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मुंबई इंडियंस में युजवेंद्र चहल का शारीरिक शोषण भी हुआ था, अब मुश्किल में विदेशी क्रिकेटर: जानें क्या है मामला

भारतीय क्रिकेट टीम के लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल ने हाल में अपने साथ 2011 में घटित हुए एक वाकया का खुलासा करके सबको चौंका दिया। उन्होंने बताया कि कैसे मुंबई इंडियंस की ओर से IPL खेलते हुए उनके दो साथी क्रिकेटरों ने उनके साथ बदसलूकी करते हुए उन्हें रात भर रस्सी से बाँधे रखा था और बाद में उनसे माफी भी नहीं माँगी थी। इन दोनों क्रिकेटरों के नाम जेम्स फ्रैंकलीन (न्यूजीलैंड) और एंड्रियू साइमंड्स (ऑस्ट्रेलिया) हैं।

आरसीबी पॉडकॉस्ट पर चहल के इसी खुलासे के बाद खबर आई है कि इंग्लैंड की काउंटी टीम डरहम ने अपने मुख्य कोच जेम्स फ्रैंकलिन से निजी तौर पर बात करने का फैसला लिया है। डरहम ने कहा है कि वो इस बाबत जेम्स फ्रैंकलीन से बात करेंगे और अधिक तथ्य जुटाने का प्रयास करेंगे। अपने बयान में डरहम टीम ने कहा, “हमें हाल फिलहाल में आई न्यूज रिपोर्ट्स का पता चला जो साल 2011 की घटना से जुड़ी हैं और जिसमें हमारे स्टाफ का नाम है। हमारे स्टाफ का नाम होने की वजह से क्लब उनसे अकेले में बात करेगा और तथ्यों का पता लगाएगा।”

जेम्स फ्रैंकलीन न्यूजीलैंड के पूर्व क्रिकेटर हैं। उन्हें 2019 में डरहम कोच के तौर पर नियुक्त किया गया था। उन्होंने 31 टेस्ट, 110 एक दिवसीय और 38 टी-20 मैच खेले हैं। इन सबके अलावा फ्रैंकलीन ने मुंबई इंडियंस की ओर से 2011 और 2012 में 20 खेल भी खेले थे।

2011 में मुंबई इंडियंस की जीत के बाद चहल के बाँधे गए हाथ-पाँव

साल 2011 में ऑस्ट्रेलिया के एंड्रियू साइमंड्स, न्यूजीलैंड के जेम्स फ्रैंकलीन और भारत के युजवेंद्र चहल मुंबई इंडियंस टीम का हिस्सा थे। युजवेंद्र ने हाल में ही ये खुलासा किया कि उस समय फ्रैंकलीन और साइमंडस ने उनके हाथ-पाँव बाँधकर उन्हें कमरे में बंद कर दिया था और बाद में अपनी की हरकत को भूल भी गए थे।

चहल ने कहा था, “ये घटना 2011 की है जब मुंबई इंडियंस ने चैंपियंस लीग को जीता था। हम चेन्नई में थे। साइमंड्स ने बहुत फ्रूट जूस पी लिया था। मुझे नहीं पता कि वो क्या सोच रहा था लेकिन उसने और जेम्स फ्रैंकलीन ने साथ में मेरे हाथ-पैर बाँधे और कहा कि तुम्हें ही गाँठ खोलनी होगी। वे इतना खोए हुए थे कि उन्होंने मेरा मुँह टेप से बाँध दिया था और मेरा ध्यान उन्हें पूरी पार्टी में नहीं था। वे सब चले गए थे। सुबह में जब कोई सफाई के लिए आया और मुझे देखा तब मेरे हाथ खोले। उन्होंने मुझसे पूछा कि आप कब से थे यहाँ। इस पर मैंने कहा कि मैं तो पूरी रात से यही हूँ। ये एक एक मजाकिया कहानी बन गई।”

चहल से जब पूछा गया कि क्या उनसे किसी ने इस हरकत के लिए माफी माँगी। इस पर चहल ने कहा, “नहीं। उन लोगों ने कहा कि जब आप जूस ज्यादा पी लेते हो तो आपको सुबह में याद नहीं रहता।”

जब 15 वीं मंजिल से लटका दिए गए थे चहल

बता दें कि इससे पहले युजवेंद्र चहल ने इससे पहले अपने साथ साल 2013 में घटित घटना के बारे में खुलासा किया था। उन्होंने बताया था कि  2013 में आईपीएल के छठे सीजन में उनकी जान जाते-जाते बची थी। उस समय वह मुंबई इंडियंस का हिस्सा थे। उन्होंने कहा था, “मेरी यह स्टोरी कुछ लोगों को पता है। लेकिन आज से पहले मैंने यह बात कभी किसी को नहीं बताई। अब लोग इसके बारे में जानेंगे। यह 2013 की बात है, जब मैं मुंबई इंडियंस टीम का हिस्सा था। हमारा बैंगलोर में एक मैच था। मैच के बाद एक गेट-टुगेदर था। वहाँ एक खिलाड़ी था, जो शराब के नशे में धुत था, मैं उसका नाम नहीं लूँगा। वह काफी देर से मुझे घूर रहा था, फिर कुछ सोचकर उसने मुझे अपने पास बुलाया।”

