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सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानवापी मामला वाराणसी जिला अदालत को किया ट्रांसफर, बोले जस्टिस चंद्रचूड़- धार्मिक चरित्र पता करने से नहीं रोकता वर्शिप एक्ट

वाराणसी के ज्ञानवापी विवादित ढाँचे (Gyanvapi Controversial Structure, Varanasi) को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में जस्टिस चंद्रचूड़ की अदालत ने कहा कि किसी स्थान के धार्मिक चरित्र के निर्धारण को पूजा स्थल अधिनियम, 1991 द्वारा प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने मामले को सुनवाई के लिए वाराणसी के निचली अदालत को स्थानांतरित कर दिया।

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, “इस मामले में बहुत जटिलता और संवेदनशीलता है, इसलिए इसे निचली अदालत द्वारा एक वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी द्वारा सुना जाना चाहिए।” जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि यही कारण है कि ट्रायल कोर्ट को केस की सुनवाई जारी रखने देना चाहिए।

मुस्लिम पक्षकार को स्पष्ट कर दिया कि इस मामले में निचली अदालत की कार्यवाही पर वह रोक नहीं लगा सकता। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि निचली अदालत को निर्देश देने के बजाय संतुलन बनाने की जरूरत है।

सुनवाई के दौरान उदाहरण देते हुए जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, “भारत में धार्मिक स्थलों का हाइब्रिड चरित्र बहुत आम है। मस्जिद और शिवलिंग को भूल जाइए, एक जगह पर क्रॉस का होना किसी जगह को ईसाई पूजा का स्थान नहीं बना देगा।”

इस दौरान मुस्लिम पक्ष के वकील हुजैफा अहमदी ने कहा कि जिस क्षेत्र में हिंदू पक्ष कह रहे हैं कि शिवलिंग मिला है, वहाँ एक तालाब है। अहमदी ने कहा, “हम कहते हैं कि यह एक फव्वारा है। उस क्षेत्र में नल हैं। उस क्षेत्र को वज़ू के लिए खोला जा सकता है।”

अहमदी की इस माँग पर सॉलिसिटर जनरल ने कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि इससे कानून-व्यवस्था की समस्या खड़ी हो जाएगी। अदालत की बेंच ने भी अहमदी की इस माँग को मानने से इनकार कर दिया।

मुस्लिम पक्षकारों के वकील हुजैफा अहमदी ने कोर्ट को बताया कि ट्रायल कोर्ट ने अब तक जो किया है, उससे माहौल खराब हो सकता है। उन्होंने कोर्ट से यथास्थिति बनाए रखने का आग्रह करते हुए कहा कि पिछले 500 सालों से उस स्थान को जैसे इस्तेमाल किया जा रहा था उसे बरकरार रखा जाए। हालाँकि, यह माँग स्वीकार नहीं हुई।

‘कोर्ट को नहीं मानता, प्रॉपर्टी वापस चाहिए तो बनो मुसलमान’: अस्पताल संचालक निहाल खान पर रेप और धर्मान्तरण के प्रयास का आरोप

मध्य प्रदेश के भोपाल में एक अस्पताल संचालक पर धर्मान्तरण के दबाव और रेप का आरोप लगा है। पीड़िता ने इसकी शिकायत पुलिस में की है। आरोपित का नाम निहाल खान है। शिकायत एक महिला फिजियोथेरेपिस्ट द्वारा दर्ज करवाई गई है। फ़िलहाल, आरोपित अस्पताल संचालक फरार है।

पीड़िता का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में पीड़िता ने कहा, “मैं भोपाल में 2 अस्पताल की मालकिन हूँ। मेरे पार्टनर निहाल खान हैं। उन्होंने मेरे साथ प्यार का नाटक किया। उन्होंने मुझे अपनी पत्नी बताया। मुझे लंबे समय तक साथ रखा। मेरे ऊपर 2 महीने से धर्म परिवर्तन का दबाव डाला जा रहा। मुझ से कहा जा रहा है कि मैं मुसलमान नहीं बनी तो मुझे बीवी नहीं माना जाएगा। मैं किसी कोर्ट को नहीं मानता। किसी कोर्ट की शादी को भी मैं नहीं मानूँगा। जब मैंने धर्म परिवर्तन से मना किया तब वो शादी से मुकर गया।”

पीड़िता ने आगे बताया, “मुझ से निहाल ने कहा कि मैंने प्रॉपर्टी अपने नाम कर ली है। मेरा जो कर पाओ कर लो। अगर तुम अपनी प्रॉपर्टी वापस पाना चाहती हो तो तुम्हे मुसलमान बनना पड़ेगा। उन्होंने अस्पताल के कागजात बदलवा लिए हैं। उन्होंने सारे बैंक खातों में भी अपना अकेले का ही नाम डाल रखा है। ये अस्पताल के मुस्लिमों को साथ ले कर सारे काले कारनामे करते हैं।”

