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न्यूयॉर्क में ‘स्वास्तिक’ अब यहूदी विरोधी या नाजी विचारधारा का प्रतीक नहीं: स्टेट एसेंबली और सीनेट के बिल में बदली गई भाषा

जर्मनी के नाजियों के नाम पर बदनाम कर दिए गए भारतीय परंपरा और समृद्धि के प्रतीक ‘स्वास्तिक’ (Swastik) को लेकर अमेरिका (America) में हिंदू समाज को एक अभूतपूर्व सफलता मिली है। न्यूयॉर्क (New York) सीनेट ने स्वास्तिक को ‘यहूदी विरोधी’ और ‘फासीवादी प्रतीक’ के रूप में हटा दिया है। इसकी जानकारी अमेरिका में रहने वाले हिंदू समुदाय के संगठन ने शुक्रवार (29 अप्रैल 2022) को दी।

हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने ट्वीट कर बताया, “सहयोगी दलों के साथ काम कर रहे हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन (@hinduamerican) के 4 महीने के अथक प्रयासों के बाद न्यूयॉर्क सीनेट और न्यूयॉर्क विधानसभा में बिल NY A.9155 और NY S.7680 के जरिए ‘स्वास्तिक’ शब्द को हटा दिया गया है। दोनों बिलों को मूल रूप से स्वास्तिक को ‘सेमेटिक विरोधी और फासीवादी प्रतीकों’ के रूप में संदर्भित किया गया था।”

यहूदी समाज को धन्यवाद देते हुए फाउंडेशन ने कहा, “नाजी जर्मनी के भयानक इतिहास के बावजूद हम अपने यहूदी सहयोगियों को उनकी उदारता के लिए धन्यवाद देते हैं, जिन्होंने हकेनक्रेज़ (नाजियों द्वारा इस्तेमाल प्रतीक) की स्वास्तिक के साथ जुड़ी झूठी पहचान को समाप्त करने में हमारी मदद की।”

फाउंडेशन ने कहा कि इस तरह की प्रत्येक जीत सदियों से विभिन्न धार्मिक परंपराओं का अभिन्न अंग रहा स्वास्तिक के पवित्र, शुभ एवं समृद्धि के सूचक अर्थ के बारे में लोगों को शिक्षित करने की दिशा में कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित करती है।

बता दें कि 7 जनवरी 2021 के कैपिटल सीज का संदर्भ दिया गया है, जिसमें अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के समर्थकों ने चुनावी धोखाधड़ी का आरोप लगाकर कैपिटल हिल पर धावा बोल दिया था। उस दौरान उनके हाथों में ट्रंप के समर्थकों के हाथों में बैनर और झंडे थे। 7 जनवरी 2022 के दिनांक वाले इस बिल में कहा गया है (इस लिंक पर बिल को पढ़ें) कि ट्रंप के समर्थकों के हाथों में यहूदी विरोधी, फासीवादी और नव-नाजीवादी विचारधारा के प्रतीक वाले झंडे थे। इसे संघीय युद्ध वाले झंडे के रूप में जाना जाता है।

अमेरिका में स्वास्तिक नाम से है गाँव

बता दें कि जिस अमेरिका में स्वास्तिक को नाजीवाद के प्रतीक के रूप में चिन्हित किया गया था, उसी अमेरिका में स्वास्तिक नाम का एक सदियों पुराना गाँव है। यह गाँव भी न्यूयॉर्क राज्य में ही है। बाद में उसे नाजीवाद का प्रतीक बताते हुए सितंबर 2020 में इसके नाम को बदलने की वोटिंग हुई, लेकिन नाम बदलने के पक्ष में एक भी वोट नहीं पड़ा।

नाम नहीं बदलने के इच्छुक लोगों को लेकर शहर के ब्लैक ब्रुक टाउन बोर्ड के सुपरवाइजर जॉन डगलस ने बताया था कि इस शहर का नाम स्वास्तिक, शहर के मूल निवासियों द्वारा 1800 के दशक में रखा गया था। यह संस्कृत के शब्द से लिया गया है, जिसका अर्थ ‘कल्याण’ होता है। यह गाँव आज भी इसी नाम से जाना जाता है।

कनाडा ने स्वास्तिक पर बैन लगाने की कोशिश की थी

फरवरी 2022 में कनाडा में प्रदर्शन के बाद वहाँ की सरकार ने खालिस्तान समर्थक स्थानीय नेता जगमीत सिंह के दबाव में ट्रुडो सरकार ने स्वास्तिक पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर ली थी। इसके लिए संसद में एक विधेयक भी लाया गया था। उसके बाद भारत और भारतीयों के विरोध के बाद मार्च 2022 में वहाँ की सरकार ने बिल की भाषा में बदलाव करते हुए स्वास्तिक की जगह ‘हुक्ड क्रॉस’ कर दिया था।

स्वीडन को ‘मजहब का सम्मान’ सिखा रहा चीन, खुद उइगर मुस्लिमों को पानी के लिए तरसाता है, सूअर का माँस खाने को करता है मजबूर…

यूरोप के उत्तर में बसा स्वीडन दुनिया के सबसे शांतिप्रिय देशों में से एक है। लेकिन बीते कुछ दिनों से हिंसक घटनाओं और सांप्रदायिक दंगों के कारण इस देश में अशांति फैली हुई है। स्वीडन में 14 अप्रैल को लिंकोपिन शहर में अप्रवासी और इस्लाम विरोधी पार्टी ‘स्ट्राम कुर्स (Stram Kurs)’ द्वारा कुरान की प्रतियाँ जलाने के ऐलान के बाद कट्टरपंथी इस्लामवादियों की उन्मादी भीड़ ने जमकर दंगा और हिंसा की। नकाबपोश उन्मादी भीड़ ने ‘अल्लाहु अकबर’ के नारे लगाते हुए पुलिस की कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया और पत्थरबाजी भी की। इसके बाद से स्वीडन अंतरराष्ट्रीय मीडिया में चर्चा में हैं।

अब चीन ने स्वीडन में हुई हिंसक घटना को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। जी हाँ, वही चीन जो दुनिया भर में मानवाधिकारों का उल्लंघन करने के लिए जाना जाता है। उइगर मुस्लिमों (Uighur Muslims in China) पर क्रूर अत्याचार करने वाली चीन की कम्युनिस्ट सरकार (Chinese Communist Government) ने कहा है, “स्वीडन को अपने देश में रह रहे मुस्लिमों और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों की ‘धार्मिक आस्था’ का सम्मान करना चाहिए। उनकी हितों की रक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए।”

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने 20 अप्रैल को स्वीडन में कुरान की प्रतियाँ जलाने की आलोचना करते हुए इस घटना को शर्मनाक बताया था। चीनी समाचार पत्र ग्लोबल टाइम्स के अनुसार, “उन्होंने यूरोपीय देश से मुस्लिमों और अन्य अल्पसंख्यक समूहों की धार्मिक मान्यताओं का ईमानदारी से सम्मान करने, उनके अधिकारों की रक्षा करने को कहा था।”

खैर, स्वीडन को मुस्लिमों के हितों की रक्षा और उनके मजहब का सम्मान करने का ज्ञान देने के ठीक पाँच दिन बाद ही चीन का विदेश मंत्रालय काफी घबराया हुआ नजर आया, क्योंकि उसे खबर मिली कि मई में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार की आयुक्त मिशेल बाचेलेट चीन की यात्रा पर आने वाली हैं। दरअसल, चीन के शिनजियांग प्रांत का दौरा करने के मकसद से संयुक्त राष्ट्र की एक टीम चीन पहुँच गई है। ये टीम यहाँ संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार आयुक्त के चीन दौरे के लिए जरूरी तैयारियाँ कर रही है। मानवाधिकार आयुक्त मिशेल बैशलेट अगले महीने शिनजियांग का दौरा करेंगी। संयुक्त राष्ट्र के किसी मानवाधिकार आयुक्त ने 2005 के बाद से शिनजियांग की यात्रा नहीं की है। इस बात को लेकर चीन बेहद डरा हुआ है।

