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‘…. तो J&K का भारत में विलय के दौरान मुस्लिमों का फैसला कुछ और होता’: उमर अब्दुल्ला के आरोप पर BJP नेता ने कहा- भारत से बेहतर जगह नहीं

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (JKNC) के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) ने कहा है कि देश में मुस्लिमों को परेशान किया जा रहा है। कभी मस्जिदों पर लाउडस्पीकर के नाम पर तो कभी हलाल मीट को बैन करने के नाम पर तो कभी बुलडोजर के नाम पर डराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय के समय मुस्लिमों को पता होता कि यहाँ एक धर्म को ज्यादा महत्व दिया जाता है तो शायद उनका फैसला कुछ अलग होता।

उमर अब्दुल्ला ने कहा कि मस्जिदों पर लाउडस्पीकर की अनुमति नहीं दी जा रही है, जबकि दूसरी जगहों पर इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। अब कहा जा रहा है कि हलाल मीट नहीं बेचा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “हम (मु्स्लिम) जो करते हैं वो आपको पसंद नहीं आता। आखिर हलाल मीट क्यों नहीं बेचा जाना चाहिए? आपको हमारे खाने से चिढ़ है। हमारे कपड़े पहनने के तरीके (हिजाब) पर एतराज है।”

उन्होंने आरोप लगाया कि जम्मू-कश्मीर में रमजान के महीने में सेहरी और इफ्तार के वक्त बिजली की कटौती की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह मुस्लिमों की भावना के साथ खिलवाड़ है। अगर उनकी भावना से खिलवाड़ नहीं करना है तो सेहरी और इफ्तार के वक्त बिजली देनी चाहिए।

उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जब मु्स्लिमों के घरों पर बुलडोजर चलाए जाते हैं तो टेलीविजन चैनल के एंकर कहते हैं कि भारत में बुलडोजर की कमी हो जाएगी तो बुलडोजर आयात करना पड़ेगा या भारत में ही बनाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जब टेलीविजन चैनल के एंकर बुलडोजर पर चढ़ते हैं और ड्राइवर से कहते हैं कि सिर्फ घर के छत को गिराया गया है, दीवार खड़ी है तो मुस्लिमों को कैसा लगता होगा? उन्होंने मुस्लिमों की भावनाएँ जुड़ी होने की बात कही।

उमर ने इसी दौरान जम्मू-कश्मीर की भारत में विलय पर सवाल उठा दिया। उन्होंने कहा कि ये वो हिंदुस्तान नहीं है, जिसके साथ जम्मू-कश्मीर ने विलय किया था। जिस हिंदुस्तान के साथ समझौता किया था, उसमें हर मजहब को बराबरी की नजर से देखा जाता था। उन्होंने कहा कि अगर उस वक्त कहा गया होता कि यहाँ एक धर्म को दूसरे धर्म से ज्यादा अहमियत दी जाएगी तो शायद मुस्लिमों का फैसला कुछ और होता।

उमर अब्दुल्ला के इन आरोपों पर भाजपा के वरिष्ठ नेता और बिहार सरकार में मंत्री शहनवाज हुसैन ने नकार दिया है। उन्होंने कहा कि उमर अब्दुल्ला भारत के बारे में जिस तरह का बयान दे रहे हैं वह दुर्भाग्यपूर्ण है। जितना अच्छा माहौल आज देश में है, देश मिलकर रह रहा है, वह शानदार है। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया में अल्पसंख्यकों के लिए भारत से बेहतर देश नहीं हो सकता।

मोहम्मदपुर के बाद दिल्ली के इन 40 गाँवों के मुस्लिम नाम बदलने के लिए बीजेपी ने खोला मोर्चा, CM केजरीवाल को लिखा पत्र

दिल्ली के मोहम्मदपुर गाँव में माधवपुर का बोर्ड लगाने के बाद बीजेपी ने दिल्ली के 40 गाँवों के मुस्लिम नामों को बदलने की माँग को लेकर मोर्चा खोल दिया है। इसे लेकर दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने मुख्यमंत्री केजरीवाल को पत्र लिखा है। उन्होंने दिल्ली सरकार से इस संबंध में जल्द फैसला लेने की माँग की है।

इसके लिए आदेश गुप्ता ने ट्वीट कर कहा, “दिल्ली का हर गाँव स्वाभिमान के साथ जाना जाए न कि किसी गुलामी के प्रतीक से, आज सीएम अरविंद केजरीवाल को पत्र लिखकर गुलामी के प्रतीक 40 गाँवों के नाम बदलकर स्वतंत्रता सेनानियों और महान विभूतियों के नाम पर रखे जाने की माँग की, आशा है कि वे राजनीति से ऊपर उठकर शीघ्र स्वीकृति देंगे।”

