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PoJK मतलब आजादी के बाद भारत की बलिदान भूमि: परिसीमन आयोग की सिफारिश सराहनीय, अब हो ‘घर वापसी’ का प्रयास

आज़ादी का अमृत महोत्सव मनाते हुए जम्मू-कश्मीर के अपने उन भाइयों और बहनों को याद करना आवश्यक है जोकि पाकिस्तान के जुल्मोसितम के शिकार हुए। उनके वंशज आज तक भी शोषण-उत्पीड़न सहने और दर-दर की ठोकरें खाने को अभिशप्त हैं। पाक अधिक्रांत जम्मू-कश्मीर (PoJK: Pakistan-occupied Jammu and Kashmir, पीओजेके) के विस्थापितों और वहाँ के वासियों के साथ न्याय सुनिश्चित करना राष्ट्रीय कर्तव्य है।

पीओजेके स्वातंत्र्योत्तर भारत की बलिदान भूमि है। जम्मू में 8 मई, 2022 को जम्मू-कश्मीर पीपुल्स फोरम द्वारा आयोजित ‘श्रद्धांजलि व पुण्यभूमि स्मरण सभा’ ऐसी ही एक कोशिश है। इस सभा में शामिल होकर पाक अधिक्रांत जम्मू-कश्मीर के हजारों विस्थापित अपने पूर्वजों के त्याग और बलिदान का स्मरण करेंगे। यह अपने जीवन-मूल्यों, धर्म-संस्कृति और राष्ट्रभाव का परित्याग न करने वाले भारत माँ के उन असंख्य सपूतों के प्रति श्रद्धांजलि और उनके वंशजों के साथ खड़े होने का अवसर है। साथ ही, अपनी ‘घर वापसी’ और अपने अधिकारों की आवाज़ भी मुखर करेंगे।

इस सभा का उद्देश्य पाकिस्तान, चीन और दुनिया को यह सन्देश देना है कि प्रत्येक भारतीय अपने पीओजेके के उत्पीड़ित और विस्थापित भाइयों-बहनों के बलिदान और दुःख-दर्द से अनजान नहीं है। उनके कष्ट निवारण और राष्ट्रीय एकता-अखंडता की रक्षा के लिए सम्पूर्ण राष्ट्र एकजुट और संकल्पबद्ध है।

पाक अधिक्रांत जम्मू-कश्मीर के प्रमुख क्षेत्र नीलम, हटियन बाला, मीरपुर, देवा बटाला, भिम्बर, कोटली, बाग़ पुलंदरी, सदनोती, रावलकोट, मुजफ्फराबाद, पुंछ, गिलगित और बाल्टिस्तान आदि हैं। बाद की दो लड़ाइयों (1965 और 1971) में पाकिस्तान ने कूटनीतिक चालाकी से छम्ब सेक्टर को भी हथिया लिया। माँ शारदा पीठ, माँ मंगला देवी मंदिर और गुरू हरगोविंद सिंह गुरुद्वारा जैसे अनेक पवित्र स्थल पाकिस्तान के अवैध कब्जे में हैं।

पीओजेके वासियों की भाषा, खान-पान, वेशभूषा और संस्कृति-प्रकृति पाकिस्तानी से अधिक भारतीय है। यहाँ कश्मीरी, गोजरी, पहाड़ी, हिंदको आदि भाषाएँ बोली जाती हैं। यह क्षेत्र न सिर्फ भू-रणनीतिक दृष्टि से, बल्कि अपने प्राकृतिक संसाधनों और सांस्कृतिक समृद्धि के कारण भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

आज यहाँ शिया मुसलमान बसते हैं। आज़ादी के समय हिन्दू और सिख भी काफी संख्या में रहते थे। जितने जुल्मोसितम गैर-मुस्लिमों अर्थात हिन्दू और सिखों पर हुए, लगभग उतने ही जुल्मोसितम आज शिया मुसलमानों पर हो रहे हैं। उन्हें आज तक भी दोयम दर्जे का मुसलमान और दोयम दर्जे का नागरिक माना जाता है।

अमजद अयूब और डॉ. शब्बीर चौधरी (लन्दन), जमील मकसूद (ब्रुसेल्स), मंसूर अहमद पश्तीन (वजीरिस्तान), आरिफ आजक़िया, हाजी सैय्यद सलमान चिश्ती, जफ़र चौधरी और जावेद राही जैसे हिम्मतवर लोग अलग-अलग मंचों से लगातार पीओजेके के पीड़ितों की आवाज़ मुखर कर रहे हैं।

जम्मू-कश्मीर पीपुल्स फोरम द्वारा आयोजित जनसभा का प्रतीकात्मक ही नहीं, बल्कि रणनीतिक महत्व भी है। इस सभा में अपनी भूमि को वापस पाने और घर वापसी के संकल्प को फलीभूत करने के ठोस उपायों पर चर्चा होनी चाहिए। इन विस्थापितों की कुर्बानियों और कष्टों की ओर अंतरराष्ट्रीय समाज का ध्यान भी आकृष्ट करना चाहिए।