ह्यूमन राइट्स वॉच द्वारा चीन को दुनिया में मानवाधिकारों का हनन करने वालों में सूचीबद्ध किया गया है। मानवाधिकार समूहों और कुछ पश्चिमी सरकारों का आरोप है कि चीनी सरकार शिनजियांग में उइगर मुस्लिम का नरसंहार और उन पर अत्याचार कर रही है। चीन शिनजियांग में न केवल उइगर, बल्कि तुर्की मुस्लिमों की सांस्कृतिक पहचान को भी मिटा रहा है। सऊदी अरब, पाकिस्तान, अफगानिस्तान जैसे कई मुस्लिमों देशों समेत पूरी दुनिया यह बात जानती है कि चीन जो स्वीडन को ‘धार्मिक मान्यताओं के सम्मान’ का पाठ पढ़ रहा है, वह खुद उइगर मुस्लिमों के साथ बर्बरतापूर्ण व्यवहार करता है।

मजहब छोड़ने के लिए प्रताड़ित किया जाता है

एक रिपोर्ट के अनुसार, 1 मिलियन से 2 मिलियन यानी 10 से 20 लाख उइगर मुस्लिमों और अन्य अल्पसंख्यक समुदाय को शिनजियांग के विभिन्न शिविरों में रखा गया है। यहाँ उन्हें अपना मजहब छोड़ने, मार्क्सवाद का अध्ययन करने और कारखानों में काम करने के लिए प्रताड़ित किया जाता है। जबकि मध्य एशिया और अफ्रीका के अशांत क्षेत्रों से बड़ी संख्या में मुस्लिम आकर स्वीडन समेत अन्य यूरोपीय देशों में बसे हैं। यहाँ की सरकारों ने इन पर रहम दिखाते हुए, उन्हें सभी सुविधाएँ उपलब्ध कराई हैं, जिससे कभी शरणार्थी रहे ये मुस्लिम धीरे-धीरे स्वीडन के नागरिक बन गए। करीब एक करोड़ की जनसंख्या वाले शांतिप्रिय लोकतंत्र स्वीडन को ऐसे शरणार्थियों के लिए सुरक्षित स्थान माना जाता है। इसके बावजूद चीन उस पर ऊँगली उठा रहा है, जबकि आए दिन उइगर मुस्लिमों पर चीन के अत्याचारों की खबरें अंतरराष्ट्रीय मीडिया में छाई रहती हैं।

द हॉन्ग कॉन्ग पोस्ट के अनुसार, ऑस्ट्रेलियन स्ट्रेटेजिक पॉलिसी इंस्टीट्यूट की 2020 (Australian Strategic Policy Institute’s 2020) की रिपोर्ट के अनुसार, उइगर चीनी सरकार की नीति के तहत इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल और ऑटोमोटिव सहित स्पलाई चेन की एक रेंज में काम करते हैं, जिसे ‘शिनजियांग एड’ (Xinjiang Aid) के रूप में जाना जाता है। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि उइगर सिर्फ शिनजियांग में ही काम नहीं कर रहे हैं। वे नौ चीनी प्रांतों में फैले 27 कारखानों में भी काम करते हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन में उइगर मुस्लिमों को अक्सर उनकी इच्छा के विरुद्ध काम करने के लिए मजबूर किया जाता है।

यह भी बताया जाता है कि चीनी डिटेंशन सेंटर में उइगर मुस्लिमों के मुँह में पाइप डालकर हाथ-पैर बाँध दिए जाते हैं। इतना ही नहीं पानी माँगने पर चीनी सैनिक उइगर मुस्लिमों के मुँह में पानी के बोतल का ढक्कन तक कस देते हैं। एक चीनी पुलिस अधिकारी के शब्दों में, “उइगरों को चीन के सैनिक मालगाड़ी में भरकर डिटेंसन सेंटर्स लाते हैं। इन्हें कई दिनों तक भूखा मरने के लिए छोड़ दिया जाता है। ज्यादा विरोध करने पर चीनी सैनिक एक ही हथकड़ी में दो-दो लोगों को बाँध देते हैं। कभी-कभी तो इन अल्पसंख्यक समुदाय को पीट-पीटकर मार भी दिया जाता है। भागने के डर से उइगरों को शौचालय तक नहीं जाने दिया जाता है।”

‘देह-व्यापार का शिकार, खिलाता है सूअर का मांस’

अक्टूबर 2021 में खुलासा हुआ था कि चीन उइगर मुस्लिमों के अंगों को बेच रहा है। ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न स्थित अख़बार ‘द हेराल्ड सन’ ने चीन के ऑर्गन ट्रैफिकिंग का खुलासा किया था। रिपोर्ट में बताया गया था कि उइगर मुस्लिम के स्वस्थ लिवर को चीन 1,60,000 डॉलर्स (1.20 करोड़ रुपए) में बेच रहा है। अख़बार के मुताबिक, इन धंधों से चीन को 1 बिलियन डॉलर (7492 करोड़ रुपयों) की कमाई हो रही है। 2017-19 के बीच 80,000 उइगर मुस्लिमों को देह-व्यापार का शिकार बनाया गया था। खास बात यह है कि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग (UNHRC) को भी चीन के इस गोरखधंधे की जानकारी है। उसी साल चीन के शिनजियांग क्षेत्र में आधी रात को गिरफ्तार हुई उइगर महिला हसिएत अहमत (57) को उसके पड़ोस के युवाओं को इस्लामिक शिक्षा देने और कुरान की प्रतियाँ छिपाने के लिए 14 साल जेल की सजा सुनाई गई थी। ये भी खबर आई थी कि शिनजियांग में मुस्लिम महिलाओं की जबरन नसबंदी कराई जाती है, उन्हें सूअर का मांस खाने और शराब पीने के लिए भी मजबूर किया जाता है।

3 साल में 16000 मजहबी स्थल ध्वस्त

चीन में उइगर मुस्लिमों का होता दमन कई वर्षों से चर्चा में बना हुआ है। उनकी संस्कृति, सभ्यता, मजहबी रिवाज, तौर-तरीके, घर की बनावट, साज-सजावट का तरीका सब बदला जा रहा है। इसके अलावा डिटेंशन कैंप में रख कर महिलाओं के साथ रेप, अबॉर्शन समेत तमाम अमानवीयता की जा रही है। इमाम और मौलवियों को भी कैद में रखा जा रहा है। यही नहीं उइगरों की मस्जिद को गिरा कर होटल बनाने की तैयारी में रहने वाला चीन 3 साल में 16000 मजहबी स्थल ध्वस्त कर चुका है।

दूसरी ओर चीन इन सभी दावों को खारिज करता रहता है। उसका कहना है कि उन्होंने कोई मजहबी स्थल जबरन गिराया ही नहीं, जबकि मीडिया खबरें बताती हैं कि 2017 से 2020 के बीच में शिनजियांग के 900 क्षेत्रों में करीब 16000 मस्जिदें या तो आधी या फिर पूरी ध्वस्त हुई हैं। मीनारों को मस्जिद से हटा दिया गया है। रॉयटर्स समाचार एजेंसी की मानें तो हाल ऐसा है कि जब उनका पत्रकार रमजान के माह में उइगर गया तो उसने भी मस्जिदों को या तो पूरा गिरा हुआ या फिर आधा ध्वस्त पाया।

