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बाइडेन के सलाहकार ने रूस से तेल-गैस की खरीद पर भारत को दी धमकी, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने खोली पश्चिम देशों के पाखंड की पोल

रूस-यू्क्रेन में जारी जंग के बीच भारत की भूमिका अहम हो गई है, जिसको देखते हुए दुनियाभर के देश लगातार भारत का दौरा कर उसके मूड को परखने की कोशिशें कर रहे हैं। इसी क्रम में गुरुवार (31 मार्च 2022) को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के अंतरराष्ट्रीय अर्थशास्त्र के राष्ट्रीय उप सुरक्षा सलाहकार दलीप सिंह भारत के दौरे पर आए। इस दौरान उन्होंने अमेरिकी प्रतिबंधों को दरकिनार कर रूस से तेल खरीदने के लिए वैकल्पिक भुगतान तंत्र स्थापित करने के लिए भारत को ‘परिणाम’ भुगतने की धमकी दे डाली। उनके इस बयान के बाद से विवाद खड़ा हो गया है।

दलीप सिंह ने कहा, “मैं यहाँ हमारे प्रतिबंधों के मैकेनिज्म, हमारे साथ जुड़ने के महत्व, साझा संकल्पों को व्यक्त करने और साझा हितों को आगे बढ़ाने के लिए दोस्ती की भावना से आया हूँ। और हाँ, ये उन देशों के लिए रिजल्ट है, जो एक्टिवली प्रतिबंधों को दरकिनार करने या वापस लेने की कोशिश करते हैं।”

अमेरिकी अधिकारी ने चेतावनी दी, “हम सभी देशों, खासतौर से हमारे सहयोगियों और भागीदारों के प्रति काफी उत्सुक हैं, लेकिन रूसी रूबल का समर्थन करने वाले तंत्र को विकसित करने के लिए, जो कि डॉलर बेस्ड वित्तीय प्रणाली को कमजोर करने की कोशिशें करते हैं, उनके खिलाफ सख्त कदम उठाएँगे।”

भारत के राजकीय दौरे पर आए अमेरिकी अधिकारी दलीप सिंह नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान विवादित टिप्पणी की। उन्होंने द्वावा किया कि अगर चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर घुसपैठ करता है तो रूस भारत की मदद नहीं करेगा।

दलीप सिंह के मुताबिक, “चीन के साथ इस रिश्ते में रूस जूनियर पार्टनर बनने जा रहा है। और चीन रूस से जितना अधिक लाभ लेगा वो भारत के लिए ठीक नहीं होगा। मुझे नहीं लगता कि कोई भी यह विश्वास करेगा कि यदि चीन एक बार फिर वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) का उल्लंघन करता है, तो रूस भारत की रक्षा के लिए आगे आएगा।”

भारत के रूस पर अपनी रक्षा और ऊर्जा की जरूरतों के लिए निर्भरता कम करने की चेतावनी देते हुए सिंह ने आगाह किया, “हम नहीं चाहते कि रूस से भारत में आयात में किसी भी तरह की तेजी आए, क्योंकि यह ऊर्जा या किसी अन्य निर्यात से संबंधित है, जो वर्तमान में हमारे द्वारा या अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध व्यवस्था के अन्य पहलुओं द्वारा प्रतिबंधित किया जा रहा है।”

दलीप सिंह की बेतुकी बयानबाजी पर भड़का गुस्सा

अमेरिकी अधिकारी दलीप सिंह की भारत को धमकी पर लोगों का गुस्सा भड़क गया है। देश के पूर्व राजनयिक डिप्लोमेसी की भाषा का इस्तेमाल नहीं करने को लेकर अमेरिकी अधिकारी की आलोचना की। उन्होंने ट्वीट किया, “तो ये हमारे दोस्त हैं.. यह कूटनीति की भाषा नहीं है.. यह जबरदस्ती वाली बात है। कोई इस युवक को बताए कि दंडात्मक एकतरफा आर्थिक उपाय परंपरागत अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है।”

इसी क्रम में पत्रकार स्टेनली जॉनी ने भी कहा, “भारत किसी बड़ी शक्ति का ग्राहक नहीं है। वो किसी समूह का भी हिस्सा नहीं है। दुनिया की सर्वाधिक आबादी वाले दूसरे सबसे बड़े देश और विश्व की सातवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था को पब्लिकली ये नहीं बताया जाना चाहिए कि उसे क्या करना है और क्या नहीं करना है। दलीप सिंह दिल्ली में इस अहम बिंदु से चूक गए।”

वहीं लेखक जोरावर दौलत सिंह ने भी अमेरिकी अधिकारी की खिंचाई की और ट्वीट किया, “दलीप नाम का यह आदमी भ्रमित है। इस तरह की बहादुरी केवल सहयोगी राज्यों के साथ काम करती है। ”

पश्चिमी देशों के पाखंड पर विदेश मंत्री की खरी-खरी

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत-ब्रिटेन सामरिक फ्यूचर्स फोरम में बोलते हुए पश्चिमी देशों के पाखंड का पर्दाफाश किया। उन्होंने बताया कि यूरोपीय देश पहले से ही रूस से तेल के सबसे बड़े आयातक थे। इसके साथ ही उन्होंने रूस से तेल खरीदे जाने के भारत सरकार के फैसले का बचाव किया और इस बात पर जोर दिया कि भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति पर अच्छे सौदे प्राप्त करना महत्वपूर्ण था, ऐसे समय में जब वैश्विक बाजार अस्थिर थे।

उन्होंने आगे कहा, “ये बड़ा ही दिलचस्प है, हमने देखा है कि इस मुद्दे पर एक अभियान (हमारे खिलाफ) जैसा दिखता है। जब तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो मुझे लगता है कि देशों के लिए मार्केट जाना और ये देखना कि उसके लोगों के लिए क्या सही है, यह देखना स्वाभाविक है।”

