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CM योगी ने अवैध लाउडस्पीकर्स पर तलब की रिपोर्ट, 17000 स्थलों पर कम की गई आवाज़, ईद पर पुलिस तैयार: 125 जगह उतरवाए गए भोंपू

देश भर के मस्जिदों में लाउडस्पीकर को लेकर चल रहे विवाद के बीच उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ने राज्य में धार्मिक स्थलों से अवैध लाउडस्पीकरों को हटाने का आदेश दिया है। पिछले हफ्ते सीएम योगी आदित्यनाथ (Yogi Aditynath) ने रिहायशी इलाकों में स्थित धार्मिक स्थलों में सामान्य मानक के अनुसार ही लाउडस्पीकर (Loudspeakers) बजाने का निर्देश दिया था। साथ ही उन्होंने धार्मिक स्थलों में तेज आवाज में लाउडस्पीकर बजाने वालों की रिपोर्ट माँगी थी।

अपर मुख्य सचिव (गृह) अवनीश कुमार अवस्थी ने जानकारी दी, “शनिवार (24 अप्रैल, 2022) को राज्य में धार्मिक स्थलों से अवैध लाउडस्पीकरों को हटाने का आदेश जारी किया गया था। इस संबंध में जिलों से 30 अप्रैल तक रिपोर्ट माँगी गई है।” अवस्थी ने बताया कि पुलिस को निर्देश दिया गया है कि वह धार्मिक स्थलों के धर्मगुरुओं से बातचीत कर अवैध लाउडस्पीकरों को हटवाएँ।”

ADG लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार ने सोमवार (25 अप्रैल 2022) को बताया, “अभी तक उत्तर प्रदेश में में 125 धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर हटवाए गए हैं। वहीं, 17 हजार धार्मिक स्थलों पर स्पीकर की आवाज कम की गई है। इसके अलावा शासन ने तेज आवाज में लाउडस्पीकर बजाने वालों की रिपोर्ट तलब की है। ये रिपोर्ट 30 अप्रैल तक देनी होगी।”

अगले महीने ईद और अक्षय तृतीया एक ही दिन पड़ने की संभावना है। ऐसे में सीएम ने निर्देश दिए हैं कि लाउडस्पीकर के इस्तेमाल से किसी भी प्रकार के धार्मिक जुलूस के दौरान दूसरे समुदाय को असुविधा नहीं होनी चाहिए। इसे पुलिस की अनुमति के बिना नहीं निकाला जाना चाहिए। ADG लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत ने यह भी बताया, “अलविदा की नमाज और इसके पहले जो अन्य धर्मों के भी त्योहार हुए हैं, उनमें लाउडस्पीकर की आवाज कम करने के लिए लगभग 37,344 धर्मगुरुओं से बात की गई है।”

ईद की तैयारियों को लेकर प्रशांत कुमार ने कहा, “अलविदा की नमाज (रमजान महीने का आखिरी जुमा) लगभग 31 हजार जगहों पर होनी है। इसके चलते करीब 75 हजार ईदगाह और 20 हजार मस्जिदों में नमाज पढ़ी जाएगी। इन सभी जगहों पर बात कर लाउडस्पीकर की आवाज को या तो परिसर तक ही सीमित रखा जाएगा या फिर लाउडस्पीकर उतरवाए जाएँगे। संवेदनशील जिलों में 45 कंपनी PAC, 7 कंपनी CRPF और स्थानीय पुलिस फोर्स को अलर्ट किया गया है।”

गौरतलब है कि बीते दिनों हिंदू नववर्ष, रामनवमी और हनुमान जन्मोत्सव पर देश के अलग-अलग राज्यों में शोभा यात्राओं पर हुए हमलों के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कई कड़े निर्देश जारी किए थे। इसके तहत यूपी में बिना अनुमति के कोई भी जुलूस और धार्मिक यात्रा निकालने पर रोक लगा दी गई है। आयोजकों को जुलूस के दौरान शांति और सौहार्द बनाए रखने के संबंध में शपथ पत्र भी देना होगा। नियमों का उल्लंघन होने पर कठोर कार्रवाई की बात भी कही गई है।

हनुमान शोभा यात्रा पर मुस्लिम भीड़ का हमला, मूर्ति पर शराब की बोतलें फेंकी: BJP ने की ‘बुलडोजर जस्टिस’ की माँग, आंध्र की जगन सरकर निशाने पर

भारतीय जनता पार्टी ने मंगलवार (26 अप्रैल, 2022) को आंध्र प्रदेश के नेल्लोर में रविवार (24 अप्रैल, 2022) को हनुमान शोभा यात्रा पर हमला करने वाले बदमाशों के खिलाफ ‘बुलडोजर न्याय’ की माँग की। इस घटना को लेकर वाईएस जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली सरकार की आलोचना करते हुए, भाजपा के राष्ट्रीय सचिव और आंध्र प्रदेश के सह-प्रभारी सुनील देवधर ने कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री लंबे समय से हिंदुओं और भाजपा के धैर्य की परीक्षा ले रहे हैं।

उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “हिंदुओं ने कल नेल्लोर में भयावह स्थिति देखी जब ‘हनुमान शोभा यात्रा’ पर अवैध मस्जिद से पथराव हुआ और मूर्ति पर शराब की बोतल फेंकी गई! यह शर्मनाक है! जगन मोहन रेड्डी, आप कब तक हिंदुओं के धैर्य की परीक्षा लेते रहेंगे? आंध्र प्रदेश #BulldozerJustice की जरूरत है।” ट्वीट में उन्होंने गृह मंत्रालय को भी टैग किया है।

इसके साथ ही MLC वाकाती नारायण रेड्डी ने भी मंगलवार ट्विटर पर कहा कि नेल्लोर शहर में जब हनुमान जयंती जुलूस नेल्लोर जिला कोर्ट रोड से शांतिपूर्वक गुजर रहा था तो मस्जिद के युवाओं ने भद्दे इशारे किए। उन्होंने आरोप लगाया कि मस्जिद परिसर के कुछ लोगों ने जुलूस में शामिल लोगों को भड़काने की कोशिश की।

सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करते हुए, उन्होंने उपद्रवियों द्वारा लगाए गए इस्लामी नारे और जुलूस के दौरान शांति भंग करने के उनके कृत्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने ट्विटर पर स्थानीय भाषा में लिखा था, “ये दूसरी तरफ से किए गए नारे थे जब जुलूस शांतिपूर्ण ढंग से गुजर रहा था। हिंदुओं के देश में हमारे हिंदुओं की यही स्थिति है। उन्हें प्रताड़ित किया जाता है। अब अगर हम शांति और धर्मनिरपेक्षता पर विचार करें तो हम सड़कों पर चल भी नहीं पाएँगे। यह दुनिया को यह बताने का समय है कि हमारा देश एक हिंदू देश है।”

आंध्र प्रदेश के नेल्लोर में हनुमान जुलूस पर हमला

रिपोर्ट्स के मुताबिक, नेल्लोर शहर में हनुमान जयंती जुलूस की शुरुआत टीटीडी कल्याण मंडपम से स्टोनहाउस पेट एरिया तक की गई। शांतिपूर्ण जुलूस में 15,000 से अधिक हिंदुओं ने भाग लिया था। जुलूस जब शांतिपूर्ण तरीके से जिला कोर्ट रोड से गुजर रहा था तो पास की मस्जिद के मुस्लिम भीड़ ने पत्थर और काँच की बोतलों से जुलूस पर हमला कर दिया।

मुस्लिम भीड़ ने भगवान हनुमान की प्रतिमा पर शराब की बोतलें भी फेंकी। उन्होंने भद्दे इशारे किए और जुलूस में इस्लामी नारे लगाए। भाजपा के राष्ट्रीय सचिव और आंध्र प्रदेश के सह-प्रभारी सुनील देवधर ने 26 अप्रैल को यह भी कहा कि नेल्लोर जिला न्यायालय के पास बनी मस्जिद अवैध थी और राज्य सरकार को अवैध निर्माण पर रोक लगानी चाहिए। उन्होंने हाल ही में दिल्ली के जहाँगीरपुरी और मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे अन्य राज्यों में हुए अतिक्रमण विरोधी अभियान का उल्लेख किया और कहा कि सांप्रदायिक झड़पों में शामिल लोगों के घरों और संपत्तियों को गिरा दिया जाना चाहिए।

साथ ही, MLC रेड्डी ने उल्लेख किया कि जिस जमीन पर मस्जिद खड़ी थी वह लोक निर्माण विभाग की थी और कुछ साल पहले उस पर कब्जा कर लिया गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाई कोर्ट ने चार साल पहले बेदखली का आदेश दिया था, लेकिन अधिकारी अभी तक निर्देशों को लागू करने में विफल रहे हैं। रेड्डी ने चेतावनी दी कि अगर ऐसी घटना दोबारा हुई तो हिंदू चुप नहीं रहेंगे। उन्होंने कहा कि वह शहर में असामाजिक तत्वों के खिलाफ अदालत में अवमानना ​​याचिका दायर करेंगे। इस बीच भाजपा ने इस घटना पर गंभीर आपत्ति जताई है और जिला कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा है जिसमें शहर में सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के लिए कहा गया है।

महिला पुलिकर्मी से छेड़छाड़ में पकड़े गए जिग्नेश, जहाँगीरपुरी वाले अंसार की तरह कैमरे पर किया ‘पुष्पा’ स्टेप: वीडियो

विवादित ट्वीट के मामले में असम पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद जमानत मिलने और फिर गिरफ्तार किए जाने पर कॉन्ग्रेस के विधायक जिग्नेश मेवाणी फिल्म पुष्पा का ‘झुकेगा नहीं’ वाला स्टेप कैमरे पर करके पुलिस के साथ जाते दिखे। ये वीडियो गुजरात कॉन्ग्रेस सेवादल के ऑफिशियल ट्विटर अकाउंट से शेयर किया गया है।

दरअसल, जब पुलिस की टीम जिग्नेश मेवाणी को जीप में लेकर जा रही थी तो एक रिपोर्टर ने उनसे सवाल पूछने की कोशिश की। इस पर मेवाणी ने बाहर देखा और अल्लू अर्जुन की फिल्म पुष्पा स्टाइल में इशारे किए। 10 सेकंड की क्लिप में मेवाणी की ये हरकत देखी जा सकती है।

गौरतलब है कि पीएम नरेंद्र मोदी को लेकर किए गए एक ट्वीट के मामले में जमानत मिलने के बाद मेवाणी को महिला पुलिस अधिकारी से छेड़छाड़ और अभद्र व्यवहार करने के आरोप में असम पुलिस ने दोबारा गिरफ्तार कर लिया था। इससे पहले अदालत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर विवादित ट्वीट के मामले में उनकी जमानत अर्जी पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था।

इस मामले पर असम पुलिस की ओर से जारी एक बयान में कहा गया, “गुजरात के विधायक जिग्नेश मेवाणी को बारपेटा पुलिस स्टेशन में उनके खिलाफ दर्ज एक नए मामले में केस नंबर 81/22 और आईपीसी की धारा 294, 323, 353, 354 के तहत फिर से गिरफ्तार किया गया है।”

जहाँगीरपुरी हिंसा के आरोपित अंसार ने भी पुष्पा स्टाइल दिखाया था

इससे पहले जहाँगीरपुरी के दंगों के मुख्य आरोपित मोहम्मद अंसार ने भी पुलिस हिरासत में अल्लू अर्जुन की फिल्म पुष्पा के इसी सिग्नेचर मूव का इस्तेमाल किया था। ये एक्शन उसने कोर्ट ले जाते वक्त किया था। इसके जरिए ये संदेश देने की कोशिश की गई थी उसे कोई पछतावा नहीं है।

