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‘शराब के नशे में माता के जागरण में पहुँचा News18 का पत्रकार, कहे अपशब्द’: श्रद्धालुओं ने बताया, पत्रकार का आरोप – मुझे पीटा, पुलिस ने नकारा

नोएडा एक्सटेंशन के इको विलेज में रहने वाले ‘नेटवर्क 18’ के एक पत्रकार पर शराब पीकर माता के जगराता में विघ्न डालने का आरोप लगा है। ये घटना रविवार (10 अप्रैल, 2022) रात की है। उक्त पत्रकार सौरभ शर्मा का कहना है कि वो देर रात सोसाइटी में चल रहे जगराते में लाउडस्पीकर को बंद कराने गए थे। आरोप है कि इस दौरान पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में भीड़ ने उन पर हमला कर दिया। हालाँकि, जगराता पक्ष की बात सुनने के बाद कुछ और ही कहानी सामने आई है।

‘बोलता हिंदुस्तान’ के पत्रकार ने ‘News 18’ के सौरभ शर्मा का पक्ष रखते हुए कहा, “नोएडा एक्सटेंशन के इको विलेज में ‘नेटवर्क 18 के एक सीनियर पत्रकार पर लाउडस्पीकर बजाने वाले जगरातियों ने हमला किया है। उनकी पत्नी को घर में घुसकर कपड़े फाड़ देने की धमकी दी है। साल का उनका बच्चा दहशत में है। पुलिस तमाशा देखती रही। गुंडों ने थाने में पुलिस वालों के सामने धमकाया।” बता दें कि थाना बिसरख की पुलिस इस मामले की जाँच कर रही है।

बता दें कि सौरभ शर्मा सोसायटी ऑक्सफोर्ड स्‍क्वायर सुपर टेक इकोविलेज 3 में रहते हैं। पुनीत के ट्वीट पर गौतम बुद्ध नगर की पुलिस ने इस मामले पर प्रतिक्रिया दी है। थाने ने बताया कि इकोविलेज के निवासियों ने जगराता का आयोजन किया गया। भगवती के जागरण के दौरान ही पीआरवी को तेज़ आवाज़ में भजन और गाने चलाए जाने की शिकायत की गई। पुलिस ने मौके पर पहुँच कर आवाज़ को धीमा भी करवाया। कुछ लोगों का ये भी कहना है कि उक्त पत्रकार का घर जगराता स्थल से काफी दूर है, फिर भी वो वहाँ पहुँच गया।

पत्रकार का कहना है कि भगवती जागरण के आयोजकों ने उनके और उनके परिवार के साथ अभद्रता की है। इस मामले में जागरण के आयोजकों के साथ-साथ वहाँ उपस्थिति लोगों ने भी पुलिस के समक्ष बयान दिया है। उनकी मानें तो शराब के नशे में ‘न्यूज़ 18’ के पत्रकार ने जागरण में श्रद्धालुओं को अपशब्द कहे और उनके साथ अभद्रता भी की। दोनों पक्षों द्वारा दिए गए प्रार्थना-पत्रों पर पुलिस जाँच कर रही है। पुलिस ने पूछताछ के बाद कार्रवाई की बात कही है।

ऑपइंडिया ने इस मामले में जब बिसरख थाना क्षेत्र के इंस्पेक्टर उमेश बहादुर से बात की तो उन्होंने बताया कि FIR दोनों तरफ से दर्ज करा दी गई है और पुलिस जाँच के बाद कार्रवाई करेगी। उन्होंने मारपीट की घटना को नकार दिया और कहा कि अब तक की जाँच में सिर्फ जुबानी बहस की बात ही सामने आई है। वहीं पुलिस में हमारे सूत्रों का भी कहना है कि मारपीट का आरोप गलत है। हमें जी सूचना मिली है, उसके अनुसार, पुलिस ने दोनों पक्षों में समझौता की बात कही थी, क्योंकि मारपीट नहीं हुई। लेकिन, तथाकथित कम्युनिस्ट पत्रकार लगातार अपने रसूख की धमकी देता रहा।

‘पानी तक नहीं था, अपना ही पेशाब पीने के लिए बोतल में भर रहे थे’: झारखंड रोपवे हादसे के पीड़ितों ने सुनाई दास्ताँ

