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‘जिस महिला को पति के खून सना चावल खिलाया, उससे मिला हूँ’: बोले ‘आरंभ है प्रचंड’ वाले पीयूष मिश्रा – The Kashmir Files का एक-एक शब्द सच

जम्मू-कश्मीर में 1990 के दशक में कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार और पलायन की गाथा को उजागर करती निर्देशक विवेक अग्निहोत्री की फिल्म द कश्मीर फाइल्स जब से रिलीज हुई है। इसके बाद से बॉलीवुड दो धड़ों में बंट गया है। एक धड़ा इसे जबरन झूठा करार देने में लगा है तो दूसरी तरफ एक-एक कर लोग अब इस फिल्म का समर्थन भी कर रहे हैं। इन्हीं लोगों में से एक हैं म्यूजिक डायरेक्टर और एक्टर पीयूष मिश्रा। उन्होंने इस फिल्म को पूरी तरह से सच बताया है।

पीयूष मिश्रा ने फिल्म द कश्मीर फाइल्स के एक-एक शब्द को सच करार दिया। उन्होंने कहा कि कश्मीर में जो कुछ भी हुआ है उसे किसी भी तरह से झूठा करार नहीं दिया जा सकता है। जो लोग इसे प्रोपेगेंडा करार दे रहे हैं, उनसे बहस करने का कोई अर्थ नहीं है। मिश्रा के मुताबिक, फिल्म में जिस महिला को उसके पति के खून से सने हुए चावल खिलाए गए थे वो उससे मिल चुके हैं। उन्होंने वो वीडियो भी देखने का दावा किया है।

फिल्म में जो दिखाया गया है, एक-एक बात सही है। एक्टर संजय सूरी का जिक्र करते हुए पीयूष मिश्रा ने बताया कि उनके (संजय सूरी) पिता की भी इसी तरह से हत्या कर दी गई थी। लोग चुपचाप निकल गए, उस पर आज तक कोई एफआईआर तक नहीं हुई। कश्मीर में ऐलान कर दिया गया कि लोग 48 घंटे में वहाँ से चले जाएँ औऱ लोग वहाँ से चले गए।

एक्टर ने ये भी बताया कि वो खुद भी कश्मीर के कबाइलियों पर एक कहानी लिख रहे हैं, जिसमें 1947 से 1995 तक का उल्लेख किया जाएगा। पीयूष मिश्रा कहते हैं कि वो 85 साल की एक ऐसी महिला से मिलें हैं, जिसने 1947 में हुए कबाइली हमलों को अपनी आँखों से देखा था। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि गुजरात के दंगों पर भी फिल्म बननी चाहिए।

कौन हैं पीयूष मिश्रा

गौरतलब है कि पीयूष मिश्रा फिल्म अभिनेता, म्यूजिक डायरेक्टर, गीतकार, गायक, स्क्रिप्ट राइटर और संवाद लेखक और एक प्रसिद्ध थिएटर निर्देशक और हिंदी नाटककार हैं। उन्होंने अपना प्रारंभिक जीवन ग्वालियर में बिताया, जहाँ उन्होंने अपनी शिक्षा प्राप्त की। वो फिल्म गैंग्स ऑफ वासेपुर-2 फिल्म के गाने ‘हम जहर से भरे, बिच्छुओं में पले..आबरू की कसम’ और फिल्म गुलाल के फिल्म के ‘आरंभ है प्रचंड है’ गाने में काम किया है।

मुस्लिमों के लिए नेहरू को UCC नहीं था कबूल, अब उत्तराखंड में लागू करने की तैयारी: जानिए क्या है सामान नागरिक संहिता, इससे क्या बदलेगा

पाँच राज्यों सहित उत्तराखंड (Uttarakhand) में विधानसभा चुनाव (Assembly Election) के दौरान प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (CM Pushkar Singh Dhami) ने कहा था कि अगर भाजपा दोबारा सत्ता में आती है राज्य में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code -UCC) लागू किया जाएगा। मुख्यमंत्री बनते ही धामी ने UCC लागू करने के लिए एक उच्चस्तरीय कमिटी गठित करने के लिए कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। इस घोषणा के बाद मुस्लिम संगठनों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के नेतृत्व में भाजपा सरकार (BJP Government) देश में हिंदूवाद को स्थापित कर मुस्लिमों को दोयम दर्जे का नागरिक बनाना चाहती है।

ऐसा नहीं है कि भाजपा ने सत्ता में आते ही समान नागरिक संहिता की बात करना शुरू कर दिया है। भाजपा अपने अस्तित्व के समय से ही समान नागरिक संहिता की वकालत करती रही है। भाजपा के हर चुनावी घोषणा-पत्र में समान नागरिक संहिता का मुद्दा प्रमुखता से रहा है और इसे लागू करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराती रही है। भाजपा ही नहीं, आजादी के बाद कॉन्ग्रेस के राजेन्द्र प्रसाद और जेबी कृपलानी जैसे गणमान्य नेताओं ने भी देश में धर्म आधारित कानून का विरोध किया था।

कई मौकों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट भी समान नागरिक संहिता लागू करने की बात कह चुका है और इस पर सरकार से जवाब तलब कर चुका है। संविधान का अनुच्छेद 44 भी देश में समान नागरिक संहिता लागू करने की बात कहता है। इसके बावजूद, संविधान के मूल भावना को दरअसल किनार कर देश में UCC का विरोध किया जाता रहा है और इसका सबसे प्रमुख कारण भारतीय राजनीति में मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति का घुसपैठ है।

इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल का विरोध

UCC की दिशा में उत्तराखंड सरकार के कदम का इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल (IAMC) ने विरोध जताया है। काउंसिल का कहना है कि यह संविधान में दिए गए धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है। शरिया मुस्लिम मजहबी किताब कुरान पर आधारित है और इसे संहिताबद्ध नहीं किया जा सकता है। काउंसिल ने आरोप लगाया कि कर्नाटक के स्कूलों में बुर्का-हिजाब पर प्रतिबंध से स्पष्ट है कि धर्मनिरपेक्षता की आड़ में मुस्लिमों के साथ भेदभाव की जा रही है और हिंदू त्योहारों एवं धार्मिक ग्रंथों को स्कूली पाठ्यक्रमों में शामिल किया जा रहा है।

अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन स्थित IAMC के निदेशक रशीद अहमद ने कहा, “UCC भारत को एक हिंदू बहुसंख्यक देश में बदलने की दिशा में उठाया गया कदम है, जहाँ मुस्लिम अल्पसंख्यकों को दूसरे दर्जे का नागरिक बनाया जाएगा।हिंदू राष्ट्रवादी भाजपा लंबे समय से इसका समर्थक रही है, क्योंकि वह मुस्लिम एवं अन्य अल्पसंख्यकों के धार्मिक प्रथाओं को खत्म करना चाहती है।”

UCC पर क्या कहता है संविधान

इस्लामिक संगठन भले ही इसे संविधान प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता की अधिकार को खत्म करना बता रहा है, लेकिन उसी संविधान में समान नागरिक संहिता लागू करने की बात कही गई है। 26 जनवरी 1950 को लागू किए गए संविधान के भाग 4 में अनुच्छेद 36 से लेकर 51 तक राज्य के नीति निदेशक तत्वों का वर्णन किया गया है। ये निदेशक तत्व, मूल अधिकारों की मूल आत्मा कहे जाते हैं। अनुच्छेद 44 में समान नागरिक संहिता को अनिवार्य बताया गया है। अनुच्छेद 44 में कहा गया है, “भारत पूरे देश में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता को लागू करने का प्रयास करेगा।”

यहाँ बताना आवश्यक है कि संविधान के अनुच्छेद 37 में अनुच्छेद 44 में जैसे नीति निदेशक तत्व कानून की अदालत में अप्रवर्तनीय है, फिर भी देश के शासन में मौलिक है और कानून बनाकर इन सिद्धांतों को लागू करना राज्य (भारत) का कर्तव्य है।

समान नागरिकता पर सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने देश में समान नागरिक संहिता की आवश्यकता पर हमेशा बल दिया है। मुस्लिम महिला शाह बानो के तीन तलाक उनका भरण-पोषण के लिए खर्चे के लिए दायर याचिका पर फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, “दुख की बात है कि हमारे संविधान का अनुच्छेद 44 एक मृत पत्र बना हुआ है। एक समान नागरिक संहिता परस्पर विरोधी कानूनों के प्रति असमानता वाली निष्ठा को हटाकर राष्ट्रीय एकीकरण के उद्देश्य को पूरा करने में मदद करेगी।”

द्विविवाह में प्रसिद्ध केस सरला मुद्गल के फैसले में भी सुप्रीम कोर्ट ने समान नागरिक संहिता नहीं लाने के लिए देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की सरकार के रवैये पर निराशा व्यक्त की था। पंडित जवाहरलाल नेहरू ने साल 1954 में संसद में हिंदू कोड बिल लाया था, जिसके तहत हिंदू (बौद्ध, सिख, जैन आदि) के सिविल कानूनों को निर्धारित किया गया था।

जुलाई 2021 मे दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस प्रतिभा एम सिंह ने हिन्दू मैरिज ऐक्ट 1955 से जुड़ी सुनवाई के दौरान देश में समान नागरिक संहिता की आवश्यकता पर बल देते हुए केंद्र सरकार से इसके विषय में आवश्यक कदम उठाने के लिए कहा था। कोर्ट ने कहा था कि UCC के कारण समाज में झगड़ों और विरोधाभासों में कमी आएगी, जो अलग-अलग पर्सनल लॉ के कारण उत्पन्न होते हैं।

मायरा उर्फ ​​वैष्णवी विलास शिरशिकर और दूसरे धर्म में शादी से जुड़ी 16 अन्य याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 नवंबर 2021 को सरकार से यूनिफॉर्म सिविल कोड के मामले में संविधान के अनुच्छेद 44 को लागू करने के लिए एक पैनल का गठन करने को कहा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा था समान नागरिक संहिता काफी समय से लंबित है और इसे स्वैच्छिक नहीं बनाया जा सकता है।

कोर्ट ने कहा था, “इस मामले पर अनावश्यक रियायतें देकर कोई भी समुदाय बिल्ली के गले की घंटी को बजाने की हिम्मत नहीं करेगा। यह देश की जरूरत है और यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वो नागरिकों के लिए यूसीसी को लागू करे और उसके पास इसके लिए विधायी क्षमता है।”

समान नागरिक संहिता पर बाबा साहेब अंबेडकर और राजेंद्र प्रसाद की राय

75 साल पहले बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर ने कहा था कि समान नागरिक संहिता को ‘विशुद्ध रूप से स्वैच्छिक’ नहीं बनाया जा सकता है। उन्होंने उस दौरान भी अल्पसंख्यक समुदाय के डर और आशंकाओं को देखते हुए यह बात कही थी।

संसद में साल 1954 में हिंदू कोड बिल पर बहस के दौरान समाजवादी नेता जेपी कृपलानी ने कॉन्ग्रेस सरकार पर सांप्रदायिक होने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि यह सरकार केवल हिंदुओं के लिए विवाह के कानून ला रही है और मुस्लिमों के लिए नहीं। उन्होंने मुस्लिमों के लिए ऐसे ही मुस्लिम बिल लाने के लिए कहा था कि मुस्लिम महिलाओं को भी सशक्त बनाया जा सके।

भारत के पहले और तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने भी हिंदू कोड बिल का जोरदार विरोध किया था। राजेंद्र प्रसाद ने कहा था कि इस तरह के कानून जनता की राय को ध्यान में रखे बिना एकतरफा और मनमाने ढंग से बनाया जा रहा है। उन्होंने कानून पर हस्ताक्षर करने से भी इनकार करने की धमकी दी। इसके कारण तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित नेहरू और राष्ट्रपति के बीच टकराव की स्थिति आ गई थी।

