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आगरा से गुरुग्राम तक गंगा और यमुना के बीच का पूरा इलाका हमारा: कुतुब मीनार मामले में पक्षकार बनाने को लेकर जाट राजा नंद राम के वंशज की याचिका

दिल्ली की साकेत कोर्ट ने कुतुब मीनार परिसर में पूजा के अधिकार को लेकर हिंदू व जैन पक्षों की याचिका पर फैसला 24 अगस्त तक के लिए टाल दिया है। दरअसल, गुरुवार (9 जून 2022) को सुनवाई के दौरान इस मामले में दिलचस्प मोड़ देखने को मिला। इस मामले में पक्षकार बनाने को लेकर एक नई याचिका दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता ने आगरा से गुरुग्राम तक गंगा और यमुना के बीच के पूरे इलाके पर अधिकार का दावा किया है। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश दिनेश कुमार ने इस अर्जी पर विचार की बात कही है।

अदालत में एडवोकेट एमएल शर्मा के माध्यम से कुंवर महेंद्र ध्वज प्रसाद सिंह की ओर से यह याचिका दायर की गई है। उन्होंने याचिका में आगरा संयुक्त प्रांत (United province of Agra) का उत्तराधिकारी होने का दावा करते हुए इस मामले में खुद को पक्षकार बनाए जाने की माँग की है। याचिका के अध्ययन के लिए हिंदू पक्ष ने कुछ समय माँगा है। नई याचिका पर सभी पक्षों की सुनवाई 24 अगस्त को होगी।

इस अर्जी पर विचार करने के बाद ही कोर्ट पूजा के अधिकार से संबंधित अपना फैसला सुनाएगा। एडवोकेट एमएल शर्मा ने बताया कि दक्षिणी दिल्ली का पूरा इलाका कुंवर महेंद्र ध्वज की रियासत के अंदर आता है, इसलिए उन्हें इस मामले में पक्षकार बनाया जाना चाहिए। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के साथ-साथ याचिकार्ताओं ने आवेदन का विरोध किया, लेकिन न्यायाधीश दिनेश कुमार ने उन्हें अपना जवाब दाखिल करने के लिए कहा।

सिंह के आवेदन में कहा गया है कि कुतुब मीनार परिसर के अंदर हिंदुओं और जैनियों के लिए पूजा के अधिकार से संबंधित मामले को उनके बिना पूरा नहीं किया जा सकता है, क्योंकि जिस जमीन पर मीनार बनी हुई है वह मुगल काल से उनके परिवार की है। उन्होंने अपनी याचिका में दावा किया है कि न केवल कुतुब मीनार और कुव्वत-उल-इस्लाम, बल्कि आगरा से गुरुग्राम तक गंगा और यमुना नदियों के बीच का पूरा इलाका उनका है। उन्होंने आगे कहा कि दक्षिणी दिल्ली का पूरा इलाका कुंवर महेंद्र ध्वज की रियासत के अंदर आता है और उनकी रियासत में ये मामला होने के नाते उन्हें इसमें पक्षकार बनाया जाना चाहिए।

इसके अलावा महेंद्र ध्वज प्रसाद सिंह ने कहा कि वह बेसवान परिवार से आते हैं और राजा रोहिणी रमन धवज प्रसाद सिंह के उत्तराधिकारी हैं, जिनकी मृत्यु वर्ष 1950 में हुई थी। लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार यह परिवार मूल रूप से जाट राजा नंद राम का वंशज है जिनकी मृत्यु 1695 में हुई थी।

गौरतलब है कि पिछले महीने ‘भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI)’ ने कहा था कि यहाँ किसी भी धर्म के पूजा-पाठ या नमाज की अनुमति नहीं है। हिन्दू पक्ष ने यहाँ पूजा-पाठ के लिए याचिका दायर की थी, जिसका ASI ने अदालत में विरोध किया था। संस्था ने कहा था कि इसकी पहचान को बदला नहीं जा सकता है।

कॉन्वेंट में नन का यौन शोषण, घसीटते हुए ले गए, हाथ-पाँव बाँध लगाया इंजेक्शन: चर्च बोला – उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं

कर्नाटक के मैसूर के श्री रामपुरा में मर्सी कॉन्वेंट में काम करने वाली एक नन ने दावा किया कि उसका यौन उत्पीड़न किया गया है। उसने मदद की अपील करते हुए कहा कि उसे अपनी आवाज उठाने के लिए जान से मारने की धमकी मिल रही है। सिस्टर एल्सीना ‘Daughters of our Lady of Mercy’ चर्च के कॉन्वेंट में काम करती थी।

नन ने आरोप लगाया कि उसे जबरन कॉन्वेंट के एक मनोरोग अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहाँ उसके साथ यौन उत्पीड़न किया गया। नन ने इस संबंध में एक वीडियो साझा किया, जिसमें मर्सी कॉन्वेंट में कथित तौर पर हुई अनियमितताओं, यौन उत्पीड़न और भ्रष्टाचार आदि के बारे में बात की।

जानकारी के मुताबिक नन सिस्टर एल्सीना ने कर्नाटक महिला आयोग में कॉन्वेंट में हो रही भ्रष्टाचार और अनियमितता की शिकायत की थी। कॉन्वेंट ने उसे शिकायत वापस लेने के लिए कहा, लेकिन उसने इनकार कर दिया। जिसके बाद उसे कथित तौर पर प्रताड़ित किया गया और जबरन अस्पताल में भर्ती कराया गया। नन के रिश्तेदारों और पुलिस के हस्तक्षेप के बाद अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद उसे कॉन्वेंट से निकाल दिया गया। 

सिस्टर एल्सीना एक 45 वर्षीय नन हैं, जिसका जन्म और पालन-पोषण मेंगलुरु में हुआ था। उसके पिता कोझीकोड से हैं और माँ अलाप्पुझा से हैं। वह कोडागु में एक अन्य कलीसिया द्वारा संचालित एक स्कूल में एक शिक्षिका और बाद में प्रधानाध्यापिका के रूप में काम करती थी।