झारखंड के देवघर स्थित त्रिकुट पर्वत पर हुए रोपवे हादसे के बाद बचाए गए लोग अब अपने साथ हुई आपबीती बयाँ कर रहे हैं। इसी क्रम में रोप वे की परिवार के 6 लोगों के साथ फँसे पीड़ित विनय कुमार दास ने बताया कि जब हम लोग ट्रॉली में फँसे हुए थे, तो हमने अपने पेशाब को बोतल में इकट्ठा किया था, ताकि अगर कुछ और समय तक हमें पानी न मिले तो उसे पी सकें।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, मधुबनी जिले के रहने वाले एक शख्स ने बताया कि रोपवे ट्रॉली में फँसे थे तो ऐसा लगा कि अब मैं नहीं बचूँगा, लेकिन बचाव दल ने में बचा लिया। एक अन्य ट्रॉली में फँसी लड़की ने अपने भयावह अनुभवों को साझा करते हुए कहा, ”ट्रॉली चलती तो डरती थी, वरना डर ​​नहीं होता, हम सब रात भर भूखे रहे, मंगलवार सुबह 11.30 बजे तक कुछ न कुछ खाया और पानी पिया।” लड़की ने आगे कहा, “हमें जब नीचे उतारा जा रहा था तो अच्छा लगा, लेकिन जब रस्सी बीच में रुकी तो लगा कि हम गिर जाएँगे।”

रेस्क्यू किए गए एक अन्य पर्यटक शुभम टिबड़ेवाल ने कहा, “जब ट्रॉली फँस गई थी तो तेज हवा और कुहासे के कारण बहुत डर लग रहा था। हम अपने परिवार के साथ बाबाधाम पूजा करने के लिए आए थे। ये पूजा का ही फल था कि भगवान ने आज इतनी बड़ी दुर्घटना होने के बाद भी पूरे परिवार को बचा लिया। आज के बाद रोपवे में कभी नहीं चढ़ेंगे।”

क्या हुआ था

गौरतलब है कि रविवार (10 अप्रैल 2022) को रामनवमी होने के कारण बड़ी संख्या में लोग त्रिकुट पहाड़ पर पहुँचे थे। पहाड़ पर बने मंदिर की तरफ एक साथ 26 ट्रॉलियाँ रवाना की गई थीं, जिससे रोपवे की तारों पर अचानक लोड बढ़ा और रोलर टूट गया। तीन ट्रॉलियाँ पहाड़ से टकरा गईं, वहीं दो नीचे गिर गईं। इनमें सवार 12 लोग जख्मी हो गए और दो लोगों की मौत हो गई। हालाँकि, मंगलवार 45 घंटे के ऑपरेशन के बाद 48 में से 46 लोगों को बचा लिया गया।

‘कर देंगे तड़ी पार, बुलाऊँ क्या अली को…’: मंदिर के बाहर तमंचे और हरे झंडे के साथ नजर आई मुस्लिम भीड़, खरगोन का पुराना वीडियो वायरल

मध्य प्रदेश के खरगोन में रामनवमी के मौके पर निकली शोभायात्रा पर रविवार (10 अप्रैल 2022) को जमकर पथराव किया गया। बताया गया कि मस्जिद के बाहर डीजे को लेकर मुस्लिमों ने आपत्ति जताई थी वहीं राम भक्तों पर पथराव के साथ 30 से ज्यादा दुकानों और मकानों में आग लगा दी गई और मंदिरों में भी तोड़फोड़ की गई थी। वहीं कई पुराने वीडियो वायरल हो रहे हैं जिसमें मुस्लिम भीड़ इस्लामी गाने पर कट्टा और हथियार लहराते हुए मंदिर के बाहर डांस करती नजर आ रही है।

स्वराज की पत्रकार स्वाति गोयल शर्मा ने एक पुराना वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा है, “ये है खरगोन, जहाँ एक मस्जिद के बाहर संगीत बजाने पर रामनवमी के जुलूस पर पथराव किया गया है। जबकि यह ठीक एक मंदिर के सामने हो रहा है। हाथ में पिस्तौल लिए भीड़ को देखिए।”

उन्होंने अपने दूसरे ट्वीट में वीडियो को संभवतः 2018 का बताते हुए लिखा है, “मध्य प्रदेश के खरगोन में एक मंदिर के पास से हरे झंडे और डीजे के साथ जुलूस, जहाँ रामनवमी के जुलूस पर पत्थरों से हमला किया गया था।” उन्होंने अपने उसी ट्वीट में गाबे के बोल भी शेयर किए हैं जो कि भड़काऊ हैं।

इस्लामी गाने के बोल है-

कर देंगे तड़ी पार
बुलाऊँ क्या अली को
एक बार में मिट जाएगा हर बार का झगड़ा
बुलाऊँ क्या अली को

वहीं स्वाति गोयल शर्मा ने ओवैसी को टैग करते हुए एक और वीडियो शेयर किया है जिसमें मुस्लिम भीड़ इस्लामी गाने पर मंदिर के बाहर नाचती-कूदती नजर आ रही है। उत्तराखंड के इस वीडियो में भी गाने के बोल भड़काऊं हैं।

जहाँ खरगोन में इतने भड़काऊ इस्लामी गीत पर मुस्लिम भीड़ खुलेआम हथियार लहराते हुए मंदिर के बाहर डीजे बजाकर उछल रही है जबकि पूरे इलाके में हिन्दुओं द्वारा कोई उपद्रव पैदा नहीं किया गया। वहीं रामनवमी पर हिन्दुओं की शोभायात्रा को बस इसलिए निशाना बनाया गया, पत्थरबाजी की गई, दुकानें जलाई गईं कि शोभायत्रा में डीजे बज रहा था।

