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16 किमी/घंटे की स्पीड से आगे बढ़ा ‘असानी’ चक्रवात, 24 घंटे में ले सकता है विकराल रूप: जानें कौन-कौन से क्षेत्र होंगे प्रभावित

बंगाल की खाड़ी में बना तूफान अब असानी चक्रवात (Asani cyclone) में तब्दील होकर लगातार आगे बढ़ रहा है। इसके कारण हवाओं की रफ्तार आने वाले समय में 75 किलोमीटर प्रति घंटे से भी अधिक हो सकती है। फिलहाल ये चक्रवात 16 किमी प्रति घंटे की गति से आगे बढ़ रहा है। तूफान के चलते ओडिशा, आंध्र प्रदेश और बंगाल में जोरदार बारिश होने की संभावना मौसम विभाग की ओर से व्यक्त की गई है।

असानी चक्रवात से कौन से क्षेत्र होंगे प्रभावित

रिपोर्ट के मुताबिक, अगले 24 घंटे में यह तूफान और अधिक विकराल हो सकता है। आईएमडी भुवनेश्वर के वरिष्ठ वैज्ञानिक उमाशंकर दास ने तूफान की तीव्रता को देखते हुए ओडिशा के तीन जिलों गजपति, गंजम और पुरी में बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा ओडिशा के ही पाँच जिलों- जगतसिंहपुर, पुरी, खुर्दा, कटक और गंजम में भारी बारिश की आशंका जताई है।

बताया जा रहा है कि असानी चक्रवात का असर सबसे ज्यादा पश्चिम बंगाल और ओडिशा में देखने को मिल सकता है। इसके अलावा इसका असर बिहार, झारखंड, सिक्किम, में भी दिखेगा। मौसम विभाग की ओर से इन सबको अलर्ट जारी हुआ है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ओडिशा तट के नजदीक 9-10 मई को स्थिति खराब होगी।

असानी चक्रवात की रफ्तार

आईएमडी के मुताबिक, असानी तूफान की 8 मई को अधिकतम स्पीड लिमिट 60 से 70 किमी प्रति घंटे से 80 किमी प्रति घंटे तक रहेगी, रविवार दोपहर तक 110 किमी प्रति घंटे की रफ्तार के साथ 90 से 100 किमी प्रति घंटे तक हो सकती है, जबकि शाम तक इसकी स्पीड और अधिक बढ़कर 95 से 105 किमी प्रति घंटे तक पहुँचने की आशंका है। सोमवार (9 मई) को हवा की स्पीड 125 किमी प्रति घंटे तक होगी, लेकिन इसके बाद से यह तूफान कमजोर पड़ सकता है। हालाँकि, ओडिशा के स्पेशल रेस्क्यू कमिश्नर पी के जेना ने कहा कि जरूरत पड़ने पर 7.5 लाख लोगों को निकालने के लिए हम तैयार हैं।

असानी चक्रवात का केंद्र

उल्लेखनीय है कि इस तूफान का केंद्र पोर्ट ब्लेयर (अंडमान द्वीप समूह) से लगभग 380 किमी पश्चिम में स्थित है। फिलहाल यह विशाखापत्तनम से दक्षिण-पूर्व दिशा में 970 किमी और पुरी से दक्षिण-पूर्व दिशा में 1020 किमी दूर है। मौसम विभाग के मुताबिक, अच्छी बात यह है कि ये तूफान भारत के पूर्वी तट पर टकराने की बजाय, उसके समानांतर ही निकल जाएगा।

असानी नाम क्यों पड़ा?

गौरतलब है कि इस नए चक्रवाती तूफान का नाम ‘असानी’ रखा गया है। इस तूफान को ये नाम श्रीलंका ने दिया है। ‘असानी’ सिंघली भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ ‘क्रोध’ अर्थात गुस्सा होता है। इस चक्रवात का नाम इसके क्रोध या गुस्से को दर्शाता है।

7000 साल पहले उन्नत घरों में रहते थे हस्तिनापुर वालों के पूर्वज, सड़कें और ड्रेनेज सिस्टम भी: ASI ने खोजी 5000 साल पुरानी ज्वेलरी फैक्ट्री

‘भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI)’ ने हरियाणा के प्राचीन स्थल राखीगढ़ी में एक 5000 साल पुरानी आभूषणों की फैक्ट्री ढूँढ निकालने में सफलता पाई है। पिछले 32 वर्षों से चल रहे इस खुदाई कार्यक्रम की ये सबसे बड़ी सफलता मानी जा रही है। हरियाणा के हिसार जिले में स्थित राखीगढ़ी का सम्बन्ध सिंधु घाटी सभ्यता से माना जाता है। ये गाँव एक पुरातात्विक स्थल है। इसके साथ ही प्राचीन काल में घर बनाने की उत्कृष्ट कला भी दिखी है।

7000 वर्ष पहले लोगों के पास इस तरह के घर होना और उसमें एक पूरा का पूरा किचन परिसर का बनाया जाना, विशेषज्ञों को भी अचंभे में डाल रहा है। यहाँ ज्वेलरी फैक्ट्री का मिलना बताता है कि हजारों वर्ष पूर्व ये जगह व्यापार और कारोबार का एक महत्वपूर्ण स्थल रहा होगा। ताम्र और सोने से बने कई ऐसे आभूषण भी मिले हैं, जो हजारों वर्षों से अब तक छिपे हुए थे। ये वैसा ही है, जैसे उत्तर प्रदेश के सिनौली में कांस्य युग की चक्कियाँ (व्हील डिस्क) मिले थे।

