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नोएडा के शारदा यूनिवर्सिटी द्वारा हिंदू विरोधी सवाल पूछे जाने पर बवाल: हिंदुत्व की तुलना नाजीवाद और फासीवाद से, धर्मांतरण का कारण भी पूछा

नोएडा स्थित शारदा यूनिवर्सिटी (Sharda University) हिन्दू विरोधी प्रश्नों के चलते विवादों के घेरे में आ गया है। इसके प्रश्न पत्र में हिन्दुओं की तुलना फासीवादियों से की गई है। भाजपा नेता विकास प्रीतम सिन्हा ने ट्वीट करते हुए कथित रूप से इसे मुस्लिम शिक्षक द्वारा बनाया गया बताया है। प्रश्न पत्र BA के राजनीति विज्ञान के साल 2021-2022 सत्र का है।

भाजपा नेता ने अपने ट्वीट में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath), धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) और शलभमणि त्रिपाठी (Shalabh Mani Tripathi) को टैग किया है। इस प्रश्न पत्र के पाँचवें नंबर पर सवाल किया गया है कि धर्मान्तरण के मूल कारण क्या हैं? वहीं, छठे नंबर पर पूछा गया है कि ”क्या आपको नाजीवादी, फासीवादी और हिंदुत्व में कोई समानता दिखती है?’ प्रश्न पत्र में दोनों सवालों को विस्तार से बताने के लिए कहा गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ ही देर बाद यह प्रश्न पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। कुछ नेटीजेंस इस प्रश्न पत्र को #BanShardaUniversity के नाम से ट्वीट भी करने लगे।

@peacearyap हैंडल ने लिखा, “यूनिवर्सिटी बंद होनी चाहिए’

ऑपइंडिया ने इस प्रश्न पत्र की सत्यता की पुष्टि के लिए शारदा यूनिवर्सिटी से सम्पर्क किया। रिशेप्शन पर मौजूद स्टाफ ने अपने सीनियर से बात करवाने के लिए कुछ देर के लिए हमें होल्ड कर रखा। बाद में उनके सीनियर फोन लाइन पर नहीं आए। मौजूद स्टाफ द्वारा एक अन्य नंबर दिया गया, जिसे किसी के भी द्वारा उठाया नहीं गया। शारदा यूनिवर्सिटी द्वारा प्रश्न पत्र की पुष्टि अथवा इंकार होने के बाद हम इस जानकारी को अपडेट करेंगे।

‘मेटा एक निजी संस्था, आर्टिकल-19 के अधिकारों को हमारे खिलाफ लागू नहीं किया जा सकता है’: दिल्ली HC में बचाव में उतरी सोशल मीडिया कंपनी

दिल्ली हाईकोर्ट को इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे लोकप्रिय प्लेटफॉर्म की संचालन करने वाली सोशल मीडिया कंपनी (Social Media Company Meta) मेटा ने बताया, “भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 (अभिव्यक्ति की आजादी) के तहत एक यूजर द्वारा इन अधिकारों को उसके खिलाफ लागू नहीं किया जा सकता है। यह एक निजी संस्था है जो सार्वजनिक कार्य का निर्वहन नहीं करती है।”

एक इंस्टाग्राम अकाउंट को कथित तौर पर निष्क्रिय करने के खिलाफ एक रिट याचिका के जवाब में दायर अपने हलफनामे में अमेरिका स्थित कंपनी ने कहा, “इंस्टाग्राम एक स्वतंत्र और अपनी इच्छा से प्रयोग किया जाने वाला प्लेटफॉर्म है, जो एक निजी अनुबंध है। याचिकाकर्ता को इसके इस्तेमाल का कोई मौलिक अधिकार नहीं है।”

हाई कोर्ट में विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों द्वारा कई यूजर्स के अकाउंट को सस्पेंड करने और उसे डिलीट करने की चुनौती देने वाली कई याचिकाएँ डाली गई हैं। कंपनी की तरफ से हलफनामे में कहा गया है, “याचिकाकर्ता का अदालत में रिट याचिका दायर करना अनुचित कदम है, क्योंकि याचिकाकर्ता और मेटा के बीच संबंध एक निजी अनुबंध होता है। ऐसे में अनुच्छेद-19 के तहत आने वाले अधिकारों को मेटा जैसी एक निजी संस्था के खिलाफ लागू नहीं किया जा सकता है।”

इसमें आगे कहा गया, “याचिकाकर्ता का एक निजी संस्था मेटा के खिलाफ अनुच्छेद-19 के तहत अधिकारों का दावा करने का प्रयास अनुचित, कानून के विपरीत है, इसे अस्वीकार किया जाना चाहिए। मेटा सामाजिक कार्यों का निर्वहन नहीं कर रही है, जो उसे अनुच्छेद 226 के तहत अदालत में घसीटा जाए।”

बता दें कि एक ट्विटर अकाउंट के संस्पेंशन के खिलाफ एक अन्य याचिका के जवाब में केंद्र सरकार ने मार्च में दिल्ली हाई कोर्ट को बताया था कि किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता को सामाजिक और तकनीकी रूप से सोशल मीडिया मंच पर नहीं छोड़ा जा सकता है। उन्होंने कहा था कि सोशल मीडिया मंचों को नागरिकों के मौलिक अधिकारों का सम्मान करना चाहिए और भारत के संविधान के अनुरूप होना चाहिए।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया था कि एक महत्वपूर्ण सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे मौलिक अधिकारों हनन नहीं करना चाहिए। इसके लिए उसकी जवाबदेही बनती है। अन्यथा किसी भी लोकतांत्रिक देश को इसके लिए गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