ब्रिटेन की विदेश सचिव लिज ट्रस के साथ बातचीत के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस बात पर जोर दिया कि भारत ने मध्य पूर्व से अधिकांश उर्जा की आपूर्ति की है। उन्होंने ये भी बताया कि कुल आयात का करीब 8 फीसदी अमेरिका और रूस से 1 फीसदी से भी कम कच्चे तेल की खरीद हुई थी।

इसके साथ ही उन्होंने दलीप सिंह के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि रूसी तेल और गैस का सबसे बड़ा खरीददार तो यूरोपीय देश ही है। उन्होंने आगे कहा, “मुझे पूरा यकीन है कि अगर हम दो या तीन महीने तक इंतजार करेंगे तो देखेंगे कि वास्तव में रूसी तेल और गैस के बड़े खरीददार कौन हैं। मुझे इस बात का संदेह है कि हम उस लिस्ट में टॉप 10 में भी नहीं होंगे।”

जैसे ही विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पश्चिमी देशों के झूठ की पोल खोली तो लिज ट्रस यूके के बचाव में उतर आईं। उन्होंने दावा किया कि उनका देश इस साल के अंत तक रूसी ऊर्जा की आपूर्ति पर अपनी निर्भरता को खत्म कर देगा। इसके साथ ही उन्होंने इस बात को भी स्वीकार किया कि जब 2014 में रूस ने क्रीमिया पर हमला किया था तो ब्रिटेन ने पर्याप्त कदम नहीं उठाए थे।

उन्होंने कहा, “जब पुतिन ने क्रीमिया पर आक्रमण किया तो हमने पर्याप्त कदम नहीं उठाए। हमने मिन्स्क समझौतों में खुद को शामिल करने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किया और अब उसके परिणाम देख रहे हैं।” ट्रस ने कहा कि रूसी तेल की खरीद पर नियंत्रण रखा जाए, ताकि उसकी युद्ध मशीनरी को ‘फंडिंग’ करने से रोका जा सके। उन्होंने आगे कहा, “मुझे लगता है कि इस वक्त सबसे बड़ा खतरा ये है कि हम प्रतिबंधों पर छोड़ देते हैं। हम ऐसा नहीं कर सकते हैं। हमें पुतिन पर दबाब बनाए रखने और यूक्रेन में हथियारों की आपूर्ति जारी रखने की जरूरत है।”

हालाँकि, इस मामले में विदेश मंत्री द्वारा भारत का रुख स्पष्ट किए जाने के बाद ट्रस ने कहा कि भारत एक संप्रभु राष्ट्र है और वो अपने मामलों में फैसले लेने के लिए स्वतंत्र है। ब्रिटिश सचिव ने कहा, “मुझे लगता है कि ये बहुत ही अहम है कि हम उन मामलों में दूसरे देशों के फैसलों का सम्मान करें, जिसका वो सामना करते हैं। भारत एक संप्रभु राष्ट्र है। मैं भारत को यह नहीं बताने जा रही हूँ कि क्या करना है।”

गौरतलब है कि है कि हाल ही में भारत ने रुपए-रूबल की वैकल्पिक भुगतान प्रणाली के जरिए रूस से S-400 मिसाइल को खरीदा है। इसके अलावा देश रूस के साथ आयात-निर्यात से संबंधित भुगतान के दूसरे मामलों को हल करने की बी कोशिशें कर रहा है, जो कि अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण उपजे हैं।

इस साल 24 फरवरी 2022 से जब से रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से भारत ने रूस से अतिरिक्त 13 मिलियन बैरल तेल की खरीद की है। जबकि पिछले साल 2021 में सालभर में कुल 16 मिलियन बैरल रूसी तेल खरीदा गया था।

कर्नाटक में हलाल के विरोध ने पकड़ा जोर, बेंगलुरु में ‘केवल हिंदू रेस्तरां में खाएँ’ का बैनर: बीजेपी नेता ने बताया था- इकोनॉमिक जिहाद

कर्नाटक (Karnataka) में स्कूल-कॉलेजों में बुर्का-हिजाब बैन के बाद अब हलाल (Halal) मीट की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की माँग हो रही है। विभिन्न हिंदू संगठनों ने राज्य में मुस्लिम व्यापारियों से हलाल मांस खरीदने का बहिष्कार किया है। इसके साथ ही इन दुकानों के साइनबोर्ड पर से हलाल प्रमाणन को भी हटाने की माँग की गई है।

हिंदू जागृति समिति, श्रीराम सेना, बजरंग दल सहित आठ समूहों ने हिंदुओं से हलाल मांस नहीं खरीदने का आग्रह किया है। इन हिंदूवादी संगठनों का कहना है कि हलाल की जगह ‘झटका’ नामक हिंदू पारंपरिक पद्धति के अनुसार काटा गया मांस ही हिंदुओं को खरीदना चाहिए।

इस संबंध में हिंदू संगठनों के एक संघ ने राज्य में ‘होसा तडाकू’ उत्सव के दौरान लोगों से हलाल मांस का बहिष्कार करने की अपील की है। हिंदू संगठनों ने हलाल को मुस्लिमों द्वारा देश की वित्तीय संपत्ति पर नियंत्रण करने की साजिश बताते हुए कहा, “इस्लामी संगठन देश में एक समानांतर वित्तीय प्रणाली बनाने की कोशिश कर रहे हैं। यह देश की सुरक्षा के लिए खतरनाक है। जब खाद्य प्रमाणन के लिए FSSAI और FDA जैसी सरकारी प्रमाणन एजेंसियां ​​हैं तो धर्म के आधार पर प्रमाणन की क्या आवश्यकता है? हलाल प्रमाणीकरण धर्मनिरपेक्षता और पारंपरिक कसाई और मांस व्यापारियों के साथ घोर अन्याय है।”