साथ ही वहाँ एक रथ भी खोजा गया था, जो प्राचीन उन्नत योद्धाओं की एक संस्कृति की ओर इशारा करता है। 2018 में इस जगह पर हुई खोजों में एक कब्रिस्तान भी मिला था, जो बताता है कि इस संस्कृति के लोगों का मृत्यु पर्यन्त जीवन पर विश्वास था। ASI ने राखीगढ़ी में पिछले दो महीनों में जो खोज की है, उससे एक सभ्यता के विकास की ओर बढ़ने के क्रम का पता चलता है। इसमें हजारों मिट्टी के घड़ों के अलावा रॉयल सील्स और बच्चों के खिलौने भी शामिल हैं।

ये सभी चीजें खुदाई में मिली हैं। ASI के एडिशनल डायरेक्टर जनरल (ADG) डॉक्टर संजय मंजुल ने कहा कि पिछले दो दशकों में सुनौली, हस्तिनापुर और राखीगढ़ी में संस्था ने काफी काम किया है और फ़िलहाल ये निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि राखीगढ़ी के लोग ही हस्तिनापुर वासियों के पूर्वज थे। उनका कहना है कि यहीं सर संस्कृति और सभ्यता का विकास हुआ। वहाँ आज से 7000 वर्ष पूर्व भी योजनाबद्ध तरीके से मकान बनते थे। इससे पहले एक कंकाल के साथ तांबे का दर्पण मिला था। माना जा रहा है ये 5000 वर्ष पुराना है। जाँच के बाद सही आकलन सामने आएगा।

इतना ही नहीं, उन घरों में पानी की निकासी की अच्छी व्यवस्था होती थी। सड़कों से मिलती हुई गालियाँ बनाई जाती थीं। सड़कों और गलियों में मोड़ पर कच्ची मिट्टी को जला कर ईंट का रूप दिया जाता था और निर्माण को नुकसान न पहुँचे, इसकी व्यवस्था की जाती थी। यहाँ कई मुहर, मृदभांड, हाथी दाँत, सोने और मानव की हाड़ियों की वस्तुएँ भी मिली हैं। फ़िलहाल यहाँ खुदाई जारी रहेगी। सितंबर 2022 से अगली खुदाई शुरू होगी।

वर्तमान खुदाई इस महीने के अंत तक ख़त्म हो जाएगी। हरियाणा सरकार ने ASI के साथ एक समझौता भी किया है, जिसके तहत यहाँ से मिली प्राचीन वस्तुओं को वहाँ के एक संग्रहालय में रखा जा रहा है। राखीखास और राखीशाहपुर में ये स्थल 350 हेक्टेयर में फैला हुआ है, जिसमें कुछ गाँव और कृषि क्षेत्र हैं। यहाँ 7 टीले हैं। 1998-2001 में ASI ने पहली खुदाई की थी। पुणे के डेक्कन कॉलेज ने 2013-16 रिसर्च किया। यहाँ महिलाओं की 60 कब्रें भी मिली थीं, जिन्हें मिट्टी के बर्तन, शेल चूड़ियों और सजे हुए गहनों के साथ दफनाया गया था।

भारत सरकार ने इसे पाँच प्रतिष्ठित स्थलों में से एक के रूप में विकसित किए जाने की योजना भी तैयार की है। बड़ी मात्रा में पत्थरों के अवशिष्ट मिले हैं, जो कीमती हुआ करते थे। सड़कों की चौड़ाई सामान्यतः 2.6 मीटर हुआ करती थी। पूर्व-पश्चिम और उत्तर-दक्षिण दिशा में 18 मीटर तक इसकी गलियाँ जाती हैं। मिट्टी की ईंटों के 15 भाग अब तक दिखे हैं। जली हुई ईंट की दीवार मिली है। नालियाँ भी हैं। बड़ी मात्रा में टेराकोटा और स्टील से बनी कुत्ते-बैल व अन्य पशुओं की मूर्तियाँ, मालाएँ और पत्थरों के मोती भी मिले हैं।

सरकारी मास्टर हारून अली ने 11 साल के वंश के चेहरे पर पेन से किए वार, मुँह पर थूका… क्योंकि उनकी कार साफ नहीं की

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में सरकारी स्कूल के एक प्रिंसिपल पर एक छात्र को बेरहमी से पीटने का आरोप लगा है। पीड़ित छात्र का नाम वंश है, जो क्लास 6 में पढ़ता है। आरोपित प्रिंसिपल का नाम हारून अली मुनव्वर है।

शिकायत के मुताबिक प्रिंसिपल हारून अली मुनव्वर कार साफ़ न करने से छात्र से नाराज थे। इस घटना के विरोध में हिन्दू जागरण मंच ने कोतवाली में हंगामा किया है। आरोपित प्रिंसिपल सस्पेंड कर दिया गया है। पुलिस में घटना की शिकायत 7 मई 2022 (शनिवार) को की गई है। पुलिस को दी गई शिकायत में पीड़ित छात्र की उम्र 11 साल बताई गई है। पीड़ित के पिता राकेश के मुताबिक:

