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यूपी सरकार ने मुख़्तार अंसारी की ₹5.10 करोड़ की संपत्ति जब्त की: कोर्ट ने बेटे अब्बास की गिरफ़्तारी पर फिर रोक लगाई, दिया था भड़काऊ बयान

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में माफिया मुख़्तार अंसारी पर बड़ी कार्रवाई करते हुए बुधवार (27 अप्रैल, 2022) को प्रशासन ने उससे जुड़ी 5.10 करोड़ रुपए की बेनामी संपत्ति जब्त की। ये संपत्तियाँ मऊ से 5 बार लगातार विधायक रहे मुख़्तार अंसारी के साले अनवर शहजाद और सरजील रजा के नाम पर दर्ज थी। मुख़्तार अंसारी फ़िलहाल बाँदा के जेल में बंद है। इस कार्रवाई के बाद से माफिया के परिजनों और रिश्तेदारों में हड़कंप मचा हुआ है।

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सत्ता में लौटने के साथ ही गुंडे-मवालियों पर कार्रवाई और तेज़ हुई है। गाजीपुर में गैंगस्टर एक्ट की धारा 14 (1) के तहत ‘गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रिया-कलाप’ को लेकर आई रिपोर्ट पर डीएम ने इस कार्रवाई का आदेश दिया। इस कार्रवाई के लिए सदर एसडीएम प्रतिमा मिश्रा और सीओ ओजस्वी चावला के नेतृत्व में पुलिस और राजस्व की टीम सुबह 10.30 बजे बबेड़ी स्थित भूमि पर पहुँच गई थी।

तत्पश्चात मुनादी करवा कर जमीन कुर्क करने की कार्रवाई की गई। सदर सीओ ओजस्वी चावला ने इस सम्बन्ध में जानकारी देते हुए बताया कि संपत्ति को कुर्क करने की कार्रवाई पूरी कर ली गई है। इस दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल को मौके पर तैनात किया गया था। इससे पहले भी 10 अप्रैल, 2022 को माफिया से जुड़ी 3.50 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की गई थी। ये प्लॉट महुआबाग में शुभ्रा कॉम्प्लेक्स के सामने 811 वर्ग मीटर में स्थित था।

ये मुख़्तार अंसारी की अम्मी राबिया खातून के नाम पर दर्ज था। उसकी बीवी आफसा अंसारी के नाम पर भी एक अवैध गजल होटल बना हुआ था, उसे भी ध्वस्त करने की कार्रवाई की गई थी। मऊ जिले में भी मुख़्तार अंसारी के आर्थिक साम्राज्य पर गाह्रो चोट दी गई है, वहीं कई अन्य जिलों में भी ये कार्रवाई जारी है। इससे पहले मऊ प्रशासन ने 11 अप्रैल, 2022 को मुख्तार अंसारी के करीबी गणेश दत्त मिश्रा की पाँच एकड़ भूमि पर अवैध प्लॉटिंग को बुलडोजर से ध्वस्त कराया था। इसकी अनुमानित लागत 60 करोड़ बताई गई थी।

वहीं दूसरी तरफ खबर आ रही है कि भड़काऊ बयान देने के आरोपित और मऊ से सपा विधायक अब्बास अंसारी की गिरफ़्तारी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। 12 मई को फिर से सुनवाई होने तक उसकी गिरफ़्तारी पर रोक की अवधि बढ़ा दी गई है। यूपी सरकार ने अपना जवाब दाखिल किया, जिस पर अब्बास अंसारी पक्ष काउंटर दायर करेगा। बता दें कि अब्बास अंसारी, मुख़्तार का बेटा है। तब चुनाव आयोग ने भी इस बयान को लेकर उस पर कार्रवाई की थी।

भगदड़ में एक की मौत, कई हुए थे घायल: गुजरात HC ने शाहरुख़ खान के खिलाफ FIR रद्द की, ‘रईस’ के प्रमोशन में हुआ था हादसा

फिल्म ‘रईस’ के प्रमोशन के दौरान मचे भगदड़ के मामले में गुजरात उच्च-न्यायालय ने बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख़ खान खिलाफ दर्ज केस को खारिज कर दिया है। ये भगदड़ पूर्वी गुजरात में स्थित वरोदड़ा के रेलवे स्टेशन पर मची थी। जस्टिस निखिल एस करिएल की बेंच ने ये फैसला सुनाया। उन्होंने कहा कि तब शाहरुख़ खान की तरफ से किए गए कार्यों को लापरवाही या उतावलापन नहीं कहा जा सकता है। ‘रईस’ 25 जनवरी, 2017 को रिलीज हुई थी।

गुजरात हाईकोर्ट ने ये भी कहा कि शाहरुख़ खान की तरफ से जो भी किया गया, उसे वरोदड़ा रेलवे स्टेशन पर हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना का सटीक कारण नहीं माना जा सकता। इस मामले में दर्ज की गई FIR में बताया गया था कि शाहरुख़ खान अपनी फिल्म ‘रईस’ के प्रमोशन के लिए मुंबई से दिल्ली ट्रेन से यात्रा कर रहे थे। इसी दौरान जैसे ही ट्रेन वरोदड़ा रेलवे स्टेशन पर रुकी, शाहरुख़ खान को देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई।