पंडित नेहरू समान नागरिक संहिता का किया था विरोध

हिंदू कोड पर संसद में बहस के दौरान दौरान जब समान नागरिक संहिता की बात हुई तो प्रधानमंत्री नेहरू ने इस पर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा था कि इसके लिए अभी सही समय नहीं आया है, क्योंकि मुस्लिम इसके लिए तैयार नहीं हैं।

पंडित नेहरू ने संसद में समान नागरिक संहिता के बजाए हिंदू कोड बिल का बचाव करते हुए कहा था, “मुझे नहीं लगता कि वर्तमान समय में भारत में इसे लागू करने का समय आया है। जब हिंदू कोड बिल के माध्यम से देश की 80% से अधिक जनता के लिए व्यक्तिगत कानून के तहत लाया जा चुका है तो भारत में सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लागू करने का कोई औचित्य नहीं है।”

क्या है समान नागरिक संहिता और क्यों मुस्लिम करते हैं विरोध

समान नागरिक संहिता को सरल अर्थों में समझा जाए तो यह एक ऐसा कानून है, जो देश के हर समुदाय पर समुदाय लागू होता है। व्यक्ति चाहे किसी भी धर्म का हो, जाति का हो या समुदाय का हो, उसके लिए एक ही कानून होगा। अंग्रेजों ने आपराधिक और राजस्व से जुड़े कानूनों को भारतीय दंड संहिता 1860 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872, भारतीय अनुबंध अधिनियम 1872, विशिष्ट राहत अधिनियम 1877 आदि के माध्यम से सब पर लागू किया, लेकिन शादी, विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति आदि से जुड़े मसलों को सभी धार्मिक समूहों के लिए उनकी मान्यताओं के आधार पर छोड़ दिया।

इन्हीं सिविल कानूनों को में से हिंदुओं वाले पर्सनल कानूनों को पंडित जवाहरलाल नेहरू ने खत्म किया और मुस्लिमों को इससे अलग रखा। हिंदुओं की धार्मिक प्रथाओं के तहत जारी कानूनों को निरस्त कर हिंदू कोड बिल के जरिए हिंदू विवाह अधिनियम 1955, हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956, हिंदू नाबालिग एवं अभिभावक अधिनियम 1956, हिंदू दत्तक ग्रहण और रखरखाव अधिनियम 1956 लागू कर दिया गया। वहीं, मुस्लिमों के लिए उनके पर्सनल लॉ को बना रखा, जिसको लेकर विवाद जारी है। इसकी वजह से न्यायालयों में मुस्लिम आरोपितों या अभियोजकों के मामले में कुरान और इस्लामिक रीति-रिवाजों का हवाला सुनवाई के दौरान देना पड़ता है।

इन्हीं कानूनों को सभी धर्मों के लिए एक समान बनाने की जब माँग होती है तो मुस्लिम इसका विरोध करते हैं। मुस्लिमों का कहना है कि उनका कानून कुरान और हदीसों पर आधारित है, इसलिए वे इसकी को मानेंगे और उसमें किसी तरह के बदलाव का विरोध करेंगे। इन कानूनों में मुस्लिमों द्वारा चार शादियाँ करने की छूट सबसे बड़ा विवाद की वजह है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड भी समान नागरिक संहिता का खुलकर विरोध करता रहा है।

गोवा में लागू है UCC

देश भर में समान नागरिक संहिता को लागू करने की माँग दशकों से हो रही है, लेकिन देश में गोवा अकेला ऐसा राज्य है जहाँ समान नागरिक संहिता लागू है। गोवा में वर्ष 1962 में यह कानून लागू किया गया था। साल 1961 में गोवा के भारत में विलय के बाद भारतीय संसद ने गोवा में ‘पुर्तगाल सिविल कोड 1867’ को लागू करने का प्रावधान किया था। इसके तहत गोवा में समान नागरिक संहिता लागू हो गई और तब से राज्य में यह कानून लागू है।

पिछले दिनों गोवा में लागू यूनिफॉर्म सिविल कोड की तारीफ सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एस ए बोबड़े ने भी की थी। सीजेआई ने कहा था कि गोवा के पास पहले से ही वह है, जिसकी कल्पना संविधान निर्माताओं ने पूरे देश के लिए की थी।

उस जैनुद्दीन को UP पुलिस से मुठभेड़ में लगी गोली, जिसने ‘द कश्मीर फाइल्स’ देखकर लौट रहे लोगों पर चाकू से किया था हमला

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के फजिलगंज में 18 मार्च 2022 को ‘द कश्मीर फाइल्स’ देख कर लौट रहे 3 युवकों पर चाकुओं से हमला किया गया था। पुलिस ने इस घटना में फरार चल रहे आरोपित जैनुद्दीन को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया है। मुठभेड़ में जैनुद्दीन के पैर में गोली लगी है। एनकाउंटर में सब इंस्पेक्टर आलोक यादव भी घायल हुए हैं। मुठभेड़ गुरुवार (24 मार्च 2022) को हुई।

कुशीनगर पुलिस ने एक बयान में बताया है कि गुरुवार की रात करीब 9 बजे देवरिया बॉर्डर में बदमाशों से पुलिस की मुठभेड़ हुई थी। मुठभेड़ में जैनुद्दीन उर्फ गोगा गोली लगने से हुआ घायल हो गया। फाजिलनगर चौकी इंचार्ज सब इंस्पेक्टर आलोक यादव भी इस मुठभेड़ में घायल हुए हैं। पुलिस ने जैनुद्दीन के पास से अपाचे बाइक, एक पिस्टल और एक चाकू बरामद किया। घायल पुलिसकर्मी और आरोपित का इलाज करवाया जा रहा है। दोनों की हालत खतरे से बाहर है।

