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‘पाकिस्तान मैच जीते या हारे कश्मीरी पंडितों के घरों पर पत्थरबाजी जरूर होती’: सुरेंद्र रैना ने बयान किया दर्द, कहा- ‘इस्लामी दहशतगर्द महिलाओं को बनाते थे निशाना’

विवेक अग्निहोत्री की फिल्म द कश्मीर फाइल्स के रिलीज होने के बाद से एक-एक कर कश्मीरी पंडित सामने आ रहे हैं और जम्मू-कश्मीर में 1990 के दौरान इस्लामिक जिहाद से जुड़ी वीभत्स कहानियों को दुनिया के सामने रख रहे हैं। इसी क्रम में सुरेंद्र कुमार रैना ने भी अपना दर्द बयाँ किया है। उन्होंने बताया कि टीका लाल टपलू की हत्या के बाद से ही घाटी में एक-एक कर पंडितों को निशाना बनाया जाने लगा।

अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, सुरेंद्र रैना उस दौर को याद करते हुए कहते हैं कि साल 1975 से ही इसकी शुरुआत हो गई थी, लेकिन 1885 के बाद तक कश्मीर में हालात इतने खराब गए थे कि हिंदुओं का घर में भी रहना दूभर हो गया था। घर में घुसकर दहशतगर्द घाटी खाली करने की धमकियाँ देते थे। महिलाओं और लड़कियों को सबसे आसान समझा जाता था और चुन-चुनकर उन्हें निशाना बनाया जाता था।

श्रीनगर के रैनावाड़ी के रहने वाले सुरेंद्र रैना ने कहा कि 90 के दशक में सरकारी कर्मचारियों तक का अपने ऑफिस जा पाना मुश्किल हो गया था। 90 के दशक की एक घटना को याद कर रैना बताते हैं कि इस्लामी आतंक के बीच भारत-पाकिस्तान के मैच के बीच जब पाकिस्तान की टीम हारने लगी तो इस्लामी दहशतगर्द सड़कों पर उतरकर कश्मीरी पंडित महिलाओं से छेड़छाड़ करने लगे। देश विरोधी नारेबाजी शुरू हो गई और रात होते-होते कश्मीरी पंडितों के घरों में पत्थरबाजी शुरू कर दी गई। रैना बताते हैं कि उन्हें लगा था कि यहाँ जिंदा बच पाना मुश्किल है।

यहीं नहीं भारत-पाकिस्तान के मैच के दौरान कश्मीरी पंडितों से जबरदस्ती चंदा वसूला जाता था। खास बात ये कि पाकिस्तान मैच जीते या हारे कश्मीरी पंडितों के घरों में पथराव आम बात थी।

देशभक्त होने के कारण हुई थी टीका लाल टपलू की हत्या

सुरेंद्र कुमार रैना के मुताबिक, टीका लाल टपलू देशभक्त थे और वो हिंदूवादी संगठनों से जुड़े हुए थे। उनकी हत्या के बाद कश्मीरी पंडितों को टारगेट कर मारा जाने लगा। इस्लामिक जिहादियों ने एक लिस्ट तैयार की थी, जिसमें कश्मीरी पंडितों को टारगेट करने का प्लान था। रैना बताते हैं कि 1990 का शुरुआती पखवाड़ा था जब घाटी में इस्लामिक जिहादी सामूहिक रैलियाँ निकालकर कश्मीरी पंडितों से घाटी छोड़ने या फिर इस्लाम कबूल करने के लिए धमकाने लगे, जिसके बाद हमें घाटी छोड़ना पड़ा।

द कश्मीर फाइल्स बनाने के लिए फिल्म निर्माता को धन्यवाद करते हुए रैना कहते हैं कि केंद्र सरकार कश्मीरी पंडितों की घर वापसी के लिए योजनाएँ चला रही है। सम्मान सहित घर वापसी के साथ ही कश्मीरी पंडितों को उनकी जमीनों का अधिकार भी दिलाना चाहिए।

क्या पंजाब में अलगाववादी राजनीति की शुरुआत हो गई? पठानकोट हमले को लेकर CM भगवंत मान के दावे पर लोगों ने लगाई लताड़

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान (Punjab CM Bhagwant Mann) ने हाल में में विधानसभा में दावा किया कि पठानकोट एयरबेस पर हमले के बाद उन्हें केंद्र सरकार की ओर से एक पत्र मिला था, जिसमें ऑपरेशन के लिए भेजी गई सेना पर हुए खर्च की भरपाई के लिए 7.5 करोड़ रुपए की माँग की गई थी।

मान ने कहा कि पत्र के बाद वह तत्कालीन गृहमंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) से मिलने गए और उन्हें अपनी चिंताओं से अवगत कराया था। मान ने कहा, “मैंने राजनाथ जी से कहा कि मेरे और मेरे सहयोगी साधु सिंह के सांसद निधि से पैसे काट लें, लेकिन मुझे लिखित में दें कि आपने पंजाब को सेना किराए पर दी है और राज्य देश का हिस्सा नहीं है।”