’20 मिनट में सुलझा 21 साल पुराना विवाद’: सीएम योगी ने उत्तराखंड को सौंपा अलकनंदा, यूपी को मिला ‘भागीरथी’

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने गुरुवार (5 अप्रैल 2022) को ऐलान किया कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड (Uttarakhand) के बंटवारे के साथ शुरू हुए संपत्ति विवाद को आखिरकार को 21 साल बाद सुलझा लिया गया है। इसमें अलकनंदा होटल उत्तराखंड सरकार को सौंप दिया गया, जबकि भागीरथी होटल को यूपी सरकार को दिया गया है।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने हरिद्वार में एक कार्यक्रम के दौरान सीएम पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) को अलकनंदा होटल को सौंप दिया। इसके साथ ही उन्होंने हरिद्वार में ₹41 करोड़ की लागत से यूपी सरकार द्वारा निर्मित भागीरथी गेस्ट हाउस का भी उद्घाटन किया। सीएम योगी ने कहा कि ये सब कुछ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के दृष्टिकोण से प्रेरित है।

सीएम योगी ने कहा, “गंगा का जन्म तभी होता है जब भागीरथी और अलकनंदा एक साथ आती हैं। यूपी-उत्तराखंड भले ही दो अलग राज्य हों, लेकिन दोनों राज्यों के लोगों की जनभावनाएँ एक जैसी ही हैं। हमने इसे नौकरशाही पर नहीं छोड़ते हुए राजनीतिक रूप से बातचीत के जरिए मुद्दों को सुलझाया है।” उन्होंने कहा कि यह समाधान देश में दो राज्यों के बीच विवादों को सुलझाने के लिए एक उदाहरण स्थापित करेगा।

उन्होंने आगे कहा कि जब वो 2017 में मुख्यमंत्री बने थे, उसके एक सप्ताह के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने अलकनंदा होटल को उत्तराखंड को सौंपने के संबंध में दोनों राज्यों के बीच संपत्ति विवाद को सुलझाने में देरी पर नाराजगी व्यक्त की थी। उन्होंने कहा, “मैंने इसे प्राथमिकता के आधार पर लिया, ताकि इस तरह के अंतरराज्यीय विवादों को अदालतों में सालों तक घसीटा न जाए, बल्कि बातचीत से सुलझाया जाए।” इस मौके पर सीएम योगी ने उत्तराखंड सरकार को राज्य में इको-टूरिज्म और पर्यटन गतिविधियों की अपार संभावनाओं का पता लगाने का सुझाव भी दिया, ताकि स्थानीय स्तर पर रोजगार को बढ़ावा दिया जा सके।

गौरतलब है कि अलकनंदा होटल हर की पौड़ी के पास गंगा नहर के किनारे स्थित है। इसे 1964 में यूपी पर्यटन निगम द्वारा बनाया गया था। अलग राज्य बनने के बावजूद उत्तराखंड में 4,000 आवासीय भवनों, 357 गैर-आवासीय भवनों और 13,813 हेक्टेयर भूमि पर यूपी सिंचाई विभाग का नियंत्रण है। साल 2000 में राज्य के बंटवारे के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने अलकनंदा होटल को छोड़ने से इनकार कर दिया था।

ट्रिपल इंजन सरकार को दिया क्रेडिट

इस मौके पर उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने दोनों राज्यों के बीच परिसंपत्तियों के विवाद को 20 मिनट में सुलझाने का दावा किया। उन्होंने इसका श्रेय सीएम योगी आदित्यनाथ की कोशिशों और ट्रिपल इंजन की सरकार को दिया है। धामी ने कहा कि इससे पहले तक अलग-अलग सरकारों के होने के कारण इस मसले का समाधान नहीं हो पा रहा था।

BJP नेता तेजिंदर बग्गा को मोहाली ले जा रही पंजाब पुलिस को हरियाणा में रोका गया, मामले में आया नया मोड़

भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा को लेकर हुई गिरफ्तारी से सियासी घमासान छिड़ गई है। बग्गा को पंजाब पुलिस गिरफ्तार करके मोहाली ले जा रही थी तो हरियाणा पुलिस ने कुरुक्षेत्र में रोक लिया है। दिल्ली पुलिस ने पंजाब पुलिस के खिलाफ अपहरण का केस दर्ज कर लिया है। जिसके बाद बग्गा को ले जाने वाले काफिले को हरियाणा पुलिस ने रोक लिया। इससे पहले बीजेपी कार्यकर्ताओं ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पंजाब पुलिस के खिलाफ जनकपुरी थाने के बाहर बग्गा की गिरफ्तारी को लेकर विरोध प्रदर्शन किया।

