Home Blog Page 2700

लंदन यात्रा के लिए राहुल गाँधी ने नहीं ली विदेश मंत्रालय की मंजूरी: रिपोर्ट; वहाँ जाकर कहा था – भारत एक राष्ट्र नहीं

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) ने इन दिनों ब्रिटेन की यात्रा पर हैं। वह लंदन स्थित कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने कहा था कि भारत में स्थिति ठीक नहीं है। बीजेपी ने देश भर में केरोसिन छिड़क रखा है।

अब इस मामले में जानकारी सामने आई है कि राहुल गाँधी ने बिना राजनीतिक मंजूरी के लंदन की यात्रा की। दरअसल, सभी सांसदों को अपनी विदेश यात्राओं से पहले विदेश मंत्रालय से राजनीतिक मंजूरी लेनी होती है। ‘इंडिया टुडे’ की रिपोर्ट के मुताबिक राहुल गाँधी ने अपनी हालिया लंदन यात्रा से पहले विदेश मंत्रालय से राजनीतिक मंजूरी के लिए आवेदन नहीं किया था।

अनिवार्य है विदेश मंत्रालय से मँजूरी लेना

गौरतलब है कि सभी संसद सदस्यों को विदेश यात्रा करने से पहले विदेश मंत्रालय से राजनीतिक मंजूरी लेना अनिवार्य है। यात्रा से कम से कम तीन सप्ताह पहले वेबसाइट पर जानकारी डालकर विदेश मंत्रालय की मंजूरी लेनी होती है। लेकिन राहल गाँधी ने इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया। इसके अलावा सभी सांसदों को विदेश मंत्रालय के माध्यम से विदेशी सरकारों, संस्थानों आदि से निमंत्रण प्राप्त करना होता है। यदि कोई सीधा निमंत्रण मिलता है तो इसकी जानकारी विदेश मंत्रालय को देनी होती है। इसके बाद उन्हें मंत्रालय से राजनीतिक मंजूरी लेनी होती है। सूत्रों के मुताबिक राहुल गाँधी ने विदेश यात्रा करने से पहले विदेश मंत्रालय की मंजूरी नहीं ली थी।

अपनी इस विदेश यात्रा के दौरान राहुल ने कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। इस दौरान उन्होंने कहा था कि भारत अच्छी स्थिति में नहीं है। बीजेपी ने पूरे देश में मिट्टी का तेल फैला दिया है। आपको एक चिंगारी चाहिए और हम बड़ी मुसीबत में पड़ जाएँगे। इसे रोकना विपक्ष की जिम्मेदारी है। कॉन्ग्रेस लोगों, समुदायों, राज्यों और धर्मों को एक साथ लाती है। हमें इस तापमान को कम करने की जरूरत है क्योंकि अगर यह तापमान ठंडा नहीं हुआ तो चीजें गलत हो सकती हैं। 

राहुल गाँधी ने कहा था, “भारत ऐसा देश नहीं बन सकता जिसे बोलने की अनुमति नहीं है। प्रधानमंत्री का रवैया होना चाहिए कि ‘मैं सुनना चाहता हूँ’। लेकिन हमारे प्रधानमंत्री नहीं सुनते। आपके पास ऐसा देश नहीं हो सकता जिसे बोलने की अनुमति नहीं है।”

हालाँकि, ये कोई पहली बार नहीं है जब राहुल गाँधी इस तरह से विदेश दौरे पर गए हों। मौका चाहे नए साल का हो, संसद सत्र का हो, चुनाव का हो या फिर राहुल गाँधी के जन्मदिन का… वो हर बड़े मौके पर विदेश की यात्रा पर होते हैं। पिछले दिनों गृह मंत्री अमित शाह ने वह मौके गिनाए थे, जब गाँधी परिवार के सदस्यों ने एसपीजी का अनादर  किया था। उन्होंने कहा कि 600 बार ऐसे मौके आए जब राहुल गाँधी ने ऐसा किया।

इस संबंध में आँकड़े पेश करते हुए उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी ने भारत में यात्रा करने के दौरान 1892 बार एसपीजी के नियमों का उल्लंघन किया जबकि 2015 से अब तक (2019) अपनी विदेश यात्राओं के दौरान उन्होंने 247 बार एसपीजी के नियमों की धज्जियाँ उड़ाईं। इस पर गृहमंत्री शाह ने पूछा कि आखिर यह लोग अपनी विदेश यात्राओं की जानकारी इतना छिपाते क्यों हैं?

