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HDFC की जिस ब्रांच में हुई थी इफ्तार और नमाज, वहाँ बंद हुआ सरकारी खाता: बाराबंकी ब्रांच पर PM योजना में लापरवाही का आरोप

UP के बाराबंकी में HDFC बैंक की जिस ब्रांच में रोजा इफ्तारी और नमाज करवाई गई थी, वहाँ से एक सरकारी खाते को हटा लिया गया है। यह खाता नगर विकास अभिकरण डूडा की ओर से संचालित योजना जिला नगरीय गरीबी उन्मूलन का है। इस खाते को 20 करोड़ रुपए से अधिक का बताया जा रहा है। ब्रांच पर प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना भी सही ढंग से संचालित न करने का आरोप है। बैंक के ब्रांच मैनेजर जहीर अब्बास हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नगर विकास अभिकरण ने अब बैंक ऑफ़ इंडिया में खाता खुलवा लिया है। खाते को बदलने की वजह बैंक द्वारा लापरवाही बरतना बताया गया है। इसकी पुष्टि डूडा के परियोजना अधिकारी सौरभ त्रिपाठी ने की है।

नगर विकास अभिकरण डूडा के इस खाते में निर्माण कार्यों के पैसे का आदान-प्रदान होता है। इस खाते को डीएम के साथ मुख्य विकास अधिकारी और डूडा के PO एक साथ संचलित करते हैं। माना जा रहा है कि इस कदम से HDFC बैंक की पैसार बाराबंकी ब्रांच के आर्थिक हालात पर नकारात्मक असर पड़ेगा।

पिछले महीने 19 अप्रैल को बाराबंकी की CDO (मुख्य विकास अधिकारी) एकता सिंह ने डूडा के प्रोजेक्ट ऑफिसर सौरभ त्रिपाठी के साथ बैंक का निरीक्षण किया था। निरीक्षण की वजह बैंक की ब्रांच पर पटरी के 44 दुकानदारों का महीने भर पहले स्वीकृत लोन न देने और उनकी फ़ाइलों को दबा कर रखने का आरोप था। अधिकारियों के दौरे और निर्देश के बाद बैंक ने कुछ पटरी दुकानदारों को लोन दिया। इन कार्यों की प्रगति अधिकारियों को संतोषजनक नहीं लगी। बताया जा रहा है कि यही वजह बैंक से खाते को हटाने की बनी है।

इस बीच बैंक परिसर में हुई इफ्तार पार्टी के चलते HDFC का यह बाराबंकी ब्रांच नए विवादों में घिर गया था। शुक्रवार (22 अप्रैल, 2022) को बैंक में इफ्तारी हुई थी। इसमें समाजवादी पार्टी के नेता सहित कई अन्य स्थानीय मुस्लिम भी शामिल हुए थे। बैंक ने उन्हें उपहार भी दिए थे। बैंक मैनेजर जहीर अब्बास ने इफ्तारी को शवाब बताते हुए इसे इस्लाम के मुताबिक सही करार दिया था। तब हिन्दू संगठनों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए प्रशासन से कार्रवाई की माँग की थी।

बैंक के अंदर इफ्तारी पर HDFC मुख्यालय का जवाब

ऑपइंडिया ने HDFC बैंक के मुंबई मुख्यालय स्थित कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन विभाग के प्रमुख रोहित पांचाल से इस मुद्दे पर 26 अप्रैल 2022 को बात की थी। इस बातचीत में ऑपइंडिया के सवाल थे:

  • क्या इफ्तारी करवाने की अनुमति स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों से ली गई थी?
  • क्या इफ्तारी HDFC बैंक की स्थाई परम्परा है और देश की हर ब्रांच में होती है?
  • यदि बैंक में मजहबी कार्यक्रम के दौरान कोई अन्य धार्मिक संगठन विरोध प्रदर्शन करता तो उन हालातों का जिम्मेदार कौन होता?
  • यदि बैंक परिसर में इतनी भीड़ के दौरान कैश आदि गायब हो जाता तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होती?
  • यदि बैंक टाइम खत्म होने के बाद बेहद जरूरतमंद को भी पैसे डालने या निकालने के लिए बैंक में इंट्री नहीं मिलती तो किस नियम से बैंक समय खत्म होने के बाद इतनी भीड़ को अंदर बुला कर इफ्तारी करवाई गई?
  • यदि ब्रांच मैनेजर जहीर अब्बास का निर्णय सही है तो क्या आप सभी सीनियर अधिकारी उनके साथ उनके पक्ष में खड़े हैं?
  • यदि उनका निर्णय गलत है तो कौन सी कार्रवाई संभावित है?
  • क्या आप कुछ अन्य फोटो और वीडियो भी भेज सकते हैं, जिसमें साधु-संतों या पादरी आदि को बुला कर कोई धार्मिक कार्यक्रम करवाया जा रहा हो?

