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सोनिया गाँधी के सरकारी घर के अंदर रहस्यमयी मजार! क्या वक्फ इस पर भी कर सकता है दावा?

कुछ दिन पहले कॉन्ग्रेस नेता गुलाम नबी आजद जब कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी के आवास पर बैठक के लिए गए तो गाड़ी बदलते हुए उनकी एक तस्वीर वायरल हुई, जिसमें एक रहस्यमयी ढाँचा नजर आ रहा था। कई लोगों ने इसे देख हैरानी जताई कि सोनिया गाँधी के आधिकारिक आवास पर क्या कोई मजार है?

कई रिपोर्टों में बताया गया कि ये मजार ही है जो 10, जनपथ पर स्थित है। हालाँकि, इस संबंध में जानकारी कहीं भी ज्यादा नहीं दी गई। ऐसे में ऑपइंडिया ने पता लगाने का प्रयास किया कि ये मजार किसकी है। चूँकि आमतौर पर हर मजार, दरगाह, मस्जिद और मदरसा की जानकारी वक्फ बोर्ड पर होती है इसलिए हमने वक्फ से सूचना जुटाने को ही बुद्धिमानी समझी। हम इस प्रक्रिया के साथ कहाँ पहुँचे, आइए बताएँ:

मजार किसकी है?

हमने दिल्ली वक्फ बोर्ड से संपर्क किया कि इस मजार का पूरा विवरण क्या है। हमने बोर्ड को मेल भेजा, कॉल की, लेकिन कहीं से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। नतीजन हमें इंटरनेट पर मौजूद जानकारी पर निर्भर होना पड़ा। हम इंटरनेट से वक्फ की साइट पर गए और उस सेक्शन पर सर्च किया जहाँ वक्फ से जुड़ी हर संपत्ति की जानकारी दी गई होती है। इस विकल्प पर आप राज्यवार ढंग से हर जगह वक्फ की संपत्ति का पता लगा सकते हैं। हमने अपने काम के लिए दिल्ली चुना।

हालाँकि साइट के अनुसार, दिल्ली वक्फ बोर्ड के तहत 1045 संपत्तियाँ पंजीकृत हैं लेकिन हम यह सत्यापित नहीं कर सकते हैं कि ये संख्या इतनी ही है या इससे और ज्यादा। हमें नहीं मालूम ये साइट नियमित अपडेट की गई या नहीं।

जनपथ क्षेत्र नई दिल्ली जिले में आता है। साइट के अनुसार, नई दिल्ली तीन भागों में विभाजित है- कनॉट प्लेट, चाणक्यपुरी और संसद मार्ग। हमने तीनों क्षेत्र खंगाले लेकिन जनपथ पर या 10 जनपथ के नजदीक हमें कोई मजार नहीं मिली। लिस्ट में सिर्फ दरगाह शेख करीमुल्लाह मजार थी।

वक्फ बोर्ड साइट से लिया स्क्रीनशॉट

अगर आगे इस संबंध में हमें कोई जानकारी मिली तो इस रिपोर्ट को अपडेट किया जाएगा।

10 जनपथ की रहस्यमयी मजार

अब चूँकि हम वक्फ बोर्ड की साइट खंगाल चुके थे, अगला कदम था कि इसके बारे में जानकारी इंटरनेट से जुटाएँ। हमने इस नाम वाली मजार के बारे में इंटरनेट पर जानकारी देखी। खोजने पर डेलीओ की रिपोर्ट मिली और चीजें दिलचस्प होती गईं। दरअसल, 10 जनपथ को इस रिपोर्ट में अनलकी कहा गया था और इसी रिपोर्ट में उस मजार का जिक्र था जो कि पेड़ के नीचे बनी है। रिपोर्ट में इस मजार का और अतीत में हुई तमाम घटनाओं को जोड़कर बताया गया था। 

