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सेक्स से पहले लड़की का ‘हाँ’ कहना जरूरी, चुप रही-विरोध नहीं किया तो भी माना जाएगा रेप: स्पेन के नए कानून के बारे में जानिए

स्पेन में ​एक दिल दहला देने वाली घटना के करीब 6 साल बाद दुष्कर्म के खिलाफ बेहद सख्त कानून लाया गया है। स्पेन की सरकार ने महिला अधिकारों को लेकर लंबे समय से हो रहे विरोध प्रदर्शन को देखते हुए यह अहम कदम उठाया गया है। हाल ही में (26 मई 2022) संसद के निचले सदन में यौन संबंधों को बलात्कार की श्रेणी में लाने के लिए स्पेन में एक बिल पारित किया गया। इस बिल के मुताबिक, स्पेन में रेप पीड़िता को ये साबित करने की जरूरत नहीं होगी कि उसका दुष्कर्म हुआ है। अगर उसने सेक्स के लिए स्पष्ट रूप से सहमति नहीं दी है, तो वो रेप माना जाएगा।

वहीं अगर वह इस दौरान चुप रही या फिर किसी वजह से विरोध नहीं कर पाई तो भी इसे उसकी सहमति नहीं माना जाएगा। इस बिल को ‘ओनली यस मीन्स यस’ कहा जा रहा है। निचले सदन से पास होने के बाद अब इसे स्पेन की सीनेट में पेश किया जाएगा। आइए जानते हैं क्या है यह कानून, क्या है इसकी अहमियत और इसे बनाने के पीछे वजह क्या रही है।

नहीं से ज्यादा हाँ को अहमियत

इस कानून में सेक्स के लिए नहीं से ज्यादा हाँ को अहमियत दी गई है। नए कानून को लेकर स्पेन के प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज ने संसद में कहा, “अगर वह नहीं कहती है, तो इसका मतलब है नहीं होगा और अगर वह हाँ नहीं कहती है तो भी इसका मतलब नहीं ही होगा।” यानी अगर कोई लड़की या महिला सेक्स के लिए साफ तौर पर ‘हाँ’ नहीं कहती है या फिर चुप रहती है तो इस स्थिति में उसके साथ बनाए गए संबंध को रेप माना जाएगा। वहीं अगर महिला या लड़की स्पष्ट तौर पर सेक्स के हाँ कहती है, तो यह किसी भी तरह से रेप नहीं माना जाएगा।

इस कानून को लाने के पीछे की वजह

स्पेन में इस कानून को लाने के पीछे एक दिल दहला देने वाली घटना है। 7 जुलाई 2016 को स्पेन का काला दिवस माना जाता है। करीब दो साल तक चले इस केस में कोर्ट के सामने दुष्कर्म का वीडियो भी पेश किया गया था। इसे देखने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया था। अदालत ने बुल फेस्टिवल के दौरान 18 साल की एक लड़की से गैंगरेप करने वाले सभी पाँच आरोपितों को दोषी नहीं माना और उन्हें केस से बरी कर दिया था। इसकी वजह बनी थी, रेप के दौरान लड़की की खामोशी और उसकी आँखे बंद होना। कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा था कि गैंगरेप के समय लड़की की आँखें बंद थीं और वो खामोश थी, ऐसे में सेक्स में उसकी सहमति नजर आ रही है। अदालत ने इन पाँचों को बलात्कार की बजाय उससे कम गंभीर समझे जाने वाले अपराध यौन उत्पीड़न के तहत दोषी पाया था। पैम्पेलोना में हजारों लोग गैंगरेप पर कोर्ट के फैसले को लेकर आगबबूला हो गए थे और विरोध प्रदर्शन करने सड़कों पर उतर आए थे।

उन दरिंदों ने दुष्कर्म का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर भी शेयर कर दिया था। इस घटना ने स्पेन की जनता को झकझोर कर रख दिया था। उस दौरान लड़की की चुप्पी के कारण गैंग रेप का यह मामला सेक्स के लिए सहमति और असह​मति के फेर में फँस गया था। इसके बाद स्पेन में महिला अधिकारों को लेकर एक नई बहस छिड़ गई थी। इसी घटना के आधार पर यह नया कानून बनाया गया है, ताकि कोई भी रेप का गुनहगार बरी ना होने पाए।

कानपुर में जुमे की नमाज के बाद हिंसा: नुपूर शर्मा के विरोध में मस्जिदों से ऐलान, पुलिस पर भी पत्थरबाजी

उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात में शुक्रवार (3 जून 2022) को जुमे की नमाज के बाद मुस्लिम कट्टरपंथियों ने जमकर पत्थरबाजी की। इसमें 6-7 हिन्दू बुरी तरह से घायल हुए हैं। कट्टरपंथी मुस्लिम दिल्ली बीजेपी की प्रवक्ता नूपुर शर्मा के पैगंबर मुहम्मद को लेकर दिए गए कथित बयान से नाराज हैं। पत्थरबाजी कर रहे मुस्लिमों को जब पुलिस ने रोका तो इन्होंने पुलिस पर भी जमकर पत्थर बरसाए।

रिपोर्ट के मुताबिक, घटना परेड चौराहे की है। हालात बिगड़ते देख भारी संख्या में पुलिस बलों को तैनात किया गया, हालाँकि, पत्थरबाजी जारी रही। इसके बाद उन्मादी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठियाँ भाँजी गई और टियर गैस के गोले दागे। बताया जाता है कि नूपुर शर्मा के बयान को लेकर जौहर फैंस एसोसिएशन और दूसरी मुस्लिम तंजीमों ने गुरुवार को ही बाजार बंद कराने का ऐलान कर दिया था। इसके बाद आज जुमे की नमाज के बाद कथित शांतिप्रिय समुदाय ने सड़क पर आकर उत्पात मचाना शुरू कर दिया।

