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न्याय के लिए बुलडोजर का चलना और उसका विद्युत गति से रुक जाना – दोनो ही तंत्र की विफलता का सूचक

दण्ड: शास्ति प्रजा: सर्वा दण्ड एवाभिरक्षति।
दण्ड: सुप्तेषु जागर्ति दंडम धर्म विदुर्बुधा: ।। – मनु स्मृति

“वास्तव में दण्ड ही प्रजा पर शासन करता है, दण्ड ही प्रजा की रक्षा करता है, जब प्रजा सोती है, दण्ड ही जागृत रहता है, इसी कारण विद्वान दण्ड को ही राजा का प्रमुख कार्य मानते हैं।”

मनु स्मृति का यह श्लोक मानव सभ्यता के प्रारम्भिक काल में लिखा गया और आज भी उतना ही सामयिक है जितना शताब्दियों पूर्व था। जिस समाज में आम नागरिक अपनी सुरक्षा के प्रति निश्चिंत होता है और स्वयं शस्त्र नहीं धारण करता है, वह समाज सशक्त शासन के लिए जाना जाता है, जहाँ सत्ता प्रजा के सबसे निर्बल व्यक्ति के अस्तित्व एवं अधिकार के लिए कर्मशील हो।

समाज में शासन और शासित का विभाजन इसी मूल सहमति के आधार पर निर्मित होता है और पश्चिम से आयातित सभ्यताओं को छोड़ दें तो एक सुसंस्कृत समाज में प्रत्येक आम नागरिक सैनिक नहीं होता है।

वर्तमान में एक बुलडोज़र न्याय चर्चा में है और उत्तर प्रदेश में माफिया के विरोध में प्रमुखता से उपयोग की गई यह न्याय व्यवस्था जब दंगों के उत्तर में अन्य राज्यों में प्रयुक्त हो रही है तो तुष्टिकरण की नीति का लाभार्थी रहा धार्मिक समुदाय इसके निशाने पर आ रहा है। ऐसे में जब रामनवमी तथा हनुमान जयंती की शोभा यात्राओं पर मुस्लिम-बहुल क्षेत्रों में हुए पथराव और हिंसक आक्रमणों के प्रत्युत्तर में शासन द्वारा इस व्यवस्था को मध्य प्रदेश के खरगौन और दिल्ली के जहाँगीरपुरी में उतारा गया तो राष्ट्रीय पटल पर सर्वोच्च न्यायालय में पहुँचने के साथ प्रस्तुत हुआ।

दिल्ली में हनुमान जयंती की शोभा यात्रा पर एक हिंसक भीड़ का आक्रमण हुआ, और इसके पक्ष में बड़ी दलीलें दी गईं। एक तर्क यह था कि शोभा यात्रा की प्रशासन से अनुमति नहीं ली गई थी। समय के साथ पहले तो यह तथ्यात्मक रूप से ग़लत निकला, क्योंकि हिंदू समुदाय ने इस यात्रा की विधिवत स्थानीय पुलिस से अनुमति ली थी, परंतु स्थानीय थाना मुख्यालय को इसकी सूचना समय पर नहीं दे पाया।

इसके कारण (पुलिस की गफलत) ना सिर्फ़ यात्रा और हिंदू समुदाय पर आरोप लगे, इस हिंसक आक्रमण को न्यायसंगत सिद्ध करने का प्रयास किया गया मानो दिल्ली में क़ानून व्यवस्था बनाए रखने का उत्तरदायित्व जहाँगीरपुरी के अल्प-संख्यक समुदाय पर हो और प्रत्येक अवैध जुलूस को प्रतिबंधित करने के लिए पुलिस को नहीं जहाँगीरपुरी की मस्जिद के इमाम को संविधान के द्वारा उत्तरदायी बनाया गया हो।

इस हिंसक झड़प के दूसरे दिन जहाँगीरपुरी में बुलडोज़र उतरे, और शरारतपूर्ण रूप से पहले से फैलाए गए शासकीय आदेश को इस प्रकार प्रचारित किया गया मानो अनाधिकृत निर्माण के विरुद्ध हुई यह कार्यवाही हिंदू-विरोधी दंगों के विरोध में हो रही हो। जैसे जैसे सत्य उद्घाटित होता चला गया, यह भी प्रकट होता चला गया कि उत्तर प्रदेश में दंगों और आपराधिक माफिया के विरुद्ध हुई कार्रवाई से इतर दिल्ली में बुलडोज़र कांड एक सुप्त प्रशासनिक व्यवस्था, जिसमें एक कबाड़ और कथित रूप से सट्टे का कारोबारी अंसार पाँच मंज़िला भवन खड़ा कर लेता है, एक दंगे की भूमिका में पूरी तरह से निर्वस्त्र हो चुकने के बाद अपनी छवि को बचाने का प्रयास करती है।

जहाँगीरपुरी के बुलडोजर मस्जिद के बाहर की दीवार और मंदिर के बाहर के गेट के साथ कुछ छिटपुट छज्जे और ठेले हटा पाते हैं। कॉन्ग्रेस समर्थित वरिष्ठ अधिवक्ताओं का समूह, प्रशांत भूषण, दुष्यंत दवे और कपिल सिबल के साथ मिल के 10:30 बजे उस न्यायालय में अपना मामला सूचीबद्ध करा पाते हैं जो सर्वोच्च न्यायालय पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद सत्तारूढ़ पार्टी की हिंसा के मामले को समयाभाव के कारण संज्ञान में नहीं ले पाता है।

