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3000+ हिंदुओं को ईसाई बनाना चाहता था चर्च, इनकार सुन बौखलाया: पब्लिक रोड ब्लॉक की, हिंदू बच्चों को पढ़ाने से भी किया मना

तमिलनाडु के तिरुवन्नामलाई के मारुथुवमपडी गाँव से चौंकाने वाला मामला प्रकाश में आया है, जहाँ गाँव के लोगों ने गाँव में ही स्थित एक रोमन कैथोलिक चर्च पर धर्मान्तरण नहीं करने पर रास्ता रोकने का आरोप लगाया है। इस मामले को लेकर गाँव के लोगों ने जिले के कलेक्टर से आरोपित चर्च के खिलाफ कार्रवाई करने की माँग की है।

रिपोर्टों के मुताबिक, ग्रामीणों का आरोप है कि चर्च ने उन्हें ईसाई धर्म अपनाने को कहा था, लेकिन जब उन्होंने इससे इनकार कर दिया तो उसने लोगों को प्रताड़ित करने का ये रास्ता निकाला। इसके साथ ही चर्च ने धर्मान्तरण से इनकार करने वाले लोगों के बच्चों को शिक्षा देने से भी इनकार कर दिया है। इस गाँव में करीब 3000 हिंदू रहते हैं, जिन्होंने चर्च की धर्मान्तरण की माँग को ठुकरा दिया था, जिसके बाद चर्च ने तौर पर उस रास्ते पर दीवार खड़ी कर दिया है, जिससे होकर हिंदू मुख्य सड़क तक पहुँचते थे।

चर्च के इस कार्य के बाद गाँव के लोगों ने तिरुवन्नामलाई जिले के कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपकर कैथोलिक चर्च के द्वारा संचालित स्कूल के प्रशासनिक अधिकारी फादर येसुपदम पर ईसाई धर्म अपनाने के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि ईसाई पादरी ने पब्लिक रोड को रोकने के लिए चर्च के चारों तरफ चर्च परिसर की दीवार खड़ी कर दिया है। चर्च की स्कूल में हिंदू और ईसाई बच्चों के साथ अलग-अलग व्यवहार का आरोप है।

100 साल से भी अधिक समय से कर रहे सड़क का इस्तेमाल

ग्रामीणों का कहना है कि वो बीते 100 साल से भी अधिक समय से इस सड़क का इस्तेमाल करते रहे हैं। लेकिन जब से चर्च ने इस रास्ते को बंद कर दिया है, तब से लोगों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट तक पहुँचने के लिए लोगों को लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। लोगों ने शिकायत की है कि कोरोना के कारण दो साल तक स्कूल बंद होने के बाद जब स्कूल खुला तो वे खुश थे, लेकिन चर्च के स्कूल अधिकारियों ने उन्हें धर्मान्तरण करने के लिए कहा।

आरोप ये भी हैं कि स्कूल की माँग के मुताबिक, पूरी ट्यूशन फीस और दूसरी फीस का भुगतान करने के बाद भी हिंदू छात्रों को किसी भी तरह की रियायत नहीं दी जाती है। बल्कि, परीक्षा शुरू होने पर हिंदू छात्रों को स्कूल आने से मना कर दिया गया। स्थानीय लोगों के मुताबिक, अब तो चर्च की स्कूल में केवल ईसाई बच्चों को ही अंदर जाने की इजाजत है। हालाँकि, इस मसले पर चर्च के पादरी ने विवादित जमीन को चर्च की ही बताया है और ये भी दावा किया कि उसे इस पर दीवार बनाने का अधिकार है। इस मामले में जानकारी के लिए ऑपइंडिया ने तिरुवन्नामलाई जिले के अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई जबाव नहीं दिया गया।

BJP नेता के जवान बेटे का पेड़ से लटकता शव: पश्चिम बंगाल पुलिस बता रही आत्महत्या, तृणमूल के गुंडों पर भाजपा का आरोप

पश्चिम बंगाल के मेदनीपुर जिले में एक भाजपा कार्यकर्ता के बेटे की लाश फाँसी पर लटकी हुई मिली है। मृतक का नाम देबाशीष मन्ना है, जिसकी उम्र लगभग 22 साल है। शव को पूरी मेदनीपुरी के खेजुरी नाम के इलाके में एक पेड़ से लटकाया गया था। देबाशीष के पिता का नाम मुक्तिपदा मन्ना है। घटना 7 मई 2022 (शनिवार) की बताई जा रही है।