‘हिजाब पहनी लड़कियों को जेल’

फरवरी 2021 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उइगर मुस्लिमों के साथ होते अत्याचार की खबरों के बीच ये खबर आई थी कि चीन की नजर अब सान्या क्षेत्र के उत्सुल मुस्लिमों पर भी है। इस क्षेत्र में 10 हजार से भी कम संख्या में ये समुदाय रहता है। मगर, वहाँ ‘चीनी सपने’ को साकार करने की आड़ में इस समुदाय पर अप्रत्यक्ष रूप से हमले होने शुरू हो गए थे। जानकारी के अनुसार, सान्या में अब मुस्लिम घरों व दुकानों के बाहर लिखे मजहबी नारों जैसे अल्लाह-हू-अकबर को स्टिकर्स की मदद से ढका गया था। हलाल खाने के बोर्ड को भी रेस्त्रां आदि से हटाया गया था। इस्लामी स्कूलों को बंद कर दिया गया और हिजाब पहनने वाली लड़कियों को जेल भेजने की कोशिश की गई थी।

महाराष्ट्र के इंस्पेक्टर ने कीर्तन के बीच नारद मुनि के आसन को किया अपवित्र, बाद में इकलौते बेटे की शपथ खा माँगी माफी

महाराष्ट्र (Maharashtra) में एक पुलिस अधिकारी ने हिंदू देवता (Hindu God) का अपमान करने के बाद अपने इकलौते बेटे की शपथ खाकर माफी माँगी है। महाराष्ट्र के चालीसगाँव सिटी थाने के पुलिस इंस्पेक्टर केके पाटिल ने 27 अप्रैल 2022 की रात सप्तश्रृंगी देवी मंदिर के पास आयोजित एक वारकरी संप्रदाय के कीर्तन में नारद मुनि के पवित्र स्थान का अनादर किया था। इंस्पेक्टर वहाँ रात के 10 बजने के कारण आयोजकों से लाउडस्पीकर बंद करने के लिए कहने गए थे।

पुलिस इंस्पेक्टर केके पाटिल (फोटो साभार: ट्विटर)

अगले दिन इस घटना की जानकारी जैसे ही लोगों को लगी, हिंदुओं और विशेषकर वारकरी संप्रदाय के अनुयायियों में पुलिस निरीक्षक के खिलाफ रोष फैल गया। चालीसगाँव में अपने कार्यकाल के दौरान केके पाटिल की उत्कृष्ट सेवाओं को देखते हुए भाजपा के स्थानीय MLC मंगेश चव्हाण ने हस्तक्षेप किया और पाटिल ने अपनी गलती के लिए माफी माँगी। इस दौरान पाटिल ने कहा कि उनसे अनजाने में भूल हो गई है।

महाराष्ट्र का वारकरी संप्रदाय और इसकी कीर्तन परंपरा 13वीं शताब्दी की है। 7वीं सदी से चली आ रही इस परंपरा को श्रद्धालु आज भी निभाते हैं। ऐसा ही एक कीर्तन महाराष्ट्र के चालीसगाँव शहर के हनुमानसिंह राजपूत नगर क्षेत्र में सप्तश्रृंगी देवी मंदिर के समक्ष 27 अप्रैल 2022 की शाम को आयोजित किया गया था। रात करीब 10:15 बजे जब चालीसगाँव शहर के पुलिस निरीक्षक केके पाटिल नगत रोड इलाके में गश्त कर रहे थे तो उन्होंने कीर्तन स्थल पर लगे लाउडस्पीकर से आवाजें सुनीं। चूँकि भारत के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के तहत रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकरों का उपयोग प्रतिबंधित है, इसलिए वह आयोजकों से लाउडस्पीकर बंद करने को कहने के लिए कीर्तन स्थल पर गए।

वारकरी संप्रदाय के स्थानीय वयोवृद्ध सदस्यों ने पुलिस निरीक्षक केके पाटिल को माफ कर दिया और एक अधिकारी के रूप में उनके अच्छे कार्यों की सराहना की। (फोटो साभार: ट्विटर)

केके पाटिल आयोजकों को निर्देश देने के लिए जैसे ही मंच पर गए, वहाँ रखे नारद मुनि के पवित्र आसन पर बिना जूते उतारे चले गए। पाटिल के अनुसार, वह इस तथ्य से अनजान थे कि वारकरी कीर्तन कार्यक्रम के मंच पर नारद मुनि का आसन होता है। माना जाता है कि हिंदू देवताओं और भगवान विष्णु कीर्तन करने वाले वे पहले व्यक्ति हैं।

इस घटना की खबर फैलते ही स्थानीय हिंदुओं में आक्रोश फैल गया। राज्य के विभिन्न हिस्सों से वारकरी संप्रदाय के लोग चालीसगाँव में संपर्क करने लगे। कई हिंदू संगठनों ने भी स्थानीय भारतीय जनता पार्टी के MLC मंगेश चव्हाण से संपर्क किया और उन्हें घटना की जानकारी दी। इसके बाद चव्हाण ने हालात को देखते हुए इसे संभालने की पहल शुरू कर दी।

मंगेश चव्हाण ने अंत्योदय जनसेवा कार्यालय में वारकरी संप्रदाय के महत्वपूर्ण सदस्यों और पुलिस निरीक्षक की बैठक बुलाई। वहाँ भगवान पांडुरंग और महाराज शिवाजी की मूर्तियों के सामने पुलिस निरीक्षक केके पाटिल ने ‘अनजाने में हुई गलती’ के लिए माफी माँगी। पाटिल ने कहा, “मैं भी एक ऐसे परिवार से ताल्लुक रखता हूँ, जो वारकरी परंपरा को मानता है लेकिन दुर्भाग्य से मैं वारकरी कीर्तन में नारद मुनि के आसन से अनजान था। जब मैं उस इलाके में गश्त कर रहा था तो रात के 10:15 बज चुके थे। इसलिए जब लाउडस्पीकर की आवाज सुनी तो मैं कोर्ट के आदेश का पालन कराने के लिए वहाँ गया। मैं अपनी पुलिस वर्दी में था। मैं उसी के साथ मंच पर गया और इसलिए मेरे द्वारा अनजाने में यह कृत्य हुआ है। इसके लिए मैं माफी माँगता हूँ।”

एमएलसी मंगेश चव्हाण ने कहा, “हालांकि इंस्पेक्टर केके पाटिल के इस कृत्य से हिंदुओं और विशेषकर वारकरियों की भावनाओं को ठेस पहुँची है, लेकिन यह घटना सिर्फ इसलिए हुई क्योंकि उन्हें नारद मुनि की पवित्र आसन का महत्व नहीं पता था। वारकरी संप्रदाय एक भक्ति परंपरा है, जो सभी को क्षमा करने के लिए जानी जाती है। अनजाने में हुए अपमान और समाज में आक्रोश के कारण केके पाटिल साहब ने खुद माफी माँगने की परिपक्वता दिखाई।”

