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लटकी थीं 48 जिंदगी, 45 घंटे बाद 2500 फीट की ऊँचाई पर रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा: देवघर रोपवे हादसे का हाई कोर्ट ने भी लिया संज्ञान

झारखंड के देवघर स्थित त्रिकुट पर्वत पर हुए रोपवे हादसे के बाद शुरू किया गया बचाव अभियान पूरा हो गया है। 45 घंटे तक चले अभियान के बाद रोपवे की ट्रॉलियों में फॅंसे 48 लोगों में से 46 को बचा लिया गया है। हालाँकि, मंगलवार (12 अप्रैल 2022) को भी एक महिला पर्यटक की ट्रॉली से नीचे गिरने के कारण मौत हो गई। बचाव अभियान के दौरान ये दूसरी मौत थी। इससे पहले सोमवार को भी एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। वहीं 12 लोग घायल भी हुए हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार को करीब 7 घंटे तक एयरफोर्स और आईटीबीपी की टीम ने करीब 2500 फीट की ऊँचाई पर ज्वाइंट ऑपरेशन चलाया औऱट्रालियों में फँसे 15 लोगों को बचा लिया। इस ऑपरेशन के दौरान एक जवान के पैरों में भी चोट लगी है। हादसे में घायल लोगों में महिलाएँ औऱ बच्चियाँ शामिल हैं। कई लोगों को इंटेसिव केयर यूनिट (ICU) में रखा गया है। उल्लेखनीय है यह ऑपरेशन काफी खतरनाक था, ऐसा इसलिए क्योंकि तेज हवा होने के कारण रोपवे की रस्सियाँ हिलने लगती थीं।

सोमवार को पहले दिन सेना, वायुसेना, NDRF औऱ और ITBP की टीमों ने करीब 12 घंटे तक बचाव अभियान चलाकर 33 पर्यटकों को सफलतापूर्वक बचाया था। लेकिन, एक व्यक्ति की सेफ्टी बेल्ट टूटने के कारण नीचे गिरने से मौत हो गई। अंधेरा और कोहरा होने के कारण बचाव को फिर रोक दिया गया था।

इस हादसे पर झारखंड हाई कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है। मुख्य न्यायधीश रवि रंजन औऱ जस्टिस एसएन प्रसाद की बेंच ने जाँच का आदेश दिया है। कोर्ट ने सरकार से मामले में 25 अप्रैल को रिपोर्ट तलब की है।

गौरतलब है कि रविवार (10 अप्रैल 2022) को रामनवमी होने के कारण बड़ी संख्या में लोग त्रिकुट पहाड़ पर पहुँचे थे। पहाड़ पर बने मंदिर की तरफ एक साथ 26 ट्रॉलियाँ रवाना की गई थीं, जिससे रोपवे की तारों पर अचानक लोड बढ़ा और रोलर टूट गया। तीन ट्रॉलियाँ पहाड़ से टकरा गईं, वहीं दो नीचे गिर गईं। इनमें सवार 12 लोग जख्मी हो गए और दो लोगों की मौत हो गई। बाकी ट्रॉलियाँ आपस में टकराकर रुक गईं। लोगों को निकालने के लिए जैसे ही सेना ने हेलीकॉप्टर का सहारा लिया, वैसे ही पंखे की तेज हवा से ट्रॉलियाँ हिलने लगीं, इससे लोगों की जान पर बन आई।

UP के हाथरस को लेकर बंगाल में निकाला मार्च, नादिया गैंगरेप में ढूँढा ‘अफेयर’ का एंगल: रेप पर ममता बनर्जी का ये कैसा भेद

पश्चिम बंगाल के नादिया में एक त़णमूल कॉन्ग्रेस नेता के बेटे की बर्थडे पार्टी में 14 साल की बच्ची का रेप होना, बाद में उसकी मृत्यु होना और बिन अटॉप्सी उसका देह संस्कार हो जाना…एक ऐसा मामला है जिसने सबके कान खड़े कर दिए हैं।

पीड़िता के परिवार का साफ कहना है कि उनके ऊपर टीएमसी नेता ने अंतिम संस्कार के लिए दबाव बनाया। पुलिस ने भी इस केस में टीएमसी नेता के बेटे को मुख्य आरोपित के तौर पर पकड़ा है। लेकिन बावजूद पूरे घटनाक्रम के प्रदेश की मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे पर बयान दिया तो क्या- “आपको कैसे पता कि उसका रेप हुआ, क्या वो प्रेग्नेंट थी, या लव अफेयर का मामला था या फिर वह बीमार थी।”

ममता बनर्जी का ये बयान कितना संवेदनहीन इसे बताने की जरूरत नहीं है। वो बच्ची नौंवी क्लास में थी और नाबालिग थी, फिर भी प्रदेश सीएम को लगता है कि इस मामले में निंदा मात्र करने से पहले ये सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कहीं उसका लव अफेयर तो नहीं था। क्या यदि लव अफेयर था भी, तो भी लड़की के साथ हुए रेप और उसकी मौत को जस्टिफाई किया जा सकता है?

CM ममता बनर्जी ने ये पूछा भी कैसे: पीड़िता के पिता

अब ममता बनर्जी के इसी बयान की आलोचना जगह-जगह है। बच्ची के पिता का सोचिए क्या हाल हुआ होगा जो न्याय की उम्मीद प्रशासन से लगाए बैठे हैं और उन्हें पूछा ये जा रहा है कि कहीं उनकी 14 साल की बच्ची प्रेगनेंट तो नहीं थी। पिता ने ये सवाल सुन आहत मन से पूछा है, “आखिर मुख्यमंत्री कैसे इस तरह की बातें पूछ सकती हैं कि मेरी बच्ची प्रेगनेंट थी। मैं न्याय चाहता हूँ और ये चाहता हूँ कि जो लोग भी इस अपराध में शामिल हैं उन्हें सजा मिले।” परिजन आरोप लगा रहे हैं कि उन्हें टीएमसी नेता के दबाव में आकर बिन ऑटोप्सी कराए बच्ची का अंतिम संस्कार करना पड़ा।

‘अगर रेप पीड़िता के लिए बोला है…तो ममता बनर्जी उस पद के नहीं है काबिल’

दिल्ली की निर्भया की माँ ने भी पश्चिम बंगाल की सीएम के बयान पर दुख जाहिर किया है। अपनी बेटी को 2012 में खो चुकीं निर्भया की माँ जानती हैं कि एक रेप पीड़िता का दर्द या उसके माता पिता का दर्द क्या होता है। ऐसे में जब उन्होंने ममता बनर्जी का बयान सुना तो वो हैरान रह गईं। उन्होंने कहा, “एक महिला होने के नाते अगर वह इस तरह की टिप्पणी कर रही हैं तो वह उस पद के काबिल नहीं हैं जिस पर वह बैठी हैं।”

