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16 साल के शिवम पर खरगोन में ऐसा हमला कि कब होश में आएगा डॉक्टरों को भी नहीं पता: 2 दिन बाद है बहन की शादी, रामनवमी जुलूस को दंगाइयों ने बनाया था निशाना

मध्य प्रदेश के इंदौर के खरगोन में रामनवमी की शोभा यात्रा के दौरान मस्जिदों से किए गए हमले में गंभीर रूप से घायल हुए 16 साल के नाबालिग लड़के की हालात गंभीर बनी हुई है। चोट के कारण शिवम के सिर की हड्डी टूटकर उसके ब्रेन में जा घुसी है। इसका ऑपरेशन के बाद भी उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। हालाँकि, ऑपरेशन के हालात में मामूली सुधार बताया जा रहा है, लेकिन वह अभी भी वेंटिलेटर पर है और उसे अभी तक होश नहीं आया है। लोगों का कहना है कि पत्थर फेंकने के लिए मस्जिदों पर लोहे के गुलेल बनाए गए हैं।

रविवार को रामनवमी के दिन भगवान राम की शोभा यात्रा पर पत्थरबाजी होने लगी। पत्थारबाजी के दौरान ही पेट्रोल बम और गोलियाँ चलाने की भी बता कही जा रही है। इसके बाद आसपास के हमलों का दौर शुरू हो गया। शिवम के मामेरे भाई नीलेश जोशी ने बताया कि घर के बाहर खड़े थे। उसी दौरान मुस्लिम समुदाय के उपद्रवी आए और पत्थर मारने लगे। शिवम भी वहीं खड़ा था। मुख्य हमलावर टोपी पहनकर आया था। बुर्के में से भी कुछ लोग पत्थर चला रहे थे।

इसी दौरान एक पत्थर आकर शिवम के सिर पर लगा। पत्थर लगते ही वह गिर गया और उसके सिर से खून बहने लगा। इसके बाद परिजनों लेकर उसके निजी अस्पताल गए, लेकिन वहाँ बेड खाली नहीं था। इसके बाद वे उसे सरकारी अस्पताल में लेकर गए, जहाँ उसकी घाव को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे इंदौर रेफर कर दिया। इसके बाद वह रास्ते में ही बेहोश हो गया।

इंदौर पहुँचने के बाद CHL हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने देखा उसके सिर पर गहरा गड्ढा बना हुआ है। डॉक्टरों का कहना है कि सिर में गहरा घाव है और यह घाव किससे हुआ है कहना मुश्किल है। डॉक्टरों का कहना है कि चोट इतनी गहरी है कि सिर की कुछ हड्डियाँ टूटकर ब्रेन में चली गईं, जिन्हें ऑपरेशन कर निकाला गया है। ऑपरेशन के बाद भी शिवम को होश नहीं आया है। डॉक्टरों का कहना है कि होश कब तक आएगा, कहना मुश्किल है।

शिवम के रिश्तेदारों का कहना है कि खरगोन के खसखसवाड़ी मस्जिद के आसपास कई घरों में लोहे की गुलेल बँधी है। हालाँकि, इसे अब ढँक दिया गया है। उनका आरोप है कि हमले के लिए कई मकानों को चिन्हित किया गया था। उपद्रवियों की मंशा अभी भी हिंसा फैलाने की है। लोगों का कहना है कि महिलाओं और बच्चों को वे दूसरी जगह हटा रहे हैं।

शिवम का गाँव खरगोन से 100 किलोमीटर दूर निसरपुर में है और उसके पिता किसान हैं। शिवम खरगोन में अपने मामा के यहाँ रहकर ITI से कंप्यूटर में डिप्लोमा कर रहा था। परिवार में उसकी दो बहनें हैं। उसकी एक बहन की शादी 17 अप्रैल को है और परिवार उसके स्वस्थ होने की उम्मीद लगाए बैठा है।

जंप सूट, चेहरे पर गैस मास्क और पीठ पर सिलेंडर: ब्रूकलिन में जिस अश्वेत ने बरसाई गोलियाँ, उसके यूट्यूब पर नस्लवादी वीडियो की भरमार

न्यूयॉर्क के ब्रुकलिन में 36वें स्ट्रीट मेट्रो स्टेशन पर मंगलवार (12 अप्रैल, 2022) को हुए हमले में हमलावर ने यात्रियों पर फायरिंग की और ट्रेन में धुँआ भर दिया। इस ताबड़तोड़ गोलीबारी में करीब 20 लोग घायल हुए हैं। वहीं इस गोलीबारी में हमलावर के रूप में पुलिस ने एक शख्स फ्रैंक आर.जेम्स की पहचान की है। जो कि फिलाडेल्फिया का रहने वाला है।

जहाँ पुलिस उसे बेघर बता रही है वहीं आरोपित को ‘पर्सन ऑफ इंटरेस्ट’ या इस घटना में उसके शामिल होने के आधार पर तलाश रही है। फिलहाल अभी उसे गिरफ्तार नहीं किया गया है।

हमलावर का हुलिया

मीडिया रिपोर्ट में कहा कि एक गैस मास्क और आमतौर पर कंस्ट्रक्शन फिल्ड से जुड़े कर्मियों द्वारा पहनी जाने वाली ड्रेस में एक बंदूकधारी ने भीड़-भाड़ वाली दक्षिण की ओर जाने वाली ट्रेन में एक बम फेंका और फिर यात्रियों पर गोलियाँ चला दीं। जैसे ही ट्रेन 36वें सेंट स्टेशन पर पहुँची और ट्रेन के दरवाजे खुले, घायल यात्री ट्रेन से बाहर आ गए प्लेटफॉर्म पर गिर गए।

सोशल मीडिया पर अपलोड किए गए घटना के वीडियो फुटेज में दिखाया गया है कि ट्रेन से बाहर आने वाले यात्री घबराए हुए थे और स्टेशन पर धुएँ में घिरे हुए थे।