ये जानना उल्लेखनीय है कि पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री भी इसी इमारत में रहते थे जो पीएम बनने के बाद यहाँ आए और दो साल बाद उन्हें रूस में मृत पाया गया। आज तक किसी को नहीं पता उनके साथ क्या हुआ, उनका निधन कैसे हुआ, या कथित हत्या के पीछे किसका हाथ था। कहते हैं कि वो दिल का दौरा था लेकिन किसी को नहीं मालूम रिपोर्ट्स में कितनी सच्चाई है।

उनके बाद सोनिया गाँधी और राजीव गाँधी यहाँ आए। 1991 में राजीव गाँधी की LTTE आतंकियों द्वारा हत्या कर दी गई। सोनिया गाँधी अब भी अपने बेटे राहुल के साथ वहाँ रहती हैं। लेकिन वहाँ रहते हुए राहुल गाँधी को अपने आप को साबित करने के लिए कितनी कोशिशें करनी पड़ रही हैं ये हर कोई जानता है। यही हाल है प्रियंका गाँधी का। 

दिलचस्प बात है कि साल 2004 में सोनिया गाँधी ने लोकसभा चुनाव जीते और पीएम बनने को तैयार हुईं लेकिन इटली से जुड़ी पृष्ठभूमि के कारण ऐसा नहीं हुआ। कुछ लोग इसे अंधविश्वास कह सकते हैं। लेकिन क्या यह वास्तव में एक अंधविश्वास ही है सबसे पुरानी पार्टी की अध्यक्ष कथित रूप से ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ इमारत में रहते हुए पार्टी को बचाने के लिए संघर्ष करती हैं?

2014 की संडे गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, जब ये इमारत कॉन्ग्रेस का कार्यालय थी तब आपातकाल के समय कई कॉन्ग्रेस सदस्यों को यहाँ के कुछ इलाकों में खून के धब्बे दिखे थे। 10 जनपथ को लेकर ऐसी और अफवाह है। हालाँकि हमें नहीं पता कि इन सबका मजार से कुछ लेना-देना है या नहीं। लेकिन बता दें कि राजीव गाँधी के इस इमारत में आने से पहले यहाँ कॉन्ग्रेस नेता केके तिवारी रहते थे जिनका राजनैतिक करियर भी समय के साथ गिरता गया।

अन्य जगहों को लेकर पसरे अंधविश्वास

अपनी रिसर्च के दौरान, हमें दिल्ली की मशहूर जगह जैसे लुटियन दिल्ली और दिल्ली एयरपोर्ट से जुड़े कुछ और अंधविश्वासों के बारे में पता चला। यहाँ कुछ का जिक्र कर रहे हैं। पहला 22, शामनाथ मार्ग से जुड़ा है। संडे गार्जियन के अनुसार, यहाँ भाजपा नेता मदन लाल खुराना 3 साल तब रहे जब वो दिल्ली के सीएम थे। 1993 में वे यहाँ आए और 1996 में तब तक रहे जब तक कि हवाला स्कैम आया और इसमें उनका भी नाम था।

बाद में इसी आवास में शीला दीक्षित सरकार के मंत्री दीप चंद बंधू आए और यहाँ रहते हुए उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद ये जगह अशुभ मानी जाने लगी। 

अगला अंधविश्वास क़ुतुब कर्नलनेड से जुड़ा है। माना जाता है कि इसे लड़कियों और महिलाओं का श्राप मिला है जिन्हें नवाब और वरिष्ठ अधिकारी अपने लिए अपहरण कर लेते थे। इन लड़कियों को बंदी बनाकर यहाँ प्रताड़िता किया जाता था। जो इस इमारत के आसपास रहते हैं उनका दावा है कि यहाँ से लड़कियों के चीखने की आवाजें आती हैं।

रनवे वाली दरगाह

इन सबके अलावा क्या आप जानते हैं कि इंदिरा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के परिसर में भी एक मजार है? माना जाता है कि दो सूफी संत- हजरत काले खान और हजरत रौशन खान यहाँ सुरक्षित हवाई उड़ानों के लिए हैं।  एयरपोर्ट के कई कर्मचारी और एयरलाइन से जुड़े लोग इस मजार पर जाते हैं और मानते हैं कि पीर बाबा उनकी रक्षा करेंगे। ये दोनों संत 14 वीं और 15वीं सदी के माने जाते हैं।

