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‘मोदी जी मदद कीजिए, हमें बचाइए’: POK की गैंगरेप पीड़िता ने भेजा वीडियो संदेश, बोली- कभी भी हो सकती है हमारे परिवार की हत्या

पाकिस्तान (Pakistan) में महिलाओं को इंसाफ मिलना तो दूर, समाज में उनकी क्या स्थिति यह यह दुनिया से छुपी हुई नहीं है। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) में फातिमा कादरी (बदला हुआ नाम) नाम की गैंगरेप पीड़िता (Gangrape survivor Maria Tahir) बीते सात सालों से न्याय की आस में दर-दर ठोकरें खा रही है। थक-हार कर अब उसने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) से मदद दी गुहार लगाई है। फातिमा ने पीएम मोदी से उसे भारत में आने देने की इजाजत देने की माँग की है।

एक भावनात्मक वीडियो जारी कर फातिमा ताहिर ने भारतीय प्रधानमंत्री से अपने बच्चों और अपने लिए एक घर और सुरक्षा की माँग की है। उसने कहा कि POK में उसे न्याय मिलना मुश्किल है और वहाँ की पुलिस और नेता उसके परिवार की हत्या कर सकते हैं।

वीडियो में फातिमा रोते हुए कहती हैं, “असलाम वालेकुम! मैं पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की रहने वाली हूँ। मेरा केस गैंगरेप, ब्लैकमेलिंग का है। मैं पिछले सात वर्षों से न्याय के लिए लड़ रही एक सामूहिक बलात्कार पीड़िता हूँ। मुझे यहाँ की पुलिस, सरकारें और न्यायपालिका ने न्याय नहीं दिया है। इसलिए मैं अपने इस वीडियो संदेश के जरिए भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील करना चाहती हूँ कि वो हमें रियासत में आने की इजाजत दें। मेरे बच्चों को जान को खतरा है। पाकिस्तान की स्थानीय पुलिस और वरिष्ठ राजनेता चौधरी तारिक फारूक कभी भी मुझे, मेरे बच्चों और मेरे शौहर का कत्ल कर सकते हैं। मैं पीएम मोदी जी से आग्रह करती हूँ कि वे हमें जम्मू-कश्मीर में आने देने की इजाजत दें। साथ ही हमें सुरक्षा दें।”

2015 का है मामला

फातिमा के मुताबिक, यह मामला 2015 का है। उनका आरोप है कि सात साल पहले उनके साथ हारून राशिद, ममून राशिद, जमील शफी, वकास अशरफ, सनम हारून और तीन अन्य ने गैंगरेप किया था। तभी से वो इंसाफ के लिए दर-दर भटक रही हैं। फातिमा ने पीओके के चीफ जस्टिस समेत कई अधिकारियों को भी पत्र लिखे, लेकिन उनकी मदद नहीं की गई, उल्टे कहा गया कि वो एक विवाहित महिला हैं।

उल्लेखनीय है कि पीओके को हासिल करना भारत सरकार के एजेंडे में शामिल है। इसको लेकर हाल ही में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने इशारा भी किया था।

गुजरात हिंसा में विदेशी फंडिंग, पहले से ही रच ली गई थी साजिश: ईंट-पत्थर और लाठी-डंडे जुताई थे: गिरफ्तार मौलवियों से पूछताछ में खुलासा

गुजरात (Gujrat) के हिम्मतनगर रामनवमी हिंसा (Ram Navami Violence) मामले में चल रही जाँच के बीच खंभात हिंसा की जाँच में चौंकाने वाली खबरें सामने आई हैं। रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि इस हिंसा में कम-से-कम तीन मौलवी शामिल हैं और इन्होंने राज्य के अलग-अलग इलाके के लोगों को खंभात में शांति और सद्भाव को बिगाड़ने के लिए बुलाया था।

गुजराती समाचार चैनल वीटीवी की रिपोर्ट में कहा गया है कि हिंसा पूर्व नियोजित थी और इसमें शामिल लोगों को इन मौलवियों ने शहर के बाहर से बुलवाया था।

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि इस हिंसा की साजिश को पहले से ही शातिराना ढंग से रचा गया था और शोभा यात्रा से एक दिन पहले इसमें शामिल लोगों को इलाके की शांति और सद्भाव को बिगाड़ने के लिए बाहर से बुलाया गया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, शोभा यात्रा के दौरान पहले पथराव किया गया और फिर दुकानों में आग लगा दी गई। खंभात हिंसा में गिरफ्तार तीनों मौलवियों से पूछताछ में पता चला है कि शोभा यात्रा में बवाल करने के लिए इन लोगों ने पहले की योजना बना ली थी। हिंसा को अंजाम देने के लिए मौलवियों ने भरूच और अहमदाबाद से लोगों को खंभात बुलाया था और उनके यहाँ रहने-खाने की व्यवस्था की थी। ऐसी भी खबरें आ रही हैं कि इसके लिए देश के बाहर से फंडिंग भी की गई थी।

न्यूज 18 गुजराती ब्यूरो के प्रमुख जनक दवे की रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी रजाक अयूब, हुसैन हशमाशा दीवान भीड़ को पथराव करने के लिए उकसाने में शामिल थे। इस हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई है, जबकि कई अन्य लोग घायल हो गए हैं।

