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तेजिंदर बग्गा को मेडिकल जाँच के लिए दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल ले गई दिल्ली पुलिस, जज के घर में हुई पेशी: जानिए आज का पूरा घटनाक्रम

पंजाब पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद हरियाणा से तेजिंदर पाल सिंह बग्गा को छुड़ाकर दिल्ली पुलिस उन्हें वापस दिल्ली लाई है। उन्हें शुक्रवार (6 मई, 2022) की रात 9 बजे गुरुग्राम में जज के घर पर पेश किया गया। उससे पहले उन्हें दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल मेडिकल जाँच के लिए ले जाया गया। इधर द्वारका कोर्ट पहुँचते ही पंजाब पुलिस के डीएसपी के एस संधू का बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने जमकर विरोध किया। हालाँकि, उनका कहना है कि बग्गा के मामले में उन्होंने नियमों के अनुसार कार्रवाई की है।

इधर पंजाब पुलिस के एडीजीपी शरद चौहान भी कुरुक्षेत्र के थानेसर थाने पहुँचे। यहीं पर पंजाब पुलिस के अधिकारियों को रोक कर रखा गया है। वहीं इस मामले में पंजाब पुलिस ने पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट का रुख किया है।

क्या है आज का पूरा घटनाक्रम

गौरतलब है कि शुक्रवार की अल सुबह दिल्ली स्थित घर से पंजाब पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया। इस घटना के बाद बग्गा कि पिता ने दिल्ली के जनकपुरी थाने में बग्गा के अपहरण की शिकायत दर्ज कराई और इसका आरोप पंजाब पुलिस पर लगाया। इसके बाद हरकत में आई दिल्ली पुलिस ने हरियाणा पुलिस से मदद माँगी औऱ हरियाणा पुलिस ने कुरुक्षेत्र में पंजाब पुलिस के काफिले को रोक दिया

इधर दिल्ली पुलिस की टीम बग्गा को पंजाब पुलिस के चंगुल से छुड़ाने के लिए कुरुक्षेत्र के लिए रवाना हुई औऱ उन्हें वापस दिल्ली लेकर आई।

बता दें कि पंजाब पुलिस पर ये आरोप है कि उसने अवैध तरीके से न सिर्फ बग्गा को गिरफ्तार किया, बल्कि उनके पिता के साथ मारपीट भी की। तेजिंदर बग्गा के पिता ने ऑपइंडिया से बात की। उन्होंने बताया, “पहले मेरे घर में 2 पुलिसकर्मी घुसे। वो मुझ से सामान्य ढंग से बात कर रहे थे। उस समय घर पर तेजिंदर और उनके अलावा कोई नहीं था। उसी समय तेजिंदर कपड़े पहन कर बाहर आए। थोड़ी बातचीत के बाद कई पुलिसकर्मी मेरे घर में जबरन घुस गए। उनके इस काम की मैं वीडियो बनाने लगा। इसी दौरान एक पुलिसकर्मी मुझे खींच कर कमरे की तरफ ले गया और मुझ से हाथापाई की।”

तेजिंदर बग्गा के पिता ने आगे बताया, “इसके बाद वो तेजिंदर को खींच कर बाहर ले गए और हिरासत में ले लिया। पुलिसकर्मियों ने बग्गा को उनकी पगड़ी तक नहीं पहनने दी, जबकि उसने इसे पहनने की गुजारिश की। पुलिसवाले बग्गा का फोन भी अपने साथ ले गए।”

इस मामले में दिल्ली पुलिस ने पंजाब पुलिस पर प्रक्रिया का पालन नहीं करने का आरोप लगाया है। दिल्ली पुलिस का दावा है कि उसे गिरफ्तारी को लेकर पूर्व सूचना नहीं दी गई थी।

नागराजू की हत्या में भी मुस्लिम परिवार के बचाव में कूदा NDTV, हैदराबाद की घटना पर एडिटर ने सांप्रदायिक एंगल से किया इनकार

मुस्लिम महिला से शादी करने के मामले में हैदराबाद की सड़कों पर महिला के परिवार द्वारा हैदराबाद की सड़कों पर हिंदू व्यक्ति नागराजू की बेरहमी से हत्या किए जाने के एक दिन बाद कथित लिबरल मीडिया हाउस ने इस हत्या में धार्मिक एंगल को झुठलाने की कोशिश की है। जबकि पहले से ये स्पष्ट है कि मुस्लिम युवती से शादी करने के कारण हिंदू व्यक्ति की हत्या की गई थी।

इसी इसी क्रम में गुरुवार (5 मई 2022) को विवादित न्यूज नेटवर्क एनडीटीवी की कार्यकारी संपादक उमा सुधीर ने 25 वर्षीय नागराजू की हत्या के मामले में मजहबी एंगल को दबाने की कोशिश की, जिसे दो मुस्लिम पुरुषों ने चाकू मार दिया था। आरोपित की पहचान महिला के भाई के रूप में हुई है।

