Home Blog Page 2755

मस्जिद कमिटी की धमकी के बावजूद ज्ञानवापी मस्जिद में वीडियोग्राफी शुरू: कड़ी सुरक्षा के बीच लगे अल्लाह-हू-अकबर के नारे

अदालत के आदेश के बाद उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में वाराणसी की काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मस्जिद परिसर (Gyanvapi Masjid) की वीडियोग्राफी और सर्वे का काम (6 मई 2022) से शुरू हो गया। वाराणसी सिविल कोर्ट ने ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में श्रृंगार गौरी सहित अन्य मूर्तियों में दर्शन पूजा और सुरक्षा की माँग वाली याचिका पर सुनवाई करने के बाद यह आदेश दिया था। ऐतिहासिक आधार पर ज्ञानवापी मस्जिद को काशी विश्वनाथ मंदिर को तोड़कर बनाया गया है और दोनों आपस में सटे हुए हैं।

ताजा जानकारी के मुताबिक, ज्ञानवापी मस्‍जिद पर‍िसर में कोर्ट कमिश्नर सहित हिंदू और मुस्लिम पक्ष के वादी और वकीलों ने अंदर प्रवेश किया। इस दौरान सर्वे का विरोध कर रहे मुस्लिम पक्ष के लोग काशी विश्वनाथ मंदिर के गेट नंबर 4 पर जमकर अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगाए। वहीं, दूसरे पक्ष ने भी नारेबाजी के विरोध में हर-हर महादेव के नारे लगाए। इलाके में भारी भीड़ और माहौल के देखते हुए पुलिस भीड़ को हटाने में लगी है। यह वीडियोग्राफी तीन-चार दिन तक चलेगी।

बता दें कि ज्ञानवापी मस्जिद समिति ने कोर्ट के आदेश के बावजूद कहा था कि वह मस्जिद के अंदर वीडियोग्राफी की अनुमति नहीं देगी। इसे देखते हुए वाराणसी में सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए गए हैं। अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद प्रबंध समिति के संयुक्त सचिव एसएम यासीन ने कहा था कि किसी को भी मस्जिद में प्रवेश की इजाजत नहीं होगी। मुस्लिम पक्ष ने कहा है कि सर्वेक्षण और वीडियोग्राफी काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर तक ही सीमित होनी चाहिए और किसी भी ‘गैर-मुस्लिम’ को मस्जिद में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

इस मामले में हिंदू याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व कोर्ट कमिश्नर की टीम में 15 लोग कर रहे हैं। इसके अलावा कोर्ट कमिश्नर के 2 सहयोगी और 3 फोटोग्राफर व वीडियोग्राफर भी सर्वे व वीडियोग्राफी के समय मौजूद हैं। वहीं, पाँच वकीलों के साथ अंजुमन इंतेजामिया कमेटी के प्रतिवादी भी मौजूद हैं। मंदिर के अंदर दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं या किसी को भी सघन चेकिंग के बाद ही अंदर जाने दिया जा रहा है। मस्जिद की सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही अर्धसैनिक बलों के हाथ में है।

बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद विवाद 1991 से वाराणसी की स्थानीय अदालत में लंबित है। उच्च न्यायालय के आदेश के बाद यह मुकदमा इलाहाबाद उच्च न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया गया है। हालाँकि, श्रृंगार गौरी मामला महज सात महीने पुराना है।

18 अगस्त 2021 को वाराणसी की पाँच महिलाओं ने श्रृंगार गौरी मंदिर में प्रतिदिन दर्शन करने की माँग समेत अन्य माँगों को लेकर वाराणसी के सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत में मुकदमा दायर किया था। अदालत ने याचिका को स्वीकार करते हुए न केवल मौके पर स्थिति जानने के लिए वकीलों का एक आयोग गठित करने का आदेश दिया था, बल्कि वकीलों का एक कमीशन भी नियुक्त किया था। इतना ही नहीं विपक्ष को नोटिस जारी किया गया, लेकिन विवादित स्थल का निरीक्षण नहीं हो सका था।

वाराणसी सिविल जज (सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक) जस्टिस रवि कुमार दिवाकर ने 18 अगस्त 2021 के अपने पहले के आदेश को दोहराते हुए 8 अप्रैल 2022 को कोर्ट कमिश्नर अजय कुमार मिश्रा को नियुक्त कर सर्वेक्षण और वीडियोग्राफी की कार्यवाही फिर से शुरू करने की अनुमति दी थी। इस बीच वाराणसी जिला प्रशासन और पुलिस ने आपत्ति जताई। कार्रवाई को रोकने के लिए उन्होंने तर्क दिया कि बेहतर सुरक्षा व्यवस्था की आवश्यकता है और केवल मुस्लिम और सुरक्षाकर्मी ही मस्जिद के अंदर जा सकते हैं। अदालत ने सुनवाई के बाद याचिका को खारिज करते हुए अपने पहले के आदेश को जारी रखा और 10 मई से पहले ईद के बाद सर्वेक्षण और वीडियोग्राफी की कार्रवाई पर रिपोर्ट माँगी और सुनवाई की तारीख 10 मई भी तय की।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ज्ञानवापी मस्जिद की बाहरी दीवार के भीतर देवी श्रृंगार गौरी की मूर्ति स्थापित है। राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद भक्तों के नियमित प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया था और चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन ही इस देवी की पूजा करने की अनुमति थी।

द कन्वर्जन: छल, निकाह, हलाला… पर्दे पर लव जिहाद की घृणित क्रूरता जो डराती भी है, बाँधती भी है