द न्यूज मिनट के अनुसार, हिंदू जागृति समिति के सदस्यों ने बताया कि बेंगलुरु के विजयनगर में उन तीन दुकानों से साइनबोर्ड हटा दिए गए हैं, जिन पर लिखा था कि ‘यहाँ हलाल उपलब्ध है’। वहीं, बेंगलुरु के बाहरी इलाके नेलामंगला में ‘केवल हिंदू रेस्तरां में खाएँ’ के बैनर लगाए गए हैं।

हलाल पर उठाई जा रहीं गंभीर आपत्तियों पर विचार होगा- कर्नाटक CM बोम्मई

इससे पहले बुधवार (30 मार्च 2022) को कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई (Karnataka CM Basavaraj Bommai) ने कहा था कि हलाल मीट को लेकर उठाई जा रही ‘गंभीर आपत्तियों’ पर राज्य सरकार विचार करेगी। उन्‍होंने कहा कि कई दक्षिणपंथी समूहों ने हलाल मांस के बहिष्कार की अपील की है। सरकार इस मसले पर अपना रुख बाद में स्‍पष्‍ट करेगी।

मुख्यमंत्री बसवराज ने कहा, “हलाल मीट का मुद्दा अभी-अभी शुरू हुआ है। इसका संपूर्ण अध्ययन करना होगा। इसका नियमों से कोई वास्‍ता नहीं है। यह एक प्रथा है, जो जारी है। अब इस पर गंभीर आपत्तियाँ उठ रही हैं। इसलिए हम इसका अध्ययन करेंगे।”

हलाल पर भाजपा नेता रवि ने उठाए थे सवाल

हलाल मीट (Halal Meat) को ‘इकोनॉमिक जिहाद’ करार देते हुए भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव सीटी रवि ने हिंदुओं से इसका इस्तेमाल नहीं करने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि ‘हलाल’ का इस्तेमाल जिहाद की तरह किया जाता है, ताकि मुस्लिम दूसरों के साथ व्यापार न करें।

बीजेपी नेता ने कहा, “जब वे (मुस्लिम) सोचते हैं कि हलाल मांस का इस्तेमाल होना चाहिए तो यह कहने में क्या गलत है कि इसका इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।” रवि का कहना है कि हो सकता है कि हलाल मांस मुस्लिमों के लिए बहुत प्रिय है, लेकिन हिंदुओं के लिए यह किसी का बचा हुआ (जूठा) है। हलाल को कुछ इस तरीके से पूरी प्लानिंग के साथ डिजाइन किया गया है कि इस प्रोडक्ट को लोग केवल मुस्लिमों से ही खरीदें, दूसरों से नहीं।

भाजपा नेता का कहना है कि अगर मुस्लिम हिंदुओं से मांस खरीदने से इनकार करते हैं तो आप हिंदुओं से ये क्यों कहते हैं कि वो मुस्लिमों से हलाल मीट खरीदें। अगर मुस्लिम गैर-हलाल मांस खाते हैं तो हिंदू भी हलाल मीट का इस्तेमाल करेंगे। बिजनेस एकतरफा नहीं होता, दोतरफा होता है।

परीक्षा पे चर्चा: फिल्म की कहानी सुनाकर PM मोदी ने दी सेल्‍फ असेसमेंट की सीख, कहा-ऑनलाइन या ऑफलाइन के बजाय कुछ देर इनरलाइन भी रहें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (1 अप्रैल 2022) को ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम के 5वें संस्करण में विद्यार्थियों को एग्जाम के तनाव से बचने का गुर बताया। परीक्षा से पहले भय और नंबर कम आने से जुड़े प्रश्नों पर पीएम मोदी ने कहा कि परीक्षा जीवन का सहज हिस्सा है। यह आपकी विकास यात्रा का हिस्सा है। आप कई बार एग्जाम दे चुके हैं। परीक्षा के अनुभवों को अपनी ताकत बनाएँ। जो आप करते हैं उसमें विश्वास भरें। परीक्षा जीवन का एक पड़ाव भर है। उन्होंने आगे कहा, “त्योहारों के बीच में एग्जाम भी होते हैं। इस वजह से त्योहारों का मजा नहीं ले पाते। लेकिन अगर एग्जाम को ही त्योहार बना दें, तो उसमें कईं रंग भर जाते हैं।”

पीएम ने सुनाई फिल्‍म की कहानी

इसके अलावा सुबह पढ़ाई करें या शाम को? खेलने से पहले पढ़े या बाद में? खाली पेट पढ़ें या खा-पीकर? इन सवालों के जवाब में पीएम मोदी ने कहा, “मुझे एक फिल्‍म याद आती है जिसमें रेलवे स्‍टेशन के पास रहने वाले एक व्‍यक्ति को बंगले में रहने का अवसर मिलता है। वहाँ उसे नींद नहीं आती तो वह रेलवे स्‍टेशन जाकर रेलगाड़‍ियों की आवाज रिकार्ड करता है और वापस आकर टेप रिकॉर्डर में सुनकर फिर सोता है। आशय ये है कि हमें कंफर्टेबल होना जरूरी है। इसके लिए सेल्‍फ असेसमेंट करें और देखें कि आप कब और कैसे पढ़ाई के लिए कंफर्टेबल होते हैं।”

बिना खेले कोई खिल नहीं सकता

प्रधानमंत्री ने कहा कि खेले बिना कोई खिल नहीं सकता। अपने प्रतिद्वंदी की चुनौतियों का सामना करना हम सीखते हैं। किताबों में जो हम पढ़ते हैं, उसे आसानी से खेल के मैदान से सीखा जा सकता है। हालाँकि, अभी तक खेलकूद को शिक्षा से अलग रखा गया। मगर अब बदलाव आ रहा है और जल्‍द और बदलाव आने को तैयार है।