एल्सीने ने TNM को बताया, “मुझे Daughters of Our Lady of Mercy के कॉन्वेंट में आए अभी अभी तीन महीने हुए थे। मैं पिछले 25 सालों से नन हूँ। काफी समय से, मैंने कॉन्वेंट में कुछ अनियमितताएँ देखी और मैंने इसके बारे में कर्नाटक महिला आयोग को लिखा था। कॉन्वेंट में नन ने मुझे महिला आयोग से शिकायत वापस लेने के लिए मजबूर किया और जब मैंने मना कर दिया, तो मुझे लगा कि मेरे खिलाफ कुछ चाल चल रही है। इसके बाद मैंने वीडियो बनाया। जिसमें मैंने अपने जीवन के लिए खतरे के बारे में बताया। इसे मैंने अपने भतीजे के साथ शेयर किया।”

नन ने आरोप लगाया कि 31 मई को शाम 7 बजे कॉन्वेंट में उसे काफी टॉर्चर किया गया। नन ने कहा, “31 मई को एक नन ने मुझे बताया कि कुछ मेहमान आए हैं। वहाँ दो या तीन आदमी थे और दो नन थीं, जो सब मेरे लिए अजनबी थीं। वे आपस में बातें कर रहे थे। बाद में मुझे लगा कि यह कुछ गुंडों और मेरी मंडली के लोगों के बीच मुझ पर हमला करने की साजिश है। उनमें से एक ने ही मुझे पीटा और मैं गिर पड़ी। उन्होंने मेरा मोबाइल फोन छीन लिया और मेरे हाथ बाँध दिए। पुरुषों में से एक ने मुझे कुछ इंजेक्शन लगाया और मैं गिर गई। वे मुझे एक जानवर की तरह घसीटते हुए गाड़ी में ले गए, इसमें नन भी उनकी मदद कर रही थीं। एक आदमी ने मेरे पैरों पर मुहर लगा दी। मेरे चिल्लाने के बावजूद किसी ने मेरी मदद करने की कोशिश नहीं की। मैं अभी भी होश में थी और मैंने देखा कि एक नन एक आदमी से कुछ ले रही है।” 

नन ने आगे कहा, “वे मुझे पास के एक मेंटल केयर अस्पताल में ले गए, जो ननों द्वारा संचालित है। मेरे साथ बेहद बुरा व्यवहार किया गया, वे मुझे घसीटकर ऊपरी मंजिल पर ले गए। उस रात, मुझे एक आदमी से बहुत बुरे अनुभव हुए। अस्पताल का स्टाफ नर्स होने का दावा करने वाले एक अन्य व्यक्ति ने भी मुझे पीटा। उन्होंने मुझे कुछ दवा का इंजेक्शन लगाया। अगले दिन मैंने वहाँ एक नर्स से पूछा कि मुझे वहाँ क्यों भर्ती कराया गया तो उसने मुझे बताया कि ऐसा इसलिए है क्योंकि मैं मानसिक रूप से अस्वस्थ हूँ। तब तक मैं बहुत थक चुकी थी और मेरे मुँह से झाग निकलने लगा था।”

कॉन्वेंट के इस कारनामे का खलासा तब हुआ, जब उसके भतीजे ने फोन पर संपर्क न होनं पर पुलिस स्टेशन का रुख किया। इस दौरान उसने नन द्वारा शेयर किया गया वीडियो भी दिखाया। जिसके बाद पुलिस ने तहकीकात करते हुए उसे खोज निकाला।

नन ने कहा, “उन्होंने मेरे पिता को पहले दिन मुझे देखने नहीं दिया। मुझे देखने के लिए उन्हें अस्पताल के बाहर चार दिन इंतजार करना पड़ा। तब तक मीडिया को सूचना दी गई। एक दिन जब मुझे काउंसलिंग रूम से बाहर निकाला गया तो मैंने अपने पिता की आवाज सुनी। मैंने नन से विनती की। मुझे मेरे पिता को देखने की अनुमति दी और उनके पास चली गई। जिस दिन मुझे छुट्टी मिली, उन्होंने मुझसे लिखाया कि मुझे मेरी मर्जी से भर्ती कराया गया था और मेरे पिता ने मुझे डिस्चार्ज करवाया था। लेकिन मैंने उस पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए। अस्पताल ने यह भी माँग की कि मैं एक पत्र लिखकर कहूँ कि मैं अस्पताल छोड़कर अपने पिता के साथ जा रही हूँ। मैंने नाटक किया कि मैं पत्र लिख रही थी और भागकर अपने पिता के पास चली गई।”

इसके बाद वह और उसके पिता एक पुलिस की गाड़ी से थाने पहुँचे। सिस्टर एल्सीना 6 जून को पुलिस के साथ अपने कपड़े लेने कॉन्वेंट गई थी। “लेकिन उन्होंने उसे न तो उसके नन के कपड़े दिए और न ही फोन दिया।”

इस बीच चर्च ने बायन जारी कर दावा किया कि नन का कार्य अनुचित है और वह कॉन्वेंट को बदनाम करने के लिए किया गया था। बुधवार (8 जून 2022) को जारी अपने प्रेस बयान में चर्च ने कहा कि नन सुधा केवी उर्फ ​​एल्सीना पिछले 24 वर्षों से धार्मिक मण्डली की सदस्य हैं, लेकिन पिछले कुछ महीनों से वह आक्रामक व्यवहार कर रही है और अन्य ननों के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर रही है, आत्महत्या करने की धमकी दे रही है।

चर्च ने कहा, “सुधा को उसके व्यवहार के कारण सेंट मैरी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लेकिन सुधा ने एक बाहरी व्यक्ति के कहने पर मण्डली के सदस्यों के खिलाफ झूठे आरोपों के साथ एक वीडियो क्लिप बनाई और इसे सोशल मीडिया के माध्यम से फैला दिया। डॉक्टरों की सलाह के खिलाफ, उसे छुट्टी मिल गई और वह पुलिस से अनुमति लेकर अपने पिता के साथ चली गई। 6 जून को वह कॉन्वेंट लौट आई और ननों को धमकी दी कि वह उन्हें अदालत में घसीटेगी। मामले में पुलिस ने नन पर मारपीट का केस दर्ज कर जाँच कर रही है।”

‘आजादी के बाद की सरकारों ने विकास पर ध्यान नहीं दिया, क्योंकि इसमें मेहनत लगती है’: गुजरात में PM मोदी ने ₹3000 करोड़ के प्रोजेक्ट का किया शुभारंभ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने ‘गुजरात गौरव अभियान’ के तहत राज्य के नवसारी में शुक्रवार (10 जून 2022) को करीब 3,000 करोड़ रुपए की कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों को संबोधित भी किया।