सीमा की नजर बार-बार अपने मोबाइल की डिजिटल घड़ी पर जा रही थी। नौ बजने को आए थे पर फिल्म अभी तक शुरू नहीं हुई थी। उसे चिंता थी कि फिल्म लम्बी चली तो खाना मिल पाएगा कि नहीं। पिछली बार हम जब द कश्मीर फाइल्स (The Kashmir Files) का पहले दिन का शो देखने गए थे, तब भी देर रात होने से सारे रेस्टोरेंट बंद हो चुके थे। खाना उसदिन भी नहीं मिला था। कल यानी गुरुवार (5 मई 2022) की रात तो हम दिल्ली के चाणक्य सिनेमा में द कन्वर्जन (The Conversion) का ग्रेंड प्रीमियर देखने के लिए आए थे।

प्रीमियर का घोषित समय था शाम सात बजे का। मैंने मुझे बड़े आदर भाव से निमंत्रित करने वाले मित्र कपिल मिश्रा से पूछा भी था तो उन्होंने कहा था कि आप 7.25 तक आएँगे तो चलेगा। इसलिए मेरा अनुमान था कि कुल मिलाकर 7.45 तक तो पिक्चर शुरू हो ही जाएगी। ढाई घंटे की लम्बी फिल्म हुई तो भी साढ़े दस तक तो हम फारिग हो जाएँगे। लेकिन यहाँ तो नौ बज चुके थे और फिल्म शुरू होने का नाम ही नहीं ले रही थी। एक-दो बार बीच में कभी वीडियो तो कभी आवाज आती थी पर फिर गायब हो जाती थी।

बार-बार कुछ तकनीकी गड़बड़ी की घोषणओं के बीच खचाखच भरे ऑडी 3 में दर्शक धैर्य और उत्कंठा से फिल्म शुरू होने का इंतज़ार कर रहे थे। मेरा पत्रकारीय मन किसी गड़बड़ी या अनिष्ट की आशंका भी कर रहा था। मुझे ध्यान आ रहा था कि अभूतपूर्व सफलता पाने वाली कश्मीर फाइल्स को भी शुरू के दिनों में कुछ थियेटरों में दिक्क्तों का सामना करना पड़ा था। दूर क्यों जाया जाए, पिछले हफ्ते ही राजधानी के फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट क्लब और फिर प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने कश्मीर फाइल्स के सफल निर्देशक विवेक अग्निहोत्री को प्रेस वार्ता करने की इजाजत नहीं दी थी। द कन्वर्जन तो सीधे-सीधे एक बेहद विवादित मगर ज्वलंत मुद्दे पर बनी फिल्म है। न जाने दिन-रात ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ की वकालत करने वालों में से किसी को ‘सलेक्टिव सेकुलरवाद’ का कौन सा कीड़ा काट जाए और फिल्म का प्रदर्शन ही रोक दिया जाए।

ऐसे कई सवाल मन में उस भूख की तरह बिलबिला रहे थे जो हमारे पेट में भी हलचल मचा रही थी। इतनी भीड़ में उठकर कुछ खाने के लिए जाना भी अटपटा लग रहा था। मगर तकनीकी गड़बड़ से भूख थोड़े ही रुकती है सो कई लोग बड़े साइज की बाल्टी के आकार के कागज के डिब्बों में पॉपकॉर्न लेकर आना शुरू कर चुके थे। इससे उठती महक ने हमारी भूख की भड़कती अग्नि में मानो घी डाल दिया। वो तो भला हो साथ की सीट पर बैठे श्रीमान विनोद बंसल की बिटिया विदुषी का जो उठकर गई और तीन लार्ज पॉपकॉर्न के डिब्बे ले आई। एक सादा नमकीन, एक चीज वाले और एक कैरामल के स्वाद वाले। मालूम नहीं कि ये विदुषी के उठ के जाकर पॉपकॉर्न लाने का कमाल था या देरी के लिए किए जाने वाली बंसल साहब की ट्वीट का कि ऐसा होने के कुछ समय बाद फिल्म चालू हो गई।

यकीन मानिए, फिल्म देखने के बाद न मुझे और न ही सीमा को उस देरी पर कोई गिला-शिकवा रहा जो अबतक हुई थी। सबसे पहली बात तो ये कि ये एक बेहद साहसपूर्ण विषय पर बनाई फिल्म है। फिल्म देखने जाते हुए मन में था कि कहीं ये महज एक नजरियाती प्रोपेगेंडा फिल्म ही न हो। सोचा था कि यदि ऐसा हुआ तो हम बीच में उठकर चले आएँगे। इससे हमें बुलाने वाले कपिल मिश्रा के आग्रह की इज्जत भी रह जाएगी और हमारा समय भी जाया नहीं होगा। पर ऐसी नौबत नहीं आई और अगर एक-दो दृश्यों को छोड़ दिया जाए तो फिल्म ने हमें लगातार बाँधे रखा। सीमा को अगली सुबह जल्दी ऑफिस जाना था तो भी उन्होने कहा कि अब तो पूरी फिल्म देखनी ही है।