पुलिस के मुताबिक, “इस मुठभेड़ के दौरान जैनुद्दीन का साथी राजा खरवार भाग निकला। उसकी तलाश की जा रही है। जैनुद्दीन बेहद शातिर अपराधी है। उसके खिलाफ कई पुलिस स्टेशन में केस दर्ज हैं। जैनुद्दीन हिस्ट्रीशीटर है और उस पर गैंगस्टर भी लगा हुआ है। उस पर 25000 रुपए का इनाम भी घोषित था। पुलिस को फिलहाल उसकी धारा 147,323,324,307,504 भादविव 3 (2) (v) SC/ST एक्ट में तलाश थी।”

जैनुद्दीन ने वीडियो जारी कर प्रशासन को दी थी गाली

चाकूबाजी के आरोपित जैनुद्दीन ने बाद में एक वीडियो जारी कर प्रशासन को चैलेन्ज दिया था। उस वीडियो में जैनुद्दीन ने प्रशासन को माँ की गाली देते हुए चाकू मारने का बात स्वीकार की थी। उसके साथ एक अन्य आरोपित अनीश भी दिखाई दे रहा था। बाद में अनीश ने अदालत में सरेंडर कर दिया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 18 मार्च को फजिलगंज कस्बे के एक सिनेमा हॉल से द कश्मीर फाइल्स का अंतिम शो देखकर 3 युवक देशभक्ति का नारा लगाते हुए बाहर निकल रहे थे। ये युवक स्थानीय जोकवा बाजार के रहने वाले थे। इनके नारे एक वर्ग विशेष को नागवार गुजरा। इस बात पर दोनों पक्षों में बहस शुरू हो गई। कुछ ही देर बाद वर्ग विशेष के लोगों द्वारा तीनों युवकों पर हमला कर दिया गया। हमले के लिए चाकुओं का इस्तेमाल किया गया। हमले में साहुल जायसवाल, कृष्णा जायसवाल और सचिन बुरी तरह से घायल हो गए।

‘मुस्लिम छात्रों के व्हाट्सएप्प ग्रुप का हिस्सा था उमर खालिद, महिला प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर हमला किया’: अदालत की टिप्पणी

फरवरी 2020 में हुए दिल्ली हिंदू विरोधी दंगों की साजिश के मामले में आरोपित उमर खालिद को दिल्ली की कोर्ट से बड़ा झटका लगा। गुरुवार (24 फरवरी, 2022) को हुई सुनवाई के दौरान पूर्वी दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने आरोपित उमर खालिद को जमानत देने से इनकार कर दिया। उमर खालिद पर दिल्ली दंगों की साजिश रचने समेत कई गंभीर आरोप है और वह गिरफ्तारी के बाद से लगातार जेल में ही बंद है।

गुरुवार को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत इस याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। सुनवाई के दौरान आरोपित ने अदालत से कहा था कि अभियोजन पक्ष के पास उसके खिलाफ अपना मामला साबित करने के लिए सबूत नहीं हैं। वहीं, अभियोजन पक्ष की तरफ से कहा गया था कि सीएए प्रदर्शन के नाम पर लोगों को चारे के रूप में इस्तेमाल किया था। कोर्ट ने उमर खालिद के रिसर्चर होने और उसके थीसिस लिखने की बात पर कहा कि इसका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि साजिश की शुरुआत से लेकर दंगों तक उमर खालिद का नाम बार-बार आया है। वह JNU के मुस्लिम छात्रों के व्हाट्सएप ग्रुप का सदस्य था। उसने विभिन्न बैठकों में भाग लिया। उमर ने हिंसा के लोगों को भड़काया था। इतना ही नहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प जब दिल्ली आए थे, तब उमर ने लोगों को सड़कों पर आने के लिए कहा था। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि खराब करने के लिए ऐसा किया गया। दंगों के बाद हुईं कॉल्स में उसका भी उल्लेख किया गया था।

इसमें कहा गया है कि चार्जशीट के अनुसार, चक्काजम की ‘पूर्व नियोजित साजिश’ थी और दिल्ली में 23 अलग-अलग नियोजित स्थलों पर एक पूर्व नियोजित विरोध था, जो टकराव, चक्काजाम और हिंसा को बढ़ावा देने के लिए था। इसी के परिणामस्वरूप दंगे हुए थे।

कोर्ट ने कहा कि इसका टारगेट मिश्रित आबादी वाले क्षेत्रों में सड़कों को ब्लॉक करना और वहाँ रहने वाले नागरिकों के आने और जाने को पूरी तरह से रोकना था। इसके बाद महिला प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया। इसका मकसद लोगों के अंदर दहशत पैदा करना था। अदालत के मुताबिक, यह UAPA के धारा-15 के तहत ‘आतंकवादी अधिनियम’ (Terrorist Act) है।

साथ ही कोर्ट ने कहा कि जिस तरह से हथियारों का इस्तेमाल हुआ और हमले हुए, उससे साफ था कि यह एक पूर्व नियोजित साजिश थी। आदेश में कहा गया है, “ऐसे कार्य जो भारत की एकता और अखंडता के लिए खतरा पैदा करते हैं और सांप्रदायिक सद्भाव में टकराव पैदा करते हैं, किसी भी वर्ग में आतंक पैदा करते हैं, उन्हें हिंसा में घिरा हुआ महसूस कराते हैं, वह भी एक आतंकवादी एक्ट है।”

बता दें कि उमर खालिद और कई अन्य पर फरवरी 2020 को हुए दंगों के मास्टरमाइंड होने के लिए IPC के साथ-साथ UAPA के तहत भी मामला चल रहा है। इन दंगों में 53 लोगों की मौत हो गई थी और 700 से अधिक घायल हो गए थे। नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान ये दंगे भड़के थे। खालिद के अलावा कार्यकर्ता खालिद सैफी, जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी की छात्रा नताशा नरवाल और देवंगना कलीता, जामिया समन्वय समिति के सदस्य सफूरा जरगार, आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन और कई अन्य पर मामले में सख्त कानून के तहत मामले दर्ज किए गए।

