पैगंर मोहम्मद पर नुपूर शर्मा की टिप्पणी के बाद भारत पर सवाल उठाने वाले पाकिस्तान में हिंदू मंदिर पर एक बार फिर हमला हुआ। घटना कराची के कोरांगी थाना क्षेत्र में स्थित श्री मारी माता मंदिर की है। वहाँ बुधवार (8 जून 2022) को मूर्तियों को खंडित पाया गया। पुलिस ने जानकारी होने के बाद मंदिर में हुई तोड़फोड़ पर लोगों से पूछताछ की और आक्रोशित समुदाय को देखते हुए इलाके में पुलिस बल की तैनाती हुई।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, संजीव नामक हिंदू ने बताया कि बुधवार को 6 से 8 लोग मोटरसाइकल से इलाके में आए और मंदिर पर हमला किया। संजीव ने बताया कि उन्हें नहीं मालूम कि किसने ये हमला किया और क्यों किया। वहीं पुलिस ने कहा कि 5-6 अज्ञात आए, मंदिर में घुसे और उसमें तोड़फोड़ की। कोरांगी एसएचओ ने इस मामले में दर्ज की गई एफआईआर की पुष्टि की।
बता दें कि पाकिस्तान में हिंदुओं के धार्मिक स्थल अक्सर कट्टरपंथियों के निशाने पर रहते हैं। पिछले साल अक्टूबर मेें ऐसे ही एक ऐतिहासिक मंदिर को निशाना बनाया गया था। उस दौरान भी अज्ञात हमलावरों पर केस दर्ज हुआ था और शिकायत में यही कहा गया था कि अंजान लोगों ने मंदिर में घुसकर उसमें तोड़फोड़ की। अब इस बार भी यही हुआ है। सामनेे आई वीडियो में देख सकते हैं कि कैसे हनुमान जी की मूर्ति को क्षतिग्रस्त किया गया है। उनके आस-पास रखी पूजा सामग्री को बिखेर दिया गया है। देवी-देवताओं की तस्वीरें जमीन पर पड़ी हैं।
The sanctity of a Hindu temple was disrespected after unidentified ruffians vandalised the premises. The Shri Mari Maata Mandir in Korangi, Karachi was attacked on Wednesday causing fear to spread amongst the Hindu community. #etribune#news#korangi#Mandirpic.twitter.com/2KBZwU9AtQ
द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “अज्ञात बदमाशों द्वारा परिसर में तोड़फोड़ करने के बाद एक हिंदू मंदिर की पवित्रता को भंग किया गया। कराची के कोरंगी में श्री मारी माता मंदिर पर बुधवार को हमला हुआ, जिससे हिंदू समुदाय में भय फैल गया।”
The sanctity of a Hindu temple was disrespected after unidentified ruffians vandalised the premises. The Shri Mari Maata Mandir in Korangi, Karachi was attacked on Wednesday causing fear to spread amongst the Hindu community. #etribune#news#korangi#Mandirpic.twitter.com/2KBZwU9AtQ
उल्लेखनीय है कि इससे पहले फरवरी माह में सिंध प्रांत के रोहरी में एक हिंदू को मुस्लिमों द्वारा न केवल लूटा गया था बल्कि उसमें तोड़फोड़ भी हुई थी। ये मंदिर शिरन वाली माता हिंदू मंदिर का है। जहाँ हिंदू देवताओं की 5 मूर्तियों को क्षतिग्रस्त किया गया था।
Started the morning with this horrible news. Another temple in Rohri, #Sindh has been attacked & vandalized by religious extremists, they looted d cash & gold and broke 5 idols of #Hindu deities. This time, it’s Shiranwali Mata Mandir.#ProtectMinoritiesReligiousPlacespic.twitter.com/zdtAcG92DH
उससे पूर्व 27 जनवरी को सिंध प्रांत के थारपारकर जिले में निर्माणाधीन हिंगलाज माता मंदिर को पाकिस्तानी अथॉरिटी द्वारा गिरा दिया था। साथ ही साल 2020 में नवरात्रि के दौरान अज्ञात बदमाशों ने हिंगलाज माता की मूर्ति के सिर को भी क्षतिग्रस्त कर दिया था और उनके वाहन का मुँह भी तोड़ दिया था।
भारतीय क्रिकेट टीम के ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा (Ravindra Jadeja) की बेटी निधान्या 8 मई 2022 को 5 साल की हो गईं। बेटी के पाँचवें जन्मदिन को जडेजा ने बेहद खास अंदाज में मनाया है और इसका क्रेडिट उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) को दिया है।
जडेजा की पत्नी रिवाबा ने बेटी के 5 वें जन्मदिन पर गुजरात के जामनगर में सुकन्या समृद्धि योजना (Sukanya Samriddhi Account) के तहत 101 बच्चियों का खाता खुलवाया है और सभी खातों में 11-11 हजार रुपए जमा किए हैं। इसकी हर तरफ तारीफ हो रही है।
जडेजा ने सोशल मीडिया के जरिए इसकी जानकारी देते हुए लिखा है, “आज यानी आठ जून को मेरी बेटी निध्याना जडेजा का पाँचवाँ जन्मदिन है। इस मौके पर मेरी पत्नी रिवाबा जडेजा ने समाज के लिए एक महान काम करने का फैसला किया है। उन्होंने जामनगर के पोस्ट ऑफिस में 101 सुकन्या समृद्धि अकाउंट खुलवाए हैं। हमें अपनी बेटी के जन्मदिन पर यह काम करके खुशी हो रही है। इसकी प्रेरणा हमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से मिली है, जिन्होंने अपने कार्यकाल के 8 साल पूरे कर लिए है। मैं राज्य के संचार मंत्री देव सिंह जी चौहान का भी धन्यवाद देना चाहता हूँ जिन्होंने हमारे इस कदम को पूरा समर्थन दिया। हम उम्मीद करते हैं कि ऐसे समर्थन के साथ इसी तरह के समाज सेवा भरे काम करते रहेंगे।”
जडेजा ने ट्विटर अकाउंट पर इस कार्यक्रम के कई फोटो भी शेयर किए हैं। IPL के 15 वें सीजन में चेन्नई की कप्तानी करने वाले जडेजा फिलहाल चोट की वजह से भारतीय टीम का हिस्सा नहीं हैं और परिवार के साथ समय बिता रहे हैं।
क्या है सुकन्या समृद्धि योजना ?