उसे दिल्ली की रोहिणी कोर्ट ने 17 अप्रैल 2022 को सुनवाई के बाद पुलिस की हिरासत में भेज दिया था। यही वो दिन था जब उसने पुष्पा स्टाइल में इशारे किए। गौरतलब है कि अंसार पर आरोप था कि हिंदुओं की शोभा यात्रा निकलते वक्त पथराव और हमले करने के लिए लोगों को उकसाया था।

‘जैसे कोरोना में खाली हिंदू को बीमारी पकड़ा था… खुदा फिर ऐसा करेगा’: जहाँगीरपुरी की औरतों का ‘जहर’ भी माशाअल्लाह

दिल्ली के जहाँगीरपुरी में शनिवार (16 अप्रैल 2022) को हनुमान जन्मोत्सव पर निकाली गई हिंदुओं की शोभा यात्रा पर हमला हुआ था। इसके बाद कई वीडियो वायरल हुए थे जिसमें दंगाई पत्थरबाजी करते, गोली चलाते, हथियार लहराते दिखे थे। इलाके में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण की बात भी सामने आई थी। अवैध निर्माणों को हटाने के लिए नगर निगम ने अभियान शुरू किया था जिसे सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद रोक दिया गया। इस अभियान के बाद से ही इस कार्रवाई को मुस्लिम विरोधी प्रचारित करने की कोशिशें की जा रही है।

इस बीच जहाँगीरपुरी की एक औरत का वीडियो वायरल हुआ है जिसमें वह कह रही है कि कोरोना केवल हिंदुओं को हुआ था। मुसलमानों को कुछ नहीं हुआ था। इसी तरह फिर से हिंदुओं पर कोई मुसीबत आएगी। पांचजन्य से बात करते हुए इस औरत ने कहा, “हमें कोई जानकारी (अतिक्रमण हटाने के अभियान की) नहीं दी गई थी। वे सीधे आए और एकाएक तोड़फोड़ शुरू कर दी। इन लोगों ने सुप्रीम कोर्ट से इसकी इजाजत भी नहीं ली। मुस्लिमों को ले जाकर उनके साथ मारपीट की जा रही है। उनकी बीवियों को उठा रहे हैं और उनके घरों को तोड़ा जा रहा है। हर जुल्म तो मुस्लिमों पर ही किया जा रहा है। ये कैसा अन्याय है, ऊपर वाला फैसला करेगा।”

आगे यह औरत कहती है, “जैसे कोरोना में हुआ था। उस दौरान केवल हिंदुओं को बीमारी हुई थी, मुस्लिमों को नहीं। खुदा ऐसा करेगा कि फिर कोई मुसीबत हिंदुओं पर आएगी। मुस्लिमों पर तो चाहे, जितने भी अत्याचार कर लें।” वैसे यह पहला मौका नहीं है जब जहाँगीरपुरी की किसी औरत के भीतर का मजहबी जहर इस तरह सामने आया हो। शोभा यात्रा पर हमले के बाद एक औरत का वीडियो सामने आया था जिसमें वह जय श्रीराम के नारे को लेकर अपनी नफरत प्रदर्शित कर रही थी।

वायरल वीडियो में इस औरत ने कहा था, “हमारे नमाज पढ़ते हुए डीजे क्यों बजाया जा रहा है। जय श्रीराम का नारा बहुत जोर-जोर से ये लोग चिल्ला रहे थे तो कोई भी बर्दाश्त नहीं करेगा। डीजे हमारे मस्जिद के आगे आखिर क्यों बजाया जाएगा।” इतना ही नहीं दंगाइयों के बचाव में उनके घर की औरतें भी अजीबोगरीब तर्क देती रही हैं।

जहाँगीरपुरी की हिंसा के दौरान गोली चलाने वाले सोनू चिकना और सलीम चिकना की अम्मी ने गोली चलाने की बात को कबूल करते हुए कहा था कि उसके बेटे को बेवजह गिरफ्तार किया गया है। उसने तो हिंसा के दौरान सिर्फ ‘अपने समुदाय का समर्थन’ करने के लिए बंदूक उठाई थी।

गौरतलब है कि जहाँगीरपुरी हिंसा में घायल हुए एएसआई अरुण कुमार ने बताया था कि शोभा यात्रा के गुजरते समय गाली-गलौच करने वालों में औरतें ज्यादा थीं। उनके अनुसार वे लोग जैसे ही सी ब्लॉक से बाहर निकले वैसे ही उनके ऊपर पथराव शुरू हो गया। हमलावरों के हाथों में लाठी, तलवार, सरिया सब कुछ था।

सांसद नवनीत राणा और उनके विधायक पति को अदालत से राहत नहीं: अब 29 अप्रैल को जमानत पर सुनवाई, कोर्ट पर ‘काम का बोझ’

महाराष्ट्र के अमरावती से सांसद नवनीत राणा और उनके विधायक पति रवि राणा को मंगलवार (26 अप्रैल, 2022) को भी राहत नहीं मिली। अब राणा दंपति (Navneet Rana and Ravi Rana) की जमानत याचिका पर 29 अप्रैल को मुंबई के सेशन कोर्ट में सुनवाई होगी। सांसद नवनीत राणा के वकील ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया, “अदालत पर काम का बहुत बोझ है, इसलिए हम 29 अप्रैल को जमानत अर्जी पर सुनवाई के लिए राजी हो गए हैं। अदालत आगे की सुनवाई का फैसला करेगी। 29 अप्रैल और उसके बाद भी फैसला आ सकता है।”

वकील रिजवान मर्चेंट ने यह भी बताया कि राणा दंपति ने बांद्रा मजिस्ट्रेट अदालत के समक्ष लंबित अपनी जमानत याचिका वापस लेने का फैसला किया है, जिसने उन्हें गिरफ्तारी के एक दिन बाद यानी 24 अप्रैल को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।

