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कप्तानी में नहीं चला ‘सर जडेजा’ का जादू, चेन्नई की कमान फिर से MS धोनी के पास: 6 हार के बाद जूझ रही CSK की टीम

महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni Captain) एक बार फिर से चेन्नई सुपरकिंग्स (Chennai Super Kings) के कप्तान बनने जा रहे हैं। टीम के कप्तान रवींद्र जडेजा ने छह हार के बाद शनिवार (30 अप्रैल 2022) को अपना पद छोड़ दिया है। दरअसल, चेन्नई की टीम मौजूदा सीजन में अब तक सिर्फ दो मैचों ही जीत पाई है। आठ मुकाबलों में छह हार के साथ चेन्नई सुपरकिंग्स नौवें स्थान पर है।

धोनी रविवार (1 मई 2022) को बतौर कप्तान सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ होने वाले मैच में उतरेंगे। धोनी आईपीएल इतिहास के दूसरे सफल कप्तान हैं। उनके नेतृत्व में सीएसके ने 2010, 2011, 2018 और 2021 में चार बार खिताब अपने नाम किया है। धोनी की अगुआई में कुल 204 मैच खेले गए हैं, जिसमें से चेन्नई ने 121 मैच जीते हैं। वहीं 82 मैचों में हार मिली है। बताया जा रहा है कि ईपीएल शुरू होने से दो दिन पहले कप्तानी से हटने का फैसला किया था।

चेन्नई सुपरकिंग्स टीम ने अपने बयान में कहा, “जडेजा ने खेल पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कप्तानी से हटने का फैसला किया है। उन्होंने महेंद्र सिंह धोनी से फिर कप्तानी करने का अनुरोध किया है। धोनी ने टीम के हित में इसे स्वीकार कर लिया है।”

बता दें कि टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के इस्तीफा देने के बाद जडेजा ने इसी साल यानी आईपीएल 2022 में पहली बार टीम की कप्तानी संभाली थी। लेकिन वह अपनी टीम का दबदबा कायम रखने में नाकामयाब रहे। बतौर कप्तानी और खेल में उनका दमदार प्रदर्शन नहीं रहा। जडेजा (Ravindra Jadeja) ने मौजूदा सीजन में 92 गेंदों का सामना किया है और 112 रन बनाए हैं। उनका स्ट्राइक रेट 121.7 का रहा है। इसी दबाव के चलते उन्होंने कप्तानी छोड़ने का ऐलान किया है।

जहाँ से शुरू हुआ इस्लाम, वहीं के लोग नहीं रख रहे रोजा: कहीं फूँके जा रहे सिगरेट तो कहीं मसाज का मजा, सरकारें भी दे रहीं ढील

मिडिल-ईस्ट के ज्यादातर देशों में मुस्लिम लोग रमजान के महीने रोजा रखने से कतरा रहे हैं। इन दिनों जॉर्डन की राजधानी अम्मान के बार में सूर्यास्त के बाद एक अलग ही नजारा देखने को मिलता है। वहीं, ईरान की राजधानी तेहरान में ट्रैफिक के दौरान आपको लोग सिगरेट पीते हुए नजर आ जाएँगे। बताया जाता है कि मोरक्को के माराकेच में बड़ी संख्या में इस दिनों लोग ‘Raunchy massages’ कराते हैं।

रमजान के पवित्र महीने में जब मुस्लिमों को सुबह से शाम तक खाने, पीने और सेक्स से दूर रहने के लिए कहा जाता है। ऐसे में इन देशों में ये सभी काम खुलेआम किए जा रहे हैं। The Economist की रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त अरब अमीरात के दुबई में रहने वाले कुछ लोग अब अरबी शब्द हराम के बाद ‘हरमदान (Haramadan)’ महीने का मजाक उड़ाते हैं। यानी ऐसी चीजें जो वर्जित हैं, जबकि अधिकांश मध्य पूर्वी राज्य अभी भी रमजान में कुछ चीजों करने को अपराध मानते हैं।

दरअसल, रमजान इस्लामी कैलेंडर का नौवाँ महीना होता है, जिसे इबादत का सबसे पवित्र महीना माना जाता है। मुस्लिम लोग इस पूरे महीने में रोजा रखते हैं। सऊदी अरब मिस्र, कतर, इंडोनेशिया, मलेशिया, यमन और फिलीस्तीन और कई मुस्लिम देशों में रमजान का चाँद दिखने के बाद 2 अप्रैल, 2022 से रोजे शुरू हुए। कहा जाता है कि रमजान महीने में जो लोग रोजा रखते हैं, उन्हें सूरज डूबने के बाद होने वाली मगरिब अजान से पहले कुछ भी खाने या पीने की मनाही होती है। रोजे के दौरान सिगरेट पीना व जबरन उल्टी करने की सख्त मनाही होती है। इसके अलावा रोजा रखने वाले लोगों को गलत सोच व गलत गतिविधियों में शामिल होने पर पाबंदी होती है।

दशकों पहले मिडिल-ईस्ट देशों में रमजान के दौरान नियमों को तोड़ने पर लगाया जुर्माना, अब वहाँ पार्किंग के लिए लगाए गए जुर्माने से भी कम हो गया है, जिसके चलते कोई भी नियम मानने को तैयार नहीं होता है। जॉर्डन पर अधिकतम 25 दीनार (लगभग $35 यानी 2678 भारतीय रुपए) का जुर्माना है। वहीं ओमान में रोजे के दौरान नियम तोड़ने पर एक रियाल ($3 यानी 229 भारतीय रुपए) हैं। कहा जाता है कि अधिकारी ऐसे ज्यादातर मामलों में अपनी आँखें मूँद लेते हैं।

नजफ़ शहर के एक इराकी वकील कहते हैं, “वे सोशल-मीडिया से बहुत डरते हैं। रमजान में सिगरेट पीने और रोजे के दौरान मुस्लिम नियमों को तोड़ने के कई मामले कोर्ट में आते हैं।” हाल के वर्षों में जॉर्डन ने खाद्य और पेय पदार्थों को भारी कीमत पर बेचने के लिए रमजान लाइसेंस पेश किए। ऐसे में यहाँ कई मुस्लिम लोग रोजे रखने से कतरा रहे हैं। अम्मान में एक वित्तीय सलाहकार का कहना है कि उनके 25 सहयोगियों में से केवल दो ही रोजा रख कर रहे हैं।

पटियाला हिंसा: शिवसेना नेता को कोर्ट ने पुलिस हिरासत में भेजा, 25 आरोपितों में से सिर्फ 3 गिरफ्तार, बोले CM मान – घटना सांप्रदायिक नहीं