सोशल मीडिया और मोबाइल गेमिंग के एडिक्‍शन से कैसे बचें

पीएम ने कहा कि सोशल मीडिया और मोबाइल गेमिंग के एडिक्‍शन के बचने के भी उपाय हैं। जितना मजा मोबाइल के अंदर या लैपटॉप के अंदर घुसने में है, उतना ही मजा खुद के अंदर घुसने में भी है। छात्र ऑनलाइन या ऑफलाइन रहने के बजाय कुछ देर इनरलाइन भी रहें। एकाग्र होकर पढ़ाई करेंगे तो मोबाइल के एडिक्‍शन से बचे रहेंगे।

पीएम मोदी ने कहा कि अक्सर देखने में आता है कि माता-पिता अपने सपनों और अपेक्षाओं को बच्चों पर थोपते हैं। सभी पेरेंट्स व टीचरों को कहना चाहेंगे कि बच्चों की स्ट्रेंथ को पहचानें, यह आपकी कमी है कि आप उसकी ताकत  को समझ नहीं पा रहे हैं। दूरी वही से बन जाती है। अपने सपनों को माता-पिता बच्चों पर न थोपें। 

FIR होते ही कानपुर के नवाज शरीफ ने बदल ली कव्वाली, कहा- मेरे दिल में हैं मोदी, जान में योगी: उर्स पर की थी देश विरोधी बातें

मध्य प्रदेश के रीवा जिले में आयोजित उर्स में देश विरोधी बातें करने वाले कानपुर के कव्वाल नवाज शरीफ उर्फ शरीफ परवाज पर FIR दर्ज हो गई है। रिपोर्टों के अनुसार उसे गिरफ्तार करने के लिए मध्य प्रदेश पुलिस की टीम कानपुर गई हुई है। इधर केस दर्ज होते ही नवाज शरीफ के सुर बदल गए हैं। उसका कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उसके दिल में रहते हैं।

रीवा जिले के मनगंवा में सोमवार (28 मार्च 2022) को आयोजित कव्वाली में उसने प्रधानमंत्री मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए आपत्तिजनक बातें कही थी। इसका वीडियो वायरल होने के बाद कव्वाल नवाज शरीफ के खिलाफ हिन्दू संगठनों ने मामला दर्ज करवाया था। FIR में उर्स कमेटी के आयोजक का भी नाम है।

मध्य प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने गुरुवार (31 मार्च 2022) को कहा, “मैंने इसमें तत्काल ही कव्वाल शरीफ परवाज के खिलाफ केस दर्ज करने के आदेश दे दिए थे। केस रजिस्टर्ड होकर धारा 153, 505 और 298 (1) में कार्रवाई भी हो गई है। हमारी 2 टीमें उसको पकड़ने के लिए कानपुर पहुँच चुकी है। कानपुर पुलिस सहयोग कर रही है। वे जल्द ही गिरफ्तार हो जाएँगे।”

केस दर्ज होते ही कव्वाल के बदले सुर

इस मामले में केस दर्ज होते ही कवाल शरीफ परवाज के सुर बदल गए हैं। उन्होंने वीडियो जारी कर मोदी और योगी की जम कर तारीफ की है। वीडियो में कव्वाल ने कहा, “हिंदू भाइयों को नमस्कार, आदाब। अस्सलाम वाले कुम। मैंने 28 तारीख को रीवा के मनगंवा में एक प्रोग्राम दिया था। वहाँ का एक वीडियो सोशल मीडिया पर बहुत वायरल हो रहा है। मैंने वहाँ कोई ऐसी गलत बात नहीं की। मैंने कहा था कि मोदी जी, योगी जी और अमित शाह भी हमारे हैं। उनसे भी बड़े ईश्वर, अल्लाह और औलिया हैं। मोदी जी मेरे दिल में, योगी और अमित शाह मेरी जान में हैं। मैंने उनके लिए नहीं कहा था। मेरा किसी की तरफ इशारा नहीं था। मेरा इशारा गरीब नवाज की तरफ था।”

गौरतलब है कि वायरल वीडियो में कव्वाल नवाज शरीफ ने कहा था, “मोदी जी कहते हैं हम हैं, अमित शाह जी कहते हैं और योगी जी कहते हैं हम हैं…लेकिन ये लोग हैं कौन? कौन हैं ये लोग? ये लोग कुछ भी नहीं कर सकते हैं। अगर गरीब नवाज चाह लें तो पता ही नहीं चलेगा कि हिंदुस्तान कहाँ बसा था। कहाँ पर था? ये वलियों का वो मकाम है कि अगर नजर फेर लेते हैं तो पूरे के पूरे शहर को वीरान कर देते हैं। जरा सा इतिहास पढ़ लो तो पता चल जाएगा।”

ब्रिटेन में खालिस्तान समर्थक KTV का लाइसेंस रद्द, हिंसा और आतंकवाद को बढ़ावा देने में शामिल रहा है टीवी चैनल

ब्रिटिश टेलीकॉम रेगुलेटर ‘ऑफिस ऑफ कम्युनिकेशंस- ऑफकॉम’ (British Telecom regulator Ofcom) ने जाँच के बाद खालिस्तान (Khalistan) समर्थक मीडिया नेटवर्क खालसा टेलीविजन लिमिटेड या केटीवी (Khalsa Telivision Ltd- KTV) को जारी किए गए लाइसेंस को निलंबित कर दिया है। जाँच के दौरान पाया गया कि इस खालिस्तानी चैनल ने प्रसारण नियमों का उल्लंघन किया है।

एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि ऑफकॉम की जाँच में पाया गया है कि केटीवी पर 95 मिनट के लाइव चर्चा कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ में हिंसा के लिए उकसाया गया। शो के दौरान कार्यक्रम के प्रस्तुतकर्ता (Anchor) ने भड़काऊ बयान दिए थे, जिसमें उसने खालिस्तान के लिए हत्या सहित किसी भी तरह की हिंसा को जायज बताया था। यह टेलीविजन चैनल यूनाइटेड किंगडम (UK) में सिख समुदाय द्वारा संचालित किया जाता है।