बीरभूम में 200 से अधिक बम बरामद, संसद में रोते हुए बोलीं सांसद – ‘हमने बंगाल में जन्म लेकर अपराध नहीं किया, राष्ट्रपति शासन लगाइए’

पश्चिम बंगाल के बीरभूम (Birbhum, West Bengal) जिले में 8 लोगों को जिंदा जलाने के मामले में ममता सरकार की चौतरफा आलोचना हो रही है। इसको देखते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य पुलिस को 10 दिनों के अंदर पूरे राज्य से अपराधियों की धरपकड़ कर हथियार बरामद करने का अल्टीमेटम दिया है। शुक्रवार (25 मार्च 2022) को बीरभूम हिंसा मामले में पुलिस ने करीब 200 से अधिक बम बरामद किए।

प्रभात खबर के मुताबिक, पुलिस ने गुरुवार को भी पश्चिम बर्दवान जिले के सालानपुर में एक हथियार बनाने वाले कारखाने का भंडाफोड़ कर बड़ी मात्रा में हथियार बरामद किए थे। पुलिस ने बताया कि जिले के माड़ग्राम थाना इलाके के छोटन डंगाल के पास झाड़ियों में छिपाकर रखे गए बम निष्क्रिय कर दिए हैं। हालाँकि, अभी तक किसी की गिरफ्तारी की कोई सूचना नहीं है। वहीं गाँव में बम मिलने से लोगों में दहशत का माहौल है।

वहीं, संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में आज राज्यसभा में बीरभूम हिंसा पर जोरदार हंगामा किया गया। इस दौरान बीजेपी नेता और राज्यसभा सदस्य रूपा गांगुली बीरभूम का मुद्दा उठाया और भावुक होकर रोने लगीं। रूपा गांगुली ने ममता सरकार पर तंज कसते हुए कहा “इस बार सिर्फ 8 लोग मरे हैं। ज्यादा नहीं मरे सर, ज्यादा मरने से फर्क नहीं पड़ता। बात यह है कि जला के मारा जाता है। बात यह है कि गैरकानूनी बंदूकें रखी जाती हैं। बात यह है कि पुलिस पर भरोसा नहीं है। बात यह है कि अनीस खान मरता है तो सिर्फ सीबीआई की माँग की जाती है। उन्होंने कहा कि 7 दिन में 26 पॉलिटिकल मर्डर हुए हैं। ऑटॉप्सी रिपोर्ट में कहा गया है कि पहले उनके हाथ पैर तोड़े और बंद कमरे में मारकर जला दिया गया।”

बीजेपी नेता ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की माँग करते हुए कहा कि पहले एक काउंसलर को मारा, फिर एक उप प्रधान को मारा। इसके बाद मास किलिंग हुआ और उन्हें किसने मारा कुछ पता नहीं। एक-एक करके लोगों को मारा जा रहा है। लोग यहाँ से भाग रहे हैं। यह जगह जीने लायक नहीं है। पश्चिम बंगाल भारत का अंग है, हमें वहाँ राष्ट्रपति शासन चाहिए, हमें जीने का हक है। हमने पश्चिम बंगाल में जन्म लेकर अपराध नहीं किया है।

बता दें कि बीरभूम जिले के बोगटुई गाँव में जिंदा जलाए गए 8 लोगों को मारने से पहले बुरी तरह प्रताड़ित किया गया था। दो बच्चों और तीन महिलाओं सहित कुल 8 शवों के पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया गया है। फोरेंसिक विशेषज्ञों ने अपने प्रारंभिक निष्कर्ष में कहा है कि घरों में मिले शवों के परीक्षण में पता चला है कि पीड़ितों को पहले बुरी तरह पीटा गया था। उसके बाद उन्हें जिंदा जला दिया गया था।

निकाह से इनकार करने पर हुसैन ने छात्रा को मार डाला, सूटकेस में लाश डाल गंग नहर में जा रहा था फेंकने: Video वायरल

उत्तराखंड में पुलिस ने एक ऐसे युवक को गिरफ्तार किया है जो एक लड़की की हत्या के बाद उसकी लाश सूटकेस में डालकर गंग नहर में फेंकने जा रहा था। घटना रुड़की के कलियर की है। गुरुवार (24 मार्च 2022) को जब गुलजेब हुसैन होटल से सूटकेस लेकर निकला तो कर्मचारियों को उस पर शक हुआ। सूटकेस खोलने पर उस लड़की की लाश मिली, जिसके साथ वह होटल में आया था। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है।

पुलिस ने एक बयान में बताया है कि 24 मार्च को गुलजेब मृतक लड़की के साथ साबरी होटल में आया था। लड़की उसकी गर्लफ्रेंड थी। गुलजेब उससे निकाह करना चाहता था। लेकिन लड़की के घर वाले इसके लिए राजी नहीं थे। लड़की ने भी गुलजेब को अपने घर वालों की मर्जी के खिलाफ जाकर निकाह करने से इनकार कर दिया। इसके बाद गुस्से में आकर गुलजेब ने उसकी हत्या कर दी।

पुलिस द्वारा जारी प्रेस नोट

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना के दिन शाम लगभग 5 बजे गुलजेब और युवती होटल में आए थे। लगभग 3 घंटे बाद गुलजेब होटल से एक भारी सूटकेस उठाकर जाने लगा। सूटकेस उठाने में उसे दिक्कत हो रही थी, जिससे होटल स्टाफ को शक हुआ। थोड़ी ही देर में आसपास के लोग जमा हो गए। सूटकेस खुलवाया गया तो अंदर लड़की की लाश मिली। इसके बाद उसे पकड़कर लोगों ने पुलिस के हवाले कर दिया।

वायरल वीडियो में देख सकते हैं कि कुछ लोगों ने आरोपित को जमीन पर बिठा रखा है। वो बार-बार उठने की कोशिश करता है तो उसको पुलिस आने की बात कहकर डाँटा जा रहा। लोगों को वह अपना नाम अयान और मेवड़ गाँव का रहने वाला बताता है। सूटकेस में बंद मृतका को लाल रंग के कपड़ों में वीडियो में देखा जा सकता है।