मंगेश चव्हाण ने आगे कहा, “जब से केके पाटिल चालीसगाँव थाने में आए हैं, तब से इलाके में अवैध गतिविधियाँ कम हो गई हैं। उन्होंने यहाँ क्राइम रेट पर नजर रखी। सड़कों पर घूम रहे आवारा और स्थानीय लड़कियों को छेड़ने वाले अब पुलिस और उनके अनुशासन से डरे हुए हैं। यह सब इसलिए हो सका, क्योंकि केके पाटिल बहुत ही तत्परता से अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं। यह सब सिर्फ एक स्थानीय एमएलसी के रूप में मैं उनकी प्रशंसा करने के लिए नहीं कह रहा हूँ, वास्तव में हम सभी ने इस परिवर्तन को देखा है। वारकरी संप्रदाय के सदस्यों ने भी इस बात पर ध्यान दिया है। जब आप अपना कर्तव्य बखूबी निभा रहे होते हैं, तो अनजाने में ऐसा कुछ हो जाता है। मैं सभी वारकरियों से अपील करता हूँ कि इस अच्छे अधिकारी को माफ कर दें, जो वास्तव में समाज के लिए अच्छा कर रहा है। मैं सभी से अनुरोध करता हूँ कि इस घटना को किसी भी अवांछित रंग में न रंगें और सद्भाव बनाए रखें।”

स्थानीय वारकरी संप्रदाय के एक वरिष्ठ सदस्य ने कहा, “वारकरियों के आक्रोश को देखते हुए इंस्पेक्टर केके पाटिल ने एमएलसी मंगेश चव्हाण और वारकरी संप्रदाय सहित अन्य वरिष्ठ सदस्यों की उपस्थिति में अपनी गलती के लिए माफी माँगी। उन्होंने अपने इकलौते पुत्र की शपथ ली और कहा कि वह वास्तव में नहीं जानते थे कि यह नारद मुनि का पवित्र आसन है। उन्होंने क्षमा करने के लिए कहा। इस शहर के लिए अब तक किए गए उनके अच्छे कार्यों की हम सराहना करते हैं। यह केके पाटिल साहब ही हैं, जिन्होंने सुनिश्चित किया है कि हमारी लड़कियाँ सुरक्षित रहें।”

अन्य सभी वारकरी और कीर्तन में शामिल लोग भी इस बात से सहमत थे कि केके पाटिल ने ही साप्ताहिक कीर्तन और सप्ताह भर चलने वाले कीर्तन दोनों का फिर से आयोजन करने के लिए प्रेरित किया था, क्योंकि ये पारंपरिक कार्यक्रम COVID-19 महामारी के दौरान बंद कर दिए गए थे। एमएलसी मंगेश चव्हाण ने अपने ट्विटर हैंडल से पूरी घटना को साझा किया है।

‘पटियाला में काली मंदिर पर फेंके पेट्रोल बम’: पंजाब में खालिस्तान समर्थकों की हिंसा, हिंदू संगठन बोले- जो कभी न हुआ, वो AAP सरकार में हुआ

पंजाब के पटियाला में खालिस्तान समर्थकों और हिन्दू संगठनों में झड़प की खबर है। इस झड़प को रोकने आए SHO पर खालिस्तान समर्थकों द्वारा तलवार से हमला किया गया। काली माता मंदिर को भी निशाना बनाया गया है। पत्थरबाजी का भी आरोप है। हमले के कई लोग घायल हुए हैं। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। घटना 29 अप्रैल 2022 (शुक्रवार) की है।

द सिटी हेडलाइन द्वारा जारी किए गए फुटेज के मुताबिक उपद्रवियों की भीड़ को मंदिर में घुसने से रोकने के लिए कई पुलिसकर्मी मंदिर के गेट पर खड़े हो गए थे। हिन्दू सुरक्षा समिति का आरोप है कि खालिस्तान समर्थकों ने मंदिर के बाहर आग लगाने की भी कोशिश की। मदिर के मुख्य द्वार को तोड़ने का प्रयास किया गया। मुख्य द्वार पर पेट्रोल से भरी बोतलें फेंकी गई। पुलिस ने कुछ हमलावरों को हिरासत में भी लिया है। हिन्दू पक्ष के आशुतोष गौतम नाम के व्यक्ति भी घायल हैं। इस दौरान हमलावरों ने कथित तौर पर खालिस्तान के समर्थन में नारे भी लगाए।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हिन्दू संगठनों ने ‘खालिस्तान मुर्दाबाद’ नाम से मार्च निकाला था। यह मार्च गुरपतवंत सिंह पन्नू द्वारा जारी किए गए खालिस्तान समर्थन के वीडियो के विरोध में हुआ था। इसके बाद कुछ खालिस्तान समर्थक मार्च का विरोध करने लगे। उन्होंने शिवसैनिकों को बंदर सेना कहा और मुर्दाबाद के नारे लगाए। काली माता मंदिर के पास यही तनाव टकराव में बदल गया।

दोनों तरफ से पत्थर चलने लगे। इस दौरान खालिस्तान समर्थकों के हाथों में तलवारें दिखाई देने लगीं। खालिस्तान समर्थकों की भारी भीड़ ने काली माता मंदिर को घेर लिया। उन्हें काबू करने के लिए पुलिस को 15 राउंड गोलियाँ चलानी पड़ी। उपद्रवियों के काली माता मंदिर में भी घुसने की फुटेज सामने आए हैं। हिंसा को काबू करने के प्रयास में SHO त्रिपड़ी करमवीर सिंह तलवार के हमले में घायल हो गए।

‘जो कभी न हुआ वह आप सरकार में हुआ’

ऑपइंडिया ने इस घटना के बारे में शिवसेना हिंदुस्तान के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पटियाला निवासी पवन गुप्ता से बात की। पवन गुप्ता ने बताया, “जिस मंदिर पर खालिस्तानियों का हमला हुआ है वो उत्तर भारत में हिन्दुओं का सबसे प्रमुख तीर्थ स्थान है। यहाँ पर तब भी हमला नहीं हुआ था जब खालिस्तान का जोर चरम पर था। लेकिन आम आदमी पार्टी की सरकार में खालिस्तानी सोच वालों को ऐसी खुली छूट मिली हुई है कि आज इतना बड़ा दुस्साहस हुआ है। मंदिर के गेट पर तलवार मारी गई है। बाहर प्रसाद आदि की दुकानों को नुकसान पहुँचाया गया है। दर्शन करने आए श्रद्धालुओं से मारपीट की गई है। हिन्दू पक्ष से 2-3 लोग घायल हैं। खुद SSP पटियाला मौके पर मौजूद थे। उनके ही सामने तलवारें लहराते हुए उपद्रवी नाच रहे थे।”

मुख्यमंत्री ने घटना को बताया दुखद और DGP को दिए निर्देश

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस घटना को दुखद बताया है। उन्होंने कहा, “पटियाला की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। मैंने DGP से बात की और उन्हें जरूरी निर्देश दिए हैं। हम खुद हालत पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं। पंजाब की शांति को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा।”

AAP ने बताया कॉन्ग्रेस और अकाली का विवाद

खुद को ट्विटर पर आनंदपुर साहिब में आम आदमी पार्टी का लोकसभा इंचार्ज बताने वाले डॉ. सनी अहलूवालिया ने इसे एक राजनैतिक विवाद बताया है। उन्होंने कहा, “एक तरफ शिवसेना और कॉन्ग्रेस है तो दूसरी तरफ अकाली दल। ये आपस में इसलिए लड़ रहे हैं जिससे पंजाब का माहौल बिगड़ जाए। लेकिन भगवंत मान की सरकार ने एक ही घंटे में हालत पर काबू पा लिया। आम आदमी पार्टी की सरकार पंजाब में जीरो टॉलरेंस पर काम करेगी। इस घटना में शामिल हर एक व्यक्ति को जेल भेजा जाएगा। लॉ एन्ड आर्डर पंजाब सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।”