मालूम हो कि बॉम्बे हाई कोर्ट ने सोमवार (25 अप्रैल, 2022) को महाराष्ट्र में हनुमान चालीसा पढ़ने के कारण गिरफ्तार किए गए सांसद नवनीत राणा और उनके पति रवि राणा की दूसरी FIR को रद्द करने से इनकार कर दिया था। याचिका पर हाई कोर्ट के जस्टिस पीबी वराले और एसएम मोदक की बेंच ने सुनवाई की थी। कोर्ट ने कहा था कि दोनों याचिकाएँ अलग-अलग हैं और ये सुनवाई करने के लायक नहीं है। राणा दंपति को हनुमान चालीसा का पाठ करने को लेकर उठे विवाद के बाद शनिवार को गिरफ्तार किया गया था।

क्या है पूरा मामला

गौरतलब है कि लाउडस्पीकर और हनुमान चालीसा पर जारी सियासत के बीच अमरावती से सांसद नवनीत राणा ने उद्धव ठाकरे के आवास मातोश्री के सामने हनुमान चालीसा का पाठ करने का ऐलान किया था, जिसके बाद 23 अप्रैल, 2022 को मुंबई की खार पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। उन पर मुंबई पुलिस ने राजद्रोह (आईपीसी की धारा 124 A) और धार्मिक भावनाओं को भड़काने के आरोप लगाए थे। इसके अलावा उन पर आईपीसी की धारा 353 (सरकार काम में बाधा) के तहत केस दर्ज किया गया था। इसी एफआईआर को कोर्ट ने खारिज करने से इनकार कर दिया है।

जिस महाराष्ट्र में हनुमान मंदिरों से हुई स्वराज्य की स्थापना, आज वहीं हनुमान चालीसा ‘देशद्रोह’: समर्थ गुरु रामदास और छत्रपति शिवाजी को याद करे शिवसेना

महाराष्ट्र में आज हनुमान चालीसा पर विवाद चल रहा है। अमरावती की सांसद नवनीत राणा और उनके पति बडनेरा के विधायक रवि राणा को सिर्फ इसीलिए गिरफ्तार कर लिया गया, क्योंकि उन्होंने हनुमान चालीसा पढ़ने का ऐलान किया था। देशद्रोह का मुकदमा भी ठोक दिया गया। महाराष्ट्र में हनुमान चालीसा बजाने पर लाउडस्पीकर उतार दिए जाते हैं। लेकिन, क्या आपको पता है कि मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी के मार्गदर्शक समर्थ गुरु रामदास भगवान हनुमान के अनन्य भक्त थे।

समर्थ गुरु रामदास ने बनवाए थे 400 हनुमान मंदिर, ‘स्वराज्य’ में था योगदान

समर्थ गुरु रामदास ने 400 से भी अधिक हनुमान मंदिरों का निर्माण कराया था। इसके पीछे न सिर्फ भगवान राम और हनुमान में उनकी अपार श्रद्धा थी, बल्कि मातृभूमि के प्रति प्रेम भी था। मुग़ल आक्रांताओं के खिलाफ युवकों को तैयार करने में इन छोटे-बड़े हनुमान मंदिरों ने बड़ी भूमिका निभाई। ‘स्वराज्य’ के लिए ये मंदिर एक तरह के ‘फिटनेस केंद्र’ का काम भी करते थे, जहाँ युवक व्यायाम और योग-प्राणायाम के अलावा हथियारों का अभ्यास भी करते थे।

आज भी आप महाराष्ट्र में देखेंगे तो हर छोटे-बड़े शहरों और गाँवों में छोटे-छोटे हनुमान मंदिर मिल जाएँगे। ये मंदिर धीरे-धीरे कर के राज्य की भौगोलिक स्थिति का एक परिचायक बन गए। की क्षेत्रों में तो ये मंदिर लैंडमार्क का काम करते हैं, जिससे इनकी महत्ता समझी जा सकती है। इसी तरह नासिक से लगे तकली गाँव में एक प्राचीन गोमाया हनुमान मंदिर है, जहाँ प्रतिमा की स्थापना खुद समर्थ गुरु रामदास ने अपने हाथों से की थी।

सन् 1632 में नशरदी, जिसे नशरदी नुल्ला भी कहते हैं, उसके किनारे पर इसकी स्थापना की गई थी। इसने मराठा साम्राज्य से लेकर महाराष्ट्र के इतिहास में कई मोड़ देखे हैं और इतिहास -बिगड़ते देखा है। समर्थ रामदास ने हनुमान मंदिरों की स्थापना का कार्य यहीं से शुरू किया था। बाद में जाकर इसने एक अभियान का रूप ले लिया। उन्होंने इन मंदिरों के जरिए तब के युवाओं की जुझारू प्रवृत्ति को जागृत किया। इस गाँव में वो 12 वर्षों तक रहे थे।

दिलचस्प है समर्थ गुरु रामदास और छत्रपति शिवाजी महाराज की मुलाकात

समर्थ रामदास और शिवाजी के मुलाकात की कहानी भी दिलचस्प है। जब रामभक्त रामदास ने हनुमान जी की मूर्ति की स्थापना कर धार्मिक स्वतंत्रता की ओर कदम बढ़ाया था, उसी काल में तोरण दुर्ग जीत कर शिवाजी ने औरंगजेब के खिलाफ स्वतंत्रता का बिगुल बजाया था। शिवाजी को जब समर्थ रामदास के बारे में पता चला तो उन्होंने उन्हें मिलने के लिए पत्र भेजा। संदेश मिलते ही संत रामदास ने अपना प्रत्युत्तर भेजा।

इस पत्र में भारतवर्ष के महान संत ने लिखा कि उन्होंने देशाटन के समय कई राजा देखे हैं, लेकिन दिल्ली के मुग़ल दरबार के सामने सब भीगी बिल्ली बने रहते हैं। समर्थ रामदास ने स्पष्ट कर दिया कि उन्हें शिवाजी में शक्ति और युक्ति से सज्जित एक धर्म रक्षक की छवि दिखती है, जबकि उत्तर के कई राजाओं को धर्म की चिंता नहीं। उन्होंने धर्म स्थापना के पुनीत कार्य में शिवाजी का सहयोग माँगा। ये पढ़ कर शिवाजी आह्वादित हो गए।