एक ट्वीट करते हुए उमा सुधीर ने दावा किया कि मृतक नागराजू और उनकी मुस्लिम पत्नी सुल्ताना एक-दूसरे को दस साल से जानते थे और एक-दूसरे से प्यार करते थे, इसलिए शादी की थी। लड़का एससी समुदाय से था और लड़की मुस्लिम समुदाय से है, जो कि एक्सीडेंटल है। किसी को भी इस घटना को सांप्रदायिक या जाति का रंग नहीं देना चाहिए।

फोटो साभार: ट्विटर

नागराजू की नृशंस हत्या पर भारी आक्रोश के बीच उमा सुधीर जैसे लोग अपराध को ‘धर्मनिरपेक्ष’ साबित करने के लिए इसलिए इतना उछलकूद कर रहे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि लड़की मुस्लिम है। उमा सुधीर जैसे कथित ‘धर्मनिरपेक्ष-लिबरल’ लोग न केवल ये चाहते हैं कि लोग इस हत्या के धार्मिक एँगल की उपेक्षा करें। बल्कि, मुस्लिम समुदाय द्वारा किए गए अपराधों को व्हाइट वॉश करने की कोशिश करें।

नागराजू की हत्या केवल उसकी धार्मिक पहचान अलग होने के कारण उनकी हत्या की गई। बावजूद इसके उमा सुधीर चाहती हैं कि लोग इस कम्युनल एँगल को छोड़ दें और मुस्लिमों का नाम न लें, जिस पर अपने ही जीजा की हत्या का आरोप है। इस तरह के कार्य कुछ और नहीं, बल्कि देश में हिंदुओं के प्रति सांप्रदायिक घृणा, अपराध को तुच्छ बनाने की कोशिश है।

मुस्लिम लड़की से शादी करने के कारण नागराजू की हत्या उसके ही मुस्लिम साले ने कर दी थी। इसका कारण केवल इतना सा था कि उसने हिंदू होकर मुस्लिम महिला से शादी की थी। मुस्लिम हिंदुओं से इस कदर नफरत करते हैं कि आरोपित इस्लाम की धार्मिक पवित्रता की रक्षा के लिए अपनी ही बहन की हत्या करने के लिए उतारू था। लेकिन, फिर भी उमा सुधीर चाहती हैं कि लोग विश्वास करें कि इस घटना में कोई धार्मिक एंगल नहीं है।

हिंदू नहीं होते तो जिंदा होते नागराजू

नागराजू अगर हिंदू नहीं होते और किसी गैर मुस्लिम से शादी नहीं करते तो शायद वो जीवित होते। नागराजू की पत्नी सुल्ताना ने खुलासा किया था कि 25 वर्षीय मार्केटिंग मैनेजर पत्नी के लिए धर्मान्तरण कर इस्लाम अपनाने को तैयार था। लेकिन फिर भी उसकी हत्या कर दी गई।

गौरतलब है कि बुधवार को नागराजू पर सुल्ताना के भाई सैयद मोबिन अहमद और मोहम्मद मसूद अहमद ने लोहे की रॉड से हमला किया। उसे चाकू मार दिया गया। इसमें वो गंभीर रूप से घायल हो गया था, इसके कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इसका वीडियो भी वायरल हुआ था।

हिंदुओं को सबक सिखाने की थी पूरी तैयारी: अदालत ने दिल्ली हिन्दू विरोधी दंगों के आरोपित ताहिर हुसैन समेत 6 पर तय किए आरोप

दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार (6 मई) को 2020 के दिल्ली हिंदू विरोधी दंगों के संबंध में AAP के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन के खिलाफ आरोप तय कर दिए। कोर्ट ने कहा कि ताहिर हुसैन दंगों में सक्रिय भागीदार था न कि मूकदर्शक। दरअसल, कोर्ट करण नाम के एक व्यक्ति द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था। करण का दिल्ली के खजूरी खास इलाके के चांद बाग में एक गोदाम था, जिसे ताहिर हुसैन के नेतृत्व में उन्मादी भीड़ ने नष्ट कर दिया गया था।

सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र भट ने कहा, “वहाँ ताहिर हुसैन के घर से पत्थर और बम आदि फेंके जा रहे थे… वह मूकदर्शक नहीं, बल्कि दंगों में सक्रिय भाग ले रहा था और गैरकानूनी रूप से लोगों को जुटाए गए अन्य लोगों को दूसरे समुदाय से संबंधित व्यक्तियों को सबक सिखाने के लिए उकसा रहा था।”

कोर्ट ने कहा कि हुसैन और 5 अन्य अर्थात् शोएब, गुलफाम, जावेद, फिरोज और अनस के बीच हिंदू समुदाय से संबंधित संपत्तियों की आगजनी और तोड़फोड़ करने का समझौता था। आप के पूर्व पार्षद ने यह सुनिश्चित करने के लिए ‘विस्तृत तैयारी’ की थी कि उनकी योजना वास्तविकता बन जाए।

न्यायाधीश ने आगे कहा, “उपरोक्त परिस्थितियाँ कहीं भी यह संकेत नहीं देती हैं कि यह एक अचानक हुआ कृत्य था, बल्कि यह स्पष्ट रूप से प्रकट करता है कि आरोपी ताहिर हुसैन की इमारत ई-17 से हिंदू समुदाय की संपत्तियों में तोड़फोड़ और आगजनी करने के लिए प्रयोग किया गया था। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए विस्तृत तैयारी की गई थी।”