आतंकी एंगल नहीं

हालाँकि, पुलिस ने कहा कि अभी आतंकवादी घटना के नजरिए से जाँच नहीं की जा रही है, लेकिन फायरिंग को लेकर जाँच जारी है। वहीं यह भी दावा किया जा रहा है कि न्यूयॉर्क पुलिस को हमलावर के संभावित हुलिया की जानकारी भी मिल गई है। हमलावर जम्प शूट, गैस मास्क और कंस्ट्रक्शन वर्कर के कपड़े में था। वहीं उसके पीठ पर सिलेंडर भी था।

पुलिस ने कहा कि वे हमले के सिलसिले में 62 वर्षीय फ्रैंक आर जेम्स की तलाश कर रहे हैं, क्योंकि उसने एक वैन किराए पर ली थी जो शूटिंग से जुड़ी हो सकती है। क्योंकि उसकी चाबी घटनास्थल पर ही मिली थी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एनवाईपीडी चीफ ऑफ डिटेक्टिव्स जेम्स एसिग ने कहा हम यह निर्धारित करने के लिए देख रहे हैं कि क्या उसका ट्रेन से कोई संबंध है।

पुलिस ने शख्स की जानकारी मिलते ही सूचना देने की अपील करते हुए 50 हजार डॉलर (38,07,680 रुपए) का ईनाम भी घोषित किया है। हमलावर को सोशल मीडिया यूजर बताते हुए दावा किया गया है कि वह नस्लवादी वीडियो अपलोड करता रहता था।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हाल के वर्षों में YouTube पर दर्जनों नस्लवादी वीडियो अपलोड किए हैं, जिनमें यहुदियों से नफरत, एक वीडियो में न्यूयॉर्क के मेयर एरिक एडम्स को दी गई धमकी भी शामिल है। जिसको देखते हुए अब मेयर की निजी सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।

20 लोग घायल

न्यूयॉर्क पुलिस विभाग के आयुक्त कीचंत सीवेल ने कहा कि संदिग्ध बंदूकधारी का मकसद फ़िलहाल पता नहीं है। वहीं गोलीबारी में घायल 20 में से कुल 16 लोग अस्पताल में भर्ती हैं। उनमें से दस को गोली लगी है, वहीं 5 की हालत गंभीर लेकिन स्थिर बताई जा रही है।

हिमाचल में धर्म संसद को रोकने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, कपिल सिब्बल ने की थी माँग: हरिद्वार वाले पर उत्तराखंड सरकार से पूछा – क्या कार्रवाई हुई?

सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश में प्रस्तावित ‘धर्म संसद’ कार्यक्रम पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालाँकि, सर्वोच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि वो स्थानीय पुलिस-प्रशासन से संपर्क कर सकते हैं। बता दें कि 17 दिसम्बर, 2021 को उत्तराखंड के हरिद्वार में हुए ‘धर्म संसद’ कार्यक्रम के दौरान महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती और जितेंद्र नारायण त्यागी (पहले वसीम रिजवी) पर भड़काऊ और घृणा भरे भाषण देने के आरोप लगे थे।

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड कि सरकार से रिपोर्ट माँगी है कि ‘हेट स्पीच’ के इस मामले में अब तक क्या-क्या कार्रवाई की गई। 19 दिसम्बर, 2021 को ‘हिंदू युवा वाहिनी’ ने दिल्ली में इसी तरह का कार्यक्रम आयोजित किया था। याचिका में आरोप लगाया गया है कि इन कार्यक्रमों में एक खास समुदाय के विरुद्ध युद्ध छेड़ने के लिए उकसाया गया था। लेकिन, अदालत ने याचिकाकर्ताओं की माँग नहीं मानी और इस संबंध में हिमाचल प्रदेश की सरकार को कोई आदेश जारी नहीं किया।

उत्तराखंड सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि हरिद्वार ‘धर्म संसद’ में ‘हेट स्पीच’ आरोपितों के खिलाफ 4 FIR दर्ज की जा चुकी है। साथ ही इस मामले में 3 आरोप-पत्र भी दाखिल किए गए हैं। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने पूछा था कि महीनों बीत जाने के बावजूद इस मामले में कोई गिरफ़्तारी क्यों नहीं हुई है। याचिकाकर्ताओं में पूर्व हाईकोर्ट जज अंजना प्रकाश और पत्रकार कुर्बान अली शामिल थे। कॉन्ग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने उनकी तरफ से अदालत में जिरह की।

एएम खनविलकर और एएस ओका की पीठ ने इस मामले पर सुनवाई की। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि ये सिर्फ मामूली ‘हेट स्पीच’ ही नहीं है, बल्कि पूरे मुस्लिम समुदाय के नरसंहार के लिए उकसाए जाने का मामला है। हिमाचल प्रदेश में रविवार (17 अप्रैल, 2022) को ये कार्यक्रम होने वाला है। हिमाचल प्रदेश सरकार के वकील को इस याचिका की एक कॉपी मुहैया कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है। कपिल सिब्बल ने कहा कि हम उस दौर में हैं, जब ‘सत्यमेव जयते’ नारे का मतलब बदल दिया गया है। 22 अप्रैल को अगली सुनवाई से पहले हिमाचल प्रदेश सरकार को स्टेटस रिपोर्ट दायर करने को कहा गया है

खुले मंच से कहा- 15 मिनट के लिए पुलिस हटा लो… हैदराबाद की स्पेशल कोर्ट ने नहीं माना ‘हेट स्पीच’: ओवैसी का भाई बरी, राम-गौपूजा का भी बनाया था मजाक

विशेष अदालत ने तेलंगाना विधानसभा में AIMIM (ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन) के विधानमंडल दल के नेता अकबरुद्दीन ओवैसी को हेट स्पीच से जुड़े दो मामलों को निर्दोष करार देते हुए बरी कर दिया है। हैदराबाद में AIMIM के 7 विधायक हैं, जिनमें से अकबरुद्दीन ओवैसी ने चंद्रयांगुत्ता का प्रतिनिधित्व करते हैं। 1999 से अब तक वो 5 बार इस सीट को जीत चुके हैं और पिछले 23 वर्षों से लगातार विधायक हैं।