उपरोक्त सभी सवालों पर रोहित पांचाल ने कहा, “बैंक किसी भी धार्मिक/मजहबी रीति रिवाज नहीं बल्कि कॉर्पोरेट नियमों से संचालित है। हम पूरे हालात पर नजर बनाए हुए हैं। अभी तक मैनेजर या आयोजकों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। हम प्रयास करेंगे कि आगे से ऐसे हालत न बनें। यदि इस मामले में कोई कार्रवाई होती है तो हम उस से आपको अवगत करवाएँगे।” बाकी सवालों पर रोहित खामोश रहे।

18 साल की सोनम शुक्ला, बोरे में मिली लाश… ट्यूशन के नाम पर गई थी ‘बॉयफ्रेंड’ मोहम्मद अंसारी के घर

मुंबई पुलिस ने NEET की तैयारी कर रही 18 वर्षीय छात्रा सोनम शुक्ला की निर्मम हत्या के मामले में मोहम्मद अंसारी नाम के 23 वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़िता सोनम सोमवार (25 अप्रैल, 2022) शाम 4 बजे ट्यूशन के लिए घर से निकलने के बाद लापता हो गई थी। सोनम मुंबई के गोरेगाँव वेस्ट इलाके के प्रेमनगर की रहने वाली थीं। पुलिस के अनुसार, किशोरी अपनी ट्यूशन नहीं गई और रात करीब 9 बजे वहाँ से निकलने से पहले अपनी एक महिला मित्र के घर चली गई।

जब सोनम शुक्ला रात 9:30 बजे तक घर नहीं लौटी, तो चिंतित पिता ने उसका पता लगाने के लिए उसे फोन किया। पीड़िता के पिता ने बताया, “मेरी बेटी ने मुझसे कहा कि वह कुछ समय में घर पहुँच जाएगी क्योंकि वह अपने दोस्त के घर पर है। लेकिन जब वह रात 11.30 बजे तक नहीं पहुँची, तो मैं चिंतित हो गया और फिर से उसे कॉल लगाने की कोशिश की।”

उन्होंने बताया कि सम्भवतः रात करीब 11 बजे ही किशोरी का फोन बंद हो गया था। वहीं, 18 वर्षीय, स्नातक छात्रा, बेकरी मालिक मोहम्मद अंसारी के घर गई थी। क्योंकि, उस समय उसके अम्मी-अब्बू घर पर नहीं थे।

अंसारी के साथ कथित तौर पर रिलेशनशिप में रहीं सोनम शुक्ला की उनसे तीखी नोकझोंक हुई। इसके बाद आरोपित ने उसका तार से तब तक गला घोंट दिया जब तक कि पीड़िता की मौत नहीं हो गई। फिर उसने उसके हाथ और पैर बाँध दिए, उसके शव को एक बोरे में भर दिया और फिर उसे मलाड पश्चिम में एक नाले के पास फेंक दिया।

आरोपित अंसारी को उम्मीद थी कि शव को मछलियाँ खा जाएँगी। बेटी के न मिलने पर सोनम के पिता ने गोरेगाँव पश्चिम पुलिस में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। वहीं पुलिस को सोनम का क्षत-विक्षत शव गुरुवार (28 अप्रैल, 2022) को ही बरामद हो गया था, जब वह वर्सोवा के बरिस्ता लेन में किनारे लग गया था।

गौरतलब है कि डीसीपी (जोन IX) मंजूनाथ सिंगे ने मामले का संज्ञान लिया था और जाँच शुरू की। वर्सोवा पुलिस ने अपने व्हाट्सएप ग्रुप पर पीड़िता की तस्वीर अपलोड की और पता चला कि गोरेगाँव पश्चिम पुलिस स्टेशन में उसके माता-पिता ने एक लड़की के लापता होने की सूचना दी थी। पुलिस ने सोनम के माता-पिता को सूचित किया, जिन्होंने पहले गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई थी।

वहीं सोनम के पिता ने इस पूरे मामले में अफसोस जताते हुए कहा, “मुझे पता चला कि मेरी बेटी की हत्या कर दी गई थी जब पुलिस ने एक लड़की के क्षत-विक्षत शरीर की तस्वीर भेजी थी, लेकिन वह उसकी पहचान करने की स्थिति में नहीं थे। इसलिए, हमें कूपर अस्पताल पहुँचने के लिए कहा गया जहाँ हमने उसकी पहचान की। पुलिस ने कहा कि उसका शरीर एक बोरे में भरा हुआ था और वर्सोवा के पास राख में पड़ा मिला था।”

मामले में बात करते हुए वर्सोवा पुलिस के एक अधिकारी ने कहा कि उन्हें स्थानीय सूत्रों से अंसारी के बारे में पता चला था। जिसे गिरफ्तार कर लिया गया है। अधिकारी ने कहा कि पूछताछ के दौरान ही आरोपित अंसारी टूट गया और उसने अपना अपराध कबूल कर लिया है।

दक्षिण भारतीय फिल्मों की जरूरत से ज्यादा तारीफ: नवाजुद्दीन सिद्दीकी, इनकी फिल्म हीरोपंती-2 को सिर्फ 2.7 रेटिंग, कमाई भी फुस्स

दक्षिण भारत की फिल्मों पुष्पा, KGF-2 और RRR को मिल रही सफलता के मुद्दे पर बॉलीवुड एक्टर नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने बयान दिया है। उन्होंने इन फिल्मों को जरूरत से ज्यादा तारीफ मिलने की बात कही है। साथ ही उन्होंने कहा कि वो डब फिल्मों को नहीं देखते हैं।

अपने इंटरव्यू में नवाजुद्दीन ने कहा, “कोई फिल्म जब भी हिट होती है और बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन करने लगती है, तब उस फिल्म की लोग इतनी तारीफ़ करने लगते हैं, जिस योग्य वो होती भी नहीं है। इसी तरफ जब कोई फिल्म अच्छा नहीं कर पाती, तब उसको इतना बुरा बताया जाने लगता है, जितनी वो वास्तव में होती नहीं है।”

