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महिला की मौत में भेड़ को 3 साल जेल, पीड़ित परिवार को 5 गाय देगा मालिक: सजा पूरी होने के बाद मृतका के परिवार का होगा हक

अफ्रीकी (Afrca) देश दक्षिण सूडान (South Sudan) में एक महिला की हत्या (Murder) के मामले में वहाँ की लोकल कोर्ट ने एक भेड़ (Sheep) को तीन साल जेल की सजा सुनाई है। भेड़ पर सींग से मार-मारकर महिला को अधमरा करने का आरोप था। बाद में चोटों के कारण महिला की मौत हो गई थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, भेड़ ने 45 वर्षीय महिला पर हमला कर दिया और उसे तब तक सींग से मारता रहा जब तक कि वह बेहोश नहीं हो गई थी। इस हमले में महिला की सारी पसलियाँ टूट गईं। उसे घायल अवस्था में अस्पताल ले जाया गया, लेकिन चोट इतनी अधिक थी कि बचाया नहीं जा सका।

इसके बाद महिला की हत्या के आरोप में पुलिस ने भेड़ को गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में मेजर एलिजा माबोर ने सूडान के आई रेडियो को बताया, “भेड़ ने पसलियों पर हमला किया और औरत तुरंत मर गई। ये घटना रुम्बेक ईस्ट अकुएल योल नाम की जगह पर हुई।” पुलिस अधिकारी ने बताया कि भेड़ को उसके मालिक के साथ हिरासत में रखा गया था। लेकिन अदालत ने मालिक को सजा नहीं सुनाई है। भेड़ को अगले तीन साल तक सूडान के लेक स्टेट में एडुएल काउंटी मुख्यालय में एक सैन्य शिविर में रहना होगा।

अदालत ने भेड़ के मालिक को पीड़ित परिवार को मुआवजे के रूप में पाँच गाय देने का आदेश दिया है। इसके अलावा जब तीन साल बाद भेड़ रिहा होगा तो उसे भी पीड़ित परिवार को दे दिया जाएगा।

छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक नन्हेंसर शिव मंदिर से शिवलिंग गायब, ग्रामीणों में मची खलबली के बीच जाँच में जुटी पुलिस

छत्तीसगढ़ के नन्हेसर गाँव में ऐतिहासिक शिव मन्दिर से शिवलिंग गायब होने का मामला सामने आया है। मामला छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के सन्ना थाना क्षेत्र का है जहाँ शिवलिंग गायब होने की सूचना के बाद सोमवार (23 मई, 2022) की देर रात आसपास के गाँवों से बड़ी संख्या में भक्त मन्दिर पहुँच गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए सूचना मिलते ही सन्ना पुलिस भी रात को ही मौके पर पहुँच गई।

वहीं मंगलवार की सुबह जशपुर की एडीशनल एसपी और एसडीओपी समेत भारी संख्या में पुलिस बल नन्हेंसर पहुँच गया था। मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी राजेश अग्रवाल ने चोरी हुए प्राचीन शिवलिंग को बरामद करने के लिए सन्ना थाना प्रभारी बीएल साहू और दुलदुला थाना प्रभारी संतलाल अयाम के नेतृत्व में दो टीम का गठन किया गया है।

क्या है मामला

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जशपुर के सन्ना तहसील मुख्यालय से 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित नन्हेंसर गाँव में सैकड़ों साल पुराना शिव मन्दिर है। नन्हेसर गाँव में स्थित प्राचीन शिव मंदिर के बैगा (पुजारी) की पत्नी का निधन एक सप्ताह पहले हो गया था। जिसकी वजह से अंतिम संस्कार और अन्य कार्यक्रमों में व्यस्तता की वजह से बैगा की जगह एक सरिता नाम की महिला मंदिर की देखभाल कर रही थी। लेकिन, रविवार की शाम को महिला जब मंदिर की सफाई करने आई तो शि​वलिंग गायब मिला, जिसके बाद पूरे इलाके में खलबली मच गई।

अज्ञात आरोपितों ने गड्ढा खनकर पूरा शिवलिंग ही उखाड़ के ले गए हैं। वहीं कहा जा रहा है कि मंदिर से शिवलिंग के चोरी होने की घटना की जानकारी मंदिर की देखभाल करने वाली महिला सरिता ने ही ग्रामीणों को दी थी।

रिपोर्ट के अनुसार, कहा जा रहा है कि घटना की जानकारी मिलते ही एएसपी श्रीमती प्रतिभा पांडेय के नेतृत्व में जाँच के लिए पुलिस टीम नन्हेंसर गाँव पहुँच गई थी। एएसपी ने बताया कि एसपी राजेश अग्रवाल के निर्देश पर मामले में अज्ञात आरोपितों के खिलाफ धारा 380 के तहत अपराध दर्ज कर मामले की जाँच की जा रही है।

गौरतलब है कि कि नन्हेंसर के इस मंदिर के प्रति स्थानीय लोगों की बहुत आस्था है। माना जाता है कि लगभग 80 साल पहले एक स्थानीय व्यक्ति के स्वपन में इस स्थान पर शिवलिंग होने की बात आई थी। इस आधार पर खुदाई किए जाने पर शिवलिंग की प्रकट हुई थी। यहाँ हर साल महाशिवरात्रि के दिन मेला का आयोजन किया जाता है।

अब्दुल की दाढ़ी जैसा ही फेक निकला इमरान से पैसे की लूट: 20 मामले जब ‘जय श्रीराम’ के नाम पर फैलाया झूठ

महाराष्ट्र के औरंगाबाद में गुरुवार (19 मई 2022) को सिडको पुलिस (CIDCO Police) ने इमरान खान नाम के एक युवक को फर्जी वीडियो बनाकर साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के आरोप में गिरफ्तार किया। वीडियो में आलमगीर कॉलोनी के निवासी इमरान खान से ‘जय श्रीराम’ के नारे लगाते हुए युवकों को 1700 रुपए छीनते और उसे पीटते दिखाया गया था।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिस वीडियो में इमरान खान को 15 युवकों द्वारा पीटते हुए दिखाया गया था, वह फर्जी है। जो युवक इमरान खान को पीटते हुए ‘जय श्रीराम’ के नारे लगा रहे थे, वे उसी के लोग हैं। बताया जा रहा है कि इमरान खान ने 15 से अधिक लोगों को हिंदुओं के कपड़े पहनाकर जय श्रीराम के नारे लगाते हुए खुद को पीटने को कहा था।

ये पहला मामला नहीं है जब जय श्रीराम के नाम पर फेक न्यूज फैलाई गई हो। इससे पहले भी कई मामले सामने आ चुके हैं, जब ‘जय श्री राम’ बुलवाने या इस नारे के नाम पर पिटाई का दावा झूठा निकल चुका है।