पीड़िता ने आगे बताया, “मेरे अस्पताल की एक दलित महिला कर्मचारी को अस्पताल के एक मुस्लिम स्टाफ ने गलत तरीके से छुआ था। बाद में उस मुस्लिम स्टाफ ने उसी महिला कर्मचारी को अपने साथ निकाह का ऑफर देते हुए कहा कि मैं 4-5 बीवियाँ रख सकता हूँ। उसे डॉक्टर बनाने का भी लालच दिया गया। जब मैंने उसे रोका तो मेरे साथ भी बदतमीजी की गई। मुझे बोला गया कि हम मुस्लिम हैं और तुम हिन्दू हो। जो कर पाओ कर लो।”

दैनिक भास्कर के मुताबिक पुलिस ने डॉक्टर निहाल खान पर रेप और मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम सहित कई अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पीड़िता ने निहाल खान पर खुद से मारपीट करने का भी आरोप लगाया है। पीड़िता भोपाल के लाला लाजपत राय कॉलोनी की रहने वाली बताई जा रही है। साल 2018 में पीड़िता ने दीपक सोनी नाम के एक युवक से शादी की थी। 1 महीने बाद ही दोनों अलग हो गए थे। बाद में वह डिपो चौराहे के जनरल अस्पताल में ऑन कॉल विजिट पर मरीजों को देखने जाने लगी। इसी विजिट के दौरान उसकी निहाल से जान-पहचान हो गई थी। उसने कभी अपना पूरा नाम नहीं बताया। शुरुआत में मैंने भी नहीं पूछा। निहाल ने पीड़िता से हमदर्दी दिखाई और शादी का वादा करके उस से शारीरिक संबंध बना लिए।

इस दौरान निहाल पीड़िता के परिवार से भी मेल-मिलाप बढ़ा लिया। इसी मेल-मिलाप का फायदा उठा कर निहाल खान ने पीड़िता की माँ के साथ मिल कर अशोका गार्डन में अस्पताल खोल लिया। इसमें पीड़िता की माँ ने भी पैसे लगाए। इसी के साथ पीड़िता ने 8 लाख रुपए में डिपो चौराहे का जनरल अस्पताल निहाल को पार्टनर बना कर खरीद लिया। पीड़िता के मुताबिक बाद में निहाल खान ने फर्जी पेपर बनवा कर अस्पताल के डॉक्युमेंट अपने नाम करवा लिए। जब पीड़िता ने इसका विरोध किया तब उसकी पिटाई की गई। उसे धमकी दी गई कि अगर पुलिस से शिकायत हुई तो गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे।

कॉन्ग्रेस पर प्रशांत किशोर का डायरेक्ट वार: चिंतन शिविर पर उठाए सवाल, कहा- गुजरात-हिमाचल में भी होगी हार

राजस्थान के उदयपुर (Udaipur, Rajasthan) में हुए कॉन्ग्रेस के चिंतन शिविर को लेकर चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) तंज कसा है। उन्होंने कहा कि इस चिंतन से कॉन्ग्रेस (Congress) को कोई फायदा नहीं होने वाला है। उन्होंने कहा कि गुजरात (Gujarat) और हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में होने वाले विधानसभा चुनावों (Assembly Elections) में कॉन्ग्रेस की हार होने वाली है।

प्रशांत किशोर ने कॉन्ग्रेस के चिंतन शिविर पर शुक्रवार (20 मई 2022) को ट्वीट कर कहा, “मेरे विचार से यह (चिंतन शिविर) यथास्थिति को लम्बा खींचने और कम-से-कम गुजरात और हिमाचल में आगामी चुनावी हार तक #कॉन्ग्रेस नेतृत्व को और समय देने के अलावा कुछ भी सार्थक हासिल करने में विफल रहा!”

बता दें कि उदयपुर चिंतन शिविर कॉन्ग्रेस नेताओं ने पार्टी में व्यापक बदलाव को लेकर सहमति दी है। इसमें राहुल गाँधी को एक बार फिर पार्टी का नेतृत्व सौंपने की माँग उठी। बताया जा रहा है कि जो नेता पहले उनके अध्यक्ष बनाए जाने के खिलाफ थे, वे भी अब समर्थन राहुल गाँधी कर कर रहे हैं। इससे कयास लगाए जा रहे हैं कि दो राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव राहुल गाँधी के नेतृत्व में ही कॉन्ग्रेस लड़ सकती है।

ऐसे में प्रशांत किशोर का यह बयान बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसके पहले राहुल गाँधी के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस पार्टी को कई चुनावों में हार का मुँह देखना पड़ा है। बता दें कि प्रशांत किशोर ने कुछ समय पहले पार्टी की कायाकल्प की योजना पेश की थी, लेकिन कॉन्ग्रेस ने उनकी को पूरी योजना को अमल में लाने से इनकार कर दिया था। कह भी कहा जाता है कि कॉन्ग्रेस ने उन्हें पार्टी से जुड़ने का आमंत्रण दिया था और पार्टी में बेहतर पद नहीं मिलने के कारण प्रशांत किशोर उसे ठुकरा दिया था।