हालाँकि दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक रामनवमी शोभायात्रा पर पथराव और खरगोन में हिंसा की घटना अचानक नहीं घटी। यह पूर्व नियोजित हमला था। उपद्रवियों ने पहले से ही छतों पर पत्थर और पेट्रोल बम जमा कर रखे थे। एक बार नहीं, बल्कि दो-दो बार आगजनी की घटना को अंजाम दिया गया। यहाँ तक कि शाम में हुए हमले के बाद शांति-व्यवस्था कायम रखने के लिए कर्फ्यू लगा दिया गया था। इसके बाद रात के लगभग 12 बजे एक बार फिर से हिंसा भड़की और कई घरों को आग के हवाले कर दिया गया। कई घरों में लूटपाट की गई। जिस पर बाद में शिवराज सरकार ने बुलडोजर चलाकर एक्शन भी लिया।

गौरतलब है कि खरगोन में हर साल रामनवमी के मौके पर तालाब क्षेत्र से शोभा यात्रा निकाले जाने की परंपरा रही है। इस साल भी बड़ी तैयारी के साथ दोपहर 3 बजे ये शुरू हुआ। मुख्य झाँकी को दांगी मोहल्ले में ही खड़ा कर रामनवमी की शोभा यात्रा रोकनी पड़ी थी। फायर फाइटर का कांच तोड़ दिया गया था। बिजली ट्रांसफर्मरों को आग के हवाले किया गया। वहीं यह भी बताया जा रहा है कि 7 साल पहले भी जब खरगोन में दंगे हुए थे तो इसी तरह से भारी संख्या में घरों की छतों पर पत्थर मिले थे।

CM नीतीश कुमार से 5-6 फ़ीट की दूरी पर धमाका: एक महीने में दूसरी बार सुरक्षा में चूक, मुक्का मारने की भी हुई थी कोशिश

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सुरक्षा में एक बार फिर से बड़ी चूक हुई है। नालंदा में मंगलवार (12 अप्रैल 2022) को सीएम की जन-संवाद के दौरान एक शख्स ने विस्फोट कर दिया, जिससे वहाँ अफरातफरी मच गई। यह धमाका सीएम से केवल 5-6 फीट की दूरी पर हुआ। अच्छी बात यह थी कि ये एक पटाखा था। जिससे कोई नुकसान नहीं हुआ। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, जनसंवाद कार्यक्रम के दौरान ये धमाका हुआ। पहले तो लगा कि फायरिंग की गई है, लेकिन जल्द ही ये पटाखा निकला। इस मामले में इस्लामपुर थाना क्षेत्र के सत्यारगंज के रहने वाले शुभम आदित्य को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। उसके पास से पटाखा और माचिस मिली है। शुभम का कहना है कि जब सीएम लोगों से मिलकर उनके आवेदन ले रहे थे तो उसने राष्ट्रीय मुद्दों की तरफ उनका ध्यान खींचने की कोशिश की, लेकिन जब उन्होंने उस पर ध्यान ही नहीं दिया तो उसने पटाखे फोड़ दिए।

तीन स्तरीय सुरक्षा निकली खोखली

मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को देखते हुए तीन स्तर का सुरक्षा घेरा बनाया गया था। उनके कार्यक्रम से पहले खोजी कुत्ते, बम डिस्पोजल स्क्वॉड और स्पेशल ब्रान्च के अधिकारी तक जगह का निरीक्षण करते हैं। हालाँकि, इन सब के बावजूद एक व्यक्ति पटाखे और माचिस के साथ सीएम के पास तक पहुँच गया, जो कि सुरक्षा के लिहाज से चिंताजनक है।

पहले भी हो चुका है हमला

बिहार के सीएम नीतीश कुमार की सुरक्षा में एक महीने के अंदर ये दूसरी बार बड़ी चूक हुई है। इससे पहले हाल ही में 27 मार्च, 2022 को सीएम नीतीश कुमार बख्तियारपुर से जुड़े गाँवों में भ्रमण के लिए निकले थे। उसी दौरान एक युवक ने उन्हें मुक्का मारा था। हालाँकि, वो बच जाते हैं और पुलिस ने उसे भी पकड़ लिया था।

गुजरात में इस्लामी हिंसा के बाद हिन्दुओं का पलायन, पेट्रोल बम से हुआ था हमला: कई ने मंदिरों में ली शरण, खाना-पानी नसीब नहीं