बताया जा रहा है कि गिरफ्तारी के दौरान लगभग 50 पुलिसकर्मी मौजूद थे। वे लगभग 1 दर्जन वाहनों से आए थे। बग्गा की गिरफ्तारी दिल्ली के उनके घर से की गई। इस घटनाक्रम पर तेजिंदर बग्गा के पिता ने ऑपइंडिया से बात करते हुए बताया था, “पहले मेरे घर में 2 पुलिसकर्मी घुसे। वो मुझ से सामान्य ढंग से बात कर रहे थे। उस समय घर पर तेजिंदर और उनके अलावा कोई नहीं था। उसी समय तेजिंदर कपड़े पहन कर बाहर आए। थोड़ी बातचीत के बाद कई पुलिसकर्मी मेरे घर में जबरन घुस गए। उनके इस काम की मैं वीडियो बनाने लगा। इसी दौरान एक पुलिसकर्मी मुझे खींच कर कमरे की तरफ ले गया और मुझ से हाथापाई की।”

तेजिंदर के पिता ने आगे बताया, “इसके बाद वो तेजिंदर को खींच कर बाहर ले गए और हिरासत में ले लिया। पुलिसकर्मियों ने बग्गा को उनकी पगड़ी तक नहीं पहनने दी, जबकि उसने इसे पहनने की गुजारिश की। पुलिसवाले बग्गा का फोन भी अपने साथ ले गए।”

इससे पहले 2 अप्रैल 2022 को भाजपा युवा मोर्चा के राष्ट्रीय महासचिव तेजिंदर पाल सिंह बग्गा ने बताया था कि पंजाब पुलिस उनके दिल्ली स्थित घर पर गिरफ्तारी के लिए आई थी। तब बग्गा ने कहा था कि पुलिस ने यह कदम बिना किसी पूर्व सूचना के और बिना FIR की कॉपी दिए ही उठाया था जो कानून के हिसाब से अनुचित है। 

गौरतलब है कि बग्गा सोशल मीडिया पर अरविंद केजरीवाल के खिलाफ काफी मुखर रहे हैं। पिछले दिनों बग्गा ने कहा था, “पूरे देश के सबसे बड़े नरसंहार का दिल्ली विधानसभा में मज़ाक उड़ाया गया। अरविंद केजरीवाल के मुताबिक द कश्मीर फाइल्स फिल्म में दिखाया गया कश्मीरी पंडितों का नरसंहार झूठ है। मुझे लगता है कि 100 करोड़ हिन्दू इसे कभी नहीं भूलेंगे।”

सरकारी स्कूलों में धर्मांतरण: हाई कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार से पूछा- लगाम लगाने के लिए दिशा-निर्देश क्यों नहीं, ईसाई मिशनरियों को समर्थन का दावा

मद्रास हाईकोर्ट (Madras High Court) ने गुरुवार (5 मई 2022) को तमिलनाडु (Tamil Nadu) सरकार को सरकारी स्कूलों में बड़े पैमाने पर कराए जा रहे जबरन धर्मांतरण को लेकर लताड़ लगाई। हाईकोर्ट ने आश्चर्य जताते हुए राज्य सरकार से सवाल किया, “तमिलनाडु सरकार को जबरन धर्म परिवर्तन के खिलाफ दिशानिर्देश तैयार करने में क्या परेशानी है? राज्य के स्कूलों में धर्मांतरण रोकने के लिए दिशानिर्देश तैयार करने का निर्देश उसे क्यों नहीं देना चाहिए?”

न्यायमूर्ति आर महादेवन और एस अनंती की खंडपीठ ने शहर के एक अधिवक्ता बी जगन्नाथ की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। अधिवक्ता ने अपनी याचिका में शिक्षा विभाग को सरकारी एवं सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में जबरन धर्मांतरण को रोकने के लिए सुधारात्मक उपायों सहित सभी आवश्यक कदम उठाने का दिशानिर्देश तैयार करने का आदेश देने की माँग की थी। अदालत ने कहा कि संविधान धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है, जबरन धर्म परिवर्तन का नहीं।

सुनवाई के दौरान इस मामले में सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा कि वह इस तरह के धर्मांतरण करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। हालाँकि, इस याचिका का सरकार ने यह कहते हुए विरोध किया कि यह बिना तथ्यों के आधार पर दायर की गई है, इसलिए इस पर विचार ना किया जाए।

उल्लेखनीय है कि इस याचिका में सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों, अन्य शैक्षणिक संस्थानों, प्राथमिक और उच्च माध्यमिक दोनों में धर्मांतरण और जबरन धर्मांतरण को रोकने और प्रतिबंधित करने के लिए सरकार को प्रभावी दिशा-निर्देश तैयार करने और सुधारात्मक उपायों सहित सभी आवश्यक कदम उठाने का निर्देश देने की प्रार्थना की गई है।

रिपोर्टों के अनुसार, याचिकाकर्ता ने अदालत के सामने बड़े पैमाने पर जबरन धर्मांतरण रैकेट को रोकने के लिए जिला स्तर पर एक आंतरिक शिकायत समिति गठित करने का प्रस्ताव भी रखा। अधिवक्ता ने कहा कि ईसाई मिशनरियों को कथित तौर पर राज्य सरकार का समर्थन प्राप्त है और वे शिक्षण संस्थानों में हिंदू लड़कियों को निशाना बनाते हैं। उन्होंने याचिका में साफ तौर पर लिखा, “वे हिंदू छात्रों को अपमानित करते हैं और उन्हें गाली देते हैं। वे धर्म के आधार पर भेदभाव करते हैं और हिंदू लड़कियों को दूसरे धर्म को नहीं अपनाने पर प्रताड़ित करते हैं।”