‘मुस्लिम बुजुर्ग को पीटा-दाढ़ी काटी, बुलवाया जय श्री राम’ – पुलिस ने नकारा

आरोप लगाया गया कि उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में एक मुस्लिम बुजुर्ग से जबरदस्ती ‘जय श्री राम’ बुलवाया गया। मुस्लिम बुजुर्ग ने 4 अज्ञात लोगों पर पिटाई और जबरन दाढ़ी शेव कराने का आरोप लगाया। AIMIM के असदुद्दीन ओवैसी और AltNews के जुबैर ने ‘जय श्री राम’ को बदनाम करने का बीड़ा उठाया। इन दोनों ने आरोपितों में आरिफ और मुशाहिद का नाम छिपा लिया। ये मामला ताबीज को लेकर मारपीट का निकला।

मुस्लिमों ने ही मस्जिद की दीवार पर दंगा भड़काने के लिए लिखे थे ‘जय श्री राम’

भैंसा के एएसपी किरण खरे ने कहा कि मस्जिद की दीवारों पर ‘जय श्री राम’ लिखने वाले लोगों की सीसीटीवी फुटेज से पहचान कर ली गई। आरोपितों में से एक की पहचान मोहम्मद अब्दुल कैफ के रूप में हुई और दूसरा नाबालिग निकला। घटना तेलंगाना के भैंसा की थी। कुछ महीनों पहले ही भैंसा में हिंदू समुदाय के खिलाफ दंगा भड़का था, जिसकी वजह से वहाँ पर सांप्रदायिक तनाव उत्पन्न हो गया था।

तनिष्क स्टोर में ‘जय श्री राम’ के नारों का खौफ? फैक्ट चेकर मो. जुबैर ने किया हिन्दुओं को बदनाम करने का प्रयास

मोहम्मद जुबैर ट्विटर पर तनिष्क विज्ञापन विवाद का फायदा उठाते हुए यह साबित करने का प्रयास करते देखा गया कि लोग ‘जय श्री राम’ का नारा लगाकर तनिष्क के शोरूम पर हमला करने की प्लानिंग कर रहे हैं या फिर तनिष्क स्टोर में मौजूद लोगों को डराने का प्रयास कर रहे हैं और हिंदू तनिष्क स्टोर के बाहर आक्रामक प्रदर्शन कर रहे हैं और शोरूम में मौजूद सभी लोगों पर हावी हो रहे हैं। ये बात भ्रामक निकली।

दरअसल, वीडियो से पता चला कि दरअसल लोग प्रदर्शन तो कर रहे थे, लेकिन जिस तरह हिन्दुओं को निशाना बनाते हुए मोहम्मद जुबैर ने अपने वीडियो के जरिए दर्शाया, वैसे नहीं। जुबैर के ही पोस्ट पर ‘बेफिटिंग फैक्ट’ नाम से एक ट्विटर यूजर ने तनिष्क शोरूम के बाहर हो रहे प्रदर्शन का वीडियो पोस्ट किया। कुछ लोग शोरूम के बाहर जमीन पर बैठकर शांतिपूर्ण तरीके से सिर्फ जय श्री राम का नारा लगा रहे थे। 

‘जय श्रीराम बुलवा, जबरन शराब पिला कर मार डाला’: कैब ड्राइवर आफताब की हत्या पर मीडिया का झूठ, UP पुलिस ने खोला राज

मोहम्मद आसिफ खान नामक व्यक्ति ने एक खबर शेयर करते हुए दावा किया कि गौतम बुद्ध नगर में आफताब आलम नामक एक कैब ड्राइवर को मार डाला गया। साथ ही ये भी दावा किया कि हत्या से पहले कैब ड्राइवर को ‘जय श्री राम’ बोलने के लिए बाध्य किया गया और शराब भी पीने के लिए मजबूर किया गया। दरअसल, मामला सांप्रदायिक नहीं था। कैब ड्राइवर आफ़ताब जब बुलंदशहर में एक बुकिंग को छोड़ कर वापस लौट रहे थे, तभी कुछ असामाजिक तत्व टैक्सी में बिना बुकिंग कराए ही बैठ गए। तभी सारा विवाद हुआ।

‘गफ्फार के साथ दारू के नशे में लूट के लिए हुई मारपीट’: जबरन ‘जय श्री राम’ बुलवाने का लगाया था आरोप

राजस्थान के सीकर में एक ऑटो चालक ने आरोप लगाया कि उससे जबरदस्ती ‘जय श्री राम’ और ‘मोदी ज़िंदाबाद’ बुलवाया गया। जनसत्ता, आजतक और नवभारत टाइम्स सहित कई मीडिया संस्थानों ने इस घटना को जगह दी। सच्चाई ये थी कि आरोपितों ने उनसे जर्दा माँगा। इसके बाद हुई कहासुनी के बाद उन्होंने ऑटो ड्राइवर को खदेड़ कर उसके साथ मारपीट की। आरोपित शराब के नशे में थे और पहले भी लूटपाट की घटनाओं में संलिप्त रहे हैं।

जिस ‘नेपाली’ का सिर मूँड़ा लिखा ‘जय श्री राम’, वो निकला भारतीय: ₹1000 के लिए कराया वीडियो शूट, 6 गिरफ्तार

वाराणसी में जिस व्यक्ति का जबरन सिर मूँड़ कर उस पर ‘जय श्री राम’ लिख दिया गया था, वो भारतीय निकला। इससे पहले ख़बर आई थी कि वो व्यक्ति नेपाली था, जिसका सिर मूँड़ कर उससे नेपाल के प्रधानमंत्री ओली के खिलाफ नारे लगवाए गए और उसे गंजे सिर पर ‘जय श्री राम’ लिख दिया गया। वाराणसी पुलिस ने खुद इस बात की सूचना दी थी कि उक्त व्यक्ति 1000 रुपए लेकर भाड़े का नेपाली बना था।

शनिवार (जुलाई 18, 2020) को एसएसपी अमित पाठक ने खुलासा किया था कि वीडियो में नेपाली बता कर पेश किया जा रहा व्यक्ति मूल रूप से भारतीय है। उसका नाम धर्मेंद्र भारतीय है। पुलिस ने बताया था कि साड़ी की दुकान में काम करने वाले धर्मेंद्र की आर्थिक तंगी का फायदा उठाते हुए कुछ लोगों ने उसे लालच दिया और वीडियो शूट करवाने के लिए ये सब ड्रामा रचा।

गोधरा में ‘जय श्री राम’ न बोलने पर मुस्लिम युवकों की पिटाई की खबर निकली झूठी

दिल्ली निवासी मो. कामिल ने आरोप लगाया कि उसके भाई से सिर्फ इस बात के लिए मारपीट की गई क्योंकि आरोपित उससे ‘जय श्रीराम’ बोलने के लिए दवाब बना रहे थे। इसके बाद हरकत में आई दिल्ली पुलिस ने पीड़ित से पूछताछ की और कहा कि यह मामला दो समुदाय के लड़कों के बीच महज झगड़े का है। यह आपसी झगड़ा था, लेकिन इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की जा रही थी। 

