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करौली में हिंदुओं के साथ हिंसा को राजस्थान के राज्यपाल ने बताया ‘सुनियोजित’, रिपोर्ट में दावा- पहले से थी जानकारी, फिर पुलिस नहीं थी तैयार

राजस्थान (Rajasthan) के करौली में विक्रम संवत से शुरू होने वाले हिंदू नववर्ष के दौरान एक रैली में हिंदुओं पर किया गया हमला सुनियोजित था। इसके कई पहलू सामने आ चुके हैं। पुलिस को पता था कि मुस्लिम मुहल्ले से रैली निकलने वाली है, फिर भी यह हिंसा हुई। कुछ लोगों का आरोप है कि जब उन पर हमला हो रहा था, तब भी पुलिस मूकदर्शक बनी थी। प्रदेश के राज्यपाल कलराज मिश्र (Governor Kalraj Mishra) ने इस सुनियोजित हिंसे को लेकर बयान दिया है।

राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा कि किरौली हिंसा के दौरान जिस तरह से पथराव किया गया, उससे साबित होता है कि हिंसा को सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया और इसे रोका जा सकता था। राज्यपाल ने यह भी कहा कि पुलिस की कार्यशैली पर सवाल नहीं उठाया जाना चाहिए। यह दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है।

यह मामला राज्य के विधानसभा में भी गूँजा। मंगलवार (4 अप्रैल 202) को विधानसभा में प्रतिपक्ष के उप-नेता राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि जलूस मार्ग पर अचानक हमला होना पुलिस प्रशासन की विफलता है। उन्होंने कहा कि जुलूस से पहले सैकडों मन पत्थर एकत्रित किये जाते हैं और फिर जुलूस दौरान अचानक मकान की छतों से हमला होता है। हमले के लिए पहले से ही लाठी, तलवार एकत्रित किये जाते हैं। इससे साबित होता है कि यह हिंसा सुनियोजित थी। उन्होंने कहा कि घटना के 45 मिनट बाद अतिरिक्त पुलिस बल पहुँचता है, जो प्रशासन की विफलता को दर्शाता है।

राठौड़ ने प्रतिबंधित पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) की एक चिट्ठी का जिक्र भी किया। उन्होंने कहा कि PFI के प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद आसिफ ने एक अप्रैल को मुख्यमंत्री, पुलिस महानिदेशक को एक पत्र लिखकर कहा कि दो अप्रैल से चार अप्रैल तक पूरे प्रदेश में तनाव पैदा होगा और सांप्रदायिक सद्भाव भी बिगड़ेगा। इस चुनौती के बाद भी राज्य सरकार ने उसका कोई संज्ञान नहीं लिया।

PFI की चिट्ठी

राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को लिखी चिट्ठी में मोहम्मद आसिफ ने कहा था, “दिनांक 2 से 4 अप्रैल तक राजस्थान के तमाम जिलों, तहसीलों और कस्बों में RSS और उनके अन्य संगठनों द्वारा हिन्दू नववर्ष के अवसर पर भगवा रैली आयोजित की जा रही है। इन रैलियों में धार्मिक उन्माद फैलाने वाले नारों को प्रतिबंधित करने, साम्प्रदायिक सौहार्द को बचाने, कानून-व्यवस्था को कायम रखने और इन आयोजनों को शांतिपूर्ण ढंग से पूरा करवाने की माँग की जाती है।”

पीड़ितों ने सुनाई खौफनाक कहानी

इस हिंदू विरोधी हिंसा में घायल मोहन स्वामी ने बताया कि वे भी एक गाड़ी में बैठे और उसमें गाना बज रहा था। अचानक छतों पर से पत्थर बरसने लगे। घरों से लोग लोग लाठी-डंडे लेकर निकल आए और लोगों को मारने लगे। पत्थर लगने से कई बाइक सवार वहीं गिर गए। उनकी बाइकों में आग लगा दी। उन्होंने दैनिक भास्कर से कहा, “मुझे करौली में सब जानते हैं। उपद्रवियों के बीच से आवाज आई… यही इनका मुखिया है, मारो इसे। इसके बाद बदमाशों ने मुझ पर लाठियों से हमला कर दिया। किसी तरह से लोग मुझे बचाकर हॉस्पिटल में ले आए।”

वहीं, सौरभ नाम के एक शख्स ने बताया कि दंगों के दौरान उसका भाई अखिलेश गंभीर रूप से घायल हो गया है और वह हॉस्पिटल में भर्ती है। अखिलेश बाहर खड़ा होकर रैली देख रहा था, तभी पत्थर बरसने लगे। वह पत्थरों से बचने की कोशिश कर रहा था। इसी दौरान दंगाइयों ने सिर में पीछे से डंडा मारा। उसका हाथ फ्रैक्चर हो गया। उसने पास के एक मकान में छुपकर अपनी जान बचाई।

क्या हुआ था हिंदू नववर्ष के जुलूस में

करौली जिले के फूटा कोट इलाके में शनिवार (2 अप्रैल, 2022) को हिन्दू नववर्ष (नव संवत्सर) के उपलक्ष्य में मुस्लिम बहुल इलाके से एक बाइक रैली गुजर रही थी। इसी दौरान उन पर पथराव कर दिया गया। दुकानों और बाइकों को आग के हवाले कर दिया गया। इस घटना में 33 से अधिक लोगों और चार पुलिसकर्मियों के घायल होने की जानकारी भी सामने आई थी। वहीं, पुष्पेंद्र नाम के व्यक्ति की हालत गंभीर बताई जा रही है। उसे जयुपर रेफर कर दिया गया है।

जिस मुस्लिम बहुल इलाके में हिंदुओं पर पत्थर बरसाए गए वहाँ के मस्जिद पर, घरों में पहले से भारी-भारी ईंट-पत्थर इकट्ठा किए गए थे। लाठी-डंडों पर जुटाया गया था। हालात देखते हुए 7 अप्रैल तक कर्फ्यू भी लगा दिया गया है। फिलहाल इस पूरी घटना के संबंध में 46 लोग पकड़े गए हैं। अन्य आरोपितों की तलाश जारी है।

भगवंत मान के ‘पुल’ की खोली थी पोल, अब गिरफ्तार किए गए PTC चैनल के एमडी: लड़कियों का यौन शोषण करवाने के आरोप

पीटीसी नेटवर्क के प्रेसिडेंट और एमडी रबींद्र नारायण (PTC TV MD Rabindra Narayan) को गिरफ्तार कर लिया गया है। एक ‘मिस पंजाब’ कंटेस्टेंट ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी, जिसको लेकर पंजाब पुलिस ने उन्हें बुधवार (6 अप्रैल, 2022) तड़के सुबह उनके गुरुग्राम स्थित आवास से पूछताछ के लिए हिरासत में लिया। शिकायतकर्ता ने बताया कि ‘मिस पंजाब’ कॉन्टेस्ट के दौरान पीटीसी स्टाफ के एक सदस्य ने उसे जबरदस्ती एक कमरे में बंद कर दिया और उसका शोषण किया