पटियाला के पंजाब में भड़की हिंसा मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 6 एफआईआर दर्ज की हैं। इन एफआईआर में 25 लोग नामजद हैं जिनमें से 3 की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें शिवसेना द्वारा निष्कासित किए गए हरीश सिंघला भी शामिल हैं जिन्हें कोर्ट ने दो दिन की पुलिस हिरासत में भेजा है। इनके अलावा कुलदीप सिंह और दलजीत सिंह पकड़े गए हैं। इस पूरी हिंसा का मास्टरमाइंड बरजिंदर सिंह परवाना को बताया जा रहा है जिसकी गिरफ्तारी जल्द हो सकती है

पटियाला हिंसा में 6 FIR, 3 गिरफ्तार

पटियाला के आईजी एमएस चिन्ना ने बताया, “पटियाला में कल कानून व्यवस्था के साथ खिलवाड़ हुआ जिसके संबंध में 6 प्राथमिकी दर्ज की हैं और हरीश सिंगला सहित 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। मुख्य आरोपित व मास्टरमाइंड बरजिंदर सिंह परवाना को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।”

आईजी पटियाला ने कहा, “हरीश सिंघला को 2 दिन की पुलिस रिमांड में भेजा गया है। हर आरोपित जिनका इस हिंसा से संबंध होगा सब पकड़े जाएँगे, उनकी जाँच होगी और उन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा। किसी को कोई छूट नहीं मिलेगी।”

पुलिस ने यह भी बताया कि पटियाला में जो दो पक्षों द्वारा की हिंसा की गई उसके बाद शांति सदस्यों ने पुलिस को आश्वासन दिया है कि शहर में आगे से किसी भी जुलूस में ऐसा माहौल नहीं बनेगा। केस का जो मुख्य आरोपित है उसकी आपराधिक पृष्ठभूमि है, उसके विरुद्ध चार एफआईआर दर्ज हैं, वो इन मामलों मे गिरफ्तार भी हुआ है।

पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई

इससे पहले इस केस में मालूम हो कि पटियाला के IG राकेश अग्रवाल और SSP नानक सिंह को उनके पदों से हटाया गया था। दोनों अधिकारियों की जगह मुखविंदर सिंह छीना नए IG और दीपक पारिख को नए SSP का पद मिला था। इनके अलावा सिटी SP हरपाल सिंह, डीएसपी अशोक कुमार, लाहौरी गेट के SHO गुरप्रीत सिंह और कोतवाली के SHO बिक्रम सिंह पर भी कार्रवाई हुई थी।

हिंसा सांप्रदायिक नहीं, राजनैतिक है: सीएम भगवंत मान

मामले पर बात करते हुए सीएम भगवंत मान ने हिंसा का सारा इल्जाम भाजपा और शिवसेना पर मढ़ा। उन्होंने कहा, “मामले में कुछ लोगों के विरुद्ध केस दर्ज हो चुका है। हिंसा में भाजपा और शिवसेना के लोग थे और दूसरी ओर अकाली दल के लोग थे। ये सारा राजनीतिक टकराव था इसे धर्म-समुदायों से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। जाँच हो रही है। सच सामने आएगा।” सीएम मान का कहना है कि ये उनकी पार्टी की लोकप्रियता है कि उससे घबरा कर विपक्षी दल ये सब हरकत कर रहे हैं।

पटियाला हिंसा 

गौरतलब है कि कल पंजाब के पटियाला में खालिस्तान समर्थकों और हिंदू संगठनों के बीच झड़प का मामला प्रकाश में आया था। इस दौरान एसएचओ पर भी खालिस्तानी समर्थकों ने तलवार लेकर हमला कर दिया था और हिंदुओं के काली मंदिर को भी निशाना बनाया था। प्रशासन ने वहाँ हालात को काबू पाने के लिए इंटरनेट सेवाओं पर अस्थायी रूप से प्रतिबंध लगाया था और शहर को हाई अलर्ट पर रखा गया था।

खालिस्तानी तत्वों के विरोध में निकली थी रैली

बता दें कि सिख फॉर जस्टिस के प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू ने कुछ दिन पहले शुक्रवार को खालिस्तान का स्थापना दिवस मनाने की घोषणा की थी। इसके जवाब में शिवसेना (बाल ठाकरे) के नेता हरीश सिंगला ने शुक्रवार (29 अप्रैल) को खालिस्तान विरोध रोष निकाली थी। इस दौरान उन विरोधी गुट के साथ उनकी झड़प हो गई। दोनों तरफ से पथराव भी हुए। वहीं अराजक तत्वों ने काली माता मंदिर पर हमला कर दिया। इस दौरान कई लोग घायल भी हुए।

आंध्र के जवाहर लाल नेहरू टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी में नमाज़ के लिए समतल किया गया मैदान, VC ने दी अनुमति: BJP ने किया विरोध

आंध्र प्रदेश के काकीनाडा (Kakinada) स्थित जवाहर लाल नेहरू टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी में रमज़ान की नमाज़ के लिए मैदान को समतल किया गया। इस मामले में अब विवाद उठ खड़ा हुआ है। भाजपा ने शिक्षा केंद्रों को धार्मिक स्थल न बनाने की आवाज उठाई है। वहीं विश्वविद्यालय परिसर में नमाज़ पढ़ने वाले समूह ने वो जगह एक मुस्लिम सेठ द्वारा दान की गई बताते हुए वहाँ नमाज़ को जायज बताया है।

डेक्कन क्रॉनिकल के मुताबिक, JNTUK के चांसलर GVR प्रसाद राजू ने बताया, “कुछ लोगों का एक समूह मुझ से यूनिवर्सिटी कैम्पस में एक दीवाल खड़ी करने की माँग की। इस माँग के पीछे नमाज़ पढ़ने को वजह बताया गया। यह मामला न्यायालय में पेंडिंग है इसलिए मैंने दीवाल की अनुमति देने से मना कर दिया। फ़िलहाल उन्हें रमज़ान की नमाज़ के लिए झाड़ियों को साफ़ करने और वहाँ की जमीन को समतल करने की अनुमति दी गई है।”

वहीं भाजपा के स्थानीय नेताओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जमीन को समतल करने की अनुमति वापस लेने की माँग की है। इस दौरान भाजपा नेता दुव्वुरी सुब्रह्मण्यम ने कहा, “शिक्षण संस्थानों में किसी भी धार्मिक कार्यक्रम की अनुमति नहीं होनी चाहिए। हमारी पार्टी ने आंध्र प्रदेश के राज्यपाल को चिट्ठी लिख कर बताया है कि एक धार्मिक समूह के द्वारा यूनिवर्सिटी की जमीन पर लंबे समय से अवैध कब्ज़ा है। अब वहाँ पर सत्ताधारी पार्टी के नेताओं के सहयोग से शॉपिंग काम्प्लेक्स बनाने की तैयारी है जबकि उस जमीन का विवाद कोर्ट में लंबित है। यह विश्वविद्यालय के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं। राज्यपाल इस अवैध निर्माण को फ़ौरन रोकने का आदेश दें।”