नहीं देखी पुष्पा, KGF-2 या RRR

पुष्पा, KGF-2 या RRR जैसी फिल्मों को मिल रही सफलता के सवाल पर सिद्दीकी ने कहा, “सच बताऊँ तो इसमें से मैंने कोई भी फिल्म नहीं देखी। जब मैंने देखा ही नहीं तो मैं ये नहीं बता सकता कि ये कैसी फ़िल्में थीं। मुझे इंग्लिश ज्यादा समझ में नहीं आती लेकिन जब मैं इंग्लिश फ़िल्में देखता हूँ तो मुझे समझ में आती हैं। तब मैं उनकी भावनाओं से जुड़ जाता हूँ। लेकिन कोई और भाषा में बात कर रहा हो और वो डबिंग हो तो मैं वो फिल्म नहीं देख सकता। यही मेरा नजरिया है। मैंने खुद एक तमिल फिल्म की थी, जिसमें मुझे पढ़ कर बोलना पड़ा था। उस फिल्म को करके मुझे अंदर से ग्लानि महसूस हुई थी क्योकि मैंने वो फिल्म की थी, जिसे मैं खुद ही समझ नहीं पा रहा था।”

दक्षिण भारतीय फिल्मों को मिल रही लोकप्रियता और सफलता के सवाल पर नवाजुद्दीन ने कहा, “मैं एक अभिनेता हूँ और मैं एक्टिंग देखता हूँ। डब फ़िल्में मैं नहीं देखता। बोलो आप और आवाज किसी और की हो, मैं ऐसा नहीं देख सकता। जिन दक्षिण भारतीय फिल्मों की काफी चर्चा हो रही है, मैंने उन्हें देखा नहीं है। बाकी लोग देख रहे हैं। उनको मजा आ रहा है, ये अच्छी बात है।”

न जाने क्यों चलता है बॉयकॉट का ट्रेंड

नवाजुद्दीन ने आगे कहा, “मुझे ये नहीं पता कि कुछ लोग मुझे ट्रोल क्यों कर रहे हैं। क्या उनको मज़ा आ रहा या कोई और बात है? जब देखो बॉयकॉट शुरू हो जाता है। ये क्यों हो रहा है, ये मुझे नहीं पता। फिल्मों के प्रदर्शन पर लोगों के हर हफ्ते विचार बदलते रहते हैं। जो अच्छा सिनेमा है, उसकी तारीफ करिए लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि बाकियों की बुराई करो।”

हिंदी सिनेमा में कुछ बदलाव की माँग पर नवाजुद्दीन को सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जा रहा है। इस पर उन्होंने कहा, “मेरे द्वारा सिनेमा में बदलाव की माँग पर बहुत सारे लोग मुझे गालियाँ दे रहे हैं। हिंदी फिल्मों में हिंदी प्रयोग करने की माँग पर मुझे ट्रोल किया गया। मुझे फिल्मों में भी बेवजह गाली-गलौज पसंद नहीं है। जब किसी कैरेक्टर को निगेटिव दिखाने के लिए गाली जरूरी होती है, तब उसे प्रयोग करना ही पड़ता है। इसका ध्यान मैं अपने व्यक्तिगत जीवन में भी रखता हूँ।”

हीरोपंती 2 बॉक्स ऑफिस और रेटिंग दोनों में फ्लॉप

‘हीरोपंती-2’ में नवाजुद्दीन सिद्दीकी भी हैं। यह फिल्म 29 अप्रैल को रिलीज हुई है। इसे IMDb पर सिर्फ 2.7 रेटिंग मिली है। पहले और दूसरे दिन (शुक्रवार-शनिवार) का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन 6.5 करोड़ और 4.5 करोड़ रहा है।

साउथ की फिल्मों और उनकी सफलता को लेकर नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने जिस तरह की प्रतिक्रिया दी है, अब जरा उसकी सच्चाई भी जान लें। KGF-2 की बात करें तो रिलीज के तीसरे सप्ताह में भी यह हिंदी फिल्मों को पानी पिला रही है। शुक्रवार को इसकी कमाई 4 करोड़ रुपए हुई। 1000 करोड़ रुपए की कमाई करके इसने फिल्म इंडस्ट्री के कई रिकॉर्ड तोड़ डाले हैं।

‘हीरोपंती-2’ ने रिलीज के बाद 2 दिन में 10-11 करोड़ रुपए का बिजनेस किया है। अगर रिलीज के बाद 2 दिनों का ही आँकड़ा देखा जाए तो KGF-2 दस कदम आगे (10 गुना ज्यादा कमाई) है ‘हीरोपंती-2’ से। अभिनेता यश की फिल्म ‘KGF Chapter 2’ ने दो दिनों में दुनिया भर में 304.62 करोड़ रुपए (सभी भाषाओं में) कमा लिए थे। KGF-2 के हिंदी वर्जन की बात करें तो रिलीज के दो दिनों के भीतर इसकी नेट कमाई 100.74 करोड़ रुपए हो गई थी।

पादरी को 18 साल की जेल, 4 लड़कों का किया था रेप: विदेश नहीं, केरल के ईसाई संस्थान की घटना