ऑफकॉम के आदेश में कहा गया है कि यह अपराध और अव्यवस्था को बढ़ावा देने वाला और नियमों के खिलाफ है। आदेश में कहा गया है, “इस उल्लंघन की गंभीर प्रकृति को देखते हुए और हमारे निलंबन नोटिस में निर्धारित कारणों के तहत हम आज खालसा टेलीविजन लिमिटेड के यूके में प्रसारण के लाइसेंस को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर रहे हैं।”

खालसा टेलीविजन लिमिटेड को ऑफकॉम की इस कार्रवाई के खिलाफ अपील करने के लिए 21 दिन का समय दिया गया है।

खालिस्तानी नेटवर्क ने भारत के खिलाफ हिंसा का किया था आह्वान

यह टीवी चैनल भारत में हिंसा को बढ़ावा देने के लिए कुख्यात है। पिछले साल फरवरी में ऑफकॉम ने खालिस्तान समर्थक नेटवर्क- खालसा टेलीविजन (KTV) पर एक कार्यक्रम के दौरान चर्चा में घृणा फैलाने और हिंसा को बढ़ावा देने के कारण 50,000 पाउंड का जुर्माना लगाया था। इस चर्चा में आतंक का संदर्भ देते हुए ब्रिटिश सिखों को हिंसा करने के लिए उकसाया गया था। उस दौरान ब्रिटिश मीडिया नियामक ऑफकॉम ने केटीवी को चेतावनी दी थी कि वह इस तरह की भड़काऊ सामग्री परोस कर नियमों का उल्लंघन ना करे।

वीडियो एवं शो में भारतीय लोगों के खिलाफ हिंसक कार्रवाई की अपील और सिख अलगाववादी आंदोलनों को बढ़ावा देने वाले हिंसक कृत्यों का महिमामंडन किया गया था। शो में सिख धर्म की आलोचना करने वालों के खिलाफ हिंसा और आतंकवादी संगठनों को वैध बताया। संगीत वीडियो में पूर्व भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की तस्वीरें थीं और उस तस्वीर के मुँह से खून टपक रहा था।

उसके कैप्शन में लिखा था, “आपने मासूमों का खून पिया, दुष्ट महिला”। गीत में लिखा था, “योद्धा आपके राज्य को नष्ट कर देंगे”। इस में दिल्ली के लाल किले को आग की लपटों में दिखाया गया था। इस शो और वीडियो को ऑफकॉम ने ‘भारत के खिलाफ हिंसक कार्रवाई की वकालत करने वाला’ माना था।

बता दें कि यूनाइटेड किंगडम में खालसा टेलीविजन लिमिटेड के लाइसेंस के तहत प्रसारित होने वाला केटीवी सिख समुदाय के लिए संचालित किया जाता है।

आंध्र प्रदेश के राम मंदिर में ईसाई प्रार्थना, BJP नेताओं ने शेयर किया वायरल वीडियो… पुलिस ने दी जानकारी, ‘अवैध कब्जा’ से इनकार

आंध्र प्रदेश में ईसाई मिशनरियों ने एक हिंदू मंदिर पर कब्जा कर लिया है – एक वीडियो शेयर करके यह आरोप भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने लगाया। ये घटना राज्य के गंगावरम स्थित राम मंदिर की बताई जा रही है। भाजपा नेताओं के आरोप के अनुसार एक पादरी ने मंदिर के अंदर ईसाई प्रार्थना सभा आयोजित की। शुक्रवार (31 मार्च 2022) को इससे संबंधित वीडियो वायरल हुआ।

बीजेपी के आंध्र प्रदेश प्रभारी और राष्ट्रीय सचिव सुनील देवधर ने भी यह वीडियो शेयर किया है। ट्वीट में वीडियो को लेकर उन्होंने लिखा: “यह बर्दाश्त नहीं। मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी के धर्मांतरण एजेंडा को चर्च आगे बढ़ा रहा है। गंगावरम स्थित राम मंदिर को गैर-कानूनी ढंग से एक पादरी ने कब्जा लिया और अंदर ईसाई प्रार्थना कर रहे। सभी अपराधी तुरंत गिरफ्तार किए जाएँ।”

सुनील देवधर द्वारा शेयर किए गए वीडियो में आप देख सकते हैं कि जहाँ प्रार्थना चल रही है, उसके पीछे एक मंदिर है। मंदिर के गेट पर ताला लगा हुआ है।

आंध्र प्रदेश के सीएम वाईएस जगन मोहन रेड्डी पर बीजेपी नेता ने धर्मान्तरण के एजेंडे को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने चर्च पर अपनी सीमा रेखा को क्रॉस कर अवैध तरीके से राम मंदिर पर कब्जा करने और हिंदू मंदिर के अंदर ईसाई रीति-रिवाजों का पालन करने का आरोप भी लगाया। बीजेपी नेता ने मंदिर के अंदर घुसने वाले सभी दोषियों के खिलाफ तत्काल गिरफ्तारी की माँग की है।

इसी घटना के वीडियो को शेयर करते हुए भाजपा के सीनियर लीडर विष्णु वर्धन रेड्डी ने तंज कसा और कहा कि आंध्र प्रदेश में हिंदुओं के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने दावा किया कि एक ईसाई पादरी ने गंगावरम में राम मंदिर पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया और मंदिर के अंदर ईसाई प्रार्थना की।

इसके लिए दोषी सभी लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग करते हुए उन्होंने कहा कि वाईएसआर-कॉन्ग्रेस सरकार की तुष्टीकरण की राजनीति के कारण ऐसा हो रहा है।

आंध्र प्रदेश पुलिस ने दी सही जानकारी

आंध्र प्रदेश की पूर्वी गोदावरी पुलिस ने भाजपा नेताओं के द्वारा शेयर किए गए इस वीडियो को लेकर सही जानकारी दी है। पुलिस ने बताया कि पादरी ने राम मंदिर पर “अवैध रूप से कब्जा” नहीं किया है।

