Home Blog Page 2839

अमेरिकी स्टेट ओहायो की सीनेट ने विवेक अग्निहोत्री को किया सम्मानित, कश्मीर फाइल्स के निर्देशक ने 370 हटाने के लिए PM मोदी को कहा धन्यवाद

कई दशकों से कश्मीर घाटी में दफन हो चुके कश्मीरी पंडितों के दर्द को बड़े पर्दे पर दिखाकर निर्देशक विवे​क अग्निहोत्री ने सबका दिल जीत लिया है। यही वजह है कि अमेरिका के ओहायो प्रांत की सीनेट ने ‘द कश्मीर फाइल्स’ (The Kashmir Files) फिल्म के लिए विवेक अग्निहोत्री को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया है। ओहायो के सीनेटर नीरज अतानी ने कहा कि प्रशस्ति पत्र ‘कश्मीरी पंडितों के नरसंहार’ को दर्शाने वाली अग्निहोत्री की फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ पर उनके काम को सम्मानित करने के लिए दिया गया है। निर्देशक ने इस सम्मान के लिए ट्वीट करके उनका आभार व्यक्त किया।

वि​वेक अग्निहोत्री (Vivek Agnihotri) लिखते हैं, “द कश्मीर फाइल्स की पूरी टीम की तरफ से और हमारे दर्शकों की ओर से मैं इस सम्मान के लिए स्टेट ऑफ ओहायो सीनेट को धन्यवाद देता हूँ। दुनिया कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार और भारत की मानवता के महान मूल्य को पहचान रही है।” उन्होंने अनुच्छेद-370 हटाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी शुक्रिया किया।

आपको बता दें कि पहली बार विदेशों में कश्मीरी पंडितों के इस नरसंहार को आधिकारिक रूप से स्वीकार किया जा रहा है। अतानी ओहायो के इतिहास में प्रांत के पहले भारतीय-अमेरिकी और हिंदू सीनेटर हैं। प्रशस्ति पत्र पर ओहायो सीनेट के अध्यक्ष मैट हफमैन और अतानी ने संयुक्त रूप से हस्ताक्षर किए हैं। इसमें कहा गया है, ”वास्तव में, आपने सार्वभौमिक अपील वाली एक ऐसी फिल्म बनाने की कोशिश की है, जिसमें घाटी से कश्मीरी पंडितों के जबरन पलायन को दर्शाया गया है। आपको और आपके दोस्तों को अपनी उपलब्धियों पर गर्व होना चाहिए।”

गौरतलब है कि विवेक अग्रिहोत्री के निर्देशन में कश्मीरी पंडितों के नरसं​हार पर बनी ‘द कश्मीर फाइल्स’ बॉक्स ऑफिस पर कमाल का प्रदर्शन कर रही है। प्रधानमंत्री मोदी से लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस फिल्म की सराहना की है। वहीं, देश के कट्टरपंथी-वामपंथी समूह इस फिल्म से खासा नाराज हैं। एनडीटीवी ने तो इस फिल्म की रिलीज से पहले ही इसे प्रोपेगेंडा फिल्म बता दिया था और विरोध के बाद उन्हें अपनी रिपोर्ट से ‘प्रोपेगेंडा’ शब्द हटाना पड़ा था।

20 अकाउंट, एक ही ​दिन में हर खाते से आए ₹596294: मेधा पाटकर के NGO में चंदे का गजब ‘संयोग’, ED ने दर्ज की FIR

एक गैर सरकारी संगठन (NGO) है। नाम है- नर्मदा नवनिर्माण अभियान (NNA)। इसकी मुख्य ट्रस्टी हैं मेधा पाटकर। जी हाँ, वही स्वयंभू सामाजिक/पर्यावरण कार्यकर्ता मेधा पाटकर जो नर्मदा बचाओ आंदोलन (Narmada Bachao Andolan) की प्रवर्तक रहीं हैं।आपको यह जानकर ताज्जुब होगा कि इस एनजीओ के खाते में एक ही दिन 20 अलग-अलग खातों से एक समान रकम आई। अब यह कोई संयोग है या गोलमाल, इसकी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जाँच शुरू की है। संदिग्ध लेनदेन को लेकर शिकायत मिलने के बाद एजेंसी ने एफआईआर दर्ज कर ली है। हैरत की बात यह भी है कि यह मामला करीब 17 साल तक दबा रहा।

मामला साल 2005 का है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 5 मार्च 2004 को इस NGO का बृहन्मुंबई चैरिटी कमिश्नर के पास रजिस्ट्रेशन हुआ। 18 जून 2005 को NGO के बैंक ऑफ़ इंडिया के अकाउंट नंबर 001010100064503 से 1,19,25,880 रुपए का चंदा आया। इस लेन-देन को लेकर मिली शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए केंद्रीय एजेंसियों ने जाँच शुरू की है। ईडी के अलावा राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) और आयकर विभाग में भी अलग-अलग शिकायतें दर्ज की गई हैं।

मेधा पाटकर के NGO का अकाउंट डिटेल (फोटो साभार: dailypioneer)