केरल की एक अदालत ने एक पादरी थॉमस को 4 नाबालिग बच्चों के साथ अप्राकृतिक कुकर्म के आरोप में 18 साल की सजा सुनाई है। यह घटना 5 साल पुरानी है। पादरी का नाम थॉमस परीक्कुलम (Fr Thomas Parekkulam) है। पादरी पर कुल 4 केस दर्ज हैं। चारो मामलों में 1 लाख रुपए जुर्माना भी भरने का आदेश हुआ है। सजा शुक्रवार (29 अप्रैल, 2022) को सुनाई गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना केरल के कोल्लम की है। पादरी के यौन शोषण से पीड़ित लड़के 16 वर्ष की आयु के थे। आरोपित पादरी की उम्र 35 साल बताई जा रही है। वह चेन्नई के SDM माइनर सेमिनरी संस्थान से जुड़ा हुआ था। इसी संस्थान के पुल्लामाला क्षेत्र में पादरी के तौर पर कार्यरत था। पीड़ित लड़के इसी संस्थान के छात्र थे।

आरोपित पादरी पर धारा 377 के साथ पॉक्सो एक्ट में भी केस कोल्लम के पुथूर थाने में दर्ज हुआ था। पादरी के खिलाफ तिरुवनन्तपुरम की चाइल्ड वेलफेयर कमेटी ने केस दर्ज करवाया था। अभियोजन पक्ष के मुताबिक गिरफ्तारी के बाद पादरी पुलिस की कस्टडी से भी भाग निकला था। हालाँकि, बाद में उसे चेन्नई से पकड़ लिया गया था।

पादरी को सजा कोल्लम के एडिशनल जिला और सत्र न्यायाधीश के एन सुजीत ने सुनाया है। अदालत ने पीड़ित छात्रों के शारीरिक और मानसिक प्रताड़ित को देखते हुए DLSA (जिला कानूनी सेवा अथॉरिटी) से पीड़ित छात्रों को मुआवजा भी देने के लिए कहा है।

कोई मुस्लिम महिला नहीं चाहती कि उसका शौहर 3 और बीवियाँ घर लाए: UCC पर ओवैसी का विरोध, CM सरमा बोले- यह जरूरी

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (MHA Amit Shah) के बयान के बाद समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर बहस तेज हो गई है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने शनिवार (30 अप्रैल 2022) को कहा कि देश में आवश्यकता नहीं है। वहीं, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने कहा कि यह मुद्दा मुस्लिम महिलाओं से सीधा जुड़ा हुआ है, क्योंकि कोई मुस्लिम महिला नहीं चाहती कि उसका शौहर घर ने तीन और बीवी लेकर आए।

ओवैसी ने कहा, “बेरोजगारी और महंगाई बढ़ रही है और आप समान नागरिक संहिता के बारे में चिंतित हैं। हम इसके खिलाफ हैं। विधि आयोग ने भी कहा है कि भारत में यूसीसी की जरूरत नहीं है।” उन्होंने कहा कि जब भाजपा शासित राज्यों ने इसे लागू करने की इच्छा व्यक्त की है तो इसे पूरे देश में लागू करे की जरूरत नहीं है।

गोवा में लागू समान नागरिक संहिता की बात करते हुए ओवैसी ने कहा कि वहाँ का कानून एक हिंदू पुरुष को दूसरी पत्नी की अनुमति देता है। कानून के अनुसार, अगर पहली पत्नी 30 वर्ष की हो गई है और उसका कोई बेटा नहीं है तो उसका पति दूसरी शादी कर सकता है। उन्होंने कहा, “हिंदू अविभाजित परिवार की तरह मुस्लिमों, सिखों और ईसाइयों को कर में छूट क्यों नहीं है?”

वहीं, असम के सीएम सरमा ने कहा कि यूसीसी देश के लिए आवश्यक है। यह सभी मुस्लिम महिलाओं के लिए एक बड़ा मुद्दा है। उन्होंने कहा, “हर कोई यूसीसी का समर्थन करता है। कोई भी मुस्लिम महिला नहीं चाहती कि उसका शौहर तीन और बीवियाँ लेकर घर आए… तीन निकाह करे। ऐसा कौन चाहेगा? यह मेरा मुद्दा नहीं है, यह मुस्लिम माताओं और महिलाओं का मुद्दा है।”

क्या है समान नागरिक संहिता?

समान नागरिक संहिता एक ऐसा कानून है, जो देश के हर समुदाय पर समान रूप लागू होता है। व्यक्ति चाहे किसी भी धर्म का हो, जाति का हो या पंथ का हो, सबके लिए एक ही कानून होगा। अंग्रेजों ने आपराधिक और राजस्व से जुड़े कानूनों को भारतीय दंड संहिता (IPC) 1860, भारतीय साक्ष्य अधिनियम (IEA) 1872, भारतीय अनुबंध अधिनियम (ICA) 1872, विशिष्ट राहत अधिनियम 1877 आदि के माध्यम से सारे समुदायों पर लागू किया, लेकिन शादी-विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति, गोद लेने आदि से जुड़े मसलों को धार्मिक समूहों के लिए उनकी मान्यताओं के आधार पर छोड़ दिया।