प्रशांत किशोर ने एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा था, “मैं कॉन्ग्रेस के नेताओं में एक समस्या देखता हूँ। वे मानते हैं कि हमने देश में लंबे समय तक शासन किया है और जब लोग नाराज होंगे तो अपने आप वर्तमान सरकार को उखाड़ फेंकेंगे और फिर हम सत्ता में वापस आ जाएँगे। वे कहते हैं कि आप क्या जानते हैं, हम सब कुछ जानते हैं और लंबे समय तक सरकार में रहे हैं।”

बता दें कि प्रशांत किशोर ने 2 मई अपने सुराज अभियान को लेकर ट्विटर पर लिखा था, “लोकतंत्र का एक सार्थक भागीदार बनने और जन-समर्थक नीतियों को आकार देने में मदद करने की मेरी खोज ने बीते 10 सालों में उतार-चढ़ाव देखे हैं। अब मैं नया पन्ना पलटने जा रहा हूँ। अब मुद्दों और जन सुराज के मार्ग को बेहतर ढंग से समझने के लिए ‘रियल मास्टर्स’ यानी जनता के पास जाने का समय आ गया है, शुरुआत बिहार से होगी।”

इसके साथ ही 5 मई को उन्होंने कहा था कि वह बिहार के लोगों के साथ पहले 3-4 महीने संवाद स्थापित करेंगे और फिर 2 अक्टूबर से पश्चिम चंपारण से पदयात्रा शुरू करेंगे। उन्होंने कहा था कि इस दौरान वे समाज के विभिन्न तबके के लोगों से मुलाकात स्थिति को समझने का प्रयास करेंगे। इसके बाद राजनीतिक पार्टी बनाने पर विचार किया जाएगा।

लव जिहाद की पीड़ित रही नीतू यादव फंदे से लटकी मिली, अकरम पर लगाया था पहचान छिपाने और इस्लाम कबूलने का दबाव डालने का आरोप

UP के गाजियाबाद जिले के लोनी इलाके में नीतू यादव नाम की एक महिला ने फाँसी लगा कर कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। मृतका साल 2021 में लव जिहाद का शिकार हुई थी। उसने नवंबर 2021 में अपने पूर्व पति अकरम कुरैशी के खिलाफ बागपत पुलिस में शिकायत भी दर्ज करई थी। उसका विवाद अपने ही पड़ोस के इकबाल नाम के व्यक्ति से भी बताया जा रहा है। नीतू का शव 18 मई 2022 (बुधवार) को उसके घर से मिला।

रिपोर्ट्स के मुताबिक नीतू यादव का पूर्व पति अकरम कुरैशी उससे फर्जी नाम से मिला था। शादी के बाद कुरैशी ने जबरन इस्लाम कबूलने का दबाव डाला। स्वराज्य की पत्रकार स्वाति गोयल शर्मा ने 20 दिन पहले मृतका से बात करने का दावा किया है। उन्होंने नीतू जैसी महिला द्वारा आत्महत्या जैसा कदम उठाने पर हैरानी जताई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मृतका की उम्र 32 साल थी। वह लोनी के प्रेमनगर इलाके में अपने परिवार के साथ रहती थी। अकरम कुरैशी के बाद उसने मनीष गुप्ता नाम के व्यक्ति से शादी की थी। फ़िलहाल मनीष और नीतू अलग-अलग रह रहे थे। कुछ समय पहले नीतू का कॉलोनी के ही इकबाल से विवाद हुआ था। इस झगड़े के बाद नीतू से फाँसी लगा कर जान देने की कोशिश की थी। तब घर के लोगों ने नीतू को बचा लिया था। पुलिस नीतू की मौत के बाद हर पहलू की जाँच कर रही है।

मृतका द्वारा दर्ज FIR के मुताबिक अकरम से उसकी पहली मुलाकात जनवरी 2020 में हुई थी। तब नीतू बागपत के बड़ौत में रशीदिया नर्सिंग होम में काम करती थी। अकरम ने अपनी पहचान नीतू से छिपाई और शारीरिक संबंध बनाए। जब नीतू गर्भवती हुई तो अकरम ने अपनी बीवी रुखसार और भाई तनवीर के साथ उसे प्रताड़ित किया और गर्भ गिराने का दबाव बनाया। नीतू जैसे-तैसे इन सभी के चंगुल से बच पाई और 18 नवम्बर 2020 को पुलिस में शिकायत की। तब पुलिस ने अकरम को जेल भेजा। बाद में नीतू ने एक बेटी को जन्म दिया।

मृतका नीतू यादव मूल रूप से बागपत के खेकड़ा गाँव की रहने वाली थी। अकरम से पहले साल 2012 में उसकी शादी परिवार की मर्जी से एक व्यक्ति से हुई थी। साल 2017 में उसका तलाक हो गया था। इस रिश्ते से नीतू को एक बेटा हुआ था। तलाक के बाद नीतू अपने मायके में रहने लगी थीं। 1 साल के बाद घर वालों ने नीतू को घर से निकाल दिया। घर से निकलने के बाद नीतू ने नर्सिंग का कोर्स किया जो 2019 में खत्म हुआ। इसके बाद उसने बड़ौत के रशीदिया नर्सिंग होम में नौकरी मिली थी, जहाँ उसकी मुलाकात अकरम से हुई थी।