दवे की रिपोर्ट में कहा गया है कि जिस दिन शोभा यात्रा की अनुमति मिली थी, उसी दिन पथराव और हिंसा की योजना बनाई गई थी। शोभा यात्रा रविवार को थी और आरोपितों ने बाहरी लोगों को शनिवार को ही खंभात बुला लिया था। जिन लोगों को पथराव और हिंसा के लिए बुलाया गया था, उन्हें आश्वासन दिया गया था कि उन्हें कुछ नहीं होगा और उन्हें कानूनी सहायता प्रदान की जाएगी।

आरोपितों ने शोभा यात्रा से पहले भारी मात्रा ईंट-पत्थर और लाठी-डंडे जैसे अन्य हथियार इकट्ठा कर लिए थे। अगले दिन रविवार को जब शोभा यात्रा निकली और मस्जिद से गुजरने लगी, इसी दौरान यात्रा में शामिल लोगों पर पथराव शुरू हो गया। अचानक हुए इस हमले में कई लोग घायल हो गए।

कई रिपोर्ट में यह बता भी सामने आई है कि कथित पुलिस अत्याचारों से लड़ने के नाम पर लोगों से चंदा वसूले कर धन इकट्ठा किए गए। वहीं, धन के विभिन्न स्रोतों की भी जाँच की जा रही है।

रामनवमी पर हिंसा

रामनवमी पर आनंद जिले के खंभात क्षेत्र में हिंदुओं द्वारा प्रभु राम के जन्मदिन पर शोभा यात्रा निकाली गई थी। जब शोभा यात्रा एक मस्जिद के पास से गुजरी तो जुलूस पर पथराव कर दिया गया। इस दौरान उपद्रवियों ने लगभग 7-8 दुकानों में आग भी लगा दी। इस हिंसा में एक व्यक्ति की मौत और कई अन्य लोग घायल हो गए थे। ऐसी ही घटना को राज्य के हिम्मतनगर में भी अंजाम दिया गया। वहाँ रामनवमी के जुलूस पर पथराव किया गया।

रामनवमी के जुलूस पर पथराव और हिंसा की घटनाएँ पश्चिम बंगाल, झारखंड, मध्य प्रदेश, कर्नाटक जैसे कई राज्यों से भी सामने आई हैं। भारत में ‘उदारवादियों’ ने यह दावा करके हिंसा को सही ठहराने की कोशिश की है कि ‘मुस्लिम क्षेत्रों’ में श्रीराम की जय-जयकार वाले संगीत और नारे लगाकर मुस्लिमों को उत्तेजित किया गया। इस्लाम में मूर्ति पूजा को सबसे बड़ा पाप माना गया है। यहाँ पढ़ें पथराव के बारे में कुरान क्या कहता है।

जिस ‘दिल्ली मॉडल’ का इतना ढोल पीटते हैं केजरीवाल, उसको ‘हेड मास्टर’ भी नसीब नहीं: दिल्ली के 824 स्कूल में प्रिंसिपल नहीं, NCPCR ने माँगा जवाब

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने मंगलावर (12 अप्रैल, 2022) को दिल्ली के सरकारी स्कूलों में प्रिंसिपल के 824 रिक्त पदों पर स्पष्टीकरण माँगा। दिल्ली के मुख्य सचिव विजय देव को लिखे पत्र में शीर्ष बाल अधिकार निकाय ने कहा है कि अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो के नेतृत्व में एक टीम ने राष्ट्रीय राजधानी के कई स्कूलों का दौरा किया और बुनियादी ढाँचे एवं अन्य पहलुओं के संबंध में खामियाँ पाईं। इसमें आगे कहा गया है कि टीम ने जिन स्कूलों का दौरा किया, उनमें से अधिकतर स्कूलों में स्कूल के प्रमुख (HoS) नहीं थे। यह पद खाली था।

NCPCR ने उल्लेख किया कि NCT सरकार के शिक्षा विभाग के तहत कुल 1027 स्कूल आते हैं। इनमें से केवल 203 में हेड मास्टर या कार्यवाहक हेड मास्टर हैं। इसमें आगे लिखा गया है, “स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए सकारात्मक सीखने का माहौल सुनिश्चित करने और समावेशी संस्कृति को विकसित करने में एक हेड मास्टर या प्रिंसिपल की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। हेड मास्टर या प्रिंसिपल की अनुपस्थिति का बच्चों की सुरक्षा और सलामती पर असर पड़ता है।”

पत्र में शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 का हवाला देते हुए कहा गया है कि जिन स्कूलों में छठी से आठवीं कक्षा के छात्रों की संख्या 100 से ऊपर है, वहाँ स्कूल में पूर्णकालिक प्रिंसिपल होना चाहिए। NCPCR ने मुख्य सचिव से ऐसे पदों की रिक्तियों और शिक्षा विभाग द्वारा 19 अप्रैल तक की गई कार्रवाई के बारे में तथ्यात्मक स्थिति शेयर करने के लिए कहा है।

साभार: Newsroompost

NCPCR ने दिल्ली के स्कूल में स्वच्छता और सुरक्षा का उठाया मुद्दा

मुख्य सचिव को लिखे एक अन्य पत्र में, NCPCR ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के सांसद मनोज तिवारी ने सर्वोदय कन्या विद्यालय, सब्जी मंडी, तिमारपुर, दिल्ली का दौरा किया। यहाँ उन्हें स्कूल की बिल्डिंग में स्वच्छता संबंधी कई समस्याएँ दिखी। शीर्ष निकाय ने कहा कि इस तरह की चीजों से स्कूल में गंभीर दुर्घटनाएँ हो सकती हैं।