अदालत ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 120बी (आपराधिक साजिश), 147 (दंगा), 148 (सशस्त्र दंगा), 149 (गैरकानूनी सभा), 395 (डकैती) और 427, 435 और 436 के तहत 6 लोगों के खिलाफ आरोप तय किए। ताहिर हुसैन पर IPC की अन्य धाराओं के अलावा धारा 109 और 114 का भी आरोप लगाया गया।

दिल्ली दंगों में ताहिर हुसैन की भूमिका

ऑपइंडिया ने पहले बताया था कि कैसे ताहिर हुसैन ने एक बयान में कबूल किया था कि उन्होंने दंगों के लिए अपने घर को लॉन्चपैड के रूप में चुना था। यह देखते हुए कि उसका घर एक ऊँची इमारत थी और उस समय निर्माणाधीन थी, बिना किसी दिक्कत के ईंट और पत्थरों को इकट्ठा किया जा सकता था।

ताहिर हुसैन ने कबूल किया कि उसने और उसके अन्य साथी साजिशकर्ताओं ने पहले से ही पत्थर-ईंट और अन्य गोला-बारूद इकट्ठा करना शुरू कर दिया था, ताकि वे उन लोगों को सिखा सकें, जो CAA के समर्थन में थे। दंगा भड़कने के 2-3 दिन पहले उसने थाने से अपनी लाइसेंसी पिस्टल भी छुड़ा ली थी।

हिंदुओं को सबक सिखाने के लिए गोला-बारूद इकट्ठा करते हुए ताहिर हुसैन ने कहा कि उसने अपने समर्थकों को ‘किसी भी चीज़ के लिए और हर तरह से तैयार’ रहने के लिए कहा था। उसने यह भी सुनिश्चित किया था कि इलाके के सभी सीसीटीवी कैमरे को तोड़ दिया जाए, ताकि दंगों के सबूत ना मिल सकें। दंगों के दौरान वह अपने भाइयों के साथ घर में मौजूद था।

अकेले नेपाल नहीं गए थे राहुल गाँधी, 2 और गाँधी भी थे साथ: पार्टी Video में दिखी महिला को लेकर भी नया दावा

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गाँधी (Congress Leader Rahul Gandhi) हाल ही में एक शादी में शिरकत करने के बाद नेपाल (Nepal) से लौटे हैं। उनके साथ दो अन्य लोग भी उस समारोह में गए थे। इनका नाम है- सुब्रमण्यम गाँधी और कलावती गाँधी। राहुल गाँधी का नेपाल यात्रा का एक वीडियो वायरल काफी वायरल हुआ था, जिसमें वह एक महिला के साथ पार्टी करते हुए नजर आ रहे हैं। ताजा रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि वह भारतीय मूल की एक पुर्तगाली महिला थी और कहा जाता है कि वह अमेरिका में पढ़ाई कर रही है। नेपाल के सबसे बड़े समाचार पत्र, कांतिपुर नेशनल डेली के हवाले से यह दावा किया जा रहा है। 

हालाँकि, इससे पहले सोशल मीडिया यूजर्स ने दावा किया था कि वीडियो में दिख रही महिला चीन की राजदूत होउ यांकी (Hou Yanqi) हैं। जो वीडियो वायरल हो हुआ है, उसमें राहुल गाँधी तेज संगीत के बीच पार्टी करते दिख रहे हैं। राहुल गाँधी बीच-बीच में उस महिला के कान में कुछ कहते हुए भी दिखाई दिए। इस वीडियो के सामने आने के बाद राहुल गाँधी कई तरह के सवालों के घेरे में आ गए। नेटिजन्स ने सवाल उठाए कि कहीं ये राहुल की चीनी कनेक्शन तो नहीं है।

इसके बाद तेलंगाना कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष और सांसद रेवंत रेड्डी (Telangana Congress president Revanth Reddy) ने काठमांडू नाइट क्लब में राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) के साथ देखी गई महिला को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही खबरों को सही ठहराया था। उन्होंने स्वीकार किया था कि क्लब में राहुल गाँधी के साथ देखी गई महिला कोई और नहीं, बल्कि चीन की राजदूत होउ यांकी (Hou Yanqi) ही हैं। स्थानीय मीडिया से बात करते हुए रेवंत रेड्डी ने कहा था कि राहुल गाँधी ने नेपाल की राजधानी काठमांडू के एक नाइट क्लब में चीनी राजदूत (Chinese Ambassador) से मुलाकात की थी।

पार्टी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद कॉन्ग्रेस राहुल गाँधी के बचाव में हाथ-पैर मारने लगी। लगातार ट्वीट कर उनकी तारीफ की जाने लगी। कुछ मीडिया हाउस भी थे, जो कॉन्ग्रेस नेता के बचाव में हाथ-पैर मार रहे थे। महिला की पहचान उजागर करने के लिए इन संस्थानों ने फैक्ट चेक भी कर दिया। इसी में से एक था- इंडिया टुडे।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट ने वीडियो में दिख रही महिला को लेकर किए जाने वाले दावे को निराधार बताया। संस्थान ने कहा कि राहुल गाँधी जिस महिला से बात कर रहे हैं, वह चीन की राजदूत नहीं हैं। वह महिला नेपाल की है और दुल्हन की फ्रेंड है। काठमांडू के जिस लॉर्ड ऑफ ड्रिंक्स पब में कॉन्ग्रेस नेता पार्टी के लिए गए थे, उसके सीईओ राबिन श्रेष्ठ के हवाले से इंडिया टुडे ने बताया कि उनके साथ दिख रही ​महिला चीनी राजदूत नहीं है। उन्होंने कहा, “वह दुल्हन की फ्रेंड है, जिसे शादी में आमंत्रित किया गया था।”