बता दें कि 18 जून 2005 को 20 अलग-अलग खातों से NGO को दान मिला। हैरानी की बात यह है कि सभी खातों से आई राशि एक समान थी। इन सभी 20 खातों से NGO के खाते में ₹5,96,294 की राशि आई। इस तरह एक ही दिन में ₹1,19,25,880 राशि आई। इससे भी हैरत की बात तो यह है कि दान देने वालों में एक नाबालिग भी शामिल थी, जिसका नाम पल्लवी प्रभाकर भेलकर बताया गया है। वह उस समय नाबालिग थी। इसके अलावा NGO को मझगाँव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) से जनवरी 2020 से मार्च 2021 तक लगभग 62 लाख रुपए का दान भी मिला। यह दान 6 बार में अलग-अलग तारीखों को किया गया था।

मेधा पाटकर के खिलाफ शिकायत करने वाले संजीव झा हैं। उन्होंने कहा कि लेन-देन का यह डिटेल गंभीर सवाल उठाता है कि कैसे 20 अलग-अलग लोगों ने एक ही दिन में एक समान राशि जमा की। आमतौर पर फंडिंग राउंड फिगर में किया जाता है लेकिन इन डोनर्स को इतने विषम अंकों में पैसा जमा करने के लिए किसने प्रेरित किया, यह भी जाँच का विषय है। यह एक संगठित सिंडिकेट फंडिंग की ओर भी इशारा करता है।

उन्होंने कहा कि देश के हर परियोजना/नीति का विरोध करने का पाटकर और उनके NGO का इतिहास रहा है। चाहे वह सरदार सरोवर परियोजना हो, परमाणु परियोजनाएँ हों, कोयला खदान परियोजनाएँ हों या फिर हाल ही में CAA और केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए कृषि कानून। मेधा पाटकर ने मोदी सरकार की हर परियोजना का मुखरता से विरोध किया है। बता दें कि इससे पहले संजीव झा की शिकायत पर मुंबई पासपोर्ट अधिकारियों ने मेधा पाटकर का पासपोर्ट जब्त कर लिया था।

‘कहा था न रमजान में इलाके में मत आना’ : AIMIM नेता ने खुलेआम पुलिस को धमकाया, बोले- 100 रुपए के आदमी हो तुम

हैदराबाद के मुशीराबाद से पुलिस को धमकाने की एक वीडियो सामने आई थी। वीडियो को भाजपा नेता राजा सिंह ने अपने सोशल मीडिया पर शेयर किया था। इसमें एक AIMIM नेता थे जो तमाम लोगों के बीच खड़े होकर पुलिसकर्मियों पर चिल्लाते हुए धमकी दे रहे थे। उन्हें कहते सुना जा सकता था कि पुलिस इलाके में रमजान के समय में न घुसे। भाजपा ने पुलिस के साथ ऐसी बदसलूकी देख उनके विरुद्ध कार्रवाई की माँग थी, जिसके बाद अब खबर है कि हैदराबाद पुलिस ने AIMIM नेता को गिरफ्तार कर लिया है।

AIMIM पार्षद ने की पुलिस से बदसलूकी

जानकारी के मुताबिक, मुशीराबाद के भोलाकपुर में ये पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब पुलिस ने कुछ स्थानीय मुस्लिमों से एक तय समय के बाद उनकी दुकान बंद करने को कहा, लेकिन किसी ने पुलिस की बात नहीं सुनी। उलटा AIMIM पार्षद गयासुद्दीन मोहम्मद वहाँ आए और पुलिस से भिड़ गए।

उन्होंने बार-बार तेज आवाज में और उंगली दिखाते हुए ऑन ड्यूटी पुलिसकर्मी से कहा कि उनके इलाके में इस तरह आना नहीं चलेगा। अगर ड्यूटी करनी है तो बस ड्यूटी की जाए। इसके बाद वे पुलिस वाले को कहते हैं कि वो अपने एसआई को बुलाएँ, वो उन्हीं से बात करेंगे। पुलिसवाले जब अपने किसी वरिष्ठ को फोन मिलाते हैं तो AIMIM नेता वीडियो में बोलते हैं कि वो इलाके के पार्षद हैं।

आगे वह चिल्लाकर कहते हैं, “क्या कहा था जहाँगीर साहब को। एक महीने तक इस इलाके में मत आना। क्यों आए फिर।” पुलिसकर्मी जब उन्हें रोकने और समझाने की कोशिश करता है तो पार्षद जवाब देते हैं- ‘तुम क्या बोल रहे हो मुझे। चुप बैठो। तुम 100 रुपए के आदमी हो…100 रुपए के आदमी।’

भाजपा नेता राजा सिंह ने इस वीडियो को शेयर करते हुए AIMIM नेता की गुंडगर्दी पर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा, “हैदराबाद पुलिस को साफ धमकाया जा रहा है कि वो अगले 30 दन इलाके में न घुसें। ऑन ड्यूटी अधिकारियों को गाली दी जा रही है। ये सब करने की बहुत ज्यादा स्वतंत्रता मिली है।”

उन्होंने जानकारी दी कि घटना मुशीराबाद की है, साथ ही माँग की कि क्या इस मामले में कोई कार्रवाई हो सकती है। जिसके बाद हैदराबाद पुलिस ने इस संबंध में उनके ट्वीट पर उन्हें रिप्लाई दिया। इसमें हैदराबाद पुलिस ने उन्हें बताया कि उन्होंने घटना के संबंध में आईपीसी की धारा 353, 506, के तहत मुकदमे को दर्ज कर लिया है।

राजा सिंह से ऑपइंडिया की बात

घटना की वीडियो ऑपइंडिया के संज्ञान में जब आई तो हमने विधायक राजा सिंह से संपर्क किया। उन्होंने बताया, “यह AIMIM पार्टी का पार्षद मोहम्मद गयासुद्दीन है… घटना मुशीराबाद के भोलाकपुर क्षेत्र की सोमवार रात की  है। मुशीराबाद एक मुस्लिम बहुल क्षेत्र है। रात में यहाँ दुकानें बंद करवाने आए लोकल पुलिस इंस्पेक्टर को यह पार्षद धमकाते हुए कह रहा है कि जब हमारा गृहमंत्री हमको खुली छूट दिया है दुकानें खोलने के लिए,  तो तू 100 रुपए का आदमी कौन होता है हमें रोकने वाला?”

