जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले के एक सरकारी स्कूल में तिलक लगाकर जाने पर छात्रा की पिटाई का मामला सामने आया है। एक हिंदू लड़की के परिवार ने आरोप लगाया है कि उनकी बेटी को स्कूल शिक्षक निसार अहमद ने पीटा, क्योंकि उसने तिलक लगा रखी थी। उन्होंने बताया कि अभी नवरात्रि चल रही है। उनकी बेटी ने घर में पूजा करने के बाद तिलक लगाया था।
सीएनएन न्यूज 18 के पत्रकार तेजिंदर सिंघी सोढ़ी ने इस संबंध में एक वीडियो शेयर किया है। वीडियो क्लिप में परिवार को अपनी पीड़ा के बारे में बात करते हुए सुना जा सकता है।
The family of a Hindu girl in Rajouri has accused that her daughter was beaten by a school teacher Nisar Ahmed as she went to school wearing a Tilak on her forehead as she had Pooja at her home for Navratras. The teacher has been placed under suspension by the Government pic.twitter.com/orAgF8njIi
— Tejinder Singh Sodhi ?? (@TejinderSsodhi) April 5, 2022
वीडियो में लड़की के पिता ने कहा, “यहाँ मिडिल स्कूल के अंदर जिस किस्म की बात चल रही है, ऐसे में सिर्फ जम्मू-कश्मीर नहीं बल्कि पूरे हिंदुस्तान के अंदर जितने लोग रह रहे हैं, वह ऐसे मजहबपरस्ती, कौमपरस्ती के नाम पर एक-दूसरे का सिर फोड़ देंगे।” इसके साथ ही उन्होंने मामले में कार्रवाई की भी माँग की।
जानकारी के मुताबिक शिक्षक निसार अहमद कोटरांका अनुमंडल के ड्रामन पंचायत के शासकीय मध्य विद्यालय खदुरियां में पोस्टेड थे। आरोप सामने आने के बाद राजौरी जिला प्रशासन ने मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है। शिक्षक को निलंबित कर दिया गया है। जिला प्रशासन राजौरी ने अतिरिक्त डीसी कोटरांका को मामले और आरोपों की जाँच करने के लिए कहा है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि किसी भी स्कूल में शारीरिक दंड और बच्चों की पिटाई सख्त वर्जित है।
गौरतलब है कि पिछले दिनों ऐसा ही मामला मध्य प्रदेश के रायसेन जिले से सामने आया था। यहाँ पर आठवीं क्लास के एक छात्र को स्कूल में तिलक लगाकर जाने पर बेरहमी से पीटा गया था। स्कूल में पढ़ाने वाली निशात (निशाद) बेगम नाम की टीचर ने बाहरी लड़कों से कह कर पवन सेन नामक बच्चे की पिटाई करवाई थी। पवन को तिलक लगाकर स्कूल आने से बार-बार मना किया गया था। लेकिन छात्र स्कूल जाने से पहले मंदिर जाता था इसलिए उसके माथे पर तिलक रहता था। इसी बात से नाराज टीचर ने पवन को ऐसे पिटवाया कि वह बेहोश हो गया।
आतंकवादी समूह अल-कायदा के सरगना अयमान अल-जवाहिरी का एक वीडियो सामने आया है। 9 मिनट के इस वीडियो में वह मुस्लिमों को उकसा रहा है। कर्नाटक के शैक्षणिक संस्थानों में ड्रेस कोड की जगह बुर्के में प्रवेश के कट्टरपंथियों की माँग का समर्थन करता नजर आ रहा है। भारत को ‘हिंदू लोकतंत्र’ बताते हुए कहा है कि मुसलमानों पर अत्याचार हो रहा है। हिजाब विवाद के बीच ‘अल्लाहु अकबर’ के नारे लगाकर चर्चा में आई मुस्कान खान की प्रशंसा कर रहा है।
Seems Ayman al-Zawahiri is alive after all. The al-Qaeda leader has appeared in a ‘proof of life’ video commenting on a February 2022 incident where a college student in India protested he right to wear a hijab pic.twitter.com/JCNuXbYqsD
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक जवाहिरी के इस वीडियो के साथ एक पोस्टर भी जारी किया गया है, जिसमें मुस्कान के लिए Noble woman of India यानी ‘भारत की महान महिला’ भी लिखा गया है। जवाहिरी ने भारत में मुस्लिमों के दमन का आरोप लगाते हुए मुस्लिमों को इसके खिलाफ आवाज उठाने के लिए भी उकसाया।
BIG : Terror Organization #AlQaeda openly declare support for #Hijab movement in India
Terrorist Al Zawahiri release a video praising Radical muslim girl Muskan who was seen shouting Allah hu Akbar inside an educational institute in Karnataka pic.twitter.com/YalDcRHBbI
जवाहिरी ने वीडियो में मुस्कान खान को अपनी ‘बहन’ बताया और उसकी तारीफ में एक कविता भी पढ़ी। उसने कहा कि उसे वीडियो और सोशल मीडिया के जरिए मुस्कान के बारे में पता चला और इस ‘बहन’ ने ‘तकबीर’ की आवाज उठाकर उसका दिल जीत लिया। इसीलिए वो उसकी तारीफ में कविता पढ़ रह है। कविता पढ़ने के बाद उसने हिजाब पर प्रतिबंध लगाने वाले देशों की निंदा की। उसने पाकिस्तान और बांग्लादेश को भी पश्चिमी देशों का सहयोगी बताकर लताड़ लगाई।
Very much clarity; In the latest video AQ Chief Dr Zawahiri talking about Feb 2022 Indian University incident and video message is proof that previous rumors about Zawahiri’s death were not true.
गौरतलब है कि नवंबर के बाद से यह जवाहिरी का पहला वीडियो है और यह दिखाता है कि मोस्टवांटेड आतंकवादी जीवित है। इससे पहले साल 2020 में उसके मारे जाने की रिपोर्ट सामने आई थी, लेकिन अलकायदा की ओर से उसके जिंदा होने की बात कही गई थी। साल 2011 में पाकिस्तान के एबटाबाद में अमेरिकी कार्रवाई में ओसामा बिन लादेन के मारे जाने के बाद से वह अल कायदा की कमान सँभाल रहा है।
क्या है हिजाब विवाद?