कुछ मीडिया संस्थानों ने क्रॉप्ड वीडियो के जरिए यह साबित करने की कोशिश की थी कि झारखंड की भाजपा सरकार में मंत्री सीपी सिंह ने कॉन्ग्रेस विधायक इरफान अंसारी को जय श्री राम बोलने के लिए मजबूर किया। यह आधा सच था। भाजपा नेता को विलेन की तरह से पेश करने के लिए मीडिया संस्थानों ने जान-बूझकर पूरे वीडियो का एक ही हिस्सा दिखाया। वीडियो के शुरुआती हिस्से को देखने से पता चलता है कि सीपी सिंह जय श्री राम पर कॉन्ग्रेस विधायक के कॉमेंट का जवाब दे रहे थे।

चंदौली: खालीद ने किया आत्मदाह, मीडिया ने फैलाया झूठ

आज तक और इंडिया टुडे ने खबर चलाई कि उत्तर प्रदेश के चंदौली गाँव में खालीद ने जय श्री राम नहीं बोला, तो उसे आग में झोंक दिया गया। मगर चंदौली के एसपी संतोष कुमार सिंह ने इस बारे में बयान जारी करते हुए कहा कि पुलिस ने खालीद के बयानों में विरोधाभास पाया है। उन्होंने बताया कि एक चश्मदीद के बयान के मुताबिक, खालीद को किसी समूह ने आग में नहीं झोंका, बल्कि उसने खुद ही आग लगाई थी। उन्होंने कहा कि बच्चा जिस तरह से अलग-अलग लोगों को अलग-अलग बयान दे रहा है, उसे देखकर ऐसा लग रहा है कि जैसे उसे किसी ने ये सारी बातें सिखाई हैं। एसपी ने बताया कि बच्चा जिस दो गाँवों के बारे में बात कर रहा है, वो दोनों गाँव अलग- अलग दिशाओं में स्थित है और जिस जगह के बारे में वो बता रहा है वहाँ की सीसीटीवी फुटेज में वो कहीं भी नहीं है। इससे साफ जाहिर हो रहा है कि खालीद किसी के सिखाने पर ये बयान दे रहा है।

औरंगाबाद: शेख आमेर ने समुदाय में नाम करने के लिए बोला झूठ

शेख आमेर ने आजाद चौक से बजरंग चौक की तरफ जाते वक्त एक कार वाले से मामूली सा विवाद हो गया। आमेर ने उन लोगों को सबक सिखाने का सोचा और एक ही दिन पहले शहर के हुडको कॉर्नर पर घटी घटना को याद करते हुए उसने जय श्री राम न बोलने पर पिटाई की झूठी कहानी बनाई और पुलिस में शिकायत कर दी।

शिकायत दर्ज कराने के एक दिन बाद ही आमेर अपने बयान से पलट गया। उसने अपना बयान वापस लेते हुए कहा कि उसने अपने समुदाय के सदस्यों के बीच अपना कद बढ़ाने और उससे झगड़ा करने वाले लोगों को सबक सिखाने के लिए मनगढ़ंत कहानी के आधार पर पुलिस से शिकायत की।

औरंगाबाद: नहीं किया भीड़ ने मजबूर

इमरान इस्माइल पटेल ने दावा किया कि रात को भीड़ ने घर लौटते समय पकड़ कर मारपीट की और जय श्री राम बोलने के लिए मजबूर किया। वहीं न केवल पुलिस बल्कि इमरान को बचाने वाले चश्मदीद ने भी उसके दावे की तस्दीक करने से साफ़ मना कर दिया है। पुलिस के अनुसार यह एक निजी रंजिश के चलते हुई हाथापाई थी।

ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है कि न केवल ‘हमसे जय श्री राम बुलवाया जा रहा है’ के दावों की बाढ़ आ रही है, बल्कि अधिकाँश दावे गलत भी साबित हो रहे हैं? अगर दावे सही साबित होते तो माना जा सकता था कि चाहे किसी के बहकावे में, चाहे हिन्दूफ़ोबिक राज्य-व्यवस्था से ऊबकर हिन्दू भड़क उठे हैं। लेकिन चूँकि लगभग सारे दावे भी गलत साबित हो रहे हैं, तो ऐसा भी नहीं है।

मुज़फ़्फ़रनगर: न दाढ़ी नोंची, न राम-नाम बुलवाया

इमाम इमलाकुर रहमान जब अपने साथ मारपीट की बात पर मुज़फ़्फ़रनगर में FIR करने पहुँचे तो न ही मामले में कोई जय श्री राम था, और न ही उन्होंने दाढ़ी नोंचे जाने की बात अपनी FIR में कही। लेकिन जब तक वह मामले की पूरी FIR करने बागपत पहुँचे (जहाँ का मामला था), यह सब चीज़ें बागपत FIR में अतिरिक्त आ गईं थीं। न केवल इन्हें एसपी ने ख़ारिज किया, बल्कि अंदेशा भी जताया कि साम्प्रदायिक एंगल जानबूझकर जोड़ा गया ताकि मामले में त्वरित कार्रवाई हो।

उन्नाव: जुमे तक अगर काज़ी साहब की बात न मानी तो…

क्रिकेट खेलने में स्थानीय लड़कों से हुए हुए विवाद और झगड़े को लेकर मदरसे के बच्चे जब काज़ी निसार मिस्बाही के पास पहुँचे तो क़ाज़ी साहब खुद ही ‘स्पिनर’ निकले। न केवल मदरसे के बच्चों से जबरन जय श्री राम बुलवाए जाने का ‘स्पिन’ उन्होंने मामले में लगा दिया, बल्कि धमकी भी दी कि अगर जुमे तक उनके बताए चार ‘दोषियों’ को उसी जुमे तक न पकड़ा गया तो ‘जो एक्शन कहीं भी नहीं हुआ, वो होगा‘

वह बात और है कि न केवल पुलिस की जाँच में यह मामला भी साम्प्रदायिक रूप से खोखला निकला, बल्कि फिर भी प्रदेश के प्रमुख सचिव (सूचना) तक को मामले पर प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलानी पड़ गई।

कानपुर: नशे में हुई लड़ाई पर झूठ

ऑटो-ड्राइवर आतिब पर हमला बेशक हुआ, ईंट-पत्थर से मारकर उसे मरणासन्न भी बिलकुल किया गया, लेकिन यहाँ भी जय श्री राम बोलने के लिए मजबूर करने की बात झूठ निकली। पुलिस जाँच के अनुसार यह एक नशे में हुई हाथापाई थी, जिसकी परिणति आतिब को शौचालय में बाँधकर पीटने के रूप में हुई।

कूच बिहार: आप्सी मियाँ की करनी हिन्दुओं के सर

आप्सी मियाँ ने अपने हममज़हब असगर को कान पकड़ कर उठक-बैठक लगाने और जय श्री राम बोलने के लिए मजबूर किया। और लिबरल गिरोह ने हिन्दुओं को जिम्मेदार ठहराने में समय नहीं लगाया। यह भी ध्यान नहीं दिया कि कुछ बिहार पश्चिम बंगाल में है- जहाँ हिन्दू खुद भी अगर जय श्री राम बोलें तो हो सकता है उन्हें गोली मारी जा सकती है। ऐसे में एक हिन्दू भला दुसरे मजहब वाले से जय श्री राम बुलवाएगा?