फिल्म की कहानी को देखा जाए तो मध्यांतर तक फिल्म थोड़ी हलकी-फुल्की रहती है। अच्छा संगीत, दृश्यानुसार गीत और सुरुचिपूर्ण लोकेशन फिल्म को गति देते हैं। गीत कर्णप्रिय हैं। वाराणसी के घाट, कैम्पस की बिंदास ज़िन्दगी और एक संस्कारवादी हिन्दू माता-पिता तथा उनकी ‘मॉर्डन’ बेटी के बीच के टकराव का अच्छा चित्रण निर्देशक विनोद तिवारी ने किया है। कहानी लिखी है वंदना तिवारी ने। फिल्म ये बताने में सफल है कि ‘लव जिहाद’ अब हिंदूवादियों की एक राजनीतिक फेंटेसी मात्र नहीं, बल्कि ऐसी सच्चाई है जिससे समाज को लगातार दो-चार होना पड़ रहा है। यों तो प्यार और जिहाद दो कभी न मिलने वाले अलग-अलग किनारे जैसे लगते हैं, मगर मजहबी कट्टरता कई बार आदमी को इंसान बने नहीं रहने देती। धर्मान्धता में अपने मजहब के विस्तार के लिए कैसे प्रेम जैसी पवित्र भावना का दुरुपयोग हो सकता है, फिल्म इसे गहनता के साथ उकेरती है।

फिल्म के डायलॉग और बेहतर हो सकते थे। मगर कहानी के अलावा द कन्वर्जन का सबसे सशक्त पक्ष है, हीरोइन का पात्र निभाने वाली अभिनेत्री का अभिनय। मुझे नहीं मालूम कि अभिनेत्री विंध्य तिवारी ने इससे पहले कौन से फिल्म की है। मगर बाप रे बाप क्या अभिनय क्षमता है इस अभिनेत्री में। एक ही किरदार में अनेक कठिन भाव बड़ी कुशलता के साथ उसने निभाए हैं। एक बिंदास भरी उत्श्रंखलता से लेकर असहनीय अत्याचार और दर्द सहने वाली नायिका का सशक्त अभिनय विंध्य तिवारी ने किया है। सच मानिए तो हीरोइन की शुरुआती एंट्री इतनी अधिक प्रभावित नहीं करती पर जैसे फिल्म आगे बढ़ती है वैसे ही शृंगार, करुणा, भय, छल, क्रोध और रौद्र आदि कई जटिल भावों को वे बड़ी सहजता से निभाती नज़र आतीं हैं।

फिल्म के कई दृश्य बहुत भावपूर्ण है। मुझे सबसे सबसे अधिक मार्मिक दृश्य लगता है कि जब फिल्म में साक्षी बनी अभिनेत्री निकाह के समय अपना नाम बदलने को मज़बूर होती है। जिस गहराई के साथ सिर्फ अपनी आँखों के ज़रिए अपने साथ हुए अनजाने छल को विंध्य अभिनीत करती हैं, वह उनकी अभिनय क्षमता का नमूना है। हलाला की घृणित क्रूरता विचलित कर देने वाली है। निर्देशक की दाद देनी पड़ेगी कि वे इस दौरान आम मुम्बईया फिल्मों की तरह सेक्स दिखाने के लालच से बचे रहे। आप अपनी जवान होती बेटी के साथ फिल्म को देखने में असहज नहीं होते। बबलू शेख की भूमिका में प्रतीक शुक्ला ने भी जोरदार अभिनय किया है।

कुल मिलाकर एक नाज़ुक विषय पर बनी एक सशक्त फिल्म है- द कन्वर्जन। मुद्दा विवादास्पद होने के साथ-साथ समीचीन भी है। फिल्म पर राजनीति होना भी अवश्यम्भावी है। निर्देशक विनोद तिवारी ने शुरू में बताया ही था कि उनकी फिल्म महीनों सेंसर बोर्ड में लटकी रही थी। देखा जाए तो मजहब, राजनीति, विवाद और स्त्री विमर्श- ये सब मिलकर बॉक्स ऑफिस पर इसकी सफलता की कहानी अभी से कह रहे हैं।

इंस्टाग्राम पर भगवान राम सहित देवी-देवताओं को गंदी गालियाँ, सोहेल सहित 4 के वीडियो वायरल, लोगों ने उठाई कार्रवाई की माँग

सोशल साइट इंस्टाग्राम पर हिन्दू देवी-देवताओं को गालियाँ देते हुए एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में 4 लोगों की बातचीत के दौरान सोहेल नाम के व्यक्ति द्वारा भगवान राम के प्रति भद्दे और अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया गया है। वीडियो में एक महिला भी दिखाई दे रही है जिसका नाम अनु खान बताया जा रहा है। नेटीजेंस पुलिस को टैग करते हुए आरोपितों पर कार्रवाई की माँग कर रहे हैं।

वीडियो में सोहेल न सिर्फ भगवान राम बल्कि उनकी माँ को भी गालियाँ दे रहा है। साथ ही वो सभी भगवानों को भद्दे-भद्दे शब्द बोल रहा। अपनी गालियों को सोहेल धर्म पर अपना बयान बता रहा है। बीच में उसको एक अन्य व्यक्ति द्वारा रोका गया लेकिन वो नहीं माना। अपनी बात पर पछतावा करने के बजाय सोहेल हिन्दू धर्म और देवताओं को गालियाँ देता रहा।

@engineer_inside नाम के ट्विटर हैंडल ने इस वीडियो को शेयर करते हुए UP पुलिस और साइबर पुलिस को टैग किया है। शिकायत के वीडियो को पब्लिक लाइव बताते हुए आरोपित पर एक्शन लेने की माँग की गई है। हैंडल द्वारा आरोपित का प्रोफाइल लिंक शेयर करते हुए उसकी हिस्ट्री निकालने का निवेदन भी किया गया है। साथ ही बताया गया है कि आरोपित ऐसा आए दिन करता रहता है। ट्वीट हुए इसी वीडियो के कमेंट बॉक्स में कई अन्य यूजर्स भी पुलिस को टैग करके कार्रवाई की माँग कर रहे हैं।