दिलचस्प बात यह है कि सीएम मान के दावे तथ्यात्मक रूप से गलत प्रतीत होते हैं। पहली साल 2016 में भगवंत मान पंजाब के संगरूर निर्वाचन क्षेत्र से केवल संसद सदस्य थे। अगर केंद्र सरकार पंजाब सरकार से कोई पत्राचार करती तो वह किसी सांसद को पत्र नहीं भेजती, वह मुख्यमंत्री या गृह सचिव को भेजती। दूसरी बात यह है कि राजनाथ सिंह तब गृहमंत्री थे और सेना रक्षा मंत्रालय के अधीन आती है। इसलिए, सेना के मामले में उनसे मिलने से कोई फायदा नहीं होगा।

तीसरा बिंदु इस तथ्य से संबंधित है कि केंद्र सरकार किसी भी राज्य में अर्धसैनिक बलों को भेजने के बदले उससे शुल्क लेती है। केंद्रीय सशस्त्र बलों द्वारा किए जाने वाले विभिन्न प्रकार के कर्तव्यों के लिए राज्यों द्वारा शुल्क वहन किया जाता है और पंजाब कोई अपवाद नहीं है। वर्तमान में गृह मंत्रालय उन राज्यों से प्रति वर्ष लगभग 13 करोड़ रुपए वसूलता है, जहाँ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) तैनात है। ‘अत्यधिक जोखिम’ और बेहद ‘कठिनाई’ वाले क्षेत्रों में सीएपीएफ की तैनाती के लिए केंद्र सरकार प्रति वर्ष लगभग 34 करोड़ रुपए शुल्क लेती है।

इस तरह की सोच अलगावाद की ओर झुकाव का इशारा: बोले नेटिजन्स

सीएम मान की इस टिप्पणी पर कई सोशल मीडिया यूजर्स ने प्रतिक्रिया दी। एक ट्विटर यूजर ने बयान को अलगाववादी टिप्पणी बताते हुए लिखा, “अब मुझे एहसास हुआ कि जम्मू के कुछ ट्विटर यूजर्स इस पार्टी का समर्थन क्यों कर रहे हैं। बेशक, इस प्रकार का व्यवहार उनके समर्थकों के इरादों के अनुरूप है।”

एक लोकप्रिय ट्विटर यूजर theskindoctor13 ने कहा कि क्या सही है या गलत पर बहस की जा सकती है, लेकिन पंजाब की तरह अन्य राज्यों में भी सीएपीएफ की तैनाती के लिए शुल्क लिया जाता है। उन्होंने आगे कहा कि इस तरह के भाषण अलगाववादी भावनाओं को भड़काते हैं।

एक अन्य यूजर ने कहा, “AAP का एजेंडा सामने आ ही गया। पंजाब को भारत से अलग करने का पूरा प्लान बना रखा है केजरीवाल ने। शुरुआत हो चुकी है।”

एक यूजर ने अपना गुस्सा जाहिर करते हुए लिखा, “जैसा कि मैंने पहले ही कहा था कि पंजाब में आप(AAP) का सरकार बनाना आईएसआई (पाकिस्तान की खुफिया एजेेंसी) की जीत है। यह अलगावादी खालिस्तान आंदोलन को एक अलग स्तर पर ले जाएगा। इन जोकरों ने अपनी असली मंशा दिखाने से पहले एक महीने भी इंतजार नहीं किया।”

गौरतलब है कि पंजाब सरकार को 2 जनवरी से 27 जनवरी के बीच पठानकोट और आसपास के इलाकों में अर्धसैनिक बलों के जवानों की 20 कंपनियों की तैनाती के बदले भुगतान का अनुरोध करते हुए एक बिल जारी किया गया था। आतंकी हमले के दौरान एयरबेस को मजबूत करने के लिए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की 11 कंपनियाँ और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की 9 कंपनियों को तैनात किया गया था। पंजाब सरकार को 6,35,94,337 रुपए का बिल भेजा गया था, जिसका भुगतान करने से उसने इनकार कर दिया था।

भारत के हर तरह से सहयोग के लिए हम तैयार: PM मोदी से मिले रूसी विदेश मंत्री, 40 मिनट चली मीटिंग में दिया पुतिन का ‘खास सन्देश’

प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार (1 अप्रैल 2022) शाम को रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मुलाकात की। पीएम मोदी और रूस के विदेश मंत्री के बीच यह मुलाकात करीब 40 मिनट तक चली। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव की भारत की आधिकारिक यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका स्वागत किया। वहीं आज ही रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष के बीच रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में विदेश मंत्री एस जयशंकर से भी मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने यूक्रेन मसले को लेकर भारत के रुख की तारीफ करते हुए कहा है कि रूस इस बात की सराहना करता है कि भारत एकतरफा न होकर स्थिति को पूरी तरह से समझकर आगे बढ़ रहा है। 

बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले दो हफ्तों में भारत दौरे पर आए ब्रिटेन, चीन, ऑस्ट्रिया, ग्रीस और मैक्सिको सहित किसी भी देश के मंत्री से सार्वजनिक रूप से मुलाकात नहीं की थी। ऐसे में रूसी विदेश मंत्री के साथ पीएम मोदी की यह मुलाकात बेहद अहम मानी जा रही है।

सर्गेई लावरोव ने कहा है कि भारत और रूस सामरिक भागीदारी को विकसित करते रहे हैं और यह हमारी प्राथमिकता रही है। हम निश्‍चित तौर पर विश्‍व व्‍यवस्‍था में संतुलन बनाने में रुचि रखते हैं। हमने अपने द्विपक्षीय संदर्भ को और मजबूत किया है। 

लावरोव ने कहा कि वह राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “व्यक्तिगत रूप से संदेश” देना चाहते हैं। उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति (पुतिन) और प्रधानमंत्री मोदी एक दूसरे के साथ नियमित संपर्क में हैं और मैं राष्ट्रपति को अपनी बातचीत के बारे में रिपोर्ट करूँगा। वह जिस तरह से प्रधानमंत्री मोदी को अपना सर्वश्रेष्ठ सम्मान देते हैं और मैं व्यक्तिगत रूप से इस संदेश को देने के अवसर की सराहना करता हूँ।”

रूस-यूक्रेन के बीच भारत के एक मध्यस्थ बनने की संभावना पर रूसी विदेश मंत्री ने कहा कि भारत महत्वपूर्ण देश है। यदि भारत इस भूमिका को निभाना चाहता है जो समस्या का समाधान प्रदान करता है, यदि भारत अंतरराष्ट्रीय समस्याओं के लिए न्यायसंगत और तर्कसंगत दृष्टिकोण के साथ है, तो हम ऐसी प्रक्रिया का समर्थन कर सकते हैं। 

भारत को तेल आपूर्ति की पेशकश, रुपया-रूबल भुगतान और प्रतिबंधों को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में लावरोव ने कहा, “अगर भारत हमसे कुछ भी खरीदना चाहता है, तो हम चर्चा करने और पारस्परिक रूप से सहयोग तक सहमति बनाने के लिए तैयार हैं। हम भारत को किसी भी सामान की आपूर्ति करने के लिए तैयार रहेंगे जो वह हमसे खरीदना चाहता है। हम चर्चा के लिए तैयार हैं। रूस और भारत के बीच बहुत अच्छे संबंध हैं।”

सुरक्षा चुनौतियों के मामले में भारत का समर्थन कैसे किया जा सकता है, इस सवाल पर रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा, “हमारी बातचीत उन संबंधों की विशेषता है जो हमने कई दशकों तक भारत के साथ विकसित किए हैं। संबंध रणनीतिक साझेदारी हैं, यह वह आधार है जिस पर हम सभी क्षेत्रों में अपने सहयोग को बढ़ावा दे रहे हैं। मेरा मानना है कि भारतीय विदेश नीतियों की विशेषता स्वतंत्रता और वास्तविक राष्ट्रीय वैध हितों पर ध्यान केंद्रित करना है। रूसी संघ में यही नीति काम करती है और यह हमें बड़ा देश, अच्छे दोस्त और वफादार भागीदार बनाती है।”

रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से जब पूछा गया कि क्या भारत पर अमेरिकी दबाव भारत-रूस संबंधों को प्रभावित करेगा, उन्होंने कहा, “मुझे कोई संदेह नहीं है कि कोई दबाव हमारी साझेदारी को प्रभावित नहीं करेगा। वे (अमेरिका) दूसरों को अपनी राजनीति का पालन करने के लिए मजबूर कर रहे हैं।”

उल्लेखनीय है कि जयशंकर एवं लावरोव के बीच यह बैठक ऐसे समय में हुई जब एक दिन पहले ही अमेरिका ने आगाह किया कि रूस के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंधों में गतिरोध पैदा करने वाले देशों को अंजाम भुगतने पड़ेंगे। यूक्रेन मसले पर भारत ने तत्काल युद्धविराम का आह्वान किया है लेकिन रूसी आक्रमण की निंदा करने वाले प्रस्तावों पर संयुक्त राष्ट्र के मंचों पर मतदान में हिस्सा लेने से परहेज किया है।

यूपी में माफिया खान मुबारक गैंग के खिलाफ योगी सरकार का एक्शन, गुर्गों की ₹5.58 करोड़ की संपत्ति जब्त, नोएडा में भी चला बुलडोजर

सत्ता में वापसी करते ही अपने वादे के अनुसार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (UP CM Yogi Adityanath) ऐक्शन में आ गए हैं। प्रदेश में माफियाओं के खिलाफ फिर से शुरू हो गई है। यूपी के अंबेडकरनगर जिले के थाना क्षेत्रों में माफिया खान मुबारक (Mafia Khan Mubarak) के गुर्गों के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई की है।

