Home Blog Page 2772

सिंगापुर में The Kashmir Files पर बैन को लेकर शशि थरूर ने कसा तंज, विवेक अग्निहोत्री ने The Leela Hotel Files से दिया जवाब

साल 1990 में कश्मीरी पंडितों के नरसंहार और पलायन पर आधारित विवेक अग्निहोत्री की ब्लॉकबस्टर फिल्म द कश्मीर फाइल्स (The Kashmir Files) ने सिनेमाघरों में खूब धूम मचाया। इस फिल्म को लेकर दुनिया भर में काफी चर्चा हुई, हो रही है। अब खबर आ रही है कि सिंगापुर में इस फिल्म के दिखाने पर बैन लगाया जा रहा है।

कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर ने ट्विटर पर इस खबर को शेयर करते हुए चुटकी ली है। उन्होंने लिखा कि भारत की सत्ताधारी पार्टी ने जिस फिल्म को प्रमोट किया है, उसे सिंगापुर में बैन कर दिया जाएगा। शशि थरूर ने इसके साथ चैनल न्यूज एशिया की रिपोर्ट का लिंक और खबर का स्क्रीशॉट शेयर किया है। 

न्यूज एशिया के मुताबिक सिंगापुर में ‘द कश्मीर फाइल्स’ को प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। इसका कारण फिल्म में दिखाई गई बर्बरता को माना जा रहा है क्योंकि रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि इसे सिटी और स्टेट की फिल्म गाइडलाइंन्स से परे माना जा रहा है। रिपोर्ट में अधिकारियों ने कहा कि फिल्म में मुस्लिमों का उत्तेजक और एकतरफा चित्रण किया गया है। इसके साथ ही कश्मीर में चल रहे हिंदू-मुस्लिम संघर्ष में हिंदुओं को सताया जाना भी एक तरफा है, जिसे वहाँ के नियमों के अनुसार नहीं माना जा रहा है।

अधिकारियों ने रिपोर्ट में कहा कि फिल्म में जिस तरह की गतिविधियाँ दर्शाई गई हैं, वह अलग-अलग समुदायों के बीच दुश्मनी पैदा करने और उनके एकजुट और बहु-धार्मिक समाज की सामाजिक एकता को तोड़ने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि फिल्म क्लासिफिकेशन गाइडलाइंस के तहत, सिंगापुर में नस्लीय या धार्मिक समुदायों को बदनाम करने वाले किसी भी कंटेंट को दर्शकों तक पहुँचाने के लिए मना कर दिया जाएगा।

शशि थरूर के ट्वीट पर फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ के निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने थरूर को ‘मूर्ख’ और ‘हमेशा हर चीज की शिकायत’ करने वाले के रुप में संबोधित करते हुए कहा कि सिंगापुर में दुनिया का सबसे पिछड़ा हुआ सेंसर है। इसने ‘द लास्ट टेम्पटेशन ऑफ जीसस क्राइस्ट’ पर भी प्रतिबंध लगा दिया (अपनी मैडम से पूछ लें)। यहाँ मैडम से मतलब हुआ कॉन्ग्रेस की बॉस सोनिया गाँधी से।

विवेक अग्निहोत्री ने इसके अलावा एक काल्पनिक फिल्म ‘द लीला होटल फाइल्स (The Leela Hotel Files)’ का नाम गढ़ते हुए भी थरूर पर निशाना साधा। दरअसल इसी होटल में थरूर की पत्नी की लाश मिली थी। विवेक अग्निहोत्री ने लिखा कि ‘द लीला होटल फाइल्स’ को भी बैन किया जाएगा। इसलिए कृप्या कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार का मजाक उड़ाना बंद करें।

बता दें कि शशि थरूर की मैडम (पत्नी) सुनंदा पुष्कर की 17 जनवरी, 2014 को दिल्ली के होटल लीला पैलेस में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई। अपनी मौत से कुछ दिनों पहले सुनंदा ने आरोप लगाया था कि उनके पति थरूर के एक पाकिस्तानी पत्रकार के साथ संबंध हैं। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने शशि थरूर के खिलाफ धारा 306 और धारा 498-A के तहत केस दर्ज किया था। थरूर पर पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने और उनके साथ क्रूरता से पेश आने का आरोप लगाया गया था। हालाँकि अगस्त 2021 में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सुनंदा पुष्कर की मौत के मामले में शशि थरूर को सभी आरोपों से बरी कर दिया था।

उल्लेखनीय है कि कश्मीर फाइल्स में साल 1990 में कश्मीरी पंडितों के साथ हुए नरसंहार और अत्याचार का मार्मिक व दिल को गमगीन कर देने वाला चित्रण हैं। इसमें कई ऐसी बातें बताई गई हैं, जो चुभती भी है और दुखी भी करती हैं। इसे दर्शकों का भरपूर प्यार मिला। खासकर कश्मीरी पंडित इस फिल्म को देख अपनी दर्द को याद कर काफी गमगीन हुए। उन्होंने फिल्म के निर्देशक विवेक रंजन अग्निहोत्री की प्रशंसा करने के साथ उन्हें दिल से दुआएँ भी दीं। लोगों ने अनुपम खेर, दर्शन कुमार, मिथुन चक्रवर्ती,पल्लवी जोशी अन्य सभी कलाकारों के बेमिसाल अभिनय के लिए उनकी सराहना भी की।

बीना झा ने ऑटो मिस्त्री हारिष खान से किया था प्यार, बिना शादी साथ भी रहे… अब गर्दन में कई बार चाकू घुसाए जाने से मौत