दिल्ली: चश्मदीदों ने मोमिन के आरोप को बताया झूठा

रोहिणी, सेक्टर-20 के मदरसे में पढ़ाने वाले मोहम्मद मोमिन ने आरोप लगाया कि जय श्री राम बोलने से इंकार करने पर कुछ लोगों ने उनकी कार को टक्कर मार दी। पुलिस ने जाँच की लेकिन एक भी चश्मदीद गवाह ने मोमिन की बात का समर्थन नहीं किया। घटनास्थल के पास लगे सीसीटीवी फुटेज से भी आरोपों की पुष्टि नहीं हुई।

करीमनगर: ‘मजनूँ’ की पिटाई बनी ‘जय श्री राम’

किसी समय ’15 मिनट के लिए पुलिस हटा दो’ का दावा करने वाले अकबरुद्दीन ओवैसी की AIMIM के नेता रहे और आजकल ‘मजलिस बचाओ’ से जुड़े अमजद उल्लाह खान ने दावा किया कि भाजपा-संघ के लोगों ने एक दूसरे समुदाय के किशोर को पीटा क्योंकि उसने जय श्री राम कहने से मना कर दिया था। करीमनगर के कमिश्नर ने साफ किया कि उनकी जाँच में ऐसा कुछ नहीं निकला, और यह निजी कारणों से हुई हिंसा थी- यह लड़का किसी किशोरी को तंग करने को लेकर उस लड़की के पक्ष के लोगों के हाथों पिटा था। यही नहीं, पिटने वाले लड़के के भी अपने बेटे की गलती मानते हुए माफ़ी माँगी।

गुरुग्राम: बरकत का दावा निकला झूठा

मोहम्मद बरकत ने दावा किया कि गुरुग्राम में कुछ हिन्दुओं ने उसे घेर कर मारा, उसकी इस्लामी गोल टोपी फेंक दी और ‘जय श्री राम’ बोलने के लिए मजबूर किया। हरकत में आई गुरुग्राम पुलिस ने 15 लोगों को हिरासत में लिया, 50 के करीब सीसीटीवी फुटेज खंगालीं, और अंत में इस नतीजे पर पहुँची कि बरकत अली के साथ मार-पीट तो हुई, लेकिन न ही उसकी टोपी किसी ने ‘फेंकी’ और न ही जय श्री राम बोलने के लिए मजबूर किया गया। यही नहीं, स्वराज्य संवाददाता स्वाति चतुर्वेदी की जाँच में तो शक की सूई इस ओर भी घूमी कि बरकत को किसी ने सिखाया-पढ़ाया तो नहीं था इस घटना को साम्प्रदायिक रंग देने के लिए।

आपराधिक घटना को सांप्रदायिक मोड़

जून 2017 में राजस्थान के नागौर जिले में लोगों के एक समूह ने अपने चेहरे छुपाते हुए कुछ लोगों को कैमरे पर गाली-गलौज करते हुए और एक महिला को प्लास्टिक के पाइप से पीटते हुए, उसे जबरन धार्मिक नारे लगाने के लिए दबाव डालते हुए रिकॉर्ड किया। यह स्पष्ट नहीं था कि इस घटना को किसने रिकॉर्ड किया था, लेकिन वीडियो में साफ दिखाई दे रहा था कि लोग महिला को ‘अल्लाह’ और ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने के लिए मजबूर कर रहे थे। इस घटना में भी, मीडिया गिरोह के लोगों ने ‘अल्लाह’ वाले हिस्से को आसानी से अनदेखा कर दिया और पूरी घटना को सांप्रदायिक स्पिन देने के लिए केवल ‘जय श्री राम’ भाग पर ध्यान केंद्रित किया। यह घटना पूरी तरह से आपराधिक थी और सांप्रदायिक स्पिन के बिना भी अपने आप में काफी भयावह थी।

दिल्ली: दो समुदाय के लड़कों के झगड़े में जबरन ‘जय श्रीराम’ ठूँसा

मई 2020 में दिल्ली निवासी मो. कामिल ने आरोप लगाया कि उसके भाई से सिर्फ इस बात के लिए मारपीट की गई क्योंकि आरोपित उससे ‘जय श्रीराम’ बोलने के लिए दवाब बना रहे थे। इसके बाद हरकत में आई दिल्ली पुलिस ने पीड़ित से पूछताछ की और बताया कि यह मामला दो समुदाय के लड़कों के बीच महज झगड़े का है।

(नोट: ये चुनिंदा घटनाएँ हैं जिनकी हकीकत खबरों में आ गईं। ऑपइंडिया समय-समय पर इस सूची को अपडेट करता रहेगा, क्योंकि यह कोई संयोग नहीं बल्कि एक सोचा-समझा पैटर्न है हिंदुओं को बदनाम करने का।)

‘सब कुछ तुम्हारे जन्मतिथि जैसा भ्रामक नहीं’: अमित मिश्रा ने शाहिद अफरीदी को किया ‘बोल्ड’, आतंकी यासीन मलिक के लिए कर रहा था बैटिंग

आतंकी यासीन मलिक का समर्थन करने पर भारतीय स्पिन गेंदबाज अमित अमित मिश्रा ने पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान शाहिद अफरीदी को करारा जवाब दिया है। भारत के लिए 68 अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुके दाहिने हाथ के लेग-ब्रेक स्पिनर अमित मिश्रा ने शाहिद अफरीदी के ट्वीट का जवाब देते हुए लिखा, “प्रिय शाहिद अफरीदी, यासीन मलिक ने अदालत में खुद ही अपना दोष कबूल किया है। सब कुछ आपके जन्मतिथि की तरह भ्रामक नहीं है।”

बता दें कि शाहिद अफरीदी ने आतंकी का समर्थन करते हुए ट्वीट किया था, “भारत अपने जबरदस्त मानवाधिकार हनन के कृत्यों के खिलाफ किए जाने वाली आलोचना की आवाज़ों को दबाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है, जो विफल होगा। यासीन मलिक पर मनगढंत आरोप लगाए जाने से कश्मीर की आज़ादी के संघर्ष पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। मैं संयुक्त राष्ट्र (UN) से आग्रह करता हूँ कि कश्मीरी नेताओं के खिलाफ चल रहे अवैध और अन्यायपूर्ण ट्रायल्स पर संज्ञान ले।”

साथ ही शाहिद अफरीदी ने पीछे से अपनी एक तस्वीर भी पोस्ट की। उनके आगे पाकिस्तान के नेशनल फ्लैग और उसके कब्जे वाले कश्मीर (जिसे पाकिस्तानी ‘आज़ाद कश्मीर’ कहते हैं) के कथित झंडे को देखा जा सकता है। इससे पहले पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने भी यासीन मलिक का समर्थन करते हुए कहा था कि ‘भारत अधिकृत जम्मू कश्मीर’ में ‘कश्मीरी नेताओं के साथ दुर्व्यवहार’ का दुनिया को संज्ञान लेना चाहिए।