उन्होंने कहा कि मोहम्मदपुर के साथ ही हुमायूंपुर, युसूफ सराय, मस्जिद मोठ, बेर सराय, मसूदपुर, जमरूदपुर, बेगमपुर, सदैला, फतेहपुर बेरी, हौजखास, शेख सराय, नेब सराय, मिर्जापुर, हसनपुर, गालिबपुर, ताजपुर खुर्द, नजफगढ़, अलीपुर सहित 40 गाँवों का नाम स्वतंत्रता सेनानियों, बलिदानियों और अलग-अलग क्षेत्र में विशेष उपलब्धि हासिल करने वालों के नाम के नाम पर रखा जाना चाहिए।

बता दें कि आदेश गुप्ता बुधवार (27 अप्रैल, 2022) को मोहम्मदपुर गाँव में जाकर इसका नाम बदलने की माँग करते हुए माधवपुर का बोर्ड लगाया था। उनका कहना है कि गाँववासियों की माँग पर लगभग चार माह पहले दक्षिणी दिल्ली नगर निगम ने इस संबंध में प्रस्ताव पास करके दिल्ली सरकार को भेजा था। दिल्ली सरकार ने अब तक इसे मंजूरी नहीं दी है।

दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष का कहना है कि देश स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे होने पर अमृत महोत्सव मना रहा है। इतने वर्षों बाद भी राजधानी के कई गाँवों के नाम गुलामी के प्रतीक वाले हैं। संभव है मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल का ध्यान इस तरफ नहीं गया हो। भाजपा ने इस तरह के 40 गाँवों की पहचान की है। वहीं आदेश गुप्ता ने दिल्ली सरकार को लिखे पत्र में दावा किया है कि 40 गाँवों के नाम बदलने को लेकर गाँव के लोग सहमत हैं।

‘मैंने वो सब खो दिया था, जो वर्षों से बनाया था’: जम्मू-कश्मीर के पहले UPSC टॉपर शाह फैसल ने सेवा में लौटने के दिए संकेत, कहा- नई शुरुआत

जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) के पहले संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) टॉपर रहे शाह फैसल (Shah Faesal) आईएस (IAS) की नौकरी छोड़कर राजनीति में जाने पर अफसोस जताया है। उन्होंने सरकारी सेवा में फिर से लौटने का संकेत दिया है। इस संबंध में उन्होंने बुधवार (27 अप्रैल 2022) को कई ट्वीट किए।

फैसल ने ट्वीट में कहा, “मेरे जीवन के 8 महीनों (जनवरी 2019-अगस्त 2019) ने इतना बेकार बना दिया था कि मैं लगभग समाप्त हो गया था। एक कल्पना का पीछा करते हुए मैंने लगभग वह सब कुछ खो दिया था, जो मैंने वर्षों में बनाया था। काम, दोस्त, प्रतिष्ठा और सार्वजनिक सद्भावना। लेकिन मैंने कभी उम्मीद नहीं खोई। मेरे आदर्शवाद ने मुझे निराश किया।”

अगले ट्वीट में उन्होंने कहा, “मुझे खुद पर भरोसा था कि मैं अपने द्वारा की गई गलतियों को नहीं दोहराऊँगा। यह जीवन मुझे एक और मौका देगा। मेरा एक हिस्सा उन 8 महीनों की याद से थक गया है और मैं उस याद को मिटाना चाहता हूँ। मुझे विश्वास है कि बाकी समय मिटा देगा।” उन्होंने कहा कि अतीत की छाया से अलग एक अद्भुत दुनिया है और 39 साल की उम्र में एक बार फिर से शुरुआत करने को लेकर बेहद उत्साहित हैं।

शाह फैसल का नाम पोस्टिंग की प्रतीक्षा वाले अधिकारियों की सूची में हैं। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने फैसल की पुन: नियुक्ति प्रक्रिया खोल दी है। माना जा रहा है कि फैसल आईएएस अधिकारी के रूप में या उप-राज्यपाल के सलाहकार की भूमिका मेें वापस सरकारी सेवा में लौटेंगे।

जम्मू-कश्मीर का सामान्य प्रशासन विभाग

बता दें कि साल 2019 में उन्होंने IAS पद से इस्तीफा दे दिया था। पिछले तीन वर्षों के दौरान उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया था। GAD डिपार्टमेंट के सूत्रों का कहना है कि जिस अधिकारी ने अपना इस्तीफा सौंप दिया था और स्वीकृति के लिए डीओपीटी- भारत सरकार को भेज दिया गया था, उन्हें सामान्य प्रशासन विभाग में पोस्टिंग के आदेश की प्रतीक्षा में रखा गया है।