इस संबंध में याचिकाकर्ता वकील ने तंजावुर जिले की एक हालिया घटना का हवाला भी दिया है। याचिकाकर्ता वकील ने बताया कि तंजावुर में एक स्कूली छात्रा लावण्या को ईसाई धर्म में परिवर्तित करने के लिए प्रताड़ित किया गया था, जिसके चलते उसने आत्महत्या कर ली थी। कोर्ट ने इस मामले की सीबीआई जाँच के आदेश दिए थे।

याचिकाकर्ता ने याचिका में यह भी दावा किया कि कन्याकुमारी जिले के एक सरकारी स्कूल में धर्मांतरण की माँग नहीं मानने पर एक छात्र को कथित तौर पर घुटने टेकने के लिए मजबूर किया गया। अधिवक्ता जगन्नाथ ने धर्मांतरण के खिलाफ कड़े कदम उठाने की माँग की है। उन्होंने कहा है कि धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए अदालत का हस्तक्षेप आवश्यक है।

बंगाल में फंदे से लटका मिल BJP कार्यकर्ता, पार्टी ने TMC पर लगाया हत्या का आरोप: अमित शाह के स्वागत समारोह के सभी कार्यक्रम रद्द

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दो दिवसीय पश्चिम बंगाल दौरे के बीच कोलकाता में भाजपा कार्यकर्ता का शव मिला है। जानकारी के मुताबिक, शव फाँसी के फंदे से लटका हुआ बरामद किया गया है। मृतक की पहचान काशीपुर विधानसभा निवासी अर्जुन चौरसिया के रूप में हुई है। मृतक अर्जुन भारतीय जनता पार्टी युवा मंडल मोर्चा के वाइस प्रेसिडेंट थे।

बीजेपी ने टीएमसी पर हत्या का आरोप लगाया है। हालाँकि, भाजपा के आरोपों का खंडन करते हुए टीएमसी सांसद शांतनु सेन ने कहा, “हमारे खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार हैं। पुलिस को मामले की जाँच करने दें।” पुलिस ने कहा कि घटना की जाँच शुरू कर दी गई है।

27 वर्षीय भाजपा कार्यकर्ता की हत्या पर भारतीय जनता पार्टी ने शोक व्यक्त किया है। पार्टी की ओर से बयान जारी कर बताया गया है कि कोलकाता में अमित शाह के स्वागत समारोह के सभी कार्यक्रमों को रद्द कर दिया गया है। भाजपा के एक अन्य वरिष्ठ नेता ने कहा कि अमित शाह यह खबर सुनकर नाराज हो गए। उन्होंने एनएससी बोस हवाई अड्डे पर अपना भव्य स्वागत रद्द करने के लिए कहा। शाह अपनी दो दिवसीय यात्रा के दूसरे चरण में उत्तर बंगाल से शहर पहुँचेंगे। बताया जा रहा है कि अमित शाह मृतक बीजेपी कार्यकर्ता के परिवार से भी मुलाकात करेंगे।

उत्तर कोलकाता के भाजपा अध्यक्ष कल्याण चौबे का कहना है कि अर्जुन एकदम स्वस्थ्य थे। उन्होंने कल रात उनके नेतृत्व में 200 बाइक की रैली आयोजित करने की योजना भी बनाई थी लेकिन आज सुबह उन्हें घोष बागान रेल यार्ड में मृत पाया गया। काफी हंगामे के बाद बीजेपी कार्यकर्ताओ ने डेड बॉडी को ले जाने दिया। पूरे इलाके को चितपुर थाने की पुलिस ने सील कर दिया है। लालबाजार इलाके की खुफ़िया विभाग की साइंटिफिक टीम घटनास्थल पर मौजूद है।

बंगाल बीजेपी नेता दिलीप घोष ने ट्विटर पर लिखा, “अभिजीत सरकार के बाद, एक और युवा भाजपा कार्यकर्ता, 27 वर्षीय अर्जुन चौरसिया की TMC के राजनीतिक आतंकियों ने हत्या कर दी और कोलकाता में फाँसी पर लटका दिया। टीएमसी राजनीतिक हत्याओं की घिनौनी संस्कृति को आगे बढ़ाकर लोकतंत्र का गला घोंटने पर आमादा है।”

बता दें कि अभिजीत सरकार की दो मई को उनके घर से बाहर घसीट कर हत्या कर दी गई थी। हमले से ठीक पहले वे दो बार फेसबुक पर लाइव हुए थे और टीएमसी गुंडों के हमले को लेकर बताया था। 

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी नेता की हत्या का पहला मामला नहीं है। पिछले महीने अप्रैल में भी एक बीजेपी कार्यकर्ता का शव संदिग्ध स्थितियों में पेड़ से लटका मिला था। तब मृतक की पहचान पूर्ण चंद्र नाग के तौर पर हुई थी। वो मजदूरी कर अपना घर चलाते थे और बीरभूम जिले के मल्लारपुर कस्बे में 19 अप्रैल की सुबह अपने घर के बाहर वह पेड़ से लटके मिले थे। इससे पहले पूर्वी मिदनापुर में भी एक बीजेपी कार्यकर्ता की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। बीजेपी कार्यकर्ता का नाम शंभु माइती था। डेरिया दिघी क्षेत्र के नंटू प्रधान कॉलेज के पास केलेघई नदी के समीप शंभू को कुछ लोगों ने घायल हालत में देखा था। शंभू के बदन में जगह-जगह घाव के निशान थे।