पश्चिम बंगाल पुलिस इस घटना को आत्महत्या बता रही है। पुलिस के मुताबिक, “अभी तक पीड़ित परिवार ने कोई शिकायत दर्ज नहीं करवाई है। अगर कोई शिकायत मिलती है तो हम मामले की जाँच करेंगे।” वहीं इस घटना के बाद भाजपा के स्थानीय नेताओं ने ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल के कार्यकर्ताओं पर आरोप लगाया है। आपको बता दें कि गृहमंत्री अमित शाह अपने बंगाल दौरे पर फाँसी पर लटके पाए गए भाजपा कार्यकर्ता अर्जुन चौरसिया के घर गए थे।

गौरतलब है कि 6 मई 2022 को अर्जुन चौरसिया का शव घोष बागान इलाके में रेल क्वार्टर की एक खाली पड़ी बिल्डिंग में मिला था। अर्जुन की उम्र 26 साल थी।

गिरफ्तारी के लिए पत्रकार अमन चोपड़ा के घर सामने डेरा डालकर बैठी राजस्थान पुलिस: दो मामलों में HC लगा चुका है रोक, लोग बता रहे बदले की कार्रवाई

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) के नेतृत्व वाली राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार (Rajasthan Government) ‘न्यूज़ 18’ के पत्रकार अमन चोपड़ा (Aman Chopra) के पीछे पड़ी हुई है। उनके आवास के बाहर राजस्थान के 5 पुलिसकर्मियों ने डेरा डालकर बैठे हुए हैं। राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा दो मामलों में अमन चोपड़ा की गिरफ्तारी पर रोक लगाने के बाद वहाँ की सरकार ने अब तीसरी FIR में उन्हें गिरफ्तार करने की कोशिश कर रही है। इससे पता चलता है कि राजस्थान की सरकार बदले की भावना से काम कर रही है।

अमन चोपड़ा के खिलाफ तीसरा मामला राजस्थान के डूंगरपुर जिले में दर्ज किया गया है। इसके पहले बूँदी और अलवर में दर्ज मामलों को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने अमन चोपड़ा की गिरफ्तारी पर रोक लगा दिया था। डूंगरपुर के SP सुधीर जोशी ने PTI को बताया कि उनकी टीम नोएडा में ही रूकी हुई है और चोपड़ा को हर संभावित जगह तलाश कर रही है। जोशी ने आरोप लगाया कि नोएडा पुलिस उनके काम में बाधा डाल रही है।

SP जोशी के आरोपों का जवाब देते हुए सेंट्रल नोएडा के एसीपी-2 योगेंद्र सिंह ने कहा कि राजस्थान पुलिस की टीम अमन चोपड़ा के खिलाफ गैर-जमानती वारंट लेकर दोपहर करीब 3 बजे बिसरख पुलिस थाने आई थी। कानूनी प्रक्रिया पूरी की और हमारे दो कर्मी उनके साथ गए। वहाँ चोपड़ा के घर पर ताला लगा था, जिसके बाद उन्होंने वारंट को घर के बाहर चिपका दिया है। उन्होंने कहा कि राजस्थान पुलिस ने आने की जानकारी नहीं दी थी।

शनिवार (7 मई 2022) को राजस्थान पुलिस की टीम अमन चोपड़ा के घर गई थी, लेकिन वे वहाँ नहीं मिले। इसके बाद राजस्थान के पुलिसकर्मियों ने उनके घर के बाहर डेरा डाल रखा है। हालाँकि, इस दौरान उत्तर प्रदेश पुलिस भी वहाँ पर मौजूद है, ताकि कोई अवैध कार्रवाई न की जा सके। इसके बाद राजस्थान पुलिस के कर्मी आवश्यक कागजी कार्रवाई के लिए स्थानीय बिसरख थाने गए हैं।

बता दें कि शनिवार को राजस्थान पुलिस उस सोसाइटी में घुस गई, जहाँ अमन चोपड़ा रहते हैं और उनके दरवाजे पर वॉरंट चिपका दिया। ये सब तब हो रहा है, जब राजस्थान उच्च-न्यायालय ने ‘न्यूज़ 18’ के एडिटर अमन चोपड़ा के खिलाफ कोई भी कार्रवाई करने से पुलिस को रोक रखा है। उनके घर के दरवाजे पर गिरफ़्तारी का वॉरंट चिपकाने के बाद राजस्थान पुलिस को यूपी पुलिस थाने लेकर गई। इस दौरान अमन चोपड़ा के घर का ताला बंद था।

