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उत्तराखंड में लागू होगा समान नागरिक संहिता, शपथ लेते ही धामी ने दोहराई प्रतिबद्धता: PM मोदी भी थे मौजूद

उत्तराखंड में भाजपा नेता पुष्कर सिंह धामी ने दोबारा मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। उनके शपथग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री मौजूद रहे।

शपथ लेने से ठीक पहले पुष्कर सिंह धामी ने यूनिफॉर्म सिविल कोड(Uniform Civil Code) यानी समान नागरिक संहिता को लागू करने की बात दोहराई थी। उन्होंने कहा था कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) अपने हर वादे को पूरा करेगी। मतलब अब वह इसे लेकर कमेटी का गठन करेंगे और कानून बनेगा।

चुनाव से पहले भी धामी ने अपनी रैलियों में यूनिफॉर्म सिविल कोड का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि कानून को तैयार करने के लिए वह कमेटी का गठन करेंगे, जिसमें कानूनी एक्सपर्ट, वरिष्ठ नागरिक और बुद्धिजीवी शामिल होंगे। बता दें कि समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड का अर्थ होता है भारत में रहने वाले हर नागरिक के लिए एक समान कानून होगा, चाहे वह किसी भी धर्म या जाति का क्यों न हो। समान नागरिक संहिता में शादी, तलाक और जमीन-जायदाद के बँटवारे में सभी धर्मों के लिए एक ही कानून लागू होगा।

उत्तराखंड (Uttarakhand) में जीत के बाद बीजेपी ने पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) पर दोबारा भरोसा जताया है। अपनी सीट नहीं बचा पाने के बावजूद धामी दोबारा सूबे की सत्ता सँभालेंगे। पुष्कर सिंह धामी ने खटीमा (Khatima) से चुनाव लड़ा था, जहाँ उन्हें हार का सामना करना पड़ा, जिसके बाद से ऐसी अटकलें थी कि बीजेपी धामी को दोबारा मुख्यमंत्री नहीं भी बनाएगी। हालाँकि ये अटकलें गलत साबित हुई। धामी ने इस बात के लिए पार्टी और पीएम मोदी का आभार जताया था। उन्होंने कहा था कि सामान्य से पार्टी कार्यकर्ता पर इतना भरोसा जताने के लिए वह बीजेपी नेतृत्व का धन्यवाद करते हैं।

उत्तराखंड के चुनाव नतीजों की बात करें तो भारतीय जनता पार्टी ने 70 में से 47 सीटों पर जीत हासिल की थी। वहीं कॉन्ग्रेस 19 सीटों पर सिमट गई थी। इसके अलावा बहुजन समाज पार्टी को 2 सीट मिली थी। 2 ही सीटों से निर्दलीय प्रत्याशी जीतकर आए थे।

पहले स्कूल खोलने का दिखावा, अब शरिया का हवाला: तालिबान ने गर्ल्स स्कूलों को फिर किया बंद, रोती हुई लौटीं छात्राएँ

अपनी कट्टरपंथी विचारधारा को लेकर कुख्यात अफगानिस्तान का तालिबान शासन दुनिया को भ्रमित करने का काम कर रहा है। दुनिया भर के देशों से अपनी मान्यता हासिल करने के लिए तालिबान खुद को उदार दिखाने का प्रयास करता है, लेकिन वापस अपनी असली विचारधारा पर आ जाता है। लड़कियों के स्कूलों को खोलने की घोषणा करने के बाद कुछ ही समय बाद तालिबान ने उन्हें बंद करने का आदेश दे दिया।

तालिबान ने बुधवार (23 मार्च) को कहा कि लड़कियों सेकेंडरी स्कूल तब तक बंद रहेंगे, जब तक कि उन्हें फिर से खोलने के लिए शरिया के अनुसार योजना नहीं बनाई जाती। तालिबान द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है, “हम सभी गर्ल्स हाई स्कूलों और उन स्कूलों को सूचित करते हैं जिनमें कक्षा छह से ऊपर की छात्राएँ हैं कि वे अगले आदेश तक बंद हैं।”

दरअसल, लड़कियों के स्कूलों को खोलने की घोषणा के बाद छात्राएँ उत्साह के साथ स्कूल लौटी थीं, लेकिन कुछ समय ही उन्हें घर लौटने के लिए कह दिया गया। इस दौरान कई लड़कियाँ रोने लगीं। नाम नहीं छापने की शर्त पर एक छात्रा ने रॉयटर्स को बताया, “हम सभी निराश हो गए हैं। जब प्रिंसिपल ने हमें बताया तो सभी ने उम्मीदें खो दीं और रोने लगीं।”