भाजपा नेताओं ने जिस धार्मिक समूह पर यूनिवर्सिटी कैम्पस की जमीन पर अवैध कब्ज़े का आरोप लगाया है उसका नाम MEWA बताया जा रहा है। इस समूह के प्रभारी दीन ने डेक्कन क्रॉनिकल को बताया, “जमीन पर कोई विवाद नहीं है। दशकों पहले गुजरात के नूर सेठ नाम के व्यक्ति ने 6 एकड़ जमीन नमाज़ के लिए दान में दी थी। इसे आंध्र प्रदेश वक्फ बोर्ड ने भी चिह्नित किया है। इस जमीन पर रमज़ान की नमाज़ दशकों से हो रही है। मैं बचपन से यहाँ रमज़ान और बकरीद पर नमाज़ होते देख रहा हूँ।”

202 सेकंड में लंदन-पेरिस-बर्लिन सब तबाह: यूक्रेन का समर्थन इंग्लैंड को भारी, TV पर फोटो-वीडियो जारी कर रूस ने ऐसे दी धमकी

रूस और यूक्रेन के बीच जंग खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही। इसी बीच खबर है कि रूसी न्यूज चैनल पर एक शो के दौरान होस्ट और वहाँ गए मेहमानों के बीच परमाणु युद्ध की संभावना पर चर्चा की गई। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

चैनल वन ने 60 मिनट के इस शो में एक नक्शा दिखाया। इसमें बताया गया कि सरमत मिसाइल (Sarmat Intercontinental Ballistic Missile, also known as Satan II) को यूरोपियन कैपिटल तक पहुँचने में कितना समय लगेगा। रूसी चैनल ने दुनिया को यह भी बताया कि सरमत मिसाइल को लंदन को हिट करने में 202 सेकंड, पेरिस के लिए 200 सेकंड और बर्लिन तक पहुँचने में 106 सेकंड का समय लगेगा।

चैनल में आए अलेक्सी ज़ुरावलेव (Aleksey Zhuravlyov) नाम के नेता ने कहा, “अगर सरमत मिसाइल वहाँ पर गिरती है, तो ब्रिटिश द्वीप समूह खत्म हो जाएँगे।”

गुरुवार (28 अप्रैल 2022) के शो में रोडिना पार्टी के अध्यक्ष अलेक्सी ज़ुरावलेव ने चर्चा को नई दिशा देते हुए कहा कि अगर रूस ने ब्रिटेन के खिलाफ परमाणु हथियार लॉन्च किए तो क्या होगा? इस पर चर्चा के दौरान होस्ट ने कहा कि यदि परमाणु युद्ध हुआ तो ‘कोई नहीं बचेगा’।

यूक्रेन का समर्थन करने वाले ब्रिटेन को चेताते हुए नेता अलेक्सी ज़ुरावलेव (Aleksey Zhuravlyov) ने कहा, “वे हम पर स्टेट टेररिज्म का आरोप लगा रहे हैं।” इस पर शो की होस्ट ने कहा कि ब्रिटेन के पास भी परमाणु हथियार हैं और इस युद्ध में कोई नहीं बचेगा।

शो में दर्शकों को एक नक्शा दिखाते हुए बताया गया कि मिसाइलों को कैलेनिनग्राद, पोलैंड, लिथुआनिया और बाल्टिक सागर के बीच रूसी एन्क्लेव से लॉन्च किया जा सकता है। इससे वो मिसाइलों 106 सेकंड में बर्लिन, 200 सेकंड में पेरिस और 202 सेकंड में लंदन पहुँच सकते हैं।

डेली मेल के मुताबिक, ब्रिटेन के रक्षा मंत्री (UK’s Armed Forces Minister) द्वारा यूक्रेन का समर्थन करने और जंग के लिए जिम्मेदार रूस की आलोचना करने के जवाब में रूसी चैनल ने यह शो किया। इस शो और चैनल के माध्यम से ‘कोई नहीं बचेगा’ की धमकी भी दी। यह भी बताया और दिखाया कि कैसे व्लादिमीर पुतिन यूरोप की तीन राजधानी पर परमाणु हमले की शुरुआत करेंगे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुतिन 9 मई को रूस की विजय दिवस परेड का इस्तेमाल यूक्रेन पर अंतिम और प्रभावी वार के लिए कर सकते हैं। यह बात विदेशी मीडिया में ऐसे समय में आई है, जब नाटो के पूर्व प्रमुख रिचर्ड शेरिफ ने यूक्रेन और रूस में बढ़ते तनाव के बीच पश्चिमी देशों को खुद को तैयार करने के लिए आगाह किया।

बताया जा रहा है कि रूस ने यह कदम इंग्लैंड और अन्य पश्चिमी देशों द्वारा यूक्रेन का समर्थन करने के बाद उठाया है। मीडिया रिपोर्टों की मानें तो पश्चिमी देशों द्वारा यूक्रेन का समर्थन करने के जवाब में पुतिन ने सेना को अपनी सबसे घातक सरमत मिसाइलों (Sarmat Missile, also known as Satan II) का परीक्षण करने का आदेश दिया है। पिछले हफ्ते पुतिन ने कहा था कि उनके देश की हाइपरसोनिक मिसाइलें सभी आधुनिक रक्षा प्रणालियों को भेद सकती हैं और ब्रिटेन पर हमला करने के लिए तैयार हैं।

बस रोक 38 हिन्दुओं की हत्या, सिख ड्राइवर को छोड़ दिया: पटियाला में ही खालिस्तानियों ने किया था नरसंहार, अब माँ दुर्गा के लिए अश्लील शब्द

पंजाब के पटियाला में काली मंदिर में हुई हिंसा के बाद एक बार फिर से खालिस्तानियों की चर्चा जोरों पर है। भारत को खंडित कर के पंजाब को अलग मुल्क बनाने का दिवास्वप्न लेकर चले इन खालिस्तानी आतंकियों के नेटवर्क पाकिस्तान से लेकर कनाडा तक हैं और इसका इस्तेमाल वो भारत के खिलाफ सिखों को भड़काने के लिए करते हैं। समय-समय पर वो हिन्दुओं का कत्लेआम मचाते रहे हैं। लालड़ू बस नरसंहार इन्हीं में से एक है।

पटियाला में क्या हुआ?