हिरासत में लिए जाने के बाद उसकी पहचान गुलजेब के तौर पर हुई। वह हरिद्वार के ज्वालापुर का रहने वाला है। मृतका का नाम रमसा है। वह हरिद्वार जिले के ही मंगलौर की रहने वाली थी तथा बीकॉम की पढ़ाई कर रही थी। मृतका के पिता राशिद के अनुसार उनके घर में शादी समारोह था। फिर भी आरोपित उनकी बेटी को आपने साथ ले गया। आरोपित और मृतका दूर के रिश्तेदार बताए जाते हैं।

एक रिपोर्ट के मुताबिक लड़की ने अपनी फर्जी ID कार्ड होटल में जमा किया था। उसमें उसका नाम काजल दर्ज था। पुलिस को होटल के बाहर एक स्कूटी भी मिली है। बताया जा रहा है कि दोनों इसी स्कूटी से आए थे।

‘चंद मुस्लिम वोटों के लिए.. महिलाओं-बच्चों की लाशों पर बेशर्म हँसी… केजरीवाल की करतूत अपनी माँ के चरित्र पर सवाल उठाने जैसा’

कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार पर बनी फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ को झूठा बताने पर दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल पर भाजपा लगातार हमलावर है। इसी क्रम में दिल्ली भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने केजरीवाल पर निशाना साधते हुए कहा कि इस फिल्म को झूठा बताकर केजरीवाल ने वहाँ पर बलिदान देने वाले हर जवान का मजाक उड़ाया है। साथ ही कहा कि ये अपनी माँ के चरित्र पर सवालिया निशान लगाने जैसा है।

बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने एक वीडियो ट्वीट कर केजरीवाल पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “कल दिल्ली विधानसभा में अरविंद केजरीवाल ने कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार को झूठा बताया। कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार को झूठा बताना अपनी माता जी के चरित्र पर सवाल उठाने जैसा है। छोटे-छोटे बच्चों, महिलाओं की लाशों पर ये बदतमीजी, बेहूदगी और बेशर्मी से भरी हँसी, आतंकवादियों को बचाने की ऐसी बेशर्म कोशिश! अरविंद केजरीवाल ने न केवल कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार का मजाक बनाया है, बल्कि देश के लिए बलिदान हुए सेना के हर जवान का भी मजाक बनाया है। आतंकियों को बचाने की बेशर्म कोशिश है ये।”

कपिल मिश्रा ने आगे कहा, “द कश्मीर फाइल्स को यूट्यूब पर डालने वाली बात पर मैं पूछता हूँ कि अरविंद केजरीवाल अपने विज्ञापनों को यूट्यूब पर क्यों नहीं डाल देते। अपने विज्ञापन क्यों टीवी, अखबारों, रेडियो में चलाने हैं? अपने विज्ञापनों को भी यूट्यूब पर डाल दें। दूसरों के लिए ये ज्ञान देना और कबीर खान की फिल्म को टैक्स फ्री क्यों किया था? चंद मुस्लिमों के वोटों के लिए इस तरह से हिंदुओं का मजाक उड़ाना और बदतमीजी करना विधानसभा की गरिमा के खिलाफ है। विधानसभा में जो किया गया वो इतिहास का काला दिन था।”

इससे पहले मिश्रा में फिल्म को यूट्यूब पर डालने के केजरीवाल के बयान पर कहा था कि ये केजरीवाल नहीं हँस रहे हैं, वो अंदर से डरे हुए हैं।

अरविंद केजरीवाल का बयान

गौरतलब है कि दिल्ली विधानसभा में सीएण अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार को कश्मीरी पंडितों के नरसंहार और पलायन पर बनी फिल्म ‘The Kashmir Files’ को झूठा बताते हुए प्रदेश में टैक्स फ्री करने से इनकार कर दिया था। उन्होंने कहा था, “निर्देशक विवेक अग्निहोत्री को इतना ही शौक है तो बोलो यूट्यूब पर डाल देगा, वहाँ सब कुछ फ्री है और सारे लोग देख लेंगे एक ही दिन के अंदर। टैक्स फ्री कराने की ज़रूरत ही क्या है?” जबकि इससे पहले उन्होंने स्वरा भास्कर की ‘निल बटे सन्नाटा’ और तापसी पन्नू की ‘साँड की आँख’ को टैक्स फ्री कर दिया था।

कलकत्ता HC ने ठुकराई बंगाल पुलिस से जाँच की माँग: आदेश के बाद मौके पर पहुँची CBI की टीम, बीरभूम हिंसा की जाँच शुरू

पश्चिम बंगाल के रामपुरहाट, बीरभूम (Birbhum, West Bengal) जिले के एक गाँव में हुई हिंसा की जाँच अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दी गई है। इसके बाद सीबीआई जाँच करने के लिए फॉरेंसिक टीम रामपुरहाट पहुँच गई है। कलकत्ता हाई कोर्ट (Calcutta High court) ने शुक्रवार (25 मार्च, 2022) को इस मामले की सुनवाई करते हुए राज्य की ममता सरकार की उस माँग को ठुकरा दिया, जिसमें मामले की जाँच बंगाल पुलिस से ही कराने की बात कही गई थी।

कोर्ट ने बंगाल के एडवोकेट जनरल (AG) से कहा कि उन्हें अपने आदेश को रोकने के पीछे कोई वजह नजर नहीं आती। इसलिए उनकी माँग ठुकराई जाती है। इसी के साथ कोर्ट ने सीबीआई को आदेश दिया कि वह मामले की जाँच रिपोर्ट सात अप्रैल तक कोर्ट को सौंपे। बता दें कि घटना के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने मामले की जाँच के लिए SIT का गठन किया था। अभी तक मामले में SIT ही जाँच कर रही थी।