अफगानिस्तान के शिक्षा मंत्रालय ने पिछले हफ्ते घोषणा की थी कि हाई स्कूल की लड़कियों की शिक्षा के लिए बुधवार को स्कूलों को खोल दिया जाएगा। मंगलवार (22 मार्च) को शिक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने सभी छात्राओं को स्कूलों में लौटने का आग्रह करते हुए उन्हें बधाई देते हुए वीडियो भी जारी किया था। में लौटने पर बधाई देते हुए एक वीडियो जारी किया।

अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने तालिबान शासन से बार-बार कहा है कि अफगानिस्तान में महिलाओं की शिक्षा पर प्रतिबंध न लगाया जाए। तालिबान शासन को मान्यता देने की शर्तों में वहाँ की महिलाओं को शिक्षा देने के लिए उपाय करना एक प्रमुख शर्त है।

दरअसल, 15 अगस्त 2021 को अफगानिस्तान पर दोबारा कब्जा करने के बाद तालिबान ने लड़कियों को स्कूल जाने पर प्रतिबंध लगा दिया था। इससे पहले 1996 से 2001 तक के अपने पहले शासन में भी तालिबान ने लड़कियों की पढ़ाई और उन्हें काम करने से रोक दिया था।

तालिबान की इस घोषणा पर अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र मिशन (यूएनएएमए) ने इसे निराशाजनक और अपने वादे से मुकरने वाला बताते हुए एक बयान में कहा, “अफगानिस्तान में तालिबान द्वारा आज 6वीं कक्षा से ऊपर की छात्राओं को स्कूल लौटने की अनुमति देने पर अनिश्चितकालीन प्रतिबंध लगाने की घोषणा का संयुक्त राष्ट्र निंदा करता रहे हैं।”

‘सरकारी काफिर मारे जाएँगे, तब वापस होगी CAA-NRC’: सलीम खान को कोर्ट का जमानत देने से इनकार, दिल्ली दंगों की रची थी साजिश

दिल्ली दंगों में साजिश रचने के मामले में आरोपित मोहम्मद सलीम खान को दिल्ली की एक अदालत ने मंगलवार (22 मार्च, 2022) को जमानत देने से इनकार कर दिया। 

कोर्ट ने गवाहों के बयानों का हवाला देते हुए अपने आदेश में कहा कि खान चाँद बाग विरोध स्थल के आयोजकों में से एक था, जहाँ भड़काऊ भाषण दिए गए थे। अदालत ने कहा कि उसने दिल्ली में यातायात को बाधित करने (चक्का जाम) की कोशिश की और 23 जगहों पर योजनाबद्ध तरीके से विरोध प्रदर्शन करने की साजिश रची।

कोर्ट ने कहा कि उसका इरादा यातायात की आवाजाही को बाधित करना था जिसके परिणामस्वरूप उत्तर-पूर्वी दिल्ली में रहने वाले लोगों के लिए आवश्यक सेवाएँ बाधित हुई। उसने विभिन्न तरीकों से हिंसा करने की साजिश रची, जिसके कारण फरवरी 2020 के दिल्ली दंगे हुए। कोर्ट ने कहा कि इस एरिया को पूरी तरह से घेरने की योजना थी ताकि इस क्षेत्र से लोगों के प्रवेश करने और निकलने से पूरी तरह से रोका जा सके।

कोर्ट ने कहा, “टारगेट था … पूरे क्षेत्र को नागरिकों के आने और जाने को पूरी तरह से रोकना … और फिर महिला प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों पर हमला किया। इससे क्षेत्र में दंगा भड़क गया।” अदालत के मुताबिक यह ‘आतंकवादी अधिनियम’ (Terrorist Act) के अंतर्गत आएगी।

साथ ही कोर्ट ने कहा कि जिस तरह से हथियारों का इस्तेमाल हुआ और हमले हुए, उससे साफ था कि यह एक पूर्व नियोजित साजिश थी। आदेश में कहा गया है, “ऐसे कार्य जो भारत की एकता और अखंडता के लिए खतरा पैदा करते हैं और सांप्रदायिक सद्भाव में टकराव पैदा करते हैं, किसी भी वर्ग में आतंक पैदा करते हैं, उन्हें हिंसा में घिरा हुआ महसूस कराते हैं, वह भी एक आतंकवादी एक्ट है।”