चहल ने आगे कहा था, “वह मुझे बाहर ले गया और मुझे बालकनी से लटका दिया। मेरे हाथ उसके गले से लिपटे हुए थे। अगर मेरा हाथ फिसल जाता तो… मैं 15वीं मंजिल से ही गिर गया होता। तभी वहाँ मौजूद लोगों ने पूरी स्थिति को सँभाला। मैं तो बेहोश हो गया था, मुझे लोगों ने पानी पिलाया। उस दिन मुझे समझ में आया कि हमें बाहर जाते हुए कितना सर्तक रहना चाहिए। यह एक ऐसी घटना थी, जिसमें मैं बाल-बाल बचा था। अगर थोड़ी सी भी चूक हो जाती तो मैं 15वीं मंजिल से नीचे गिर गया होता।”

‘तलवार लेकर हिंदुओं की तरफ दौड़ा… मैं पकड़ने को भागा तो पीछे से गोली मार दी’: खरगोन के SP ने बताया- रामनवमी शोभा यात्रा पर हमला कैसे

रामनवमी शोभा यात्रा पर देश के कई राज्यों में इस बार हमला हुआ है। ऐसी ही एक घटना मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के खरगोन से भी सामने आई थी। हिंसा करने वालों से शिवराज सरकार सख्ती से निपट रही है। जिला प्रशासन ने पत्थरबाजों के अवैध निर्माणों को बुलडोजर से ढाह दिया है।

10 अप्रैल 2022 को भड़की हिंसा में खरगोन के पुलिस अधीक्षक (SP) सिद्धार्थ चौधरी को भी गोली लगी थी। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने विस्तार से उस दिन की घटना के बारे में बताया है। यह भी बताया है कि कैसे उनको गोली लगी और किस तरह पत्थरबाजी में उनका गनमैन घायल हुआ था।

एसपी ने बताया कि एक व्यक्ति तलवार लेकर हिंदुओं की तरफ दौड़ा था। उन्होंने 12-15 पुलिसवालों के साथ उसे पकड़ने की कोशिश की। पुलिस ने उसे पकड़ लिया, लेकिन वह छूटकर फिर से भागने लगा। फिर एसपी ने जैसे ही उसे दौड़कर पकड़ने की कोशिश की, किसी ने पीछे से उनके पैर पर गोली मार दी। चौधरी ने बताया कि शुरुआत में उन्हें लगा कि किसी ने पत्थर मारा है। लेकिन उनके गनमैन को समझ आ गया था कि गोली लगी है। सिर पर चोट लगे होने के बावजूद गनमैन खून से लथपथ एसपी को हॉस्पिटल लेकर गए।

एसपी सिद्धार्थ चौधरी ने बताया कि मुख्य झाँकी न आने की वजह से जुलूस निकलने में थोड़ी देर हो गई थी। इस दौरान मस्जिद में नमाज का समय हो गया और फिर हालात बिगड़ गए। उन्होंने बताया है कि प्रशासन झाँकियों को धीरे-धीरे आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन पीछे से कुछ लोगों ने पत्थर फेंकना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे लोग इकट्ठा हो गए और आगजनी करनी शुरू कर दी। संकरी और तंग गली होने के बावजूद पुलिस वालों ने जिन घरों में आग लगी थी, वहाँ से लोगों को सुरक्षित निकाला।

क्या है पूरा मामला?

10 अप्रैल को खरगोन के तालाब चौक इलाके में रामनवमी की शोभा यात्रा निकाली गई थी। इस यात्रा के दौरान कुछ लोगों ने पथराव किया। 30 से ज्यादा दुकानों और मकानों में आग लगा दी गई और मंदिरों में भी तोड़फोड़ की गई। इस हिंसा के दौरान छह पुलिसकर्मियों समेत 24 लोग घायल हो गए। हमले के बाद शांति-व्यवस्था कायम रखने के लिए कर्फ्यू लगा दिया गया। एक रिपोर्ट के अनुसार यह घटना अचानक नहीं घटी। यह पूर्व नियोजित हमला था। उपद्रवियों ने पहले से ही छतों पर पत्थर और पेट्रोल बम जमा कर रखे थे।

दिल्ली दंगों में शरजील इमाम को बेल देने से कोर्ट का इनकार, ठुकराई ‘पहले गिरफ्तारी-बाद में दंगा’ वाली दलील

दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों में यूएपीए के तहत आरोपित बनाए गए जेएनयू के पूर्व छात्र शरजील इमाम को दिल्ली कोर्ट ने सोमवार (11 अप्रैल 2022) को बेल देने से मना कर दिया। दिल्ली कोर्ट के विशेष न्यायाधीश अभिताभ रावत ने इमाम की बेल याचिका खारिज करते हुए कहा कि शरजील के खिलाफ जो आरोप लगाए गए हैं उन्हें सच मानने के लिए उनके पास उचित आधार हैं। वहीं इस फैसले से पहले सुनवाई के दौरान इमाम के वकील ने  कहा कि उनके मुअक्किल की गिरफ्तारी दंगों से पहले हुई थी इसलिए उसका दंगों की साजिश रचने में कोई हाथ नहीं है।

शरजील इमाम के पक्ष और विरोध में दी गई दलीलें

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, शरजील इमाम के वकील तनवीर अहमद मीर ने इमाम के लिए दलील देते हुए कहा कि उस पर लगाए गए साजिश के इल्जाम गलत हैं क्योंकि उसकी गिरफ्तारी हिंसा से पहले ही हो गई थी और हिंसा बाद में हुई। मीर ने इमाम को छुड़वाने के लिए कोर्ट में कहा, “हम ऐसी व्यवस्था को बर्दाश्त नहीं कर सकते जहाँ साजिशें अंतहीन हो जाती हैं और अनंत काल तक चलती ही रहती हैं।” मीर ने कोर्ट में इमाम के ऊपर लगे इल्जामों पर सवाल उठाए और पूछा क्या पूरे मामले में शरजील इमाम को जिम्मेदार ठहराने के लिए कोई सबूत है जो बताता है कि दंगों के दौरान हत्या करने की साजिश रची गई।