भाजपा नेता ने बताया कि यहाँ का गृहमंत्री भी मुस्लिम ही है और क्षेत्र का विधायक भी TRS पार्टी से है। लेकिन फिर भी इसे ट्वीट करके उन्होंने पुलिस से कार्रवाई की माँग की। उनके ट्विट और लोकल मीडिया के सपोर्ट से इस पर्षद पर एफआईआर दर्ज हुई है।

TRS की प्रतिक्रिया

घटना की वीडियो तेलंगाना के नगर प्रशासन और शहरी विकास मंत्री के टी रामाराव ने भी शेयर की और गुस्सा जाहिर करते हुए डीजीपी से उन लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का अनुरोध किया, जिन्होंने ड्यूटी पर पुलिस अधिकारियों को बाधित किया था। उन्होंने लिखा, “तेलंगाना में राजनीतिक जुड़ाव के बावजूद इस तरह की बकवास बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए”।

बाप तेजाब से मारता था, बेटा गोलियों से मरवाता है: बिहार में MLC कैंडिडेट पर AK-47 से फायरिंग, FIR में शहाबुद्दीन के बेटे ओसामा का भी नाम

बिहार के कुख्यात अपराधी और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन (Mohammad Shahabuddin) की जेल में मौत के बाद उनका बेटा अपने अब्बू के कदमों पर चल पड़ा है। बिहार में हुए AK-47 से हमले के बाद लोगों के जुबान पर यही बात आ रही है। शहाबुद्दीन के बेटे ओसामा शहाब (Osama Sahab) पर आरोप है कि उन्होंने बिहार के सिवान से विधान परिषद (MLC) उम्मीदवार की गाड़ी पर खतरनाक AK-47 से लगभग 150 राउंड गोलियाँ बरसाईं, जिसमें एक शख्स की मौत और कई लोग घायल हो गए हैं।

MLC प्रत्याशी रईस खान (Rais Khan) ने इस संबंध में सिवान के हुसैनगंज थाने में शिकायत दर्ज कराई है। इस मामले में ओसामा सहित 8 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। दी गई शिकायत में मोहम्मद रईस ने कहा कि वह MLC चुनाव के लिए हुए मतदान के दिन (4 अप्रैल को) अपने समर्थकों के साथ घर लौट रहे थे, इसी दौरान रास्ते में ओसामा ने उनके वाहन पर अंधाधुन फायरिंग की। इस फायरिंग में विनोद यादव के एक शख्स की मौत हो गई है।

रईस ने अपनी शिकायत में कहा है कि काफिले में उनके साथ चल रही गाड़ी के ड्राइवर हसाम अली खाँ और उनके साथ बैठे तेग अली खाँ तो तीन गोलियाँ लगी हैं। वहीं, बारात से लौट रहे विनोद यादव को चार-पाँच गोलियाँ लगीं। वहीं, अपनी गाड़ी से जा रहे राकेश तिवारी और उनकी पत्नी इंदू तिवारी को भी गोलियाँ लगी हैं।

इस गोलीबारी में विनोद यादव को अस्पताल ले जान के क्रम में मौत हो गई, जबकि घायलों को ईलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मामले में ओसामा के अलावा शहाबुद्दीन के करीबी आफताब आलम, गुड्डू पिस्टल, पूर्व मुखिया साबिर मियाँ, डबलू खाँ, आजाद अंसारी, आसिफ सिद्दीकी और चवन्नी को आरोपित बनाया गया है।

सारण के डीआईजी रवींद्र कुमार मंगलवार (5 अप्रैल) को सिवान पहुँचे और कहा कि इस घटना में शामिल लोग बख्शे नहीं जाएँगे। पुलिस उन्हें जल्द गिरफ्तार करेगी और उन्हें जेल में डालेगी। वहीं, ओसामा के समर्थकों का कहना है कि वह जिले से बाहर हैं, इस घटना में उनका कोई हाथ नहीं है। उन्हें बदनाम किया जा रहा है।

शहाबुद्दीन की विरासत का दावेदार ओसामा

जेल में शहाबुद्दीन की मौत के बाद ओसामा को उनका राजनीतिक वारिस माना जा रहा है। हालाँकि, उनका अम्मी हिना शहाब भी राजनीति में सक्रिय है, लेकिन शहाबुद्दीन की मौत के बाद जिस तरह के बिहार के नेताओं का ओसामा से मिलना हुआ, उससे यही कयास लगाया जा रहा है कि वे शहाबुद्दीन की स्याह विरासत को छोड़ेंगे नहीं।

