विवेक अग्निहोत्री (Vivek Agnihotri) की फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ (The Kashmir Files) की रिलीज के साथ ही जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) से 1990 के दौरान पलायन के लिए मजबूर हुए कश्मीरी हिंदुओं की बात हर कोई कर रहा है, लेकिन प्रख्यात गीतकार संतोष आनंद (Santosh Ananad) ने खुलासा किया है कि 90 के दशक में आतंकवाद इस कदर अपने चरम पर था कि उनके गाने तक से कश्मीर का नाम हटा दिया गया था। वो कहते हैं कि कश्मीर में हुआ नरसंहार ऐसा सच है, जिसे न तो दबाया जा सकता है और न ही छुपाया जा सकता है।
प्रख्यात गीतकार और कवि संतोष आनंद ने यह बात मंगलवार (29 मार्च 2022) को प्रयागराज में कही। वो यहाँ कीडगंज में आयोजित ‘काव्य चकल्लस-2022’ के तहत हो रहे अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में शामिल होने के लिए आए थे। उन्होंने बताया कि 1992 में सुपरहिट फिल्म ‘तहलका’ आई थी। इसका एक गाना था ‘दिल दीवाने का डोला दिलदार के लिए …’ इस गाने को संतोष आनंद ने ही लिखा था। उन्होंने बताया कि ये गाना असली नहीं है। इसके असली बोल थे, ‘दिल दीवानों का डोला कश्मीर के लिए..हर देशभक्त ये बोला कश्मीर के लिए..मेरा रंग दे बसंती चोला कश्मीर के लिए।’
संतोष आनंद कहते हैं कि उस वक्त घनघोर आतंकवाद था। उस दौरान कश्मीर का नाम लेना भी मुनासिब नहीं था। मेरे गाने को रोक दिया गया। इसकी न्यूज तक नहीं आई। वो बताते हैं कि उनके गाने को लेकर एक समाचार के वरिष्ठ संवाददाता ने बुलाकर दिखाया था कि एक पेज की खबर बनी थी, लेकिन पूरे पेज पर विज्ञापन लगा दिया गया। उन्होंने ये भी कहा कि वो एक राष्ट्रवादी विचारधारा वाले व्यक्ति हैं।
साभार: दैनिक जागरण
द कश्मीर फाइल्स का पहला शो देखता
संतोष आनंद द कश्मीर फाइल्स को सच बताते हुए कहा, “मैं व्हील चेयर पर हूँ और थिएटर में शो देखने नहीं जा सकता। लेकिन हाँ मैं इसकी कल्पना अवश्य कर सकता हूँ। फिल्म अच्छी है, तभी चर्चित है। अगर मैं जा सकता तो इस फिल्म का पहला शो देखता मैं।”
गौरतलब है कि प्रख्यात गीतकार संतोष आनंद शोर, रोटी कपड़ा और मकान, क्रांति और प्रेम रोग समेत कई फिल्मों के लिए गीत लिख चुके हैं। वो फिल्मों के लिए 109 गीत लिख चुके हैं।
यूक्रेन के विरुद्ध कोई भी सामग्री प्रकाशित करके अब डिजिटली पैसा कमाना कठिन होगा। गूगल ने अपने हर प्रकाशक को शुक्रवार की देर रात एक संदेश भेजा है जिसमें उन्होंने बताया कि वे किसी भी ऐसे केंटेंट को मॉनेटाइज नहीं करेंगे जिसमें यूक्रेन हालातों के खिलाफ बात हो। ये फैसला गूगल की नई कंटेंट पॉलिसी का हिस्सा है जो 23 मार्च 2022 को अधिसूचित की गई है।
हाल में गूगल ने अपने हर प्रकाशक को इस नीति के संबंध में संदेश भेजा। उन्होंने बताया कि ये अपडेट स्पष्ट करने के लिए व प्रकाशकों के मार्गदर्शन का विस्तार करने के लिए है क्योंकि ये युद्ध से संबंधी है। उन्होंने जानकारी दी कि उन्होंने उन आर्टिकल्स पर कार्रवाई करनी शुरू कर दी है जो नीतियाँ का उल्लंघन करती हैं।
गूगल AD के जरिए कमाई और यूक्रेन से जुड़ी नई नीति