उल्लेखनीय है कि कर्नाटक में हिजाब विवाद उस समय शुरू हुआ था, जब उडुपी के एक सरकारी स्कूल में कुछ छात्राओं को हिजाब पहनकर कक्षा में जाने पर रोक लगा दी गई थी। इसे लेकर देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन हुए थे। इसी दौरान 8 फरवरी को मांड्या में पीईएस कॉलेज के अंदर भगवा शॉल पहने लड़कों ने ‘जय श्री राम’ के नारे लगाए। ‘जय श्री राम’ के नारे लगाती भीड़ के सामने 19 साल की मुस्कान खान ने ‘अल्लाह हू अकबर’ के नारे लगाए थे। यह मामला कर्नाटक हाईकोर्ट भी गया था। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि हिजाब इस्लाम का अभिन्न अंग नहीं है, इसलिए राज्य सरकार को इसे स्कूलों के अंदर यूनिफॉर्म का हिस्सा बनाने का निर्देश नहीं दिया जा सकता।
मुंबई के गोरेगाँव के पात्रा चॉल घोटाले में कार्रवाई करते हुए 5 अप्रैल 2022 को शिवसेना नेता संजय राउत की पत्नी और उनके करीबी प्रवीण राउत से जुड़ी 11 करोड़ रुपए की संपत्ति प्रवर्तन निदेशालय द्वारा जब्त कर ली गई। पात्रा चॉल घोटाले में संजय राउत के दोस्त प्रवीण राउत की संलिप्तता है। वह गुरु आशीष कंस्ट्रक्शन कंपनी के निदेशक हैं। इसी कंपनी के पास गोरेगाँव के पात्रा चॉल का पुनर्विकास करवाने का जिम्मा था। जिसने अपना काम करने की जगह घोटाले को अंजाम दिया और फिर पैसों का हेर-फेर शुरू हुआ। संजय राउत की पत्नी भी इन्हीं हेर-फेर के पैसों से खरीदी गई संपत्ति के कारण ईडी की रडार पर हैं।
पात्रा चॉल भूमि घोटाला
महाराष्ट्र हाउसिंग एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (MHADA) की 47 एकड़ जमीन पर 672 किराएदार रहते थे। इन्हीं 672 किराएदारों के पुनर्वास के लिए पात्रा चॉल परियोजना के तहत चॉल के विकास का काम प्रवीण राउत की कंपनी को सौंपा गया। कॉन्ट्रैक्ट में कहा गया था कि 47 एकड़ पर जो बिल्डिंग बनेगी उसके 672 फ्लैट चॉल के किराएदारों को देने होंगे और तीन हजार फ्लैट एमएचडीए को हैंडओवर करने होंगे। बाद में जो जमीन बचेगी उसे बेचने और विकसित करने के लिए भी अनुमति जरूरी होगी। अब चॉल विकास के कॉन्ट्रैक्ट में सब चीजें तय थीं। बस गड़बड़ तब शुरू हुई जब कंपनी ने न तो इस जगह का विकास किया। न किराएदारों को मकान दिए और न ही MHADA को फ्लैट हैंडओवर किए।
1000 करोड़ रुपए का हेरफेर
मुंबई पुलिस में दायर एफआईआर के आधार पर चालू हुए इस केस पर ईडी ने बताया, “पीएमएलए के तहत की गई जाँच से पता चला कि गुरु आशीष कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक होने के नाते प्रवीण राउत ने पुनर्विकास परियोजना में सक्रिय भूमिका निभाई और हाउसिंग डेवलपमेंट एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटिड के राकेश कुमार वधावन और सारंग वधावन के साथ मिलकर 1000 करोड़ रुपए की भूमि हेर-फेर में कामयाब रहे। इस दौरान 672 किरायेदारों और खरीदारों के हितों को नुकसान पहुँचाया गया। ईडी ने बयान दिया कि विभिन्न बिल्डरों से 1, 034 करोड़ पाने के अलावा आरोपित ने बैंक से भी लोन लिए।
संजय राउत की बीवी वर्षा राउत का भूमि घोटाले में कनेक्शन
ईडी अधिकारियों ने आगे आरोप लगाया कि 2010 में, प्रवीण राउत ने इक्विटी सेल और भूमि सौदों की आड़ में अपने बैंक खाते में 95 करोड़ रुपए प्राप्त किए थे, हालाँकि कंपनी प्रोजेक्ट को पूरा नहीं कर सकी और उनकी कोई कमाई नहीं हुई। प्रवीण पर एजेंसी ने आरोप मढ़ा कि एचडीआईएल कंपनी से प्रवीण राउत के खाते में 100 करोड़ ट्रांस्फर किए गए। इसके बाद उसने ये पैसा अपने करीबियों व परिजनों के अकॉउंट में डाल दिया।
2010 में अपराध से जुड़ा पैसा वर्षा राउत के पास आया। ये रकम 83 लाख रुपए की थी जिसने प्रवीण राउत की पत्नी माधुरी प्रवीण राउत के जरिए भेजा गया था। इसी पैसे का इस्तेमाल वर्षा राउत ने दादर में फ्लैट खरीदने के लिए किया। जब जाँच हुई तो पता चला कि वर्षा के पास से माधुरी के पास 55 लाख रुपए ट्रांस्फर हुए थे। इनके अलावा और भी ट्रांजैक्शन थीं। ईडी का कहना है कि खिम बीच के पास जो 8 प्लॉट हैं वो भी वर्षा राउत और स्वप्ना पाटकर के नाम पर खरीदे गए हैं। स्वप्ना, उन सुजीत पाटकर की बीवी हैं जो संजय राउत के करीबी हैं।
संजय राउत के दोस्त की गिरफ्तारी
बता दें कि इस भूमि घोटाले में एजेंसी लंबे समय से अपनी जाँच कर रही है। 2 फरवरी 2022 को इस बाबत प्रवीण राउत को अरेस्ट किया गया था और कल जो कार्रवाई हुई उसमें 11 करोड़ की संपत्ति को जब्त किया गया। इसमें प्रवीण राउत के पालघर, सफल और पडगा में जमीन और मुंबई के दादर व अलीबाग के किहिम बीच में संजय राउत की पत्नी वर्षा राउत के प्लॉट जब्त किए गए। किहिम बीट वाली संपत्ति में वर्षा राउत के साथ स्वप्ना पाटकर भी मालिक थीं।