मानवाधिकारों का उल्लंघन, लोकतन्त्र का पददलन, माँ-बहनों का शील-हरण, पाकिस्तानी सेना की पिट्ठू सरकार और शासन-तंत्र द्वारा दमन, पाकिस्तानी सेना की देखरेख में फल-फूल रहे आतंकी संगठन और नशीले पदार्थों की खेती और तस्करी, पाकिस्तान के सिन्धी-पंजाबी मुस्लिम समुदाय को बसा कर किए जा रहे जनसांख्यिकीय परिवर्तन, मंदिरों और गुरुद्वारों को ढहाने, मूर्तियों को क्षतिग्रस्त करने आदि के किस्से पाक अधिक्रांत कश्मीर का रोजनामचा है।

यह सब सह रहे लोगों का अपराध यह है कि वे महाराजा हरिसिंह द्वारा हस्ताक्षरित 26 अक्टूबर, 1947 के अधिमिलन-पत्र के अनुसार भारतीय गणराज्य का हिस्सा होना चाहते हैं। भारत की प्रगति और खुशहाली में शामिल होना चाहते हैं। अमन-चैन और सुख-शांति चाहते हैं, जो ‘एक असफल राष्ट्र’ बन चुके पाकिस्तान में कभी मयस्सर नहीं होगी।

यह ऐतिहासिक अवसर है कि हम भूल-सुधार करते हुए अपने देश के भूले-बिसरे हिस्सों और देशवासियों का ध्यान करें। उनके मान-सम्मान और अधिकारों के लिए कुछ ठोस योजनाएँ बनाएँ। वर्तमान केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर समस्या के समाधान की दिशा में दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय दिया है। उसने पीओजेके विस्थापितों के प्रति पूरी संवेदनशीलता, सहानुभूति और सदाशयता दिखाते हुए 2000 करोड़ रुपए के राहत पैकेज, अन्यान्य सुविधाओं और योजनाओं की शुरुआत की है। लेकिन इस राहत पैकेज में जम्मू-कश्मीर के बाहर बसे विस्थापितों को शामिल न करना अनुचित है।

तत्कालीन जम्मू-कश्मीर सरकार की सांप्रदायिक नीति और उपेक्षापूर्ण रवैये के कारण बहुत से विस्थापितों को अलग-अलग राज्यों में शरण लेनी पड़ी। पीओजेके विस्थापित समिति ने गृहमंत्री अमित शाह को एक ज्ञापन देकर अलग-अलग जगहों पर बसे सभी शरणार्थियों को इन राहत योजनाओं का लाभ देने की माँग भारत सरकार से की है। कश्मीर घाटी के विस्थापितों के लिए भी ऐसे पैकेज और परियोजनाएँ लागू की जा रही हैं। लेकिन इन राहत योजनाओं का दायरा और स्तर बढ़ाए जाने की आवश्यकता है।

नागरिकता (संशोधन) अधिनियम-2019 ऐसी ही एक उल्लेखनीय राहत योजना है। कश्मीर घाटी के विस्थापितों के लिए देश के शिक्षण संस्थानों और सरकारी सेवाओं में प्रवेश हेतु विशेष प्रावधान किए गए हैं। इसके दायरे में पीओजेके विस्थापितों को भी शामिल करने की आवश्यकता है। जिस भारत का नागरिक होने की वजह से उनके पूर्वजों को असहनीय क्रूरता और प्रताड़ना सहनी पड़ी और वे स्वयं आज तक भी मुश्किल हालात में जीने को मजबूर हैं; उस भारत की सरकार और नागरिक समाज को एकजुट होकर उनके साथ खड़े होने और उनके आँसू पोंछने और आश्वस्त करने की जरूरत है।

भारत को कश्मीर घाटी में और पीओजेके के सीमान्त क्षेत्रों में सेना और अर्धसैनिकों बलों की कॉलोनियाँ बसाने की पहल करनी चाहिए। यहाँ बसने और काम-धंधा शुरू करने वाले देशवासियों को बसाने के लिए भूमि अधिगृहीत और विकसित की जानी चाहिए। प्रवासी श्रमिकों और उद्यमियों के लिए सस्ते दाम पर आवासीय और व्यावसायिक भूखंड, आसान ऋण, ब्याज दर में सब्सिडी, शस्त्र लाइसेंस और शस्त्र आदि की उपलब्धता सुनिश्चित करनी चाहिए। ये लोग आतंकवाद से निपटने और खोई हुई भूमि को पाने में सेना और स्थानीय समाज के साथ प्रभावी भूमिका निभा सकेंगे।

दहशतगर्दों के वर्चस्व को समाप्त करने की दिशा में ये उपाय प्रभावी साबित होंगे। आतंकवाद के शिकार निर्दोष नागरिकों को बलिदानी का दर्जा और उनके परिजनों को आर्थिक, सामाजिक और शारीरिक सुरक्षा देकर आतंकवाद से निडरतापूर्वक लड़ने वाला नागरिक समाज तैयार किया जा सकता है। सामाजिक संकल्प और संगठन के सामने मुट्ठीभर भाड़े के आतंकी भला कब तक ठहर पाएँगे!

जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता वाले परिसीमन आयोग ने अपनी अंतिम रिपोर्ट दे दी है। इसमें अनुसूचित जनजातियों के लिए 9 सीटें आरक्षित की गई हैं। आयोग ने एक महिला सहित कश्मीर घाटी के दो विस्थापितों के मनोनयन की सिफारिश की है।

इसी प्रकार पाक-अधिक्रांत जम्मू-कश्मीर के विस्थापितों के मनोनयन (संख्या स्पष्ट नहीं है) की सिफारिश भी की गई है। यह पहली बार किया गया है। इसलिए सराहनीय और स्वागतयोग्य है। हालाँकि, मनोनयन की जगह चुनाव द्वारा और अधिक संख्या में प्रतिनिधित्व दिया जाना चाहिए था। इन समुदायों और भारत के राष्ट्रवादी बुद्धिजीवियों की ओर से इस आशय की माँग की जा रही थी।

उल्लेखनीय है कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पाक अधिक्रांत क्षेत्र के लिए 24 सीटों को खाली छोड़ा जाता रहा है। यह उचित अवसर था कि उस क्षेत्र से खदेड़े गए भारतवासियों और उनके वंशजों के लिए 24 में से कम-से-कम 4 सीटें आवंटित कर दी जातीं। गुलाम कश्मीर और कश्मीर घाटी के विस्थापितों के लिए सीटें आरक्षित करना इसलिए जरूरी था, ताकि उनके उनका दुःख-दर्द, समस्याओं और मुद्दों की ओर देश-दुनिया का ध्यान आकर्षित हो।

वर्तमान केंद्र सरकार ने 22 फरवरी, 1994 के भारतीय संसद के संकल्प की पृष्ठभूमि में अनुच्छेद 370 और 35 ए को निष्प्रभावी करते हुए जम्मू-कश्मीर के पूर्ण विलय की दिशा में बड़ी पहल की थी। अब उस संकल्प की सिद्धि की दिशा में सक्रिय होने का अवसर है।

हाईकोर्ट ने बग्गा की गिरफ्तारी पर लगाई रोक: पिता बोले- केजरीवाल ने दिया था AAP में शामिल होने का ऑफर, अब परेशान कर रहे हैं

दिल्ली भाजपा (Delhi BJP) के प्रवक्ता तजिंदर पाल सिंह बग्गा (Tajinder Pal Singh Bagga) को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट (Punjab & Haryana High Court) से शनिवार (7 मई 2022) की देर रात राहत मिल गई। कोर्ट ने अगले आदेश आदेश तक बग्गा के खिलाफ पंजाब पुलिस को किसी भी कार्रवाई पर रोक लगा दी है। दरअसल, मोहाली कोर्ट ने बग्गा के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट के खिलाफ दायर अर्जी पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने यह बात कही।

इससे पहले पंजाब पुलिस (Punjab Police) ने भाजपा नेता को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन हरियाणा पुलिस ने उसे रोक लिया था। इसके बाद दिल्ली पुलिस उन्हें हरियाणा से छुड़ा लाई थी। इसके साथ ही दिल्ली पुलिस ने पंजाब पुलिस पर बग्गा का अपहरण करने का मामला भी दर्ज किया था।

इसके बाद मोहाली कोर्ट ने एक नए मामले में तजिंदर पाल सिंह बग्गा के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दी और पंजाब पुलिस की साइबर क्राइम ब्रांच से उन्हें कोर्ट के सामने प्रस्तुत करने के लिए कहा। बग्गा के खिलाफ धारा 153 A, 505, 505 (2) और 506 के तहत केस दर्ज किया था। इसके बाद बग्गा के वकील ने हाईकोर्ट में अर्जी देकर आवश्यक सुनवाई के लिए अनुरोध किया।

पंजाब एवं हरियाणा कोर्ट ने शनिवार की आधी रात को जस्टिस अनूप चितकारा के आवास पर मामले की अर्जेंट सुनवाई की और इस मामले में बग्गा को राहत देते हुए पंजाब पुलिस को किसी भ कार्रवाई से रोक दिया। इस मामले में अगली सुनवाई 10 मई को होगी।

कोर्ट से बग्गा को राहत मिलने के बाद उनके पिता प्रीतपाल सिंह बग्गा ने कहा, “मुझे खुशी है कि तजिंदर को पंजाब हाईकोर्ट से राहत मिली है। पंजाब की आम आदमी पार्टी की सरकार उन्हें किसी ना किसी मामले में फँसाना चाहती है। वे FIR करते रहेंगे, लेकिन हम रुकने वाले नहीं हैं। यह लड़ाई लंबी चलेगी।” वहीं, बग्गा को राहत मिलने पर तेजस्वी सूर्या ने ट्वीट किया- “न्याय की एक और जीत.. कानून के शासन की एक और जीत हुई है।”

उन्होंने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल (Delhi CM arvind Kejriwal) बग्गा से डरते हैं, क्योंकि वह उनके गलत कामों को उजागर कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि केजरीवाल ने तजिंदर को AAP में शामिल होने के लिए मनाने की भी कोशिश की, लेकिन वह शामिल नहीं हुए। इसके बाद उन्हें परेशान किया जाने लगा।