कहते हैं कि उन्होंने फिर से इसके प्रत्युत्तर में पत्र तो लिखा लेकिन समर्थ रामदास से मिलने के लिए इतने अधीर हो उठे कि खुद ही पत्र लेकर चाफल के श्रीराम मंदिर के नीचे की पहाड़ी पर शिंगणवाडी के जंगलों में पहुँच गए। इसके बाद समर्थ रामदास जैसे शिवाजी के आध्यात्मिक ही नहीं बल्कि राजनीतिक दिशा-निर्देशक बन गए। उन्होंने भगवान श्रीराम का नाम लेकर छत्रपति को उनकी मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद दिया था।

आज उसी महाराष्ट्र में हनुमान चालीसा पढ़ना ‘देशद्रोह’

हाल ही में महाराष्ट्र की महाविकास आघाड़ी सरकार में मंत्री एवं कॉन्ग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने कह दिया कि सीएम उद्धव ठाकरे से हनुमान चालीसा के पाठ की माँग करने वाले ‘नीच’ और ‘हर*मी’ हैं। राणा दंपति की गिरफ़्तारी के बाद शिवसेना के प्रवक्ता एवं राज्यसभा सांसद संजय राउत ने हनुमान चालीसा पढ़े जाने को राज्य को अस्थिर करने की साजिश बताते हुए तंज कसा कि अब राणा दंपति जेल में ही हनुमान चालीसा पढ़ें।

राणा दंपति पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का इल्जाम मढ़ते हुए उनकी गिरफ्तारी हुई और इस केस की एफआईआर सामने आने के बाद पता चला कि राणा दंपति के ऊपर धारा 124-ए के तहत कार्रवाई की गई है, जो कि देशद्रोह की धारा है। इसके अलावा अधिकारियों ने बताया कि दोनों के ऊपर आईपीसी की धाराओं 153 (ए) और 353 तथा मुंबई पुलिस अधिनियम (पुलिस की निषेधाज्ञा उल्लंघन) की धारा 135 के तहत मामले दर्ज किए गए हैं।

शिवसेना के एक मुस्लिम नेता ने एक वीडियो जारी कर के कहा, “हम यहाँ रवि राणा की पत्नी व सांसद नवनीत राणा द्वारा 500 लोगों के साथ मातोश्री के बाहर हनुमान का चालीसा पाठ करने के ऐलान के बाद एकत्रित हुए हैं। वो यहाँ 500 क्या 5000 लोगों के साथ भी आ जाएँ तो भी इंशा अल्लाह कुछ नहीं होने वाला है, क्योंकि यहाँ बालासाहेब ठाकरे के कट्टर शिवसैनिक मौजूद हैं।” आज ये सब उसी महाराष्ट्र में हो रहा है, जहाँ स्वराज्य की स्थापना ही हनुमान मंदिरों के जरिए हुई थी।

कॉमनवेल्थ गेम्स से कुश्ती, तीरअंदाजी, शूटिंग साफ: राष्ट्रमंडल खेलों से पहले ही भारत का गेम बिगाड़ने का ये कैसा ‘यूरोपीय प्लान’

ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया में साल 2026 में होने वाले कॉमनवेल्थ खेलों (CommonWealth Games 2026) की खबरें अभी से मीडिया में सुर्खियाँ बटोरनी लगी हैं। इसकी वजह है कि इस बार एक ओर जहाँ कॉमनवेल्थ गेम्स में सबसे लोकप्रिय खेल टी-20 क्रिकेट को जगह मिली है तो वहीं दूसरी ओर इन खेलों की सूची में से शूटिंग, तीरअंदाजी (आर्चरी) और कुश्ती जैसे खेलों को बाहर कर दिया गया है। मालूम हो कि जो खेल इस बार लिस्ट से हटाए गए हैं वो हरियाणा, पंजाब, यूपी, दिल्ली जैसे प्रदेश के खिलाड़ियों को प्रभावित करने वाले हैं। इनमें लंबे समय से भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन उम्दा रहा है।

कॉमवेल्थ गेम्स को लेकर ये फैसला सुनाए जाने के बाद तमाम खिलाड़ी इससे निराश हैं। उन्होंने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि जब-जब देश ने किसी खेल में मेडल जीतने शुरू किए है तभी या तो उस खेल को अंतरराष्ट्रीय स्तर खेलों से हटा दिया गया या फिर उसके लिए कोई नियम बना दिए गए। नाराज खेल प्रशिक्षकों की शिकायत है कि जिन खेलों से भारत को मेडल आते हैं उन्हीं पर बैन लगा दिया जाता है।

कॉमनवेल्थ खेलों में भारतीयों का प्रदर्शन

बता दें कि भारत तीरअंदाजी, कुश्ती औ शूटिंग तीनों में ही कॉमनवेल्थ खेलों में अच्छे प्रदर्शन करता आया है। साल 2018 में भारतीय पहलवानों ने कॉमलवेल्थ गेम्स में कुल 12 पदक जीते थे जिनमें से 5 स्वर्ण पद थे। इसी तरह भारतीय शूटर्स ने खेल के दौरान 16 मेडल जीते थे जिनमें 7 स्वर्ण पदक थे। तीरअंदाजी में भी भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन हमेशा उत्कृष्ट रहा। ये बात और है कि इस खेल को 2010 के बाद कॉमनवेल्थ गेम्स में जगह नहीं दी गई। 2010 में जब कॉमनवेल्थ खेल हुए थे तीरअंदाजी में भारत ने 3 गोल्ड समेत 8 मेडल जीते थे।

