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केरल: जज कलाम पाशा ने बंद करवा दिया नीना प्रसाद का मोहिनीअट्टम, आँखों में आँसू और अपमानित हो मंच से गईं प्रसिद्ध नृत्यांगना

केरल के पलक्कड़ (Palakkad) जिला जज कलाम पाशा फिर से विवादों में हैं। उन पर मोहिनीअट्टम की प्रसिद्ध नृत्यांगना डॉक्टर नीना प्रसाद का कार्यक्रम रुकवाने का आरोप है। घटना शनिवार (19 मार्च 2022) शाम की है, जब प्रसाद पलक्कड के सरकारी मोयन एलपी स्कूल में मंचन कर रहीं थी। बताया जाता है कि कार्यक्रम रोके जाने के बाद नीना प्रसाद की आँखों में आँसू आ गए औऱ उन्होंने इसे अपने कैरियर का सबसे कड़वा अनुभव करार दिया।

रिपोर्टों में कहा गया है कि कमाल पाशा सरकारी मोयन लोअर प्राइमरी स्कूल के पास रहते हैं। स्कूल में नीना प्रसाद का शो शनिवार शाम 8:30 बजे होना था। जज का कहना है कि यह शो उनके लिए परेशानी भरा था। इसी कारण उन्होंने इसे रोकने को कहा। जिला जज का आदेश मिलते ही पुलिस कार्यक्रम स्थल पर पहुँच गई और उसने घंटे भर के ‘सख्यम’ कार्यक्रम को रोक दिया। इसमें श्रीकृष्ण और अर्जुन के संबंधों को दर्शाया गया था। कार्यक्रम रोके जाने पर डॉ. नीना प्रसाद की आँखों से आँसू निकल आए। यहीं नहीं वरिष्ठ नृत्यांगना और उनकी टीम को स्टेज पर अपमानित भी किया गया।

इसे कड़वा अनुभव बताते हुए डॉ. प्रसाद ने कहा, “यह मेरे नृत्य कैरियर का सबसे कड़वा अनुभव था। यह न केवल मेरे लिए बल्कि उन साथी कलाकारों के लिए भी अपमानजनक अनुभव था।” प्रसिद्ध कलाकार ने जज कलाम पाशा पर मनमानी का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने इस शो के लिए डांस और कोरियोग्राफी की तैयारी में घंटों का समय दिया था। उन्होंने कहा, “यह एक ऐसा सोलो परफॉर्मेंस था, जिसके लिए मैंने काफी समय दिया था। इसे वॉयलिन, मृदंगम औऱ एडक्का जैसे शांत वाद्ययंत्रों के साथ किया गया था।”

गौरतलब है कि इस शो का आयोजन शेखरीपुरम ग्रैंडशाला ने किया था, जहाँ श्रीचित्रन एमजे के द्वारा लिखी गई किताब इतिहासंगले थेदी का विमोचन भी किया गया। इस घटना के बाद जस्टिस कलाम पाशा पर ‘सांस्कृतिक असहिष्णुता’ का आरोप लगाते हुए पुरोगमना कला साहित्य संघम के अध्यक्ष शाजी एन करुण और महासचिव अशोकन चारुविल ने सोमवार को लोगों से इसका विरोध करने का आह्वान किया। साहित्य संघ ने स्पष्ट कहा कि राज्य अपनी कला और संस्कृति का गला न घोटे।

उन्होंने कहा, “नौकरशाहों और न्यायधीशों की तुलना में केरल के लोग कलाकारों को अधिक सम्मान और महत्व देते हैं। अब वक्त आ गया है कि हमें इस बात को याद करना चाहिए के इस देश के एक प्रधानमंत्री ने एक कलाकार (एमएस सुब्बुलक्ष्मी) को एक बड़ा पद दिया था।” वहीं पुलिस ने सफाई देते हुए कहा है कि उसके पास जज के आदेश का पालन करने अलावा दूसरा विकल्प ही नहीं था।

पहले भी विवादों में रहे हैं जज कलाम पाशा

जज कलाम पाशा पहले भी विवादों से घिरे रहे हैं। पिछले साल ही पाशा पर उनकी बीवी ने उसे ‘ट्रिपल तलाक’ देने का आरोप लगाया था। पाशा की बीवी ने जज के खिलाफ कार्रवाई की माँग करते हुए केरल हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि साल 2018 में एक लेटर के जरिए कलाम पाशा ने उन्हें तीन तलाक दे दिया था।