यही नहीं इंडिया टुडे ने नेपाल के जाने-माने अखबार काठमांडू पोस्ट (The Kathmandu Post) के पत्रकार अनिल गिरि से भी संपर्क करने का दावा किया। उन्होंने पुष्टि की कि वायरल वीडियो में दिखाई दे रही महिला नेपाल की रहने वाली है। उन्होंने कहा, “वह महिला चीनी राजदूत नहीं है, बल्कि दुल्हन पक्ष की ओर से आमंत्रित एक नेपाली महिला है।” हालाँकि इंडिया टुडे ने इस महिला का नाम नहीं बताया। 

बता दें कि चीनी राजदूत होउ यांकी वही हैं, जिन पर हनीट्रैप का सहारा लेकर अपने देश का हित साधने के आरोप लगते रहे हैं। राहुल गाँधी जिस कार्यक्रम में दिख रहे हैं, वो सुमनिमा उदास का आयोजन था। सुमनिमा उदास उनकी दोस्त हैं, जिनके निमंत्रण पर राहुल गाँधी नेपाल पहुँचे थे।

1140 मस्जिदों में से 950 को मिली लाउडस्पीकर बजाने की अनुमति वहीं 2400 मंदिरों में से इजाजत केवल 24 को: मुंबई पुलिस

महाराष्ट्र में लाउडस्पीकर पर हनुमान चालीसा और अजान को लेकर जारी विवाद के बीच बुधवार (4 मई 2022) को कहा कि मुंबई में 2400 मंदिर हैं, जिनमें से केवल 24 ने ही लाउडस्पीकर का इस्तेमाल करने की इजाजत प्राप्त की है। जबकि, 1,140 मस्जिदों में से 950 को अधिकारियों से लाउडस्पीकर का उपयोग करने की मंजूरी मिली है।

एक अधिकारी के मुताबिक मुंबई पुलिस के पास जो आँकड़े उपलब्ध हैं, उसके अनुसार मुंबई में केवल 1% मंदिरों ने ही अपने परिसरों में लाउडस्पीकर बजाने के लिए इजाजत माँगी है। इसके अलावा चर्च, गुरुद्वारों, बुद्ध विहारों और प्रार्थनाघरों जैसे दूसरे पवित्र स्थलों द्वारा इस लाउडस्पीकर के इस्तेमाल के आँकड़ों को पुलिस द्वारा अभी एकत्र किया जा रहा है। अधिकारी के मुताबिक, इन पूजा स्थलों के प्रबंधन को लाउडस्पीकर लगाने के लिए अनुमति लेने के लिए कहा जाएगा।

गौरतलब है कि मनसे के अध्यक्ष राज ठाकरे द्वारा मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने की माँग के बीच बुधवार की शाम को मुंबई पुलिस के कमिश्नर संजय पांडे के कार्यालय में बैठक की गई थी। इस दौरान लाउड स्पीकर के उपयोग को लेकर चर्चा की गई थी। अधिकारी के मुताबिक, मंदिरों, मस्जिदों आदि पवित्र जगहों पर सुबह 6 बजे से रात 10 बजे के दौरान सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों को तहत बजाने को कहा गया है।

बैठक में शामिल उपनगरीय मुंबई के खरदंडा मंदिर के ट्रस्टी चिंतामणि नेवते ने कहा कि राजनेताओं को लोगों की धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा, “राजनेताओं को चुनाव के लिए ऐसे मुद्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।” दादर में एक जैन मंदिर के सचिव ने कहा कि धार्मिक स्थलों पर डेसिबल की सीमा 50 निर्धारित की गई है। उन्होंने दावा किया कि घरों में इस्तेमाल होने वाले मिक्सर और ग्राइंडर का शोर इससे अधिक था।”

इस मसले पर मनसे चीफ राज ठाकरे ने कहा, “जहाँ तक ​​मुझे पता है, मुंबई में 1,140 से अधिक मस्जिदें हैं। इनमें से 135 मस्जिदों ने दिशानिर्देशों का उल्लंघन करते हुए सुबह 5 बजे अज़ान की। हम राज्य में शांति चाहते हैं। मैं पुलिस से पूछना चाहता हूँ कि आप केवल हमारे कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं। मेरा कहना है कि मस्जिदों से सभी अवैध लाउडस्पीकरों को हटा दिया जाना चाहिए, जब तक उन्हें हटा नहीं दिया जाता है, हम अपना आंदोलन जारी रखेंगे।”

जाने कौन है वो जिसने 700 साल पुराने पवित्र पेड़ पर नग्न फोटोशूट कराकर हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाई, हो सकती है 6 साल की जेल