गुजरात के साबरकाँठा जिले को हिम्मतनगर के वंजारावास इलाका सांप्रदायिक हिंसा की आग में झुलस रहा है। इस इलाके की मुस्लिम बहुल आबादी से जान का खतरा होने के कारण अब यहाँ से हिंदू समुदाय पलायन करने लगा है। लोग तेजी से अपने घरों को खाली करने लगे हैं। यह सब 10 अप्रैल, 2022 को रामनवमी के मौके पर हिंदुओं के जुलूस पर मुस्लिमों के हमले और पत्थरबाजी के बाद हो रहा है।

गुजरात का वंजारावास इलाका मुस्लिम बहुल क्षेत्र है और हिंदू यहाँ पर अल्पसंख्यक हैं। ये सभी गरीब और अनुसूचित जाति से संबद्ध हैं। रामनवमी की पूर्व संध्या पर यहाँ पर कट्टरपंथी मुस्लिमों के हमले और पत्थरबाजी में 70 से 80 हिदुओं के घरों को निशाना बनाया गया। वहीं पड़ोसी चनगर के रहने वाले मुस्लिमों ने बड़ी संख्या में यहाँ दो घंटे तक पथराव किया, जिसके के कारण अब स्थानीय हिंदू भयभीत है। एक स्थानीय व्यक्ति के मुताबिक, मुस्लिमों ने उनके घर पर भी पेट्रोल बम से हमला किया था, स्टील की छत होने के कारण वो लोग बच गए। यहाँ के करीब 200 हिंदू इलाके में फैले तनाव के कारण डरे हुए हैं।

एक स्थानीय व्यक्ति के मुताबिक, इलाके में इस हिंसा के बाद वो लोग डर और खौफ के साए में जी रहे हैं, जो इस जगह को खाली तो करना चाहते हैं, लेकिन उनके जाने के लिए कोई जगह नहीं है। कुछ लोग तो स्थानीय मंदिरों में शरण लिए हैं। वो बिन पानी और खाने के रहने को मजबूर हैं।

यहीं के रहने वाले एक औऱ स्थानीय निवासी ने अपना दर्द बयाँ करते हुए कहा, “हम लोग केवल 60-70 परिवार हैं, जबकि वे (मुस्लिम) करीब 2000 परिवार हैं। जब भी वो लोग हमले करते हैं तो न तो हम अपनी रक्षा कर पाते हैं औऱ न ही उनकी बराबरी कर पाते हैं। इसलिए हम जा रहे हैं।” कुछ लोगों का तो ये भी कहना था कि मुस्लिमों ने पुलिस की टीम पर भी पथराव किया था।”

एक व्यक्ति ने तो पुलिसिया कार्रवाई पर गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कहा कि हिंदुओं को सुरक्षा देने की बजाए पुलिस अधिकारी गलत तरीके से उन्हें ही हिरासत में ले रहे हैं।

एक अन्य स्थानीय निवासी ने जाँच में गड़बड़ी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हिंदुओं को सुरक्षा देने के बजाय पुलिस अधिकारी उनकी अन्यायपूर्ण हिरासत में ले रहे हैं। वहीं एक पीड़िता महिला का कहना है कि 11 अप्रैल 2022 को हिंदुओं के इलाके में पत्थरबाजी के बीच उनके घर और दुकान से पंखे और गैस सिलिंडर चोरी कर लिए गए। घटना के बाद पुलिस ने एक्शन लेते हुए 4 लोगों को पकड़ा भी। लोगों का तो ये भी आरोप है कि शाम औऱ रात को साम्प्रदायिक हिंसा के दौरान उन्मादी भीड़ ने उन पर पेट्रोल बम से हमले किए।

क्या है मामला

गौरतलब है कि 10 अप्रैल 2022 रामनवमी का त्योहार था। उस देशभर में हिंदुओं ने जुलूस निकाले। हालाँकि, इस दौरान कई जगहों पर इस्लामिक कट्टरपंथ का सामना भी करना पड़ा। मुस्लिमों ने जुलूसों पर हमले किए। ऐसा ही हिम्मतनगर में भी हुआ था। रिपोर्ट्स की मानें तो इस घटना में कुछ गाड़ियों में तोड़फोड़ भी की गई। ये हमले जुलूस के मुस्लिम बहुल छपरिया इलाके में पहुँचने पर शुरू हुए। पथराव की इन घटनाओं में कई लोग घायल हुए हैं।

‘IPL छोड़ो, देश के साथ खड़े हो जाओ’: श्रीलंका को वर्ल्ड चैंपियन बनाने वाले कप्तान ने कहा- सरकार के खिलाफ बोलने से डरते हैं क्रिकेटर