संजय राउत का गुस्सा
राउत से संबंधित संपत्तियों पर कार्रवाई के उन्होंने कल अपना गुस्सा दिखाया था। उन्होंने कहा था, “मैं वो नहीं हूँ जो डर जाऊँ। मेरी संपत्ति जब्त कर लो। मुझे गोली मार दो। जेल भेज दो। संजय राउत, बालासाहेब ठाकरे का चेला है। एक शिवसैनिक है। वो लड़ेगा और सबका पर्दाफाश करेगा। मैं चुप रहने वालों में से नहीं हूँ। उन्हें फुदकने दो। नाच लेने दो जितना नाचना है।”
गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर पर हमला (Gorakhnath Temple Attack) करने वाले अहमद मुर्तजा अब्बासी को लेकर लगातार चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार वह एयरगन से अपने घर की छत पर ही टारगेट को ढेर करने का अभ्यास कर रहा था। यह भी पता चला है कि घरेलू हिंसा की वजह से उसका अपनी पहली बीवी से तलाक हुआ था।
मुर्तजा का निकाह 2019 में जौनपुर की सलमा उर्फ शादमा के साथ हुआ था, लेकिन कुछ ही महीनों में तलाक हो गया। सलमा के पिता मुजफ्फरुल हक का कहना है कि उनकी बेटी को उसकी सास प्रताड़ित करती थी। उन्होंने यह भी बताया है कि मुर्तजा केमिकल इंजानियर है और निकाह के वक्त पूरी तरह ठीक था। मंदिर पर हमले को लेकर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए उन्होंने बताया कि तलाक के बाद उससे उनलोगों का संपर्क नहीं है।
मुर्तजा को उसके पिता मानसिक रूप से अस्थिर बता रहे हैं। हालाँकि उसका इलाज करने वाले डॉक्टर ने भी इस दावे को नकार दिया है। पूर्व बीवी सलमा का भी कहना है कि मुर्तजा के साथ कोई मानसिक समस्या नहीं थी। रिपोर्ट के अनुसार सलमा ने बताया है कि निकाह के बाद दोनों कुछ महीने ही साथ रहे थे। इस दौरान मुर्तजा कम ही बोलता था। वह अपना लैपटॉप और मोबाइल उसे नहीं छूने देता था। सलमा का कहना है कि मुर्तजा की वैवाहिक जीवन में रूचि नहीं थी और उसकी अम्मी उसे काफी प्रताड़ना दिया करती थी।
UP | In 2019 he married my daughter, soon after they divorced due to domestic violence by her mother-in-law. Not in touch with him since then.He was chemical engineer;was normal…I can’t comment on the incident: Muzaffarul Haq, Gorakhnath temple attack accused’s ex father-in-law pic.twitter.com/E9UMiXrw00
उल्लेखनीय है कि मुर्तजा के आतंकी संगठन ISIS से लिंक मिले हैं। वह कट्टरपंथी जाकिर नाइक के वीडियो देखता था। उसके लैपटॉप से जिहादी सामग्री भी बरामद की गई है।
इस बीच आज तक की रिपोर्ट में बताया गया है कि मुर्तजा के घर की छानबीन के दौरान एटीएस को एयरगन मिली है। बताया जा रहा है कि वह पिछले कुछ समय से एयरगन से निशाने लगाने का अभ्यास कर रहा था। यह अभ्यास वह अपने घर की छत या खाली जगह पर करता था। एटीएस की टीम उसकी पूर्व बीवी के घर जौनपुर भी गई थी।
गौरतलब है कि मुर्तजा ने रविवार (3 अप्रैल 2022) को गोरखनाथ मंदिर पर हमला किया था। वह गमछे में धारदार हथियार छिपाकर लाया था। रोके जाने पर उसने पीएसी जवानों को घायल कर दिया था। वह अल्लाहु अकबर के नारे लगा रहा था।
उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में संघ कार्यकर्ताओं पर फूल बरसाने वाले एक मुस्लिम डॉक्टर की हत्या करने वाले को एक लाख रुपए का इनाम देने की घोषणा की गई है। यह मामला मैनाठेर थाना क्षेत्र के गाँव महमूदपुर माफी का है। आरोपित हाफिज इमरान वारसी ने लोगों के घरों और दुकानों में पर्चा लिखकर भी डाला था। डॉक्टर की शिकायत पर पुलिस ने इलाके का सीसीटीवी फुटेज देखा, जिसके बाद उन्होंने मुस्लिम डॉक्टर के खिलाफ फतवा जारी करने वाले आरोपित हाफिज इमरान वारसी को गिरफ्तार कर लिया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2 अप्रैल को हिंदू नववर्ष के अवसर पर डॉक्टर मोहम्मद निजाम भारती ने अपने गाँव महमूदपुर माफी में RSS कार्यकर्ताओं के आगमन पर उन पर फूल बरसाए और उन्हें माला पहनाकर उनका स्वागत किया था। निजाम का कहना है कि वह भाजपा से जुड़े हुए हैं। उनके द्वारा आरएसएस कार्यकर्ताओं का स्वागत करना गाँव के ही हाफिज इमरान वारसी को नागवार गुजरा, जिसके चलते उसने उनके खिलाफ फतवा जारी कर दिया।
डॉक्टर ने बताया कि इमरान ने उनके खिलाफ पर्चे लिखकर रात में ही गाँव में बँटवा दिए थे। उसने डॉक्टर निजाम को गैर मुस्लिम घोषित करते हुए लोगों से उनका सामाजिक बहिष्कार करने, उन्हें मस्जिद में ना घुसने देने और हत्या करने वाले को एक लाख रुपए का इनाम देने की घोषणा भी की थी। डॉक्टर की शिकायत पर पुलिस ने इलाके का सीसीटीवी फुटेज निकाला। इसकी जाँच करने के बाद उन्होंने इमरान को गिरफ्तार कर लिया।