इस दरगाह को रनवे दरगाह भी कहते हैं। ये जनता के लिए हर गुरुवार खुलती है लेकिन बस कुछ घंटों के लिए। एयरपोर्ट प्रशासन एक खास बस का इंतजाम करता है ताकि मजार पर लोग जा सकें।

वक्फ की संपत्ति हमेशा वक्फ की होती है

गौरतलब है कि जब कोई संपत्ति वक्फ के साथ पंजीकृत की जाती है। ये हमेशा वक्फ में जुड़ी होती है। लेकिन 10 जनपथ वाले मामले में ये नहीं मालूम कि ये मजार और उसके आस-पास का एरिया वक्फ में पंजीकृत है या नहीं। इसलिए ये नहीं कह सकते कि सोनिया गाँधी का आवास वक्फ की संपत्ति है या नहीं। या इस पर वक्फ अपना दावा कर सकता है या नहीं।

वक्फ बोर्ड की वेबसाइट

हाल में, गुजरात वक्फ बोर्ड ने सूरत नगर निगम की इमारत पर अपना दावा बोला था। उनका कहना था कि मुगल काल में सूरत नगर निगम की इमारत सराय थी और इसे हज यात्रा के दौरान इस्तेमाल किया जाता था। इसके बाद ये संपत्ति ब्रिटिश साम्राज्य से जुड़ गई। लेकिन जब 1947 में भारत आजाद हुआ तो संपत्ति भारत सरकार को मिली, लेकिन इसके दस्तावेज अपडेट नहीं हुए। इसके बाद ये बिल्डिंग वक्फ की हो गई और वक्फ तो कहता ही है कि एक बार जो वक्फ का हुआ वो हमेशा वक्फ का रहता है।

अगर आपको बतौर पाठक 10 जनपथ पर स्थित मजार या उस ढाँचे के बारे में कोई जानकारी है या आप जानते हैं कि वो कंपाउंड वक्फ संपत्ति में आता है या नहीं तो आप [email protected] पर इसकी जानकारी दे सकते हैं।

IAS नियाज खान पर MP सरकार सख्त, बोले गृहमंत्री- वे लक्ष्मण रेखा लाँघ रहे, जवाब माँगा जाएगा: द कश्मीर फाइल्स पर उगला था जहर

‘द कश्मीर फाइल्स’ फिल्म को लेकर विवादित टिप्पणी करने वाले आईएएस अधिकारी नियाज खान की समस्याएँ बढ़ सकती हैं। मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि राज्य सरकार नियाज को नोटिस जारी कर जवाब तलब करेगी। नियाज खान ने द कश्मीर फाइल्स को लेकर सोशल मीडिया पर टिप्पणियाँ की थी। इस पर भाजपा के नेता और मंत्रियों ने नाराजगी जाहिर की है। 

गृहमंत्री डा. मिश्रा ने बुधवार (23 मार्च 2022) को मीडिया से चर्चा के दौरान नोटिस जारी करने की बात कही। उन्‍होंने कहा कि ये गंभीर विषय है। नियाज़ खान मर्यादा का उल्लंघन कर रहे हैं। वह अधिकारियों के लिए तय लक्ष्मण रेखा को लाँघ रहे हैं। राज्य सरकार इस संबंध में उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी करेगी और उनसे जवाब तलब किया जाएगा।

द कश्मीर फाइल्स को लेकर मध्य प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी नियाज खान कई दिनों से बयान दे रहे हैं। पिछले दिनों उन्होंने एक ट्वीट करते हुए लिखा था, “द कश्मीर फाइल्स ब्राह्मणों का दर्द दिखाती है। उन्हें पूरे सम्मान के साथ कश्मीर में सुरक्षित रहने की अनुमति दी जानी चाहिए। निर्माताओं को कई राज्यों में बड़ी संख्या में मुसलमानों की हत्याओं को दिखाने के लिए एक फिल्म बनानी चाहिए। मुसलमान कीड़े नहीं, बल्कि इंसान हैं और देश के नागरिक हैं।”

