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‘Nimbooz’ फ्रूट जूस है या नींबू-पानी? अब सुप्रीम कोर्ट करेगा फैसला, 7 साल से लंबित है मामला

अगर आप भी इस बात को लेकर संशय में हैं कि निंबूज (Nimbooz) नींबू पानी है या फ्रूट जूस? तो अब आपको ये सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) बताएगा। दरअसल सुप्रीम कोर्ट इस बात पर सुनवाई करने के लिए तैयार हो गया है कि लोकप्रिय सॉफ्ट ड्रिंक ‘निंबूज’ नींबू पानी है या फ्रूट पल्प या जूस बेस्ड ड्रिंक है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए जाने के बाद, इस प्रोडक्ट पर लगाए जाने वाले उत्पाद शुल्क (Excise Duty) की सही मात्रा निर्धारित होगी। 

ये याचिका ‘आराधना फूड्स’ नाम की एक कंपनी ने दायर की है जो चाहती है कि इस ड्रिंक को ‘फ्रूट पल्प या फ्रूट जूस बेस्ड ड्रिंक’ की वर्तमान स्थिति की बजाए नींबू पानी के रूप में वर्गीकृत किया जाए। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, याचिका पर जस्टिस एमआर शाह और बीवी नागरत्न की दो-न्यायाधीशों की पीठ सुनवाई करेगी। अदालत ने 11 मार्च को सुनवाई की घोषणा की थी। मामला मार्च 2015 से लंबित है और अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर ‘निंबूज’ पर फैसला होगा।

दरअसल इसमें सेंट्रल एक्साइज और आराधना फूड कंपनी के बीच उत्पाद शुल्क की श्रेणी को लेकर विवाद है। उत्पाद शुल्क विभाग का कहना था कि निंबूज को सेंट्रल एक्साइज एंड सर्विस टैक्स हैदराबाद यानी CETH 2022 के प्रावधान 90/20 के तहत फलों के पल्प और रस से बने पेय के तहत आना चाहिए जबकि अराधना फूड्स की दलील थी कि ये तो सिर्फ नींबू पानी है। इसे तो CETH 2022 के प्रावधान 10/20 के तहत सेंट्रल एक्साइज टैरिफ एक्ट 1985 के फर्स्ट शेड्यूल में होना चाहिए। 

आराधना फूड्स की दलील है कि उत्पाद शुल्क विभाग अप्रैल से दिसंबर 2013 में उनकी दलील मान भी चुका है लेकिन उसके बाद विभाग अपनी जिद पर अड़ गया। उत्पाद शुल्क विभाग ने ऐसे ही अन्य उत्पादों का हवाला देते हुए पेप्सिको के इस उत्पाद थम्स अप निंबूज को भी फलों के गूदे और रस से बने उत्पाद की श्रेणी में रखते हुए उसी मुताबिक जीएसटी लगाने की दलील दी तो निर्माता कंपनी ने कोर्ट का रुख किया। 

बता दें कि ‘निंबूज’ को 2013 में पेप्सिको द्वारा लॉन्च किया गया था और ड्रिंक को बगैर फिज के असली नींबू के रस से निर्मित कहा गया था। इससे इसके वर्गीकरण के संबंध में बहस छिड़ गई – क्या इसे नींबू पानी या फ्रूट जूस/ फ्रूट पल्प पर आधारित रस माना जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट में अप्रैल में याचिका पर सुनवाई होने की संभावना है।

‘RRR’ में लोगों को दिखी देशभक्ति के साथ-साथ रामायण की भी झलक, ‘बाहुबली’ वाले डायरेक्टर की नई फिल्म में Jr NTR और राम चरण हीरो

फिल्म निर्देशक एसएस राजामौली (SS Rajamauli) की बहुप्रतीक्षित ‘RRR’ सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। फिल्म में जूनियर एनटीआर (Jr NTR) और रामचरण तेजा (Ramcharan Teja) मुख्य भूमिका में हैं। फिल्म रिलीज होते ही पर्दे पर छा गई है। निर्देशक राजामौली का जादू लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा है। सोशल मीडिया पर इसको लेकर जबरदस्त प्रतिक्रिया मिल रही है।

फिल्म में अंग्रेजी शासनकाल को दिखाया गया है, जहाँ पहले रामचरण तेजा अंग्रेजी हुकूमत में एक पुलिस अधिकारी (रामराजू) की भूमिका में होते हैं। फिल्म में रामचरण तेजा पुलिस अधिकारी होने के कारण खुद को सम्मानित तो महसूस करते हैं, लेकिन उन्हें इस बात का दुख होता है कि ‘काला’ होने के कारण उसे अंग्रेजी हुकूमत वो सम्मान नहीं देती है, जिसका वह हकदार है। वहीं दूसरी ओर जूनियर एनटीआर एक गोंड आदिवासी की भूमिका में होते हैं, जो कि मल्ली नाम की एक लड़की को बचाने के लिए शहर आते हैं। हालाँकि बाद में रामचरण तेजा भी जूनियर एनटीआर के साथ मिलकर अंग्रेजी शासन के खिलाफ युद्ध छेड़ देते हैं।