यूपी पुलिस ने कुख्यात माफिया मुबारक के तीन सहयोगियों के खिलाफ उत्तर प्रदेश गिरोह अधिनियम की धारा 14(1) के तहत जिले के हसवर थाना क्षेत्र के हरसम्हार गाँव में कार्रवाई की है। कार्रवाई के तहत इन तीनों की लगभग 5 करोड़ रुपए मूल्य की अचल संपत्ति जब्त की गई है। इनमें याहिया खान की 10 लाख रुपए की कीमत का मकान, वसीम मुख्तार का 18 लाख रुपए का मकान और कमरुल के 30 लाख रुपए के दो मकान शामिल हैं।

दूसरी तरफ, शराब माफिया सुरेश सिंह की भी लगभग 5 करोड़ रुपए की संपत्ति को भी कुर्क किया गया है। इन संपत्तियों को कुर्क कर पुलिस ने सील लगा दिया है। साल 2016 में अहिरौली थाना के सोनवा में इसी राइस मिल पर अवैध शराब की फैक्ट्री पकड़ी गई थी। सुरेश अभी जिला बदर किए गए हैं।

बता दें कि माफिया खान मुबारक का एक वक्त में इलाहाबाद और आसपास के इलाकों में दहशत थी। लोग उसके डर से अपनी जुबान नहीं खोलते थे। मुबारक इस समय फतेहगढ़ जेल में बंद है। वहीं, सुरेश को जिला बदर किया गया है।

अंबेडकरनगर के एडिशनल एसपी संजय कुमार राय ने बताया कि एसपी के आदेश पर खान मुबारक के गुर्गों और सुरेश सिंह पर कार्रवाई की गई है। इस कार्रवाई में 5 करोड़ 58 लाख रुपए की अचल संपत्ति जब्त की गई है।

नोएडा में भी चला बुलडोजर

इधर नोएडा प्राधिकरण ने सेक्टर 134 और सेक्टर 135 के डूब क्षेत्र में बने अवैध फार्म हाउसों पर बुलडोजर चलाकर ध्वस्त दिया है और भू-माफियाओं के कब्जे से करोड़ों रुपए की जमीन को मुक्त करा लिया है।

इसके अलावा, प्राधिकरण ने ग्रीन ब्यूटी फॉर्म हाउस में भी कार्रवाई करते हुए अवैध तरीके से बनाए गए आलीशान फार्म हाउस को ध्वस्त कर दिया। प्राधिकरण को शिकायत मिली थी कि यहाँ अवैध तरीके से प्लॉटिंग की गई है। नोएडा प्राधिकरण के वर्क सर्कल अधिकारी विजय रावल के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई में कई बुलडोजर शामिल किए गए थे।

‘कलर और फॉन्ट में मामूली बदलाव, संस्कृत श्लोक पहले जैसा ही रहेगा’: ‘Logo’ विवाद में घिरने के बाद बैकफुट पर IIM अहमदाबाद

प्रतिष्ठित भारतीय प्रबंधन संस्थान, अहमदाबाद (IIMA) के लगभग 45 प्रोफेसरों द्वारा लोगो में बदलाव का विरोध करते हुए बोर्ड ऑफ गवर्नर्स को लिखे जाने के एक दिन बाद अब IIMA ने अपने लोगो को फिर से डिजाइन करने के विवाद पर सफाई दी है।

आईआईएम ने एक बयान में कहा कि मैनेजमेंट इंस्टूट्यूट ने अपनी वेबसाइट में सुधार करने के लिए लोगो को फिर से रिफ्रेश करने की जरूरत महसूस की है। इसलिए इसने फाइनल डिजाइन सिफारिशों के साथ आने के दौरान ‘मूल्यांकन, अन्वेषण, वर्डमार्क बनाने, ब्रांडमार्क बनाने’ के पहलुओं को ध्यान में रखा।

आईआईएम-ए ने कहा कि नया लोगो पिछले लोगो की विरासत को पहले की ही तरह रखेगा। इसके साथ ही इसके मूल रूप में ‘विद्याविनियोगदिविकासः’ की लाइन को बनाए रखेगा। आईआईएम की कहना है कि वो इसके मूल लोगो में केवल मामूली सा बदलाव कर रहा है। ये बदलाव इसके कलर और फॉन्ट में है।

अपने बयान में आईआईएम ने कहा, “प्रस्तावित लोगो ओरिजिनल लोगो की विरासत को जारी रखता है, इसकी संस्कृत में (विद्याविनियोगदिविकासः) स्टेटस लाइन को भी ओरिजिनल ही रखा गया है। कलर और फॉन्ट का आधुनिकीकरण किया गया है, जाली से प्रेरित ब्रांड चिह्न को और अधिक अनुकूल बनाया गया है। डिजिटल मीडिया में कम्युनिकेशन और ब्रांड के नाम को और अधिक विशेष बनाया गया है।”