दस मिनट की सुनवाई में न्यायालय अवैध निर्माण के विरोध में हुई प्रशासनिक कार्यवाही पर रोक लगा देता है। चलता हुआ बुलडोज़र गुप्ता जी और झा जी की दुकानों को रौंद के शांत हो जाता है। प्रशासन को पुनः चार-चार, पाँच-पाँच तलों के भवन दिखने बंद हो जाते हैं। जिन अनाधिकृत क़ब्ज़ाधारकों के घरों तक प्रशासन नहीं पहुँच पाता, उनकी क़ानून को जेब में रखने की छवि और अधिक बल पाती है। अपराध के विरोध में सत्ता के ग़ैर-अनुपातिक कोप का जो भय हज़ारों की संख्या में सड़क पर उतरने वाली भीड़ पर पड़ना चाहिए वो उन छह-सात लोगों जैसे सलीम शेख़, अंसार, गुल्फ़ाम आदि को पुलिस की पकड़ में पहुँचाता है जिनके लिए अदालत और पुलिस के चक्कर सामान्य जीवन के अंग हैं।

शीघ्र ही ज़मानत पा कर दिल्ली में सत्ता में बैठी पार्टी का कार्यकर्ता अंसार दोबारा अपने धंधों में लग जाएगा, अवैध शरणार्थियों की नागरिकता के प्रमाण तैयार कराएगा, क्योंकि वह एक विस्तृत तंत्र का छोटा सा पुर्ज़ा मात्र है। वह उस तंत्र का भाग है, जो चार वर्ष की बच्ची के हत्यारे के भविष्य के प्रति आशावान है, जो आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता इरफ़ान को हीरा गुजराती की बहन के बलात्कार के आरोप में ज़मानत दे देता है और दिन दहाड़े इरफ़ान एक पीड़ित, दलित भाई की हत्या कर देता है।

लोकतंत्र में राजा एक व्यक्ति नहीं है, एक व्यवस्था है जिसमें न्यायपालिका, कार्यपालिका और राजनैतिक नेतृत्व आता है। इन तीनों में से एक की भी कमी से प्रशासनिक दंड खोखला हो जाता है। लोकतंत्र के इन तीनों अंगों में मनुष्य ही हैं, जो उस मनुष्य से भिन्न नहीं है जो ठेला खींचता हैं, जो शिक्षा देता है, जो लेख लिखता है, जो घरों की रसोइयों में भोजन की व्यवस्था करता है, बसें चलाता है। वह अपनी सुरक्षा इन लोगों के सुपुर्द विश्वास के आधार पर करता है। जब इन तीनों में से कोई अंग असंतुलित होता है, जनता सशंकित हो जाती है। जब न्यायालय भिन्न मामलों को अलग-अलग दृष्टि से देखता है तो उसमें एक चिंतित कर देने वाली स्वेच्छाचारिता परिलक्षित होती है। जब पुलिस अपने कार्य में सतर्क नहीं होती है, उचित या अनुचित कारणों से, तो न्याय के विचित्र साधन प्रकट होते हैं।

न्याय व्यवस्था के साधन के रूप में बुलडोज़र का चलना और उसका विद्युत गति से रुक जाना, दोनो ही तंत्र की विफलता का सूचक है। ऐसे साधन की आवश्यकता तब ही होती है जब अंसार का पाँच तल्ले का मकान बिना प्रशासन और पुलिस को दिखे खड़ा हो जाता है और उसे इतना दुस्साहसी बना देता है कि वह अन्य धार्मिक उपक्रमों के प्रति असहिष्णु हो उठता है। यदि वह एक मंज़िल के घर में किराए पर होता और अपनी योग्यता के अनुसार वैध मार्गों से जीविकोपार्जन करता तो उसमें प्रशासन को धता बताने का साहस ही ना होता।

सहसा उठाए गए प्रयासों से समाचार पत्र तो भर सकते हैं परंतु एक सहज नैतिक और न्यायिक व्यवस्था के खोखलेपन को ऐसे कदम भर नहीं सकते। न्याय के लिए सबसे हानिकारक विवेकहीनता और स्वेच्छाचारिता है। यदि शोभा यात्रा अवैध भी रही हो तो जिस राष्ट्रीय राजधानी ने वर्षों तक सड़कें रोक कर बैठे अवैध प्रदर्शन असहाय अदालतों और मौन प्रशासन के सामने देखे हों, वह एक दिन की शोभा यात्रा पर न्यायपालिका के बदले हुए तेवर ना समझ सकेगा ना स्वीकार कर सकेगा।

विकास एवं प्रगति की अंतिम रेखा पर खड़े अंतिम व्यक्ति के विश्वास के बिना ना सरकार का कोई अर्थ है ना ही न्यायपालिका का। यह सरकार, न्यायपालिका और प्रशासन के लिए आत्मावलोकन का अवसर है। बुलडोज़र उस बीमार हुए पौधे का सड़ा हुआ फल है जिसकी जड़ें गल चुकी हैं। जड़ों की चिकित्सा के बिना समाज ना सुरक्षित हो सकता है ना ही विकसित। शासित की सुरक्षा के लिए शासक का दंड का निष्पक्ष और सशक्त होना आवश्यक है। इसी मूलभूत समझ पर के सभ्य समाज खड़ा रहता है।

अरस्तू के अनुसार – केवल वह शासन स्थिर है जिसमें न्याय के समक्ष प्रत्येक व्यक्ति समान है। शासन सतर्क हो तथा भय एवं लोभ के बिना कार्य करे तो ही भारत सुरक्षित होगा। बुलडोज़र न्याय-व्यवस्था के अभावों का विकल्प नहीं है। उत्तर प्रदेश में बुलडोज़र का उद्देश्य एवं परिणाम दिल्ली में बुलडोज़र के उपयोग से भिन्न है।