श्रीलंका की गिरती अर्थव्यवस्था और बढ़ती महंगाई ने वहाँ की जनता को सड़कों पर उतरकर सरकार के विरोध में प्रदर्शन करने को मजबूर कर दिया है। लोगों की माँग है कि राष्ट्रपति गोटाहया राजपक्षे अपना इस्तीफा दें और अपने घर जाएँ। नागरिकों में बिजली, पानी, खाना आदि बुनियादी जरूरतें न मिल पाने की वजह से काफी गुस्सा है। इसी क्रम में श्रीलंका के पूर्व क्रिकेटर व हाल में मंत्री पद से इस्तीफा देने वाले अर्जुना राणातुंगा ने भी आवाज उठाई। हालाँकि, वह प्रत्यक्ष रूप से इस प्रदर्शन का हिस्सा नहीं बने लेकिन उन्होंने मंगलवार को अपने देश के क्रिकेटरों को संदेश दिया कि वो लोग इंडियन प्रीमियर लीग खेलना छोड़ें और आकर देश के साथ खड़े हों, इस प्रदर्शन का हिस्सा बनें।

IPL छोड़ो, देश के साथ खड़े हो: अर्जुना राणातुंगा

समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए अर्जुना राणातुंगा ने कहा, “मुझे सच में नहीं पता लेकिन कुछ क्रिकेटर हैं जो शान से आईपीएल खेल रहे हैं और देश में बारे में एक शब्द नहीं कह रहे। दुर्भाग्य से ये लोग सरकार के विरुद्ध बोलने से डरते हैं। ये क्रिकेटर भी मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले क्रिकेट बोर्ड के लिए काम करते हैं और अपनी जॉब बचाना चाहते हैं। लेकिन अब इन्हें कदम उठाना होगा क्योंकि कई युवा क्रिकेटर आगे आए हैं और प्रदर्शन को समर्थन दिया है।”

उन्होंने कहा, “जब कुछ गलत होता है तो आपमें इतना दम होना चाहिए कि आप सामने आकर बोलें वो भी बिन अपने काम के बारे में सोचें। लोग कहते हैं कि आखिर मैं प्रदर्शन में क्यों नहीं हूँ। ये सिर्फ इसलिए क्योंकि मैं 19 साल से राजनीति में हूँ और ये कोई राजनीति संबंधी मसला नहीं है। अब तक कोई भी पॉलिटिकल पार्टी या राजनेता इस प्रदर्शन में नहीं गया। यही इस देश के लोगों की सबसे बड़ी ताकत है।”

आईपीएल खेलने वाले क्रिकटरों के लिए उन्होंने कहा, “मुझे मालूम है कि आपको पता होगा कि कौन इस समय आईपीएल खेल रहा है। मैं किसी का नाम नहीं लेना चाहता हूँ। बस मैं चाहता हूँ वो अपना काम एक हफ्ते के लिए छोड़ दें और प्रदर्शन के समर्थन में आएँ।”

PM मोदी की तारीफ

इससे पहले 1996 CSX BF अर्जुना राणातुंगा ने अपने देश के मौजूद हालात को लेकर पीएम मोदी की तारीफ की थी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जाफना इंटरनेशनल एयरपोर्ट को शुरू करने में हमारी मदद की थी। भारत का फोकस सिर्फ पैसे देने पर नहीं, बल्कि हमारी जरूरतों को समझने पर भी है। इसी वजह से भारत हमें पेट्रोल-दवाई जैसी चीजों की मदद पहुँचा रहा है, जिसकी कमी हमें आगे आने वाले समय में हो सकती है।

श्रीलंका की हालत

बता दें कि कर्ज में डूबने के कारण श्रीलंका की अर्थव्यवस्था लगातार गिरती जा रही है। खाने से लेकर गैस-सिलेंडर की दिक्कत से इस समय श्रीलंका बुरी तरह जूझ रहा है। जरूरी सामानों के लिए पड़ोसी देशों की जरूरत पड़ रही हैं। लोग सड़कों पर उतर आए हैं। प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से उनका इस्तीफा माँगा जा रहा है। वहीं सरकार लोगों को आश्वासन दे रही है कि वो ये सारी चीजें न करें क्योंकि सरकार स्थिति से निपटने की कोशिश कर रही है।

लालच दे ईसाई बनाने वाले 2 युवक गोरखपुर से गिरफ्तार: अब तक 25 का करा चुके हैं धर्मान्तरण, J&K और पठानकोट से कनेक्शन

गोरखपुर में नौकरी और नकदी का लालच देकर हिंदुओं को ईसाई बनाने की साजिश रचने वाले दो आरोपितों को पकड़ा गया है। पिपराइच पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया जहाँ से उन्हें सोमवार (11 अप्रैल, 2022) को जेल भेज दिया गया है। दोनों आरोपितों में एक जम्मू कश्मीर तो दूसरा पठानकोट का रहने वाला है। मीडिया रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि धर्मान्तरण के काम में लगे हुए दोनों आरोपित पास्टरों (प्रोटेस्टेंट चर्च से जुड़े प्रचारक) को पिछले तीन महीने से यहाँ रह रहे थे और लोगों को ईसाई बनाने के प्रयास कर रहे थे।