काशी के बाद अब मंगलुरु में मस्जिद के नीचे मिला हिन्दू मंदिर! हिन्दुओं ने किया पूजा-पाठ: ASI सर्वे की माँग, धारा-144 लागू

वाराणसी में ज्ञानवापी विवादित स्थल के बाद अब कर्नाटक (Karnataka) के मंगलुरु जिले के बाहरी इलाके में स्थित एक पुरानी मस्जिद के नीचे से मंदिर जैसी संरचना (Temple Type Structure Found In Mangaluru) मिली है। इसके बाद बुधवार (25 मई, 2022) को विश्व हिन्दू परिषद (VHP) और बजरंग दल (Bajrang Dal) के कार्यकर्ताओं ने गंजिमुत में श्री रामंजनेय भजन मंदिरा थेनकुलीपदी में पूजा यानि ‘तंबुला प्रश्ने’ अनुष्ठान किया।

VHP कार्यकर्ताओं ने ये पूजा मस्जिद के जीर्णोद्धार के दौरान मिले मंदिर जैसे ढाँचे पर हो रहे विवाद के समाधान के लिए किया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मौके पर ज्योतिष के अनुसार हिंदू संगठनों ने देवत्व स्थापित करने की ‘रस्म’ निभाई। इसके जरिए ये पता लगाया जाता है कि स्थान विशेष में दैवीय शक्तियाँ हैं या नहीं। अगर ‘तंबुला प्रश्ने’ का पॉजिटिव रिजल्ट आता है तो इसके बाद ‘अष्टमंगला प्रश्ने’ अनुष्ठान किया जाता है। बताया जाता है कि विश्व हिन्दू परिषद ने इस अनुष्ठान की भी योजना बनाई है।

थेनकुलीपाडी में सुबह 8:30 बजे से 11 बजे तक VHP ने ये अनुष्ठान किए, जिसके बाद किसी भी तरह की अनहोनी से बचने के लिए पुलिस कमिश्नर ने गाँव के मलाली में जुम्मा मस्जिद के 500 मीटर के दायरे में धारा 144 को लागू कर दिया है। इसके साथ ही शाँति व्यवस्था को बनाए रखने के लिए इलाके में भारी संख्या में पुलिस बलों को भी तैनात किया गया है।

मंगलुरू के पुलिस कमिश्नर NS कुमार ने कहा, “हालात शांतिपूर्ण हैं। आज हिन्दू संगठनों ने एक अनुष्ठान किया है, जो कि 8.30 बजे से 11 बजे तक चला। जिन जगहों पर आवश्यकता थी, वहाँ पर फोर्सेज को डिप्लॉय किया गया है। ग्रामीणों ने यह भी फैसला किया है कि कोई अप्रिय घटना नहीं होगी और दोनों पक्ष अदालत में लड़ने के लिए सहमत हो गए हैं।”

बीजेपी ने की ASI सर्वे की माँग

इस बीच भाजपा के विधायक भरत शेट्टी ने घटना स्थल की ASI से सर्वे कराने की माँग की है। वो इसे सामाजिक मुद्दा बता चुके हैं। इस मामले को लेकर बीजेपी विधायक ने ट्वीट किया, “ये कोई ध्रुवीकरण की कोशिश नहीं, बल्कि इतिहास को फिर से जानने की कोशिश है। हम कोई भी दावा नहीं करते हैं, लेकिन सच को फिर प्राप्त करने की उम्मीद करते हैं। सक्षम प्राधिकारी को सर्वे करने दीजिए। दुनिया को सच्चाई से अवगत कराया जा सके।”

इससे पहले 21 मई को मिले इस ढाँचे के सामने आने के बाद उन्होंने कहा था कि सच जानने के योग्य है, इसे दबाया या विकृत नहीं किया जा सकता है। न ही इससे वर्शिप एक्ट 1991 का उल्लंघन भी नहीं होता। गौरतलब है कि मस्जिद के नीचे से मंदिर जैसा ढाँचा मिलने के बाद लोगों में उत्सुकता बढ़ गई है। वहीं अब कोर्ट मस्जिद के जीर्णोद्धार पर रोक लगा चुका है।

‘मुस्लिम छात्रों के झूठे आरोपों पर अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी ने किया निलंबित’: हिन्दू छात्र का आरोप – मिली धर्म से समझौता न करने की सज़ा

बेंगलुरु में एक हिंदू छात्र ने अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी ( Azim Premji University) पर आरोप ​लगाया है कि इस्लामवादियों और वामपंथी विचारधारा वाले छात्रों द्वारा उसे निशाना बनाने के बाद निलंबित कर दिया गया है। ऋषि तिवारी ने कहा कि कुछ छात्रों ने उसे हिंदू होने के कारण परेशान किया और उसके साथ भेदभाव किया गया। इसको लेकर उसका मुस्लिम छात्रों से विवाद हो गया। इस मामूली विवाद पर कॉलेज प्रशासन ने उसे निलंबित कर दिया है।

ऋषि तिवारी के अनुसार, 2020 में उसने एमए डेवलपमेंट का कोर्स करने के लिए अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया था। उसके बाद से उसे यहाँ हिंदू होने के कारण भेदभाव का सामना करना पड़ा है। तिवारी को संस्थान के प्रोफेसरों और अन्य शिक्षकों द्वारा बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से पढ़कर आने के लिए टारगेट किया गया, क्योंकि बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी को ‘दक्षिणपंथी’ और उनकी आस्था हिंदू धर्म का गढ़ माना जाता है। इस भेदभाव के खिलाफ तिवारी अपनी आवाज उठाई और संस्थान के निदेशक को में शिकायत पत्र लिखा। इस बारे में तिवारी ने ऑपइंडिया से भी बात की है।