इससे पहले राजस्थान पुलिस ने ‘न्यूज़ 18’ के दफ्तर में जाकर भी इस तरह की हरकतें की थीं और बाद में बयान दिया था कि अमन चोपड़ा उन्हें नहीं मिले। उनके खिलाफ राजस्थान में धार्मिक भावनाएँ भड़काने का मामला दर्ज किया गया है। राजस्थान के अलवर में जिस तरह से मंदिरों पर बुलडोजर चलाया गया और प्रतिमाएँ फेंक दी गईं, उस पर शो करने के कारण कॉन्ग्रेस सरकार उनके पीछे पड़ी है। अलवर में हिन्दू संगठनों ने भी इस कदम के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन किया है।

राजस्थान पुलिस की इस करतूत का लोग विरोध कर रहे हैं। भाजपा के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इसे उच्च न्यायालय के आदेश का पूर्ण और बेशर्मी भरा उल्लंघन करार दिया। अधिवक्ता आशुतोष दुबे ने कहा कि ये नई संस्कृति बन गई है कि असली दोषियों को पकड़ने की बजाए घटना के खिलाफ आवाज़ उठाने वालों को ही चुप कराओ। विक्रांत ने लिखा कि महाराष्ट्र में अर्णब गोस्वामी को गिरफ्तार करने के बाद भी कॉन्ग्रेस ने कोई सबक नहीं सीखा है।

नवनीत राणा ने किया CM उद्धव के खिलाफ चुनाव लड़ने का ऐलान, कहा – हनुमान चालीसा अपराध तो 14 दिन क्या, 14 साल की जेल के लिए भी तैयार

सांसद नवनीत राणा जेल से छूटने के बाद अस्पताल में भर्ती थीं, जहाँ उनका उनका इलाज चल रहा था। अब उन्होंने अस्पताल से निकले ही मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है। राणा दंपति सोमवार (9 मई, 2022) को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली निकलेंगे और केंद्रीय गृह मंत्रालय जाएँगे। नवनीत राणा ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिल कर पूरे मामले की शिकायत देने की योजना भी बनाई है। जेजे अस्पताल में उनका स्पोंडिलोसिस का इलाज चल रहा था।

उससे पहले उन्हें भायखला जेल में रखा गया था। अस्पताल से निकलने के बाद समर्थकों ने ‘जय श्री राम’ के नारे के साथ उनका स्वागत किया। उन्होंने शिवसेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे को चुनौती देते हुए कहा कि आगामी चुनाव में वो कहीं से भी लादेन, वो उनके खिलाफ ही ताल ठोकेंगी। आगामी बृहन्मुम्बई महानगरपालिका (BMC) चुनावों में शिवसेना के खिलाफ प्रचार करने का ऐलान भी किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर हनुमान चालीसा पढ़ना अपराध है तो इसके लिए वो 14 दिन क्या, 14 वर्षों तक भी जेल में रहने के लिए तैयार हैं।

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री एवं भाजपा नेता देवेंद्र फड़नवीस ने भी नवनीत राणा से मुलाकात की है। 36 वर्षीय सांसद ने कहा, “मैं उद्धव ठाकरे के खिलाफ चुनाव लड़ूँगी।हिम्मत है तो जीत कर दिखाओ।” 12 दिन जेल और 3 दिन अस्पताल में रह कर वापस आईं नवनीत राणा ने ने जेल में अधिकारियों द्वारा दुर्व्यवहार के आरोप भी लगाए थे। उन्होंने कहा, “संजय राउत ने मुझे 20 फ़ीट भूमिगत दफ़न करने की बात कही थी। BMC में शिवसेना ने जो भ्रष्टाचार किया है, उसके लिए जनता उसे जमीन से 20 फ़ीट नीचे फेंक देगी।”

राणा दंपति ने कहा कि शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत और मंत्री अनिल परब जल्द से जेल जाने वाले हैं। वहीं अब कहा जा रहा है कि महाराष्ट्र सरकार नवनीत राणा के खिलाफ कोर्ट में अवमानना का याचिका डालने वाली है, क्योंकि दावा है कि उन्होंने मीडिया में बयान देकर कोर्ट के आदेश का उल्लंघन किया है। नवनीत राणा ने ऐलान कर दिया है कि उनकी लड़ाई जारी रहेगी। दोनों फ़िलहाल जमानत पर बाहर हैं। अब सभी की निगाहें अदालत की अगली सुनवाई पर हैं।