गोरखपुर पुलिस ने पिपराइच के निवासी संजय मौर्या के तहरीर पर दोनों के खिलाफ धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम की धाराओं में केस दर्ज किया है। वहीं मुखबिर से सूचना के आधार पर, रविवार (10 अप्रैल, 2022) को पिपराइच पुलिस ने धर्मान्तरण गैंग के दोनों आरोपितों को हिरासत में ले लिया था और पूछताछ में ईसाई धर्मांतरण का मामला सही पाने पर केस दर्ज कर जेल भेज दिया।

रिपोर्ट के अनुसार, ईसाई धर्मान्तरण में लगे, खुद को ईसाई धर्म का पास्टर बता रहे हैं। कहा जा रहा है कि दोनों आरोपित कुछ साल पहले खुद भी हिन्दू थे। वहीं दोनों की पहचान जम्मू-कश्मीर के जानेपुर निवासी केशव सिंह जनवाल पुत्र गोवर्धन सिंह और पठानकोट निवासी ओंकार के रूप में हुई है।

पुलिस के मुताबिक, दोनों युवक जनवरी से चिलबिलवा गाँव निवासी सीमा के घर रह रहे थे। दोनों गाँव के लोगों को मिशनरी स्कूलों में दाखिला दिलाकर निशुल्क अच्छी शिक्षा, रोजगार देने, रुपए देने का लालच देकर हिंदू धर्म से ईसाई धर्म में परिवर्तन कराने का दबाव बना रहे थे। कहा जा रहा है कि जिस सीमा के यहाँ ये दोनों रह रहे थे उन्हें भी इन लोगों ने ईसाई धर्म में परिवर्तित होने के लिए तैयार भी कर लिया था।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एसओ पिपराइच मधुम मिश्रा ने बताया कि पूछताछ में सामने आया है कि दो साल पहले तक दोनों खुद हिंदू थे। लेकिन बाद में ईसाई धर्म से प्रभावित होकर कनर्वट हो गए। अब वे दोनों अपने धर्म का प्रचार प्रसार कर रहे हैं और यूपी के अलग-अलग जिलों में जाकर गरीब लोगों को तरह तरह का लालच देकर ईसाई बनने के लिए उकसा रहे हैं। इसी सिलसिले में जम्मू का केशव सिंह जनवाल 18 जनवरी 2022 को गोरखपुर आया तो पठानकोट का ओंकार 7 अप्रैल 2022 को आया था।

बता दें कि पुलिस ने मीडिया को यह भी बताया कि दोनों ने दो साल में अलग-अलग जगहों के करीब 25 लोगों का ईसाई बना दिया है। गोरखपुर में भी ये इसी प्रयास में थे लेकिन इनके मंसूबे फेल हो गए और दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।

छतों से नहीं देख सकते शोभा यात्रा, घर पर नहीं लगा सकते ध्वज: धर्म पर राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार का पहरा, पत्थरबाजों पर सख्ती कब

राजस्थान के करौली में शनिवार (2 अप्रैल, 2022) को पथराव की घटना के बाद राजस्थान में कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार ने घरों पर धार्मिक झंडे फहराने पर रोक लगा दी है। इसके अलावा जुलूसों और शोभा यात्राओं के दौरान डीजे बजाने को लेकर पाबंदियाँ लगाई हैं। यह पाबंदियाँ दुर्गा अष्टमी, राम नवमी, महावीर जयंती और हनुमान जयंती आदि हिंदू त्योहारों को चिह्नित करने के लिए किए जा रहे हैं। राज्य के कई जिलों में दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 144 लागू कर दी गई है।

मीडिया रिपोर्टों से पता चलता है कि राज्य सरकार ने धार्मिक झंडों के इस्तेमाल या उन्हें निजी स्थानों पर लगाने पर रोक लगा दी है। इस दौरान लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर पाबंदी है। जारी किए गए फरमान के मुताबिक, किसी भी व्यक्ति या संस्था को किसी भी समारोह या उत्सव में डीजे का इस्तेमाल करने के लिए अनिवार्य रूप से पूर्व अनुमति लेनी होगी।

दिशानिर्देशों के अनुसार, आयोजकों को जुलूस, रैलियों और डीजे सिस्टम के उपयोग के लिए एक हलफनामा और अनुरोध पत्र प्रस्तुत करना होगा। साथ ही साथ डीजे सिस्टम के माध्यम से चलाई जाने वाली सामग्री का विवरण भी देना होगा। पुलिस अपनी चेकलिस्ट में यह भी जाँच करेगी कि उन्होंने डीजे के कंटेंट की जाँच की है या नहीं।