सीसीटीवी फुटेज का उल्लेख करते हुए, कोर्ट ने कहा, “अभियोजन द्वारा दायर किए गए फुटेज में दंगाइयों को इकट्ठा करने का एक ठोस और पूर्व नियोजित प्रयास दिखता है। उनके हाथ में हथियार हैं। उन्होंने मुख्य वजीराबाद मार्ग को ब्लॉक कर दिया और बेहद ही क्रूर तरीके से पुलिसकर्मियों पर हमला किया।”

सलीम खान दिल्ली दंगों में भीड़ का हिस्सा था

दिल्ली दंगों में सलीम खान की भूमिका के बारे में बात करते हुए, दिल्ली कोर्ट ने उल्लेख किया कि खान को भीड़ का हिस्सा पाया गया था। कोर्ट ने कहा कि वह 24 फरवरी, 2020 को भीड़ में मौजूद था। भीड़ के पास पत्थर, डंडे, तलवारें और डंडे थे।

कोर्ट ने एक गवाह का हवाला दिया, जो चाँद बाग विरोध स्थल के पास रहता था। उन्होंने अपने बयान में कहा कि सलीम खान चाँद बाग में 15 जनवरी, 2020 के आसपास शुरू हुए विरोध प्रदर्शन के आयोजकों में से एक था। उसने आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को भी धरना स्थल पर जाकर पैसे बाँटते देखा। हुसैन ने कथित तौर पर प्रदर्शनकारियों से कहा, “यह पैसा हमारे कौम की मदद के लिए आएगा।”

एक अन्य गवाह का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि साजिशकर्ताओं ने लोगों को धर्म के आधार पर सरकार के खिलाफ भड़काया। गवाह के मुताबिक, साजिशकर्ता ने लोगों से कहा था, “भाषणों की सामग्री अन्य बातों के साथ-साथ यह होगी कि सरकार को सीएए/एनआरसी को वापस लेने के लिए मजबूर होना पड़ेगा और इसके लिए हिंसा और चक्काजाम का इस्तेमाल करना होगा।”

इसके अलावा, मुख्य वजीराबाद रोड पर, हेड कांस्टेबल रतन लाल, पुलिस उपायुक्त (शाहदरा), और सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) गोकुल पुरी पर प्रदर्शनकारियों ने हमला किया। एसीपी और डीएसपी गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि रतन लाल की बेरहमी से हत्या कर दी गई। कोर्ट ने कहा कि सलीम खान दंगाइयों के बीच मौजूद था और बाद में उसकी पहचान की गई।

खान ने एक भाषण में कहा था, “जब तक सरकारी अधिकारी और काफिर नहीं मारे जाते, यह सरकार सीएए/एनआरसी वापस नहीं लेगी।”

‘नाजुक’ लालू यादव को दिल्ली एम्स ने 24 घंटे के भीतर ही कर दिया डिस्चार्ज, मेडिकल रिपोर्ट पर उठ रहे हैं सवाल

चारा घोटाले में सजायाफ्ता राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) को दिल्ली एम्स ने 24 घंटे के भीतर ही डिस्चार्ज कर दिया है। उन्हें मंगलवार (22 मार्च 2022) को राँची स्थित रिम्स से यहाँ लाया गया था। उनकी हालत नाजुक बताई गई थी। डिस्चार्ज किए जाने के बाद उनके मेडिकल रिपोर्ट पर सवाल उठ रहे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, राँची के राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान में मेडिकल बोर्ड की बैठक में मंगलवार को ये तय हुआ था कि लालू यादव को दिल्ली रेफर किया जाए। वहाँ लालू यादव का क्रिएटनिन लेवल 4.1 से बढ़कर 4.6 हो गया था। इसके बाद उन्हें दिल्ली एम्स के इमरजेंसी वार्ड में रखा गया। डॉक्टरों ने सेहत ठीक पाते हुए उन्हें सुबह तीन बजे ही छुट्टी दे दी और उन्हें रिम्स में अपना इलाज कराने को कहा।

न्यूज एजेंसी एएनआई भी सूत्रों के ह​वाले से बताया है, “राजद नेता लालू प्रसाद यादव कल रात करीब नौ बजे AIIMS पहुँचे। उन्हें निगरानी के लिए आपातकालीन वार्ड में भर्ती कराया गया था। बाद में डॉक्टरों की सलाह पर उन्हें छुट्टी दे दी गई। वह कुछ समय तक विभिन्न टेस्ट के लिए निगरानी में रहेंगे।” रिपोर्ट के अनुसार उन्हें अब वापस रिम्स भेजा जाएगा।