साल 2009 में यूपीएससी टॉप करने वाले शाह फैसल ने देश में बढ़ती असहिष्णुता के नाम पर जनवरी 2019 में सरकारी नौकरी छोड़ते हुए इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद उन्होंने मार्च 2019 में जम्मू-कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट नाम से एक राजनीतिक पार्टी बनाई थी। उनका उद्देश्य विधानसभा चुनाव लड़ना था, लेकिन राज्य में अनुच्छेद 370 हटने के बाद से जम्मू-कश्मीर को केंद्रशासित प्रदेश घोषित कर दिया गया और चुनाव नहीं संपन्न हुआ।

अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 को खत्म करने के बाद शाह फैसल को हिरासत में भी लिया गया था। राज्य के बदले राजनीतिक हालात के बाद उन्होंने अगस्त 2020 में राजनीति छोड़ने की घोषणा कर दी। इसके बाद सरकारी सेवा में आने के उन्होंने कई बार संकेत दिए थे। केंद्र और भाजपा के कटु आलोचक रहे फैसल सोशल मीडिया पर केंद्र सरकार की नीतियों का खूब समर्थन करने लग गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के बयानों और भाषणों को भी खूब साझा करते रहे हैं।

उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा के लोलाब इलाके में जन्मे फैसल श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SKIMS) में मेडिकल की पढ़ाई की थी और वहाँ वे गोल्ड मेडलिस्ट थे। जब फैसल 19 साल के थे तब साल 2002 में उनके शिक्षक पिता गुलाम रसूल शाह को आतंकियों ने हत्या कर दी थी।

आयशा के शौहर आरिफ खान को मिली 10 साल की सजा: दहेज को लेकर प्रताड़ित करने पर साबरमती नदी में कूदकर की थी आत्महत्या

अहमदाबाद की आयशा खान नाम की महिला ने फरवरी 2021 में आत्महत्या कर ली थी। अब इस मामले में कोर्ट ने फैसला सुनाया है। अहमदाबाद सत्र अदालत ने मामले में फैसला देते हुए आयशा के शौहर आरिफ खान को 10 साल कैद की सजा सुनाई है। बता दें कि आयशा ने अहमदाबाद में साबरमती नदी में कूदने से ठीक पहले एक वीडियो रिकॉर्ड किया था। यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में आयशा ने अपने शौहर और उसके परिवार पर दहेज और उत्पीड़न का आरोप लगाया था।

रिपोर्टों के अनुसार, अदालत ने सजा सुनाने के लिए आयशा द्वारा रिकॉर्ड किए गए वीडियो संदेश को अहम सबूत माना। अदालत ने कहा कि घरेलू हिंसा की सामाजिक बुराई को रोकने के लिए आरोपित को बख्शा नहीं जाना चाहिए। आरिफ की आवाज की भी जाँच की गई। फैसले में उसे भी अहम सबूत माना गया।

जानकारी के मुताबिक आयशा ने साबरमती नदी में कूदने से पहले अपने शौहर को भी बुलाया था। पुलिस ने आयशा और आरिफ के बीच 70 मिनट की कॉल रिकॉर्डिंग बरामद की थी जिसमें आरिफ को आयशा के ऊपर चिल्लाते हुए और कहते हुए सुना गया था, “जाओ मरो और मुझे अपनी मौत का वीडियो भेजो।”

आयशा की मौत के एक हफ्ते बाद और अधिक जानकारी सामने आई थी जिससे पता चला था कि उसके शौहर आरिफ का राजस्थान की एक लड़की के साथ एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर था। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि आयशा का शौहर आरिफ अपनी प्रेमिका को फोन करता था और आयशा के सामने ही उसके साथ अश्लील बातचीत करता था। अपने शौहर के उत्पीड़न के बावजूद, आयशा ने चुप रहने का फैसला किया और उससे सवाल-जवाब नहीं किया।

कथित तौर पर, आरिफ ने आयशा के सामने कबूल किया था कि उसके जीवन में एक और महिला थी और उसने कहा था कि वह उसे आयशा के लिए नहीं छोड़ेगा। इससे पहले 2020 में आयशा ने अहमदाबाद के वटवा पुलिस स्टेशन में आरिफ और उसके परिवार के खिलाफ दहेज उत्पीड़न का मामला भी दर्ज कराया था।

आत्महत्या करने से पहले उसने अपने माता-पिता को भी फोन किया। उसके माता-पिता ने आयशा को अपना फैसला बदलने के लिए मनाने की बहुत कोशिश की लेकिन वे असफल रहे। उसने अपनी अम्मी से कहा, “जो कुछ हुआ है, मैं उससे काफी निराश हूँ, मैं इसे और बर्दाश्त नहीं कर सकती, वह (उसका शौहर आरिफ) आजादी चाहता है, मैं उसे आजादी दूँगी।”