बता दें कि प्रकाशक, ब्लॉगर्स, न्यूज वेबसाइट, ऐप कंटेंट डेवलपर और अन्य समूह, अपने कंटेंट में गूगल ऐड लगाकर पैसा कमाते हैं। इसके अलावा वे गूगल ऐड मैनेजर टूल का प्रयोग करते हैं जहाँ वे उन विज्ञापनों को दिखाना चुन सकते हैं जो कि सीधे ग्राहकों से आते हैं बिना गूगल को बिचौलिया बनाए। मगर अब अब गूगल की नीतियाँ अपने विज्ञापनों के साथ-साथ ऐसे डायरेक्ट विज्ञापनों को भी प्रभावित कर सकती हैं।
आसान शब्दों में कहें तो गूगल ऐसी किसी सामग्री पर विज्ञापन नहीं चलने देगा जो युद्ध की निंदा उसमें शोषण या उसे खारिज करने वाली सामग्री पर बात करेंगे। इस प्रक्रिया को आर्टिकल का डिमॉनेटाइजेशन कहते हैं यानि की उस आर्टिकल की रीच से जितने पैसे प्रकाशक को आते थे वह आना बंद हो जाएँगे। एंटी यूक्रेन आर्टिकल लिख कर कोई प्रकाशक रेवेन्यू जेनेरेट नहीं कर सकेगा।
कोरोना को वुहान वायरस कहने पर गूगल ने लगाए थे ये प्रतिबंध
इससे पहले गूगल ने तब ऐसा किया था जब कुछ आर्टिकल्स में कोरोना वायरस को वुहान वायरस कहा जा रहा था और लैब लीक थ्योरी की चर्चा गरम थी। अब की, गूगल ने इस बात को साफ किया है कि ऐसे दावे कि यूक्रेन के पीड़ित सारी त्रासदी के लिए खुद जिम्मेदार हैं या फिर ऐसे ही उदाहरण जिसमें पीड़ितों पर इल्जाम मढ़ा जा रहा है कि यूक्रेन नरसंहार कर रहा है या फिर अपने ही नागरिकों पर हमला कर रहा है आदि पर कार्रवाई होगी।
गूगल ने भेजा ऑपइंडिया को संदेश
ऑपइंडिया को भी गूगल ने एक संदेश भेजा है। ये संदेश “Winning ‘hearts’ and PR war, but Ukraine has a “Nazi” problem that NATO and USA do not talk about”- इस आर्टिकल के लिए आया है जिसे गूगल ने डिमॉनेटाइज किया है। इस लेख में यूक्रेन के लोगों को दोषी नहीं ठहराया गया लेकिन इसमें कुछ असहज पहलुओं की चर्चा है जिसकी ओर कई लोग इशारा कर रहे थे। ये चर्चा नव नाजी तत्वों की उपस्थिति में यूक्रेन की स्थापना पर थी। आजोव बटालियन ऐसा ही एक तत्व है।
रूस की कार्रवाई
उल्लेखनीय है कि यूक्रेन में चल रहे युद्ध के बीच बड़ी तकनीकी और सोशल मीडिया कंपनियाँ अंतरराष्ट्रीय संघर्ष में अपना पक्ष रख रही हैं और खुद को सुपनेशनल संस्थाओं के रूप में पेश कर रही हैं। रूस ने पिछले कुछ समय में गूगल और फेसबुक दोनों पर अपनी ओर से कार्रवाई की है। पहले रूस ने मेटा को चरमपंथी संगठन बताया और फिर गलत सूचना फैलाने का आरोप लगाकर गूगल न्यूज पर भी प्रतिबंध लगा दिया।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (UP CM Yogi Adityanath) ने श्रीराम की नगरी अयोध्या (Ayodhya) के मंदिर, मठ और अन्य धार्मिक स्थलों से ली जाने वाली व्यवसायिक कर (Commercial Tax) पर रोक दिया है। स्थानीय नगर निगम को इनसे लाखों रुपए टैक्स के रूप में मिलते थे।
मुख्यमंत्री योगी ने राज्य के दोबारा मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार अयोध्या पहुँचे। इस दौरान मंडल की समीक्षा बैठक में उन्होंने यह आदेश दिया। दरअसल, अयोध्या के मंदिर एवं मठों के महंतों ने सीएम योगी से टैक्स से बाहर करने के लिए कई बार आग्रह किया था। इसके बाद सीएम योगी ने उन्हें आश्वस्त किया था।
Ayodhya | Uttar Pradesh CM Yogi Adityanath orders Nagar Nigam to stop the levying of tax on mutts, temples, and religious places. Now mutts, temples, and religious places need not pay commercial tax.