कुश्ती, तीरअंदाजी, शूटिंग को जगह न मिलने पर भारतीय खिलाड़ियों में नाराजगी

अंतररराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम कई बार रौशन करने वाले पहलवान बजरंग पुनिया ने इस खबर को सुनने के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा “मैं जानना चाहता हूँ कि यह (कुश्ती हटाने का) फैसला किस आधार पर लिया गया है। कुश्ती सबसे पुराने खेलों में से एक है। लगभग सभी देश हमारे इस खेल को खेलते हैं। मुझे ऐसा भी लगता है कि भारतीयों को निशाना बनाया जा रहा है। पहले उन्होंने शूटिंग हटाई और अब कुश्ती। यह फैसला न केवल दूसरे देशों के एथलीटों के खिलाफ है बल्कि स्पष्ट रूप से भारत के भी खिलाफ है क्योंकि भारतीय इसमें अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।”

इसी तरह शॉटगन शूटर व खेल रत्न से सम्मानित विजेता रंजन सोढ़ी ने मीडिया में कहा, “यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिन दो खेलों में भारत का दबदबा रहा, उन्हें कॉमनवेल्थ गेम्स से हटाया जा रहा है।” उन्होंने कहा, “यूरोप के देश अभी भी ज्यादातर देशों को अपने से कमतर मानते हैं। वे ये नहीं समझना चाहते कि हमारे जैसे देश बेहतर हो सकते हैं और इसलिए वे इन खेलों को बाहर निकालने की कोशिश कर रहे हैं। आप क्या सोचते हैं कि 2022 बर्मिंघम खेलों से शूटिंग क्यों हटा ली? क्या आप वास्तव में मानते हैं कि ब्रिटेन जैसे अमीर देश के पास रेंज बनाने के लिए पर्याप्त पैसा नहीं है।”

खेल विभाग ने माँगा IOA से जवाब

भारत के खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने भी कहा, “स्पोर्ट्स विभाग ने इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन से जवाब माँगा है कि आखिर बैठक में कौन शामिल था और उसमें क्या चर्चा की गई और आखिर शूटिंग, कुश्ती और तीरअंदाजी को कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 को किन कारणों से हटाया गया।” उनके अलावा हरियणा के राज्य मंत्री अनिल विज ने भी राष्ट्रमंडल खेलों से कुश्ती जैसे खेल बाहर किए जाने पर नाराजगी दिखाई और कहा, “हरियाणा की शान कुश्ती और तीरंदाजी को राष्ट्रमंडल खेलों से बाहर करना दुर्भाग्य पूर्ण । राष्ट्रमंडल खेल संघ को इस पर दुबारा विचार करना चाहिए ।”

इन 16 खेलों को किया गया शामिल

गौरतलब है कि साल 2026 में विक्टोरिया में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स को लेकर कॉमनवेल्थ खेलों की आयोजन समिति ने प्रारंभिक सूची में जिन 16 खेलों को शामिल किया है उनमें एक्वेटिक्स, एथलेटिक्स, बैडमिंटन,मुक्केबाजी, बीच वॉलीबॉल, टी-20 क्रिकेट, साइकलिंग, जिमनास्टिक, हॉकी, लॉन बाउल, नेटबॉल, रग्बी, सेवन्स, स्क्वैश, टेबल टेनि, ट्रायथलॉन, वेटलिफ्टिंग जैसे खेलों को शामिल किया गया है। इस सूची से कुश्ती, तीरअंदाजी, शूटिंग गायब होने पर जहाँ भारतीय खिलाड़ियों से लेकर राजनेता तक नाराज हैं। वहीं कहा जा रहा है कि इस साल के अंत में कुल और खेलों को जोड़ा जाएगा। ऐसे में थोड़ी उम्मीद लगा सकते हैं कि ये इन खेलों के महासंघ के अनुरोध पर इन्हें भी कॉमनवेल्थ गेम्स में जगह मिले।

IOA ने जताई नाराजगी, सीजीएफ को पत्र

कुछ दिन पहले ही भारतीय कुश्ती महासंघ और भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ दोनों ने 2026 में अपने अपने खेलों को शामिल करने की कोशिश में आगे आने को कहा है। इसके अलावा भारतीय ओलंपिक संघ ने भी राष्ट्रमंडल खेल महासंघ से अगली बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा करने को कहा है। आईओए महासचिव राजीव मेहता ने ऑस्ट्रेलिया में होने वाले खेलों को लेकर सीजीएफ अध्यक्ष लुईस मार्टिन को पत्र भी लिखा है। पत्र में कहा गया, “भारतीय राष्ट्रमंढल खेल संघ के लिए ये हैरानी वाली बात है कि इन तीनों खेलों को अनदेखा किया गया…हम अनुरोध करते हैं कि सीजीएफ की अगली आमसभा के एजेंडे में हमारे अनुरोध को शामिल किया जाए।”

‘राजू बन मंदिर में शादी, घर ले जा निकाह, मौलाना और भाइयों से रेप भी करवाया’: ग्वालियर में लव जिहाद, आरोपित का घर ध्वस्त

मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले के डबरा से लव जिहाद का मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने आरोपित के अवैध मकान को ध्वस्त कर दिया है। इस दौरान डबरा के जंगीपुरा में भारी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात था। कार्रवाई के दौरान तहसीलदार दीपक शुक्ला, एसडीओपी विवेक शर्मा, थाना प्रभारी सहित नगर पालिका का पूरा अमला मौजूद था।

अधिकारियों ने कहा कि एंटी माफिया अभियान के तहत इमरान के अवैध मकान को गिराया गया है। आरोपित का मकान गली में अंदर होने के कारण बुलडोजर नहीं पहुँच पा रहा था। इस कारण मकान को पहले खाली करवाया और उसके बाद फिर नगर निगम टीम ने मजदूरों की मदद से मकान ध्वस्त कर दिया।