कंटेस्टेंट ने यह भी आरोप लगाया है कि चैनल द्वारा हर साल कराने जाने वाले ब्यूटी कॉन्टेस्ट की आड़ में मानव तस्करी हो रही है। स्थानीय मीडिया के मुताबिक, PTC नेटवर्क पर यह आरोप भी है कि चैनल में मिस पंजाबी कॉन्टेस्ट के नाम पर भोली-भली लड़कियाँ बुलाई जाती थीं और फिर बड़े-बड़े लोगों से उनका यौन शोषण करवाया जाता था।

पीटीसी नेटवर्क ने एमडी को हिरासत में लिए जाने को सियासी रंजिश करार दिया है। उधर, पीटीसी के एमडी ने आरोप लगाया है कि यह जाँच मीडिया पर हमला है। नारायण ने भगवंत मान सरकार पर मीडिया की आवाज दबाने का आरोप लगाते हुए इसे राजनीति से प्रेरित कदम बताया। पीटीसी चैनल के प्रवक्ता ने संवाददाताओं से कहा कि इस मामले में गठित एसआईटी पहले ही हमारे एमडी रबींद्र नारायण का बयान दर्ज कर चुकी है और एमडी ने भी जाँच में पूरा सहयोग किया है। साथ ही कहा कि पुलिस को सभी डीवीआर सौंप दिए हैं, जिन्हें देखने से साफ पता चलता है कि आरोप लगाने वाली लड़की हमारे साथ कभी जुड़ी ही नहीं थी।

बता दें कि नारायण को आज उनके गुरुग्राम स्थित आवास से गिरफ्तार किया गया था, जबकि उनके खिलाफ मोहाली में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। कथित तौर पर, पंजाब पुलिस इस मामले में एक और संदिग्ध की तलाश कर रही है, जबकि अधिकारियों ने इसमें शामिल बड़े रैकेट की भूमिका की पहचान करने के लिए गहन जाँच शुरू कर दी है।

भगवंत मान के पुल पर पीटीसी की रिपोर्ट

मालूम हो कि 31 मार्च, 2022 को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। अरविंद केजरीवाल के साथ एक इंटरव्यू में मान ने सांसद के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान 1.80 करोड़ रुपए के कोटेशन के मुकाबले सिर्फ 6 लाख रुपए में पंजाब में एक पुल बनाने के बारे में हास्यास्पद दावे किए थे। स्थानीय समाचार चैनल पीटीसी न्यूज ने पुल को कवर करने के लिए एक रिपोर्टर को वहाँ भेजने का फैसला किया।

पीटीसी ने मान के दावों की पोल खोलते हुए उनकी धज्जियाँ उड़ा दी थीं। चैनल ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि संगरूर जिले के दिर्बा गाँव में जलमार्ग के ऊपर एक पुल की बजाए एक कंक्रीट पावर स्लैब बिछाया गया था।

गौरतलब है कि पीटीसी के एमडी रबींद्र नारायण की गिरफ्तारी चैनल द्वारा भगवंत मान के कथित झूठे दावों को उजागर करने के कुछ दिनों बाद हुई है। पीटीसी टेलीविजन नेटवर्क का स्वामित्व शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के पास है।

रामनवमी और हनुमान जयंती मनाने चली कॉन्ग्रेस घर में ही घिरी, MLA आरिफ मसूद ने कहा- रमजान की बात क्यों नहीं

मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस के गले की फाँस पार्टी के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का एक आदेश बन गया है। इस आदेश में कमलनाथ ने पार्टी कार्यकर्ताओं को रामनवमी और हनुमान जयंती मनाने के निर्देश दिए हैं। भोपाल से पार्टी विधायक आरिफ मसूद ने इस पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि इससे गलत मिसाल स्थापित किया जा रहा है। उन्होंने पूछा है कि रामनवमी औऱ हनुमान जयंती के बीच आखिर कॉन्ग्रेस रमजान को कैसे भूल गई।

मसूद ने कहा, “जो परिपत्र जारी किया है उस पर मुझे ऐतराज है। ऐसे परिपत्र राजनीतिक दलों को जारी नहीं करने चाहिए। हम जिस विचारधारा में काम करते हैं उसमें सभी को साथ लेकर चलते हैं। आपने रामनवमी और हनुमान चालीसा का जिक्र किया, लेकिन आप अंबेडकर जयंती, गुड फ्राइडे औऱ रमजान का जिक्र नहीं किया। ये तीनों बड़े त्योहार पड़ने वाले हैं। बाकियों और हममें एक फर्क है और वो ये कि दूसरी पार्टियाँ एक धर्म की बात करती हैं और हम सभी की। बेहतर यही रहेगा कि हम राजनीतिक बात, आंदोलन की बात करें। धार्मिक त्योहार होते हैं और होते रहेंगे, इन्हें न कोई रोक सका है और न कोई रोक पाएगा।”

गौरतलब है कि 10 अप्रैल रामनवमी है और 16 अप्रैल को हनुमान जयंती है। इसी को देखते हुए एमपी कॉन्ग्रेस के चीफ कमलनाथ ने प्रदेश के पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को एक पत्र जारी किया है। इसमें उन्होंने रामनवमी के दिन राम कथा और रामलीला करने और 16 अप्रैल को हनुमान जयंती के अवसर पर हनुमान चालीसा का पाठ कर इसे भव्य तरीके से मनाने का निर्देश दिया है। ये निर्देश बड़े से लेकर सबसे छोटे स्तर तक के कार्यकर्ता के लिए था। इस बीच प्रदेश के गृह मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा ने मसूद की आपत्ति पर चुटकी लेते हुए कहा कि मसूद इस बात को पचा नहीं पा रहे हैं कि इफ्तार का आयोजन करने वाली पार्टी अब मंदिरों के चक्कर क्यों लगा रही है?

‘वो लाउडस्पीकर पर अजान बजाएँ… यहाँ हनुमान चालीसा बजेगी’ : भजन गायिका अनुराधा पौडवाल के सवाल, बोलीं- भारत जैसा कहीं नहीं होता

बॉलीवुड के मशहूर गायक सोनू निगम के बाद अब देवी-देवताओं के भजन गाने के लिए प्रसिद्ध, गायिका अनुराधा पौडवाल ने लाउडस्पीकर पर होती अजान के मुद्दे पर अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि जैसे भारत में अजान दी जाती है। वैसे तो मुस्लिम देशों में भी नहीं होता। उन्होंने बताया कि वो किसी मजहब के विरुद्ध नहीं हैं, लेकिन इस तरह लाउडस्पीकर पर जब अजान होती है तो बाकी धर्म के लोग भी चाहते हैं कि वह भी स्पीकर चलाएँ।

अनुराधा पौडवाल ने अपना पक्ष जी न्यूज से बातचीत में रखा। उन्होंने कहा, “मैं दुनिया की कई जगहों पर घूमी हूँ। लेकिन जैसे भारत में होता है वैसा कहीं और नहीं होता। मैं किसी धर्म के खिलाफ नहीं हूँ। पर हमारे यहाँ इसे जबरदस्ती बढ़ावा दिया जा रहा है। ऊँची आवाज में मस्जिद से लाउडस्पीकर लगाकर अजान चलाई जाती है जिसे देख दूसरों को भी लगता है कि वो अपना लाउडस्पीकर क्यों न चलाएँ।”