इसके अलावा, राजस्थान सरकार ने कहा है कि लोगों को घर के आगे से गुजरने वाली शोभा यात्रा को देखने के लिए अपने घरों की छतों पर खड़े होने की अनुमति नहीं दी जाएगी। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में कहा गया है कि शोभायात्रा के दौरान ड्रोन से नजर रखी जाएगी और शोभायात्रा के रास्ते में आने वाले सभी घरों पर राजस्थान पुलिस की तरफ से बाहर से ताला लगा दिया जाएगा।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट (साभार: Twitter user Hirendra Kaushik)

उल्लेखनीय है कि ध्वनि प्रदूषण को कम करने के लिए सभी सार्वजनिक और धार्मिक स्थानों पर लाउडस्पीकरों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसके लिए पूर्व अनुमति आवश्यक होगी। जिसके बाद उन्हें सुबह 6 बजे से रात 10 बजे के बीच दी यह अनुमति दी जाएगी। हैरानी की बात यह है कि हिंदू त्योहारों के दौरान लाउडस्पीकरों के इस्तेमाल से होने वाले ‘ध्वनि प्रदूषण’ के बारे में इतना चिंतित दिखने वाला प्रशासन अज़ान के दौरान एक ही दिन में पाँच बार लाउडस्पीकर का इस्तेमाल होने पर बेफिक्र रहता है। 

दिलचस्प बात यह है कि यह प्रतिबंध 7 अप्रैल, 2022 को लागू हुआ और 9 मई तक लागू रहेगा। इस बीच महावीर जयंती, दुर्गा अष्टमी, अम्बेडकर जयंती, राम नवमी और हनुमान जयंती जैसे हिंदू त्योहार हैं।

बता दें कि राजस्थान के करौली जिले के फूटा कोट इलाके में शनिवार (2 अप्रैल, 2022) को हिन्दू नव वर्ष (नव संवत्सर) के उपलक्ष्य में मुस्लिम बहुल इलाके से गुजर रही एक बाइक रैली पर पथराव के बाद एक दुकान और एक बाइक को आग के हवाले कर दिया गया जिससे इलाके में तनाव पैदा हो गया।

गौरतलब है कि राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार ने रमजान के पाक महीने में मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में बिना किसी रुकावट के बिजली आपूर्ति के निर्देश दिए थे। जोधपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड ने निर्देश जारी कर कहा था कि रमजान के पूरे महीने में किसी भी मुस्लिम बहुल इलाके में बिजली कटौती नहीं होगी।

सब जला दो, काटो, मारो, छोड़ो मत… खरगोन में जिस धन्नालाल के घर में घुसे थे दंगाई, उन्होंने बताया किसके पास थे कैसे हथियार

रामनवमी के मौके पर रविवार (10 अप्रैल 2022) को कई राज्यों में हिंसा की घटना सामने आई। ऐसी ही एक घटना मध्य प्रदेश से भी सामने आई। राज्य के खरगोन में रामनवमी जुलूस पर पथराव और आगजनी की घटनाओं के बाद पूरे शहर में कर्फ्यू लगाना पड़ा। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और पुलिस मौजूद है। हालाँकि लोगों ने जिस तरह के दहशत को झेला, वह उनसे बाहर नहीं निकल पा रहे हैं।

कुछ चश्मदीदों के हवाले से दैनिक भास्कर ने बताया है कि उस दिन हिंसा कैसे भड़की। इन्हीं लोगों में से एक हैं धन्नालाल पंवार। वह शीतला माता मंदिर के पास रहते हैं। उस दिन उपद्रवी उनके घर में भी घुस आए थे। रिपोर्ट में धन्नालाल के हवाले से बताया गया है कि 300-400 लोगों की भीड़ अचानक से आ गई थी। वे चिल्ला रहे थे- सब जला दो। काटो, मारो, छोड़ो मत…

उन्होंने बताया कि पहले मस्जिद में नमाज पढ़कर लोग शोभा यात्रा के मार्ग से निकले। फिर अचानक पथराव शुरू हुआ हुआ और देखते ही देखते यह हिंसक हो गया। इसमें मस्जिद में नमाज पढ़ रहे लोग भी इसमें शामिल हो गए। किसी के हाथ में पत्थर, किसी के हाथ में फरसे तो किसी के पास अन्य हथियार थे। भीड़ ने उनके घर में भी घुस कर तांडव मचाया। गाड़ी में आग लगा दी और पेट्रोल बम फेंके। यह सब देख उनकी 10 साल की बेटी बेहोश हो गई। पुलिस ने उन्हें बाहर निकाला।

त्रिलोक जाधव नाम के अन्य चश्मदीद ने बताया कि मंदिर में काफी तोड़फोड़ की गई। भगवान श्रीराम के पोस्टर को फेंक दिया गया। बच्चों को भी नहीं छोड़ा। दंगाइयों को जो भी दिखा सब पर पत्थरबाजी की। गाड़ियों में आग लगा दी। त्रिलोक ने बताया कि दंगाई यह कहते हुए हमला कर रहे थे कि जो भी दिखे, उसे मार डालो।