नियाज खान के इस ट्वीट के बाद बीजेपी के कई नेताओं ने उनकी आलोचना भी की गई थी। नियाज खान की प्रतिक्रियाओं को लेकर मध्य प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग भी उनके खिलाफ कार्रवाई की माँग कर चुके हैं। सारंग ने कहा था कि वे लाइमलाइट में आने के लिए टिप्पणियाँ कर रहे हैं। वहीं भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने उन्हें नौकरी छोड़कर राजनीति में उतरने की चुनौती दी थी। अब सरकार ने भी उन पर एक्शन लेने का फैसला किया है। इसी कड़ी में अब उन्हें नोटिस भेजा जा रहा है। 

गौरतलब है कि नियाज खान का विवादों से पुराना नाता है। वह पिछले कुछ समय से अपने विवादित ट्वीट के लिए चर्चा में रहे हैं। वो अपने हैंडल से सरकार और सिस्टम की लगातार आलोचना करते रहे हैं। खुद उनके मुताबिक 17 साल की नौकरी में उनके 10 जिलों में 19 बार ट्रांसफर हुआ है। वो इसके पीछे अपने सरनेम खान को वजह बताते हैं। जनवरी 2019 में उन्हें लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की मीटिंग में प्रमुख सचिव विवेक अग्रवाल द्वारा बाहर कर दिया गया था।

‘बीवी ने बोला देश छोड़ दो.. उन्होंने बीवी ही छोड़ दी लेकिन देश नहीं छोड़ा’: आमिर खान को इन्होंने बताया ‘सच्चा देशभक्त’

बॉलीवुड फिल्मों के रिव्यू को लेकर अक्सर विवादों में रहने वाले कमाल आर खान (Kamaal R Khan) ने अभिनेता आमिर खान पर तंज कसते हुए एक ट्वीट किया है। ट्विटर पर खूब एक्टिव रहने वाले क्रिटिक केआरके ने मंगलवार (21 मार्च, 2022) को लिखा, “आमिर खान ने साबित कर दिया है, कि वो सच्चा देशभक्त है! उसकी बीवी ने बोला था कि देश में डर लगता है! देश छोड़ दो! भाई ने बीवी छोड़ दी, लेकिन देश नहीं छोड़ा।”

इसके साथ ही केआरके ने अपने ट्वीट में लॉफिंग इमोजी भी बनाया है। सोशल मीडिया पर यह ट्वीट वायरल हो रहा है। यूजर्स आमिर खान (Aamir khan) के पुराने वीडियो शेयर ​कर रहे हैं। एक ट्विटर यूजर ने लिखा, “केआरके सर, ये देखो आमिर तो किलो के हिसाब से गालियाँ दे रहा था मोदी को पहले….अब।”

इस वीडियो में शेखर गुप्ता से बात करते हुए आमिर खान ने गुजरात में हत्याओं के लिए नरेंद्र मोदी को जिम्मेदार ठहराया था। साथ ही कहा था, “लोगों को एक नेता के द्वारा ‘सज़ा’ दी गई। इसके लिए नरेंद्र मोदी, उनकी पार्टी और उनके लोग इन हत्याओं के लिए जिम्मेदार हैं। हजारों भारतीयों को इस त्रासदी से गुजरना पड़ा। जो लोग इस तरह की घटनाओं को अंजाम देते हैं, वो पूरी तरह से देश विरोधी हैं।”

एक अन्य यूजर ने लिखा, “तुम नाम के ही नहीं सही में कमाल हो।”

दरअसल, सोमवार (21 मार्च 2022) को आरआरआर (RRR) फिल्म के प्रमोशन के दौरान लाल सिंह चड्डा के अभिनेता आमिर खान ने कहा था कि ‘द कश्मीर फाइल्स’ फिल्म को हर हिंदुस्तानी को देखना चाहिए। इसके बाद से वह खासा सुर्खियों में हैं। मीडियाकर्मियों ने जब आमिर से फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ को लेकर सवाल किया तो उन्होंने कहा, “मैं जरूर देखूँगा उसे, क्योंकि वो इतिहास का वो हिस्सा है जिससे हमारा दिल दुखता है। तो कश्मीर में जो कश्मीरी पंडितों के साथ हुआ है वो यकीनन दुख की बात है। उस टॉपिक पर अगर कोई फिल्म बनी है तो यकीनन हर हिंदुस्तानी को उसे देखना चाहिए।”