दिल्ली के महरौली इलाके से हत्या का मामला प्रकाश में आया है, जहाँ सोमवार (9 मई 2022) को हारिष खान नाम के एक शख्स ने 19 साल की अपनी प्रेमिका की चाकू से गोदकर बेरहमी से हत्या कर दी। आरोपित को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, मृतक बीना झा को भूलभुलैया में खून से लथपथ हालत में पाया गया था, जिसके बाद उसे एम्स के ट्रामा सेंटर ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस मामले में डीसीपी (दक्षिण जिला) बनिता मैरी जैकर ने कहा कि आरोपित को पुलिस की पेट्रोलिंग टीम ने मौके से गिरफ्तार कर लिया है। बहरहाल मृतिका के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। उसका मंगलवार (10 मई 2022) को पोस्टमार्टम किया जाएगा। इसके बाद शव को परिजनों को सौंप दिया जाएगा।

पुलिस के मुताबिक, कंट्रोल रूम को शाम करीब 6:40 बजे एक फोन आया था, जिसमें भगवती अस्पताल के पास ही एक महिला को चाकू मारे जाने की जानकारी मिली। इसके तुरंत बाद पेट्रोलिंग कर रहा स्टॉफ मौके पर पहुँचा। वहाँ पर पुलिस को देखते ही आरोपित ने भागने की कोशिश की, लेकिन उसे पकड़ लिया गया। पुलिस को आरोपित के पास से चाकू बरामद हुआ है।

पूछताछ के दौरान आरोपित ने पुलिस को बताया कि वो पीड़िता के साथ बीते तीन साल से रिलेशनशिप में था और अभी दो महीने पहले से ही वो दोनों एक साथ रहने लगे थे। डीसीपी बिनीता मैरी जैकर के मुताबिक, आरोपित ऑटोरिक्शॉ मिस्त्री है। लेकिन, कोरोना के कारण वो बीते एक साल से बेरोजगार था। ऐसे में पैसे की तंगी को लेकर दोनों के बीच आए दिन लड़ाई-झगड़े होते रहते थे। करीब 5 दिन पहले लड़की (बीना झा) झगड़े के बाद अपने माता-पिता के पास चली गई थी।

इसके बाद आरोपित ने उसे सोमवार यह कहकर मिलने के लिए बुलाया कि दोनों बैठकर आपसी सहमति से मामले को सुलझाएँगे। इस दौरान लड़की को उसने अपनी आर्थिक हालत के बारे में बताया और उससे अपने पास वापस आने को कहा। लेकिन जब लड़की ने मना किया तो दोनों के बीच इसी को लेकर खूब झगड़े हुए। खान ने पीड़िता को बर्बाद कर देने की धमकी दी। इस बीच लड़की ने जब वहाँ से बचकर भागने की कोशिश की तो आरोपित ने उसे पीछे पकड़ लिया और उसकी गर्दन पर चाकू से कई वार किए। पीड़िता को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उसे मृत घोषित कर दिया गया।

पाकिस्तान में इतने भी मजे नहीं हैं: कट्टरपंथियों को केरल हाईकोर्ट ने समझाया, कहा- भारत ने कभी मुस्लिमों को नहीं बनाया बंधक

भारत के खिलाफ जंग छेड़ने व कश्मीर में कैंप लगाकर आतंकियों की भर्ती करने के मामले में 10 आरोपितों की उम्रकैद की सजा बरकरार रखते हुए केरल हाई कोर्ट ने इस्लामी कट्टरपंथियों पर अपनी टिप्पणी की। कोर्ट ने इशारा किया कि जिन उग्र विचार वालों को लगता है पाकिस्तान ही उनके लिए सही जगह है वो जान लें कि भारत में उनके साथ कभी कुछ गलत नहीं हुआ।

अदालत ने कट्टरपंथियों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कट्टरपंथी और उग्र विचार वाले लोग विभाजन के बाद से भारत के इतिहास को देखें और महसूस करेंगें कि बाड़ के दूसरी तरफ (पाकिस्तान में) स्थिति इतनी भी ठीक नहीं है जितनी वो लोग समझ के बैठे हैं। न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति सी जयचंद्रन ने मामले की सुनवाई के दौरान बताया कि पाकिस्तान के साथ संघर्ष के दौरान भी हिंदू बहुल भारत में मुसलमानों को बंधक बनाने की घटनाएँ विभाजन के बाद से नहीं हुई हैं।

गौरतलब है कि साल 2013 में भारत के खिलाफ आतंकियों की भर्ती करने के मामले में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी की अदालत ने केरल के कुछ आरोपितों को पकड़कर आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसी मामले पर केरल हाईकोर्ट ने सोमवार को सुनवाई की और हुए लश्कर-ए-तैयार के तदियंतविडे नजीर समेत 10 की सजा जस की तस रखी। लेकिन 3 को बरी कर दिया गया। बताया जाता है कि नजीर ही लश्कर ए तैयबा का केरल कमांडर था।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने आतंकियों को पड़ने के लिए एनआईए और केरल पुलिस की प्रतिबद्धता की तारीफ की। साथ ही लैरी कॉलिन्स और डोमिनिक लैपिएरे की किताब ‘फ्रीडम एट मिडनाइट’ के अध्याय 5 का हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि भारत में मुसलमान एक ‘हिंदू समुद्र में द्वीप’ जैसे होंगे और देशों के बीच संघर्ष का शिकार होंगे…। कोर्ट ने कहा कि न तो इतने सालों में ऐसी कोई घटना हुई जहाँ बंधक बनाने की हालत आई और न ही कभी उनकी ओर से अच्छा व्यवहार किया गया। अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि आरोपितों की भर्ती केरल से केवल मजहबी आधार पर हुई थी। बाद में इन्हें पाकिस्तान भेजा गया ताकि ये वहाँ से ट्रेनिंग लेकर आएँ और भारत में आतंक मचाएँ। भारतीय सेना के साथ मुठभेड़ में इनमें से तीन मर गए थे जबकि एक ने भर्ती की बात स्वीकार कर ली थी।