सुकन्या समृद्धि योजना (Sukanya Samriddhi Account) के तहत 10 साल या उससे कम उम्र की लड़कियों के लिए खाता खोला जा सकता है। इस खाते को न्यूनतम 250 और अधिकतम 1.5 लाख रुपए से खोला जा सकता है। सरकार इस योजना पर अच्छा रिटर्न देती है साथ ही टैक्स में रिबेट भी मिलता है। इससे बच्चियों की पढाई-लिखाई में मदद मिलती है। इस योजना के अंतर्गत एक बच्ची के नाम पर एक ही खाता खुलवाया जा सकता है। अगर दो बेटियाँ हैं तो दोनों के नाम अलग-अलग खाते खोलने होंगे।
भाजपा की कार्यकर्ता हैं रिवाबा जडेजा
बता दें कि जडेजा की पत्नी रिवाबा भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सक्रिय कार्यकर्ता हैं। उन्होंने 2019 में भाजपा की सदस्यता ली थी। रिवाबा अक्सर भाजपा से जुड़े राजनीतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेती हैं। वह भाजपा के साथ-साथ सौराष्ट्र की करणी सेना की महिला विंग की अध्यक्ष भी हैं।
पैगंबर मोहम्मद पर कथित विवादित टिप्पणी को लेकर भाजपा से निलंबित हो चुकीं नूपुर शर्मा और नवीन जिंदल की मुसीबत बढ़ती जा रही है। जानकारी के मुताबिक राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (एनसीएम) ने जहाँ इस मामले में दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर रिपोर्ट तलब किया। वहीं अब पता चला है कि बीजेपी के दोनों पूर्व नेताओं के ऊपर दिल्ली पुलिस द्वारा FIR दर्ज कर ली गई है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को नोटिस जारी कर रिपोर्ट में नूपुर शर्मा द्वारा कथित विवादित टिप्पणी को लेकर दिल्ली पुलिस ने अब तक क्या-क्या एक्शन लिया है, इसका ब्यौरा माँगा है। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को नोटिस जारी कर 3 हफ्ते में पूरे मामले की रिपोर्ट माँगी है।
ऐसे में दिल्ली पुलिस की IFSO यूनिट ने अलग-अलग प्रावधानों के तहत समाज में नफरत फैलाने वालों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की है। एफआईआर में नुपूर शर्मा और नवीन कुमार जिंदल के अलावा शादाब चौहान, सबा नकवी, मौलाना मुफ्ती नदीम, अब्दुर रहमान, गुलजार अंसारी, अनिल कुमार मीणा, पूजा शकुन का नाम शामिल है।
Following names have been mentioned in the FIR details: Nupur Sharma, Naveen Kumar Jindal, Shadab Chauhan, Saba Naqvi, Maulana Mufti Nadeem, Abdur Rehman, Gulzar Ansari, Anil Kumar Meena, Pooja Shakun: Delhi Police (2/2)
बता दें कि नूपुर शर्मा के खिलाफ मुंबई में भी रजा अकादमी की शिकायत पर FIR दर्ज हो चुका है और मुंबई पुलिस द्वारा नूपुर शर्मा को इस मामले में समन भी जारी किया गया है।
गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पैगंबर मोहम्मद पर किए गए कथित विवादित टिप्पणी के लिए रविवार (5 जून, 2022) को राष्ट्रीय प्रवक्ता नूपुर शर्मा को पार्टी से निलंबित कर दिया था, वहीं दिल्ली इकाई के मीडिया प्रमुख नवीन कुमार जिंदल को पार्टी से निष्कासित कर दिया था। यह यह भी उल्लेखनीय है कि बीजेपी ने अपने दोनों प्रवक्ताओं के खिलाफ यह कार्रवाई ऐसे समय में की है, जब उनके बयानों को लेकर सोशल मीडिया से लेकर विदेशों में भी विवाद खड़ा हो गया था और इस्लामिक देशों ने भारत को इसी मुद्दे पर घेरने की कोशिश की थी।
बता दें कि इस मुद्दे पर सोशल मीडिया से लेकर मीडिया में मचे बवाल के बाद बीजेपी ने अपने दोनों प्रवक्ताओं पर जहाँ एक्शन लिया था वहीं सोशल मीडिया पर तभी से नुपुर शर्मा को उनके सच बोलने की वजह से अपार जनसमर्थन भी मिल रहा है।
दरअसल, नूपुर शर्मा ने टाइम्स नाउ पर एक बहस के दौरान इस्लाम के संस्थापक पैगंबर मोहम्मद के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की थी जबकि जिंदल ने उनके बारे में ट्विटर कर एक आपत्तिजनक पोस्ट किया था, हालाँकि जिसे उन्होंने बाद में डिलीट भी कर दिया था।
वहीं नुपुर शर्मा की क्लिप ऑल्ट न्यूज़ के मोहम्मद जुबैर ने वायरल कर दिया था लेकिन यह बात छिपा ली थी कि वह किस बात पपर प्रतिक्रिया दे रहीं थी। वहीं इन दोनों के वीडियो और ट्वीट की आलोचना करने के लिए पूरी मुस्लिम उम्माह और वामपंथी समूह उतर आया था। इन दोनों की टिप्पणियों पर कई मुस्लिम समूहों ने आपत्ति जताई थी और इसके खिलाफ वे हिंसक विरोध प्रदर्शन तक भी उतर गए। कानपुर मामले में अभी एक्शन जारी है।
भारतवर्ष में एक से बढ़ कर एक योद्धा हुए हैं, जिनमें से अधिकतर के बारे में हमारे पाठ्य पुस्तकों में कुछ नहीं मिलता। योद्धा और संत बंदा सिंह बहादुर उनमें से ही एक हैं, जिनकी कहानी में न सिर्फ सिख खालसा की वीरता, बल्कि मुगलों की क्रूरता की भी दास्ताँ है। 15 वर्ष की उम्र में ही संन्यास ग्रहण करने वाले ‘लक्ष्मण दास’ ने लगभग दो दशक ‘माधव सिंह बैरागी’ के रूप में बिताया। गोदावरी नदी के किनारे स्थित नांदेड़ में उन्होंने अपना आश्रम स्थापित किया था।