गौरतलब है कि आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव चारा घोटाले में सजायाफ्ता हैं। उन्होंने डोरंडा कोषागार से गलत तरीके से 139.5 करोड़ रुपए की अवैध निकासी मामले में सीबीआई कोर्ट ने पाँच साल की सजा सुनाई थी। इसके अलावा लालू पर 60 लाख रुपए का जुर्माना भी कोर्ट ने ठोका था। खराब स्वास्थ्य के आधार पर उन्हें जेल से रिम्स में एडमिट किया गया था। 1996 में इस मामले में राँची के डोरंडा थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी।

साल 1990–92 में डोरंडा ट्रेजरी से 139.35 करोड़ रुपए की अवैध निकासी की गई थी। CBI जाँच के मुताबिक इस केस में पशुओं को हरियाणा और दिल्ली से बाइक पर राँची तक ढोने की कहानी गढ़ी गई थी। इन पशुओं में सांड और भैंसे भी शामिल थे। इस जाँच में नेता और अफसर सभी शामिल पाए गए थे। दिल्ली और हरियाणा से इन पशुओं को बिहार लाने के पीछे अच्छी नस्ल के जानवर तैयार करना बताया गया था।

नंबी नारायणन को दुबई में स्टैंडिंग ओवेशन: आर माधवन ने बनाई है फिल्म, वैज्ञानिक के साथ हुआ था अपराधियों की तरह व्यवहार

‘कभी-कभी एक आदमी के साथ अन्याय होना, पूरे राष्ट्र के साथ अन्याय होने जैसा है।’ – अभिनेता आर माधवन (R Madhavan) के निर्देशन में बनने वाली उनकी पहली फिल्म ‘रॉकेट्री: द नंबी इफेक्ट’ (Rocketry: The Nambi Effect) इस भावना को बेहद खूबसूरती से पूरी दुनिया के सामने लाती है। यह फिल्म केरल के जाने माने रॉकेट वैज्ञानिक नंबी नारायणन (Nambi Narayanan) की कहानी है। हाल ही में ‘एक्सपो 2022 दुबई’ में ‘रॉकेट्री: द नंबी इफेक्ट’ के ट्रेलर स्क्रीनिंग के बाद प्रतिष्ठित इसरो अंतरिक्ष वैज्ञानिक नंबी नारायणन के लिए शानदार स्टैंडिंग ओवेशन हुआ।

एक्सपो 2022 कार्यक्रम में जब वैज्ञानिक की बायोपिक का ट्रेलर दिखाया गया, तो दर्शक भावुक हो गए और उन्होंने नंबी नारायणन के सम्मान में खड़े होकर तालियाँ बजाईं। इस दौरान जब नंबी नारायणन से पूछा गया कि उन्होंने अपनी कहानी बताने के लिए आर माधवन को ही क्यों चुना। इस पर रॉकेट वैज्ञानिक ने कहा, “मैं किसी ऐसे व्यक्ति को चाहता था जो वास्तव में एक इंजीनियर होने का अर्थ समझे। माधवन खुद एक इंजीनियर हैं, इसलिए मैंने उन्हें अपनी कहानी बताई। जब मैं उन्हें समझा रहा था कि मैंने एपीजे अब्दुल कलाम की जान कैसे बचाई, तो उन्हें तुरंत वह मिल गया जो मेरा मतलब था।”

‘रॉकेट्री: द नंबी इफेक्ट’ को हिंदी, तमिल, तेलुगु, मलयालम और अंग्रेजी भाषा में 1 जुलाई 2022 को दुनिया भर में रिलीज किया जाएगा। फिल्म के निर्देशक, निर्माता और लेखक आर माधवन रॉकेट्री: द नंबी इफेक्ट में नंबी नारायणन का किरदार निभा रहे हैं। उन्होंने फिल्म का निर्देशन, निर्माण और लेखन भी किया है। सिमरन, रजित कपूर, रवि राघवेंद्र, मिशा घोषाल, गुलशन ग्रोवर, कार्तिक कुमार और दिनेश प्रभाकर के जैसे कलाकारों के साथ इस फिल्म में शाहरुख खान और सूर्या भी दिखाई देंगे।

फिल्म का प्री-प्रोडक्शन कार्य 2017 की शुरुआत में ही शुरू हो गया था। अक्टूबर 2018 में इसका टीजर जारी कर दिया गया था। भारत के अलावा जॉर्जिया, रूस, फ़्रांस और सर्बिया में इस फिल्म की शूटिंग हुई है।

बता दें कि 30 नवंबर 1994 की बात थी, जब कुछ पुलिस वाले नंबी नारायणन के घर पर आ धमके। उन्होंने कहा कि DIG आपसे बात करना चाहते हैं। जब नंबी ने पूछा कि क्या उन्हें गिरफ्तार किया जा रहा है, तो पुलिसकर्मियों ने ना में जवाब दिया। उन्हें पुलिस की गाड़ी में आगे बिठा कर ले जाया गया था (अपराधियों को अक्सर पीछे बिठाया जाता है)।