बता दें कि सोहेल की प्रोफ़ाइल संस्कारी सोहेल के नाम से बनी हुई है। उसने अपनी प्रोफइल पर अकबरुद्दीन ओवैसी की फोटो लगा रखी है। सोहेल ने रुबिका लियाकत और पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ के वीडियो भी शेयर कर रखे हैं। 78 लोगों को फॉलो करने वाले सोहैल के फ़िलहाल 975 फॉलोवर हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले इंस्टाग्राम पर अपनी महिला मित्र के साथ हिन्दुओं को गालियाँ देने और उनको मारने तक की बात करने वाले नदीम को असम पुलिस ने राजस्थान से गिरफ्तार किया था। नदीम पर राजस्थान में भी केस दर्ज हुआ था।

काशी विश्वनाथ मंदिर के सामने नमाज पढ़ने लगी मुस्लिम महिला, पुलिस ने जबरन हटाया, बोले लोग- नमाजियों की ऐसी भीड़ यहाँ पहले नहीं देखी

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ और ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का आज शुक्रवार (6 मई 2022) को अदालती आदेश के बाद वीडियोग्राफी का काम शुरू हो गया है। इस दौरान दोनों पक्षों की ओर से जमकर नारेबाजी भी हुई। इससे पहले वहाँ का माहौल तब गरमा गया जब काशी विश्वनाथ मंदिर के गेट नंबर 4 के सामने एक मुस्लिम महिला नमाज पढ़ने लगी। वहाँ पर तैनात सुरक्षाबलों ने पहले तो उसे डिस्टर्ब नहीं किया, लेकिन काफी देर तक इंतजार करने के बाद उसे जबरन वहाँ से हटाना पड़ा

रिपोर्ट के मुताबिक, वाराणसी के जैतपुरा थाना क्षेत्र की रहने वाली मुस्लिम महिला का नाम आयशा बताया जा रहा है। थाना चौक पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया है। पुलिस का कहना है कि आरोपित महिला मानसिक रूप से बीमार है। फिलहाल उसे पुलिस की हिरासत में रखा गया है।

कोर्ट कमिश्नर की अगुआई में वीडियोग्राफी

दोपहर 3 बजे से कोर्ट कमिश्नर की अगुआई में वीडियोग्राफी सुनिश्चित है। इस दौरान हिंदू पक्ष और मुस्लिम पक्ष की ओर पहुँचे। इसमें अंजुमन इंतजामिया कमेटी के लोग भी शामिल रहेंगे। इसके अलावा, दोनों समुदाय के लोग भारी संख्या में वहाँ पहुँचे हैं। इस बीच मस्जिद को हरे पर्दे से ढंक दिया गया है। दरअसल काशी विश्वनाथ मंदिर धाम के गेट नंबर 4 के बगल से मस्जिद की ओर जाने का करीब 8 फीट चौड़ा रास्ता है। इस रास्ते से मस्जिद का पूरा हिस्सा दिखता है। इस हिस्से को हरे पर्दे और होर्डिंग लगा कर ढंक दिया गया।

इससे पहले नहीं दिखी ऐसी भीड़

जुमे की नमाज के कारण सामान्यतया यहाँ भीड़ होती है, लेकिन लोगों का कहना है कि इससे पहले इतनी भीड़ यहाँ पहले कभी नहीं देखी गई थी। माना जा रहा है कि मस्जिद के सर्वे को लेकर इतनी भीड़ इकट्ठा हुई थी। बता दें कि कोर्ट ने 30 अप्रैल 2022 को ज्ञानवापी मस्जिद परिसर स्थित माता श्रृंगार गौरी एवं अन्य विग्रहों की स्थिति का पता लगाने के लिए वीडियोग्राफी कराने का आदेश दिया था।

सड़क पर उतरे पुलिस कमिश्नर

कोर्ट द्वारा वीडियोग्राफी के आदेश के बाद वाराणसी में चप्पे-चप्पे पर पुलिस का सख्त पहरा लगा दिया गया है। खुद वाराणसी के पुलिस कमिश्नर ए सतीश गणेश सुरक्षा व्यवस्था को संभालने के लिए सड़क पर उतर आए हैं। इसके साथ ही एलआईयू की टीमों समेत इंटेलीजेंस ब्यूरो की टीमें भी सिविल ड्रेस में इलाके पर नजर रख रही हैं।

बौना, दुर्योधन, तानाशाह: पंजाब पुलिस की करनी पर कुमार विश्वास ने खूब सुनाया, कपिल मिश्रा ने बग्गा को बताया ‘सच्चा सरदार’

बीजेपी नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा (Tajinder Pal Singh Bagga) की गिरफ्तारी के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इसको लेकर बीजेपी नेता कपिल मिश्रा (Kapil Mishra) ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Delhi CM Arvind Kejriwal) पर तंज कसा है। वहीं, आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व नेता कुमार विश्वास (Kumar Vishwas) ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान (Punjab CM Bhagwant Mann) को कठघरे में खड़ा किया है। 

कुमार विश्वास ने ट्वीट करते हुए लिखा, “प्रिय छोटे भाई भगवंत मान, ख़ुद्दार पंजाब ने 300 साल में दिल्ली के किसी असुरक्षित तानाशाह को अपनी ताकत से कभी नहीं खेलने दिया। पंजाब ने तुम्हारी पगड़ी को ताज सौंपा है, किसी बौने दुर्योधन को नहीं। पंजाब के लोगों के टैक्स के पैसों व उनकी पुलिस का अपमान मत करो। पगड़ी सम्भाल जट्टा।”

वहीं, कपिल मिश्रा ने ट्वीट में लिखा, “तजिंदर बग्गा को पंजाब पुलिस के 50 जवान घर से गिरफ्तार करके ले गए। तजिंदर पाल सिंह बग्गा एक सच्चा सरदार है, उसे ऐसी हरकतों से ना डराया जा सकता है, ना कमजोर किया जा सकता। एक सच्चे सरदार से इतना डर क्यों?”