इसके अलावा, फिल्म में अजय देवगन और आलिया भट्ट भी हैं। दोनों के किरदार छोटे, लेकिन बेहद महत्वपूर्ण हैं। रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि इसे हिंदी में भी डब किया गया है, जिसे हिंदी भाषी बेल्ट में काफी पसंद किया जा रहा है। बिहार में थिएटर्स हाउसफुल चल रहे हैं। इसके अलावा फिल्म के समीक्षक भी इसे अच्छी रेटिंग दे रहे हैं।

सोशल मीडिया पर लोग अब इसे रामायण से जोड़कर देखने लगे हैं। इससे पहले बाहुबली के दौरान राजामौली ने महाभारत की यादों को ताजा कर दिया था।

पाइरेसी का शिकार हुई RRR

बहरहाल फिल्म के लिए बुरी खबर यह है कि ये फिल्म भी पाइरेसी का शिकार हो गई है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इस RRR को ऑनलाइन लीक कर दिया गया है। इसे तमिलरॉकर्स जैसे प्लेटफॉर्म पर चलाया जा रहा है। हालाँकि, इससे पहले पुष्पा, अखंडा, वकील साब, भीमला नायक, श्याम सिंघा रॉय, बंगाराजू, डीजे टिल्लू, खिलाड़ी, राउडी बॉयज, गुड लक सखी, जान्हवी कपूर की रूही, मोहनलाल की दृश्यम 2, 2.0, अंग्रेजी मीडियम, भूत पार्ट वन द हॉन्टेड सहित फिल्में शिप, शुभ मंगल ज्यादा सावधान, लव आज कल और स्ट्रीट डांसर 3डी भी ऑनलाइन लीक हो चुकी हैं।

शौहर की सरकार बचाने के लिए जादू-टोना पर उतरीं इमरान खान की बीवी, पिंकी ‘पिरनी’ के पूर्वजों ने तुगलक के समय किया था धर्मांतरण: रिपोर्ट

पाकिस्तान में सत्ता बचाने की पुरजोर कोशिश कर रहे पाकिस्तान के वजीरे आजम इमरान खान (Imran Khan) की रहस्यमयी बीवी बुशरा बीबी और उनका जादू टोना एक बार फिर चर्चा में आ गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 41 साल की बुशरा बीबी राजस्थान के जैसलमेर जिले के संस्थापक हिंदू राजा जैसल की वंशज हैं। इमरान खान की तीसरी बीवी बुशरा (Bushra Bibi or Bushra Riaz) मूल रूप से पाकिस्तान के दक्षिणी पंजाब से हैं और वह मशहूर वट्टू कबीले (Wattoo Clan) से आती हैं।

वट्टू सतलुज घाटी की प्रमुख राजपूत जनजातियों में से एक हैं, जो भाटी राजपूतों के करीबी माने जाते हैं। बताया जाता है कि इसके सदस्यों को बाबा फरीदुद्दीन ने इस्लाम में परिवर्तित कर दिया था। रिपोर्टों के अनुसार, 14 वीं शताब्दी में फिरोज शाह तुगलक के शासनकाल के दौरान धर्मांतरण हुआ था। दिलचस्प बात यह है कि बहावलपुर में वट्टू कबीले जैसलमेर के संस्थापक राजा जैसल के वंश के 8वें वंशज होने का दावा करते हैं। बाबा फरीदुद्दीन और उनकी शिक्षाओं में इमरान खान की दिलचस्पी ही उन्हें बुशरा तक ले गई।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान में ऐसी अफवाह है कि बुशरा बीबी के पास रहस्यमयी शक्तियाँ हैं। पाकिस्तान के नेता प्रतिपक्ष और प्रधानमंत्री पद के दावेदार शाहबाज शरीफ ने दावा किया है कि इमरान खान के घर बनिगाला में जादू टोना के लिए कई टन मांस जलाया जा रहा है। शाहबाज इस दौरान बुशरा बीबी का जिक्र कर रहे थे, जो खुद को उनका सच्चा दोस्त बताती हैं। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के भाई और पीएमएलएन नेता शाहबाज शरीफ ने एक निजी टीवी चैनल से बातचीत में कहा कि लोग खाने के लिए मर रहे हैं, बच्चे दूध के लिए तरस रहे हैं, लेकिन बनिगला में जादू टोने के लिए चिकन जलाया जा रहा है। उन्होंने कहा, “मैं यह पूरे दावे के साथ कह रहा हूँ।” इसके बाद भी प्रधानमंत्री रियासत-ए-मदीना को लेकर बयान दे रहे हैं। शाहबाज ने इमरान खान से किसी भी तरह की बातचीत से इनकार कर दिया है।