उन्होंने कहा था कि ‘प्रमुख कश्मीरी नेता’ यासीन मलिक पर आतंकवाद के ‘झूठे आरोप लगा कर’ दोषी ठहराने की प्रक्रिया ‘भारत के जबरदस्त मानवाधिकार हनन के आलोचकों को चुप कराने’ का एक विफल प्रयास है। उन्होंने ये भी कहा था कि मोदी सरकार को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। इसी तरह पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने ‘हिंदुत्व फासिस्ट’ बता दिया और यासीन मलिक पर लगे आरोपों को झूठा बताया।

‘तुम अपने पिताजी से पैसे लेकर बनवाए थे?’: केशव मौर्य के साथ ‘तुम-तड़ाक’ पर उतरे अखिलेश यादव, CM योगी ने दिया करारा जवाब

उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सेशन के दौरान सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से ‘तुम-तड़ाक’ कर के बात करनी शुरू कर दी। दरअसल, समाजवादी पार्टी के कार्यकाल के दौरान सैफई में हुए आयोजनों पर निशाना साधते हुए केशव प्रसाद मौर्य ने पूछा कि क्या वो इसके लिए पैसे सैफई की जमीनें भेज कर लाते थे? डिप्टी सीएम ने पूछा कि क्या इसके लिए पैसे आपने सैफई की जमीन बेच कर लाए थे?

इस पर पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भड़क गए और केशव प्रसाद मौर्य को ‘तुम’ कह कर सम्बोधित करना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा, “हम नहीं लाए थे, तो क्या तुम लेकर आए थे? केशव प्रसाद मौर्य दूसरों की चिंता करते रहे, इसीलिए चुनाव हार गए। तुम अपने घर से, अपने पिताजी से पैसा लाते हो बनाने के लिए? (सड़कें, पुल वगैरह) तुमने राशन बाँटा तो पिताजी से लेकर? चुप, हट, क्या बात है।” इसके बाद सदन में जोरों का हंगामा होने लगा।

हालाँकि, इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी हस्तक्षेप किया और याद दिलाया कि कैसे पूरा सदन काफी देर तक अखिलेश यादव को सुनता रहा और अब जब डिप्टी सीएम बोल रहे हैं तो इस तरह ‘रनिंग कमेंट्री’ का क्या मतलब है? उन्होंने कहा कि एक सम्मानित नेता के प्रति इस प्रकार की टिप्पणी सही नहीं है और सरकार विकास कार्य कराती है तो इसकी उपलब्धियाँ गिनाना गलत नहीं है। उन्होंने कहा कि उप-मुख्यमंत्री के प्रति इस तरह की भाषा सदन के गरिमा के अनुरूप नहीं है।

सीएम योगी ने कहा कि जिस तरह का आचरण करेंगे, उसी तरह की प्रतिक्रिया मिलनी तय है। उन्होंने कहा कि सहमति-असहमति हो सकती है, लेकिन असभ्य भाषा का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष की काफी बातों पर हम भी आपत्ति जता सकते थे, लेकिन हमने सदन की गरिमा का ध्यान रखा। अखिलेश यादव ने एक घंटे के भाषण में योगी सरकार पर लगातार हमले किए, लेकिन जवाब मिलने पर तिलमिला गए।

डिप्टी सीएम मौर्य ने इस दौरान कह दिया कि 2027 में भी कमल खिलेगा। पिछली सरकार में मौर्य के पास पीडब्ल्यूडी विभाग था। अखिलेश यादव ने उन पर तंज कसते हुए कहा था कि वो भूल गए हैं कि उनके जिला मुख्यालय की सड़कें किसने बनवाई और फोरलेन किसने बनवाई। बता दें कि गुरुवार (26 मई, 2022) को यूपी सरकार अपना बजट पेश करेगी, जो 6.5 लाख करोड़ रुपयों का हो सकता है। ये बजट सेशन 6 दिनों का है।

शूटिंग के बहाने बुलाया, कपड़े उतार सड़क किनारे दफना दिया: गला घोंटने से पहले हरियाणवी सिंगर को हत्यारों ने दिया था ड्रग्स, 11 मई से थी लापता

हरियाणवी सिंगर संगीता उर्फ दिव्या की हत्या मामले में दिल्ली पुलिस ने दो आरोपितों को गिरफ्तार कर मर्डर की गुत्थी सुलझा ली है। हरियाणा के महम में संगीता को पहले ड्रग्स दिया गया और फिर उसे कार में ही गला दबाकर मार दिया। उसके बाद उसकी बॉडी को सड़क किनारे गड्ढे में दबा दिया। हत्या से पहले उसके कपड़े उतार दिए गए थे। पुलिस को उसका क्षत-विक्षत शव मिला था। दिल्ली पुलिस ने बताया है कि आरोपितों ने उसकी हत्या के लिए साजिश रची थी और उसे अल्बम शूटिंग के बहाने महम बुलाया था। हैरान करने वाली बात है कि आरोपित हरियाणवी लोक गायिका संगीता के दोस्त ही थे।

पुलिस ने बताया कि संगीता 11 मई 2022 से लापता थी। उसके परिवार ने 14 मई को इस संबंध में दिल्ली के जफरपुर कलां इलाके में शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद पुलिस ने जाँच के दौरान 21 मई को रवि और अनिल को महम में गिरफ्तार किया। दोनों ने खुलासा किया कि उन्होंने गायिका की हत्या का षड्यंत्र रचा था। परिजनों ने रेप एंगल से भी मामले की जाँच की माँग की है। 

11 मई को क्या हुआ था

11 मई को दोपहर करीब तीन बजे भिवानी में गाना रिकॉर्ड करने के लिए 29 वर्षीय सिंगर पूर्वी दिल्ली स्थित जाफराबाद के अपने घर से निकली थी। उसने अपने परिवार को बताया था कि वह गाना रिकॉर्ड करने जा रही है। मोहित उसका गाना रिकॉर्ड कराना चाहता है। संगीता ने फोन पर रात में करीब साढ़े आठ बजे अपने परिवार से बात की थी और कहा था कि वह सोने जा रही है। यही परिवार संग उसकी आखिरी बातचीत थी। संगीता एक दलित परिवार से थी।

रेप का आरोप लगा चुकी थी गायिका

पुलिस उपायुक्त (द्वारका) शंकर चौधरी ने बताया कि आरोपितों ने एक म्यूजिक वीडियो बनाने के बहाने संगीता से संपर्क किया था। उन्होंने बताया कि मोहित उर्फ अनिल दिल्ली से उसे अपने साथ लेकर गया, उसे नशीला पदार्थ दिया गया और फिर उसकी हत्या कर दी गई। पुलिस का अनुसार बलात्कार को लेकर अभी तक कोई सबूत नहीं मिला है। उन्होंने बताया कि आरोपित पहले महिला के दोस्त थे। संगीता ने इससे पहले रवि के खिलाफ बलात्कार का मामला भी दर्ज कराया था। बताया जा रहा है कि रवि ने संगीता को शादी का प्रस्ताव दिया था और फिर बाद में उसका यौन उत्पीड़न किया।