इसके अलावा उन्होंने एक वीडियो शेयर करते हुए कहा, “आज सुबह लगभग 6 बजे 50 से ज्यादा पंजाब पुलिस के सिपाहियों ने तजिंदर बग्गा को उनके घर से गिरफ्तार किया। ऐसा लग रहा है कि अरविंद केजरीवाल ने पंजाब पुलिस की पूरी ताकत बग्गा को चुप कराने के लिए लगा दी है। 50-50 पुलिस वाले उनके घर के अंदर आ रहे हैं, वो भी तब जब पंजाब पुलिस ने स्पष्ट तौर पर कहा था कि इस तरह का कोई कदम न उठाया जाए। अभी तो जाँच शुरू ही हुई थी। ट्वीट करने के मामले में, सोशल मीडिया पर सवाल उठाने के मामले में पुलिस का इस प्रकार से इस्तेमाल भारत के इतिहास में कभी नहीं हुआ है।”

उन्होंने आगे कहा, “ऐसा लगता है कि पंजाब की पुलिस पंजाब का कानून-व्यवस्था छोड़ कर दिल्ली में लोगों को गिरफ्तार करने के लिए लगा दी गई है। दिल्ली में जगह-जगह पंजाब पुलिस के लोग घूम रहे हैं। मैं ये कहना चाहता हूँ कि तेजिंदर बग्गा एक सच्चा सरदार है। एक बहादुर और साहसी सरदार है और अरविंद केजरीवाल एक सच्चे सरदार से डर गए हैं। इस प्रकार पुलिस का दुरुपयोग भारत के इतिहास में कभी नहीं किया गया। अभी तो एक महीना हुआ है पंजाब पुलिस का ताकत अरविंद केजरीवाल के पास आए हुए और इस प्रकार से पुलिस को एक्टिविस्टों को उठाने के लिए, सोशल मीडिया पर आवाज उठाने वालों को गिरफ्तार करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। अगर यही पुलिस पटियाला में लॉ एंड ऑर्डर ठीक करने में लगे तो शायद जो पटियाला में हो रहा है, वह नहीं होता। आज सारा देश बग्गा के साथ है और अरविंद केजरीवाल का डिक्टेटर वाला चेहरा, जिसके बारे में सभी लोग बात करते थे, पुलिस का गैरकानूनी इस्तेमाल…वो आज हम सबके सामने है।”

उल्लेखनीय है कि दिल्ली बीजेपी के फायर ब्रांड नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा को शुक्रवार (6 मई 2022) की सुबह सुबह पंजाब पुलिस उनके घर पहुँची और उन्हें गिरफ्तार किया। बग्गा के पिता ने बदसलूकी का आरोप भी लगाया है। इन सबके बीच पंजाब पुलिस को हरियाणा पुलिस ने कुरुक्षेत्र में रोक लिया है और इसके साथ ही दिल्ली पुलिस ने पंजाब पुलिस की टीम पर अपहरण का केस दर्ज किया है। 

तेजिंदर पाल बग्गा की गिरफ्तारी पर पंजाब पुलिस के खिलाफ अपहरण का केस, कुरुक्षेत्र से बीजेपी नेता को वापस ला रही दिल्ली पुलिस

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को कथित तौर पर धमकी देने के मामले में पंजाब पुलिस द्वारा भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा को गिरफ्तार किए जाने के मामले में दिल्ली पुलिस ने अपहरण का केस दर्ज किया है। इस मामले में राजधानी के जनकपुरी थाने केस दर्ज किया गया है, जिसमें पंजाब पुलिस पर बग्गा के अपहरण का आरोप है।

इस मामले में दिल्ली पुलिस ने पंजाब पुलिस के खिलाफ आईपीसी की धारा 452, 365, 342, 392, 295/34 के तहत मामला दर्ज किया है।

पंजाब पुलिस ने बग्गा को किया है गिरफ्तार

दिल्ली बीजेपी के नेता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा को शुक्रवार (6 मई, 2022) को पंजाब पुलिस ने गिरफ्तार किया। बताया जाता है कि करीब एक दर्जन गाड़ियों में पंजाब पुलिस के करीब 50 पुलिसकर्मियों ने इस काम को अंजाम दिया। बग्गा की कथित अवैध गिरफ्तारी की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में भाजपा नेता और समर्थक जनकपुरी थाने पहुँच गए।

टाइम्स नाउ द्वारा शेयर किए गए एक वीडियो में जनकपुरी थाने के बाहर बड़ी संख्या में बीजेपी नेता नजर आए। बता दें कि जब भी किसी एक राज्य की पुलिस दूसरे राज्य में कोई ऑपरेशन करती है तो प्रोटोकॉल के तहत ये जरूरी होता है कि स्थानीय पुलिस को पहले इसके बारे में बताया जाय। हालाँकि, अभी तक ये स्पष्ट नहीं हो सका है कि स्थानीय पुलिस को सूचित किया था या नहीं।