इस सुनवाई के वक्त इमाम की बेल याचिका के विरोध में राज्य की ओर से पेश हुए पब्लिक प्रॉजियक्यूटर अमित प्रसाद ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने कोर्ट को साफ किया कि जैसा कि साजिश की बात बार-बार तनवीर दोहरा रहे हैं, हकीकत में कि इमाम की गिरफ्तारी पहले साजिश के लिए नहीं बल्कि देशद्रोह वाले भाषण के लिए हुई है। इसलिए इमाम के वकील बार-बार ‘साजिश’ कहकर बहस को गुमराह न करें। प्रसाद ने कहा अगर किसी तरह की साजिश की गई और जाँच एजेंसियों ने उसे पहचान कर दंगे होने से रोक भी लिए तो भी वो साजिश ही हलाती है।

कोर्ट ने माना- अभी बेल देना ठीक नहीं

दलीलों को सुनने के बाद अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने माना कि मामले की मौजूदा हालत इमाम को जमानत पर रिहा करने के लिए अनुकूल नहीं हैं। इससे पहले दिल्ली पुलिस ने भी दलील दी थी कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए शरजील इमाम को जमानत न दी जाए, क्योंकि अगर ऐसा हुआ तो आरोपित कानून की प्रक्रिया से बच सकता है और गवाहों को धमका सकता है।

शरजील के ख़िलाफ़ 24 जनवरी 2022 को पूर्वी दिल्ली की अदालत ने देशद्रोह समेत आईपीसी की संगीन धाराओं में आरोप तय किए थे। कोर्ट ने कहा था कि इमाम ने 2019 में जो भड़काऊ बयानबाजी करके असम को देश से काटने की बात की थी उसके लिए उन्हें ट्रायल का सामना करना होगा। इसके अलावा उसके चक्का जाम करने वाले भाषण के ऊपर उसके विरुद्ध यूएपीए के तहत भी केस दर्ज हुआ था।

‘हमने यूक्रेन और पड़ोसी देशों को भेजी दवाएँ, राहत सामग्रियाँ’: अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ बैठक में बोले PM मोदी – बुचा में निर्दोषों की हत्या चिंताजनक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने सोमवार (11 अप्रैल 2022) को अमेरिका के राष्ट्रपति जो बायडेन (Joe Biden) के साथ वर्चुअल बैठक की। बैठक से पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सोमवार को वाशिंगटन स्थित अमेरिकी रक्षा विभाग के मुख्यालय पेंटागन पहुँचे, जहाँ पर अमेरिकी रक्षा सचिव लॉयड जे ऑस्टिन ने उनका स्वागत किया। वहीं, बैठक में हिस्सा लेने के लिए विदेश मंत्री एस. जयशंकर पहले ही अमेरिका पहुँच गए थे। दोनों भारत और अमेरिका के बीच होने वाली इस बैठक को सकारात्मक बता रहे हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन ने ट्वीट किया, “आज सुबह मैंने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वर्चुअल बैठक की। मैं हमारी सरकारों, अर्थव्यवस्थाओं और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करने की आशा करता हूँ।” वहीं इस मामले में विशेषज्ञों ने कहा कि रूस और यूक्रेन के युद्ध की वजह से भारत और अमेरिका के संबंधों में तनाव आ गया था। अमेरिका चाहता था कि भारत खुलकर रूस का विरोध करे, लेकिन मोदी सरकार ने ऐसा करने से इनकार कर दिया। अब इस बैठक के बाद उम्मीद जताई जा रही कि दोनों के बीच तनाव काफी हद तक कम होगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन के साथ वर्चुअल बातचीत में पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमने यूक्रेन और अन्य पड़ोसी देशों को दवाएँ और अन्य राहत सामग्री भेजी है। यूक्रेन की माँग पर हम जल्द उन्हें दवाओं की एक और खेप भेज रहे हैं।

पीएम ने ​आगे कहा, “मैंने यूक्रेन और रूस के राष्ट्रपतियों से कई बार फोन पर बात की और उनसे शांति की अपील की। मैंने राष्ट्रपति पुतिन को यूक्रेन के राष्ट्रपति के साथ सीधी बातचीत करने का भी सुझाव दिया। बुका में निर्दोष नागरिकों की हत्या बहुत ही चिंताजनक है। हमने इसकी निंदा की और निष्पक्ष जाँच की भी माँग की।”

बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी ने 1 अप्रैल को रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से भी मुलाकात की थी। पीएम मोदी और रूस के विदेश मंत्री के बीच यह मुलाकात करीब 40 मिनट तक चली थी। इस दौरान उन्होंने यूक्रेन मसले को लेकर भारत के रुख की तारीफ करते हुए कहा था कि रूस इस बात की सराहना करता है कि भारत एकतरफा न होकर स्थिति को पूरी तरह से समझकर आगे बढ़ रहा है।

‘कैसे पता चलेगा उसका रेप हुआ, क्या वो गर्भवती थी’: नादिया में गैंगरेप के बाद नाबालिग की मौत, ममता बनर्जी ने पीड़िता पर ही उठाए सवाल

पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के हंसखली में एक जन्मदिन की पार्टी में कथित तौर पर गैंगरेप के बाद एक नाबालिग लड़की की मौत हो गई। पुलिस ने रविवार (10 अप्रैल, 2022) को इसकी जानकारी दी। वहीं लड़की के परिवार ने दावा किया कि इस मामले में मुख्य आरोपित तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के एक पंचायत सदस्य का बेटा है। जिसे गिरफ्तार कर लिया गया है।