अयोध्या प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हनुमानगढ़ी मंदिर और श्रीराम जन्मभूमि में जाकर माथा टेका और रामनवमी के दौरान उत्सव की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को श्रीराम जन्मोत्सव को दिव्य और भव्य रूप से मनाने का निर्देश भी दिया। इस दौरान मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास, महंत कौशल किशोर सहित कई संतों ने उनसे मुलाकात की।
अयोध्या नगर निगम के महापौर ऋषिकेश उपाध्याय ने कहा, “आज मुख्यमंत्री जी ने सभी अधिकारियों को निर्देश दे दिया है कि मठ, मंदिर और धर्मशालाओं से चैरिटेबल के रूप में टैक्स लिया जाए, लेकिन कमर्शियल टैक्स ना लिया जाए। इससे संत बहुत खुश हैं। अयोध्या में 8 हजार मठ-मंदिर है और इनका टैक्स माफ करने संबंधित प्रस्ताव हम लोग सदन में जल्दी ही पास करेंगे।”
वहीं, हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को कोटि-कोटि धन्यवाद और आभार। उन्होंने कहा, “हमारे गुरुदेव ने कई बार मुख्यमंत्री से अयोध्या के मठों और मंदिरों का टैक्स माफ करने के लिए कहा था। पहले सालाना 250 रुपए से लेकर 300 रुपए तक का टैक्स लगता था, लेकिन नगर निगम बनने के बाद से मंदिरों में एक लाख से लेकर 3 लाख रुपए तक का टैक्स आता है।”
दरअसल, अयोध्या जिला बनने से पहले फैजाबाद नगरपालिका और अयोध्या नगरपालिका टैक्स का संचालन और सुविधाओं का ख्याल रखती थीं। फैजाबाद का नाम बदलकर अयोध्या जिला घोषित करने के बाद अयोध्या नगर निगम की भी घोषणा हुई थी। तब से टैक्स में बढ़ोत्तरी हो गई थी।
अष्टमी-नवमी को अयोध्या में VIP दर्शन नहीं
आम लोगों की भावनाओं को समझते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने VIP लोगों से कहा है कि वे नवरात्रि में अष्टमी एवं नवमी को मंदिरों में दर्शन करने के लिए नहीं जाएँ। अगर इस दौरान वे दर्शन के लिए जाते हैं तो उन्हें VIP सुविधा नहीं दी जाएगी और उन्हें आम दर्शनार्थी की तरह भगवान के दर्शन करने होंगे।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अगर कोई भी अधिकारी इस दौरान दर्शन के लिए आता है तो उसे विशेष सुविधा ना दी जाए। उन्होंने इस दौरान रामनवमी के दौरान VIP प्रोटोकॉल पर रोक लगाने की घोषणा की है।
मीडिया और सोशल मीडिया के तमाम प्लेटफॉर्म पर पिछले कुछ समय से कानपुर की एक खबर वायरल है। इस खबर में शकील नाम के एक व्यक्ति द्वारा भाजपा का झंडा लगाने पर पड़ोसियों द्वारा पीटे जाने का आरोप है। शकील ने अपने पड़ोसियों पर उनकी आँख निकालने और गर्दन काटने जैसी धमकी के आरोप लगाए हैं। कुछ मीडिया संस्थान इस पूरे मामले को कुशीनगर के बाबर अली की घटना से जोड़ कर देख रहे हैं।
1 अप्रैल 2022 (शुक्रवार) को आज तक द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट में बताया गया, “पढ़े-लिखे मुस्लिम युवक को बीजेपी का झंडा लगाने पर पड़ोसियों ने आँख फोड़ कर गर्दन काटने की धमकी ही नहीं दी बल्कि कई बार उसके साथ सरेआम मारपीट भी की गई। शकील एक मल्टीनेशनल कम्पनी में काम करता है। उसने FIR तो दर्ज करवा दी लेकिन अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।”
TV9 की रिपोर्ट के मुताबिक, “मामला किदवई नगर के जूही कॉलोनी का है। घटना 29 मार्च (मंगलवार) की है। इस केस में शाहनवाज, राशिद, रिज़वान और भल्लू नामजद हैं। पीड़ित शकील ने आरोपितों द्वारा खुद को लगातार धमकियाँ मिलने का भी आरोप लगाया है।”
इसी मामले में अमर उजाला की खबर के अनुसार, “शकील के घर पर लगा भाजपा का झंडा नोच कर फेंक दिया गया है। शकील अहमद का भाजपा समर्थक होने का दावा है। कुछ दिन पहले एक भाजपा विधायक ने उसको माला भी पहना दी थी। यह बात कइयों को अच्छी नहीं लगी। यही शकील की पिटाई की वजह बनी है।”
न्यूज़ 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, “शकील को धमकी मिली है कि मुसलमानों के साथ न चले तो आँखें निकाल कर सिर कलम कर दिया जाएगा। उसके घर में दहशत का माहौल है। शकील खुद को साल 2013 से ही भाजपा का समर्थक बताता है।”