उनके बड़े भाई और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी AIMIM के अध्यक्ष हैं। नामपल्ली मेट्रोपॉलिटन अदालत परिसर में स्थित स्पेशल MP/MLA सेशन कोर्ट ने उन्हें निर्मल और निज़ामाबाद जिलों में हेट स्पीच के दो मामलों में निर्दोष करार दिया। हालाँकि, ‘राष्ट्रीय अखंडता’ की दुहाई देते हुए अदालत ने उन्हें निर्देश दिया कि वो भविष्य में विवादित भाषण देने से बचें। ये मामला 2012 का है। तब FIR दर्ज किए जाने के बाद उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था।

हिन्दुओं के खिलाफ घृणा फैलाने और उकसाने वाला ये भाषण उन्होंने 8 दिसंबर, 2012 को निज़ामाबाद में और आदिलाबाद के निर्मल क़स्बे में उसी साल 22 दिसंबर को दिया था। तब तेलंगाना भी आंध्र प्रदेश का ही हिस्सा हुआ करता था। इस मामले की जाँच CID को सौंपी गई थी, जिसने 2016 में आरोप-पत्र दाखिल किया था। उन पर IPC की धाराओं के तहत भड़काने वाला भाषण देने के आरोप लगाए गए थे। ये वीडियोज आज तक सर्कुलेट किए जाते हैं। अदालत ने कार्यवाही के दौरान कुल 74 गवाहों के बयान सुने

निर्मल में उन्होंने ‘बाबरी मस्जिद की शहादत’ की बात करते हुए कहा था कि मुंबई में उसके बाद बम धमाके हुए। उन्होंने कहा था, “ऐ हिंदुस्तान, अगर तुमने बाबरी मस्जिद की शहादत न की होती तो बम्बई के धमाके भी नहीं होते। मैं सिर्फ मुस्लिमपरस्त हूँ। राम जेठमलानी ने कहा कि सबसे गंदा आदमी जो औरतों का इकराम नहीं करता, वो राम था। ये मैं नहीं बोल रहा, राम जेठमलानी ने कहा।” इसी तरह निज़ामाबाद में भी उन्होंने भड़काऊ भाषण दिए थे।

वहाँ उन्होंने नरेंद्र मोदी की तुलना पाकिस्तानी आतंकी अजमल कसाब से कर डाला था और कहा था कि जब कसाब को फाँसी हो सकती है तो भारत में रहने वाला मुस्लिमों को मारता है तो उसे क्यों नहीं? उन्होंने हिंदुओं में गौ-पूजा का भी मजाक बनाते हुए कहा था कि हिंदू बाजार में लाकर ‘अपनी माता’ को बेच रहे हैं। उन्होंने यहाँ भी बाबरी मस्जिद का मुद्दा उठाया था। उन्होंने ’15 मिनट के लिए पुलिस हटाने’ वाली धमकी भी हिन्दुओं को दी थी। उन्होंने कहा था, “मुस्लिम 25 करोड़ हैं और तुम हिंदू 100 करोड़ हो। 15 मिनट के लिए पुलिस हटा लो, देख लेंगे किसमें कितना दम है।”

जिस अंकिती बोस ने विदेश में खड़ी कर दी Zilingo, उनके साथ भी अशनीर ग्रोवर जैसा किस्सा: जानिए क्या है मामला

वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के चलते हाल ही में फिनटेक यूनिकॉर्न भारतपे (BharatPe) के सह-संस्थापक और प्रबंध निदेशक (MD) अशनीर ग्रोवर को कंपनी बोर्ड से इस्तीफा देना पड़ा था। उससे पहले आर्थिक गड़बड़ियों के आरोप में कंपनी ने उनकी पत्नी माधुरी जैन ग्रोवर को बर्खास्त कर दिया था। अब इसी तरह की कहानी एक और भारतीय आंत्रप्रेन्योर के साथ दुहराई जा रही है। इनका नाम है- अंकिती बोस (Ankiti Bose)। सिंगापुर के हाई प्रोफाइल स्टार्टअप्स में से एक Zilingo Pte ने सीईओ अंकिती को सस्पेंड कर दिया है।

जिलिंगो पैरल मर्चेंट्स और फैक्ट्रियों को टेक्नोलॉजी की आपूर्ति करती है। कंपनी ने अकाउंटिंग में कथित तौर पर गड़बड़ियाँ मिलने के बाद अंकिती पर कार्रवाई की है। ब्लूमबर्ग ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि नई फंडिंग जुटाने की कोशिशों के दौरान एक ड्यू डिलीजेंस प्रॉसेस के बीच इन गड़बड़ियों का पता चला। हालाँकि बोस ने इन आरोपों पर ख़ारिज करते हुए अपने सस्पेंशन को चुनौती दी है। उन्होंने कंपनी के कदम को ‘विच हंट’ बताते हुए अपने निलंबन का विरोध किया और कहा कि यह कंपनी में एक निवेशक के खिलाफ उनके द्वारा की गई उत्पीड़न की शिकायतों का नतीजा है।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक जिलिंगो पीटीई, गोल्डमैन सैक्स ग्रुप इंक से 15 से 20 करोड़ डॉलर जुटाने की कोशिश कर रही थी। तभी इनवेस्टर्स ने विचार-विमर्श के दौरान उसके फाइनेंसेज पर सवाल उठाए। जिसकी वजह से बातचीत बीच में ही अटक गई। इसके बाद टेमासेक होल्डिंग्स और सिकोइया कैपिटल इंडिया जैसे इनवेस्टर्स ने उनकी फाइनेंशियल प्रैक्टिसेज की जाँच शुरू कर दी। जिलिंगो हजारों छोटे मर्चेंट्स के ट्रांजेक्शंस और रेवेन्यू के लिए जिम्मेदार है और कंपनी ने 2019 से अपने फाइनेंशियल रिटर्न फाइल नहीं किए हैं।