बीजेपी समर्थकों का कहना था कि क्या इसीलिए केजरीवाल पुलिस की कमान अपने हाथ में चाहते थे। बीजेपी नेताओं ने कहा कि बग्गा एक नेता हैं, एक उम्मीदवार हैं और भाजपा में राजनीतिक पदों पर हैं, वह आतंकवादी नहीं हैं। पंजाब पुलिस ने उनके साथ इस तरह का व्यवहार करते हुए उन्हें केवल इसलिए गिरफ्तार किया, क्योंकि उन्होंने अरविंद केजरीवाल के खिलाफ बयान जारी किया था।

इस मामले में दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने बग्गा कि गिरफ्तारी को अवैध करार दिया। उन्होंने कहा कि पंजाब पुलिस ने बग्गा के पिता के साथ मारपीट की। गुप्ता ने आगे कहा, “तेजिंदर बग्गा को पंजाब पुलिस ने अवैध रूप गिरफ्तार किया है। उन्होंने उन्हें पगड़ी तक नहीं पहनने दिया। उनके पिता द्वारा तजिंदर बग्गा के साथ मारपीट की शिकायत दर्ज कराई गई थी। केजरीवाल की हिटलर जैसी हरकत की कीमत उन्हें चुकानी पड़ेगी। पंजाब पुलिस केजरीवाल के निर्देश पर काम कर रही है।”

बग्गा को पगड़ी पहनने की भी इजाजत नहीं थी: पिता का आरोप

तेजिंदर बग्गा के पिता ने ऑपइंडिया से बात करते हुए बताया था, “पहले मेरे घर में 2 पुलिसकर्मी घुसे। वो मुझ से सामान्य ढंग से बात कर रहे थे। उस समय घर पर तेजिंदर और उनके अलावा कोई नहीं था। उसी समय तेजिंदर कपड़े पहन कर बाहर आए। थोड़ी बातचीत के बाद कई पुलिसकर्मी मेरे घर में जबरन घुस गए। उनके इस काम की मैं वीडियो बनाने लगा। इसी दौरान एक पुलिसकर्मी मुझे खींच कर कमरे की तरफ ले गया और मुझ से हाथापाई की।”

बग्गा के पिता ने आगे बताया, “इसके बाद वो तेजिंदर को खींच कर बाहर ले गए और हिरासत में ले लिया। पुलिसकर्मियों ने बग्गा को उनकी पगड़ी तक नहीं पहनने दी, जबकि उसने इसे पहनने की गुजारिश की। पुलिसवाले बग्गा का फोन भी अपने साथ ले गए।”

बग्गा को वापस लाने कुरुक्षेत्र रवाना हुई दिल्ली पुलिस

हालाँकि, पंजाब पुलिस को हरियाणा पुलिस ने रोक लिया है। हरियाणा की पुलिस बग्गा समेत पंजाब पुलिस को पूछताछ के लिए सदर थाना पिपली ले गई है। वहीं दिल्ली पुलिस भी बग्गा को वापस लाने के लिए कुरुक्षेत्र के लिए रवाना हो चुकी है। इस बीच हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने दो टूक कहा है कि तेजिंदर पाल सिंह बग्गा को दिल्ली पुलिस को ही सौंपा जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर किसी का अपहरण हुआ है तो उसे रोकना हमारी जिम्मेदारी है। वहीं बताया जा रहा है कि पंजाब पुलिस भी कोर्ट जाने की तैयारी कर रही है।

वहीं अभी यह खबर आ रही है कि बग्गा को लेकर दिल्ली पुलिस वापस आ रही है।

नोएडा के शारदा यूनिवर्सिटी द्वारा हिंदू विरोधी सवाल पूछे जाने पर बवाल: हिंदुत्व की तुलना नाजीवाद और फासीवाद से, धर्मांतरण का कारण भी पूछा

नोएडा स्थित शारदा यूनिवर्सिटी (Sharda University) हिन्दू विरोधी प्रश्नों के चलते विवादों के घेरे में आ गया है। इसके प्रश्न पत्र में हिन्दुओं की तुलना फासीवादियों से की गई है। भाजपा नेता विकास प्रीतम सिन्हा ने ट्वीट करते हुए कथित रूप से इसे मुस्लिम शिक्षक द्वारा बनाया गया बताया है। प्रश्न पत्र BA के राजनीति विज्ञान के साल 2021-2022 सत्र का है।

भाजपा नेता ने अपने ट्वीट में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath), धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) और शलभमणि त्रिपाठी (Shalabh Mani Tripathi) को टैग किया है। इस प्रश्न पत्र के पाँचवें नंबर पर सवाल किया गया है कि धर्मान्तरण के मूल कारण क्या हैं? वहीं, छठे नंबर पर पूछा गया है कि ”क्या आपको नाजीवादी, फासीवादी और हिंदुत्व में कोई समानता दिखती है?’ प्रश्न पत्र में दोनों सवालों को विस्तार से बताने के लिए कहा गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ ही देर बाद यह प्रश्न पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। कुछ नेटीजेंस इस प्रश्न पत्र को #BanShardaUniversity के नाम से ट्वीट भी करने लगे।

@peacearyap हैंडल ने लिखा, “यूनिवर्सिटी बंद होनी चाहिए’