वहीं आज मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस घटना को लेकर परिवार के गैंगरेप के दावे पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। बनर्जी ने कहा, “आपको कैसे पता कि उसके साथ रेप हुआ, क्या वो प्रेग्नेंट थी, या लव अफेयर का मामला था या फिर वह बीमार थी।” उन्होंने कहा कि अगर कपल रिलेशनशिप में है तो हम उन्हें कैसे रोक सकते हैं, यह यूपी नहीं है कि मैं लव जिहाद के नाम पर ऐसा कर सकती हूँ। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि बाल आयोग इस केस में रेप और हत्या की जाँच करेगा।

बता दें कि बंगाल के नदिया में नौवीं क्लास की छात्रा के माता-पिता ने घटना के चार दिन बाद शनिवार (9 अप्रैल) को हंसखली थाने में आरोपित के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के मुताबिक, लड़की सोमवार (4 अप्रैल) को आरोपित की जन्मदिन की पार्टी में शामिल होने के लिए उसके घर गई थी, लेकिन वह बीमार हालत में घर लौटी, हमारी बेटी का बहुत खून बह रहा था और पेट में तेज दर्द हो रहा था, और इससे पहले कि हम उसे अस्पताल ले जाते, उसकी मौत हो गई।

मामले में परिवार का दावा है कि घटनाओं के क्रम और पार्टी में मौजूद लोगों से बात करने के बाद उन्हें यकीन है कि आरोपित और उसके दोस्तों ने उनकी बेटी के साथ सामूहिक बलात्कार किया था। वहीं परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि लोगों का एक समूह नाबालिग का मृत्यु प्रमाण पत्र जारी होने से पहले ही उसके शव को ले जाकर जबरन दाह संस्कार कर दिया।

गौरतलब है कि कलकत्ता हाईकोर्ट में सोमवार को एक याचिका दायर कर नदिया जिले में नाबालिग से कथित सामूहिक बलात्कार और उसकी वजह से हुई मौत के मामले की जाँच सीबीआई से कराने का अनुरोध किया गया। इस याचिका में दावा किया गया है कि आरोपित TMC के एक पंचायत नेता का बेटा है। याचिकाकर्ता के वकील अनिंद्य सुंदर दास ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश प्रकाश श्रीवास्तव की अदालत ने इस मामले की तत्काल सुनवाई की अनुमति दी है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, वकील ने बताया कि इस मामले का ज‍िक्र मंगलवार को संभवत: अदालत के सामने किया जाएगा। दास ने कहा कि इस मामले की जाँच सीबीआई से कराने का अनुरोध किया गया है क्योंकि आरोपित तृणमूल के एक पंचायत सदस्य का बेटा है।

उन्होंने कहा कि पुलिस को कथित तौर पर घटना होने के एक हफ्ते बाद पता चला। वहीं लड़की के परिवार के सदस्यों ने पुलिस को दी गई शिकायत में बताया कि वह चार अप्रैल को आरोपित के जन्मदिन की पार्टी में उसके घर, नदिया जिले के हंसखली में गई थी और उसके साथ दुष्कर्म करने से पहले उसे नशीला पदार्थ दिया गया था।

‘हवन से कुछ छात्रों को थी दिक्कत, रात में परोसा गया मांसाहारी भोजन’: JNU ने रामनवमी विवाद पर जारी किया बयान

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में रामनवमी की पूजा में विघ्न डालने और एबीवीपी के सदस्यों के साथ मारपीट करने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। दरअसल, रामनवमी समारोह के दौरान वामपंथी छात्रों द्वारा हमले किए जाने के एक दिन बाद जेएनयू ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इस मामले पर अपनी सफाई दी है। संस्थान ने कहा, “जेएनयू प्रशासन ने छात्रों से संयम बरतने और जेएनयू का माहौल ना बिगाड़ने की अपील की थी।”

जेएनयू प्रशासन की ओर से विज्ञप्ति जारी की गई

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय ने सोमवार (11 अप्रैल, 2022) को कावेरी हॉस्टल में रामनवमी समारोह पर हुए हमले का संज्ञान लिया है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के सदस्यों, नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) सहित वामपंथी छात्र संगठनों का हंगामा मीडिया में आने के बाद जेएनयू प्रशासन ने इसकी निंदा की है।

संस्थान ने एक आधिकारिक बयान जारी कर के कहा, “10 अप्रैल, 2022 को जेएनयू कैंपस में छात्र संगठनों के बीच हाथापाई हुई थी। रामनवमी के अवसर पर कावेरी हॉस्टल में छात्रों ने हवन का आयोजन किया था। तभी वहाँ मौजूद कुछ छात्रों ने इसका विरोध किया। छात्रों के वार्डन और डीन द्वारा मामला शांत करने कराने के बाद हवन शांतिपूर्वक संपन्न हुआ।”

बयान में आगे कहा गया है, “इसके बावजूद, छात्रों के कुछ संगठन इससे खुश नहीं थे। उन्होंने तुरंत बाद, रात के खाने के समय वहाँ पर हंगामा किया और कावेरी हॉस्टल में दोनों समूहों के बीच काफी बहस हुई। मेस का संचालन छात्र समिति करती है। प्रशासन का उनके मेन्यू से कोई लेना-देना नहीं है। वार्डन ने मौके पर सफाई दी और छात्रों के बीच हंगामा होने पर नोटिस जारी किया कि मांसाहारी भोजन परोसने पर कोई रोक नहीं है।”

स्थिति को शांत करने के लिए प्रशासन द्वारा उठाए गए कड़े कदमों का जिक्र करते हुए बयान में कहा गया है, “वार्डन ने रात में शांति बनाने और मामले को स्पष्ट करने के लिए एक नोटिस जारी किया, जिसके बाद जेएनयू प्रशासन तुरंत हरकत में आया। जेएनयू की कुलपति प्रो. शांतिश्री धूलिपदी पंडित ने कावेरी हॉस्टल का दौरा किया और स्थिति का जायजा लिया। जेएनयू एक समृद्ध विरासत वाली संस्था है, जिसने कई पीढ़ियों को शिक्षित किया है। यह हमेशा से स्वस्थ बहस और एक मजबूत संस्कृति के साथ अकादमिक और बौद्धिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है।”

रामनवमी की रात क्या हुआ था?