कैसे आया आइडिया

देहरादून में जन्मी अंकिती, मुंबई में पली-बढ़ीं और सेंट जेवियर्स (मुंबई) में गणित और अर्थशास्त्र की पढ़ाई की है। उनको साल 2018 में फोर्ब्स एशिया की 30 अंडर 30 सूची और फॉर्च्यून के 40 अंडर 40 लिस्ट में शामिल किया गया था। एक बार अंकिती छुट्टियों में बैंकॉक घूमने गई थी। वहाँ उन्होंने लोगों में फैशन के लिए प्यार देखा। बोस को शुरुआती प्रेरणा बैंकॉक के लोकप्रिय चतुचक बाजार की यात्रा से मिली, जिसमें पूरे थाईलैंड से सामान बेचने वाले 15,000 से अधिक बूथ हैं। उन्होंने महसूस किया कि विक्रेताओं के पास विस्तार करने के पर्याप्त अवसर नहीं हैं। फिर उन्होंने सोचा कि क्यों न इसके लिए एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म खोला जाए। 2015 में थाईलैंड और कंबोडिया में अपनी शुरुआत करने के बाद कंपनी ने 400 कर्मचारियों के साथ आठ देशों में ऑफिस खोले। कंपनी ने छोटे व्यापारियों को कस्टमर को बेचने में मदद करके शुरुआत की और फिर नए फील्ड में विस्तार किया है। कंपनी के संस्थापकों ने हजारों छोटे विक्रेताओं के साथ काम किया। उन्होंने पाया कि कई के पास टेक्नोलॉजी, पूँजी अर्थव्यवस्थाओं तक पहुँच नहीं है।

अंकिती ने भारत को क्यों नहीं चुना?

अंकिती ने इस कंपनी का स्टार्टअप शुरू करने के लिए भारत को इसलिए नहीं चुना, अपनी रिसर्च में उन्होंने पाया कि भारत में पहले से ही ऑनलाइन मार्केट में Amazon, Flipkart जैसी बड़ी कंपनियाँ बड़े लेवल पर मौजूद थे। लेकिन साउथ ईस्ट एशिया में ऐसा कोई प्लेयर नहीं था। लिहाजा उन्होंने अपनी कंपनी की शुरुआत करने के लिए साउथ ईस्ट एशिया को चुना। इस तरह 2015 में ZILINGO कंपनी की शुरुआत हुई। कंपनी ‘यूनिकॉर्न’ स्टेटस पाने के काफी करीब है।

शरद पवार के खिलाफ ‘साजिश’ रचने के आरोप में पत्रकार गिरफ्तार: महाराष्ट्र राज्य परिवहन के कर्मचारियों ने किया था प्रदर्शन, फेंके थे चप्पल

महाराष्ट्र (Maharashtra) की महाविकास अघाड़ी सरकार (MVA Government) की प्रमुख साझेदार राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) के प्रमुख शरद पवार (Sharad Pawar) के आवास पर राज्य परिवहन के कर्मचारियों के विरोध के सिलसिले में बुधवार (13 अप्रैल) को पुलिस ने एक पत्रकार को गिरफ्तार कर लिया।

पिछले सप्ताह महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (MSRTC) के कर्मचारी पवार के आवास ‘सिल्वर ओक’ के पास विरोध प्रदर्शन किया था। इस दौरान उनके आवास पर कुछ प्रदर्शनकारियों ने पत्थर और चप्पलें भी फेंकी थीं। इस घटना के बाद पुलिस ने कई कर्मचारियों को गिरफ्तार कर लिया था। रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में कुल 115 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं, 109 लोगों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

इस मामले में पुलिस ने यूट्यूब पत्रकार चंद्रकांत सूर्यवंशी को गिरफ्तार किया है। पत्रकार ‘एमजेटी मराठी’ नाम से एक यूट्यूब चैनल चलाता है। मुंबई पुलिस ने उसे पुणे से गिरफ्तार किया है। पत्रकार को पूछताछ के लिए मुंबई शिफ्ट किया जा रहा है। लोक अभियोजक के अनुसार, चंद्रकांत सूर्यवंशी साजिश का हिस्सा था।

क्या है मामला

शरद पवार के घर के सामने प्रदर्शन करने और पत्थर-चप्पल फेंकने के आरोप में (8 अप्रैल 2022) की देर रात 107 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया था, जिनमें 23 महिलाएँ भी हैं। इस मामले में मुंबई के गाँवदेवी पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है। एसटी कर्मचारियों ने महाराष्ट्र सरकार पर वादे पूरे नहीं करने का आरोप लगाते हुए मुंबई में पवार के घर के बाहर विरोध प्रदर्शन किया था। शरद पवार हाय-हाय के नारे भी लगाए थे। यह विरोध प्रदर्शन अभी भी जारी है।

बता दें कि महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (MSRTC) के कर्मचारी नवंबर 2021 से हड़ताल पर हैं। बॉम्बे हाई कोर्ट ने (Bombay High Court) MSRTC कर्मचारियों की हड़ताल (MSRTC Strike) को लेकर 7 अप्रैल को बड़ा फैसला दिया था। कोर्ट ने कर्मचारियों को 22 अप्रैल तक ड्यूटी पर फिर से लौटने का अल्टीमेटम दिया था, लेकिन कोर्ट के अल्टीमेटम के एक दिन बाद ही कर्मचारियों ने शरद पवार के घर के बाहर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

पिता ने कश्मीरी पंडितों के लिए शीश कटा दिया, पर औरंगजेब के सामने नहीं झुके: बेटे ने शुरू किया ‘खालसा’, जानिए कौन थे पहले ‘पंज प्यारे’

सिखों के दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी ने 1699 में बैसाखी के दिन खालसा पंथ की स्थापना की और सिखों को ‘सिंह’ मतलब ‘शेर’ का नाम दिया था। खालसा के यदि शाब्दिक अर्थ की बात करें तो होता है ‘शुद्ध’। यह अरबी शब्द ‘खालिस’ से लिया गया है। खालसा शब्द श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी में संत कबीर की वाणी में केवल एक बार आता है। इसमें लिखा है, “कहू कबीर जब भाये खालसा प्रेम भगत जिह जानी”, जिसका अर्थ है, “कबीर कहते हैं कि वे लोग जो परमात्मा के प्रेम और भक्ति को जानते हैं, वे सबसे शुद्ध हैं।”