ग्वालियर के गोल पहाड़िया की रहने वाली एक युवती ने डबरा निवासी इमरान को हिंदू युवक राजू जाटव बनकर दोस्ती करने और फँसाने का आरोप लगाया था। युवती के अनुसार राजू उर्फ इमरान ने 18 सितंबर 2021 को शीतला माता मंदिर में उससे शादी की। शादी से पहले उसने युवती का गर्भपात भी करवाया था। शादी के बाद जब वह राजू के घर गई तो उसके इमरान होने का पता चला।

कई महीनों तक प्रताड़ना झेलने के बाद युवती ने ग्वालियर पहुँच महिला थाने में पुलिस से शिकायत दर्ज कराई। युवती ने बताया कि इमरान ने अपने भाइयों अमन और पुन्नी तथा शहर के मौलाना ओसामा से उसका दुष्कर्म करवाया। पीड़िता के मुताबिक मौलाना ने जबरन धर्म परिवर्तन कराने के बाद उसका इमरान से निकाह कराया और निकाह वाली रात ही उसके साथ दुष्कर्म किया। महिला ने ससुराल पक्ष पर निकाह के बाद से मारपीट करने और 7 महीने तक बंधक बनाकर रखने का आरोप लगाया।

महिला का आरोप है कि उसकी सास सुग्गा बेगम ने उसे वेश्यावृत्ति के धंधे में धकेल दिया था। उसे एक कमरे में बंद करके रखा गया था, उसके कमरे में कुछ युवक आते थे और वे उसके साथ दुष्कर्म करते थे। 20 अप्रैल को कमरे का दरवाजा खुला रह गया, जिससे वह किसी तरह से वहाँ से भाग कर अपने मायके आ गई। इसके बाद उसने पूरी कहानी अपने परिवार वालों को बताई। इसके बाद पीड़िता ने शनिवार (23 अप्रैल 2022) को पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करवाई।

युवती ने एसपी से मुलाकात कर सुरक्षा की भी माँग की। ग्वालियर के पुलिस अधीक्षक (SP ग्वालियर) अमित सांघी ने बताया कि शिकायत पर कार्रवाई करते हुए कथित पति इमरान, देवर अमन, पुन्नी, मौलाना ओसामा खान और दो अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने मामले में दो आरोपितों इमरान और उसकी अम्मी सुग्गा बेगम को गिरफ्तार किया है और तीन आरोपित फरार हैं। इनकी तलाश की जा रही है।

‘योगी का इस्तेमाल न हो, पूरा और असली नाम बताएँ’: UP सीएम के खिलाफ लगाई याचिका, हाई कोर्ट ने ₹1 लाख का जुर्माना लगाया

इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad High Court) ने वह याचिका खारिज कर दी है, जिसमें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) को आधिकारिक संवाद के लिए अपने नाम में ‘योगी’ का इस्तेमाल करने से रोकने की गुहार लगाई गई थी। साथ ही माँग की गई थी वे अपने पूरे और वास्तविक नाम का सार्वजनिक तौर पर इस्तेमाल करें और इसी नाम से शपथ लें। यह जनहित याचिका नमहा ने दायर की थी। हाई कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए याचिकाकर्ता पर एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है।

बार ऐंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार चीफ जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस पीयूष अग्रवाल की खंडपीठ ने कहा, “हम इस याचिका को पूरी तरह से गलत मानते हैं। याचिकाकर्ता एक राजनीतिक व्यक्ति है। लेकिन उसने जानबूझकर अपनी पहचान छिपाते हुए याचिका दायर की। इसका कोई छिपा मकसद हो सकता है या ऐसा सस्ता प्रचार पाने के लिए किया गया हो। यह देखते हुए इस याचिका को खारिज किया जाता है।” अदालत ने यह भी पाया कि याचिकाकर्ता ने दिल्ली का अपना पता दिया था, जबकि वह उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखता है। लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार अदालत ने जुर्माने की राशि छह सप्ताह के भीतर प्रयागराज के विकलांग केंद्र, भारद्वाज आश्रम में जमा कराने के निर्देश दिए हैं।

इससे पहले याचिकाकर्ता ने दलील दी कि सीएम अलग-अलग जगहों पर, अलग-अलग मौकों पर अलग-अलग नामों का इस्तेमाल कर रहे हैं। उसका कहना था कि सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत उसने मुख्यमंत्री के नाम के संबंध में जानकारी माँगी थी। लेकिन उसे यह उपलब्ध नहीं कराई गई। नमहा ने अपनी याचिका में दलील दी थी कि मुख्यमंत्री के कई नामों जैसे आदित्यनाथ, योगी आदित्यनाथ आदि का इस्तेमाल डिजिटल मंचों सहित विभिन्न जगहों पर किया जा रहा है। इससे लोगों में भ्रम पैदा हो रहा है। इसलिए मुख्यमंत्री को केवल एक नाम का उपयोग करने का निर्देश दिया जाना चाहिए।

इस पर राज्य सरकार की ओर से पेश हुए अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने याचिका पर आपत्ति जताते हुए दलील दी कि यह विचार योग्य नहीं है। याचिकाकर्ता ने इसे (याचिका) जनता के लाभ के लिए नहीं, बल्कि अपने प्रचार में लिए दायर किया है। इसमें मुख्यमंत्री को व्यक्तिगत रूप से पक्षकार बनाया गया है और एक व्यक्ति के खिलाफ जनहित याचिका दायर नहीं की जा सकती। वहीं, याचिकाकर्ता के वकील का कहना था कि उसके मुवक्किल ने लोगों के लाभ के लिए इसे दायर किया है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्टकी पीठ ने याचिकाकर्ता पर जुर्माना लगाते हुए याचिका को खारिज कर दिया।

बूचड़खाने, मस्जिद, बांग्लादेशी-रोहिंग्या… जहाँगीरपुरी के हिंदू विरोधी दंगों पर फैक्ट-फाइंडिंग कमिटी ने सब कुछ बताया