इस दौरान शाहरुख़ खान ने न सिर्फ हाथ हिला कर लोगों का अभिवादन किया, बल्कि भीड़ की तरफ टीशर्ट्स और गेंदें भी फेंकी। इसके बाद मची भगदड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज तक करना पड़ा। इस भगदड़ में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी, साथ ही कई अन्य घायल भी हुए थे। कार्यक्रम के दौरान एक पुलिसकर्मी बेहोश भी हो गया था। स्थानीय कॉन्ग्रेस नेता जितेंद्र सोलंकी ने इस मामले में FIR दर्ज कराई थी।

शाहरुख़ खान के खिलाफ IPC की धाराओं 336, 337, और 338 के अलावा रेलवेज एक्ट 145, 150, 152, 154 और 155 (1) (a) के तहत भी मामला दर्ज किया गया था। शाहरुख़ खान ने इसे रद्द करने के लिए गुजरात हाईकोर्ट का रुख किया और उच्च-न्यायालय ने जुलाई 2017 में इस मामले में कार्रवाई रोक दी। कोर्ट का कहना था कि शाहरुख़ खान के पास कार्यक्रम के लिए प्रशासन की अनुमति थी। हाईकोर्ट का कहना है कि इस घटना के पीछे सिर्फ एक कारण नहीं था, कई कारण थे।

‘भारत अपनी शर्तों पर दुनिया से रिश्ते निभाएगा, हमें किसी की सलाह की जरूरत नहीं’: विदेश मंत्री जयशंकर ने पश्चिमी देशों को फिर सुनाया

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार (27 अप्रैल, 2022) को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में रायसीना डायलॉग को सम्बोधित करते हुए उन्होंने क्षमता निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत को इस बारे में व्यावहारिक होना चाहिए कि वह अंतरराष्ट्रीय वातावरण का लाभ कैसे उठाता है और कड़ी सुरक्षा पर अधिक ध्यान देकर अतीत में की गई गलतियों को कैसे सुधारता है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत के 75 साल कार्यक्रम में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कार्यक्रम के दौरान कहा, “जब हम 75 सालों को पीछे मुड़कर देखते हैं तो हम सिर्फ वो बीते हुए 75 साल नहीं देखते बल्कि वो 25 साल भी देखते हैं जो आने वाले हैं। एक समय था जब दुनिया के इस हिस्से में हम एकमात्र लोकतंत्र थे। अगर लोकतंत्र आज वैश्विक है या आज हम इसे वैश्विक देखते हैं, तो इसका श्रेय भारत को जाता है।”

कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने भारत कहाँ पिछड़ गया है इस सवाल के जवाब में कहा, “भारत ने अतीत में अपने सामाजिक संकेतकों और मानव संसाधनों पर उस तरह का ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा हमने मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलाजी ट्रेंड पर उतना ध्यान नहीं दिया, जितना हमें देना चाहिए था। विदेश नीति के लिहाज से हमने कड़ी सुरक्षा को उतना महत्व नहीं दिया। अब भारत को अगले 25 वर्षों में क्षमता निर्माण पर ध्यान देना चाहिए। भारत को परिणामों पर पूरी तरह से तय होना चाहिए और इस बारे में पूरी तरह से व्यावहारिक होना चाहिए कि यह अंतरराष्ट्रीय वातावरण का लाभ कैसे उठाता है।”

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस बात पर कहा, “भारत अपनी शर्तों पर दुनिया से रिश्ते निभाएगा और इसमें भारत को किसी की सलाह की जरूरत नहीं है। वो कौन हैं समझकर दुनिया को खुश रखने की जगह हमें इस आधार पर दुनिया से संबंध बनाने चाहिए कि हम कौन हैं। दुनिया हमारे बारे में बताए और हम दुनिया से अनुमति लें वो वाला दौर खत्म हो चुका है। अगले 25 सालों में भारत वैश्विककरण का केंद्र होगा।”

वहीं बता दें कि रूस के साथ व्यापार को लेकर विदेश मंत्री ने कहा, “आदेश जैसे ऑर्डर को अब एशिया में चुनौती मिलने लगी है। रूस के साथ व्यापार को लेकर हमें यूरोप से सलाह मिली कि हम रूस के साथ और व्यापार ना करें। कम से कम हम किसी को सलाह देने नहीं जाते।” आदेश जैसे ऑर्डर करने वाले यूरोप पर जमकर बरसते हुए विदेश मंत्री ने बिना चीन का नाम लिए कहा, “यूरोप उस वक्त असंवेदनशील क्यों था जब बीजिंग एशिया को धमका रहा था?”

उन्होंने कहा कि यूरोप के लिए ये जागने का समय है कि वो एशिया की तरफ भी देखे। एशिया दुनिया का हिस्सा है जहाँ अस्थिर सीमाएँ और आंतकवाद जैसी समस्याएँ हैं। दुनिया को समझना होगा कि समस्याएँ आने वाली नहीं हैं बल्कि आ चुकी है।

‘कैमरा-माइक बाहर रख कर आइए’: तेज प्रताप की बातें सुन सरपट भागा पत्रकार, पीछा करते-करते पहुँच गए माँझी के आवास

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप लगातार सुर्ख़ियों में बने हुए हैं। हाल ही में राजद नेता रामराज यादव ने उन पर नंगा कर के कमरे में बंद कर के पिटाई करने का आरोप लगाया। इसके बाद तेज प्रताप यादव राजद से इस्तीफे का ऐलान कर के सुर्ख़ियों में आ गए। अब उनका इंटरव्यू लेने आए एक पत्रकार को उन्होंने न सिर्फ दौड़ा दिया बल्कि उसका वीडियो भी बनाया। फिर वो पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम माँझी के घर पहुँचे।