मुगल सम्राट औरंगजेब के इस्लामी शरिया शासन के दौरान अपने पिता गुरु तेग बहादुर के सिर काटे जाने के बाद गुरु गोबिंद सिंह ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। गुरु गोबिंद सिंह ने खालसा को एक योद्धा के रूप में स्थापित किया, जिसका कर्तव्य था कि वह किसी भी प्रकार के धार्मिक उत्पीड़न से निर्दोषों की रक्षा करें। खालसा की स्थापना के साथ ही सिख परंपरा में एक नए चरण की शुरुआत हुई। इसने सिखों के अस्थायी नेतृत्व के लिए एक नई संस्था का रूप लिया, जिसने मसंद व्यवस्था की जगह ली। इसके अतिरिक्त, खालसा ने सिख समुदाय के लिए एक राजनीतिक और धार्मिक दृष्टि भी प्रदान की। और उस दिन से, वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतेह सिख धर्म का एक अभिन्न अंग बन गया।

गुरु तेग बहादुर जी का बलिदान

ये वो समय था, जब औरंगजेब का अत्याचार लगातार ही बढ़ता जा रहा था और देश भर के हिन्दू सहित कश्मीरी पंडित आतंकित थे। वाराणसी, उदयपुर और मथुरा सहित हिन्दुओं की श्रद्धा वाले कई क्षेत्रों में औरंगजेब की फ़ौज मंदिरों को ध्वस्त किए जा रही थी। सन 1669 में तो हद ही हो गई जब हिन्दुओं को नदी किनारे मृतकों का अंतिम-संस्कार तक करने से रोक दिया गया। शाही आदेश और जोर-जबरदस्ती, दोनों के जरिए हिन्दुओं पर प्रहार हो रहे थे।

जम्मू-कश्मीर में शेर अफगान नामक आक्रांता कश्मीरी पंडितों का नामोनिशान मिटा देना चाहता था और औरंगजेब को उसका संरक्षण प्राप्त था। ऐसे कठिन समय में कश्मीरी पंडितों का एक प्रतिनिधिमंडल गुरु तेग बहादुर के पास पहुँचा और उन्हें अपनी समस्या बताई। औरंगजेब के अत्याचार और क्रूरता की दास्तान सुनाई तो वो काफी दुःखी हो उठे।

कहते हैं, जब पूरे दरबार में निराशा का माहौल था, तब बालक गोविंद राय को भी ये ठीक नहीं लगा और उन्होंने कई सवाल दाग दिए। वो पूछने लगे कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि जहाँ दिन-रात भजन-कीर्तन और शास्त्रों की बातें होती थीं, वहाँ आज इस तरह नीरसता का माहौल छाया हुआ है। बच्चे की जिद के आगे गुरु तेग बहादुर झुक गए और सारी व्यथा कह डाली। दरबार में कौन लोग आए थे और उनकी व्यथा थी- सब।

उन्होंने ये तक कह दिया कि इनके दुःखों के निवारण के लिए किसी महापुरुष का बलिदान चाहिए। इस पर बालक गोविंद राय ने पूछा इस समय भारतवर्ष में आपसे बढ़ कर विद्वान, सद्गुणों वाला और महान महापुरुष कौन है, इसीलिए क्या आपको ही इस बलिदान के लिए स्वयं को प्रस्तुत नहीं करना चाहिए? एक बालक के मुँह से गुरु नानक की शिक्षाओं और शरणागत की रक्षा के लिए प्राण त्यागने की बातें सुन कर गुरु तेग बहादुर समझ गए कि ये ईश्वर का ही संदेशा है।

गुरु तेग बहादुर जी औरंगजेब से मिलने के लिए एक प्रतिनिधिमंडल के साथ दिल्ली गए, जहाँ उन्होंने औरंगजेब चुनौती दी कि यदि वे गुरु तेग बहादुर जी को इस्लाम में परिवर्तित कर सकते हैं, तो सभी कश्मीरी पंडित भी धर्मांतरित हो जाएँगे। औरंगजेब ने अपने शिष्यों को गुरु तेग बहादुर जी को किसी भी कीमत पर परिवर्तित करने का आदेश दिया।

उन्होंने गुरु तेग बहादुर को धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर करने के लिए हर संभव यातना दिया लेकिन असफल रहे। अंततः औरगजेब के आदेश पर श्री गुरु तेग बहादुर का सर धड़ से अलग कर दिया। तीन अन्य सिखों, भाई मति दास, भाई सती दास, और भाई दयाल दास, जो उनके साथ दिल्ली आए थे, को भी श्री गुरु तेग बहादुर जी की हत्या से पहले औरंगजेब ने मरवा डाला था।

खालसा का गठन

गुरु तेग बहादुर जी की औरंगजेब द्वारा हत्या के बाद, उनके पुत्र श्री गुरु गोबिंद सिंह सिखों के दसवें और अंतिम गुरु बने। खालसा के गठन से कई महीने पहले, गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपने सभी अनुयायियों को 1699 में बैसाखी पर आनंदपुर साहिब आने का निमंत्रण भेजा था, जो 30 मार्च को था। आनंदपुर साहिब में हजारों अनुयायी इस शुभ आयोजन के लिए एकत्रित हुए थे।

विशेष रूप से, गुरु गोबिंद सिंह ने निमंत्रण में खालसा बनाने के अपने इरादे के बारे में कोई सूचना नहीं दी थी, लेकिन एक धार्मिक मण्डली का उल्लेख किया था। बैसाखी से कुछ समय पहले श्री गुरु गोबिंद सिंह ने मसंदों की संस्था को समाप्त कर दिया था। वे मूल रूप से गुरु और अनुयायियों बीच माध्यम की तरह थे। मसंद प्रथा के उन्मूलन के साथ संगत और गुरु के बीच एक सीधा संबंध बन गया।

गुरु ने माँगा प्यारों का शीश

सिख धर्म के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी ने सिखों को वैसाखी के दिन 30 मार्च 1699 को श्री आनंदपुर साहिब में इकट्ठा होने के लिए कहा। गुरु गोबिंद सिंह जी ने एक पहाड़ी (जिसे अब श्री केसगढ़ साहिब कहा जाता है) पर जमा हुए मण्डली को संबोधित किया। उन्होंने सिख परंपरा के अनुसार अपनी तलवार खींची, और फिर इकट्ठा हुए लोगों से एक स्वयंसेवक को आगे आने के लिए कहा, जो अपना सिर बलिदान करने के लिए तैयार हो।