बाद में एक अन्य पत्र में टाइपिंग मिस्टेक होने की बात कही गई। इसमें बताया गया था कि तीन तलाक देने की असली तारीख 1 मार्च, 2017 थी। इतना ही नहीं बीवी ने जस्टिस पाशा और उनके भाई पर तलाक से मना करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी देने का आरोप भी लगाया था। खास बात ये है कि कलाम पाशा के भाई बी कमाल पाशा केरल हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज हैं।

हरियाणा में जबरन धर्मांतरण पर 10 साल तक की सजा, ₹5 लाख तक जुर्माना: विधानसभा से बिल पारित, कॉन्ग्रेस ने किया विरोध

जबरन धर्मांतरण पर रोक को लेकर हरियाणा विधानसभा से बिल पास हो गया है। मंगलवार (22 मार्च 2022) को दो घंटे की चर्चा के बाद सदन ने इस पर मुहर लगाई। कॉन्ग्रेस ने इसका विरोध किया। उसके सदस्य सदन से वॉक आउट कर गए।

सरकार ने जबरन धर्मांतरण के विरुद्ध विधेयक में कड़े प्रावधान किए हैं। हरियाणा गैर-कानूनी धर्मांतरण रोकथाम विधेयक, 2022 (Haryana Prevention of Unlawful Conversion of Religion Bill, 2022) के मुताबिक, अगर लालच, बल या धोखाधड़ी के जरिए धर्म परिर्वतन किया जाता है तो एक से पाँच साल तक की सजा और कम से कम एक लाख रुपए के जुर्माना का प्रावधान है।

विधेयक के मुताबिक, जो भी नाबालिग या महिला अथवा अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के व्यक्ति का धर्म परिवर्तन कराता है या इसका प्रयास करता है तो उसे कम से कम चार साल जेल का सजा मिलेगी, जिसे बढ़ाकर 10 साल और कम से कम तीन लाख रुपए का जुर्माना किया जा सकता है।

जबरन धर्मांतरण साबित होने पर अधिकतम दस साल कैद व न्यूनतम पाँच लाख रुपए का जुर्माना होगा। इसके अलावा यदि शादी के लिए धर्म छिपाया जाता है तो 3 से 10 साल तक की जेल और कम से कम 3 लाख रुपए जुर्माना लगेगा। वहीं सामूहिक धर्म परिवर्तन के संबंध में 5 से 10 साल तक की जेल और कम से कम 4 लाख रुपए के जुर्माने का प्रावधान है। इस विधेयक के तहत किया गया प्रत्येक अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती होगा।

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने विधेयक पर बोलते हुए कहा कि इसका उद्देश्य किसी धर्म के साथ भेदभाव करना नहीं है। यह केवल जबरन धर्मांतरण के मामलों में काम करेगा। विधेयक में उन विवाहों को अवैध घोषित करने का प्रावधान है, जो पूरी तरह से एक धर्म से दूसरे धर्म में धर्मांतरण के उद्देश्य से किए गए हों। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 4 सालों में जबरन धर्मांतरण के 127 मामले दर्ज हुए हैं। धर्मांतरण एक बड़ी समस्या है। कोई अपनी इच्छा से कानूनी तरीके से अपना धर्म बदल सकता है, लेकिन अवैध धर्मांतरण के लिए अधिनियम पारित किया गया है।

वहीं नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि मौजूदा कानूनों में ही जबरन धर्मांतरण कराए जाने पर सजा का प्रावधान है, ऐसे में एक नया कानून लाए जाने की कोई जरूरत नहीं थी। कॉन्ग्रेस की वरिष्ठ नेता किरण चौधरी ने कहा कि यह विधेयक एक एजेंडे के साथ लाया गया है। इसका उद्देश्य समुदायों के बीच विभाजन को गहरा करना है, जो कि ‘अच्छा विचार’ नहीं है।

बता दें कि हरियाणा कैबिनेट ने धर्मांतरण रोकथाम विधेयक 2022 को पहले ही इजाजत दे दी थी। 4 मार्च 2022 को गृह मंत्री अनिल विज ने इस संबंध में विधानसभा में बिल पेश किया था। विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने राज्य सरकार के इस कदम की सराहना की थी। वीएचपी के संयुक्त महामंत्री सुरेंद्र जैन ने कहा था कि इस बिल से राज्य सरकार ने अपने दृढ़ संकल्प को दिखाया है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश में यह कानून बन चुका है।  

बंगाल में 8 को जिंदा जलाए जाने के बाद घर छोड़कर जा रहे स्थानीय, गवर्नर ने बताया- जंगलराज: Video अपने विवेक से देखें

पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी पार्टी के नेता की हत्या का बदला लेने के लिए TMC समर्थकों ने रामपुरहाट के घरों में आग लगाकर 8 लोगों को जिंदा जला दिया। सामने आए विजुअल्स बेहद परेशान करने वाले हैं जिसमें पुलिस घर के अंदर से मृतकों के कंकाल निकाल रही है। लोग इतना डरे हैं कि उन्होंने अपने घरों को छोड़कर दूसरी जगह जाना शुरू कर दिया है। स्थानीयों का कहना है कि वो भय से अपने घरों को छोड़ रहे हैं। पुलिस ने उन्हें किसी तरह की सुरक्षा नहीं दी। अगर दी होती तो ये सब नहीं होता।

जानकारी के मुताबिक, इस वीभत्स घटना के बाद सीआईडी ने मौके पर पहुँचकर अपनी जाँच शुरू कर दी है। इस बीच गृह मंत्रालय ने पूरी घटना पर जहाँ बंगाल सरकार से रिपोर्ट माँगी। वहीं राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने बंगाल के पुलिस अधीक्षक से केस में जाँच करने और 3 दिन के भीतर उन्हें रिपोर्ट तलब करने को कहा है। राज्य में हुई बर्रबरता को देखते हुए जगदीप धनखड़ ने भी सीएम ममता पर निशाना साधते हुए कहा है कि बंगाल हिंसा और जंगलराज के हवाले है।

राज्यपाल ने साधा CM ममता बनर्जी पर निशान

एक वीडियो ट्वीट करते हुए बंगाल राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने कहा, “भयानक हिंसा और आगजनी की घटना से संकेत मिलता है कि राज्य हिंसा की संस्कृति और जंगलराज के हवाले है। अब तक 8 लोगों की जान जा चुकी है। इस बारे में चीफ सेक्रेटरी से मैंने रिपोर्ट तलब करने को कहा है। मेरी संवेदनाएँ पीड़ितों के परिवारों के साथ हैं।”

रामपुरहाट घटना पर MHA से लेकर NCPCR ने माँगी रिपोर्ट

बता दें कि बंगाल की घटना पर केंद्र ने उनसे 72 घंटे में जवाब माँगा है। NCPCR ने भी रिपोर्ट देने के लिए 3 दिन का समय दिया है। ऐसे में ममता सरकार ने घटना की जाँच के लिए अपनी ओर से SIT गठित की है। बंगाल पुलिस इसे लगातार राजनैतिक हिंसा मानने से मना कर रही है। TMC ने मंत्री फिरहाद हकीम के नेतृत्व में अपने तीन विधायकों की टीम बनाकर उन्हें घटनास्थल का मुआएना करने भेजा है। वहीं भाजपा ने भी 5 सदस्यों की फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बनाई है जो इस मामले में रिपोर्ट दाखिल करेंगे।

राज्यपाल धनखड़ के बयान से नाराज हुईं ममता बनर्जी

राज्यपाल का बयान आने के बाद ममता बनर्जी भी नाराज दिखाई दीं। उन्होंने राज्यपाल को पत्र लिखकर कहा आग्रह किया कि इस समय किसी भी अनुचित बयान को देने से बचा जाए। राज्यपाल की टिप्पणियों को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि प्रतिष्ठित संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति के लिए अशोभनीय है। गवर्नर को संबोधित पत्र में सीएम ममता बनर्जी ने लिखा है, “आपकी बातों और बयानों का राजनीतिक स्वर होता है, जो सरकार को धमकाने के लिए अन्य राजनीतिक दलों को समर्थन देता है।”

बंगाल में 1 हफ्ते में 26 राजनैतिक हत्याएँ

उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल के बीरभूम के रामपुरहाट में टीएमसी नेता भादू शेख की बम हमले मौत के बाद हिंसा मचाई गई। उपद्रवियों ने टीएमसी नेता की मौत का बदला लेने के लिए इलाके के कई घरों को आग में झोंका जिसमें दावा है कि कुल 12 लोग जलकर मर गए। वहीं पुलिस मृतकों की संख्या 8 बताने में लगी है।

पत्रकार अभिजीत मजूमदार का दावा है कि बंगाल मे एक हफ्ते में 26 राजनैतिक हत्याएँ हुई हैं। अब नई घटना में 12 लोगों को जिंदा जला दिया गया है। इनमें महिला और बच्चे भी शामिल हैं। इसकी वजह राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने बंगाल पुलिस से रिपोर्ट माँगी  है। अभिजीत दावा करते हैं कि बंगाल अब जिहादी आतंक और कम्युनिस्ट युग के अपराधियों का अड्डा बन गया है जहाँ हिंदुओं पर अत्याचार बढ़ता जा  रहा है।