राजस्थान के सरकारी अस्पताल में नाबालिग से रेप, निसार खान ने डिलिवरी वार्ड में ले जाकर 14 साल की बच्ची से की दरिंदगी

राजस्थान (Rajasthan) रेप (Rape) के मामले में आए दिन चर्चा में रहता है। इसी क्रम में ताजा मामला बाड़मेर (Barmer) से आया है। जहाँ पेट में दर्द होने पर होने पर जिले के सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए गई नाबालिग (14) के साथ चाकू की नोक पर निसार खान (26) ने बलात्कार किया। वारदात को अंजाम देने के बाद वह वहाँ से फरार हो गया।

रिपोर्ट के मुताबिक, ये वारदात गुड़ामालानी इलाके की बताई जा रही है। सोमवार (16 मई 2022) को पीड़िता के पेट में अचानक से दर्द उठा तो अपने भाई के साथ वो गुड़ामालानी सीएची सेंटर में इलाज के लिए गई, लेकिन वहाँ पर काफी भीड़ थी, जिसके कारण उसका भाई उसे वहीं पर बैठाकर बाजार सामान लाने के लिए चला गया। इस बीच पहले से ही लड़की पर नजर रख रहा आरोपित निसार खान पुत्र हाजी खान वहाँ आया और वो उसे चाकू की नोक पर जबरदस्ती अस्पताल के ही खाली पड़े डिलिवरी वार्ड में लेकर गया।

वहाँ जाने के बाद आरोपित ने नाबालिग के साथ रेप किया और इसका वीडियो बना लिया। साथ ही फोटो भी खींच लिया। इसके बाद वहाँ से फरार हो गया। घटना के बाद जब पीड़िता का भाई वहाँ पहुँचा तो उसने अपने साथ हुई ज्यादती की बात अपने भाई को बताई। दोनों वहाँ से इलाज कराए बिना ही घर लौट गए और घर जाकर पीड़िता ने इसकी जानकारी माँ को दी।

इसके बाद 19 मई को पीड़िता को लेकर उसके परिजन गुड़ामालानी थाने गए और रेप का केस दर्ज कराया। इस मामले में पुलिस ने आरोपित के खिलाफ आईपीसी की धाराओं के साथ ही पोक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज किया है।

जिले के एसपी दीपक भार्गव के मुताबिक, आरोपित निसार फरार चल रहा है और उसकी तलाश की जा रही है। यह घटना दोपहर के समय हुई थी, इसलिए उस दौरान अस्पताल में कौन था, इसकी छानबीन की जा रही है।

गैस, कुकर और टीवी की सर्विस का काम करता है नासिर

इस घटना को लेकर गुड़ामालानी थाने के एएसआई सोनाराम का कहना है कि पीड़िता की मेडिकल जाँच की गई है। आरोपित गैस, कुकर और टीवी सर्विस का काम करता है। वो भी गुड़ामालानी का ही रहने वाला है औऱ कुछ महीने पहले इसी के सिलसिले में पीड़िता के घर पर आया था। तभी से वो उस पर नजर बनाए हुए था।

औरंगजेब मंदिर विध्वंस का चैंपियन, जमीन आज भी देवता के नाम: सुप्रीम कोर्ट को बताया क्यों ज्ञानवापी हिंदुओं का, कैसे लागू नहीं होता वर्शिप एक्ट

उत्तर प्रदेश के वाराणसी (Varanasi, Uttar Pradesh) में ज्ञानवापी विवादित ढाँचे (Gyanvapi Controversial Structure) में वीडियोग्राफिक सर्वे के बाद सामने आए साक्ष्यों के बाद हिंदू पक्ष ने अपना दावा और मजबूती से पेश करना शुरू कर दिया है। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जवाबी याचिका दायर की गई है, जिसमें कहा गया है कि मुगल आक्रांता औरंगजेब (Aurangzeb) ने फरमान जारी कर भगवान आदि विश्वेश्वर के मंदिर को गिराने का आदेश दिया था।

इस जवाबी याचिका में कहा गया है कि मुगल आक्रांता औरंगजेब मंदिरों का विध्वंस करने में चैंपियन था और उसके आदेश पर काशी और मथुरा सहित देश के मंदिरों का विध्वंस किया गया। इसके साथ ही इसमें यह भी कहा गया है कि मंदिर के हिस्से को ध्वस्त तो कर दिया गया था और उसी क्षेत्र में ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण भी किया गया, लेकिन वे हिंदू धार्मिक प्रतीकों और देवताओं की मूर्तियों को बदलने में विफल रहे। इसलिए देवी श्रृंगार गौरी, भगवान गणेश और अन्य देवता आज भी परिसर में मौजूद हैं।