उन्होंने कहा, “मैं तो मिडिल ईस्टर्न देशों में भी ट्रैवेल कर चुकी हूँ। लेकिन वहाँ तो लाउडस्पीकर पर अजान बैन है। जब मुस्लिम देशों में लाउडस्पीकर पर अजान नहीं हो रही तो भारत में ही क्यों हो रहा है ऐसा? उन्होंने कहा, “यहाँ लाउडस्पीकर पर अजान चलती है तो यहाँ लोगों ने कहा हम हनुमान चालीसा चलाएँगे। इसी कारण से विवाद बढ़ता है जो बेहद दुखद है।”

उन्होंने नवरात्रि और रामनवमी जैसे हिंदू त्योहारों को लेकर बात की। साथ ही युवाओं को संदेश दिया। उन्होंने कहा, “हमें अपने बच्चों को देश की संस्कृति के बारे में जागरुक करना चाहिए। उन्हें ये बात बताई जानी चाहिए कि आदि शंकराचार्य हमारे धर्म गुरु हैं।: वह बोलीं, “पोप का संबंध ईसाइयों से है, ये जानकारी तो सबको होगी ही। इसीलिए हमारे धर्म के बारे में भी ये पता होना ही चाहिए कि हिंदुओं के पास चार वेद, 18 पुराण और 4 मठ हैं।”

सोनू निगम और लाउडस्पीकर विवाद

बता दें कि अनुराधा की तरह ही साल 2017 में ऐसा ही सवाल सोनू निगम ने उठाया था। उन्होंने पूछा था कि आखिर जब इस्लाम बना तो बिजली नहीं थी। फिर ये सब क्यों होता है। उनका कहना था कि वो मुस्लिम नहीं है फिर भी सुबह उठना पड़ता है। आखिर कब जबरन मजहब थोपना बंद किया जाएगा। उनके इस बयान के बाद उनके विरुद्ध कट्टरपंथियों ने उन्हें गंजा करने के लिए फतवा जारी कर दिया था।

ब्रह्मा-विष्णु-इंद्र को बलात्कारी बता AMU में हो रही थी रेप पर पढ़ाई, अब ‘माफी-सस्पेंशन’ से हिंदूफोबिया पर डाल रहा पर्दा

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (Aligarh Muslim University- AMU) एक फिर गलत कारणों से चर्चा में है। यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर ने अपने लेक्चर में हिंदू देवी-देवताओं (Hindu God) को बलात्कारी साबित करने की कोशिश की। बवाल होने के बाद यूनिवर्सिटी ने प्रोफेसर को निलंबित कर दिया है। वहीं, हिंदू संगठनों ने प्रोफेसर पर रासुका लगाने की माँग की है।

निलंबन पत्र को ट्विटर पर शेयर करते हुए AMU ने कहा, “एएमयू ने डॉ जितेंद्र कुमार को किया निलंबित। प्रथम दृष्टया मिसकंडक्ट और मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉ जितेंद्र को जाँच पूरी होने तक सेवा से निलंबित कर दिया गया है। डॉ कुमार को जारी कारण बताओ नोटिस के जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।”

यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कहा कि बलात्कार के संदर्भ में पौराणिक घटनाओं की जिक्र प्रोफेसर ने अपने स्लाइड के कंटेंट में किया, जिसकी यूनिवर्सिटी प्रशासन और मेडिसिन विभाग निंदा करता है। छात्र-छात्राओं, कर्मचारियों और जनता की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के लिए प्रोफेसर को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

इस मामले में मेडिसिन विभाग के डीन राकेश भार्गव के निर्देशन में दो सदस्यीय जाँच समिति बनाई गई है। मामला बढ़ने और चारों तरफ आलोचना होने के बाद प्रोफेसर जितेंद्र कुमार ने बिना शर्त माफी माँगी है। हालाँकि, माफी माँगने के बावजूद उनके खिलाफ कार्रवाई की तैयारी हो रही है। यूपी पुलिस के क्षेत्राधिकारी ने कहा कि AMU के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर डॉ जितेंद्र से संबंधित विवादित पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन की जानकारी सामने आई है।

वहीं, विश्व हिंदू परिषद (VHP) के प्रवक्ता विनोद बंसल ने हिंदुओं के लिए न्याय की माँग करते हुए कहा कि प्रो जितेंद्र का अस्थायी निलम्बन कर AMU अपने कुकर्मों पर पर्दा डाल रहा है। उन्होंने VC और आरोपित के निलंबन के साथ-साथ रासुका लगाकर अविलंब गिरफ्तारी की माँग की।

बंसल ने कहा कि हिंदू देवी देवताओं को बलात्कारी बताने वाले AMU के प्रोफेसर उसके उसके सभी षड्यंत्रकारियों पर रासुका लगा कर कठोरतम कार्यवाही जरूरी है। उन्होंने कहा, “जिहादी व कम्युनिस्टों के इन जहरीले फनों को अविलंब कुचलना जरूरी है।”

डॉ. जितेंद्र कुमार AMU से संबद्ध जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। वह मंगलवार (5 अप्रैल 2022) को सेक्सुअल ऑफेंस पर लेक्चर के दौरान हिंदू पौराणिक घटनाओं का संदर्भ लेते हुए एक स्लाइड शो शेयर किया। इसमें उन्होंने ब्रह्मा, इंद्र और भगवान विष्णु के चरित्र पर सवाल उठाया।

लेक्चर के दौरान प्रोफेसर जितेंद्र ने कहा कि ब्रह्मा ने अपनी पुत्री के साथ रेप किया। इंद्र ने गौतम ऋषि को धोखा देते हुए उनकी पत्नी के साथ संबंध बनाए। दैत्यराज जलंधर की पत्नी के साथ विष्णु ने संबंध जोड़ा। लेक्चर के दौरान इन संदर्भों को देखकर विद्यार्थियों ने हंगामा शुरू कर दिया। टिप्पणी के बाद बुधवार (6 अप्रैल) को भी यूनिवर्सिटी में माहौल गरमाया हुआ है।

इससे पहले बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में भी हिंदू देवी-देवताओं को लेकर आपत्तिजनक भाषा पर हंगामा मचा था। BHU में एक पेटिंग प्रदर्शनी के दौरान भगवान श्रीराम की पेंटिंग के ऊपर प्रोफेसर ने अपनी और माता सीता की पेटिंग पर अपनी पत्नी की तस्वीर लगा दिया था। इसको लेकर भी भारी बवाल हुआ था।

‘परिवारवादी पार्टियों ने देश के साथ किया विश्वासघात, हम करते हैं राष्ट्रभक्ति की राजनीति’: BJP स्थापना दिवस पर बोले PM मोदी

भारतीय जनता पार्टी (BJP) बुधवार (6 अप्रैल 2022) को अपना 42वाँ स्थापना दिवस मना रही है। इस अवसर पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने दिल्ली में अपने मुख्यालय में पार्टी का झंडा फहराया। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पार्टी कार्यकर्तोओं को संबोधित किया। इसके अलावा लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय पर आयोजित कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हिस्सा लिया।