उसकी आत्महत्या पर सोशल मीडिया पर कई तीखी प्रतिक्रियाएँ सामने आई थी। अधिकारियों ने शव को बरामद कर लिया था और मामले में उसके शौहर के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया था। बाद में उसे मार्च 2021 में गिरफ्तार कर लिया गया था। हालाँकि, अधिकांश लोगों ने महिला के प्रति सहानुभूति व्यक्त की, तो वहीं कुछ ऐसे लोग भी थे जिन्होंने शिकायत की कि उसने हलाल के ऊपर हराम को चुना।

शाहीन बाग से NCB ने ₹400 करोड़ मूल्य के 100Kg ड्रग्स किया बरामद, ₹30 लाख कैश भी जब्त: अफगानिस्तान से जुड़े तार

दिल्ली के जामिया नगर के शाहीन बाग (Shaheen Bagh, Jamia Nagar) में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने छापेमारी कर भारी मात्रा में हेरोइन एवं अन्य संदिग्ध पदार्थ बरामद किया है। NCB ने बुधवार (27 अप्रैल 2022) को 50 किलोग्राम हेरोइन और 47 किलोग्राम अन्य ड्रग बरामद किया है। इसके बाद साथ ही पैसे गिनने वाली मशीन के साथ भारी मात्रा में नकदी भी जब्त किया गया है।

NCB के DDG (Operation) संजय सिंह ने बताया कि एनसीबी दिल्ली जोन ने 27 अप्रैल को जामिया नगर के शाहीन बाग में एक आवासीय परिसर में छापेमारी की। इसमें 50 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता वाली हेरोइन, 47 किलोग्राम संदिग्ध नशीले पदार्थ, 30 लाख रुपये नकद और अन्य आपत्तिजनक सामग्री जब्त की है।

संजय सिंह ने बताया कि हेरोइन एवं अन्य ड्रग की खेप अफगानिस्तान के रास्ते भारत पहुँची है, जिसे जामिया नगर में छिपा कर रखा गया था। वहीं, जब्त की गई नकदी हवाला के जरिए इकट्ठा करने का अंदेशा है। वहीं, इस मामले में एक व्यक्ति को गिरफ्तार करने की बात कही जा रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कुल कीमत लगभग 400 करोड़ रुपए से अधिक है।

बताया जा रहा है कि ये हेरोइन पेड़ की डालों में कैविटी बनाकर उसमें छिपाकर समंदर और फिर पाकिस्तान बॉर्डर के रास्ते भारत में लाया गया है। इसे फ्लिपकार्ट की पैकिंग में पैक किया गया था। इस ड्रग्स सिंडिकेट के तार पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली सहित देश के कई राज्यों से जुड़े होने का अंदेशा जाहिर किया जा रहा है।

NCB के DDG ज्ञानेश्वर सिंह के बताया कि इससे पहले भी ये सिंडिकेट अलग-अलग सामान में ड्रग छिपाकर भारत ला चुका है। इस सिंडिकेट से जुड़े लोग हेरोइन मैन्युफैक्चरिंग और अडल्टरिंग में माहिर हैं। वे इसका फायदा जाँच एजेंसियों को चकमा देने में करते हैं। इस सिंडिकेट से जुड़े लोगों के अन्य शहरों के ठिकानों पर भी जाँच चल रही है।

बता दें कि शाहीन बाग वही जगह हैं, जहाँ CAA-NRC के विरोध में महीनों तक सड़कों को जाम रखकर पूरी राजधानी को बंधक बना लिया गया था। यहाँ दिल्ली भर लोगों को लाकर पर प्रदर्शन में बैठाया जाता था और उन्हें रहने-खाने की मुफ्त व्यवस्था की जाती थी। यहाँ तक कहा जाता है कि प्रदर्शन में शामिल करने के लिए लोगों को दिहाड़ी दी जाती थी।

‘राजस्थान में तुरंत बदलें CM, नहीं तो होगा पंजाब जैसा हाल’: सचिन पायलट ने कॉन्ग्रेस आलाकमान को दी चेतावनी, संकट गहराया

राजस्थान कॉन्ग्रेस में एक बार फिर से सियासी उथल-पुथल शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कॉन्ग्रेस नेता सचिन पायलट के बीच की अनबन की खबरें एक बार फिर मीडिया की गलियारे में है। सूत्राें का दावा है कि कॉन्ग्रेस नेता सचिन पायलट ने सोनिया गाँधी से मुलाकात कर अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री पद से हटाने की माँग की है। वहीं इधर चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के कॉन्ग्रेस में एंट्री न होने की पीछे की वजह अशोक गहलोत बताए जा रहे हैं।