याचिका में कहा गया है कि औरंगजेब ने अपने फरमान में और मुगल इतिहासकारों के रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि औरंगजेब या उसके बाद के शासकों ने विवादित भूमि पर वक्फ बनाने या किसी मुस्लिम या मुस्लिम निकाय को जमीन सौंपने का आदेश दिया था। हिंदू पक्ष की ओर कोर्ट में शामिल अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने याचिका में अदालत को बताया कि फरमान की कॉपी कोलकाता के एशियाटिक लाइब्रेरी रखे होनी की जानकारी मिली है।

याचिका में कहा गया है कि इतिहासकार इस बात की पुष्टि करते हैं कि इस्लामी शासक औरंगजेब ने 9 अप्रैल 1669 को एक आदेश जारी किया था, जिसमें उसके प्रशासन को वाराणसी में स्थित भगवान आदि विश्वेश्वर के मंदिर को ध्वस्त करने का निर्देश दिया गया था। आदि विश्वेश्वर के मंदिर पर 1193 ईस्वी से 1669 ईस्वी तक हमला किया गया, लूटा गया और ध्वस्त किया गया।

हिंदू पक्ष ने कहा कि मस्जिद सिर्फ वक्फ की भूमि पर बनाई जा सकती है। इस मामले में मंदिर की भूमि और संपत्ति अनादि काल से देवता की है। तर्क दिया गया कि किसी मुस्लिम शासक या किसी मुस्लिम के आदेश के तहत मंदिर की भूमि पर किए गए निर्माण को मस्जिद नहीं माना जा सकता है।

याचिका में कहा गया है कि काशी में आदि विश्वेश्वर ज्योतिर्लिंग ‘स्वयंभू देवता’ हैं और यह ‘तपोभूमि’ भारतवर्ष के विभिन्न हिस्सों में स्थापित 12 ज्योतिर्लिंगों में से सबसे प्राचीन है। हिंदू पौराणिक कथाओं के तहत ज्योतिर्लिंगों का विशेष महत्व है और इसका वर्णन वेदों, पुराणों, उपनिषदों और अन्य शास्त्रों में किया गया है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि ज्ञानवापी विवादित ढाँचे पर पूजास्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 लागू नहीं होता, क्योंकि वहाँ की संरचना के धार्मिक चरित्र को बदलने को लेकर कोई सवाल ही नहीं है। वहाँ अभी भी भगवान की पूजा होती है और श्रद्धालुओं द्वारा पंचकोशी परिक्रमा किया जाता है। याचिका में कहा गया है कि हिंदू कानून भी कहता है कि देवता की भूमि हमेशा देवता के नाम पर रहती है। विदेशी शासन आने के बाद भी देवता का अधिकार खत्म

याचिका में कहा गया है कि मुस्लिम पक्ष भी इस बात को मानते हैं कि 30 दिसंबर 1810 को तत्कालीन जिलाधिकारी वॉटसन ने अध्यक्ष परिषद को एक पत्र भेजकर ज्ञानवापी क्षेत्र को हमेशा के लिए हिंदुओं को सौंपने का सुझाव दिया था।

जुमे पर ज्ञानवापी के विवादित ढॉंचे में भारी जुटान, गेट बंद करना पड़ा: इलाहाबाद हाई कोर्ट में सुनवाई 6 जुलाई तक टली

वाराणसी की ज्ञानवापी विवादित ढाँचे में शुक्रवार (20 मई 2022) को जुमे की नमाज अदा करने के लिए बड़ी संंख्या में लोग पहुँच गए। परिसर के अंदर जगह नहीं होने के बाद गेट बंद करने पड़े। फिलहाल पुलिस-प्रशासन अलर्ट मोड में है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार विवादित ढाँचे के भीतर 700 लोगों की क्षमता है। लेकिन करीब एक हजार लोग जमा हो गए। इसके बाद गेट बंद कर लोगों से अन्य मस्जिदों में जाने की अपील की गई। वाराणसी की अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी की अपील के बावजूद लोगों का यह जुटान हुआ। कमेटी ने लोगों से ज्यादा तादाद में नहीं आने और अपने मोहल्ले की मस्जिदों में ही नमाज अदा करने की अपील की थी। इसका कारण ज्ञानवापी के वजू खाने को सील किया जाना बताया गया था।

उल्लेखनीय है कि हिंदू पक्ष ने सर्वे के दौरान विवादित ढाँचे के वजू खाना में शिवलिंग मिलने का दावा किया था। इसके बाद इस जगह को सील कर सुरक्षाकर्मियों के हवाले कर दिया गया। हालाँकि प्रशासन ने जुमे पर नमाजियों के लिए पानी के विशेष इंतजाम किए थे। प्रशासन की ओर से बताया गया था कि नमाजियों के लिए 50 लोटा और दो ड्रम पानी का इंतजाम किया गया है।