पीएम मोदी ने कहा कि परिवारवादी पार्टियों ने देश के युवाओं को भी कभी आगे नहीं बढ़ने दिया, उनके साथ हमेशा विश्वासघात किया है। और आज हमें गर्व होना चाहिए कि आज भाजपा ही इकलौती पार्टी है जो इस चुनौती से देश को सजग कर रही है, सतर्क कर रही है। इसके साथ ही पीएम मोदी ने लोगों से कमलपुष्प को पढ़ने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इसको आप जितनी बार पढ़ेंगे, आपको हर जीवनगाथा से एक नई ऊर्जा और मार्गदर्शन मिलेगा।

पीएम मोदी ने कहा कि उनके लिए राजनीति और राष्ट्रनीति साथ-साथ चलते हैं, लेकिन ये भी सच्चाई है कि अभी भी देश में दो तरह की राजनीति चल रही है। एक राजनीति है परिवारभक्ति की, और दूसरी है राष्ट्रभक्ति की। देश के युवा अब ये समझने लगे हैं कि किस तरह परिवारवादी लोकतंत्र की सबसे बड़ी दुश्मन हैं। लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ करने वाली ये पार्टियाँ, संविधान और संवैधानिक व्यवस्थाओं को भी कुछ नहीं समझतीं।

उन्होंने कहा, “पिछले कई चुनावों में हमने लगातार देखा है कि भाजपा का विजय तिलक करने के लिए सबसे आगे हमारी माताएँ-बहनें रहती हैं। ये केवल एक चुनावी घटना भर नहीं है बल्कि ये एक ऐसा सामाजिक और राष्ट्रीय जागरण है जिसका इतिहास में विश्लेषण किया जाएगा। आज दुनिया के सामने एक ऐसा भारत है जो बिना किसी डर या दबाव के, अपने हितों के लिए अडिग रहता है। हमारी सरकार राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखते हुए काम कर रही है। आज देश के पास नीतियाँ भी हैं, नियत भी है। देश के पास निर्णयशक्ति भी है, निश्चयशक्ति भी है।”

पीएम ने आगे कहा कहा, “पार्टी आज से सामाजिक न्याय पखवाड़ा शुरू करने जा रही है। मेरा आप सभी से विशेष आग्रह है कि इस अभियान में सक्रियता से जुड़ें। सरकार गरीबों के लिए जो योजनाएँ चला रही हैं, उनके प्रति देशवासियों को जागरूक करें। आज देश जमीन से जुड़े तमाम अभियानों को आगे बढ़ा रहा है और भाजपा के कार्यकर्ता के रूप में जमीन पर उनके सारथी आप ही हैं। आज देश जमीन से जुड़े तमाम अभियानों को आगे बढ़ा रहा है और भाजपा के कार्यकर्ता के रूप में जमीन पर उनके सारथी आप ही हैं।”

इस दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा, “एक समय वो भी था जब संसद में हमारे सिर्फ 2 सदस्य हुआ करते थे और लोग हमारा मजाक उड़ाया करते थे। आज मोदी जी के नेतृत्व में भाजपा को ये गौरव प्राप्त हुआ है कि आज हम दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बनकर खड़े हैं। आज हमारी पार्टी ने दो बार मोदी जी के नेतृत्व में पूर्ण बहुमत के साथ केंद्र में सरकार बनाई है। आज राज्यसभा में 1988 के बाद 100 का आँकड़ा पार करने वाली पार्टी भाजपा ही है। आज 12 राज्यों में विशुद्ध भाजपा की सरकार है और 18 राज्यों में हमारे गठबंधन की सरकार है।”

आगे उन्होंने विपक्षों पर निशाना साधते हुए कहा कि हमें आज के दिन संकल्प लेना है कि जो प्राइवेट लिमिटेड पार्टियाँ हैं, जो अपने परिवार के आगे कुछ नहीं देखती हैं, उन्हें घर बैठाना है। साथ ही जो समाज की सेवा के साथ आगे बढ़ते हैं, उन्हें ताकत प्रदान करनी है। संकल्प लें कि हम परिवारवाद को मुँहतोड़ जवाब देंगे।

उल्लेखनीय है कि भारतीय जनता पार्टी की स्थापना 6 अप्रैल, 1980 को हुई, लेकिन देश की सत्तारूढ़ पार्टी ने 1951 से लेकर 1980 तक भारतीय जनसंघ और जनता पार्टी के रूप में भी अपने सफर को पूरा किया था। पार्टी ने अपनी इस यात्रा में कई उतार चढ़ाव देखे हैं। दो सीटों वाली पार्टी 2014 और 2019 में प्रचंड बहुमत के साथ अपनी सरकार बनाने में सफल रही। इसके अलावा ‘कॉन्ग्रेस मुक्त भारत’ का नारा देते हुए कई राज्यों में भी सरकार बनाने में सफल रही।

जानवर को कैसे करते हैं हलाल, काटने से पहले बेहोश करना इस्लाम में क्यों नहीं कबूल: जानिए सब कुछ

भारत और दुनिया भर में हलाल उद्योग खतरनाक गति से बढ़ रहा है। दुनिया भर में 1.8 बिलियन (1 अरब 80 करोड़) से अधिक लोग इस्लाम को मानने वाले हैं और हलाल खाद्य बाजार वर्तमान में वैश्विक खाद्य उद्योग का 16% है। वहीं निकट भविष्य में हलाल खाद्य उत्पादन में वैश्विक व्यापार का 20% तक वृद्धि की उम्मीद है।

भारत में करीब 180 मिलियन (18 करोड़) मुस्लिम (जनसंख्या का 14%) हैं, वहीं भारत वर्तमान में इस्लामिक सहयोग संगठन के (OIC) देशों को हलाल मांस के सबसे बड़े निर्यातकों में से एक है। हलाल काउंसिल ऑफ इंडिया के मुफ्ती ताहिर के अनुसार, हलाल उत्पादों को ‘स्वास्थ्य और स्वच्छता’ के कारण गैर-मुस्लिमों के बीच भी अत्यधिक लोकप्रियता प्राप्त है।

उन्होंने टिप्पणी की है, “हलाल स्वस्थ और स्वच्छ होने का पर्याय है… यहाँ तक ​​​​कि गैर-मुस्लिमों का एक बड़ा वर्ग (भारत के भीतर भी) स्वच्छता और स्वास्थ्य कारणों से हलाल मांस पसंद करता है? दरअसल, हलाल काउंसिल ऑफ इंडिया का आदर्श वाक्य ही है- स्वस्थ खाओ, बेहतर सोचो।

इस्लाम कुरान और पैगंबर मुहम्मद (हदीस में) के शब्दों के आधार पर मुस्लिमों के लिए आहार उत्पादों को ‘हलाल और ‘हराम’ के रूप में अलग-अलग करता है। जबकि इस्लाम में हलाल के रूप में जिसे बताया गया है वह दूसरे धर्मों के लोगों पर भी लागू हो यह जरूरी नहीं है।

इसके बावजूद, हलाल उत्पादों का भारतीय खाद्य उद्योग में हिस्सा बहुत ज़्यादा नहीं है। यह भी विशेष रूप से गैर-मुस्लिमों में जागरूकता की कमी और वैकल्पिक भोजन विकल्पों की उपलब्धता न होने के कारण भी है।

फिर भी, हलाल मांस उद्योग आधुनिक उद्योगों की आवश्यकताओं की हिसाब से पिछड़ा हुआ है, जिसकी बड़ी वजह विशेष रूप से सख्त इस्लामिक नियम और मानवीय और तकनीकी रूप से उन्नत प्रक्रियाओं को न अपनाने के कारण है।