उधर, बग्गा को गिरफ्तार करने के दौरान पंजाब पुलिस के जवानों ने उन्हें पगड़ी नहीं पहनने दी। इस पर राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने स्वत: संज्ञान लिया है। आयोग ने पंजाब के चीफ सेक्रेटरी को पत्र लिखकर इस मामले में 7 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने को कहा है। 

नेपाल पार्टी के बाद तेलंगाना की जनसभा में पहुँचे राहुल गाँधी, थीम का कुछ अता-पता नहीं: वीडियो में पूछ रहे- बोलना क्या है

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) नेपाल के दौरे से भारत वापस आ गए हैं। आते ही वो तेलंगाना के दो दिवसीय दौरे पर चले गए हैं। इस बीच उनका एक वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वो कॉन्ग्रेस नेताओं से पूछते दिख रहे हैं कि ‘क्या बोलना है’। ये वीडियो तेलंगाना कॉन्ग्रेस नेताओं के साथ बैठक का है।

17 सेकंड की क्लिप में देखा जा सकता है कि राहुल गाँधी कुर्सी पर बैठे हुए बाकी के कॉन्ग्रेस नेताओं से पूछते हैं, “आज का मुख्य विषय क्या है … क्या बोलना है?” उल्लेखनीय है कि शुक्रवार (6 मई 2022) को तेलंगाना के दौरे पर पहुँचे राहुल गाँधी किसानों के मुद्दे पर वारंगल में एक जनसभा को संबोधित करने वाले हैं।

राहुल गांधी दो दिवसीय दौरे पर शुक्रवार को तेलंगाना पहुँचे जहाँ उनका वारंगल में किसानों के मुद्दों पर एक जनसभा को संबोधित करना था। बहरहाल इस पर तंज कसते हुए बीजेपी की आईटी सेल के अध्यक्ष अमित मालवीय ने कहा, “ऐसा तब होता है जब आप निजी विदेश यात्राओं और नाइटक्लबिंग के बीच राजनीति करते हैं।”

इस बीच एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने भी राहुल गाँधी के इस वीडियो पर कमेंट किया है। ओवैसी ने कहा, “जब आपको ये नहीं पता कि आप तेलंगाना की जनता को क्या संदेश देना चाहते हैं, तो वे आपका समर्थन क्यों करेंगे। ओवैसी ने राहुल गाँधी पर तंज किया कि आपका दिमाग खाली है। आप टीआरएस से कैसे लड़ेंगे। ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम में कॉन्ग्रेस साफ हो गई है।”

नेपाल में नाइटक्लब विवाद चर्चा में

गौरतलब है कि इससे पहले राहुल गाँधी नेपाल में एक नाइट क्लब में देखे गए थे। उनके साथ एक महिला भी थी, जिसको लेकर दावे किए गए कि वो चीनी राजदूत होउ यांकी हैं। काफी राजनीति के बाद राहुल के ही करीबी रेवंत रेड्डी ने भी कन्फर्म किया कि वो महिला चीनी राजदूत ही थी। दावा किया जाता है कि वो वहाँ अपनी एक दोस्त की शादी अटेंड करने के लिए गए थे। हालाँकि, उक्त महिला को लेकर एक नई जानकारी सामने आई कि वो भारतीय मूल की पुर्तगाली महिला थी।

‘सेक्सी दुर्गा’ के डायरेक्टर पर अभिनेत्री ने लगाया उत्पीड़न और पीछा करने का आरोप, गिरफ़्तारी के एक दिन बाद ही बेल: केरल का मामला

मलयालम फिल्म निर्देशक सनल कुमार शशिधरन को अभिनेत्री मंजू वारियर का पीछा करने और प्रताड़ना के मामले में गिरफ्तार किया गया। हालाँकि, शुक्रवार (6 मई, 2022) को केरल के अलुवा स्थित JFCM अदालत ने उसे जमानत भी दे दी। उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा-354D (किसी महिला का पीछा करना या फिर उसकी रुचि न होने के बावजूद उससे जबरन संपर्क एवं बातचीत करने की कोशिश करना) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

अभिनेत्री ने निर्देशक द्वारा किए जा रहे आपत्तिजनक मैसेज्स और करतूतों को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी। दोनों ‘कयाट्टम (Kayattam)’ फिल्म में साथ काम कर चुके हैं, जो अक्टूबर 2020 में रिलीज हुई थी। जहाँ सनल कुमार शशिधरन इस फिल्म के निर्देशक थे, मंजू वारियर ने अभिनय के साथ-साथ फिल्म का निर्माण भी किया था। शशिधरन ने जमानत मिलने के बाद कहा कि वो किसी को बाधा नहीं पहुँचा रहे हैं और कई दिनों से अभिनेत्री मंजू से उनकी बात भी नहीं हुई है।