वहीं, इमरान ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि यहाँ के लड़के सट्टा खेलते हैं, उसको लेकर मैंने पर्चा डाला था। इस मामले पर एसपी विद्यासागर मिश्र का कहना है कि डॉक्टर निजाम की शिकायत के आधार पर केस दर्ज किया गया है। उन्होंने अपनी शिकायत में कहा है कि इमरान नाम के एक शख्स ने उनके खिलाफ फतवा जारी किया है। आरोपित के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे जेल भेजा जा रहा है।
दिल्ली में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदेश कुमार गुप्ता ने ऑपइंडिया से विभिन्न मुद्दों पर बातचीत की। राष्ट्रीय राजधानी में MCD (दिल्ली नगर निगम) के चुनाव होने हैं और संसद में बिल पास करा के तीनों नगर निगमों को एक कर दिया गया है। नए सिरे से MCD में वार्डों का परिसीमन भी किया जाना है। इधर कश्मीरी पंडितों के मुद्दे पर दिल्ली विधानसभा में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और AAP विधायकों के ठहाके भी मुद्दा बने।
प्रश्न: AAP कह रही है कि भाजपा ने चुनाव टालने के लिए MCD के एकीकरण का फैसला लिया है। इस पर आपका क्या कहना है? जवाब: देखिए, दिल्ली की MCD नागरिक सेवाएँ देने वाली एक प्रमुख संस्था है और प्राथमिक स्तर पर शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े ये कई कार्य करती है। सार्वजनिक स्वास्थ्य के अलावा कूड़ा और साफ़-सफाई का काम इसके ही जिम्मे है। MCD को जिस तरह तीन हिस्सों में एक सुधार के रूप में कॉन्ग्रेस ने काट दिया था, 10 वर्षों बाद आज देखने को मिल रहा है कि ये लगातार कमजोर और बदहाल हुई है। इसका खामियाजा दिल्ली की जनता के अलावा नगर निगम के कर्मचारियों और कोरोना काल में फ्रंटलाइन पर काम करने वाले डॉक्टरों-नर्सों को भी भुगतना पड़ा है। उन्हें समय पर वेतन-पेंशन नहीं मिलते। जब से AAP की सरकार आई है, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रतिदिन MCD को कमजोर करने का कार्य किया है।
प्रश्न: अरविंद केजरीवाल तो कह रहे हैं कि भाजपा चुनाव से भाग रही है। इसका आप क्या जवाब देना चाहेंगे? जवाब: असली बात तो ये है कि ‘चोर की दाढ़ी में तिनका’। जब कोई गलत कार्य करता है तो उसे यही डर सताने लगता है। अरविंद केजरीवाल रोज सुबह उठ कर MCD को गाली देते हैं और इसके फंड्स रोकते हैं। 7 वर्षों में उन्होंने हर दिन कभी सफाईकर्मियों का, कभी पार्कों का, कभी जेजे क्लस्टर का, कभी गाँवों का, कभी झुग्गी-झोपड़ियों में स्ट्रीट लाइट का और अनऑथोराइज्ड कॉलनियों के पैसे रोके। अब पूरी दिल्ली का एक मेयर होगा जो यहाँ के मुख्यमंत्री के बराबर होगा, तो सीएम को डर सता रहा है कि उन्होंने जो पाप किए हैं, MCD को दबाने का कार्य किया है, तो MCD मजबूत होकर बराबर में खड़ी होगी। इसीलिए, वो अनाप-शनाप बक रहे हैं।
प्रश्न: आप कई वर्षों से MCD में हैं। ऐसे में भाजपा अपनी ऐसी कौन सी उपलब्धियाँ लेकर जनता के बीच जाएगी और कहेगी कि हमें फिर से वोट दीजिए? जवाब: MCD प्रतिदिन 11,000 मीट्रिक टन कूड़ा उठाता है। आज MCD की सबसे बड़ी सफलता है कि हर घर के बाहर दस्तक देकर कूड़ा ले जाती है। सूखा कूड़ा और गीला कूड़ा अलग उठाया जाता है। इतनी बड़ी संख्या में कूड़ेदानों को हटा कर वहाँ पर सीनियर सिटिज़न्स सेंटर, रिक्रिएशन सेंटर और कॉम्पैक्टर लगाए गए हैं। दिल्ली के अंदर तीनों निगमों में 15,000 पार्क्स हैं, जिन्हें MCD मेंटेन करता है। 1400 से अधिक स्कूलों में स्मार्ट क्लासेज लगाए जाते हैं। रानी झाँसी फ्लाईओवर दिल्ली के उत्तरी हिस्से को दक्षिणी से जोड़ता है। पहले जिस सफर में एक घंटा लगता था, वो अब 5-7 मिनटों में पूरा हो जाता है। भारत दर्शन पार्क और ‘वेस्ट ऑफ सेवन वंडर्स’ बनाए गए हैं। सीमित संसाधनों में दिल्ली नगर निगम ने काफी बेहतर कार्य किया है।
प्रश्न: पिछली बार हुए MCD के चुनाव में AAP 49 सीटें लेकर आई थी और उसे 26% वोट मिल गए थे, ऐसे में क्या आप अरविंद केजरीवाल की पार्टी को अगले चुनावों में चुनौती मानते हैं? जवाब: जब चुनाव होता है तो चुनौतियाँ तो आती हैं, लेकिन हम जनता, सेवा और कार्य में विश्वास करते हैं। पिछले दो वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने जिस तरह मुफ्त में राशन और कोरोना टीकाकरण की सुविधा दी ‘उज्ज्वला योजना’ के माध्यम से महिलाओं को गैस चूल्हे और सिलिंडर मिले, ‘स्वनिधि योजना’ से रेहड़ी-पटरी वालों को रुपए मिले, ई-श्रम कार्ड बने। आज दिल्ली में रेहड़ी-पटरी-खोमचा लगाने वालों और मजदूरों को इसका फायदा मिल रहा है। दिल्ली की 2 करोड़ की आबादी में जो 89 लाख महिलाएँ हैं, झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले लोग हैं और जो बुजुर्ग हैं, वो भी केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं। जबकि अरविंद केजरीवाल की सरकार की उपलब्धियाँ ये हैं कि उन्होंने बुजुर्गों को पेंशन नहीं दी, विधवाओं की पेंशन रोक दी, गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत केंद्र सरकार द्वारा दिए गए राशन को बाँटने में भी भेदभाव किया। कोरोना काल में किराएदारों का किराया माफ़ करने की बात की थी, लेकिन ये भी नहीं किया।