पत्र में तिवारी ने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि मुस्लिम छात्रों द्वारा उन्हें अपमानित किया जाता था, क्योंकि उन्होंने अपनी विचारधारा और धर्म से समझौता नहीं किया। एक बार उनके और एक अन्य छात्र (मुस्लिम) के बीच मामूली विवाद को कैंपस में ‘हिंदू बनाम मुस्लिम’ मुद्दे के रूप में बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया गया। जैसा कि तिवारी ने बताया, कॉलेज में प्लेसमेंट प्रक्रिया के दौरान चयन नहीं होने के कारण भी उन्हें प्रताड़ित किया गया।

‘एक विवाद के बाद निलंबित किया गया’

पत्र के अनुसार, जब ऋषि तिवारी अपने हॉस्टल में लौट रहे थे, तभी ‘इस्लामी और वामपंथी विचारधारा’ वाले छात्रों के एक समूह ने उन्हें घेर लिया। उन्होंने उनके साथ दुर्व्यवहार किया और उन पर हमला भी किया। ऑपइंडिया से बात करते हुए तिवारी ने कहा, “1 मई 2022 को रात करीब 8:45 बजे इस्लामवादी और वामपंथी विचारधारा के 8-10 छात्रों ने मुझे घेर लिया। उन्होंने मेरे लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल भी किया और मुझ पर हमला भी किया। अगले दिन यानी 2 मई की शाम करीब 6 बजे कुछ प्रोफेसरों और छात्रों ने मेरे खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और मुझे यूनिवर्सिटी से निकाले जाने की माँग की।”

वहीं, मुस्लिम छात्रों की भीड़ ने उन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि तिवारी ने मुस्लिम छात्र के चेहरे पर खाना फेंका और उस पर थूका। यही नहीं उन्होंने उन पर हमला करने का आरोप भी लगाया। उनका कहना है कि तिवारी ने उन्हें ‘हिंदूवादी, संघी और कट्टर हिंदू बनाने का जबरन प्रयास किया था। इस मामले में तिवारी ने 2 मई को स्कूल ऑफ डेवलपमेंट के निदेशक के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन उनका पक्ष सुने बिना ही उन्हें निलंबित कर दिया गया। 2 मई के बाद से तिवारी को तत्काल प्रभाव से सभी कक्षाओं और हॉस्टल से अनिश्चितकाल के लिए निलंबित कर दिया गया है। तिवारी उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के बल्लान गाँव के रहने वाले हैं।

अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी में ऋषि तिवारी के खिलाफ धरना प्रदर्शन

छात्रों के एक समूह ने इस घटना को ‘इस्लामोफोबिया’ करार दिया था। इस समूह ने कॉलेज के परिसर में तिवारी के खिलाफ प्रदर्शन किया। उनके खिलाफ सोशल मीडिया खासकर इंस्टाग्राम पर कई पोस्ट किए। अपने खिलाफ कॉलेज में हुए प्रदर्शन को लेकर तिवारी ने कहा, “जिस तरह से यूनिवर्सिटी में छात्रों के एक समूह ने मुझे सांप्रदायिक बना दिया है। उससे मैं यहाँ खुद को बेहद असुरक्षित महसूस कर रहा हूँ। इन सबके बावजूद एक भी अधिकारी ने मेरी बात नहीं सुनी और ना ही मेरा पक्ष जानने की कोशिश की।” छात्र का कहना है कि मेरा अंतिम सेमेस्टर पूरा होने वाला था और आने वाले कुछ महीनों में मुझे मेरी डिग्री मिलने वाली थी, लेकिन इस विवाद के बाद से मेरी डिग्री और नौकरी दोनों खतरे में हैं। मेरा परिवार आर्थिक रूप से पिछड़ा हुआ है। पूरे परिवार की जिम्मेदारी मेरे ऊपर है। ऐसे में कुछ भी समझ नहीं आ रहा है।

‘सवाल पूछने पर निशाना बनाया’

पिछले साल यूनिवर्सिटी में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इसमें बतौर मुख्य अतिथि फ्रेंच के राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर क्रिस्टोफ जैफ्रेलोटे (जो अक्सर भारत के खिलाफ बोलते हैं) को आमंत्रित किया गया था। तिवारी के अनुसार, यह कार्यक्रम देखते ही देखते ‘भाजपा सरकार और हिंदू धर्म को बदनाम करने’ वाले कार्यक्रम में बदल गया। इस दौरान उन्होंने और उनके कुछ दोस्तों ने जिज्ञासावश जैफ्रेलोटे से एक प्रश्न पूछ लिया। इसको लेकर कार्यक्रम आयोजित करने वालों ने इन छात्रों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। सवाल पूछने को गंभीरता से लेते हुए विश्वविद्यालय ने इस मामले की जाँच के लिए एक विशेष समिति का गठन किया था।

उस कार्यक्रम के बाद से तिवारी और उनके कुछ दोस्तों को हिंदू होने व उनकी अलग विचारधारा के लिए निशाना बनाया जाने लगा। छात्रों को सार्वजनिक रूप से संघी, भाजपा के प्रवक्ता और भाजपा आईटी सेल का सदस्य कहा जाता था। तिवारी कहा, “मुझे अपनी पहचान और हिंदू होने पर गर्व है। इसलिए मैं इसे कोई अपराध नहीं मानता है। वैचारिक मतभेद होने का मतलब यह नहीं है कि मुझे अपनी डिग्री और नौकरी वंचित होना पड़ेगा। विश्वविद्यालय मुझे न्याय दिलाने का कोई प्रयास नहीं कर रहा है।”