हलाल, ‘खून की अशुद्धता’ और कुरान के प्रतिबंध

जानकारों का कहना है, मुस्लिमों से हर समय इस्लाम (शरिया कानून) के आधार पर खाने-पीने के प्रतिबंधों का पालन करने की अपेक्षा की जाती है। साथ ही इस्लाम में जिन्हें हराम कहा गया है, उनसे बचने को भी कहा गया है। जैसे-

  • सूअर
  • अल्लाह के नाम के बिना जिबह (काटे) किए गए जानवर
  • लंबे नुकीले दाँत या टस्क वाले जानवर
  • कीड़े-मकोड़े
  • प्राइमेट, सरीसृप (काँटेदार पूँछ वाली छिपकलियों को छोड़कर) और उभयचर
  • गधों, खच्चरों (घोड़ों की मनाही नहीं है) और लाइकोनपिक्टस (अफ्रीकी जंगली कुत्ता)
  • जलीय जंतु जो मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं
  • रक्त (किसी भी जानवर का)

‘जानवरों की हत्या’ की हलाल प्रणाली, जिसे ‘जिबह’ भी कहा जाता है, जो जानवरों के ‘रक्तस्राव’ पर विशेष जोर देती है। यह विशेष रूप से इस्लामी मान्यता के कारण है कि रक्त ‘अशुद्ध’ है। और जिबह किए गए जानवरों से रक्त का बहना हलाल प्रक्रिया का प्रमुख आधार है। कुरान की कई ऐसी आयतें हैं, जो दोहराती हैं कि खून के सेवन से किसी भी कीमत पर बचना चाहिए। दरअसल, खून को इस्लाम में हराम माना गया है।

कुरान- अध्याय 2 (अल-बकराह) आयत- 173 कहता है:

“उसने तुम्हें केवल ऐसा मांस खाने से मना किया है, जो मरे हुए जानवर का सड़ा हुआ मांस हो, खून, सूअर या जो कुछ भी बिना कलमा पढ़े जिबह किया गया हो। लेकिन अगर कोई जरूरतों से विवश है- न तो इच्छा से प्रेरित है और न ही तात्कालिक आवश्यकता से- तो वे गुनहगार नहीं होंगे। निश्चय ही अल्लाह बड़ा क्षमाशील और अत्यन्त दयालु है।”

अध्याय- 5 (अल-मैदाह) कुरान की आयत- 3 कहता है:

“मृत जानवर का सड़ा हुआ मांस, खून और सूअर तेरे लिए वर्जित हैं, जो अल्लाह के सिवा किसी और के नाम पर जिबह किया गया है, गला घोंटने, पीटने, गिरने, या मौत के मुँह में जाने से मारा जाता है; जिसे आंशिक रूप से किसी शिकारी द्वारा खाया गया है, जब तक कि आप इसे हलाल नहीं करते और जो वेदियों पर बलि (झटका) दिया गया है। आपको ऐसे में निर्णयों के लिए बहुत कुछ आकर्षित करने की भी मनाही है। यह सब बुराई है। आज काफ़िरों ने तुम्हारे ईमान को ‘कम करने’ की सारी उम्मीद छोड़ दी है। इसलिए उनसे मत डरो; मुझसे डरो! आज मैंने तुम्हारे लिए तुम्हारा ईमान सिद्ध कर दिया है, तुम पर अपनी मेहरबानी पूरी कर दी है, और इस्लाम को तुम्हारे रास्ते के रूप में चुना है। लेकिन जो कोई भीषण भूख से मजबूर है- गुनाह का इरादा नहीं है – तो निश्चित रूप से अल्लाह बड़ा क्षमाशील, दयालु है।”

कुरान- अध्याय 6 (अल-अनम) आयत- 145 कहता है:

कहो, ऐ पैग़म्बर, “जो कुछ मुझ पर उतारा गया है, उसमें मुझे कुछ भी खाने से मनाही नहीं है, सिवाय सड़े हुए मांस, बहते ख़ून, सूअर-जो अशुद्ध है- या अल्लाह के अलावा किसी और के नाम पर (बिना कलमा के) किया गया है। परन्तु यदि कोई आवश्यकता से विवश है – न तो इच्छा से प्रेरित है और न ही तत्काल आवश्यकता से अधिक है – तो निश्चय ही तुम्हारा पालनहार बड़ा क्षमाशील, अत्यन्त दयालु है।”

अध्याय 16 (अल-मैदाह) कुरान की आयत 115 कहती है:

“उसने तुम्हें केवल सड़े हुए मांस खाने से मना किया है, खून, सूअर, और जो कुछ अल्लाह के अलावा किसी और के नाम पर जिबह किया जाता है। परन्तु यदि कोई आवश्यकता से विवश है – न तो इच्छा से प्रेरित है और न ही तत्काल आवश्यकता से अधिक है – तो निश्चित रूप से अल्लाह बड़ा क्षमाशील, दयालु है।”

वहीं कट्टरपंथी इस्लामी उपदेशक जाकिर नाइक के अनुसार, झटका पद्धति रीढ़ की हड्डी को नुकसान पहुँचाती है, जिसके परिणामस्वरूप हृदय में रक्त का ‘जमाव’ होता है। नाइक के अनुसार, मृत जानवर के शरीर में खून बहने के बजाय रुक जाता है।

उसके अनुसार, हलाल करके जब जानवरों को जिबह करते हैं तो खून तेजी से निकलता है। आज का विज्ञान भी हमें बताता है कि रक्त कीटाणुओं और जीवाणुओं का वाहक है। हम (मुस्लिम) हाइजेनिक लोग हैं। हम कीटाणुओं से लदे जानवरों को खाना पसंद नहीं करते।

इतना ही नहीं कथित तौर पर मेडिकल की डिग्री रखने वाले नाइक ने दावा किया कि हलाल का मांस झटके के मांस की तुलना में अधिक समय तक ताजा रहता है।

हलाल तरीके से जानवरों की जिबह

इस्लामी कानून (शरिया) के अनुसार, किसी जानवर को ‘हलाल’ के लिए एक तेज चाकू के उपयोग की आवश्यकता होती है, जिसमें किसी तरह की जंग और भोथरा न हो। हालाँकि, किसी विशेष प्रकार के चाकू का उपयोग करने का कोई निर्देश नहीं है, बस इस बात पर जोर दिया जाता है कि चाकू का ब्लेड जानवर की गर्दन से 2-4 गुना बड़ा हो।

जानवर को अच्छी तरह से खिलाया जाना चाहिए, पीने के लिए साफ पानी दिया जाना चाहिए और इसे उसके बेजान होने से पहले किया जाना चाहिए।

सहीह मुस्लिम, हदीसों का एक संग्रह, पुस्तक 21, संख्या 4810 में बताता है:

“शादीद बी. औस ने कहा: दो चीजें हैं जो मुझे अल्लाह के रसूल ने याद किया है: वास्तव में अल्लाह ने हर चीज में भलाई का आदेश दिया है; इसलिए जब तुम घात करो, तो अच्छे तरीके से करो, और जब घात करो, तो अच्छी रीति से हलाल करो। इसलिए तुम में से हर एक अपनी छुरी की धार तेज करे, और हलाल किए हुए पशु को आराम से मरने दे।”