साभार: Newsroompost

पत्र में कहा गया है, “मामले की गंभीरता को देखते हुए आपके कार्यालय से अनुरोध है कि इस मामले में तत्काल कार्रवाई की जाए और इस संबंध में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट इस पत्र की प्राप्ति के सात दिनों के भीतर आयोग के साथ शेयर की जाए।”

भाजपा नेताओं ने दिल्ली के स्कूलों की कमियों को किया उजागर

सांसद मनोज तिवारी अकेले भाजपा नेता नहीं हैं, जिन्होंने हाल ही में दिल्ली के स्कूलों में कमियों को उजागर किया है। डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया और सीएम अरविंद केजरीवाल समेत आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं ने आगामी राज्य विधानसभा चुनाव को देखते हुए गुजरात के स्कूलों पर निशाना साधा था। AAP नेताओं के हमले के बाद दिल्ली के भाजपा नेताओं ने हाल के दिनों में कई स्कूलों का दौरा किया और छात्रों एवं शिक्षकों की समस्याओं के बारे में बताते हुए वीडियो शेयर किया।

अपने ‘लव जिहादी’ लीडर पर कार्रवाई कर सकती है CPM: केरल में ईसाई महिला से मुस्लिम नेता की शादी पर विवाद

केरल में एक वामपंथी नेता और ईसाई महिला की शादी पर विवाद खड़ा हो गया है। मामले के तूल पकड़ने के बाद राज्य की सत्ताधारी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) इस नेता पर कार्रवाई करने को लेकर विचार कर रही है। रिपोर्टों के अनुसार ईसाई महिला के रिश्तेदारों ने केरल के कोझीकोड की सीपीआई (एम) इकाई के नेता और DYFI कन्नोथ क्षेत्र के सचिव शेजिन पर ‘लव जिहाद’ का आरोप लगाया है। इसके बाद पार्टी ने इस मुस्लिम नेता के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की बात कही है।

शेजिन कोडनचेरी के रहने वाले हैं। उन पर थेयापारा की रहने वाली ज्योत्सना मैरी जोसेफ को भगा ले जाने और फिर शादी करने का आरोप है। ज्योत्सना मैरी जोसेफ सऊदी अरब में नर्स का काम करती थी। बताया जाता है यह कपल सात महीने से रिलेशनशिप में था। जानकारी के मुताबिक ज्योत्सना की किसी और के साथ शादी फिक्स हो गई थी। वह सगाई से दो हफ्ते पहले अपने घर केरल आई थी। लेकिन शेजिन से शादी करने के लिए उसने अपना घर छोड़ दिया।

इसके बाद ज्योत्सना के माता-पिता ने कोडनचेरी पुलिस में बेटी के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई। जब पुलिस ने माकपा नेता के खिलाफ कार्रवाई नहीं की तो परिजन और स्थानीय लोगों ने थाने तक मार्च निकाला। रिश्तेदारों और स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि यह शादी ‘लव जिहाद’ है। हालाँकि ज्योत्सना का कहना है कि उसने अपनी मर्जी से शादी की है। लेकिन, उसके परिवार का आरोप है कि दबाव के कारण ज्योत्सना ऐसा कह रही है। इस बीच, शेजिन और ज्योत्सना मंगलवार (12 अप्रैल, 2022) को थमारसेरी कोर्ट में पेश हुए। कोर्ट ने उन्हें साथ रहने की इजाजत दे दी।

स्थानीय लोगों और रिश्तेदारों द्वारा सीपीआई (एम) पर शेजिन का साथ देने का आरोप लगाने के बाद पार्टी की कोझीकोड इकाई कार्रवाई करने पर विचार कर रही है। शेजिन को पार्टी से निलंबित किया जा सकता है।

सीपीआई (एम) के जिला सचिवालय के सदस्य जॉर्ज एम थॉमस ने बताया कि पार्टी शेजिन के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी में है, क्योंकि उन्होंने क्षेत्र में मुस्लिमों और ईसाइयों के बीच सांप्रदायिक सद्भाव में बाधा पैदा करने की कोशिश की। उन्होंने आगे कहा, “अगर वे प्यार में थे, तो शेजिन को पार्टी को सूचित करना चाहिए था। उन्होंने पार्टी इकाई या संगठन में किसी से बात नहीं की। यह आरोप कि सीपीएम ने दोनों की मदद की थी, सच नहीं है।” पार्टी ने दावा किया कि इस शादी ने कम्युनिस्ट पार्टी के मुख्य मतदान क्षेत्र में दो समुदायों के बीच कलह पैदा कर दिया है।

‘हमला हमारे ही त्योहारों पर क्यों’: राजदीप सरदेसाई को MP के गृहमंत्री ने लताड़ा, लिबरल थेथरई का अब हर हिंदू को ऐसे ही देना होगा जवाब

मध्य प्रदेश के खरगोन में रामनवमी के मौके पर हिंदुओं की शोभा यात्रा को जान-बूझकर निशाना बनाए जाने के बाद जो हिंसा भड़की, उसमें उपद्रवियों द्वारा कई दुकानों, मकानों को आग लगाया गया। इसके बाद मंदिरों में जो तोड़फोड़ हुई वो अलग और जो आधा दर्जन पुलिसकर्मी समेत 24 से ज्यादा लोग घायल हुए वो अलग…। छानबीन में सामने आया कि ये कोई अचानक भड़की हिंसा नहीं थी बल्कि इसके लिए पहले से तैयारी की गई थी। छतों पर पत्थर और पेट्रोल बम इकट्ठा थे ताकि शोभा यात्रा पर फेंके जा सकें।