लेकिन, वर्ष 2015 में देश में असहिष्णुता को लेकर बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान ने मोदी सरकार पर हमला बोला था। उन्होंने कहा था कि इस ओर कई घटनाओं ने उन्हें चिंतित किया है। यही नहीं, उन्होंने बताया था कि उनकी तत्कालीन पत्नी किरण राव ने तो उन्हें यहाँ तक सुझाव दे दिया था कि उन्हें देश छोड़ देना चाहिए।

बता दें कि पिछले साल 3 जुलाई को आमिर खान ने किरण राव से अपनी 15 साल की शादी को खत्म करते हुए कहा था, ”आप लोगों को बहुत दुख हुआ होगा और शॉक भी लगा होगा, लेकिन हम आपको बताना चाहते हैं कि हम बहुत खुश हैं। हमारे रिश्ते में चेंज आया है। हम साथ में खुश रहे, हँसे। हमारा रिश्ता विश्वास, प्यार और सम्मान के मामले में लगातार बढ़ता ही रहा। अब हमने निर्णय लिया है कि अब हम जीवन के नए अध्याय की शुरुआत करेंगे, लेकिन पति-पत्नी के रूप में नहीं।”

दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर दो सूफी फकीरों की मजार, होती है जुमे की नमाज भी: दावा – इनके कारण ही हवाई अड्डा सुरक्षित

दिल्ली का इंदिरा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भी मजहबी कारनामों से अछूता नहीं है। यहाँ पर वर्षों से दो मजार हैं, जिसको लेकर लोग हैरान हैं कि ऐसा कैसे हो सकता है। आईजीआई एयरपोर्ट दुनिया का सबसे व्यस्ततम एयरपोर्ट माना जाता है। यहीं पर एक मजार या दरगाह एयरपोर्ट में है तो दूसरी रनवे के पास स्थित है।

एयरपोर्ट के अंदर ये मजार या दरगाह कब और कैसे बनी ये अपने आप में एक रहस्य है। लेकिन, इतना तो जरूर है कि सरकारी संपत्ति के अंदर दो मुस्लिम फकीरों की मजार को लेकर लोगों का गुस्सा सामने आने लगा है। हालाँकि, कर्मचारियों का कहना है कि यह मजार लंबे वक्त से वहाँ पर है। हवाई अड्डे के टर्मिनल-2 के पास स्थित मजार पर लोगों को नमाज के लिए भी अनुमति है। हवाई अड्डे में 10/28 के पास वाले टर्मिनल से इसे साफ देखा जा सकता है। यहाँ से एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया कार्गो कॉम्प्लेक्स टी-2 से दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक इस मजार के लिए मुफ्त सेवाएँ भी देता है। जुम्मे की रात को यहाँ पर लोग नमाज करते हैं।

यह रनवे से काफी करीब है। 2011 की इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, दरगाह में चढ़ाने के लिए फूल, अगरबत्ती और दूसरी चीजें एयरपोर्ट पर ही कस्टम हाउस के बाहर बेचा जाता है। उस वक्त सुरक्षा इतनी कमजोर थी की इंडिया टुडे की टीम जासूसी कैमरे के साथ रनवे के करीब दरगाह तक पहुँच गई थी।

ऐसी अफवाहें हैं कि ये मजार अथवा दरगाह दो सूफी फकीरों बड़े बाबा (बाबा काले खान) और छोटे बाबा (बाबा रोशन खान) की है। यहाँ की इमेज नहीं ली जा सकती है। यहाँ आने से पहले गेट नंबर 6 पर सिक्योरिटी चेकिंग होती है।

इंंदिरा गाँधी एयरपोर्ट के अंदर ”पीर बाबा की मजार (साभार: य़ूट्यूब)