प्रबंधन संस्थान ने ये भी कहा कि प्रस्तावित नया लोगो इसी साल जून में होने वाले वार्षिक छुट्टी के बाद जारी होगा।

क्या है मामला

गौरतलब है कि हमने 31 मार्च 2022 को बताया था कि IIMA द्वारा सिदी सैय्यद मस्जिद की जाली और संस्कृत के पद्य ‘विद्याविनियोगदिविकासः’ (ज्ञान के प्रसार से विकास) से प्रेरित ‘ट्री ऑफ लाइफ’ के लोगो बदलने के विरोध में करीब 45 प्रोफेसरों ने इसको लेकर बोर्ड ऑफ गवर्नर्स को पत्र लिखा था।

संस्थान के मेंबर ने इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया था कि उन्हें लोगों बदलने की प्रक्रिया में शामिल ही नहीं किया गया। फैकल्टी को इस बात की चिंता सता रही थी कि संस्थान का नया लोगो आईआईएम की विरासत और उसके उद्देश्य की पहचान से मेल नहीं खाता है। संस्थान के प्रोफेसरों का कहना था कि आईआईएम का मूल लोगो जाली और संस्कृत की लाइन उसे और उसके भारतीय लोकाचार को परिभाषित करती है।

ऑपइंडिया को आईआईएम के करीबी सूत्रों ने बताया कि प्रस्तावित लोगो में इसके मौजूदा फीचर्स के अलावा मूल लोगो की विशेषताएँ पहले जैसी ही बनी रहेंगी, जैसा कि संस्थान ने अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित अपने हालिया बयान में कहा है।

बॉयफ्रेंड ही निकला हिरोइन का हत्यारा: हथौड़े से पीट-पीटकर कर मारा, एक महीने तक फ्रीजर में रखी बॉडी; फिर टुकड़े-टुकड़े कर फेंक दिया

काफी समय से गायब बताई जा रहीं इटली की जानी-मानी पोर्न स्टार कैरोल माल्टेसी (Carol Maltesi) की असल में इस साल जनवरी में ही हत्या कर दी गई थी। हत्या के आरोप में पुलिस ने उनके बॉयफ्रेंड डेविड फोंटाना को गिरफ्तार किया है। वह फूड ब्लॉगर है और एक्ट्रेस के पड़ोस में ही रहता था। कहा जा रहा है कि हत्या से कुछ समय पहले ही दोनों का ब्रेकअप हुआ था। इस मर्डर मिस्ट्री की गुत्थी टैटू के जरिए सुलझी है।

रिपोर्टों के अनुसार फोंटाना ने हत्या की बात कबूल कर ली है। उसने हथौड़े से पीट-पीटकर कैरोल की हत्या की। उसके बाद उनकी लाश को करीब एक महीने तक फ्रीजर में रखा। बाद में उसके टुकड़े टुकड़े कर फेंक दिए। उसने चेहरे को जला डाला था, ताकि शिनाख्त न हो सके। हाल ही में एक राहगीर ने नेलपॉलिश लगे क्षत-विक्षत एक हाथ को देखा था और पुलिस को सूचना दी थी। लेकिन चेहरा चले होने के कारण मृतका की पहचान नहीं हो सकी थी। लाश पर टैटू मिले थे, जिससे पहले मृतका की पहचान की गई और फिर पुलिस फोंटाना तक पहुँची।

शव की शिनाख्त के लिए पुलिस ने बॉडी पार्ट्स की फोटो प्रकाशित की थी। कैरोल के शरीर पर 11 टैटू थे, जिसमें से 7 इस फोटो में दिख रहे थे। उनकी OnlyFans साइट पर भी कई वीडियो थी। जब पुलिस ने मिलान किया तो उनके कई एक्स-रेटेड फ्लिक्स में वह टैटू दिखाई दे रहा था। जानकारी के मुताबिक जब मृतका की पहचान की पुष्टि हो गई तो फोंटाना का नाम सामने आया। उसने जाँचकर्ताओं को शुरुआत में बताया कि वह उसे जानता है। लेकिन उसके लापता होने में किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया।

पुलिस ने उसकी गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू कर दी। उसके घर की तलाशी ली, जहाँ एक बड़ा फ्रीजर मिला। उसी तरह के कचड़े की थैली मिली, जिसका इस्तेमाल कैरोल के शव के टुकड़ों को फेंकने के लिए किया गया था। इसके बाद पूछताछ में उसने अपना जुर्म कबूल लिया है। आरोपित ने बताया कि सेक्स के बाद किसी बात को लेकर दोनों में झगड़ा हो गया था और इसी गुस्से में उसके हाथों कैरोल का कत्ल हो गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक्ट्रेस जनवरी 2022 से गायब चल रही थी। 19 मार्च को 26 साल की कैरोल माल्टेसी के शव के टुकड़े सड़क के किनारे पड़े मिले थे। लेकिन पकड़ में आने से पहले तक फोंटाना ऐसा दिखावा करता रहा जैसे कैरोल जिंदा हो। जैसे कि वह उसके घर का किराया देता था। उसके फोन पर आने वाले मैसेज का जवाब देता था। कैरोल आखिरी बार 20 जनवरी को मिलान के पास रेस्काल्डिना में अपने घर के इलाके में जिंदा देखी गई थी। उसकी एक 6 साल की बेटी भी है।