उल्लेखनीय है कि पहले से ही आज शुक्रवार (20 मई 2022) को जुमे के के कारण बड़ी संख्या में नमाजियों के विवादित ढाँचे पहुँचने की संभावना जताई जा रही थी। इसे देखते हुए अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी ने मुस्लिमों से भीड़ नहीं लगाने की गुजारिश की थी। लेकिन इस अपील का कुछ खास असर नहीं पड़ा।

इस बीच इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ज्ञानवापी से जुड़े मामले की सुनवाई 6 जुलाई तक टाल दी है। हाई कोर्ट को यह तय करना है कि 31 साल पहले 1991 में दाखिल वाद की सुनवाई हो सकती है या नहीं। इस मामले में 16 मई को पिछली सुनवाई हुई थी। पिछली सुनवाई पर हिंदू पक्ष की बहस पूरी नहीं हो सकी थी। जानकारी के मुताबिक हिंदू पक्ष की बहस पूरी हो गई है। शुक्रवार को यूपी सुन्नी सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड के अधिवक्ता पुनीत गुप्ता ने अपना पक्ष रखा। अगली सुनवाई में भी वह ही बहस करेंगे। हालाँकि अन्य अदालतों में इस मामले को लेकर सनवाई जारी रहेगी। बता दें कि इस मामले में आज (20 मई 2022) सुप्रीम कोर्ट में फिर से सुनवाई होने वाली है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को वाराणसी की ट्रायल कोर्ट से भी कोई आदेश न देने को कहा था।

72 हूरों का लालच, अलकायदा से लिंक: सूफी इस्लामिक बोर्ड ने कहा- मुस्लिमों को कट्टरपंथी बना रहा PFI, सरकार लगाए बैन

कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) की पोल खोलने में जुटे सूफी इस्लामिक बोर्ड ने एक बार फिर से इसे बैन करने की माँग की है। सूफी बोर्ड ने दावा किया है कि कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पीएफआई आतंकवादी संगठन अलकायदा से मिला हुआ है और उसी से मिले निर्देशों के आधार पर काम करता है।

इस्लामिक बोर्ड के प्रवक्ता कशिश वारसी ने रिपब्लिक टीवी को दिए इंटरव्यू में पीएफआई पर भारतीय मुस्लिमों को भड़काने का आरोप लगाया है। उन्होंने सनसनीखेज खुलासा करते हुए कहा कि पीएफआई के अलकायदा से मिले होने के खुलासे के बाद उन्हें हत्या की धमकी भी मिली है। वारसी कहते हैं कि पीएफआई को कई राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल पाया गया है। हमें पीएफआई पर बैन लगाने के लिए सरकार से अनुरोध किए कुछ दिन हो चुके हैं। अब जब सूफी बोर्ड को अलकायदा ने हत्या की धमकी दी है तो ये साबित हो चुका है पीएफआई अलकायदा से जुड़ा हुआ है। इसलिए, सरकार को इस पर प्रतिबंध लगाकर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।

दो साल पहले भी लगाया था ऐसा ही आरोप

इससे पहले दिसंबर 2020 में भी सूफी इस्लामिक बोर्ड ने पीएफआई के आतंकियों के साथ मिले होने और मुस्लिम युवाओं को जिहाद के लिए कट्टरपंथी बनाने का आरोप लगाया था। यहीं नहीं सूफी इस्लामिक बोर्ड ने पीएफआई पर उसकी राजनीतिक शाखा सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) के जरिए मुस्लिमों के गुमराह करने का आरोप लगाया था। बोर्ड ने आरोप लगाया कि पीएफआई संगठन देश में मुस्लिमों को जिहाद के लिए भड़काता है और उन्हें यह विश्वास दिलाता है कि मरने के बाद उन्हें जन्नत में ’72 हूरें’ मिलेंगी।

मुस्लिमों में ऐसी धारणा है कि आतंकी जब भी जिहाद में मारे जाते हैं तो स्वर्ग में जाने के बाद ’72 हूर’ यानि कि 72 कुँवारी लड़कियाँ मिलती हैं, जो उनकी यौन इच्छाओं को पूरा करती हैं। इस्लामिक आतंकवादी इस बात में विश्वास करते हैं। आतंकवादी संगठन आईएसआईएस, अल-कायदा, बोको हराम जैसे संगठन नए आतंकियों को लालच देने और उन्हें भर्ती करने के लिए ऐसे वादे करते हैं।

मुस्लिमों को कट्टरपंथी बनाने के सूफी इस्लामिक बोर्ड के आरोप के बाद हाल ही में PFI ने उसे मानहानि का नोटिस भी भेजा था। इसके जबाव में बोर्ड ने दो टूक कहा था कि वे तब तक नहीं रुकेंगे जब तक भारत में पीएफआई पर प्रतिबंध नहीं लगाया जाता क्योंकि वो भारत के युवाओं को कट्टर बना रहा है।