बैरागी बन गए थे बंदा सिंह बहादुर, गुरु गोविंद सिंह ने दी खालसा की कमान
सन् 1670 के अक्टूबर में जन्मे बंदा सिंह बहादुर को ये नाम खालसा में शामिल होने के बाद मिला। हालाँकि, गुरु गोविंद सिंह ने उनका नाम ‘गुरबख्श सिंह’ रखा था। सन् 1708 में गुरु गोविंद सिंह ने बंदा सिंह बहादुर के आश्रम जाकर उनसे मुलाकात की थी, जिसके बाद बंदा सिंह बहादुर उनके शिष्य बन गए। खालसा में आते-आते ही बंदा सिंह बहादुर ने पंजाब के पटियाला में स्थित मुगलों की प्रांतीय राजधानी समाना पर नियंत्रण स्थापित कर इस्लामी आक्रांताओं में हड़कंप मचा दिया।
बंदा सिंह बहादुर के जीवन के बारे में हम बात करेंगे, लेकिन मुग़ल बादशाह फर्रुख सियर के राज में किस तरह उनकी हत्या की गई और सिखों का भयंकर कत्लेआम हुआ, उसके बारे में विस्तृत चर्चा आवश्यक है। बंदा सिंह बहादुर को जब मुगलों ने पकड़ लिया, तब उन्हें बाँध कर दिल्ली लाया गया। गुरदास नांगल के युद्ध में उन्होंने मुगलों से लोहा लिया था। लेकिन, उनके चमत्कार और पराक्रम के बारे में मुगलों ने इतना सुन रखा था कि उन्हें डर था कि कहीं रास्ते में वो भाग न जाएँ।
युद्धबंदियों के साथ मुगलों ने किया था कुछ ऐसा सलूक
एक मुगल अधिकारी ने तो यहाँ तक कहा कि वो खुद को उनके साथ ही रास्ते भर बाँध कर जाना चाहता है, ताकि जैसे ही वो भागें वो उनके शरीर में खंजर घुसा सके। उनके पाँव में बेड़ियाँ लगी हुई थीं। उनके गले में एक रिंग फँसाया गया था, उनके हाथ जंजीरों से बाँध दिए गए थे और उन्हें एक लोहे के पिंजरे में डाल दिया गया था। लोहे के पिंजरे से उन्हें 4 जगह बाँधा गया था। हाथी पर वो पिंजरा रखा हुआ था और उनके दोनों तरफ दो मुग़ल फौजियों को उनके साथ ही बाँधा गया था।
उनके साथ-साथ गाजे-बाजे के साथ एक मुग़ल दल चल रहा था। साथ ही फौजियों ने अपने-अपने भाले पर मृत सिखों के कटे हुए सिर लटका रखे थे, जिन्हें वो प्रदर्शित करते हुए चल रहे थे। सबसे पीछे मुगलों के अमीर, फौजदार और अन्य राजा लोग चल रहे थे। 780 अधमरे सिख बंदियों, 2000 कटे हुए सिर और 700 मालगाड़ियों में भरे हुए सिखों के कटे हुए सिर लेकर अब्दुल अस समद खान लाहौर की शाही सड़क में घुसा। इस जुलूस को देखने के लिए सड़क के दोनों तरफ एक बड़ी भीड़ थी।
अधिकतर कटे हुए सिरों से खून टपक रहे थे। उसने अपने बेटे ज़करिया खान और अमिन खान के बेटे कमरुद्दीन खान के साथ उन बंदियों को दिल्ली भेजा, क्योंकि उसे मुग़ल बादशाह की तरफ से वहीं रहने का आदेश आया था। ज़करिया खान को लगा था कि 200 युद्धबंदी बादशाह के सामने छोटी संख्या है, इसीलिए उसने पूरे पंजाब में सिखों के ‘शिकार’ का आदेश जारी किया। निर्दोष सिखों को पकड़-पकड़ कर लाया जाता और उनका सिर कलम कर दिया जाता।
इस तरह सिखों के कलम किए हुए सिरों से 700 मालगाड़ियों को भर दिया गया। सरहिंद में बंदा सिंह बहादुर और इन युद्धबंदियों को घुमाया गया, जहाँ सड़क के दोनों किनारे खड़े होकर मुस्लिम भीड़ उन्हें गंदी-गंदी गालियाँ दे रही थीं। जबकि सिख बंदी इस दौरान गुरु ग्रन्थ साहिब की पंक्तियाँ पढ़ रहे थे। जिस तरह मराठा सम्राट संभाजी का अपमान किया गया था, ठीक उसी तरह चीजें यहाँ भी हुईं। दिल्ली में बादशाह के सामने मुग़ल सरदारों ने अपनी क्रूरता की मिसाल पेश कर वाहवाही लूटी।
सबसे पहले बादशाह फर्रुख सियर के सामने 2000 सिखों के कटे हुए सिर बाँसों पर लटका कर पेश किए गए। उन सिखों के लंबे-लंबे बाल हवा से लहरा रहे थे। उसके बाद एक मरी हुई बिल्ली को पेश कर के बादशाह को बताया गया कि गुरदास नांगल के आसपास रहने वाले चौपाये जानवरों तक को नहीं बख्शा गया है। फिर बंदा सिंह बहादुर को पेश किया गया, जिन्हें जानबूझ कर मजाक बनाने के लिए सोने से जड़ी पगड़ी पहनाई गई थी।
इसके पीछे कई ऊँटों पर बाँध कर लाए गए सिख बंदियों को पेश किया गया। प्रमुख सिखों को भेड़ की खाल पहनाई गई थी, ताकि वो भालू की तरह लगें। सिख बंदियों के हाथ एक लकड़ी के साथ ठोक दिए गए थे। इस दौरान मुस्लिम भीड़ लगातार उन पर हँस रही थी। उन्होंने इसे ‘तमाशा’ नाम दिया था। मिर्जा मुहम्मद हैरसी नाम के एक व्यक्ति ने लिखा है कि कैसे मुस्लिम भीड़ ख़ुशी से नाच-गा रही थी। उसने लिखा है कि फिर भी सिख खुश थे और प्रार्थना कर रहे थे, कह रहे थे कि ये सब सर्वशक्तिमान ईश्वर ने ही लिखा है।