इसी घटनाक्रम पर द क्विंट ने लिखा, “इस बार विधानसभा चुनाव में उसने अपने घर पर बीजेपी का झंडा लगाया जबकि बाकी पूरे मोहल्ले में कॉन्ग्रेस का झंडा लगा था। बीजेपी का झंडा लगाने पर पड़ोसी शहनवाज ने अपने घरवालों के साथ मिलकर उसकी जमकर पिटाई की। इसके बाद उसने किदवई नगर थाने में मामले की एफआईआर दर्ज कराई।”
भाजपा के मुताबिक शकील का पार्टी से कोई वास्ता नहीं
शकील के आरोपों पर भाजपा निराला नगर वार्ड 84 के अध्यक्ष अरविंद कुशवाहा ने पत्र जारी किया है। यह पत्र SHO किदवई नगर को सम्बोधित है। इस पत्र में लिखा गया है, “मेरे वार्ड 84 में रह रहे अब्दुल शकील का भाजपा से कोई रिश्ता न था और न ही अभी है।”
भाजपा का पुलिस को पत्र (साभार – कानपुर पुलिस)
किराएदारी से जुड़ा विवाद – शकील के पड़ोसी
कानपुर पुलिस द्वारा शेयर किए गए एक वीडियो में शकील के पड़ोसी राजेंद्र सिंह ने बताया, जूलरी की दुकान थी। उसको खाली करवाया गया। तब से मोहल्ले में थोड़ा विवाद चलने लगा। घटना के दिन दोनों पक्ष आपस में खींचातानी कर रहे थे। चूँकि मैं मोहल्ले का था इसलिए मैं खुद वहाँ पहुँचा और दोनों पक्षों को अलग किया। जब मैंने दोनों को अलग किया तब शकील के घर कोई झंडा नहीं टंगा था। मैंने दोनों पक्षों को दुबारा झगड़ा न करने और करने पर पुलिस बुला कर जेल भिजवाने की चेतावनी दी। उसके बाद कोई बात नहीं हुई। इसने (शकील) कब FIR करवाई, ये पता नहीं। इसमें मेरा भी नाम है, इसलिए मैं सामने आकर आपको बता रहा हूँ कि मेरे आगे कोई भी मारपीट जैसी घटना नहीं हुई थी। BJP का झंडा कल से लगा दिया गया है। मामला मकान का था, जिसमें सिर्फ खींचतान हुई थी। इसमें कोई घायल नहीं है और किसी को कोई नुकसान भी नहीं हुआ है।”
— POLICE COMMISSIONERATE KANPUR NAGAR (@kanpurnagarpol) April 1, 2022
न फैलाएँ भ्रामक सूचना: कानपुर पुलिस
कानपुर पुलिस ने इस झंडा विवाद में भ्रामक सूचना फैलाने से मना किया है। पुलिस के मुताबिक, “थाना किदवई नगर में मकान में झंडा लगाने के विवाद में सामने आए चश्मदीद पड़ोसी व वार्ड अध्यक्ष के बयानों ने घटना की मंशा जाहिर कर दी है। उचित कार्रवाई के लिए पुलिस जाँच कर रही है। कृपया भ्रामक सूचनाएँ न फैलाएँ।’
#POLICE_COMMISSIONERATE_KANPUR_NAGAR के थाना किदवई नगर में मकान में झंडा लगाने के विवाद में सामने आए चश्मदीद पड़ोसी व वार्ड अध्यक्ष के बयानों ने घटना की मंशा स्पस्ट कर दी है, उचित कार्रवाई के लिए पुलिस जांच कर रही है, कृपया भ्रामक सूचनाएं न फैलाएं। @News18P
— POLICE COMMISSIONERATE KANPUR NAGAR (@kanpurnagarpol) April 1, 2022
इंदौर में भी ऐसी ही घटना, पुलिस ने किया था खंडन
कानपुर जैसी ही घटना मध्य प्रदेश के इंदौर में भी हुई थी। यहाँ इसी साल मार्च के महीने में एमजी रोड थानाक्षेत्र के युसूफ ने अपने घर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फोटो लगाने पर शरीफ मंसूरी द्वारा खुद पर हमला किए जाने का आरोप लगाया था। पुलिस जाँच में युसूफ और शरीफ मंसूरी में किराएदारी का विवाद निकल कर सामने आया था।
युसूफ और शरीफ के बीच विवाद लम्बे समय से चल रहा था। इसमें खुद युसूफ ही पुलिस के आगे कई बार बुलाने के बाद भी पेश नहीं हुआ था। इस मामले में शरीफ मंसूरी ने युसूफ पर इस आरोप के बहाने सस्ती लोकप्रियता लेने का आरोप लगाया था।
आर्यन खान ड्रग्स केस में एक बड़ा ट्विस्ट आ गया है। इस मामले में एनसीबी (NCB) के अहम गवाह प्रभाकर सेल (Prabhakar Sail) की मौत हो गई है। मृतक के वकील तुषार खंडारे के मुताबिक मौत की वजह हार्ट अटैक कहा जा रहा है। यह घटना शुक्रवार (1 अप्रैल, 2022) शाम लगभग 4 बजे की है। प्रभाकर की मृत्यु मुंबई में चेंबूर के माहुल इलाके में उनके घर में हुई है।
Mumbai | NCB’s panch witness in Cordelia cruise drug case, Prabhakar Sail died yesterday. As per his lawyer Tushar Khandare, he died of a heart attack at his residence in Mahul area of Chembur yesterday.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दिल का दौरा पड़ने के बाद प्रभाकर को नजदीकी भगवती अस्पताल ले जाया गया। वहाँ उनकी मौत हो गई। बताया जा रहा है कि पुलिस अधिकारी इस मौत पर डॉक्टरों से बात करेंगे और मेडिकल रिपोर्ट को भी जाँचेंगे। परिवार के किसी सदस्य द्वारा किसी गड़बड़ी की आशंका से आपत्ति दर्ज करवाने पर उसका पोस्टमार्टम भी करवाया जाएगा।