गौरतलब है कि आतंकी समूह सिख फॉर जस्टिस के मुखिया गुरपतवंत सिंह पन्नू ने 29 अप्रैल को खालिस्तान के स्थापना दिवस मनाने की घोषणा की थी। इस घोषणा के वीडियो में उसने न सिर्फ पंजाब, बल्कि हरियाणा को भी खालिस्तान के नक्शे में दिखाया था। इसी के साथ पन्नु ने 29 अप्रैल को पंजाब और हरियाणा के सभी जिला मुख्यालयों पर खालिस्तान का झंडा लहराने की घोषणा भी की थी।

अलविदा की नमाज के बाद सहारनपुर में मुस्लिम भीड़ का हंगामा, सरकार विरोधी नारेबाजी: बोली पुलिस – मीडिया के उत्तेजक सवालों से बिगड़ा माहौल

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में नमाज के दौरान मुस्लिम भीड़ ने हंगामा किया। बता दें कि उत्तर प्रदेश में पुलिस-प्रशासन के साथ ही कई मुल्ले-मौलवियों से भी अपील करवाई जा रही है कि मुस्लिम सड़क पर नमाज न पढ़ें। इसके बावजूद यहाँ मुस्लिम भीड़ सड़क पर नमाज पढ़ने को लेकर अड़ गई। जब पुलिस स्थिति को नियंत्रित करने पहुँची तो हंगामा शुरू हो गया। जामा मस्जिद के बाहर जुमे की नमाज के बाद मुस्लिम युवकों ने सरकार का विरोध किया, जिसके बाद विवाद शुरू हुआ।

इन मुस्लिम युवकों ने उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। मजहबी नारेबाजी के बाद तनाव का माहौल बन गया। हंगामे की सूचना के बाद तुरंत पुलिस मौके पर पहुँची और स्थिति को शांत कराने की कोशिश की, लेकिन पुलिस का भी विरोध किया जाने लगा। जामा मस्जिद के बाहर भारी जाम लगा दिया गया और आने-जाने वाली गाड़ियाँ वहाँ खड़ी रहीं। DM और SSP को कई थानों की पुलिस के साथ मौके पर पहुँचना पड़ा।

इसके बाद स्थिति नियंत्रित हो सकी। फ़िलहाल मामला शांत है। याद दिला दें कि गुरुवार (28 अप्रैल, 2022) की शाम ‘जामा मस्जिद की इंतजामिया कमेटी’ ने एक पत्र जारी कर के सहारनपुर के मुस्लिमों से अपील की थी कि अलविदा जुमा की नमाज मस्जिद के भीतर ही अता की जाए, सड़क पर ट्रैफिक रोक कर या बाजार में दूसरों को परेशानी देकर नमाज न पढ़ने को कहा गया था। मुस्लिमों को अपने मोहल्ले के मस्जिदों में ही नमाज पढ़ने को कहा गया था।

इसे लेकर इलाके के मुस्लिमों में नाराजगी थी। आक्रोश प्रकट करने के लिए मुस्लिम भीड़ मस्जिद के बाहर आकर नारेबाजी करने लगी। SSP आकाश कुमार ने जानकारी दी है कि अब न सिर्फ जाम हटवा दिया गया है, बल्कि स्थिति भी नियंत्रण में है। जिलाधिकारी अखिलेश सिंह ने भी वहाँ मुस्लिमों को समझाया-बुझाया। काफी देर तक हंगामे की स्थिति बनी रही। इस घटना के कई वीडियोज भी सामने आए हैं, जिनमें मुस्लिम भीड़ का जुटान देखा जा सकता है।

SSP ने जानकारी दी कि अलविदा की जुमे की नमाज पढ़ कर लौट रहे मुस्लिमों से कुछ मीडियाकर्मियों द्वारा उत्तेजनापूर्ण सवाल पूछे गए, जिसके बाद कुछ लड़कों ने हल्ला-गुल्ला किया। उन्होंने बताया कि किसी भी प्रकार का विवाद नहीं हुआ और कुछ मीडिया चैनलों द्वारा भ्रामक और असत्य खबरें फैलाई जा रही हैं, जिनके खिलाफ नोटिस जारी कर के उनसे स्पष्टीकरण माँगा जाएगा। उन्होंने कहा कि माहौल शांत है और अब कोई गड़बड़ नहीं है।

‘हिंसा फैलाने वालों के दिन लद गए, जो सद्भावना रखेंगे वही रहेंगे’: संघ प्रमुख मोहन भागवत की दो टूक

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक (प्रमुख) मोहनराव भागवत (Mohan Rao Bhagwat) ने गुरुवार (28 अप्रैल 2022) को कहा कि जिस समाज को हिंसा पसंद है, वो अपना अंतिम दिन गिन रहा है। उन्होंने कहा कि हिंसा से किसी को फायदा नहीं होता। सभी समुदायों को मिलकर मानवता की रक्षा करनी चाहिए।

संघ प्रमुख भागवत ने यह बता महाराष्ट्र के अमरावती के एक कार्यक्रम में उस दौरान कही, जब रामनवमी और हनुमान जयंती को लेकर देश भर में पथराव और हिंसा की घटनाएँ सामने आईं। इनमें दिल्ली का जहाँगीरपुरी, मध्य प्रदेश का खरगोन, गुजरात, कर्नाटक आदि प्रमुख जगहें हैं, जहाँ शोभायात्रा के दौरान जुलुसों पर पथराव किया गया था।

भागवत ने कहा, “हमें चिंता करने की आवश्यकता नहीं। हमारे पास सभी इच्छाओं को पूरी करने का समय हमारे पास है, क्योंकि हम सत्य पर हैं। हम सबको अपना मानकर चलते हैं। तो हमारे पास सदा के लिए समय है। हमारी बातें गलत हैं, किसी दूसरे का विरोध करने वाली हैं, दुनिया में अशांति और हिंसा फैलाने वाली हैं तो अब उसके दिन लद गए।”

उन्होंने आगे कहा, “आखिरी छटपटाहट अहिंसा की चाहिए और सद्भावना की चाहिए। जो अहिंसा पर चलते हैं, जो सत्य पर चलते हैं, सद्भावना पर चलते हैं, न्याय पर चलते हैं, उनके लिए समय है, क्योंकि वे रहने वाले हैं।”

अखंड भारत को लेकर मोहन भागवत

कुछ दिन पहले भागवत ने अखंड भारत को लेकर बड़ी बात कही थी। उन्होंने कहा था कि संघ के लिए अखंड भारत हमेशा से सर्वोपरि रहा है। जिस तरह से चीजें आगे बढ़ रही है, उससे अगले 20-25 साल में यह काम पूरा हो जाएगा, लेकिन सामूहिक प्रयास को गति देने पर यह जल्दी भी पूरा हो सकता है।

भागवत ने 13 अप्रैल 2022 को हरिद्वार में एक कार्यक्रम के दौरान कहा था, “इसी गति से चले तभी गणना से काम होने वाला है। हम थोड़ी गति और बढ़ा देंगे तो आपने 20-25 साल कहा, मैं 10-15 ही कहता हूँ। उसमें जिस भारत का सपना देखकर हम चल रहे थे, वो भारत स्वामी विवेकानंद ने जिसको अपने मनुचक्षों से देखा था। और जिसके उदय की महर्षि योगी अरविंद ने भविष्यवाणी की थी वो हम इसी देह में, इन्हीं आंखों से अपने इस जीवन में देखेंगे। मेरी शुभकामना भी है, ये आप की इच्छा भी है और हम सबका संकल्प भी है।”