सबसे पहले बात कर लेते हैं कि उत्तर-पश्चिम भारत में बसे राज्य पंजाब के दक्षिणी-पूर्वी हिस्से में स्थित पटियाला में क्या हुआ। शिवसेना नेता हरीश सिंगला को इस मामले में पुलिस ने गिरफ्तार किया है। उन्हें पार्टी ने भी निकाल दिया है। वीडियो में खालिस्तानी भीड़ को हाथों में तलवार और झंडे लेकर हिन्दुओं से भिड़ते हुए देखा जा सकता है। ‘खालिस्तान मुर्दाबाद मार्च’ के विरोध में निकले कट्टरवादियों ने काली मंदिर में घुस कर भी ‘बेअदबी’ की।

‘सिख फॉर जस्टिस (SFJ)’ का अध्यक्ष गुरपतवंत सिंह पन्नू अक्सर भड़काऊ वीडियो जारी कर के सिखों को उकसाता रहता है, जिसके विरोध में ये मार्च आयोजित किया गया था। पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी ISI के इशारों पर नाचने वाले पन्नू ने शुक्रवार (29 अप्रैल, 2022) को ‘खालिस्तान स्थापना दिवस’ मनाने का ऐलान किया था, जिसके विरोध में ये मार्च निकाला गया था। अमृतसर के खानकोट में पैदा हुआ पन्नू विदेश से ही भारत विरोधी एजेंडा चलाता है।

उसे सरकार ने आतंकवादी घोषित कर रखा है। उसने न सिर्फ ‘किसान आंदोलन’ के दौरान सिखों को भड़काया, बल्कि पंजाब चुनाव में भी दखल देने की कोशिश की। पटियाला में उसके खिलाफ रैली निकली तो उसके समर्थक भी सड़क पर आ गए। स्थिति नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हवा में 15 राउंड गोलीबारी करनी पड़ी। AAP कह रही है कि पंजाब का माहौल बिगाड़ने की साजिश हो रही है, जबकि विपक्ष का आरोप है कि AAP की सरकार आने के बाद ही ये सब शुरू हुआ है।

खालिस्तानियों ने दी माँ दुर्गा को गाली

हिन्दू और सिख धर्म सनातन संस्कृति का ही हिस्सा हैं, क्योंकि दोनों का जन्म भारत की भूमि पर ही हुआ है। गुरु नानक ने जहाँ भारतीय ऋषि परंपरा को ही आगे बढ़ाया, वहीं दशम गुरु गोविंद सिंह ने रामायण को अपने तरीके से लिखा। गुरु गोविंद सिंह माँ भगवती की पूजा भी करते थे। निराकार रूप में सिख धर्म में उनकी पूजा होती रही है। लेकिन, जिस तरह अब काली मंदिर में शराब की बोतलें फेंके जाने के आरोप लग रहे हैं, स्पष्ट है कि खालिस्तानी हिन्दुओं और सिखों में दरार डालना चाहते हैं।

इसी बीच निहंगों का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक पगड़ी पहले कट्टरपंथी ये कहते हुए दिख रहा है कि गुरु गोविंद सिंह द्वारा स्थापित ‘खालसा पंथ’ सभी धर्मों का गुरु है। वो कहता दिख रहा है कि हरिद्वार हेमकुंत प्रभात में पहाड़ों पर रहने वाले लोगों को ही देखिए, जिनका वर्णन ‘सर्बलोह ग्रन्थ’ में है। निहंग आगे पूछता है कि उसमें बताए गए पहाड़ी कौन लोग हैं? इसके बाद वो पूछता है, “तुम्हारी दुर्गा को नंगा नाचने के लिए किसने मजबूर किया, पूछिए उनसे?”

सिख कट्टरपंथी इस वीडियो में आगे कहता है, “जब राक्षसों ने इंद्र देवता का घर लूट लिया और दुर्गा को नंगा नाचने के लिए मजबूर किया, तब उसे किसने बचाया? प्रशासन से पूछो। नानक सिंह से पूछो। या तो मंदिर से गोली चलाने वालों को बाहर लेकर आओ, या फिर अपनी बंदूकें उठाओ और सिखों के रास्ते में मत आओ। हम भी देखेंगे कि उनकी काली माता भला कहाँ छिपती है।” क्या आप किसी सनातन संस्कृति को मानने वाले से इस तरह की भाषा की उम्मीद करते हैं?

लालड़ू बस नरसंहार: जब खालिस्तानियों ने 38 हिन्दुओं को मार डाला

ये घटना 6 जुलाई, 1987 की है। जैसा कि हमें पता है, पूरा अस्सी का दशक खालिस्तानी आतंकवाद से पीड़ित रहा है। जहाँ एक तरफ जरनैल सिंह भिंडरांवाले के अंत के लिए तत्कालीन इंदिरा गाँधी ने ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ का आदेश दिया और स्वर्ण मंदिर में सेना घुसी, वहीं दूसरी तरफ इसके आक्रोश के रूप में अपने ही सिख अंगरक्षकों द्वारा इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद बड़े पैमाने पर सिखों का नरसंहार हुआ। इसमें कई कॉन्ग्रेस नेताओं के नाम सामने आए।

खालिस्तानियों ने न सिर्फ प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी, बल्कि पंजाब के मुख्यमंत्री रहे बेअंत सिंह और तब भारतीय सेना के अध्यक्ष रहे जनरल अरुण श्रीधर वैद्य को भी खालिस्तानियों ने मार डाला। इसी तरह लालड़ू में हरियाणा की एक सरकारी बस को घेर लिया गया। ये बस चंडीगढ़ से ऋषिकेश के लिए निकली थी, जिसमें 75-79 के आसपास हिन्दू सवार थे। रात के 10 बजे के आसपास बस के करीब एक फिएट कार आकर रुकी।

चार बंदूकधारी उसमें से निकल कर बस में घुसे और बस ड्राइवर के सिर पर बंदूक रख कर बस को एक खुली जगह ले जाने के लिए कहा। खालिस्तानियों ने अबसे पहले तो हिन्दुओं को जम कर लूटा। उनके सारे कीमती सामान छीन लिए गए। इसके बाद उन्हें बस में बीच में जमा होने के लिए कहा गया। इसके बाद उन बंदूकधारियों ने बस के दोनों तरफ जाकर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। गुरमीत सिंह नाम का एक आतंकी गोलीबारी में मारा गया।

लेकिन, खालिस्तानी आतंकियों की गोलीबारी में 38 निर्दोष हिन्दुओं की जान चली गई और 33 घायल हो गए। इस घटना को ‘खालिस्तानी कमांडो फ़ोर्स (KCF)’ नामक आतंकी संगठन ने अंजाम दिया था, जिसका अस्तित्व आज भी है। इसके आका अमेरिका, कनाडा और पाकिस्तान में बैठे रहते हैं। मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या में भी इसका हाथ था। हालाँकि, इसके खिलाफ चले अभियान के बाद अब ये खासा कमजोर हो गया है।