#BREAKING | आर्यन खान केस के गवाह प्रभाकर सैल की हार्ट अटैक से मौत
NCP (राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी) के युवा मोर्चा अध्यक्ष सूरज चव्हाण ने प्रभाकर सेल की मौत की जाँच की माँग की है। एक वीडियो जारी करके उन्होंने मुंबई पुलिस को सम्बोधित करते हुए कहा, “मुंबई पुलिस जाँच करके प्रभाकर की मौत की असल वजह को सबके सामने लाए। वो एक बड़े केस में गवाह थे।”
— Jai Maharashtra News (@JaiMaharashtraN) April 2, 2022
बता दें कि प्रभाकर सेल ने शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान ड्रग्स केस में कई ऐसे सनसनीखेज खुलासे किए थे, जिसकी वजह से वो चर्चा में था। उसने एनसीबी के जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े पर भी रिश्वत लेने का गंभीर आरोप लगाया था। इसके बाद एनसीबी सवालों के घेरे में आ गई थी और समीर वानखेड़े को इस केस से भी हटना पड़ा था।
प्रभाकर सेल द्वारा दिए गए शपथ पत्र में NCB के जोनल डॉयरेक्टर समीर वानखेड़े पर कॉर्डेलिया क्रूज ड्रग केस के आरोपितों से 25 करोड़ रुपए रिश्वत माँगने के आरोप लगे थे। इस केस में शाहरुख़ खान के बेटे आर्यन खान भी आरोपित थे जिन्हे कुछ समय तक जेल में भी रहना पड़ा था। प्रभाकर सेल के पी गोसावी का अंगरक्षक था। वहीं के पी गोसावी की सेल्फी आर्यन खान के साथ वायरल हुई थी।
केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय (Housing and Urban Development Ministry) ने चाणक्यपुरी स्थित सरकारी बंगले को खाली करने के लिए कॉन्ग्रेस को नोटिस भेजा है। यह बंगला कॉन्ग्रेस को अलॉट किया गया था, लेकिन इसमें पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी के सचिव विंसेंट जॉर्ज अवैध रूप से रह रहे हैं।
मंत्रालय के तहत आने वाले संपदा निदेशालय (DEO) ने बताया कि दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित बंगला (नंबर C-ll/109) को कॉन्ग्रेस को अलॉट किया गया था और इसका बकाया 3.08 करोड़ रुपए हो गया है। निदेशालय का कहना है कि यह पैसा अभी तक जमा नहीं किया गया है। वहीं, पिछला भुगतान अगस्त 2013 में किया गया था।
DEO द्वारा 25 मार्च को कॉन्ग्रेस को भेजे गए नोटिस में कहा गया है, “आपने सार्वजनिक परिसर पर अनधिकृत कब्जा लिया है। आपको उक्त परिसर से बेदखल कर दिया जाना चाहिए… पत्र संख्या 7/259/94- द्वारा 26-06-2013 से आवंटन रद्द होने के बाद भी आप सार्वजनिक परिसरों पर कब्जा करना जारी रखे हुए हैं।”
नोटिस में सार्वजनिक परिसर अधिनियम 1971 की धारा 3 बी की उप-धारा (1) के तहत कारण बताओ नोटिस किया गया है। कारण बताओ नोटिस में पार्टी से पूछा गया है कि आखिर इस बंगले से बेदखली का आदेश क्यों न दिया जाए? अगर संतोषजनक कारण नहीं दिया गया तो निर्धारित समय के भीतर बेदखल की कार्रवाई की जाएगी।
इससे पहले फरवरी में केंद्र सरकार द्वारा कॉन्ग्रेस पार्टी को उसके कार्यालय, सोनिया गाँधी के आधिकारिक निवास और उनके सचिव के कब्जे वाली संपत्तियों के लंबित किराए का भुगतान करने के लिए नोटिस भेजा था।
बता दें साल 2014 साल में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनने के बाद से लंबे से अवैध कब्जा किए सरकारी बंगलों को खाली करवाने पर ध्यान दिया गया। एक रिपोर्ट के अनुसार, मोदी सरकार के पहले साल में 460 नेताओं के सरकारी बंगले को खाली करा लिया गया था।
उस दौरान कब्जाधारियों की आनाकानी को देखते हुए मोदी सरकार ने साल 2019 में बंगले खाली कराने के लिए एक कानून भी बनाया था। इस कानून में प्रावधान किया गया है कि अगर कोई बंगला समय पर खाली नहीं करता है तो उस पर 10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। इसके साथ ही नोटिस मिलने के तीन दिन के बाद आवास खाली कराने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
पाकिस्तान (Pakistan) में संघीय जाँच एजेंसी (FIA) ने चाइल्ड पोर्नोग्राफी (Child Pornography) का धंधा करने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है। एजेंसी की साइबर क्राइम सेल (Cyber Crime Cell) ने शुक्रवार (1 अप्रैल 2022) को बताया कि गिरोह के सदस्य बच्चों का यौन शोषण करते और उसका वीडियो डार्क वेब पर बेचकर पैसे कमाते थे। गिरोह के एक महिला सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि अन्य आरोपितों की तलाश जारी है।