न्यायमूर्ति विनोद चंद्रन ने अपने आदेश में कहा, “ऐसी जन्नत की चाह में, जो सिर्फ इंसानों को मार कर और देश के नागरिकों को मार कर मिलती है, पाँच लोगों ने धरती पर ऐसी जन्नत का सफर किया….अब वो वहाँ जन्नत के मजे ले रहे हैं या नहीं ये एक सवाल है लेकिन उन्होंने अपने परिवारजनों के लिए जीवन को जहन्नुम बना दिया जो शर्म से दुख में डूबते जा रहे हैं।”

भगवान राम के ससुराल में ‘समधी साला है’: वो गाली जिसे सुन जगद्गुरु हुए भाव-विभोर, वायरल वीडियो पर बड़े-बड़े लोग कर रहे कॉमेंट

भगवान श्री राम का विवाह राजा जनक की पुत्री माता सीता के साथ हुआ था। राजा जनक जनकपुर के निवासी थे, जो नेपाल में है। विश्व प्रसिद्ध कथा वाचक जगद्गुरु रामभद्राचार्य हाल ही में जनकपुर (नेपाल) पहुँचे थे, जिसका एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में जनकपुर की महिलाएँ पारंपरिक अंदाज में गाली सुनाकर उनका स्वागत करती नजर आ रही हैं। महिलाएँ उनको ‘समधी’ के रूप में संबोधित कर उनसे हास्य-विनोद करती दिख रही हैं।

जनकपुरी की माताओं ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य का इस तरह से स्वागत कर लगभग विलुप्त हो चुकी विधाओं को जैसे जीवंत कर दिया। जगतगुरु रामभद्राचार्य ने भी इस कलयुग में त्रेता युग के गुरु वशिष्ठ के परंपराओं का निर्वहन किया। यहाँ रामभद्राचार्य स्वयं को भगवान राम (लड़के वाले) की ओर से मानते हैं और सीताजी नेपाल की थीं, इस तरह से नेपाल भगवान राम का ससुराल है। इसीलिए नेपाल की महिलाएँ इन्हें ‘समधी’ मानकर यह गीत सुना रही हैं।

हास्य व्यंग करने की चली आ रही है परंपरा

महिलाएँ जगद्गुरु को समधी कह संबोधित कर रही हैं, इसके पीछे भी एक प्रसंग है। दरअसल रामचरित मानस में वर्णन है कि जब भगवान श्री राम की बारात मिथिला पहुँची तो साथ में गुरु वशिष्ठ भी थे, तो वहाँ की महिलाओं ने बारातियों और गुरु वशिष्ठ से हास्य-व्यंग्य किया और उनको ‘गालियाँ’ सुनाईं। हालाँकि यह प्रथा विलुप्त सी होती जा रही है, लेकिन मिथिला में अभी भी बारातियों, दूल्हे और समधियों को ‘गाली’ दिए बिना विवाह को संपन्न नहीं माना जाता है।

शादी के लिए आए बाराती को गाली देना शुभ शगुन माना जाता है और घर में भी रौनक बनी रहती है। बाराती भी इसे गलत तरीके से नहीं लेते हैं। वह भी इसका आनंद लेते हैं। इसके पीछे उनका अपार प्रेम छुपा होता है। मिथिला में जमाइ (दूल्हा) और समधी (दूल्हे के पिता) को सम्मान भी उतना ही दिया जाता है।

जनकनगरी मिथिला ये परंपरा आज तक चली आ रही है। यही वजह है कि जब गुरु रामभद्राचार्य जनकपुर पहुँचे तो वहाँ की महिलाएँ उनका स्वागत करने पहुँचीं और समधी (गुरुदेव वशिष्ठ) के भाव से पारंपरिक गाली ‘समधी साला है’ सुनाने लगीं। गुरुवर भी वीडियो में प्रसन्न मुद्रा में दिख रहे हैं।

जिस अंदाज में माताओं ने जगदगुरु रामभद्राचार्य के सामने पारम्परिक गारी (गाली को ही गारी कहते हैं उस क्षेत्र में) ‘समधी साला है’ गाया, उसको सुनने के बाद उनके चेहरे पर जो भाव उभरे, वो अपने आप में अद्भुत है। एक बार तो वो हल्का सा शर्माते हुए भी दिखाई देते हैं। इस पर वो अपने दोनों हाथों से चेहरे को ढक लेते हैं। रामभद्राचार्य जी का यह वीडियो ट्विटर और फेसबुक पर खूब तेजी से वायरल हो रहा है। इस पर मशहूर कवि कुमार विश्वास सहित कई यूजर्स ने कमेंट किए हैं।

उन्होंने लिखा, “अनिर्वचनीय आनंद। पूज्य महाराज जी मुख पर वैसी ही सलज्ज मंद मुस्कान है जैसी गुरु वशिष्ठ के मुख पर रही होगी। महाराज जी के साथ हम जैसे कोई लखन लाल (भगवान लक्ष्मण) गए होते तो देते जमकर ऐसा जवाब। “कोउ नहिं उपजे मात पिता बिन अस है जग की नीति, तुम्हरी बिटिया महि ते उपजीं अस हमरी नहिं रीति।”

कौन हैं कथा वाचक रामभद्राचार्य

जगद्गुरु रामभद्राचार्य एक विश्व विख्यात कथा वाचक हैं और मूल रूप से जौनपुर (उत्तर प्रदेश) के रहने वाले हैं। रामभद्राचार्य भारत के चार प्रमुख जगद्गुरु में से एक हैं और उनको 1988 में इस उपाधि से नवाजा गया।