इस एफआईआर के साथ ओसामा पर अवैध AK-47 से संबंधित मामला दर्ज हो गया है। इससे पहले शहाबुद्दीन के घर से भी AK-47 का जखीरा बरामद हुआ था। वहीं, ओसामा पर तेजाब कांड में भी नाम आया था, लेकिन कोर्ट ने उसे खारिज कर दिया था।

शहाबुद्दीन का आतंक

बिहार में आतंक का पर्याय बन चुके शहाबुद्दीन राजद के संरक्षण में बेलगाम हो चुके थे। उन हत्या, अपहरण, डकैती, फिरौती, पुलिस पर हमला सहित कई दर्जन मुकदमे दर्ज थे। चंदा बाबू का केस उनमें से एक है। अगस्त 2004 को रंगदारी नहीं देने पर शहाबुद्दीन के गुर्गों ने सिवान के व्यापारी चंद्रेश्वर प्रसाद उर्फ चंदा बाबू के दो बेटों राजीव और सतीश की बीच चौराहे पर तेजाब से नहलाकर हत्या कर दी थी।

इस मामले में जब पुलिस अधिकारी सीके अनिल और एस रत्‍न संजय कटियार ने भारी पुलिस फोर्स के साथ शहाबुद्दीन के सिवान स्थित घर पर छापेमारी की। इस दौरान शहाबुद्दीन के गुर्गों ने पुलिस पर हमला कर दिया। शहाबुद्दीन और पुलिस के बीच लगभग 3 घंटे तक गोलियाँ चली थीं। इस दौरान शहाबुद्दीन के घर पाकिस्तान में निर्मित AK-47, भारी मात्रा में अन्य हथियार और जेवरात बरामद किए गए थे।

कौन हैं रईस खान

रईस खान और उनका भाई अयूब खान कभी शहाबुद्दीन के मुख्य शूटर हुआ करते थे। बाद में दोनों भाइयों ने शहाबुद्दीन के हटकर अलग गैंग बना लिया। इसके बाद से दोनों के दुश्मनी शुरू हो गई। इसके बाद से दोनों भाइयों ने बिहार और पश्चिम बंगाल में कई वारदातों को अंजाम दिया। दोनों भाई खान ब्रदर्स के नाम से कुख्यात हो गए।

सीवान जिले के सिसवन प्रखंड में साल 2000 के दशक में रईस खान और इनके भाई अयूब खान का दबदबा था। इन दोनों का दोनों राज्यों में खूब आतंक था। रईस खान पर पुलिस की हत्या सहित दर्जनों अपराधिक मुकदमा दर्ज है। जमीन हथियाने सहित कई अवैध धंधों में ये लिप्त रहे।

तीन महीने पहले अयूब खान को STF ने पूर्णिया के बयासी थाना के चेकपोस्ट से गिरफ्तार किया था। अयूब खान पर हत्या, रंगदारी माँगने, लूट, डकैती और अपहरण के कुल 42 मामले 17 अलग-अलग थानों में हैं। इतना ही नहीं, बिहार के साथ-साथ उत्तर प्रदेश और ओडिशा की पुलिस को भी इसकी तलाश थी।

इसके बाद रईस खान में जदयू से अपनी राजनीति की शुरुआत की। माना जा रहा है कि यह हमला राजनीतिक दबंगई को लेकर ही है।

ईसाई महिला का सिर काटने वाला वीडियो देख इस्लाम छोड़ बन गया नास्तिक, अब कोर्ट ने सुनाई 24 साल की सज़ा: पैगंबर की आलोचना का आरोप

अफ्रीकी देश नाइजीरिया (Nigeria) के उत्तरी राज्य कानो (Northern State of Kano) के हाई कोर्ट ने एक मुबारक बाला (Mubarak Bala) नाम के एक नास्तिक को इस्लाम की ईशनिंदा का दोषी ठहराते हुए मंगलवार (5 अप्रैल, 2022) को 24 साल की सजा सुनाई। ‘ह्यूमनिस्ट एसोसिएशन ऑफ नाइजीरिया (Humanist Association of Nigeria)’ के 37 वर्षीय अध्यक्ष मुबारक बाला पर इस्लाम और उनके पैगंबर मुहम्मद की आलोचना करने वाले फेसबुक पोस्ट लिखने समेत 18 आरोपों के लिए दोषी ठहराया गया है।

कानो स्थित हाई कोर्ट के न्यायाधीश फारुक लॉन ने कहा, “अदालत ने मुहम्मद मुबारक बाला को 24 साल की सजा सुनाई है।” रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल 2020 को हिरासत में लिए गए नाइजीरियाई नास्तिक बाला के खिलाफ मुस्लिमों के एक समूह ने सोशल मीडिया पर इस्लाम के बारे में आपत्तिजनक संदेश पोस्ट करने का आरोप लगाते हुए एक याचिका दायर की थी। कानो में मुस्लिम बहुसंख्यक हैं। यह उत्तरी नाइजीरिया के लगभग एक दर्जन राज्यों में से एक है, जहाँ धर्मनिरपेक्ष कानूनों के साथ-साथ इस्लामी कानून यानी शरिया का पालन किया जाता है।

बताया जा रहा है कि अगर बाला पर इस्लामी कोर्ट में मुकदमा चलाया जाता, तो उन्हें मौत सजा हो सकती थी, क्योंकि इस्लामी कानून में बेहद कठोर सजा देने का प्रावधान है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय अधिकार समूहों ने उन्हें हिरासत में लेने की कड़ी निंदा करते हुए उनकी रिहाई की माँग की है।