दिल्ली के जहाँगीरपुरी में हनुमान जयंती के दिन हुए हिन्दू विरोधी दंगों को लेकर विशेषज्ञों की एक फैक्ट-फाइंडिंग कमिटी ने रिपोर्ट तैयार की है। इस कमिटी में सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता मोनिका अरोड़ा, उद्यमी मोनिका अग्रवाल, दिल्ली विश्वविद्यालय स्थित ‘इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ होम इकोनॉमिक्स (IIHE)’ की अस्सिस्टेंट प्रोफेसर दिव्यांशा शर्मा, PGDAV की प्रोफेसर श्रुति मिश्रा और DU के मिरांडा हाउस कॉलेज में राजनीतिक विज्ञान की अस्सिस्टेंट प्रोफेसर सोनाली चितलकर शामिल थीं।

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि कैसे हिन्दुओं द्वारा निकाली जा रही शोभा यात्रा पर स्थानीय मुस्लिमों ने हमला किया। पिछले 20 वर्षों से शांतिपूर्ण ढंग से चली आ रही यात्रा पर न सिर्फ पत्थरबाजी की गई, बल्कि तलवारों और बंदूकों के साथ उस पर हमला किया गया। इस यात्रा का आयोजन ‘विश्व हिन्दू परिषद (VHP)’ के दिल्ली प्रांत ने किया था। यात्रा के रूट और समय-तारीख़ को लेकर स्थानीय पुलिस-प्रशासन को पहले ही सूचित कर दिया गया था।

इस रिपोर्ट में पाया गया है कि ताजिया जैसे सामान्य यात्राओं के लिए पुलिस अनुमति नहीं देती है, बल्कि उन्हें पूर्व में सूचित कर दिया जाता है और वो सुरक्षा मुहैया कराते हैं। हिन्दुओं की इस शोभा यात्रा के साथ भी पुलिस थी। यात्रा में भक्ति गाने बज रहे थे और साथ में एक झाँकी भी चल रही थी। इस क्षेत्र में जामा मस्जिद है और इसके आसपास मुस्लिमों के घर हैं। रिपोर्ट में लिखा है कि यात्रा निकलने के कुछ ही देर में कुशल सिनेमा वाली सड़क से मुस्लिम भीड़ ‘अल्लाहु अकबर’ चिल्लाती हुई आ गई, जिनके पास तरह-तरह के हथियार थे।

इसी हमले ने एक दंगे का रूप ले लिया। FIR में 6-7 पुलिसकर्मियों के गंभीर रूप से घायल होने की बात कही गई है। लोगों ने बताया कि उन्होंने भाग कर के छिप कर अपनी जान बचाई। उनकी गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया। कई गाड़ियाँ चुरा ली गईं। रिपोर्ट में ये भी पाया गया है कि छतों पर हमले से ही पत्थर-बोतल इकट्ठे कर लिए गए थे और हनुमान जयंती शोभा यात्रा पर हमले की साजिश पूर्व में ही रच ली गई थी। पत्थरों और पेट्रोल बमों के साथ पल में ही एक बड़ी मुस्लिम भीड़ सामने आ गई।

इस रिपोर्ट में जहाँगीरपुरी को अवैध गतिविधियों, डेमोग्राफिक बदलाव और कट्टरवाद का सक्रिय टाइम बम बताते हुए इसके पीछे पाँच कारण गिनाए गए हैं – आवासीय व्यवस्था के लिए आरक्षित की गई ग्रीन लैंड्स का अवैध अतिक्रमण, इलाके में कई अवैध कबाड़ वाले स्थलों का होना, अवैध पार्किंग, कई अवैध बूचड़खाने और सट्टेबाजी। रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा है कि हिन्दू शोभा यात्रा पर हमले में स्थानीय मुस्लिम और बंगलदेश रोहिंग्या शामिल थे।

फैक-फाइंडिंग कमिटी ने पाया कि स्थानीय मस्जिद पर हमले के कोई सबूत नहीं हैं, लेकिन मीडिया का एक धड़ा बिना तथ्यों के फेक न्यूज़ फैलाने में लगा हुआ है। शोभा यात्रा के दौरान किसी भी मस्जिद के ऊपर कोई झंडा नहीं लगाया गया। भीड़ में कई बाहरी भी थे। हमलावरों में बच्चों के शामिल होने को क्षेत्र में बढ़ती कट्टरता का एक उदाहरण बताया गया है। ये भी पाया गया कि अवैध अतिक्रमण कर के ग्रीन लैंड पर बने घरों से हमले हुए, जो मस्जिद के आसपास हैं।

जहाँगीरपुरी दंगों को लेकर फैक्ट-फाइंडिंग कमिटी की रिपोर्ट

इस क्षेत्र में चल रहे अवैध व्यापार की ओर भी रिपोर्ट में इशारा किया गया है। यहाँ कई अवैध कबाब की दुकानें चल रही हैं। बताया गया है कि कई अवैध बूचड़खाने और बना दिए गए हैं और खाली सरकारी जमीनों को अवैध पार्किंग में तब्दील कर दिया गया है। अवैध व्यापार के कारण ये अधिक अपराध वाला क्षेत्र है। पुलिस पर स्थानीय लोगों की शिकायतों पर आँख मूँदे रहने के आरोप लगाए गए हैं। बताया गया है कि लोग इस क्षेत्र में जाना नहीं चाहते।

इन सबके अलावा इस क्षेत्र में होने वाली चेन छीनने जैसी घटनाओं की ओर इशारा किया गया है और लिखा है कि रात के अँधेरे में यहाँ कोई नहीं निकलना चाहता। महिलाओं के लिए ये जगह खासा असुरक्षित है। याद दिलाया गया है कि कैसे 18 अप्रैल, 2022 को घटना की जाँच करने गए क्राइम ब्रांच के अधिकारियों पर भी पत्थरबाजी हुई। कानून-व्यवस्था स्थापित करने की किसी भी कोशिश का जवाब यहाँ पत्थरबाजी से ही दिया जाता है।