राम भद्राचार्य तुलसीपीठ के संस्थापक और प्रमुख हैं। तुलसीपीठ संत तुलसीदास के नाम पर चित्रकूट में एक धार्मिक और सामाजिक सेवा संस्थान है। रामभद्राचार्य चित्रकूट में जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय के संस्थापक और आजीवन चांसलर भी हैं।

चीन के चंगुल में फँस जल रहा श्रीलंका: सांसद ने खुद को मारी गोली, इस्तीफा दे चुके PM के घर में लगाई आग – 5 की मौत, 200+ घायल

चीन के कर्ज के जंजाल में फँसे श्रीलंका में एक बार फिर से लगाए गए राष्ट्रीय आपातकाल के बाद वहाँ बड़े पैमाने पर हिंसा की घटनाएँ हो रही हैं। देश के खराब होते हालात और दबावों के आगे झुकते हुए श्रीलंकाई प्रधानमंत्री महिंद्रा राजपक्षे ने सोमवार (9 अप्रैल 2022) को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस हिंसा में अब तक 5 की मौत औj 200 से अधिक घायल हुए हैं। वहाँ खाने-पीने के सामानों के साथ ही ईंधन, बिजली और ट्रांसपोर्ट सब महँगा हो गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, महिंद्रा राजपक्षे (76 साल) ने अपना इस्तीफा अपने छोटे भाई और देश के राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे को सौंप दिया। हालाँकि, उनके इस्तीफे से देश में हिंसा की घटनाएँ रुकी नहीं। श्रीलंकाई पीएम के इस्तीफे के कुछ घंटों के बाद ही सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों ने हंबनटोटा स्थित उनके पैतृक घर ‘मेदामुलाना वालवा’ को जला दिया। इससे उनका घर जलकर खाक हो गया। इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रही हैं। इसके अलावा कुरुनेगला में भी आंदोलकारियों ने महिद्रा राजपक्षे के घर को आग के हवाले कर दिया।

महिंद्रा राजपक्षे ने अपना इस्तीफा देते हुए कहा कि वो अपने पद से इसलिए इस्तीफा दे रहे हैं ताकि सर्वदलीय अंतरिम सरकार का गठन किया जा सके। अपने इस्तीफे के पत्र में उन्होंने कहा कि वो लोगों और सरकार को इस संकट से निकालने के लिए किसी भी तरह का बलिदान देंगे। इसी के साथ उन्होंने कैबिनेट को भंग कर दिया है।

प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक बयान जारी कर कहा कि मौजूदा सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक और समस्याओं के समाधान के लिए राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे ने संसद के सभी दलों के सदस्यों को राष्ट्रीय एकता सरकार में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। बहरहाल देशभर में सोमवार शाम 7 बजे से बुधवार सुबह 7 बजे तक के लिए कर्फ्यू लगाया गया है।

सांसद ने खुद को मारी गोली

सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान हिंसक भीड़ ने सत्ताधारी पार्टी के सांसद अमरकीर्ति अतुकोराला (57 साल) को पश्चिमी शहर नितम्बुआ में घेर लिया था। दावा है कि उन्होंने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। हालाँकि, दावा ये भी है कि पहले सांसद की कार से प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई गई थी, जिसके बाद लोगों ने उन्हें रोक कर कार से नीचे उतार लिया।

फ्री कल्चर ले डूबा

हाल ही में श्रीलंका के वित्त मंत्री अली साबरी ने इस बात का खुलासा किया था कि अपने चुनावी वादे को पूरा करने के लिए साल 2019 में राजपक्षे सरकार द्वारा की गई व्यापक कर कटौती के बाद देश में करदाताओं की संख्या लगभग 10 लाख कम हो गई थी। जबकि, देश में कुल टैक्सपेयर्स की संख्या ही 1550000 थी, जो कि साल 2021 के अंत तक घटकर 412000 रह गए थे।

गौरतलब है कि इसके पहले देश में 1 अप्रैल को आपातकाल लागू किया गया था। हालाँकि, कुछ दिन बाद ही 5 अप्रैल को इसे हटा लिया गया था।

कश्मीर का जो मंदिर 600 साल पहले इस्लाम की आग में जला, वहाँ अब हवन-पूजा को ASI कह रहा गलत: प्रशासन को भेजी शिकायत

जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग शहर में स्थित 8 वीं शताब्दी के मार्तंड सूर्य मंदिर में हाल में वर्षों बाद पूजा-अर्चना करके श्रद्धालुओं ने हर-हर महादेव के नारे लगाए थे। इसके बाद प्रदेश के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा भी नवग्रह अष्टमंगलम हवन व पूजा में सम्मिलित हुए थे और उनकी तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर सामने आई थी। अब उसी पूजा अर्चना को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) ने नियमों का उल्लंघन बताया है। साथ ही गवर्नर द्वारा इस मंदिर में पूजा करने पर अपनी आपत्ति जहिर की है। एएसआई ने इस मुद्दे को जिला प्रशासन से शिकायत करके उठाया है।

पीटीआई की खबर के अनुसार, एएसआई अधिकारियों ने कहा नियमानुसार राज्यपाल को एएसआई द्वारा संरक्षित स्थान पर पूजा अर्चना करने से पहले मंजूरी लेनी चाहिए थी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस पूजा के लिए अन्य राज्यों से पुरोहितों को बुलाया गया।