ये वीडियो उन्होंने खुद अपने सोशल मीडिया हैंडल्स से बुधवार (27 अप्रैल, 2022) को दोपहर में शेयर किया था। इसमें देखा जा सकता है कि कैसे वो पत्रकार का पीछा कर रहे हैं। उनका इंटरव्यू लेने आया पत्रकार एक यूट्यूब चैनल से ताल्लुक रखता है। वो बिहार के पूर्व मंत्री के घर पहुँचा था। उसने तेज प्रताप यादव से पूछा कि क्या वो उससे नाराज हैं? तेज प्रताप यादव ने जवाब दिया, “नहीं, आप अपना माइक और कैमरा बाहर रख कर आइए।”

इतना सुनते ही उक्त पत्रकार अपनी कार में बैठ कर वहाँ से किसी तरह निकल भागा। इस दौरान भी तेज प्रताप यादव उसके पीछे-पीछे कुछ दूर तक चलते रहे। बाद में उन्होंने दावा किया कि ये वही पत्रकार है, जिसने उन्हें बदनाम करने का प्रयास किया है। तेज प्रताप यादव इसके बाद भी लगातार वीडियो बनाते रहे और सीधे ‘हिंदुस्तान आवाम मोर्चा (HAM)’ के संस्थापक जीतन राम माँझी के यहाँ पहुँचे। उन्होंने दिखाया कि अब उक्त पत्रकार की गाड़ी यहीं पर लगी हुई है।

तेज प्रताप यादव ने इसके बाद दावा किया कि उनके विरुद्ध जीतन राम माँझी के आवास से ही सारी साजिश रची जा रही है। तेज प्रताप यादव ने अब तक राजद से इस्तीफा तो नहीं दिया है, लेकिन अपना आवास छोड़ कर राबड़ी देवी के 10 सर्कुलर रोड स्थित निवास पर शिफ्ट हो गए हैं। तेजस्वी यादव भी अपनी पत्नी के साथ यहीं पर रहते हैं। लालू यादव भी जब दिल्ली से लौटते हैं तो उनका यही ठिकाना होता है। नजरें अब तेज प्रताप यादव के अगले कदम पर है।

हाल ही में रामराज यादव ने आरोप लगाया था, “इफ्तार पार्टी के दिन मुझे पार्टी के द्वारा 3 नंबर पंडाल की जिम्मेदारी दी गई थी। उस दिन करीब 3 जब मैं 10 नंबर पंडाल पर अपने महानगर के पदाधिकारियों को ड्यूटी पर लगा रहा था तो तेज प्रताप यादव मुझे कमरे में लेकर गए। उसके बाद जो सुलूक मेरे साथ किया गया, उससे आज भी मेरा रोया खड़ा हो जाता है…मुझे धमकी दी गई तो आरजेडी छोड़ दो, अन्यथा 10 दिन में तुम्हें गोली मरवा देंगे।”

‘अपनी फिल्मों को हिंदी में डब कर के क्यों रिलीज करते हो?’: जानिए क्यों साउथ एक्टर सुदीप पर भड़के अजय देवगन, बाद में बताई गलतफहमी

बॉलीवुड अभिनेता अजय देवगन ने बुधवार (27 अप्रैल, 2022) को कन्नड़ स्टार किच्चा सुदीप (Kiccha Sudeep) को हिंदी भाषा और हालिया रिलीज फिल्म KGF: 2 पर उनके विवादास्पद बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। देवगन ने ट्विटर पर सवाल भी किया है कि अगर हिंदी राष्ट्रीय भाषा नहीं है तो साउथ इंडस्ट्री के मेकर्स अपनी फिल्मों को हिंदी में डब करके रिलीज क्यों करते हैं?

अजय देवगन ने ट्विटर पर किच्चा सुदीप को टैग करते हुए लिखा, “मेरे भाई, आपके अनुसार अगर हिंदी हमारी राष्ट्रीय भाषा नहीं है तो आप अपनी मातृभाषा की फ़िल्मों को हिंदी में डब करके क्यों रिलीज़ करते हैं? हिंदी हमारी मातृभाषा और राष्ट्रीय भाषा थी, है और हमेशा रहेगी। जन गण मन।”

अजय देवगन के ट्वीट पर सुदीप किच्चा प्रतिक्रिया देते हुए सुदीप चिच्चा ने लिखा, “सर… मैंने उस लाइन को क्यों कहा, मेरे ख्याल से इसका संदर्भ उससे बिलकुल अलग है, जैसा कि आपने समझा है। जब मैं आपसे पर्सनली मिलूँगा तो इस बात पर डिसकस करूँगा कि मैंने वह बयान क्यों दिया था। यह बयान किसी को चोट पहुँचाने, उकसाने या कोई बहस शुरू करने के लिए नहीं था। मैं अपने देश की हर भाषा से प्यार और सम्मान करता हूँ सर। मैं चाहता हूँ कि यह टॉपिक यहीं पर खत्म हो, क्योंकि इसे अलग संदर्भ में लिया गया।”

एक और ट्वीट में उन्होंने लिखा, “आपके द्वारा हिंदी में भेजे गए टेक्स्ट को मैं समझ गया। केवल इसलिए कि हम सभी ने हिंदी का सम्मान किया, प्यार किया और सीखा। यह कोई अपराध नहीं है सर, लेकिन सोच रहा था कि अगर मेरी प्रतिक्रिया कन्नड़ में टाइप की गई तो क्या स्थिति होगी।!! क्या हम भी भारत के नहीं हैं सर।”