मूल लेख को आप यहाँ पढ़ सकते हैं।

दिल्ली का ‘बढ़िया स्कूल’ देखने केरल से आए ऑफिसर लोग: AAP विधायक का दावा फुस्स, वामपंथी सरकार ने निकाली हवा

केरल सरकार (Kerala Government) ने आप विधायक आतिशी मार्लेना (Atishi Marlena) के उस दावे का खंडन किया है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि केरल के एक प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली के स्कूलों का दौरा किया और यहाँ के स्कूली मॉडल को समझा। 23 अप्रैल 2022 (शनिवार) को आतिशी ने एक ट्वीट कर कहा कि केरल के प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली के कलकाजी स्कूल का दौरा किया और यहाँ के मॉडल को समझकर उसे केरल में लागू करने में रुचि दिखाई। इस दावे को केरल के शिक्षा मंत्री ने गलत बताया है।

साभार – ट्विटर

आतिशी ने अपने ट्वीट में लिखा था, “केरल के अधिकारियों की कालका जी के स्कूल में मेजबानी करना शानदार रहा। वो हमारे शिक्षा मॉडल0 को समझना चाह रहे थे और उसे अपने प्रदेश में लागू करना चाह रहे थे। यह अरविंद केजरीवाल सरकार की विकास के माध्यम से राष्ट्र निर्माण का तरीका है साझेदारी से विकास।

source – Twitter

ठीक यही ट्वीट आम आदमी पार्टी के आधिकारिक हैंडल से भी किया गया। इस ट्वीट में लिखा था, “केरल के सम्मानित लोगों ने दिल्ली के सरकारी स्कूलों का दौरा कर शिक्षा में हुई क्रान्ति देखा। उन्होंने कहा कि उन्होंने सोचा नहीं था कि सुविधाएँ इतनी बेहतरीन होंगी। केजरीवाल सरकार की हैपीनेस क्लासेस से इंप्रेस शिक्षाविदों ने इसे केरल में भी लागू करने की इच्छा जताई।”

अरविन्द केजरीवाल ने पंजाब चुनावों में भी दिल्ली मॉडल की काफी चर्चा की थी। केरल देश का सबसे शिक्षित राज्य है। वहाँ से दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था से प्रभावित होकर प्रतिनिधिमंडल आना आप पार्टी की सरकार की छवि में चार चाँद लगा रहा था।

केरल के शिक्षा मंत्री ने किया खंडन

आतिशी और उनकी आम आदमी पार्टी सरकार के इन दावों का केरल सरकार ने खंडन किया है। केरल के शिक्षा मंत्री वी सिवनकुट्टी ने कहा, “केरल के शिक्षा विभाग ने किसी भी व्यक्ति को ‘दिल्ली मॉडल’ के बारे में जानकारी लेने के लिए नहीं भेजा है। पिछले महीने दिल्ली से कुछ अधिकारी केरल के शिक्षा मॉडल को समझने आए थे। हम ये जानना चाह रहे हैं कि आम आदमी पार्टी की विधायक द्वारा किन ‘अधिकारियों’ का स्वागत किया गया?”

Source – Twitter

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, केरल के जिन अधिकारियों ने दिल्ली के स्कूल का दौरा किया उनमें CBSE स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के क्षेत्रीय सचिव विक्टर टीआई, केरल सहोदया कॉम्प्लेक्स संघ के कोषाध्यक्ष एम दिनेश बाबू एवं अन्य लोग शामिल थे।

गुवाहाटी में NDA की प्रचंड जीत: 60 में से 58 पर विजय, BJP ने 52 सीटों पर मारा मोर्चा, कॉन्ग्रेस के हिस्से- 0

असम के गुवाहाटी के नगर निगम चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को ऐतिहासिक जीत मिली है। वहाँ कुल 60 सीटों पर मतदान हुए थे और 58 सीटें एनडीए के हिस्से आई हैं। इनमें 52 सीट स्पष्ट तौर पर भाजपा के हिस्से आईं जिनमें 3 सीट तो ऐसी थीं जिन्हें बीजेपी ने निर्विरोध जीता। भाजपा की सहयोगी पार्टी असोम गणा परिषद ने भी अपने खाते में 6 सीट जोड़ी जिससे एनडीए का खाता 58 तक पहुँच पाया।

शर्मनाक बात ये है कि 60 सीटों पर हुए इन चुनावों में देश की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी कॉन्ग्रेस खाता तक नहीं खोल पाई। उनसे अच्छा प्रदर्शन तो आम आदमी पार्टी ने किया जिन्होंने एक सीट जीत कर गुवाहाटी में अपना खाता खोला। चुनावों के नतीजे स्पष्ट होने के बाद प्रदेश मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने गुवाहाटी की जनता का शुक्रिया अदा करते हुए ट्वीट किया। उन्होंने लिखा,

“मैं गुवाहाटी के लोगों को जीएमसी चुनावों में भाजपा और उसके सहयोगियों को ऐतिहासिक जीत दिलाने के लिए नमन करता हूँ। इस विशाल जनादेश के साथ, लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में हमारी विकास यात्रा में अपने विश्वास की पुष्टि की है।”