प्रशासन को भी जब तथ्यों को पता चला तो उन्होंने सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए और उपद्रवियों के घर बुलडोजर चलाया गया। अब पूरे घटनाक्रम को देखें तो मामला हिंदुओं पर हमला किए जाने से शुरू हुआ। मगर, जो वामपंथी लिबरल खेमा है उसे दिक्कत इस बात से नहीं है कि आखिर कैसे हिंसा को भड़काया गया। उन्हें मलाल इस बात का है कि प्रशासन आखिर उन उपद्रवियों की संपत्तियों पर कैसे बुलडोजर चला सकती है जो इस देश के अल्पसंख्यकों में आते हैं।

द वायर की आरफा खानुम शेरवानी को पढ़िए। उपद्रवियों के घर पर चलाए गए बुलडोजर से नाराज आरफा लिखती हैं कि ये बुलडोजर सिर्फ मुस्लिमों के घर तक नहीं रुकेगा बल्कि सबका नंबर आएगा। आरफा पूछती हैं, “किस कानून के तहत मुस्लिमों के घर खरगोन में गिराए जा रहे हैं? किस कानून ने ऐसा करने का अधिकार दिया है? क्या कोर्ट अब इस भारत में काम कर रहे हैं?”

सबा नकवी इस एक्शन से आहत होकर लिखती हैं, “तो संक्षेप में भारत में कानून की स्थिति ये है कि अगर मेरे पड़ोस में या इमारत में एक व्यक्ति या समूह दुर्व्यवहार करता है और वहाँ मुसलमान रहते हैं तो पूरे ब्लॉक को नीचे गिरा दिया जाएगा।” वह एनडीटीवी से बातचीत में कहती हैं, “ जब अल्पसंख्यकों के विरुद्ध घृणा से भरे भाषण दिए जाते हैं, तब तो कोई गिरफ्तारी नहीं होती।”

उपद्रवियों से हमदर्दी रखने वालों की लिस्ट में आरफा-सबा जैसे कई सेकुलरवादी हैं। स्वाति चतुर्वेदी ने भी अपने ट्वीट में शिवराज सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए लिखा है- मोदी और उनके मुख्यमंत्री अब कानून पर, प्रक्रिया पर और लोकतंत्र पर बुलडोजर चला रहे हैं।

दिलचस्प बात ये है कि अगर आप इन सेकुलरवादी, कट्टर विचारों वाले, या वामपंथी स्वभाव के लोगों के ट्विटर हैंडल खंगालेंगें तो आपको पता चलेगा कि इनके सवाल ये कहीं नहीं है कि आखिर हिंदुओं की यात्रा पर पथराव करके माहौल बिगाड़ने का क्या मतलब था बल्कि इनकी चिंता तो ये है कि आखिर कैसे प्रशासन उपद्रवियों के विरुद्ध इतनी सख्त कार्रवाई कर रहा है।

राजदीप को MP गृहमंत्री ने लताड़ा

राजदीप सरदेसाई, जो वामपंथी खेमे के वरिष्ठ माने जाते हैं उन्होंने हाल में अपने शो में मध्य प्रदेश के गृहमंत्री से इस बाबत सवाल-जवाब करके अपनी खूब फजीहत कराई है। जैसे उनका सवाल देखिए- शिवराज सरकार मुस्लिम दंगाइयों को निशाना बना रही है पर हिंदू या हिंदुत्व दंगाइयों को कोई कुछ नहीं कह रहा?

राजदीप के इस सवाल का नरोत्तम मिश्रा ने दो टूक जवाब दिया। वह बोले- “क्या हमने रीवा में कार्रवाई नहीं की उस पंडित के खिलाफ जिस पर रेप के आरोप लगे थे।” उन्होंने राजदीप को लताड़ते हुए कहा, “आपको सिर्फ यही दिखाई देता है, दिक्कत इतनी ही है। रीवा में पंडित ने जो किया था उसके बाद साधू के संत के घर तोड़े थे न। लेकिन आपको दिखते सिर्फ यही हैं।”

मध्य प्रदेश के गृहमंत्री से लताड़ लगने के बाद राजदीप ने फिर अगला सवाल ओवैसी के कंधे पर रखकर पूछा। उन्होंने कहा “आप धर्म का इस्तेमाल करके राम नवमी पर नफरत फैलाना चाहते हैं, हिंदुत्व का राज करना चाहते हैं।” इस सवाल को सुन मध्य प्रदेश के गृहमंत्री ने कहा, “ओवैसी जैसे लोगों के मन में हम प्रेम भी पैदा नहीं करना चाहते। हमने उनका प्रेम देखा है कैसा है। ये मैंने बताया न कि ये क्रोनोलॉजी है जो देश में चल रही है और आप जैसी चर्चाओं से कभी कभी गलत दिशा में चली जाती है। राम नवमी साल में एक दिन आती है और 12 जगह देश में दंगा हो जाता है। ये सब हमारे त्योहारों पर ही होता है न उनके त्योहारों पर नहीं होता कभी।”

राजदीप ने पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि पुलिस ने आखिर क्यों कुछ नहीं किया जबकि अगर पुलिस चाहे तो कोई दंगा नहीं हो सकता। राजदीप का सवाल सुन नरोत्तम मिश्रा ने कहा, “पुलिस अगर नहीं होती तो एसपी को गोली कैसे लगती, टाआई का सिर कैसे फटता, जवान घायल कैसे होते। मगर, ये लोग पहले से तैयारी किए हुए थे। उनके पास पत्थर थे, असला था, बंदूक थी, कट्टे थे। तभी तो गोली चली है।”