बूढ़ी मुमताज के चरित्र पर 75 साल के शौहर को हुआ शक, गुस्से में उतार दिया मौत के घाट: गर्दन और सीने पर चाकू 7 बार घोंपा

महाराष्ट्र के मुंबई से एक चौंकाने वाली घटना प्रकाश में आई है, जहाँ 75 साल के एक वृद्ध मुस्लिम व्यक्ति ने 70 वर्षीय बीवी के चरित्र पर शक होने के कारण उसकी हत्या कर दी। इसके बाद आरोपित ने आत्महत्या की कोशिश की। फिलहाल उसका अस्पताल में इलाज चल रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, हत्या की ये घटना मलाड वेस्ट इलाके के अंतर्गत आने वाले शिवाजी नगर की है। यहीं के रहने वाले समरुद्दीन चंदासा शेख (75) को अपनी बीवी मुमताज समरुद्दीन शेख (70) के चरित्र पर काफी दिनों से शक था। इसी के चलते उसने चाकू से गोदकर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद उसने खुद को भी चाकू मार लिया और सुसाइड करने की कोशिश की। फिलहाल उसे इलाज के लिए कूपर अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

इस मामले में मालवानी पुलिस ने इंडियन पीनल कोड की धारा 302 के तहत हत्या का केस दर्ज कर मामले की जाँच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि आरोपित को उसकी बीवी पर शक था, जिसको लेकर दोनों मियाँ-बीवी में आए दिन मारपीट होती रहती थी। उसने कई बार कई जगहों पर अपनी बीवी का पीछा भी किया था। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक घटना शनिवार (7 मई 2022) की सुबह की है। उस दौरान वृद्ध दंपति घर पर अकेले ही थे। चरित्र वाले मामले को लेकर ही दोनों के बीच मारपीट शुरू हुई, इस बीच शेख ने रसोई से चाकू निकाला और बीवी की गर्दन और सीने पर सात बार वार किया।

खुद को चाकू मार मदद के लिए चिल्लाया

इस घटना को लेकर मालवानी थाने के एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि मुमताज को चाकू मारने के बाद आरोपित ने खुद को भी चाकू मारा। इसके बाद मदद के लिए चिल्लाया। आवाज सुनकर आसपास के लोग उसके घर पहुँचे तो देखा कि मुमताज बिस्तर पर खून से लथपथ पड़ी हुई है। इसके बाद वे दोनों को कूपर अस्पताल ले गए जहाँ मुमताज को मृत घोषित कर दिया गया और शेख को इलाके लिए आईसीयू में भर्ती कराया गया। पुलिस का कहना है कि दंपति के बेटे रफीक शेख का बयान दर्ज कर लिया गया है। उसकी हालत गंभीर है। अब आरोपित समरुद्दीन शेख को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद गिरफ्तार करेंगे।

UP में उतारे गए 100000 लाउडस्पीकर, CM योगी ने अफसरों से कहा- किसी कीमत पर ये दोबारा न लगें

देशभर में लाउडस्पीकर (Loud Speaker) के इस्तेमाल को लेकर जारी सियासत के बीच उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Aadityanath) ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि अब तक प्रदेश में धार्मिक स्थलों से 1,00,000 लाउडस्पीकरों को हटाया गया है और अब ये किसी भी कीमत पर दोबारा नहीं लगने चाहिए। ये जिम्मेदारी अब अधिकारियों की होगी।

दो दिन के झाँसी और ललितपुर के दौरे पर पहुँचे सीएम योगी ने शनिवार (7 मई 2022) को झाँसी में जन प्रतिनिधियों से मुलाकात की और विकास कार्यों की समीक्षा की। अधिकारियों के साथ बैठक में उन्होंने सख्त संदेश दिया है कि धार्मिक कार्य केवल धार्मिक परिसरों के अंदर ही होने चाहिए, सड़कों पर नहीं। इसके कारण सड़कों पर चलने वाले लोगों को किसी भी तरही की समस्या नहीं होनी चाहिए।