बता दें कि इससे पहले गुवाहाटी नगर निगम के चुनाव 2013 में हुए थे। उस समय कॉन्ग्रेस ने 31 वार्ड में से 19 सीटों को जीता था। भाजपा के हिस्से तब 11 सीट आई थी और 1 सीट को एजीपी ने जीता था। इस बार वार्ड की संख्या को बढ़ा कर 60 कर दिया गया जिसमें से 50 फीसद महिलाओं के लिए आरक्षित थी। इन 60 सीटों पर इस बार कुल 200 लोगों ने अपनी किस्मत आजमाई थी।

9 साल बाद हुए नगर निगम के चुनावों में भाजपा ने अपने 53 प्रत्याशियों को मैदान में उतारा था जिनमें से उन्हें 52 पर विजय मिली। वही एजीपी ने 7 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 6 पर जीत दर्ज की। इसी तरह कॉन्ग्रेस पार्टी ने 55 सीटों पर चुनाव लड़ा था, मगर उन्हें एक सीट पर भी कामयाबी नहीं मिली। आम आदमी पार्टी ने 39 वार्ड में अपने उम्मीदवारों को लड़ाया था इनमें से एक को जीत मिली है। बता दें कि गुवाहाटी नगर निगम के चुनावों में वार्ड नंबर 5, 6 और 22 ऐसे रहे जिनमें भाजपा को निर्विरोध जीत मिली।

‘सूरत के हेरिटेज कॉम्प्लेक्स में रातों-रात दरगाह बना कर कब्जा किया जा रहा है’: वीडियो वायरल

गुजरात (Gujarat) का एक वीडियो वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में सूरत के चौकबाजार इलाके में हेरिटेज कॉम्प्लेक्स के अंदर एक दरगाह (Dargah at Heritage building in Surat) दिखाई दे रही है। वीडियो शूट करने वाले शख्स का आरोप है कि यह दरगाह रातों-रात बनी है। एक दिन पहले यह दरगाह इस स्थान पर नहीं थी। वीडियो बनाने वाले शख्स को यह कहते हुए भी सुना जा सकता है, “इस स्थान पर कब्जा कर लिया गया है। यहाँ पर झाड़-फूँक और दिया लगाया गया है। इस पूरी जमीन पर धीरे-धीरे कब्जा किया जा रहा है।”

दरगाह की ओर इशारा करते हुए वह शख्स कहता है, “कल तक यह चीज यहाँ पर नहीं थी। सार्वजनिक स्थान पर ये चीज बनाई जा रही है। आप लोगों को सोचना है कि ये चीज यहाँ पर रहनी चाहिए या नहीं रहनी चाहिए। ये आप लोगों का निर्णय है।” उसने आम लोगों को चेताया और कहा, “आज यहाँ कब्जा हुआ है। कल आपके घरों पर कब्जा होगा तो आप सोच लीजिए कि आपको क्या करना है। ये गैजन शाह वालिद की दरगाह-वरगाह बनाई गई है। इसका काम अभी भी चल रहा है। अभी भी हमारे पास टाईम है कि समय रहते इसका विरोध किया जाए। अगर बात आगे पहुँच गई तो आप हाथ पर हाथ धरे बैठे रहेंगे।”

सूत्रों के अनुसार, जिस जमीन पर दरगाह बनी है, पुलिस उसके मालिक की तलाश कर रही है। जब दरगाह के मामले में पुलिस से संपर्क किया गया तो एक अधिकारी ने बताया कि स्वामित्व के रिकॉर्ड से पता चलता है कि जमीन तीन पक्षों की है। एक पक्ष सूरत नगर निगम है, एक सरकारी जमीन है और एक प्राइवेट पार्टी है। वह प्राइवेट पार्टी कौन है, जिसका जिक्र नहीं किया गया। उसको लेकर सूरत पुलिस ने बताया कि जाँच में पाया गया है कि यह 5-6 ट्रस्टियों वाला एक ट्रस्ट है। पुलिस ने कहा कि वे भूमि के स्वामित्व के बारे में अधिक जानकारी के लिए शहरों का सर्वेक्षण कर र​हे हैं।

पता चला है कि घनीभाई देसाई, गोरधनभाई चोखावाला, यशवंतभाई शुक्ला, ईश्वरलाल देसाई, चुन्नीभाई भट्ट ट्रस्टी हैं, जो इस जमीन के तीसरे मालिक हैं। कुल मिलाकर हेरिटेज कॉम्प्लेक्स की जमीन के तीन अलग-अलग मालिक हैं। इसका एक हिस्सा सूरत नगर निगम के पास है, कुछ हिस्सा गुजरात सरकार के पास है और कुछ हिस्सा ऊपर बताए गए ट्रस्ट के पास है। यह पता लगाने के लिए कि दरगाह सरकारी अधिकारियों के क्षेत्र में आती है या नहीं इसके लिए शहर के सर्वेक्षण से उस विशेष क्षेत्र के स्वामित्व को जानना होगा। हालाँकि, उपरोक्त जानकारी से तो ऐसा ही लगता है कि वक्फ ने अभी तक इस दरगाह को लेकर कोई दावा नहीं किया है, जबकि कुछ स्थानीय मीडिया रिपोर्टों का दावा है कि यह दरगाह यहाँ कई वर्षों से है, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं की जा सकती है।

सूरत नगर निगम निकाय वक्फ संपत्ति है

पिछले साल नवंबर में एसएमसी मुख्यालय मुगलिसरा (SMC headquarters Muglisara) को वक्फ संपत्ति घोषित किया गया था। उस वक्त शरिया कानून का हवाला देते हुए राज्य वक्फ बोर्ड ने दावा था कि इस इमारत का इस्तेमाल 17वीं शताब्दी में हज यात्रियों द्वारा किया गया था और इसे एक मुस्लिम शासक द्वारा दान किया गया था। सुप्रीम कोर्ट की इस घोषणा, ‘एक बार वक्फ, हमेशा एक वक्फ’ पर भी भरोसा जताया गया था।