गौरतलब है कि पिछले दिनों पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में सत्तारूढ़ तृणमूल कॉन्ग्रेस के एक पंचायत अधिकारी की हत्या के कथित तौर पर विरोध स्वरूप बोगतुई गाँव में करीब एक दर्जन झोपड़ियों में आग लगा दी गई थी। इसमें दो बच्चों और तीन महिलाओं समेत आठ लोगों की मौत हो गई। इसी मामले में जनहित याचिका दायर कर सीबीआई या एनआईए से जाँच की माँग की गई थी। अदालत ने इस मामले का संज्ञान लिया था। गुरुवार (24 मार्च 2022) को कोर्ट ने इस केस में सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। 

हिंसा में अनिरुल हुसैन (Anirul Hossain) मुख्य आरोपित बताया जा रहा है। उसे गुरुवार को तारापीठ के एक होटल से गिरफ्तार किया गया। अनिरुल हुसैन रामपुरहाट का रहने वाला है और तृणमूल कॉन्ग्रेस का नेता और ब्लॉक प्रमुख है। TMC के गठन से पहले वह कॉन्ग्रेस का नेता था। हुसैन को विधानसभा के उपाध्यक्ष और बीरभूम के विधायक आशीष बनर्जी का बेहद करीबी बताया जाता है। हुसैन इलाके की राजनीतिक गतिविधियों को नियंत्रित करता है।

मामले में बंगाल इमाम एसोसिएशन ने बीरभूम के बाहुबली नेता अनुब्रत मंडल के खिलाफ भी कार्रवाई की माँग की जा रही है। एसोसिएशन के अध्यक्ष याहिया खान ने कहा कि इस घटना के बाद जिसने कहा था कि टीवी फटने से आग लगी है, उस पर कार्रवाई होनी चाहिए। बता दें कि आग में जलकर 8 लोगों की मरने की घटना सामने आने के बाद अनुब्रत मंडल कहा था कि टीवी फटने के कारण आग लगी है। जब ममता बनर्जी पीड़ित परिवारों से मिलने के लिए पहुँची थीं, तब भी अनुब्रत मंडल ममता बनर्जी के साथ थे।

वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घटना की निंदा करते हुए कहा था कि आशा करते हैं कि राज्य सरकार बंगाल की महान धरती पर ऐसा जघन्य पाप करने वालों को जरूर सजा दिलवाएगी। इसके अलावा उन्होंने बंगाल के लोगों से आग्रह किया कि ऐसी वारदात को अंजाम देने वालों को, ऐसे अपराधियों का हौसला बढ़ाने वालों को कभी माफ न करें।

‘मुस्लिम पड़ोसियों ने बता दिया वो चावल के ड्रम में छिपे हैं’: बीके गंजू के भाई ने याद किया वाकया – याद आता है 8 गोलियों से छलनी सीना

‘द कश्मीर फाइल्स’ फिल्म ने क्या आम, क्या खास सबका दिल अंदर से झकझोर कर रख दिया है। कश्मीर में आतंकियों ने चावल के ड्रम में छिपे जिस कश्मीरी पंडित बाल कृष्ण गंजू की हत्या कर दी गई थी, उनके बड़े भाई शिबन कृष्ण गंजू इतने सालों के बाद भी अपने भाई की मौत का गम नहीं भुला पा रहे हैं। ‘दैनिक भास्कर’ को 75 वर्षीय शिबन कृष्ण गंजू ने अपना दर्द बयाँ करते हुए कहा, “मैं 32 साल से हर रोज जब भी आँखें बंद करता हूँ, मुझे हमारा चार मंजिला घर सामने दिखने लगता है। चौथी मंजिल पर रखा वह चावल से भरा ड्रम और उसमें खून से लथपथ मेरे भाई का छलनी सीना दिखता है।”

अपने पड़ोसियों को वे लोग बहुत मानते थे, उनके बारे में बताते हुए गंजू के बड़े भाई कहते हैं, “आतंकियों ने हमारे घर में बाल कृष्ण को बहुत ढूँढा, पर वो नहीं मिला। इसके बाद वो चले जा रहे थे, लेकिन तभी हमारे मुस्लिम पड़ोसियों ने उन्हें इशारे से बता दिया था कि वह चावल के ड्रम में चौथी मंजिल पर छिपा है। मेरे पड़ोसी और हमारा घर एक ही लेवल पर था, इसलिए उन्होंने मेरे भाई को छिपते हुए देख लिया था। इसके बाद आतंकियों ने चौथी मंजिल पर जाकर चावल से भरे ड्रम में छिपे मेरे भाई के सीने में 8 गोलियाँ दाग दीं। आज भी मेरे पास इसकी FIR रखी हुई है। उस वक्त बाल कृष्ण केवल 35 साल का रहा होगा। उनकी एक बेटी भी है, जो उस समय लगभग दो साल की थी।”

उन्होंने आगे बताया कि हत्या करने के बाद आतंकियों ने दो साल की बच्ची को गोद में लेकर नीचे खड़ी मेरी डरी सहमी भाभी से जाते हुए कहा, “वह मर गया है, जाओ उसे संभालो।” उन्होंने यह भी बताया कि खूंखार आतंकी फारूक अहमद डार हमारे पड़ोस में रहता था। उसे सब बिट्टा कराटे के नाम से भी जानते थे। उन्होंने बताया कि हमारे और भी कई मुस्लिम पड़ोसी थे, जो कब खूँखार आतंकी बन गए हमें पता ही नहीं चला।

वहीं, इससे पहले बीके गंजू की भांजी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर करके बताया था कि मेरे परिवार में कोई भी इस बारे में बात नहीं करना चाहता था। आज भी जब फिल्म रिलीज हुई, पूरे देश के लोग कश्मीरी पंडितों को सपोर्ट कर रहे हैं और सुन रहे हैं कि उस समय क्या हुआ था, तब जाकर मेरे माता-पिता ने इस बारे में बात की। मैंने उनसे पूछा कि उस समय आखिर क्या हुआ था। उन्होंने बताया कि गंजू की पत्नी और उनकी बेटियाँ अभी भी उस ट्रॉमा से बाहर नहीं आ पाई हैं। अब इस बारे में जानने के बाद लगा कि यह हमारे परिवार के लिए हीलिंग जैसा है, इसलिए इतने सालों से कोई भी इसके बारे में बात नहीं करना चाहता था।