मजार की देखभाल करने वालों का दावा है कि आईजीआई हवाईअड्डे के सुचारू संचालन को ये दोनों फकीर ही सुरक्षित रखते हैं। ऐसी कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि एयरपोर्ट के कर्मचारी सूफी फकीरों के अलौकिक मिथकों में विश्वास करते हैं। दावा तो यहाँ तक है कि इस मजार की एक ईंट तो सन 1860 की है और पीर बाबा दरगाह को तो और भी अधिक पुराना माना जाता है।

एयरपोर्ट के कर्मियों के हवाले से दावा किया गया है कि इन दरगाहों ने कई सारी दुर्घटनाओं को रोका है। सतीश नाम के एक व्यक्ति का हवाला देते हुए रिपोर्ट्स में कहा गया है कि एक लैंडिंग के वक्त प्लेन के इंजन में आग लग गई, लेकिन जैसे ही फ्लाइट दरगाह के पास पहुँची तो चमत्कार हो गया और आग बुझ गई। इससे फ्लाइट को कंट्रोल कर लिया गया। हालाँकि, वो फ्लाइट कौन थी इसकी जानकारी नहीं है।

अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे में सुरक्षा की दृष्टि से खतरा होने के बावजूद दशकों से दो मजारें यहाँ चल रही हैं और मान्यता है कि मर चुके पीर बाबाओं की शक्ति के कारण ही दरगाह उस स्थान पर बनी हुई है।

यहाँ हर साल उर्स का भव्य आयोजन होता है, जिसमें भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण और अन्य एयरलाइंस भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करती हैं। इसका रखरखाव ‘बाबा की समिति’ नाम से एक समिति करती है, जो कि दान के पैसों से चलती है।

‘बताई जानी चाहिए वीर सावरकर की कहानी, नहीं मिला उनका हक़’: रणदीप हुड्डा बनेंगे ‘स्वतंत्र वीर सावरकर’, महेश मांजरेकर बना रहे फिल्म

बॉलीवुुड अभिनेता रणदीप हुड्डा ने शहीद दिवस (23 मार्च) पर अपनी अगली फिल्म की घोषणा की। महेश मांजरेकर के निर्देशन में बनी इस फिल्म का नाम ‘स्वतंत्र वीर सावरकर’ (Veer Savarkar) रखा गया है। यह फिल्म क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर की बायोपिक है। इसमें रणदीप हुड्डा स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर के किरदार में नजर आएँगे।

रणदीप हुड्डा ने सोशल मीडिया इंस्टाग्राम पर इसकी घोषणा करते हुए लिखा, “कुछ कहानियाँ बताई जाती हैं और कुछ जी जाती हैं! स्वतंत्रवीर सावरकर की बायोपिक का हिस्सा बनकर आभारी, उत्साहित और सम्मानित महसूस कर रहा हूँ।”

रणदीप हुड्डा ने इस किरदार के लिए चुने जाने पर कहा, “ऐसे कई नायक हैं, जिन्होंने हमें हमारी स्वतंत्रता दिलाने में अपनी भूमिका निभाई है। हालाँकि, सभी को उनका हक नहीं मिला है। विनायक दामोदर सावरकर इन गुमनाम नायकों में सबसे गलत समझे जाने वाले और प्रभावशाली स्वतंत्रता सेनानी हैं और उनकी कहानी जरूर बताई जानी चाहिए। स्वातंत्र्य वीर सावरकर के लिए ‘सरबजीत’ के बाद संदीप के साथ काम करके मुझे बेहद खुशी हो रही है। इसे निभाना एक चुनौती होगी।”

वहीं रणदीप हुड्डा के चुनाव को लेकर निर्माता संदीप सिंह ने कहा, “वीर सावरकर को भारतीय इतिहास के सबसे विवादास्पद पात्रों में से एक मानते हुए मैं केवल रणदीप के बारे में सोच सकता था। वीर सावरकर के योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। मुझे आश्चर्य है कि हमारी इतिहास की किताबों में वीर सावरकर का कभी उल्लेख क्यों नहीं किया गया?”