सुबह से ही चमनगंज, मेस्टन रोड बाबू पुरवा, दलेल पुरवा, कर्नलगंज हीरामन पुरवा समेत कई इलाकों में पूर्ण या आँशिक बंदी थी। पुलिस ने मुस्लिमों को किसी भी तरह के प्रदर्शन की इजाजत नहीं दी थी, लेकिन जुमे की नमाज के दौरान विभिन्न मस्जिदों से एक संदेश दिया गया कि वो पैगंबर मुहम्मद पर किसी भी तरह की टिप्पणियों क बर्दाश्त नहीं करेंगे। वहीं नमाज के बाद कट्टरपंथी सड़क पर उतर आए।

बहरहाल कानपुर के पुलिस कमिश्नर का कहना है कि अब हालात सामान्य हो गए हैं। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ये मुस्लिम बाहुल्य इलाका है। हालात को कंट्रोल में करने के बाद अब पुलिस ये पता लगाने में जुट गई है कि पत्थरबाजी में कौन लोग शामिल थे।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और खुद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद आज कानपुर के दौरे पर हैं। इनके साथ ही सीएम योगी आदित्यनाथ भी हैं। अपने इस दौरे के दौरान पीएम मोदी राष्ट्रपति कोविंद के गाँव परौंख भी गए।

क्या है पूरा मामला

बीते दिनों फैक्ट चेक के नाम पर प्रोपेगेंडा फैलाने वाले ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर ने बीजेपी नेता का एक ट्विस्टेड स्पीच ट्वीट कर ट्रोल्स को उकसाया था। जिसके बाद इस्लामिक कट्टरपंथियों ने नूपुर शर्मा को गला काटने की भी धमकी दी थी। हालाँकि, ये मामला यहीं नहीं थमा, इस्लामिक कट्टरपंथियों ने बीजेपी प्रवक्ता की हत्या करने पर ईनाम रखने लगे। AIMIM (इंकलाब) ने भाजपा नेता नूपुर शर्मा की हत्या पर ₹1 Cr इनाम घोषित कर दिया।

नूपुर शर्मा पर तमाम तरह की हिंसक वारदातों में आरोपित रज़ा एकेडमी ने पहली FIR मुंबई में दर्ज करवाई थी। इसके बाद एक मदरसे के मौलवी ने दूसरा केस मुंबई के ही मुम्ब्रा थाने में दर्ज करवाया था। नूपुर पर तीसरी FIR हैदराबाद के साइबर क्राइम थाने में 31 मई 2022 दर्ज हुई थी। इसके बाद पुणे के कोंढवा थाने में भी उनके खिलाफ एक एफआईआर दर्ज कराई गई। इस्लामिक कट्टरपंथियों को भड़काने का काम मोहम्मद जुबैर ने किया था।

हैदराबाद में 17 साल की लड़की से मर्सिडीज में गैंगरेप: 5 में से 3 आरोपित नाबालिग, AIMIM विधायक के बेटे के शामिल होने से पुलिस का इनकार

तेलंगाना (Telangana) की राजधानी हैदराबाद (Hyderabad) में एक नाबालिग लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म करने के मामले में स्थानीय सांसद असदुद्दीन औवैसी (Asaduddin Owaisi) की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) और TRS नेता के बेटों का नाम सामने आया है। हालाँकि इस मामले में पुलिस AIMIM विधायक के बेटे के आरोपित होने से इनकार कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार शुरू में द न्यूज मिनट के अनुसार, तेलंगाना भाजपा (BJP) ने आरोप लगाया है कि यौन शोषण की घटना में शामिल पाँच लड़कों में से तीन लड़के नेताओं के बेटे हैं। इनमें से एक लड़का AIMIM विधायक का बेटा है। एक राज्य के अल्पसंख्यक बोर्ड के अध्यक्ष का बेटा और तीसरा मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की पार्टी तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS) के नेता का बेटा है। वहीं पुलिस 5 में से तीन आरोपितों को नाबालिग बता रही है।

तेलंगाना भाजपा के प्रवक्ता के कृष्णसागर राव ने का कहना है कि हैदराबाद पुलिस ने AIMIM विधायक के बेटे की संलिप्तता के कारण अभी तक आरोपित को नहीं पकड़ा है। उन्होंने कहा कि पुलिस AIMIM और TRS के राजनीतिक दबाव में है। वहीं पुलिस का दावा है कि अभी तक के बयान के अनुसार, विधायक का बेटे का नाम नहीं आया है।

भाजपा प्रवक्ता राव ने कहा, “बीजेपी पाँच अपराधियों की गिरफ्तारी की माँग कर रही है। मैं सवाल कर रहा हूँ कि कार जब्त होने के बावजूद हैदराबाद की पुलिस ने इन्हें गिरफ्तार क्यों नहीं किया। इस मामले में लड़की के माता-पिता ने 1 जून को ही शिकायत दर्ज कराई है। इसके अलावा, सभी परिस्थितिजन्य साक्ष्य भी उपलब्ध हैं। क्या पुलिस सीएम KCR या AIMIM प्रमुख ओवैसी से अनुमति की प्रतीक्षा कर रही है?”