NDTV ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि सचिन पायलट ने पिछले दिनों गाँधी परिवार के साथ तीन बैठकें की है। बताया जाता है कि इस दौरान पायलट ने कॉन्ग्रेस आलाकमान से कहा कि गहलोत को हटाने में देर करने पर राजस्थान में पंजाब जैसी स्थिति हो जाएगी। सूत्रों का यह भी कहना है कि सचिन पायलट ने सोनिया से खुद को सीएम बनाने की माँग भी की है।

सचिन पायलट ने सोनिया गाँधी से साफ शब्दों में कह दिया कि यदि राजस्थान में कॉन्ग्रेस सरकार रिपीट करनी है तो अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री पद से हटाना ही होगा। पायलट से पहले सोनिया गाँधी ने सीएम अशोक गहलोत को नई दिल्ली में मुलाकात के लिए बुलाया था। वहीं पाँच दिन पहले ही 23 अप्रैल को राजधानी जयपुर में राजस्व सेवा परिषद के जयपुर में एक कार्यक्रम में गहलोत ने कहा था कि उनका इस्तीफा तो 1998 से परमानेंट सोनिया गाँधी के पास रखा हुआ है। जब मुख्यमंत्री बदलना होगा तो किसी को कानो-कान खबर तक नहीं लगेगी। यह काम रातो-रात हो जाएगा। इस पर कोई चर्चा और चिंतन नहीं होगा। सोनिया गाँधी फैसला लेने के लिए स्वतंत्र है। इसलिए अफवाहों पर ध्यान न दें।

इधर बताया जा रहा है कि किशोर के कॉन्ग्रेस में न आने की वजह गहलोत ही हैं। पीके का पार्टी में न आना गहलोत के लिए फायदेमंद और सचिन पायलट के लिए नुकसानदेह है। ऐसा इसलिए क्योंकि प्रशांत किशोर ने कहा था कि पार्टी में युवा चेहरों को आगे लाना चाहिए। ऐसे में सचिन पायलट को मौका मिल सकता था। वहीं यह फैसला गहलोत के लिए राहत भरा रहा। उन्होंने पिछले दिनों पीके के कॉन्ग्रेस में शामिल होने का विरोध किया था। गहलोत के खास वफादार माने जाने वाले तकनीती शिक्षा मंत्री डाॅ. सुभाष गर्ग ने भी इस तरफ इशारा किया। उन्होंने ट्विटर पर लिखा- “किसी संगठन को मजबूत व ताकतवर केवल नेतृत्व व कार्यकर्ता ही बना सकते हैं। कोई सलाहकार व सेवा प्रदाता नहीं। नेतृत्व के चाणक्य की जरुरत है न कि व्यापारी की।”

हालाँकि, राजस्थान राज्य में सचिन पायलट के खेमे ने कहा है कि पायलट लड़ना बंद नहीं करेंगे, वह किसी भी ‘लॉलीपॉप’ के लिए अपना राजनीतिक स्थान नहीं छोड़ेंगे। उल्लेखनीय है कि राजस्थान में दिसंबर 2023 में चुनाव होने हैं। ऐसे में सचिन पायलट ने अपनी बात पार्टी के प्रमुख के सामने रख दी है। दो साल पहले, पायलट ने जब सीएम के पद के लिए अपनी दावेदारी की थी तो उन्‍हें 18 विधायकों का साथ मिला था। वहीं प्रदेश के मुख्‍यमंत्री अशोक गहलोत को अपने विधायकों को लेकर रिसॉर्ट में रहना पड़ा था।

पीएम मोदी ने असम में 6 कैंसर अस्पतालों को किया राष्ट्र को समर्पित, 7 की रखी आधारशिला, कहा- नए अस्पताल मरीजों से खाली रहें तो अच्छा है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार (28 अप्रैल 2022) को असम में कैंसर के 6 अस्पतालों को राष्ट्र को समर्पित किया और 7 नए अस्पतालों की आधारशिला रखी। उन्होंने लोगों के स्वस्थ जीवन की कामना करते हुए कहा कि अस्पताल जरूरी हैं और सरकार इसे बनवा भी रही है, लेकिन अगर ये नए अस्पताल मरीजों से खाली रहेंगे तो उन्हें बहुत खुशी होगी।