अपने संबोधन में पीएम ने कहा, “आज गुजरात गौरव अभियान में मुझे एक बात का विशेष गौरव हो रहा है कि मैंने इतने साल मुख्यमंत्री के रूप में काम किया, लेकिन कभी भी आदिवासी क्षेत्र में इतना बड़ा कार्यक्रम नहीं हुआ था। गुजरात का गौरव बीते 2 दशकों में हुआ तेज़ विकास है, सबका विकास है और इस विकास से पैदा हुई नई आकांक्षा है। इसी गौरवशाली परंपरा को डबल इंजन की सरकार ईमानदारी से आगे बढ़ा रही है।”

उन्होंने कहा, “आज मुझे 3,000 करोड़ रुपए से अधिक के प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन और शिलान्यास करने का अवसर मिला। ये सारे प्रोजेक्ट सूरत, तापी, नवसारी, वलसाड सहित दक्षिण गुजरात के करोड़ों साथियों का जीवन आसान बनाएँगे।”

‘सबका विकास’ के मंत्र पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा, “बीते 8 वर्षों में सबका साथ, सबका विकास के मंत्र पर चलते हुए हमारी सरकार ने गरीब को मूलभूत सुविधाएँ देने और उनके कल्याण पर सबसे ज्यादा जोर दिया है।”

प्रधानमंत्री बोले, “8 साल पहले आपने अनेक-अनेक आशीर्वाद देकर बहुत सारी उम्मीदों के साथ मुझे राष्ट्र सेवा की अपनी भूमिका को विस्तार देने के लिए दिल्ली भेजा था। बीते 8 सालों में हमने विकास के सपने और आकांक्षाओं से करोड़ों नए लोगों, अनेकों नए क्षेत्रों को जोड़ने में सफलता प्राप्त की है।”

पीएम नरेंद्र मोदी ने यह भी कहा कि बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और हर प्रकार की कनेक्टिविटी वाले ये प्रोजेक्ट विशेष रूप से राज्य के आदिवासी क्षेत्रों में स्थापित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये सुविधाएँ रोजगार के अवसरों से जोड़ेंगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा, “आज मुझे गौरव इस बात का हो रहा है कि गुजरात छोड़ने के बाद जिन लोगों ने गुजरात को संभालने का दायित्व निभाया और आज भूपेंद्र भाई और सीआर पाटिल की जोड़ी जिस उमंग और उत्साह के साथ नया विश्वास जगा रही है, उसी का परिणाम है कि आज मेरे सामने 5 लाख लोगों का विशाल जनसमूह है।”

उन्होंने पुरानी सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा, “आजादी के इस लंबे कालखंड तक जिन्होंने सबसे अधिक समय तक सरकार चलाई, उन्होंने विकास को अपनी प्राथमिकता नहीं बनाया। जिन क्षेत्र, जिन वर्गों को इसकी सबसे ज्यादा जरूरत थी वहाँ उन्होंने विकास किया ही नहीं, क्योंकि ये काम करने में मेहनत ज्यादा लगती है।”

पीएम मोदी ने गुजरात सरकार की प्रशंसा करते हुए कहा, “गुजरात की डबल इंजन की सरकार शत-प्रतिशत सशक्तिकरण के अभियान में पूरी ताकत से जुटी है। मैं भूपेंद्र भाई, सीआर पाटिल और उनकी पूरी टीम को बहुत बहुत बधाई देता हूँ।”

दरगाह के पास फाँसी के फंदे से लटका मिला नूपुर शर्मा का पुतला, संवेदनशील है एरिया: बोले स्थानीय कॉर्पोरेटर – ये अफगानिस्तान नहीं

कर्नाटक के बेलगावी में भाजपा की निलंबित प्रवक्ता नूपुर शर्मा का पुतला बीच सड़क पर फाँसी से फंदे से लटका हुआ मिला। ये घटना बेलगाम के फोर्ट रोड की है, जहाँ नूपुर शर्मा के पुतले को लटकाया गया था। इसके बगल में स्थित एक इमारत में कई माइकें लगी हुई दिख रही हैं और साथ ही हरे रंग का एक झंडा भी दिखाई दे रहा है। पुतले को साड़ी पहनाई गई थी और उस पर नूपुर शर्मा की तस्वीरें भी चस्पाई गई थीं।

ये भी जानने लायक है कि जहाँ ये पुतला लटका हुआ पाया गया, वहाँ बसहिबान नाम का एक दरगाह भी स्थित है। ये घटना शुक्रवार (10 जून, 2022) की है। पुलिस ने बताया कि रात के अंधेरे में पुतला लटकाने का काम किया गया। जैसे ही पुलिस के संज्ञान में ये घटना आई, इसे तुरंत हटाया गया। चूँकि ये सांप्रदायिक रूप से एक संवेदनशील क्षेत्र है, पुलिस ने शांति-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बल की तैनाती बढ़ा दी है।

स्थानीय कॉर्पोरेटर शंकर पाटिल ने इस घटना के बारे में पुलिस को सूचना दी। स्थानीय हिन्दुओं एवं हिन्दू संगठनों ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई की माँग की है। स्थानीय महानगरपालिका के निर्दलीय सदस्य शंकर पाटिल ने कहा कि ये अफगानिस्तान नहीं है, ऐसे में न्यायपालिका इसका निर्णय लेगी कि नूपुर शर्मा दोषी हैं या नहीं। उन्होंने कहा कि समाज में अशांति फैलाने के लिए बदमाशों ने ये काम किया है। उन्होंने आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की।

पैगंबर मुहम्मद पर टिप्पणी का आरोप लगने के बाद नूपुर शर्मा और नवीन जिंदल को लगातार हत्या की धमकियाँ मिल रही हैं। दोनों को भाजपा ने भी पार्टी से निलंबित कर दिया है। उधर नूपुर शर्मा को समर्थन देने वाले डच सांसद गीर्ट वाइल्डर्स ने कहा कि इस्लाम असहिष्णु है और इसकी विचारधारा दुनिया के लिए खतरा है। वाइल्डर्स ने कहा कि जो मुल्क अपने यहाँ के अल्पसंख्यकों की हत्या कर देते हैं और उन्हें जेल में डाल देते हैं, वे कानून द्वारा शासित एक लोकतांत्रिक देश से माफी की माँग करते हैं तो यह सबसे बड़ा पाखंड है।

