पंजाब के अमृतसर स्थित ‘श्री अकाल तख्त’ के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह द्वारा सिखों से आधुनिक हथियार रखने की अपील किए जाने के बाद दल खालसा का भी इस मुद्दे पर विवादित बयान आया है। ये बयान कट्टरपंथी संगठन दल खालसा द्वारा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिया गया जिसमें वह 6 जून को स्वतंत्रता मार्च और श्री अकाल तख्त साहिब पर घल्लूघारा दिवस की बरसी मनाने की माँग कर रहे थे। इस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह को खुद हथियार रखने की सलाह दी और कहा कि वह ऐसा करके उदाहरण सेट करें।
अकाल तख्त के ‘जत्थेदार’ हथियार लेकर सेट करें उदाहरण: दल खालसा
कट्टरपंथी संगठन दल खालसा के प्रवक्ता कवर पाल सिंह बिट्टू ने कहा कि ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने हर सिख को लाइसेंसी हथियार ऱखने की सलाह दी थी। 6 जून को घल्लूघारा दिवस के मौके पर उन्हें भी श्री अकाल तख्त साहिब पर हथियार के साथ पहुँचना चाहिए। बिट्टू ने कहा कि श्री हरमिंदर साहिब में हथियार लेकर जाने पर कोई मनाही नहीं हैं। सिर्फ गुरुघर की ओर हथियार नहीं जा सकता।
अपनी बात रखते हुए बिट्टू ने खालिस्तानी आतंकी भिंडरावाला का उदाहरण दिया। बिट्टू ने कहा, “भिंडरावाले खुद भी हथियार को अपने पास रखते थे और श्री अकाल तख्त साहिब पर वह अपने साथ हथियार ही लेकर जाते थे।” दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार दल खालसा के प्रवक्ता ने कहा 6 जून को स्वर्ण मंदिर में खालिस्तान के लगने वाले नारे और लहराई जाने वाली तलवारें सिर्फ लोगों के जज्बात होते हैं। वहाँ वही जाता है जिसे अमृतसर से प्रेम हो।
घल्लूघारा दिवस
बता दें कि हर साल 6 जून को ब्लू स्टार की बरसी के मद्देनजर घल्लूघारा दिवस पंजाब में मनाया जाता है। इस बार इस दिवस के मद्देनजर पंजाब पुलिस ने कई जगहों पर सुरक्षा को बढ़ा दिया है। लगातार भड़काऊ बयानबाजी और धार्मिक स्थलों को उड़ाने की धमकियों के बीच पुलिस पूरी तरह अलर्ट हैं। लेकिन इसी बीच दल खालसा का ये विवादित बयान सामने आया है।
अकाल तख्त के जत्थेदार ने हथियार रखने के लिए की थी अपील
इससे पहले पंजाब के अमृतसर स्थित ‘श्री अकाल तख़्त’ का जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने सिखों से आधुनिक हथियार रखने की अपील की थी, जिसे सुन मुख्यमंत्री भगवंत मान ने उनके बयान पर आपत्ति जताई है। ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा था कि हर सिख आधुनिक हथियार का लाइसेंस रखने की कोशिश करे। उन्होंने मीरी-पीरी के संस्थापक गुरु हरगोबिंद साहिब के गुरुता गद्दी दिवस पर संगत के नाम जारी संदेश में इस तरह की अपील करके दावा किया था कि गुरु हरगोविंद ने चार युद्ध लड़े और चारों में ही उन्होंने जीत दर्ज की। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है जब सिख बाणी पढ़ कर बलवान बनें और हर सिख शस्त्रधारी भी बने।
कर्नाटक (Karnataka) के हासन जिले में अरासिकेरे (Arasikere) में सोमवार (30 मई 2022) को एक मंदिर में मूर्तियों को तोड़ने वाले अज्ञात उपद्रवियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। ये मूर्तियाँ निर्माणाधीन प्रक्रिया में थीं, जिन्हें प्रदर्शनी के लिए बनाया जा रहा था।
पुलिस के अनुसार, यह घटना मालेकल्लू तिरुपति हिल (Malekallu Tirupathi Hill) के प्रदर्शनी केंद्र में हुई। इसके बाद से यहाँ तनाव की स्थिति पैदा हो गई है। हालाँकि, मूर्तियों को किन लोगों ने तोड़ा, इसका अभी तक पता नहीं चल पाया है, लेकिन पुलिस के हाथ इस मामले में कई अहम सुराग लगे हैं।
पुलिस का कहना है कि हमने अज्ञात बदमाशों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। उनके मुताबिक कम से कम चार बदमाशों ने मिलकर मंदिर में मूर्तियों को तोड़ दिया, जिनकी कुछ दिनों में स्थापना की जानी थी।