“आरोपित प्रिंसिपल हारून पर पहले ही कई गंभीर केस दर्ज हैं। हर दिन की तरह उनका बेटा स्कूल गया तो उसे प्रिंसिपल ने उसे अपनी कार साफ करने के लिए कहा। जब मेरे बेटे ने मना कर दिया तो बेटे के माथे और सिर पर पेन से वार किया गया। उसके मुँह पर थूक दिया गया और उसका कॉलर पकड़ कर पटक दिया गया। बाद में वंश को गंदी-गंदी गालियाँ दी गईं। घटना के बाद पीड़ित छात्र काफी डरा हुआ है।”

पुलिस को दी गई शिकायत

बेसिक शिक्षा अधिकारी बागपत ने आरोपित प्रिंसिपल हारून को सस्पेंड कर दिया है। वहीं अपनी सफाई में प्रिंसिपल हारून अली ने कहा कि कक्षा 6 के 11 वर्षीय छात्र पर स्कूल में दंगा करने का आरोप है। साथ ही हारून ने अपने ऊपर लगे सभी आरोप बेबुनियाद बताए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पीड़ित परिवार बड़का गाँव का है, जो बागपत की बड़ौत कोतवाली इलाके में पड़ता है। इंस्पेक्टर कोतवाली मानवीर सिंह ने इस पूरे मामले की जाँच कर उचित कार्रवाई का भरोसा दिया है।

ऑपइंडिया ने इस मामले में पीड़ित बच्चे के पिता राकेश से बात की। उन्होंने बताया, “अभी तक पुलिस की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गई है। केस में FIR दर्ज हो गई है।” वहीं पीड़ित के वकील निशांत ने ऑपइंडिया को बताया:

“पीड़ित परिवार OBC समुदाय से है। घटना में सस्पेंड करने की जो कार्रवाई हुई है, वो बस दिखाने के लिए की गई है। अभी तक पुलिस द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। हमें ये भी जानकारी नहीं है कि कौन सी धाराएँ लगाई गई हैं।

वकील निशांत ने आगे बताया, “केस दर्ज किए जाने के बाद लगातार पीड़ित परिवार को धमकियाँ मिल रही हैं। आरोपित प्रिंसिपल कुछ लोगों को लेकर लगातार केस वापस लेने का दबाव बना रहा है। पीड़ित परिवार काफी गरीब है। प्रिंसिपल हारून इससे पहले भी कई बच्चों के साथ मारपीट कर चुका है। उसका क्लास टाइम में स्कूल में सोते हुए भी वीडियो वायरल हो चुका है। हमने उसकी बच्चों से कार साफ़ करते हुए भी वीडियो बनाई है।”

सामने माँ सीता और मुँह पर मदर मैरी का नाम… हीरोपंती-2 के इस सीन को देख भड़के यूजर्स, कहा- इसीलिए फ्लॉप हुई फिल्म

बॉलीवुड फिल्मों में दर्शाए गए दृश्यों में अक्सर हिंदुओं को नीचा दिखाने का प्रयास होता है। हाल में ऐसा ही कुछ हीरोपंती-2 फिल्म की रिलीज के बाद भी देखने को मिला। इस फिल्म में एक दृश्य है जिसमें अमृता सिंह भगवान राम और माता सीता के सामने हाथ जोड़ कर खड़ी हैं लेकिन नाम ले रही हैं मदर मैरी का। अब इसी सीन को देख यूजर्स ने इस पर आपत्ति जताई है और एक बार फिर बॉयकॉट बॉलीवुड की माँग को उठाया है।

वीडियो में अमृता सिंह मंदिर के सामने गायत्री मंत्र का पाठ करती हैं और फिर अचानक हाथ जोड़कर भगवान के सामने कहती हैं, “मदर मैरी को तो मैंने इंग्लिश में कह दिया और आपके लिए माता रानी तेल की जगह दिए में देसी घी डाला है। ये देखकर तो आप समझ ही गई होंगी कि आज ये माँ थोड़ी टेंशन में है। वो क्या है न आज मेरा भोला बच्चा डेंजर दुनिया को फेस करने जा रहा है।”

अब इसी सीन को जेम्स ऑफ बॉलीवुड ने अपने ट्विटर पर शेयर किया है और सवाल पूछा है, “हीरोपंती 2 में महिला देवी माँ के सामने बैठी हैं और मदर मैरी का नाम लेती हैं। आखिर अन्य धर्मों के लोगों के लिए उर्दूवुड कभी भी इस धार्मिक भाईचारे का विस्तार क्यों नहीं करता? हम कभी भी मुस्लिम या ईसाई पात्रों को हिंदू देवताओं का नाम लेते हुए क्यों नहीं देखते हैं।”

उनके अलावा अन्य यूजर्स ने भी इस बात पर दौर किया है कि कैसे भगवान राम और माँ सीता के पूरे परिवार के साथ मदर मैरी की मूर्ति रखी गई है। यूजर ने मजाक उड़ाते हुए कहा कि तभी तो मूवी फ्लॉप हो गई क्योंकि माता रानी सोची मदर मैरी को बुलाया है और मदर मैरी सोची ये माता रानी को बुला रही हैं..दोनों ने छोड़ दिया और मूवी का बंटाधार हो गया।