सिखों ने जवाब दिया कि भूख-प्यास और रसद न मिलने के कारण उनका ये हाल हुआ, वरना इससे पहले इतने युद्धों में उनकी क्षमताओं को लोग देख ही चुके हैं। बंदा सिंह बहादुर की पत्नी और उनके 4 साल के बेटे अजय सिंह के अलावा बच्चे की देखभाल करने वाली महिला को भी हरम में भेजा गया। लगभग 694 सिखों को हत्या के लिए सरबराह खान कोतवाल को सौंप दिया गया। मुग़ल सरदारों को उनकी कायरता का जम कर बादशाह ने इनाम दिया।
सिखों के पास संसाधन नहीं थे, ऐसे में मुगलों को आश्चर्य हो रहा था कि कैसे उन्होंने इतनी बड़ी इस्लामी फ़ौज से लगातार टक्कर लिया। 5 मार्च, 1716 को दिल्ली में सिखों का कत्लेआम शुरू हुआ। हर दिन 100 सिखों को पकड़ कर लाया जाता और उनका सिर कलम कर दिया जाता। कत्लगाह में जल्लाद अपनी तलवारों की धार तेज़ कर के रखते, सिखों को इस्लाम अपना कर मुस्लिम बनने को कहा जाता, लेकिन एक ने भी गुरु की राह से अलग जाना स्वीकार नहीं किया।
एक सप्ताह तक ये कत्लेआम चलता रहा। इसके गवाह रहे लोगों ने लिखा है कि सिख बलिदान देने के लिए एक-दूसरे से आगे जाने की होड़ में रहते थे और अंत समय तक उनके चेहरे पर उनकी मजबूती झलकती थी। सिर काट-काट कर उनके शरीरों को फेंक कर एक ढेर बनाया जाता और रात को उनकी सिर कटी हुई लाशों को पेड़ से टाँग दिया जाता था। इस दौरान एक विधवा की भी कहानी आती है, जिसका बेटा बंदियों में शामिल था।
उस युवक की अभी-अभी शादी हुई थी और हाथ के कंगन तक नहीं उतरे थे। माँ ने किसी तरह झूठ बोल कर बादशाह फर्रुख सियर से उसे छुड़ाने का आदेश ले लिया। उन्होंने कहा कि उनका बेटा गुरु का अनुयायी नहीं है और सिखों का बंदी था। लेकिन, बेटे ने इस आदेश के बावजूद अपनी माँ पर झूठ बोलने का आरोप लगाया और गुरु से धोखे की जगह बलिदान को चुना। उसने जल्लाद के सामने अपना सिर झुकाया और एक झटके में सिर कलम हो गया।
बंदा सिंह बहादुर के 4 साल के बेटे का दिल निकाल कर उनके मुँह में ठूँस दिया गया
इस दौरान 3 महीने तक बंदा सिंह बहादुर को प्रताड़ित किया जाता रहा। बंदा सिंह बहादुर और उनके साथियों को हत्या वाले दिन किले से बाहर लाया गया। इसके बाद सिख बंदियों को बहादुर शाह I की कब्र के साथ परेड कराया गया। बंदा सिंह बहादुर को अन्य कैदियों की तरह इस्लाम और मौत में से कोई एक चुनने को कहा गया, लेकिन गुरु गोविंद सिंह के चुने हुए सिपाही ने मृत्यु को चुना। इसके बाद जो हुआ, वो शरीर और आत्मा को कँपाने वाला है।
बंदा सिंह बहादुर के 4 साल के बेटे अजय सिंह को उनकी गोद में डाल दिया गया और उसकी हत्या करने को कहा गया, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। इसके बाद उनके सामने ही उनके 4 साल के बेटे को चाकू से टुकड़े टुकड़े में काटा गया और उसका दिल निकाल कर पिता बंदा सिंह बहादुर के मुँह में ठूँस दिया गया। वो स्थिर रहे, एक मूर्ति की तरह – इसे ईश्वर की इच्छा मान कर। फिर कसाई वाले चाकू से बंदा सिंह बहादुर की दाईं आँख को निकाल लिया गया, उसके बाद बाईं आँख काट कर बाहर कर दी गई।
फिर उनके दाएँ पैर को काट कर अलग कर दिया गया। उसके बाद उनके दोनों हाथों को काट कर उनके शरीर से अलग कर दिया गया। फिर उनके शरीर से मांस निकाले जाने लगे। उसके बाद उन्हें टुकड़ों में काटा जाने लगा। लेकिन, वो टस से मस नहीं हुए और अपना बलिदान दे दिया, पर इस्लाम नहीं अपनाया। उनके बाकी साथियों का भी यही हाल किया गया। औरंगजेब की क्रूरता सबने सुनी है, लेकिन बाकी मुगलो के अत्याचार उससे कम नहीं थे, उलटा हर एक इस्लामी शासक ने क्रूरता की पिछली सारी हदें पार की।
पैगंबर मुहम्मद पर पूर्व भाजपा प्रवक्ता की विवादित टिप्पणी से मुस्लिम उम्माह जहाँ भड़का हुआ है वहीं वे इसे भारत को बड़े पैमाने पर लगे अंतरराष्ट्रीय झटके के रूप में भी देख रहे हैं। अब इस मामले में विवादित अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने भी टिप्पणी की है। उन्होंने NDTV से आज बात करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कदम उठाना चाहिए और इस जहर को रोकना चाहिए।
नसीरुद्दीन शाह ने धर्म संसद वाले विवाद पर एनडीटीवी से इंटरव्यू में कहा, “मैं पीएम से इन लोगों में कुछ अच्छी समझ डालने की अपील करूँगा। अगर उनका मानना है कि (हरिद्वार) धर्म संसद में जो कहा गया है, वह सही है तो उन्हें ऐसा कहना चाहिए और यदि नहीं, तो उन्हें इस पर भी अपनी बात रखनी चाहिए।”
वहीं उन्होंने आगे यह भी कहा, “मैं चाहता हूँ कि पीएम ट्विटर पर जिन नफरत फैलाने वालों को फॉलो करते हैं… उन्हें कुछ करना होगा। जहर को बढ़ने से रोकने के लिए उन्हें कदम उठाने की जरूरत है।”