रिपोर्ट के मुताबिक, एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज से पता चला है कि जिस कार में लड़की का कथित बलात्कार हुआ था, उसमें एक नेता का बेटा सवार हो रहा था। फुटेज में उसे जल्द ही बाहर निकलते हुए देखा गया था। अधिकारी का कहना है कि चूँकि अधिकांश आरोपित भी नाबालिग हैं, इसलिए इस मामले में आगे बढ़ने से पहले पुलिस कई स्रोतों से पुष्टि कर रही है।

इंडिया टुडे के अनुसार, एक वरिष्ठ पुलिस अधिकार ने बताया कि एक विधायक का बेटा और अल्पसंख्यक बोर्ड के अध्यक्ष का एक बेटा पार्टी में लड़की के साथ मौजूद था। इनमें से पीड़िता केवल एक आरोपित की पहचान करने और उसका नाम लेने में सक्षम थी। यह आरोपित भी नाबालिग है।

क्या है मामला

28 मई को 17 साल की एक नाबालिग लड़की हैदराबाद के जुबली हिल्स स्थित एम्नेशिया एंड इनसोम्निया पब में एक पार्टी में शामिल होने के लिए गई थी। इस पार्टी को उसके दो दोस्तों ने होस्ट किया था। उसी पब में कुछ अन्य लड़के भी उससे मिले।

इस मामले में लड़की के पिता 1 जून को जुबली हिल्स थाने में दी गई अपनी शिकायत में कहा कि मर्सिडिज कार में सवार कुछ लड़कों ने उसकी बेटी को पब से बाहर ले आए और कार में ले जाकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया।

पिता की शिकायत के अनुसार, “उनकी बेटी 28 मई की दोपहर को पब में एक पार्टी में गई थी। शाम लगभग 5.30 बजे कुछ लड़के उसको लेकर TS09 FL6460 नंबर वाली एक लाल रंग की मर्सिडीज लेकर गए। इसके साथ ही एक अस्थायी पंजीकरण संख्या वाली एक इनोवा में कुछ लड़के वहाँ आए।”

पिता ने अपनी शिकायत में यह भी कहा है कि इन लड़कों ने उसकी बेटी के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट भी की, जिसकी वजह से उसकी गर्दन पर मामूली चोटें आईं। उस समय, लड़की गहरे सदमे में थी और जो कुछ हुआ, उसके बारे में सही-सही बताने में असमर्थ थी।

नाबालिग लड़की के पिता की शिकायत के आधार पर आरोपितों के खिलाफ IPC की धारा 354 (महिला की शील भंग करने के इरादे से हमला या आपराधिक बल), धारा 323 (स्वेच्छा से चोट पहुँचाने की सजा) और POCSO ऐक्ट धारा 9 एवं 10 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

बाद में लड़की को सहायता केंद्र भेजकर वरिष्ठ महिला पुलिस अधिकारियों द्वारा उसकी काउंसलिंग की गई। इस दौरान नाबालिग ने अपने साथ हुई घटना के बारे में पुलिस अधिकारी को विस्तार से बताया। पीड़िता के बयान के बाद पुलिस ने उसका मेडिकल कराया और उसके आधार पर सामूहिक दुष्कर्म के लिए IPC की धारा 376 की धारा जोड़ी।

ज्ञानवापी में नमाज पर लगे रोक, पूजा-पाठ के लिए तत्काल खोला जाए: 22 प्रस्तावों पर काशी के संतों की मुहर, बिन्दु माधव मंदिर की सच्चाई भी मुस्लिमों को बताएँगे

ज्ञानवापी विवादित ढाँचे (Gyanvapi Masjid Shivling) के वजू खाने में शिवलिंग मिलने के दावे के बाद भले ही यह मामला अदालत में विचाराधीन हो, लेकिन इसे लेकर संत समाज मुखर हो गया है। शुक्रवार (3 जून 2022) को काशी धर्म परिषद की बैठक में साधु-संतों ने कुल 22 प्रस्तावों पर चर्चा की। इस दौरान संतों ने ज्ञानवापी विवादित ढाँचे के वजू खाने में मिले शिवलिंग के तत्काल दर्शन और उनके पूजन की माँग की। उन्होंने ऐसा नहीं होने पर ज्ञानवापी परिसर में हिंदुओं के साथ मुस्लिमों के प्रवेश पर प्रतिबंध की बात कही।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह बैठक कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद के गाँव लमही स्थित सुभाष भवन में आयोजित की गई थी। बैठक में विभिन्न मठों के मठाधीश, साधु-संत समेत कई सामाजिक कार्यकर्ता और इतिहासकार शामिल हुए। इस खास मौके पर संतों ने कहा कि मुस्लिम धर्मगुरुओं से अपील है कि वो सनातन धर्म के प्रमुख आस्था के केंद्र से अपना दावा छोड़ें। अदालत का फैसला आने तक ज्ञानवापी में पूजा नहीं तो नमाज भी बंद होनी चाहिए। धर्म परिषद की बैठक में इस बात पर भी सहमति बनी की मक्का और मदीना के इमामों को पत्र लिखकर औरंगजेब के काशी के मंदिरों के विध्वंस के इतिहास को बताया जाएगा।

वहीं, बैठक में पातालपुरी मठ के महंत स्वामी बालक दास ने कहा, “ज्ञानवापी में शिवलिंग मिला है। इसके बावजूद हमें हमारे आराध्य देवता की पूजा नहीं करने दी जा रही है। फिर, वहाँ नमाज क्यों पढ़ी जा रही है। जब हमारी पूजा पर प्रतिबंध है, तो नमाज पढ़ने पर भी रोक लगाई जानी चाहिए।”

इसके अलावा बिंदु माधव मंदिर की सच्चाई भी बताने पर चर्चा हुई। संतों ने कहा कि बिन्दु माधव मंदिर की सच्चाई भी मुस्लिमों को बताएँगे।