डिब्रूगढ़ के खनिकर मैदान में एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि हम ये अस्पताल इसलिए बना रहे हैं कि अगर कभी अस्पताल जाने की नौबत आ जाए तो कैंसर के मरीजों को मौत से लड़ने की आवश्यकता ही न हो। पीएम मोदी ने ये भी कहा कि असम में कैंसर अस्पतालों की इतनी अधिक जरूरत इसलिए हो रही है क्योंकि यहाँ बहुत बड़ी संख्या में ये बीमारी डिटेक्ट होती रही है। नॉर्थईस्ट में कैंसर बड़ी समस्या है, जिससे सबसे अधिक गरीब परिवार प्रभावित होते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अब तक अगर यहाँ के किसी व्यक्ति को कैंसर डिटेक्ट होता था तो उन्हें इसके इलाज के लिए दूसरे शहरों में जाना पड़ता था, लेकिन पिछले पाँच सालों में यहाँ जिस तरह के कदम उठाए गए हैं, उसके लिए सर्बानंद सोनोवाल, हिमंता बस्वा सरमा और टाटा ट्रस्ट को धन्यवाद देता हूँ। पीएम मोदी ने बताया कि बीते कुछ सालों में कैंसर की इतनी दवाएँ बनाई गई हैं, जिससे कैंसर के इलाज में इस्तेमाल दवाओं की कीमतें आधी रह गई हैं। इससे करीब 1000 करोड़ रुपए की बचत हुई है। प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों से 900 से भी अधिक दवाएँ सस्ते दामों में मिल रही हैं।

पीएम मोदी ने देश में एम्स को लेकर कहा कि 2014 से पहले देश में केवल 7 एम्स थे। लेकिन हमने सभी में सुधार करते हुए देश में 16 नए एम्स घोषित किए। उन्होंने कहा कि आज यहाँ 7 नए कैंसर अस्पतालों का लोकार्पण किया गया है, लेकिन एक वक्त वो भी था, जब यहाँ साल में एक अस्पताल भी खुल जाए तो बड़ा उत्साह माना जाता था।

अपने अंतिम वर्षों को स्वास्थ्य के लिए समर्पित करना चाहता हूँ: रतन टाटा

इस मौके पर उद्योगपति रतन टाटा ने कहा कि वो अपने जीवन के अंतिम वर्षों को स्वास्थ्य के लिए समर्पित करना चाहता हूँ। असम को ऐसा प्रदेश बनाएँ जो सभी को पहचान और मान्यता दे।

वहीं असम के सीएम हिमंता बस्वा सरमा ने पीएम मोदी को धन्यवाद दिया। सरमा ने बताया कि डिब्रूगढ़ में कैंसर अस्पताल का निर्माण करने के लिए असम सरकार द्वारा 2767 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया था, जबकि टाटा ट्रस्ट ने 1100 करोड़ रुपए से अधिक दिया है।

BHU में इफ्तार पार्टी पर बवाल: वीसी लॉज के सामने हनुमान चालीसा पाठ करेगी ABVP, यूनिवर्सिटी की सफाई- वर्षों से रोजा इफ्तार

उत्तर प्रदेश के वाराणसी (Varanasi, Uttar Pradesh) में प्रख्यात काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में रोजा इफ्तार और भड़काऊ नारों को लेकर माहौल गर्मा गया है। कुलपति आवास के बाहर पुतला जलाकर इफ्तार पार्टी का विरोध करने के बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने वीसी लॉज के सामने हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) का पाठ करने की घोषणा की है। 

वहीं, इस विवाद को लेकर BHU ने सफाई दी है। बीएचयू ने कहा कि विश्वविद्यालय में विभिन्न त्योहारों एवं उत्सवों का आयोजन होता है, जिसमें विश्वविद्यालय परिवार के सदस्य आपसी प्रेम और सद्भाव के साथ शामिल होते हैं। विश्वविद्यालय ने कहा कि विश्वविद्यालय में कई वर्षों से रोजा इफ्तार का आयोजन होता रहा है और विश्वविद्यालय परिवार का मुखिया होने के नाते कुलपति इसमें शामिल होते रहे हैं।

विश्वविद्यालय के पत्र में कहा गया है, “27 अप्रैल को महिला विश्वविद्यालय में रोजा इफ्तार का आयोजन किया गया, जिसमें कुलपति जी को आमंत्रित किया गया था। पिछले दो वर्षों से कोरोना महामारी की वजह से इस कार्यक्रम का आयोजन नहीं हो सका था। इस बार यह आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न अधिकारियों ने शिरकत की।” विश्वविद्यालय का कहना है कि इस तरह का मुद्दा उठाकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है।

इसी बीच गुरुवार (28 अप्रैल 2022) की शाम को एबीवीपी के छात्रों ने वीसी लॉज पर हनुमान चालीसा के पाठ का ऐलान किया है। संस्था के छात्रों का कहना है कि जब बीएचयू में रोजा इफ्तार हो सकता है तो हनुमान चालीसा का पाठ भी होगा। परिषद का दावा है कि इस पाठ में शाम 5:00 बजे बड़ी संख्या में छात्र हिस्सा लेंगे और हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ करेंगे।