‘चंडीगढ़ को फौरन पंजाब को करें ट्रांसफर’: CM भगवंत मान ने माँग उठा विधानसभा में पेश किया प्रस्ताव

पंजाब के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) नेता भगवंत मान ने चंडीगढ़ को तत्काल पंजाब को ट्रांसफर करने की माँग करते हुए शुक्रवार (1 अप्रैल 2022) को राज्य विधानसभा में प्रस्ताव पेश किया। इसमें केंद्र सरकार पर केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासन में संतुलन को बिगाड़ने की कोशिश करने का आरोप लगाया। साथ ही चंडीगढ़ को तुरंत पंजाब को ट्रांसफर करने की माँग की गई। 

बता दें कि चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश होने के साथ-साथ पंजाब और पड़ोसी हरियाणा दोनों की ही राजधानी है। केंद्र सरकार चंडीगढ़ प्रशासन के कर्मचारियों के लिए सेवा नियमों में बदलाव कर रहा है। इससे केंद्र सरकार के अधिकारियों की तरह चंडीगढ़ प्रशासन के कर्मचारियों को भी लाभ मिल रहा है।

विधानसभा से पास अपने प्रस्ताव में भगवंत मान ने कहा है कि पंजाब पुनर्गठन अधिनियम 1966 के तहत पंजाब को हरियाणा राज्य में पुनर्गठित किया गया था। केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ और पंजाब के कुछ हिस्सों को तत्कालीन केंद्र शासित प्रदेश हिमाचल प्रदेश को दे दिया गया था। उन्होंने कहा, “तब से पंजाब और हरियाणा राज्य के नामांकित व्यक्तियों को कुछ अनुपात में प्रबंधन पदों को देकर भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMS) जैसी सामान्य संपत्ति के प्रशासन में एक संतुलन का उल्लेख किया गया था। अपनी कई हालिया कार्रवाइयों के माध्यम से केंद्र सरकार इस संतुलन को बिगाड़ने की कोशिश कर रहा है।”

मुख्यमंत्री ने बताया, “इसी तरह चंडीगढ़ प्रशासन हमेशा पंजाब और हरियाणा के अधिकारियों द्वारा 60:40 के अनुपात में प्रबंधित किया गया है। हालाँकि, हाल ही में केंद्र सरकार ने चंडीगढ़ में बाहरी अधिकारियों को तैनात किया है और चंडीगढ़ प्रशासन के कर्मचारियों के लिए केंद्रीय सिविल सेवा नियम पेश किए हैं, जो कि पूरी तरह से अतीत में हुए समझौतों के खिलाफ है।”

यह कदम चंडीगढ़ में सरकारी कर्मचारियों के लिए केंद्रीय सेवा नियमों का विस्तार करने के केंद्र सरकार के फैसले के कुछ दिनों बाद आया है। इसमें उन्होंने कहा था कि चंडीगढ़ प्रशासन के कर्मचारियों को केंद्र सरकार में काम करने वाले उनके समकक्षों के समान लाभ मिलेगा। केंद्र सरकार के इस फैसले की पंजाब सरकार ने आलोचना की थी। पहले चंडीगढ़ के कर्मचारी पंजाब सेवा नियमों के अधीन थे। अब सरकारी कर्मचारियों के रिटायरमेंट की आयु 58 से बढ़ाकर 60 होगी। महिलाएँ भी केंद्र सेवा नियमों के अनुरूप अब 2 साल की मातृत्व अवकाश का लाभ उठा सकती हैं। राज्य में विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि इससे चंडीगढ़ पर पंजाब का दावा कमजोर हो जाएगा।

चंडीगढ़ को लेकर पंजाब और हरियाणा का पिछले 5 दशकों से अधिक समय से विवाद चल रहा है। दोनों राज्य चंडीगढ़ पर दावा करते हैं। दिलचस्प बात यह है कि हिमाचल प्रदेश भी शहर के कुछ हिस्सों पर अपना दावा करता है।

पाकिस्तान से सटा पंजाब का फरीदकोट, विदेशी चंदे से बनी मस्जिदें; केरल के NGO ने कश्मीर से डायवर्ट किया फंड: रिपोर्ट्स

पाकिस्तान की सीमा (Pakistan Border) से सटे पंजाब (Punjab) के जिलों में मस्जिदों की बढ़ती संख्या को लेकर सुरक्षा एजेंसियाँ चौकन्ना हो गई हैं। इन मस्जिदों को बनाने के लिए ना सिर्फ विदेशों से फंडिंग हासिल की गई, बल्कि इन्हें पंजाब तक पहुँचाने के लिए धनराशि को डायवर्ट भी किया गया। इस मामले में केरल का एक गैर-सरकारी संगठन (NGO) निशाने पर आ गया है।