दावा- बग्गा को पंजाब पुलिस ने पगड़ी भी नहीं पहनने दी: कपिल मिश्रा को भी AAP नेता ने धमकाया, कहा- अगली बारी आप की…

पंजाब पुलिस पर भाजपा नेता तेजिंदर पाल बग्गा को गिरफ्तारी के दौरान पगड़ी नहीं पहनने देने का आरोप लगा है। उनके पिता के साथ मारपीट करने के आरोप में पंजाब पुलिस के खिलाफ दिल्ली के जनकपुरी थाने में तहरीर भी दी गई है। पंजाब पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ भाजपा नेताओं ने विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया है। यह घटनाक्रम 6 मई 2022 (शुक्रवार) का है।

दिल्ली बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “पुलिस मिलने के बाद केजरीवाल पागल हो गए हैं। वो तानाशाही और गुंडागर्दी दिखा रहे। पंजाब पुलिस ने गिरफ्तारी के दौरान बग्गा के पिता के साथ मारपीट की और कपड़ा ठूँसा। इस दौरान बग्गा को पगड़ी तक नहीं पहनने दिया गया। यह सब कुछ केजरीवाल के इशारे पर हो रहा। इसके खिलाफ हम सड़कों पर उतरेंगे और ईंट का जवाब पत्थर से देंगे।” आदेश गुप्ता ने केजरीवाल को ‘हिटलर’ की उपाधि दी है। इससे पहले ऑपइंडिया से बातचीत के दौरान खुद तेजिंदर बग्गा के पिता ने अपने साथ पंजाब पुलिस पर मारपीट करने और बग्गा को पगड़ी नहीं पहनने देने का आरोप लगाया था।

तेजिंदर बग्गा की गिरफ्तारी के विरोध में भाजपा नेता जनकपुरी थाने पहुँचे। जनकपुरी थाने के बाहर भाजपा नेताओं ने प्रदर्शन किया। इस दौरान पंजाब पुलिस और अरविंद केजरीवाल के विरोध में नारेबाजी भी हुई।

आप प्रवक्ता ने कपिल मिश्रा को धमकाया

बग्गा की गिरफ्तारी का विरोध कर रहे कपिल मिश्रा को आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रवक्ता घनेन्द्र भरद्वाज ने धमकी दी। उन्होंने लिखा, “मिश्रा जी आप भी बहुत जहर उगलते रहते हो, आप भी जल्द ही सुधर जाओ, नहीं तो अगली बारी आप की भी हो सकती है।” इस ट्वीट के जवाब में कपिल मिश्रा ने लिखा, “AAP की पुलिस, जेल, तानाशाही हमें ना चुप करा सकती, ना डरा सकती। सुबह से AAP के कार्यकर्ताओं की ऐसी धमकियाँ साफ करती है कि पंजाब पुलिस का इस्तेमाल अब केजरीवाल के विरोधियों को चुप कराने में किया जाएगा।”

बग्गा ने केजरीवाल के खिलाफ क्या कहा था?

30 मार्च 2022 को तेजिंदर पाल बग्गा का बयान इंडिया TV ने दिखाया था। वह बयान अरविंद केजरीवाल के घर के आगे प्रदर्शन के दौरान दिया गया था। तब बग्गा ने कहा था, “पूरे देश के सबसे बड़े नरसंहार का दिल्ली विधानसभा में मज़ाक उड़ाया गया। अरविंद केजरीवाल के मुताबिक द कश्मीर फाइल्स फिल्म में दिखाया गया कश्मीरी पंडितों का नरसंहार झूठ है। मुझे लगता है कि 100 करोड़ हिन्दू इसे कभी नहीं भूलेंगे।”

बग्गा ने आगे कहा था, “सोनिया गाँधी ने भगवान राम के अस्तित्व को नकार दिया था और आज उनकी खुद की पार्टी के अस्तित्व पर संकट है। इसलिए मैं अरविंद केजरीवाल को बता देना चाहता हूँ कि देश का हिंदू तुम्हें तुम्हारी जगह दिखाएगा। केजरीवाल को अपने बयान पर माफ़ी माँगनी चाहिए। अगर वो माफ़ी नहीं माँगते तो भाजपा कार्यकर्ता उन्हें चैन से रहने नहीं देंगे। हमारा विरोध-प्रदर्शन जारी रहेगा।”

पंजाब पुलिस ने इस बयान के आधार पर पटियाला में FIR दर्ज की थी। अगले दिन बग्गा ने ट्वीट कर उस FIR के वापस लिए जाने की जानकारी दी थी। बाद में इस मामले में SIT का गठन किया गया था। SIT को यह तय करना था कि तेजिंदर पाल बग्गा के ट्वीट से अरविंद केजरीवाल को नुकसान या नुकसान पहुँचाने का प्रयास तो नहीं हुआ।

बुर्का उतार सेल्फी लेने पर होगी पिटाई: ‘मुस्लिम डिफेंस फोर्स’ की धमकी, कहा- मॉल में बुर्का उतार गलत काम करती हैं महिलाएँ