बता दें कि बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा को हाल ही में निलंबित कर दिया गया था। करीब 10 दिन पहले टाइम्स नाउ के एक टीवी डिबेट शो के दौरान पैगंबर मुहम्मद पर उनकी टिप्पणियों के बाद सड़क से लेकर, सोशल मीडिया और मीडिया में मचे बवाल के बीच उन पर यह कार्रवाई की गई। वहीं इसी की प्रतिक्रिया में ईरान, इराक, कुवैत, कतर, सऊदी सहित कम से कम 15 देशों ने भी अपना आधिकारिक विरोध दर्ज कराया था।
वहीं जब बात नूपुर शर्मा को जान से मारने की धमकी मिलने की आई तो नसीरुद्दीन शाह ने कहा कि इसकी निंदा की जानी चाहिए। बता दें कि इस मामले में एक अन्य भाजपा नेता, नवीन जिंदल को पैगंबर मुहम्मद पर सोशल मीडिया पर उनके पोस्ट के लिए निष्कासित कर दिया गया था। वहीं नूपुर शर्मा ने कई बार यह बताया था कि उन्होंने भगवान शिव पर की जा रही ख़राब टिप्पणियों से आहत होकर पैगम्बर पर हदीसों में लिखा सच कहा।
जब इस मामले में NDTV ने नसीर से पूछा कि सरकार का कहना है कि ये टिप्पणियाँ सरकार का बयान नहीं बल्कि फ्रिंज एलिमेंट्स के विचार हैं।
तब नसीरुद्दीन शाह ने कहा, “वो महिला कोई मामूली तत्व नहीं है। वह एक राष्ट्रीय प्रवक्ता है।”
अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने हिंदू देवताओं के अपमान पर नूपुर शर्मा की टिप्पणी का जिक्र करते हुए कहा, “उन्हें ऐसा कोई उदाहरण याद नहीं है जब किसी मुस्लिम ने हिंदू देवता पर इस तरह का भड़काऊ बयान दिया हो।”
उन्होंने आगे जॉर्ज ऑरवेल के 1984 के संदर्भ का सहारा लेते हुए यह भी कहा, “यह एक कपटपूर्ण माफी थी, शायद ही आहत भावनाओं को शांत करने के लिए थी। आप शांति और एकता की बात करते हैं और आपको एक साल के लिए जेल भेज दिया जाता है। आप नरसंहार की बात करते हैं, आपको कलाई पर एक थप्पड़ मिलता है। यहाँ दोहरे मापदंड काम कर रहे हैं।”
वहीं नूपुर शर्मा को जान से मारने की धमकी मिलने पर उन्होंने दोहराया कि इसकी निंदा की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा, “ऐसा सोचना भी गलत है। इसलिए पाकिस्तान और अफगानिस्तान जिस स्थिति में हैं, उसमें वे हैं। हम इन देशों का अनुकरण नहीं करना चाहते हैं, लेकिन हम किसी तरह ऐसा कर रहे हैं। गाय को मारने के संदेह में लोग मारे जाते हैं। ये चीजें बर्बर इस्लामिक देशों में हुईं लेकिन भारत में नहीं।”
अभिनेता ने अभद्र भाषा के लिए समाचार चैनलों को भी दोषी ठहराया। उन्होंने कहा, “नफरत पैदा की जाती है और यह एक जहर है जो तब उगलता है जब आप एक विरोधी दृष्टिकोण का सामना करते हैं। इसके लिए टीवी समाचार और सोशल मीडिया जिम्मेदार हैं।”
यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें लगता है कि बॉलीवुड के खानों को मौजूदा विवाद पर बोलना चाहिए था, शाह ने कहा, “मैं उस स्थिति में नहीं हूँ जिसमें वे हैं। लेकिन मुझे लगता है कि वे ऐसी स्थिति में हैं जहाँ उनके पास खोने के लिए बहुत कुछ है। मुझे लगता है कि उन्हें लगता है कि वे बहुत अधिक जोखिम उठा रहे होंगे।” वहीं सोनू सूद पर बात करते हुए कहा मुझ पर भी रेड पड़ सकती है।
वहीं अंत में जब पपूछा गया कि शाह क्या आप एक मुस्लिम के रूप में खुद को हासिए पर महसूस करते हैं। तब शाह ने कहा कि सब कुछ के बावजूद, मैंने खुद को हाशिए पर महसूस नहीं किया। उन्होंने इस पर एक लम्बी टिप्पणी में कहा-
“मैं भारत में बहुसंख्यक मुसलमानों की तुलना में भाग्यशाली हूँ जो खतरा या हाशिए पर महसूस करते हैं। मैं खुद को हाशिए पर महसूस नहीं करता। मैं इस देश में दुखी नहीं हूँ। यह वह देश है जिसमें मेरा पालन-पोषण हुआ और मैं भाग्यशाली हूँ। एक ऐसी स्थिति जहाँ मुझे हाशिए पर नहीं रखा जा सकता। ऐसा नहीं है कि मेरे सत्ता विरोधी बयानों ने मुझे काम करने से रोका है। मुझे बस उम्मीद है कि किसी तरह अच्छी समझ बनी रहे। व्यक्तिगत रूप से, मैं खुद को अलग नहीं महसूस करता। मुझे अपने बारे में पता है कि मेरी मुस्लिम पहचान और मेरी मुस्लिम संस्कृति है। मेरी पत्नी एक हिंदू है और हम ऐसा कहने से पीछे नहीं हटते। यह नफरत की लहर खत्म हो जाएगी। किसी दिन।”
राजस्थान के नागौर (Nagaur, Rajasthan) में लव जिहाद के एक मामले को लेकर बवाल हो गया है। कई हिंदू संगठनों ने इसको लेकर प्रशासन को चेतावनी दी है और कहा है कि लव जिहाद के आरोपित को नहीं पकड़ा गया तो इससे सांप्रदायिक माहौल बिगड़ सकता है।
मामला जिले रियांबड़ी कस्बे का है। आरोप है कि यहाँ एक मुस्लिम अधेड़ एक हिंदू युवती को भगा ले गया है। युवती शादीशुदा है और उसे भगाने वाला 40 साल का अधेड़ व्यक्ति है। मुस्लिम व्यक्ति पर युवती को बहला-फुसलाकर भगाने का आरोप लगा है।
इस मामले को एक दिन पहले जिले के पादूकलां थाने में एक युवक ने मामला दर्ज कराया था। अपनी शिकायत में युवती ने कहा कि उसकी बहन की उम्र 19 साल है और वह शादीशुदा है। वहीं, रियांबड़ी का रहने वाला अलाउद्दीन कुरैशी 40 साल का है और वह उसकी बहन को बहलाकर उठा ले गया है।