इससे पहले फरवरी 2021 में उन्होंने कहा था, ”आने वाले समय में अखंड भारत की ज़रूरत है। भारत से अलग होने वाले क्षेत्र जो वर्तमान में खुद को अलग मानते हैं, उनके लिए भारत से जुड़ना आवश्यकता है। ऐसे कई क्षेत्र जो खुद को भारत का हिस्सा नहीं मानते हैं उनमें अस्थिरता है।”

मुजफ्फरनगर का एक आश्रम और 10 महीने में 150 ​मुस्लिम बने हिंदू: मिलिए स्वामी मृगेंद्र से, जानिए कैसे कराते हैं घर वापसी

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में मंगलवार (26 अप्रैल 2022) को दो मुस्लिम परिवारों के 8 सदस्यों ने हिंदू धर्म में वापसी की थी। बघरा स्थित स्वामी यशवीर आश्रम में हवन-पूजन करवाकर इनकी घर वापसी कराई गई थी। इसमें स्वामी मृगेंद्र महाराज की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वे भी यशवीर आश्रम से जुड़े हैं।

स्वामी मृगेंद्र महाराज घर वापसी का अभियान अरसे से चला रहे हैं। दैनिक भास्कर ने इसको लेकर उनसे विस्तार से बातचीत की है। इस दौरान उन्होंने बताया कि पिछले 10 महीने में वे 150 से अधिक लोगों की घर वापसी करवा चुके हैं। हालिया दोनों परिवारों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि 11 साल पहले इन परिवारों के आठ सदस्यों ने लालच में आकर इस्लाम कबूल कर लिया था। उन्होंने कहा, “उन्हें शादी के बाद उनके बच्चों के लिए एक घर और अच्छे सामाजिक जीवन का वादा किया गया था। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ और परिवार ने खुद को ठगा हुआ महसूस किया। उनकी आर्थिक स्थिति भी खराब होती जा रही थी। इसलिए उन्होंने हिंदू धर्म में लौटने का फैसला किया।”

स्वामी मृगेंद्र महाराज ने कहा कि यदि किसी हिंदू का धर्मांतरण करके उसे मुस्लिम बनाया जाता है तो ये सीधे तौर पर देश का विरोध है। अगर सभी हिंदू बन जाएँगे तो दो धर्मों के बीच की लड़ाई खत्म हो जाएगी। कुछ तत्व गरीब हिंदू लोगों को प्रभावित करते हैं और उन्हें आर्थिक सहायता का वादा करते हैं। उनके अनुसार हिंदू समुदाय के गरीब लोग खतरे में हैं क्योंकि उन्हें पैसे, संपत्ति और अच्छे सामाजिक जीवन देने का लोभ देकर इस्लाम कबूल करने के लिए मजबूर किया जाता है। जो हिंदू पैसे के लिए इस्लाम स्वीकार करते हैं, वे बाद में खुद को ठगा हुआ महसूस करते हैं और फिर वापस अपने धर्म में लौट आते हैं।

घर वापसी की प्रक्रिया के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “इस प्रक्रिया में लगभग डेढ़ घंटे तक पवित्र मंत्रों का जप किया जाता है। फिर जो सनातन धर्म को अपनाने की इच्छा रखते हैं उन्हें पवित्र गंगाजल और जनेऊ पहनने के लिए दिया जाता है।” उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में यशवीर आश्रम परिषद की स्थापन स्वामी यशवीर महाराज और स्वामी मृगेंद्र महाराज ने 2001 में की थी। इसके बाद से वे इस काम में जुटे हैं।

पिछले साल 19 जुलाई को आश्रम ने लोगों को हिंदू धर्म में वापस लाने के लिए एक विशेष अभियान चलाया था। उस दिन पवित्र मंत्रों और गंगाजल के आचमन का जाप करके 22 मुस्लिम व्यक्तियों की हिंदू धर्म में वापसी करवाई गई थी। जुलाई 2021 से अब तक आश्रम में 150 से अधिक मुस्लिमों को हिंदू धर्म में वापस लाया गया है।

परिषद में मेरठ, शामली, मुजफ्फरनगर, बिजनौर और मुरादाबाद सहित सात शहरों में लगभग 25000 लोगों का समूह है। ये लोग उन सभी की मदद करते हैं जो सनातन धर्म को अपनाने और हिंदू धर्म में लौटने की इच्छा व्यक्त करते हैं। स्वामी ने कहा, “आश्रम में हम लोगों को हिंदू धर्म अपनाने के लिए मजबूर नहीं करते हैं। मैं जबरदस्ती धर्मांतरण का समर्थन नहीं करता। लोग खुद आश्रम आते हैं और हम बस उनकी मदद करते हैं।”

‘शाहिद अफरीदी चरित्रहीन, जालसाज, झूठा’: दानिश कनेरिया ने कहा- हिंदू होने के कारण मुझे फँसाया, PCB हटाए बैन

पाकिस्तान के पूर्व स्पिनर दानिश कनेरिया (Pakistani Cricketer Danish Kaneria) ने अपनी टीम के पूर्व साथी और कप्तान शाहिद अफरीदी (Shahid Afridi) पर क्रिकेट खेलने के दौरान हिंदू होने के कारण उनसे दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया है। कनेरिया ने अफरीदी को चरित्रहीन, जालसाज और झूठा इंसान बताया है। इसके साथ ही पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) से अपने खिलाफ लगाए गए आजीवन प्रतिबंध को भी हटाने का अनुरोध किया है।

पाकिस्तान के 41 वर्षीय पूर्व क्रिकेटर दानिश कनेरिया ने कहा कि साल 2013 में उन पर लगाए गए स्पॉट फिक्सिंग के आरोप झूठे थे। इसलिए उन पर से प्रतिबंध हटाकर उन्हें भी एक मौका दिया जाना चाहिए, क्योंकि उन्होंने भी मुल्क के लिए खेला है। बता दें कि पाकिस्तानी क्रिकेटर शोएब अख्तर ने भी खुलासा किया था कि हिंदू होने के कारण कनेरिया के साथ पाकिस्तान टीम ने अन्याय किया था।

न्यूज एजेंसी IANS से बात करते हुए कनेरिया ने गुरुवार (28 अप्रैल 2022) को कहा कि पाकिस्तानी टीम के कप्तान शाहिद अफरीदी ने उनके खिलाफ साजिश रची थी। उन्होंने कहा, “शाहिद अफरीदी ने मुझे हमेशा नीचा दिखाया। वह मुझे बेंच पर रखते थे और वनडे मैच नहीं खेलने देेते थे। वह नहीं चाहते थे कि मैं टीम में रहूँ।”

कनेरिया ने कहा कि शाहिद अफरीदी चरित्रहीन और झूठे व्यक्ति हैं। उनके अच्छे प्रदर्शन से शाहिदी अफरीदी जलते थे और दूसरे खिलाड़ियों को भी उनके खिलाफ भड़काते थे। कनेरिया का कहना है कि इन सब बातों को नजरअंदाज कर वह सिर्फ क्रिकेट पर ध्यान देते थे। अगर शाहिद अफरीदी कप्तान नहीं होते तो वह 18 वनडे मैचों की तुलना बहुत अधिक मैच खेलते।

कनेरिया ने आगे बताया, “मेरे खिलाफ स्पॉट फिक्सिंग के झूठे आरोप लगाए गए थे। मेरा नाम इस मामले में शामिल व्यक्ति के साथ जोड़ा गया था। वह अफरीदी समेत अन्य पाकिस्तानी क्रिकेटरों का भी दोस्त था, लेकिन मुझे इसमें शामिल किया गया था। मैं किसी तरह की फिक्सिंग में शामिल नहीं रहा।”