एक दिन पहले यानी रामनवमी के मौके पर एबीवीपी ने आरोप लगाया था कि वामपंथी छात्र रामनवमी की पूजा करने से लोगों को रोक रहे थे। वहीं वामपंथियों ने कहा था कि एबीवीपी वालों ने उन्हें नॉन वेज खाने से रोका। सोशल मीडिया पर इस झड़प की वीडियो ही सामने आई थी, जिसमें कई छात्रों के सिर और हाथ से खून बहता दिखाई दे रहा था। एबीवीपी ने यह भी आरोप लगाया था कि नॉन-वेज को मुद्दा बनाना वामपंथियों की साजिश थी। वह लोग हॉस्टल में रामनवमी मना रहे थे और उसी समय इफ्तार का कार्यक्रम भी यूनिवर्सिटी में चल रहा था। ये वामपंथियों से बर्दाश्त नहीं हुआ और उन्होंने नॉन वेज को मुद्दा बनाकर माहौल बिगाड़ दिया।

ऑपइंडिया से बात करते हुए एबीवीपी की राष्ट्रीय महासचिव निधि त्रिपाठी ने बताया कि कल छात्रों ने कावेरी हॉस्टल में रामनवमी की पूजा का आयोजन किया था। हॉस्टल के मेस के अंदर इसी समय इफ्तार पार्टी चल रही थी और बाहर पूजा का आयोजन किया हुआ था। अच्छे से सारी चीज हो रही थीं। लेकिन ये सब वामपंथियों को रास नहीं आया। वो बाहर इकट्ठा हुए और जब छात्र पूजा करके बाहर निकलने लगे तो उन पर हमला कर दिया।

निधि के अनुसार, वामपंथियों का गुट उसी समय से रामनवमी पूजा का विरोध कर रहा था जबसे इस पूजा के पोस्टर छापे गए थे। हालाँकि, तमाम विरोध के बावजूद कल पूजा हुई जिसे देख वामपंथी बाहर इकट्ठा होना शुरू हो गए। निधि बताती हैं कि जब छात्र पूजा करके वापस मेस से होते हुए लौटे तो उन पर हमला किया गया। इस हमले में दिव्या नाम की छात्रा के हाथ में काँच की बोतल से मारा गया जिससे उसे चोटें आईं। रवि राज नाम का छात्र है वो भी पूजा से वापस आ रहा था तो उसके हाथ पर भी किसी धारदार हथियार से मारा गया जिसके कारण उसे 8 टांके आए हैं। महासचिव बताती हैं कि वामपंथियों ने एक दिव्यांग विद्यार्थी को भी मारा और उनके कपड़े भी फाड़े।

तीन तलाक के बाद सउदी अरब भागने की फिराक में था शौहर सलमान खान, आगरा पुलिस ने दबोचा, दूसरी निकाह की दे रहा था धमकी

यूपी के आगरा में ट्रिपल तलाक देने का एक मामला सामने आया है। थाना एत्माद्दौला पुलिस ने पत्नी को तीन बार तलाक बोलने के मामले में आरोपित शौहर को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का कहना है कि वह सऊदी अरब भागने की फिराक में था।

आगरा पुलिस द्वारा जारी बयान में एत्माद्दौला थाने के प्रभारी निरीक्षक सत्यदेव शर्मा के मुताबिक, “अफसाना ने थाने में FIR दर्ज कराया था और आरोप लगाया कि ससुराल के लोग दहेज की माँग कर रहे हैं।”

शिकायत में अफसाना ने यह भी बताया कि शौहर सऊदी अरब में काम करता है। वह घर आया था और दूसरे निकाह की धमकी दे रहा था। तभी उसने तीन तलाक बोल दिया था। शौहर सलमान खान उर्फ इकरार खान मूल रूप से अलीगढ़ के बन्नादेवी इलाके का रहने वाला बताया जा रहा है।

आगरा पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर इस मामले में आरोपित की तलाश शुरू कर दी थी। जिसके बाद शनिवार (9 अप्रैल, 2022) को ही मछली वाली पुलिया से आरोपित सलमान खान उर्फ इकरार को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ़्तारी के बाद पुलिस ने आरोपित से थाने ले जाकर पूछताछ की।

कहा जा रहा है कि पुलिस ने पीड़िता अफसाना को भी थाने बुलाकर पूछताछ की है। आगरा पुलिस ने महिला को आश्वासन दिया है कि मामले जाँच के बाद आरोप सही पाया गया तो आरोपित इकरार के खिलाफ सम्बंधित धाराओं में कार्रवाई की जाएगी।

‘रॉकिंग स्टार’ यश ने नृसिंह मंदिर में की पूजा-अर्चना, तिलक भी लगाया: रिलीज से पहले ही ‘KGF 2’ ने तोड़ा ‘RRR’ का रिकॉर्ड