दिल्ली में हमले की फिराक में त​हरीक-ए-तालिबान, UP पुलिस से इनपुट के बाद हाई अलर्ट पर राजधानी: बाजारों में सर्च ऑपरेशन

आतंकी देश की राजधानी दिल्ली में हमले को अंजाम देने की फिराक में है। तहरीक-ए-तालिबान की इंडिया सेल की ओर से दिल्ली में बड़े ब्लास्ट की धमकी दी गई है। उत्तर प्रदेश पुलिस से मिले इनपुट के आधार पर दिल्ली में हाई अलर्ट जारी किया गया है। मंगलवार (22 मार्च 2022) देर रात तक पुलिस ने सरोजिनी नगर मार्केट समेत कई अन्य जगहों पर सर्च ऑपरेशन भी चलाया।

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के अधिकारियों के मुताबिक, आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान (इंडिया सेल) की ओर से कुछ लोगों को ईमेल भेजे गए थे, जिसमें दिल्ली में ब्लास्ट की धमकियाँ दी गई थी। बाद में लोगों ने धमकी भरे ई मेल्स को लेकर शिकायत की। यूपी पुलिस ने इसकी जानकारी दिल्ली पुलिस को दी।

इसके बाद एहतियातन दिल्ली में अलर्ट घोषित कर दिया गया है। सुरक्षा कारणों से सरोजिनी नगर मार्केट समेत कई जगहों पर सर्च ऑपरेशन चलाया गया है। पुलिस का कहना है कि ये एक ‘प्रिवेंटिव सर्च’ था। दिल्ली पुलिस ने बाजारों को बंद करने के किसी भी तरह के आदेश जारी किए जाने से इनकार किया है।

हालाँकि, सरोजिनी नगर मिनी मार्केट के ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक रंधावा का कहना है कि सुरक्षा के हालात को देखते हुए बाजार को बंद रखने की बात कही है। इस बीच यूपी पुलिस ने भी कहा कि ये धमकी भले ही दिल्ली के लिए हो, लेकिन हमने राज्य में भी अलर्ट जारी किया है। फिलहाल मेल भेजने वाले का पता करने की कोशिशें की जा रही हैं।

रिपोर्ट्स में कहा गया है कि भोपाल में आतंकियों से पूछताछ में इस बात का खुलासा हुआ है कि देश के 9 राज्यों में आतंकी वारदातों की आशंका है। ये वो राज्य हैं, जहाँ पर बांग्लादेश का आतंकी संगठन जमात-उल-मुजाहिदीन अपनी पैठ बना चुका है।

महाराष्ट्र CM उद्धव ठाकरे के साले के ₹6.5 करोड़ के 11 फ्लैट्स जब्त, मनी लॉन्ड्रिग में ED की कार्रवाई, बोले संजय राउत – वो हमारे परिवार के

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार (22 मार्च 2022) को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) के साले श्रीधर पाटनकर की करोड़ों की संपत्ति को जब्त कर लिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईडी ने आज ठाणे के नीलांबरी परियोजना में बने 11 आवासीय फ्लैट्स को सीज कर दिया, जिसकी कीमत करीब 6.45 करोड़ रुपए बताई जा रही है। बीजेपी नेता किरीट सोमैया ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी।

श्रीधर पाटनकर उद्धव ठाकरे की पत्नी रश्मि ठाकरे के भाई हैं और पुष्पक समूह में पार्टनर हैं। बताया जा रहा है कि 30 करोड़ रुपए का अनसिक्योर्ड लोन एक एंट्री ऑपरेटर नंदकिशोर चतुर्वेदी नाम के शख्स के जरिए एक शेल कंपनी श्री साईबाबा गृहिणी समिति प्राइवेट लिमिटेड के जरिए ट्रांसफर किया गया था। श्रीधर पाटनकर पर आरोप है कि उन्होंने ठाणे में इन 11 घरों को इतने ही पैसे से खरीदा था। ED को संदेह है कि ठाकरे के साले ने इन रुपए का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग करके फ्लैट्स को खरीदने में किया है।

वहीं, ईडी की कार्रवाई से बौखलाए शिवसेना नेता संजय राउत ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा, “श्रीधर माधव पाटनकर हमारे परिवार के सदस्य हैं। उनका रिश्ता महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे तक ही सीमित नहीं है। श्रीधर पर कार्रवाई भाजपा की साजिश है। ED सिर्फ महाराष्ट्र और बंगाल में कार्रवाई कर रही है, जहां बीजेपी सत्ता में नहीं है। भाजपा कितनी भी कोशिश कर ले, न बंगाल झुकेगा और न महाराष्ट्र टूटेगा।”