प्रश्न: मीडिया में अक्सर ये चलता है कि दिल्ली में भाजपा के पास कोई चेहरा नहीं है। जैसे उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ और मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान हैं, दिल्ली में भाजपा कभी डॉक्टर हर्षवर्धन कभी किरण बेदी चेहरा बनती हैं। आप किसके नेतृत्व में चुनाव में जाएँगे? जवाब: हम लिजेसी/विरासत वाली पार्टी नहीं हैं, जो किसी परिवार के दम पर चुनाव लड़ते हों कि उनके बेटे आएँगे, फिर आगे उनके बेटे आएँगे। हमारा सामान्य कार्यकर्ता ही हमारी ताकत है। आज सभी गर्व महसूस करते हैं कि बूथ और मंडल का अध्यक्ष रहा आदेश कुमार गुप्ता भी प्रदेश अध्यक्ष बन सकता है। आज हर युवा और व्यक्ति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रभावित है। हमारे लिए बड़ा नाम नहीं, हम आम लोगों और कमजोर वर्ग के विश्वास को जगा कर संगठन का कार्य करते हैं।
प्रश्न: प्रदेश भाजपा में गुटबाजी की बात कही जाती है। मनोज तिवारी प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं। विजय गोयल एक बड़ा चेहरा हैं। आपको क्या ऐसा कुछ लगता है? आप बतौर प्रदेश अध्यक्ष सबको साथ लेकर कैसे चल रहे हैं? जवाब: भाजपा एक ऐसी पार्टी है, जो सामान्य कार्यकर्ताओं की है और यहाँ भिन्न-भिन्न स्तर से लोग आकर एक परिवार की तरह कार्य करते हैं। यहाँ निर्णय सामूहिक तौर पर लिए जाते हैं। गुटबाजी का कोई सवाल ही नहीं उठता है। हम किसी भी तरफ चलते हैं तो विपक्षी दल इसीलिए घबराते हैं, क्योंकि हम एकजुट पार्टी हैं, हमारे यहाँ नेता-कार्यकर्ता एक परिवार की तरह रहते हैं, साथ भोजन करते हैं। यहाँ कोई गुटबाजी नहीं है।
प्रश्न: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल कह रहे हैं कि अगर MCD में भाजपा जीत जाती है तो वो राजनीति छोड़ देंगे। क्या आपको लगता है वो अपने बयान पर कायम रहेंगे? जवाब: वो इससे पहले के अपने बयान देख लें। उन्होंने उत्तराखंड के चुनाव में भी यही कहा था। गोवा में भी भाजपा के जीतने पर राजनीति छोड़ने की बात कही थी। ऐसा किया क्या? उन्होंने अपने बच्चों की कसम तक खा ली थी। अन्ना हजारे के आंदोलन के समय अपने परिवार की कसम खाई थी कि वो राजनीति में नहीं आएँगे। ऐसे व्यक्ति का भला क्या भरोसा।
प्रश्न: संसद में MCD का बिल आया है। नए सिरे से परिसीमन होगा। आपको क्या लगता है, इसमें कितना समय लग सकता है? चुनाव तो परिसीमन होने के बाद ही होगा। जवाब: हम तो चाहते हैं कि अभी चुनाव हो जाएँ। हमारी पार्टी एकदम तैयार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से हमारे कार्यकर्ता 18 घंटे प्रतिदिन कार्य करते हैं। बाक़ी जो कार्य हैं, वो परिसीमन आयोग और चुनाव आयोग करेगा। ये संस्थाएँ इसका उत्तर देंगी। एक राजनीतिक दल के रूप में आज चुनाव की घोषणा हो जाए, तब भी हम पीछे नहीं हटेंगे।
प्रश्न: AAP 13,000 बूथों पर ‘बूथ विजय अभियान’ चला रही है। उन्होंने ‘MCD बदलाव कमिटी’ भी बनाई है। कॉन्ग्रेस भी डिजिटल रूप से सदस्यता अभियान चला रही है। इन सबकी काट के लिए आपने संगठन स्तर पर क्या तैयारियाँ की हैं? हमारे बूथ स्तर पर पुख्ते तरीके से तैयारी चल रही है। युवाओं, महिलाओं और नए वोटरों से संवाद चल रहा है। विभिन्न प्रान्त और भाषा वाले जो लोग दिल्ली में आते हैं, सामाजिक रूप से OBC और SC-ST समाज के लोग हैं, उनके साथ भी बैठकें कर रही हैं। बूथ स्तर पर हमारी 21 सदस्यीय कमिटी बहुत मजबूत है।
प्रश्न: भाजपा ने कोरोना आपदा के दौरान दिल्ली में संगठन स्तर पर क्या-क्या राहत कार्य किए? आपको लगता है आगामी चुनावों में पार्टी को इसका फायदा मिलेगा? जवाब: पहली बात तो ये है कि हम सेवा या राहत कार्य चुनावी फायदे के लिए नहीं करते हैं। कोरोना आपदा में हमने दिल्ली की जनता और गरीबों के लिए कार्य किया। बिहार, झारखंड, ओडिशा या पश्चिम बंगाल के जो गरीब-मजदूर यहाँ रहते थे, उनके घर तक राशन, भोजन, सैनिटाइजर-मास्क और दवाएँ देने का कार्य भाजपा कार्यकर्ताओं ने उस वक्त किया, जब दूसरी पार्टियों के लोग अपने घरों में आइसोलेट थे, खुद को घरों में नजरबन्द कर लिया था। तब अपनी जान जोखिम पर डाल कर भाजपा कार्यकर्ताओं ने 50 लाख घरों में राशन पहुँचाया। सामूहिक कम्युनिटी किचन चलाया गया। ये सब सिर्फ चुनाव के लिए नहीं, बल्कि ‘सेवा ही संगठन’ के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के मंत्र के तहत किया गया।