वहीं, विश्वविद्यालय की दीवारों पर भड़काऊ नारे लिखने का आरोप भगत सिंह छात्र मोर्चा पर लगाया जा रहा है। हालाँकि, मोर्चा ने इन नारों को लिखने में अपना हाथ होने से इनकार किया है। वहीं, मोर्चा ने इसी दौरान विश्वविद्यालय के लंका गेट पर बैठक करने का ऐलान किया है। ऐसे में दोनों संगठनों के छात्रों के बीच टकराव की आशंका उत्‍पन्‍न हो गई है। इसको देखते हुए परिसर में सुरक्षाबलों को तैनात कर दिया गया है।

बता दें कि बुधवार की शाम को कुलपति प्रोफेसर सुधीर कुमार जैन के साथ-साथ प्रोक्टर प्रो. वीके शुक्ला सहित महिला महाविद्यालय के रोजेदार शिक्षक, शिक्षिकाओं व छात्राओं ने अपना रोजा खोला था। छात्रों ने ऑपइंडिया से बात करते हुए बताया कि वहाँ डा. मो. अफजल हुसैन के नेतृत्व में रोजा और रमजान पर एक चर्चा भी हुई। इसकी जानकारी होने पर छात्रों का बड़ा समूह आक्रोशित हो गया। इसको लेकर विरोध प्रदर्शन भी हुआ।

इसके अगले दिन यानी गुरुवार (27 अप्रैल) को परिसर में दीवारों पर “कश्मीर तो बस झाँकी है, पूरा भारत बाकी है।” तो “ब्राह्मणों तेरी कब्र खुदेगी BHU की धरती पर।” जैसे नारे लिखकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की गई है। इसके बाद परिसर का माहौल गर्म हो गया है। कैंपस में फोर्स को तैनात कर दिया गया है।

सड़क पर सरेआम गोवंश को काटा, मेरठ में हिन्दू संगठनों के दबाव में दर्ज हुआ मुकदमा, 4-5 आरोपितों को तलाश रही पुलिस

उत्तर प्रदेश के मेरठ में गोवंश की हत्या का मामला सामने आया है। घटना टीपी नगर थाना क्षेत्र के रोहटा रोड के पास की है। यहाँ गुरुवार (अप्रैल) सुबह गोवंश को खुलेआम सड़क पर काट दिया गया। पुलिस चौकी के पीछे गोवंश की निर्मम हत्या किए जाने के बाद टीपी नगर थाना क्षेत्र के रोहटा रोड में तनाव का माहौल उत्पन्न हो गया है। मेरठ पुलिस का कहना है कि मामले में टीपी नगर थाने में मामला दर्ज कर लिया गया है।

इस घटना से हिंदू संगठन काफी उग्र हो चुके हैं। विश्व हिंदू परिषद- गौरक्षा विभाग ने इस संबंध में एक पत्र भी जारी किया है। इसमें उन्होंने उत्तर प्रदेश प्रशासन से मामले में जल्द से जल्द कार्रवाई करने की बात कही है। विहिप ने पत्र में लिखा है कि मेरठ जनपद में समुदाय विशेष लगातार धार्मिक भावनाओं को आहत करने का कृत्य कर रहे हैं। उनका बार-बार इस तरह से इन घटनाओं को अंजाम देना और प्रशासन एवं पुलिस की विफलता किसी भी सांप्रदायिक तनाव को जन्म दे सकती है। इसलिए समय रहते यथासंभव कार्रवाई कर इस तरह के घृणित मानसिकता वाले तत्वों के मन में भय पैदा करना होगा, ताकि वह सपने में भी इस तरह के आपराधिक कृत्य के बारे में नहीं सोचेंगे।

विश्व हिंदू परिषद ने जारी किया लेटर

बताया जा रहा है कि रोहटा रोड पर स्थित पुलिस चौकी के पीछे 4-5 युवकों ने एक गोवंश की हत्या कर दी। सड़क के किनारे सब्जी बेचने वाले माँ और बेटे ने जब देखा तो शोर मचाया। जिसके बाद हत्यारे गोवंश को तड़पता छोड़ अपने गाड़ी में बैठ कर फरार हो गए। वहीं जिस पुलिस चौकी के पीछे गोवंश की हत्या की गई उस पुलिस चौकी पर ताला लटका मिला।