‘कैंपस में दिवाली मनाने पर लगाई फटकार’

सूत्रों के मुताबिक, कैंपस के एकेडमिक कैलेंडर में किसी भी हिंदू त्योहार पर छुट्टी नहीं है। पिछले साल नवंबर में तिवारी और उनके कुछ दोस्तों ने कैंपस में दिवाली मनाई थी, जो वहाँ हिंदू धर्म में विश्वास नहीं रखने वालों को अच्छा नहीं लगा। उन्हें दिवाली मनाने के लिए भी टारगेट किया गया। ऋषि तिवारी और उनके दोस्तों को एक ही समूह द्वारा बार-बार निशाना बनाया गया। उन पर संघी, भाजपा के लोग और कट्टरपंथी हिंदू का लेबल लगा दिया गया और सार्वजनिक रूप से इन्हीं नामों से बुलाया जाने लगा। खैर, जैसे ही हमें इस मामले से जुड़ी अन्य जानकारी मिलती है, हम अपने पाठकों को उससे अपडेट कराते रहेंगे।

आतंकी यासीन मलिक को उम्रकैद: टेरर फंडिग में सजा के बाद बजे ढोल, श्रीनगर में कट्टरपंथियों ने की पत्थरबाजी

जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार के आरोपित यासीन मलिक को टेरर फंडिग केस में दोषी ठहराए जाने के बाद आज 25 मई को उसकी सजा मुकर्रर हो गई। NIA कोर्ट ने तमाम धाराओं के तहत टेरर फंडिंग केस में उसे उम्रकैद की सजा सुनाई है।

यासीन को सजा मिलने से खुश लोगों ने यासीन के पोस्टर जलाकर और पटाखे फोड़ते हुए उसे सजा दिए जाने की खुशी जाहिर की। ढोल-नगाड़े बजाते हुए कोर्ट के फैसले का स्वागत हुआ। लेकिन श्रीनगर में कुछ युवकों द्वारा बीच सड़क पर पत्थरबाजी किए जाने की तस्वीरें भी मीडिया में आई हैं। सुरक्षा लिहाज से वहाँ इंटरनेट सेवा बंद की गई है।

यासीन की सजा मुकर्रर होने से पहले दिल्ली के पटियाला कोर्ट में चली सुनवाई में इस बात पर बहस हुई कि यासीन को कितनी सजा दी जाए। इस दौरान एनआईए ने मलिक के लिए फाँसी की सजा माँगी और यासीन ने भी कोर्ट को कहा कि वो किसी तरह की भीख नहीं माँगेगा, कोर्ट को जो करना है करे।

कोर्ट में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी के न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने कहा कि गवाहों के बयान और सबूतों के एनालिसिस से पता चलता है कि केस में सभी आरोपितों के एक-दूसरे से संपर्क थे और पाकिस्तानी फंडिंग की बात भी सच है।

यासीन के समर्थन में कट्टरपंथी

टेरर फंडिग केस में 19 मई 2022 को हुई सुनवाई के दौरान दिल्ली की अदालत ने यासीन मलिक को गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत और आईपीसी के तहत साजिश और देशद्रोह का दोषी पाया था और सजा सुनाने की तारीख आज यानी 25 मई तय हुई थी। लेकिन आज कोर्ट में यासीन की सजा सुनाने का वक्त आया तो एक बार फिर ट्विटर पर I stand with yaseen हैशटैग के साथ ट्वीट दिखने लगे। सड़कों पर पत्थरबाजी होने लगी।

सुरक्षा लिहाज से पुलिस ने पटियाला कोर्ट की सुरक्षा को बढ़ा दिया है और श्रीनगर के भी कुछ हिस्सों को बंद रखा गया है। वहीं पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान ने यासीन के खिलाफ कार्रवाई होता देख मोदी सरकार को फासीवादी कहा। शाहिद अफरिदी ने भी ट्विटर पर यासीन के लिए मानवाधिकार का रोना रोकर यूएन से संज्ञान लेने को कहा।

यासीन ने कबूला जुर्म, कोर्ट के फैसले को चुनौती देने से मना किया

मालूम हो कि इसी महीने 2022 में यासीन मलिक ने कोर्ट में आतंकवाद के आरोपों को कबूल किया था। उसने पटियाला हाउस कोर्ट की एनआईए अदालत में अपनी गलती मानते हुए कोर्ट से कानून के मुताबिक सजा देने की माँग की थी। दोषी करार होने के बाद मलिक ने कोर्ट में कहा था कि वह UAPA की धारा 16, 17, 18, व 20 और आईपीसी की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश) व 124-ए (देशद्रोह) के तहत खुद पर लगे आरोपों को चुनौती नहीं देना चाहता।