‘कई बार जेल जा चुके हैं तजिंदर बग्गा’: मानहानि मामले में सुब्रमण्यम स्वामी को अदालत का समन, कोर्ट ने कहा – पर्याप्त सबूत

दिल्ली की एक विशेष अदालत ने मानहानि मामले में मंगलवार (22 मार्च 2022) को राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी (Subramanian Swamy) को समन जारी किया। एसीएमएम धर्मेंद्र सिंह के मुताबिक, भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा (Tajinder Bagga) द्वारा एक ट्वीट को लेकर दायर मानहानि मामले में स्वामी के खिलाफ पर्याप्त सबूत पाए गए हैं, जिनके आधार पर अदालत ने यह आदेश दिया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, तजिंदर बग्गा ने स्वामी के खिलाफ मानहानि मामले में कार्रवाई की माँग करते हुए राउज एवेन्यू अदालत (Rouse Avenue court) का रुख किया था, जिसमें भाजपा सांसद ने आरोप लगाया था कि स्वामी ने उन्हें लेकर कहा था कि बीजेपी में शामिल होने से पहले बग्गा को कई बार जेल भेजा गया था। अदालत ने ट्वीट और गवाहों के बयानों पर विचार करने के बाद समन जारी करने का आदेश दिया।

अदालत ने माना कि वर्तमान में प्रतिवादी के खिलाफ कार्रवाई के लिए पर्याप्त सबूत हैं। शिकायत में लगाए गए आरोपों, साक्ष्यों और उनके द्वारा रिकॉर्ड में लाई गई सामग्री के मद्देनजर अदालत ने स्वामी को आईपीसी की धारा 500 के तहत समन किया। तजिंदर बग्गा के अनुसार, पिछले साल 28 सितंबर को स्वामी ने अपने ट्विटर हैंडल पर ट्वीट किया था कि दिल्ली के पत्रकारों ने मुझे सूचित किया है कि भाजपा में शामिल होने से पहले तजिंदर बग्गा को नई दिल्ली मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन द्वारा अपराधों के लिए कई बार जेल भेजा जा चुका है।

दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता ने यह भी कहा कि उस ट्वीट के बाद उन्हें उनकी पार्टी के वरिष्ठ नेता परवीन शंकर कपूर (मीडिया रिलेशन दिल्ली भाजपा के प्रमुख) द्वारा बुलाया गया था। इसके अलावा उसी दिन उन्हें दिल्ली भाजपा के उपाध्यक्ष शशि यादव का भी फोन आया था और उन्होंने भी उनसे पूछताछ की थी।

‘लता मंगेशकर ने किया था The Kashmir Files में गाने का वादा, लेकिन…’: निर्देशक ने बताया, फिल्म ने कमाए ₹210 करोड़

क्या आपको पता है कि सुर सम्राज्ञी लता मंगेशकर भी ‘The Kashmir Files’ फिल्म में गाना गाने वाली थीं? ये खुलासा खुद निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने किया है। उन्होंने बताया कि ‘द कश्मीर फाइल्स’ फिल्म के अंदर एक भी गाना नहीं है, क्योंकि ये एक त्रासदी की कहानी है और न सिर्फ एक ऐतिहासिक ड्रामा है, बल्कि नरसंहार के पीड़ितों को एक श्रद्धांजलि भी है। निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने एक कश्मीरी गायिका से स्थानीय लोकगीत को रिकॉर्ड कराया था।

विवेक अग्निहोत्री बताते हैं कि उनकी बड़ी इच्छा थी कि भारत की स्वर कोकिला कही जाने वाले लता मंगेशकर इस गाने को गाएँ। हालाँकि, तब तक लता मंगेशकर ने फिल्मों में गाने से दूरी बना ली थी और रिटायर हो गई थीं। बता दें कि उनका गायन करियर आठ दशकों का रहा था, जिसमें कई पीढ़ियों का मनोरंजन हुआ। ‘द कश्मीर फाइल्स’ के निर्देशक-निर्माता ने लता दीदी से आग्रह किया कि वो इस फिल्म में एक गाना गाएँ।

निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने TOI से बात करते हुए बताया कि उनकी पत्नी अभिनेत्री पल्लवी जोशी के लता मंगेशकर के करीबी रिश्ते रहे हैं और उनके आग्रह के बाद वो मान भी गई थीं। पल्लवी जोशी ने ‘द कश्मीर फाइल्स’ में एक वामपंथी प्रोफेसर राधिका मेनन का किरदार निभाया है। साथ ही वो फिल्म के निर्माताओं में से भी एक हैं। बकौल विवेक अग्निहोत्री, लता दीदी ने पल्लवी जोशी से वादा किया था कि कोरोना की लहर ख़त्म होते ही वो इस फिल्म के लिए गाना रिकॉर्ड करेंगी।

उन्होंने ये भी बताया कि कश्मीर दिवंगत लता मंगेशकर के दिल के काफी करीब था। बता दें कि भारत की सुर साम्राज्ञी का 6 फरवरी, 2022 को निधन हो गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उनके अंतिम दर्शन के लिए मुंबई पहुँचे थे। लता मंगेशकर को उम्र के उस पड़ाव में स्टूडियोज में जाने की सलाह नहीं थी, ऐसे में ‘द कश्मीर फाइल्स’ की टीम सब कुछ ठीक होने का इंतजार कर रही थी। लेकिन, उससे पहले उनका निधन हो गया।

विवेक अग्निहोत्री ने कहा कि लता मंगेशकर जैसी हस्ती के साथ काम करने का उनका सपना, सपना ही रह गया। बता दें कि नब्बे के दशक में इस्लामी कट्टरवादियों द्वारा कश्मीर की घाटी में कश्मीरी पंडितों के नरसंहार और उनके पलायन को दर्शाती फिल्म ने 11 दिनों में दुनिया भर में 206 करोड़ रुपए कमा लिए हैं। भारत में भी इस फिल्म ने 180 करोड़ रुपए का आँकड़ा पार कर लिया है। इसके साथ रिलीज हुई प्रभास की ‘राधे श्याम’ और एक हफ्ते बाद आई अक्षय कुमार की ‘बच्चन पांडेय’ इसकी आँधी में पिट गई।

‘32000 महिलाओं की तस्करी-धर्मांतरण, केरल को इस्लामी राज्य बनाने की साजिश’: कश्मीर फाइल्स के बाद अब ‘The Kerala Story’

कश्मीरी पंडितों के नरसंहार पर बनी निर्देशक विवेक अग्निहोत्री की फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ की बंपर सफलता के बाद अब निर्माता विपुल अमृतलाल शाह भी एक ऐसे ही गंभीर मुद्दे पर अपनी अगली फिल्म बड़े पर्दे पर ला रहे हैं। इस फिल्म का नाम ‘द केरला स्टोरी’ (The Kerala Story) है, जिसमें केरल में हजारों महिलाओं की तस्करी की दिल दहला देने वाली क्रूरता दिखाई जाएगी। मंगलवार (22 मार्च, 2022) को ‘द केरला स्टोरी’ का टीजर रिलीज किया गया। यू-ट्यूब पर शेयर किया टीजर 1 मिनट 10 सेकंड का है।

इसमें बताया गया है कि केरल से आईएसआईएस (ISIS) और दुनिया के अन्य युद्धग्रस्त क्षेत्रों के लिए हजारों महिलाओं की तस्करी की जाती है। टीजर की शुरुआत में स्क्रीन पर एक सवाल आता है, जिसमें दर्शकों से पूछा गया है कि अगर आपकी बेटी आधी रात तक घर ना आए तो आपको कैसा महसूस होगा? इसके बाद इसमें बताया गया है कि 12 सालों में केरल से हजारों लड़कियाँ गायब हुई हैं और अब तक अपने घर नहीं आईं।

फिर वर्ष 2006 से लेकर 2011 तक केरल के मुख्यमंत्री रहे वी एस अचुतानंदन इसमें कह रहे हैं, “पॉपुलर फ्रंट केरल को एक इस्लामी राज्य बनाने पर अमादा है। प्रतिबंधित संगठन एनडीएफ की तरह इनका उद्देश्य भी अगले 20 साल में केरल को मुस्लिम राज्य में परिवर्तित कर देना है।” टीजर में दिखाए गए आँकड़ों के मुताबिक, केरल में 32000 से ज्यादा महिलाओं की तस्करी की गई और उन्हें आतंकवादी संगठन आईएसआईएस को बेच दिया गया। ‘द केरला स्टोरी’ के लेखक सुदीप्ता सेन हैं और वही फिल्म का डायरेक्शन कर रहे हैं।