सनल कुमार जनवरी 2017 में रिलीज हुई फिल्म ‘सेक्सी दुर्गा’ को लेकर विवादों में रहे थे। जैसा कि फिल्म के नाम से ही स्पष्ट है, इसे हिन्दुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाने के लिए बनाया गया था। इसमें एक मुस्लिम पुरुष और हिन्दू महिला की कथित प्रेम कहानी दिखाई गई थी। विरोध के बाद इस इंडी हॉरर फिल्म का नाम ‘एस दुर्गा’ कर दिया गया था। फिल्म के लिए उसे देश-विदेश में कई अवॉर्ड्स भी मिले थे। हालाँकि, वास्तविकता में हिन्दू लड़कियाँ ‘लव जिहाद’ की शिकार होती रहती हैं।

अब सनल कुमार शशिधरन ये कह रहे हैं कि मंजू वारियर का जीवन खतरे में है और वो कुछ लोगों के प्रभाव में आकर कदम उठा रही हैं। पुलिस का कहना है कि निर्देशक पुलिस थाने से भी जमानत ले सकते थे, लेकिन उन्होंने अदालत में पेश किए जाने की जिद पकड़ ली। उन्होंने पुलिस पर उनका मोबाइल फोन न लौटाने के आरोप लगाए, जबकि एलमक्कारा थाने का कहना है कि मोबाइल फोन को कोर्ट में जमा कराया गया है और तय कानूनी प्रक्रिया के तहत वो इसे वापस ले सकते हैं।

सनल कुमार शशिधरन ने उन्हें गिरफ्तार करने आए पुलिसकर्मियों पर सवाल उठाते हुए फेसबुक लाइव भी किया था। इसके बाद उन्हें थाने लाया गया और पूछताछ हुई। इससे पहले सनल कुमार शशिधरन कह चुके हैं कि ‘कयाट्टम’ फिल्म मंजू वारियर के प्रति उनके प्यार और श्रद्धा के लिए याद रखा जाएगा। उन्होंने कहा था कि मंजू वारियर के साथ काम करने के बावजूद वो प्राइवेट में उनकी सराहना नहीं कर सकते। उन्होंने आरोप लगाया था कि अभिनेत्री अपने ‘सहयोगियों’ के कब्जे में हैं।

तजिंदर बग्गा मामले में पंजाब सरकार को नोटिस: पगड़ी न पहनने दिए जाने को अल्पसंख्यक आयोग ने बताया धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन, माँगा जवाब

दिल्ली बीजेपी के नेता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा को जिस तरह से पंजाब की पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इस पर अब केंद्र सरकार हरकत में आ गई है। बग्गा के साथ किए गए व्यवहार पर राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने स्वत: संज्ञान लेते हुए पंजाब के चीफ सेक्रेटरी को पत्र लिखा है। केंद्रीय आयोग ने पंजाब सरकार से इस मामले में 7 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने को कहा है।

कमीशन द्वारा जारी किए गए लेटर के मुताबिक, एनसीएम एक्ट 1992 के तहत आयोग अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। इसके मुताबिक, पंजाब पुलिस द्वारा बग्गा की गिरफ्तारी के दौरान उन्हें पगड़ी तक नहीं पहनने देने की मीडिया रिपोर्टों पर ये एक्शन लिया गया है। आयोग का कहना है कि इस तरह के कार्य एक सिख व्यक्ति के धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन है। ये पत्र भारत सरकार के संयुक्त सचिव ए धनलक्ष्मी द्वारा लिखा गया है।

क्या है पूरा मामला

गौरतलब है कि बीजेपी नेता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा को शुक्रवार (6 मई 2022) अल सुबह पंजाब पुलिस के 50 जवानों ने दिल्ली स्थित उनके घर से गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद बग्गा के पिता ने जनकपुरी थाने में पंजाब पुलिस के खिलाफ बग्गा के अपहरण की शिकायत दर्ज कराई।

बग्गा के पिता ने ऑपइंडिया से बात करते हुए बताया था, “पहले मेरे घर में 2 पुलिसकर्मी घुसे। वो मुझ से सामान्य ढंग से बात कर रहे थे। उस समय घर पर तेजिंदर और उनके अलावा कोई नहीं था। उसी समय तेजिंदर कपड़े पहन कर बाहर आए। थोड़ी बातचीत के बाद कई पुलिसकर्मी मेरे घर में जबरन घुस गए। उनके इस काम की मैं वीडियो बनाने लगा। इसी दौरान एक पुलिसकर्मी मुझे खींच कर कमरे की तरफ ले गया और मुझ से हाथापाई की।”

उनके पिता ने आगे बताया, “इसके बाद वो तेजिंदर को खींच कर बाहर ले गए और हिरासत में ले लिया। पुलिसकर्मियों ने बग्गा को उनकी पगड़ी तक नहीं पहनने दी, जबकि उसने इसे पहनने की गुजारिश की। पुलिसवाले बग्गा का फोन भी अपने साथ ले गए।”

हालाँकि, दिल्ली पुलिस के कहने पर हरियाणा में पंजाब पुलिस को रोक लिया गया और बाद में दिल्ली पुलिस कुरुक्षेत्र गई औऱ उन्हें वापस लाई।