केरल का ‘रिलीफ एंड चैरिटेबल फाउंडेशन ऑफ इंडिया (Relief and Charitable Foundation of India- RCFI) पंजाब के फरीदकोट जिले में तीन मस्जिदों को बनाने के लिए 70 करोड़ रुपए की फंडिंग की थी। इस फंडिंग को उसने विदेशों से हासिल किया था और कश्मीर के बारामूला के दो निवासियों के माध्यम से इस राशि को डायवर्ट पर फरीदकोट भेजा था। इन लोगों ने मस्जिदों को बनाने और उसके लिए बिलों के भुगतान करने का काम किया था।

यह बात भी सामने आई है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने अगस्त 2021 में इस NGO की फंडिंग पर रोक लगा दी थी। इसके साथ पंजाब पुलिस तथा अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने RCFI को इस मामले को लेकर चेतावनी दी थी। वहीं, खुद को RCFI का प्रवक्ता बताने वाले सलाम उस्ताद का कहना है कि इस मामले वह गृह मंत्रालय को अपना जवाब भेज चुके हैं। उस्ताद का कहना है कि RCFI की पंजाब में कोई इकाई नहीं है। यह संस्था सामाजिक कार्यों में लगी है। उनका कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा अंतर्राष्ट्रीय फंडिंग पर ‘मनमाने ढंग से प्रतिबंध’ लगाने के संस्था परेशान है।

RCFI की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, यह संस्था साल 2000 में बनाई गई है और इसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर काम करते हुए पिछड़े वर्गों के सामाजिक एवं सांस्कृतिक पहलुओं को ऊपर उठाना है। इसके साथ ही उनके जीवन-स्तर में सुधार भी संस्था का मुख्य उद्देश्य बताया गया है। हालाँकि, मस्जिद बनाने का जिक्र नहीं है। RCFI देश के 24 राज्यों में संचालित होती है, जिसकी लगभग 24 लाख लोगों तक पहुँच है। इस संस्था को विदेशों से भी खूब फंडिंग होती रही है।

साल 2015 से 2017 के बीच फरीदकोट में बनाई बनाई गईं ये तीन मस्जिदें पाकिस्तान की सीमा से केवल 40-70 किलोमीटर के दायरे में स्थित हैं। राज्य के अन्य सीमावर्ती जिलों- फिरोजपुर, तरनतारन, अमृतसर, गुरदासपुर और पठानकोट में 200 से अधिक मस्जिदें हैं। इनमें कई मस्जिदें हाल ही में बनाई गई हैं। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों का चौकन्ना होना लाजिमी है।

सीमाई इलाके होने के कारण ये बेहद संवेदनशील क्षेत्र हैं। खालिस्तानी आतंकी जरनैल सिंह भिंडरावाले का जन्म भी फरीदकोट जिले को रोडे में हुआ था, जो कि अब मोगा जिले में पड़ता है। इस इलाके में खालिस्तान समर्थकों की एक बड़ी तादाद है, जबकि मुस्लिमों की जनसंख्या बेहद कम है। ऐसे में नए मस्जिदों का निर्माण चौंकाने वाली बात है।

राणा अय्यूब नहीं जा सकेंगी विदेश, हाई कोर्ट से ‘चंदा घोटाले’ में नहीं मिली राहत: पत्रकारिता और फ्रीडम ऑफ स्पीच की दुहाई भी नहीं आई काम

कथित पत्रकार और कट्टर इस्लामी और वामपंथी गिरोह की सदस्य राणा अय्यूब को दिल्ली हाई कोर्ट ने जोर का झटका दिया है। कोर्ट ने शनिवार (1 अप्रैल 2022) को राणा अय्यूब की देश से बाहर जाने के लिए अनुमति की माँग वाली याचिका पर अंतरिम आदेश देने से मना कर दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय को कथित पत्रकार के खिलाफ लंबित जाँच पर स्टेटस रिपोर्ट दर्ज करने की भी इजाजत दे दी। वो मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में आरोपित हैं।

दरअसल, राणा अय्यूब ने जाँच एजेंसियों द्वारा लंदन जाने से रोके जाने के बाद दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर उन्हें देश से बाहर जाने देने की इजाजत माँगी थी। इससे पहले मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में एयरपोर्ट पर इमीग्रेशन विभाग के अधिकारियों ने 29 मार्च को उन्हें लंदन जाने से रोक दिया था।

राणा अय्यूब के मामले में सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने अदालत को बताया कि राणा अय्यूब के मामले की महत्वपूर्ण दस्तावेजों को रिकॉर्ड में लाने की जरूरत है। केंद्रीय जाँच एजेंसी की तरफ से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि वे सोमवार को अदालत के समक्ष दस्तावेज जमा करेंगे।