‘ममता बनर्जी को मुँह फिनाइल से धोना चाहिए’ : भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी

इसी तरह अन्य लोग भी हैरानी जता रहे हैं। भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने तो पीड़िता के लिए ऐसी बयानबाजी सुन ममता बनर्जी को उनका मुँह फिनाइल से धोने की सलाह दी है। उन्होंने कहा है, “ममता बनर्जी को अपना मुँह ब्लीचिंग पाउडर और फिनाइल से धोना चाहिए…ऐसे घटिया शब्दों की उम्मीद एक सीएम से नहीं होती।”

पीड़िता के पिता, निर्भया की माँ और भाजपा नेता की तरह सबका यही पूछना है कि महिला होने के नाते और एक राज्य की सीएम होने के बाद ये बाद बनर्जी के मुख से ये सब निकला तो कैसे निकला।

हाथरस रेप केस में ममता बनर्जी ने उठाए थे सवाल

लोगों के सवाल हैं कि जो महिला हाथरस पीड़िता के लिए बंगाल में मार्च निकाल रही थीं वो अब अपने ही राज्य में एक पीड़ित माँ-बाप का विश्वास क्यों नहीं कर पा रहीं। स्थिति लगभग एक ही तरह की तो है। वहाँ हाथरस में भी पीड़ित परिवार अपने लिए न्याय माँग रहा था और यहाँ नादिया गैंगरेप केस की पीड़िता के पिता भी अपनी मृत बेटी के लिए इंसाफ माँग रहे हैं। फिर सवाल ये है कि प्रतिक्रिया देने में ममता बनर्जी का ऐसा दोहरा रवैया क्यों?

क्या रेप पीड़िता के लिए संवेदनाएँ इस आधार पर उमड़ती हैं कि यूपी में भाजपा सरकार है तो वहाँ हुए हाथरस पीड़िता के लिए अपना समर्थन देना है और अगर रेप पीड़िता टीएमसी शासित बंगाल की है तो उसके चरित्र पर प्रश्नचिह्न लगाना है।

पीड़ित परिवार के लोग खुलकर टीएमसी नेता समर गोला का नाम लेकर कह रहे है कि उनके दबाव में बच्ची का देह संस्कार करना पड़ा लेकिन उनके विरुद्ध कार्रवाई कोई नहीं। समर गोला के बेटे ब्रज गोला और उसके साथी प्रभाकर पोद्दार को पुलिस ने गिरफ्तार किया है क्योंकि वे इस मामले में मुख्य दोषी हैं।

मामले की जाँच अब भी चल रही है। पीड़ित परिवार के दावों की भी जाँच हो रही है और अन्य पक्ष भी जाँचे जा रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री के बयान से अगर लोग हैरान हैं तो सिर्फ इसलिए क्योंकि सीएम ने अपने सवाल से उस बच्ची के चरित्र पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है जो अब इस दुनिया में ही नहीं है और जिसके माता-पिता अपनी बेटी के साथ हुए रेप का इल्जाम ममता बनर्जी की ही पार्टी के नेता के बेटे पर लगा रहे हैं।

अंत में ममता बनर्जी ने 11 अप्रैल 2022 को मिलन मेला के कार्यक्रम में पीड़िता के लिए क्या कहा उसे पूरा पढ़ लीजिए। ममता बनर्जी कहती हैं,

“एक सामान्य इंसान की तरह मैं ये कहती हूँ कि आखिर ये सबूत कैसे मिलेगा कि बच्ची का बलात्कार हुआ या वो प्रेगनेंट थी या वजह कोई और थी… जैसे किसी ने उसे पीटा या किसी बीमारी से वह मर गई। प्रेम प्रसंग तो पक्का था। उसका परिवार जानता था और पड़ोसी भी जानते थे। अब अगर एक लड़का और लड़की एक दूसरे से प्यार करते हैं तो मैं उन्हें सजा कैसे दे दूँ… ये उत्तर प्रदेश नहीं हैं। मैं लव जिहाद के नाम पर वैसा यहाँ नहीं कर सकती”

13 वर्षीय नाबालिग हिन्दू लड़की से सादिक ने रजत त्यागी बन किया रेप, हरिद्वार पुलिस ने किया गिरफ्तार

हरिद्वार में एक नाबालिग से रेप के मामला सामने आया है। जहाँ सादिक ने रजत त्यागी बनकर 13 वर्षीय हिन्दू लड़की को धमकी देकर यौन शोषण किया है। वहीं अब 10 अप्रैल, 2022 को दर्ज FIR के बाद आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।

क्या है पूरा मामला

हरिद्वार जिले के ग्राम विशनपुर कुंडी से 13 वर्षीय कक्षा 8 की छात्रा से रेप का मामला सामने आया है। मामले में आरोपित का नाम सादिक है जो खुद को रजत त्यागी उर्फ राजा बताता था। जो पिछले लम्बे समय से स्कूल से घर आते जाते समय लड़की को परेशान करता चला आ रहा था।

FIR की कॉपी

FIR के अनुसार, मामले में आरोपित ने हिन्दू लड़की को कई बार बहला-फुसलाकर उसके फोटो खींचे और कहा कि यदि तू मुझसे अब बात नहीं करेगी, तो तेरे फोटो वायरल कर दूँगा। चूँकि, इन दिनों स्कूल की छुट्टी चल रही है। लड़की के माता-पिता सुबह से ही अपने काम पर चले जाते है। जिसका फायदा उठाकर आरोपित सादिक ने रजत त्यागी उर्फ राजा बनकर लड़की के घर आकर जबरन उसे परेशान करता है।

थाने में की गई शिकायत के मुताबिक, लगभग 4-5 दिन पहले आरोपित धमकी देकर गया कि अब तेरे फोटो ये है। या तो मेरे साथ चल नहीं तो तेरे माँ बाप को मरवा दूँगा। वहीं शिकायत में परिवार ने यह भी बताया है कि छानबीन करने पर आरोपित का नाम राजा नहीं बल्कि सादिक निवासी बादपुर है, जिसने लड़की का फोटो भी वायरल किया है।

FIR में दर्ज शिकायत के अनुसार, सादिक पिछले 8 महीने से लड़की को परेशान करता आ रहा है। वहीं इस मामले में FIR के बाद आरोपित सादिक को गिरफ्तार कर लिया गया है।

मिस्र में पकड़ा गया नीरव मोदी का साथी सुभाष शंकर, देश लेकर लौटी CBI: PNB स्कैम से जुड़ा है मामला