अजय देवगन ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा, “आप एक दोस्त हैं। गलतफहमी दूर करने के लिए धन्यवाद। मैंने हमेशा फिल्म उद्योग को एक समझा है। हम सभी भाषाओं का सम्मान करते हैं और हम उम्मीद करते हैं कि हर कोई हमारी भाषा का भी सम्मान करेगा। शायद, अनुवाद में कुछ छूट गया था।”

अजय देवगन का यह ट्वीट सुदीप द्वारा KGF 2 फिल्म को ‘पैन इंडिया फिल्म’ कह कर विवाद खड़ा करने के कुछ दिनों बाद आया है। कन्नड़ भाषा की फिल्म KGF Chapter: 2 की अभूतपूर्व सफलता के बाद, कन्नड़ सुपरस्टार ने एक वायरल वीडियो में कहा, “फिल्म कन्नड़ में बनाई गई थी और अब हिंदी राष्ट्रीय भाषा नहीं रही। वे (बॉलीवुड) भी आज पैन इंडिया फिल्म बना रहे हैं। लेकिन, वे तमिल और तेलुगू में स्ट्रगल कर रहे हैं और फिल्में नहीं चल रही हैं। आज हम (कन्नड़ फिल्म उद्योग) जो फिल्म बना रहे हैं वह हर जगह पसंद की जा रही हैं।” KGF Chapter: 2 को कई भाषाओं में डब किया गया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2019 में अपनी फिल्म पेलवान के प्रमोशन के दौरान जब उनसे फिल्म की हिंदी में डबिंग को लेकर सवाल किया गया था तो उन्होंने कहा था कि हिंदी राष्ट्रभाषा कैसे है। उन्होंने उस समय कहा था, “सब कुछ यहीं से शुरू हुआ, इसलिए यह हमेशा अधिक वजन रखता है। मेरे हिसाब से अन्य भाषाओं की तुलना में हिंदी बोलने वालों की संख्या अधिक है। इसलिए, हम हिंदी वर्जन को अधिक तरजीह दे रहे हैं।” बता दें कि किच्चा सुदीप बॉलीवुड में भी काम कर चुके हैं। वो सलमान खान की फिल्म ‘दबंग 3’ में नजर आए थे।

4 मई को खुलेगा देश का सबसे बड़ा IPO, ₹902-949 होगा प्राइस बैंड: जानिए LIC आईपीओ में निवेश के लिए क्या है जरूरी

शेयर मार्किट में भारतीय जीवन बीमा निगम लिमिटेड (LIC) के आईपीओ को लेकर निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) के सचिव तुहिन कांत पांडे ने बुधवार (27 अप्रैल, 2022) को इसके बारे में जानकारी दी। इसमें कहा गया है कि सरकार की इस बीमा कंपनी में 3.5 फीसदी हिस्सेदारी बेचने और करीब 20,557.23 करोड़ रुपए जुटाने की योजना है। यहाँ बता दें कि पहले इसका आकार 65 हजार करोड़ रुपए रखने का निर्णय किया गया था, जिसे अब बदल दिया गया है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद दीपम के सचिव तुहिन कांता पांडे ने कहा, “एलआईसी का आईपीओ देश का सबसे बड़ा आईपीओ होगा भले ही इसका इश्यू साइज घटाकर दिया गया है। लाॅन्ग टर्म में यह इश्यू निवेशकों के लिए फायदेमंद साबित होगा।” दीपम सचिव तुहिन कांत पांडे ने आगे बताया, “एलआईसी आईपीओ के लिए प्रति शेयर 902 रुपए से 949 रुपए पर प्राइस बैंड निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि हम इसे एलआईसी 3.0 चरण कहेंगे।”

LIC के अध्यक्ष एम. आर. कुमार ने कहा, “एंकर इंवेस्टर्स के लिए 2 मई, 2022 को आईपीओ खुलेगा, जबकि 4 से 9 मई तक आम जनता के लिए ये खुलेगा। इसके अलावा ये बाजार में 17 मई को लिस्ट हो सकता है।” मीडिया से बात करते हुए उन्होंने इसे भारत का सबसे बड़ा आईपीओ भी बताया। कुमार के मुताबिक प्राइज बैंड 902-949 रुपए रखा गया है, जिसमें पॉलिसी धारकों को 60 रुपए की छूट मिलेगी, जबकि खुदरा निवेशकों और कर्मचारियों के लिए 45 रुपए की छूट का प्रावधान है। इस आईपीओ में निवेशक एक लाॅट में कम से कम 15 शेयरों के लिए बोली लगा सकते हैं।

तुहिन कांत पांडे ने बताया, “कैपिटल मार्किट के प्रतिकूल हालात के मद्देनजर एलआईसी आईपीओ का आकार बिल्कुल सही है। इससे कैपिटल की कमी नहीं होगी और मॉनेटरी सप्लाई भी बाधित नहीं होगी। एलआईसी का आईपीओ पूरी तरह से ऑफर ऑन सेल होगा। कंपनी इसके जरिए एंकर निवेशकों के लिए 5.929 करोड़ शेयर जारी करेगी। कर्मचारियों के लिए 15.8 करोड़ शेयर और पॉलिसी धारकों के लिए 2.214 करोड़ शेयर रिजर्व रखे गए हैं। इसके अलावा क्यूआईबी के लिए 9.883 शेयर निर्धारित किए गए हैं।