‘मुस्लिम महारानी’ के ब्रा पर पाकिस्तान में हंगामा, Ertugrul वाली हिरोइन को पड़ रही गाली 

तुर्की के टीवी धारावाहिक दिरिलिस एर्तुगरुल में हलीमा सुल्तान का किरदार निभाने वाली तुर्की अभिनेत्री इसरा बिल्जिक से पाकिस्तानी नाराज हैं। कारण है कि यह अभिनेत्री इस्लामी धारावाहिक में मुस्लिम महारानी के किरदार में नजर आई थीं और अब उन्होंने ब्रा पहनकर विक्टोरिया सीक्रेट का विज्ञापन किया है।

बिल्जिक ने कंपनी के साथ अपनी साझेदारी की वीडियो अपने इंस्टा पर शेयर की जिसमें वह विक्टोरिया सीक्रेट के नए कलेक्शन लव क्लाउड का प्रमोशन कर रही हैं। इस विज्ञापन को बिल्जिक ने जैसे ही अपलोड किया वैसे ही पाकिस्तानी फैन उस पोस्ट के कमेंट सेक्शन में आ धमके और नैतिकता का पाठ पढ़ाते हुए दुख जताने लगे कि तुर्की अभिनेत्री ने उनकी भावनाओं से खिलवाड़ किया।

पाकिस्तानियों ने लिखा, “शर्म आनी चाहिए! हलीमा का किरदार निभाने के बाद तुम्हें ऐसी पोशाक पहनते हुए शर्म आनी चाहिए।” अभिनेत्री के कमेंट सेक्शन में पाकिस्तानियों को गाली देते देखा जा सकता है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या इस ऐड के जरिए वह नग्नता को बढ़ावा देना चाहती हैं।

इन मुस्लिम कट्टरपंथियों का सवाल है कि अगर यही सब करना था तो फिर दिरिलिस एर्तुगरुल सीरिज में काम क्यों किया था। ये लोग एक्ट्रेस को धमका रहे हैं कि अगर उन्होंने नग्नता को बढ़ावा दिया तो जल्द ही वो अपनी प्रसिद्धि खो देंगी।

एक यूजर ने कहा, “हलीमा सुल्तान भाभी ये क्या कर रही हो, अगर दिरिलिस एर्तुगरुल भाई ने इस तरह ब्रा में देखा तो तुम्हें झापड़ पड़ेगा। कृपया ऐसे न दिखाएँ।”

यूजर्स कहते हैं कि हलीमा बनकर एक्ट्रेस ने लोगों के दिल में जगह बनाई थी लेकिन अब वह सिर्फ सफरत पाएँगी। एक कट्टरपंथी उन्हें कहता है, “अगर तुम्हें पैसे ही चाहिए तो तुम पाकिस्तानियों से माँग लो लेकिन इस्लामी संस्कृति को नष्ट मत करो।”

बता दें कि बिल्जिक ने पहली दफा इस प्रकार की आलोचना का सामना नहीं किया। पिछले साल भी सोशल मीडिया यूजर्स ने उन्हें निजी तस्वीरों पर कोसा था। जिसके बाद एक्ट्रेस ने बड़ी नरमी से ऐसे फॉलोवर्स को सलाह दी थी कि अगर उन लोगों को उनके पहनावे से दिक्कत है तो वो उन्हें अनफॉलो कर दें।

बीवी के सामने रियाज नाबालिग से करता कुकर्म: 7 महीने से कैद कर 18 घंटे कराता काम और खाने में देता बिस्किट, भागने पर तलवा जलाया

राजस्थान की राजधानी जयपुर (Jaipur, Rajasthan) में एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसे सुनकर मानवता भी शर्मसार भी हो जाएगी। शौहर मोहम्मद रियाज (27) और बीवी रुही परवीन (25) ने एक नाबालिग बच्चों के साथ ना सिर्फ मारपीट की, बल्कि शराब के नशे में रियाज उसके साथ कुकर्म भी किया। इतना ही नहीं, नाबालिग बंधकर बनाकर रखा गया और खाने के नाम पर उसे बिस्किट और पानी दिया जाता है। पुलिस ने रुही को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि रियाज फरार है।