पंजाब नेशनल बैंक घोटाले (PNB Scam) में केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) को बड़ी सफलता मिली है। सीबीआई ने भगोड़े कारोबारी नीरव मोदी के अहम सहयोगी सुभाष शंकर परब (Subhash Shankar Parab) को मिस्र से भारत वापस लाने में सफलता हासिल की है। सुभाष शंकर 2018 में नीरव मोदी के साथ देश छोड़कर भाग गया था। सीबीआई उसे लंबे समय से भारत वापस लाने की कोशिश में थी। अब उसे कोर्ट में पेश कर जाँच एजेंसी हिरासत की माँग करेगी।

नीरव मोदी के करीबी सुभाष शंकर को मिस्त्र की राजधानी काहिरा से पकड़ा गया है। सीबीआई मंगलवार (12 अप्रैल 2022) सुबह उसे लेकर मुंबई आई। 2018 में दर्ज हुए केस के बाद से ही सुभाष शंकर फरार चल रहा था। 2018 में इंटरपोल ने उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस (RCN) जारी किया था। जानकारी के मुुताबिक सुभाष शंकर फायरस्टार डायमंड में डिप्टी जनरल मैनेजर (फाइनेंस) था और वह 7000 करोड़ रुपए के नीरव मोदी बैंक फ्रॉड में एक मुख्य आरोपित है। इसके साथ ही उसने नीरव की फर्जी कंपनियों में फर्जी डायरेक्टर (Dummy Director) रखने में अहम भूमिका निभाई थी।

नीरव के भाई नेहल को जब पता चला कि भारतीय जाँच एजेंसियाँ उन्हें ढूँढ रही है तो उन्होंने सुभाष परब को काहिरा में डमी निदेशकों को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया था। ये डमी निदेशक हांगकांग में थे, जहाँ से वे धोखाधड़ी में शामिल नीरव की फर्जी कंपनियों के मामलों की देखरेख किया करते थे। सीबीआई और ईडी द्वारा केस दर्ज करने के बाद नीरव मोदी के सौतेले भाई नेहल मोदी ने सभी डमी निदेशकों के मोबाइल फोन नष्ट कर दिए और सुभाष परब की मदद से उन्हें काहिरा शिफ्ट कर दिया।

गौरतलब है कि भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी और उसके मामा मेहुल चोकसी पर पंजाब नेशनल बैंक को करीब 13,578 रुपए का लोन लेकर धोखाधड़ी करने का आरोप है। नीरव मोदी लंदन भाग गया था। इसके बाद लंदन की अदालत ने उसे वहाँ की जेल में बंद करने का आदेश दिया। भारत की जाँच एजेंसी उसे लगातार देश वापस लाने की कोशिश कर रही है। ब्रिटेन की वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट नीरव मोदी को भारत प्रत्यर्पण करने का आदेश दे चुकी है। हालाँकि नीरव मोदी ने मानसिक स्वास्थ्य और मानवाधिकारों का हवाला देते हुए इसे चुनौती दे रखी है।

उत्तर प्रदेश MLC चुनाव में भाजपा ही भाजपा: 36 में से 33 सीटों पर BJP का कब्जा, नहीं खुला अखिलेश यादव की पार्टी का खाता

उत्तर प्रदेश के विधान परिषद के चुनाव परिणामों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इतिहास रचते हुए 36 में से 33 सीटों पर जीत हासिल की। ऐसा पहली हो रहा है जब विधानसभा के साथ-साथ किसी पार्टी को विधान परिषद में भी बहुमत हासिल हुआ है। प्रमुख विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (SP) चुनाव में मुकाबले में ही नहीं दिखी। पार्टी को एक भी सीट पर जीत हासिल नहीं कर सकी। तीन निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी जीत हासिल की है।

प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बीजेपी की जीत पर बधाई दी। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, “उत्तर प्रदेश के उच्च सदन के लिए नव निर्वाचित सभी सदस्यों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ! आज उत्तर प्रदेश के स्थानीय प्राधिकारी विधान परिषद चुनावों में भाजपा की प्रचण्ड विजय ने पुनः स्पष्ट कर दिया है कि आदरणीय प्रधानमंत्री जी के कुशल मार्गदर्शन एवं नेतृत्व में प्रदेश की जनता राष्ट्रवाद, विकास एवं सुशासन के साथ है।”

बता दें कि शाहजहाँपुर-पीलीभीत एमएलसी सीट पर भी भाजपा ने कब्जा कर लिया। भाजपा प्रत्याशी डॉक्टर सुधीर गुप्ता ने यहाँ से जीत दर्ज की। सपा एमएलसी एवं प्रत्याशी अमित यादव रिंकू लंबे अंतर से चुनाव हार गए। विधानसभा चुनाव 2022 में सपा प्रत्याशी के भाई पूर्व विधायक राजेश यादव शाहजहाँपुर की मीरानपुर कटरा विधानसभा से करीब 300 वोट के मामूली अंतर से हारे थे।

वहीं गोरखपुर-महाराजगंज प्राधिकारी निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद चुनाव में बीजेपी से सीपी चंद 4432 वोटों से विजयी हुए। फर्रुखाबाद-इटावा सीट से बीजेपी के प्रांशु दत्त द्विवेदी ने जीत दर्ज की। 4139 मत बीजेपी को मिले। वहींं, सपा से हरीश यादव को मात्र 656 मत मिले। इधर कानपुर-फतेहपुर सीट से बीजेपी के अविनाश सिंह चौहान ने जीत दर्ज की है। उनको 4619 मत मिले हैंं। सपा के दिलीप सिंह उर्फ कल्लू यादव 299 मत मिले हैं। 

रायबरेली सीट पर सपा से चुनावी मैदान में उतरे बीरेंद्र यादव को बीजेपी प्रत्याशी दिनेश प्रताप सिंह ने करारी मात दी है। लखनऊ-उन्नाव सीट पर बीजेपी के उम्मीदवार रामचंद्र प्रधान की जीत हुई है। यहाँ समाजवादी पार्टी के निवर्तमान विधान परिषद सदस्य सुनील सिंह साजन अपनी सीट नहीं बचा पाए। रामचंद्र प्रधान को यहाँ 92 फीसदी वोट मिले। सपा प्रत्याशी डॉक्टर कफील खान को भी हार का सामना करना पड़ा।