गौरतलब है कि एएसआई कि आपत्ति इस बात पर है कि जब प्राचीन स्मारक संबंधी कानून के मुताबिक केंद्र सरकार की लिखित अनुमति के बिना संरक्षित स्मारकों में बैठक, दावत, मनोरंजन या कुछ और नहीं किया जा सकता। फिर वहाँ बिन अनुमति लिए पूजा का आयोजन क्यों हुआ। उन्होंने इस मामले को जिला प्रशासन के साथ उठाया है। एएसआई का कहना है कि भले ही पूजा मंदिर के बाहर की गई मगर तब भी ये नियमों का उल्लंघन है।

बता दें कि 8 मई को कश्मीर के मार्तंड सूर्य मंदिर में पूजा अर्चना करने के बाद मनोज सिन्हा ने इसे दिव्य अनुभव बताया था। साथ ही अपने ट्वीट में मंदिर में हुई पूजा से जुड़ी तस्वीरों को शेयर कर लिखा था, “सरकार सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व के प्राचीन स्थलों की रक्षा और विकास के लिए प्रतिबद्ध है, उन्हें जीवंत केंद्रों में बदलना जो हमें धार्मिकता के मार्ग पर ले जाएंगे और इस खूबसूरत भूमि को शांति, खुशी और समृद्धि का आशीर्वाद देंगे।”

मार्तंड सूर्य मंदिर

गौरतलब है कि कश्मीर का मार्तंड सूर्य मंदिर अनंतनाग शहर से पूर्व दिशा में 3 किलोमीटर की दूरी पर है। ये एक किस्म के पठार पर स्थित है। उस समय इसकी कलाकृतियाँ देख कर लोग अचंभे से भर जाते थे। सिकंदर शाह मीरी ने उनमें से कई मंदिरों को ध्वस्त कर के उन्हीं ईंट-पत्थरों का इस्तेमाल कर मस्जिदें बनवाई। उसने इसकी जड़ों को खोदना शुरू किया और उनमें से पत्थर निकाल कर लकड़ियाँ भर देता था। इसके बाद उन लकड़ियों में वो आग लगवा देता था। इस तरह उसने मार्तंड सूर्य मंदिर को ध्वस्त कर डाला।

ये भी जानने लायक बात है कि इस मंदिर को नष्ट करने की सलाह उसे एक ‘सूफी फकीर’, जिसे आजकल ‘सूफी संत’ भी कहते हैं, उसने दी थी। उसका नाम था – मीर मुहम्मद हमदानी। वो कश्मीर के समाज को इस्लामी बनाना चाहता था। वो इलाके में ब्राह्मणों के वर्चस्व को तोड़ कर सारी संपदा हथियाना चाहता था। इसके बाद कई भूकंप भी आए, जिनमें मंदिर को क्षति पहुँची। जिस पठार पर इसे बनाया गया था, वहाँ से तब अधिकतर कश्मीर घाटी को देखा जा सकता था।

रावण और मंदोदरी की बेटी थीं सीता: वो कौन हैं, जो इस कहानी को मानते हैं… किसने लिखी है यह ‘अद्भुत’ रामायण?

वैशाख महीने की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को श्रीराम वल्लभा देवी माँ सीता का प्रकाट्य हुआ था। इसलिए इस तिथि को जानकी नवमी और सीता नवमी के नाम से जाना जाता है। इस वर्ष यह आज मंगलवार 10 मई, 2022 को है। माँ सीता को माँ लक्ष्मी का भूमि अवतार माना जाता है। भूमि से उत्पन्न होने के कारण उन्हें भूमात्मजा और राजा जनक की पुत्री होने से उन्हें जानकी भी कहा जाता है।

आज उनके प्राकट्य दिवस के अवसर पर उनके जन्म से जुड़ी उन पौराणिक कथाओं पर बात करते हैं जो अपने आप में कई रहस्यों से भरी है। माँ सीता के बारे में वाल्मीकि रामायण और कई अन्य ग्रंथों में जो उल्लेख मिलता है उसके अनुसार मिथिला के राजा विदेहराज जनक के राज में कई वर्षों से वर्षा नहीं हो रही थी। इससे चिंतित होकर राजा जनक ने जब ऋषियों से सलाह ली और उन्होंने उपाय के रूप में बताया कि जब महाराज स्वयं हल चलाएँ तो इन्द्र देव की कृपा से वर्षा हो सकती है।

राजा जनक द्वारा हल चलाने का प्रसंग (साभार-detechter.com)

मान्यता है कि बिहार स्थिति सीममढ़ी का पुनौरा गाँव वह स्थान है जहाँ राजा जनक ने हल चलाया था। हल चलाते समय हल एक धातु से टकराकर अटक गया। तब जनक ने उस स्थान की खुदाई का आदेश दिया। कहा जाता है कि उस स्थान से एक कलश निकला जिसमें एक सुंदर सी कन्या थी। चूँकि, राजा जनक निःसंतान थे। उन्होंने कन्या को ईश्वर की कृपा मानकर पुत्री बना लिया। हल का फल जिसे सीत कहते हैं उससे टकराने के कारण कलश से कन्या प्रकट हुई थी इसलिए कन्या का नाम सीता रखा गया।

इस घटना से इतना तो पता चलता है कि माँ सीता राजा जनक की अपनी पुत्री नहीं थी। जहाँ जमीन के अंदर से कलश से प्राप्त होने के कारण सीता स्वयं को पृथ्वी की पुत्री मानती थी। वहीं वास्तव में सीता के पिता कौन थे और कलश में सीता कैसे आईं इसका उल्लेख अलग-अलग भाषाओं में लिखे गए रामायण और दूसरी कथाओं से प्राप्त होता है।