‘शरिया क्रूर, इस्लाम असहिष्णु, दुनिया के लिए खतरा’: हॉलैंड के MP ने कहा- नूपुर शर्मा पर गर्व करे भारत

इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद को लेकर भाजपा (BJP) की पूर्व नेता नूपुर शर्मा (Nupur Sharma) द्वारा की गई टिप्पणी को सही बताते हुए उन्हें समर्थन देने वाले डच सांसद गीर्ट वाइल्डर्स (Geert Wilders) ने इस्लाम असहिष्णु है और इसकी विचारधारा दुनिया के लिए खतरा है। उन्होंने कहा कि भारत से माफी माँगने वाले मुल्क देश बेहद क्रूर शरिया शासन से संचालित होतेे हैं और उनका मानवाधिकार का ट्रैक रिकॉर्ड बेहद खराब है।

वाइल्डर्स ने कहा कि जो मुल्क अपने यहाँ के अल्पसंख्यकों की हत्या कर देते हैं और उन्हें जेल में डाल देते हैं, वे कानून द्वारा शासित एक लोकतांत्रिक देश से माफी की माँग करते हैं तो यह सबसे बड़ा पाखंड है। उन्होंने कहा कि दुनिया जानती है कि ईरान, कतर, सऊदी अरब जैसे इस्लामिक अपने अल्पसंख्यकों को कितना प्रताड़ित करते हैं। उन्होंने इस्लामिक देशों को सबसे बड़ा पाखंडी बताया।

डच सांसद ने कहा कि माफी की माँग करने वाले ज्यादातर देश OIC (ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कंट्रीज) के सदस्य हैं। ये लोग मानवाधिकार को शरिया कानून के अधीन बताते हैं, जबकि शरिया कानून बेहद क्रूर और यह मानवाधिकारों एवं स्वतंत्रता का घोर हनन करता है। उन्होंने कहा कि भारत और हॉलैंड जैसे देशों में सभी नागरिक एक समान हैं। 

वाइल्डर्स ने कहा कि नूपुर शर्मा ने जो भी कहा वह हिंदू देवी-देवताओं के मजाक उड़ाने वाले शख्स के विरोध में कहा। इसलिए उन्होंने कुछ भी गलत नहीं कहा। एक लोकतंत्र देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तहत कानून के दायरे में रहते हुए किसी भी धर्म की आलोचना की जा सकती है।

नवभारत टाइम्स को दिए इंटरव्यू में वाइल्डर्स ने कहा कि नूपुर शर्मा ने जो पैगंबर मोहम्मद को लेकर जो कहा, वह सच है। सभी जानते हैं कि हदीसों में कहा गया है कि पैगंबर मुहम्मद ने जब आयशा से शादी की तब वह सिर्फ 9 साल की थी। उन्होंने कहा कि सच बोलने के लिए धमकियाँ मिलना हास्यास्पद है। भारत को सच बोलने वाली इस महिला पर गर्व करना चाहिए। 

उन्होंने कहा कि जो लोग आतंकी विचारधारा और इस्लाम की आलोचना करते हैं, वे ‘इस्लामोफोब’ (इस्लाम से डर या नफरत) नहीं हैं। नूपुर शर्मा भी इस्लामोफोब (Islamophobe) नहीं हैं। इस्लाम पूरी तरह असहिष्णु है और यह विचारधारा दुनिया के लिए खतरा है। इस्लाम हर उस चीज के प्रति असहिष्णु है, जो इस्लामिक नहीं है।

वाइल्डर्स ने कहा कि अल कायदा, आईएसआईएस, तालिबान दुनिया के आपराधिक और आतंकवादी संगठन हैं। वे सिर्फ डर, हिंसा और आतंक की भाषा बोलते हैं। उन्होंने बताया कि 10-15 साल पहले उन्हें भी आतंकियों ने अपनी हिटलिस्ट में शामिल किया था। तब वे अपना घर छोड़कर करीब 17 साल सेफ हाउस में रहे थे।

बता दें कि मुस्लिम देशों द्वारा भारत से माफी की माँग करने पर हॉलैंड (Holland) में विपक्ष के नेता और सांसद गीर्ट वाइल्डर्स ने नूपुर शर्मा का समर्थन किया था। वाइल्डर्स कहा था, “यह हास्यास्पद है कि अरब और इस्लामी देश भारतीय राजनेता नुपुर शर्मा के पैगंबर मुहम्मद के बारे में बोले गए सच से नाराज हैं, जिन्होंने वास्तव में आयशा से जब वह 6 साल की थी तब शादी की थी और जब वह 9 साल की थी तब शादी का उपभोग किया था। भारत माफी क्यों माँगता है?”

एक अन्य ट्वीट में वाइल्डर्स ने कहा था, “तुष्टिकरण कभी काम नहीं करता। यह केवल चीजों को और खराब करेगा। इसलिए भारत के मेरे प्यारे दोस्तों, इस्लामिक देशों से डरो मत। आजादी के लिए खड़े हों और अपने राजनेता नूपुर शर्मा का बचाव करने में गर्व और दृढ़ रहें जिन्होंने पैगंबर मुहम्मद के बारे में सच बोला था।”

नवाब मलिक को राज्यसभा चुनाव में वोट डालने की हाई कोर्ट ने भी नहीं दी इजाजत: MVA को ओवैसी के समर्थन पर बोली मनसे- शिवसेना का छद्म हिंदुत्व उजागर

महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार के मंत्री नवाब मलिक राज्यसभा चुनाव में वोट नहीं डाल पाएँगे। हाई कोर्ट ने उन्हें इसके लिए जेल से रिहाई की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। दूसरी ओर सत्ताधारी महाविकास अघाड़ी (एमवीए) गठबंधन के उम्मीदवार को असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM का समर्थन मिलने को लेकर भी राजनीति गरमा गई है।

महाराष्ट्र की 6 राज्यसभा सीटों के लिए शुक्रवार (10 जून 2022) को वोट डल रहे हैं। AIMIM ने इस चुनाव में एमवीए की साझेदार कॉन्ग्रेस के उम्मीदवार इमरान प्रतापगढ़ी को वोट देने का ऐलान किया है। इसके बाद राज ठाकरे की मनसे ने कहा है कि इस समर्थन ने शिवसेना के छद्म हिन्दुत्व को उजागर कर दिया है।