कहाँ-कहाँ हुई मतगणना

मुरादाबाद, शाहजहाँपुर, बरेली, लखनऊ, सीतापुर, रायबरेली, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, बहराइच, गोंडा, बाराबंकी, अयोध्या, बस्ती, देवरिया, आजमगढ़, गोरखपुर, बलिया, गाजीपुर, जौनपुर, वाराणसी, प्रयागराज, फतेहपुर, फर्रुखाबाद, झाँसी, आगरा, मेरठ और सहारनपुर को मतगणना केंद्र बनाया गया था। उत्तर प्रदेश में खाली एमएलसी की 36 सीटों पर 27 सीटों के लिए शनिवार (9 अप्रैल 2022) को मतदान हुआ था।

स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन क्षेत्र की 35 निकाय सीटों पर 36 सदस्यों का चुनाव की प्रक्रिया चार फरवरी को शुरू हुई थी। मगर यूपी विधानसभा चुनाव 2022 के चलते इस प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया गया था। 25 मार्च तक इस चुनाव के लिए नामांकन जमा कराए गए। 36 सीटों में से 9 पर भाजपा के सदस्य निर्विरोध निर्वाचित घोषित हुए हैं। शेष 27 सीटों पर चुनाव हुआ था।

भैंस चोरी में सपा नेता आजम खान को पीड़ितों ने कोर्ट में पहचाना: घर में घुसकर मारपीट, लूटपाट और डकैती का मामला

समाजवादी पार्टी के विधायक आजम खान (Azam Khan) की यतीमखाना मामले में मुश्किलें बढ़ गई हैं। इस मामले में दो पीड़ितों ने कोर्ट में आरोपितों की पहचान की है। मामला रामपुर कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली यतीमखाना बस्ती को जबरन खाली कराने से जुड़ा है। आरोपितों पर घर में घुसकर लूटपाट, मारपीट, डकैती और भैसों की चोरी का आरोप है।

इस मामले में 11 मार्च 2022 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए MPMLA कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान सराय गेट के रहने वाले मोहम्मद कमर उर्फ पप्पू और मुन्ने ने भैंसों की चोरी के मामले की पुष्टि की। साथ ही कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ही जरिए पेश हुए सपा नेता आजम खान, सेवानिवृत्त सीओ आले हसन, सपा जिलाध्यक्ष वीरेंद्र गोयल और इस्लाम ठेकेदार आदि की पहचान भी की। सभी पीड़ितों ने कोर्ट में अपने पुराने बयान को दोहराया।

गौरतलब है कि यतीमखाना केस साल 2016 का है। 15 अक्टूबर 2016 को कमर ने आरोप लगाया था कि सपा नेता समेत करीब 30 लोग उसके घर में घुस गए। सारा सामान घर से बाहर फिकवाने के बाद उस पर बुलडोजर चलवा दिया। साथ ही चार भैंस भी खोल ले गए। 2019 में आऱोपितों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। कोतवाली थाने क्षेत्र में इस मामले में कुल 12 केस दर्ज किए गए थे। बहरहाल कोर्ट ने मामले में अगली सुनवाई 6 मई 2022 को नियत की है।

खरगोन के उपद्रवी मुस्लिम दिखे ‘पीड़ित’ इसलिए दिग्विजय सिंह ने शेयर की ‘फेक तस्वीर’

मध्य प्रदेश के खरगोन में रामनवमी जुलुस पर पत्थरबाजी को लेकर दिग्विजय सिंह ने ट्वीट कर शिवराज सिंह चौहान सरकार पर निशाना साधा, जिस पर फेक वीडियो के जरिए सूबे को बदनाम करने के आरोपों में कॉन्ग्रेस नेता खुद ही घिरते नजर आए। भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने दिग्विजय सिंह के ट्वीट पर तुरंत ही पलटवार किया, जिसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया।

दरअसल खरगोन में पत्थरबाजी की घटना को लेकर दिग्विजय सिंह ने कहीं और का फोटो मध्य प्रदेश के खरगोन का बताकर ट्वीट किया था और लिखा, “क्या तलवार लाठी लेकर धार्मिक स्थल पर झंडा लगाना उचित है। क्या खरगोन प्रशासन ने हथियारों को लेकर जुलूस निकालने की इजाजत दी थी? क्या जिन्होंने पत्थर फेंके चाहे वो जिस भी धर्म के हों, सभी के घर पर बुलडोजर चलेगा? शिवराज जी मत भूलिए.. आपने निष्पक्ष होकर सरकार चलाने की शपथ ली है।”

बीजेपी को घेरने के चक्कर में कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने कहीं और की तस्वीर शेयर कर शिवराज सरकार के निशाने पर आ गए हैं। दरअसल, दिग्विजय सिंह ने एक ट्वीट किया जिसको लेकर बवाल मचा हुआ है। पूर्व सीएम ने खरगोन हिंसा के नाम पर एक ट्वीट किया था, जिसमें उन्होंने बिहार के एक तस्वीर को अपने ट्वीट में टैग करते हुए इसे खरगोन का बता दिया। बता दें कि इस फोटो में कुछ युवक मस्जिद में की मीनार पर चढ़कर भगवा झंडा लगा रहे हैं।

शिवराज सिंह का पलटवार

वहीं जैसे ही दिग्वियज सिंह का यह ट्वीट सामने आया, सीएम शिवराज सिंह चौहान ने भी उस पर पलटवार किया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने ट्वीट कर लिखा, “दिग्विजय सिंह ने एक धार्मिक स्थल पर युवक द्वारा भगवा झंडा फहराने का फोटो सहित ट्वीट किया है, वह मध्यप्रदेश का नहीं है। उनका यह ट्वीट प्रदेश में धार्मिक उन्माद फैलाने का षड्यंत्र है और प्रदेश को दंगे की आग में झोंकने की साजिश है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

हालाँकि, दिग्विजय सिंह के फेक फोटो वाले ट्वीट पर भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने पलटवार करते हुए कहा, “यही तो मामा के बुलडोजर की ताकत है, चला खरगोन के जिहादियों पर और दर्द सीधे आपके दिल पर पहुँच गया. आप रात भर ना सो पाए होंगे। आपका मन बड़ा दुखी होगा, इसलिए यह झूठा फोटो ले आए निष्पक्ष तुड़ाई की जाएगी.. जिस घर से पत्थर, पेट्रोल बम निकला है वह घर मिट्टी में मिला दिया जाएगा।”

वहीं इस पलटवार के बाद ही दिग्विजय सिंह फेक फोटो डिलीट कर दी। अब सिर्फ टेक्स्ट दिखाई दे रहा है। वहीं सोशल मीडिया पर भी लगातार कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह को घेरा जा रहा है।