वेदवती कैसे बनीं रावण के विनाश का कारण

जहाँ एक प्रसंग के अनुसार, मिथिला नरेश जनक ने धरती से प्राप्त सीता को अपनी पुत्री मानकर पालन-पोषण किया और स्वयंवर के जरिए वह श्रीराम की अर्धांगिनी बनीं। वहीं अद्भुत रामायण में सीता को रावण और मंदोदरी की बेटी बताया गया है। रावण के अपने विनाश के बीज भी तार्किक रूप से इन्हीं कथाओं में गुथे गए हैं।

अद्भुत रामायण की इस घटना से पहले जो कथा जुड़ती है वह है वेदवती की। दरअसल, ब्रह्मवैवर्त पुराण में यह कथा आती है जहाँ से रावण के अंत की कथा भी जुड़ती है। कहते हैं रावण के अंत के पीछे सबसे बड़ी वजह बनीं भगवान विष्णु की उपासक वेदवती। माँ सीता इन्हीं वेदवती का पुनर्जन्म थीं। वेदवती के बारें में कहा जाता है कि वह बेहद सुंदर, सुशील और धार्मिक कन्या थीं। वह भगवान विष्णु की उपासक होने के साथ उनसे ही विवाह करना चाहती थीं।

ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, वेदवती अपनी इच्छा पूर्ति के लिए सांसारिक जीवन छोड़कर जंगल में कुटिया बनाकर तपस्या में लीन थीं। इसी दौरान एक दिन जब रावण हिमालय का भ्रमण करते हुए एक ऋषि कन्या वेदवती को देखा तो मोहित हो गया। वह कन्या के निकट गया और अभी तक उसके अविवाहित रहने का कारण पूछा।

तब वेदवती ने बताया कि उसके पिता उसका विवाह विष्णु से करना चाहते थे। परन्तु एक राक्षस के मुझ पर मोहित होने के कारण उसने मेरे पिता का वध कर दिया। पति के वियोग में माता का भी देहावसान हो गया। पिता की मृत्यु का बदला लेने के लिए ही उन्होंने तपस्या का मार्ग अपनाया।

रावण ने शुरु में वेदवती को बहकाने की कोशिश की, परन्तु उसके नहीं मानने पर उसने वेदवती के केश पकड़ लिए तब कहा जाता है कि वेदवती ने रावण के द्वारा पकड़े गए बालों को काट दिया और दौड़ते हुए अग्नि कुंड मे कूद कर अपनी जान दे दी। मगर मरने से पहले उन्होंने रावण को श्राप दिया कि वो खुद रावण की पुत्री के रूप में जन्म लेकर उसकी मृत्यु का कारण बनेंगी। वही वेदवती अगले अगले जन्म में एक कन्या के रुप में जन्मी और रावण के विनाश का कारण बनीं।

वेदवती के इस प्रसंग को फिल्म सीता स्वयंबर में फिल्माया गया था तो उसकी छोटी सी क्लिप आप यहाँ देख सकते हैं।

रावण और मंदोदरी की बेटी सीता – कहाँ है प्रसंग?

अद्भुत रामायण में ही उल्लेख है, “रावण कहता है कि जब मैं भूलवश अपनी पुत्री से प्रणय की इच्छा करूँ तब वही मेरी मृत्यु का कारण बने।”

अद्भुत रामायण के प्रसंग के अनुसार ही, दण्डकारण्य में गृत्स्मद नाम का एक ब्राह्मण था जो माँ लक्ष्मी को पुत्री रूप मे पाने की कामना से, प्रतिदिन एक कलश मे कुश के अग्र भाग से मंत्रोच्चारण के साथ दूध की बूंदें समर्पित करता था। कहते हैं उस समय देव-असुरों के बीच संग्राम चलता रहता था। कभी असुर देवों पर तो देव असुरों पर आक्रमण करते रहते थे। उसी बीच किसी दिन रावण उस ब्राह्मण की कुटिया पर पहुँच गया। उस समय गृत्समद वहाँ उपस्थित नहीं थे। इसका फायदा उठा कर रावण ने आश्रम के अन्य ब्राह्मणों और ऋषियों को मारकर उनके रक्त को उसी कलश में भर लिया।

कहते हैं कि रावण उस रक्त कलश को अपने साथ लेकर लंका चला गया। जहाँ उसने अपनी पत्नी मंदोदरी को उस कलश को सम्भाल कर रखने को कहा। वहीं मंदोदरी को उस कलश में क्या है? इसके बारे में बताते हुए उसने कहा कि यह बहुत ही तीक्ष्ण विष से भरा है। जब कुछ दिनों के बाद रावण विहार के उद्देश्य से सह्याद्रि पर्वत पर चला गया जो मंदोदरी को पसंद नहीं थी। कहते हैं अपनी उपेक्षा से खिन्न मंदोदरी ने मृत्यु को वरण करने के उद्देश्य से कलश में रखा पदार्थ पी लिया।

वहीं देवी लक्ष्मी को पुत्री के रूप में प्राप्त करने के लिए मंत्रोचारित दूध का ऐसा प्रभाव पड़ा कि मंदोदरी गर्भवती हो गईं। तत्पश्चात, मंदोदरी ने सोचा कि जब मेरे पति मेरे पास नहीं है। ऐसे में जब उन्हें इस बात का पता चलेगा। तो वह क्या सोचेंगे। यही सब सोचते हुए मंदोदरी तीर्थ यात्रा के बहाने कुरुक्षेत्र चली गई। कहा जाता है कि वहीं पर उसने गर्भ को निकालकर भ्रूण को एक घड़े में रखकर भूमि में दफन कर दिया और सरस्वती नदी में स्नान कर वह वापस लंका लौट गई। कहते हैं कि कालांतर में इसी भ्रूण से सीता का जन्म हुआ। मान्यता है कि वही घड़ा हल चलाते वक्त मिथिला के राजा जनक को मिला था, जिसमें से सीता जी प्रकट हुईं थी।