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कोर्ट को बताया, “इस मामले को जितना सीधा दिखाने की कोशिश की जा रही है, ये वैसा है नहीं। राणा अय्यूब ने कोरोना में मदद के नाम पर फंड जुटाया और 2 करोड़ तक का फंड हड़प गई। ये रुपए औऱ डॉलर में मिले थे। राहत कार्य के नाम पर पत्रकार ने फर्जी बिल जमा कराए। राणा अय्यूब ने 50 लाख रुपए की राशि को अपने नाम पर जमा करा लिया और उसे व्यक्तिगत तौर पर अपने लिए खर्च किया। लुकआउट नोटिस बहुत पहले जारी किया गया था।”

प्रवर्तन निदेशालय कोरोना महामारी में मदद के नाम पर ऑनलाइन क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म केटो के जरिए जुटाए गए दान के पैसों की जाँच कर रहा है। यहीं नहीं ईडी मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में राणा अय्यूब की 1.77 करोड़ रुपए की संपत्ति को कुर्क कर चुका है।

इससे पहले राणा अय्यूब के वकील वृंदा ग्रोवर ने एजेंसी पर अपने मुवक्किल के अधिकारों का दमन करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उनके पेशे की प्रैक्टिस के अधिकार को कम किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “अगर लोग राज्य की आलोचना कर रहे हैं, तो क्या वे मुझे बोलने नहीं देंगे? उन्होंने मुझे यहाँ किस लिए रखा है?”

पत्रकार के वकील ने आगे कहा, “याचिकाकर्ता एक पत्रकार होने के कारण सत्ता से सच बोलती हैं, ऐसे में वो कभी-कभी सरकार के लिए कुछ असुविधा या असुविधा का जरिया मानी जाती हैं। लेकिन याचिकाकर्ता को विदेश जाकर अपनी वाक और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का प्रयोग करने के अधिकार से वंचित करने का कोई आधार नहीं है।” वकील ने यह भी दावा किया कि ये पूरा आइडिया अय्यूब के लंदन ट्रिप को फेल करने का था, इस मामले में ईडी के पास दिखाने के लिए कुछ भी नहीं है।

बहरहाल इस मामले में अगली सुनवाई कोर्ट सोमवार (4 अप्रैल 2022) को करेगा।

बिहार से आया चोर, यूपी के घर में घुसा: दारू देखकर मन डोल गया… सुबह आँख खुली तो लगी हथकड़ी

बिहार की शराबबंदी आए दिन अलग-अलग वजहों से चर्चा में रहती है। अब यह सुर्खियों में एक चोर की वजह से ही। दरअसल, बिहार का रहने वाला यह चोर उत्तर प्रदेश के एक घर में घुसा था। लेकिन वहाँ शराब की बोतल देखकर उसका मन डोल गया। दारू पीने के बाद वह उसी घर में सो गया। सुबह आँख खुली तो पकड़ा गया।

घटना शनिवार (26 मार्च 2022) की है। अब इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। आरोपित की पहचान दीपक शाह के तौर पर हुई है। वह उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के एक घर में चोरी के इरादे से घुसा था। घर में रखी शराब पीकर अपनी सुध-बुध खो बैठा। इतनी ज्यादा शराब पी ली कि उसी घर के आँगन में सो गया। सुबह पुलिस ने तहरीर के आधार पर उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

वीडियो में घर का सामान अस्त-व्यस्त हालत में बिखरा हुआ है। पीछे से कोई 100 नंबर (पुलिस) को फोन करने के लिए कह रहा है। आरोपित को उठाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन वो पूरी तरह से नशे में दिखाई दे रहा। वीडियो में महिलाओं की रिकार्डिंग करने के लिए कहते हुए भी आवाज सुनाई देती है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना बांसडीहरोड थाना क्षेत्र के रघुनाथपुर बेला गाँव की है। यहाँ पर सड़क के किनारे चंदन गुप्ता का घर बना हुआ है। उनके घर में बिहार के भोजपुर के जगदीशपुर का रहने वाला दीपक चोरी के इरादे से घुसा था। इस दौरान उसको आलमारी में अंग्रेजी शराब की बोतल दिख गई। बोतल देखकर आरोपित ने शराब पीने का मन बना लिया। शराब के साथ उसने घर में रखी नमकीन भी चखी। उसने इतनी शराब पी ली कि होश खो बैठा और सुबह हो गई।

सुबह जब चंदन गुप्ता के परिवार की नींद खुली तब उन्होंने उस संदिग्ध को आँगन में ही पड़ा पाया। उस समय तक भी आरोपित नशे में था। इस मामले की सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस ने आरोपित को अस्पताल में भर्ती करवाया। अस्पताल में भी उसने पुलिस को चंदन के घर में घुसने की वजह चोरी बताई। मंगलवार (29 मार्च) को तहरीर मिलने के बाद आरोपित को जेल भेज दिया गया।