बता दें कि 22 प्रस्तावों में से 5 प्रमुख प्रस्ताव में कहा गया है कि प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 को तत्काल रद्द किया जाए। ज्ञानवापी में मिले आदि विश्वेश्वर के शिवलिंग की पूजा का अधिकार तत्काल दिया जाए। शिवलिंग को फव्वारा कहने वाले असदुद्दीन ओवैसी जैसे लोगों पर एफआईआर की जाए। सनातन धर्म के लोगों को ज्ञानवापी में उनके पूजापाठ के मौलिक अधिकार से वंचित न किया जाए। ज्ञानवापी में नमाज पढ़ने और मुस्लिमों के प्रवेश पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाए।

‘हिंदू विभाजनकारी हैं, रहेंगे’: AMU के पूर्व छात्र फहद जुबेरी का प्रोपेगेंडा सुनिए, खुद ‘ईशनिंदा’ पर माँग चुका है माफी

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) का पूर्व छात्र फहद जुबेरी एक बार फिर चर्चा में हैं। फहद जुबेरी, जिस पर ईशनिंदा का आरोप लगाकर यूनिवर्सिटी ने आजीवन प्रतिबंध लगा दिया था। वह इन दिनों अपने समुदाय के लोगों का विश्वास जीतने के लिए हिंदुओं के खिलाफ दुष्प्रचार कर रहा है। आपको याद दिला दें कि एएमयू ने वर्ष 2018 में इस्लामिक धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के आरोप में फहद के अलावा 3 अन्य छात्रों पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया था। फहाद ने इसके लिए माफी भी माँगी थी।

फहद की घटिया मानसिकता वामपंथी मीडिया पोर्टल न्यूजलॉन्ड्री के जरिए सामने आई है। अब उसने अपने मुस्लिम समुदाय के लोगों का विश्वास जीतने के लिए हिंदुओं को बदनाम करने का हथकंडा अपनाया है। न्यूजलॉन्ड्री के साथ बातचीत में फहद ने कहा, “हिंदू विभाजनकारी रहे हैं और उनका यह रवैया भविष्य में भी जारी रहेगा।”

फहद ने काशी और मथुरा मामले को लेकर कहा है कि इस विवाद का कारण हिंदु हैं। यह बदलने वाला नहीं है। उसने आगे कहा, “यह केवल मथुरा, काशी या अयोध्या के बारे में नहीं है। आप देख सकते हैं कि भारत के मुस्लिम बहुल इलाकों में क्या हो रहा है? हमने यह भी देखा कि नमाज को लेकर गुरुग्राम में क्या हुआ? फिर हमने मस्जिदों में लाउडस्पीकर लगाने पर हिंदुओं द्वारा किए गए हमले भी देखे।”

फहद इस बात पर जोर देते हुए कहता है कि एक शहर सभी वर्ग के लोगों के लिए होता, इसलिए गुरुग्राम में नमाज करना कोई गलत नहीं था। फहद यही नहीं रुका उसने साथ ही यह भी कहा, “ये वे स्थान हैं, जहाँ लोग अपनी पहचान व्यक्त करते हैं। हम ऐसी जगहों पर एक नई तरह की हिंसा देख रहे हैं, जहाँ कुछ लोग मस्जिद के सामने जाकर चिल्लाते हैं। तो यह सिर्फ काशी या मथुरा तक ही सीमित नहीं है। भविष्य में यह और भी गलत होगा।”

बातचीत में, फहद ने जोर देकर कहा कि यह विवाद इसलिए हो रहे हैं, क्योंकि सब कुछ हिंदुओं के हाथ में आ गया है और वे अब रुकने वाले नहीं हैं। इस अराजकता का मुख्य कारण हिंदू और हिंदुत्व की विचारधारा की है, क्योंकि वे अपने हिसाब से चीजों को बदलने का प्रयास कर रहे हैं।

कौन हैं फहद जुबेरी?

बता दें फहद जुबेरी अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का पूर्व छात्र और स्कॉलर है। इसे 2018 में रमजान के महीने में फेसबुक पर एक तस्वीर अपलोड करने के लिए विश्वविद्यालय ने हमेशा के लिए बैन कर दिया था। नशरा अहमद, फहद ज़ुबेरी, उमर गाज़ी और सुशांत टैंक पर ईशनिंदा का आरोप लगाया गया था। उन्होंने 6 जून 2018 को दिल्ली के एक पब की एक तस्वीर फेसबुक पर पोस्ट की थी, जिसमें उनकी टेबल पर बीयर की बोतलें रखी हुई थीं। इसके साथ उन्होंने कैप्शन में लिखा था: “अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के संगीत के दिग्गजों के साथ इफ्तारी। अल्लाह की कृपा से तीन सुन्नियों को आज रात मदीरा का सुख मिला है।”

इसके बाद विश्वविद्यालय में आक्रोश फैल गया और कई छात्रों और कार्यकर्ताओं ने उनके सिर कलम करने की धमकी दी थी। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय छात्र संघ (AMUSU) के पूर्व उपाध्यक्ष नदीम अंसारी ने उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 295A के तहत धार्मिक भावनाओं को आहत करने और इस्लाम के लिए अभद्र भाषा प्रयोग करने के खिलाफ मामला दर्ज करवाया था। तब फहद और अन्य ने लोगों ने इसके लिए माफी माँगी थी और उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने का अनुरोध किया गया था।

मोहम्मद परवेज के सैलून में बाल कटाने गए शिवशंकर, मामूली कहासुनी में गले में कैंची घोंप मार डाला: आजमगढ़ की घटना