राजनीति से ले लूँगा संन्यास: मलिक

हालाँकि आज बुधवार को फैसला आने से पहले जब यासीन को मालूम चला कि उसके लिए अधिकतम सजा की माँग हुई है तो उसने अदालत को कहा कि वह कोर्ट में भीख नहीं माँगेगा, कोर्ट को जो करना हो करे। वह बोला कि अगर जाँच एजेंसी इस बात को साबित कर दे कि 28 साल के दौरान यासीन की किसी आतंकवादी गतिविधि या हिंसा में मौजूदगी है, तो वह अपनी राजनीति से संन्यास ले लेगा और फाँसी भी कबूल होगी। मलिक ने कहा, “मैंने सात प्रधानमंत्रियों के साथ काम किया है। मैं अपने लिए कुछ भी नहीं माँगूँगा। मैं अपनी किस्मत का फैसला अदालत पर छोड़ता हूँ।”

यासीन मलिक के गुनाह

उल्लेखनीय है कि यासीन मलिक पर टेरर फंडिंगे के अलावा और भी बड़े-बड़े इल्जाम हैं। जैसे उसने भारतीय वायुसेना के 4 जवानों की हत्या की थी। उसने सीएम मुफ्ती मोहम्मद की बेटी अपहरण करवाया था। इसके अलावा यासीन उन्हीं आतंकियों में शामिल था जिनके आतंक के कारण कश्मीरी हिंदू घाटी छोड़ने पर मजबूर हुए थे।

हिजाब में आई ज्वेलरी शॉप, बंदूक दिखाकर लूटने की कोशिश: दुकानदार ने हिजाब और बाल पकड़ बाहर निकाला, देखिए VIDEO

सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें एक महिला हिजाब पहनकर बंदूक के दम पर ज्वेलरी की दकान लूटने की कोशिश करती है। हालाँकि दुकानदार की चालाकी और बहादुरी उस पर भारी पड़ती है। जैसे ही हिजाब वाली महिला दुकान के मालिक को बंदूक दिखाती है, वह उछल कर काउंटर की दूसरी तरफ कूदता है और उसका हिजाब और बाल पकड़कर खींचते हुए बाहर लाता है।

ज्वेलरी की दुकान के अंदर लगे सीसीटीवी कैमरे से लिए गए पहले वीडियो में, एक महिला काले हिजाब में दुकान में दिखाई दे रही है। वह दुकान के मालिक से  सोने के गहने दिखाने के लिए कह रही है। जब दुकान का मालिक और बक्से लाने के लिए अपनी पीछे घूमता है, तो महिला अपने साथ ले गई प्लास्टिक की एक बैग के अंदर से बंदूक निकालती है। फिर वह दुकान के मालिक पर बंदूक तानती है और गहने लूटने की कोशिश करती है।

हालाँकि, दुकान का मालिक शांत रहता है और महिला का सामना करता है। वह तेजी दिखाते हुए एक हाथ से बंदूक पकड़ लेता है और दूसरे हाथ से महिला के बाल और हिजाब को पकड़ लेता है। फिर वह चोर महिला को घसीटते हुए बाहर लाता है।

दुकान के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद वीडियो में दुकान का मालिक महिला को उसके हिजाब और बालों से घसीटता हुआ दिखाई दे रहा है। तभी एक राहगीर उसे देखता है और मदद के लिए आता है। वह महिला का हाथ पकड़ लेता है। जबकि दुकान का मालिक दूसरों को मदद के लिए बुलाने की कोशिश करता है।

एपीएन न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना मुंबई के विरार इलाके में हुई। मंगलवार (24 मई 2022) को हिजाब पहने महिला मुंबई के विरार में एक ज्वेलरी की दुकान में बंदूक लेकर लूटपाट करने के लिए घुसी थी। हालाँकि दुकान के मालिक की बहादुरी और तत्परता से एक बड़ा अपराध होने से टल गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि महिला को पुलिस के हवाले कर दिया गया है। महिला कथित तौर पर पेशे से बार गर्ल है और 2 दिन पहले भी उसी दुकान पर गई थी। News18 लोकमत की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुकान के मालिक का नाम देवलाल गुजर है। रिपोर्टों में कहा गया है कि महिला द्वारा इस्तेमाल की गई बंदूक नकली थी।

घूस लेकर चीनी नागरिकों को वीजा: कार्ति चिदंबरम के खिलाफ CBI के बाद अब ED ने दर्ज किया मनी लॉन्ड्रिंग का मामला, पूछताछ के लिए होंगे समन

कॉन्ग्रेस नेता पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम की मुसीबतें बढ़ सकती है। चीनी नागरिकों को रिश्वत के बदले वीजा के मामले में सीबीआई के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी मामला दर्ज कर जाँच तेज करने का फैसला लिया है। ईडी ने सीबीआई से कुछ दस्तावेजों की डिटेल माँगी है, ताकि जाँच में शामिल किया जा सके। ये दस्तावेज सीबीआई को कार्ति के ठिकानों पर छापेमारी में मिले थे।

CBI ने कार्ति के ठिकानों पर मारे थे छापे

ये मामला 2011 का है, जब केंद्र में कॉन्ग्रेस की सरकार थी और पी चिदंबरम गृहमंत्री थे। उसी वक्त पंजाब में एक बिजली कंपनी में काम करने के लिए 250 चीनियों को वीजा जारी किया गया। इसमें नियमों का जमकर उल्लंघन हुआ था। आरोप है कि उनके पिता गृहमंत्री थे, ऐसे में उन्होंने नियम के खिलाफ वीजा जारी करवाया। उस समय वेदांत समूह की कंपनी तलवंडी साबो पावर लिमिटेड (TSPL) पंजाब में एक प्लांट लगा रही थी और इसके लिए चीनी कंपनी को जिम्मा दिया गया था।