बाला ने 2014 में इस्लाम मजहब को त्याग दिया था और अल्लाह की इबादत करना बंद कर दिया था, जिसके बाद बाला के परिवार ने उन्हें जबरन 18 दिनों के लिए एक मनोरोग विभाग में भर्ती कराया था। उन्हें 2020 में पड़ोसी देश कडुना से गिरफ्तार किया गया था उसके बाद उन्हें कानो लाया गया, तब से वह पुलिस हिरासत में हैं।

बता दें कि कानो में एक मुस्लिम परिवार में जन्मे और पेशे से एक इंजीनियर बाला ने बताया था कि उन्होंने 2013 में एक ईसाई महिला का सिर काटने का वीडियो देखने के बाद इस्लाम मजहब को छोड़कर नास्तिक बनना स्वीकार किया। काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के अनुसार, उन्हें गिरफ्तार करने की बड़ी वजह पैगंबर मुहम्मद को ‘आतंकवादी’ कहने वाली उनकी फेसबुक पोस्ट थी, जिसको लेकर वकीलों के एक समूह ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। मालूम हो कि नाइजीरिया अफ्रीका का सबसे अधिक आबादी वाला देश है। इसके उत्तर में मुस्लिम और दक्षिण में ईसाई बहुसंख्यक आबादी है।

अमेरिका में भी हैं ‘राना अयूब’: अश्वेतों के नाम पर लिया ₹502 करोड़ का चंदा, आलीशान घरों की खरीद और ऐश पर किए खर्च

अमेरिका में जॉर्ज फ्लॉयड नाम के अश्वेत समुदाय के व्यक्ति की मौत के बाद ‘ब्लैक लाइव्स मैटर’ कैम्पेन शुरू किया गया था। इसी के नाम से ‘ब्लैक लाइव्स मैटर, ग्लोबल नेटवर्क फाउंडेशन’ नाम के एक संगठन में गड़बड़ी का मामला प्रकाश में आया है। रिपोर्टों के मुताबिक, इससे जुड़े तीन नेताओं पैट्रिस कुल्लर्स, एलिसिया गार्जा और मेलिना अब्दुल्ला ने दान में मिले पैसों 6 मिलियन डॉलर (45,35,79,000 रुपए) का एक शानदार मैंशन खरीदा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, 2020 में गुप्त रूप से यह संपत्ति खरीदी गई थी। दरअसल, अक्टूबर 2020 में फ्लॉयड की मौत के बाद हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान इस फाउंडेशन को कुल 66.5 मिलियन डॉलर (5,02,71,67,250 रुपए) का दान मिला। दो सप्ताह के बाद डायने पास्कल नाम के एक व्यक्ति ने एक घर खरीदा और अपने नाम पर उसका रजिस्ट्रेशन करवाया। पास्कल जनाया पैट्रिस कंसल्टिंग के फाइनैंशियल मैनेजर हैं। पैट्रिस कंसल्टिंग एक एलएलसी कंपनी है, जिसे कुल्लर्स और उनके पति चलाते थे। इस घर के मालिकाना हक को बाद में कानूनी फर्म पर्किन्स कोइ द्वारा डेलावेयर में स्थित एलएलसी को दे दिया गया।

बताया जाता है कि तीनों लोगों ने चोरी-छिपे 6500 वर्ग फुट से अधिक का घर खरीदा था, जिसमें दर्जनों बेडरूम, बाथरूम और 20 से अधिक कारों की पार्किंग के लिए स्पेस तक था। हालाँकि, इसके लिए लेन-देन कभी नहीं किया गया। इस प्रॉपर्टी का मालिक कौन है, इसको लेकर भी खुलासा नहीं किया गया है। लेकिन, कुलर्स समेत संगठन के कई अन्य लोग इस घर का इस्तेमाल करते थे। YouTube पर इसका वीडियो शेयर किया गया था।

याद दिला दें कि भारत में भी राना अय्यूब नाम की एक तथाकथित पत्रकार पर कुछ इसी तरह के आरोप हैं। हाल ही में उन्हें विदेश जाने से रोका गया था, क्योंकि उन पर कोरोना के नाम पर करोड़ों का चंदा इकट्ठा कर के इसे अपने परिवार के लिए खर्च करने के आरोप हैं। हालाँकि, इसके बाद वो उच्च-न्यायलय पहुँचीं, जहाँ से उन्हें विदेश जाने की अनुमति मिल गई।

ऐसे हुआ मामले का खुलासा

इस मामले का खुलासा उस वक्त हुआ जब न्यूयॉर्क पोस्ट ने एक आर्टिकल में दावा किया कि कुल्लर्स ने कैलिफोर्निया में 3 मिलियन डॉलर (22.68 करोड़ रुपए) के चार घर खरीदे हैं। साथ ही ‘ब्लैक लाइव मैटर्स ग्लोबल नेटवर्क फाउंडेशन’ को मिले दान में अंतर देखा गया था। इसके बाद कुल्लर्स ने फाउंडेशन के कार्यकारी निदेशक के पद से इस्तीफा दे दिया था।