एक आगे आया, जिसे गुरु गोबिंद सिंह एक तंबू के अंदर ले गए। और अंदर ‘खचाक’ की आवाज आई और गुरु बिना स्वयंसेवक के भीड़ में लौट आए, लेकिन तलवार पर लगे खून के साथ। उन्होंने फिर एक और स्वयंसेवक के लिए कहा और बिना किसी के और खून से लथपथ तलवार के साथ चार बार तम्बू से लौटने की उसी प्रक्रिया को दोहराया।

पाँचवाँ स्वयंसेवक जब उनके साथ तंबू में गया, तब गुरु सभी पाँच स्वयंसेवकों के साथ लौट आए, और सभी सुरक्षित। उन्होंने उन्हें पंज प्यारे और सिख परंपरा में पहला खालसा कहा। ये पांच स्वयंसेवक थे: दया राम (भाई दया सिंह जी), धर्म दास (भाई धर्म सिंह जी), हिम्मत राय (भाई हिम्मत सिंह जी), मोहकम चंद (भाई मोहकम सिंह जी), और साहिब चंद (भाई साहिब सिंह जी)।

गुरु गोबिंद सिंह ने फिर एक लोहे के कटोरे में पानी और चीनी मिलाकर उसे दोधारी तलवार से हिलाकर अमृत तैयार किया। इसके बाद उन्होंने पंज प्यारे को आदि ग्रंथ के पाठ के साथ निर्देशित किया, इस प्रकार खालसा की स्थापना ने सिख परंपरा में एक नए चरण की शुरुआत की। इसने खालसा योद्धाओं के लिए एक दीक्षा समारोह (अमृत ​​पहुल , अमृत समारोह) और आचरण के नियम तैयार किए। पहले पाँच खालसा को दीक्षा देने के बाद, गुरु ने पाँचों को खालसा के रूप में दीक्षा देने के लिए कहा। इसने गुरु को छठा खालसा बना दिया और उनका नाम गुरु गोबिंद राय जी से बदलकर गुरु गोबिंद सिंह जी कर दिया गया।

खालसा पंथ

खालसा की रचना सिख धर्म के अनुयायियों को दस गुरुओं के प्रशिक्षण और शिक्षाओं पर आधारित है। गुरु गोबिंद सिंह जी चाहते थे कि हर सिख हर तरह से परिपूर्ण हो, यानी भक्ति और शक्ति या भक्ति और शक्ति का संयोजन। सिख धर्म के मुख्य सिद्धांतों में दान और तेग या तलवार शामिल हैं, जो खालसा की में अंतर्निहित थे।

उन्होंने प्रत्येक सिख में त्याग, स्वच्छता, ईमानदारी, दान और साहस जैसे पाँच गुण पैदा किए। उन्होंने सिख कोड ऑफ डिसिप्लिन भी निर्धारित किया। साथ ही खालसा तलवार का प्रयोग केवल आपात स्थिति में ही कर सकता है, अर्थात तलवार तब तक नहीं खींची जा सकती जब तक कि सभी शांतिपूर्ण तरीके विफल नहीं हो जाते। इसका उपयोग केवल आत्मरक्षा और उत्पीड़ितों की रक्षा के लिए किया जा सकता है।

उन्होंने खालसा को पंज कक्का- केश, कंघा, कच्छ, कारा और कृपाण धारण करने के लिए कहा। सिख धर्म की मूल बातों के अनुसार, एक सच्चा खालसा भेदभाव नहीं करता है या किसी को नीच आत्मा के रूप में नहीं देखता है। वह उत्पीड़ितों की रक्षा में उठ खड़ा होगा और जरूरतमंदों की मदद के लिए दान करेगा।

जयपुर एयरपोर्ट पर पकड़ा गया बिजनौर का मोहम्मद फैजी, ‘मुस्लिम फंड’ के नाम पर करोड़ों रुपए लूट भाग गया था सऊदी

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के बिजनौर (Bijnor) जिले के नगीना में ‘अल फैज़ान मुस्लिम फंड लिमिटेड’ नाम से चिटफंड कम्पनी के जरिए लोगों से करोड़ों रुपए लूट कर सऊदी भागने वाले इसके मुख्य संचालक मोहम्मद फैजी को गिरफ्तार कर लिया गया है। वह सऊदी अरब से जयपुर एयरपोर्ट पर लैंड हुआ, उसी दौरान से उसे पकड़ लिया गया। यूपी पुलिस ने फैजी के नाम पर पहले से ही लुक आउट सर्कुलर जारी कर रखा था।

इस मामले को लेकर नगीना के सीओ सुमित शुक्ला ने कहा, “9 जनवरी को ‘अल फैज़ान मुस्लिम फंड लिमिटेड’ नाम के ट्रस्ट से काफी लोगों का पैसा लेकर भागने की सूचना मिली थी। उसमें इसका मुख्य आरोपित मोहम्मद फैजी सऊदी अरब से वापस लौटा और जयपुर एयरपोर्ट पर पकड़ा गया, क्योंकि हम लोगों ने पहले से ही लुक आउट सर्कुलर जारी कर रखा था। इसके द्वारा बड़े पैमाने पर घोटाला किया गया है। उसके खिलाफ विधिक कार्रवाई की जा रही है। वर्तमान में इसमें कुल चार लोग हैं। इसमें से एक इसकी बहन है और दो अन्य लोग हैं। इनके एक साथी को पहले ही जेल भेजा जा चुका है। बाकियों को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।”

क्या है मामला

नगीना के मोहल्ला लाल सराय का रहने वाला आरोपित मोहम्मद फैजी बीते 5 साल से मुस्लिम फंड चला रहा था। वह लोगों को शरिया कानून के हिसाब से पैसे जमा करने के लिए कहता था। शरिया कानून के मुताबिक ब्याज हराम है। इसी के चलते कई मुस्लिमों ने अपने पैसे फ़ैज़ी के पास जमा कर रखे थे।

कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि कि फ़ैज़ी ने नगीना स्थित अपने घर को बेच दिया था और विदेश भाग गया था। 15 जनवरी 2022 को फ़ैज़ी के ऑफिस की तलाशी के दौरान पुलिस को बैंक ऑफ़ बड़ौदा के बैनर बरामद हुए थे। ऑफिस के बाहर बैंक ऑफ़ बड़ौदा का कस्टमर केयर बोर्ड भी मिला था। उसके खिलाफ 170 लोगों ने शिकायत दर्ज करवाई है।