प्रोफेसर वकास फारूक ने बनाया था नाजीवाद और फासीवाद से हिंदुत्व की तुलना वाला सवाल, शारदा यूनिवर्सिटी ने जारी किया ‘कारण बताओ नोटिस’: हो चुका है निलंबित

उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में स्थित शारदा यूनिवर्सिटी में छात्रों से हिन्दू वरोधी सवाल पूछे जाने के मामले में नई कार्रवाई की गई है। इससे पहले खबर आई थी कि उक्त सवाल बनाने वाले प्रोफेसर को निलंबित कर दिया गया है, वहीं अब उसे कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने की जानकारी भी दी गई है। ये सवाल स्नातक (BA/Bachelor Of Arts) के प्रथम वर्ष के छात्रों से पूछा गया था। यूनिवर्सिटी ने इसकी जाँच के लिए तीन सदस्यीय कमिटी का गठन किया था।

शनिवार (7 मई, 2022) को दोपहर से पहले इस कमिटी ने छात्रों के साथ मुलाकात की। इसके बाद वकास फारूक कुट्टे नामक अस्सिस्टेंट प्रोफेसर को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, जिसने ये सवाल बनाया था। कमिटी ने अपनी शुरुआती जाँच में ये भी पाया है कि उक्त सवाल आपत्तिजनक था। ये भी फैसला लिया गया कि कॉपी की जाँच और मार्किंग के समय इस सवाल को नज़रअंदाज़ किया जाएगा और इससे मार्क्स पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

शारदा यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार ने सोशल मीडिया के माध्यम से बयान जारी कर के जानकारी दी है कि कुलपति (VC) ने भी इन सुझावों पर मुहर लगा दी है। साथ ही विश्वविद्यालय के मैनेजमेंट ने उस प्रश्नपत्र के लिए लोगों से माफ़ी भी माँगी है। इससे पहले अपने ट्वीट में यूनिवर्सिटी ने कहा था, “विश्वविद्यालय प्रशासन हर उस लाइन से कोई इत्तेफाक नहीं रखती जो किसी भी राष्ट्रीय पहचान या संस्कृति के विरोध में हो। हम भारत के सच्चे और स्वर्णिम रूप को दिखाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

बता दें कि वकास फारूक कुट्टे जामिया मिल्लिया यूनिवर्सिटी में भी पढ़ चुका है। उसने JRF & NET (राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा) की परीक्षा क्वालीफाई की थी। वो राष्ट्रवादियों पर निशाना साधते हुए लेख लिखते रहता है और JNU में फरवरी 2016 में देश के टुकड़े-टुकड़े किए जाने के नारे लगे थे। कश्मीर पर लिखते हुए वो भारतीय सेना का भी अपमान कर चुका है। उसने एक तरह से भारत सरकार को ही कश्मीर में हो रहे आतंकवाद के लिए जिम्मेदार ठहरा दिया था।

इस विवादित पेपर के पाँचवें नंबर पर सवाल किया गया था कि धर्मान्तरण के मूल कारण क्या हैं? वहीं, छठे नंबर पर पूछा गया था – ”क्या आपको नाजीवादी, फासीवादी और हिंदुत्व में कोई समानता दिखती है?” प्रश्न पत्र में दोनों सवालों को विस्तार से बताने के लिए कहा गया था। यह पूरा विवाद तब उठा था, जब भाजपा नेता विकास प्रीतम सिन्हा ने इसकी फोटो कॉपी ट्वीट करते हुए उसमें पूछे गए एक सवाल को आपत्तिजनक बताया।

कानपुर में अवैध अतिक्रमण हटाने गई प्रशासन की टीम पर हमला, बुलडोजर पर पत्थरबाजी: एक युवक को पकड़ कर पीटा

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के कानपुर में शनिवार (7 मई, 2022) को अतिक्रमण हटाने गई ‘कानपुर विकास प्राधिकरण (KDA)’ के बुलडोजर के खिलाफ लोगों ने जमकर पथराव किया। इस मौके पर पुलिस के साथ लोगों की भिड़ंत हो गई। लोगों का आरोप था कि मनमाने तरीके से KDA प्रशासन दुकानों को ढहा रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, घटना लाल बंगला इलाके की है, जहाँ शनिवार की सुबह प्रशासन की टीम पूरे लाव-लश्कर के साथ पहुँची। अतिक्रमण रोधी कार्रवाई से पहले अधिकारियों ने लोगों से अतिक्रमण को हटाने के लिए कहा। इसके बाद प्रशासन के केडीए के बुलडोजर ने एक-एक कर अतिक्रम का पर्याय बने घरों को जमींदोज करना शुरु कर दिया। इस मौके पर लोगों में भगदड़ मच गई। प्रशासन की कार्रवाई से नाराज स्थानीयों ने बुलडोजर पर पत्थरबाजी भी की।