संगीता का फोन बार-बार स्विच ऑफ आने के बाद परिवार ने पुलिस से संपर्क किया, मगर उसे कोई जवाब नहीं मिला। 13 मई को परिवार ने फिर से पुलिस से संपर्क किया, मगर कोई सफलता हाथ नहीं लगी। इसके बाद 14 मई को मिसिंग रिपोर्ट दर्ज कराई गई। पुलिस जाँच में जुटी रही, आरोपितों को गिरफ्तार किया, तब जाकर 23 मई को शव बरामद हुआ। पुलिस का कहना है कि शुरुआती जाँच में पता चलता है कि गायिका की हत्या गला घोंटकर की गई।

हाथ छोड़ साइकिल के साथ राज्यसभा के लिए निकले कपिल सिब्बल, नेटिजन्स बोले- आजम खान की पैरवी का मिला नजराना

कॉन्ग्रेस में लंबे समय से बगावती सुर बुलंद करने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। इसका खुलासा उन्होंने आज (25 मई, 2022) को समाजवादी पार्टी के समर्थन से राज्यसभा के लिए निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल करने के बाद किया है। नामांकन के बाद पत्रकारों से बातचीत में कॉन्ग्रेस के बागी गुट G-23 के सदस्य कपिल सिब्बल ने खुलासा किया कि उन्होंने 16 मई को ही कॉन्ग्रेस से त्यागपत्र दे दिया था

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कपिल सिब्बल ने राज्यसभा में नामांकन के बाद सभी दलों के समर्थन का दावा किया है। वहीं इस्तीफे की वजह बताते हुए सिब्बल ने कहा, ”हम विपक्ष में रहकर एक गठबंधन बनाना चाहते हैं ताकि मोदी सरकार का विरोध कर सकें। हम चाहते हैं कि 2024 में ऐसा माहौल बने हिन्दुस्तान में कि मोदी सरकार की जो खामियाँ हैं वह जनता तक पहुँचाई जाएँ। मैं खुद इसका प्रयास करूँगा।”

कपिल सिब्बल के नामांकन पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा, “आज कपिल सिब्बल ने राज्यसभा के लिए नामांकन किया है। वो समाजवादी पार्टी के समर्थन से राज्यसभा में जा रहे हैं। पहला नामांकन हुआ है। पार्टी की तरफ से दो और जा सकते हैं, बहुत जल्द उनका भी नामांकन हो जाएगा।”

हालाँकि, राजनीतिक हलकों से लेकर सोशल मीडिया में इसे कपिल सिब्बल द्वारा सपा की मदद का ईनाम माना जा रहा है। वहीं यह भी कहा जा रहा है कि अखिलेश यादव ने इसी बहाने पार्टी में चल रही कलह पर भी लगाम लगाने की कोशिश की है।

बता दें कि कपिल सिब्बल ने सपा नेता आज़म ख़ान का मामला अदालत में लड़ा और आखिरकार उन्हें बेल पर आज़ाद करा लिया। वहीं कहा जा रहा है कि नाराज़ चल रहे आज़म खान को सिब्बल के ज़रिए बड़ी आसानी से साधा जा सकता है। आज़म खान ने कपिल सिब्बल को राज्यसभा भेजे जाने का स्वागत भी किया है।

यही नहीं, चुनाव आयोग में भी पार्टी सिंबल के मामले में कपिल सिब्बल ने अखिलेश यादव के पक्ष में पैरवी कर उन्हें जीत दिलाई थी। वहीं सिब्बल कुछ अन्य मामलों में भी सपा के कई नेताओं के साथ मुलायम सिंह यादव के लिए भी मुक़दमे लड़ चुके हैं।

जहाँ एक तरफ इस बात का शोर है कि अखिलेश यादव ने कॉन्ग्रेस नेता को आज़म खान का वकील होने का ईनाम दिया है। वहीं अखिलेश यादव राज्यसभा चुनाव को पार्टी की अंदरूनी राजनीति को खत्म करने का जरिया बनाने का प्रयास करते दिख रहे हैं। आजम खान 27 माह बाद सीतापुर जेल से बाहर निकले हैं। कोर्ट में उनकी पैरवी पूर्व केंद्रीय मंत्री और मशहूर वकील कपिल सिब्बल ने की है। ऐसे में कपिल सिब्बल को पार्टी की ओर से आजम खान को मनाने की जिम्मेदारी दी जा सकती है।

बता दें कि कपिल सिब्बल ने आज़म खान के समर्थन के लिए शुक्रिया अदा किया। सिब्बल ने कहा, ”मुझे खुशी है कि मैं राज्यसभा का निर्दलीय उम्मीदवार बनने जा रहा हूँ। मैं हमेशा इस देश में स्वतंत्र आवाज बनना चाहता था। मुझे खुशी है कि अखिलेश यादव ने इसे समझा। हम पार्टी का सदस्य होने पर उसके अनुशासन से बंध जाते हैं।”

वहीं सोशल मीडिया पर लोग तरह-तरह के कमेंट कर रहे हैं। मिहिर झा ने लिखा, “आज़म खान: कपिल सिब्बल ने जमानत दिलाकर हक अदा किया, उनको फीस देने की हमारी हैसियत नहीं” 25th May: “सिब्बल को समाजवादी पार्टी ने राज्य सभा भेजा। इसी ट्वीट में उन्होंने यह भी लिखा कि राज्यसभा के सीट के लिए कितना पड़ा, कपिल सिब्बल की फीस से भी कम?”

कपिल सिब्बल के नामांकन पर यहाँ कुछ दूसरे सोशल मीडिया रिएक्शन भी देख सकते हैं।

गौरतलब है कि राज्यसभा की 11 सीटों पर इस बार चुनाव होना है। विधानसभा में सदस्यों की संख्या के आधार पर देखा जाए तो इन 11 सीटों में से भाजपा 7 और समाजवादी पार्टी 3 सीटों पर जीत दर्ज कर सकती है।

भूत उतारने के नाम पर मौलवी जाकिर नाइक ने सौबी जान को इतना मारा कि हो गई मौत, J&K पुलिस ने शौहर समेत तीन को किया गिरफ्तार

जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) से हैरान करने वाली घटना सामने आई है। मंगलवार (24 मई 2022) को शोपियाँ में सौबी जान नाम की एक मुस्लिम महिला को बुरी ताकतों (Demon) से मुक्ति के नाम पर एक मौलवी या पीर ने इतनी बेरहमी से पीटा कि उसकी मौत (Death) हो गई। इस मामले में पुलिस ने तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए आरोपितों में महिला का शौहर, भूत भगाने वाला मौलवी और एक अन्य व्यक्ति शामिल है। पुलिस अधिकारियों ने बुधवार को कहा कि दम्हाल हंजीपोरा कुलगाम के मुजफ्फर अहमद शेख की बीवी सौबी जान को शैतान से बचाने के लिए शोपियाँ के ही हंजीपोरा कछदूरा स्थित एक मौलवी के पास ले जाया गया था। वहाँ सांगड़ काजीगुंड के रहने वाले मौलवी जाकिर अहमद नाइक ने महिला को इतनी बुरी तरह पीटा कि उसकी हालत गंभीर हो गई। अधिकारी ने बताया कि बाद में उसे जिला अस्पताल कुलगाम ले जाया गया, जहाँ उसकी मौत हो गई।