हालाँकि, ‘एनिमल वेलफेयर’ के बहाने जानवरों को हलाल से पहले खिलाने की इस्लामी रिवाज में समस्या है। इस तरह की विधि से जुगाली करने वाले जानवरों के पेट में बैक्टीरिया की मात्रा और बढ़ जाती है। आधुनिक औद्योगिक विधियों जिबह से पहले 12 घंटे तक जो कुछ भी खाया गया है उसकी निकासी की आवश्यकता होती है, ताकि मांस को प्रदूषित होने के जोखिम को टाला जा सके।

हलाल केवल एक समझदार, वयस्क मुस्लिम व्यक्ति द्वारा किया जाना चाहिए, जो इस्लामी रीति-रिवाजों से परिचित हो। “एक गैर-मुस्लिम द्वारा जिबह किए गए जानवर हलाल नहीं कहे जाएँगे। यूरोपीय संघ में हलाल प्रमाणन विभाग का भी कहना है कि हलाल के समय अल्लाह के नाम का आह्वान (कलमा पढ़ा जाना) किया जाना चाहिए: बिस्मिल्लाह रहमाने… अल्लाह-हू-अकबर।

क़ुरान, अध्याय 6 (अल अनम) आयत 18 में स्पष्ट करता है: तो अल्लाह के नाम पर केवल वही खाओ जो अल्लाह के नाम पर हलाल किया गया है यदि आप वास्तव में उसमें ईमान रखते हो।

जानवरों के स्लॉटर के लिए आधुनिक तकनीक

यह देखते हुए कि हलाल करने वाले के लिए एक पंक्ति में 4000-12000 पक्षियों को प्रोसेस्ड करते समय हर बार अल्लाह का नाम लेना मुश्किल है। वहीं इस पर फतवा देते हुए, एक फरमान जारी किया है कि बड़े पैमाने पर हलाल करने के लिए केवल एक बार ही कलमा पढ़ना काफी है।

हलाल में मशीनों से अधिक श्रमिक (मुस्लिम) शामिल होते हैं, जिससे मांस की कीमत काफी बढ़ जाती है।

यहाँ तक ​​कि पोल्ट्री की गर्दन काटने के लिए भी एक स्वचालित चाकू का उपयोग इस्लाम में हराम माना जाता है, यह देखते हुए कि जिबह का हलाल तरीका खून की कमी (तेजी से बहने) पर जोर देता और जो एनिमल वेलफेयर के खिलाफ है। इन दोनों बातों से समझौता किया जा सकता है यदि स्वचालित मशीनों द्वारा काटा जाता है।

यह महत्वपूर्ण है कि जानवर को ठीक से जिबह किया जाए। यह उत्तेजना या घबराहट की स्थिति में नहीं होना चाहिए क्योंकि यह चीरे की सटीकता में गड़बड़ी पैदा कर सकता है। हलाल प्रक्रिया के अनुसार, खून को तेजी से बहने के लिए जानवर को उसके बायीं तरफ लिटाना चाहिए। यह भी मक्का (क़िबला) की दिशा में होना चाहिए।

Slaughter practices of different faiths in different countries – Scientific Figure on ResearchGate

अलग-अलग जानवरों को अलग-अलग तरीकों से हलाल किया जाता है। उदाहरण के लिए, एक भेड़ को क्षैतिज स्थिति में हलाल किया जाता है, जबकि जुगाली करने वालों को एक सीधी स्थिति में लिटाकर, पिछले पैर से दबाकर हलाल किया जाता है। दिलचस्प बात यह है कि अधिकांश हलाल बूचड़खाने जानवर को लिटाकर ही हलाल करते हैं।

पार्श्व स्थिति में जिबह किए गए जुगाली करने वाले जानवरों में रक्तस्राव सबसे अधिक होता है और जब सीधी स्थिति में रखा जाता है तो सबसे कम होता है। लंबवत रूप से लटकाए गए बकरे या जानवरों से सीधे रखे गए जानवरों की तुलना में अधिक खून बहता है।

हलाल के लिए, चीरा गर्दन पर और आहार नली नीचे लगाया जाना चाहिए। श्वासनली, आहारनाल, गले की नसें और जानवर की कैरोटिड धमनियों को बिना किसी रुकावट या देरी के तेज गति में काटा जाना चाहिए।

अब्दुल्ला. एफ. बोरिलोवा ने कहा, “चीरा निचले जबड़े के पास गर्दन लगाया जाना चाहिए लेकिन रीढ़ तक नहीं पहुँचना चाहिए। इसका मतलब है कि हलाल के दौरान सिर को शरीर से पूरी तरह से अलग नहीं किया जाना चाहिए।”

बेहोश कर जानवरों को काटना और हलाल के साथ असंगति

जबकि हलाल कहता है कि हत्या के समय जानवर को पूरी तरह से सचेत होना चाहिए, जो आश्चर्यजनक रूप से चेतना की स्थिति के बारे में चिंता पैदा करता है। जबकि स्टन्निंग या बेहोशी की प्रक्रिया में ऐसा माना जाता है कि किसी जानवर की चेतना का अंत (मृत्यु) बिना परेशानी, पीड़ा, चिंता और दर्द के होनी चाहिए।

यूरोप में जानवरों की हत्या में स्टनिंग अनिवार्य है। अपेक्षाकृत दर्द रहित वध प्रक्रिया का कुरान और हदीसों में कोई उल्लेख नहीं मिलता है, मुस्लिम समुदाय के बीच आम सहमति यह है जानवरों को हलाल से पहले बेहोश नहीं किया जाना चाहिए।

शोधकर्ताओं अब्दुल्ला एफ और बोरिलोवा के अनुसार, “खासकर एनिमल वेलफेयर की दृष्टि से बिना बेहोशी के मवेशियों को जिबह करने के कई नुकसान हैं। जानवर काटे जाने पर तनाव और दर्द का अनुभव करता है और झूठे एन्यूरिज्म (तनाव या दर्द से जुड़े हार्मोन आदि) विकसित करता है जिससे उसकी मृत्यु में में देरी होती है।”

उन्होंने कहा, “जानवरों को काटने के बाद यदि यंत्रवत् रूप से नियंत्रित नहीं किया जाता है, तो धीमी गति से रक्तस्राव होता है इस प्रकार, लंबे समय तक उसे अनावश्यक पीड़ा होती है।”

हलाल पोल्ट्री उद्योग में, स्टनिंग को ‘अस्वीकार्य’ माना जाता है। उन्होंने कहा, “हालाँकि बिजली के माध्यम से बेहोशी में पक्षियों के आकार को मानकीकृत किया गया है, कुछ पक्षी मारे जाने से पहले बेहोशी की प्रक्रिया या लगने वाले समय में देरी के कारण मर जाते हैं।”

“एक ही वोल्टेज के करंट को झेलने और बिजली से बेहोश होने के बाद भी जीवित रहने की पोल्ट्री की क्षमता एक विशेष वजन के पैरामीटर के भीतर भी भिन्न होती है।” यहाँ तक ​​​​कि नॉनपेनेट्रेटिव पर्क्यूसिव रिवर्सिबल स्टनिंग के मामलों में भी, यह देखा गया है कि बड़ी संख्या में मवेशियों में असामान्य रक्तस्राव होता है।