आजादी के बाद देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने हिंदुओं के पर्सनल लॉ को खत्म कर दिया, लेकिन मुस्लिमों के कानून को ज्यों का त्यों बनाए रखा। हिंदुओं की धार्मिक प्रथाओं के तहत जारी कानूनों को निरस्त कर हिंदू कोड बिल के जरिए हिंदू विवाह अधिनियम 1955, हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956, हिंदू नाबालिग एवं अभिभावक अधिनियम 1956, हिंदू दत्तक ग्रहण और रखरखाव अधिनियम 1956 लागू कर दिया गया। ये कानून हिंदू, बौद्ध, जैन, सिख आदि पर समान रूप से लागू होते हैं।

मुस्लिमों का कानून पर्सनल कानून (शरिया), 1937 के तहत संचालित होता है। इसमें मुस्लिमों के निकाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, संपत्ति का अधिकार, बच्चा गोद लेना आदि आता है, जो इस्लामी शरिया कानून के तहत संचालित होते हैं। अगर समान नागरिक संहिता लागू होता है तो मुस्लिमों के निम्नलिखित कानून बदल जाएँगे।

समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद मुस्लिमों की चार शादियों पर रोक लग जाएगी। पत्नी को तलाक के बाद उचित हर्जाना या गुजारा भत्ता देना होगा, संपत्तियों में बेटियों को बराबर का अधिकार देना होगा, गोद लिए बच्चों को अपनी संतान का दर्जा देते हुए संपत्ति में वारिस बनाना होगा और शरिया कोर्ट का अंत हो जाएगा।

उन्नाव में छत से लटकती मिली नर्स की लाश: परिवार ने रेप-हत्या का लगाया आरोप, पुलिस का इनकार, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट भी आई

उत्तर प्रदेश के उन्नाव (Unnao, Uttar Pradesh) में एक निजी अस्पताल में 18 वर्षीया नर्स के साथ नौकरी के पहले ही दिन गैंगरेप करने के बाद हत्या का मामला झूठा निकला है। नर्स का शव शनिवार (30 अप्रैल 2022) को अस्पताल की छत से लटका हुआ मिला। इस मामले में जहाँ मामला दर्ज कर एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया था। वहीं आज (1 मई, 2022) मामले में खुलासा करते हुए उन्नाव के एडिशनल एसपी शशि शेखर सिंह ने रेप और हत्या से इनकार किया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने मौत का कारण हैंगिंग अर्थात लटकना बताया।

बता दें कि घटना जिले के बांगरमऊ कोतवाली के दुल्लापुरवा गाँव की है। यहाँ हरदोई-उन्नाव मार्ग पर पाँच दिन पहले यानी 25 अप्रैल को न्यू जीवन अस्पताल नाम से एक निजी हॉस्पिटल खोला गया था। इस अस्पताल में आसीवन थाने के एक गाँव की युवती ने नर्स के रूप में शुक्रवार (29 अप्रैल 2022) को काम शुरू किया था। इसके पहले वह सफीपुर के एक अस्पताल में वह लगभग डेढ़ साल से नर्स के रूप में काम कर रही थी।

शुक्रवार को युवती की नौकरी का पहला दिन था। बताया जा रहा है कि उस दिन रात होने पर अस्पताल के संचालक नूर आलम ने युवती को अस्पताल में ही रुकने के लिए कहा। इसके बाद शुरूआती दौर में रात में नूर आलम सहित तीन लोगों द्वारा उसके साथ रेप करने की खबर सामने आई थी। कहा जा रहा था कि रेप करने के बाद आरोपितों ने नर्स के गले में रस्सी बाँधकर छत से नीचे लटका दिया। जिसे अब पुलिस ने ख़ारिज करते हुए मौत का कारण छत से लटकना बताया है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में रेप या गैंगरेप की पुष्टि नहीं हुई है।

गौरतलब है कि अगले दिन युवती की छत से लटकी लाश को देखकर लोगों में हड़कंप मच गया। इसके बाद लोगों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुँचकर शव को नीचे उतारा। युवती के मुँह पर मास्क लगा था और उसके हाथ में एक रुमाल था। युवती अस्पताल के पास में ही किराए का कमरा लेकर रहती थी।

इस मामले में लड़की के परिजनों ने अस्पताल के संचालक नूर आलम और चांद आलम सहित तीन लोगों के खिलाफ रेप और हत्या का मुकदमा दर्ज कराया है। उन्नाव के ASP शशि शेखर सिंह ने बताया था कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। आरोपितों की तलाश की जा रही है। वहीं अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर गैंगरेप के आरोपों को नकार दिया गया है।

नोट: यह खबर उन्नाव पुलिस के पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अपडेट के आधार पर नई सूचनाओं को ध्यान में रखते हुए अपडेट की गई है।

मुस्लिम होटलों में हिंदू मर्दों को नपुंसक और महिलाओं को बांझ बनाने की दवा: पूर्व कॉन्ग्रेस नेता, केरल पुलिस ने किया गिरफ्तार

केरल पूर्व मुख्य सचेतक और कॉन्ग्रेस से पूर्व विधायक पीसी जॉर्ज (PC George) को पुलिस ने रविवार (1 मई 2022) को गिरफ्तार कर लिया। जॉर्ज ने कहा था कि राज्य में मुस्लिमों के रेस्टोरेंट में मिलने वाली चाय एवं ड्रिंक्स में नपुंसक बनाने वाली दवा मिली होती है। उन्होंने मुस्लिमों का बहिष्कार करने की भी अपील की थी। उनके इस बयान के बाद शनिवार (30 अप्रैल 2022) को उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।