कन्नड़ सुपरस्टार यश की फिल्म ‘केजीएफ चैप्टर 2’ (KGF Chapter 2) 14 अप्रैल को सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली है। फिल्म की रिलीज से पहले यश (Yash) ने आंध्र प्रदेश के विजाग में स्थित सिंहाचलम मंदिर में भगवान नृसिंह की पूजा अर्चना की। इस दौरान अभिनेता ने मल्टी शेड शर्ट और काले रंग की डेनिम पहन रखी थी, साथ ही उन्होंने अपनी कमर में एक गमछा भी लपेटा हुआ था।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही फोटो में अभिनेता माथे पर तिलक लगाते और भगवान नृसिंह की प्रार्थना करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इससे पहले फरवरी में यश भगवान गणेश का आशीर्वाद लेने के लिए कर्नाटक के प्रसिद्ध अनेगुड्डे श्री विनायक मंदिर (Anegudde Shri Vinayaka Temple) गए थे।

फिल्म का निर्देशन प्रशांत नील ने किया है, जिन्होंने केजीएफ चैप्टर 1 के पहले भाग को भी निर्देशित किया था। फिल्म के दूसरे भाग में यश के अलावा बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त और रवीना टंडन, श्रीनिधि शेट्टी और प्रकाश राज अहम किरदार में हैं। बताया जा रहा है कि फिल्म का क्लाइमेक्स बेहद जबरदस्त है। यही कारण है​ कि फिल्म का प्रमोशन भी काफी जोर शोर से किया जा रहा है। ‘केजीएफ: चैप्टर 2’ के निर्माता फिल्म के डिजिटल प्रमोशन में भी कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।

ट्रेलर लॉन्च करने के बाद सोशल मीडिया पर अभिनेता के डिजिटल अवतार को मेटावर्स प्लेटफॉर्म पर भी साझा किया गया और इसे ‘KGFVerse’ पर डब किया जा रहा है। ‘यश बॉम्बे रॉकी’, ‘नाराची रॉकी’ और ‘तूफान रॉकी’ के तीन डिजिटल अवतार मेटावर्स पर हैं। 2018 की ब्लॉकबस्टर फिल्म का दूसरा भाग भी कन्नड़ के अलावा तेलुगु, हिंदी, तमिल और मलयालम भाषा में डब करके रिलीज किया जाएगा।

यही नहीं, यश की फिल्म ने रिलीज से पहले ही राम चरण तेजा (Ram Charan Teja) और जूनियर एनटीआर (Jr NTR) की फिल्म ‘RRR’ का रिकॉर्ड तोड़ डाला। दक्षिण भारतीय फिल्मों के ​दीवाने यश की फिल्म जल्द से जल्द बड़े पर्दे पर देखने को बेताब हैं। इसलिए वह एडवांस में ही फिल्म की टिकट खरीद रहे हैं। फिल्म के टिकट 2000 रुपए में बिक रहे हैं। यही कारण है कि ‘केजीएफ 2’ फिल्म एडवांस बुकिंग के मामले में ताबड़तोड़ कमाई कर सुपरहिट फिल्मों का रिकॉर्ड तोड़ रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केजीएफ 2 के हिंदी वर्जन (KGF 2 Hindi version) की अभी तक 11 करोड़ रुपए से अधिक की कमाई हो चुकी है। इसकी तुलना में आरआरआर के हिंदी वर्जन की एडवांस बुकिंग 5 करोड़ से थोड़ी ज्यादा हुई थी। फिल्म ट्रेड एनालिसिस प्लेटफॉर्म ‘इंडियन बॉक्स ऑफिस (KGF Box Office Collection)’ के एक ट्वीट के अनुसार, फिल्म उत्तर भारत में 20 करोड़ रुपए के टिकट बेच चुकी है, जिसमें अकेले हिंदी वर्जन से 11.4 करोड़ रुपए आए हैं।

फोटो साभार: ट्विटर

ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श के मुताबिक, हिंदी के दर्शकों में फिल्म को लेकर काफी क्रेज है। उन्होंने लिखा, “मुंबई की कुछ जगहों पर टिकट की कीमतें 1450 से 1500 रुपए प्रति सीट है। दिल्ली में 1800 से 2000 रुपए के टिकट बेचे जा रहे हैं। बॉक्स ऑफिस पर तूफान आ रहा है।”

फोटो साभार: ट्विटर

बता दें कि विशाखापट्टनम (Visakhapatnam) से महज 16 किमी दूर सिंहाचल पर्वत (Sinhachal Mountains) पर भगवान नृसिंह का प्राचीन और विशाल मंदिर है। यह मंदिर भगवान विष्‍णु के नृसिंह रूप की पूजा के लिए प्रमुख मंदिर है। सिंहाचलम मंदिर ग्यारहवीं शताब्दी में बने विश्व के गिने-चुने प्राचीन मंदिरों में से एक माना जाता है। सिंहाचल शब्द का अर्थ है सिंह का पर्वत। यह पर्वत भगवान विष्णु के चौथे अवतार नृसिंह का निवास स्थान माना जाता है। मान्यता है कि इसी स्थान पर भगवान नृसिंह अपने भक्त प्रहलाद की रक्षा के लिए अवतरित हुए थे।

350+ लापता बच्चों को खोज चुके हैं यूपी के DSP सुनील दत्त दुबे: एक को तो 45 साल बाद माँ से मिलाया, कई लड़कियों को बचाया