बता दें कि एलआईसी आईपीओ को लेकर पहले केंद्र सरकार की योजना 5 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की थी। इसके तहत कंपनी 31.6 करोड़ शेयर जारी करने वाली थी। लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण बाजार में आई उथल-पुथल के मद्देनजर इसका आकार छोटा कर दिया गया। लेकिन सरकार ने भले ही आईपीओ का आकार 65 हजार करोड़ रुपए से घटाकर 21 हजार करोड़ रुपए कर दिया है, फिर भी ये सबसे बड़ा आईपीओ होगा।

गौरतलब है कि देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) में सरकार की 100 फीसदी हिस्सेदारी है। यानी सरकार के पास कंपनी के 632.49 करोड़ शेयर हैं।

ऑस्ट्रेलिया में मेलबोर्न की सड़कों पर खालिस्तानी आतंकी भिंडरावाले का बैनर: भारतीयों ने प्रशासन को लिखा पत्र- बंद हो आतंक का महिमामंडन

ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख शहर मेलबर्न (Melbourne, Australia) में बुधवार (27 अप्रैल 2022) को सड़क के किनारे खालिस्तानी आतंकी ‘जरनैल सिंह भिंडरावाले’ (Jarnail Singh Bhindranwale) का बड़ा-सा बैनर लगा दिया। इसमें भिंडरावाले की एक बड़ी तस्वीर लगी थी और उसके आतंकी गतिविधियों का महिमामंडन किया गया था। इसको देखकर भारतीय समुदाय के लोगों में गुस्सा फैल गया और उन्होंने इसकी सूचना विक्टोरिया पुलिस और स्थानीय निकाय के अधिकारियों को दी।

द ऑस्ट्रेलिया टुडे के अनुसार, आनंद पाल मेलबर्न हवाईअड्डे के पास एक एक सम्मेलन में अपनी गाड़ी से जा रहे थे। इसी दौरान सनशाइन अस्पताल के पास लगे इस बिलबोर्ड पर उनकी नजर पड़ी। पाल ने बताया कि इस तस्वीर को देखकर उन्हें अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हुआ।

आनंद पाल ने बताया, “यह आतंकवादी खालिस्तान अलगाववादी आंदोलन के नाम पर भारतीय के पंजाब में मेरे दो चाचाओं की हत्या के लिए जिम्मेदार था।” उन्होंने कहा कि भिंडरावाले की तस्वीर देखकर वे इतने दुखी हो गए बीमारी का बहाना बनाकर वे काम पर जाने के बजाय वापस घर लौट गए।

नाम नहीं छापने की शर्त पर एक स्थानीय व्यक्ति ने ऑस्ट्रेलिया टुडे को बताया कि मेलबर्न में खालिस्तान समर्थकों के बहुत से रेस्टोरेेंट और स्टोर हैं। वहाँ खड़ी कई कारों पर ‘आई लव भिंडरावाले और खालिस्तान जिंदाबाद’ के स्टिकर लगाए देखे गए हैं। इस संबंध में बिलबोर्ड लगाने वाली कंपनी को एक पत्र भी भेजा गया है।

विरोध में स्थानीय निकाय द्वारा भेजा गया पत्र (साभार: ऑस्ट्रेलिया टुडे)

पत्र में कहा गया है, “इस तरह के बिलबोर्ड लगाना आतंकी और कट्टरपंथी विचारधारा को आश्रय देने की तरह है। अगर आपको नहीं पता है तो बता देें कि खालिस्तान मूवमेंट आतंक आधारित मूवमेंट है, जो एक अलग देश की माँग करता है। बिलबोर्ड में दिखाया गया जरनैल सिंह भिंडरावाले न सिर्फ भारत सरकार द्वारा आतंकवादी घोषित है, बल्कि कई विदेशी सरकारों ने भी इसे आतंकी घोषित किया है।”

पत्र में अलगाववाद को बढ़ावा देने वाले इस तरह के किसी भी किसी भी विज्ञापन या प्रदर्शन को तुरंत रोकने की माँग की गई है। साथ ही मेलबर्न में धार्मिक घृणा फैलाने वालों की निंदा की गई है।

मोहम्मदपुर नहीं, अब माधवपुरम कहिए: दिल्ली के 40 गाँवों का नाम बदलेगी भाजपा शासित MCD, कहा – गुलामी का प्रतीक नहीं चलेगा

देश की राजधानी दिल्ली स्थित मोहम्मदपुर गाँव का नाम बदलकर माधवपुरम कर दिया गया है। इस मामले में दिल्ली भाजपा ने बुधवार (27 अप्रैल, 2022) को कहा कि उसने गाँव का नाम बदल दिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, मोहम्मदपुर गाँव का नाम बदलकर माधवपुरम करने की सारी प्रक्रियाओं को पूरा कर लिया गया है। इस मौके पर दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष आदेश गुप्ता समेत कई अन्य नेता मौजूद रहे। इसको लेकर आदेश गुप्ता ने ट्वीट कर कहा, “अब से यह गाँव माधवपुरम के नाम से जाना जाएगा। आजादी के 75 साल बाद भी गुलामी का कोई भी प्रतीक हमारा हिस्सा हो ये कोई भी दिल्लीवासी नहीं चाहेगा।”