राजदीप ने प्रशासन कार्रवाई से आहत होकर कहा कि आखिर उनकी सरकार भाईचारा कैसे फैलाएगी अगर बार-बार इसी तरह डर बनाने का काम करेगी। इस पर राज्य गृहमंत्री ने कहा, “जब तक दंगाइयों के फन नहीं कुचले जाएँगे तब तक भाईचारा नहीं फैल पाएगा। इसलिए इन्हें सबक सिखाना जरूरी है।”

राजदीप ने गृहमंत्री के सामने ये मुद्दा उठाया कि बिहार में जैसे लोग मस्जिद के सामने जाकर नारेबाजी कर रहे हैं क्या आप धार्मिक जुलूस से अपनी ताकत का प्रदर्शन चाहते थे? यह सवाल सुन नरोत्तम मिश्रा भड़क गए। उन्होंने राजदीप की फजीहत करते हुए कहा, “आपको तो यही लगेगा।” उन्होंने पूछा कि आखिर धार्मिक जुलूस में कहाँ भाजपा या कॉन्ग्रेस का झंडा दिखाई दिया जो राजदीप को वो जूलूस राजनैतिक लग गया। नरोत्तम मिश्रा ने ये पूछे जाने पर कि क्या बुलडोजर पॉलिटिक्स का थोड़ा भी दुख है या नहीं, वह बोले जो गलती करेगा वो सजा को भुगतेगा।

रामनवमी पर अलग-अलग जगह हुआ माहौल बिगाड़ने का प्रयास

आपको जानकर हैरानी होगी कि लिबरल और वामपंथियों में जितनी सुगबुगाहट उपद्रवियों की संपत्तियों पर बुलडोजर चलता देखकर हुई उतना उन्हें उस राम नवमी वाले दिन भी नहीं हुई जब केवल खरगोन में ही नहीं देश के विभिन्न राज्यों में राम नवमी की शोभा यात्रा को निशाना बनाया गया। आप देखें चाहे राजस्थान का करौली, बंगाल का हावड़ा, गुजरात का हिम्मतनगर, झारखंड का लोहारगढ़ या कर्नाटक का मुलबगल हो… हर जगह शोभा यात्रा को निशाना बनाकर यह सबूत दिया गया कि हिंदू त्योंहारों के लिए कितनी घृणा लोगों के मन में हैं मगर, इन सबके बाद भी लिबरलों की आँख बंद रही। ये नींद टूटी जब दंगाइयों पर कार्रवाई होनी शुरू हुई।

अब भी इन लोगों के जरिए या इनके अकॉउंट पर अगर संबंधित घटना या कार्रवाई पर बात हो रही है तो वो या तो मोदी सरकार की आलोचना के एंगल से हो रही है या फिर प्रशासन के एक्शन पर हो रही है। इनके लिए वो राजस्थान का करौली चर्चा का कारण नहीं है जहाँ 10-12 किलो के पत्थर छतों से हिंदुओं की शोभा यात्रा पर फेंके गए, मगर प्रशासन ने दंगाइयों पर कड़ी कार्रवाई की जगह हिंदू त्योहार के समय जगह-जगह धारा 144 लगा दी और वहीं दूसरी ओर रमजान के समय में दूसरे समुुदाय को पूरी-पूरी बिजली देने का वादा कर दिया।

ऐसे दोहरे रवैये वाले सेकुलरों के बीच रहते हुए मध्य प्रदेश के गृहमंत्री की तरह सवाल पूछना जरूरी हो जाता है कि हमारे ही धार्मिक आयोजनों पर हमले क्यों होते हैं? क्यों हिंदुओं की शोभा यात्रा को निशाना बनाया जाता है? क्यों वामपंथी ये मानते हैं कि हिंदुओं पर हमला हिंदुओं की गलती है कि आखिर वह मुस्लिम इलाके में अपना जुलूस लेकर गए कैसे?

देवघर रोपवे दुर्घटना में झारखंड की सोरेन सरकार की लापरवाही आई सामने: देर से शुरू हुआ बचाव कार्य, रिपोर्ट और मेटनेंस कार्यों की अनदेखी की

झारखंड (Jharkhand) के देवघर में रेपवे दुर्घटना (Deoghar Ropeway Accident) में तीन लोगों की मौत और कई लोगों घायल होने के बाद राज्य की हेमंत सोरेन सरकार (Hemant Soren Government) की हर तरफ किरकिरी हो रही है। वहीं, राज्य सरकार इस लापरवाही को किसी दूसरे के सिर पर डालने का भरपूर प्रायास कर रही है और इसे संचालित करने वाली निजी को प्रतिबंधित कर अपने दोष की इतिश्री कर रही है।

झारखंड पर्यटन विभाग के निदेशक राहुल सिन्हा का कहना है कि रोपवे का धुरा टूटने के कारण यह दुर्घटना हुई। अब सवाल है कि यह धूरा टूटा ही क्यों? रोपवे सेवा संचालित करने वाली निजी कंपनी दामोदर रोपवे एंड इंफ्रा लिमिटेड (DRIL) के मैन्यूअल में स्पष्ट है कि सर्विस शुरू करने से पहले ट्रॉली, हैंगर सहित तमाम आवश्यक जाँच प्रतिदिन की जाती है। इसके अलावा, तिमाही, छमाही और सालाना जाँच और रखरखाव का नियम है।