निर्देशक महेश वी मांजरेकर ने इस पर बात करते हुए कहा, “यह उन कहानियों को बताने का सही समय है, जिन्हें हमने नजरअंदाज किया था। स्वातंत्र्य वीर सावरकर एक ऐसा सिनेमा होगा, जो हमें अपने इतिहास को फिर से देखने के लिए मजबूर करेगा। मैं संदीप सिंह के साथ काम करना चाहता था और मुझे खुशी है कि हम इस फिल्म को एक साथ कर रहे हैं।”

उल्लेखनीय है कि बायोपिक फिल्म वीर सावरकर के जीवन की प्रमुख घटनाओं को कवर करेगी। इसकी शूटिंग इसी साल जून में शुरू हो जाएगी। फिल्म को लंदन, महाराष्ट्र और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के विभिन्न स्थानों पर शूट किया जाएगा। 

कहीं धर्मांतरण कर दूसरी बीवी बनने का दबाव तो कहीं केस वापस नहीं लेने पर धमकी: MP में लव जेहाद का कहर, अरमान के कारण सुसाइड

लव जिहाद और धर्मांतरण पर कानून बनने के बावजूद जेहादियों पर उसका कोई असर नहीं दिख रहा है। लव, दुष्कर्म और धर्मांतरण को उसी शिद्दत से अंजाम देने की अब भी कोशिश करते दिख रहे हैं, जैसा वे कानून बनने से पहले करते थे। लव जिहाद की घटनाएँ आज भी बदस्तूर जारी हैं। मध्य प्रदेश में लव जिहाद की घटनाएँ रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। खंडवा में राहुल बनकर अमजद ने एक हिंदू महिला को फँसाया और यौन शोषण करने के बाद उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव डाल रहा है। वहीं, इंदौर में लव जिहाद की पीड़िता को दुष्कर्म का आरोपित उसे केस खत्म करने की धमकी दे रहा है।

खंडवा में राहुल बन अजमद ने किया यौन शोषण

मध्य प्रदेश के खंडवा में मोहम्मद अमजद ने राहुल बनकर एक हिंदू युवती को अपने जाल में फँसाया और शादी का झांसा देकर दो साल तक यौन शोषण किया। बाद में पता चला कि जिसे वह राहुल समझ रही थी, उसका असली नाम अमजद है। इसके बाद महिला ने पुलिस में शिकायत की और लव जिहाद की धाराओं में केस दर्ज कर लिया गया है।

मोघट रोड थाने क्षेत्र के दुबे कॉलोनी में रहने वाली 42 वर्षीया पीड़िता ने बताया कि वह एक अस्पताल में नर्स का करती है। कंप्यूटर को सुधारने के लिए घासपुरा का रहने वाला अमजद साल 2017 में अस्पताल आया था। वहाँ पीड़िता की उससे पहचान हुई और उसने अपना नाम राहुल शर्मा बताया। धीरे-धीरे दोनों में दोस्ती हो गई। अमजद पीड़िता को लगातार फोन करता। धीरे-धीरे उसने अपने प्रेमजाल में फँसा लिया।

इसके बाद आरोपित उसे शादी का झाँसा दे यौन शोषण करने लगा। यह सिलसिला लगातार लगभग पाँच साल तक चला। जब महिला ने उस पर शादी का दबाव बनाया तो वह शादी के लिए के लिए आनाकानी करने लगा। इसके बाद पीड़िता ने अहमद के बारे में पता किया तो उसकी असलियत सामने आई।

पीड़िता को पता चला की राहुल का असली नाम अमजद है और वह पहले से ही शादीशुदा है। इसके बाद दोनों के बीच विवाद होने लगा। इस पर अमजद ने कहा कि वह दूसरी पत्नी रख सकता है। अगर वह अपना धर्म बदल लेगी तो वह उससे शादी कर लेगा।