उन पर (बुशरा बीबी) अक्सर जादू टोना करने का आरोप लगाया जाता रहा है। बुशरा को पाकिस्तान में पिंकी ‘पिरनी’ (पवित्र महिला) या पिंकी बीबी के नाम से भी जाना जाता है। ऐसी खबरें थीं कि बुशरा ने एक सपना देखा था, जिसमें पैगंबर मुहम्मद ने उसे अपने जीवन और देश की बेहतरी के लिए इमरान खान से निकाह करने के लिए कहा था।

रिपोर्ट्स की माने तो बुशरा की छवि एक तंत्र-मंत्र और जादू टोना करने वाली शख्सियत के रूप में भी बताई जाती रही है। पाकिस्तान में बुशरा बीबी पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि वह इमरान खान की कुर्सी बचाने के लिए खूनी जादू टोना कर रही हैं। इससे पहले भी वैनिटी फेयर की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि एक बार बुशरा बीबी ने भविष्यवाणी थी कि जिन्नों को पका हुआ माँस खिलाना इमरान खान के प्रधानमंत्री बनने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसके लिए उन्हें उपयुक्त महिला से शादी करनी होगी। प्रधानमंत्री का पद सँभालने के 6 महीने खान ने 2018 में लाहौर में एक सादे समारोह में बुशरा बीबी से निकाह कर लिया था।

वहीं बीते दिनों पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की तीसरी बीवी बुशरा के साथ खटपट होने की खबरें भी आई थीं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इमरान खान का इस्लामाबाद वाला घर छोड़कर बुशरा लाहौर चली गई थीं। इससे पहले भी बुशरा को लेकर मीडिया में अक्सर अजीबोगरीब दावें वाली खबर भी आ चुकी हैं। ऐसी रिपोर्टों में उनके लिए दावा किया गया था कि वे जिन्नों को गोश्त खिलाती हैं और उनका चेहरा आईने में नहीं दिखता है। बाद में कैपिटल टीवी ने इसे फेक न्यूज़ करार दिया था।

लखनऊ विश्वविद्यालय से लेकर उप-मुख्यमंत्री तक: जानिए कौन हैं ब्रजेश पाठक, विकास दुबे के खिलाफ खुल कर सामने आए थे

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में भारी जीत के बाद शुक्रवार (25 मार्च) को भाजपा नेताओं ने पद और गोपनीयता की शपथ ली। इन सबके बीच जो सबसे बड़ा उलटफेर दिखा, वह है उप-मुख्यमंत्री के रूप में ब्रजेश पाठक का शपथ। पाठक योगी सरकार में विधायी, न्याय एवं ग्रामीण अभियंत्रण सेवा में मंत्री रह चुके हैं। इस बार दिनेश शर्मा की जगह उन्हें उप-मुख्यमंत्री बनाया गया है।

साल 2014 के मोदी लहर में हारने के बाद राजनीतिक हवा का रूख भाँपते हुए ब्रजेश पाठक बहुजन समाज पार्टी (BSP) छोड़कर साल 2016 में भाजपा में शामिल हो गए। साल 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत के बाद बनी सरकार में तेजतर्रार नेता पाठक को कैबिनेट मंत्री बनाया गया था।

ब्रजेश पाठक ब्राह्मणों के मुद्दे को उठाते रहे हैं। जब माफिया सरगना विकास दुबे का एनकाउंटर हुआ तब दुबे के समर्थन में लामबंद लोगों ने सीएम योगी को ब्राह्मण विरोधी बताना शुरू कर दिया था। उस समय ब्रजेश पाठक मजबूती के साथ मुख्यमंत्री के साथ खड़े नजर आए थे और विकास दुबे को खूंखार अपराधी बताया था। माना जाता है तब से वह सीएम योगी के करीबी बन गए थे।

ब्रजेश पाठक का जन्म उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के मल्लावां में 25 जून 1964 को हुआ था। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से कानून में स्नातक (LL.B) की डिग्री हासिल की है और पेशे से वकील हैं। साल 1989 में उन्होंने छात्र राजनीति में प्रवेश किया था और 1990 में लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र संघ के अध्यक्ष बने थे।

छात्र राजनीति के बाद पाठक ने मुख्यधारा की राजनीति की शुरुआत की। साल 1992 में वह कॉन्ग्रेस में शामिल हो गए और 2002 के विधानसभा चुनाव में मल्लावां विधानसभा सीट से उतरे, लेकिन चुनाव हार गए। इसके बाद उन्होंने 2004 में कॉन्ग्रेस छोड़कर बहुजन समाज पार्टी (BSP) का दामन थाम लिया।