जैसा कि सिन्हा कहते हैं कि रोपवे का धुरा टूटने के कारण यह दुर्घटना हुई, यदि रखरखाव का नियमित और समय से जाँच की जाती तो खामी स्पष्ट रूप से सामने नजर आती। हालाँकि, यह स्पष्ट है कि इस पर बहुत ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया। झारखंड के पर्यटन मंत्री हफीजुजल हसन का कहना है कि इस घटना की वजह मेंटनेंस नहीं कराना है। उन्होंने कहा कि इसकी पुलिया टेढ़ी थी, तार (रोपवे) भी ढीला था। यहाँ तक कि रोपवे को संचालित करने के लिए बिजली भी नहीं है और जेनरेटर के माध्यम से इसका संचालन किया जाता है।

अब सवाल है कि पर्यटन मंत्री जब यह बात कह रहे हैं तो मंत्रालय ने इस पर अब संज्ञान क्यों नहीं लिया था। निजी कंपनी को रोपवे संचालन का जिम्मा सौंपने के बाद पर्यटन विभाग ने इसकी जाँच करने की जहमत कभी नहीं उठाई, जबकि रेवेन्यू DRIL से लगातार लेती रही। वहीं, DRIL का कहना है कि अनुबंध में स्पष्ट है कि पाँच का उसे दो बार विस्तार देना है। इसलिए कंपनी सेवा संचालित कर रही थी।

ऐसी सर्विसों के लिए रेस्क्यू ड्रील का समय-समय पर संचालन करने की आवश्यकता होती है, लेकिन राज्य के आपदा प्रबंधन मंत्रालय और विभाग ने इस ड्रील को कराने में कभी रुचि नहीं दिखाई। यही कारण है कि जब दुर्घटना हो गई तो राज्य सरकार के हाथ-पाँव फूल गए और लोगों को 45 घंटे तक आसमान में लटके रहना पड़ा।

यह बात भी सामने आई है कि एक सरकारी एजेंसी ने देवघर रोपवे की स्थित को लेकर सुरक्षा ऑडिट कराया था। इसमें स्पष्ट कहा गया था कि तार के हालात बेहतर नहीं हैं सिर्फ संतोषजनक हैं। इसमें जोड़ों पर निगरानी और तार पर जंग लगने पर ध्यान रखने को कहा गया था। यहाँ बताना आवश्यक है कि रोपवे के लिए इस्तेमाल होने वाला तार सात साल पुराना है।

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे का आरोप है कि घटना वाले दिन शाम छह बजे तक त्रिकूट में क्या हुआ, इसकी जानकारी मुख्य सचिव समेत किसी भी उच्च अधिकारी को नहीं थी। सोरेन सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने हेलिकॉप्टर को समय पर उड़ान भरने के लिए जरूरी सामान मुहैया नहीं कराया, इसलिए बचाव कार्य भी देर से शुरू हुआ।

“अब अपनी त्वचा को बचाने के लिए, यह कहता है कि दामोदर इंफ्रा के साथ अनुबंध 2019 में समाप्त हो गया है। अगर दामोदर इंफ्रा शर्तों को पूरा किए बिना और एसओपी का पालन किए बिना और प्रशासन की नाक के नीचे सरकार की अनुमति के बिना काम कर रहा था, तो इसके लिए किसे दोषी ठहराया जाना है। यह राज्य सरकार की मिलीभगत को दर्शाता है।’

देवघर धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से झारखंड का महत्वपूर्ण स्थान है। त्रिकूट पर्वत पर तीर्थयात्रियों और ट्रेकिंग के शौकीन लोगों की बढ़ती संख्या को देखते हुए राज्य सरकार ने साल 2007 में रोपवे सर्विस की शुरुआत की थी। शुरुआत के दो साल पर्यटन मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले झारखंड पर्यटन विकास निगम द्वारा संचालित किया गया। उसके बाद इसे साल 2009 में इसे निजी कंपनी दामोदर रोपवे एंड इंफ्रा लिमिटेड (DRIL) को सौंप दिया गया।

इफ्तार पार्टी का एक Video यह भी: इमरान खान के बुजुर्ग समर्थक के साथ उनके बागी सांसद ही भिड़े, PPP नेताओं ने हाथापाई में दिया साथ

पाकिस्तान का सियासी ड्रामा अब इफ्तार पार्टी में मारपीट तक पहुँच गया है। सोशल मीडिया में वायरल हुए एक वीडियो में इमरान खान की तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी (PTI) के असंतुष्ट सांसद नूर आलम खान को पीपीपी नेताओं के साथ मिलकर पीटीआई के एक बुजुर्ग कार्यकर्ता के साथ मारपीट करते देखा जा सकता है। यह घटना इस्लामाबाद के एक होटल की बताई जा रही है। वीडियो में इमरान खान के बुजुर्ग समर्थक के साथ नूर आलम की बहसबाजी को हाथापाई में बदलते देखा जा सकता है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक नूर आलम के साथ पीपीपी नेता मुस्तफा नवाज खोखर, नदीम अफजल खान और फैजल करीम कुंदी होटल में इफ्तार पार्टी करने आए थे। जहाँ बुजुर्ग (पीटीआई कार्यकर्ता) भी मौजूद थे। वीडियो में खान और खोखर को बोतल फेंककर मारता है, जिसके बाद दोनों उसे धक्का देकर नीचे गिरा देते हैं। कुछ लोग बीच-बचाव करते भी नजर आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर ये वीडियो खूब शेयर किया जा रहा है। लोग मजे लेने के साथ ही इस पर प्रतिक्रियाएँ भी दे रहे हैं।