पूर्वी गोदावरी के पुलिस अधीक्षक एम रवींद्रनाथ बाबू ने कहा कि प्रार्थना सभा आयोजित करने वाली महिला और उसके बेटे के बीच पारिवारिक विवाद है। इसे ही सांप्रदायिक रंग दे दिया गया। पुलिस के अनुसार कड़ा मंगयम्मा नाम की महिला ने अपने घर के सामने सड़क पर ईसाई प्रार्थना सभा आयोजित की। उसके घर और सड़क से सटे ही राम मंदिर है, जिसे वायरल वीडियो में देखा जा सकता है।

स्वरा भास्कर के साथ फिल्म बना रहे थे विवेक अग्निहोत्री, शूटिंग से ठीक पहले कर दी छुट्टी: ‘द कश्मीर फाइल्स’ के निर्देशक ने खुद बताई वजह

‘द कश्मीर फाइल्स’ के निर्देशक विवेक अग्निहोत्री और ‘अनारकली ऑफ आरा’ की अभिनेत्री स्वरा भास्कर की तकरार आपने कई बार सोशल मीडिया में देखी होगी। पर आप शायद ही जानते हों कि कभी स्वरा भास्कर के साथ अग्निहोत्री फिल्म बनाने जा रहे थे। लेकिन शूटिंग से पहले उन्होंने बॉलीवुड की इस लिबरल अदाकारा को बाहर का रास्ता दिखा दिया था। इसकी वजह अग्निहोत्री ने एक हालिया इंटरव्यू में बताई है।

विवेक अग्निहोत्री ने Lehren को दिए इंटरव्यू में बताया कि उन्होंने फिल्म ‘बुद्धा इन अ ट्रैफिक जाम’ के लिए स्वरा भास्कर को साइन किया था। लेकिन लास्ट मिनट पर उन्हें रिप्लेस कर दिया गया। उन्होंने कहा, “हमारे उस (फिल्म) के लिए स्वरा भास्कर थी। स्वरा वह फिल्म कर रही थी। शूटिंग से एक दिन पहले, मैं हैदराबाद के लिए उड़ान भर रहा था और मेरे निर्माता ने कहा कि अगर कोई फिल्म से पहले इतने नखरे दिखाती है तो फिल्म के बाद यह काफी मुश्किल होने वाला है। इसलिए हमने उन्हें आखिरी मिनट में रिप्लेस कर दिया।” नीचे के वीडियो में आप यह बात 25वें मिनट से सुन सकते हैं।

बताया जाता है कि इसी घटना के बाद से ही स्वरा और विवेक के बीच अच्छे रिश्ते नहीं हैं। दोनों अक्सर सोशल मीडिया पर भिड़ते रहते हैं। स्वरा ने ‘द कश्मीर फाइल्स’ को लेकर भी अग्निहोत्री की आलोचना की थी। उन्होंने ट्वीट किया था, “अगर आप चाहते हैं कि लोग आपको सफलता के लिए आपकी मेहनत को बधाई दे तो पहले बीते 5 साल में उनके सिर पर बैठकर गंदगी नहीं फैलाना चाहिए था।” स्वरा का ये ट्वीट तब आया था, जब लोग बॉलीवुड सेलेब्स से ‘द कश्मीर फाइल्स’ को सपोर्ट करने की माँग कर रहे थे। हालाँकि ये ट्वीट स्वरा को ही भारी पड़ गया और वो सोशल मीडिया पर बुरी तरह ट्रोल हो गईं।

उल्लेखनीय है कि विवेक अग्निहोत्री हमेशा से लीक से हटकर सिनेमा बनाते रहे हैं। उनकी द कश्मीर फाइल्स ने नब्बे के दशक में हुए हिंदुओं के नरसंहार को आवाज देने का काम किया है। लेकिन एक तबके को यह रास नहीं आ रहा है। एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने तो कहा है कि इस फिल्म को प्रदर्शन की अनुमति ही नहीं मिलनी चाहिए थी। वहीं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पिछले दिनों इस फिल्म को ‘झूठा’ करार दिया था।

कुर्सी जाते देख इमरान खान को आई बरखा दत्त की याद, ‘विदेशी साजिश’ के दावों पर अमेरिका ने लगाई लताड़

पाकिस्तान (Pakistan) के प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran Khan) ने गुरुवार (31 मार्च) को अपनी आवाम को सम्बोधित करते हुए भारत की विवादित पत्रकार बरखा दत्त की किताब का जिक्र किया। साथ ही उन्होंने अमेरिका पर भी अपनी सरकार के खिलाफ साजिश का आरोप लगाया है। इमरान खान द्वारा यह भाषण तब दिया गया जब वो अविश्वास प्रस्ताव के बाद सत्ता गँवाने की कगार पर खड़े हैं।

बरखा दत्त के बारे में बोलते हुए इमरान खान ने कहा, “बरखा दत्त की किताब में है कि वो (नवाज़ शरीफ) नेपाल के अंदर नरेंद्र मोदी से छुप-छुप कर मिल रहे थे। अपनी ही फ़ौज से बचने के लिए।”

वहीं अमेरिका के बारे में इमरान ने कहा, “हमें 7-8 मार्च को अमेरिका की तरफ से एक मैसेज आता है। उस मैसेज में पहले से लिखा था कि पाकिस्तान में अविश्वास प्रस्ताव पेश होने वाला है। जबकि तब ऐसा कुछ हुआ भी नहीं था। इसका मतलब ये हुआ कि जो कुछ भी हो रहा उसमें इनके (विपक्ष) के लोगों की पहले से बाहर के लोगों से चर्चा हो रही थी। अमेरिका का वो मैसेज पाकिस्तान की सरकार के खिलाफ नहीं बल्कि सिर्फ मेरे खिलाफ है। वो (अमेरिका) खुद को पाकिस्तान से गुस्सा होना बताते हैं और कहते हैं कि अगर इमरान खान विश्वास मत हार जाता है तब हम पाकिस्तान को माफ़ कर देंगे। लेकिन अगर इमरान खान विश्वास मत जीत जाता है तब हमारे ताल्लुक खराब हो जाएँगे और पाकिस्तान को एक मुश्किल वक्त का सामना करना पड़ेगा।”