जबकि स्टनिंग एक प्रक्रिया के रूप में मुस्लिमों में स्वीकार्य होने के लिए, हलाल को नियंत्रित करने वाले मानकों का पालन करना चाहिए। इसमें रिवर्सिबल स्टनिंग शामिल है जो जानवर को मारता नहीं है या स्थायी चोट नहीं पहुँचता है। जिसे कलमा पढ़ते हुए एक मुस्लिम व्यक्ति द्वारा किया जाना चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सूअरों पर स्टनिंग उपकरणों का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।

फिर भी, ‘मानवीय प्रक्रिया’ में संसाधनों की कमी, उचित स्टनिंग (बेहोशी) उपकरणों और तकनीकी प्रशिक्षण के आभाव के कारण कई अन्य चुनौतियाँ हैं। वर्तमान में, मुस्लिम बहुसंख्यक मलेशिया (जो इस्लाम के शफी विचारधारा का अनुसरण करता है) में हलाल से पहले स्टनिंग स्वीकार्य है, लेकिन पाकिस्तान में नहीं (जो इस्लाम के हनफी विचार का पालन करता है)।

यह देखते हुए कि इस्लामिक कानून (शरिया) 1400 साल पहले स्थापित किए गए थे, जिससे यह स्पष्ट है कि कुछ आधुनिक तकनीकें और मानदंड इस्लामी नियमों से मेल नहीं खाते हैं। ऐसे में वे मुस्लिम, जो मानते हैं कि शरिया हर समय और जगह के लिए मान्य है। वे मांस उद्योग में भी स्लॉटर की आधुनिक तकनीकी को अपनाने से इनकार करते हैं।

References: Abdullah, F., Borilova, G., & Steinhauserova, I. (2019). Halal Criteria Versus Conventional Slaughter Technology. Animals : an open access journal from MDPI, 9(8), 530. https://doi.org/10.3390/ani9080530

यूक्रेन का बूचा और 400 लाशें… वो नरसंहार जिसकी भारत ने भी की कड़ी निंदा, रूस बता रहा है ‘फेक अटैक’

रूस-यूक्रेन (Russia Ukraine war) के बीच युद्ध लगातार जारी है। इस बीच भारत ने यूक्रेन के बूचा (Boocha Massacre) में लोगों के नरसंहार के मामले में निष्पक्ष जाँच की माँग की है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत टीएस तिरुमूर्ति ने रूस का नाम लिए बिना इस घटना की कड़ी निंदा की और कहा कि बूचा में लोगों की हत्या की खबरें परेशान करने वाली हैं। उन्होंने हिंसा को समाप्त करने के लिए कूटनीतिक पहल की बात कही है।

तिरुमूर्ति ने कहा कि जब बेकसूर लोगों की जिंदगी दाँव पर लगी हो तो कूटनीति को ही शांति स्थापना के व्यवहारिक विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूक्रेन के बिगड़ते हालात पर भारत की चिंताएँ काफी बढ़ी हुई हैं। इस संकट के कारण दुनियाभर में खाद्य और ऊर्जा की सामान महँगे हो रहे हैं। भारतीय अधिकारी ने कहा कि जब पिछली बार सुरक्षा परिषद की बैठक हुई थी और जब इस बार सुरक्षा परिषद की जो बैठक हो रही है, तब से अब तक यूक्रेन की स्थिति में तनिक भी बदलाव नहीं हुआ है। बैठक के दौरान भारत ने खुलकर न तो रूस का साथ दिया और न ही यूक्रेन का साथ दिया, लेकिन युद्ध पीड़ितों की हर संभव मदद की बात जरूर की।

क्या है बूचा?

बूचा यूक्रेन का एक शहर है। ये देश की राष्ट्रीय राजधानी कीव से 46 किलोमीटर स्थित है। करीब 36,000 लोगों की आबादी वाले इस शहर का नाम बूचा नदी पर पड़ा है। यहाँ पर चीजें आसानी से उपलब्ध थीं। इसीलिए अधिकतर युवा यहाँ जाना पसंद करते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, बूचा में नरसंहार किए जाने का खुलासा उस वक्त हुए जब यहाँ 400 से भी अधिक लाशें एक साथ बरामद हुईं। लोगों के हाथ पीछे करके बाँध दिए गए थे और फिर उन्हें प्रताड़ित करने के बाद मार दिया गया।

इस हत्या का आरोप रूस के चेचेन सैनिकों पर लग रहा है। 30 मार्च को रूसी सैनिकों ने इस शहर को खाली किया था और करीब 40 दिन के बाद यूक्रेनी सैनिक यहाँ पहुँचे। कीव में कब्जे की जंग के दौरान युद्ध क्षेत्र बना हुआ था।

रूस ने बताया फेक

हालाँकि, रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने बूचा मामले को ‘फेक अटैक’ करार देते हुए इसे यूक्रेन औऱ पश्चिमी देशों का प्रोपेगेंडा करार दिया है। उन्होंने कहा समझौते के आधार पर रूसी सैनिकों ने उस इलाके को खाली कर दिया था। कुछ दिनों के बाद वहाँ पर एक ‘फेक अटैक’ प्लान किया। इसे यूक्रेनी प्रतिनिधि और उनके पश्चिमी संरक्षक सभी सोशल मीडिया के चैनलों के जरिए प्रसारित कर रहे हैं।

अब बंगाल के पूर्वी बर्दवान में बीरभूम जैसी आगजनी: हत्या के बाद कई घर फूॅंके, अब तक 39 गिरफ्तार

पश्चिम बंगाल के पूर्वी बर्दवान जिले में एक व्यक्ति की हत्या के बाद कई घरों को आग के हवाले कर दिया गया। मछली व्यवसायी उत्पल घोष की मनोज घोष ने रविवार (3 अप्रैल 2022) को हाथापाई के बाद कुल्हाड़ी से काटकर हत्या कर दी थी। उत्पल जिले के गलसी थाना क्षेत्र के लोआ संतोषपुर गाँव के रहने वाले थे। रिपोर्टों में बताया गया है कि दोनों के बीच आपसी दुश्मनी थी। मनोज रविवार को उत्पल के घर गया था और फिर किसी काम के बहाने बाहर बुलाया। बाद में उत्पल का शव सड़क पर पड़ा मिला। पास में ही कुल्हाड़ी भी पड़ी थी। इसके बाद गाँव में हड़कंप मच गया।

घटना के तुरंत बाद पुलिस ने मनोज समेत पाँच लोगों को हिरासत में लिया। उसने हत्या की बात कबूल कर ली, जिसके बाद पुलिस ने उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया। कथित तौर पर मनोज और उत्पल में बहस हो गई थी। इस दौरान मनोज ने कुल्हाड़ी उठाई और उत्पल की हत्या कर दी।

पुलिस ने उत्पल के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। सोमवार (4 अप्रैल 2022) को जब शव गाँव पहुँचा तो ग्रामीणों ने आक्रोशित होकर मनोज, उसके चाचा खेत्रनाथ घोष और हरधन घोष के घरों पर हमला बोल दिया। उन्होंने उनके घरों के बाहर पुआल में आग लगा दी। आक्रोशित भीड़ ने घरों के आसपास खड़े वाहनों को भी आग के हवाले कर दिया।