लोकजीवन में सीता राजा-जनक और सुनयना की पुत्री के रूप में विख्यात भले रहीं हों लेकिन यह भी प्रचलित था कि वे दोनों केवल पालक माता-पिता ही थे। वाल्मिकी रामायण के अलावे कम्पन रचित रामायण, जैन रामायण, थाई रामायण और लोक-कथाओं में भी माँ सीता के जन्म और जीवन को लेकर अलग-अलग ढंग से वर्णन है।

जहाँ तक बात अद्भुत रामायण की है तो बता दूँ कि एक बार ऋषि भारद्वाज ने ऋषि वाल्मीकि से रामायण के कुछ गुप्त और रहस्यमय पहलुओं को बताने के लिए कहा और कहा जाता है कि इसी के परिणामस्वरूप, वाल्मीकि द्वारा अद्भूत रामायण लिखी गई। यह संस्कृत भाषा में है जो 27 सर्गों में रचित एक विशेष कविता है। जबकि वाल्मीकि रामायण को इस ग्रन्थ का प्रेरणास्रोत भी बताया जाता है।

रावण ने सीता को अशोक वाटिका में क्यों रखा?

यहाँ एक और प्रसंग का जिक्र तो बनता ही है जो सीता के अपहरण के बाद उन्हें लंका के अशोक वाटिका में रखने से जुड़ा है। कई बार सवाल उठता है कि रावण की कैद में एक लंबा समय गुजारने के दौरान जनकनंदनी सीता ने कभी रावण को अपने समीप भी नहीं आने दिया। क्या वह सीता के क्रोध से डरता था या फिर भगवान राम के? वह किसी वचन में बँधा था या फिर वह श्राप था जिससे वह सीता से दूर रहने के लिए बाध्य था। आलीशान महल सोने की लंका को छोड़कर उसने क्यों सीता को अशोक वाटिका में रखा?

इस सवाल का जवाब भी पुराणों मिलता है। कहते हैं रावण की सोने की लंका का निर्माण कुबेर ने किया था, यह भव्य और विशाल तो था ही लेकिन इतना आकर्षक भी था कि जो इसे देखता, बस देखता ही रह जाता। लेकिन, फिर भी सीता का हरण करने के बाद रावण ने उन्हें लंका के किसी महल में नहीं बल्कि वाटिका में इसलिए रखा क्योंकि वह नलकुबेर के श्राप से भयभीत था।

इस श्राप से जुड़ा जो प्रसंग है, उसके अनुसार, स्वर्ग की खूबसूरत अप्सरा रंभा, कुबेर के पुत्र नलकुबेर से मिलने धरती पर आई थी। और कहते हैं कि जब रावण की दृष्टि रंभा पर पड़ी तो वह उसके सौंदर्य पर मुग्ध हो गया। रंभा ने उसे कहा भी कि वह नलकुबेर की होने वाली पत्नी हैं लेकिन फिर भी रावण ने उनका सम्मान नहीं किया और रंभा के साथ दुर्व्यवहार किया।

जब इस बात की खबर नलकुबेर को मिली तो उसने रावण को श्राप दे दिया कि जब भी वह कभी किसी स्त्री को बिना उसकी स्वीकृति के छुएगा या फिर अपने महल में जबरदस्ती रखने की कोशिश करेगा तो वह उसी क्षण भस्म हो जाएगा। कहते हैं कि इसी श्राप की वजह से रावण ने बिना सीता की स्वीकृति के ना तो उन्हें स्पर्श किया और ना ही उन्हें अपने महल में रखा।

4 दिनों में ही पार हुआ 75000 श्रद्धालुओं का आँकड़ा: इस बार रिकॉर्ड संख्या में लोगों ने किए बाबा केदार के दर्शन, कोरोना के बाद चमका पर्यटन भी

उत्तराखंड (Uttarakhand) में स्थित केदारनाथ मंदिर में इस बार ज्यादा से ज्यादा श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन करने पहुँच रहे हैं। यही कारण है कि इस बार केदारनाथ यात्रा (Kedarnath Yatra) ने पिछले सारे रिकार्ड तोड़ दिए हैं। बताया जा रहा है कि पिछले चार दिनों में अब तक 75 हजार के करीब तीर्थयात्रियों ने बाबा केदार के दर्शन कर लिए हैं। पिछले साल की तुलना में यह कहीं अधिक है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बार हजारों की संख्या में हर दिन भोले के दरबार में भक्त पहुँच रहे हैं। वर्ष 2019 की यात्रा में जहाँ पहले दिन 9000 व दूसरे दिन 7000 हजार और तीसरे दिन 8000 के करीब श्रद्धालु पहुँचे थे। वहीं इस बार केदारनाथ धाम में पहले दिन 23,512 दूसरे दिन 18,212 और तीसरे दिन 17,749 श्रद्धालुओं ने बाबा केदार के दर्शन किए, जबकि चौथे दिन यानी सोमवार दोपहर तक 16 हजार से अधिक तीर्थयात्री केदारनाथ धाम की यात्रा पर निकल गए थे।

इस साल 6 मई को सुबह 6 बजकर 25 मिनट पर केदारनाथ धाम के कपाट खुले थे। इन चार दिनों में लगभग 75 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा केदार के दर्शन कर लिए हैं। हर दिन श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देख यात्रा पड़ावों में व्यवसाय कर रहे व्यापारी भी काफी खुश नजर आ रहे हैं। केदारघाटी की 60 प्रतिशत आबादी केदारनाथ यात्रा पर निर्भर रहती है। पिछले दो साल तक कोरोना महामारी (Corona) के कारण चार धाम यात्रा पर बुरा असर पड़ा है।