इमरान ने आगे कहा, “एक निर्वाचित प्रधानमंत्री के खिलाफ ऐसा लेटर? यह एक प्रामाणिक डॉक्यूमेंट है। हमारे राजदूत को ऐसा कहा गया। 22 करोड़ की हमारी कौम बताए कि क्या ये हमारी हैसियत है? मेरे रूस जाने की बात पर हमारी सरकार की सहमति थी। यूरोप के कई देश के नेता रूस गए थे लेकिन सिर्फ हमें ये बोला जा रहा है। जैसे कि हम उनके कोई नौकर हैं। अमेरिका की बातचीत उन लोगों से है जिनके जरिए यहाँ पाकिस्तान में साजिश हुई है। ये असल में वफादार गुलाम हैं।”

अमेरिका ने किया इमरान के आरोपों का खंडन

इमरान खान के आरोपों का खंडन करने हुए अमेरिका ने कहा, “हम पाकिस्तान के हालात पर लगातार नजर रखे हुए हैं। हम लोकतंत्र का सम्मान करते हैं। इमरान खान द्वारा लगाए गए आरोप निराधार हैं।”

पाकिस्तान के नेटीजेंस इस पूरे मामले को ट्विटर पर हैशटैग #LetterGate नाम से चला रहे हैं।

ईसाई लड़का-मुस्लिम लड़की, सनातन धर्म में वापसी कर लिए सात फेरे: बरेली के अगस्त्य मुनि आश्रम में हुआ विवाह

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में एक ईसाई लड़के और मुस्लिम लड़की ने हिन्दू विधि-विधान से शादी की है। शादी बुधवार (30 मार्च 2022) को बरेली के अगस्त्य मुनि आश्रम में सम्पन्न हुई। बाराती और घराती हिन्दू संगठन के लोग बने। कन्यादान मंदिर के महंथ ने किया। मंदिर के महंथ केके शंखधर ने इसकी जानकारी दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ईसाई दूल्हे का नाम सुमित और मुस्लिम दुल्हन का नाम नूर बी है। सुमित बरेली और नूर बी पीलीभीत की रहने वाली है। दोनों 12वीं कक्षा से एक-दूसरे से परिचित थे। बाद में शादी का फैसला किया तो धर्म के आधार पर विरोध हुआ। सुमित को सनातन संस्कार पसंद थे इसलिए उसने नूर से हिन्दू बन शादी का प्रस्ताव रखा। इस प्रस्ताव को नूर ने तुरंत मान लिया।

इस शादी में सुमित के हिन्दू दोस्तों ने बहुत मदद की। हिन्दू युवा वाहिनी के कार्यकर्ता दोनों को लेकर बरेली के अगत्स्य मुनि के आश्रम आए। यहाँ के महंथ पंडित केके शंखधार को पूरी बात बताई। सुमित और नूर ने अपने बालिग होने के सबूत पेश किए। इसके बाद दोनों की सनातन धर्म में वापसी करवाकर शादी आश्रम में करवाई गई। नूर को नया नाम निशा मिला है। शादी के बाद वह पति के साथ ससुराल चली गई।

शादी के बाद सुमित और निशा ने सनातन धर्म के संस्कारों को पालन करने का संकल्प लिया। निशा ने बताया, “मैं बालिग हूँ। सभी फैसले सोच-समझकर लिए हैं। मैं अपने पति के साथ दूर किसी और शहर में जाकर चैन से रहूँगी। मैं माँ दुर्गा की भक्त हूँ। आने वाले नवरात्रि से मैं उनका व्रत भी रखूँगी।”

शादी करवाने वाले महंथ को मिलती रही है धमकी

ऑपइंडिया ने इस शादी को करवाने वाले अगत्स्य मुनि आश्रम के महंथ केके शंखधार से बात की। उन्होंने बताया, “नूर के अब्बा का नाम बाबू बख्स है। वे खेती-किसानी करते हैं। शादी के बाद लड़की के परिवार वालों ने सुमित और उसके परिवार के खिलाफ पीलीभीत जिले के जहानाबाद थाने में FIR दर्ज करवाया है। लड़की के अपहरण का आरोप लगाया गया है। अब कोर्ट और पुलिस को लड़की के दिए बयान पर आगे की कार्रवाई होगी। लड़की बालिग है और MA की छात्रा है। उसने शादी के लिए शपथ-पत्र भी दे रखा है। सुमित केस दर्ज होने के बाद से काफी डरा हुआ है।” उन्होंने बताया शपथ पत्र में नूर ने लिखा, “विवाह से पूर्व मेरा शुद्धिकरण (घर वापसी) करवाया जाना आवश्यक है।”

महंथ के के शंखधार ने बताया, “मैं कमलेश तिवारी के सगंठन से जुड़ा हुआ हूँ। जिन्होंने कमलेश तिवारी की हत्या की थी वो पहले मुझे भी फोन कर अपने साथ बरेली से कमलेश तिवारी के घर चलने का ऑफर किए थे। इसके अलावा मुझे जैश-ए-मोहम्मद का नाम बताकर धमकी भी आ चुकी है। पहले सुरक्षा के लिए मुझे 2 पुलिसकर्मी दिए गए थे। लेकिन फ़िलहाल के लिए मेरी सुरक्षा में कोई नहीं है।” हालाँकि पीलीभीत के जहानाबाद थाने के एचएचओ ऑपइंडिया ने इस मामले में लड़की के पिता की ओर कोई केस दर्ज करवाए जाने से इनकार किया है।