जॉर्ज पर एक हिंदू सम्मेलन में मुस्लिम भावनाओं को आहत करने के आरोप में उनके घर से गिरफ्तार किया गया है। जॉर्ज के खिलाफ धारा 295A के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसमें कहा गया है कि वे समाज में विभाजन पैदा करने और सांप्रदायिक नफरत फैलाने के प्रयास कर रहे हैं। उनके खिलाफ गैर-जमानती धारा लगाई गई है। 

जॉर्ज ने कहा कि मुस्लिम समुदाय के लोग गैर-मुस्लिम इलाकों में व्यवसाय शुरू करते हैं और उन्हीं से पैसे कमाते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की थी कि वे ऐसे मुस्लिम कारोबारियों का बहिष्कार करें। उन्होंने कहा, “मुस्लिम खाने में तीन बार थूकते हैं। उनके मौलाना कहते हैं कि थूक इत्र हैं। हम उनका खाना क्यों खाएँ?”

जॉर्ज ने कहा कि लोगों को मुस्लिमों द्वारा चलाए जाने वाले रेस्तरां में बचना चाहिए, क्योंकि वे खाने-पीने के सामानों में ‘नपुंसकता पैदा करने वाले ड्रॉप’ का इस्तेमाल करते हैं। वे पुरुषों को नपुंसक और महिलाओं बांझ बनाकर वे देश पर कब्जा करने की इच्छा पाल कर बैठे हैं। इसलिए हर हिंदू और ईसाई महिला को कम-से-कम चार बच्चे पैदा करना चाहिए।

देश में बढ़ रहे जनसंख्या असंतुलन को लेकर उन्होंने कहा कि हिंदू और ईसाई महिलाएँ अधिक बच्चों को जन्म देने के प्रति अनिच्छुक होती हैं, लेकिन मुस्लिम महिलाएँ इस काम को बहुत ईमानदारी के साथ करती हैं। इसके लिए उन्हें बधाई देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके जरिए वे इस हिंदू देश को हथियाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

जॉर्ज ने आगे कहा, “हिंदू नहीं जानते कि इसका जवाब कैसे देना है। वे डर से पीछे हट रहे हैं। जब भी मैं किसी शादी में जाता हूँ तो इस बात को जोड़ों के सामने रखता हूँ। उनमें से कुछ लोग खुशी से मेरे सुझाव पर सहमति जताते हैं।” उन्होंने कहा कि वे हमेशा से भारत को एक हिंदू राष्ट्र के रूप में देखते हैं।

कॉन्ग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार में छह बार के विधायक और पूर्व मुख्य सचेतक रहे जॉर्ज ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) द्वारा शुक्रवार (29 अप्रैल 2022) को आयोजित अनंतपुरी हिंदू महासम्मेलन के दौरान यह बात कही। इस महासम्मेलन में पीसी जॉर्ज को भी वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया था।

विपक्षी दलों का विरोध

जॉर्ज के बयानों के बाद इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IML) के नेता पीके फिरोज ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) की युवा शाखा मुस्लिम यूथ लीग (MUL) ने इस संबंध में डीजीपी को पत्र लिखा था। वहीं, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPM) ने जॉर्ज से बयान वापस लेने और मुस्लिमों से माफी माँगने को कहा था।  

राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता और कॉन्ग्रेस विधायक वीडी सतीशन ने कहा कि जॉर्ज ने यह बयान बयान साम्प्रदायिक भावना भड़काने और समाज में विभाजन पैदा करने के मकसद से दिया है। कॉन्ग्रेस की केरल इकाई ने उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की थी।

कोयंबटूर में ऐसी घटना आई थी सामने

साल 2019 में तमिलनाडु के कोयंबटूर में एक घटना सामने आई थी। उस दौरान तमाम सोशल मीडिया पर दावा किया गया था कि मुस्लिमों के रेस्टोरेंट और होटलों में हिंदुओं और मुस्लिमों के लिए अलग-अलग बर्तनों में बिरयानी पकाई है। दावा किया गया था कि हिंदुओं वाली बिरयानी में नपुंसक बनाने वाली टैबलेट मिलाई जाती है।

उस दौरान कोयंबटूर में रहमान बिस्मिल्लाह के माशा अल्लाह नामक रेस्तरां के ऊपर आरोप लगाते हुए खबर वायरल की गई थी कि इसमें ऐसी ही बिरयानी बेचते हुए पकड़ा गया है। हालाँकि, यह बात भी सामने आई थी कि इस खबर के साथ जो फोटो वायरल की जा रही थी, वह श्रीलंका की थी जो गैरकानूनी दवाओं की खेप पकड़े जाने के दौरान की थी। 

इफ्तार में हिंदुओं को बुलाया और गोमांस परोस दी: BNP के नेताओं ने दी थी पार्टी, माफी भी नहीं माँगी

बांग्लादेश के सिलहट में एक इफ्तार पार्टी में शामिल हुए हिन्दुओं को गोमांस खिलाने की खबर है। इस इफ्तारी में शामिल लोगों को बीफ के अलावा कोई दूसरी चॉइस भी नहीं दी गई। यह घटना सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। मामला गुरुवार (28 अप्रैल 2022) का बताया जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह इफ्तारी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) द्वारा आयोजित की गई थी। इस पार्टी में हिन्दू धर्म के लगभग 20 लोग शामिल थे। इन सभी को बाकी खाने के साथ गोमांस भी परोसा गया।