सीबीआई की एफआईआर के अनुसार कार्ति और उनके के बेहद करीबी एस भास्कररमन को TSPL के एक अधिकारी ने 50 लाख रुपए की रिश्वत दी थी। इसी मामले में हाल ही में भास्कररमन को पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया गया था। वहीं चेन्नई और दिल्ली में चिदंबरम के आवासों समेत देश के अनेक शहरों में 10 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया था।

अब ED ने दर्ज किया मामला

अब इसी मामले में केंद्रीय जाँच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय ने भी एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए उसी मामले को दर्ज कर लिया है। सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर को आधार बनाते हुए ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत इस केस को टेकओवर कर लिया है। बताया जा रहा है कि जल्द ही इस मामले में ईडी कार्ति चिदंबरम सहित कई अन्य आरोपितों को पूछताछ के लिए समन भेजेगी और आगे की कार्रवाई को अंजाम दिया जाएगा। 

दो मंदिरों में तोड़फोड़, शिवलिंग उठाकर नाले के पास फेंका, असम पुलिस ने कहा- जल्द ही आरोपित होंगे सलाखों के पीछे

असम में गुवाहाटी के भेटापाड़ा इलाके में कुछ असामाजिक तत्वों ने सड़क किनारे स्थित दो हिन्दू मंदिरों में तोड़फोड़ की है। इसे लेकर स्थानीय लोग भड़के हुए हैं। गुवाहाटी प्लस की रिपोर्ट के अनुसार, बताया जा रहा है कि मंगलवार (24 मई, 2022) की रात को शिव मंदिर में कई लोग घुसे और शिव की प्रतिमा के साथ ही शिवलिंग को उठाकर फेंक दिया। वहीं दूसरे मंदिर में भी गेट के पास लगी मूर्ति को नुकसान पहुँचाया गया है।

वहीं मामले का संज्ञान लेते हुए गुवाहाटी पुलिस के डीसीपी सुधाकर सिंह ने कहा है कि हमने मामले में जाँच शुरू कर दी है और आरोपितों को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

रिपोर्ट के अनुसार, एक प्रत्यक्षदर्शी ने गुवाहाटी प्लस को बताया कि वे उपद्रवी लोग भेटापाड़ा में शिव प्रतिमा को नुकसान पहुँचाने और शिवलिंग को नाले के पास में फेंकने के बाद एक दूसरे मंदिर में भगवान गणेश की प्रतिमा को भी उखाड़कर फेंकने की कोशिश की। हालाँकि, वशिष्ठ थाना के अंतर्गत आने वाले इस मंदिर में ग्रिल लगे होने के कारण जब तोड़फोड़ में कामयाबी नहीं मिली तो ग्रिल के बाहर लगे एक प्रतिमा को नुकसान पहुँचाया।

वहीं एक दूसरे स्थानीय व्यक्ति ने घटना के बारे में बात करते हुए बताया, “कुछ अराजक तत्व मंदिर में घुसे और हमारे शिवलिंग और भगवान शिव की प्रतिमा को नाले में फेंक दिया। यह हमारे लिए शर्म की बात है।”

रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में कुछ स्थानीय लोगों का यह कहना है कि हमारे धर्म के लोगों का काम नहीं हो सकता है जरूर इसमें धर्म विशेष के कुछ लोग शामिल होंगे। आरोपितों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

कहा जा रहा है लोगों को दोनों मंदिरों में तोड़फोड़ के बारे में सुबह जब पता चला तो उन्होंने बशिष्ट और हटिंगटन पुलिस स्टेशन में फोन कर सूचना दी। जिसके बाद मौके पर पहुँची पुलिस ने कार्रवाई का आश्वासन दिया। वहीं लोगों ने शिवलिंग और मूर्तियों को वापस मंदिर में रखा।

‘घर के परखच्चे उड़ गए थे, मैं हिल गया था’: आप जानते हैं सोहा अली के पति कुणाल खेमू के साथ कश्मीर में क्या हुआ था?

पिछले दिनों कश्मीरी हिंदुओं पर हुए अत्याचार की तस्वीर पर्दे पर आने के बाद कई पुरानी कहानियाँ ताजा हुईं। लोगों ने सामने आ आकर बताया कि कैसे उनके अपनों को इस्लामी आतताइयों ने मारा और फिर उन लोगों के घर जला दिए। 90 के दशक में जिन लोगों के घर जलाए गए उनमें एक नाम बॉलीवुड एक्टर कुणाल खेमू का भी। आज कुणाल अपना 39वाँ जन्मदिन मना रहे हैं। उनकी पहचान एक कामयाब एक्टर और पटौदी खानदान के दामाद यानी सोहा अली खान के पति के तौर पर होती है। हालाँकि एक समय ऐसा भी था जहब वो उस समुदाय से अलग नहीं थे जिन्हें सन् 1990 में तमाम प्रताड़नाओं का सामना करना पड़ा।