पिछले साल जॉर्ज फ्लॉयड की मौत की बरसी मनाने के लिए तीनों एक घर में इकट्ठे हुए। उन्होंने एक वीडियो बनाया और उसे यूट्यूब पर शेयर कर दिया। वीडियो में तीनों ने राइट विंग मीडिया को घेरते हुए ये आरोप लगाया था कि उसने जानबूझकर ब्लैक लाइव्स मैटर से जुड़े लोगों को निशाना बनाया। कोई भी घर खरीदने की बात को मानने को तैयार नहीं है।

जॉर्ज फ्लॉयड की मौत

46 वर्षीय अश्वेत जॉर्ज फ्लॉयड की एक मिनिपोलिस पुलिस अधिकारी के हाथों मौत हो गई थी। कथित तौर पर उस मिनिपोलिस पुलिस अधिकारी ने फ्लॉयड की गर्दन पर लगभग 9 मिनट तक अपना घुटना रखा। जॉर्ज फ्लॉयड इस दौरान घुटना हटाने की गुहार लगाता रहा। उसने यह भी कहा था कि वह साँस नहीं ले पा रहा है। लेकिन, पुलिस अधिकारी नहीं पिघला और फ्लॉयड की मौत हो गई। इसके बाद लोगों का गुस्सा पुलिस के प्रति भड़क गया और हिंसक रूप ले लिया।

30 मई, 2020 को यह विरोध-प्रदर्शन पूरे अमेरिका में फैल गया, जिसके कारण कई शहरों में कर्फ्यू लगाना पड़ा। फिलाडेल्फिया में प्रदर्शनकारियों ने मियामी में राजमार्ग को यातायात को बंद करने के दौरान एक मूर्ति को गिराने की कोशिश भी की थी। ‘ब्लैक लाइव्स मैटर’ को पिछले साल शांति के नोबल पुरस्कार के लिए भी नामित किया गया था।

विरोध के बीच राष्ट्रपति राजपक्षे ने श्रीलंका में आपातकाल हटाया, विपक्षी दल SLFP ने लिया समर्थन वापस, 40 सांसद भी हुए बागी

चीन (China) के कर्ज के जाल में फँसकर कंगाली के कगार पर खड़े श्रीलंका में पाँच दिन बाद राष्ट्रीय आपातकाल को खत्म कर दिया गया है। देश के राष्ट्रपति गोताबाया राजपक्षे (Gotabaya Rajapaksa) ने मंगलवार (5 अप्रैल 2022) की देर रात एक गजट नोटिफिकेशन 2274/10 जारी किया, जिसके बाद देशभर में जारी आपातकाल का अंत हो गया। उन्होंने आपातकालीन अध्यादेश को वापस लेने की बात कही।

आपातकालीन नियम के तहत के तहत सुरक्षाबलों को देश में किसी भी तरह की गड़बड़ियों को रोकने के लिए असीमित अधिकार दिए गए थे। उससे पहले विपक्ष ने सोमवार (4 अप्रैल 2022) को संसद में चर्चा के दौरान इमरजेंसी को खत्म करने की माँग की थी।

उल्लेखनीय है कि देश में जारी आर्थिक संकट के कारण गुरुवार (31 मार्च 2022) को लोगों ने राष्ट्रपति आवास के बाहर जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया था। लोगों का मानना है कि देश की इस हालात के लिए राजपक्षे जिम्मेदार हैं। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने 45 लोगों को गिरफ्तार भी किया था। हालात बिगड़ते देख राष्ट्रपति गोताबाया राजपक्षे ने शुक्रवार (1 अप्रैल 2022) को देशभर में आपातकाल की घोषणा कर दी थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राजपक्षे सरकार को इस बात की जानकारी मिली थी कि देश की जनता 3 अप्रैल को बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन की योजना बना रही है। इसी विरोध को दबाने के लिए राष्ट्रपति ने यह निर्णय लिया गया था। आपातकाल के साथ ही देशभर में कर्फ्यू लगा दिया गया। प्रदर्शन के दौरान आगजनी की घटनाएँ भी हुई थीं। कई सरकारी गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया था।

वहीं, श्रीलंका फ्रीडम पार्टी (SLFP) के नेता मैत्रीपाला सिरिसेना ने सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया है। सिरिसेना ने कहा कि उनकी पार्टी आम लोगों के साथ है। इससे 225 सदस्यीय श्रीलंकाई संसद में राजपक्षे अपना बहुमत खो चुके हैं। सत्तारूढ़ पार्टी के 40 से अधिक सांसदों ने बागी रूख अपना चुके हैं। बता देें कि सत्ताधारी श्रीलंका पोदुजाना पेरामुना पार्टी के 117 सासंद हैं, जबकि SLFP के 15 सांसद हैं। वहीं, गठबंधन सरकार में 10 अन्य दलों के 14 सांसदों का भी समर्थन प्राप्त था।

महंगाई चरम पर

द्वीपीय देश में महंगाई चरम पर है। खाने-पीने की वस्तुओं से लेकर रसोई गैस तक लोगों को नहीं मिल पा रही है। बिजली कटौती तो 13 घंटे तक हो रही है। देश के राष्ट्रपति गोताबाया राजपक्षे अभी भी आपातकाल के अपने फैसले का बचाव कर रहे हैं। उनका कहना है कि देश में आर्थिक संकट कोरोना महामारी के कारण आया है। उन्होंने ये भी कहा है कि 113 सदस्यों का बहुमत साबित करने वाले किसी भी दल को सत्ता सौंपने के लिए तैयार हैं।