MNS प्रवक्ता गजानन काले ने कहा, “शिवसेना का छद्म हिंदुत्व उजागर हो गया है। वे (शिवसेना) AIMIM का समर्थन लेने से नहीं हिचकिचाते हैं, जो निजाम के सीधे वंशज हैं।” काले ने कहा कि MVA ने राज्यसभा चुनाव के लिए AIMIM की मदद लेकर लोगों के हितों को पीछे छोड़ दिया है। इससे पहले AIMIM के महाराष्ट्र अध्यक्ष इम्तियाज जलील ने कहा था, “भाजपा को हराने के लिए हमारी पार्टी (AIMIM) ने महाराष्ट्र में राज्यसभा चुनाव के लिए महाविकास अघाड़ी के लिए वोट देने का फैसला किया है। महाराष्ट्र के हमारे दो AIMIM विधायकों को कॉन्ग्रेस उम्मीदवार इमरान प्रतापगढ़ी के लिए वोट देने को कहा गया है।”

नवाब मलिक को कोर्ट का झटका

इस बीच मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जेल में बंद NCP नेता नवाब मलिक (Nawab Malik) ने महाराष्ट्र राज्यसभा चुनाव में वोट देने के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombey High Court) में याचिका दायर कर शुक्रवार (10 जून 2022) को एक दिन के लिए जमानत माँगी थी। कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए उन्हें PMLA कोर्ट के पास जाने को कहा।

उल्लेखनीय है कि PMLA कोर्ट ने राज्यसभा चुनाव की पूर्व संध्या पर NCP नेता नवाब मलिक और अनिल देशमुख को वोट डालने से रोक दिया था। इसके खिलाफ दोनों नेताओं ने हाई कोर्ट का रुख किया था। इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने याचिकाओं को लेकर जनप्रतिनिधित्व कानून का हवाला देते हुए कहा था कि कैदियों के पास मतदान का अधिकार नहीं है।

‘हिंदू यहाँ सिर्फ 3%, डरकर जीते हैं, पलायन-लव जिहाद से भी पीड़ित’: कानपुर हिंसा के दौरान चंद्रेश्वर हाते पर कब्जे की थी योजना

उत्तर प्रदेश के कानपुर (Kanpur, Uttar Pradesh) में 3 जून 2022 को भड़की हिंसा के बाद अगली जुमे की नमाज आज 10 जून (शुक्रवार) को है। इस दौरान किसी भी तरह की अप्रिय घटना से निबटने के लिए प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किए हैं।

इस बीच ऑल इंडिया सुन्नी उलेमा काउंसिल ने सभी इमामों को पत्र लिखकर नमाज के बाद लोगों से सीधे घर जाने की अपील करने के लिए कहा है। हालाँकि, बयान जारी करते हुए मौलाना हाजी सलीम ने विरोध प्रदर्शनों को गाँधीवादी ढंग से करने का भी फरमान दिया। इस बीच ऑपइंडिया ने 6 जून को घटनास्थल पर जाकर पूरे मामले की जमीनी पड़ताल की।

हिंसा स्थल पर हिन्दुओं की कई दुकानें

3 जून को हुई हिंसा के दौरान सबसे अधिक प्रभावित यतीमखाना से परेड चौराहे के बीच का हिस्सा रहा। यह दूरी आधे किलोमीटर से कुछ कम है। यहाँ हिन्दुओं की कई दुकानें स्थित हैं। हालाँकि, यह इलाका आबादी के हिसाब से मुस्लिम बहुल कहा जाता है। यहाँ स्थित दुकानों में चंदा मेडिकल, टंडन ज़ेरॉक्स, मीरा पेंट्स, उषा पैथोलॉजी, भाटिया रेस्टोरेंट, डॉक्टर अभिषेक व डॉक्टर प्रसाद की क्लिनिक प्रमुख हैं। इनके बीच में इक्का दुक्का खान चेन एन्ड लेदर, राजू चेन नाम की भी दुकानें भी दिखीं। हमारी रिपोर्टिंग के दौरान इन सभी दुकानों के शटर बंद दिखे।

परेड चौराहे से यतीमखाना रोड

चंद्रेश्वर हाता भी था निशाने पर

ऑपइंडिया की टीम को परेड चौराहे पर भारी फोर्स के बीच सिर पर शिखा रखा एक व्यक्ति अपने दैनिक कामों में व्यस्त दिखा। वहाँ जाने पर कुछ और लोग एक-दूसरे का राम-राम कह कर अभिवादन करते दिखे। उन सभी ने कैमरे के सामने आने से मना कर दिया, लेकिन उन्होंने अपनी बात रखी।

उन्होंने ने कहा, “हम गिने-चुने हिन्दू इस एक खास क्षेत्र में हैं। हमारे मोहल्ले का नाम चंद्रेश्वर है, जहाँ कुछ सौ हिन्दू रहते हैं। घटना के दिन प्रदर्शन के नाम पर हमारे मोहल्ले को निशाना बनाने की कोशिश की गई थी। वो तो फ़ोर्स की सक्रियता थी कि हम बच गए।”

चंद्रेश्वर हाता

इस क्षेत्र में कैराना से ज्यादा पलायन

ऑपइंडिया ने चंद्रेश्वर हाते के ही निवासी चेतन वाजपेई उर्फ़ सर्वेश वाजपेई से बात की। उन्होंने बताया, “पहले हमारे हाते के पीछे चमड़े का बहुत बड़ा काम था, जो अब रेडीमेड का हो गया है। मार्केट में अधिकतर मुस्लिम समुदाय के ही लोग हैं। अभी उस मार्केट में जाने के लिए घूमकर जाना पड़ता है। अगर ये हाता वो हासिल कर लेते हैं तो उनकी मार्केट सड़क पर आ जाएगी।”

वाजपेई आगे बताते हैं, “जिस दिन ये हाता हाथ से निकला, उस दिन इस जगह से हिन्दू नाम का अस्तित्व मिट जाएगा। यहाँ के बचे 3% हिन्दू 97% की आँखों में चुभ रहे हैं। साल 1992 में राम मंदिर और मार्च 2001 में दिल्ली के विवाद के दौरान भी ये हाता चर्चित रहा। तब हिन्दू की आबादी यहाँ ठीक थी, इसलिए हम विरोध कर लेते थे। पलायन का मुद्दा कैराना के बदले कानपुर होना चाहिए।”