एक सोशल मीडिया यूजर ने लिखा, “पीटीआई वालों एक बात समझ आ जानी चाहिए कि भाई चाहे PPP हो MQM हो PMLN या दूसरे भाई। हम इस खेल के पुराने खिलाड़ी हैं। जरा ख्याल से हम अभी शरीफ हुए हैं वरना जमाना हमें बदमाश के तौर पर पहचानती है।”

अनुपम वहाब नाम के एक यूजर ने लिखा, “जो इन सांसदों को सपोर्ट कर रहे हैं, उऩका खुद का रवैया अपने वालिदों के साथ ऐसा ही होगा तभी उनको इसके अंदर कुछ गलत नहीं लगता। शर्म करो यहाँ तुम्हें यही आवाम लेकर आई है।”

एक यूजर ने लिखा कि वाह क्या शानदार आइडिया है। दोहरा रवैया और फिर नैरेटिव गढ़ना। हिंसक गतिविधि को बढ़ावा देना और फिर विक्टिम कार्ड खेलना।

एक अन्य यूजर ने लिखा कि ये सब जो आज सत्ता में हैं, समय आने पर अवाम इनका खतना करेगी। अभी ये सत्ता में हैं, इसलिए अवाम इन पर हमला नहीं कर सकती। ये सड़क पर आम लोगों के साथ यह करें तो देखें क्या होता है।

एक यूजर ने लिखा, शर्म आनी चाहिए वो बुजुर्ग हैं। हौसले से काम लेना चाहिए। कभी इधर, कभी उधर… इनके साथ ऐसा ही होना चाहिए और हर चीज के लिए आरोप नहीं लगा सकते।

गौरतलब है कि पाकिस्तान में हाल ही में सत्ता परिवर्तन हुआ है। सैकड़ों की संख्या में पीटीआई कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर शाहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली नई सरकार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं और पीपीपी के कार्यकर्ता अविश्वास प्रस्ताव में जीत का जश्न मना रहे हैं।

‘3 मई तक हटा दो मस्जिदों से लाउडस्पीकर वरना…’ : मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने महाराष्ट्र सरकार को दिया अल्टीमेटम, बोले- हम पीछे नहीं हटेंगे

मस्जिदों पर लगे लाउडस्पीकर्स के खिलाफ महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के नेताओं ने पहले ही मोर्चा खोला हुआ था और अब पार्टी के प्रमुख राज ठाकरे ने ठाणे में आयोजित एक रैली में इसे मस्जिदों से हटाने के लिए अल्टीमेटम दे दिया है। राज ठाकरे ने अपने पार्टी समर्थकों के सामने महाराष्ट्र सरकार से कहा कि या तो मस्जिदों में लगे लाउडस्पीकर्स को 3 मई तक हटा लिया जाए वरना वो लोग हनुमान चालीसा स्पीकरों पर बजाना शुरू कर देंगे।

समाजार एजेंसी एएनआई के अनुसार, उन्होंने कहा, “मस्जिद में लगे लाउडस्पीकर 3 मई तक हट जाने चाहिए, वरना हम भी स्पीकरों पर हनुमान चालीसा चलाएँगे। ये एक सामाजिक मामला है न कि मजहबी। मैं राज्य सरकार से कहना चाहता हूँ कि हम इस मसले पर पीछे नहीं हटाएँगे, चाहे जो करना हो कर लेना।”

गुड़ी पड़वा पर भी दी थी चेतावनी

बता दें कि इससे पहले राज ठाकरे ने हिंदू नव वर्ष गुड़ी पड़वा पर अपने पार्टी के लोगों को संबोधित करते हुए मस्जिदों के सामने डबल लाउडस्पीकर लगाने की चेतावनी दी थी। उन्होंने 2 अप्रैल को शिवाजी पार्क में आयोजित रैली में कहा था कि अगर सरकार मस्जिदों के लाउडस्पीकरों के बारे में कुछ भी निर्णय नहीं ले पाएगी तो उनकी पार्टी हर मस्जिद के सामने डबल लाउडस्पीकर लगाएगी और हनुमान चालीसा का जाप करेगी।

लाउडस्पीकर को लेकर वह बोले थे, “मैं प्रार्थना करने के किसी के अधिकार का विरोध नहीं करता, लेकिन मस्जिदों पर लगे लाउडस्पीकरों को हटा दिया जाना चाहिए। मैं सरकार से अनुरोध करता हूँ कि उन्हें हटाया जाए। अगर ऐसा नहीं किया गया तो हम उन मस्जिदों के ठीक सामने हनुमान चालीसा का जाप करने के लिए डबल लाउडस्पीकर लगाएँगे। लाउडस्पीकर का उल्लेख किस धर्म में है? क्या आपके धर्म की खोज के समय कोई लाउडस्पीकर था?”