इफ्तारी में शामिल हिन्दुओं ने इस घटना की निंदा करने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया। BNP के ही एक सदस्य मंटू नाथ ने लिखा, “मैं और बाकी हिन्दू बीफ के अलावा कोई और विकल्प न होने के चलते मुस्लिम कार्यकर्ताओं को बस रोजा तोड़ते देख रहे थे।”

वही BNP के ही एक अन्य हिन्दू नेता कनक कांति दास ने इस इफ्तारी को तमाशा बताया है। उन्होंने लिखा, “आपने इफ्तारी के मज़े लिए और हम हिन्दू बस देखते रहे।” इफ्तारी में बीफ परोसने की घटना को BNP सिलहट ने भी स्वीकार किया लेकिन इसके लिए किसी भी प्रकार की माफ़ी नहीं माँगी।

चिकन बिरयानी में बीफ, दुकानदार गिरफ्तार

एक अन्य घटनाक्रम में बांग्लादेश के पत्रकार सौमिक ने चिकन बिरयानी में गोमांस परोसने वाले दुकानदार की गिरफ्तारी का ट्वीट किया है। अपने ट्वीट में उन्होंने ‘चटगाँव प्रतिदिन’ नाम के अख़बार का स्क्रीनशॉट लगाया है। 28 अप्रैल 2022 की उस खबर में हेडलाइन है, “चटगाँव में हिंदू खरीदार को गोमांस खिलाने के बाद दुकानदार जेल गया।” ट्वीट में पकड़े गए आरोपित का फोटो भी है।

रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश के चटगाँव में सुपन नाम का लड़का अपने जन्मदिन के मौके पर दोस्तों के साथ रेस्टोरेंट में चिकन बिरयानी खाने गया था। दुकान का नाम ‘दुबई रेस्तरां और बिरानी हाउस’ है। वहाँ उसे चिकन बिरयानी में गोमांस भी परोसा गया। इसकी जानकारी होते ही सुपन ने पुलिस को शिकायत दी। पुलिस ने होटल मैनेजर मंज़ूर अहमद को जेल भेज दिया है। इसी केस में अभी 2 आरोपित फरार बताए जा रहे हैं।

पंजाब में मलेरकोटला DC ऑफिस के बाहर फहराया खालिस्तानी झंडा: SFJ आतंकी पन्नू ने की थी अपील, सुरक्षा एजेंसियाँ सतर्क

पंजाब (Punjab) में मुख्यमंत्री भगवंत मान (Bhagwant Mann) के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी (Aam Aadami Party) की सरकार बनने के बाद से वहाँ के हालात बिगड़ते जा रहे हैं। पटियाला में खालिस्तान विरोधी मार्च निकलने के बाद बिगड़े हालात और हुई हिंसा के अगले दिन शनिवार (30 अप्रैल 2022) की रात को मलेरकोटला (Malerkotla) के जिलाधिकारी कार्यालय (DC Office) के सामने खालिस्तान (Khalistan) के झंडे लहरा दिए गए। पंजाब के बदल रहे हालात को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियाँ सतर्क हो गई हैं। वहीं, खुफिया एजेंसियाँ हालिया घटनाओं के लिंक तलाशने की कोशिश कर रही हैं।

हालात को देखते हुए कई शहरों में कर्फ्यू लगाया गया है। इसके बावजूद मलेकोटला के डीसी ऑफिस के बाहर कुछ बदमाशों ने खालिस्तान का झंडा फहरा दिया। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। खालिस्तानी झंडे को देखकर पुलिस अधिकारियों के हाथ-पाँव फूल गए। उन्होंने तत्काल झंडे को हटाया और उपद्रवियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश देनी शुरू कर दी है। संभावित दोषियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस छापेमारी और तलाशी अभियान चला रही है।

हालात को देखते हुए शनिवार को पंजाब सरकार ने तीन बड़े अधिकारियों का स्थानांतरण कर दिया था। पटियाला रेंज के आईजी राकेश अग्रवाल, पटियाला के एसएसपी नानक सिंह और पटियाला के एसपी हरपाल सिंह को हटा दिया गया था। खुफिया एजेंसियाँ और सुरक्षा अधिकारी हाल के दिनों में पंजाब में हुई घटनाओं को आपस जोड़ने और इसके लिए विदेशी मदद की संभावनाओँ पर गौर करते हुए जाँच कर रही हैं।

बता दें कि पिछले सप्ताह चंडीगढ़ के बुड़ैल जेल को उड़ाने की कोशिश की गई थी। इस जेल में कई खालिस्तानी कट्टरपंथी और गैंगस्टर बंद हैं। जेल की पिछली दिवारों के पास डेटोनेटर और तार मिले थे। इसी जगह पर साल 2004 में 109 फीट सुरंग खोदा गया था। इस सुरंग के सहारे पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के हत्यारे परमजीत सिंह भौरा, जगतार सिंह हवारा, जगतारा सिंह तार और रसोइया देवी सिंह फरार हो गए थे।

अधिकारियों ने कहना है कि सुरक्षा एजेंसियाँ ​​स्थिति को संभालने के लिए सतर्क हैं, क्योंकि इटली, कनाडा और अमेरिका के अलावा पाकिस्तान के देशद्रोही समूह लोगों को उकसा रहे हैं और पंजाब की स्थिति को बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं।