जहाँ हुई हिंसा कभी उसी के पास कत्ल हुए थे गणेश शंकर विद्यार्थी

ऐतिहासिक घटना को याद करते हुए चेतन कहते बताते हैं कि जिस परेड चौराहे पर हिंसा हुई थी, वहाँ से मूलगंज मार्ग पर मात्र 300 मीटर की दूरी पर सुनहरी मस्जिद स्थित है। इसी के पास साल 1931 में गणेश शंकर विद्यार्थी की हत्या हुई थी।

वो कहते हैं, “3 जून को हिंसक भीड़ उसी रास्ते पर जा रही थी। अचानक एक लड़का हमारे हाते के आगे खड़ा होकर रुमाल लहराने लगता है और भीड़ को हमारे घरों की तरफ बुलाता है। रुमाल हिलाने का वह वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था। तब सिर्फ आधे दर्जन के करीब पुलिसकर्मी मौजूद थे। उन्होंने भीड़ रोकने की कोशिश की, लेकिन उन पर पथराव हो गया।”

जान-माल के बचाव में उठाए उनके ही फेंके पत्थर

चेतन ने आगे बताया, “पुलिस बल कम होने के चलते उधर से पथराव होता रहा। इस दौरान हमारे हाते की एक महिला व बच्चा घायल हो गया। इसको देखकर ही हमारी तरफ के लोग आक्रोशित हो गए और उन्होंने पुलिस के साथ मिलकर भीड़ द्वारा फेंके गए पत्थरों को उठाकर आत्मरक्षा में उनकी तरफ वापस फेंका। बाद में पुलिस ने उन्हें खदेड़ा।”

गलती एकतरफा तो कार्रवाई दोतरफा कैसे

चेतन कहते हैं, “कुछ दूर भागने के बाद भीड़ फिर से ठेले में पत्थर और पेट्रोल बम लेकर वापस लौटी। भीड़ में कानपुर के अलग-अलग हिस्सों के लोग शामिल थे। इसलिए उनकी पहचान में दिक्कत आ रही है। आज जो लोग पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगा रहे हैं, वे जान लें कि गलती भी एकतरफा थी। हम लोगों ने किया ही क्या? पथराव में हमारे 8 लोग घायल हैं, जिनमें एक महिला भी शामिल है। एक लड़के की कुहनी टूट गई है।”

हमारे पूरे मोहल्ले को जलाने का था प्लान

चेतन ने आगे कहा, “रास्तों में तैनात पुलिस बल भीड़ को अलग-अलग दिशा में मोड़ने में कामयाब रहे। अगर वो भीड़ एक तरफ चल देती तो हमारे मोहल्ले का बचना मुश्किल था। उनको समस्या नूपुर शर्मा से है तो उनसे विरोध करते। हमारे घरों की तरफ पेट्रोल बम लेकर क्यों आए थे? कल कोई और कुछ बोलेगा तो पूरे देश को जला दोगे क्या?”

शत्रु सम्पत्ति भी है उनके गुस्से की एक वजह

चेतन बताते हैं, “यहाँ के अधिकतर लोग शत्रु सम्पत्तियों पर काबिज हैं। इसी के साथ अभी कुछ दिन पहले कानपुर की मेयर ने इसी इलाके का दौरा करके कई मंदिरों को मुस्लिमों के कब्जे से मुक्त करवाया था। हिंसक भीड़ में शामिल कई लोगों के गुस्से की एक वजह ये भी है।”

चेतन कहते हैं कि अगर सच में शत्रु सम्पत्तियों पर ठोस कार्रवाई हो जाए तो कानपुर का एक बड़ा हिस्सा खाली हो जाएगा। पाकिस्तान गए कई लोगों ने अपनी तमाम सम्पत्तियाँ यहाँ अपने रिश्तेदारों को सौंप रखी हैं। ये एक बहुत बड़ी साजिश है देश के विरुद्ध।

योगीराज में उल्टा पड़ा दंगाइयों का दाँव

चेतन के मुताबिक, “दंगाइयों का दाँव असल में उल्टा पड़ गया। उनको गलतफहमी थी कि आज फ़ोर्स काफी दूर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की सुरक्षा में होगी। इसलिए मोहल्ले में कोई बड़ा काण्ड कर देते हैं। शायद हमारे मोहल्ले में घुसकर नरसंहार या आगजनी का प्लान था। हालाँकि, कुछ ही मिनटों में भारी संख्या में फोर्स पहुँच गई तो दंगाइयों का दाँव उल्टा पड़ा गया और उनको भागना पड़ा। 15 मिनट में पुलिस कमिश्नर तक पहुँच गए, जो दंगाइयों को भी आशा नहीं थी। योगी सरकार में पिछली सरकारों के मुकाबले काफी कुछ सकारात्मक बदलाव हुआ है।”

हाते की लड़कियों के खिलाफ लव जिहाद की साजिश

मोहल्ले में लव जिहाद को लेकर चेतन ने बताया, “हमारे हाते में रहने वाली लगभग 10-15 लड़कियों के खिलाफ लव जिहाद की साजिश रची गई थी। हम जैसे-तैसे उनमें से कई लड़कियों को समझाने में सफल रहे। बाकी को भी समझाने का प्रयास कर रहे हैं। इसमें पुलिस ने भी सहयोग किया।”

मोहल्ले के हिंदुओं के डर को लेकर चेतन ने बताया, “सच्चाई ये है कि हम लोग यहाँ दब कर रहते हैं। हम लोग डरे हुए हैं। हमारे घरों के बगल ऊँची-ऊँची इमारतें बना दी गई हैं, जहाँ से पत्थर और बम फेंके जाते हैं। ये जो भी करें उसको करने दें तो ठीक, अगर हमने विरोध किया तो वहीं दिक्कत शुरू हो जाती है। हमारी सुरक्षा के लिए पुलिस की तैनाती बनी रहे।”

स्थानीय हिन्दू नेता प्रकाश शर्मा ने ऑपइंडिया से कहा, “भीड़ के इरादे काफी खतरनाक थे। उनके निशाने पर चंद्रेश्वर हाता था। प्रशासन ने सही समय पर सख्ती दिखते हुए उनको काबू किया, वरना हालात भयावह होते।” वहीं, स्थानीय भाजपा नेता सुनील बजाज ने भी हिंसा वाले दिन पुलिस प्रशासन की मुस्तैदी की तारीफ की और उपद्रवियों के मंसूबों को खतरनाक बताया।