पुलिस का कहना है कि मामले में जाकिर अहमद नाइक, मृतक के शौहर और तीसरे शख्स को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार किए गए तीसरे शख्स के बारे में कहा जा रहा है कि वह जाकिर अहमद नाइक का शिष्य है। हालाँकि, अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन पुलिस अधिकारी का कहना है कि तीनों आरोपित युवा हैं।

बताया जा रहा है कि महिला अपने मायके आई हुई थी। महिला के शौहर को ही इस बात का शक था कि सौबी जान पर भूत का साया है। इसके बाद उसने जाकिर अहमद नाइक से संपर्क किया। बाद में मौलवी ने उपचार नाम पर महिला को मौत के घाट उतार दिया। शोपियाँ जिले की पुलिस अधीक्षक तनुश्री ने तीनों आरोपितों को गिरफ्तार किए जाने की पुष्टि की है। पुलिस अधिकारी ने कहा कि मामले में आगे की जाँच की जा रही है।

खुद छोटे कपड़ों पर सुने ताने, बहनें पहनती हैं हिजाब: महिला बॉक्सर निखत जरीन को सलमान खान के ट्वीट पर आया रोना

तेलंगाना के निजामाबाद की रहने वाली महिला बॉक्सर निखत जरीन (Nikhat Zareen) आजकल खासा चर्चा में हैं। विश्व बॉक्सिंग चैम्पियनशिप में गोल्ड मेडल हासिल करने वाली निखत जरीन ने हिजाब विवाद (Hijab Controversy) को व्यक्तिगत चॉइस का मुद्दा बताया है। उन्होंने खुलासा किया कि खुद उनके घर में उनकी दो बहने हिजाब पहनती हैं। लेकिन, स्पोर्ट्स में होने के कारण वो ऐसा नहीं कर सकतीं।

‘न्यूज तक’ को दिए इंटरव्यू में 25 वर्षीय बॉक्सिंग चैम्पियन ने कहा, “मैं एक ऑर्थोडॉक्स (रूढ़िवादी) समुदाय से आती हूँ। जब भी मैं बॉक्सिंग करती थी, तो लोग बहुत ज्यादा कमेंट करते थे। हालाँकि, मैंने किसी की भी नहीं सुनी, क्योंकि मुझे मेरा सपना पता था कि मुझे मेरे देश का प्रतिनिधित्व करके देश के लिए मेडल जीतना है। इसीलिए मेरा ध्यान केवल बॉक्सिंग करने और मेडल पर था।”

पूरे देश में हलचल मचाने वाले हिजाब विवाद पर निखत जरीन कहती हैं कि ये सभी की अपनी व्यक्तिगत पसंद का मुद्दा है। निखत ने आगे कहा, “मेरे खुद के घर में मेरी दो बहनें हिजाब पहनती हैं। मैं इसलिए नहीं पहनती क्योंकि मैं स्पोर्ट्स में हूँ। एक भारतीय के तौर पर देश को रिप्रेजेंट कर रही हूँ तो मैं कोशिश करती हूँ कि स्पोर्ट्स में धर्म न आए, क्योंकि खेल का कोई धर्म नहीं होता।”

हालाँकि, निखत कहती हैं कि बॉक्सिंग में इंटरनेशनल बॉडी ने हिजाब पहनने की अनुमति दे रखी है। ऐसे में अगर कोई मुस्लिम ऐसा करके देश के लिए मेडल जीतना चाहती है, तो वो भी बॉक्सिंग कर सकती है। वो कहती हैं कि बचपन से ही उन्हें पुलिस की यूनिफॉर्म बहुत ही ‘कूल’ लगती थी। इसी कारण वो पुलिस अधिकारी बनना चाहती थीं।

इसके साथ ही बॉक्सिंग स्टार ने सलमान खान से मिली बधाई पर कहा कि वो बचपन से सलमान खान को ही पसंदीदा हीरो मानती थीं और जब सलमान खान ने उनके लिए ट्वीट किया तो वो रोईं भी। जबकि, नीरज चोपड़ा के ट्वीट पर निखत कहती हैं कि उन्होंने ने भी अपने जीवन में काफी संघर्ष किया था।

गौरतलब है कि हाल ही में निखत जरीन ने थाईलैंड की जितपोंग जुटामेंस को 5-0 से हरा कर विश्व चैंपियन बनने वाली वो भारत की पाँचवीं महिला मुक्केबाज हैं। मुक्केबाजी से पहले एथलेटिक्स में निखत जरीन ने स्टेट चैंपियन बनीं, लेकिन फिर मुक्केबाजी में कदम रखा। भारत में मुक्केबाजी में सबसे बड़ा नाम मैरी कॉम हैं, जिन्होंने 6 बार ये ख़िताब अपने नाम किया है।

देवताओं की मूर्तियों को तोड़ मांस तौलना, मस्जिद की सीढ़ियों में लगाना: जानिए प्रतिमाओं से मुस्लिम हमलावरों को इतनी नफरत क्यों

आजादी का नारा देने वाला ‘डफली गैंग’ अक्सर फैज अहमद फैज का एक शेर गाता है- ‘लाजिम है कि हम भी देखेंगे…..’। इस शेर में आगे का मुखड़ा है- ‘जब अर्ज़-ए-ख़ुदा के काबे से सब बुत उठवाए जाएँगे, हम अहल-ए-सफ़ा मरदूद-ए-हरम मसनद पे बिठाए जाएँगे।’

उर्दू में बुत का अर्थ है प्रतिमा, मूर्ति आदि। इस्लामी आक्रमणकारियों ने भारत पर आक्रमण के दौरान प्राचीन प्रतिमाओं को खूब तोड़ा। आक्रमण का उद्देश्य सिर्फ लूट-पाट नहीं, बल्कि बुतों को तोड़ने और इस्लाम का पताका फहराना भी किया था। मुहम्मद बिन कासिम शुरू हुआ ये सिलसिला अंग्रेजी शासन आने तक लगातार चलता रहा।

भारत में इस्लामिक आक्रमण के दौरान हजारों मंदिरों को लूटा गया, उन्हें तोड़ा गया। इस दौरान मूर्तियों को खंडित किया। मूर्तियों के नाक, हाथ, पैर, धड़ आदि तोड़ कर उन्हें खंडित कर अपमानित करने की कोशिश की गई। सैकड़ों जगहों पर इसके उदाहरण आज भी दिखते हैं। ये सिर्फ भारत में ही नहीं, जहाँ-जहाँ इस्लामी आक्रमणकारी गए, वहाँ के धरोहरों और विरासतों को नष्ट करने की उन्होंने कोशिश की।

ऐसा नहीं है कि ये काम सिर्फ इस्लामी आक्रमणकारियों ने की, ईसाईयत के शुरुआती दौर में भी यही किया गया। मिस्र जैसी हजारों साल पुरानी सभ्यता को नष्ट करने के लिए पहले ईसाई और फिर बाद में इस्लामी आक्रमणकारियों ने पूरी कोशिश की। भारत के इतिहास में मुस्लिम आक्रमणकारियों के प्रतिमाओं से नफरत की कहानी भी अंकित है।