यूपी पुलिस के अधिकारी सुनील दत्त दुबे अब तक 350 से अधिक खोए बच्चों को खोज कर उनके परिवार से मिला चुके हैं। सुनील दत्त दुबे वर्तमान में जिला महराजगंज के फरेंदा में डिप्टी SP के पद पर सेवाएँ दे रहे हैं। लापता बच्चों को तलाशने के साथ ही इन्होंने कई गायों को भी कटने से बचाया है। साथ ही पुलिस के कई संगठित अपराध और आतंकवाद विरोधी अभियानों में शामिल रहे हैं। ऑपइंडिया ने उन्हें बात कर के इस उपलब्धि के बारे में और अधिक जानकारी ली।

गुमशुदा बच्चों की तलाश में देश के कई हिस्सों में गया

ऑपइंडिया से बात करते हुए सुनील दत्त दुबे ने कहा, “मैंने गुमशुदा बच्चों की तलाश के अभियान को एक चुनौती के रूप में लिया। कार्रवाई सिर्फ कागज़ों पर ही न दिखे, इसका भी मैंने ध्यान रखा। बेसहारा बच्चों को रखने वाली देश के कई हिस्सों में चल रही NGO से मिला। मैंने पाया कि गरीब परिवार अपने गुमशुदा बच्चों को खोजने का सामर्थ्य नहीं रखते थे। मैंने ऐसे बच्चों की तलाश के लिए अपने थाने में एक टीम बनाई। जैसे ही किसी गुमशुदगी की सूचना मिलती थी, मेरी वो टीम सक्रिय हो जाती थी। मैं रेलवे स्टेशन, बस अड्डे और गायब होने के स्थान के आसपास से फुटेज उठाता था। देश भर के NGO के नंबर और ई-मेल लेने के बाद उन्हें मेल और फोन कर सूचना देता था। इस के चलते कई बच्चे चेन्नई, मुंबई और कोलकाता से बरामद हुए।”

यूपी पुलिस की डीएसपी सुनील दत्त दुबे

एक गुमशुदा को सऊदी अरब से तो एक अन्य को 41 साल बाद खोजा

सुनील दत्त दुबे ने बताया, “अपनी तलाश के दौरान एक बच्चा सऊदी अरब की जेल में मिला। मैंने लोगों से पैसे जुटा कर उसको वापस लाने में सफलता पाई। भदोही जिले के औराई क्षेत्र के गाँव सहसेपुर का 15 साल की उम्र में एक बच्चा बिछड़ गया था। सन् 1977 में गुमशुदा वो बच्चा 42 साल बाद 57 साल की उम्र में अपने परिवार से मिला था। वो राजस्थान की एक संस्था में रह रहा था और उसे अपने घर के बारे में सिर्फ वाराणसी की जानकारी थी। जब उसको खोजा गया, तब उसकी माँ जीवित थी। उसने अपने भाइयों को भी पहचाना। आज वो अपने परिवार में ख़ुशी से रह रहा है। ख़ास बात तो ये है कि सरकारी कागज़ों में उसका नाम ही गायब हो गया था।”

DSP फरेंदा के मुताबिक, “इसी प्रकार रेलवे स्टेशन पर मिले एक बच्चे को मैंने नेपाल में उसके घर पहुँचाया था। इसके अलावा बिहार से 6 साल की उम्र में आया एक बच्चा चाय की दुकान पर काम करता था। उसको अपने घर के बारे में पता ही नहीं था। उसको ले कर हमें 3 बार बिहार जाना पड़ा। एक बार भदोही जिले की 2 लड़कियाँ गायब हुई थीं, तब मैंने उन्हें एक संस्था के माध्यम से चेन्नई में बरामद किया था। एक बार तो प्रयागराज की एक संस्था में मिर्जापुर का एक बच्चा अपना घर और परिवार जानते हुए भी नहीं जाना चाहता था, क्योंकि उसका मन संस्था में ही लग गया था। मैंने उसके घर वालों को बुला कर उनके हवाले किया।”

सुनील दत्त दुबे

गुमशुदा बच्चों को उनके माँ-बाप से मिलाने से मिलती है सकारात्मक ऊर्जा

सुनील दत्त दुबे ने बताया, “जिसके घर का बच्चा गायब होता है उसके घर में चूल्हे नहीं जलते। उनके परिवार वाले बदहवास हो कर भटकते हैं। ऐसे में गुमशुदा बच्चों को उनके परिवार से मिलाने के बाद के भावनात्मक दृश्य मुझे इस काम को आगे भी करने की प्रेरणा देते हैं। उनके चेहरे पर आई मुस्कान को मैं पहले ‘ऑपरेशन मुस्कान’ नाम से सोशल मीडिया पर डालता था। बाद में यही नाम शासन तक गया। अब यह ‘ऑपरेशन मुस्कान’ एक ब्रांड बन चुका है।

कई कारण हैं बच्चों के गायब होने के

बच्चों के गायब होने की वजह पर DSP फरेंदा ने बताया, “मेरे अपने अनुभव के मुताबिक बच्चों की गुमशुदगी के कई कारण हैं। कुछ बच्चे किसी बात पर नाराज हो कर घर से निकल जाते हैं। तो कुछ गरीब घरों के बच्चे कमाने आदि के मकसद से घरों से भेजे जाते हैं जिसमें से कुछ वापस नहीं आ पाते। एक बार 2 लड़कियाँ मुंबई में हीरोइन बनने चली गई थीं। तब उनकी जानकारी मैंने फेसबुक पर फ्लैश करवाई। वो फेसबुक पोस्ट उन लड़कियों के डिब्बे में बैठे कुछ लोगों ने पढ़ी और उन दोनों लड़कियों को इटारसी स्टेशन पर सुरक्षा बलों के हवाले कर दिया गया। इन दोनों लड़कियों को मुंबई से किसी ने फोन कर के TV सीरियल में काम दिलाने का वादा किया था। उस केस में 2 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। बहलाने-फुसलाने के अन्य भी कई मामले आए थे।”