इंडोनेशिया की राजधानी बाली में स्थित 700 साल पुराने एक पवित्र पेड़ पर नग्न फोटोशूट कराने वाली मॉडल चर्चा में है। यह पेड़ बाली के बाबाकन मंदिर में है। स्थानीय लोग कई वर्षों से इस विशालकाय पेड़ को पवित्र मानते हैं और उसकी पूजा करते हैं। इसलिए नेकेड फोटोशूट की वजह से हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुँची है। इसकी वजह से लोग काफी गुस्से में हैं।

रूस की योग इंफ्लूएंसर और इंस्टाग्राम स्टार अलीना फजलीवा (yoga influencer Alina Fazleeva) के नग्न फोटोशूट को लेकर सोशल मीडिया पर काफी बवाल होने के बाद उनके खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई गई ​है। बताया जा रहा है कि बाली के रहने वाले आंत्रप्रेन्योर नीलुह जेलांटिको की नजर जब इस फोटो पर पड़ी, तो उन्होंने इसकी सूचना लोकल पुलिस को दी। नीलुह ने कहा कि रूसी लड़की 700 साल पुराने (Weeping Paperbark Tree) (वहाँ के लोग इसे kayu putih कहते हैं) के नीचे नग्न होकर फोटोशूट करा रही थी। नीलुह ने यह भी बताया कि इमिग्रेशन अधिकारी उस रूसी योग इंफ्लूएंसर को ट्रैक कर रहे हैं।

अगर इंस्टाग्राम पर 17,000 से अधिक फॉलोअर्स वाली मशहूर योग इंफ्लूएंसर अलीना इस मामले में लोकल पोर्न लॉ के तहत दोषी पाई जाती हैं, तो उन्हें 6 साल तक की जेल या फिर करीब 52 लाख रुपए के जुर्माने की सजा हो सकती है। हालाँकि, मामले के तूल पकड़ने के बाद अलीना ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से इस फोटो को डिलीट कर दिया है। इसके बाद वह पवित्र पेड़ के पास दोबारा गई और वहाँ प्रार्थना की। साथ ही सोशल मीडिया पर 4 मई को अपने कृत्य के लिए माफी माँगते हुए एक वीडियो भी पोस्ट किया

उन्होंने लिखा, “मैं बाली और इंडोनेशिया के सभी लोगों से माफी माँगती हूँ। मैं अपने किए पर शर्मिंदा हूँ। मैं आप लोगों की भावनाओं को आहत नहीं करना चाहती थी, लेकिन मुझे इस जगह के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।”

अलीना आगे लिखती हैं, “मैंने बस पेड़ के नीचे प्रार्थना की और फिर सीधे पुलिस स्टेशन गई। मैंने उन्हें इस मामले के बारे में बताया और माफी माँग ली है।” पुलिस प्रवक्ता रानेफली डियान कैंड्रा ने बताया कि एलीना खुद अधिकारियों के पास पहुँची थी। केस में आगे की कार्रवाई की जा रही है।

हालाँकि, उन्होंने यह उल्लेख नहीं किया कि उन्हें किस सजा का सामना करना पड़ सकता है। रिपोर्टों के अनुसार, अगर एलीना प्रोनोग्राफी फैलाने की दोषी पाई जाती हैं, तो उनके खिलाफ सख्त इंफॉर्मेशन और इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजैक्शन्स एक्ट के तहत कार्रवाई हो सकती है।

बंगाल में उस BJP वर्कर के परिजनों से मिले अमित शाह, जो फँदे से लटके मिले थे: कहा- होगी CBI जाँच

केंद्रीय गृह अमित शाह (MHA Amit Shah) पश्चिम बंगाल (West Bengal) के दो दिवसीय दौरे के बीच कोलकाता (Kolkata) पहुँचे, जहाँ वो शुक्रवार (6 मई 2022) को मृत पाए गए बीजेपी के कार्यकर्ता अर्जुन चौरसिया के काशीपुर स्थित घर गए और पीड़ित परिजनों से मिले। उन्होंने मामले में सीबीआई जाँच की बात कही है। इस मामले में गृह मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल सरकार से रिपोर्ट तलब की है।

रिपोर्ट के मुताबिक, गृह मंत्री ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा, “कल उन्होंने (ममता बनर्जी) पहला साल पूरा किया, ऐसा लगता है कि वो एक तरह का मैसेज देना चाहती हैं कि वो रुकेंगी नहीं। मैंने परिवार के साथ विस्तृत बातचीत की है। वे अपने बेटे को खोने और जिस तरह से उसका शव उनसे छीन लिया गया था, उससे वे निराश हैं। हमारी पार्टी ने कोर्ट का रुख किया है। सीबीआई जाँच होनी चाहिए और दोषियों को सजा मिलनी चाहिए। ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रशासन ने आरोपितों को गिरफ्तार करने की बजाय जबरदस्ती शव को कब्जा लिया है।”