कनेरिया ने कहा कि शोएब अख्तर पहले व्यक्ति हैं, जिन्होंने उनकी समस्या के बारे में पहली बार सार्वजनिक रूप से बोला था। अख्तर ने खुले मंच से कहा था कि एक हिंदू होने के कारण टीम में कनेरिया के साथ कैसा व्यवहार किया गया था। उन्होंने कहा कि बाद में कई अधिकारियों ने उन पर दबाव डाला, इसके बाद अख्तर ने इस बारे में बात करना बंद कर दिया।

उन्होंने पीसीबी से अपने खिलाफ लगाए गए प्रतिबंध को हटाने का अनुरोध किया, ताकि वे शांति और इज्जत के साथ रह सकें। कनेरिया ने कहा कि पाकिस्तान के लिए खेलना उनके लिए गर्व की बात है और इसके लिए वह PCB के आभारी हैं। उन्होंने कहा कि कई फिक्सर पर से प्रतिबंध हटाया जा चुका है। इसलिए अन्य खिलाड़ियों की तरह उन्हें भी मौका मिलना चाहिए।

बता दें कि 2012 में इंग्लिश काउंटी चैंपियनशिप प्रो-लीग मैचों में स्पॉट फिक्सिंग के दो आरोपों में इंग्लिश एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) द्वारा सभी क्रिकेट से उन पर आजीवन प्रतिबंधित लगा दिया गया था। इसके बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने उन्हें सस्पेंड कर दिया था।

पाकिस्तान के कराची के बेहद गरीब घर में जन्मे कनेरिया साल 2000 और 2010 के बीच 61 टेस्ट मैच खेले, जिनमें 34.79 की औसत से 261 विकेट लिए। उन्होंने 18 वनडे मैचों में 45.53 की औसत से 15 विकेट लिया था। वह टेस्ट क्रिकेट में पाकिस्तान के लिए सबसे अधिक विकेट लेने वाले स्पिनर हैं। कनेरिया क्रिकेटर वसीम अकरम (414), वकार यूनिस (373) और इमरान खान (362) के बाद सर्वकालिक सूची में चौथे स्थान पर हैं। कई मैचों में कनेरिया ने पाकिस्तानी टीम को जिताने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

कनेरिया को लेकर क्या कहा था शोएब अख्तर ने?

पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर शोएब अख्तर ने दिसंबर 2019 में एक चैट शो में स्वीकारा किया था कि दानिश कनेरिया हिंदू थे, इसलिए पाकिस्तानी टीम में उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया जाता था। साथ ही टीम के खिलाड़ी यहाँ तक कहते थे कि दानिश कनेरिया उनके साथ खाना क्यों खाते हैं?

इस दौरान शोएब अख्तर ने यूसुफ योहाना के बारे में बताते हुए कहा था, “यूसुफ के नाम 12 हजार रन दर्ज हैं। मगर, हमने कभी उनका सम्मान नहीं किया। दो-तीन खिलाड़ियों से मेरी लड़ाई भी हुई। मैंने कहा कि अगर कोई हिंदू है तो भी वो खेलेगा और फिर उसी हिंदू ने हमें टेस्ट सीरीज जिताई।”

दानिश कनेरिया का जिक्र करते हुए शोएब ने कहा था, “बात खुल जाएगी, मगर बताना चाहता हूँ कि कुछ खिलाड़ियों ने मुझसे कहा कि दानिश कनेरिया हमारे साथ खाना क्यों खाता है। मैंने उन सभी से कहा कि मैं तुम्हें यहाँ से उठाकर बाहर फेंक दूँगा, तुम अपने घर के कप्तान होगे। वो खिलाड़ी तुम्हें 6-6 विकेट लेकर दे रहा है। इंग्लैंड में दानिश और शमी ने ही हमें सीरीज जिताई थी।”

बता दें कि यूसुफ योहाना मूल रूप से ईसाई थे, लेकिन बाद में अचानक उन्होंने मुस्लिम धर्म अपना लिया था। कहानी तो यह भी चली कि क्रिकेट करियर को लंबा खींचने और प्रताड़ना से बचने के लिए उनके जैसे स्टार खिलाड़ी को भी धर्म परिवर्तन करना पड़ा।

27 बड़े शहर, 16 करोड़ लोग घरों में कैद: कोरोना के कारण ये है चीन का हाल, भूख से बेहाल हैं लोग, खाने-पीने के चीजों की किल्लत

चीन में कोरोना महामारी (Corona Virus) को लेकर कोहराम मचा हुआ है। यहाँ ‘जीरो कोविड पॉलिसी’ के कारण कम केस सामने आने पर भी करोड़ों की आबादी वाले शहरों में तुरंत लॉकडाउन (China Lockdown) लगा दिया जा रहा है। विदेशी मीडिया सीएनएन के मुताबिक, इन दिनों सबसे बुरी स्थिति चीन की आर्थिक राजधानी शंघाई की है। यहाँ एक दिन में संक्रमण के 10,000 नए मामले दर्ज किए गए हैं। कोरोना के प्रकोप को देखते हुए चीन ने अपने दो सबसे बड़े शहरों बीजिंग और शंघाई में लॉकडाउन लगा दिया है। केवल शंघाई में 2 करोड़ 50 लाख लोग अपने घरों में कैद रहने को मजबूर हैं। इस बीच महामारी पर काबू पाने के लिए अधिकारियों ने राजधानी बीजिंग में भी बड़े पैमाने पर कोरोना संक्रमितों का टेस्ट शुरू कर दिया है और स्कूलों को बंद कर दिया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, चीनी सरकार की दमनकारी नीति (China Zero Covid Policy) के कारण देश में कोहराम मचा हुआ है। चीन की सख्ती का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि व​ह संक्रमण को रोकने के लिए, जहाँ कम मामले सामने आ रहे हैं, वहाँ भी लॉकडाउन लगाकर लोगों को घरों में कैद रहा है। सीएनएन के अनुसार, वर्तमान में चीन के 27 शहरों में लॉकडाउन लगा हुआ है। इन शहरों में रहने वाले 16.5 करोड़ लोग अपने-अपने घरों में कैद हैं।

जानें आखिर क्या है चीन की जीरो कोविड पॉलिसी

चीन महामारी के दौरान अपनी जीरो कोविड पॉलिसी पर अड़ा हुआ है। इसके तहत वह वायरस को रोकने के लिए लॉकडाउन, मास टेस्टिंग, क्वारंटाइन और देश की सीमाएँ बंद करने जैसे कठोर कदम उठा रहा है, लेकिन चीन में अत्यधिक संक्रामक ओमीक्रोन वेरिएंट के कारण कोरोना के तेजी से बढ़ते मामलों के कारण उसकी पॉलिसी पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। कोरोना वायरस तेजी से चीन के अलग-अलग प्रांत और शहरों में फैलता जा रहा है। ऐसे में चीन की जीरो कोविड पॉलिसी के कड़े प्रतिबंधों का सकारात्मक असर कहीं भी दिखाई नहीं दे रहा है। इन शहरों में प्रतिबंधों के कारण हाहाकार मचा हुआ है। स्थिति यह है कि लोग भूख से मरने को मजबूर हैं।