मामला जयपुर के मक्का मस्जिद इलाके का है। मंगलवार (22 मार्च) को 12 साल का एक बच्चा रेंगकर छत पर पहुँचा और वहाँ से वह रोड पर पहुँच गया। गुजरते लोगों से अपनी जान बचाने की गुहार लगाते हुए मदद माँगने लगा। स्थानीय लोगों ने बच्चे की हालत देखकर पुलिस और चाइल्ड हेल्पलाइन को फोन कर मामले की जानकारी दी। लोगों का कहना था कि उन्होंने इस बच्चे को कॉलोनी में पहले कभी नहीं देखा था।

सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुँची और बच्चे को देखा तो उसके शरीर पर हर तरफ जख्म थे। उसके तलवे जले हुए थे और वह अपने खड़ा नहीं हो पा रहा था। उसने बताया कि रुही ने उसे छत की सफाई के लिए भेजा था और वह रेंगते हुए पड़ोसी के छत पर चला गया और सीढ़ियों से होता रोड पर चला आया।

दैनिक भास्कर के अनुसार, पूछताछ में नाबालिग ने पुलिस को बताया कि दोनों शौहर-बीवी काम के बहाने उसे अपने साथ लेकर आए थे। उसे सुबह 7 बजे से रात के 12 बजे तक काम कराया जाता था। जब उसे भूख लगती थी तो उसे खाने के लिए बिस्किट और पानी देते थे। दोनों उसके साथ रोजाना मारपीट करते थे।

बच्चे का कहना है कि रियाज शराब के नशे में उसके साथ कुकर्म करता था और उसकी बीवी उसका साथ देती थी। जब उसने भागने की कोशिश की तो उसके तलवे जला दिए। बच्चे का कहना है कि उसे बंधक बनाकर रखा गया था और पिछले 7 महीने से उसने धूप नहीं देखा है। उससे चूड़ियाँ बनाने के साथ घर के साथ काम कराए जाते थे।

बच्चा बिहार के दरभंगा जिले के हयाघाट बिलासपुर का रहने वाला है। उसके घर की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है। उसके पिता ने गाँव के ही रहने वाले इन दोनों आरोपित के साथ काम करने के लिए उसे जयपुर भेज दिया। बच्चा जब भी अपने माता-पिता से बात करने के लिए कहता था तो उसे जबरन कहलवाया जाता था कि वह जयपुर में ठीक है और उसे कोई दिक्कत नहीं है।

पहले मुस्लिम भीड़ ने पीटा, फिर पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई के आरोप: 30 हिन्दू परिवारों का पलायन, होली के DJ पर हुआ था विवाद

होली के दिन उत्तर प्रदेश के बदायूँ जिले में डीजे बंद करने को लेकर हुए विवाद के बाद मुस्लिमों और हिंदुओं में मारपीट हुई। दोनों पक्षों में पत्थरबाजी के दौरान एक दारोगा और सिपाही समेत 9 लोग घायल हुए हैं। इस मामले में ग्राम प्रधान बेगम जैनब के पति मुहम्मद रिजवान की शिकायत पर पुलिस ने 17 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इस बीच अब 30 हिंदू परिवारों ने वहाँ से पलायन किया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, ये घटना कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले अल्लापुर भोगी गाँव की है। होली का दिन था और उसी दिन इस्लामिक पर्व शब-ए-बारात भी थी। होली होने के कारण हिंदू डीजे बजा रहे थे। वहीं मुस्लिम जुलूस निकालते हुए कब्रिस्तान में चिराग जलाने के लिए जा रहे थे। मुस्लिमों ने म्यूजिक सिस्टम को बंद कराने की कोशिश की। दारोगा विकेश कुमार ने भी हिंदुओं से ही डीजे को बंद करने को कहा। इसी को लेकर विवाद शुरू हो गया, जिसके बाद दोनों पक्षों की ओर से पथराव हुआ और इसमें कई लोग घायल हुए।

बाद में फोर्स के बल पर लोगों को खदेड़ा गया। मौजूदा ग्राम प्रधान जैनब के पति रिजवान ने पूर्व प्रधान वली मुहम्मद पर हिंदुओं को भड़काने का आरोप लगाया है। रिजवान ने वली मुहम्मद समेत 17 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर लिखाई है, जिसके आधार पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, मेवाराम, मुकेश समेत कई अन्य ग्रामीणों का आरोप था कि ग्राम प्रधान रिजवान, गुड्डू और तारिक समेत करीब 150 लोगों ने हिंदुओं पर हमला कर दिया था। बावजूद इसके इनके खिलाफ पुलिस ने केस दर्ज ही नहीं किया।