लालड़ू के बारे में बता दें कि ये जगह भी पंजाब के पटियाला में ही स्थित है। इसके मात्र 24 घंटे बाद ही हरियाणा के हिसार में फतेहाबाद के नजदीक खालिस्तानी आतंकियों ने 22 अन्य नागरिकों की भी हत्या कर दी थी। लालड़ू की घटना में बस का ड्राइवर हरि सिंह सिख ही था। उसे ज़िंदा छोड़ दिया गया था। सबसे पहले पुलिस को उसने ही घटना की जानकारी दी थी। उसने बताया था कि फिएट जब आकर रुकी तो उसे लगा कि ड्राइवर शराब के नशे में होगा, लेकिन उसमें से स्टेनगन लिए लोग निकले।

पहले तो खालिस्तानियों ने कहा कि वो सिर्फ लूटपाट करने के लिए आए हैं। इसके बाद यात्रियों ने अपने सारे गहने उन्हें डर से दे दिए और सोचा कि जान बच जाएगी। इसके बाद बस 8 किलोमीटर तक चलती रही। इस दौरान खालिस्तानी हिन्दुओं पर तंज कसते हुए पूछ रहे थे कि अब तुम्हारा जूलियो रिबेरो कहाँ है? बता दें कि पंजाब में खालिस्तान के दिनों में जूलियो रिबेरो पंजाब के DGP थे। तेजतर्रार अधिकारियों में गिने जाने वाले रिबेरो मुंबई के पुलिस कमिश्नर भी रहे हैं।

खालिस्तानियों ने बस में बैठे हिन्दू यात्रियों का मजाक उड़ाते हुए पूछा, “जब सिख युवक मारे जा रहे थे तो तुम सब हँस रहे थे। अब देखो, कैसे गीदड़ की तरह बैठे हुए हो।” इसके बाद सभी यात्रियों को ‘सत् नाम वाहे गुरु’ चिल्लाने को मजबूर किया गया। हालाँकि, इस दौरान कलावती नाम की एक यात्री किसी तरह बस से कूद कर जान बचा कर भागने में सफल रही। साथ में वो अपने तीन छोटे-छोटे बच्चों को भी ले गई। जमालपुर और हसनपुर के बीच में बस रोक कर दोनों तरफ से फायरिंग शुरू कर दी गई।

अब्दुल गफूर नाम के एक घायल ने भी इस पूरे वाकये के बारे में पुलिस को बताया था। सूट पहले एक क्लीन शेव व्यक्ति भी इसमें मारा गया, जिसकी पहचान बंदूकधारियों में से ही एक गुरमीत सिंह उर्फ़ टोनी के रूप में हुई। उसकी लाश को गाड़ी में डाल कर घग्गर नदी पार कर के आतंकियों ने गाड़ी को जलाने की कोशिश की, लेकिन बारिश होने के कारण वो ट्रक से वहाँ से भाग निकले। ड्राइवर हरि सिंह को सिख होने के कारण छोड़ दिया गया था।

KCF ने बस में एक नोट भी छोड़ा था, जिसमें लिखा था कि हर एक सिख के बदले 100 हिन्दुओं की हत्या की जाएगी। बस में महिलाओं-बच्चों की लाशें भी पड़ी हुई थीं। आज भी खालिस्तानियों की सोच वही है और वो किसी न किसी बहाने हिन्दुओं-सिखों में दरार डाल कर हिन्दुओं का खून बहाना चाहते हैं। पाकिस्तान उन्हें शह देता है। कनाडा में सिख वोट अधिक होने के कारण उन्हें पनाह मिलती है। इनका वही लक्ष्य है, जो तालिबान का रहा है।

भारत का अपमान करने वाले कॉमेडियन को प्रियंका चोपड़ा का साथ, कहा – बहादुर और प्रेरणादायक

कुछ दिन पहले अंतरराष्ट्रीय मंच का इस्तेमाल करके विदेशियों के सामने भारत का अपमान करने वाले कॉमेडियन वीर दास को बॉलीवुड-हॉलीवुड अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा ने बहादुर और प्रेरणादायक बताया है। उन्होंने अपने अकॉउंट पर वीर दास के शो से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो शेयर करते हुए वीर दास की तारीफ की।

अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में प्रियंका चोपड़ा ने लिखा, “क्या दिन है! अपने कमाल के दोस्तों के साथ एक कमाल के दोस्त को वो करते हुए देखना, जो वह सबसे बेहतर करता है। वीर दास तुम बहुत बहादुर और प्रेरणादायक हो। तुमने मुझे हँसा-हँसा कर मेरी आँखों में आँसू ला दिए। हमें इस शो का हिस्सा बनाने के लिए थैंक्स।”

बता दें कि वीर दास वही विवादित कॉमेडियन है जिसने पिछले साल 16 नवंबर को अमेरिका के जॉन एफ केनेडी सेंटर में 7 मिनट तक भारत विरोधी प्रोपगेंडा को जमकर हवा दी थी। अपने वन लाइनर्स की मदद से उसने भारत को, भारत की राजनीति को, स्थानीय मुद्दों को, पीएम मोदी को खूब कोसा था और हर प्रोपगेंडाबाज की तरह उसने भारत में नारी को पूजने की जो परंपरा है उसे रेप से जोड़ा था।

इसके अलावा मंच पर खड़ा होकर वीर दास ने कहा था, “मैं उस भारत से आता हूँ जहाँ महिला को सुबह पूजा जाता है और रात में गैंगरेप होता।” वीर दास की वन लाइनर्स में अजीब बात ये थी कि उसने अमेरिका में खड़े होकर भारत में हो रहे रेपों के बारे में बात की थी, लेकिन ये भूल गया था कि अमेरिका रेप मामलों में कई देशों से बहुत आगे है। वीर दास ने अपनी कॉमेडी के जरिए हिंदुओं को असहिष्णु दिखाते हुए भगवा रंग का भी मखौल उड़ाया था। साथ ही साथ भारत-पाकिस्तान मैच को लेकर क्रिकेट पर भी तंज कसा था। इसके बाद वैश्विक स्तर पर पीएम केयर फंड पर वीर दास ने सवाल उठाए थे और स्थानीय मुद्दों को भी उठाने से वीर दास ने गुरेज नहीं किया था।