Karnataka | Miscreants vandalised idols belonging to an under-construction private museum in Arasikere, Hassan district on 30th May; FIR registered
रिपोर्ट्स के अनुसार, 300 साल पुराने इस पवित्र स्थान को ‘मिनी तिरुपति’ मंदिर के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर एक पहाड़ी के ऊपर अरासिकेरे शहर से दो किमी दूर स्थित है। यहाँ रहने वाले लोग इस मंदिर में भगवान की पूजा अर्चना करने लिए जाते हैं।
पुलिस ने यह भी बताया कि सोमवार को मंदिर परिसर में आए बदमाशों ने पहले कल्याणी (मंदिर का पवित्र जल निकाय) में स्नान किया। उसके बाद उन्होंने आपत्ति के बावजूद वहाँ धूम्रपान किया और परिसर में काम कर रहे मजदूरों को धमकाकर भगा दिया। बाद में, वे प्रदर्शनी केंद्र (Exhibition Centre) गए और उन मूर्तियों को तोड़ दिया। बदमाशों ने मूर्तियों को तोड़ने के लिए रॉड और अन्य हथियारों का इस्तेमाल किया था।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हासन जिले के एसपी आर श्रीनिवास गौड़ा (पुलिस अधीक्षक) और जिले के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुँचे। डॉग स्क्वायड और फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट ने बदमाशों के खिलाफ सबूत जुटाए हैं। पुलिस का कहना है कि हम इस मामले में गहनता से जाँच कर रहे हैं।
अपनी पाद को डिब्बे में बंद करके लाखों-करोड़ों कमाने वाली अभिनेत्री ने नया बिजनेस शुरू किया है। स्टेफनी माटो नाम की विदेशी एक्ट्रेस ने हाल में खुलासा किया कि अब वो अपने बूब्स का पसीना जार या बोतल में भरके व्यापार करती हैं और इस तरह वो एक माह में 5000 डॉलर यानी ₹3,88,250 कमाती हैं। उनकी एक दिन की इनकम को यदि महीने के 30-31 दिन के हिसाब से जोड़ें तो ये कमाई लगभग ₹11647500 से ज्यादा बनेगी।
जानकारी के लिए बता दें कि 3-4 माह पहले तक स्टेफनी पाद का बिजनेस करती थी और उससे करोड़ों कमाती थीं। 31 साल की अभिनेत्री को अपना ये अजीबोगरीब बिजनेस हार्ट अटैक के डर से छोड़ना पड़ा। उनकी हालत इतनी बिगड़ गई थी कि उन्हें आनन-फानन में अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था। हालाँकि अब वह जैम प्रेस को दिए अपने इंटरव्यू में बताती हैं, “गर्मी आ रही हैं और मेरे बूब्स पसीने में भीगते हैं, तो क्यों न इन्हें बोतल में भरकर बेचा जाए।”
माटो बताती हैं कि उन्हें एक बोतल में अपने बूब्स से पसीना निकालकर भरने में 15 मिनट लगते हैं। अगर मौसम ज्यादा गर्म हो तो वो एक दिन अपने पसीने की 10 बोतने भी भर देती हैं और अपने एक्स रेटेड अनफिल्टर्ड साइट से 500 डॉलर के करीब में बेचती हैं। माटो इस काम को मेहनत का काम बताती हैं और कहती हैं- ‘मेरे पास अच्छे बूब्स हैं। फैन्स इन्हें सूँघकर और चाटकर और करीब आ सकते हैं।”
माटो की मानें तो इस बिजनेस को चलाने के लिए वो अपने आपको हमेशा हाइड्रेट रखती हैं ताकि वो पर्याप्त मात्रा में अपने ग्राहकों के लिए पसीना निकाल सकें। माटो के अनुसार वह खुद को मेपल का पेड़ मानती हैं और अपने बूब्स के पसीने को उसका रस। इसीलिए वह पसीने को ऐसे इकट्ठा करती हैं जैसे पेड़ करता है। माटो को ये भी मालूम है कि पसीना इकट्ठा करने के लिए हमेशा धूप में पूल के पास बैठा रहना उनके लिए खतरनाक हो सकता है लेकिन उनके मुताबिक वो खुद को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त सावधानियाँ बरतती हैं।
बता दें कि माटो ने अपने नए बिजनेस की सूचना टिकटॉक और इंस्टाग्राम पेज के जरिए दी थी। इसके बाद यूजर्स का मिक्सड रिएक्शन देखने को मिला। कुछ यूजर्स इसे सुनकर घिन्नाए और कुछ ने कहा कि वो हैरान कि ये लड़की अपने शरीर के अंग नहीं बेच रही।
क्यों बंद किया पाद का कारोबार?