गौरतलब है कि साउथ दिल्ली में भीकाजी कामा प्लेस के पास स्थित इस गाँव के नामकरण की प्रक्रिया बहुत समय पहले से ही दिल्ली नगर निगम शुरू कर चुका था। बीजेपी के स्थानीय पार्षद भगत सिंह टोकस के मुताबिक, इस गाँव में हिंदुओं की आबादी सर्वाधिक है। इसलिए इसका नाम बदला जाना चाहिए।

दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने कहा, “गाँव का नाम बदलने के लिए यहाँ के पार्षद भगत सिंह टोकस ने एनएमडीसी के हाउस में प्रस्ताव पेश किया था, जिसे महापौर की सहमति से पास कर दिया गया। दिल्ली सरकार तुष्टिकरण की राजनीति कर दिल्ली के माहौल को खराब कर रही है।”

बीजेपी नेता ने यह भी कहा कि अभी 40 ऐसे गाँवों का नामकरण किया जाना है, जिनका मुगल काल के समय नाम बदला गया था। इन सभी गाँवों के नामों को स्वतंत्रता सेनानियों, देश और समाज के लिए काम करने वालों के नाम पर रखा जाएगा। माधवपुरम गाँव से इसकी शुरुआत हो चुकी है। आदेश गाँधी ने कहा कि निगम ने अपनी तरफ से सारी दस्तावेजी कार्रवाई पूरी कर ली है और अब गेंद दिल्ली सरकार के पाले में है।

उल्लेखनीय है कि अब जब भी आप माधवपुरम गाँव में जाएँगे तो प्रवेश द्वार पर ही इसके नाम का बोर्ड दिखाई देगा।

Pak का अत्याचर-चीन ने छीना रोजगार: बलूचों के लिए SHERO बनी खुद को उड़ाने वाली माँ, शौहर बोला- गर्व है

पाकिस्तान के कराची में एक बलूच महिला ने चीनी नागरिकों को निशाना बनाते हुए जब खुद को बम से उड़ाया, तो ये देख सब हैरान रह गए कि आखिर एक औरत ने ऐसा कैसे कर दिया। घटना के बाद अचानक ये खबरें आने लगीं कि पढ़ी-लिखी एमएससी, एमफिल पास महिला दो बच्चों की माँ, डॉक्टर की बीवी, बलूच लिबरेशन आर्मी की सदस्य थी, जो संगठन से जुड़ी इसीलिए ताकि खुद को कुर्बान कर सके।

धमाके के बाद संगठन द्वारा जारी बयान में कहा गया कि वह उनकी पहली महिला फिदायीन हमलावर थी। बलूचिस्तान के लिए जान गँवाने वाले उन पर ऐसे कई लोग हैं जो चीनी नागरिकों को अपनी जमीन से खदेड़ने के लिए और पाकिस्तानी सेना को भगाने के लिए कुछ भी करेंगे। शारी बलूच उन्हीं लोगों में से एक थी जिसे दो छोटे बच्चे देखते हुए रोका गया कि वो इस काम का मन न बनाए। हालाँकि शारी ने इस मामले में किसी की नहीं सुनी और खुद को हमले के लिए तैयार करती रहीं।

धमाके के बाद लोग ये देख हैरान हो ही रहे थे कि आखिर कैसे एक महिला इतने घातक हमले को अंजाम दे सकती है, कि तभी सोशल मीडिया पर शारी के शौहर के ट्वीट ने लोगों को चौंका दिया। अपने बीवी और बच्चों के साथ तस्वीर साझा करते हुए शारी के शौहर ने कहा कि उसे अपनी बीवी पर गर्व है और बच्चों को भी ये सोचकर फख्र होगा कि उनकी माँ कितनी महान थी।

इसके बाद फिदायीन हमलावर शारी की तारीफों का बलूचियों ने तांता लगा दिया। सोशल मीडिया पर ये लोग गर्व के साथ शारी की तस्वीर शेयर कर रहे हैं। पाकिस्तान जिसे आत्मघाती आतंकी हमला कह रहा है वो बलूच लोगों के लिए ‘कुर्बानी’ है। उनके अनुसार ये कुर्बानी शारी ने अपनी सरजमीं को पाकिस्तान और चीन के अत्याचारों से आजाद कराने के लिए दी है।

बलूचिस्तान के लोग शारी को आतंकी कहने वालों से सवाल पूछ रहे हैं कि क्या कोई ये सोच रहा है कि दो बच्चों की माँ ने अपने बच्चे और परिवार छोड़कर जान क्यों दे दी। अगर नहीं! तो ये सोचने का समय कि वो कौन सी चीन की परियोजना है जिससे बलूचिस्तान के लोग आहत हैं और चीन को भगाना चाहते हैं। वो क्या वजह है पाकिस्तान के हिस्से आने के बाद भी बलूचिस्तान के लोगों को पाकिस्तानी सेना से इतनी नफरत है कि वह उन्हें जिंदा नहीं छोड़ते।