प्रश्न: कुछ दिनों पहले एक ट्वीट काफी वायरल हुआ है। भाजयुमो के नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने ट्वीट किया कि जब 10 लाख हरामी मरते होंगे तो एक अरविंद केजरीवाल पैदा होता होगा। आप पर इसे दोहराने का आरोप लगा। दिल्ली विधानसभा में आपके खिलाफ प्रस्ताव लाया गया। AAP के एक विधायक ने इसे ‘सिर कलम करने वाला बयान’ बता दिया। क्या आप इस पर कायम हैं? जवाब: अगर आपने सही में इस बयान को सुना होगा, तो इसे आप सुन कर अंदाज़ा लगा सकते हैं कि हमने ये कहा कि हमारी पार्टी के एक नेता ने, मित्र ने ऐसा ट्वीट किया था कि जब 10 लाख हरामी मरे होंगे, तब एक अरविंद केजरीवाल पैदा हुआ होगा। मैंने कहा कि ये हमारे, भाजपा के संस्कार नहीं हैं। कसी व्यक्ति, या किसी चुने हुए प्रतिनिधि या सामान्य व्यक्ति गलत कार्य करता है तो उसे हम कुत्ता-कमीना-हरामी न कहें। गलत कार्य करने वाला खुद भुगतेगा, जनता उसे जवाब देगी। इतिहास गवाह है कि जिस-जिस ने इस देश में हिन्दुओं का अपमान किया, उसका हश्र लालू-मुलायम और कॉन्ग्रेस जैसा हुआ है।
प्रश्न: फिल्म ‘The Kashmir Files’ सुपरहिट हुई है। दिल्ली विधानसभा में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत AAP के विधायकों ने कश्मीरी पंडितों के नरसंहार पर ठहाके लगाए। अरविंद केजरीवाल कह रहे हैं कि भाजपा ने कश्मीरी पंडितों के लिए कुछ नहीं किया और उनकी सरकार ने नौकरी दी। इस पर आपका क्या कहना है? जवाब: मैं अरविंद केजरीवाल को बता देना चाहता हूँ कि अटल बिहारी वाजपेयी और नरेंद्र मोदी की सरकार में 6000 से अधिक कश्मीरी पंडितों को नौकरियाँ दी गईं। उनका पुनर्वास किया गया। अनुच्छेद-370 और धारा-35A खत्म करने का कार्य पीएम मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने किया। अरविंद केजरीवाल अपने गिरेबान में झाँके। उन्होंने क्या किया? कश्मीरी पंडितों को नौकरी तक नहीं दी। नौकरी दी भी तो अदालत का डंडा पड़ने, अदालत का चाबुक पड़ने के बाद।
प्रश्न: अरविंद केजरीवाल ने ‘द कश्मीर फाइल्स’ फिल्म को टैक्स फ्री करने से इनकार कर दिया। कई भाजपा शासित राज्यों ने इसे टैक्स फ्री किया है, ऐसे में आपकी इस पर क्या प्रतिक्रिया है? जवाब: इस फिल्म को टैक्स फ्री न कर के उन्होंने अपनी मानसिकता को उजागर किया है। जब एक मुख्यमंत्री ‘नील बटे सन्नाटा’ और ‘साँड़ की आँख’ जैसी फिल्मों को टैक्स फ्री कर सकता है, हजारों करोड़ रुपए विज्ञापन में उड़ा सकता है, ऐसे में जब कश्मीरी पंडितों के नरसंहार के सच को सामने लाया गया है तो क्या दिल्ली के युवाओं और छात्रों को इसे देखने का अधिकार नहीं है? जो अब तक नहीं बताया गया, वो सामने आ रहा है तो उसे जानने का अधिकार नहीं है? दिल्ली के मुख्यमंत्री को हिन्दुओं की भावनाओं को आहत करने और उनका अपमान करने के लिए कोई न कोई बहाना चाहिए। उनका यही उद्देश्य है। इसके पीछे कारण हैं – तुष्टिकरण की राजनीति, एक खास वोट बैंक को खुश करना। यही कारण था कि अरविंद केजरीवाल ने ‘टुकड़े-टुकड़े’ गैंग का समर्थन किया। उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों में उनकी पार्टी के नेताओं के हाथ सामने आए। दिल्ली में हनुमान मंदिर उनकी पार्टी ने तोड़ा। राम मंदिर का पहले वो विरोध करते हैं, फिर जब बन जाता है तो वहाँ ढोंग रचने जाते हैं। हिन्दुओं का विरोध असली कारण है। उन्हें डर है कि ‘द कश्मीर फाइल्स’ को टैक्स फ्री करने से एक खास वोट बैंक नाराज़ हो जाएगा। वरना हजारों करोड़ रुपए विज्ञापन पर उड़ाने वाली सरकार इसे टैक्स फ्री क्यों नहीं करेगी?
प्रश्न: अरविंद केजरीवाल कह रहे हैं कि उनकी कट्टर ईमानदारी, कट्टर देशभक्ति और कट्टर इंसानियत वाली पार्टी है। उन्होंने खुद को ‘स्वीट आतंकवादी’ भी कहा था। इस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है? जवाब: वो कट्टर हैं। बहुत कट्टर हैं। वो इतने कट्टर देशद्रोही, दोगले और बेईमान हैं। इसकी कोई पराकाष्ठा नहीं है। इसकी कोई तुलना नहीं की जा सकती। 32 साल पहले कश्मीर में जिन महिलाओं को आरी से काट दिया गया था, उनका बलात्कार हुआ था और हत्याएँ कर दी गई थीं। इन सब पर ठहाके लगाने के लिए उन्हें दिल्ली का मुख्यमंत्री बनाया गया था?