ऑपइंडिया ने इस प्रश्न पत्र की सत्यता की पुष्टि के लिए शारदा यूनिवर्सिटी से सम्पर्क किया। रिशेप्शन पर मौजूद स्टाफ ने अपने सीनियर से बात करवाने के लिए कुछ देर के लिए हमें होल्ड कर रखा। बाद में उनके सीनियर फोन लाइन पर नहीं आए। मौजूद स्टाफ द्वारा एक अन्य नंबर दिया गया, जिसे किसी के भी द्वारा उठाया नहीं गया। शारदा यूनिवर्सिटी द्वारा प्रश्न पत्र की पुष्टि अथवा इंकार होने के बाद हम इस जानकारी को अपडेट करेंगे।

‘मेटा एक निजी संस्था, आर्टिकल-19 के अधिकारों को हमारे खिलाफ लागू नहीं किया जा सकता है’: दिल्ली HC में बचाव में उतरी सोशल मीडिया कंपनी

दिल्ली हाईकोर्ट को इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे लोकप्रिय प्लेटफॉर्म की संचालन करने वाली सोशल मीडिया कंपनी (Social Media Company Meta) मेटा ने बताया, “भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 (अभिव्यक्ति की आजादी) के तहत एक यूजर द्वारा इन अधिकारों को उसके खिलाफ लागू नहीं किया जा सकता है। यह एक निजी संस्था है जो सार्वजनिक कार्य का निर्वहन नहीं करती है।”

एक इंस्टाग्राम अकाउंट को कथित तौर पर निष्क्रिय करने के खिलाफ एक रिट याचिका के जवाब में दायर अपने हलफनामे में अमेरिका स्थित कंपनी ने कहा, “इंस्टाग्राम एक स्वतंत्र और अपनी इच्छा से प्रयोग किया जाने वाला प्लेटफॉर्म है, जो एक निजी अनुबंध है। याचिकाकर्ता को इसके इस्तेमाल का कोई मौलिक अधिकार नहीं है।”

हाई कोर्ट में विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों द्वारा कई यूजर्स के अकाउंट को सस्पेंड करने और उसे डिलीट करने की चुनौती देने वाली कई याचिकाएँ डाली गई हैं। कंपनी की तरफ से हलफनामे में कहा गया है, “याचिकाकर्ता का अदालत में रिट याचिका दायर करना अनुचित कदम है, क्योंकि याचिकाकर्ता और मेटा के बीच संबंध एक निजी अनुबंध होता है। ऐसे में अनुच्छेद-19 के तहत आने वाले अधिकारों को मेटा जैसी एक निजी संस्था के खिलाफ लागू नहीं किया जा सकता है।”

इसमें आगे कहा गया, “याचिकाकर्ता का एक निजी संस्था मेटा के खिलाफ अनुच्छेद-19 के तहत अधिकारों का दावा करने का प्रयास अनुचित, कानून के विपरीत है, इसे अस्वीकार किया जाना चाहिए। मेटा सामाजिक कार्यों का निर्वहन नहीं कर रही है, जो उसे अनुच्छेद 226 के तहत अदालत में घसीटा जाए।”

बता दें कि एक ट्विटर अकाउंट के संस्पेंशन के खिलाफ एक अन्य याचिका के जवाब में केंद्र सरकार ने मार्च में दिल्ली हाई कोर्ट को बताया था कि किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता को सामाजिक और तकनीकी रूप से सोशल मीडिया मंच पर नहीं छोड़ा जा सकता है। उन्होंने कहा था कि सोशल मीडिया मंचों को नागरिकों के मौलिक अधिकारों का सम्मान करना चाहिए और भारत के संविधान के अनुरूप होना चाहिए।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया था कि एक महत्वपूर्ण सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे मौलिक अधिकारों हनन नहीं करना चाहिए। इसके लिए उसकी जवाबदेही बनती है। अन्यथा किसी भी लोकतांत्रिक देश को इसके लिए गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

’20 मिनट में सुलझा 21 साल पुराना विवाद’: सीएम योगी ने उत्तराखंड को सौंपा अलकनंदा, यूपी को मिला ‘भागीरथी’

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने गुरुवार (5 अप्रैल 2022) को ऐलान किया कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड (Uttarakhand) के बंटवारे के साथ शुरू हुए संपत्ति विवाद को आखिरकार को 21 साल बाद सुलझा लिया गया है। इसमें अलकनंदा होटल उत्तराखंड सरकार को सौंप दिया गया, जबकि भागीरथी होटल को यूपी सरकार को दिया गया है।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने हरिद्वार में एक कार्यक्रम के दौरान सीएम पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) को अलकनंदा होटल को सौंप दिया। इसके साथ ही उन्होंने हरिद्वार में ₹41 करोड़ की लागत से यूपी सरकार द्वारा निर्मित भागीरथी गेस्ट हाउस का भी उद्घाटन किया। सीएम योगी ने कहा कि ये सब कुछ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के दृष्टिकोण से प्रेरित है।

सीएम योगी ने कहा, “गंगा का जन्म तभी होता है जब भागीरथी और अलकनंदा एक साथ आती हैं। यूपी-उत्तराखंड भले ही दो अलग राज्य हों, लेकिन दोनों राज्यों के लोगों की जनभावनाएँ एक जैसी ही हैं। हमने इसे नौकरशाही पर नहीं छोड़ते हुए राजनीतिक रूप से बातचीत के जरिए मुद्दों को सुलझाया है।” उन्होंने कहा कि यह समाधान देश में दो राज्यों के बीच विवादों को सुलझाने के लिए एक उदाहरण स्थापित करेगा।