युवक ने अपनी शिकायत में भी कहा कि उलाउद्दीन कुरैशी पुत्र जिकरू कुरैशी उसकी बहन को भगा ले जाने के लिए उसके घर आया था। इस दौरान उसने घर में रखे सोने-चाँदी के जेवरात भी अपने साथ उठा ले गया।
पुलिस का कहना है कि इस मामले के आरोपित और युवती को पकड़ने के लिए कई टीमें गठित की गई हैं। ये टीमें आरोपित अलाउद्दीन और युवती की तलाश कर रही हैं। फिलहाल पुलिस को दोनों के बारे में अभी तक कोई सुराग नहीं मिला है। पुलिस का कहना है कि दोनों को जल्द ही पकड़ लिया जाएगा।
वहीं, पुलिस की कार्यप्रणाली को देखते हुए कई संगठनों से जुड़े लोगों ने SDM से मुलाकात की और एक ज्ञापन दिया। इसमें उन्होंने कहा कि इस घटना को लेकर इलाके में तनाव बढ़ रहा है और सांप्रदायिक माहौल कभी भी बिगड़ सकता है।
संगठन के लोगों ने SDM से आग्रह किया कि आरोपित अलाउद्दीन को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए और युवती को बरामद की जाए, ताकि रियांबड़ी क्षेत्र के माहौल को बिगड़ने से बचाया जा सके।
मेरठ में नाम बदलकर रेप
उधर यूपी के मेरठ (Meerut) में एक हिंदू युवती का यौन शोषण करने और फिर अश्लील वीडियो बनाकर धर्म परिवर्तन (Religion Change) का दबाव देने का मामला सामने आया है। पुलिस को दी गई शिकायत में पीड़िता ने बताया कि सुहेल ने अपना नाम सौरभ बताकर उससे दोस्ती की थी। इसके बाद दोनों के बीच कथित प्यार परवान चढ़ा।
युवती का आरोप है कि सुहेल ने 4 दिनों तक अपने चाचा के यहाँ रखकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए और अश्लील वीडियो भी बनाया। इसी दौरान पता चला कि वह सौरभ नहीं सुहेल है। इसके बाद वह सुहेल के घर पहुँची तो वहाँ सुहेल और उसके परिजनों ने उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाना शुरू कर दिया। इसके बाद पीड़िता ने बजरंग दल से संपर्क किया।
एसपी सिटी राजेश कुमार ने बताया मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मुकदमा दर्ज होने के बाद आरोपी सुहैल फरार हो गया है। सुहैल की तलाश की जा रही है। जल्द ही सुहैल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया जाएगा।@Uppolice#saharanpurpic.twitter.com/gdo0POF0wu
SP सिटी राजेश कुमार सिंह का कहना है कि सोहेल के बारे में जानकारी मिली है कि वह राजस्थान का रहने वाला है। उसने अपने घर वालों को इस काम में लगा रखा था कि वे निकाह के लिए युवती को धर्म परिवर्तन करने के लिए तैयार करें। आरोपी सुहेल शाह को देहरादून भागने का प्रयास के दौरान माहेश्वरी अड्डा बेहट रोड से गिरफ्तार कर लिया गया है।
ज्ञानवापी विवादित ढाँचे के सर्वे का आदेश देने वाले सिविल जज रवि दिवाकर को जान से मारने की धमकी भरे पत्र से पहले भी एक धमकी भरा इंटरनेशनल कॉल आया था। ये कॉल 29 मई को आया था और मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पूरे मामले की जाँच गोपनीय तरीके से की जा रही थी वहीं अब पत्र मिलने से पूरे मामले से पर्दा हटा है। वहीं ज्ञानवापी से ही जुड़े दूसरे मामले में ‘शिवलिंग’ की पूजा के अधिकार की माँग वाली स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की याचिका को कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया है।
बता दें कि इस धमकी भरे प्रकरण बारें में पत्र मिलने के बाद जज रवि दिवाकर ने अपर मुख्य सचिव गृह को धमकी भरी चिट्ठी और अनजान कॉल के बारे में जानकारी दी थी। वहीं सिविल जज सीनियर डिवीजन रवि कुमार दिवाकर को धमकियाँ मिलने के बाद उनकी सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
दरअसल, जज रवि दिवाकर ने वाराणसी में ज्ञानवापी विवादित ढाँचे में एडवोकेट कमिश्नर की कार्यवाही का आदेश दिया था। वहीं अपने फैसले के बाद उन्होंने खुद को इस प्रकरण को लेकर परिवार में चिंता की बात भी पहले ही कही थी। जज रवि दिवाकर को इस्लामिक आजाद मूवमेंट नामक संस्था की ओर से धमकी भरा पत्र मंगलवार को दिन में मिला था जिसकी जानकारी उन्होंने शाम को गृह सचिव को दी थी।
मामले में कमिश्नर ए सतीश गणेश ने कहा कि मंगलवार (7 जून, 2022) को दिन में जज रवि दिवाकर को धमकी भरा एक पत्र रजिस्टर्ड पोस्ट से मिला है, जिसमें कुछ और भी कागज संलग्न हैं। मामले की जाँच डीसीपी वरुणा को सौंपी गई है। हालाँकि इसकी जानकारी उन्होंने बाद में पुलिस को दी।