कुणाल खेमू ने साल 2020 में मलंग फिल्म के प्रमोशन के दौरान एक इंटरव्यू में बताया था कि कैसे एक ब्लास्ट ने उनके घर के परखच्चे उड़ा दिए थे और उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि क्या बुरा हो रहा है। ये बात 1989 की है। कुणाल उस समय छोटे थे और घाटी में काफी तनाव था। कुणाल ने अपने इंटरव्यू में उस समय को याद करते हुए कहा, “मुझे एक ब्लास्ट याद आता है, जो मेरे घर के पास हुआ था, उस ब्लास्ट का असर इतना ज्यादा था कि मेरे घर के परखच्चे उड़ गए थे, मैं खुद हिल गया था, घर का फ्लोरिंग उखड़ गया था।”

कुणाल के अनुसार धमाके के बाद वह और उनका भाई बाहर खेल रहे थे और उन्हें बहुत खुशी हो रही थी कि उन्हें सबके फोन आ रहे हैं। वह इतने छोटे थे कि कुछ समझ नहीं पाए कि उनके साथ क्या हुआ। बस उन्हें ये लग रहा था कि अगर घर टीवी पर दिखाया जा रहा है तो वो लोग बहुत फेमस हो गए हैं। इसके बाद उनके घरवालों ने उस घर को छोड़ दिया। वह बताते हैं कि उन्होंने घर से दूर होने के बाद अपने माता-पिता, दादा-दादी का दर्द देखा और धीरे धीरे कश्मीर की बात करनी छोड़ दी। उनका मानना है कि ये विषय लोगों को दुख पहुँचाता है।

कुणाल बताते हैं कि उनका परिवार कई बार श्रीनगर गया लेकिन वो लंबे समय तक नहीं जा पाए। कलंक की शूटिंग के वक्त उन्हें वहाँ जाने का समय मिला तो कश्मीरियों से बात कर वो बहुत खुश हुए। वे सब वही भाषा बोल रहे थे जिसमें कुणाल के घर में बात होती थी। इंटरव्यू के अनुसार वह इसे आतंकवाद से जुड़ा और पॉलिटिकल मानते हैं। इसके अलावा बॉलीवुड हंगामा से बात करते हुए भी कुणाल ने 3 साल पहले अपनी कश्मीरी जिंदगी से जुड़े कई राज खोले थे। इस बातचीत में भी उन्होंने ब्लास्ट से घर पर जो असल पड़ा उस पर बात की थी।

‘सिविल ड्रेस में रायफल के साथ घर में घुसे…आतंकियों की तरह घसीटा’: तजिंदर बग्गा ने शेयर किया पंजाब पुलिस का वीडियो

दिल्ली बेजीपी के नेता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा ने उस वक्त की घटना का एक नया वीडियो शेयर किया है, जब पंजाब पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने के लिए आई थी। इसको लेकर ट्वीट कर बग्गा ने लिखा, “सिविल ड्रेस, नो यूनिफॉर्म, नो वारंट, राइफल्स के साथ मेरे घर में घुसे और आतंकियों की तरह मुझे घसीट ले गए। क्योंकि मैंने अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान से गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी करने के जिम्मेदार दोषियों को गिरफ्तार करने की माँग की थी।”

बग्गा द्वारा शेयर किए गए वीडियो में उनके घर का मेन गेट नजर आता है। इसी गेट से होकर भूरे रंग की टी-शर्ट और काली जींस पहने सिविल ड्रेस में एक शख्स फोन पर बात करते हुए घर में घुसता दिखा। उसके हाथ में राइफल भी थी।

साभार: बग्गा द्वारा शेयर किए गए वीडियो का स्क्रीनशॉट

वीडियो के अगले सीन में बग्गा के घर का दरवाजा खुलता है तो बग्गा सोफे पर बैठे हुए दिखाई देते हैं। वीडियो में देखा जा सकता है कि एक आदमी सिविल ड्रेस में सोफे पर बैठे हुए खींचने की कोशिश करता है।

साभार: बग्गा द्वारा शेयर किए गए वीडियो का स्क्रीनशॉट

इसके कुछ सेकंड के बाद कुछ पुलिस अधिकारी और सिविल ड्रेस में कुछ लोग घर में घुसते हैं और उन्हें घर के बाहर खींच लाते हैं। विरोध करने पर जबरन बग्गा को गाड़ी में घुसेड़ दिया जाता है। इसी दौरान सिविल ड्रेस में ही एक व्यक्ति ने कार के दाहिनी ओर से उनके पैर को खींचा। इसके अलावा एक अन्य व्यक्ति (वो वर्दी में था या नहीं स्पष्ट नहीं) बग्गा को अपने हाथों से उठाकर कार में घुसेड़ता है। इसके बाद कार तुरंत वहाँ से चली जाती है।

साभार: बग्गा द्वारा शेयर किए गए वीडियो का स्क्रीनशॉट

क्या था पूरा मामला

गौरतलब है कि इसी महीने 6 मई, 2020 को दिल्ली में भाजपा नेता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा को पंजाब पुलिस के करीब 50 जवानों की टीम ने अल सुबह जनकपुरी स्थित उनके घर से गिरफ्तार कर लिया था। बग्गा की गिरफ्तारी की खबर फैलते ही दिल्ली बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता समेत तमाम बीजेपी के नेता और कार्यकर्ता जनकपुरी पुलिस स्टेशन पहुँचे। वहाँ पर पंजाब पुलिस के खिलाफ बग्गा के अपहरण का केस दर्ज कराया गया।