उर्दू नहीं बोलने पर शाहिद पाशा और उसके साथियों ने चंद्रू को मार डाला: पुलिस ने दावे को नकारा, हत्या के सिलसिले में 3 गिरफ्तार

बेंगलुरु में सोमवार (4 अप्रैल, 2022) को 22 वर्षीय एक युवक की तीन लोगों ने बेरहमी से चाकू मारकर हत्या कर दी। दावा किया जा रहा है कि उर्दू नहीं बोलने के कारण इस हत्या को अंजाम दिया गया। लेकिन बेंगलुरु पुलिस ने इस दावे को नकारते हुए इसे रोड रेज की घटना बताई है। मामले में तीन आरोपितों की गिरफ्तारी हुई है।

घटना बेंगलुरु के जेजे नगर थाना क्षेत्र की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मृतक की पहचान जयमरुथीनगर निवासी चंद्रू के रूप में हुई है। वह सोमवार को अपने दोस्तों के साथ एक पार्टी में शामिल हुआ था। दोपहर करीब ढाई बजे वह खाना खाने के लिए निकला था। जैसे ही वह हलेगुड्डाहल्ली के पास से गुजरा, उसकी बाइक दूसरी बाइक से हल्का सा टकरा गया। जिसके बाद बाइक सवार शाहिद पाशा ने चंद्रू के साथ बहस करना शुरू कर दिया। विवाद बढ़ता ही चला गया और फिर आरोपित शाहिद ने चंद्रू पर चाकू से हमला कर दिया।

कस्तूरी न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, शाहिद पाशा के कुछ और साथियों ने भी इसमें उसका साथ दिया। दरअसल बहस के दौरान चंद्रू ने उर्दू में बात करके कन्नड़ में बात की थी। इससे आक्रोशित भीड़ ने उसकी पिटाई की और फिर चाकू से हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल चंद्रू को अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया

यह घटना सीसीटीवी में कैद हो गई। सीसीटीवी में आरोपित शाहिद पाशा और उसके दोस्तों को चंद्रू को बेरहमी से चाकू मारते हुए देखा जा सकता है। इस दौरान उनलोगों ने तलवारें और चाकू हवा में भी लहराए। वीडियो में देखा जा सकता है कि हमले में गंभीर रूप से घायल चंद्रू आरोपित से जान की भीख माँगता है और वहाँ से उसे जाने देने की गुहार लगाता है, लेकिन आरोपितों पर इसका कोई असर नहीं पड़ता है।

पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए 21 वर्षीय शाहिद पाशा, 22 वर्षीय शाहिद गोली और एक नाबालिग को चंद्रू की चाकू मारकर हत्या करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने घटनास्थल से मिली सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय खुफिया जानकारी के आधार पर आरोपित को गिरफ्तार किया।

बेंगलुरु के पुलिस कमिश्नर कमल पंत ने ट्वीट करते हुए बताया कि शाहिद ने चंद्रू की दाहिनी जाँघ पर चाकू मारा और मौके से फरार हो गया। पुलिस कमिश्नर ने कहा कि चंद्रू ईसाई समुदाय से है। वह अपने दोस्त साइमन राज के साथ मैसूर रोड पर एक भोजनालय में गया था। पुलिस ने बताया कि तीनों आरोपितों पर हत्या का मामला दर्ज किया गया है और आगे की जाँच के लिए उन्हें हिरासत में ले लिया गया है।

इमरान खान की कुर्सी जाते ही पाकिस्तान छोड़कर भाग गईं बुशरा बीवी की सहेली, $90000 वाली पर्स के साथ तस्वीर हो रही वायरल

इमरान खान के पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही उनकी पत्नी बुशरा बीवी अक्सर सुर्खियों में रहती हैं। ज्यादातर अपने कथित काला जादू की वजह से। इस बार चर्चा बुशरा बीवी अपनी सहेली फराह खान को लेकर चर्चा में हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इमरान खान की कुर्सी जाते ही फराह पाकिस्तान छोड़कर चली गईं हैं। उनकी एक तस्वीर वायरल हो रही है जिसमें वह हवाई जहाज में बैठी हैं उनके पैरों के पास एक हैंडबैग है, जिसकी कीमत 90,000 डॉलर (1.66 करोड़ पाकिस्तानी रुपए) बताई जा रही है। फराह कहा जा रहा है कि इमरान के शासनकाल में फराह कई भ्रष्टाचार में लिप्त थीं।

रिपोर्ट के मुताबिक पीएमएल-एन नेता और पूर्व वित्त मंत्री मिफ्ताह इस्माइल ने फराह पर पंजाब प्रान्त में सिविल सर्विस के 3 अधिकारियों के ट्रांसफर के बदले में मोटी रकम घूस के रूप में लेने का आरोप लगाया है। कहा जा रहा है कि फराह खान 3 अप्रैल को उसी दिन दुबई चली गईं, जिस दिन इमरान खान ने संसद को भंग करने की सिफारिश राष्ट्रपति से की और स्पीकर ने विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव को खारिज कर दिया था।