बसपा ने साल 2004 के लोकसभा चुनावों में उन्हें उन्नाव सीट से मैदान में उतारा और वह चुनाव जीत गए। साल 2009 में पार्टी ने उन्हें राज्यसभा भेज दिया और वे सदन में पार्टी के मुख्य सचेतक बन गए। साल 2014 में वह उन्नाव लोकसभा सीट से बसपा टिकट पर लड़े, लेकिन हार गए।

लोकसभा सीट हारने के बाद पाठक 2016 में भाजपा में शामिल हो गए और 2017 के विधानसभा चुनावों में लखनऊ मध्य से चुनाव लड़े और जीत हासिल की। उसके बाद वह सीएम योगी के मंत्रिमंडल में शामिल हो गए। इस बार वह लखनऊ कैंट से जीत हासिल की है। बता दें कि इसी सीट के लिए रीता बहुगुणा जोशी अपने बेटे के लिए टिकट माँग रही थीं, लेकिन भाजपा नेतृत्व ने पाठक पर विश्वास जताया।

अगर उनकी पत्नी की बात करें तो नम्रता पाठक मायावती की सरकार में उत्तर प्रदेश महिला आयोग की उपाध्यक्ष रह चुकी हैं। साल 2012 के विधानसभा चुनावों में बसपा ने नम्रता को उन्नाव सदर सीट से अपना उम्मीदवार बनाया था, लेकिन वह चुनाव जीत नहीं पाईं।

छत्तीसगढ़ में नोटिस के बाद मंदिर से शिवलिंग उखाड़ कर कोर्ट में किया गया पेश: भगवान शिव पर जुर्माना, अवैध कब्जे के भी आरोप

भगवान शिव को छत्तीसगढ़ के राजस्व अधिकारियों द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद शिवलिंग सहित तहसील कोर्ट में पेश किया गया है। रायगढ़ जिले के अधिकारियों के मुताबिक, भगवान शिव ने जमीन पर अवैध कब्ज़ा किया है। नोटिस में हाजिर न होने की दशा में उन पर 10,000 रुपए जुर्माना भी लगाने की तैयारी थी। स्थानीय ग्रामीणों ने मजबूर हो कर शिवलिंग को उखाड़ कर कोर्ट में पेश किया। यहाँ पर तहसीलदार न होने के चलते कोर्ट ने अगली तारीख दे दी है। यह घटना 25 मार्च, 2022 (शुक्रवार) की है।

इस वीडियो में एक स्थानीय महिला को कहते सुना जा सकता है, “हम सभी आज तहसील कार्यालय आए है, जितने लोगों को नोटिस मिला है। इसी में हमारे शिव मंदिर को भी नोटिस मिला था। आज हमारी पेशी थी। शिव मंदिर में तो भगवान ही रहते हैं। उनकी पूरे गाँव के लोग पूजा करते हैं। भगवान जी पेशी में आए हैं। वही साहब से बात भी करेंगे। उनको 10,000 का जुर्माना भी लगा है। वो 10,000 भरना भी है और खाली भी करना है। भगवान ही तहसीलदार से सवाल करेंगे कि मुझे कारण बताओ नोटिस क्यों मिला। अब भगवान ही पूछेंगे कि पैसा कब भरना है और खाली कब करना है। अभी तक मुझ से कोई नहीं मिला है। मैं रायगढ़ वासियों को भी संदेश देना चाहूँगी कि अगर यही नोटिस मस्जिद में जाता तो आज मुस्लिम रायगढ़ बंद कर देते। मेरे साथ हिन्दू यहाँ खड़े हैं। हमारे भगवान का अपमान हुआ है। इसका फैसला क्या करते है आप सब बताइए।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह नोटिस अतिक्रमण के खिलाफ हाईकोर्ट में डाली गई एक याचिका के बाद जारी हुआ। 14 फरवरी, 2022 को हाईकोर्ट ने स्थानीय नगर पालिका को अवैध अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था। रायगढ़ की तहसील अदालत ने एक टीम का गठन कर के कौहाकुंडा गांव में शिकायतों की जाँच करवाई। इस दौरान सीमांकन दल नाम की उस टीम ने 10 स्थानों को चिह्नित किया। इस रिपोर्ट के आधार पर तहसील कोर्ट ने उन सभी 10 जगहों पर किसी भी नए निर्माण पर रोक लगा दी। साथ ही उन जमीनों से संबंधित सभी 10 लोगों को नोटिस जारी कर के कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया गया। इसका पालन न करने वालों को 10 हजार रुपए जुर्माना और जमीन से बेदखली होना बताया गया।