गौरतलब है कि स्टेफनी ने अपने पिछले बिजनेस को अलविदा कहने से पहले जानकारी दी थी कि उन्हें सांस लेने में दिक्कत होने लगी थी और हर बार जब वो सांस लेने की कोशिश करती थीं तो दिल के पास ऐसा महसूस होता था जैसे किसी ने चुटकी काटी हो। इसके अलावा घबराहट होना, परेशानी होना भी सामान्य हो गया था। बाद में उन्होंने एक दिन अपने दोस्त को बुलाया और अस्पताल की ओर दौड़ीं। उन्हें लग रहा था कि उन्हें दिल का दौरा आने वाला है। अस्पताल में जाकर उन्होंने डॉक्टर से अपना चेकअप कराया। लेकिन अपने अजीबोगरीब करियर के बारे में नहीं बताया। वहाँ पता चला कि उन्हें शरीर में जो असहजता लग रही थी वो कोई स्ट्रोक या हार्ट अटैक नहीं था बल्कि गैस का दर्द था। डॉक्टर ने एक्ट्रेस को उनका डाइट प्लान बदलने की सलाह दी जिसके बाद उन्होंने अपने बिजनेस पर ताला लगा दिया।
उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले से जबरन धर्मांतरण (Religious Conversion) और दुष्कर्म का मामला सामने आया है। जाकिर नाम के युवक पर आरोप है कि उसने जॉनी बनकर 13 वर्षीय नाबालिग छात्रा को पहले अपने प्रेमजाल में फँसाया, फिर उसे एक होटल में ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया। मामला प्रकाश में आते ही पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।
इस मामले में हापुड़ के एडिशनल एसपी सर्वेश कुमार मिश्रा का कहना है कि थाना हापुड़ नगर में पीड़िता के पिता द्वारा दुष्कर्म की शिकायत दर्ज की है। उसके आधार पर सुसंगत धाराओं में मामला दर्ज कर आरोपित को तत्काल गिरफ्तार कर लिया गया है। वहीं पीड़िता का मेडिकल टेस्ट कराया जा रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला नगर कोतवाली क्षेत्र का है। बच्ची के परिजनों का आरोप है कि उनकी बेटी की सहेली किसी जाकिर नाम के युवक से बात करती थी और उससे मिलने जाया करती थी। आठ माह पहले अच्छेजा गाँव के रहने वाला जाकिर धर्म छिपाकर उनकी बेटी से बात करने लगा और उसे झूठे प्रेम में फँसा लिया।
आरोप है कि आरोपित कुछ दिन पहले उनकी बेटी को एक होटल में ले गया, जहाँ उसे कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाकर पिला दिया। बेहोशी की हालत में जाकिर ने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया और उसका वीडियो बना लिया। इसके बाद वह उसे ब्लैकमेल कर पिछले आठ महीने से उसके साथ दुष्कर्म कर रहा है। यही नहीं किशोरी को अपने जाल में फँसाने के लिए आरोपित ने हिंदू धर्म को बदनाम किया। उसने हाथ में कलावा बाँधकर तिलक भी लगाया, ताकि 13 साल की लड़की उसे हिंदू समझकर उसके करीब आ जाए।
इतना ही नहीं जाकिर ने अपनी पहचान उजागर होने के बाद छात्रा पर धर्म परिवर्तन करने का भी दबाव बनाया। पीड़िता ने जब अपनी आपबीती अपने परिजनों को बताई तो उन्होंने बिना देर किए जाकिर के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज कराई। कोतवाली प्रभारी निरीक्षक सोमवीर सिंह ने बताया कि आरोपित जाकिर को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसे न्यायालय में पेश किया, जहाँ से उसे जेल भेज दिया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने केंद्र सरकार के 8 वर्ष पूरे होने पर मंगलवार (31 मई, 2022) को हिमाचल प्रदेश के शिमला में एक कार्यक्रम में शिरकत की। शिमला से लौटते हुए पीएम ने अचानक अपनी कार रोकी और एक बेटी से बात करने लगे। इनका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में आप देख सकते हैं कि पीएम के हाथों में उनकी माँ हीराबेन की पेंटिंग है। यह पेंटिंग उसी लड़की ने बनाई है।
एक यूजर ने ट्विटर पर लिखा, “अद्भुत,अविस्मरणीय, स्वर्णिम पल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने शिमला में अपनी कार को रोककर एक बेटी द्वारा बनाई गई उनकी माताजी हीराबेन की पेंटिंग को सहस भाव से स्वीकार किया। ये है मोदी जी की सादगी और सरलता।”
अद्भुत ,अविस्मरणीय, स्वर्णिम पल !