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ (Azamgarh, Uttar Pradesh) से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ सैलून में बाल कटवाने गए शिवशंकर गुप्ता नाम के एक व्यक्ति को मोहम्मद परवेज ने मामूली कहासुनी के बाद गर्दन में कैंची घोंपकर हत्या कर दी। इस संबंध में शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने आरोपित परवेज को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।

मामला आजमगढ़ के कोइनहाँ बाजार की है। यहाँ के रहने वाले शिवशंकर गुप्ता के घर के सामने ही उनके गाँव के ही मोहम्मद परवेज उर्फ शीबू का सैलून है। देर शाम शिवशंकर परवेज की दुकान पर बाल कटवाने के लिए गए। पुलिस का कहना है कि पहले बाल कटवाने को लेकर दोनों का विवाद हो गया। इसी दौरान परवेज ने कैंची उठाकर शिवशंकर के गले में घोंप दिया।

घटना की जानकारी मिलने के बाद पीड़ित के घरवाले उन्हें नजदीकी जिला अस्पताल लेकर गए, जहाँ इलाज के दौरान शिवशंकर गुप्ता की मृत्यु हो गई। घटना के दौरान सैलून में जो लोग बाल कटवा रहे थे, वे भाग गए।

इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता और भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय ने भी ट्वीट किया है। उन्होंने लिखा, “आजमगढ़ निवासी शिवशंकर गुप्ता अपने घर के सामने स्थित मोहम्मद परवेज के सैलून में बाल कटवाने गए थे। बाल कटवाने के दौरान वाद विवाद हुआ और परवेज ने शिवशंकर के गले में कैची घोंप दिया। हत्यारा परवेज सरकारी अल्पसंख्यक है और मृतक शिवशंकर गुप्ता सरकारी बहुसंख्यक।”

घटना के बाद मृतक के पिता ने हरिकेश गुप्ता ने कप्तानगंज थाने में मामला दर्ज कराया। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मोहम्मद परवेज को हिरासत में ले लिया है और उससे पूछताछ कर रही है। मृतक शिवशंकर बक्से का कारोबार करते थे।

पुलिस अधीक्षक अनुराग आर्य ने बताया, “कल शाम लगभग 7:30 बजे कप्तानगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत कोइनहाँ बाजार में मोहम्मद परवेज उर्फ शीबू नाई की दुकान पर पहले बाल कटवाने के लेकर परवेज और शिवशंकर के बीच झगड़े के दौरान परवेज द्वारा शिवशंकर के गले पर कैंची से वार कर दिया गया। मजलूम शिवशंकर को तत्काल जिला अस्पताल ले जाकर इनका उपचार शुरू कराया गया। उपचार के दौरान इनकी मृत्यु हो गई।”

SP आर्य ने आगे बताया, “मृतक पिता की तहरीर पर कप्तानगंज थाना अंतर्गत FIR नंबर 156/22, धारा 302 IPC पंजीकृत किया गया है। अभियुक्त परवेज को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। इसकी अग्रिम विवेचना थाना कप्तानगंज के द्वारा की जाएगी।”

इस घटना के बाद ग्रामीणों में गुस्सा भड़क गया। शिवशंकर की हत्या से आक्रोशित ग्रामीणों ने बाजार में सड़क जाम कर दी। इसके साथ ही हत्या के विरोध में दुकानदारों ने भी अपनी दुकानें भी बंद कर दीं। इसके बाद निजामाबाद SDM रवि कुमार और तहसीलदार शैलेंद्र सिंह के साथ प्रशासन ने मौके पर पहुँचकर ग्रामीणों से बातचीत की और मृतक परिवार को आर्थिक सहायता व दोषी को कड़ी सजा दिलाने का आश्वासन दिया। इसके बाद यातायात बहाल हो सका।

जिस बीवी के लिए कहा ‘छूने भी नहीं देती’, उसको हर महीने देने होंगे ₹30000: सांसद हीरो का घर खाली करने का हिरोइन पत्नी को आदेश

उड़िया फिल्मों की अभिनेत्री बर्षा प्रियदर्शिनी (Barsha Priyadarshini) को अपने सांसद पति का घर खाली करना होगा। ओडिशा के कटक जिले के जिले के सब डिवीजन ज्युडिशियल मजिस्ट्रेट (SDJM) की कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है। साथ ही सांसद अनुभव मोहंती (Anubhav Mohanty) को अपनी पत्नी को हर महीने 30 हजार रुपए देने के निर्देश भी दिए हैं।

मोहंती केंद्रपारा सीट से ओडिशा की सत्ताधारी पार्टी बीजू जनता दल (BJD) के सांसद हैं। एक्टर से नेता बने मोहंती का कहना था कि उनकी शादी को आठ साल हो गए हैं। लेकिन पत्नी ने एक बार भी शारीरिक संबंध नहीं बनाने दिया। उन्होंने कोर्ट में याचिका दायर कर माँग की थी कि वर्षा उनके पैतृक घर को खाली कर दें। इस स्थिति में पत्नी के लिए अलग घर की व्यवस्था करने की बात भी उन्होंने की थी। साथ ही आय के स्त्रोतों की जाँच की भी माँग की थी।

गौरतलब है कि इस दंपती की तलाक को लेकर मामला ओडिशा हाई कोर्ट में चल रहा है। पिछले दिनों हाई कोर्ट ने तलाक की प्रक्रिया पूरी होने तक पत्नी के खिलाफ कोई भी वीडियो बनाने या बयानबाजी करने से मोहंती को रोक दिया था। यह मनाही मीडिया और सोशल मीडिया दोनों लागू है। इसी तरह का आदेश प्रियदर्शिनी को भी दिया गया था।