इसी तरह खरगोन के पुलिस अधीक्षक (SP) सिद्धार्थ चौधरी ने बताया था कि एक दंगाई तलवार लेकर हिंदुओं की ओर दौड़ा था। उसे पकड़ने के दौरान उन्हें किसी ने पीछे से गोली मार दी, जो उनके बाएँ पैर में लगी थी। उन्होंने भी बताया था कि झाँकी निकलने के दौरान ही नमाज का समय हो गया था, जिसके बाद हालात बिगड़ गए।

गौरतलब है कि 10 अप्रैल को खरगोन के तालाब चौक इलाके में रामनवमी की शोभा यात्रा निकाली गई थी। इस यात्रा के दौरान कुछ लोगों ने पथराव किया। 30 से ज्यादा दुकानों और मकानों में आग लगा दी गई और मंदिरों में भी तोड़फोड़ की गई। एक रिपोर्ट के अनुसार यह घटना अचानक नहीं घटी। यह पूर्व नियोजित हमला था। उपद्रवियों ने पहले से ही छतों पर पत्थर और पेट्रोल बम जमा कर रखे थे।

DMK सरकार ने ‘अयोध्या मंडपम्’ को अपने नियंत्रण में लिया, विरोध करने पर कई गिरफ्तार: 64 सालों से ‘श्री राम समाज’ के पास था प्रबंधन

तमिलनाडु के ‘हिन्दू रिलीजियस एंड चैरिटेबल एंडोमेंट्स (HR&CE)’ विभाग ने चेन्नई के पश्चिम मांबलम में स्थित ‘अयोध्या मंडपम्’ को अपने नियंत्रण में ले लिया है। 64 वर्ष पुराने इस स्थल को ‘अयोध्या अश्वमेध महा मंडपम्’ के नाम से भी जाना जाता है। स्थानीय लोगों के विरोध प्रदर्शन और आंदोलन के बावजूद एमके स्टालिन की सरकार ने सोमवार (11 अप्रैल, 2022) को ये कार्यवाही की। कई राजनीतिक दलों ने स्थानीय लोगों के प्रदर्शन को समर्थन दिया है।

सोमवार के सुबह ही विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया था, जो दोपहर तक और तेज़ हो गया। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कई लोगों को ‘रोकथाम गिरफ़्तारी’ में रखा। स्थानीय भाजपा की पार्षद उमा आनंदन भी इस विरोध प्रदर्शन का हिस्सा थीं। उन्होंने तमिलनाडु की द्रमुक सरकार के इस फैसले को अवैध करार दिया। उन्होंने कहा कि ‘अयोध्या मंडपम्’ के देखभाल और रख-रखाव का कार्य ‘श्री राम समाज’ के जिम्मे रहा है।

स्थानीय लोगों ने कहा कि जनता ने अपने रुपए से इसे बनवाया है। यहाँ आए दिन धार्मिक कार्यक्रम होते रहते हैं। इसके अलावा ‘राधा कल्याणम्’ और ‘होमम्’ भी नियमित तौर पर आयोजित किए जाते रहे हैं। यहाँ ‘अगम’ के हिसाब से पूजा-पाठ नहीं होता है, इसीलिए लोगों का कहना है कि ये पूर्ण रूप से ‘मंदिर’ की श्रेणी में नहीं आता। मंदिर पूजन समिति ने कहा कि इसके ट्रस्टी के रूप में सिर्फ एक प्रैक्टिसिंग हिन्दू की नियुक्ति की जा सकती है और कोई सरकारी अधिकारी इसकी जगह नहीं ले सकता।

लोगों ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी हवाला दिया। टेनमपेट के बालदंडयुद्धपाणी मंदिर में ‘एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (EO)’ की नियुक्ति को अवैध करार दिया गया था। ‘श्रीराम समाज’ इस मामले को लेकर मद्रास उच्च-न्यायालय पहुँचा है। इससे पहले एक याचिका ख़ारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा था कि ‘अयोध्या मंडपम्’ के मंदिर होने या नहीं होने का फैसला सूट के जरिए होगा। बताया जा रहा है कि यहाँ बड़ी मात्रा में दान आ रहे थे, इसीलिए ये फैसला लिया गया।

HR&CE विभाग का कहना है कि इस जगह के प्रबंधन को लेकर कुप्रबंधन की कई खबरें आ रही थीं। पुलिस ने कई लोगों को सरकारी अधिकारियों के कर्तव्यों के निर्वहन में बाधा डालने के आरोप में गिरफ्तार किया। हालाँकि, बाद में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया। तमिलनाडु सरकार का कहना है कि यहाँ दान मिलते हैं, इसीलिए ये मंदिर है। जबकि ‘श्रीराम समाज’ ने कहा कि यहाँ सिर्फ तस्वीरों की ही पूजा की जाती है, मूर्तियाँ नहीं हैं।