स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि वे लोग वहाँ बीते 50 सालों से रह रहे हैं। और उनके पास इसकी रजिस्ट्री भी है। बावजूद इसके केडीए प्रशासन ने बिना किसी सूचना के एकतरफा कार्रवाई करते हुए उनकी दुकानों को ढहा दिया। यहाँ तक कि अधिकारियों ने लोगों को ये नहीं बताया कि अतिक्रमण कहाँ किया गया है। हालाँकि, बाद में प्रशासन को बुलडोजर लेकर वापस लौटना पड़ा।

लोगों ने बेवजह एक युवक को पीटा

इस बीच केडीए की अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई के दौरान स्थानीय लोगों ने एक व्यक्ति को पकड़कर पीट दिया। दरअसल, लोगों को लगा कि वो युवक प्रशासनिक कार्रवाई का समर्थन कर रहा है। जबकि, उसका कहना था कि वो अपने पैसे लेने के लिए आया था। हालाँकि, बवाल के बीच पहुँची पुलिस फोर्स ने किसी तरह लोगों को शांत कराया।

पहले भी प्रशासन को बनाया गया निशाना

ये कोई पहली बार नहीं है कि अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए गई प्रशासन की टीमों पर हमले किए गए हों। हाल ही में जीटी रोड पर कल्याणपुर में झुग्गी झोपड़ी हटाने के लिए गई केडीए की टीम पर लोगों ने हमले किए थे।

ट्विटर में नौकरी की चाहत रखने वालों में 263% का उछाल, एलन मस्क की फैन फॉलोविंग का असर: जॉब के लिए ये विशेषताएँ होनी चाहिए

जब से एलन मस्क ने ट्विटर का अधिग्रहण किया है, तभी से इस कंपनी में नौकरियों के लिए लोगों की रुचि भी बढ़ रही है। ‘Tesla’ कंपनी के CEO का दुनिया भर में एक अलग फैन बेस है। उन्होंने 44 बिलियन डॉलर (3.38 लाख करोड़ रुपए) की डील के तहत माइक्रो ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म को खरीदा है। जॉब्स प्लेटफॉर्म ‘Glassdoor’ ने बताया है कि इस फैसले के बाद से ट्विटर को लेकर जॉब इंटरेस्ट में 250 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।

मार्च 2022 से अब तक तुलना करें तो ट्विटर को लेकर जॉब इंटरेस्ट में 263% की वृद्धि हुई है। वरिष्ठ आर्थिक विशेषज्ञ डेनियल झाओ का कहना है कि एलन मस्क की अच्छी खासी फैन फॉलोविंग है, और इसी कारण लोग उनके साथ जुड़ना चाहते हैं और उनके लिए काम करना चाहते हैं। हालाँकि, ‘Glassdoor’ पर क्लिक का ये अर्थ नहीं है कि इतनी ही संख्या में जॉब एप्लिकेशन सबमिट किए हैं हैं, लेकिन ये लोगों की रुचि को दिखाता है।

एलन मस्क ने भी कहा है कि ट्विटर अब हार्डकोर सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, डिजाइन, इंफोसेक और सर्वर हार्डवेयर पर ध्यान केंद्रित करेगा। उनका मानना है कि तकनीकी क्षेत्र में प्रबंधकों को तकनीकी रूप से दक्ष होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में जो मैनेजर होते हैं उन्हें अच्छे सॉफ्टवेयर्स लिखने आने चाहिए, वरना ये ऐसा ही है जैसे घुड़सवारों के दल के मुखिया को घुड़सवारी नहीं आती हो। ट्विटर के CEO पराग अग्रवाल की छुट्टी कर के मस्क खुद ये पद संभाल सकते हैं – ये भी चर्चा है।

ट्विटर में हायरिंग के लिए एलन मस्क एक नई योजना और रणनीति पर भी काम कर रहे हैं। फ़िलहाल अभी तक ये स्पष्ट नहीं है कि ट्विटर के मौजूदा कर्मचारियों का क्या होगा और उनकी भूमिका क्या रहेगी। एलन मस्क ने कहा कि काम के लिए नैतिकता सर्वोत्तम होनी चाहिए, लेकिन जो मापदंड वो खुद के लिए रखते हैं उससे ये काफी कम होगा। ट्विटर को डर है कि इन सबके बीच उसके मौजूदा कर्मचारियों की प्रोडक्टिविटी घट सकती है।

SC के आदेशों की 2 मस्जिदों ने उड़ाई धज्जियाँ, तेज आवाज में बजाया लाउडस्पीकर: मुंबई पुलिस ने किया केस दर्ज

महाराष्ट्र में मस्जिदों में लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को लेकर चल रही सियासत के बीच मुंबई की दो मस्जिदों को सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का मखौल बनाना भारी पड़ गया। शनिवार (7 मई 2022) को मुंबई पुलिस ने बांद्रा में नूरानी मस्जिद और सांताक्रूज में कब्रिस्तान मस्जिद के खिलाफ केस दर्ज किया। इन दोनों मस्जिदों ने रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच न केवल लाउडस्पीकर बजाया बल्कि इसे चलाते हुए तय मानक का पालन भी नहीं किया।