प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी ने शिमला में अपनी कार को रोककर एक बेटी द्वारा बनाई गई उनकी माताजी हीराबेन की पेंटिंग को सहस भाव से स्वीकार किया।
दरअसल, रिज मैदान पर कार्यक्रम समाप्त होने के बाद पीएम जब मॉल रोड से अपनी कार में लौट रहे थे, तभी वह युवती उन्हें उनकी माँ की पेंटिंग लिए हुए खड़ी दिखाई। इस पर पीएम मोदी ने अपनी कार रोक ली और उसके पास पहुँच गए। पीएम ने लड़की से उसका नाम पूछा और साथ कहा कि आपने कितने दिन में यह पेंटिंग बनाई है। पीएम के सवाल का जवाब देते हुए लड़की ने कहा, “मेरा नाम अनु है। मैं शिमला की रहने वाली हूँ। मैंने एक दिन में इस पेंटिंग को बनाया है। इस दौरान युवती ने पीएम मोदी के पैर भी छुए। वहीं पीएम ने भी लड़की को आशीर्वाद दिया और वहाँ से चले गए।
— BJP Himachal Pradesh (@BJP4Himachal) May 31, 2022
बता दें कि अपनी सरकार के 8 वर्ष पूरे होने पर अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में रोड शो किया और कई विकास परियोजनाओं के उद्घाटन के साथ-साथ एक विशाल जनसभा को भी सम्बोधित किया। उन्होंने इस दौरान ‘किसान सम्मान निधि’ की 11वीं किश्त भी जारी की।
पीएम ने इसके बाद कहा कि उन्हें शिमला की धरती से देश के 10 करोड़ से भी ज्यादा किसानों के खाते में पैसे पहुँचाने का सौभाग्य मिला है। आज उनके जीवन में एक विशेष दिवस भी है, इस विशेष दिवस पर देवभूमि को प्रणाम करने का मौका मिले, इससे बड़ा सौभाग्य क्या हो सकता है। उन्होंने इतनी बड़ी तादाद में आशीर्वाद देने आने के लिए जनता का आभार व्यक्त किया।
फेमस पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला के गाँव मूसेवाला में दुख का माहौल है। सिद्धू मूसेवाला का अंतिम संस्कार गाँव के श्मशान घाट के बजाए उनकी अपनी जमीन पर किया गया। अंतिम संस्कार के लिए पार्थिव शरीर को उसी ट्रैक्टर पर ले जाया जाया गया है जिस पर वो अपने गानों में अक्सर टशन दिखाया करते थे। वहीं फैंस के ऐसे कई वीडियो सामने आए हैं जहाँ लोगों ने बोला कि दो-दो दिनों से उनके घर खाना नहीं बना है।
Punjab | Last rites of Punjabi singer and Congress leader Sidhu Moose Wala performed at his native village Moosa in Mansa district.
सिद्धू मूसेवाला की मौत से हर कोई गमजदा है। लोगों में गुस्सा भी है। वहीं यह भी खबर आ रही है कि मूसेवाला के पालतू कुत्तों ने भी दो दिनों से खाना नहीं खाया है। कहा जा रहा है कि मूसेवाला खुद उन्हें सुबह और शाम में खाना खिलाया करते थे। ऐसे में उनके आने की उम्मीद में वो भी भूखे हैं।
#WATCH | A huge crowd joins the funeral procession of singer Sidhu Moose Wala in Punjab’s Mansa.
जहाँ अंतिम संस्कार से पहले लाखों की भीड़ उन्हें आखिरी विदाई देने सड़कों पर उतर आई है। वहीं उनके पिता का एक वीडियो भी सामने आया है। जहाँ रो-रो कर बेहाल हो चुके पिता, अपने बेटे के शव के पास बैठे हैं और अंतिम समय में अपने बेटे की मूछों को ताव दे रहे हैं।
CCTV फुटेज में नजर आए संदिग्ध
पंजाब के मनसा जिले में 29 मई को दिन दहाड़े सिद्धू मूस वाला की हत्या में उनकी कथित संलिप्तता के लिए कुछ नाम सामने आए हैं। शीर्ष खुफिया सूत्रों हवाले से मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि, ये लोग या तो शामिल थे या उनके पास मूसेवाला को मारने की साजिश के बारे में पता था।
खुफिया सूत्रों के अनुसार हिसार (हरियाणा) का एक भोला, नारनौद (हरियाणा) का सतेंदर काला, सोनू काजल और बिट्टू, अजय गिल, अमित काजला, गोल्डी बराड़, लॉरेंस बिश्नोई, सचिन (पंजाबी गायक मनकीरत औलाक के प्रबंधक) और जग्गू भगवानपुरिया हैं।
पंजाब पुलिस द्वारा मनसा के भीखी रोड स्थित मनसुख ढाबा से जारी सीसीटीवी फुटेज के मुताबिक, सात संदिग्धों को हत्या से कुछ घंटे पहले 29 मई की सुबह एक साथ नाश्ता करते देखा जा सकता है। इनमें से दो की पहचान कुसा के मनप्रीत सिंह मन्नू और पंजाब के एक छोटे से गाँव जौरा के जगरूप सिंह रूपा के रूप में हुई है।
गोल्डी बरार को छोड़कर ज्यादातर संदिग्ध पंजाब और हरियाणा के हैं, जिन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कथित तौर पर इस अपराध की जिम्मेदारी ली थी। बरार ने यह भी कहा कि विक्की मिधुखेड़ा और गुरलाल बराड़ की मौत का बदला लेने के लिए वह और लॉरेंस बिश्नोई समूह ने हत्या की योजना बनाई। यहाँ तक कि सोशल मीडिया पोस्ट में वो जिम्मेदारी लेते भी नजर आए।
गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को सता रहा एनकाउंटर का डर
वहीं पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड में शामिल बताए जा रहे गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को अब मौत का डर सता रहा है। बिश्नोई ने अपनी सुरक्षा पुख्ता करने और उसे दिल्ली की तिहाड़ जेल से बाहर नहीं भेजने को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। हालाँकि, सोमवार को पटियाला हाउस कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई से मना कर दिया था। इसके बाद आज लॉरेंस बिश्नोई के वकील ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है।
याचिका में तिहाड़ जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई ने सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड में पंजाब पुलिस को उसकी कस्टडी नहीं देने का निर्देश देने की माँग की है। लॉरेंस को डर है कि पंजाब पुलिस उसे फर्जी मुठभेड़ में मार सकती है।
गौरतलब है कि पंजाब पुलिस ने रविवार को कहा था कि गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या गिरोहों के बीच आपसी रंजिश का परिणाम है और इसमें लॉरेंस बिश्नोई गिरोह लिप्त है। बता दें कि मूसेवाला की रविवार (29 मई, 2022) को पंजाब के मानसा जिले में अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। उससे एक दिन पहले राज्य की भगवंत मान सरकार ने उसकी सुरक्षा कम कर दी थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) की अपील के बाद तीर्थयात्रियों, सरकारी और गैर-सरकारी एजेंसियों ने मंगलवार (31 मई, 2022) को केदारनाथ धाम (Kedarnath Dham) के पास स्वच्छता अभियान चलाया। पीएम मोदी ने इसको लेकर श्रद्धालुओं का आभार जताया है। उन्होंने ट्वीट किया कि श्रद्धालुओं की यह भावना तीर्थस्थलों की स्वच्छता के लिए हर किसी को प्रेरित करने वाली है। दरअसल, उत्तराखंड में चार-धाम यात्रा के दौरान कुछ तीर्थयात्रियों द्वारा फैलाई गई गंदगी का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार (29 मई, 2022) को लोगों से तीर्थ स्थलों की गरिमा बनाए रखने की अपील की थी।
श्रद्धालुओं की यह भावना तीर्थस्थलों की स्वच्छता के लिए हर किसी को प्रेरित करने वाली है। https://t.co/XiytysWgKE
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पर्यटकों ने गौरीकुंड, सोनप्रयाग और केदारनाथ के रास्ते में स्वच्छता अभियान में हिस्सा लिया। सोनप्रयाग केदारनाथ के रास्ते में रुद्रप्रयाग और गौरीकुंड के बीच स्थित है। रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के मुताबिक, प्रशासन कचरा प्रबंधन की स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। नतीजतन केदारनाथ और आसपास के इलाकों में फैला कचरा अब साफ हो रहा है। मंगलवार की सुबह जिले के पर्यावरण संरक्षण पर काम करने वाली संस्था सुलभ इंटरनेशनल के प्रशासन और कर्मचारियों ने केदारनाथ क्षेत्र से टन कचरा एकत्र किया।
वहीं, गढ़वाल विश्वविद्यालय के पर्यटन विभाग के एक अधिकारी डॉ. सर्वेश उनियाल ने कहा, “इन दिनों, हम तीर्थ स्थलों पर पर्यटकों की भारी भीड़ देख रहे हैं। इसके बाद, पर्यावरण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा प्रभावित होता है। लोग कूड़ा और प्लास्टिक को लापरवाही से इधर-उधर फेंक देते हैं।”
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 मई को ‘मन की बात कार्यक्रम‘ में कई सामाजिक मुद्दों पर बात की थी। इस दौरान उन्होंने चारधाम यात्रा का भी जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि केदारनाथ यात्रा में फैलाई जा रही गंदगी से बहुत दुखी हूँ। पीएम मोदी ने आने वाले तीर्थयात्रियों से अपील की थी कि हमें तीर्थ स्थलों की गरिमा को बनाए रखने की जरूरत है। चारधाम में हर दिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुँच रहे हैं, लेकिन कुछ यात्रियों द्वारा केदारनाथ में गंदगी फैलाई जा रही है।
जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में स्कूल टीचर की दिन दहाड़े हत्या किए जाने के बाद प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला का इस मामले में विवादित बयान आया है। उन्होंने रजनी बाला नामक कश्मीरी हिंदू टीचर की हत्या पर कोई दुख प्रकट करने बजाय कहा है कि अभी सब मारे जाएँगे।