कर्नाटक (Karnataka) के मंगलुरु से हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। यहाँ मुस्लिम डिफेंस फोर्स 24×7 (Muslim Defence Force) नाम के एक समूह ने बुर्का (Burqa) नहीं पहनने और सेल्फी (Selfie) लेने के लिए सार्वजनिक स्थानों पर बुर्का उतारने वाली मुस्लिम महिलाओं को धमकी दी है। सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मुस्लिम महिलाओं को धमकाते हुए ग्रुप ने लिखा, “जो मुस्लिम महिलाएँ बुर्का नहीं पहनेंगी और सार्वजनिक स्थानों पर बुर्का उतारकर सेल्फी लेंगी, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।”

मंगलुरु के पुलिस कमिश्नर शशि कुमार के मुताबिक, यह ग्रुप खुद को मुस्लिम अधिकारों का संरक्षक बताता है और कहता है कि ये उसका कर्तव्य है कि वो मुस्लिम महिलाओं को उनकी मजहबी परंपराओं को तोड़ने से रोके। उन्होंने कहा कि इस समूह पर लगातार नजर रखी जा रही है।

सीपी शशि कुमार ने टाइम्स नाउ को बताया, “ये मैसेज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इंस्टाग्राम और फेसबुक के अलावा व्हाट्सएप पर भी लोगों को ये मैसेज भेजा जा रहा है। पुलिस को ये मैसेज व्हाट्सएप ग्रुप पर भी मिले हैं।” इस ग्रुप ने सोशल मीडिया के जरिए कहा है कि जो महिलाएँ सार्वजनिक स्थानों पर बुर्का नहीं पहनेंगी या इसे हटाकर सेल्फी लेंगी, उन्हें सबक सिखाने के लिए पीटा भी जाएगा।

मुस्लिम समूह द्वारा कन्नड़ भाषा में जारी संदेश में लिखा है, “मॉल के बेसमेंट में हमने कई महिलाओं को बुर्का उतारकर गलत कार्य करते हुए देखा। हमारे कार्यकर्ताओं ने उन्हें पहले ही चेतावनी दे दी है। अगर यह फिर से हुआ तो पीटा जाएगा।” उन्होंने अभिभावकों से भी कहा कि जब भी उनके की महिलाएँ कॉलेज और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर जाएँ तो उनकी निगरानी करें।

मंगलुरु पुलिस कमिश्नर ने बताया कि उनकी टीम लगातार इस ग्रुप के बारे में पता लगाने का प्रयास कर रही है कि ये कौन लोग हैं? पुलिस कमिश्नर के मुताबिक, ग्रुप के कुछ सदस्यों के बारे में उन्हें जानकारी मिली है, लेकिन इस मैसेज का मेन सोर्स क्या है, कौन इसका मास्टरमाइंड है, पुलिस इसका पता लगाने की कोशिश कर रही है।

उन्होंने आगे बताया कि यह सोशल मीडिया ग्रुप की तरह है, जिसमें 200 से 300 लोग जुड़े हुए हैं। इस ग्रुप में जानकारी साझा करने के नाम पर लोगों को धमकाया जा रहा है। ‘मुस्लिम डिफेंस फोर्स 24×7 ग्रुप सोशल मीडिया पर इस तरह की गतिविधियों को अंजाम दे रहा है।

गौरतलब है कि यह धमकी उस वक्त आई है, जब राज्य में कुछ मुस्लिम लड़कियों द्वारा हिजाब के बिना स्कूलों में जाने से इनकार करने के बाद ​विवाद गहराया हुआ है। बीते कुछ महीनों से कर्नाटक (Karnataka) के उडुपी जिले के प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज की कुछ मुस्लिम छात्राएँ क्लास के अंदर हिजाब (Hijab) पहनने की जिद पर अड़ी हुई हैं और इसके लिए वह लगातार प्रदर्शन करती हुई भी नजर आईं। ये छात्राएँ इस्लामीकरण के प्रतीक हिजाब को अपना मौलिक अधिकार बताती हैं।

इसके बाद कर्नाटक में हलाल मीट और लाउडस्पीकर पर अज़ान को लेकर भी विवाद हुआ। उल्लेखनीय है कि 1 अप्रैल को पशुपालन व पशु चिकित्सा सेवाओं के उपनिदेशक ने जानवरों के प्रति क्रूरता की रोकथाम नियम 2001 का हवाला देते हुए बेंगलुरु नागरिक निकाय को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा था कि जानवरों को मारने से पहले उन्हें बेहोश किया जाए। पत्र में यह भी कहा गया था कि उनके विभाग को जनता से शिकायतें मिली हैं कि जानवरों के वध से पहले सरकारी नियमों की अनदेखी हो रही है। इसको लेकर कॉन्ग्रेस ने कर्नाटक सरकार का विरोध किया था।

बच्चे का मजाक उड़ाने वाले कुणाल कामरा पर NCPCR सख्त, ट्विटर को वीडियो हटाने को कहा, होगी पुलिसिया कार्रवाई