इंग्लैंड की महिला सांसद ने दिया Basic Instinct वाला पोज, पैर फैला PM बोरिस जॉनसन को भटकाया? प्रधानमंत्री ने ट्वीट में क्या लिखा

इंग्लैंड में लेबर पार्टी की उपनेता हैं एंजेला रेनर (Angela Rayner)। इन पर वहाँ के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन (British PM Boris Johnson) की पार्टी के नेताओं ने कुछ आरोप लगाया है। आरोप यह है कि एंजेला रेनर ने प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के सामने अपने दोनों पैर फैलाए, फिर उसे एक-दूसरे के ऊपर क्रॉस करके रखा। कहा गया कि ऐसा इन्होंने प्रधानमंत्री का ध्यान भटकाने के लिए किया।

ब्रिटिश मीडिया में इस खबर को ‘बेसिक इंस्टिक्ट्स’ वाली चाल या रणनीति के नाम से परोसा जा रहा है। दरअसल ‘बेसिक इंस्टिक्ट्स (Basic Instinct)’ 1992 में आई एक फिल्म है। इसमें हॉलीवुड अभिनेत्री शेरोन स्टोन (Sharon Stone) है। दोनों पैरों को फैलाना, फिर उसे एक-दूसरे के ऊपर क्रॉस करके रखना – सामने वाले मर्द का ध्यान भटकाने के लिए फेमस यह सीन शेरोन स्टोन ने ही किया था।

हुआ यह कि एंजेला रेनर प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन को ब्रिटिश संसद में घेरने की कोशिश कर रही थीं। इसके जवाब में सत्ता पक्ष के सांसदों ने हॉलीवुड अभिनेत्री शेरोन स्टोन की 1992 में आई ‘बेसिक इंस्टिक्ट्स (Basic Instinct)’ फिल्म का हवाला देते हुए रेनर पर निशाना साधा। उन्होंने रेनर की तुलना अभिनेत्री से करते हुए कहा कि वह केवल संसद में बैठे लोगों का ध्यान भटकाना चाहती हैं।

एक अन्य सांसद ने तो यहाँ तक कह दिया, “रेनर यह बात अच्छे से जानती हैं कि वह बोरिस का मुकाबला नहीं कर सकतीं, लेकिन उनके पास अन्य कौशल भी हैं, जिससे वह खुद को साबित करने का प्रयास करती हैं।”

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन की पार्टी का नाम कंजर्वेटिव पार्टी है। इसी कंजर्वेटिव पार्टी के कुछ नेताओं ने जो आरोप लगाया, उन पर लेबर पार्टी की उपनेता एंजेला रेनर ने कहा – भद्दा सा, गंदा सा आरोप। लिंगभेद और स्त्री जाति से नफरत करने वालों का लगाया गया आरोप।

प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन (British PM Boris Johnson) ने भी ट्वीट कर ऐसे आरोपों को गलत बताया।

कौन हैं एंजेला रेनर

एंजेला रेनर (Angela Rayner) 41 वर्ष की हैं। कहा जाता है कि उन्होंने 16 साल की उम्र में गर्भवती होने के कारण स्कूल छोड़ दिया था। रेनर संसद और सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन को हटाने की माँग करती रहती हैं।

लॉकडाउन के दौरान नियमों का उल्लंघन करने के आरोपों से घिरे बोरिस जॉनसन को लेकर रेनर ने कहा था, “अगर नई रिपोर्ट सही हैं, तो इसका मतलब है कि प्रधानमंत्री ने न केवल ऐसी पार्टियों में भाग लिया, बल्कि उनमें से कम से कम एक को आयोजित करने में अहम भूमिका भी निभाई।” रेनर ने जॉनसन पर ब्रिटिश लोगों को जानबूझ कर गुमराह करने का आरोप लगाया था।

राजस्थान के अलवर में प्रशासन ने बिना मौका दिए ढाह दिया घर: 90 साल की बुजुर्ग महिला 7 दिनों से दूसरी मंजिल पर फँसी

राजस्थान के अलवर (Alwar, Rajasthan) स्थित राजगढ़ में मंदिर गिराने के दौरान कई ऐसे घरों एवं दुकानों को भी ढहा दिया गया, जिससे लोगों के परिवार का पेट पलता था। अब उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। इसी बीच एक ऐसा मामला भी सामने आया है, जिसमें एक घर के आधे हिस्से को तोड़ दिया गया और उसमें रहने वाले लोगों को बाहर निकलने का मौका भी नहीं दिया गया। इस घर के दूसरे तले पर 90 साल की एक महिला पिछले 7 दिनों दिनों से फँसी हैं।

जिस घर के आधे हिस्से को तोड़ा गया है उसमें घर की सीढ़ियाँ भी टूट गई हैं। ऐसे में घर के दूसरे तले पर फँसी 90 साल की कस्तूरी देवी वहीं फँस कर रह गई हैं। उम्र के इस पड़ाव में उन्हें चलने-फिरने में भी दिक्कत हो रही है। पैरों में सूजन ने उनकी तकलीफ को और बढ़ा दी है। वह बिना सहारे के चल भी नहीं पातीं। ऐसे में वह घर से नीचे उतरने में असमर्थ हैं।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, कस्तूरी देवी दूसरी मंजिल पर बिछी एक चारपाई पर लेटी रहती हैं। वह अपनी बेबसी पर और प्रशासन की क्रूरता पर क्रोधपूर्ण लाचार महसूस कर रही हैं। उनकी बेटियों ने बताया कि घर तोड़ने आए प्रशासन के लोगों ने उन्हें घर से बाहर निकलने तक का मौका तक नहीं दिया और घर के अगले हिस्से को ढहा दिया।