यूजर्स फिल्म की बुराई कर रहे हैं। विशाल नाम का यूजर लिखता है, “मेरा एक दोस्त है वो यह फिल्म देखने गया था अब वह अपनी आँखों और कानों का ऑपरेशन कराने के लिए डेट ढूँढ रहा है इतनी घटिया और वाहियात फिल्म है।”

यूजर्स ने हैरानी जताई है कि आखिर ईसाइयों के देवी-देवताओं की मूर्ति कैसे हिंदू मंदिर में रखी जा सकती है जबति चर्च में हिंदू देवी-देवताओं की मूर्ति देखने को ही नहीं मिलती। कुछ यूजर्स ने इस तरह के प्रयासों पर कहा कि ऐसे दृश्य दिखा कर सिर्फ हिंदुओं को जबरन ईसाई धर्म मानने के लिए मजबूर किया जा रहा है। इसके अलावा कुछ यूजर्स ने इस डॉयलॉग पर भी आपत्ति जताई है कि आखिर कैसे ये दिखाया जा सकता है कि हिंदू देवी देसी घी की माँग करती हैं जबकि हिंदू धर्म में ऐसा कुछ नहीं है।

बता दें कि ईद के मौके पर रिलीज हुई हीरोपंती 2 में टाइगर श्रॉफ, तारा सुतारिया, नवाजुद्दीन सिद्दीकी मुख्य किरदार में हैं। इस फिल्म ने एक हफ्ते में सिर्फ 23.25 करोड़ का बिजने किया है। रिलीज के 8वें दिन भी फिल्म सिर्फ 28 लाख कमा पाई। वहीं हॉलीवुड की डॉक्टर स्ट्रेंज ने रिलीज के पहले दिन 27 करोड़ रुपए की कमाई की है।

हिमाचल विधानसभा भवन के गेट पर लहराए गए खालिस्तान के झंडे, CM जयराम ठाकुर बोले- जहाँ भी होंगे, खोज निकालेंगे

खालिस्तान समर्थकों (Khalistan) को हौसले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। अब हिमाचल प्रदेश की शीतकालीन राजधानी धर्मशाला के विधानसभा परिसर के गेट पर खालिस्तानियों ने झंडे लगा दिए। रविवार (8 मई 2022) की सुबह जब विधानसभा की मेन गेट पर खालिस्तानी झंडे लगे और दीवारों पर खालिस्तान लिखा मिला तो लोगों के कान खड़े हो गए। सूचना मिलते ही पुलिस ने झंडे उतरवा दिए और लिखा हुआ खालिस्तान को पेंट करा दिया।

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर (Himachal Pradesh CM Jairam Thakur) ने इस घटना पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि रात के अंधेरे में आने वालों में हिम्मत है तो वे दिन में आकर दिखाएँ। इस घटना में शामिल लोगों की पहचान के लिए पुलिस इलाके की CCTV फुटेज खंगाल रही है।

उन्होंने कहा, “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। इस प्रकार के घटना को अंजाम देने वाले लोग नाकाम होंगे। मामले में FIR करने के बाद हमने जाँच के आदेश दे दिए हैं। धर्मशाला में हुई घटना के दोषी जहाँ भी होंगे उन्हें शीघ्र पकड़ा जाएगा। उन लोगों का यह कायरतापूर्ण दौर अब अधिक नहीं चलेगा। निश्चित तौर पर इस घटना को अंजाम देने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

बता दें कि खालिस्तान समर्थकों ने शिमला के विधानसभा परिसर पर खालिस्तान का झंडा फहराने की धमकी दी थी। हालाँकि, इसमें वे सफल नहीं हो पाए थे, लेकिन धर्मशाला के तपोवन स्थित विधानसभा परिसर में उन्होंने झंडे फहरा दिए।

बता दें कि मार्च 2022 में जयराम ठाकुर सरकार ने खालिस्तानी आतंकी भिंडरावाले की पोस्टर वाली गाड़ियों को राज्य में घुसने से रोकने का आदेश जारी किया था। सीएम जयराम ठाकुर ने स्पष्ट कहा थाकि हम ‘निशान साहिब’ (सिख ध्वज) का पूरा सम्मान करते हैं, लेकिन भिंडरावाले को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

दरअसल, पंजाब से आने वाली कई गाड़ियों पर भिंडरावाले की तस्वीरों वाले बैनर लगे हुए थे, जिस पर ज्वालामुखी और मंडी जिलों के लोगों ने आपत्ति जताई थी। ऐसे कई सारे वीडियो सामने आए, जिनमें स्थानीय लोग इन झंडों को हटाने की माँग करते दिखे। इसके बाद सरकार ने ये एक्शन ले लिया।

ट्विटर यूजर अमन बाली ने भिंडरावाले का झंडा लिए एक सिख व्यक्ति का वीडियो शेयर किया, जिसमें कुछ भिंडरावाले के पोस्टर के इस्तेमाल पर आपत्ति जता रहे थे। अमन बाली ने इसे गुंडागर्दी करार देते हुए खालिस्तानी आतंकी को ‘संत जी’ कहा।

इसके पहले अगस्त 2021 में SFJ आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू (Gurpatwant Singh Pannu) ने हिमाचल प्रदेश के सीएम जयराम ठाकुर को धमकी दी थी कि वह उन्हें 15 अगस्त को तिरंगा नहीं फहराने देगा। आडियो संदेश में ये भी कहा गया था कि पंजाब के बाद वे हिमाचल में भी कब्जा करेंगे, क्योंकि हिमाचल का कुछ क्षेत्र पहले पंजाब का हिस्सा था।

ज्ञानवापी विवादित ढाँचे में मिले स्वस्तिक के 2 निशान, वीडियो सर्वे फिर से शुरू… फिर हिन्दू पक्ष ने क्यों किया मुकदमा वापस लेने का ऐलान?