बता दें कि मृतक अर्जुन चौरसिया (26) भारतीय जनता युवा मोर्चा के उपाध्यक्ष थे। वो घोष बागान इलाके में शुक्रवार की सुबह फाँसी के फंदे से लटके पाए गए थे। इस मामले में बीजेपी सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) पर हत्या का आरोप लगा रही है। हालाँकि, टीएमसी के सांसद शांतनु सेन ने इन आरोपों को निराधार बताया है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, अर्जुन की माँ लक्ष्मी चौरसिया ने बताया कि अर्जुन अपने बड़े भाई के साथ एक अंडरवियर फैक्ट्री में काम करता था। उन्होंने कहा, “उसकी हत्या हुई है। मैं सीबीआई जाँच की माँग करती हूँ। मेरा बेटा एक खुशमिजाज इंसान था। वह कभी आत्महत्या नहीं कर सकता। उनके पास इसका कोई कारण नहीं था।”

इससे पहले बंगाल बीजेपी नेता दिलीप घोष ने ट्विटर पर लिखा है, “अभिजीत सरकार के बाद एक और युवा भाजपा कार्यकर्ता, 27 वर्षीय अर्जुन चौरसिया की TMC के राजनीतिक आतंकियों ने हत्या कर दी और कोलकाता में फाँसी पर लटका दिया। टीएमसी राजनीतिक हत्याओं की घिनौनी संस्कृति को आगे बढ़ाकर लोकतंत्र का गला घोंटने पर आमादा है।”

एकदम स्वस्थ थे अर्जुन

अर्जुन की मौत के मामले में उत्तर कोलकाता के भाजपा अध्यक्ष कल्याण चौबे का कहना था कि अर्जुन एकदम स्वस्थ्य थे। उन्होंने कल उनके नेतृत्व में 200 बाइक की रैली आयोजित करने की योजना भी बनाई थी, लेकिन आज सुबह उन्हें घोष बागान रेल यार्ड में मृत पाया गया। काफी हंगामे के बाद बीजेपी कार्यकर्ताओं ने डेड बॉडी को ले जाने दिया। पूरे इलाके को चितपुर थाने की पुलिस ने सील कर दिया है। लाल बाजार इलाके की खुफ़िया विभाग की साइंटिफिक टीम घटनास्थल पर मौजूद है।

आज हैदराबाद में नागराजू की हत्या, कभी गोविंदपुर में हरेंद्र की माँ का रेप: आम्बेडकर ने भी बताया था ‘मुस्लिम’ हो महिला तो नहीं होता ‘प्रेम’ कबूल

स्वतंत्रता के इतने वर्षों बाद भी मुस्लिम लड़कियों से प्रेम के बदले हिन्दू युवकों की हत्याओं, धर्म परिवर्तनों एवं उनके परिवार जनों पर अत्याचारों का सिलसिला लगातार जारी है। यहाँ पिक्चर बहुत साफ़ होते हुए भी ‘लव हेस नो रिलिजन’ जैसी कलात्मक सुर्खियाँ देने वालों की कमी नहीं!

दो दिन पहले (4 मई, 2022) हैदराबाद में एक मुस्लिम लड़की से शादी करने पर हिन्दू युवक की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई। नागराजू और अशरीन सुल्ताना ने 3 महीने पहले मनमर्जी से शादी की थी। घटना की उस रात पति-पत्नी दोनों टू-व्हीलर से कहीं जा रहे थे तभी मोबिन और मसूद ने अपने साथियों के साथ सरेआम रॉड और चाकू मार-मार कर नागराजू की हत्या कर दी।

यदि लड़की हिन्दू हो तो मुसलमान ‘प्रेम के मसीहा’ बन जाते हैं, लेकिन लड़की यदि उनके कौम की निकले तो समूची मुस्लिम-आबादी उस हिन्दू लड़के को अपना दुश्मन मान लेती है और अपमान का बदला लेने के लिए जिहाद का रास्ता इख़्तियार कर लेती है। इस विषय में डॉ. बी.आर. आम्बेडकर द्वारा अपनी पुस्तक ‘Pakistan or Partition of India’ में उल्लेखित 27 जून, 1936 को बंगाल के गोविंदपुर गाँव में हुई एक घटना शिक्षाप्रद है।

गोविंदपुर में राधावल्लभ नामक हिंदू का हरेंद्र नाम का एक बेटा था। इसी गाँव में दूध बेचने वाली एक मुस्लिम महिला भी रहती थी। गाँव में स्थानीय मुसलमानों को हरेंद्र का दूध बेचने वाली मुस्लिम औरत से संबंध का शक था। उन्हें इस बात का गुस्सा था कि एक मुस्लिम महिला एक हिंदू की रखैल बनकर कैसे रह सकती है। इसलिए उन्होंने फैसला किया कि अपमान का बदला राधावल्लभ के परिवार से लिया जाएगा। गोविंदपुर के मुसलमानों ने एक बैठक में हरेंद्र को बुलाया और बुरी तरह से उसे मारा-पीटा। जिस मैदान में बैठक हुई थी बाद में हरेंद्र वहीं बेहोश पड़ा मिला।