क्या है मुस्लिम फंड

इस्लामी कानूनों (शरीयत) में जमा-पूँजी पर ब्याज कमाना गैर-इस्लामी करार दिया जाता है। इसी के चलते कई मुस्लिम परिवार बैंकों में पैसा जमा नहीं करते। इन लोगों को ऐसे संस्थानों की तलाश रहती है, जो ब्याज फ्री हों। इसी सुविधा को दिलाने के नाम पर कुछ निजी संस्थाएँ सक्रिय हैं। इन्हें ही मुस्लिम फंड बैंक कहा जाता है।

बिजनौर जिले में मुस्लिम आबादी 43% से भी ज्यादा है। इसके साथ ही आसपास के जिलों में भी मुस्लिमों की अच्छी-खासी आबादी है। आरोप है कि आरोपित मोहम्मद फ़ैज़ी ने अल फैज़ान मुस्लिम फंड लिमिटेड नाम की संस्था ने कई लोगों को विश्वास में लिया और उनके पैसे जमा करवाए।

कॉमेडी, कश्मीर और दिद्दा: ‘अस्वुन कोशुर’ से भाषा और संस्कृति को जीवन दे रहीं मेनका हंडू

साहित्यकार भारतेंदु हरिश्चंद्र ने कहा है, “निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल, बिन निज भाषा ज्ञान के, मिटन न हिय के सूल।” अर्थात- मातृभाषा की उन्नति बिना किसी भी समाज की तरक्की संभव नहीं है एवं अपनी भाषा के ज्ञान के बिना मन की पीड़ा को दूर करना भी मुश्किल है।

ऐसा ही मानना है कश्मीरी पंडित मेनका हंडू (Meanka Handu) का। अगर हम आज के परिदृश्य को देखें तो ऐसा लगता है कि जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी का विस्तार हो रहा है, वैसे-वैसे हम ग्लोबल तो हो रहे हैं, लेकिन अपनी भाषा को नजरअंदाज करते जा रहे हैं और वह हमसे दूर छूटती जा रही है। 

हालाँकि, सच्चाई तो यह है कि चाहे कोई कितना भी अपनी मातृभाषा में बातचीत को जीवित रखने के महत्व को नजरअंदाज कर लें, लेकिन उससे आँखें नहीं मूँद सकता, क्योंकि भाषा केवल शब्दों या वाक्यों के तार से कहीं अधिक यह संस्कृति और इतिहास, परंपराओं और मूल्यों की पीढ़ीगत भंडार है। 

मेनका हंडू एक ऐसी ही चैंपियन हैं, जो अपनी भाषा को बचाने में अहम भूमिका निभा रही हैं। कश्मीरी भाषाओं की अनदेखी मेनका को कचोटती है और वह कश्मीरियों को इसके महत्व का अहसास कराना चाहती हैं। 7 साल की उम्र में कश्मीर से विस्थापित होने वाली मेनका के जेहन में आज भी कश्मीर रचा-बसा है और इसे वह अपनी जबान में बेहद ही मजाकिया तरीके से अपने यूट्यूब चैनल ‘Asvun Koshur’ पर पेश करती हैं। ‘Asvun Koshur’ का हिंदी में मतलब होता है- हँसता हुआ कश्मीरी (‘Smiling Kashmiri’)। इस चैनल के जरिए वह लोगों के सामने कश्मीर का हँसता हुआ चेहरा पेश करती हैं। 

अपने इस मिशन के बारे में ऑपइंडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, “मैंने यह यूट्यूब चैनल कश्मीरी भाषा को संरक्षित करने के लिए शुरू किया है। कश्मीरी लोग इस भाषा में बात नहीं करते हैं। बच्चों को स्कूलों में या घर पर भी कश्मीरी में बोलने के लिए प्रोत्साहित नहीं किया जाता है, जिसकी वजह से यह लगभग लुप्त सा होता जा रहा है। लोग ज्यादातर अंग्रेजी या उर्दू में बात करते हैं। इसका मुझे बहुत दुख होता है, क्योंकि मैं एक संस्कृति से जुड़े हुए परिवार से आती हूँ। हम लोग कश्मीरी संस्कृति, पर्व-त्योहार को मनाते हैं। घर पर अपने परिवार के साथ कश्मीरी में बात करते हैं। जब हम देखते हैं कि आजकल की पीढ़ी कश्मीरी में बात नहीं करती हैं तो काफी बुरा लगता है। अगर आप किसी को औपचारिक तौर पर जबान (भाषा) पढ़ाएँगे तो वह टीचर बन जाता है और यह काफी बोरिंग भी हो जाता है। इसलिए मैं ह्यूमर के जरिए लोगों तक अपनी बात पहुँचाती हूँ। इसमें मैं सामाजिक मुद्दों, त्रुटियों आदि को कटाक्ष के जरिए बताती हूँ। इससे फायदा यह होता है कि लोग हँस भी लेते हैं और सीख कर भी जाते हैं।”

अपने यूट्यूब चैनल पर मिलने वाली प्रतिक्रिया पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि अप्रैल 2017 में उन्होंने यह चैनल शुरू किया और उन्हें काफी पॉजिटिव रिसपॉन्स मिल रहा है। लोग इससे खुद को जुड़ा हुआ महसूस करते हैं। वह कहती हैं, “मुझे अपनी कश्मीरी संस्कृति से प्यार है। मैं मानती हूँ कि भाषा किसी भी संस्कृति की रीढ़ की हड्डी होती है और इसे संरक्षित करने की जरूरत है।” यूट्यूब चैनल में वह ‘दीदा’ (Dida) कैरेक्टर प्ले करती हैं। इस बारे में पूछे जाने पर वह कहती हैं, “दीदा का मतलब होता है- दीदी, यानी कि घर की बड़ी बेटी। मैं भी अपने घर की बड़ी बेटी हूँ तो सभी लोग मुझे दीदा कहते हैं। यह एक तरह से मेरा निकनेम है और इससे जुड़ाव महसूस करते हैं। उन्हें लगता है कि उनका कोई अपना उनसे उनकी जबान में बात कर रहा है।” 