नोटिस, (चित्र साभार – दैनिक भास्कर)

रायगढ़ तहसील कोर्ट द्वारा जिन 10 लोगों को नोटिस जारी हुई थी उसमें एक कोहाकुंडा के वार्ड 25 का शिव मंदिर भी था। शिव मंदिर में कोई पुजारी नहीं था। यह नोटिस सीधे मंदिर को ही जारी कर दी गई थी। न्यायालय द्वारा दी गई समयसीमा को देखते हुए स्थानीय लोगों ने शिवलिंग को ही उखाड़ लिया और उसे वाहन से लाद कर अदालत पहुँच गए।

उस समय कोर्ट के बाहर पीठासीन अधिकारियों के व्यस्त होने का नोटिस लगा था। इस केस की अगली सुनवाई 13 अप्रैल तय कर दी गई। वही इस मामले में तहसीलदार गगन शर्मा के मुताबिक, “मुझे नोटिस की जानकारी नहीं है। नोटिस को जारी करने वाले अधिकारी नायब तहसीलदार हैं। अगर नोटिस में कोई कमी है तो उसको दूर किया जाएगा।”

झारखंड में 61 वनवासी परिवारों ने की ‘घर वापसी’, मिशनरियों के चंगुल में फँस बन गए थे ईसाई: VHP चला रही है अभियान

झारखंड में मिशनरियों के धर्मांतरण का खेल काफी जोर-शोर से जारी है। बताया जा रहा है कि ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में भोले-भाले आदिवासी परिवारों को बहला-फुसलाकर उनका धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है। यह तब हो रहा है जब‌ राज्य में धर्मांतरण कानून लागू है। इसके बावजूद इस कानून का खुलेआम मखौल बनाया जा रहा है। ‌

जानकारी के मुताबिक, साहिबगंज जिले ईसाई मिशनरी (Christian Community) के प्रतिनिधियों द्वारा लोगों को बहला-फुसलाकर, ब्रेनवाश व जोर-जबर्दस्ती कर धर्म परिवर्तन करवाया जा रहा है। उन्हें धन का प्रलोभन दिया जाता है। ईसाई मिशनरी लगातार प्रलोभन और सुविधाओं का लालच देते हैं। इस जाल में फँसकर कई परिवार धर्मांतरण कर चुके हैं।

हालाँकि उनके ‘घर वापसी’ का सिलसिला भी जारी है। गुरुवार (25 मार्च, 2022) को साहिबगंज जिले के वनवासी समाज के 61 परिवारों के सैंकड़ों लोगों ने घर वापसी की। ‘विश्व हिन्दू परिषद’ के विभाग प्रमुख कालीचरण मंडल ने इनकी पूरे रीति-रिवाज के साथ घर वापसी की प्रक्रिया पूरी करवाई।

दरअसल, कालीचरण ने जिले के बरहेट प्रखंड के 5 गाँवों में घर वापसी का कार्यक्रम चलाया था। इसका नेतृत्व विश्व हिन्दू परिषद् के विभाग प्रमुख कालीचरण मंडल ने क्षेत्रीय प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा कर रहे हैं। उनका मकसद धोखे से अपने धर्म से अलग हुए लोगों को घर वापसी करवाना है। इसके लिए ‘विश्व हिंदू परिषद’ ने मोर्चा खोल रखा है। जिसे भर में उनके कार्यकर्ता सक्रिय हैं। इस तरह की किसी भी घटना की सूचना मिलते ही वह मौके पर पहुँच जाते हैं और आदिवासी, पहाड़िया जाति के लोगों, दलित समाज तथा गरीबों को ईसाई मिशनरियों के चंगुल में फँसने से बचा लेते हैं।

गौरतलब है कि हाल ही में झारखंड में 181 आदिवासियों के वापस ईसाई से हिन्दू बनने की खबर आई थी। गढ़वा जिले के विश्रामपुर गोरैयाबखार गाँव के 18 परिवार के 104, खूँटी टोला करचाली गाँव के 7 परिवार के 42 और महंगई गाँव के 8 परिवार के 35 सदस्यों ने घर वापसी की थी। इस दौरान उन्होंने वापस अपने समुदाय व धर्म में वापसी पर ख़ुशी जताते हुए बताया था कि उनके पूर्वजों को प्रलोभन देकर ईसाई बनाया गया था। इसी तरह पश्चिमी सिंहभूम जिले के मझगाँव थाना क्षेत्र के तेतरिया पंचायत के सिरासाई मंगापाट गाँव के 3 परिवारों के 14 सदस्य ईसाई धर्म में परिवर्तित हो गए थे। इनमें से 9 लोगों ने घर वापसी कर ली।