बताया जा रहा है कि लॉकडाउन से पहले नए इलाकों में कोई भी चेतावनी जारी नहीं की जा रही। ऐसे में अचानक लगे लॉकडाउन से लोगों में व्यापक आक्रोश है। लोगों को खाने-पीने की चीजें स्टॉक करने का भी मौका नहीं मिल पा रहा है। आलम है कि जिन शहरों में एक या दो केस मिल रहे हैं, वहाँ भी लोग डरे हुए हैं। वे लॉकडाउन के डर से खरीदारी करने में लग रहे हैं, जिसके चलते चीन के शहरों में खाने-पीने समेत दूसरे जरूरी सामानों की किल्लत होने लगी है। पिछले महीने से चीन में एक बार फिर से कोरोना के मामले तेजी से बढ़ने लगे, जो अब तक जारी हैं। साल 2020 की शुरुआत में वुहान में इसी तरह का प्रकोप देखने को मिला था, लेकिन उस वक्त संक्रमण वर्तमान रफ्तार के मुकाबले काफी धीमा था।

गौरतलब है कि पूरी दुनिया में कोरोना फैलाने के लिए बदनाम चीन में एक बार फिर से इस जानलेवा वायरस का कहर देखने को मिल रहा है। भयावह होते हालातों को देखते हुए चीनी सरकार ने 11 मार्च 2022 को कड़ा फैसला लेते हुए देश के औद्योगिक शहर चांगचुन में लॉकडाउन लगाकर 9 मिलियन (90 लाख) लोगों को घरों में कैद कर दिया था।

लोग भूख से आत्महत्या करने को मजबूर

बीते दिनों चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा था कि वायरस नियंत्रण और रोकथाम के प्रयासों में कोई कमी नहीं होनी चाहिए, जबकि आर्थिक और सामाजिक विकास नीति पर पड़ने वाले प्रभावों को चीन कम करने का प्रयास करेगा। हाल ही में शंघाई में स्थानीय लोगों और स्वास्थ्य अधिकारियों के बीच झड़प की खबरें भी सामने आई थीं। कई शंघाई निवासी दवाओं और भोजन की कमी के बारे में शिकायत करने के लिए सोशल मीडिया का भी सहारा ले चुके हैं। शंघाई के लोग भोजन के लिए पूरी तरह सरकार पर निर्भर हैं और भूखों मर रहे हैं। पिछले दिनों वहाँ लोगों द्वारा आत्महत्या करने की खबरें भी सामने आई थीं।

जहाँगीरपुरी में C से G ब्लॉक में शिफ्ट कर दिया कबाड़, अब भी सरकारी जमीन पर कब्ज़ा: चप्पे-चप्पे पर पुलिस, मस्जिद के सामने बुलडोजर के निशान

16 अप्रैल, 2022 को दिल्ली के जहाँगीरपुरी में हनुमान जयंती की शोभा यात्रा पर हमला किया गया था। हमले के दौरान हिन्दू संगठनों ने मस्जिद से पत्थरबाजी के साथ हिंसा में अवैध बांग्लादेशियों के शामिल होने का आरोप लगाया। इस घटना के बाद MCD ने उस क्षेत्र के अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलवाया था। हालाँकि, MCD की इस कार्रवाई पर कुछ ही देर बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्टे लगा दिया था। ऑपइंडिया की टीम ने 28 अप्रैल, 2022 (गुरुवार) को घटनास्थल पर जा कर अभी के हालात का जायजा लिया।

घटनास्थल और आस पास बचा बस एक तिहाई कबाड़

हिंसा से पहले और घटनास्थल और आसपास जितना कबाड़ था, अब उसका एक तिहाई ही रह गया है। काफी कबाड़ और अतिक्रमण हटाया जा चुका है। एक अनुमान के मुताबिक, दो तिहाई हिस्सा हट चुका है लेकिन अभी भी सड़कों के किनारे एक तिहाई हिस्सा दिखाई दे जाता है। हालाँकि, मौके पर गंदगी का अम्बार भी पाया गया।

घटनास्थल C ब्लॉक पर अतिक्रमण कम हुआ पर गंदगी का ढेर

कबाड़ को शिफ्ट किया गया जहाँगीरपुरी के ही G ब्लॉक में

स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के मुताबिक, ये कबाड़ घटनास्थल C ब्लॉक से हटा कर जहाँगीरपुरी के ही G ब्लॉक में शिफ्ट कर दिया गया है। G ब्लॉक में धोबीघाट कहे जाने वाले क्षेत्र के आगे खुले में सरकारी जमीन पर ऑपइंडिया की टीम को ढेर सारा कबाड़ जमा मिला। G ब्लॉक में ट्रकों और अन्य छोटे वाहनों की लगातार मूवमेंट दिखाई पड़ी। इस स्थान की हिंसा स्थल से दूरी लगभग 1 किलोमीटर है।

G ब्लॉक धोबी घाट की सरकारी जमीन पर जमा कबाड़

घटनास्थल पर पुलिस और पैरामिलिट्री कर रही कैम्प

घटना के लगभग 12 दिनों बाद स्थिति काफी हद तक सामान्य हुई है। इसके बाद भी अभी पुलिस और पैरामिलिट्री मौके पर कैम्प कर रही है। C ब्लॉक में जिस सड़क पर हिंसा की शुरुआत हुई थी, उसके चारों तरफ बैरिकेड लगी हुई है। जामिया मस्जिद के बगल भी पुलिस बल तैनात हैं। सुरक्षा बलों में महिला कर्मियों की भी अच्छी-खासी तादाद दिखी। पुलिस ने C ब्लॉक और आसपास के इलाकों को सेक्टर में बाँट रखा है। बैरिकेड के अंदर स्थानीय निवासियों को आने जाने की छूट है। रात में अतिरिक्त सख्ती बरती जा रही है।

मस्जिद जाने वाली रोड पर तैनात पुलिस और बैरिकेड

बुलडोजर से टूटा मलबा अभी भी मस्जिद और घरों के आगे

लगभग सप्ताह भर पहले MCD द्वारा चलाए गए बुलडोजर के बाद अभी भी तोडा गया मलबा सड़क के किनारे पड़ा दिखाई दिया। जामिया मस्जिद के आगे की तोड़ी गई दीवाल अभी भी उसी हाल में है। मस्जिद से सटा वकील के बोर्ड का ऑफिस का बाहरी हिस्सा भी टूटी हालत में पड़ा दिखाई दिया जहाँ हिंसा से पहले कबाड़ की बाइकें खड़ी की गईं थीं। विभिन्न पार्टियों द्वारा किए जा रहे राजनैतिक दौरों के दौरान उन्हीं स्थानों को दिखाया जा रहा है।

मस्जिद और मलबा

इसी के साथ सब्ज़ी, दूध व अन्य जरूरी सामानों की लगभग आधे से अधिक दुकानें खुली पाई गईं। C ब्लॉक के जिस सड़क पर हिंसा हुई थी उस सड़क पर अधिकतर दुकानें बंद ही रहीं। जिन दुकानों पर अतिक्रमण बता कर बुलडोजर चला था उसमें से अधिकतर बंद ही मिलीं। शाम 6 बजे से 9 बजे के बीच बाजर में थोड़ी चहल-पहल हुई। उसके बाद बाजर बंद हो गए।

C ब्लॉक रोड पर बंद दुकानें

मस्जिद के सामने खाली मैदान में भी भी झुग्गियाँ

मस्जिद के ठीक दूसरी एक खाली मैदान है। उस मैदान में हिंसा से पहले भी झुग्गियाँ थीं जो अभी भी उसी हालत में हैं। बताया जाता है कि झुग्गियों में ही अधिकतर लोग कबाड़ का काम करने वाले रहते हैं। अतिक्रमण विरोधी अभियान चलने के बाद C ब्लॉक के उस खाली मैदान पर अभी भी वो झुग्गियाँ उसी हालत में बनी हुई हैं।

मस्जिद के सामने अवैध झुग्गी