क्यों खंडित की जाती थीं मूर्तियाँ

अमेरिका के ब्रूकलिन म्यूजियम के क्यूरेटर एडवर्ड ब्लेबर्ग कहते हैं कि यह सब जानबूझकर किया जाता था। इसके पीछे धार्मिक, राजनीतिक और व्यक्तिगत कारण होते थे। इनके अंग भंग इसलिए किए जाते थे, ताकि उनकी शक्तियों को कम किया जा सके। ब्लेबर्ग कहते हैं कि आक्रमणकारी मानते थे कि प्रतिमा के जिन अंगों को तोड़ दिया जाएगा, वह काम नहीं करेगा। वे इसे ‘प्रतिमा की ताकत को खत्म करने’ के रूप में मानते थे।

भारत सहित प्राचीन सभ्याताओं में मूर्तियों को शक्ति का केंद्र माना जाता है। हिंदू धर्म में भगवान की मूर्तियों में पूजा से पहले प्राण प्रतिष्ठा करने का रिवाज है। इन मूर्तियों को ईश्वर का ही भौतिक रूप माना जाता है। हिंदू मानते हैं कि इन विग्रहों में ईश्वर की समस्त ताकत समाहित होती है।

मिस्र और बेलीलोन की सभ्यताओं पर आक्रमण करने के बाद वहाँ की मूर्तियों को खंडित करने के मामले इतिहास में दर्ज हैं। ब्रूकलिन म्यूजिम में मिस्र की प्राचीन खंडित मूर्तियों की एक गैलरी ही हैं। इन खंडित मूर्तियों पर वहाँ एक शोध रिपोर्ट भी प्रकाशित किया गया था। हालाँकि, भारत में मूर्तियों को खंडित करने की पीछे की मानसिकता को लेकर आज तक कोई शोध नहीं हुआ है।

हिंदू धर्म में कहा गया है कि खंडित मूर्तियाँ शक्तिहीन हो जाती हैं। शास्त्रों में खंडित मूर्तियों की पूजा करने की मनाही की गई है। कहा जाता है कि अगर ऐसी मूर्तियों की पूजा की जाती है तो इसका फल नहीं मिलता है और न ही मन को शांति मिलती है। इतना ही नहीं, खंडित मूर्तियों की पूजा करने से विचार अशुद्धि और मन अशांत रहता है। शिवपुराण के अनुसार, केवल खंडित शिवलिंग ही ऐसा विग्रह है, जो पूजनीय है, क्योंकि यह निराकार होता है। 

मुस्लिम आक्रमणकारियों ने भारत में देव प्रतिमाओं को किया अपमानित

वाराणसी के ज्ञानवापी विवादित परिसर में वीडियोग्राफी के बाद सामने आए शिवलिंग का मामला इसका उदाहरण है। परिसर में जिस शिवलिंग को हिंदू पवित्र मानते हैं, उसमें मुस्लिम हाथ-पैर धोते थे और कुल्ला करते थे। नमाज से पहले की इस प्रक्रिया को वजू करना कहते हैं। प्रतिमाओं को अपमानित करने का काम इस्लामिक आक्रमणकारियों का प्रारंभिक उद्देश्य रहा है।

लोदी वंश का सिकंदर लोदी नगरकोट के ज्वालादेवी मंदिर को तोड़कर इसकी मूर्तियों के टुकड़ों को कसाइयों को दे दिया था, ताकि वे इससे मांस तौल सकें। कुछ इतिहासकार कहते हैं कि औरंगजेब ने हिंदू धर्म के देव प्रतिमाओं को ध्वस्त करने के बाद उसे मस्जिद की सीढ़ियों में जड़वा दिया, ताकि मुस्लिम उस पर चढ़कर मस्जिद में जाएँ।

इतिहासकार राजकिशोर राजे के अनुसार, आगरा की जामा मस्जिद, जिसे शाही जामा मस्जिद भी कहा जाता है, की सीढ़ियों के नीचे औरंगजेब ने मथुरा के केशवदेव मंदिर को ध्वस्त करने के बाद उसकी मूर्तियाँ लगवा दी हैं, ताकि मस्जिद में आने-जाने वालों के पैरों के नीचे यह मूर्तियाँ रहें। सन 1940 में एसआर शर्मा द्वारा लिखित ‘भारत में मुगल साम्राज्य’ पुस्तक में भी इस बातका जिक्र है।

महमूद गजनी ने जब भारत पर आक्रमण किया, उस दौरान उसने थानेसर के चक्रस्वामिन मंदिर पर पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। इसमें मौजूद कास्य की आदमकद प्रतिमा को वह अपने साथ गजनी ले गया और वहाँ उसने अपने रंगमहल में रखवा दिया। रंगमहल उस स्थान को कहा जाता है, भोग-विलास, ऐश कहा जाता है। इसे हिंदी में अंत:पुर भी कहा जाता है। इसी गजनी ने गुजरात के सोमनाथ मंदिर में भी मूर्तियों का भंजन किया था।

मूर्तियों को लेकर इस्लाम में हिदायत

मूर्तियों को लेकर मुस्लिमों के ग्रंथ कुरान में कोई स्पष्ट निर्देश नहीं है, इसको लेकर सबसे मान्य हदीस ‘सहीह अल-बुखारी’ में तर्क दिया गया है। इसमें कहा गया है कि इस्लाम के पैगंबर मोहम्मद एक बार यात्रा करके घर लौटे तो अपनी बीवी आयशा के कमरे में एक पर्दा देखा। इस पर्दे पर तस्वीरें बनी हुई थीं। इन तस्वीरों को देखकर उन्होंने गुस्से में कहा, “अशहदु अल-नासा अज़ाब अल-यौम अल-कियामा अल-मुस्सविरून (क़यामत के दिन तस्वीर बनाने वालों को सबसे सख्त सजा मिलेगी)।”

हदीस मुस्लिम (हदीस संख्या: 969) में अबुल हैयाज अल असदी से से कहा गया है, “अली बिन अबी तालिब ने मुझ़ से कहा- क्या मैं तुम को उस काम के लिए न भेजूँ जिस के लिए अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने मुझ़े भेज़ा था कि किसी भी मूर्ति को मत छोड़ना उसको मिटा देना, और किसी भी ऊँची क़ब्र को मत छोड़ना मगर उसको बराबर कर देना।’’

(31:13) लुकमान ने अपने बेटे से कहा, “हे मेरे बेटे, अल्लाह के अलावा कोई मूर्ति मत स्थापित करो। मूर्तिपूजा घोर अन्याय है।” हदीसों में ऐसी कई आयतों हैं, जो मूर्तिपूजा और मूर्ति की मुखालफत करती हैं।

इन्हीं हदीसों की कट्टर इस्लामिक मौलानाओं द्वारा व्याख्या की गई, जिसको लेकर इस्लाम के शुरुआत से लेकर आजतक मुस्लिम मानते आ रहे हैं। अपने आक्रमणों के दौरान मुस्लिम आक्रांताओं ने इसका बखूबी पालन किया और मंदिर एवं मूर्तियों का खूब भंजन किया है।