अनुभव मोहंती ने पत्नी द्वारा घरेलू हिंसा का केस दर्ज कराने के बाद सितंबर 2020 में तलाक की अर्जी दाखिल की थी। इसमें कहा था कि उनकी पत्नी सेक्स के दौरान दर्द से डरने की बात करते हुए पिछले 8 साल से शारीरिक संबंध बनाने से मना कर रही हैं।

बीजेडी सांसद के मुताबिक, उनकी पत्नी ने सिर्फ सेक्स ही नहीं, बल्कि हर प्रकार के शारीरिक स्पर्श से उन्हें मना किया है। सांसद मोहंती ने इसी के साथ अन्य शिकायतों में खुद को मानसिक प्रताड़ना देना, गाली देना, परिवार से रिश्ता न रखना आदि बताया है।

दोनों की शादी साल 2014 में हुई थी। हालाँकि, उनका वैवाहिक जीवन बहुत अच्छा नहीं रहा। शादी के कुछ समय के बाद से ही दोनों में अनबन शुरू हो गई। 2016 में पहली बार अनुभव ने अपनी पत्नी के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि 2 साल बीतने के बाद भी वो सेक्स नहीं कर रही हैं। मोहंती सलमान खान के फैन हैं। साल 2020 में उनकी पत्नी बर्षा ने उन्हें SDJM कोर्ट में थप्पड़ भी मारा था। बर्षा का आरोप है कि उनका पति अक्सर शराब के नशे में रहता है।

बर्षा में मुताबिक, “अनुभव के दोस्त भी शराब पीने घर पर ही आते हैं। जब मैं मना करती थी, तब मेरी पिटाई होती थी और मानसिक उत्पीड़न भी होता था। अनुभव का कई अन्य महिलाओं से भी रिश्ता है। अनुभव के द्वारा मुझे घर से निकालने का भी प्रयास हुआ था।” सांसद अनुभव मोहंती के बारे में आपको बता दें कि अनुभव कुछ समय पहले ओडिशा TV को धमका भी चुके हैं।

बर्षा के द्वारा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने के बाद उनके पति ने उन पर फर्जी सोशल मीडिया एकाउंट बनाने और उससे लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया था। तब उन्होंने लोगों से अभिनेत्री बर्षा प्रियदर्शिनी की बातों में न आने की अपील भी की थी।

अभिनेत्री वर्षा अपने पति के खिलाफ 2 शिकायतें दर्ज करवा चुकी हैं। इसमें पहली शिकायत 22 मई को अपने खिलाफ सोशल मीडिया पर वीडियो अपलोड करने का आरोप लगाते हुए पुरीघाट थाने में और दूसरी शिकायत 25 मई को कटक के साइबर पुलिस थाने में दर्ज हुई थी। अनुभव ने अपने द्वारा बनाए गए 4 वीडियो में अपनी पत्नी से हुए विवाद और तलाक दाखिल करने की वजह भी बताई थी।

अनुभव ने अपने दूसरे वीडियो को ‘अनटोल्ड स्टोरी’ नाम से 21 मई 2022 को शेयर किया था। इस वीडियो में अनुभव ने बताया था, “हमारी शादी को कई साल बीत गए लेकिन हमारे बीच कोई शारीरिक संबंध नहीं है। ऐसा बर्षा की वजह से है। मुझे पिछले 6 वर्षों से मेरे दाम्पत्य अधिकारों से वंचित रखा गया। अब लोग तय करें कि कोई पति कितने दिन इंतज़ार कर सकता है।” सांसद अनुभव मोहंती ने लोगों से उनके हालात का मज़ाक न उड़ाने की अपील भी की थी। उन्होंने बताया था कि उन्होंने तलाक से पहले रिश्तों को सुधारने की हर संभव कोशिश की थी।

5 साल में ₹3 लाख करोड़ का निवेश जमीन पर उतारा, अब ₹80000 करोड़ की परियोजनाओं की शुरुआत: CM योगी की ‘गति’ के अडानी भी मुरीद

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) की अगुआई में उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) निवेशकों (Investors) का सबसे मनपसंद स्थान बनकर उभरा है। यही कारण है कि प्रदेश में निवेश लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले पाँच सालों में उत्तर प्रदेश को 4.68 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव मिले। वहीं, तीसरे ग्राउंड सेरेमनी के दौरान अडानी समूह ने 70,000 करोड़ रुपए निवेश करने की घोषणा की है।

कार्यक्रम में बोलते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी से प्रदेश में निवेश का माहौल बन रहा है। उन्होंने निवेशकों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि प्रदेश में उनका निवेश पूरी तरह सुरक्षित है। इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश में निवेश करने वाले उद्योगपतियों को हर संभव मदद उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “साल 2018 में पहले इंवेस्टर समिट के समय हमें 4 लाख 68 हजार करोड़ रुपए के निवेश के प्रस्ताव प्राप्त हुए थे, जिनमें से पिछले पाँच वर्षों के दौरान 3 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव को धरातल पर उतारा गया। कोरोना कालखंड के दौरान भी प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में और उनकी प्रेरणा से जीवन और जीविका को बचाने के साथ ही प्रदेश में निवेश के प्रस्तावों को सफलतापूर्वक लागू किया गया। उस दौरान 66,000 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव मिले और उसे सफलतापूर्वक धरातल पर उतारा गया।”