वाराणसी के ज्ञानवापी विवादित ढाँचे में अदालती सर्वे के दौरान बड़ा खुलासा हुआ है। वीडियोग्राफ़ी के दौरान दो स्वस्तिक के निशान मिले हैं। दोनों स्वस्तिक के निशान काफी प्राचीन हैं, लेकिन उन्हें आसानी से समझा जा सकता है। जिस विवादित ढाँचे को ‘मस्जिद’ कहा जाता है, उसके बाहर ही उन्हें पाया गया। रविवार (8 मई, 2022) को सर्वे का काम पुनः शुरू कर दिया गया। इससे पिछले दिन मुस्लिम भीड़ के विरोध के कारण इसे रोकना पड़ा था।

दिल्ली की रहने वाली राखी सिंह, लक्ष्मी देवी, सीता साहू एवं अन्य श्रद्धालुओं की याचिका के बाद ये सर्वेक्षण का कार्य किया जा रहा है। ज्ञानवापी विवादित ढाँचे की दीवार पर ही हिन्दू देवी-देवताओं की प्रतिमाएँ स्थित हैं, जिनकी पूजा के लिए न्यायालय से अनुमति माँगी गई है। सर्वेक्षण के लिए आई टीम को मुस्लिम समुदाय के 100 लोगों की भीड़ ने रोक लिया था। लेकिन, आज पुलिस-प्रशासन की मौजूदगी में ये कार्य फिर से शुरू हो गया है।

बता दें कि 1991 में ही कोर्ट में याचिका डाल कर माँग की गई थी कि विवादित ढाँचे की जमीन हिन्दुओं को वापस की जाए। याचिका में कहा गया था कि ज्ञानवापी मामले में ‘प्रार्थना स्थल कानून 1991’ लागू नहीं होता, जो ऐसे धार्मिक स्थलों पर यथास्थिति की बात करता है। कारण बताया गया कि मस्जिद अवशेषों के ऊपर बनाया गया है, जो हिन्दू मंदिरों के हैं।मुस्लिम पक्ष इसके खिलाफ हाईकोर्ट गया। उधर अब ‘वैदिक सनातन संघ’ ने मुकदमा वापस लेने की बात कर दी है।

अगस्त 2021 में पाँच महिलाओं की ओर के दाखिल याचिका के सम्बन्ध में संगठन के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह बिसेन के हवाले से ‘दैनिक भास्कर’ ने लिखा है कि सोमवार को याचिका वापस ले ली जाएगी। उन्होंने कहा कि कुछ निर्णय अचानक से लेने पड़ जाते हैं, जो समझ से परे होते हैं। उन्होंने इस पर अधिक कुछ कहने से इनकार कर दिया। संगठन पहले ही अपनी विधि सलाहकार समिति को भंग कर चुका है। वहीं याचिकाकर्ताओं में से एक मंजू सिंह ने कहा कि राखी के अलावा बाकी महिलाएँ वाराणसी से हैं, ऐसे में चर्चा चल रही है कि मुकदमा वापस लिया जाएगा या नहीं।

वीडियोग्राफ़ी के काम में बाधा डालने पर संत समाज भी नाराज़ है। ‘अखिल भारतीय संत समिति’ के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि वाराणसी में जिन आक्रांताओं ने मंदिर तोड़े थे, उनके वंशजों को आज संविधान और देश के कानून पर भरोसा नहीं है। उन्होंने इस अराजकता को इसका उदाहरण बताया। उन्होंने पूछा कि आखिर कब तक सर्वे रोकोगे? उन्होंने कहा कि मस्जिद कमिटी अलग-अलग तरह की बातें कर रही है। उन्होंने मुस्लिम भीड़ के जुटान को एक सुनियोजित षड्यंत्र करार दिया।

दिल्ली पुलिस (कुछ दिन पहले) – हिन्दू युवा वाहिनी सम्मेलन में सब कुछ सही, दिल्ली पुलिस (अब) – FIR दर्ज, हिन्दू राष्ट्र की शपथ का मामला

सुदर्शन न्यूज़ के CMD सुरेश चव्हाणके पर दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज की है। हिन्दू युवा वाहिनी ने 19 दिसंबर 2021 को दिल्ली के गोविंदपुरी में एक सम्मेलन का आयोजन किया था। इस सम्मेलन में सुरेश चव्हाणके ने जो कुछ बोला था, इसी को दिल्ली पुलिस ने आधार बनाया है। 2 धर्मों के बीच नफरत फैलाने और धार्मिक भावनाओं को आहत करने की धाराओं में FIR दर्ज किया गया है।

दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को यह जानकारी शनिवार (7 मई 2022) को दी है। इस से पहले 22 अप्रैल 2022 को दिल्ली पुलिस ने इस मामले में कुछ भी गलत नहीं होने की रिपोर्ट दाखिल की थी। उस रिपोर्ट पर जस्टिस एएम खानविलकर ने पुलिस को फिर से विचार करने के लिए कहा था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक इस केस की अगली सुनवाई 9 मई 2022 (सोमवार) को होगी। दिल्ली पुलिस ने यह FIR 153-A (2 समुदायों के बीच द्वेष फैलाना), 295-A (किसी की धार्मिक भावनाओं को आहत करना), 298 (शब्दों से किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाना) और 34 (अपराध की मंशा रखना) IPC के तहत केस दर्ज किया है। पुलिस के मुताबिक मामले की नियमानुसार जाँच करवाई जा रही है।

दिल्ली पुलिस की DCP ईशा पांडेय ने 22 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में हलफ़नामा दाखिल कर के विवेचक के हवाले से बताया था कि उस केस में कोई भी गलतबयानी नहीं हुई थी। कहा गया था कि हिन्दू युवा वाहिनी सम्मेलन के आयोजकों ने अपने धर्म को मजबूत करने पर बल दिया था। इस रिपोर्ट पर लेकिन सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश ने आपत्ति जताई थी।

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज से सवाल किया था – “क्या पुलिस का जवाब स्वीकार करने योग्य है?” इस सवाल के बाद ही नटराज ने फिर से जाँच करवाए जाने का जवाब दिया था।

हिन्दू युवा वाहिनी सम्मेलन दिल्ली के गोविंदपुरी स्थित बनारसीदास ऑडिटोरियम में आयोजित हुई थी। यहीं पर जो बोला गया था, उस पर हेट स्पीच के आरोप लगे थे। बताया गया था कि उस आयोजन में हिन्दू राष्ट्र की शपथ ली गई थी। आयोजन में मुख्य अतिथि सुदर्शन न्यूज़ के CMD सुरेश चव्हाणके थे। यद्दपि सुरेश चव्हाणके ने अपने बयान में कुछ भी गलत न होने और हिन्दू राष्ट्र की शपथ को छत्रपति शिवाजी महाराज की परम्परा बताया था।

सुप्रीम कोर्ट इस मामले में पत्रकार कुरबान अली और वरिष्ठ अधिवक्ता अंजना प्रकाश (पटना हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश) द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है। इस संबंध में पुलिस में शिकायत इलियास और फैसल अहमद ने की थी। उन्होंने बताया था कि गोविंदपुरी मेट्रो स्टेशन के पास बनारसीदास चांदीवाला सभागार में हिंदू युवा वाहिनी द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम से इलाके में दहशत फैल गई थी।

ओडिशा में मुस्लिम आरोपित ने ढाई साल के बेटे के सामने हिंदू महिला का 79 दिनों तक किया रेप: मीडिया ने ‘आलिम/फकीर’ के बजाय ‘तांत्रिक’ लिख किया गुमराह

पिछले दिनों ओडिशा के बालासोर में पारिवारिक कलह दूर करने लिए एक हिंदू परिवार झाड़-फूँक करने वाले एक शख्स के पास पहुँचा। उसने परिवार की बहू को अपने पास रखकर 79 दिनों तक रेप किया। महिला के साथ उसका 2.5 साल का बच्चा भी था। इस मामले में पुलिस ने आरोपित एसके शोरफ को गिरफ्तार कर लिया है। लेकिन, देश की मीडिया इस खबर में आरोपित को ‘तांत्रिक’ बताकर आरोपित की पहचान को छिपाने का प्रयास कर रही है।

मीडिया में शब्दों के खेल से नैरेटिव गढ़ने का काम होता है। किसी व्यक्ति के नाम से सरनेम हटाकर, नाम छुपाकर या गलत विशेषण जोड़कर आदि कई तरह से अक्सर लोगों को गुमराह किया जाता है। दरअसल, इस खबर में आरोपित एक मुस्लिम है, लेकिन उसके लिए ‘मौलवी या फकीर’ का इस्तेमाल ना करके ‘तांत्रिक’ शब्द का इस्तेमाल किया गया है। एक पाठक इस खबर को आमतौर पर ‘तंत्र साधना’ करने वाले किसी किया गया कुकर्म समझेगा।

तांत्रिक से मतलब तंत्र विद्या अभ्यास करने से जुड़ा है। ये मुख्य रूप से हिन्दू धर्म से जुड़ा हुआ है। मीडिया द्वारा की गई रिपोर्ट से ये संदेश जा रहा है कि अपराध हिन्दू व्यक्ति द्वारा किया गया था। जबकि ये अपराध मुस्लिम आलिम द्वारा किया गया था। 

ओडिशा के स्थानीय अखबार ने अपने प्रिंट और डिजिटल, दोनों माध्यमों में स्पष्ट लिखा है कि आरोपित मुस्लिम है और उसी ने परिवार को झाँसे में लेकर महिला को अपने साथ जबरन रखा और उसके बच्चे के सामने लगातार दुष्कर्म करता रहा।

ओडिशा पोस्ट ने अपने डिजिटल माध्यम में स्पष्ट रूप से आरोपित को मुस्लिम बताया है।

इस खबर को मीडिया संस्थानों ने ‘तांत्रिक’ लिखकर हिंदू स्पिन देने की कोशिश की है। NDTV, India TV, AAJTAK, ZEE NEWS आदि अधिकांश मीडिया संस्थानों ने आरोपित के लिए ‘तांत्रिक’ शब्द का इस्तेमाल किया है। एनडीटीवी ने अपनी खबर में उस फकीर का नाम ही गायब कर दिया है। इसके साथ ही उसने आरोपित के लिए तांत्रिक शब्द का इस्तेमाल किया है।