FIA ने अपनी प्रारंभिक जाँच में पाया है कि इस गिरोह के सदस्यों ने कम-से-कम 10 बच्चों का यौन शोषण किया और उसका वीडियो बनाया और फिर उस वीडियो को बेचकर पैसे कमाए। ये संदिग्ध अपराधी पंजाब की राजधानी लाहौर के बाहरी इलाके के एक निजी हाउसिंग सोसाइटी में रहते थे और उन्हें पैसा तथा अन्य तरह का लालच देकर उनके साथ बलात्कार करते थे। इस दौरान पूरी घटना का वीडियो रिकॉर्डिंग करते थे।
पुलिस का यह भी कहना है कि इन अपराधियों ने पीड़ितों का ना सिर्फ लालच देकर यौन शोषण किया, बल्कि वीडियो के जरिए उन्हें ब्लैकमेल कर लगातार उनका यौन शोषण करते रहे और पैसे से वसूलते रहे। यदि कोई लड़का इसका विरोध करता तो वो वीडियो वायरल करने की धमकी देते थे। गिरोह ने ‘डार्क वेब’ पर वीडियो को बेचकर डॉलर में धन भी कमाया।
इस मामले में FIA को एक शिकायत मिली थी, जिसमें इस गिरोह द्वारा बच्चों के शोषण के बारे में बताया गया था। घटना की जानकारी मिलते ही संस्था के लाहौर स्थित साइबर विंग को सतर्क कर दिया गया था।
शिकायत करने वाले एक पीड़ित बच्चे के पिता ने इन संदिग्धों की पहचान अर्सलान अरशद और अम्माद शहजाद के रूप में की थी। ये दोनों एक निजी हाउसिंग सोसाइटी में रहते हैं। ये दोनों ने आसपास के बच्चों और किशोरों का यौन उत्पीड़न के लिए मनाने और उनका वीडियो बनाने के लिए एक गिरोह बनाया था।
शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि इन लोगों ने उसके बेटे को भी शिकार बनाया था। 15 फरवरी 2022 को आरोपितों ने पीड़ित बच्चे को उसके घर के ऊपरी हिस्से में ले जाकर उसका यौन शोषण किया और फिर उसका वीडियो भी रिकॉर्ड किया। उसके बाद अर्सलान ने उस वीडियो को व्हाट्सऐप के जरिए अपने दोस्त आबिद को भी भेजा।
पूछताछ में आबिद ने पुलिस को बताया कि अर्सलान, अम्माद, मोआज़म और तल्हा ने नाबालिग बच्चों को पैसे और कीमती उपहार का लालच देकर फँसाया और फिर उनका शोषण कर वीडियो बनाया। इन वीडियो को वे आस्मा नाम की एक महिला और कमर उर्फ डोडा नाम के उसके ड्राइवर को भेजते थे।
असम (Assam) के गोलपारा जिले में पुलिस ने शुक्रवार (1 अप्रैल) को एक मुठभेड़ में 3 डकैतों को मार गिराया है। मारे गए डकैतों के नाम शाहजहाँ, नजमुल और सुजल हैं। तीनों पेशेवर अपराधी बताए जा रहे हैं, जिनके खिलाफ अलग-अलग पुलिस थानों में कई मामले दर्ज हैं।
Three criminals killed in police encounter in Assam’s Goalpara district
Acting on a tip-off, we stopped a vehicle but they tried to run away and opened fire on us and were killed in action. There were many criminal cases registered against them: Goalpara SP Mrinal Deka (01.04) pic.twitter.com/sepNQq6HDz
इस मुठभेड़ की पुष्टि गोलपारा जिले के एडिशनल SP मृणाल डेका ने की है। उन्होंने बताया, “हमें अपराधियों के ट्रक में छिप कर भागने की सूचना मिली थी। हमने नाकाबंदी के दौरान उन्हें रोकना चाहा। उन्होंने घेराबंदी तोड़कर भागने की कोशिश की और साथ ही पुलिस बल पर गोलियॉं भी चलाईं। जवाबी कार्रवाई में तीनों अपराधी मारे गए। मारे गए तीनों अपराधी हत्या और अपहरण जैसे कई अपराधों में शामिल थे।”
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मुठभेड़ रात लगभग 8.30 बजे हुई है। घटनास्थल गोलपारा का अगिया का अलोक बाजार क्षेत्र है। जिस वाहन में तीनों संदिग्ध सवार थे, उसमें सुपारी लदी हुई थी। पुलिस ने संदिग्ध डकैतों के वाहन को रोकने के लिए टायरों में गोली मारी थी। मुठभेड़ में घायल तीनों संदिग्धों को गोलपारा के सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
कोकराझार जिले में भी मारा गया डाकुओं का एक सरदार