घटना के वक्त पुलिस मौके पर पहले से मौजूद थी। लेकिन वह भीड़ को नियंत्रित नहीं कर सकी। हिंसा के बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की कंपनियों को तैनात किया गया है। पुलिस अधीक्षक (SP) कामनाशीश सेन ने एक बयान में कहा कि हत्या के आरोप में मनोज घोष को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने हिंसा में शामिल कई लोगों को गिरफ्तार भी किया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही सभी दोषियों को पकड़ लिया जाएगा। हिंसा और आगजनी मामले में अब तक 39 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

उत्पल की पत्नी ने लगाया मनोज पर उत्पीड़न का आरोप

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक मृतक की पत्नी ने मनोज पर उत्पीड़न का आरोप लगाया गया है। उसने कहा कि मनोज अक्सर बुरे इरादों से उससे संपर्क करता था। उसने उसे चरित्रहीन बताते हुए कहा कि अगर वह उसे घर में अकेला पाता था, तो वह दरवाजे पर पीटना शुरू कर देता और अंदर पत्थर फेंक देता था। पुलिस ने मनोज को इस मामले में गिरफ्तार भी किया था, लेकिन फिर बाद में छोड़ दिया गया। उसने मनोज के पिता कार्तिक घोष और उसकी माँ पर उत्पल की हत्या का आरोप लगाया और माँग की कि उन्हें गाँव से बाहर निकाल दिया जाए। उन्होंने प्रशासन से मनोज को फाँसी की सजा देने की माँग की है।

अपराध स्थल की जाँच कर रही फॉरेंसिक टीम

मंगलवार (5 अप्रैल 2022) को फॉरेंसिक टीम सबूत जुटाने के लिए संतोषपुर पहुँची। टीम में सीआईडी ​​इंस्पेक्टर शैवल बागची और तीन अन्य अधिकारी थे। उन्होंने उत्पल को मारने के लिए इस्तेमाल की गई कुल्हाड़ी की भी जाँच की।

बीरभूम नरसंहार

इससे पहले बंगाल के बीरभूम में भी इसी तरह की हिंसा हुई थी। 22 मार्च 2022 की देर रात बदमाशों के एक समूह ने लगभग 12 घरों में आग लगा दी, जिसके परिणामस्वरूप बीरभूम के रामपुरहाट में महिलाओं और मासूम बच्चों सहित आठ लोगों की मौत हो गई। जले हुए शवों की ऑटोप्सी रिपोर्ट से पता चला था कि घरों में आग लगाने से पहले लोगों को उनके घरों में बंद कर पीटा गया था। यह नरसंहार एक टीएमसी नेता की हत्या का कथित बदला लेने के लिए अंजाम दिया गया था।

MVA की पार्टी ने समर्थन वापस लिया, उधर कॉन्ग्रेस विधायकों ने भी सोनिया गाँधी से की शिकायत: उद्धव सरकार में पड़ी फूट

महाराष्ट्र में सत्ताधारी शिवसेना की अगुवाई वाली महा विकास अघाड़ी (MVA) गठबंधन में फूट पड़ गई है। गठबंधन की सहयोगी दल स्वाभिमानी पक्ष (SP) पार्टी ने मंलगवार (5 अप्रैल 2022) MVA से खुद के अलग होने की घोषणा कर दी है। वहीं, सत्ता में साझेदार कॉन्ग्रेस के विधायकों का प्रतिनिधिमंडल पार्टी अध्यक्ष सोनिया गाँधी से मुलाकात कर पार्टी विधायकों को नजरअंदाज करने की शिकायत की है।

सहयोगी दलों में फूट के बाद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (CM Uddhav Thackeray) के लिए मुसीबत खड़ी होती नजर आ रही है। स्वाभिमानी पक्ष के नेता राजू शेट्टी (Raju Shetty) ने निर्णय लेने से पहले पार्टी के नेताओं के साथ विचार-विमर्श किया और उसके बाद उन्होंने कहा कि गठबंधन और पार्टी के बीच अब कोई संबंध नहीं है। वह सरकार का हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा कि गठबंधन सरकार ने किसानों के साथ धोखा किया है।

शेट्टी ने कहा कि महा विकास अघाड़ी गठबंधन के न्यूतम साझा कार्यक्रमों में किसानों का हित प्रमुख बिंदू था, लेकिन राज्य सरकार ने इसे अमल में नहीं लाया। उन्होंने कहा कि पिछले ढाई वर्षों में बाढ़ से नुकसान के लिए किसानों को मुआवजा नहीं दिया गया और किसानों की भूमि का अधिग्रहण का मुआवजा सरकार ने कम कर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार के इन कदमों के कारण उन्हें विरोध करना पड़ा।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, शेट्टी ने हाल ही में अपनी पार्टी के विधायक देवेंद्र भुयार को निष्कासित कर दिया था। भुयार स्वाभिमानी पक्ष के अकेला विधायक थे। भुयार को निष्कासित करने के दौरान शेट्टी ने कहा था कि भुयार 2019 के चुनावों के बाद से राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) के नेताओं से लगातार मिलते रहे। वह पार्टी के मंच पर कभी नहीं देखे गए।

पार्टी अधिवेशन में बोलते हुए शेट्टी ने कहा, “किसानों का हित एमवीए द्वारा तय किए गए न्यूनतम साझा कार्यक्रम का केंद्र बिंदु था। मेरी पार्टी भी इसका हिस्सा थी। हालांकि, पिछले ढाई वर्षों में, हमें बाढ़ के नुकसान के लिए उचित मुआवजे की मांग के लिए राज्य सरकार के खिलाफ विरोध करना पड़ा। हमें किसानों को भूमि अधिग्रहण मुआवजे को कम करने के सरकार के फैसले का विरोध करना पड़ा।”

गठबंधन के खिलाफ कॉन्ग्रेस नेता भी सोनिया गाँधी से मिले

इधर महाराष्ट्र के कॉन्ग्रेस विधायक भी गठबंधन में परेशान हैं। उनका कहना है कि सरकार का सारा ध्यान शिवसेना और NCP के विधायकों के क्षेत्रों में विकास पर है। उन्हें लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। इस संबंध में विधायकों का एक प्रतिनिधिमंडल मंगलवार (5 अप्रैल 2022) को सोनिया गाँधी से मुलाकात की।

सूत्रों के हवाले से TOI ने बताया कि 22 विधायकों वाले इस प्रतिनिधिमंडल ने 35 मिनट के अपने मुलाकात के दौरान सोनिया गाँधी के समक्ष पार्टी में समन्वय की कमी और विधायकों के लिए निर्धारित निधि की कमी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री और NCP नेता अजीत पवार और शिवसेना नेता एकनाथ खडगे सिर्फ अपनी-अपनी पार्टी के नेताओं की मदद कर रहे हैं।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि शिवसेना और NCP महाराष्ट्र में गठबंधन सरकार चला रही है। इस दौरान विधायकों ने विभिन्न निगमों में खाली पड़ी सीटों का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में सत्ताधारी गठबंधन में पारदर्शिता की भारी कमी है। इन लोगों ने पार्टी नेता बाला साहेब थोराट और अशोक चव्हाण की भी शिकायत की।