साभार: दैनिक जागरण

एसएसपी से मिले लोग

इस बीच हिंदू समुदाय जिले के एसएसपी डॉ ओपी सिंह से मिला। अवधेश, अशोक और देवीदास ने एसएसपी को बताया कि दारोगा विकेश ने केवल मुस्लिम पक्ष की शिकायत पर एकतरफा कार्रवाई की है। दबिश के नाम पर वो लोगों को प्रताड़ित कर रहे हैं और इससे परेशान होकर गाँव के 30 परिवारों ने पलायन कर दिया है। ये लोग अपने रिश्तेदारों के घरों में रह रहे हैं।

बहरहाल एसएसपी ओपी सिंह ने कहा है कि अगर लोगों के पलायन की खबर सही है तो वे लोगों से बात कर उन्हें सुरक्षा का भरोसा दिलाएँगे।

बदायूँ पुलिस का कहना है कि मामले में आगे की जाँच की जा रही है और जाँच के बाद ही जरूरी कार्रवाई की जाएगी।

संवेदनशील रहा है अल्लापुर भोगी गाँव

अल्लापुर भोगी गाँव को अति संवेदनशील इलाका माना जाता है। यहाँ की प्रधान रिजवान की बीवी जैनब हैं, जिन्होंने पूर्व प्रधान वली मोहम्मद के भतीजे को हराया था। आरोप है कि चुनावी रंजिश के चलते ही वली मोहम्मद ने ये विवाद कराया था।

छत्तीसगढ़: महासमुंद में 1250 लोगों ने की घर वापसी, विश्व कल्याण महायज्ञ में प्रबल प्रताप जूदेव ने गंगाजल से पखारे सबके चरण

छत्तीसगढ़ में 1250 लोगों ने सनातन धर्म में वापसी की है। महासमुंद के कटांगपाली गाँव में मंगलवार (22 मार्च 2022) को आयोजित विश्व कल्याण महायज्ञ में इनलोगों ने घर वापसी की। महायज्ञ का आयोजन आर्य प्रतिनिधि समाज की ओर से किया गया था। बीजेपी के प्रदेश मंत्री प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने ईसाई मिशनरियों के शिकार हुए इनलोगों के गंगाजल से चरण पखार कर मूल धर्म में वापसी करवाई।

इस दौरान जूदेव ने कहा कि जब तक धर्मांतरण के शिकार हुए हर व्यक्ति की सनातन धर्म में वापस नहीं होती है तब तक घर वापसी का अभियान लगातार चलता रहेगा। उन्होंने उपस्थित लोगों से हिंदुओं का जबरन धर्मांतरण कराने वालों का विरोध करने की भी अपील की। इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से स्वामी देव नंद, आचार्य अंशुदेव आर्य, राजेन्द्र भाई साहब, नंदकुमार साय, पंडित ऋषिराज आर्य, पंडित पंकज भारद्वाज, रामचन्द्र अग्रवाल समेत अन्य लोग मौजूद थे।

गौरतलब है कि इससे पहले छत्तीसगढ़ के पत्थलगाँव के खूँटापानी में 400 परिवार के 1200 लोगों को हिंदू धर्म में वापसी की थी। प्रबल प्रताप सिंह ने उस कार्यक्रम का हिस्सा बनते हुए कहा था कि हिंदुत्व की रक्षा करना उनके जीवन का एकमात्र संकल्प है। उन्होंने बताया था कि घर वापसी करने वाले अधिकांश परिवार बसना सराईपाली के थे। हिंदू धर्म में लौटने वाले परिवारों ने बताया था कि करीब 3 पीढ़ी पहले उनके पूर्वजों का धर्मांतरण हुआ था। उस वक्त वे बेहद गरीब थे और मिशनरियों की ओर से कुछ आर्थिक मदद और बीमारियों में इलाज की सहायता मिलने का प्रलोभन मिलने के बाद धर्म परिवर्तन कर लिया था।

बता दें कि प्रबल प्रताप सिंह जूदेव के पिता दिलीप सिंह जूदेव अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मंत्री थे। राजपरिवार से जुड़े दिलीप सिंह जूदेव ने ही चरण पखारकर उन आदिवासियों की मूल धर्म में वापसी करवाने का अभियान शुरू किया था जो ईसाई मिशनरियों के झाँसे में आ धर्म परिवर्तन कर लेते थे। अगस्त 2013 में उनके निधन के बाद से इस सिलसिले को उनके बेटे प्रबल प्रताप सिंह जूदेव आगे बढ़ा रहे हैं। 