वहीं, एक दूसरी घटना में कोकराझार जिले में NLFB संगठन का एक पूर्व आतंकी पुलिस कस्टडी से भागने की कोशिश में मारा गया। संजुला नाम के इस अपराधी को पुलिस ने गुरुवार (31 मार्च) को गिरफ्तार किया था। वह लगभग 10 से 15 डाकुओं के गिरोह का सरदार बताया जा रहा है। पुलिस लूट का माल बरामद करने के लिए उसे अपने साथ लेकर उल्टापानी के जंगलों में गई थी। इस दौरान माल के साथ छिपाकर रखे रिवॉल्वर से उसने पुलिस पर गोलियाँ चलाईं और मौके से भागने की कोशिश की। जवाबी कार्रवाई में संजुला को भी गोली लगी। उसे स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसको मृत घोषित कर दिया गया। पुलिस ने उस सोना, 1 लाख रुपए कैश और 7.65 mm की पिस्टल और कारतूस बरामद किए हैं।
चीन (China) के ऋण के जाल में फँसकर श्रीलंका (Sri Lanka) कंगाली के कगार पर खड़ा हो गया है। महँगाई चरम पर पहुँच गई है, जिसके कारण लोगों द्वारा हिंसक प्रदर्शन किए जा रहे हैं। परिणाम यह हुआ कि सरकार को वहाँ आपातकाल (Emergency) की घोषणा करना पड़ा है। श्रीलंका के राष्ट्रपति गोताबाया राजपक्षे (Gotabaya Rajapaksa) की इस घोषणा के बाद पुलिस एवं सुरक्षाबलों को असीमित अधिकार मिल गए हैं।
देश में जारी आर्थिक संकट के कारण गुरुवार (31 मार्च 2022) को लोगों ने राष्ट्रपति आवास के बाहर जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया था। लोग इस हालात के लिए राजपक्षे को जिम्मेदार मानते हैं। प्रदर्शन के दौरान पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा था। इस दौरान 45 लोगों को गिरफ्तार भी किया था। इसके अलावा, अलग-अलग शहरों में कर्फ्यू लगाने की स्थिति आ गई है। लोगों के रोष को देखते हुए राष्ट्रपति ने शुक्रवार (1 अप्रैल 2022) को इसे लागू करने का निर्णय लिया।
श्रीलंका में खाद्यान्न और जरूरत की वस्तुओं की कीमतें आसमान छू रही हैं। बिजली की सप्लाई बंद कर दी गई है। लोगों को पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस नहीं मिल रही हैं। इस तरह खाने से लेकर परिवहन तक की व्यवस्था ठप पड़ गई है। इस कारण लोग सड़कों पर निकल आए हैं। लोगों के विरोध को दबाने के लिए पुलिस लाठी चार्ज कर रही है तो कहीं उन पर वॉटर कैनन का इस्तेमाल कर रही है। प्रदर्शनकारियों पर आँसू गैस के गोले भी छोड़े जा रहे हैं।
रिपोर्टों के अनुसार एक कप चाय की कीमत 100 रुपए हो गई है। दूध की कीमत 2,000 रुपए पर पहुँच गई है। मिर्च 700 रुपए किलोग्राम बिक रही है। एक किलो आलू के लिए 200 रुपए तक चुकाने पड़ रहे हैं। फ्यूल की कमी का असर बिजली उत्पादन पर भी पड़ा है। कई शहरों में 13 घंटे तक बिजली कटौती हो रही है। परीक्षा के लिए पेपर-इंक नहीं हैं।
हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि चीनी की कीमत 290 रुपए किलो तो चावल की कीमत 500 रुपए किलो हो चुकी है। एक पैकेट ब्रेड की कीमत 150 रुपए हो चुकी है। दूध का पाउडर 1,975 रुपए किलो, तो एलपीजी सिलेंडर का दाम 4,119 रुपए है। इसी तरह पेट्रोल 303 रुपए लीटर और डीजल 176 रुपए लीटर बिक रहा है। सभी वस्तुओं की कीमतें श्रीलंकाई रुपए में है। डॉलर के मुकाबले श्रीलंकाई रुपए की कीमत 46 फीसदी तक गिर गई है। एक मार्च को 1 अमेरिकी डॉलर की कीमत 295 श्रीलंकाई रुपए हो चुकी थी।
वहीं, लोगों की गुस्से और उनके हिंसक प्रदर्शन को वहाँ की राजपक्षे सरकार ने ‘आतंकी कृत्य’ बता दिया था और कहा था कि विपक्षी दलों से जुड़े ‘चरमपंथी तत्वों’ द्वारा ऐसी घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है। सरकार की विफलता को ढंकने के लिए वहाँ की सरकार विपक्षी दलों को जिम्मेवार ठहरा रही है।
राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे द्वारा पब्लिक इमरजेेंसी लगाने के बाद सरकार सार्वजनिक सुरक्षा, कानून-व्यवस्था, विद्रोह व दंगा और नागरिक आपूर्ति आदि के लिए नियम कठोर नियम बना सकती है। इमरजेंसी के दौरान राष्ट्रपति के आदेश के बाद किसी भी व्यक्ति की संपत्ति पर कब्जा की जा सकती है। किसी भी परिसर की तलाशी ली जा सकती है और किसी को भी बिना कारण बताए गिरफ्तार किया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर राष्ट्रपति किसी भी कानून को बदल या निलंबित भी कर सकता है।