भगवा पहने देखा तो मुस्लिम गेस्ट हाउस वाले ने भगा दिया

उस इलाके में भगवा वस्त्र में बैटरी रिक्शा चलाने वाले भदौरिया ने ऑपइंडिया को बताया, “एक बार मैं कानपुर के ही एक गेस्ट हाउस में इसी कपड़े में चला गया। गेस्ट हाउस का मालिक मुस्लिम था। मैंने उससे पानी माँगा तब उसने मुझे डाँटकर भगा दिया था।”

उन्होंने स्थिति कितनी खतरनाक है, इसकी तरफ इशारा करते हुए बताया, “इस इलाके में मेरे थाना क्षेत्र के एक पुलिसकर्मी ने मुझे पहचान लिया और मुझे किसी और क्षेत्र में जाकर रिक्शा चलाने के लिए कहा है।” भदौरिया का कहना है कि वे कम से कम 30 साल से कानपुर में काम कर रहे हैं।

ई रिक्शा चालक भदौरिया

हयात जफर हाशमी पर पहले नहीं हुआ था शक

ऑपइंडिया से बात करते हुए एक स्थानीय निवासी सलीम ने कहा उन लोगों को हयात जफर हाशमी पर पहले शक नहीं हुआ था। उन्होंने कहा, “ये हरकत बाहर से कुछ लोगों ने आकर की है। हिंसा में इस क्षेत्र के लोगों की पहचान नहीं हो पा रही। प्रशासन द्वारा लगाए गए पोस्टरों में उनके चेहरे भी पहचान में नहीं आ रहे।”

सलीम के अनुसार, “मुख्य आरोपित यहाँ से 2 KM दूर चमनगंज के पास के निवासी बताए जा रहे हैं। यहाँ बारावफात का जुलूस भी निकलता है, लेकिन कई सालों से उसमें कभी हिंसा नहीं हुई।”

रोडवेज के पास सड़क से सट कर बनी है मजार

वापसी में रोडवेज बस अड्डे की तरफ जाते हुए ऑपइंडिया की टीम को सड़क से सट कर एक मजार बनी दिखी। उस मजार के पास ही कानपुर पुलिस प्रशासन के EOW (आर्थिक अपराध शाखा) का ऑफिस दिखा। यहाँ से रोडवेज बस अड्डे की दूरी लगभग 1 KM है। इसके अलावा, कई अन्य स्थानों पर भी सड़क के ऊपर मज़हबी स्थलों का अतिक्रमण दिखाई दिया।

सड़क से सटी मजार

कोर्ट में वकील ने खुद को लगाई आग, लिखा- पैसे लेकर काम करते हैं SDM… भगवान इनको नर्क की जिंदगी दें: राजस्थान के सीकर का मामला

राजस्थान के सीकर के एसडीएम कोर्ट में एक वकील ने खुद पर पेट्रोल डालकर आग लगा ली। सुसाइड नोट में 40 वर्षीय वकील हंसराज मावलिया ने एसडीएम पर पैसे लेकर काम करने और एक एसएचओ पर खुद को धमकाने का आरोप लगाया है। घटना गुरुवार (9 जून 2022) की है। इलाज के दौरान वकील की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि उन्होंने खुद के साथ SDM को भी जलाने का प्रयास किया। घटना के बाद वकीलों ने विरोध-प्रदर्शन किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक खुद को आग लगाने वाले वकील सीकर के ही गाँव अभयपुरा के रहने वाले थे। वे लगभग 10 साल से वकालत कर रहे हैं। वो कुछ समय से डिप्रेशन में थे। घटना के दिन दोपहर लगभग ढाई बजे वकील हंसराज ने ऑफिस चैंबर में बैठे SDM राकेश कुमार के कार्यालय का गेट बंद कर दिया। इसके बाद हंसराज ने खुद को आग लगा ली और SDM के चैंबर में घुस गए। वकील SDM को अपने साथ जलाना चाह रहा थे, लेकिन SDM ने उन्हें धक्का दे कर खुद से अलग किया। इस दौरान SDM का हाथ झुलस गया।

आग और धुँआ देख कर ऑफिस में भगदड़ मच गई। इस दौरान धुएँ से एक अन्य वकील की तबीयत खराब होने लगी। फायर ब्रिगेड, मेडिकल टीम और पुलिस भी सूचना पाकर मौके पर पहुँची। वकील, SDM व एक अन्य वकील को स्थानीय खंडेला अस्पताल पहुँचाया गया। वकील हंसराज की हालत गंभीर होने के चलते उनको जयपुर SMS रेफर कर दिया गया था, जहाँ उन्होंने दम तोड़ दिया है।

पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है। वकील हंसराज के बैग से पॉलीथिन में पेट्रोल और कीटनाशक दवा की बोतल मिली है। एक लेटर भी मिला है। इसमें उन्होंने लिखा है, “SDM पैसे लेकर दलालों के माध्यम से काम करते है। वे मेरे साथ अभद्रता से पेश आते हैं। मेरी वकालत बर्बाद करने की धमकी दी जाती है। मुझे 2 बार SHO घासीराम मीणा भी धमका चुके हैं। मेरे पास विकल्प नहीं बचा है। मेरी मौत के जिम्मेदार SDM और SHO होंगे। भगवान इनको नर्क की जिंदगी दें। मेरा पार्थिव शरीर विधायक अमराराम के आने के बाद ही उठने देना।”

इस घटना के बाद वकीलों ने आक्रोश जताते हुए मामले की जाँच की माँग की है। उनके विरोध के चलते सड़क पर जाम लग गया। वहीं SHO घासीराम मीणा ने अपने ऊपर लगे आरोपों में सच्चाई होने से इनकार करते हुए कहा है कि न ही वकील हंसराज उनके पास कभी आए और न ही उन्होंने कभी उनको कुछ कहा था।

नूपुर शर्मा के विरोध में अब बंगाल में आगजनी, कट्टरपंथियों ने लगाया लंबा जाम: बोलीं CM ममता बनर्जी – दिल्ली-यूपी जाइए, वहाँ कीजिए प्रदर्शन

पश्चिम बंगाल (West Bengal) के हावड़ा में गुरुवार (9 जून, 2022) को उन्मादी प्रदर्शनकारियों की भीड़ ने राष्ट्रीय राजमार्ग को ब्लॉक कर दिया। जिसकी वजह से यातायात ठप हो गया और लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। यह प्रदर्शन भाजपा प्रवक्ता नूपुर शर्मा के सस्पेंड करने के कुछ दिन बाद की गई है, जिन्होंने कथित तौर पर पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की थी।