वहीं, चने-बिस्किट बेचकर भरण-पोषण करने वाले 50 वर्षीय भागचंद की भी एक दुकान थी। इस दुकान की साइज 10×10 थी। दुकान के ऊपर पर रहने का एक छोटा-सा कमरा था। अब दोनों को ही ढहा दिया गया है। भागचंद का परिवार अब किराए के मकान में रहने को बाध्य है। वहीं, परिवार पालने के लिए ठेला लगाना पड़ रहा है।

वहीं, योगेश गवारिया नाम के एक शख्स ने बताया कि उनका भी मकान और दुकान को ढहा दिया गया है। दुकान का सामान भी बाहर निकालने का मौका नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि उनके चार बच्चे हैं, जिनमें से एक विकलांग है। ऐसे में परिवार पालना मुश्किल हो रहा है।

जिन लोगों के मकान और दुकान टूटे हैं, उनका कहना है कि मंदिर टूटने पर सभी बोल रहे हैं, लेकिन जो लोग बेघर हो गए उनके लिए कोई नहीं बोल रहा है।

NDTV पर तेलंगाना सरकार का प्रचार: 32 मिनट तक खबर की तरह चली प्रोपेगेंडा वीडियो, कहीं नहीं लिखा था- ‘पेड न्यूज’

प्रोपेगेंडा चैनल NDTV ने हाल में अपने चैनल पर खबर के नाम पर तेलंगाना सरकार का विज्ञापन दिखाया। 21 अप्रैल 2022 को इस चैनल पर एक वीडियो चली जिसका टाइटल- ‘Telangana A Phoenix Rises’ था। इस वीडियो में मूलत: ये समझाया गया कि आखिर कैसे केसीआर की सरकार ने कम समय में तेलंगाना को राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट बनाने का काम किया है।

शो में वीडियो को लेकर दावा किया गया, “यह इस बात का लेखा-जोखा है कि कैसे सीएम के चंद्रशेखर राव के दृष्टिकोण और गतिशील नेतृत्व ने साबित किया है कि प्रभावी गवर्नेंस और सशक्त योजनाएँ प्रगति का एकमात्र मार्ग हैं।” एनडीटीवी ने तेलंगाना सरकार का यह विज्ञापन न्यूज स्टोरी की तरह चलाया और ये भी नहीं साफ किया कि ये एक पेड विज्ञापन है। उनके यूट्यूब चैनल पर भी ये वीडियो पब्लिश हो रखी है जिसका टाइटल ‘तेलंगाना सरकार की पहल’ लिखा गया है।

ये जानना दिलचस्प है कि तेलंगाना सरकार के प्रचार वाली वीडियो को बिन तथ्यों के खबर की तरह चलाने वाला एनडीटीवी अक्सर अपनी खबरों को निष्पक्ष खबरों की तरह दिखाता नजर आता है और साथ ही अन्य चैनलों पर नैतिकता से खिलवाड़ के इल्जाम लगाता है। हालाँकि, उनकी इस हरकत के बाद साबित होता है कि यदि फायदा हो तो वह खुद नैतिकता से समझौता करने में गुरेज नहीं करते।

वरिष्ठ पत्रकार व वर्तमान में सूचना और प्रसारण मंत्रालय की सलाहकार कंचन गुप्ता ने वामपंथी मीडिया चैनल एनडीटीवी के ऐसे बर्ताव को देख आपत्ति जाहिर की है। उन्होंने कहा कि एक सरकार के प्रचार का वीडियो न केवल बुनियादी नैतिकता के विरुद्ध है बल्कि प्रसारण संहिता का भी उल्लंघन है। उन्होंने बताया कि इस तरह के विज्ञापन दिखाना गलत नहीं है मगर ये बात स्पष्ट होनी चाहिए कि जो चीज दर्शक को दिखाई जा रही है वो पेड या स्पॉन्सर्ड है।

बता दें कि केबल टीवी नेटवर्क रूल, 1994 के नियम 7 (10) में ये स्पष्ट है कि हर विज्ञापन प्रोग्राम से अलग दिखाया जाना चाहिए। इसके अलावा न्यूज ब्रॉडकॉस्टर & डिजिल एसोसिएशन ने भी अपने दिशा-निर्देशों में इस बात को स्पष्ट किया हुआ है कि जो वीडियो चाहे जिस भी विषय पर हो, लेकिन ये बताना जरूरी है कि उसके बदले संस्था को पैसे मिले है या नहीं। ऐसे ही प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा प्रकाशित पत्रकारिता आचरण मानदंडों के अनुसार भी यह बात स्पष्ट करना जरूरी है कि सामग्री विज्ञापन है या खबर।

द हिंदू ने किया था चीन का प्रचार

गौरतलब है कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि वामपंथी मीडिया ने किसी सरकार का पेड प्रमोशन किया हो। इससे पहले द हिंदू इसी मामले में काफी बदनाम हुआ था जब उन्होंने चीन के विज्ञापन के लिए अपना पूरा पन्ना समर्पित कर दिया था। ये कारनामा द हिंदू ने 1 जुलाई 2020 को किया था जब चीन की कम्युनिस्ट पार्टी अपनी स्थापना के 100 वर्ष मना रही थी।