केरल हाई कोर्ट ने भी कहा था कट्टरपंथी

एक केस की सुनवाई के दौरान हाल ही में केरल हाई कोर्ट ने भी इस बात को स्वीकार किया था कि इसमें किसी तरह का कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) और इसकी मूल संस्था पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) दोनों चरमपंथी संगठन हैं। हाई कोर्ट के जस्टिस हरिपाल ने कहा था, “इसमें कोई शक नहीं, एसडीपीआई और पीएफआई चरमपंथी संगठन हैं जो हिंसा के गंभीर कृत्यों में लिप्त हैं। वहीं, वे प्रतिबंधित संगठन नहीं हैं।”

केरल हाई कोर्ट के मुताबिक, एसडीपीआई और पीएफआई का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लोगों को टार्गेट कर उनपर हमले करने का पुराना इतिहास रहा है। कोर्ट ने ये टिप्पणी मारे गए आरएसएस कार्यकर्ता ए संजीत की पत्नी की याचिका पर सुनवाई करते हुए की थी। इसमें उन्होंने मामले की सीबीआई जाँच की माँग की थी। आरोप था कि एसडीपीआई के कार्यकर्ताओं ने पलक्कड़ के एल्लापल्ली में 26 साल के आरएसएस कार्यकर्ता संजीत की हत्या उनकी पत्नी के सामने ही कर दी थी।

शादी से पहले सेक्स नहीं करूँगी: डेटिंग लाइफ से परेशान महिला खिलाड़ी ने इंस्टाग्राम पर साझा किया दर्द, कहा- मेरी जवानी का मजाक उड़ाते हैं पुरुष मित्र

लोलो जोन्स (Lolo Jones) अमेरिका की जानी-मानी एथलीट है। ओलंपिक सहित कई इंटरनेशनल टूर्नामेंट में अपने देश का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। फिलहाल वे अपनी एक इंस्टाग्राम पोस्ट को लेकर चर्चा में हैं। इस पोस्ट में अपनी पर्सनल लाइफ के बारे में कई चौंकाने वाले खुलासे करते हुए कहा है कि वे शादी के बाद ही सेक्स करेंगी।

रविवार (15 मई 2022) ​को एक इमोशनल पोस्ट में इस 39 वर्षीय महिला ​खिलाड़ी ने लिखा कि शादी से पहले सेक्स ना करने के फैसले को लेकर पुरुष उनका मजाक उड़ाते हैं। जोन्स ने अपनी पोस्ट में लिखा है कि शादी से पहले सेक्स नहीं करने के फैसले को लेकर लोग उनसे कहते हैं कि तुम बूढ़ी हो रही हो। इसके कारण एक दिन तुम्हें काफी दुखी होगा, क्योंकि तब समय तम्हारे हाथ से निकल चुका होगा।

लोकप्रिय अमेरिकी हर्डलर और बोबस्लेडर ने यह भी खुलासा किया, “मैंने आज रात उस शख्स को ब्लॉक कर दिया है, जो मुझसे पिछले 8 महीने से बातचीत कर रहा था।” लोलो ने कहा, “वह शख्स इंटिमेट होने के लिए हिंट देता था। वह शादी और बच्चों की बात करता था। लेकिन मुझे फ्रेंड जोन में रखता था। हालाँकि, वह कभी भी मुझसे मिलने के लिए टाइम नहीं निकालता है। जिसकी वजह से मैं बहुत ज्यादा दुखी भी हूँ। फिलहाल मैं लोगों से प्रार्थना करती हूँ कि वो सेक्स वाली बात को लेकर प्लीज मुझे चिढ़ाना बंद कर दें।”

2007 में Indoor National Titles जीतने वाली खिलाड़ी ने कहा कि वह अपनी डेटिंग लाइफ से परेशान हो चुकी हैं। इसलिए भगवान से अच्छे पति के लिए प्रार्थना कर रही हैं। लोलो ने कहा, “साल दर साल मेरे अंदर शादी की चाहत बढ़ती जा रही है और मैं चाहती हूँ कि मेरा भी परिवार हो। लेकिन मेरा दिल टूटता रहा है। कुछ पुरुष मुझे छेड़ते हैं कि मैं शादी से पहले सेक्स नहीं करने वाली लड़की हूँ।”

उन्होंने कहा कि ये सब मैं बहुत दुखी मन से लिख रही हूँ। भगवान के सामने रोज प्रार्थना करते हुए रोती हूँ। मेरी उम्र 39 साल की हो चुकी है। मेरे पुरुष मित्र मेरा यह कहकर मजाक उड़ाते हैं कि अब तुम्हारी जवानी ढल रही है। अगर शादी नहीं हो रही है तो कम से कम सेक्स ही कर लो, वरना टाइम निकल जाने पर कुछ हासिल नहीं होगा।

बता दें कि इस पोस्ट के वायरल होने के जोन्स ने अपना एक अैर वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर किया है। इसमें उन्होंने लिखा है कि दो दिन पहले मैंने जो पोस्ट लिखी थी, वह लोगों को काफी पसंद आई। मैं उन सभी का धन्यवाद देती हूँ, जिन्होंने मुझे और मेरी भावनाओं को समझा।

हरियाणा सरकार ने रद्द किया राहुल गाँधी के जीजा रॉबर्ट वाड्रा की रियल एस्टेट फर्म का लाइसेंस, ये है मामला