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट (Andhra Pradesh ने मंदिर में भक्तों के अधिकार पर शुक्रवार (1 अप्रैल 2022) को बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि मंदिर के भक्तों को मंदिर के संचालन-व्यवस्था पर अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है। जस्टिस आर रघुनंदन राव की पीठ ने गुंटूर जिले में श्री महाकाली अम्मावरी मंदिर के प्रस्तावित पुनर्निर्माण के खिलाफ येल्लंती रेणुका द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की।
दरअसल, याचिकाकर्ता येल्लंती रेणुका ने दावा किया था कि उनकी माँ ने अपनी खाली पड़ी जमीन पर श्री महाकाली अम्मावरी मंदिर में देवता को स्थापित किया था। इस मंदिर को 1976 में वैदिक विद्वानों और पुरोहितों द्वारा प्रतिष्ठित किया गया था, जिन्होंने प्रासंगिक आगम शास्त्रों का पालन करते हुए संस्कार और अनुष्ठान किए थे। इसके बाद मंदिर को और विकसित किया गया।
याचिका में येल्लंती रेणुका ने इस बात पर जोर दिया कि इस मंदिर और देवता की स्थापना में उसकी माँ औ एक अन्य व्यक्ति का अहम योगदान है। ऐसे में उन्हें मंदिर का वंशानुगत ट्रस्टी माना जाना चाहिए।
कोर्ट का फैसला
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट के समक्ष येल्लंती रेणुका और दूसरे याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि वे लंबे समय से मंदिर के विभिन्न धार्मिक समारोहों और अन्य गतिविधियों में भाग लेते रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि इस दावे को नकारा नहीं जा सकता।
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि आंध्र प्रदेश चैरिटेबल हिंदू धार्मिक संस्थान और धर्मार्थ बंदोबस्ती अधिनियम 1987 की धारा 2(18)(बी) में कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति जो सेवा, दान या पूजा में हिस्सा लेने का हकदार है या उसे इसकी आदत है, संस्था से जुड़ा होगा, वह उससे ‘रुचि रखने वाला व्यक्ति’ होगा।
रुचि रखने वाले शब्द की व्याख्या करते हुए कोर्ट ने कहा, “रुचि रखने वाले शब्द का एक निश्चित अर्थ है। सिविल प्रोसीजर कोड की धारा 92 में इसका प्रावधान है कि कोई भी दो व्यक्ति जो रुचि रखते हैं, वो किसी भी धर्मार्थ या फिर धार्मिक प्रबंधन के कार्यों में अदालत के हस्तक्षेप की जरूरत होने पर कोर्ट जा सकते हैं।”
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने आगे कहा, “संहिता में रुचि रखने वाले व्यक्तियों को परिभाषित नहीं किया गया है, लेकिन एक मंदिर में इसके वास्तविक उपासकों को शामिल करने की व्याख्या अवश्य की गई है। उसी परिभाषा को आंध्र प्रदेश बंदोबस्ती अधिनियम में शामिल किया गया है। बंदोबस्ती एक्ट के तहत इस कैटेगरी में आने वाले लोगों को इसमें महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। धारा 43 (5) के तहत संबंधित बंदोबस्ती विभाग के सहायक आयुक्त को किसी भी संस्था के पंजीकरण पर निर्णय लेने से पहले ऐसे व्यक्तियों को सुनवाई का अवसर देना होगा।”
अदालत ने अपने फैसले में कहा, “तथ्यों से यह माना जा सकता है कि मंदिर के भक्तों को एक संस्था या मंदिर चलाने के तरीके में अपनी बात रखने का अधिकार है और यह नहीं कहा जा सकता है कि रुचि रखने वाले ऐसे व्यक्तियों अदालत में कुप्रबंधन या पूजा के तरीकों या आवश्यक धार्मिक प्रथाओं के उल्लंघन की शिकायतों को कोर्ट में आने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।”
क्या है मामला
ये विवाद उस वक्त शुरू हुआ जब मंदिर के प्रबंधन ने मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए कदम उठाते हुए बंदोबस्ती विभाग को इसकी जानकारी देकर काम शुरू कर दिया। इसके बाद येल्लंती रेणुका और मंदिर के दूसरे संस्थापक सदस्य ने इसका विरोध किया। बावजूद इसके मंदिर प्रबंधन ने विरोध को दरकिनार करते हुए मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए भक्तों से चंदा इकट्ठा करना शुरू कर दिया।
मामला बढ़ने पर येल्लंती रेणुका ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए कहा, “मंदिर के उक्त पुनर्गठन/पुनर्निर्माण की इजाजत नहीं दी जा सकती। ऐसा किया गया तो ये संविधान के 25 और 26 का उल्लंघन होगा।”
इस दावे पर मंदिर प्रबंधन के सदस्य प्रतिवादी ने दावा किया कि येल्लंती रेणुका मंदिर के संस्थापक परिवार की सदस्य नहीं, ये एक विवादित तथ्य है। ऐसे में रेणुका अपनी रिट याचिका को बनाए रखने की हकदार नहीं हैं।