मस्जिदों ने ये कारनामा सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ताक पर रखकर किया। साल 2005 में सर्वोच्च न्यायालय ने एक आदेश जारी किया था, जिसके मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक स्थानों पर रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर बैन लगा दिया था। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने ये भी कहा था कि अगर कोई इस दौरान इसका इस्तेमाल करता है कि उसे डेसिबल के नियमों का पालन करना होगा। हालाँकि, इन दोनों मस्जिदों ने इसका उल्लंघन किया।

गौरतलब है कि मुंबई पुलिस ने ये कार्रवाई मुंबई की 1140 मस्जिदों में 950 को नमाज के लिए लाउडस्पीकर का इस्तेमाल करने की इजाजत देने के बाद की है। इस मसले पर पुलिस का कहना है कि उसने आवेदन करने वालों की साख और उनके उद्येश्य को ध्यान में रखकर इसकी इजाजत दी थी। मस्जिदों ने भी सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीसीबी) के दिशानिर्देशों का पालन करने का आश्वासन दिया था।

रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई की 1140 मस्जिदों ने अजान पढ़ने के लिए लाउडस्पीकर के इस्तेमाल की इजाजत लेने के लिए मुंबई पुलिस को आवेदन दिया था। इस मामले में मनसे चीफ राज ठाकरे द्वारा राज्यभर की मस्जिदों से लाउडस्पीकर को हटाने के आह्वान के बाद बीते 2 सप्ताह से इसके लिए आवेदन आने शुरू हुए हैं।

इससे पहले 1 मई को राज ठाकरे ने औरंगाबाद में एक रैली की थी, जिसमें उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर 4 मई तक मस्जिदों के ऊपर से लाउडस्पीकरों को नहीं हटाया गया तो मनसे कार्यकर्ता मस्जिदों के सामने लाउडस्पीकर पर हनुमान चालीसा बजाएँगे। कथित तौर पर मनसे कार्यकर्ताओं ने मुंबई, नासिक और पुणे समेत राज्य के कई भागों में अजान के वक्त पर हनुमान चालीसा का पाठ किया। बाद में उन्हें हिरासत में भी लिया गया था।

बहरहाल वर्तमान मामले में मुंबई पुलिस ने आऱोपित बांद्रा की नूरानी मस्जिद और सांताक्रूज की कब्रिस्तान मस्जिद के मैनेजमेंट के खिलाफ इंडियन पीनल कोड की धारा 188 और महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम की धारा 37 (1), (3), 135 और शोर निषेध नियम की धारा 33 (आर) (3) के तहत केस दर्ज किया है।

पंजाब में AAP विधायक के ठिकानों पर CBI रेड, छापेमारी में मिले- 94 ब्लैंक चेक, कई आधार कार्ड, विदेशी नोट और ₹1600000+ कैश

आम आदमी पार्टी (AAP) शासित पंजाब में आप के विधायक जसवंत सिंह गज्जन माजरा (Jaswant Singh Gajjan Majra) बैंक धोखाधड़ी (Bank Fraud) के मामले में फँस गए हैं। शनिवार (7 मई 2022) को CBI ने 40 करोड़ रुपए से अधिक के बैंक धोखाधड़ी मामले में पंजाब जसवंत सिंह के कई ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। माजरा अमरगढ़ सीट से AAP के विधायक हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, CBI की टीम ने जसवंत सिंह गज्जन माजरा के मालेर कोटला स्थित पुश्तैनी घर समेत संगरूर जिले में तीन स्थानों पर छापेमारी की है। सीबीआई के अधिकारियों के मुताबिक, विधायक के खिलाफ बैंक ऑफ इंडिया ने शिकायत किया था, जिसके आधार पर ये केस दर्ज किया गया है। सूत्रों का कहना है कि छापेमारी के दौरान सीबीआई ने जसवंत सिंह गज्जन माजरा के साइन किए हुए 94 ब्लैंक चेक और कई आधार कार्डों को जब्त किया है।

इसके अलावा बताया जा रहा है कि जसवंत सिंह गज्जन माजरा के ठिकानों पर तलाशी अभियान के दौरान केंद्रीय जाँच एजेंसी ने 16.57 लाख रुपए नकद, लगभग 88 विदेशी नोट, कुछ संपत्तियों के दस्तावेज, कई बैंक अकाउंट और अन्य आपत्तिजनक दस्तावेज भी बरामद किए हैं।

उल्लेखनीय है कि सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन की टीम ने ये एक्शन तेजिंदर पाल सिंह बग्गा को पंजाब पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के एक दिन बाद लिया है। बता दें कि शुक्रवार की सुबह पंजाब पुलिस के 50 पुलिसकर्मियों की टीम ने दिल्ली स्थित उनके घर से उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद पंजाब पुलिस उन्हें लेकर मोहाली के लिए रवाना हुई थी, लेकिन बग्गा के पिता की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने पंजाब पुलिस के खिलाफ अपहरण का केस दर्ज कर लिया। इसके बाद दिल्ली पुलिस के कहने पर हरियाणा की पुलिस ने कुरुक्षेत्र में पंजाब पुलिस के काफिले को रोक लिया। बाद में दिल्ली पुलिस वहाँ गई और बग्गा को वापस दिल्ली ले आई।