बता दें कि बीके गंजू एमटीएनएल में इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियर थे। 19 मार्च 1990 को आतंकी बीके गंजू की हत्या करने उनके घर पर पहुँचे थे। इन आतंकियों में बिट्टा कराटे भी शामिल था। आतंकियों ने गंजू पर सरकार का मु​खबिर होने का आरोप भी लगाया था। यही नहीं उनके खून से सने चावल उनकी पत्नी को खिलाए थे। द कश्मीर फाइल्स में कृष्णा पंडित का किरदार निभाने वाले अभिनेता दर्शन कुमार ने भी एक इंटरव्यू में इस घटना का जिक्र किया था। उन्होंने बताया ​था कि एक कश्मीरी पंडित की हत्या के बाद उनके खून से सना चावल उनकी पत्नी को खिलाया था। इस घटना के बारे में सुनकर वे दहल उठे थे। उन्हें उस रात नींद नहीं आई थी।

गौरतलब है कि द कश्मीर फाइल्स ने नब्बे के दशक में कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार को जुबान देने का काम किया है। पिछले दिनों गिरिजा टिक्कू के परिवार ने भी इस घटना पर चुप्पी तोड़ी थी। उनकी भतीजी सीधी रैना ने इंस्टाग्राम पोस्ट शेयर कर कहा था कि उनके परिवार को अभी भी न्याय का इंतजार है। गिरिजा टिक्कू को अगवा कर गैंगरेप किया गया था और फिर उन्हें जिंदा आरी से काट दिया गया था।

पूजा को सना खान बनाने आया रिहान, क्लर्क अकरम ने हिंदू अधिकारी की फर्जी साइन-मुहर लगा तैयार किए दस्तावेज: फर्जीवाड़े के आरोपों के बाद गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के शामली जिले के कांधला नगरपालिका के क्लर्क अकरम बाबू को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। उस पर नगरपालिका की अधिशासी अधिकारी निकिता शर्मा के फर्जी हस्ताक्षर और मुहर से दलित युवती पूजा रानी के दस्तावेज सना खान के नाम से तैयार करने के आरोप हैं। बीजेपी नेता और सभासद दीपक सैनी ने इस संबंध में 19 मार्च 2022 को पुलिस से शिकायत की थी। उन्होंने इसे लव जिहाद बताते हुए कांधला नगरपालिका अध्यक्ष वाज़िद हसन को पर भी मिलीभगत के आरोप लगाए थे।

इस मामले में पुलिस को दी गई शिकायत के मुताबिक, “19 मार्च 2022 को कांधला के सभासद दीपक सैनी के क्षेत्र का रिहान खान एक आधार कार्ड का फॉर्म लेकर आया। उसने सभासद से अपनी पत्नी का नाम आधार कार्ड में बदलवाने के लिए हस्ताक्षर व मोहर लगाने को कहा। सभासद ने पति और पत्नी के आधार कार्ड माँगे तो उसमें लड़के का नाम रिहान तथा लड़की का नाम पूजा रानी था। शक होने पर उन्होंने जाँच करवाई तो पता चला कि रिहान उस लड़की को सहारनपुर जिले के सरसावा क्षेत्र से भगाकर लाया था।”

शिकायत में आगे कहा गया, “ये मामला धर्मान्तरण और लव जिहाद का लग रहा है। इसमें नगरपालिका के क्लर्क अकरम बाबू के द्वारा पालिका अध्यक्ष वाजिद हसन व नगर पालिका अधिशासी अधिकारी निकिता शर्मा के हस्ताक्षर और मुहर लगा दिए गए थे। शक हो रहा है कि अकरम भी रिहान व पूजा रानी से मिला हुआ हो। इससे कस्बे का माहौल खराब हो सकता था।”

पुलिस में दी गई शिकायत

ऑपइंडिया को दीपक सैनी ने बताया, “यहाँ एक नहीं बल्कि कई घटनाएँ लव जिहाद की हो चुकी हैं। समाजवादी पार्टी की सरकार में एक लड़की का जबरन कोर्ट में 164 का बयान भी करवा दिया गया था। नए मामले में जो पूजा नाम की लड़की है उसके घर वालों से उसे नहीं मिलने दिया गया था। कागज में लड़की का एक जगह नाम सना खान और दूसरी जगह पूजा रानी देख कर मुझे शक हुआ था। जब मैंने रिहान को कागज पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया तो उसने उसने सीधे नगरपालिका अध्यक्ष से साइन करवाने की बात कही और चला गया।”

ऑपइंडिया ने इस मामले में शामली के थाना कांधला SHO से बात की। उन्होंने बताया, “लगभग डेढ़ साल पहले लड़की सहारनपुर में रहती थी। वहाँ रिहान नाम के लड़के से उसने शादी कर ली। परिजनों ने FIR भी दर्ज करवाई थी। लेकिन लड़की का कोर्ट में दिया गया 164 का बयान रिहान के पक्ष में रहा। तब से दोनों साथ ही रहते हैं। रिहान अपनी बीवी के आधार कार्ड को बनवाने गया था तब ये प्रकरण फिर से चर्चा में आया। इस घटना में कांधला नगरपालिका के क्लर्क अकरम ने नगरपालिका की अधिशासी अधिकारी की साइन और मुहर अपने पास से बिना उनकी सहमति के बनाकर लगा दी। इसके चलते अकरम पर धारा 420, 468, 471 IPC के तहत केस दर्ज कर जेल भेज दिया गया है। मामले में धर्मान्तरण जैसा कोई विषय नहीं है।”