इस हमले के बाद भी मुसलमान संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने राधावल्लभ से कहा कि जब तक उसका परिवार और बच्चे इस्लाम धर्म ग्रहण नहीं कर लेते तब तक वे उसके बेटे द्वारा किए गए गलत काम को माफ नहीं करेंगे। तब राधावल्लभ ने अपनी पत्नी और बच्चों को अन्यत्र भेजने की योजना बनाई। लेकिन मुसलमानों को इस योजना का पता चल गया। अगले दिन जब राधावल्लभ की पत्नी कुसुम अपना आँगन धो रही थी, तभी कुछ मुसलमान आए और उसे उठाकर ले गए। कुछ दूर ले जाने के बाद दो मुसलमानों ने उसके साथ बलात्कार किया और उसके जेवर उतार लिए। बाद में जब वह होश में आई तो जैसे-तैसे अपने घर पहुँची। घर पहुँच कर उसने अपने आप को एक कमरे में बंद कर लिया। लेकिन मुसलमानों ने फिर से उसका पीछा किया और उसके कमरे का दरवाजा तोड़कर उसे पकड़ लिया। हमलावर कुसुम को सड़क पर ले आए और उसे धमकी दी कि अब उसके साथ सड़क पर ही बलात्कार किया जाएगा।

साभार: Pakistan or Partition of India

इसी बीच गोविंदपुर के मुसलमानों ने कुसुम के पति राधावल्लभ को बहुत ही अपमानजनक स्थिति में (शायद नंगा कर के) गोविंदपुर की सड़कों पर घुमाया। अगले दिन मुसलमानों ने गोविंदपुर से पुलिस थाने जाने वाली सड़कों को ब्लॉक कर दिया ताकि राधावल्लभ और उसकी पत्नी में से कोई भी रिपोर्ट लिखवाने ना जा सके।

गोविंदपुर की घटना से लेकर आज हैदराबाद की घटना तक, प्रेम के संबंध में मुस्लिम-कौम की सोच में तनिक भी फर्क नहीं आया है। प्रेम के बदले में बिना किसी पश्चाताप, बिना किसी डर और बिना किसी शर्म के मुसलमान इस तरह के कृत्य करते रहते हैं। सबसे बड़ी बात, उनके भाई-बिरदारी वालों ने ना कल इसे बुरा कहा ना आज कह रहे हैं। इतने वर्षों से यही पैटर्न फॉलो होता आया है, फिर भी हिन्दू समाज इस जिहादी मानसिकता को समझने में असफल रहा है। हिन्दू समाज आज भी हिन्दू-मुस्लिम एकता और इस्लामी-भाईचारे के भ्रम में जी रहा है।

‘उसे कभी मत बताना, मैं ही उसकी माँ हूँ’: बच्ची के जैविक माता-पिता निकले भाई-बहन, कस्टडी को लेकर महिला ने रखी शर्त

गुजरात में कलोल (Kalol, Gujarat) की एक मजिस्ट्रेट अदालत ने सात साल तक अनाथालय में रहने वाली सात वर्षीय बच्ची की कस्टडी अब उसके पिता को दे दी है। माँ ने बच्ची को पिता को सौंपने से पहले एक शर्त रखी है कि वह जिंदगी में उसे कभी नहीं बताएगा कि वह उसकी माँ है और कभी भी उसे उसके पास नहीं लाएगा।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने माँ के व्यवहार पर हैरानी और दुख जताया है, जो बच्ची को अपने पास रखने के लिए तैयार नहीं है। बच्ची के जैविक माता-पिता चचेरे भाई-बहन हैं, जो मेहसाणा के राणासन गाँव के रहने वाले हैं। उनकी शादी नहीं हुई है। दोनों के बीच अवैध संबंधों के बाद इस बच्ची का जन्म हुआ था। वे इसका गर्भपात भी नहीं करा सके, इसलिए दोनों ने इसे गुपचुप तरीके से जन्म देने की योजना बनाई।

बच्ची के जन्म के दूसरे दिन यानी (5 अक्टूबर 2015) को दोनों अर्जुनपुरा गाँव में एक बस स्टॉप के पास पहुँचे। यहाँ दोनों बच्ची को छोड़ने वाले थे, तभी कुछ स्थानीय लोगों ने उन्हें ऐसा करते हुए देख लिया और पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने खिलाफ बच्ची को अज्ञात जगह पर छोड़कर भागने के मामले में एफआईआर दर्ज की और बच्ची को गाँधी नगर सिविल अस्पताल ले जाया गया। अब उसे कालूपुर के एक अनाथालय में रखा गया है।

बताया जा रहा है कि मजिस्ट्रेट अदालत ने सबूतों के अभाव में बच्ची के जैविक माता-पिता को बरी कर दिया था। हालाँकि, पिता अपनी बच्ची से बेहद प्यार करता था, उसने उसे पाने के लिए कोर्ट में आवेदन किया कि वह बच्ची की कस्टडी चाहता है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट दीपा ठाकर ने पिता के अनुरोध पर गौर किया।

अदालत ने निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि माँ को बच्ची के प्रति कोई स्नेह नहीं था, जबकि पिता ने उसकी कस्टडी पर जोर दिया, क्योंकि वह नहीं चाहता था कि उसकी बच्ची को सब अनाथ कहें। अदालत ने अपने आदेश में जैविक माँ के बयानों को भी विस्तृत रूप से दर्ज किया है। उसने कहा था, “अगर बच्चा किसी को दिया जाता है तो मुझे कोई समस्या नहीं है, लेकिन उसका मेरे साथ कोई संबंध नहीं होना चाहिए।”