इस बीच पीएमएल-एन नेता मरियम नवाज शरीफ ने फराह को ‘सभी घोटालों की जननी’ करार दिया है। आरोप है कि पंजाब में अधिकारियों के तबादले के लिए उन्होंने 6 पाकिस्तानी बिलियन रुपए लिए थे। बुशरा बीबी के बेटे मूसा मानेका ने भी फराह खान पर अपने अम्मी-अब्बू को धोखा देने का आरोप लगाया है। मूसा का दावा है कि फराह खान का उसके परिवार से कोई लेना-देना नहीं है। हालाँकि, दावा यह भी किया जा रहा है कि फराह खान ने बीते सोमवार को अबूधाबी में बुशरा बीबी की बहन मरियम रियाज की इफ्तार पार्टी में शिरकत की थी।

गौरतलब है कि बुशरा बीबी पर हाल ही में शौहर इमरान खान की कुर्सी बचाने के लिए जादू-टोने का सहारा लेने का भी आरोप लगा था। पाकिस्तान के नेता प्रतिपक्ष शाहबाज शरीफ ने दावा किया था कि इमरान खान के घर बनिगाला में जादू-टोना के लिए कई टन मांस जलाया जा रहा है। बुशरा को पाकिस्तान में पिंकी ‘पिरनी’ या पिंकी बीबी के नाम से भी जाना जाता है।

पहले लिखी- हाऊ टू मर्डर योर हस्बैंड, फिर अपने पति को ही मारी गोली: 71 साल की लेखिका पर मर्डर ट्रायल शुरू

एक समय में ‘अपने पति की हत्या कैसे करें (हाऊ टू मर्डर योर हस्बैंड)’ शीर्षक के साथ पूरा लेख लिखने वाली लेखिका पर इस समय वाकई अपने पति को जान से मार देने के कारण मुकदमा चल रहा है। इस लेखिका का नाम नैंसी क्रैम्प्टन ब्रोफी है। 71 वर्षीय लेखिका पर आरोप है कि इन्होंने 2018 में अपने 63 साल के पति डेनियल ब्रोफी को गोली मारी थी। घटना के 3 माह बाद उनको गिरफ्तार कर लिया गया था। अब उनके ऊपर मुकदमा चल रहा है।

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार डेनियल को पोर्टलैंड के ओरेगॉन कलिनरी इंस्टीट्यूट में उनकी पीठ और छाती पर गोलियाँ मारी गई थीं। नैंसी ब्रोफी ने इस घटना के बाद पुलिस को बताया कि वो उस समय घर में थीं जब उनके पति को गोली मारी गई। मगर बाद में जासूसों ने पुलिस को सूचना दी कि जिस दिन ब्रोफी को मारा गया उस दिन उनकी पत्नी घटनास्थल के आसपास थीं।

डेनियल की हत्या के बाद उनकी पत्नी ने इस घटना की जानकारी सोशल मीडिया के जरिए दी थी। उन्होंने कहा था कि अगर उनके करीबी फोन करने की सोच रहे हैं, तो ये बिलकुल सही बात है लेकिन इस समय वह कुछ सोचने-समझने में सक्षम नहीं हैं। कथिततौर पर घटना के कुछ ही दिन बाद ही लेखिका ने पुलिस वालों से ये भी कहा था कि वो उन्हें एक पत्र दें कि वो अपने पति के मर्डर केस में संदिग्ध नहीं है ताकि वो अपने पति के 40 हजार डॉलर (30 लाख रुपए) वाली लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी की रकम जाकर ले सकें।

सोमवार को जब लेखिका का ट्रायल शुरू हुआ तो उनपर इसी आधार पर आरोप लगे। दलील थी कि अधिकारियों को ये बाद बाद में पता चली है कि डेनियल की हत्या से नैंसी को सीधे-सीधे 1.5 मिलियन डॉलर (113429250 रुपए) का फायदा होता। इसलिए उन्होंने लालच में आकर ये सब किया। 

बता दें कि लेखिका को उनके पति की हत्या में नामजद किए जाने से पहले पूरी हत्या एक रहस्य थी क्योंकि पुलिस को कभी कोई संदिग्ध मिला ही नहीं। पड़ताल में किसी तरह की दुश्मनी की बात नहीं सामने आई और न ही ऐसा लगा कि डेनियल का सामान चुराने के लिए उनके साथ जोर जबरदस्ती हुई। आखिरी वक्त में उनका वॉलेट, सेलफोन, कार की चाबियाँ सब वैसे की वैसे उनके पास ही थीं।

‘पति की हत्या कैसे करें’- नैंनी ब्रोफी का लेख

अब मालूम हो कि नैंसी ब्रोफी जिन्हें उनके लेखों के कारण जाना जाता है। उन्होंने साल 2011 में एक लेख लिखा था जिसका शीर्षक था- ‘अपने पति की हत्या कैसे करें।’ इस लेख संबंधी जानकारी पर कोई सुनवाई करने से कोर्ट ने मना कर दिया। अदालत ने कहा कि ये लेख एक सेमिनार के लिए लिखा गया था और वो इसमें लिखी सामग्री को नहीं सुनना चाहते।

तस्वीर साभार: न्यूयॉर्क टाइम्स

रिपोर्टस के मुताबिक 2011 में लिखे इस लेख में नैंसी ने लिखा था, “एक रोमांटिक सस्पेंस लेखिका होने के नाते, मैं हत्या के बारे में सोचने में और इसके बाद पुलिस कार्रवाई के बारे में सोचने में बहुत समय बिताती हूँ। आखिरकार, अगर अगर मैं हत्या करके मुक्त होना चाहूँ तो मैं निश्चित तौर पर जेल में तो समय नहीं बिताना चाहूँगी।”