गालीबाज कॉमेडियन कुणाल कामरा (Kunal Kamra) ने जर्मनी में प्रधानमंत्री नरेंद्र (PM Modi) को देशभक्ति गीत सुनाने वाले बच्चे का मजाक बनाकर मुसीबत मोल ले ली है। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने कुणाल कामरा द्वारा शेयर किए गए मॉर्फ्ड वीडियो पर संज्ञान लिया है। एनसीपीसीआर ने ट्विटर इंडिया को पत्र लिखकर कामरा के खिलाफ सख्‍त कार्रवाई की माँग करते हुए फर्जी वीडियो को तत्काल सोशल मीडिया से हटाने के लिए कहा है। इसके अलावा कामरा की शिकायत पुलिस से भी की है। एनसीपीसीआर ने कहा कि कथित कॉमेडियन ने ट्विटर पर अपने राजनीतिक एजेंडे के लिए ऐसा किया है।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के यूरोप दौरे के वक्‍त बर्लिन में एक बच्चे ने पीएम के सामने देशभक्ति का गीत गाया था। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो खूब वायरल हुआ था। कामरा ने इस वीडियो के साथ छेड़छाड़ कर उसे अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर किया था। वहीं बच्‍चे के पिता की शिकायत पर एनसीपीसीआर ने संज्ञान लिया है। एनसीपीसीआर ने कहा, “हमें कुणाल कामरा के बारे में कई शिकायतें मिली हैं कि उसने एक बच्चे की वीडियो के साथ छेड़छाड़ कर उसे अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर शेयर किया है। कामरा ने अपने राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए नाबालिग बच्चे की वीडियो के साथ छेड़छाड़ की है।”

एनसीपीसीआर ने आगे कहा, “आयोग ने शिकायत पर संज्ञान लिया है। उनकी राय है कि राजनीतिक विचारधाराओं को आगे बढ़ाने के लिए नाबालिगों का इस्तेमाल करना किशोर न्याय अधिनियम, 2015 और सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के प्रावधानों का उल्लंघन है। इस तरह के प्रचार वाले उद्देश्य से बच्चों का इस्तेमाल करना नुकसानदेह है। यह उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।” इस बाबत एनसीपीसीआर ने ट्विटर से 7 दिनों के भीतर कार्रवाई करने और उसकी रिपोर्ट देने को कहा है।

गुरुवार (5 मई, 2022) को अपनी वीडियो की चौरतरफा आलोचना होने के बाद ऐसा लगता है कि विवादित छवि वाले कामरा ने इस ट्वीट को पहले से ही हटा दिया है, क्योंकि अब वह वीडियो ट्विटर पर नहीं है। हालाँकि, उसी वीडियो का एक और छेड़छाड़ वाला वीडियो उसने पोस्ट किया है, जो अभी भी उसके ट्विटर अकाउंट पर दिखाई दे रहा है। इस वीडियो में उसने पत्रकार अमिश देवगन का चेहरा लगाया हुआ है।

उल्लेखनीय है कि कामरा ने गुरुवार (5 मई 2022) को बच्चे के देशभक्ति गीत ‘भारत हम तेरी आराधना करेंगे, तेरी अर्चना करेंगे, भारत हम तेरी वंदना करेंगे’ का मजाक उड़ाते हुए इसे संपादित किया था। उसके द्वारा पोस्ट किए वीडियो में अनुषा रिजवी और महमूद फारुखी के डायरेक्शन में बनने वाली फिल्म ‘पिपली लाइव’ का गाना ‘महँगाई डायन खाय जात है’ बज रहा था।

लड़के के पिता गणेश पॉल ने कामरा के घटिया ट्वीट के लिए उसे जमकर लताड़ा था। यही नहीं उन्होंने कथित कॉमेडियन को उसकी असंवेदनशीलता और गंदी राजनीति करने के लिए मासूम बच्चे का सहारा लेने पर खरी खोटी भी सुनाई थी। सात साल के बच्चे के पिता ने कहा था कि उनका बेटा अपनी मातृभूमि से प्यार करता है। इसलिए उसने यह गाना गाया। हालाँकि, वह अभी बहुत छोटा है, लेकिन कामरा से ज्यादा अपने देश से प्यार करता है। लेकिन उसके बाद भी कामरा नहीं माना और लगातार कई ट्वीट कर अपनी निम्न मानसिकता को उजागर किया।

फोटो साभार: ट्विटर
फोटो साभार: ट्विटर

गौरतलब है कि बच्चे के पिता गणेश पॉल ने कामरा को ट्वीट करके नसीहत दी थी, “वह मेरा 7 साल का बेटा है, जो अपनी प्यारी मातृभूमि के लिए यह गीत गाना चाहता था। हालाँकि, वह अभी भी बहुत छोटा है, लेकिन अपने देश को आपसे ज्यादा प्यार करता है मिस्टर कामरा या कचरा, आप चाहे जो भी हों, मासूम बच्चे को अपनी गंदी राजनीति से दूर रखें और अपने घटिया जोक्स को बेहतर बनाने पर काम करें।”

प्यार में इस्लाम कबूलने को भी तैयार था नागराजू, पति की जान बचाने को अशरीन दूसरी निकाह के लिए भी थी राजी: फिर छलावा ही निकला जय भीम-जय मीम

हैदराबाद में 4 मई 2022 को 25 साल के दलित युवक नागराजू (Nagaraju) की हत्या कर दी गई। वजह उसने 23 साल की मुस्लिम युवती सैयद अशरीन सुल्ताना (Syed Ashreen Sultana) से शादी की थी। सरेआम नागराजू की हत्या करने वाले अशरीन के भाई और उसके रिश्तेदार थे। सोशल मीडिया पर भले #JusticeForNagaraju ट्रेंड कर रहा हो, लेकिन अपने राजनीतिक हितों के लिए ‘जय भीम-जय मीम’ का नारा बुलंद करने वालों ने खामोशी ओढ़ ली है।