वहीं धमकी भरे पत्र में लिखा गया है, “अब न्यायाधीश भी भगवा रंग में सराबोर हो चुके हैं। फैसला उग्रवादी हिंदुओं और उनसे जुड़े संगठनों को प्रसन्न करने के लिए सुनाते हैं। इसके बाद ठीकरा विभाजित भारत के मुसलमानों पर फोड़ते हैं। आप न्यायिक कार्य कर रहे हैं। आपको सरकारी मशीनरी मिली है, फिर आपकी पत्नी व माँ को डर कैसा है? आजकल न्यायिक अधिकारी हवा का रूख देखकर चालबाजी दिखा रहे हैं। आपने वक्तव्य दिया था कि ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का निरीक्षण एक सामान्य प्रक्रिया है। आप भी तो मूर्तिपूजक हैं। आप मस्जिद को मंदिर घोषित कर देंगे। कोई भी काफिर मूर्तिपूजक हिंदू न्यायाधीश से मुसलमान सही फैसले की उम्मीद नहीं कर सकता।”
ज्ञानवापी मंदिर की सुनवाई कर रहे जज को इस्लामिक आतंकियों की ओर से मिली धमकी। काफिर मूर्तिपूजक हो अतः तुम बिना सुरक्षा के सुरक्षित नहीं रहोगे…. pic.twitter.com/Wim8RdpJwL
बता दें कि प्रशासन ने इन धमकियों को गंभीरता से लिया है। इन धमकियों के बाद वाराणसी पुलिस ने सिविल जज के साथ ही जिला जज एके विश्वेशा की सुरक्षा भी बढ़ा दी है। पुलिस के मुताबिक, सिविल जज रवि कुमार दिवाकर की सुरक्षा में नौ पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे। वहीं, वाराणसी जिला जज की सुरक्षा का जिम्मा 10 पुलिसकर्मियों को दिया गया है। दोनों जजों की सुरक्षा बढ़ाने का आदेश वाराणसी के पुलिस कमिश्नर ए सतीश गणेश ने दिया है।
गौरतलब है कि एक दूसरे मामले में ज्ञानवापी विवादित ढाँचे के वजूखाने में मिले ‘शिवलिंग’ के पूजन और जलाभिषेक को लेकर अड़े स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को कोर्ट ने बड़ा झटका दिया है। वाराणसी जिला कोर्ट ने अविमुक्तेश्वरानंद की कथित शिवलिंग के पूजन के अधिकारकी माँग वाली याचिका को खारिज कर दिया।
बता दें कि याचिका खारिज करने का आदेश जिला जज ने दिया है। वहीं अविमुक्तेश्वरानंद पिछले पाँच दिनों से पूजा करने को लेकर अनशन पर बैठे थे और उन्होंने आज बुधवार (8 जून, 2022) को ही अपना अनशन खत्म किया था। इससे पहले मंगलवार को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने ऐलान किया था कि वे अब धर्म सेना का गठन करेंगे। साथ ही उन्होंने जिलाधिकारी पर आरोप लगाते हुए कहा था कि वे सुप्रीम कोर्ट की अवमानना कर रहे हैं, इसके साथ ही उन्होंने जिलाधिकारी पर भी मामला दर्ज करवाने की बात भी कही थी।
बिहार में NRC लागू करने से मना करने वाले प्रदेश के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने धर्मांतरण विरोधी कानून लाने से भी अब मना कर दिया है। मुख्यमंत्री नीतीश ने कहा कि राज्य में सभी समुदाय एकता और भाईचारा से जी रहे हैं, इसलिए इस कानून की जरूरत नहीं है।
बता दें कि भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने बिहार प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में धर्मांतरण विरोधी कानून की जरूरत बताते हुए इसे बनाने की सरकार से माँग की थी। इसके अलावा, भारत जनता पार्टी के कई नेता भी इसकी लगातार माँग करते रहे हैं। हालाँकि, सीएम नीतीश कुमार ने इस संभावना से इनकार कर दिया।
पत्रकारों के सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि बिहार में सरकार अलर्ट है। यहाँ सभी धर्म के लोग शांति से रह रहे हैं। इसलिए धर्मांतरण विरोधी कानून की कोई जरूरत नहीं है। हिंदुओं के धर्मांतरण के सवाल पर मुख्यमंत्री नीतीश ने कहा कि इसको लेकर सरकार पूरी तरह अलर्ट है।
बता दें कि बिहार में भाजपा और नीतीश कुमार की पार्टी जदयू (JDU) के बीच गठबंधन है और भाजपा के सहयोग से वह बिहार में मुख्यमंत्री है। केंद्र में मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा था कि यूपी, हरियाणा की तरह बिहार में भी धर्मांतरण विरोधी कड़ा कानून बनना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने अल्पसंख्यक शब्द खत्म करने की माँग भी की थी।
इसके पहले बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों और रोहिंग्या मुस्लिमों की पहचान के लिए NRC लागू करने से भी स्पष्ट रूप से मना कर दिया था। वहीं, बिहार में जातिगत गणना के निर्णय को लेकर भाजपा ने स्पष्ट कर दिया है कि इनमें अवैध घुसपैठियों की गिनती नहीं होनी चाहिए।
केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की सरकार में सड़क परिवहन एवं उच्च राजपथ मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने नेतृत्व में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने एक नया कीर्तिमान बनाया है। NHAI ने मंगलवार (7 जून 2022) को पाँच दिन से भी कम समय में NH-53 राजमार्ग पर एक लेन की 75 किलोमीटर सड़क बिटुमिनस कंक्रीट से बनाया है। जिसके लिए इसका नाम ‘गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में दर्ज किया गया है।