कानून बनने के बाद मध्य प्रदेश में ‘लव जिहाद’ के 67 मामले सामने आए, 109 आरोपित: अकेले खंडवा-इंदौर में ऐसी 24 घटनाएँ

मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर और खंडवा में लव जेहाद की सबसे अधिक घटनाएँ दर्ज की गई हैं। छोटे शहरों में आदिवासी महिलाएँ सबसे अधिक लव जेहाद की शिकार हुई हैं, जिनमें नाबालिग लड़कियाँ भी शामिल है। आठवीं-दसवीं तक पढ़ी हुई ये नाबालिग लड़कियाँ सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय थीं। वहीं, भोपाल और इंदौर जैसे बड़े शहरों में पढ़ने वाली कॉलेज की छात्राएँ और कामकाजी महिलाएँ भी लव जेहाद शिकार हुई हैं।

पीड़ित महिलाओं का कहना है कि मुस्लिम पुरुषों ने उनसे हिंदू बनकर सोशल मीडिया पर दोस्ती की। इसके बाद उन्हें अपने जाल में फँसाकर शादी करने का झाँसा दिया और जब वे उनके झाँसे में आ गईं, तो उन्होंने धर्म परिवर्तन (Religion Conversion) कर इस्लाम कबूल करने की शर्त रखी। मुस्लिम पुरुषों की सच्चाई का पता चलने के बाद महिलाओं ने तुरंत पुलिस से संपर्क किया।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘धर्म की स्वतंत्रता अधिनियम’ पारित होने के एक साल बाद मध्य प्रदेश में ‘लव जिहाद’ के कुल 67 मामले सामने आए हैं। इनमें से 24 घटनाओं को इसी साल जनवरी में दर्ज किया गया था और पुलिस ने उनमें से 36 में आरोप पत्र दायर किया, जबकि 29 अभी भी जाँच के दायरे में हैं। इन घटनाओं में पुलिस ने 109 लोगों को आरोपित किया है। राज्य में सबसे ज्यादा 13 मामले इंदौर में दर्ज किए गए हैं, जबकि खंडवा में 11 मामले हैं। वहीं, भोपाल तीसरे स्थान पर है, जहाँ 9 लड़कियों से को ठगा गया। भोपाल-इंदौर पुलिस द्वारा जारी किए गए आँकडों के मुताबिक, सामने आए लव जेहाद के मामलों में 50 प्रतिशत सामान्य वर्ग की युवतियाँ शामिल हैं।

इंदौर के पुलिस कमिश्नर हरिनारायणचारी मिश्र ने बताया, “जब से अधिनियम बना है, तब से शहर में करीब 13 अपराध दर्ज हुए हैं। इन सभी मामलों में लड़कियों ने बताया था कि उन पर धर्म परिवर्तन करने का दबाब बनाया गया था। बयान के सत्यापन के बाद ही केस दर्ज किए गए हैं। वहीं, खंडवा के एसपी विवेक सिंह का कहना है, “पीड़िता के बयान के आधार पर ही केस दर्ज किया जाता है। यदि, वह अपने बयान में जिक्र करती है कि दबाव बनाकर धर्म परिवर्तन करवाया जा रहा था तो फिर धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत केस दर्ज कर जाँच की जाती है। इस अधिनियम के अधीन दर्ज अपराध की जाँच एसआई या आला अधिकारियों द्वारा होती है।”

इसके अलावा प्रदेश के आदिम जाति मंत्रणा परिषद के सदस्य व पंधाना विधायक राम दांगोरे ने इन मामलों की पुष्टि करते हुए बताया कि मुसलमान लड़के आदिवासी युवतियों को ज्यादा टारगेट कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि 15 ऐसे मामले हैं, जिनमें मुस्लिम लड़कों ने आदिवासी युवतियों से निकाह किया और उनके नाम पर जमीन, सरकारी योजनाओं का लाभ ले रहे हैं।

बता दें कि मध्य प्रदेश विधानसभा में ‘मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक-2021’ सोमवार (मार्च 8, 2021) को पारित किया गया था। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की स्वीकृति मिलने के बाद मध्यप्रदेश राजपत्र (असाधारण) में यह अधिनियम 27 मार्च 2021 को प्रकाशित हो गया है। अधिनियम में शादी तथा किसी अन्य कपटपूर्ण तरीके से किए गए धर्मांतरण के मामले में अधिकतम 10 साल की कैद एवं 1 लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

कानून के अनुसार, ‘‘जबरन, भयपूर्वक, डरा-धमका कर, प्रलोभन देकर, बहला-फुसलाकर धर्म परिवर्तन कर विवाह करने और करवाने वाले व्यक्ति, संस्था अथवा स्वयंसेवी संस्था के खिलाफ शिकायत प्राप्त होते ही संबंधित प्रावधानों के मुताबिक आरोपितों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। धर्मांतरण और इसके पश्चात होने वाले विवाह के 1 महीने पहले जिलाधीश के पास लिखित में आवेदन करना होगा। राज्य सरकार के इस कानून का उल्लंघन करने वाली किसी भी शादी को शून्य माना जाएगा।’’