कर्नाटक में बुर्का, हलाल मीट (Halal Row) और मस्जिदों में लाउडस्पीकर के बाद अब एक और विवाद गहरा गया है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, राज्य में कुछ हिंदूवादी संगठनों ने हिंदुओं से फल के व्यापार में आगे आने को कहा है। उन्होंने कहा कि फ्रूट्स मार्केट में अधिकांश फल मुस्लिमों द्वारा बेचे जा रहे हैं और यहाँ उनका पूर्ण एकाधिकार है। ‘हिन्दू जनजागृति समिति’ ने मंगलवार (5 अप्रैल, 2022) को कहा कि फल बेचने वाले ज्यादातर मुस्लिम व्यापारी ही हैं।
संगठन का कहना है कि मुस्लिमों ने पूरे बाजार पर अपना कब्जा जमा लिया है और ये लोग कई पीढ़ियों से फल बेच रहे हैं, जिससे फल बेचने वाले नए और गरीब व्यापारियों को खासा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। समिति ने आगे कहा कि हम ये नहीं कह रहे कि आप किससे सामान खरीदें, लेकिन जिससे आप फल खरीदना चाहते हैं, उससे खरीदें। साथ ही कहा, “हम केवल यही चाहते हैं कि फल के व्यापार में हिंदू भी आगे आएँ। समिति ने यह भी कहा कि हम सरकार से भी गुजारिश करते हैं कि वो इस काम में गरीब फल व्यापारियों की मदद करें।”
बीते दिनों भाजपा महासचिव सीटी रवि ने हलाल मीट को लेकर एक बयान दिया था। उन्होंने हलाल मीट को ‘आर्थिक जिहाद’ करार देते हुए कहा था, “हलाल मीट बेचने का पूरा कॉन्सेप्ट ही यही है कि मुस्लिम ही आपस में व्यापार कर सकें। हलाल मीट बेचने वाला भी मुस्लिम और खाने वाला भी मुस्लिम, इसे गलत बताने में क्या गलत है।”
रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ हिंदूवादी संगठनों ने मीट की दुकानों पर लगे हलाल मीट के सर्टिफिकेट को हटाना भी शुरू कर दिया है। हिंदू जागृति समिति, श्रीराम सेना और बजरंग दल जैसे संगठनों ने हिंदुओं से अपील की है कि वो सिर्फ और सिर्फ झटके का मीट खाएँ जो हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार है। इसके अलावा कई हिंदू संगठनों ने मस्जिद पर लगे लाउडस्पीकर को हटाने की माँग भी की है।
इसे लेकर कर्नाटक के मुख्यमंत्री बासवराज बोम्मई ने कहा कि अजान का मसला जबरन नहीं बल्कि सबसे बातचीत करके सुलझाया जाएगा। इससे पहले कर्नाटक के मंत्री केएस ईश्वरप्पा ने कहा था, “राज्य में मस्जिदों के ऊपर लाउडस्पीकर लगाकर अजान करने के संबंध में हल निकालने की जरूरत है।”
विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने राम नवमी पर पूरे पश्चिम बंगाल में 1,000 से अधिक रैलियाँ या शोभा यात्रा निकालने की योजना बनाई है। ऐसा बंगाल में हिन्दुओं का मनोबल बढ़ाने के लिए अहम माना जा रहा है। वहीं बंगाल में लगातार होती हिंसा को देखते हुए भी इन शोभायात्राओं को सकुशल संपन्न कराना एक चुनौती है।
इंडिया टुडे से बात करते हुए, विहिप के बंगाल मंडल के वरिष्ठ प्रवक्ता, सौरीश मुखर्जी ने कहा, “वे रामनवमी को भव्य तरीके से नहीं मना सकते थे क्योंकि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण कोविड की स्थिति के कारण शुरू हुआ था, इसलिए उन्होंने 2022 में रामनवमी को पूरे बंगाल में भव्यतम तरीके से मनाए जाने की योजना बनाई है।
रिपोर्ट के अनुसार, मुखर्जी ने बताया, “कुल मिलाकर, हमारी पश्चिम बंगाल में 1,000 से अधिक शोभा यात्राएँ निकालने की योजना है। कोलकाता में भी रामनवमी पर 20 रैलियाँ निकाली जाएँगी।”
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी सरकार के रोड़े अटकाने की वजहों से कहा जा रहा है कि विश्व हिन्दू परिषद के लोग बंगाल पुलिस की अनुमति नहीं माँगेंगे बल्कि स्थानीय प्रशासन और पुलिस थानों को शोभायात्रा की सूचना दी जाएगी। ऐसे में सवाल या भी उठता है कि अगर बंगाल पुलिस ने अनुमति नहीं दी तो विहिप क्या करेगी?
इसका जवाब देते हुए मुखर्जी ने कहा, “हमें नहीं लगता कि रामनवमी पर शोभा यात्रा निकालने के लिए अनुमति की आवश्यकता है, लेकिन हम पुलिस को सूचित करेंगे। अगर वे इसकी अनुमति नहीं भी देते हैं, तब भी हम रामनवमी पर रैलियाँ निकालेंगे।”
चूँकि, रामनवमी की शोभायात्रा में परंपरा के अनुसार आयुध पूजा या अस्त्र-शास्त्रों की पूजा का भी विधान है। ऐसे में बंगाल में हिंसा की हालिया घटनाओं को देखते हुए प्रशासन के सहयोग पर जोर दिया जा रहा है।
मुखर्जी ने यह भी बताया कि पश्चिम बंगाल के पुलिस प्रशासन को यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि रामनवमी के दौरान विहिप के किसी भी कार्यक्रम में उपद्रवी बाधा न बनें। ऐसे में देखना होगा कि आने वाले समय में विहिप की रैली को लेकर राज्य सरकार की कैसी प्रतिक्रिया होती है।
‘तमिलनाडु मुस्लिम लीग (TNML)’ ने ‘थलापति’ विजय की नई फिल्म ‘Beast’ को प्रतिबंधित किए जाने की माँग की है। संगठन का कहना है कि कुवैत के बाद इसे भारत में भी बैन किया जाए। इस सम्बन्ध में संगठन ने तमिलनाडु के गृह सचिव को एक पत्र भी लिखा है। ‘तमिलनाडु मुस्लिम लीग’ के अध्यक्ष वीएमएस मुस्तफा ने इस पत्र में लिखा है कि कॉलीवुड मुस्लिमों को कट्टरवादी दिखा रहा है। उन्होंने कहा कि ये आपत्तिजनक है कि मुस्लिमों को अब भी सांप्रदायिक समस्याओं की जड़ के रूप में दिखाया जा रहा है।
बयान में TNML ने लिखा है, “तमिल फिल्मों में अक्सर मुस्लिमों को आतंकवादी दिखाया जाता रहा है। इस्लामवादियों को बम फोड़ने और बंदूक से गोलीबारी वाला दिखाना दुर्भाग्यपूर्ण है। इस फिल्म के दृश्यों को देख कर लगता है कि केवल इसमे ही देश की शांति और सम्प्रभुता पर हमला करते हैं। 2015 की भीषण बाढ़ के दौरान इस्लामी संगठनों द्वारा किए गए राहत कार्य को कोई नहीं भूल सकता। इस्लामी संगठनों ने कोरोना के मृतकों को दफनाया।”
उन्होंने दावा किया कि इस्लामी संगठन विभिन्न आपदाओं में बिना अपने जीवन की परवाह किए लोगों की सेवा और राहत कार्य कर रहे हैं। उन्होंने ये भी कहा कि रमजान के महीने में जब मुस्लिम रोजा रख रहे हैं, इस फिल्म की रिलीज होने से तनाव बढ़ सकता है। राज्य के गृह सचिव एसके प्रभाकर को ये पत्र भेजा गया है। संगठन ने याद दिलाया कि इससे पहले सामाजिक संगठनों को अपनी जाति की पहचान और जाति के नेताओं के नाम तक रखने पर फिल्मी किरदारों का विरोध करते देखा गया है।
Just IN: Tamil Nadu Muslim League demands ban on #Vijay‘s #Beast.