केंद्रीय मंत्री ने इसको लेकर एक ट्वीट किया है। इस ट्वीट में उन्होंने एक वीडियो शेयर किया है। वीडियो में सड़कों के निर्माण के दौरान की गतिविधियों और उसके बाद कर्मचारियों की खुशियों एवं गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड की उपलब्धियों को दर्शाया गया है।
इसके साथ ही उन्होंने एक ट्वीट भी किया है, जिसमें सड़कों की तस्वीरें और सर्टिफिकेट की कॉपी है। उन्होंने ट्वीट में लिखा, “भारत को समृद्धि से जोड़ना! प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में #AzadiKaAmrutMahotsav के साथ अपने देश की समृद्ध विरासत का जश्न मनाते हुए।”
NH-53 राजमार्ग कोलकाता, रायपुर, नागपुर, अकोला, धुले और सुरत को आपस में जोड़ता है। इस राजपथ के अमरावती और अकोला सेक्शन के बीच इंजीनियरों ने पाँच दिन से भी कम समय में एक लेन का 75 किलोमीटर लंबा बिटुमिन कंक्रीट का सड़क बिछाकर यह कीर्तिमान स्थापित किया है।
इस रोड सेक्शन का निर्माण निजी ठेकेदार ‘राजपूत इंफ्राकॉन’ द्वारा किया गया है। इस खंड के निर्माण कार्य में लगभग 800 कर्मचारी और 700 मजदूर लगे हुए थे। अमरावती-अकोला राजमार्ग सेक्शन का निर्माण शनिवार (4 जून 2022) को सुबह छह बजे शुरू हुआ और मंगलवार (7 जून 2022) को पूरा हो गया।
NH-53 राजमार्ग भारत के खनिज संपदा से समृद्ध कई क्षेत्रों से होकर गुजरता है। बता दें कि ‘राजपूत इंफ्राकॉन’ ने पहली बार रिकॉर्ड नहीं बनाया है। इससे पहले इस निजी कंपनी ने 24 घंटे में सांगली और सतारा के बीच सड़क बनाकर विश्व रिकॉर्ड बनाया था।
बता दें कि इससे पहले यह रिकॉर्ड कतर के नाम था। कतर के लोक निर्माण प्राधिकरण ASHGHAL (कतर) ने पहले 27 फरवरी 2019 को ने 10 दिनों में यह रिकॉर्ड बनाया था। कतर के अल-खोर एक्सप्रेसवे पर इतने ही लंबे कार्य को 10 दिनों में पूरा किया गया था।
कर्नाटक में कक्षाओं में हिजाब पहनने को लेकर चल रहे विवाद अभी थमने का नाम नहीं ले रहा है। वहीं अब सोशल मीडिया इंस्टाग्राम पर भाजपा नेता यशपाल सुवर्णा और श्रीराम सेना के प्रमुख प्रमोद मुतालिक का सिर कलम करने की धमकी दी गई है। इस मामले को लेकर उडिपी में शिकायत दर्ज कराई गई है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा नेता यशपाल सुवर्णा, जो कॉलेज प्रशासन के सदस्य भी हैं, ने कहा, “सार्वजनिक जीवन में सोशल मीडिया के माध्यम से इस तरह के संदेश और धमकी भरे कॉल आना बहुत आम है। जब हम राष्ट्र के लिए काम करते हैं, तो देश विरोधी संगठन या विदेश में बैठे देशद्रोही इस तरह की धमकी देते रहते हैं। मैं इसे गंभीरता से नहीं लूँगा। यह जीवन का एक हिस्सा है। हम संविधान के दायरे में रहकर अपना काम कर रहे हैं। मेरे और प्रमोद मुतालिक के बारे में एक इंस्टाग्राम पोस्ट से कोई फर्क नहीं पड़ता। हम अपने कदम पीछे नहीं हटाएँगे।”
उन्होंने कहा, “मैं इंस्टाग्राम पोस्ट को लेकर परेशान नहीं हूँ, हालाँकि, मैं जानना चाहता हूँ कि इस मुद्दे के पीछे स्थानीय लोग कौन हैं। हम इसका पता लगा लेंगे।”
गौरतलब है कि कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले के एक कॉलेज में पढ़ने वाली 23 छात्राओं को हिजाब पहनने के कारण कक्षाओं में जाने से 7 दिनों की अवधि के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है। पुत्तूर तालुक में उप्पिनंगडी डिग्री कॉलेज के अधिकारियों के छात्राओं द्वारा हिजाब उतारने के बिना कक्षाओं में भाग लेने से इनकार करने के बाद यह निर्णय लिया गया।
रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार (7 जून, 2022) की घटना ऐसे समय में आई है जब कर्नाटक सरकार ने स्कूलों और कॉलेजों के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिसमें कक्षाओं में हिजाब पहनने के लिए कोई जगह दिए बिना छात्राओं के लिए ड्रेस कोड अनिवार्य कर दी गई है।
वहीं हिजाब पहनने की अनुमति नहीं दिए जाने का विरोध करने की कोशिश करने के बाद छात्राओं को नोटिस जारी किया गया था। नोटिस में कहा गया है कि छात्राओं को नोटिस मिलने के तीन दिनों के भीतर जवाब देना होगा। इसमें यह भी उल्लेख है कि छात्राओं ने बाहरी तत्वों से मिलकर कर्नाटक उच्च न्यायालय के आदेश का उल्लंघन किया है।
बता दें कि उडुपी प्री-यूनिवर्सिटी गर्ल्स कॉलेज की 6 छात्राओं के विरोध के रूप में शुरू हुआ हिजाब विवाद पिछले एक साल में कर्नाटक में एक बड़ी समस्या बन गया है। जबकि कर्नाटक उच्च न्यायालय ने इस साल मार्च में फैसला दिया था कि हिजाब इस्लाम का अनिवार्य धार्मिक हिस्सा नहीं है। बावजूद इसके ये मुस्लिम छात्राएँ कक्षा में हिजाब पहनने की अनुमति देने पर जोर दे रही हैं।