डायरेक्टर सुदीप्तो सेन ने बताया, “हाल ही में एक रिपोर्ट में खुलासा किया गया, वर्ष 2009 से केरल और मैंगलोर की लगभग 32000 लड़कियों को हिंदू और ईसाई से इस्लाम मजहब में कन्वर्ट किया गया है और उनमें से ज्यादातर सीरिया, अफगानिस्तान और अन्य ISIS व हक्कानी प्रभावशाली क्षेत्र में पहुँच जाती हैं।” फिल्म बनाने से पहले सुदीप्तो ने इस विषय पर काफी रिसर्च की। इस दौरान उन्हें यह भी पता चला कि अपहरण और तस्करी के जरिए गायब हुईं कुछ लड़कियाँ अफगानिस्तान और सीरिया की जेल में पाई गई थीं। इनमें से ज्यादातर लड़कियों की शादी ISIS के आतंकवादियों से की गई थी और उन्हें ‘सेक्स स्लेव’ बनाया गया था।

बता दें कि हाल ही में विद्युत जामवाल के साथ विपुल शाह ने फिल्म ‘सनक’ बनाई है, जिसे ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया गया है। इसके अलावा उनकी वेब सीरीज ‘ह्यूमन’ की भी काफी सराहना की गई है। इसमें उनकी पत्नी शेफाली शाह ने मुख्य भूमिका निभाई है।

दलित महिला से गैंगरेप में जुनैद सहित 8 गिरफ्तार, दो निकले DMK कार्यकर्ता: बोले लोग – लड़कियों को स्टालिन की पार्टी से बचाओ

तमिलनाडु के विरुधुनगर जिले में एक 22 वर्षीय दलित महिला के साथ गैंगरेप की घटना सामने आई है। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने आठ लोगों को गिरफ्तार किया है। इसमें से दो तमिलनाडु में सत्ताधारी पार्टी DMK के कार्यकर्ता हैं, जबकि चार नाबालिग हैं।

गिरफ्तार आरोपितों के नाम हरिहरन, जुनैथ अहमद, प्रवीण और मदासामी हैं। इसके अलावा 4 नाबालिगों को भी गिरफ्तार किया गया है, जो कक्षा 10-12 में पढ़ते हैं। पुलिस ने बताया कि आरोपितों ने महिला के साथ कई बार रेप किया। विरोध करने पर वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी दी। 

पुलिस के अनुसार, पीड़िता को इस मामले के मुख्य आरोपित हरिहरन ने उसके आवास के पास के एक गोदाम में मिलने का लालच दिया था। वहाँ पर उसने उसके साथ शारीरिक संबंध बनाया और इसका वीडियो भी बनाया। वीडियो वायरल करने की धमकी देकर मुख्य आरोपित व उसके साथियों ने महिला से 6 महीने तक कई बार दुष्कर्म किया।

इससे तंग आकर महिला ने हिम्मत जुटाई और विरुधुनगर ग्रामीण पुलिस स्टेशन से संपर्क किया और शिकायत दर्ज कराई। अपराधियों पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की बलात्कार संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। घटना के सामने आते ही ट्विटर पर ‘#Save_GirlsfromDMK’ ट्रेंड होने लगा। इसके बाद DMK नेता कनिमोझी ने ट्विटर पर कहा कि आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए, चाहे उनका राजनीतिक जुड़ाव कुछ भी हो। 

फोटो साभार: Twitter

वहीं तमिलनाडु भाजपा प्रमुख, अन्नामलाई ने मंगलवार (22 मार्च, 2022) को कहा कि विरुधुनगर में एक 22 वर्षीय महिला से जुड़े ब्लैकमेल और गैंगरेप की घटना के बारे में जानकर वह स्तब्ध और दुखी हैं। तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि इस शर्मनाक कृत्य में स्थानीय द्रमुक पदाधिकारी का शामिल होना अधिक चौंकाने वाला है। उन्होंने कहा कि DMK सरकार लोगों को पुलिस व्यवस्था पर विश्वास नहीं दिला पा रही है।

अन्नामलाई ने ट्वीट करते हुए कहा, “इन अपराधियों को गिरफ्तार करना एक बात है, लेकिन इस द्रमुक सरकार के तहत समग्र पुलिस व्यवस्था में सुधार करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।” उन्होंने सवाल किया, “क्या तमिलनाडु के मुख्यमंत्री अपनी पार्टी के लोगों की पकड़ से स्थानीय पुलिस को बचाएँगे?”