गौरतलब है कि शोर को कम करने और लाउडस्पीकर समेत दूसरे वाद्य यंत्रों को निर्धारित डेसिबल की लिमिट में रखने को लेकर धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकरों को हटाने की मुहिम की शुरुआत राज्य सरकार ने 25 अप्रैल 2022 को शुरू की थी। यह अभियान 1 मई तक चला। इस मसले पर एक लखनऊ में एक बयान जारी कर यूपी के एडीजी लॉ एँड ऑर्डर प्रशांत कुमार ने कहा जिन लाउडस्पीकरों को लगाने के लिए प्रशासन से इजाजत नहीं ली गई है, उन सभी को अवैध श्रेणी में रखा गया है और सभी धार्मिक स्थानों से इन्हें बिना किसी भेदभाव के हटाया जा रहा है। इसके अलावा लाउडस्पीकरों को हटाने की प्रक्रिया को दौरान हाई कोर्ट के आदेशों को ध्यान में रखा जा रहा है।

विकास योजनाओं को समय पर पूरा करने का निर्देश

इसके साथ ही सीएम ने अधिकारियों को विकास परियोजनाओं को समय पर पूरा करने का निर्देश देते हुए काम समय पर नहीं करने वाली कंपनियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने को कहा है। इस बीच उन्होंने झाँसी में कानून व्यवस्था को लेकर नाराजगी भी जताई। इसको लेकर जिले के एसपी से जबाव तलब भी किया। उन्होंने जिले की कानून व्यवस्था को स्वस्थ बनाए रखने और भू माफियाओं पर नकेल कसने पर भी जोर दिया।

गौरतलब है कि इससे पहले 19 अप्रैल को भी सीएम योगी ने स्पष्ट चेतावनी दी थी कि लाउडस्पीकर की आवाज परिसर के अंदर तक ही सीमित रहनी चाहिए।

ताजमहल के 20 तालाबंद कमरों को खोलने के लिए HC में याचिका, दावा – रखी हैं हिन्दू प्रतिमाएँ: मंत्रालय ने कहा था – सुरक्षा कारणों से बंद

इलाहबाद उच्च न्यायालय के लखनऊ बेंच में आगरा स्थित ताजमहल को लेकर एक याचिका दायर की गई है। याचिका में ताजमहल में स्थित 20 तालाबंद कमरों को खोलने के लिए ‘भारतीय पुरातत्व विभाग (ASI)’ को निर्देश देने की माँग की गई है। याचिका में कहा गया है कि इन 20 तालाबंद दरवाजों के अंदर हिन्दू देवी-देवताओं की प्रतिमाएँ और प्राचीन सनातन साहित्य पुरालेख स्थित हैं। इस याचिका को डॉक्टर रजनीश ने दायर किया है।

रजनीश अयोध्या जिले में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के मीडिया इंचार्ज हैं। अदालत में उनका प्रतिनिधित्व अधिवक्ता रूद्र विक्रम सिंह कर रहे हैं। इस मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किए जाने के बाद वो अपनी दलीलें पेश करेंगे। याचिका में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा एक समिति गठित किए जाने की माँग की गई है, जो ताजमहल के तालाबंद कमरों में हिन्दू इतिहास के अवशेषों का पता लगाए। भाजपा नेता ने कहा कि इन कमरों को हमेशा लॉक्ड ही रखा जाता है और किसी को भी अंदर जाने की इजाजत नहीं दी जाती।

उन्होंने कहा कि इन कमरों में हिन्दू देवी-देवताओं की प्रतिमाओं के साथ-साथ सनातन साहित्य रखे हुए हैं, ऐसा माना जाता है। उन्होंने कहा कि इन कमरों को खोल कर जाँच के बाद विवादों को ख़त्म करने में कोई नुकसान नहीं है, इसीलिए उन्होंने ये याचिका दायर की है। इससे पहले 2016 में भी 6 वकील मिल कर एक याचिका दायर कर के दावा कर चुके हैं कि ताजमहल एक शिव मंदिर था। ‘बजरंग दल’ के संस्थापक विनय कटियार ने भी इस दावे को दोहराते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से यहाँ का दौरा कर हिन्दू प्रतीकों को देखने का आग्रह किया था।

इसी तरह 2019 में पूर्व केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार हेगड़े ने कहा था कि ताजमहल को मुग़ल बादशाह शाहजहाँ ने नहीं, बल्कि राजा जयसिम्हा ने बनवाया था। हालाँकि, अब तक कई इतिहासकार और ASI ऐसे दावों को नकारता रहा है। फरवरी 2018 में आगरा कोर्ट में एक एफिडेविट डाल कर ASI ने कहा था कि ताजमहल को शाहजहाँ ने एक मकबरे के रूप में बनवाया था, जिसमें उसकी बीवी मुमताज महल का कब्र रखा गया था।