93 में गढ़ी मस्जिद बंदर में धमाके की ‘कहानी’, अब कश्मीरी हिंदुओं का नरंसहार लग रहा BJP का ‘प्रोपेगेंडा’: बोले शरद पवार- द कश्मीर फाइल्स को पास नहीं करना था

साल था 1993। तारीख थी 12 मार्च की। मुंबई में 12 सीरियल ब्लास्ट हुए। लेकिन तब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे शरद पवार ने 13वें ब्लास्ट की कहानी गढ़ी। कहा कि एक धमाका मस्जिद बंदर में भी हुआ है। मकसद था इस्लामी कट्टरपंथियों पर पर्दा डालना, क्योंकि असली धमाके ​हिंदू बहुल इलाकों को निशाना बनाकर किए थे। इतना ही नहीं उन्होंने इस्लामी आतंकियों को बचाने के लिए बम को ‘साउथ इंडियन आतंकियों’ वाला भी बताया था। अब इन्हीं शरद पवार को नब्बे के दशक में कश्मीर में हिंदुओं के नरसंहार पर बनी फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ बीजेपी का प्रोपेगेंडा लग रही है। उनका यह भी कह​ना है कि इस फिल्म को प्रदर्शन के लिए पास ही नहीं किया जाना चाहिए था।

राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) के प्रमुुख शरद पवार गुरुवार (31 मार्च 2022) को पार्टी के अल्पसंख्यक विभाग के एक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। यहाँ उन्होंने कहा कि बीजेपी फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ के जरिए घाटी से कश्मीरी पंडितों के पलायन को लेकर झूठा प्रोपेगेंडा फैलाकर देश में जहरीला माहौल बना रही है। पवार ने कहा कि ऐसी फिल्मों के प्रदर्शन की मँजूरी नहीं दी जानी चाहिए थी, लेकिन सरकार ने इसे टैक्स फ्री कर दिया। जिन लोगों के पास देश को एक रखने की जिम्मेदारी है, वही लोगों को ऐसी फिल्म देखने को कह रहे हैं ताकि लोगों में गुस्सा भड़के।

पवार ने कहा कि यह सच है कि कश्मीरी पंडितों को घाटी छोड़नी पड़ी थी, लेकिन मुस्लिमों को भी उसी तरह से निशाना बनाया गया था। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान स्थित आतंकी समूह कश्मीरी पंडितों और मुसलमानों पर हमले के लिए जिम्मेदार हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अगर मोदी सरकार सच में कश्मीरी पंडितों की परवाह करती है तो, उसे उनके पुनर्वास के लिए हर कोशिश करनी चाहिए। अल्पसंखकों को लेकर गुस्सा नहीं भड़काना चाहिए।

इसके अलावा राकांपा प्रमुख ने चर्चा में देश के पहले पीएम जवाहरलाल नेहरू को घसीटने पर भी बीजेपी को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि कश्मीरी पंडितों को तब घाटी छोड़नी पड़ी थी, जब विश्वनाथ प्रताप सिंह पीएम थे। उन्होंने कहा कि उस समय वीपी सिंह की सरकार का समर्थन भाजपा कर रही थी। तब जगमोहन जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल थे। बाद में जगमोहन ने बीजेपी उम्मीदवार के तौर पर दिल्ली से लोकसभा चुनाव लड़े थे। इन्होंने ही कश्मीरी पंडितों की कश्मीर घाटी से निकलने में मदद की।

उन्होंने द कश्मीर फाइल्स फिल्म पर टिप्पणी के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को घेरने के लिए भी बीजेपी की आलोचना की। पवार ने कहा कि राजनीतिक आंदोलनों का स्वागत है, लेकिन अल्पसंख्यकों के बारे में बोलने पर केजरीवाल की आलोचना की गई। भाजपा देश को एक अलग मार्ग पर ले जा रही है। वह देश की एकता को नष्ट कर रही है।

पवार ने इससे पहले 29 मार्च को एक ट्वीट करते हुए लिखा था, “आज देश में नफरत और झूठ की राजनीति के दौर में युवाओं का एकजुट होना बहुत जरूरी है। कश्मीरी पंडितों के समाधान की जगह राजनैतिक फायदा खोजने वाले लोगों से और सरकारी एजेंसियों का दुरुपयोग करने वाली सरकार से युवाशक्ति ही सच्चाई और एकता के दम पर मुकाबला कर सकती है।”

शुक्रवार (1 अप्रैल 2020) को निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “माननीय शरद पवार जी, भारत जैसे गरीब राष्ट्र में आपके हिसाब से एक राजनेता के पास अपनी क़ाबिलियत से कमाई, ज़्यादा से ज़्यादा कितनी संपत्ति होनी चाहिए? भारत में इतनी ग़रीबी क्यों है, यह आपसे बेहतर कौन जनता है। ईश्वर आपको लंबी आयु दे, सदबुद्धि दे।”

गौरतलब है कि इससे पहले कॉन्ग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने भी मोदी सरकार पर फिल्म के जरिए समाज में नफरत फैलाने का प्रयास करने का आरोप लगाया था। वहीं केरल कॉन्ग्रेस ने अपने ट्वीट में दावा किया था कि 1990 से 2007 के बीच आतंकियों ने 399 कश्मीरी पंडितों को मारा, लेकिन इस दौरान 15000 मुस्लिम भी आतंकियों द्वारा मारे गए।

बता दें कि ‘द कश्मीर फाइल्स’ फिल्म कश्मीरी पंडितों के कश्मीर से पलायन, नरसंहार और उस दौरान उन पर हुए अत्याचारों की कहानी पर बनी है। बॉक्स ऑफिस पर तो फिल्म शानदार प्रदर्शन कर ही रही है, कई राज्य इसे कर मुक्त कर चुके हैं।