‘सेक्स का मन करेगा तो किसी लड़की से पूछूँगा ही’: मलयाली ऐक्टर ने कहा- क्या है MeToo, पहली बार पत्नी से ही सेक्स जरूरी नहीं

तमिल और मलयालम फिल्म के एक्टर और म्यूजिक कम्पोजर विनायकन (Vinayakan) मीटू (Me Too) पर विवादित बयान देकर इन दिनों सुर्खियों में हैं। दरअसल, विनायकन ने अपनी मलयाली फिल्म ओरुथी (Oruthee) के प्रमोशन के दौरान मीडियाकर्मियों से कहा, “उन्हें मीटू के बारे में कुछ भी नहीं पता है। अगर महिलाओं से सेक्स के लिए पूछना मीटू है तो वह ऐसा करते रहेंगे।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक, विनायकन ने कहा था, “मीटू क्या है? मैं नहीं जानता। इसलिए मैं आपसे पूछ रहा हूँ। अगर मैं किसी लड़की से सेक्स करना चाहूँ तो उससे क्या कहूँ? मैंने अपनी लाइफ में कम से कम 10 महिलाओं के साथ फिजिकल रिलेशन बनाए हैं। मैंने उन सभी से पूछा था कि क्या वो मेरे साथ संबंध बनाना चाहेंगी? मैं फिर पूछना चाहता हूँ कि क्या आप इसे मीटू कहते हैं।” इसके बाद उन्होंने पूछा कि क्या आपने सबसे पहले अपनी पत्नी के साथ सेक्स किया था? हर कोई ऐसा नहीं होता।

उन्होंने आगे कहा, “अगर उस महिला के साथ फिर सेक्स करने का मन करेगा तो मैं उससे पूछूँगा। वह ना कहेगी। लेकिन कोई महिला मेरे पास नहीं आई और कहा कि तुम जानते हो उस महिला की क्या धारणा है?”

प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक्टर ने जब यह विवादित बयान दिया, उस वक्त उनके साथ फिल्म की एक्ट्रेस नव्या नैय्यर भी मौजूद थीं। वह Oruthee से एक्टिंग में कमबैक कर रही हैं। उनसे (नव्या नैय्यर) लाइव सेशन के दौरान किसी फॉलोअर ने पूछा कि विनायकन ने जब ऐसा बोला तो वह चुप क्यों रहीं? इस पर उन्होंने कहा कि वह उस वक्त ऐसी कंडीशन में नहीं थीं कि कोई भी जवाब दे पाएँ।

बता दें कि मलयाली एक्टर विनायकन को वर्ष 2019 में गिरफ्तार किया गया था। उन पर दलित कार्यकर्ता मृदुलादेवी ने आरोप लगाया था कि विनायकन ने उनसे साथ में सोने के लिए पूछा। उस वक्त वह उन्हें एक कार्यक्रम के लिए इनवाइट करने गई थीं। सोशल मीडिया पर मृदुला को काफी सपोर्ट मिला था। इसके बाद कुछ और महिलाओं ने सोशल मीडिया पर लिखा था कि विनायकन उन पर भी भद्दे कमेंट्स कर चुके हैं।

योगी आदित्यनाथ ने दोबारा ली CM पद की शपथ: केशव मौर्य और ब्रजेश पाठक बने उप-मुख्यमंत्री, कुल 52 मंत्री

योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार (25 मार्च 2022) को दूसरी बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। राज्य में 37 साल बाद किसी पार्टी को लगातार दूसरी बार बहुमत मिला है। केशव प्रसाद मौर्य विधानसभा चुनाव हारने के बावजूद फिर से डिप्टी सीएम बनाए गए हैं। उनके साथ ही ब्रजेश पाठक भी उप मुख्यमंत्री बनाए गए हैं। गुरुवार (24 मार्च, 2022) को योगी आदित्यनाथ ने सर्वसम्मति से विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद राज्यपाल आनंदी बेन पटेल के सामने सरकार बनाने का दावा पेश किया था। देर शाम उन्होंने प्रदेश में बनाए जाने वाले मंत्रियों की लिस्ट राज्यपाल आनंदी बेन पटेल को सौंपी थी।