द हिंदू पर ये पेड कंटेंट समाचार पत्र के तीसरे पेज पर था। दिलचस्प बात तब भी यह थी कि चीन द्वारा जो पेड कंटेंट प्रकाशित किया गय, वह नियमित रिपोर्ट की तरह ही दिखाई देता था, लेकिन बारीकी से देखने पर पता चलता है कि यह चीन द्वारा पेड कंटेंट था।

‘रावण दिल का नेक और राम शातिर था’: वीडियो वायरल होने के बाद लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी ने प्रोफेसर कौर को हटाया, माँगी माफी

भगवान राम (Bhagwan Ram) का अपमान करने वाला वीडियो वायरल होने के बाद लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) ने प्रोफेसर गुरसंग प्रीत कौर को बर्खास्त कर दिया है। यूनिवर्सिटी ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक बयान जारी करते हुए इस घटना पर खेद जताया है। उन्होंने कहा, “भगवान राम का अपमान करने वाली प्रोफेसर का वीडियो सामने आने के बाद उसे बर्खास्त कर दिया गया है।”

बयान में कहा गया है, “हम यह भली-भाँति समझते हैं कि सोशल मीडिया पर शेयर किए गए वीडियो से कई लोग आहत हुए हैं, जिसमें हमारी यूनिवर्सिटी की एक प्रोफेसर को उनकी व्यक्तिगत राय रखते हुए सुना जा सकता है।” विश्वविद्यालय ने आगे कहा, “हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि यह उनका व्यक्तिगत विचार है, जिसका विश्वविद्यालय किसी भी प्रकार से समर्थन नहीं करता है। हमारा धर्मनिरपेक्ष विश्वविद्यालय है, जहाँ सभी धर्मों और जाति के लोगों के साथ प्यार और सम्मान के साथ समान व्यवहार किया जाता है।”

राम बुरे, रावण अच्छा प्रोफेसर बर्खास्त

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में बर्खास्त प्रोफेसर गुरसंग प्रीत कौर भगवान राम को बुरा इंसान बताती हैं। वह कहती हैं, “राम बुरा इंसान था। राम ने रावण जैसे नेक दिल इंसान के साथ छल किया।” कौर वीडियो में अपने छात्रों को बता रही हैं कि राम ने रावण का वध करने के लिए सीता के अपहरण की साजिश रची थी, ना कि रावण की, जिसने सीता का अपहरण किया और उन्हें लंका ले गया।

वह यहीं नहीं रुकतीं। बार-बार एक ही बात को दोहराती हैं। कौर छात्रों को भगवान राम के खिलाफ भड़काते हुए कहती हैं, “क्या आप जानते हैं कि रावण एक नेक दिल इंसान था? जबकि राम अच्छा इंसान नहीं था। राम बेहद शातिर था, जिसने चतुराई से सीता के अपहरण की योजना बनाई और रावण को बुरा इंसान साबित कर दिया।” इसके बाद प्रोफेसर छात्रों से अपने कुतर्कों पर विचार करने के लिए कहती हैं।

News18 के पत्रकार अमन चोपड़ा पर राजस्थान में 2 FIR: अलवर में मंदिर तोड़ने की घटना को जहाँगीपुरी दंगे का बताया था बदला

न्यूज़ 18 के एंकर अमन चोपड़ा (Aman Chopra) पर 23 अप्रैल (शनिवार) को राजस्थान (Rajasthan) के बूंदी और डूंगरपुर जिले में अलग-अलग FIR दर्ज की गई हैं। FIR की वजह राजस्थान के ही अलवर में तोड़े गए मंदिर पर अमन चोपड़ा द्वारा किया गया शो बताया जा रहा है। कॉन्ग्रेस के नेताओं के मुताबिक, अमन चोपड़ा ने लोगों को भड़काने के साथ साम्प्रदायिक उन्माद फैलाया है। अमन पर देशद्रोह की भी धाराएँ लगाई गईं हैं।

अमन चोपड़ा पर FIR में कहा गया है कि उनके शो में एक लाइन कही गई थी, “अलवर की घटना कहीं दिल्ली के जहाँगीरपुरी की घटना का बदला तो नहीं है।” इस शो में अमन चोपड़ा ने दोनों घटनाओं को आपस में जोड़ने का प्रयास किया था।

बूँदी में अमन चोपड़ा के खिलाफ FIR दर्ज करवाने वाले व्यक्ति का नाम चरमेश शर्मा है, जबकि डूंगरपुर जिले में कृष्ण राज सिंह FIR दर्ज कराई है। डूंगरपुर के थाना बिछीवाड़ा में दी गई शिकायत में कहा गया है, “अमन ने आपराधिक षड्यंत्र, राजद्रोह, साम्प्रदायिक तनाव बढ़ाने तथा धार्मिक भावनाएँ भड़काने का आपराधिक कृत्य किया गया है। एंकर ने जिस तरह से अपने शो में कॉन्ग्रेस पार्टी का नाम मंदिर मामले से जोड़ा है, उससे जाहिर होता है कि वह राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार के खिलाफ आम लोगों में विद्रोह पैदा करना चाहते हैं। यह भ्रामक खबर है और राजस्थान सरकार के खिलाफ षड्यंत्र है। इसे चुनी हुई सरकार के खिलाफ राजद्रोह का अपराध माना जाए।”