क्या है उस तस्वीर की सच्चाई

बता दें कि दिग्विजय सिंह द्वारा शेयर की गई तस्वीर मध्य प्रदेश के खरगोन का न होकर बिहार का है। जहाँ रामनवमी के जुलूस के दौरान बिहार के मुजफ्फरपुर में कुछ लोगों ने मस्जिद के गेट पर चढ़कर भगवा झंडा फहरा दिया था।

इस घटना के वीडियो को शेयर करते हुए कई ट्वीटर हैंडलों और मीडिया रिपोर्ट में इसे बिहार के मुजफ्फरपुर के मोहम्मदपुर गाँव का बताया गया है। वीडियो में भी देखा जा सकता है कि मोहम्मदपुर गाँव में स्थित एक मस्जिद पर कुछ लोग चढ़ कर भगवा झंडा लगा रहे है।

होगी सख्त कार्रवाई

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, दिग्विजय सिंह के फेक ट्वीट करने और उसे बाद में डिलीट करने पर गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने भी एक्शन की बात कही है। उन्होंने कहा, “दिग्विजय सिंह ने भ्रम फैलाने का काम किया है। वह हमेशा ही मध्यप्रदेश को बदनाम करने का काम करते रहे हैं। उन्होंने पहले पाकिस्तान के ब्रिज को भोपाल से जोड़ दिया था। अब बाहर की मस्जिद, जिसमें झंडा लगाया जा रहा है, उसे मध्य प्रदेश से जोड़कर दिखाया। इस मामले में विषय विशेषज्ञों से राय ली जा रही है। दिग्विजय पर कानूनी कार्रवाई करेंगे।”

खरगोन में क्या हुआ

गौरतलब है कि खरगोन में रविवार (10 अप्रैल, 2022) को रामनवमी पर भगवान राम की शोभायात्रा निकाली जा रही थी। जैसे ही यह जुलूस मुस्लिम बहुल इलाके में पहुँचा तो शोभा यात्रा पर पथराव शुरू हो गया। इस दौरान उपद्रवियों ने आतंक फैलाते हुए कई घरों और दुकानों में आग लगा दी। कई मकानों में घुसकर तोड़फोड़ की। बताया जा रहा है कि एक मंदिर में भी तोड़फोड़ की गई। जिसके बाद पूरे इलाके में सांप्रदायिक तनाव फैल गया।

मीडिया रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि मामला शांत कराने पहुँची पुलिस के करीब 20 जवान भी पत्तरबाजी में घायल हो गए, एसपी को भी चोटें आई थी। उसके बाद शिवराज सरकार ने एक्शन लेते हुए दंगाईयों के मकान और दुकानों पर बुलडोजर चलवा दिया। जिसके बाद से सियासत बढ़ गई है। यहाँ तक कि बीजेपी को बदनाम करने के किए कॉन्ग्रेस नेता द्वारा बिहार की तस्वीरों का भी इस्तेमाल किया गया।

बता दे कि रामनवमी पर साम्प्रदायिक हिंसा का मामला सिर्फ मध्य प्रदेश में ही नहीं बल्कि गुजरात, झारखंड और पश्चिम बंगाल सहित चार अन्य राज्यों में भी देखने को मिला है। जहाँ राम नवमी के जुलूस के दौरान पथराव, आगजनी, मारपीट और बड़े पैमाने पर हिंसा सामने आई है।

हिन्दू त्योहारों पर मुस्लिम भीड़ की हिंसा, पर्दा डालने के लिए ‘मुस्लिमों के नरसंहार’ की बातें: गिरोह विशेष का सोचा-समझा पैटर्न, हिन्दू हर हाल में दोषी

भारत में जब-जब मुस्लिम भीड़ हिंसा करती है, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रोपेगंडा फैलाने वाले कुछ संगठन तुरंत हरकत में आकर उन्हें पीड़ित दिखाने की जुगत में भिड़ जाते हैं। दिल्ली का हिन्दू विरोधी दंगा हो या फिर देश भर में CAA विरोधी उपद्रव, हर एक हिंसा के बाद आरोपित मुस्लिमों के लिए अदालत में वकील, मीडिया में पत्रकार और मनोरंजन की दुनिया में कुछ कट्टरपंथी उनके पक्ष में माहौल बनाने और उन्हें बचाने के लिए पहले से ही तैयार रहते हैं।

अब भी वैसा ही हो रहा है। रामनवमी के दौरान देश भर में दर्जन भर से भी अधिक इलाकों में मुस्लिम भीड़ ने हिंसा की। कहीं रामनवमी के दौरान बज रहे डीजे पर आपत्ति जताई है तो कहीं गाने के चयन पर हंगामा हुआ, कहीं शोभा यात्रा के मुस्लिम बहुल इलाके से गुजरने पर दोष मढ़ा गया तो कहीं मस्जिद के सामने से जुलूस के जाने पर पत्थरबाजी हुई। इन घटनाओं में आगजनी, पत्थरबाजी, लाठी-डंडों से पिटाई और मजहबी नारेबाजी आम बात थी। कार्रवाई होने के बाद खुद को पीड़ित दिखाना भी अब आम हो गया है।

रामनवमी के दौरान मुस्लिमों की हिंसा: पर्दा डालने के लिए तैयार हुआ गिरोह विशेष

अब चूँकि इन घटनाओं की तस्वीरें और वीडियोज सोशल मीडिया में वायरल हो रहे हैं, इस्लामी गिरोह के ऊपर जिम्मेदारी है कि वो एक ऐसा फेक नैरेटिव तैयार करें, जिसके जाल में फँस कर लोग मुस्लिम भीड़ की हिंसा की बात ही न करें। एक ऐसा माहौल बनाया जाए, जिसमें पीड़ित हिन्दुओं के ऊपर एक पर्दा डाल दिया जाए। उनकी साजिश है कि दुनिया भर में अपने प्रभावशाली लोगों को इकट्ठा कर के उनसे झूठ कहलवाया जाए कि भारत में फलाँ-फलाँ चीजें हो रही हैं।

इसी क्रम में अब नए हैशटैग की साजिश रची गई है। ‘Indian Muslims Genocide Alert (भारतीय मुस्लिमों के नरसंहार को लेकर चेतावनी)’ नाम के इस हैशटैग के जरिए ये बात फैलाई जाएगी कि देश भर में मुस्लिमों का कत्लेआम हो रहा है। कर कौन रहे हैं, तो हिन्दू। अमेरिका के वर्जीनिया के फेयरफैक्स में स्थित जॉर्ज मेसन यूनिवर्सिटी में ‘जेनोसाइड स्टडीज एंड प्रिवेंशन’ के रिसर्च प्रोफेसर रहे ग्रेगोरी स्टैंटन के हवाले से कहा जा रहा है कि उन्होंने चेतावनी जारी की है।