योगी के विधायक दल के नेता चुने जाने पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और रघुवर दास भी मौजूद रहे। इस दौरान अमित शाह ने कहा, “जनता ने योगी को फिर से मुख्यमंत्री बनाया। हमने तो बस आज नेता चुना है। उन्होंने कहा कि हमने आज एक बार फिर से उन्हें दल नेता जरूर चुना है परंतु प्रधानमंत्री मोदी ने चुनाव की प्रक्रिया की शुरुआत में ही कह दिया था कि हम उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में एक बार फिर से सुशासन की सरकार बनाने जा रहे हैं।” नई कैबिनेट में कुल 52 मंत्री हैं।

बता दें कि सीएम योगी आदित्यनाथ के शपथ ग्रहण से पहले यूपी की राजधानी लखनऊ में बड़े पैमाने पर पोस्टर-होर्डिंग लगाए गए। कई जगहों पर सीएम योगी के बड़े-बड़े कट-आउट भी लगे।

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश में करीब 37 साल बाद योगी आदित्‍यनाथ ने मुख्‍यमंत्री के रूप में वापसी किया। यूपी में 37 साल में कोई सीएम दोबारा नहीं बना। उत्तर प्रदेश में 2017 के विधानसभा चुनाव में जब बीजेपी ने जीत हासिल की तो, पार्टी ने योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाया। पाँच बार के लोकसभा सांसद को भाजपा नेतृत्व ने सबसे बड़े राज्य में महत्वपूर्ण भूमिका के लिए चुना था। 

गोरखपुर से पाँच बार सांसद रहे योगी आदित्यनाथ राज्य के हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनाव में गोरखपुर (सदर) सीट से पहली बार निर्वाचित हुए हैं। 2017 में, मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ 8 सितंबर को राज्य विधान परिषद के लिए चुने गए। 

बता दें कि उत्तर प्रदेश विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी ने योगी आदित्यनाथ के चेहरे पर चुनाव लड़ा था। विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 273 सीटों पर जीत मिली है। वहीं, सपा गठबंधन ने 125 सीटों पर जीत हासिल की है। कॉन्ग्रेस 2 और बसपा 1 सीट जीतने में सफल हो सकी।

‘तलाक नहीं दिया तो नंगी होकर सड़क पर निकल जाऊँगी’: बीवी की धमकी के बाद राजी हुआ शौहर, सऊदी अरब का मामला

सऊदी अरब से तलाक का एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। एक महिला ने शौहर को धमकी देते हुए कहा कि यदि उसने तलाक न दिया तो वह नंगी होकर सड़क पर निकल जाएगी। आखिरकार शौहर को घुटने टेकने पड़े और दोनों का तलाक हो गया।

गल्फ न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार बीवी की धमकी के बाद शौहर के पास उसकी बात मानने के अलावा कोई चारा नहीं रह गया था। हालाँकि तलाक के बाद भी शौहर शरिया अदालत गया। वहाँ उसने तलाक को अपनी मर्जी के खिलाफ बताते हुए रद्द करने की माँग की। लेकिन शरिया कोर्ट ने शौहर की दलीलों को अनसुना कर दिया। कोर्ट के मुताबिक तलाक के लिए शरिया कानून के तहत सभी औपचारिकता पूरी हो चुकी थी।

इसी सप्ताह सऊदी अरब में ही एक अन्य केस में एक शौहर ने अपनी बीवी को इसलिए तलाक दे दिया था क्योंकि वो निकाह से पहले सिगरेट पीती थी। अपने वकील के माध्यम से पीड़िता ने बताया था कि निकाह के बाद उसने सिगरेट पीना छोड़ दिया था। इसके बाद भी उसके शौहर ने यह कह कर तलाक ले लिया था कि क्या गारंटी ये भविष्य में सिगरेट नहीं पिएगी। इस मामले में कोर्ट ने महिला को पति से पहले लिए गए रुपए लौटाने का भी आदेश दिया था। इसी तरह एक अन्य मामले में सऊदी अरब में शौहर ने निकाह के तीन महीने बाद ही बीवी को तलाक ​दे दिया था। रिपोर्टों बताया गया था कि एक विवाद के बाद बीवी ने शौहर को व्हाट्सएप पर ब्लॉक कर दिया, जिसके बाद उसने उसे तलाक दे दिया।

सऊदी अरब में बढ़े तलाक के मामले

पिछले कुछ समय में सऊदी अरब में तलाक के मामलों में काफी बढ़ोत्तरी हुई है। वहाँ के सांख्यिकी प्राधिकरण द्वारा जारी आँकड़ों के मुताबिक सऊदी अरब में हर घंटे तलाक के 7 केस सामने आ रहे हैं। खुद सऊदी सरकार ने आधिकारिक रूप से स्वीकार किया है कि पिछले एक दशक में वहाँ तलाक के मामलों में 60 प्रतिशत बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। सऊदी सरकार ने तलाक के मामलों में पीड़िताओं की आर्थिक मदद के लिए के लिए कुछ विशेष कदम भी उठाए हैं।