फारूक अब्दुल्ला के विवादित बयान की वीडियो सोशल मीडिया पर हर जगह पर वायरल है। वीडियो में वह मीडिया के बीच से गुजरते हुए आगे बढ़ रहे हैं। पत्रकार उनसे पूछते हैं कि कुलगाम में एक लेडी टीचर को गोली मारी गई है इस पर वह क्या कहेंगे। ये सुन कर फारूक अब्दुल्ला कहते हैं- ‘अभी मारे जाएँगे सब।’
इस वीडियो को देखने के बाद सामान्य जन में फारूक अब्दुल्ला के प्रति गुस्सा है। वहीं कश्मीरी हिंदू की हत्या से आहत लोगों ने श्रीनगर में प्रदर्शन शुरू कर दिया है। श्रीनगर की सड़के जाम करके इंसाफ की गुहार लगाई जा रही है। पिछले दिनों आतंकियों द्वारा शिकार बनाए गए राहुल भट के पिता ने इन हत्याओं को टार्गेट किलिंग बताया है। सड़क पर जोर-जोर से नारेबाजी करके हिंदू सुरक्षा सुनिश्चित करने की माँग कर रहे हैं।
#LIVE | ‘We want justice’ slogans reverberate as anger spills onto Srinagar streets after a Hindu teacher Rajni Bala was shot dead by terrorists in Kulgam, Kashmiri Pandits rise up in protest for #JusticeForRajni
जानकारी के लिए बता दें कि जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में इस्लामी आतंकियों ने हाई स्कूल गोपालपोरा की शिक्षिका रजनी को आज गोलियों से छलनी किया। वह कुलगाम जिल में 2010 से काम कर रही थीं और उनकी परिवार सांभा जिले में रहता था। घटना के बाद घायल रजनी बाला को अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित किया। उनकी हत्या की खबर सुनने के बाद उनके परिजनों के आँसू नहीं रुक रहे और दूसरी ओर कश्मीरी हिंदुओं पर फारुक अब्दुल्ला का ऐसा बयान आया है। अब्दुल्ला ने इससे पहले भी द कश्मीर फाइल्स को लेकर कहा था कि ये फिल्म बैन होनी चाहिए वरना हत्याएँ होती रहेंगी।
#UPDATE | Injured woman teacher, a Hindu & resident of Samba (Jammu division) succumbed to her injuries. Terrorists involved in this gruesome terror crime will be soon identified & neutralised: Kashmir Zone Police
उल्लेखनीय है कि इससे पहले कश्मीर के ही बडगाम में दो-तीन हफ्ते पहले 12 मई 2022 को लश्कर-ए-तैयबा के दो आतंकियों ने एक सरकारी कार्यालय में घुस कर 35 वर्षीय राहुल भट की गोली मारकर हत्या कर दी थी। राहुल भट प्रवासी कश्मीरी हिंदुओं के रोजगार के लिए दिए गए विशेष पैकेज के लिए काम कर रहे थे। जिस समय दोनों आतंकियों ने कार्यालय में घुसकर भट की हत्या की थी, उस समय शाम के लगभग साढ़े चार बज रहे थे और तहसील कार्यालय कर्मचारियों से भरा हुआ था। आतंकी दुस्साहस दिखाते हुए भरी ऑफिस में घुस गए और राहुल भट को सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी।
इस्लाम छोड़ने वाले केरल (Kerala) के अस्कर अली (Askar Ali) एक बार फिर चर्चा में हैं। हाल ही में उन्होंने अपने रिश्तेदारों पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करने से कुछ घंटे पहले ही उनका अपहरण करने का आरोप लगाया था। उन्हें इस्लाम छोड़ने के बाद से कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। यहाँ तक कि परिवार वालों और रिश्तेदारों ने भी उनका साथ नहीं दिया। वे कहते हैं, “मैंने इस्लाम का विस्तार से अध्ययन करने के बाद इस मजहब को छोड़ दिया। जब मैं (हुदावी) कोर्स कर रहा था उस दौरान मेरे पास इस्लाम से संबंधित सामग्री के अलावा अन्य सामग्रियों को पढ़ने का अवसर काफी कम था। लॉकडाउन के दौरान मुझे अन्य विषयों को पढ़ने को मिला, जिससे मेरी आँखें खुल गईं।”
अस्कर ने इस बात इस बात को प्रमुखता से उठाया कि मुस्लिम समुदाय के जो लोग अपना मजहब छोड़ते हैं, उन्हें उनके परिवार के सदस्य ‘नीच प्राणी’ के रूप में देखते हैं। अली को इस्लाम का त्याग करने के बाद उन्मादी मुस्लिम भीड़ के हमलों का सामना भी करना पड़ा था, जैसे उन्होंने इस्लाम छोड़कर बहुत बड़ा पाप कर दिया हो।
इस्लाम छोड़ने वाले अस्कर अली (फोटो साभार:द न्यूज मिनट)