हाल ही में प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने ऑपइंडिया से बातचीत में कहा था, “पिता जी के दिवंगत होने के बाद से मैं इस कार्य को आगे बढ़ा रहा हूँ। छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा जैसे राज्यों में हमलोग 10 हजार से अधिक लोगों की इस तरह के कार्यक्रमों के जरिए घर वापसी करवा चुके हैं। कोरोना महामारी के कारण बीच में करीब दो साल हमारा यह अभियान रुक गया था। अब फिर से हम इसे गति दे रहे हैं। यह पवित्र काम है। देश निर्माण का काम है। इसे मेरे पिता ने शुरू किया और इससे जुड़कर मैं बहुत गौरवान्वित हूँ।”

कर्नाटक: महालिंगेश्वर मंदिर के वार्षिक महोत्सव में केवल हिंदू लगाएँगे दुकान, शिवमोगा और उडुपी के मंदिर भी कर चुके हैं ऐलान

कर्नाटक में पिछले दिनों हिजाब विवाद के कारण जो माहौल बना उसके बाद राज्य के कई मंदिरों ने अपने वार्षिक महोत्सव कार्यक्रमों में स्टॉल लगाने की अनुमति केवल हिंदुओं तक सीमित कर दी है। हाल में पुत्तुर जिले में स्थित महालिंगेश्वर मंदिर ने शहर में होने वाले वार्षिक जात्रा उत्सव के मौके पर केवल हिंदुओं को ही स्टॉल लगाने की अनुमति दी है। ये समारोह 10 से 20 अप्रैल के बीच शहर में होगा। ऐसे में अस्थायी स्टालों की नीलामी केवल हिंदुओं के लिए सीमित है। मंदिर के प्रशासन ने इस संबंध में 19 मार्च 2022 को द हिंदू में एक नोटिस भी निकाला।

शिवमोगा और उडुपी मंदिरों का फैसला

इससे पहले शिवमोगा में कोटे मरिकंबा जात्रा की आयोजन समिति ने 22 मार्च से शुरू हुए 5 दिवसीय उत्सव के दौरान केवल हिंदू दुकानदारों को अपनी दुकानें स्थापित करने की अनुमति देने का फैसला किया था। इसी तरह कर्नाटक के उडुपी में होसा मारिगुडी मंदिर ने भी अपने वार्षिक मेले में केवल हिंदू विक्रेताओं को दुकानें आवंटित करने का निर्णय लिया। मंदिर ने यह फैसला क्षेत्र में हुए हिजाब विवाद के बाद लिया और समिति ने ऐलान किया कि वार्षिक ‘सुग्गी मारी पूजा’ में केवल हिंदू दुकानें लगाएँगे।

महालिंगेश्वर मंदिर प्रशासन का नोटिस

शिवमोगा और उडुपी की तरह महालिंगेश्वर मंदिर ने भी इस रास्ते को अपनाया है। नोटिस में लिखा है कि केवल हिंदू विक्रेताओं को ही जोथ्रावटी उत्सव में भाग लेने की अनुमति है, जो कि अप्रैल में होगा । जात्रा के दौरान मंदिर के सामने पूजा 29 मई को होगी और अस्थायी दुकानदारों को  मंदिर कार्यालय द्वारा दी गई जमीन पर दुकान लगाने की अनुमति होगी।

शिवमोगा में हुई थी बजरंग दल कार्यकर्ता की हत्या

याद दिला दें कि पिछले दिनों कर्नाटक में हिजाब को लेकर जो बखेड़ा किया गया उसमें इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा हर्षा नामक बजरंग दल कार्यकर्ता की हत्या की गई थी। ऐसे में वहाँ हो रहे मरिकंबा उत्सव से मु्स्लिम दुकानदारों को बाहर रखा गया। मंदिर समिति के अध्यक्ष एसके मरियप्पा ने संवाददाताओं से कहा कि अतीत में कभी भी स्थिति सांप्रदायिक नहीं थी, लेकिन हाल के घटनाक्रम और सोशल मीडिया पर शुरू किए गए अभियानों ने उन्हें इस माँग को मानने पर मजबूर किया।

हिजाब विवाद और पूरा बवाल

बता दें कि पिछले दिनों हिजाब विवाद पर कर्नाटक हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाया था। हाई कोर्ट ने फैसले में कहा था कि हिजाब पहनना कोई इस्लाम में कोई अनिवार्य प्रथा नहीं है इसलिए स्कूल में ड्रेस कोड को मानना ही होगा। इस फैसले के बाद राज्य के मुस्लिमों ने विरोध जताने के लिए बंद का ऐलान किया और इस विरोध को देखते हुए हिंदू मंदिरों ने भी अपने वार्षिक महोत्सव में केवल हिंदुओं को स्टॉल लगाने की अनुमति दी। ये महोत्सव अप्रैल-मई में होंगे।