उन्होंने आगे कहा कि जब वो 2017 में मुख्यमंत्री बने थे, उसके एक सप्ताह के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने अलकनंदा होटल को उत्तराखंड को सौंपने के संबंध में दोनों राज्यों के बीच संपत्ति विवाद को सुलझाने में देरी पर नाराजगी व्यक्त की थी। उन्होंने कहा, “मैंने इसे प्राथमिकता के आधार पर लिया, ताकि इस तरह के अंतरराज्यीय विवादों को अदालतों में सालों तक घसीटा न जाए, बल्कि बातचीत से सुलझाया जाए।” इस मौके पर सीएम योगी ने उत्तराखंड सरकार को राज्य में इको-टूरिज्म और पर्यटन गतिविधियों की अपार संभावनाओं का पता लगाने का सुझाव भी दिया, ताकि स्थानीय स्तर पर रोजगार को बढ़ावा दिया जा सके।

गौरतलब है कि अलकनंदा होटल हर की पौड़ी के पास गंगा नहर के किनारे स्थित है। इसे 1964 में यूपी पर्यटन निगम द्वारा बनाया गया था। अलग राज्य बनने के बावजूद उत्तराखंड में 4,000 आवासीय भवनों, 357 गैर-आवासीय भवनों और 13,813 हेक्टेयर भूमि पर यूपी सिंचाई विभाग का नियंत्रण है। साल 2000 में राज्य के बंटवारे के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने अलकनंदा होटल को छोड़ने से इनकार कर दिया था।

ट्रिपल इंजन सरकार को दिया क्रेडिट

इस मौके पर उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने दोनों राज्यों के बीच परिसंपत्तियों के विवाद को 20 मिनट में सुलझाने का दावा किया। उन्होंने इसका श्रेय सीएम योगी आदित्यनाथ की कोशिशों और ट्रिपल इंजन की सरकार को दिया है। धामी ने कहा कि इससे पहले तक अलग-अलग सरकारों के होने के कारण इस मसले का समाधान नहीं हो पा रहा था।

BJP नेता तेजिंदर बग्गा को मोहाली ले जा रही पंजाब पुलिस को हरियाणा में रोका गया, मामले में आया नया मोड़

भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा को लेकर हुई गिरफ्तारी से सियासी घमासान छिड़ गई है। बग्गा को पंजाब पुलिस गिरफ्तार करके मोहाली ले जा रही थी तो हरियाणा पुलिस ने कुरुक्षेत्र में रोक लिया है। दिल्ली पुलिस ने पंजाब पुलिस के खिलाफ अपहरण का केस दर्ज कर लिया है। जिसके बाद बग्गा को ले जाने वाले काफिले को हरियाणा पुलिस ने रोक लिया। इससे पहले बीजेपी कार्यकर्ताओं ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पंजाब पुलिस के खिलाफ जनकपुरी थाने के बाहर बग्गा की गिरफ्तारी को लेकर विरोध प्रदर्शन किया।

बताया जा रहा है कि गिरफ्तारी के दौरान लगभग 50 पुलिसकर्मी मौजूद थे। वे लगभग 1 दर्जन वाहनों से आए थे। बग्गा की गिरफ्तारी दिल्ली के उनके घर से की गई। इस घटनाक्रम पर तेजिंदर बग्गा के पिता ने ऑपइंडिया से बात करते हुए बताया था, “पहले मेरे घर में 2 पुलिसकर्मी घुसे। वो मुझ से सामान्य ढंग से बात कर रहे थे। उस समय घर पर तेजिंदर और उनके अलावा कोई नहीं था। उसी समय तेजिंदर कपड़े पहन कर बाहर आए। थोड़ी बातचीत के बाद कई पुलिसकर्मी मेरे घर में जबरन घुस गए। उनके इस काम की मैं वीडियो बनाने लगा। इसी दौरान एक पुलिसकर्मी मुझे खींच कर कमरे की तरफ ले गया और मुझ से हाथापाई की।”

तेजिंदर के पिता ने आगे बताया, “इसके बाद वो तेजिंदर को खींच कर बाहर ले गए और हिरासत में ले लिया। पुलिसकर्मियों ने बग्गा को उनकी पगड़ी तक नहीं पहनने दी, जबकि उसने इसे पहनने की गुजारिश की। पुलिसवाले बग्गा का फोन भी अपने साथ ले गए।”

इससे पहले 2 अप्रैल 2022 को भाजपा युवा मोर्चा के राष्ट्रीय महासचिव तेजिंदर पाल सिंह बग्गा ने बताया था कि पंजाब पुलिस उनके दिल्ली स्थित घर पर गिरफ्तारी के लिए आई थी। तब बग्गा ने कहा था कि पुलिस ने यह कदम बिना किसी पूर्व सूचना के और बिना FIR की कॉपी दिए ही उठाया था जो कानून के हिसाब से अनुचित है। 

गौरतलब है कि बग्गा सोशल मीडिया पर अरविंद केजरीवाल के खिलाफ काफी मुखर रहे हैं। पिछले दिनों बग्गा ने कहा था, “पूरे देश के सबसे बड़े नरसंहार का दिल्ली विधानसभा में मज़ाक उड़ाया गया। अरविंद केजरीवाल के मुताबिक द कश्मीर फाइल्स फिल्म में दिखाया गया कश्मीरी पंडितों का नरसंहार झूठ है। मुझे लगता है कि 100 करोड़ हिन्दू इसे कभी नहीं भूलेंगे।”