बलूचिस्तान

बलूचिस्तानियों के इन सवालों के जवाब के लिए आजादी के बाद से झेला गया उनका संघर्ष याद करने की जरूरत है जब पाकिस्तान ने जबरदस्ती इस क्षेत्र पर अपना कब्जा किया था। बलूच के लोग तभी से अपनी आजादी माँग रहे थे। हालाँकि पाकिस्तानी सेना उन्हें अपने अत्याचारों से चुप करवा देती थी। बाद में लिबरेशन आर्मी जैसे विद्रोही संगठन सामने आए और वह खुद पाकिस्तानी सेना-चीनियों पर हमला करने लगे। क्षेत्रफल के नजरिए से देखें तो बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा क्षेत्र है। ऐसा भी कह सकते हैं कि ये कुल पाकिस्तान का 44 फीसद क्षेत्र है। चूँकि यह इलाका रेगिस्तानी और पहाड़ी है इसलिए यहाँ पाकिस्तानी आबादी का केवल पाँच प्रतिशत रहता है। इलाके की आबादी 1.3 करोड़ है।

बलूचिस्तान पर पाकिस्तान का अत्याचार

बलूचिस्तानियों की सबसे बड़ी शिकायत हमेशा से पाकिस्तान से यही रही कि उन्होंने सिंध और पंजाब प्रांतों का खूब विकास किया लेकिन बलूचिस्तान पर कभी ध्यान नहीं दिया गया। उलटा इस जगह स्थानियों पर पाकिस्तानी सेना के अत्याचार लगातार होते रहे।

साल 2016 की एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तानी सेना ने बलूच के नसीराबाद इलाके में अंधाधुँध गोलीबारी की थी। उस दौरान हेलीकॉप्टर से बंदूकें चलाई गई थीं। लोगों के घरों को जलाया गया था। मवेशियों से लकर महिलाओं और बच्चों तक को पाकिस्तानी सेना ने अपनी हैवानियत का शिकार बनाया था। उसी दौरान बलूचिस्तान के लोगों ने क्षेत्र में हो रहे अपहरण और जनसंहार की जानकारी भी मीडिया को दी थी।

2019 में बलूच नेता नवाब अकबर बुगती ने हालातों को बयां करते हुए कहा था“अगस्त 2006 में हत्या के बाद से सेना का अत्याचार चरम पर है। आतंकवादी समूहों के साथ साँठगाँठ करके पाकिस्तानी सेना और अन्य एजेंसियाँ हजारों बलूच राजनेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्रों, वकीलों, पत्रकारों, इंजीनियरों, डॉक्टरों और शिक्षकों को ग़ायब कर चुकी है।”

बुगती के बयान के मुताबिक बलूचिस्तान में लोगों को अगवा करके गायब करने का सिलसिला रुका नहीं है। पुराने बयान में उन्होंने 40,000 से अधिक बलूच नागरिकों के लापता और 10 हजार के हत्या की बात कही थी। उन्होंने बताया था कि ये लोग गोली से छलनी शव को बीहड़ क्षेत्रों में फेंक दिया गया। बाकी बलूच नागरिक अब भी सेना की अवैध हिरासत में हैं। इन मासूमों को न तो रिहा किया जा रहा है और न ही इन्हें कोर्ट में पेश किया जा रहा है।

इसी तरह मानवाधिकार एक्टिवि्ट फरजाना मजीद ने पाकिस्तानी फौजियों द्वारा बलूच महिलाओं पर किए जा रहे अत्याचार की तुलना 1971 में पूर्वी पाकिस्तान में हुए अत्याचारों से की थी। एक महिला ने इसी तरह कपड़े उतार कर यह दावा किया था कि पाकिस्तान पुलिस वाले उसकी बहन से रेप करते हैं और शिकायत करने पर उन्हें कोई मदद नही दी जाती, इसलिए वह कपड़े उतारकर प्रदर्शन कर रही हैं।

बलूचिस्तान में चीन की CPEC योजना

पाकिस्तान सेना के बाद बात करें चीनी नागरिकों से बलूच लोगों की नफरत की… तो बता दें कि बलूचिस्तान के लोग चीन के मनसूबों से अच्छे से वाकिफ हैं और वह ये भी जानते हैं कि पाकिस्तान ने अपनी आर्थिक समस्या से निपटने के लिए चीन को बलूचिस्तान में एंट्री दे दी है। मगर चीन इस क्षेत्र को पूरी तरह कब्जाना चाहता है। बलूचिस्तानियों को ये आभास है कि उनके क्षेत्र में चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे के नाम पर चीनियों की उपस्थिति उन्हीं के लिए घातक है।

इस परियोजना के तहत ग्वादर क्षेत्र के तहत रास्ता बन रहा है जिसका बलूच लोग शुरू से विरोध कर रहे हैं। उनकी नाराजगी ये है कि इतना बड़ा फैसला लेने से पहले एक भी बार स्थानीयों का ख्याल नहीं किया गया और अब चीनी लोगक्षेत्र में मौजूद प्राकृतिक संसाधनों से खिलवाड़ करने में लगे हैं। खबरें आती हैं कि जिस समुंदर से मछलियाँ निकालकर बलूच अपना जीवनयापन करते थे वहाँ चीनी लोग अपने ट्रॉली भेज मछलियाँ निकलवा रहे हैं, इससे स्थानीयों के काम में फर्क पड़ रहा है और उन्हें भूखा रहने को मजबूर होना पड़ा रहा है। इसके अलावा जो परियोजना लागू हो रही है उनमें भी बलूच लोगों को रोजगार नहीं मिल रहा