बता दें कि चार धामों के कपाट शीतकालीन अवकाश में बंद कर दिए जाते हैं और इसके बाद अप्रैल-मई में भक्तों के लिए खोल दिए जाते हैं। पिछले दो सालों से कोरोना महामारी के कारण मंदिर में यात्रियों के आने पर रोक लगाई गई ​थी।

बलात्कार मामले में गिरफ्तार हो सकता है राजस्थान के कॉन्ग्रेसी मंत्री का बेटा, पीड़िता ने बताया – ‘कहता था कि पिता मंत्री हैं, कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता’

राजस्थान में जलदाय मंत्री डॉ. महेश जोशी के बेटे रोहित जोशी के खिलाफ रेप केस की जाँच अब दिल्ली पुलिस करेगी। इस मामले में कभी भी उसकी गिरफ्तारी हो सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली के सदर बाजार पुलिस थाने में सोमवार (9 मई 2022) को रोहित जोशी के खिलाफ रेप का केस दर्ज कर लिया गया है। अब इस मामले की जाँच महिला पुलिस अधिकारी करेंगी।

दिल्ली पुलिस सूत्रों के अनुसार, आज मजिस्ट्रेट के सामने पीड़िता के 164 बयान दर्ज किए गए हैं। रोहित जोशी के खिलाफ रेप, अननेचुरल सेक्स, ब्लैकमेलिंग, मारपीट करने सहित गंभीर आराेपों में सात धाराओं में मामला दर्ज हुआ है। बताया जा रहा है कि सदर बाजार पुलिस स्टेशन में 338 नंबर की एफआईआर में 376, 377, 366, 312, 506, 509 के तहत मुकदमा दर्ज हुआ है।

पीड़िता ने दिल्ली पुलिस को अपनी शिकायत में बताया कि उसे मंत्री महेश जोशी से जान का खतरा है। महिला ने मंत्री के प्रभाव के कारण ​राजस्थान में निष्पक्ष जाँच पर संदेह भी जताया था। अब इस मामले की जाँच में राजस्थान पुलिस का कोई दखल नहीं रहेगा।

बता दें कि रोहित जोशी पर 23 साल की एक लड़की को शादी का झाँसा देकर रेप करने का आरोप लगा है। उत्तरी दिल्ली की पुलिस ने जीरो एफआईआर दर्ज कर मामले को माधोपुर के एसपी को ट्रांसफर कर दिया है, क्योंकि पहली बार उसके साथ वहीं पर रेप किया गया था। पीड़िता का आरोप है कि रोहित जोशी ने उसके साथ कई मौकों पर रेप किया। उसने उसकी माँग में सिंदूर भरकर कहा कि अब तुम मेरी पत्नी हो गई हो और हम जल्द ही शादी कर लेंगे। इसके बाद वो उसे हनीमून पर ले गया और उसके साथ रेप किया। आरोप है कि जब वो गर्भवती हो गई तो उसका गर्भपात भी करा दिया।

AAP विधायक अमानतुल्लाह खान पर FIR के लिए शिकायत, मेयर ने लिखा पत्र: शाहीन बाग़ अतिक्रमण विरोधी अभियान में डाली बाधा

दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के मेयर मुकेश सूर्यान ने सोमवार (9 मई 2022) को आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान (Amanatullah Khan) के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए पत्र लिखा। ‘आप’ के विधायक अमानतुल्लाह खान पर आरोप है कि उन्होंने अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई में बाधा पहुँचाई है। उन्होंने लिखा, “मेरे संज्ञान में यह आया है कि वहाँ के विधायक अमानतुल्लाह खान और निगम पार्षद अब्दुल वाजिद खान, वार्ड संख्या 102 एस ने सरकारी कार्य में बाधा पहुँचाई है।”

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान शाहीन बाग में चल रहे विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। शाहीन बाग इलाके में MCD द्वारा अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई के विरोध में लोग सड़क पर प्रदर्शन कर रहे हैं, जिसके चलते लोगों ने बुलडोजर को सड़क पर ही रोक दिया।

इससे पहले दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने मेयर मुकेश सूर्यान को पत्र लिखकर राजनीतिक दलों के नेताओं के खिलाफ एक्शन लेने की अपील की थी। आदेश गुप्ता ने आरोप लगाया था कि आम आदमी पार्टी के कुछ नेता, विधायक और पार्षदों ने शाहीन में अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने दी। कुछ लोग बुल्डोजर के सामने लेट गए। इसलिए सरकार काम में बाधा पहुँचाने समेत अन्य संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया जाए।

उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “आज शहीन बाग में निगम द्वारा की जा रही कार्रवाई को रोकने के लिए काँग्रेस और आप नेताओं ने बुलडोजर के आगे लेटकर रास्ता रोककर उसे सांप्रदायिकता का रंग दे दिया। आतंक फैलाने वाला एक आतंकी होता है किसी धर्म या मजहब का नहीं, बुलडोजर के आगे लेटने वालों तुम्हें जनता लिटाएगी।”

वहीं, SDMC सेंट्रल जोन के स्थायी समिति के अध्यक्ष राजपाल ने कहा कि अवैध रूप से बने अतिक्रमण की पहचान कर कार्रवाई होगी। इस कार्रवाई में होने वाला खर्चा भी उन्हीं लोगों से वसूला जाएगा। जनता के हक का पैसा खर्च किया जा रहा है, वह ऐसे लोगों को बढ़ावा देने के लिए नहीं है। यह पैसा भी हम इनसे वसूल करेंगे।