केनेडी सेंटर में भारत विरोधी बयानों के बाद वीर दास के ख़िलाफ़ भारत में कई जगह शिकायतें भी हुई थी। हिंदू आईटी सेल के संस्थापक अक्षित सिंह ने वीर दास के विरुद्ध ऑनलाइन एफआईआर करवाई थी। वहीं वकील आशुतोष जे दुबे ने भी मुंबई पुलिस में कॉमेडियन के विरुद्ध शिकायत करवाई थी। कॉमेडियन के ऊपर भारत की छवि धूमिल करने के आरोप में वकील आशुतोष जे दुबे ने शिकायत दी थी।

हाजी इकबाल की 21 करोड़ की संपत्ति जब्त करेगी UP पुलिस, नौकर के नाम 3 चीनी मिल और 600 बीघा जमीन का किया था ‘खेल’

बहुजन समाज पार्टी के पूर्व MLC हाजी इकबाल की कई बेनामी सम्पत्तियों को सहारनपुर पुलिस जब्त करने जा रही है। ये सम्पत्तियाँ हाजी इकबाल ने अपने नौकर नसीम के नाम कर रखी थीं। जब्त होने जा रही सम्पत्तियों की कुल कीमत 21 करोड़ के आस-पास है।

जब्तीकरण के मामले में यह उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी कार्रवाई बताई जा रही है। यह जानकारी सहारनपुर पुलिस ने 29 अप्रैल 2022 (शुक्रवार) को दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इन सम्पत्तियों को गैंगस्टर एक्ट 14 (1) के तहत जब्त किया जाएगा। इन प्रॉपर्टी में मिर्जापुर क्षेत्र के शाहपुर गाड़ा, फतेहपुर टांडा व सफीपुर गाँव में बगीचे और जमीनें हैं। नसीम को इसी अप्रैल की 21 तारीख़ को पुलिस ने गिरफ्तार किया था।

हाजी इकबाल के खेतों में काम करने वाले नसीम के नाम 3 चीनी मिलें और 600 बीघा जमीन का पता प्रशासन को चला था। नसीम से पहले हाजी इकबाल के खास माने जाने वाले पूर्व ब्लॉक प्रमुख राव लईक को हिरासत में लिया गया था। लेकिन गैंगस्टर एक्ट लगा होने के बाद भी उसे 2 हफ्ते में जमानत मिल गई थी।

सहारनपुर के SSP आकाश तोमर ने ऑपइंडिया को जानकारी देते हुए इसे प्रदेश की अब तक की सबसे बड़ी जब्तीकरण की कार्रवाई बताया। गौरतलब है कि हाजी इकबाल के खिलाफ ED मायावती सरकार में चीनी मीलों की बिक्री घोटाले से जुड़ी जाँच कर रही है। CBI ने वर्ष 2019 में हाजी इकबाल के खिलाफ केस भी दर्ज किया था। आपको बता दें कि हाजी इक़बाल ग्लोकल यूनिवर्सिटी के संस्थापक भी हैं, जो लगभग 700 एकड़ में बनी हुई है।

सप्ताह भर पहले 7 करोड़ रुपए की जमीन मुक्त

SSP आकाश तोमर द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक इससे पहले इसी महीने की 22 तारीख को समीम, परवेज़ और खालिद के कब्ज़े से 7 करोड़ रुपए मूल्य की जमीन मुक्त करवाई गई थी। यह जमीन सरसावा थानाक्षेत्र के गाँव रपरौली में थी, जिसका क्षेत्रफल लगभग 220 बीघा था।

220 बीघे जमीन को मुक्त करने के दौरान राजस्व विभाग के भी अधिकारी मौजूद रहे थे। कब्ज़े के आरोपितों पर जरूरी कानूनी कार्रवाई भी की गई थी। कब्ज़ा हटाने के लिए बुलडोजर का भी प्रयोग किया गया था।

हिंदू नेता को जंजीरों से पेड़ में बाँधा, बर्बर तरीके से मारा: इफ्तार को लेकर 40 कट्टरपंथियों का बांग्लादेश में हमला

बांग्लादेश में एक बार फिर एक हिंदू व्यक्ति के साथ बर्बरता करने का मामला सामने आया है। बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई ओइकिया परिषद के दक्षिण चटगाँव के उपाध्यक्ष जितेंद्र कांति गुहा को एक पेड़ से बाँध कर बुरी तरह पीटने की खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि इफ्तार समारोह के निमंत्रण को लेकर स्थानीय सरकारी अधिकारी के इशारे पर उसके समर्थकों ने इस घटना को अंजाम दिया।

बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के मुद्दे को प्रमुखता से उठाने वाले ‘वॉइस ऑफ बांग्लादेश हिंदू़ (@VoiceOfHindu71)’ नाम के ट्विटर हैंडल ने गुहा की फोटो शेयर की है। इसके साथ हैंडल ने लिखा है, “इफ्तार पार्टी में भाग नहीं लेने पर स्थानीय अवामी लीग के नेता मोहम्मद जसीम द्वारा बर्बर तरीके से चटगाँव के एक हिंदू नेता जितेंद्र कांति गुहा पर हमला किया गया।”

उपद्रवियों ने चगाँव के पटिया उप-जिला के हैदगाँव यूनियन में गुहा को न सिर्फ बुरी तरह मारा, बल्कि एक पेड़ से बाँध भी दिया। घटना हैदगाँव में ब्राह्मणघाट के गौचिया कम्युनिटी सेंटर के सामने अंजाम दिया गया। गुहा आवामी लीग के स्थानीय अध्यक्ष भी रह चुके हैं। इस घटना बाद उन्हें पटिया स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, लेकिन बाद में उन्हें चटगाँव मेडिकल कॉलेज अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया।

बताया जा रहा है कि हैदगाँव यूनियन अवामी लीग ने गौचिया कम्युनिटी सेंटर में इफ्तार पार्टी और बैठक का आयोजन किया था, लेकिन यूनियन परिषद (यूपी) के अध्यक्षद बीएम जसीम को आमंत्रित नहीं किया गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना के पीछे यही वजह रही।

हैदगांव यूनियन अवामी लीग के संयुक्त संयोजक शाहिदुल इस्लाम ज़ुलु ने आरोप लगाया कि यूनियन अवामी लीग ने बीएम जसीम को इफ्तार समारोह में आमंत्रित नहीं किया, क्योंकि वर्तमान अध्यक्ष को सत्तारूढ़ अवामी लीग के असंतुष्ट उम्मीदवार के रूप में चुना गया था।

नतीजतन, जसीम क्रोधित हो गया और 30-40 व्यक्तियों के एक समूह के साथ स्थान पर पहुँचा और यूनियन अवामी लीग के संयोजक महमूदुल हक हाफ़िज़ सहित कई लोगों का अपमान करना शुरू कर दिया। पूर्व सदस्य ने जितेंद्र गुहा को घूँसा मारा। इसके बाद जितेंद्र गुहा को बाहर निकाला गया और फिर एक पेड़ से जंजीर से बाँध दिया गया। फिर जसीम के समर्थकों द्वारा उन्हें बेरहमी से पीटा गया।

इस मामले पर जब बीएम जसीम ने पूछा गया तो उन्होंने आरोप लगाया कि गुहा ने अध्यक्ष रहते हुए सरकारी आवास, ट्यूबवेल और रोजगार देने का लालच देकर लोगों से पैसे लिए थे। उनका आरोप है कि उन्हीं युवकों ने पैसे वापस माँगते हुए उनकी पिटाई की।

जहाँ हिन्दुओं की संख्या काफी कम, वहाँ वो अल्पसंख्यक क्यों नहीं? पूरे देश में मुस्लिम समुदाय माइनॉरिटी क्यों?