पुलिस चौकी पर ताला लटका देख गोवंश हत्यारों का हौसला इतना बढ़ गया कि वो थाने के पीछे ही सड़क पर खुले आम गोवंश का गला रेतने का दुस्साहस कर सके। वहीं सुबह हिंदू संगठन के सदस्यों के आने तक थाने पर ताला जड़ा देख सभी उग्र हो गए। सभी ने कहा कि पुलिस हत्यारों की जब तक पहचान कराकर गिरफ्तारी सुनिश्चित नहीं करती तब तक गोवंश का शव उठने नहीं दिया जाएगा। हालाँकि एसडीएम अरुण कुमार के आश्वासन बाद गोवंश को वहाँ से हटा दिया गया। एसडीएम ने आश्वासन दिया है कि एक सप्ताह के भीतर आरोपितों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।

कार डिलीवरी में देरी के बाद ट्रेंड हुआ जीजू, यूजर्स बोले- बदल डालो, बहन इससे बेहतर के लायक

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें TamrajKillWish नाम के एक यूजर ने उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी (Lakhimpur Khiri, Uttar Pradesh) स्थित राणा मोटर्स (Rana Motors) द्वारा समय पर कार की डिलीवरी नहीं करने पर ट्विटर के जरिए 28 अप्रैल 2022 को अपना गुस्सा जाहिर किया। उसने कहा कि 25 फरवरी को उसने एक कार की बुकिंग कराई थी, जिसे 12 अप्रैल को डिलीवर करने का वादा किया गया था, लेकिन अभी तक उसकी डिलीवरी नहीं की गई।

फोटो साभार: ट्विट

इसके साथ ही उसने इस बात का भी जिक्र किया कि ये कार (टाटा नेक्सॉन) उसने कथित तौर पर अपने जीजू को कथित दहेज के तौर पर देने के लिए बुक किया था, लेकिन अभी तक कार की डिलीवरी नहीं हो सकी है। इससे उसका जीजू काफी नाराज है और उसने धमकी दी है कि अगर कार शादी में नहीं मिली तो वह शादी तोड़ देगा। उल्लेखनीय है कि टाटा नेक्सन की कीमत कार के मॉडल के आधार पर 7 लाख रुपए से शुरू होकर 13.5 लाख रुपए के बीच है।

इस बीच टाटा मोटर्स ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से यूजर को रिप्लाई करते हुए कहा, “नमस्ते, हम कभी नहीं चाहते कि हमारे ग्राहकों को इस तरह के अनुभवों से गुजरना पड़े। कृपया अपनी कॉन्टैक्ट डिटेल्स डीएम में शेयर करें, ताकि हमारी टीम आगे की मदद के लिए आपसे जुड़ सके।”

ट्वीट के बाद गंभीर आलोचनाएँ हो रही हैं, क्योंकि नेटिज़न्स का माना है कि कार दहेज के लिए है और जीजू धमकी दे रहा है कि कार नहीं मिली तो वह शादी तोड़ देगा। ट्विटर यूजर डी शर्मा ने तंज कसते हुए कहा, “कृपया जल्द से जल्द दहेज पहुँचाएँ। इसके अलावा तीन साल की अतिरिक्त वारंटी भी दें, ताकि बहन तीन साल और जीवित रहे और उससे पहले जले नहीं।”

शिवाय नाम के एक अन्य यूजर ने टाटा मोटर्स से कार की डिलीवरी नहीं करने का आग्रह करते हुए कहा, “इस कार को डिलीवर ना करें। यह दहेज है, जो कि अपराध है। लड़की को बचाइए। अगर इस कार के बिना शादी रद्द हो जाती है तो आप एक लड़की के जीवन को दुख से बचाएँगे।”

इसी क्रम में एक अन्य ट्विटर यूजर msmhater ने कहा, “बड़ी चिंता आपके भावी जीजू को लेकर होनी चाहिए। अगर कार मिलने पर ही आपकी बहन के साथ शादी तय है..तो कल वो किसी पॉश कॉलोनी में एक आलीशान फ्लैट के लिए आप सभी से वसूली करेगा। पहले उससे छुटकारा पाओ… कार जल्दी या बाद में पहुँचा दी जाएगी।”

ट्विटर यूजर द बुल राइडर ने TamrajKillWish को अपना जीजू बदलने का सुझाव दिया। यूजर ने कहा, “आपको तुरंत अपने लिए एक नया जीजू और नया कार डीलर ढूँढना चाहिए!”

हालाँकि, ट्विटर यूजर TamrajKillWish ने दहेज के मामले से जुड़े सवालों से बचने की कोशिशें की। इस मामले में ऑपइंडिया ने भी यूजर से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उससे कोई संपर्क ही नहीं हो सका। इस मामले को लेकर जब हमने लखीमपुर में राणा मोटर्स से बात की तो वहाँ जिस व्यक्ति ने फोन रिसीव किया, उसने कहा कि उसे इसकी कोई जानकारी नहीं है और वो बाद में इसकी जानकारी देने की कोशिश करेगा।