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा 80,000 करोड़ रुपए की नई परियोजनाओं का शुभारंभ किया जा रहा है। इससे 5 लाख प्रत्यक्ष और 20 लाख अप्रत्यक्ष रोजगार का सृजन होगा। वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्शन के सफल क्रियान्वयन के कारण यूपी ने अपने निर्यात को 88,000 करोड़ से बढ़ाकर 1.56 लाख करोड़ रुपए सालाना कर दिया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश छठवीं अर्थव्यवस्था से दूसरे स्थान पर आ गई है। यूपी ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ में नंबर 2 पर पहुँच गया है। प्रदेश में 500 से ज्यादा सुधार लागू किए गए हैं और 40 विभागों के 1400 से अधिक अनुपयोगी नियमों को खत्म कर प्रदेश को निवेश फ्रेंडली बनाया गया है।”

उन्होंने आगे कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी के रिफॉर्म, परफार्म और इन्फॉर्म के मंत्र को अंगीकार करते हुए उत्तर प्रदेश ने विकास की नई दिशा तय की है। इसके तहत अब तक 1 करोड़ 60 हजार लोगों को व्‍यापार से जोड़ा गया है।

ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के दौरान उद्योगपतियों ने सीएम योगी और पीएम मोदी की जोड़ी की खूब प्रशंसा की। अडानी समूह के प्रमुख गौतम अडानी ने कहा कि सीएम योगी के प्रशासन में जल्द निर्णय लेने की क्षमता आश्चर्यजनक है और इससे प्रदेश में निवेश का माहौल बन रहा है।

उन्होंने आगे कहा, “मेरा सौभाग्य है कि आज मुझे दो महान नेताओं से एक साथ मिलने का मौका मिला, जो भारत को नया भारत बनाने के लिए सतत प्रयासरत हैं।” उन्होंने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन एक दूसरे से मेल खाता है।

वहीं, उद्योगपति हीरानंदानी (Industrialist Hiranandani) ने पीएम मोदी व सीएम योगी की तारीफ करते हुए कहा, “आप दोनों का कॉग्बिनेशन डबल इंजन गाड़ी की तरह है।” इस दौरान हीरानंदानी ने प्रदेश में डेटा सेंटर बनाने में अगले पाँच साल में प्रत्येक वर्ष एक हजार करोड़ रुपए निवेश करने का ऐलान किया।

बिड़ला ग्रुप के अध्यक्ष कुमार मंगलम बिड़ला (Kumar Mangalam Birla) ने उत्तर प्रदेश को अन्य राज्यों के लिए उदाहरण बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश आगे बढ़ रहा है और प्रधानमंत्री मोदी के निर्देशन में प्रदेश सशक्त बन रहा है।

कुमार मंगलम बिड़ला ने पीएम मोदी व सीएम योगी की प्रशंसा में कहा, “जब हौसला बना लिया ऊँची उड़ान का, तब देखना फिजूल है कद आसमान का।” उन्होंने प्रदेश के सीमेंट उद्योग में पाँच हजार करोड़ रुपए निवेश करने की घोषणा की।

बता दें कि तीसरे ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के दौरान प्रदेश के टियर-2 और टियर-3 जैसे शहरों को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का काम किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसके लिए पूरी रूपरेखा तैयार कर ली है। जिन जगहों को प्रोजेक्ट्स के लिए चुना गया है, उनमें रामपुर, देवरिया, बरेली, कानपुर देहात, हमीरपुर जैसी कई जगहें शामिल हैं। इन जगहों पर खाद्य प्रसंस्करण उद्योग से लेकर रेलवे और हवाई अड्डे तक बनाने तक की परियोजना शामिल हैं।

जगन्नाथ पुरी परिक्रमा परियोजना के खिलाफ याचिका खारिज: SC ने कहा- न्यायपालिका का समय न करें बर्बाद, ₹1 लाख जुर्माना लगाया

सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा के प्रसिद्ध जगन्नाथ पुरी में ओडिशा सरकार द्वारा कराए जा रहे निर्माण कार्यों को अवैध बताकर ओडिशा हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। याचिकाकर्ता ने पुरी में श्री जगन्नाथ मंदिर की मेघनाद दीवार के चारों ओर ‘परिक्रमा प्रकल्प’ या पुनर्विकास कार्य को अवैध बताया था।

अपने फैसले में शीर्ष अदालत ने इस तरह की याचिकाओं को गैर मेरिट वाला करार देते हुए कहा कि ऐसी याचिकाएँ दायर करना जुडिशियरी के समय की बर्बादी है। कोर्ट ने इस मामले में याचिकाकर्ताओं पर 1 लाख रुपए का जुर्माना ठोंका है। अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस परियोजना से लाखों भक्तों को लाभ मिलेगा और ये याचिका उनके हितों के खिलाफ है। कोर्ट के मुताबिक, याचिकाकर्ता केवल व्यक्तिगत महिमामंडन की माँग कर रहे थे।

लॉ बीट का ट्वीट

इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने इन याचिकाकर्ताओं द्वारा जल्द से जल्द लिस्टेड करने की माँग के तरीकों पर भी नाराजगी व्यक्त की और तल्ख टिप्पणी की कि याचिकाकर्ताओं ने ऐसा हंगामा खड़ा किया कि जैसे अगर प्राथमिकता के आधार पर याचिका पर सुनवाई नहीं की तो आसमान टूट पड़ेगा। कोर्ट के फैसले के मुताबिक, 12वीं शताब्दी के जगन्नाथ मंदिर की मेघनाद दीवार के आसपास ओडिशा सरकार अब निर्माण कार्यों को जारी रख सकती है।

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस गवई की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि राज्य सरकार को मंदिर के आसपास खुदाई और निर्माण कार्य करने से नहीं रोक सकते। यह देखा गया है कि मौजूदा परियोजना मृणालिनी पाधी बनाम भारत संघ 2019 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार और प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल और अवशेष अधिनियम 1958 के अनुसार भी है। कोर्ट ने कहा कि ये जगन्नाथ मंदिर में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के हित में है।

याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि राज्य सरकार ने उत्खनन कार्य करने से कोई मंजूरी नहीं ली थी। हालाँकि, राज्य सरकार ने कहा कि सभी आवश्यक अनुमतियाँ और मंजूरी प्राप्त कर ली गई है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में ओडिशा सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता पिनाकी मिश्रा भी पुरी के मौजूदा सांसद हैं। उन्होंने फैसले को ‘भगवान जगन्नाथ की इच्छा’ बताया है और कहा है कि नवीन पटनायक को सही ठहराया गया है।

क्या है श्री मंदिर परिक्रमा परियोजना

गौरतलब है कि श्री मंदिर परिक्रमा प्रकल्प और जगन्नाथपुरी मंदिर विरासत गलियारा परियोजना का उद्घाटन ओडिशा के सीएम नवीन पटनायक ने नवंबर 2021 में किया था। पुरी के तत्कालीन ‘ओडिशा के राजा’ गजपति महाराज ने इस परियोजना के भव्य समारोह में इसका शिलान्यास किया था।

मंदिर विकास की इस परियोजना के तहत मंदिर के आसपास 75 मीटर के क्षेत्र को पहले सभी अवैध अतिक्रमणों से मुक्त किया गया था और भव्य रथ यात्रा उत्सव के लिए इसे पक्का और चौड़ा किया गया था। इस परियोजना में 12वीं शताब्दी के मंदिर की दीवार की सुरक्षा के लिए कई सुविधाओं का विकास शामिल है। अगस्त 2019 में ओडिशा सरकार ने घोषणा की कि 12 वीं शताब्दी के मंदिर की सुरक्षा और अखंडता सुनिश्चित करने के लिए जगन्नाथ मंदिर की मेघनाद दीवार के 75 मीटर के दायरे में सभी संरचनाओं को हटा दिया जाएगा।

इसके लिए जस्टिस बीपी दास आयोग द्वारा की गई सिफारिशों के पहले चरण को लागू करने का निर्णय लिया गया था। हालाँकि, कई संगठनों ने सरकार के अतिक्रमण विरोधी अभियानों का विरोध किया। सीएम नवीन पटनायक ने कहा था कि वो पुरी को विश्व स्तरीय विरासत में बदलना है।

नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग केस: ED ने राहुल गाँधी को दी नई तारीख, अब 13 जून को होगी पूछताछ, प्रियंका गाँधी भी हुईं कोविड पॉजिटिव

नेशनल हेराल्ड (National Herald) मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी को दोबारा समन जारी किया है। अब उन्हें पूछताछ के लिए 13 जून को तलब किया गया है। इधर कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी के बाद अब प्रियंका गाँधी का कोरोना रिपोर्ट भी पॉजिटिव आया है।

प्रियंका गाँधी ने ट्वीट करते हुए कहा, “मेरा COVID-19 टेस्ट पॉजिटिव आया है। मुझे हल्के लक्षण हैं। मैं कोरोना के सभी प्रोटोकॉल का पालन कर रही हूँ। मैंने घर में खुद को क्वारंटाइन कर लिया है। मेरे संपर्क में आए सभी लोगों से मेरा निवेदन है कि वे सभी जरूरी सावधानी बरतें।”

बता दें कि सोनिया गाँधी को नेशनल हेराल्ड मामले में ईडी ने पूछताछ के लिए 8 जून को बुलाया है। पूछताछ से पहले किए गए कोरोना टेस्ट में उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। सोनिया गाँधी में हल्के लक्षण हैं। उन्होंने खुद को आइसोलेट कर लिया है। उनका इलाज चल रहा है।

इससे पहले राहुल गाँधी को ईडी ने 2 जून को तलब किया था। हालाँकि वह पूछताछ के लिए ईडी के सामने पेश नहीं हुए थे। जिसके बाद ईडी ने नई तारीख दी है। दरअसल दो जून को जब ईडी ने राहुल को पेशी के लिए बुलाया था तो तब वह विदेश में थे और उनकी लीगल टीम ने ईडी से नई तारीख माँगी थी। अब ईडी ने उनके आवदेन को मंजूर करते हुए कहा है कि 13 जून को सुबह 11 बजे वो दिल्ली स्थित प्रवर्तन निदेशालय के दफ्तर में पहुँच जाएँ और अपना बयान दर्ज करवाएँ। 

क्या है मामला?

यह मामला कॉन्ग्रेस पार्टी के नेतृत्व में ‘यंग इंडियन’ में वित्तीय अनियमितता की जाँच के सिलसिले में दर्ज किया गया था। समाचार पत्र ‘नेशनल हेराल्ड’, यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड का है। ‘नेशनल हेराल्ड’ एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) द्वारा प्रकाशित किया जाता है और यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड के स्वामित्व में है। भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी और अन्य पर धोखाधड़ी की साजिश रचने और यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड के फंड का गबन करने का आरोप लगाया था।

स्वामी ने यह भी आरोप लगाया था कि यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड ने 90.25 करोड़ रुपए की वसूली के अधिकार हासिल करने के लिए सिर्फ 50 लाख रुपए का भुगतान किया था, जो एजेएल पर कॉन्ग्रेस का बकाया था। उल्लेखनीय है कि ईडी के अनुसार, गाँधी परिवार द्वारा नियंत्रित एनजीओ, जिसकी शुरुआत 2010 में केवल 5 लाख रुपए से हुई थी, अब उसकी संपत्ति 800 करोड़ रुपए से अधिक है।