‘भारत में मुस्लिमों का नरसंहार’ – इस झूठे नैरेटिव को दुनिया भर में फैलाने की बड़ी साजिश

वो ‘जेनोसाइड वॉच’ समूह का हिस्सा हैं। जारी किए गए बयान में कहा गया है कि गुजरात, कर्नाटक, बिहार, उत्तर प्रदेश, गोवा, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और झारखंड में रामनवमी की शोभा यात्राओं के दौरान मुस्लिम विरोधी हिंसा की गई। कई मस्जिदों को ध्वस्त किए जाने और जलाए जाने के साथ-साथ मस्जिदों के बाहर नारेबाजी के आरोप भी लगाए गए हैं। ‘हिंदुत्व गुंडों’ पर मस्जिदों में तलवार के साथ नाचने के आरोप भी लगाए गए हैं।

इस हैशटैग के लिए मंगलवार (12 अप्रैल, 2022) को शाम 5 बजे का समय मुक़र्रर करते हुए लिखा गया है कि सत्ता के संरक्षण में हिन्दू साधु-संत मुस्लिमों के नरसंहार के लिए उकसा रहे हैं और घृणा फैलाने वाले खुला घूम रहे हैं। इसमें ये भी लिखा है कि भारतीय मुस्लिमों को ‘सम्मान और बराबर अधिकारों’ के साथ जीने का अधिकार है। लोगों को इस ‘आसन्न नरसंहार’ के खिलाफ आवाज़ उठाने की अपील की गई है, इससे पहले कि देर हो जाए।

असल में हिन्दुओं के साथ क्या हुआ, रामनवमी के दौरान हिंसा की घटनाओं का सच क्या

इससे पहले कि आप गिरोह विशेष के चक्कर में फँसे और कोई स्वरा भास्कर, कोई RJ सायमा, कोई जुबैर या फिर कोई ओवैसी इन घटनाओं को लेकर झूठ फैलाए, आपको सच से रूबरू रहना ज़रूरी है। ये ऐसा गिरोह है, जो आपको ये बताएगा कि ‘मुस्लिमों के मकान भाजपा सरकार ने बुलडोजर से गिरा दिए’, लेकिन ये नहीं बताएगा कि ये मकान अवैध थे और उनसे रामनवमी की शांतिपूर्ण शोभा यात्राओं पत्थरबाजी और हमले किए गए। ओडिशा के जोडा से ऐसी ही घटना सामने आई है।

गुजरात के हिम्मतनगर में पत्थरबाजी में आधा दर्जन पुलिसकर्मी घायल हो गए। आरोपित राजू मेंटल, सिकंदर पठान, समीर पठान, खालिद पठान, मुबीन शेख, वाहिद पठान और उमर पठान आदि हैं। क्या आपको ये मुस्लिमों के खिलाफ हिंसा लगती है? भारत के पश्चिमी तट पर स्थिति इसी राज्य के आणंद में भी छपरिया के हनुमान मंदिर के पास निकली शोभायात्रा पर पत्थरबाजी हुई। लेकिन, दोषी हिन्दू हो गए क्योंकि उन्होंने अपने साथ हुई हिंसा के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने का ‘गुनाह’ किया।

मध्य प्रदेश के खरगोन की घटना चर्चा में है। यहाँ डीजे का बहाना बना कर मुस्लिम भीड़ ने राम नवमी मना रहे हिन्दुओं पर हमला किया। अन्य जिलों से अतिरिक्त बल मँगाने पड़े। मुंबई के मानखुर्द में भी रामनवमी मना रहे हिन्दुओं को हिंसा का सामना करना पड़ा। झारखंड के लोहरदगा में रामनवमी के मेल में घुस कर हिन्दुओं की दुकानों में आग लगाई गई। ट्रेन पर पत्थरबाजी हुई। लेकिन, गिरोह विशेष कह रहा है कि ‘मुस्लिमों का नरसंहार’ हो रहा है।

पूर्वी भारत में स्थित इसी राज्य के बोकारो में फुसरो के राजाबेड़ा स्थित गंजू मोहल्ले में रामनवमी की शोभा यात्रा पर हमला किया गया। पुलिस आई। पुलिस ने उलटा हिन्दुओं को ही रोक दिया। शोभा यात्रा को आगे नहीं बढ़ने दिया गया। जबकि गिरोह विशेष कह रहा है कि सत्ता हिन्दुओं को संरक्षण दे रही है। जबकि सच्चाई ये है कि झारखंड में भाजपा विरोधी पार्टी की सरकार है और खामियाजा हिन्दुओं को भुगतना पड़ रहा है, जो अपने ही देश में अपना त्योहार शांतिपूर्ण ढंग से नहीं मना सकते।

पश्चिम बंगाल का तो कहना ही क्या! वहाँ चुनावी हिंसा में भाजपा कार्यकर्ताओं और हिन्दुओं की हत्या की घटनाएँ और सत्ताधारी TMC पर आरोप लगना आम है, लेकिन क्या मजाक कि मीडिया मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विरुद्ध एक शब्द भी बोले या इन घटनाओं की सच्चाई दिखाए। वहाँ हावड़ा में हिन्दुओं पर हमले किए गए। बाँकुरा में हिन्दुओं पर आरोप लगाया गया कि उनकी रामनवमी की शोभा यात्रा मस्जिद के सामने से गुजरी। इस ‘गुनाह’ के कारण डेढ़ दर्जन को गिरफ्तार कर लिया गया। यहाँ किसको मिल रहा है सत्ता का संरक्षण?

JNU में क्या हुआ, वो भी चर्चा का विषय बना हुआ है। रामनवमी की पूजा में मांसाहार परोस कर विघ्न डालने की कोशिश की गई। ABVP के छात्र हवन कर रहे थे, उन्हें परेशान किया गया। हमले में दिव्या सूर्यवंशी सहित कई BVP कार्यकर्ता घायल हुए। दिव्यांग छात्रों तक को नहीं बख्शा गया। महाराष्ट्र की भी बात कर लें। वहाँ भाजपा विरोधी तीन दलों की सरकार है। वहाँ सत्ता ने क्या किया? हनुमान चलीसा लाउडस्पीकर पर बजाने के कारण ‘राम रथ’ को ही पुलिस ने जब्त कर लिया। जबकि भारत की 3 लाख मस्जिदों में रोज 5 बार लाउडस्पीकर से अजान जायज है?