हरियाणा की भाजपा सरकार ने कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी के जीजा और प्रियंका गाँधी के पति रॉबर्ट वाड्रा के एक प्रोजेक्ट का लाइसेंस रद्द कर दिया है। सत्ता में आने के 8 साल बाद भाजपा सरकार ने यह कार्रवाई की है। भाजपा की हरियाणा सरकार ने गुरुग्राम में बनाए जा रहे स्काईलाइट हॉस्पिटालिटी प्राइवेट लिमिटेड का रियल एस्टेट लाइसेंस कैंसल कर दिया है।

साल 2008 में जब हरियाणा में कॉन्ग्रेस की सरकार थी, तब रॉबर्ड वाड्रा को यह लाइसेंस दिया गया था। अब टाउन एंड कंट्री प्लानिंग, हरियाणा के डायरेक्टर की तरफ से यह कार्रवाई की गई है। लाइसेंस रद्द करने का आदेश 9 मार्च को दिया गया था।

साल 2012 में स्काई लाइट ने कमर्शियल कॉलोनी बनाने का यह लाइसेंस 58 करोड़ रुपए में रियल एस्टेट कंपनी DLF को बेच दिया गया था। इतना ही नहीं नियमों का उल्लंघन कर गुरुग्राम के वजीराबाद में डीएलएफ को 350 एकड़ जमीन बेचने का भी आरोप है। बता दें कि रियल एस्टेट डेवलपमेंट लाइसेंस से किसी को रिहाइशी, कमर्शियल या इंडस्ट्रियल कॉलोनी बनाने का अधिकार मिल जाता है। 2012 में भी यह लैंड डील काफी विवाद में थी।

आईएएस अशोक खेमका ने 15 अक्टूबर 2012 को स्काईलाइट के 3.35 एकड़ के म्यूटेशन को रद्द कर दिया था। इसके बाद यह मामला चर्चा में आ गया। हालाँकि, म्यूटेशन को रद्द करने के उनके आदेश को गुरुग्राम राजस्व प्रशासन द्वारा कभी भी प्रभावी नहीं किया गया। 25 अप्रैल, 2014 को गुरुग्राम के डिप्टी कमिश्नर ने कहा कि म्यूटेशन की स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ और यह डीएलएफ को जमीन का मालिक बताता है। 

हरियाणा में 2014 में जब भाजपा सरकार आई तो हुड्डा सरकार की तरफ से रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी को दिए गए लाइसेंस पर खूब घेराबंदी हुई। अब विभाग ने लाइसेंस रद्द कर दिया है। अब उस जमीन पर कोई भी निर्माण कार्य नहीं हो सकेगा। दरअसल हुड्डा सरकार ने काफी सस्ती कीमत में यह जमीन रॉबर्ट वाड्रा को दी थी लेकिन बाद में इसे बड़ी कीमत में डीएलएफ को बेच दिया गया।

हरियाणा सरकार ने जस्टिस एसएस ढींगरा की अध्यक्षता में एक आयोग का गठन किया था। इस जाँच की रिपोर्ट सरकार को काफी पहले सौंप दी गई थी। कोर्ट ने आयोग की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने पर रोक लगाई थी। स्काईलाइट ने जब जमीन डीएलएफ को बेची तो नए टाइटल के साथ स्क्रूटनी फीस जमा की गई और सरकार के पास आवेदन किया गया।

2012 में कॉलोनी की बिल्डिंग बनाने का प्लान अप्रूव हुआ था। 2017 तक प्रोजेक्ट कंप्लीट होना था। डीएलएफ लाइसेंस रिन्यू करवाना चाहता था। जब ऐसा नहीं हुआ तो 2011 में नए लाइसेंस के लिए आवेदन किया गया। 2012 में तत्कालीन डीजी अशोक खेमका ने म्यूटेशन रद्द कर दिया। 

अब DLF ने इस मामले में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के अतिरिक्त मुख्य सचिव के समक्ष अपील दायर की है, जिसमें रद्द करने के आदेश को चुनौती दी गई है। डीएलएफ ने सरकार को भेजे पत्र में कहा कि लाइसेंस के नवीनीकरण के लंबित रहने के कारण विकास कार्य पूरा नहीं हो सका। लाइसेंस के ट्रांसफर के लिए आवश्यक चार्ज और शुल्क के साथ एक आवेदन भी जमा किया गया था। 

उल्लेखनीय है कि वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटेलिटी 2007 में एक लाख रुपए से शुरू हुई थी। 2008 में स्काईलाइट ने सेक्टर 83 में आंकारेश्वर प्रॉपर्टीज से 7.5 करोड़ रुपए में 3.5 एकड़ जमीन खरीदी थी। आरोप है कि कॉमर्शियल कॉलोनी का लाइसेंस मिलते ही स्काईलाइट ने जमीन 58 करोड़ में डीएलएफ को बेच दी। इसको लेकर वाड्रा और हुड्डा के खिलाफ FIR भी दर्ज हुई थी।