सक्रिय है बच्चों से भीख मँगवाने वाला रैकेट

DSP सुनील दत्त ने बताया, “ये सच है कि कई ऐसे रैकेट हैं जो बच्चों का अपहरण भीख मँगाने और उनसे काम (मजदूरी) करवाने के उद्देश्य से करते हैं। मैंने मुंबई में एक बच्चा बरामद किया था, जिसे होटल में 6 साल से जबरदस्ती काम करवाया जा रहा था। उसे बहला-फुसला कर लाया गया था। यद्यपि इस तरह के रैकेट बहुत ज्यादा नहीं हैं। अब बच्चों की शिकायतों के लिए थाने आदि बन चुके हैं इस से ऐसी घटनाओं पर काफी अंकुश लग गया है।”

बच्चों को खोजने के लिए और अधिक दक्ष होना होगा पुलिस को

सुनील दत्त दुबे के मुताबिक, “गुमशुदा बच्चों को खोजने के लिए अभी पुलिस को और अधिक दक्ष होना होगा। इसके लिए ऐसे सेल का भी गठन एक विकल्प हो सकता है जिसमें इस काम में एक्सपर्ट पुलिसकर्मी हों। जैसे-जैसे समय बीतता जाता है, वैसे-वैसे बच्चे को खोजना और मुश्किल होता चला जाता है। निठारी कांड के बाद गुमशुदा बच्चों के लिए सुप्रीम कोर्ट की नई दिशानिर्देश आई हैं। ऐसे में पुलिसकर्मियों को यह समझना होगा कि गुमशुदगी की जानकारी आते ही सबसे पहले कौन से कदम उठाने हैं।”

हेलीकॉप्टर से 1500 फीट खाई में गिर कर पर्यटक की मौत, रोका गया रेस्क्यू ऑपरेशन: देवघर रोपवे में अब भी फँसे हैं एक दर्जन

झारखंड के देवघर में त्रिकुट पहाड़ के रोप-वे पर हादसे में अब भी 12 लोग फँसे हुए हैं। वहीं अँधेरे और एक हादसे के कारण आज शाम 6 बजे रेस्क्यू ऑपरेशन को रोक दिया गया। रेस्क्यू के वक्त शाम करीब 5.30 बजे 48 वर्षीय पर्यटक की हेलिकॉप्टर में चढ़ने के दौरान सेफ्टी बेल्ट टूट जाने से मौत हो गई। हादसे में व्यक्ति करीब डेढ़ हजार फीट की गहरी खाई में गिर गया जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, वह केबिन नंबर-19 में सवार था।

आज सोमवार दोपहर में सेना, वायुसेना और NDRF ने 12 बजे MI-17 हेलिकॉप्टर की मदद से दोबारा रेस्क्यू शुरू किया था। जिससे शाम तक 33 श्रद्धालुओं को बचाया गया है। वहीं 12 लोग अब भी फँसे हुए हैं। जबकि दो लोगों की मौत हो गई है। आज राहत और बचाव कार्य के समय हुए हादसे को आप नीचे के वीडियो में देख सकते हैं।

गौरतलब है कि रविवार को रामनवमी होने के कारण बड़ी संख्या में लोग त्रिकुट पहाड़ पहुँचे थे। पहाड़ पर बने मंदिर की तरफ एक साथ 26 ट्रॉलियाँ रवाना की गई थीं, जिससे रोपवे की तारों पर अचानक लोड बढ़ा और रोलर टूट गया। तीन ट्रॉलियाँ पहाड़ से टकरा गईं, वहीं दो नीचे गिर गईं। इनमें सवार 12 लोग जख्मी हो गए और दो लोगों की मौत हो गई। बाकी ट्रॉलियाँ आपस में टकराकर रुक गईं।

मीडिया रिपोर्ट में बताया जा रहा था कि फँसी हुई ट्रॉलियों में छोटे बच्चे और महिलाएँ भी हैं। अधिकारियों के मुताबिक, लोगों को निकालने के लिए जैसे ही सेना ने हेलीकॉप्टर का सहारा लिया, वैसे ही पंखे की तेज हवा से ट्रॉलियाँ हिलने लगीं, इससे लोगों की जान पर बन आई। जिला कलेक्टर मंजूनाथ भैजंत्री ने बताया कि फिलहाल रोपवे बंद है।

हादसे पर झारखंड के पर्यटन मंत्री हफीजुल हसन ने कहा है कि रोपवे का संचालन कर रही दामोदर वैली कार्पोरेशन को ब्लैक लिस्टेड किया जाएगा। रोलर कैसे टूटा, उसका मेंटेनेंस किस तरह हो रहा था, इन सब बिंदुओं की जाँच कराई जाएगी और इस तरह का हादसा फिर ना इसके लिए एक वैकल्पिक सड़क बनाई जाएगी।

हर साल हजारों लोग जाते हैं मंदिर

त्रिकुट पहाड़ पर त्रिकुटाचल महादेव मंदिर और ऋषि दयानंद का आश्रम है। हर साल हजारों लोग यहाँ मंदिर में दर्शन करने आते हैं। उनके आने जाने के लिए यहाँ एक रोपवे बनाया गया है। यह झारखंड का एकमात्र और बिहार झारखंड का सबसे ऊँचा रोपवे है। इस पर पहुँचने के लिए एक-एक ट्रॉली में 4-4 लोगों को बैठाकर ऊपर भेजा जाता है।