ठाकरे के इस बयान के बाद 3 अप्रैल को खबर आई थी कि घाटकोपर में मनसे के कार्यालय में पार्टी के कार्यकर्ताओं ने लाउडस्पीकर पर जोर-जोर से हनुमान चालीसा बजाना शुरू कर दिया। एक वीडियो सामने आई थी जिसमें लाउडस्पीकर पेड़ से बँधे दिख रहे थे और उनमें हनुमान चालीसा बज रही थी। कार्यालय में भी भारी संख्या में लोग इकट्ठा देखे गए थे। इसी बीच पुलिस ने मनसे नेता महेंद्र भानुशाली को गिरफ्तार भी किया था। उनकी गलती इतनी थी कि वह लाउडस्पीकर लगाकर ‘हनुमान चालीसा’ बजाने लगे थे।

कॉन्ग्रेस नेता ने ड्राइवर को दौड़ा-दौड़ा कर डंडे से पीटा, माफ़ी माँगता रहा पीड़ित: राजस्थान की घटना का वीडियो वायरल

राजस्थान में सत्तारूढ़ कॉन्ग्रेस के एक नेता की दबंगई का मामला प्रकाश में आया है, जहाँ मामूली टक्कर लगने के बाद तमतमाए नेता ने एक कार ड्राइवर को दोड़ाकर पीटा। मारपीट का यह वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। शिकायत के बाद अब पुलिस मामले में कार्रवाई करने की बात कह रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला श्रीगंगानगर के रायसिंहनगर है। यहाँ सोमवार (11 अप्रैल, 2022) की शाम को कॉन्ग्रेस के स्थानीय नेता अशोक रॉयल रेलवे क्रॉसिंग की तरफ जा रहे थे, लेकिन फाटक बंद होने के कारण उनके आगे चल रही कार अचानक रुक गई। ऐसे में एक कार ड्राइवर रविंद्र सिंह ने गलती से बैक गियर लगा दिया, जिससे अशोक रॉयल की कार में हलकी सी खरोच लग गई।

बस फिर क्या था, मामूली सी खरोंच लगते ही नेताजी का रौद्र रूप सामने आ गया। वो अपनी गाड़ी से नीचे उतरे और आगे खड़ी के ड्राइवर से झगड़ा शुरू कर दिया। बात बढ़ी तो कॉन्ग्रेस अपनी गाड़ी की डिक्की से डंडा निकाल लाए और उससे पीड़ित को बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया। जब वो अपनी जान बचाने के लिए भागा तो आरोपित नेता युवक को दौड़ाकर डंडों से पीटा।

इस बीच कॉन्ग्रेसी नेता की गुंडई का कुछ लोगों ने वीडियो बना लिया, जो कि अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

मारपीट का केस दर्ज

इस मामले में पीड़ित ने पुलिस में मारपीट का केस दर्ज कराया है। युवक का कहना है कि गलती से मामूली सी टक्कर लग गई थी, जिसके बाद उसने कॉन्ग्रेस नेता से माफी माँगते हुए नुकसान की भरपाई करने को कहा, लेकिन आरोपित ने उसके साथ मारपीट की। एसएचओ गणेश कुमार ने मारपीट के मामले की शिकायत दर्ज कराए जाने की बात कही है। पुलिस अधिकारी का कहना है कि मामले की जाँच के बाद दोषी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

दिग्विजय सिंह पर दर्ज हुआ सांप्रदायिक उन्माद फैलाने का मामला, झूठे ट्वीट से हिन्दुओं को कर रहे थे बदनाम

मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में रामनवमी के जुलूस के दौरान मुस्लिमों द्वारा की गई हिंसा के मामले में फेक तस्वीर ट्वीट कर हिंदुओं को बदनाम करने का प्रोपेगेंडा चलाने वाले कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उनके खिलाफ प्रदेश की राजधानी भोपाल के रहने वाले प्रकाश पांडे नाम के व्यक्ति की शिकायत पर धार्मिक उन्माद फैलाने के मामले में केस दर्ज किया गया है।

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता के खिलाफ क्राइम ब्रान्च ने इंडियन पीनल कोड के तहत धारा 58/22, 153 A(1), 295A (जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्य धर्म और धार्मिक भावनाओं का अपमान), 465, और 505(2) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। दिग्विजय सिंह के धार्मिक उन्माद फैलाने वाले इस ट्वीट पर कॉन्ग्रेस के नेताओं ने इसे उनकी निजी राय करार देकर खुद को उससे अलग कर लिया।

क्या है मामला

गौरतलब है कि खरगोन हिंसा को हिंदू साम्प्रदायिकता और मुस्लिमों को पीड़ित दिखाने की कोशिशों के तहत दिग्विजय सिंह ने ट्वीट किया था, “क्या तलवार लाठी लेकर धार्मिक स्थल पर झंडा लगाना उचित है। क्या खरगोन प्रशासन ने हथियारों को लेकर जुलूस निकालने की इजाजत दी थी? क्या जिन्होंने पत्थर फेंके चाहे वो जिस भी धर्म के हों, सभी के घर पर बुलडोजर चलेगा? शिवराज जी मत भूलिए.. आपने निष्पक्ष होकर सरकार चलाने की शपथ ली है।”

साभार: ट्विटर

कॉन्ग्रेस नेता के इस ट्वीट पर पलटवार करते हुए ट्वीट किया, “दिग्विजय सिंह ने एक धार्मिक स्थल पर युवक द्वारा भगवा झंडा फहराने का फोटो सहित ट्वीट किया है, वह मध्यप्रदेश का नहीं है। उनका यह ट्वीट प्रदेश में धार्मिक उन्माद फैलाने का षड्यंत्र है और प्रदेश को दंगे की आग में झोंकने की साजिश है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

फेक है तस्वीर

बता दें कि दिग्विजय सिंह ने जिस तस्वीर को ट्वीट कर मुस्लिमों को पीड़ित बताने की कोशिश की थी, वो दरअसल, बिहार के मुजफ्फरपुर का है, जहाँ कुछ लोगों ने मस्जिद के गुंबद पर इस्लामिक झंडा फहरा दिया था।