मुस्लिम भीड़ की करतूत को छिपाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैलाया जाता है प्रोपेगंडा

हाल ही में गोरखनाथ मंदिर में अहमद मुर्तजा अब्बासी नाम के एक कट्टरपंथी मुस्लिम ने हमला कर के पुलिसकर्मियों को घायल कर दिया, लेकिन उसका जिहादी लिंक सामने आने के बावजूद मीडिया का एक धड़ा इस पर चुप रहा। राना अय्यूब जैसों को अब ये जिम्मेदारी निभानी है कि उन्हें मुस्लिमों की हिंसा को छिपा कर इसके उलट तस्वीर दुनिया को दिखानी है। सीजे वर्लमैन जैसे लेखक सोशल मीडिया के जरिए इस उलटी तस्वीर को फैलाने में मदद करते हैं।

दोनों के ट्विटर हैंडल भी देख लीजिए। रामनवमी की शोभा यात्रा पर पत्थरबाजी करती मोहतरमा का वीडियो सीजे वर्लमैन के ट्विटर हैंडल पर नहीं दिखेगा, लेकिन उसी खरगोन में इस घटना के बाद हुई पुलिसिया कार्रवाई को वो जरूर ‘मुस्लिम विरोधी हिंसा’ बता कर प्रचारित कर रहा है। इसी तरह राना अय्यूब को देखिए। इटली में जाकर कह रही हैं कि मुस्लिम पत्रकारों पर ‘हिन्दू महासम्मेलन’ में हमला हुआ। उन पत्रकारों ने पुलिस पर उन्हें गिरफ्तार करने के आरोप लगा दिए थे, जबकि वो खुद जाकर पुलिस की वैन में बैठ गए थे।

कोरोना के नाम पर दान लेकर करोड़ों पचा जाने की आरोपित इस इस्लामी कट्टरवादी पत्रकार का काम ही यही है कि दुनिया भर के सम्मेलनों में घूम-घूम कर ये कहना कि हिन्दू अत्याचार कर रहे हैं और मुस्लिम पीड़ित हैं। पहले अधिकाधिक सक्रियता यही काम अरुंधति रॉय करती थीं (अब भी करती हैं), जिनका काम था हर कार्यक्रम में जाकर ये दोहरा देना कि भारतीय सेना अपने लोगों को मार रही है। इनका नेटवर्क इतना तगड़ा है कि ये हर एक जगह जाकर झूठ की डिलीवरी करते हैं।

उदाहरण के लिए कश्मीरी पंडितों के नरसंहार को ले लीजिए। नब्बे के दशक में 6 लाख कश्मीरी पंडितों को मुस्लिमों द्वारा किए गए नरसंहार के बाद घाटी छोड़ कर अपने ही देश में शरणार्थी बन जाना पड़ा और इसके जिम्मेदार सत्ता के गलियारों में सम्मानित होते रहे, लेकिन कभी हथियार न उठाने वाले इन कश्मीरी हिन्दुओं के लिए एक आवाज़ तक न उठी। आज इस पर फिल्म आई है तो उसका विरोध हो रहा है। ‘ग्लोबल कश्मीरी पंडित डायस्पोरा’ के अध्यक्ष ने एक वाकया भी साझा किया था, जो ध्यान देने योग्य है।

कश्मीरी एक्टिविस्ट सुरिंदर कौल ने बताया था कि कई ऐसे डेमोक्रेट्स थे, जिन्हें कश्मीर के बारे में गलत जानकारी दी गई थी और उन्होंने इस फिल्म को देखने के बाद समझा कि सच्चाई क्या है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के नेताओं ने बताया कि उनके पास पाकिस्तानी गिरोह हमेशा आते रहते हैं और कश्मीर के बारे में अपना नैरेटिव बताते रहते हैं। यही कारण है कि उनकी बात ज्यादा सुनाई देती है। वो चिल्ला-चिल्ला कर झूठ बोलते हैं, बार-बार बोलते हैं, सबको जाकर बोलते हैं।

भारत में बढ़ रही हैं इस्लामी कट्टरपंथियों की साजिशें, दूसरे विभाजन की तैयारी में?

सच्चाई क्या है। सच्चाई ये है कि भारत में इस्लामी कट्टरपंथी लगातार हावी हो रहे हैं। गोरखनाथ मंदिर पर हमला और रामनवमी के दिन एक दर्जन से भी अधिक स्थानों पर मुस्लिम भीड़ की हिंसा को छोड़ भी दें, तब भी पिछले कुछ दिनों में उनकी गतिविधियाँ हिन्दुओं की सतर्कता माँगती है। हाल ही में देश भर में 1000 महिलाओं और मूक-बधिर बच्चों को इस्लाम में धर्मांतरित करने वाले मौलाना उमर गौतम सहित कई लोगों की गिरफ़्तारी हुई थी। उत्तर प्रदेश ATS की इस जाँच में देश भर के कई इलाकों से आरोपित दबोचे गए हैं और पाकिस्तानी ISI से लिंक भी सामने आया है।

देश भर में ‘लव जिहाद’ की घटनाओं को ही ले लीजिए। भाजपा शासित राज्यों में इसके खिलाफ बने कानून का तो विरोध हो रहा है, लेकिन मुस्लिम युवकों द्वारा छद्म नाम रख कर हिन्दू लड़कियों को फाँसने और उनका इस्लामी धर्मांतरण करा देने के सैकड़ों मामले सामने आए हैं। विरोध इसके नहीं, लेकिन इसके खिलाफ बने कानून का हो रहा है। आपको मुस्लिम भीड़ द्वारा लिंचिंग का शिकार हुए भरत यादव या रूपेश पांडेय का नाम नहीं बताया जाएगा, लेकिन ये चिल्लाया जाएगा कि मुस्लिमों का नरसंहार हो रहा है।

कोरोना की पहली लहर निजामुद्दीन के मरकज से शुरू हुई थी, जहाँ मौलाना साद को कोरोना के सारे मेडिकल व सरकारी दिशानिर्देशों के उल्लंघन के लिए उकसाते हुए देखा गया। वहाँ तमाम दिशानिर्देशों की धज्जियाँ उड़ी। पुलिस की कार्रवाई के बाद सैकड़ों जमाती देश के कई मुस्लिम बहुल इलाकों में छिप गए। फिर क्या हुआ? वहाँ गई पुलिस और डॉक्टरों की टीम पर हमले। मेडिकल टीम पर मुस्लिम बहुल इलाकों में हमलों के कारण सरकार को नए नियम लाने पड़े।