प्रदर्शनकारियों ने सिर पर टोपी और लुंगी पहनकर NH116 पर हंगामा किया। इस दौरान उन्होंने इस्लामी नारे लगाए और टायर जलाए। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में आसमान में काला धुआँ फैलते हुए देखा जा सकता है।

यह नाकाबंदी निबरा (कोना एक्सप्रेसवे-एनएच 16 जंक्शन) से सुबह करीब 10:30 बजे शुरू हुई और रात 9:30 बजे समाप्त हुई। इसकी वजह से 5 घंटे से अधिक समय तक जाम लगा रहा। कई लोगों को अपनी गाड़ियाँ छोड़कर पैदल चलने के लिए मजबूर होना पड़ा। करीब 20 किलोमीटर तक यातायात ठप रहे। आने-जाने वाले लोगों को हो रही परेशानियों से बेपहरवाह भीड़ ने सड़कों पर कब्जा जमाए रखा।

हावड़ा में यातायात को लगभग ठप करने वाली भीड़ के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उनसे अन्य राज्यों में जाकर प्रदर्शन करने और लोगों का जीवन बाधित करने के लिए कहा।

उन्होंने टिप्पणी की, “संकीर्ण राजनीतिक लाभ के उद्देश्य से कुछ लोगों की सांप्रदायिक राजनीति के कारण हम नुकसान क्यों उठाएँ? यूपी, गुजरात में जाओ विरोध करो… जिन राज्यों में बीजेपी सत्ता में है। वे बंगाल में सत्ता में नहीं हैं, इसलिए यहाँ पब्लिसिटी के लिए ऐसा न करें। हम सभी हाथ जोड़कर अनुरोध कर रहे हैं कि नाकाबंदी की राजनीति से दूर हो जाएँ। कोई एक दिन के लिए उकसाएगा। कल, आसपास कोई नहीं होगा! अगर कल दंगा होता है, तो किसी के पास जवाब नहीं होगा।”

ममता ने कहा, “मैं इस तरह के (हिंसक) विरोध का समर्थन नहीं करती। अगर आप सभी इतने नाराज हैं तो दिल्ली जाइए। वहाँ शांति से विरोध प्रदर्शन कीजिए और पीएम के इस्तीफे की माँग कीजिए। आप यहाँ समस्या क्यों पैदा कर रहे हैं? मैं आप सभी से शांति बनाए रखने और विरोध वापस लेने का अनुरोध करती हूँ।” बनर्जी के साथ बैठे टीएमसी मंत्री फिरहाद हकीम ने दावा किया कि इस्लाम शांति का धर्म है और यह अशांति, दंगों या परेशानी का समर्थन नहीं करता है।

उल्लेखनीय है कि पूर्व बीजेपी प्रवक्ता नूपुर शर्मा और नवीन जिंदल द्वारा कथित तौर पर पैगंबर मुहम्मद को लेकर टिप्पणी के बाद भाजपा ने पैगंबर मुहम्मद पर उनके बयानों और कथित तौर पर इस्लामी भावनाओं को आहत करने के जवाब में राष्ट्रीय प्रवक्ता नूपुर शर्मा और नवीन कुमार जिंदल को 5 जून को पार्टी से 6 सालों के लिए निलंबित कर दिया। 

नुपूर शर्मा का गला काटने की धमकी के बाद भद्रवाह में पथराव, कर्फ्यू-इंटरनेट बंद; बुलाई गई सेना: मस्जिद से मौलाना ने उगला था जहर

जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले के भद्रवाह (Bhaderwah) में कर्फ्यू के बाद सेना बुलाई गई है। इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है। पथराव की भी खबर है। ये कदम सांप्रदायिक तनाव बढ़ने के बाद उठाए गए। तनाव एक मस्जिद से एक मौलाना के जहरीले भाषण के बाद बढ़ा है। मौलाना ने नुपूर शर्मा का गला काटने की धमकी दी थी।

डोडा के डिप्टी कमिश्नर ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कुछ इलाकों में निषेधाज्ञा लागू कर दी है। जम्मू रेंज के अतिरिक्त डीजीपी मुकेश सिंह ने चेतावनी दी है कि कानून हाथ में लेने वाले को बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है। इससे पहले भद्रवाह में एक प्राचीन मंदिर तोड़े जाने के बाद तनाव पैदा हो गया था। इस मंदिर को भद्रकाशी के रूप में भी जाना जाता है। घटना की जाँच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है।

इसके साथ ही ऐसी खबरें सामने आ रही हैं कि भड़काऊ भाषणों से भद्रवाह (डोडा) और किश्तवाड़ जिलों में तनाव पैदा करने की साजिशें की जा रही हैं। मस्जिद से भड़काऊ घोषणा करने वाला यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

इस वीडियो में एक मुल्ला तकरीर कर रहा है। वह हिंदुओं को गाली दे रहा है और नूपुर शर्मा को गला काटने की धमकी दे रहा है। वीडियो में सामने मस्जिद दिख रही है और उसकी एवं अगल-बगल के मकानों की छतों पर भी लोग खड़े नजर आ रहे हैं। भड़काऊ तकरीर के बीच में भीड़ अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगा रही है।

वीडियो में मौलाना कहता है, “गाय का पेशाब पीने वालों का, गोबर के अंदर नहाने वालों की हैसियत ही क्या है दुनिया में? इनको जो रिस्क मिलता है हमारी दहशत से मिलता है। इनको जो हवा मिलती है हमारी बरकत से मिलती है। इनको जो दरिया से पानी मिलता है, हमारी बरकत से मिलता है। वरना इनका वजूद क्या है?”

गला काटकर हत्या करने की धमकी देते हुए मौलाना कहता है, “भाइयों, वक्त हमें सर कलम करना भी सिखाती है। इसलिए बातों को जेहन में बिठा दो कि हम खामोश तब तक हैं, जब तक कि हमारा बर्दाश्त कायम है। बर्दाश्त के बाहर निकल गए तो फिर नूपुर शर्मा क्या, वो आशीष कोहली कुत्ता क्या, वो नूपुर शर्मा ‘गंदी’ क्या, उनके सर कहीं और धड़ कहीं और मिलेंगे।”