आतंकी पन्नू ने खालिस्तानी झंडा फहराने की अपील की थी

गौरतलब है कि 15 अप्रैल को खालिस्तानी आतंकी संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) के प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू (Gurpatwant Singh Pannu) ने हरियाणा (Haryana) के जिलाधिकारियों के कार्यालयों पर खालिस्तान का झंडा फहराने की अपील की थी। पन्नू ने ‘हरियाणा बनेगा खालिस्तान’ नाम से एक पत्र जारी किया था। इस पत्र में उसने गुरुग्राम के DC ऑफिस पर 29 अप्रैल को खालिस्तान का झंडा लगाने का एलान किया था। इसके साथ ही खालिस्तान के लिए हरियाणा में रेफरेंडम की बात भी कही थी।

पन्नू ने कहा था, “हरियाणा पर पंजाब का अधिकार है। यह अधिकार प्रदर्शित करने के लिए 29 अप्रैल को गुरुग्राम के DC कार्यालय पर खालिस्तान का झंडा लगाया जाएगा। यह खालिस्तान के 36वें घोषणा दिवस के मौके पर होगा।” SFJ ने खालिस्तान का मानचित्र भी जारी कर रखा है जिसमें हरियाणा को भी शामिल किया गया है। इस पत्र में हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (HSGMC) के अध्यक्ष बलजीत सिंह दादूवाल के अलावा ऑल इंडिया सिख स्टूडेंट फेडरेशन (AISSF) द्वारा भी खालिस्तान अभियान में समर्थन मिलने का दावा किया गया है।

गोरखनाथ मंदिर पर हमला करने वाले अब्बासी ने 2020 में ली थी ISIS की शपथ, 2013 से है आतंकी कनेक्शन: UP पुलिस का खुलासा

गोरखनाथ मंदिर परिसर में धारधार हथियार के साथ घुसने का प्रयास करने वाले अहमद मुर्तजा अब्बासी को लेकर यूपी पुलिस ने नया खुलासा किया है। पुलिस ने उसके पास मिले ई-डिवाइस व सोशल मीडिया अकॉउंट से पता लगाया है कि वो ISIS आतंकियों के साथ संपर्क में था और 2014 में उसकी गिरफ्तारी बेंगलुरु पुलिस द्वारा भी की गई थी।

एडीजी प्रशांत कुमार ने मीडिया को बताया, “यूपी एटीएस द्वारा आरोपित अहमद मुर्तजा अब्बासी की जाँच के बाद, उसके कई ई-डिवाइस, उसके विभिन्न सोशल मीडिया अकाउंट जैसे जीमेल, ट्विटर, फेसबुक और ई-वॉलेट के डेटा की पड़ताल की गई। डेटा छानबीन में सामने आया कि आरोपित मुर्तजा अब्बासी सोशल मीडिया के जरिए ISIS आतंकी और उसके समर्थकों के साथ संपर्क में था। साल 2014 में उसकी गिरफ्तारी ISIS प्रोपेगेंडा एक्टिविस्ट मेहदी मसरूर बिस्वास से जुड़े केस में भी हुई थी। वह आतंकी संगठन, कट्टरपंथी प्रचारक और ISIS आतंक को बढ़ावा देने वाले लोगों से प्रभावित था।”

एडीजी ने जानकारी दी कि आरोपित ने अपने बैंक के जरिए ISIS की आतंकी गतिविधियों को समर्थन देने के लिए करीब 8.5 लाख भारतीय रुपए भेजे। ये रुपए उसने ISIS समर्थकों के संगठनों के जरिए भेजे जो यूरोप और अमेरिका में हैं। एडीजी प्रशांत कुमार के अनुसार आरोपित अब्बासी ने एके-47, एम-4 कार्बाइन और दूसरे हथियारों से जुड़े वीडियो भी इंटरनेट के माध्यम से भेजे थे। अपनी आतंकी इच्छाओं को पूरा करने के लिए उसने गोरखनाथ मंदिर के दक्षिणी द्वार पर लोक वुल्फ अटैक किया। उसने वहाँ ड्यूटी पर तैनात सुरक्षा अधिकारियों की राइफल छीनने की कोशिश की। उसका इरादा हथियार छीनकर बड़े हमले को अंजाम देने का था। पुलिस ने ये जानकारी भी दी कि मुर्तजा ने साल 2013 में अंसार-उल-तौहीद नामक आतंकवादी संगठन की शपथ ली थी, जिसका 2014 में ISIS में विलय हो गया। 2020 में अब्बासी ने फिर ISIS की शपथ ली।

गोरखनाथ मंदिर पर हमला

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित गोरखनाथ मंदिर में 3 अप्रैल, 2022 को मुर्तज़ा अब्बासी ने धारदार हथियार ले कर घुसने का प्रयास किया था। इस दौरान उसने रोके जाने पर ‘अल्लाह हु अकबर’ के नारों के साथ PAC के 2 जवानों को घायल कर दिया था। मुर्तजा ने पुलिसकर्मियों के हथियार छीनने का भी प्रयास किया था। पड़ताल में पता चला था कि वह गोरखपुर के सिविल लाइंस का रहने वाला है। उसे बचाने के लिए उसके मानसिक तौर पर विक्षिप्त होने की खबरें भी मीडिया में कही गई। हालाँकि डॉक्टर के बयान और अब्बासी का बैकग्राउड देखते हुए इन दलीलों को दरकिनार कर दिया गया और राष्ट्रीय सुरक्षा के नाते जाँच आगे बढ़ी।