भारत को फिर से खंडित करने की तैयारी चल रही है। मुल्ले-मौलवियों के भड़काऊ बयान सुर्खियाँ नहीं बनते। 15 मिनट पुलिस हटा कर हिन्दुओं के कत्लेआम की बात करने वाला अकबरुद्दीन ओवैसी विधायक बन जाता है और गरीबों तक कल्याणकारी योजनाएँ पहुँचाने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को विलेन बना कर प्रचारित किया जाता है। रामनवमी के दिन हिंसा का सन्देश है – ‘देश में अब हमारे इलाके बन गए हैं। वहाँ हिन्दू अपने त्योहार नहीं मना सकेंगे। मनाएँगे, तो हम हिंसा करेंगे। फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर झूठ फैलाएँगे कि हमारा नरसंहार हो रहा है।’

रामनवमी शोभा यात्रा में शामिल हिंदुओं पर बरसाए पत्थर, काँच की बोतलों से हमला: हिंसा के बाद ओडिशा के जोडा में धारा 144

ओडिशा (Odisha) के क्योंझर जिले के जोडा में निकली रामनवमी शोभा यात्रा में शामिल हिंदुओं पर स्थानीय मुस्लिमों ने हमला कर दिया। घटना सोमवार (11 अप्रैल 2022) की। इसके बाद से इलाके में माहौल तनावपूर्ण हैं। हिंसा के बाद जिला प्रशासन ने इलाके में धारा 144 लागू कर दी है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, हर साल की तरह हिंदू रामभक्त रामनवमी के मौके पर अखाड़ा जुलूस निकालना चाहते थे, इसके लिए पुलिस से इजाजत भी माँगी गई थी। लेकिन, पुलिस ने इससे इनकार करते हुए समुदाय के केवल पाँच सदस्यों को सोमवार को जुलूस निकालने की इजाजत दी। इसके बाद सोमवार को धार्मिक झंडों के साथ हिंदू भक्त जैसे ही वार्ड नंबर 4 स्थित शिवमंदिर के पास पहुँचे तो मुस्लिम उपद्रवियों ने उनका रास्ता रोक दिया। सड़क को जाम कर हिंदुओं के साथ बहसबाजी शुरू कर दी। उन्होंने हिंदुओं को मंदिर में क्षेत्र में जाने से रोक दिया और पत्थरबाजी शुरू कर दी। काँच की बोतलों से हिंदुओं पर हमले किए गए। हिंसक झड़प में कई लोग घायल हो गए।

पुलिस पर भी बरसाए पत्थर

गंभीर हालात को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस फोर्स पहुँची। लेकिन पुलिस पर भी पत्थर फेंके गए। उन्मादी भीड़ ने क्षेत्र में आसपास की दुकानों में तोड़फोड़ शुरू का दी। दो बाइक सहित कुछ दोपहिया गाड़ियों में आग लगा दी। भीड़ को कंट्रोल करने के लिए पुलिस को हवाई फायरिंग करनी पड़ी।

बताया जा रहा है कि दोनों समुदायों के बीच यह विवाद करीब 4 घंटे से भी अधिक चला। हालात को कंट्रोल करने के लिए एसपी मित्रभानु महापात्र, चंपुआ के डिप्टी कलेक्टर प्रताप प्रीतिमय, बड़बिल एसडीपीओ हिमांशु भूषण बेहरा, बड़बिल तहसीलदार आलोक पटेल, जोडा बीडीओ जगन्नाथ हनुमान सहित पुलिस अधिकारी मौके पर मौजूद थे। मामले में बाद पुलिस अधिकारियों ने मंगलवार सुबह 10 बजे तक कस्बे में आईपीसी की धारा 144 लागू कर दी।

जल्दी बच्चे पैदा करो और मस्त रहो: रणबीर-आलिया को संजय दत्त ने दिए ‘सुखी वैवाहिक जीवन’ के टिप्स

रणबीर कपूर और आलिया भट्ट की शादी की खबरों के बीच बॉलीवुड एक्टर संजय दत्त का बयान आया है। संजय दत्त ने अपनी बायोपिक में काम करने वाले रणबीर कपूर को नसीहत दी है कि वो शादी करके जल्दी-जल्दी बच्चा पैदा करें और खुश रहें।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, जब संजय दत्त से रणबीर और आलिया की शादी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने हैरानी से पहले पूछा- क्या वो शादी कर रहा है? इसके बाद उन्होंने कहा, “अगर वो शादी कर रहा है तो मैं उसके लिए बहुत खुश हूँ। आलिया सच में मेरे सामने पैदा हुई और मेरे सामने बड़ी हुई है। शादी एक कमिटमेंट हैं जिसे वो एक दूसरे के लिए कर रहे हैं। उन्हें उस पर टिके रहना होगा, एक दूसरे का हाथ पकड़े रहना होगा और सुख, शांति और वैभव की ओर आगे बढ़ना होगा। बच्चे जल्दी पैदा करना रणबीर और मस्त रहना।

केजीएफ-2 के प्रमोशन में जुटे संजय दत्त से जब कहा गया कि वो रणबीर-आलिया को सलाह दें कि शादी के बाद आने वाली परेशानियों से कैसे निपटा जाता है तो इस पर संजय दत्त ने कहा,

“ये दोनों की तरफ से समझौता करने की बात है। कई मुश्किल रास्ते आएँगे-जाएँगे। लेकिन किसी एक को झुकना होगा। मैं उन्हें सिर्फ इस स्थिति से अच्छे से निपटने और उसी रिश्ते में रहकर परिस्थिति के हिसाब से झुकने की सलाह दूँगा, क्योंकि जीवन के हर मोड़ पर उन्हें ये बात याद रखना होगा कि उन्होंने एक-दूसरे से जो कमिटमेंट किया था वह बेहद जरूरी है। और यही आगे बढ़ने की चाबी भी है।”

गौरतलब है कि रणबीर और आलिया एक दूसरे को डेट कर रहे हैं- ये बात लंबे समय से मीडिया में थी। लेकिन हाल में पता चला कि ये दोनों स्टार किड एक दूसरे से जल्द ही शादी करने वाले हैं। हालाँकि जब इस विषय पर पुष्टि करने की कोशिश की गई तो कहीं से कोई साफ जवाब नहीं आया। पिछले दिनों जब नीतू कपूर से रणबीर और आलिया की शादी की खबरों पर सवाल किया गया था तो उन्होंने हँस के बात को टाल दिया था।

संजय दत्त की बात करें तो वह इस समय कन्नड़ फिल्म जगत में डेब्यू कर रहे हैं। जल्द ही वह केजीएफ-2 में नजर आएँगे। उन्हीं की बायोपिक ‘संजू’ में रणबीर कपूर ने उनका किरदार निभाया था जिसे देख संजय दत्त तो उनसे खुश थे ही, साथ में अन्य फिल्म आलोचकों ने भी रणबीर को उनकी एक्टिंग के लिए सराहा था।