रजनीश सिंह ने बताया कि वो 2020 से ही ‘सूचना का अधिकार (RTI)’ के जरिए ये पता लगाने में जुटे हुए हैं कि उन 20 तालाबंद कमरों में क्या है। उन्होंने भारतीय संस्कृति मंत्रालय में RTI याचिका दायर की थी। संस्कृति मंत्रालय ने ‘केंद्रीय सूचना आयोग’ को बताया कि इन कमरों को सुरक्षा कारणों से बंद कर के रखा गया है। इसके अलावा इस सम्बन्ध में कोई अन्य विवरण नहीं दिए गए। कई दावों में ताजमहल को शिव मंदिर ‘तेजो महालय’ होने की बात भी कही जाती रही है।

जेल में बंद कैदियों से करवाएँ बम ब्लास्ट, बदले में मिलेंगे ₹500000: खालिस्तानी आतंकियों के ISI कनेक्शन का भंडाफोड़, हुए कई खुलासे

हरियाणा के करनाल में पकड़े गए खालिस्तान के चार आतंकियों (Khalistani Terrorists) ने पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा किया है। खालिस्तानी चरमपंथ को बढ़ावा देने और आतंकियों को मदद करने में पाकिस्तान (Pakistan) और उसकी कुख्यात खुफिया एजेंसी ISI की भूमिका सामने आई है। पाकिस्तान से आतंकियों को हथियारों की सप्लाई हुई थी।

करनाल से पकड़े गए चारों आतंकी RDX जैसे विस्फोटकों को पहुँचाने के लिए तेलंगाना जा रहे थे, इसी दौरान बीच उन्हें गुरुवार (5 मई 2022) को गिरफ्तार कर लिया गया था। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि पाकिस्तान ड्रोन के जरिए विस्फोटकों, हथगोलों और हथियारों को पंजाब में भेजता था।

आरोपितों ने बताया कि इन्हें अभी तक दो जगहों पर पहुँचाए गए। पहला, अमृतसर-तरनतारन राजमार्ग, जहाँ इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) और हथियार रखे गए थे। आईईडी और ग्रेनेड की दूसरी खेप नांदेड़-हैदराबाद हाईवे पर रखी गई थी। वहीं, तीसरा खेप तेलंगाना के आदिलाबाद में पहुँचाना था। इसे पहुँचाने के दौरान वे करनाल में पकड़े गए।

आरोपित अमनदीप और गुरप्रीत ने आगे बताया कि पाकिस्तान स्थित बब्बर खालसा इंटरनेशनल (Babbar Khalsa International) का आतंकवादी हरविंदर सिंह उर्फ रिंदा (Harwinder Singh alias Rinda) ड्रोन का इस्तेमाल करके पाकिस्तान से आईईडी और हथियार भेजा था। इसी तरह से सीमा पार से ड्रग्स भी भेजे गए थे।

आरोपितों ने पंजाब में एक डीलर को ड्रोन से भेजी गई दवाओं को बेचकर पैसे हासिल किए थे, जबकि विस्फोटक, हथियार और गोला-बारूद को निर्धारित स्थानों पर पहुँचाया गया था। करनाल पुलिस ने इस ऑपरेशन से जुड़े पंजाब में हवाला ऑपरेटर और बड़े ड्रग तस्कर के खिलाफ अभियान शुरू कर दिया है।

खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, ISI के नये प्रमुख नदीम अंजुम ने भारत में अशांति फैलाने के लिए खालिस्तान आतंकी रंजीत सिंह नीता और वाधवा सिंह बब्बर सहित सभी खालिस्तानी नेताओं से लाहौर में बुलाया था। इसमें उसने कहा था कि भारत में हथियारों को बाँटने के लिए पंजाब के गैंगस्टरों और जेलों में बंध कैदियों का सहारा लें और उन्हें संगठित करने का काम करें।