टाइम्स नाऊ हिंदी ने भी खबर का हेडलाइन दिया है, ‘Trantic Raped Woman: ओडिशा में तांत्रिक ने महिला से उसके बेटे के सामने 79 दिन तक किया रेप।’

इंडिया टीवी ने अपनी खबर में तांत्रिका शब्द का प्रयोग किया है।

हिंदी के अखबार अमर उजाला ने भी अपने डिजिटल अंक में तांत्रिक का इस्तेमाल किया है।

ये पहली बार नहीं है कि मीडिया संस्थानों ने इस तरह का काम किया हो। इस तरह की खबरों पर वे अक्सर इस तरह के कारनामे करते रहते हैं। साल 2019 में पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में मुस्लिम आलिम द्वारा काले जादू का उपयोग करके किए गए इलाज में 10 साल के बच्चे की मौत हो गई थी। मगर मीडिया गिरोह ने इस अपराध को हिन्दू द्वारा किए गए अपराध के रूप में फैलाया और तांत्रिक शब्द का इस्तेमाल किया था।

इससे पहले भी इस तरह के आलिमों को बचाने की काफी कोशिश की जा चुकी है। द हिन्दू की एक रिपोर्ट के अनुसार एक महिला ने अजमेर में एक “तांत्रिक” पर दरगाह में नमाज़ अदा करने के बहाने ले जाने के बाद उसके साथ बलात्कार करने का आरोप लगाया था। उसी महीने, टाइम्स ऑफ इंडिया ने एक लेख प्रकाशित किया था, जिसका शीर्षक था, “तांत्रिक को बलात्कार और जबरन वसूली के लिए 10 साल की जेल” इसमें आरोपित का नाम वारसी था।

दैनिक जागरण ने किसी कारण से एक उत्पीड़न मामले में आरोपित को हेडलाइन में  “तांत्रिक सूफी बाबा” के रूप में प्रदर्शित किया। हालाँकि, उसके कंटेंट में आरोपित का नाम आफताब बताया गया था। इसी तरह Hindi News18 ने अपने लेख में लिखा, “भूत भगाने के बहाने नाबालिग के साथ दुष्कर्म करने के आरोप में तांत्रिक गिरफ्तार।” बाद में तांत्रिक की पहचान हाफिज साजिद के रूप में हुई थी।

विवादित ज्ञानवापी मस्जिद कमिटी ने एडवोकेट कमिश्नर बदलने के लिए कोर्ट में दी याचिका, मुस्लिम पक्ष के विरोध के बाद सर्वेक्षण 9 मई तक रूका

उत्तर प्रदेश के वाराणसी (Varanasi, Uttar Pradesh) में स्थित विवादित ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi Masjid) परिसर में माँ श्रृंगार गौरी स्थल की वीडियोग्राफी एवं सर्वेक्षण का काम शनिवार (7 मई 2022) को विरोध के बाद नहीं हो सका। विवादित ढाँचे से संबंधित अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद समिति ने शनिवार को स्थानीय अदालत में याचिका देकर एडवोकेट कमिश्नर अजय कुमार मिश्रा पर ‘पक्षपातपूर्ण’ होने का आरोप लगाते हुए उन्हें बदलने की माँग की।

मस्जिद कमिटी के अधिवक्ताओं ने यह कहते हुए अंदर जाने से रोक दिया, कोर्ट के आदेश में मस्जिद के अंदर वीडियग्राफी का आदेश नहीं है। विरोध के बाद सर्वे का काम अगली सुनवाई 9 मई तक के लिए टाल दी गई है।

हिंदू याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिवक्ता हरि शंकर जैन ने बताया कि वाराणसी के सिविल जज (सीनियर डिवीजन) रवि कुमार दिवाकर की अदालत में एक आवेदन दायर किया गया है, जिसमें मस्जिद का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों द्वारा एडवोकेट कमिश्नर को बदलने का अनुरोध किया गया है। जैन ने कहा, “सोमवार को मामले की सुनवाई अदालत द्वारा की जाएगी और हम मुस्लिम पक्ष द्वारा उत्पन्न की रही बाधाओं पर अपनी आपत्ति उठाएँगे”

वहीँ अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद कमेटी के एक अधिकारी ने कहा, “जब हमारी आपत्ति कोर्ट में एडवोकेट कमिश्नर को बदलने की माँग है तो वही व्यक्ति उस आयोग का नेतृत्व कैसे कर सकता है। अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद कमेटी का प्रतिनिधित्व कर रहे एडवोकेट अभय नाथ यादव ने कहा, “हमने एडवोकेट कमिश्नर को बदलने के लिए एक आवेदन दायर किया है।”

बता दें कि विवादित ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में सर्वे का काम 6 मई से हो रहा है। बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स को भी सुरक्षा व्यवस्था के लिए लगाया गया था। जब 7 मई को जब सर्वे करने वाली टीम वहाँ पहुँची, तब मुस्लिम समुदाय के लोगों ने दरवाजे पर खड़े होकर जाम लगा दिया, जिससे एडवोकेट कमिश्नर अंदर जा ही नहीं पाए। माहौल बिगाड़ने की साजिश हुई और शाम के 5 बजे बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग वहाँ पर पहुँचने लगे।