‘अल्पसंख्यक’ शब्द का अनवरत दोहन और दुरुपयोग भारतीय राजनीति का कड़वा सच है। भारतीय संविधान में सन्दर्भ-विशेष में प्रयुक्त इस शब्द को आज तक अपरिभाषित छोड़ कर मनमानी की जाती रही है। इस मनमानी ने दो समुदायों – हिन्दू और मुसलमान के बीच अविश्वास, असंवाद और अलगाव का बीजारोपण किया है।

तथाकथित प्रगतिशील-पंथनिरपेक्ष दलों की स्वार्थ-नीति का शिकार यह शब्द उनके लिए वोटबैंक साधने का उपकरण रहा है। आज तुष्टिकरण की राजनीति की विदाई बेला में “वास्तविक अल्पसंख्यकों” की पहचान करते हुए उन्हें संरक्षण-प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए। साथ ही, समस्त भारतीयों के लिए समान अधिकार सुनिश्चित करते हुए “समान नागरिक संहिता” भी लागू की जानी चाहिए।

वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर करके राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम-1992 और अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान अधिनियम-2005 को समाप्त करने की माँग की है। उन्होंने अपनी इसी याचिका में यह भी कहा है कि यदि इन आधारहीन, अनुचित, अतार्किक और असंवैधानिक अधिनियमों को समाप्त नहीं किया जा सकता है तो इन प्रावधानों का लाभ उन राज्यों में हिन्दुओं को भी मिलना चाहिए जहाँ कि वे ‘अल्पसंख्यक’ हैं।

इस याचिका में संविधान में एक विशिष्ट सन्दर्भ में प्रयुक्त अल्पसंख्यक शब्द को परिभाषित करने और उसकी सुस्पष्ट निर्देशिका/नियमावली बनाने की न्यायसंगत और समीचीन माँग की गई है। दरअसल, संविधान के अनुच्छेद 29, 30 और 350 में अल्पसंख्यक शब्द प्रयुक्त हुआ है। लेकिन वहाँ इसकी व्याख्या नहीं की गई है। इसका फायदा उठाते हुए कॉन्ग्रेस सरकार ने सन् 1992 में अल्पसंख्यक आयोग के गठन के समय वोटबैंक की मनमानी राजनीति की।

अल्पसंख्यक और भाषाई अल्पसंख्यकों की प्रचलित परिभाषा पर सवाल उठाते हुए अश्विनी उपाध्याय कहते हैं कि प्रचलित परिभाषा के अनुसार तो आज देश में सैकड़ों धार्मिक अल्पसंख्यक समूह और हजारों भाषाई अल्पसंख्यक समूह होने चाहिए। लेकिन यह दर्जा मुट्ठीभर समुदायों को ही क्यों दिया गया है? क्या यह सांप्रदायिक तुष्टिकरण की राजनीति का नायाब उदाहरण नहीं है? राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के सेक्शन 2(सी) के तहत मुस्लिम, सिख, बौद्ध, पारसी और ईसाई समुदायों को अल्पसंख्यक माना गया है। सन् 2014 में जैन समुदाय को भी अल्पसंख्यक का दर्जा दे दिया गया था।

इस याचिका के सन्दर्भ में उच्चतम न्यायालय में अपना शपथ-पत्र दायर करते हुए भारत सरकार के अल्पसंख्यक मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि अल्पसंख्यक का दर्जा देने का अधिकार सिर्फ केंद्र सरकार को ही नहीं है; बल्कि राज्य सरकार भी किसी समुदाय को उसकी संख्या और सामाजिक-सांस्कृतिक स्थिति के आधार पर यह दर्जा दे सकती है।

अल्पसंख्यक मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि 2011 की जनगणना के अनुसार जम्मू-कश्मीर, लक्ष्यद्वीप, पंजाब, मिजोरम, नागालैंड, मेघालय, मणिपुर,अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख जैसे राज्यों/केन्द्रशासित प्रदेशों में हिन्दुओं की संख्या काफी कम है। अतः वे अल्पसंख्यक होने की पात्रता को पूरा करते हैं। सम्बंधित राज्य सरकार चाहें तो अपनी भौगोलिक सीमा में उन्हें अल्पसंख्यक घोषित करते हुए विशेषाधिकार और संरक्षण प्रदान कर सकती हैं। महाराष्ट्र सरकार ने यहूदियों को अपने राज्य में अल्पसंख्यक का दर्जा देकर इसकी शुरुआत भी कर दी है। इसी तरह गुजरात सरकार ने भी अपने यहाँ जैन समुदाय को अल्पसंख्यक का दर्जा दिया है।

उपरोक्त पृष्ठभूमि में ‘अल्पसंख्यक’ की अधिक समावेशी और तर्कसंगत परिभाषा देते हुए व्यापक नियमावली बनाया जाना जरूरी है, ताकि केंद्र/राज्य अपनी मनमानी करते हुए इस प्रावधान का दुरुपयोग न कर सकें। अश्विनी उपाध्याय ने यह याचिका दायर करते हुए ‘टीएमए पाई फाउंडेशन बनाम यूनियन ऑफ़ इण्डिया’ मामले में उच्चतम न्यायालय की 11 सदस्यीय संविधान पीठ के 2003 में दिए गए ऐतिहासिक निर्णय को आधार बनाया है।

इस निर्णय में माननीय उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि धार्मिक या भाषाई अल्पसंख्यक का निर्धारण करने वाली इकाई केवल राज्य हो सकती है। यहाँ तक कि अल्पसंख्यकों से सम्बंधित केन्द्रीय कानून बनाने के लिए भी इकाई राज्य होंगे, न कि सम्पूर्ण देश होगा। इसलिए धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों का नाम-निर्धारण राज्यों की जनसंख्या के आधार पर अर्थात् राज्य विशेष को इकाई मानकर उसके आधार पर होना चाहिए। यह निर्णय अत्यंत महत्वपूर्ण है।