जानकारी दे दें कि कुवैत ने अभिनेता विजय की फिल्म ‘Beast’ की रिलीज पर प्रतिबंध लगा दिया है। तमिलनाडु में विजय को ‘थलापति’ के नाम से जाना जाता है। बताया जा रहा है कि फिल्म में इस्लामी आतंकवाद दिखाए जाने के कारण खाड़ी देश ने ये निर्णय लिया है। कुवैत में दक्षिण भारत के कई लोग रहते हैं और उन्हें बुधवार (13 अप्रैल, 2022) को रिलीज हो रही इस फिल्म का इंतजार था। कुवैत की सरकार ने इसे अपने मुल्क के हितों के खिलाफ बताया है।
जहाँ तक फिल्म के ट्रेलर का सवाल है, खबर लिखे जाने तक इसके तमिल ट्रेलर को लगभग 4 करोड़ लोग देख चुके थे और 30 लाख लोगों ने इसे लाइक भी किया है। इसमें दिखाया जाएगा कि आतंकवादी चेन्नई के एक बड़े मॉल को हाईजैक कर लेते हैं और ‘सैनिक’ विजय मॉल के अंदर ही होते हैं। फिर वो किस तरह आतंकवादियों से वहाँ बंदी बनाए गए लोगों को छुड़ाते हैं, यही फिल्म की कहानी है। इसमें भरपूर एक्शन का डोज देखने को मिलेगा। फिल्म हिंदी में भी आ रही है।
जहाँ तक, ‘Beast’ की बात है, इसका मुकाबला यश की कन्नड़ फिल्म ‘KGF Chapter 2’ से होने वाला है। ‘Beast’ के निर्देशक नेल्शन दिलीप कुमार हैं, जो सुपरस्टार रजनीकांत की अगली फिल्म (169वीं) में भी निर्देशक का जिम्मा संभाल रहे हैं। उस फिल्म की तरह इसमें भी अनिरुद्ध रविचंदर का संगीत है। फिल्म में पूजा हेगड़े और सेल्वा राघवन मुख्य भूमिकाओं में हैं। कॉमेडियन योगी बाबू भी इसमें दिखेंगे। इसका बजट 150 करोड़ रुपए है।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मंगलवार (5 अप्रैल, 2022) को नई दिल्ली में सांकेतिक भाषा प्रशिक्षण और अनुसंधान केंद्र में सुनने और बोलने में अक्षम दिव्यांग छात्रों को इस्लाम में जबरन धर्मांतरित कराने में शामिल इरफान शेख, उर्फ इरफान खान को जमानत देने से इनकार कर दिया। शेख संस्थान में सरकार द्वारा नियुक्त सांकेतिक दुभाषिया है। पुलिस की जाँच में सामने आया है कि उत्तर प्रदेश में जून-जुलाई 2021 में सामने आए उमर गौतम के धर्मांतरण गिरोह से इस कन्वर्जन रैकेट के तार जुड़े हुए हैं। शेख उमर गौतम के रैकेट में कथित रूप से एक महत्वपूर्ण कड़ी था।
Allegedly, Irfan Shaikh, who was working as an Interpreter in Sign Language Training and Research Centre, New Delhi, played a constructive role in conversion of the students by persuading them in sign languages. Shaikh is also alleged to be a vital link of Gautam’s syndicate. pic.twitter.com/PjTqS7pMV9
जस्टिस रमेश सिन्हा और बृज राज सिंह ने अपने आदेश में कहा, “मामले से जुड़े तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए जाँच अधिकारी ने इस मामले की तह तक जाकर याचिकाकर्ता के खिलाफ ठोस सबूत जुटाएँ हैं। आरोपित उमर गौतम और अन्य लोगों की मिलीभगत से याचिकाकर्ता ने सांकेतिक भाषा प्रशिक्षण और अनुसंधान केंद्र में दुभाषिया के रूप में काम करते हुए अपने पद का दुरुपयोग किया, धर्मांतरण और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल हुआ। ऐसे में हम किस आधार पर याचिकाकर्ता को जमानत दे सकते हैं?”
एनआईए/एटीएस के अतिरिक्त जिला सत्र न्यायालय लखनऊ के स्पेशल जज द्वारा दिए गए फैसले के खिलाफ शेख ने अपनी याचिका में दावा किया था कि उसे इस मामले में फँसाया जा रहा है। उसने यह भी कहा कि FIR में उसका नाम नहीं है। वहीं उसके वकील ने दावा किया है कि ट्रायल कोर्ट ने केवल अनुमानों के आधार पर उसकी जमानत खारिज कर दी थी और सभी गवाहों के बयानों पर विचार किए बिना इस मामले में अनुमान लगाया गया था। इस पर अदालत ने कहा कि उनका नाम एफआईआर में नहीं था, लेकिन मामले में सह-आरोपित राहुल भोला और जहाँगीर के बयानों के आधार पर उनकी संलिप्तता सामने आई है। जाँच एजेंसी ने पाया कि याचिकाकर्ता इरफान खान ने लालच में आकर और गलत तरीके से दिव्यांग बच्चों के धर्मांतरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
बता दें कि उत्तर प्रदेश के नोएडा में ए़टीएस की टीम ने धर्मांतरण कराने वाले दो मौलानाओं को गिरफ्तार किया था। इसमें से एक उमर गौतम था, जो पहले से हिंदू था। वह करीब 30 साल पहले धर्मान्तरण कर मुस्लिम बन गया था। इसके बाद से ही वो दिल्ली के जामिया नगर इलाके में इस्लामिक दवा सेंटर चला रहा था। यहीं से धर्मांतरण का सारा खेल खेला जाता था