इसके साथ ही ISI प्रमुख ने इन आतंकियों को कहा कि भारत के जेलों में बंद कुख्यात कैदियों को भारत में ब्लास्ट करने के लिए कहें। उन्हें हर ब्लास्ट के लिए 5 लाख रुपए दिए जाएँगे। केेंद्रीय एजेंसियों को आशंका का है कि इस नेटवर्क के अन्य संदिग्ध पंजाब, तेलंगाना, महाराष्ट्र, दिल्ली, मध्य प्रदेश और राजस्थान में छिपे हो सकते हैं। इन खुलासों को बाद एजेंसियाँ सतर्क हो गई हैं और इनसे जुड़े लोगों का पता लगाने की कोशिश कर रही हैं।

दरअसल, पाकिस्तान के नापाक इरादों का भंडाफोड़ करते हुए हरियाणा की करनाल पुलिस ने विस्फोटक और हथियारों को तेलंगाना पहुँचाने जा रहे चार संदिग्ध ‘खालिस्तानी’ आतंकवादियों को करनाल में पकड़ा था। उनकी इनोवा गाड़ी से हथियार, गोला-बारूद और IED बरामद किए गए थे।

इन आरोपितों की पहचान पंजाब के रहने वाले गुरप्रीत, अमनदीप, परमिंदर और भूपिंदर के रूप में हुई है। इस गाड़ी का इस्तेमाल पहले टैक्सी के रूप में किया जाता था। उनके खिलाफ विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908 और आर्म्स एक्ट की धारा 25, 54 और 59 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

इससे पहले, दिल्ली पुलिस ने आतंकवाद से जुड़े दो मामलों में राष्ट्रीय राजधानी और उत्तर प्रदेश से IED बरामद किया था। उन्हें पता चला था कि आतंकियों के पास से बरामद विस्फोटक पहले पाकिस्तान से पंजाब पहुँचा था और फिर वहाँ से गुर्गों को भेजे गए थे। वहीं, पंजाब में ठिकाने लगाए गए विस्फोटकों और हथियारों को खोजने का काम तेज हो गया है।

49 साल का Pak सांसद 18 साल की बीवी के लिए ‘शैतान से बद्तर’, कोर्ट में बताया – कमरा बंद करके क्या-क्या करता है

पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी के एक 49 वर्षीय पाकिस्तानी सांसद की तीसरी बीवी ने अपने शौहर से खुला (महिलाओं को तलाक का अधिकार) लेने का ऐलान किया है। तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के इस 49 वर्षीय सांसद का नाम आमिर लियाकत है। उनकी 18 वर्षीय पत्नी और मशहूर TV अदाकारा सैयदा दानिया शाह ने अपने शौहर को ‘शैतान से भी बुरा’ बताया है। दोनों का निकाह 3 महीने पहले 9 फरवरी 2022 को हुआ था।

इस फैसला का ऐलान खुद दानिया शाह ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल से किया है। उन्होंने 7 मई 2022 (शनिवार) को एक वीडियो जारी किया। वीडियो में उन्होंने कहा, “हैलो मैं दनिया। आज मैं आमिर लियाकत से अलग होने के लिए अदालत गई थी। बाकी सारी जानकारी आपको न्यूज़ के माध्यम से मिलेगी।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दानिया ने अपने शौहर पर खुद को एक छोटे से कमरे में बंद रखने का आरोप लगाया है। दनिया के मुताबिक, “उसका बर्ताव शैतान से भी बुरा है। आमिर आए दिन शराब के नशे में मुझे पीटता था। साथ ही वो मुझे और मेरे परिवार को लगातार धमकियाँ भी देता था। मैंने अदालत से माँग की है कि वो आमिर को हमें घर, 15 करोड़ रुपए और ज्वैलरी देने का आदेश दें।”

एक ऑडियो के मुताबिक दनिया ने आरोप लगाया, “वो (आमिर) कहता है कि मैं दुनिया छोड़ सकता हूँ पर नशा नहीं। न जाने कौन सा नशा है वो और कहाँ से उसे लाता है। वो सफेद रंग का होता है और काले रंग की प्लेट में बनाता है उसको। बाद में उसे वो नाक से लेता था। इसके अलावा वो वोडका भी पीता था।’

आरोपों के जवाब में सांसद शौहर ने जारी की ऑडियो और तस्वीरें

आमिर लियाकत ने खुद पर अपनी बीवी द्वारा लगाए गए आरोपों को बेबुनियाद बताया है। साथ ही उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो क्लिप शेयर किया है। वीडियो क्लिप में ऊपर टाइटल के तौर पर उन्होंने लिखा, “इसकी मासूमियत पर जाने से पहले इनका असली चेहरा देखिए। वीडियो की शुरुआत दनिया के वीडियो से होती है। बाद में दनिया की कई तस्वीरें हैं। पीछे से एक आवाज आ रही है। आवाज में “क्लाइंट सख्त है। मैं नहीं झेल सकती उसको। दूसरा क्लाइंट आ गया। मैंने पहले क्लाइंट से 5 हजार रुपए ले लिए हैं” जैसी कई बातें हैं।