5 साल से प्यार में थे नागराजू और अशरीन

नागराजू और अशरीन सुल्ताना 5 साल प्यार में थे। दलित समूह के माला बिरादरी से आने वाले नागराजू और मुस्लिमों की उच्च बिरादरी सैयद समुदाय से ताल्लुक रखने वाली अशरीन ने एक साथ ही स्कूल और कॉलेज की पढ़ाई की थी। पुलिस के मुताबिक, “30 जनवरी 2022 को अशरीन अपना मोबाइल फोन घर में छोड़ कर चली गई थी। अगले दिन दोनों ने हैदराबाद के ही आर्य समाज मंदिर में शादी कर ली। 1 फरवरी को उसके परिजनों ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई थी।”

मुस्लिम बनने को तैयार था नागराजू

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नागराजू और अशरीन के रिश्ते से दोनों परिवार नाखुश थे। दोनों ने अपने परिवार वालों को शादी के लिए समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन वे नाकाम रहे। परिवार वालों के विरोध के बाद भी दोनों ने एक साथ जीने-मरने की कसम खाई। अशरीन सुल्ताना का कहना है कि उसने अपने घर में मिल रही धमकियों को देखते हुए नागराजू को कहीं और शादी करने की सलाह भी दी थी, लेकिन वो नहीं माना। उसने बताया, “मेरी नाराज माँ को मनाने के लिए नागराजू इस्लाम कबूलने को भी तैयार थे, लेकिन किसी ने उसकी नहीं सुनी।”

अम्मी कहती थी- तेरा भाई नागराजू को मार डालेगा

बतौर अशरीन सुल्ताना, “जब मेरे भाई मोबिन को मेरे और नागाराजू के रिश्ते की जानकारी हुई तब उसने मुझे मारने की कोशिश की। उसने 2 बार मुझे फाँसी पर लटकाने का प्रयास किया। इस दौरान मेरी माँ भी मुझसे कहती रही कि तुम्हारा भाई नागराजू को मार डालेगा।”

आर्य समाज मंदिर में शादी

अशरीन सुल्ताना के अनुसार, “जब हम घर वालों को मनाने में कामयाब नहीं हो पाए तब मैं 30 जनवरी 2022 को अपने घर से चली गई। मैं अपना सिम घर पर ही छोड़कर गई थी। बाद में हमने नई सिम ले ली जिससे हमारे परिवार वाले सम्पर्क न कर पाएँ। घर से जाने के बाद हमने 1 फरवरी को पुराने हैदराबाद के आर्य समाज मंदिर में शादी कर ली। बाद में हम दोनों अलग घर लेकर रहने लगे थे।” शादी के बाद अशरीन सुल्ताना ने अपना नाम पल्लवी रख लिए। बताया जा रहा है कि इसके बाद से ही अशरीन के रिश्तेदार नागराजू की तलाश कर रहे थे। पुलिस के मुताबिक अशरीन के घर से चले जाने के बाद उनके परिवार वालों ने बालानगर थाने में 1 फरवरी को उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। पुलिस ने बुला कर दोनों के कागजात चेक किए तो दोनों बालिग पाए गए। इसलिए इस मामले में कोई कानूनी बाधा नहीं थी। पुलिस ने दोनों परिवारों को भी समझाया था कि वो इस शादी को स्वीकार करें।

पुलिस से लगाई थी सुरक्षा की गुहार

अशरीन सुल्ताना ने कहा, “शादी के बाद हम धमकियों से परेशान थे। हम सीधे जिले के पुलिस अधीक्षक के पास गए। वहाँ हमने खुद को मिल रही धमकियों के बारे में पुलिस को बताया था। हमने एक बॉन्ड पर दस्तखत भी किए थे।” पुलिस के मुताबिक आरोपित नागराजू को 1 महीने से तलाश रहे थे। घर की रेकी के दौरान उन्हें कुछ नहीं मिला तो वो सब उसके ऑफिस मारूति शो रूम तक पहुँच गए। वहाँ से उन्होंने नागराजू की जानकारियाँ जुटाईं और मौके की तलाश करने लगे। मोबिन ने इससे पहले भी 1-2 बार नागराजू को मारने का प्रयास किया था, लेकिन वो चूक गया था। इस हमले में गिरफ्तार दूसरा आरोपित मोहम्मद 29 वर्षीय मसूद अहमद रंगारेड्डी जिले के तारानगर का रहने वाला है। वह कार मकैनिक है। घटना के दिन इन्होने अपने साथियों के साथ मिल कर पहले नागाराजू के सिर पर रॉड से वार किया। बाद में धारदार हथियार से मौत हो जाने तक मृतक पर वार करते रहे।

इस घटना के वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि हमले के दौरान अशरीन ने अपने पति को बचाने की बहुत कोशिश की लेकिन वो नाकामयाब रही। साथ ही मदद की गुहार के बाद भी किसी ने उसकी सहायता नहीं की। अशरीन के मुताबिक, “जब मेरे पति नागाराजू को मेरी आँखों के आगे मारा जा रहा था तब मैंने हमलावरों के आगे उनकी मर्जी से निकाह करने की भी मिन्नत की। लेकिन उनकी संख्या बहुत अधिक थी। वो मेरी एक नहीं सुने और मेरे पति को पीटते रहे।”