हालाँकि, अस्कर अली एकमात्र पूर्व मुस्लिम नहीं हैं, जिन्हें उत्पीड़न का शिकार होना पड़ा है। हाल ही में साहिल नाम के एक और मजहब त्यागने वाले को इस्लामिक मौलवी ने लाइव टीवी पर धमकाया था। मौलाना ने बार-बार उस व्यक्ति को मुर्तद (मजहब छोड़ने वाला) (Murtad) कहकर संबोधित किया और उसे फटकारा। मौलवी ने कहा “एक मुर्तद (धर्म त्यागी) को इस्लाम के बारे में बोलने का कोई अधिकार नहीं है। चुप रहो, तुम एक शब्द भी नहीं बोल सकते।” इसके बाद मौलवी ने शो में मजहब त्यागने वालों को बुलाने पर न्यूज एंकर के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया।
मौलाना ने अपनी धमकियों के साथ जारी रखा और चिल्लाते हुए कहा, “यह इस्लाम के खिलाफ एक साजिश है। भारत के मुस्लिम आपको, आपकी जगह दिखाएँगे।”
एक मजहब त्यागने वाले को लाइव टीवी पर धमकाने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई बार इस तरह की असहिष्णुता वाली घटनाएँ सामने आ चुकी हैं। इस्लाम को त्यागने वाले व्यक्तियों को अक्सर उनके समुदाय के लोगों द्वारा जान से मारने की धमकी दी जाती है।
कुरान और हदीसों के माध्यम से धर्म त्यागना
क्या मजहब त्यागने वालों के प्रति इस तरह का व्यवहार मजहबी फरमानों से प्रभावित है? इसके लिए कुरान और हदीसों को करीब से जानने की जरूरत है। अध्याय 9 (अत-तौबा) कुरान की आयत 66 कहती है, “कोई बहाना मत बनाओ! आपने अपना विश्वास खो दिया है। यदि हम आप के एक समूह (पश्चाताप करने वालों) को क्षमा कर दें, तो हम दूसरों को उनकी दुष्टता के लिए कैसे दंडित करेंगे।”
अध्याय 16 (अन-नहल) कुरान की आयत 106 कहती है, “जो कोई अपने ईमान के बाद अल्लाह पर कुफ़्र करता है, उन लोगों को नहीं जो मजबूर हैं, बल्कि वे जो पूरे दिल से कुफ़्र को गले लगाते हैं। उन्हें अल्लाह द्वारा दोषी ठहराया जाएगा और उन्हें एक बहुत बड़ी सजा मिलेगी।”
अध्याय 88 (अन-ग़शियाह) कुरान की आयत 22-24 कहता है: “आप उन्हें विश्वास करने के लिए मजबूर नहीं कर सकते हैं। लेकिन जो कोई अल्लाह पर विश्वास करने से इनकार करेगा, अल्लाह उन्हें बड़ी सजा देगा।”
सहीह अल-बुखारी (6 प्रमुख हदीस संग्रहों में से एक) खंड 9, पुस्तक 84, हदीस 57 में कहता है:
इकरीमा: कुछ ज़ानादिक़ा (नास्तिकों) को जब अली के पास लाया गया तो उन्होंने उन्हें जला दिया। इस घटना की खबर, इब्न अब्बास तक पहुँची। इस पर उन्होंने कहा, “अगर मैं उनकी जगह होता, तो मैं उन्हें नहीं जलाता, जैसा कि अल्लाह के रसूल ने यह कहते हुए मना किया था, “किसी को भी अल्लाह की सजा (आग) से दंडित न करें।’ मैं उन्हें अल्लाह के रसूल के अनुसार, ‘जिसने अपना इस्लामी धर्म बदल दिया, उसे मार डालता।”
यह खंड 9, पुस्तक 84, हदीस 58 में आगे कहता है- एक व्यक्ति ने इस्लाम अपना लिया और फिर वापस यहूदी धर्म में लौट आया। मुआद बिन जबल आया और उसने अबू मूसा के साथ उस आदमी को देखा। मुआद ने पूछा, “इस (आदमी) में क्या गलत है?” अबू मूसा ने उत्तर दिया, “उसने इस्लाम अपनाया और फिर यहूदी धर्म में वापस चला गया।” मुआद ने कहा, “मैं तब तक नहीं बैठूँगा, जब तक आप उसे अल्लाह और उसके रसूल के फैसले के अनुसार मार नहीं देते।”
‘मजहब का त्याग’ करने को लेकर इस्लामी विद्वानों की राय
पाकिस्तानी इस्लामिक स्कॉलर डॉ इसरार अहमद (1932-2010) के अनुसार, इस्लाम त्यागने की सजा मौत है। कोई भी मुस्लिम जो अपने ईमान को छोड़कर जमात से बाहर जाता है। यानी मुर्तद बन जाता है, उसे मौत की सजा दी जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि पश्चिमी सभ्यता के प्रभाव में आकर जो भी अपने धर्म को बदलने के लिए इच्छुक हैं। उनको लेकर इस्लामी विद्वानों का तर्क है कि धर्मत्यागियों को तभी मारा जाना चाहिए, जब वे इस्लामिक स्टेट को उखाड़ फेंकने की साजिश रचें।
असिम अल हकीम नाम के एक अन्य इस्लामी विद्वान ने टिप्पणी की, “क्या दूसरों को मारना उचित है? यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप कहाँ से आ रहे हैं। यदि आप मुस्लिम हैं, तो उसके लिए एक निर्धारित सजा है।” उन्होंने आगे बताया कि इस्लाम को स्वीकार करने के बाद छोड़ना बहुत बड़ा पाप है।
हदीसों और इस्लामी विद्वानों की बातों के साथ-साथ कुरान की आयतों की बारीकी से जाँच करने पर यह स्पष्ट हो जाता है कि मुस्लिम के रूप में पैदा हुए लोगों के लिए इस्लाम छोड़ना आसान विकल्प नहीं है। ‘धर्मत्याग के लिए मौत’ की सजा के अलावा और भी कई तरह की प्रताड़ना दी जाती है। यह केवल भारत तक ही सीमित नहीं है।