फिर क्या था दिल्ली पुलिस के अनुरोध पर बग्गा को पंजाब पुलिस गिरफ्तार करके मोहाली ले जा रही थी तो हरियाणा पुलिस ने कुरुक्षेत्र में रोक लिया। इधर दिल्ली पुलिस की टीम बग्गा को वापस लाने के लिए कुरुक्षेत्र के लिए रवाना हो गई। उसी दिन दिल्ली पुलिस बग्गा को लेकर वापस दिल्ली भी लौट गई। मामला हाई कोर्ट गया, जहाँ बग्गा की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी गई।

शिक्षा का गुजरात मॉडल: सूरत के सरकारी स्कूलों में एडमिशन की होड़, लगातार तीसरे साल प्राइवेट स्कूल पीछे

दिल्ली के तथकथित शिक्षा मॉडल का आपने खूब प्रचार सुना-देखा होगा। इससे इतर एक मॉडल गुजरात में चल रहा जिसका जमीन पर लगातार असर दिख रहा। राज्य के सूरत के सरकारी स्कूलों में पिछले तीन साल ने एडमिशन के लिए भारी भीड़ देखी जा रही है। इन स्कूलों का संचालन सूरत नगर निगम करती है। इस साल इन स्कूलों में सीट से तिगुने आवेदन नामांकन के लिए आए हैं। इसके पीछे की वजह यह है कि सूरत के सरकारी स्कूलों ने आधुनिक सुविधाएँ प्रदान करने में प्राइवेट स्कूलों को पीछे छोड़ दिया है।

आमतौर पर देखा जाता है कि माता-पिता अपने बच्चों को सरकारी या नगर निगम के स्कूलों में पढ़ने के लिए डालने से हिचकिचाते हैं। लेकिन, सूरत का सरकारी स्कूल नंबर 354 पिछले तीन सालों से बेहतर शिक्षा के कारण लगातार निजी स्कूलों के छात्रों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। यहाँ अभिभावक अपने बच्चों के एडमिशन के लिए बेताब हैं। एक ही बिल्डिंग में चल रहे दो शिफ्ट के स्कूल में कुल 1400 छात्र हैं। लेकिन इस समय 4042 से अधिक छात्रों ने एडमिशन के लिए आवेदन किया है। इन्हें लकी ड्रॉ के जरिए प्रवेश दिया जाएगा।

इसी तरह सूरत के पालनपुर स्थित सरकारी स्कूल नंबर 318 में एक बोर्ड लगा है। इसमें बताया गया था कि प्रवेश केवल किंडरगार्टन के साथ-साथ कक्षा 1, 4 और 5 में दिया जाएगा। हालाँकि, कुछ ही दिनों में स्कूल की सीट भर गई। अभी भी 83 बच्चे प्रतीक्षा सूची में हैं।

कुछ स्कूल अभिभावकों से अपने बच्चों के एडमिशन के लिए ऑनलाइन फॉर्म भरने के लिए कह रहे हैं। सरकारी स्कूलों में नंबर 334, 346, और 355 में 1000-1100 की सीट है, जबकि इन स्कूलों में एडमिशन के लिए लगभग 4200 आवेदन आए हैं। यही वजह है कि स्कूलों को लकी ड्रा का सहारा लेना पड़ रहा है। अब बच्चों को लकी ड्रॉ के माध्यम से एडमिशन दिया जाएगा और बाकी बच्चों को अगले साल फिर से आवेदन करने के लिए कहा जाएगा। इन स्कूलों में कुछ शिक्षकों के बच्चे भी पढ़ते हैं। कुछ स्कूलों में लोगों को अपने बच्चों को प्रवेश दिलाने के लिए सिफारिशों की भी आवश्यकता पड़ती है।

मोटा वराछा क्षेत्र में भारी माँग के चलते गुजराती मीडियम का स्कूल बनाया गया है। स्कूल में 720 सीटों की क्षमता है, जबकि एडमिशन के लिए 3000 फॉर्म आए हैं। इसी कैंपस में अंग्रेजी मीडियम स्कूल के लिए 1000 फॉर्म आए हैं, जबकि इसकी क्षमता 225 सीटों की है। अब यहाँ भी बच्चों को लकी ड्रॉ के जरिए प्रवेश दिया जाएगा।

ऑनलाइन एडमिशन की प्रभारी रमाबेन का कहना है कि समिति के स्कूल में प्रज्ञा प्रोजेक्ट चल रहा है। इसके अलावा निगम के स्कूल में छात्रों को बिना बोझ के पढ़ाई कराई जाती है। इसलिए छात्रों का मानसिक विकास भी बहुत अच्छा होता है। इसके अलावा निगम के शिक्षक मन लगाकर छात्रों को पढ़ाई करा रहे हैं और शिक्षा समिति को अपडेट किया जा रहा है।

इस तरह से सूरत के सरकारी स्कूल सुविधाओं और शिक्षा के मामले में स्थानीय प्राइवेट स्कूलों को पछाड़ते रहे हैं। पहले भी, सूरत के सरकारी स्कूलों में एडमिशन के लिए लंबी कतारें देखी गई हैं।