महिला ने अदालत से कहा, “मैं बच्ची को नहीं रखना चाहती हूँ, क्योंकि मुझे समाज का डर है। अगर कोई मुझसे पूछेगा कि वह किसकी संतान है, तो मुझे इस सवाल का जवाब देने में शर्म महसूस होगी। अगर बेटी की कस्टडी उसके पिता को दी जाती है तो मेरी केवल यही शर्त होगी कि वह उसे मेरे पास कभी नहीं लाएगा और उसे कभी यह नहीं बताएगा कि मैं ही उसकी माँ हूँ।”

गुंडागर्दी पर उतरी पंजाब पुलिस, ये अपहरण नहीं तो क्या? : तेजिंदर बग्गा की गिरफ्तारी पर माँ ने केजरीवाल पर साधा निशाना, पिता ने दर्ज कराई शिकायत

बीजेपी नेता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा (Tajinder Pal Singh Bagga) को हरियाणा के कुरुक्षेत्र से दिल्ली लाया जा रहा है। हरियाणा पुलिस ने बग्गा को दिल्ली पुलिस को सौंप दिया है और पंजाब पुलिस खाली हाथ रह गई है। इधर, आम आदमी पार्टी के दफ्तर के बाहर विरोध प्रदर्शन भी जारी है। वहीं पूरा मामला पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट पहुँच गया है। हाई कोर्ट ने सभी पक्षों को जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं।

इस बीच बग्गा के माता-पिता ने पंजाब पुलिस पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। बग्गा के पिता प्रीतपाल सिंह ने इस संबंध में पुलिस के समक्ष शिकायत दर्ज करवाई है। उन्होंने ANI से बात करते हुए कहा, “मैंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है कि मुझे पंजाब पुलिस के जवानों ने पीटा। मैंने अभी तक तेजिंदर से बात नहीं की है। मैं दिल्ली पुलिस को उनके सहयोग के लिए धन्यवाद देता हूँ।”

इससे पहले इस घटनाक्रम पर तेजिंदर बग्गा के पिता ने ऑपइंडिया से बात करते हुए बताया था, “पहले मेरे घर में 2 पुलिसकर्मी घुसे। वो मुझ से सामान्य ढंग से बात कर रहे थे। उस समय घर पर तेजिंदर और उनके अलावा कोई नहीं था। उसी समय तेजिंदर कपड़े पहन कर बाहर आए। थोड़ी बातचीत के बाद कई पुलिसकर्मी मेरे घर में जबरन घुस गए। उनके इस काम की मैं वीडियो बनाने लगा। इसी दौरान एक पुलिसकर्मी मुझे खींच कर कमरे की तरफ ले गया और मुझ से हाथापाई की।”

तेजिंदर के पिता ने आगे बताया, “इसके बाद वो तेजिंदर को खींच कर बाहर ले गए और हिरासत में ले लिया। पुलिसकर्मियों ने बग्गा को उनकी पगड़ी तक नहीं पहनने दी, जबकि उसने इसे पहनने की गुजारिश की। पुलिस वाले बग्गा का फोन भी अपने साथ ले गए।”

वहीं भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के राष्ट्रीय सचिव, तजिंदर बग्गा की माँ कमलजीत कौर का कहना है पुलिसकर्मियों ने उन्हें जबरन खींच लिया। कौर ने कहा, “उन्होंने (बग्गा को) उनकी पगड़ी पहनने का समय भी नहीं दिया।” कमलजीत कौर ने यह भी आरोप लगाया कि पंजाब पुलिस ने न तो प्रोटोकॉल का पालन किया और न ही बग्गा की गिरफ्तारी से संबंधित कोई दस्तावेज पेश किया और न ही उन्होंने स्थानीय पुलिस इकाई को इसके बारे में सूचित किया। उन्हेंने सवाल करते हुए पूछा, “पंजाब पुलिस ने ‘गुंडों’ की तरह काम किया, आम आदमी के पोशाक में पहुँचे और उसे ले गए। यह अपहरण नहीं तो और क्या है?” 

उन्होंने ANI से बात करते हए कहा, “हमने कहा कि किसी की पीड़ा का मजाक उड़ाना और कश्मीर फाइल्स का मजाक उड़ाना सही नहीं है और उन्हें (AAP) माफी माँगनी चाहिए। उन्होंने माफी नहीं माँगी, उन्होंने (तेजिंदर बग्गा) कहा कि भाजयुमो उन्हें शांति से नहीं रहने देगा। उन्होंने (अरविंद केजरीवाल) उनके (तजिंदर बग्गा) खिलाफ FIR दर्ज की कि वह उन्हें जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। पंजाब पुलिस उनके हाथ में है तो वह इस तरह की गुंडागर्दी करेंगे।”

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को संबोधित करते हुए बग्गा की माँ ने उन्हें ‘गुंडागर्दी’ नहीं करने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “अगर आपको कोई समस्या है, तो दिल्ली पुलिस में उचित तरीके से FIR दर्ज करवाएँ। हम अदालत में सही से केस लड़ेंगे। सही और गलत का फैसला कानूनी रूप से किया जाएगा।”