यह रोचक किन्तु विचित्र ही है कि भारत में रहने वाले मुसलमानों की संख्या (19.4 करोड़) पाकिस्तान (18.4) से अधिक है। फिर वे अल्पसंख्यक क्यों और कैसे हैं; यह विचारणीय प्रश्न है।

मई 2014 में अल्पसंख्यक मामले मंत्रालय का कार्यभार संभालते समय नजमा हेपतुल्ला द्वारा दिया गया बयान अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने तब कहा था कि भारत में मुस्लिम इतनी बड़ी संख्या में हैं कि उन्हें अल्पसंख्यक नहीं कहा जा सकता है। इस सन्दर्भ में संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा दी गयी ‘अल्पसंख्यक’ की परिभाषा उल्लेखनीय है।

संयुक्त राष्ट्र संघ के अनुसार-“ऐसा समुदाय जिसका सामाजिक, आर्थिक तथा राजनीतिक रूप से कोई प्रभाव न हो और जिसकी आबादी नगण्य हो,उसे अल्पसंख्यक कहा जाएगा।” इसी प्रकार भारतीय संविधान में अल्पसंख्यक शब्द का उल्लेख करते समय विलुप्तप्रायः या संकटग्रस्त समुदायों को अपने धर्म और रीति-रिवाजों के पालन हेतु सुरक्षा और संरक्षण देने की बात की गई है।

संविधान में किसी भी समुदाय को कम या अधिक अधिकार देने की बात नहीं की गई है। उसमें स्पष्ट तौर पर सभी समुदायों को समान अधिकार देने की बात की गई है। लेकिन उपरोक्त दो अधिनियमों में संविधान की भावना से इतर मनमाने ढंग से समुदाय विशेष को अल्पसंख्यक का दर्जा देकर विशेष सुविधाएँ, अधिकार और वरीयता देने की गलत परम्परा चल निकली है। गौरतलब यह है कि संयुक्त राष्ट्र की परिभाषा और संविधान की भावना के अनुसार क्या मुस्लिम समुदाय अल्पसंख्यक का दर्जा पाने का अधिकारी है?

माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा उपरोक्त तथ्यों का गंभीर संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम-1992 और अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान अधिनियम-2005 के प्रावधानों के दुरुपयोग को रोकने की अनिवार्य पहल करनी चाहिए। केंद्र सरकार का शपथ-पत्र इस दिशा में एक विकल्प प्रस्तावित करता है।

राज्य सरकारों द्वारा अपने राज्य की भौगोलिक सीमा में धार्मिक अल्पसंख्यकों की पहचान और नाम-निर्धारण करके इस ऐतिहासिक अन्याय का शमन किया जा सकता है। अभी तक राज्य विशेष में संख्या की दृष्टि से जो बहुसंख्यक हैं, वे राज्य और केंद्र सरकारों की योजनाओं में अल्पसंख्यक रहे हैं। लेकिन समस्या के पूर्ण समाधान के लिए अल्पसंख्यक समुदायों को परिभाषित करने और उन्हें यह दर्जा देने और इसके प्रावधानों के तहत मिलने वाले विशेषाधिकारों और संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए न्यायालय द्वारा एक औचित्यपूर्ण, तार्किक और स्पष्ट नियमावली और दिशा-निर्देशिका बनाया जाना जरूरी है।

कुछ लोगों द्वारा जिलों की जनसंख्या को आधार/इकाई बनाकर जिला स्तर पर पर अल्पसंख्यक का दर्जा देने की भी बात की जा रही है। इससे समस्या खत्म नहीं होगी; बल्कि काफी अराजकता और अव्यवस्था फ़ैल जाएगी।

भारत विविधतापूर्ण देश है। इसमें भाषिक विविधता तो बेहिसाब है। इसीलिए ‘कोस-कोस पर पानी बदले, चार कोस पर वाणी’ कहा जाता है। इसलिए राज्य की जनसंख्या को आधार/इकाई बनाकर राज्य स्तर पर अल्पसंख्यक का दर्जा देने का प्रस्ताव अधिक तार्किक और समीचीन है।

संख्या के अलावा सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन और शासन-प्रशासन में भागीदारी और उपस्थिति को भी आधार बनाया जाना चाहिए। लक्ष्यद्वीप (96.2%), असम (34.2%), पश्चिम बंगाल (27%), केरल (26.6%), उत्तर प्रदेश (19.3%) और बिहार (17%) आदि में मुस्लिम समुदाय की आबादी और भागीदारी/हिस्सेदारी जरा भी कमतर नहीं है। यहाँ के विधान मंडलों से लेकर नौकरशाही और सार्वजनिक जीवन के विविध क्षेत्रों में उनकी समुचित भागीदारी है।

असम, पश्चिम बंगाल जैसे कुछ राज्यों में तो मुस्लिम तुष्टिकरण और संख्या से अधिक हिस्सेदारी होने के कारण गैर-मुस्लिम समुदाय भयभीत और असुरक्षित हैं। इलाहबाद उच्च न्यायालय ने अपने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा था कि मुस्लिम राज्य में अल्पसंख्यक नहीं हैं क्योंकि उनकी संख्या बहुत अधिक है और वे ताकतवर भी हैं। उन्हें अस्तित्वसंकट भी नहीं है।

अल्पसंख्यक की परिभाषा और नीति-निर्देशक सिद्धांत बनाते समय संविधान की मूल भावना का ध्यान रखा जाना अत्यंत आवश्यक है। ध्यातव्य है कि कम संख्या अल्पसंख्यक होने का एक आधार है, किन्तु एकमात्र आधार नहीं है। जिस प्रकार अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्गों के निर्धारण में जाति विशेष की स्थिति अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग हो जाती है, ठीक उसी प्रकार अल्पसंख्यकों के मामले में स्थिति-परिवर्तन क्यों नहीं होता?

माननीय उच्चतम न्यायालय को अपने निर्णय में इन सभी विसंगतियों और विडम्बनाओं का सटीक समाधान प्रस्तावित करने की आवश्यकता है, ताकि देश में सबका साथ और सबका विकास हो सके। साथ ही, संवैधानिक प्रावधानों का प्रयोग सम्बंधित समुदायों की समुचित भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए हो, न कि समुदाय विशेष के तुष्टिकरण और वोटबैंक की राजनीति के लिए हो। निश्चय ही, जम्मू-कश्मीर इन प्रावधानों के दुरुपयोग का सर्वप्रमुख उदाहरण है।