70 आतंकी.. Pak में ट्रेनिंग, घाटी में भेजा… J&K के पूर्व अधिकारी का खुलासा – फ़ारूक़ अब्दुल्ला चाहते तो रोक सकते थे कश्मीरी पंडितों का नरसंहार

90 के दशक में कश्मीरी पंडितों पर हुए अत्याचार और उनके पलायन के लिए जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। उस वक्त घाटी में तैनात नौकरशाह फारूक रेंजू शाह (Farooq Renzu Shah) ने कश्मीरी पंडितों पर जुल्म और उनके पलायन के पीछे की साजिशों पर पर्दा उठाते हुए अब्दुल्ला को कठघरे में खड़ा कर दिया है। उन्होंने ‘टाइम्स नाउ नवभारत’ के साथ बातचीत में कहा कि अगर तत्कालीन मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला चाहते तो कश्मीरी पंडितों का नरसंहार रुक सकता था।

अगर मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला चाहते तो क्या कश्मीरी पंडितों पर अत्याचार और उनका पलायन रोका जा सकता था? इसके जवाब में शाह ने कहा, “हाँ, हाँ, बिल्कुल रुक सकता था। पिछले 700 साल से कश्मीर के मुसलमानों और पंडितों के बीच जबर्दस्त तालमेल और दोस्ती देखने को मिली, लेकिन उसे जहरीले सियासी बयानों से तार-तार कर दिया गया।”

पूर्व डीजीपी डॉ. वैद के एक बयान का हवाला देते हुए पूर्व नौकरशाह ने कहा कि वर्ष 1989 में पाकिस्तान से प्रशिक्षित 70 आतंकियों को घाटी में उतारा गया था। दो दिन पहले डॉ. वैद ने कहा था कि 70 प्रशिक्षित आतंकवादियों को एक गुप्त गलियारे से लाकर राजनीतिक संरक्षण में रखा गया। फिर उन्हें आम लोगों के बीच भेज दिया गया। वो 70 प्रशिक्षित आतंकी कौन थे?”

वे आगे कहते हैं कि हम लोगों को केवल पाँच से छह आतंकियों के बारे में ही पता था, जिन्हें मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रूबिया सईद की फिरौती में छोड़ा गया था। उनका मानना है कि इन्हीं पाँच-छह आतंकियों ने घाटी को बर्बाद कर दिया, ये सोचना कोरा झूठ है। उनके अनुसार, वहाँ पाकिस्तान में प्रशिक्षित 70 आतंकियों को लाया गया था। शाह यह भी बताते हैं कि उस वक्त मैंने देखा कि आतंकियों ने टिकलाल टपलू को मारा, फिर भी कोई एक्शन नहीं लिया गया। ऐसा लग रहा था, जैसे कुछ हुआ ही नहीं। उसके बाद आतंकियों ने मकबूल भट्ट को फाँसी की सज़ा सुनाने वाले जज को मार दिया।

शाह का दावा है कि घाटी में कश्मीरी पंडितों के साथ जो कुछ भी हुआ, उसके लिए वहाँ की सियासी साजिश जिम्मेदार है। उन्होंने कहा, “हर कश्मीरी मुसलमान ने अत्याचार नहीं किया। एक समूह ने किया, जिसके नियंत्रण में अल सफा अखबार था। उसने ही अल सफा के पहले पन्ने पर बैनर न्यूज लगाया था कि 48 से 72 घंटे के अंदर तमाम कश्मीरी पंडित यहाँ से भाग जाएँ, नहीं तो मारे जाएँगे। अल सफा का चीफ एडिटर बाद में मारा गया, लेकिन अखबार में धमकी छपने के बाद ही कश्मीरी पंडित रातोंरात सब कुछ छोड़कर भागने लगे थे।”

शाह ने बताया, “जो शख्स इस अखबार को कंट्रोल कर रहा था, वह बाद में 98 हजार वोटों के साथ संसद पहुँचा। उसने ही पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार गिराई थी।” आपको बता दें कि वह शख्स कोई और नहीं, बल्कि फारूक अब्दुल्ला की पार्टी नैशनल कॉन्फ्रेंस का सांसद सैफुद्दीन सोज था। उसी ने पार्टी लाइन से हटकर विश्वास मत के विरोध में वोट डाला था, जिससे वाजपेयी सरकार एक वोट से गिर गई थी। बाद में सैफुद्दीन सोज कॉन्ग्रेस में शामिल हो गया था।

बता दें कि साल 1989 में जुलाई और दिसंबर के बीच फारूक अब्दुल्ला की सरकार ने 70 कट्टर इस्लामी आतंकियों को छोड़ दिया था। बाद में ये पाकिस्तान का समर्थन पाकर खूंखार आतंकी बने और हिंदुस्तान में कई आतंकी वारदातों को अंजाम दिया। घाटी में हिंदुओं के खिलाफ विरोध और इस्लामिक उग्रवाद को बढ़ावा देने में इनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है।