ह्यूमनिस्ट यूके के अनुसार, दुनिया में 13 देश ऐसे हैं जो ईशनिंदा या मजहब छोड़ने के लिए मौत की सजा देते हैं। इन देशों में अफगानिस्तान, ब्रुनेई, ईरान, कतर, सऊदी अरब, सोमालिया, संयुक्त अरब अमीरात, मलेशिया, मालदीव, मॉरिटानिया, नाइजीरिया, पाकिस्तान और यमन शामिल हैं।
इस्लाम में मजहब छोड़ने की सजा मौत
इस्लाम में मजहब छोड़ने पर मौत की सजा है। साल 2014 में आठ मुस्लिम बहुल देशों में एक मुस्लिम द्वारा इस्लाम के त्याग करने की सजा मृत्युदंड थी। जानकारी के मुताबिक, तेरह देशों में इस्लाम छोड़ने पर कई तरह की सजा दी जाती थी। इसके तहत उन्हें जेल में डाल दिया जाता है या जुर्माना लगाया जाता है। इतना ही नहीं, इसके तहत उनके बच्चे की कस्टडी भी छीन ली जाती है। कुछ दशक पहले, अधिकांश शिया और सुन्नी कानूनविदों का मानना था कि इस्लाम छोड़ना अपराध के साथ-साथ पाप भी है।
यूपी शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन वसीम रिजवी उर्फ जितेंद्र नारायण त्यागी ने अपने मकान पर जबरन कब्जे का आरोप लगाया है। सआदतगंज यतीमखाने के पास स्थित वक्फ बोर्ड के किराए के मकान में तालाबंदी देख जितेंद्र नारायण त्यागी ने रविवार (29 मई, 2022) को देर शाम हनुमान सेतु मंदिर की पार्किंग में डेरा डाल दिया। उन्होंने घोषणा की है कि जबतक यतीमखाने के पास बने मकान की चाबी उन्हें नहीं मिल जाती वह पार्किंग में ही रातें गुजारेंगे। उन्होंने अप्पने समर्थकों के साथ वहीं पार्किंग में बिस्तर लगाया और लेट गए।
वहीं यह जानकारी मिलते ही उनके समर्थन में अखिल भारतीय हिंदू महासभा और अंतरराष्ट्रीय हिंदू महासभा के पदाधिकारी भी पहुँच गए थे। इसके बाद रात करीब 7:30 बजे कमिश्नर डीके ठाकुर से मुलाकात कर मकान के एग्रीमेंट से जुड़े दस्तावेज सौंपते हुए जितेंद्र त्यागी ने ऐलान किया कि जब तक मकान की चाबी नहीं मिलती, तब तक वह मंदिर के पीछे पार्किंग में ही रहेंगे।
हालाँकि बाद में पुलिस कमिश्नर डीके ठाकुर और अन्य अधिकारियों के आश्वासन पर रविवार देर रात जितेंद्र नारायण त्यागी पार्किंग से हटे। इसके बाद वह नक्खास में रहने वाली अपनी बेटी के घर पहुँचे जहाँ उन्होंने रात गुजारी। वहीं जितेंद्र नारायण त्यागी से कल शाम एडीसीपी पश्चिम चिरंजीव नाथ सिन्हा सहित पुलिस अधिकारीयों ने मुलाकात की।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एडीसीपी चिंरजीव नाथ सिन्हा ने बताया कि जितेंद्र नारायण त्यागी से सआदतगंज के पास यतीमखाना के पास स्थित आवास के संबंध दस्तावेज माँगे गए हैं। वह एग्रीमेंट से संबंधित जो भी दस्तावेज प्रस्तुत करेंगे उसके आधार पर शिया वक्फ बोर्ड से पूछताछ की जाएगी और जो भी तथ्य सामने आएँगे उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
एडीसीपी के मुताबिक दस्तावेजों के आधार पर यतीमखाना के पास स्थित आवास जितेंद्र नारायण की पत्नी के बाबा इब्ने हसन के नाम से आवंटित है न कि उनके नाम से। जितेंद्र त्यागी बने वसीम रिज़वी उस मकान में वर्ष 2016 से रह रहे थे। जब वह शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष थे। शिया वक्फ बोर्ड के हस्तक्षेप के बाद ही उसमें ताला बंद किया गया था।
वहीं, इस मामले में जितेंद्र नारायण त्यागी का कहना है, “मकान के निर्माण में मैंने करीब 25-30 लाख रुपए खर्च किए थे। एग्रीमेंट में यह तय हुआ था कि यतीमखाने को जब भी इस मकान की आवश्यकता होगी तो मुझे तीन माह पहले नोटिस दी जाएगी। इसके साथ ही मकान के निर्माण कार्य में उनका जो भी रुपया लगा होगा वह वापस कर दिया जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
जितेंद्र त्यागी ने कहा कि बोर्ड के इशारे पर हुसैनी टाइगर्स के अध्यक्ष शमील शम्सी ने अपने साथियों और पुलिस के साथ मिलकर घरवालों को बाहर निकाल दिया और ताला जड़ दिया। उनका कहना है कि अगर किराया बकाया भी है तो बोर्ड नोटिस दे सकता है। उन्होंने दावा किया कि उनके पास इस वक्त कोई मकान नहीं है।
बता दें कि इसी बीच यह भी सूचना आ रही है कि जितेंद्र नारायण त्यागी ने 30 जून के बाद हरिद्वार में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंद रविंद्रपुरी व जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी यति नरसिंहानंद की मौजूदगी में संन्यास लेंगे। संन्यास लेकर वह सनातन धर्म के प्रचार प्रसार से जुड़ेंगे। संन्यासियों की तरह ही जीवन यापन करेंगे। वह अपना शेष जीवन सनातन धर्म के कार्यों में लगाएँगे।