सामाजिक मुद्दों पर अपनी राय रखते हुए मेनका ने एक उदाहरण दिया, “कहा जाता है कि लड़कों को सिर्फ अपने से छोटी लड़की से शादी करनी चाहिए, बड़ी लड़की से नहीं करनी चाहिए। यह एक मुद्दा है। मैंने इस वजह से बहुत सारे दिल टूटते हुए देखे हैं। रिश्ते सिर्फ इसलिए टूट जाते हैं, क्योंकि लड़की बड़ी थी और लड़के के माता-पिता उनकी शादी के लिए राजी नहीं थे। ऐसा किसी ऋषि-मुनि ने नहीं कहा है और न ही ऐसा किसी ग्रंथ में लिखा है। मैं जो करती हूँ उससे लोग जुड़ा महसूस करते हैं, क्योंकि मैं बेजुबानों की आवाज बनने की कोशिश करती हूँ। इसी तरह, मैंने नशीली दवाओं के दुरुपयोग, बॉडी शेमिंग, बच्चों पर माता-पिता का दबाव, स्वास्थ्य और स्वच्छता आदि पर वीडियो बनाए हैं।”

आगे उन्होंने फरवरी 2021 में बच्चों को कश्मीरी भाषा और संस्कृति से जोड़े जाने को लेकर किए गए प्रोग्राम के बारे में बताया। इस प्रोग्राम का नाम था- Project Asvun Koshur- Zaan (इसमें Asvun Koshur टूट्यूब चैनल का नाम है और Zaan का मतलब एक दूसरे को जानना)। मेनका ने इस पर सात एपिसोड बनाए थे। उन्होंने कहा कि Project Asvun Koshur- Zaan कश्मीरी पंडित, मुस्लिम और सिख समुदायों के बच्चों को एक साथ लाने का एक प्रयास था। इसमें बच्चों ने हमारी साझा संस्कृति को समझने और सकारात्मकता फैलाने के इरादे से बातचीत किया। इसमें उन्होंने कश्मीरी भाषा सीखने में उनकी मदद की और कवियों, कलाकारों आदि के बारे में बताया।

इस पर उन्हें तीनों समुदायों (हिंदू, मुस्लिम और सिख) की तरफ से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली। इसके साथ ही वह लोगों से अपील करती हैं कि कलाकारों का शोषण न किया जाए। कलाकार की कद्र करनी चाहिए। उन्हें इस तरह से फ्री में शो में बुलाकर उनकी कला का अपमान नहीं करना चाहिए। मेनका की एक खास बात यह है कि वह प्रोग्राम के लिए स्क्रिप्ट नहीं लिखती हैं, सिर्फ आउटलाइन बनाती हैं। 

बता दें कि मेनका एक कलाकार होने के साथ-साथ बॉम्बे यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर इंजीनियर हैं। वह पर्सनालिटी डेवलपमेंट ट्रेनिंग, प्रोडक्ट ट्रेनिंग और आईटी से संबंधित ट्रेनिंग करवाती हैं। इसके अलावा वह लिखती भी हैं। वह मूल रूप से भाषा को संरक्षित करने के लिए करती हैं। 

‘अपनी शादी छिपा 21 साल की लड़की (अंजलि) को पटा रहा है’: LockUpp में मुनव्वर फारूकी पर फूटा पूनम पांडे का गुस्सा

ऑल्ट बालाजी पर प्रसारित होने वाला लॉक अप शो कुछ विवादित प्रतिभागियों के कारण इन दिनों काफी चर्चा में है। हाल में वहाँ मुनव्वर फारूकी की शादी को लेकर खुलासा हुआ था जो कि बेहद चौंकाने वाला था। अब इसी खुलासे के बाद पूनम पांडे की एक क्लिप शो से वायरल है। इस क्लिप में वह दूसरी कंटेस्टेंट सायशा से मुनव्वर और अंजलि अरोड़ा के रिश्ते पर बात करती नजर आईं।

शो के प्रोमो में दिख रहा है कि पूनम पांडे अपना गुस्सा तो अंजलि अरोड़ा को लेकर हैं, लेकिन नाराजगी वह मुनव्वर पर भी दिखाती हैं। वह कहती हैं, “दो सालों में उसने चार रील बनाई और कोविड महामारी के समय में फेमस हो गई। मुझे इन सबसे कोई मतलब नहीं है। मैंने इससे दिल से दोस्ती की । भगवान करे ऐसा दोस्त तो मेरे दुश्मनों को भी न मिलें। उसका (अंजलि) का ब्वॉयफ्रेंड हैं और फिर भी वो ये सब करती है। मैं इतनी गिरी नहीं हूँ कि अपने दोस्तों का इस्तेमाल खुद को बचाने के लिए करूँ।”

पूनम पांडे ने आगे मुनव्वर फारूकी को लेकर कहा, “और ये…मुनव्वर। उसको बचाता रहता है। अपनी शादी छुपा के 21 साल की लड़की को पटा रहा है। ये फैक्ट है। ये सच है इसने तेरे को (सायशा को) अटका के रखा है।” आगे पूनम पांडे अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहती हैं कि उन्होंने एक पहले दिन से इनके लिए खेला। लेकिन इन्होंने क्या किया? वह बोलती हैं- “कोई मेरे पीठ पर खंजर मारेगा तो मैं पीठ से निकालकर उसके सीने पर मारूँगी।”

बता दें कि 9 अप्रैल को कंगना के रिएलिटी शो में कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी को लेकर खुलासा हुआ था कि उनकी शादी हो चुकी है और उनका एक बेटा भी है। उन्होंने सायशा शिंदे से बात करते हुए स्वीकारा था, “मुझ नहीं लगता कि जो चीज का अब मतलब ही नहीं है वो चीज बाहर आए। पहले से ही बहुत सारी परेशानी है। मामला कोर्ट में है। मैं नहीं चाहता कि ये चीजें बाहर आएँ। थोड़ा सा बात करूँगा तो सबको पूरा जाना होगा। मैं चीजों को बेहतर बनाने की कोशिश कर रहा था। ये सब चीजें मुझे 2 साल से खा रही हैं।”