मालूम हो कि बलूचिस्तान का क्षेत्र एशिया में सोने, तांबे और गैस के सबसे बड़े भंडारों में से एक है। फिर भी पाकिस्तान को इस क्षेत्र की परवाह नहीं है। साल 2019 की खबर के अनुसार स्थानीयों का आरोप था कि पाकिस्तान ने सोने और तांबे की खदानों को चीन को दे दिया है। वहाँ से वह चीनी खनिज भरते हैं और अपने देश ले जाते हैं और ये काम आज से या 1-2 सालों से नहीं चल रहा बल्कि 2001 से ही इसकी शुरुआत हो गई थी।

बलूचिस्तान को भारत से उम्मीदें

बता दें कि एक ओर बलूचिस्तानी अपने देश की पाकिस्तानी सेना और चीन जैसी विदेशी ताकतों से परेशान हैं वहीं दूसरी ओर उन्हें भारत से उम्मीदें हैं। वहाँ अक्सर पाकिस्तान के विरोध और हिंदुस्तान के समर्थन में नारेबाजी होती आई है। हाल में पाकिस्तान के राजनीतिक दल मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट (MQM) के नेता अल्ताफ हुसैन ने संयुक्त राष्ट्र, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारतीय संसद और ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन से पाकिस्तान के कब्जे से सिंध और बलूचिस्तान को आजाद कराने की अपील की थी। 

10-12 दिन से लापता हैं विदेश दौरे पर गए राहुल गाँधी, कोई नहीं कर पा रहा संपर्क: NDTV का दावा – PK की नो एंट्री से सोनिया ने बेटी का कद कर दिया छोटा

चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) द्वारा कॉन्ग्रेस (Congress) ज्वाइन करने से इनकार करने के बाद अब खबर सामने आई है कि विदेश के दौरे पर गए कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) अचानक लापता हो गए हैं। मंगलवार (26 अप्रैल, 2022) को इसका खुलासा करते हुए NDTV ने दावा किया कि वो बीते 10 दिनों से लापता है और उनसे कोई संपर्क नहीं हो सका है।

सोशल मीडिया पर एनडीटीवी की एँकर निधि राजदान की एक वीडियो वायरल हो रही है, जिसके 1:26 सेकंड के हिस्से में उन्होंने कहा, “ऐसे समय में भी राहुल गाँधी लापता हैं। वो पिछले 10-12 दिनों से विदेश में है और जो हमें पता चल रहा है कि किसी की उन तक पहुँच नहीं है।” इसके बाद निधि राजदान प्रशांत किशोर के कॉन्ग्रेस में शामिल होने के मुद्दे पर बात करती हैं। वो कहती हैं, “पीके की कॉन्ग्रेस में एंट्री को लेकर प्रियंका गाँधी काफी उत्साहित थीं। लेकिन आखिरी फैसला सोनिया गाँधी को लेना था। भले ही वो काफी उत्साहित थीं, लेकिन सोनिया गाँधी के फैसले से उनका कद छोटा हो गया है।”

‘इंडिया टुडे’ की रिपोर्ट के मुताबिक, करीब एक सप्ताह पहले राहुल गाँधी विदेश दौरे पर गए थे। सिर्फ वही नहीं, उनकी बहन प्रियंका गाँधी वाड्रा भी विदेश के दौरे पर गई थीं। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है, “ प्रशांत किशोर के वादों को लागू करने के लिए प्रियंका गाँधी ने काफी जोर दिया था। वो पीके के लिए अपने भाई और माँ समेत कॉन्ग्रेसियों को मनाने की कोशिशें कर रही थीं। यही सबसे नया संकेत मिला था। सूत्रों ने दावा किया कि इन 24 घंटों में प्रियंका गाँधी ने सभी सीमाओं को तोड़ दिया।”

भले ही राहुल गाँधी को ट्रेस नहीं किया जा सका है, लेकिन उनके गायब होने की खबरें भी उन्हें नफरत फैलाने और भ्रामक ट्वीट पोस्ट करने से नहीं रोक सकीं। बुधवार (27 अप्रैल) राहुल गाँधी ने एक नया ट्वीट किया और दावा किया कि 7 वैश्विक ब्रांडों का भारत से जाना ‘हेट-इन-इंडिया’ कैम्पेन के बढ़ने का कारण है।

पीके के 600 स्लाइड प्रेजेंटेशन भी न आए काम

गौरतलब है कि इससे पहले कॉन्ग्रेस में शामिल होने की खबरों के बीच प्रशांत किशोर ने पार्टी को पुनर्जीवित करने और उसे बचाने के लिए शीर्ष नेतृत्व के समक्ष 600 स्लाइड प्रेजेंटेशन दिए थे। इसमें उन्होंने कॉन्ग्रेस डिजिटल वर्ल्ड में सक्रिय होने, समान विचारधारा वाले मीडिया हाउसों और फेसबुक, ट्विटर के इन्फ्लुएँसरों को शामिल करने का सुझाव दिया था। इसके साथ ही पीके ने सुझाव दिया था कि पार्टी को स्टैंडअप कॉमेडियनों को पार्टी के प्रचार-प्रसार के लिए हायर करना चाहिए।

हालाँकि, पीके का ये प्रेजेंटेशन किसी काम का नहीं रहा। कॉन्ग्रेस ने उनके प्रस्ताव को ठुकरा दिया। पीके ने एक ट्वीट में कहा, “मेरी विनम्र राय में मुझसे ज्यादा पार्टी को परिवर्तनकारी सुधारों के माध्यम से गहरी जड़ें जमाने वाली संरचनात्मक समस्याओं को ठीक करने के लिए नेतृत्व और सामूहिक इच्छाशक्ति की जरूरत है।”