पुलिस के साथ घूम रहा था जहाँगीरपुरी का मास्टरमाइंड तबरेज़, ‘तिरंगा यात्रा’ में भी आगे: अब धराया, कोर्ट ने 8 दंगाइयों की जमानत याचिका रद्द की

जहाँगीरपुरी दंगे के मास्टरमाइंड तबरेज़ अंसारी को गिरफ्तार कर लिया गया है। वो तिरंगा यात्रा में सबसे आगे था और दिल्ली पुलिस के साथ अमन व हिन्दू-मुस्लिम भाईचारे की बातें करता घूम रहा था। हिन्दू-मुस्लिम एकता की बातें करते हुए दंगे के बाद ‘तिरंगा यात्रा’ निकाली गई थी। शनिवार (7 मई, 2022) को क्राइम ब्रांच ने तीन आरोपितों को गिरफ्तार, जिसमें ये भी शामिल है। उधर दिल्ली की एक अदालत ने जहाँगीरपुरी हनुमान जयंती शोभा यात्रा पर हमला व दंगा के मामले में 8 आरोपितों को जमानत देने से इनकार कर दिया।

दंगे के बाद से ही तबरेज़ अंसारी दिल्ली पुलिस के साथ घूम-घूम कर लोगों से शांति की अपील का नाटक करने में लगा हुआ था। वो पुलिस से भी ढील देने के लिए कहता रहा था। साथ ही वो नगर निगम के चुनाव के लिए भी ताल ठोक रहा था। उसके दो अन्य सहयोगियों अनाबुल और जलील को भी गिरफ्तार किया गया है। जहाँगीरपुरी में हनुमान जयंती शोभा यात्रा पर हुई पत्थरबाजी में उसका सक्रिय रोल था। DCP उषा रंगरानी जब प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रही थीं, तब वो उनके ठीक बगल वाली कुर्सी पर बैठा दिख रहा है।

दिल्ली पुलिस की नाक के नीचे वो अपने इरादों को अंजाम देता रहा। जब दिल्ली पुलिस आरोपितों को गिरफ्तार कर के थाने ले गई थी, तब बाहर इकट्ठा उनके परिजनों को तबरेज़ अंसारी उकसाने में लगा हुआ था। दिल्ली में फरवरी 2020 में हुए हिन्दू विरोधी दंगों में भी उसका नाम सामने आया था। वीडियो फुटेज और टेक्निकल सर्विलांस के आधार पर उसकी गिरफ़्तारी हुई। 30 वर्षीय तबरेज़ अंसारी दिल्ली पुलिस से इलाके से फ़ोर्स हटाने की भी माँग कर रहा था।

अब तक जहाँगीरपुरी दंगा मामले में दिल्ली पुलिस द्वारा कुल 36 गिरफ्तारियाँ की गई हैं, जिनमें 3 नाबालिग बताए जा रहे हैं। उधर रोहिणी कोर्ट के एडिशनल सेशन जज गगनदीप सिंह ने 8 आरोपितों की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि स्थानीय पुलिस ने ‘बिना अनुमति की शोभा यात्रा’ को नहीं रोका, जो उसकी विफलता को दर्शाता है। कोर्ट ने वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा मामले को ढकने की बात करते हुए कहा कि जिम्मेदारियाँ तय की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएँ न हों।

इम्तियाज, नूर आलम, शेख हामिद, अहमद अली, एसके साहहदा, शेख जाकिर और अहीर को जमानत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने माना कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर उनकी गिरफ्तारियाँ हुई हैं और प्रत्यक्षदर्शियों ने भी उन्हें पहचाना है। अदालत ने कहा कि केस अभी भी चल रहा है और इस दुर्भाग्यपूर्ण दंगे के अन्य आरोपितों को पकड़ा जाना बाकी है। कोर्ट ने पुलिस की ये बात भी मानी कि दंगाई उस इलाके के अपराधी छवि वाले लोग हैं, ऐसे में गवाहों को प्रभावित किए जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।