FIR Copy

शिकायत के आधार पर पुलिस ने अमन चोपड़ा के खिलाफ 153 A, 295 A, 124 A IPC के अलावा IT एक्ट 2000 की धारा 67 के तहत केस दर्ज किया है। वहीं, बूँदी जिले में चरमेश शर्मा द्वारा दी गई तहरीर के आधार बूँदी सदर थाने में 153 A, 295, 295 A और 120B के तहत केस दर्ज किया गया है।

Bundi District FIR

ट्विटर पर ट्रेंड हुआ अमन चोपड़ा

अमन चोपड़ा के खिलाफ FIR दर्ज होने के बाद उनका नाम ट्विटर पर ट्रेंड हो रहा है। समाचार लिखे जाने तक 41 हजार से अधिक लोग इस ट्रेंड पर ट्वीट कर चुके हैं। दिल्ली भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने भी इस मामले में लिखा, “जब आतंक ना रोका जाए तो आतंक पर सवाल उठाने वालों को रोकने की साजिश। एक पत्रकार के खिलाफ ऐसा सुनियोजित हमला लोकतंत्र के हर सिद्धान्त के खिलाफ है। अमन चोपड़ा पर सवाल मत करो। अमन चोपड़ा के सवालों के जवाब दो।”

जिस J&K में 70 साल में हो पाया ₹17000 करोड़ का निवेश, वहाँ 2 साल में ₹38000 करोड़ पहुँचा आँकड़ा: PM मोदी

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद आज (24 अप्रैल 2022) पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जम्मू गए और वहाँ की जनता को लगभग 20 हजार करोड़ रुपए की परियोजनाओं का तोहफा दिया। इस दौरान स्थानीयों ने भी उनका जोर-शोर से स्वागत किया और सांबा जिले के पल्ली गाँव में हो रही रैली हर-हर मोदी, घर-घर मोदी के नारों से गूँज उठी।

इस दौरान पीएम ने अमृतसर-कटरा एक्स्प्रेस-वे समेत 5 नए एक्सप्रेस-वे की आधारशिला रखी। साथ ही बनिहाल-काजीगुंड की दूरी डेढ़ घंटे कम में पूरी करने के लिए 8.45 किलोमीटर लंबी सुरंग भी जनता को समर्पित की। इस सुरंग का निर्माण 3100 करोड़ रुपए में हुआ है।

इसके अलावा पीएम ने बिजली उत्पादन को दोगुना करने की दिशा में 850 मेगावाट रतले पनबिजली परियोजना और 540 मेगावाट कवार पनबिजली परियोजना का भी शिलान्यास किया। जम्मू की जनता को पीएम मोदी ने 100 औषधि केंद्र समर्पित किए।

राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस पर शुभकामनाएँ देते हुए पीएम ने आज के दिन को जम्मू-कश्मीर के विकास को गति देने के लिए बहुत बड़ा दिन बताया। उन्होंने कहा, “न ये भू-भाग मेरे लिए नया है, और न मैं आप लोगों के लिए नया हूँ। मैं यहाँ की बारिकियों से अनेक वर्षों से परिचित रहा हूँ। मेरे लिख खुशी की बात है कि आज यहाँ कनेक्टिविटी और बिजली से जुड़े 20,000 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट का लोकार्पण और शिलान्यास हुआ है।”

उन्होंने बताया, “आज अनेक परिवारों को गाँवों में उनके घर के प्रॉपर्टी कार्ड भी मिले हैं। 100 जनऔषधि केंद्र जम्मू कश्मीर के गरीब और मिडिल क्लास को सस्ती दवाएँ, सस्ता सर्जिकल सामान देने का माध्यम बनेंगे।”

पंचायती राज दिवस इस बार जो जम्मू-कश्मीर से मनाया जा रहा है उसे भी पीएम ने बड़े बदलाव का प्रतीक बताया। उन्होंने 2-3 सालों में जम्मू-कश्मीर में जो बदलाव हुए उन्हें लेकर बात की। पीएम ने कहा कि केंद्र के करीब पौने 200 कानून जो यहाँ लागू नहीं होते थे। वो सब इन सालों में लागू किए गए ताकि नागरिक सशक्त बनें। बरसों तक जिन लोगों को यहाँ आरक्षण का लाभ नहीं मिला, उन्हें भी अब रिजर्वेशन का फायदा मिल पा रहा है।

पीएम ने कहा कि आने वाले 25 सालों में जम्मू-कश्मीर विकास की नई गाथा लिखेगा। पिछले 7 दशकों में यहाँ मात्र 17000 करोड़ रुपए का प्राइवेट निवेश हुआ था जबकि पिछले 2 सालों में ये आँकड़ा 38,000 करोड़ रुपए पहुँचा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रदेश के नौजवानों से वादा किया कि जिन मुसीबतों के साथ उनके बुजुर्गों ने जीवन जिया, उसके साथ उन्हें नहीं जीना पड़ेगा। पीएम ने स्थानीयों से संवाद स्थापित करने के लिए डोगरी भाषा के लोकसंगीत का उदाहरण दिया। साथ ही वह बोले कि अब बनिहाल-कांजीगुंड टनल से जम्मू और श्रीनगर की दूरी 2 घंटे कम हो गई है। ऊधमपुर-श्रीनगर-बारामुला को लिंक करने वाला आकर्षक आर्क ब्रिज भी जल्द देश को मिलने वाला है। दिल्ली -अमृतसर -कटरा हाइवे भी दिल्ली से माँ वैष्णो देवी के दरबार की दूरी को बहुत कम करने वाला है।