नारेबाजी और उपद्रव कर रहे लोगों को पुलिस ने वहाँ से खदेड़ा। वहीं अब्दुल कलाम नाम के एक उपद्रवी को यूपी पुलिस ने हिरासत में भी लिया है। उसने बहाना बनाया कि उसे लगा कि नमाज के लिए भीड़ इकट्ठी हुई थी। साथ ही उसने माफ़ी भी माँगी। मुस्लिम पक्ष के लोग बैरिकेडिंग के भीतर घुस गए।

ज्ञानवापी-शृंगार गौरी का विवाद पिछले साल शुरू हुआ था। पाँच हिंदू महिलाओं ने कोर्ट में याचिका देकर मस्जिद के अंदर स्थित माता श्रृंगार गौरी तथा अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमा की पूजा करने की इजाजत माँगी थी। हिंदुओं का दावा है कि विवादित मस्जिद प्लॉट संख्या 9130 पर स्थित है और इसके अंदर कई देवी-देवताओं के विग्रह हैं। उनका यह भी दावा है कि तहखाने में शिवलिंग भी है, जिसकी साल 1990 तक पूजा की जाती थी।

Lock Upp का विजेता बना मुनव्वर फारूकी: खुद का यौन शोषण, छोड़ चुके बीवी-बच्चे और अम्मी के तेजाब पीने की कहानी… जानें पूरा सफर

विवादित कॉमेडियन मुनव्वर फारुकी ने रियलिटी शो लॉक अप (Lock Upp) का पहला भाग जीत लिया है। इस जीत के बाद उन्हें 20 लाख रुपए कैश के साथ एक मारूति अर्टिगा कार इनाम में मिली। साथ ही उन्हें विदेश में इटली की यात्रा का भी मौका दिया गया। फाइनल में उन्होंने बॉलीवुड अभिनेत्री पायल रोहतगी को हराया। यह घोषणा 7 मई 2022 (शनिवार) को देर रात हुई।

जीत के बाद मुनव्वर फारुकी (Munawar Faruqui) ने बाहर निकल कर शेर सुनाया। उन्होंने कहा, “उठा तूफ़ान जो दस्तक दे कर आया, अकेला था लगा लश्कर ले कर आया। पूछेंगे कि किस की है ये लोहे जैसी लेगसी, कहना वो डोंगरी वाला आग ले कर आया।”

मीडिया से बात करते हुए फारुकी ने कहा, “बहुत ख़ुशी हो रही है जीत के बाद। बहुत मेहनत की थी मैंने। लोगों की दुआएँ मेरे साथ थीं। लॉक अप में हर पल हसीन था। यहाँ हम रोए, हँसे और नाचे-गाए। ये जगह छोड़ने में बुरा लगा रहा। पायल मजबूत प्रतिद्वंद्वी थीं। लेकिन मैं सोचंता था कि मेरा समाज के लिए किया गया काम और लोगों को दिया गया मज़ा जीतने के लिए पायल रोहतगी से बेहतर है। हालाँकि मैं नर्वस था।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लॉकअप OTT प्लेटफॉर्म का सबसे विवादित रियलिटी शो माना जाता है। इस शो में मुनव्वर फारुकी ने अपनी पर्नसल जिंदगी से जुड़े कई खुलासे किए थे। माना जा रहा है कि मुनव्वर ने इन खुलासों के साथ अपनी कथित हिन्दू विरोधी छवि को सुधारने की कोशिश की। इस दौरान उन्होंने बचपन में अपने साथ यौन शोषण होने और अपनी माँ के तेजाब पीने जैसे खुलासे किए।

मुनव्वर फारुकी के मुताबिक उनके रिश्तेदारों ने ही उनका 6 साल की उम्र से 11 साल का होने तक यौन शोषण किया था। इसी के साथ बचपन में उनकी अम्मी ने तेजाब पी लिया था और वे उसके कुछ दिन पहले से कुछ खा नहीं रही थीं। फारूकी ने बताया था कि उनकी माँ अपनी शादी में कभी खुश नहीं थीं। उन्हें पीटा जाता था, लड़ाई होती थी।

गौरतलब है कि मुनव्वर फारुकी अपनी असल जिंदगी में अपनी बीवी और बच्चों से अलग रहते हैं। उनका केस कोर्ट में चल रहा है। लेकिन ‘लॉक अप’ में अंजली और सायशा से मिले धोखे से मुनव्वर का दिल इस कदर टूट गया था कि वह शो में प्रिंस के सामने रोने लगा था। जिस तरह से लॉकअप से मुनव्वर फारूकी की खबरों को मीडिया में प्रसारित किया गया, उससे शो निर्माताओं की नीयत पर सवाल उठे थे।

फारुकी के कॉमेडी पंच, खेल स्ट्रैटेजी, सादगी को बाकियों से हटकर दिखाया गया। जितना प्रमोशन फारूकी का सोशल मीडिया पर हुआ, उतना शायद ही 1 मिलियन फॉलोवर वाली अंजलि अरोड़ा या टीवी इंडस्ट्री के मशहूर करणवीर बोहरा जैसे अन्य प्रतिभागियों का हुआ।