इंदौर में लव जिहाद पीड़िता को जान से मारने की धमकी

इंदौर में लव जिहाद का शिकार बनाकर दुष्कर्म करने के मामले में आरोपित और उसके साथी पीड़िता को परिवार सहित जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। आरोपितों का कहना है कि पुलिस उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाई और वे पीड़िता के परिवार को खत्म कर देंगे। शिकायत के बाद पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया है। इनमें से एक लव जिहाद का आरोपित है।

पंढरीनाथ थाना पुलिस ने बताया कि कड़ावघाट निवासी 20 वर्षीय एक युवती ने कुछ दिन पहले नूरानी नगर के रहले वाले अल्फेज पर लव जिहाद का आरोप लगाते हुए खिलाफ दुष्कर्म का केस दर्ज करवाया था। इसको लेकर आरोपित नाराज और उस पर केस में समझौता करने का दबाव डाल रहे थे।

पीड़िता का कहना है कि पाँच दिन पहले अल्फेज ने उसके भाई अरशद, शहनाज और सईद के साथ मिलकर उसे मच्छी बाजार में रोक लिया और रेप केस में समझौता करने का दबाव बनाने लगा। आरोपितों ने धमकाया, “पुलिस हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकी तो तुम क्या चीज हो।”

पीड़िता ने बताया कि अरशद ने कहा कि वह खुद लव जिहाद का आरोपित रहा है। उसकी भी कोर्ट से जमानत हो चुकी है। अल्फेज भी कोर्ट से जमानत पर बाहर आ गया है। इसके बाद पीड़िता ने आरोपितों के खिलाफ सोमवार (21 मार्च) को थाने में शिकायत दी। पीड़िता की शिकायत के बाद चारों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है।

लव जिहाद पीड़िता की सुसाइड मामले में 40 दिन बाद FIR

खंडवा के गोकुलगाँव में डेढ़ महीने पहले लव जिहाद की शिकार 20 साल की युवती की आत्महत्या के मामले में पुलिस ने 40 दिन बाद उसी गाँव के रहने वाले मोहम्मद अरमान खान के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया है। युवती की लाश कुएँ में मिली थी। पुलिस के अनुसार, अरमान मृतिका से फोन पर बात करता था और उस पर शादी का दबाव बनाता था। अरमान के प्रताड़ना से तंग आकर युवती ने कुएँ में कूद कर जान दे दी। उसने कुएं में कूदकर जान दे दी।

आरोपित अरमान खान मृतिका को मोबाइल पर नंगी-नंगी तस्वीरें भेजता था और गालियाँ देकर शादी के लिए धमकाता था। मृतिका जब शादी के लिए मना करती तो वह उसे बदनाम करने और जान से मारने की धमकी देता था। पुलिस ने 21 मार्च को आरोपी अरमान पर आत्महत्या के लिए उकसाने संबंधी एट्रोसिटी एक्ट एवं अन्य धाराओं में केस दर्ज कर लिया।

तिलक लगाकर अमेरिकी वायुसेना में ड्यूटी करेंगे दर्शन शाह, दो साल से माँग रहे थे अनु​मति: दुनियाभर से मिला था ऑनलाइन सपोर्ट

भारतीय मूल के दर्शन साह को अमेरिकी वायुसेना ने तिलक लगाकर ड्यूटी करने की अनुमति दे दी है। व्योमिंग में एफई वॉरेन एयर फोर्स बेस पर तैनात शाह पिछले दो साल से इसकी अनुमति माँग रहे थे। ऑनलाइन ग्रुप चैट के माध्यम से उनकी इस माँग को दुनिया भर के लोगों ने सपोर्ट किया था।

अमेरिकी वायुसेना ने 22 फरवरी 2022 को उन्हें पहली बार वर्दी के साथ तिलक चांदलो लगाने की अनुमति दी। वायुसेना के फैसले से खुश शाह ने कहा कि टेक्सास, कैलिफोर्निया, न्यू जर्सी और न्यूयॉर्क के मेरे दोस्त मुझे और मेरे माता-पिता को संदेश भेज रहे हैं। वे भी इस बात से बहुत खुश हैं कि वायुसेना में कुछ अलग हुआ है। उन्होंने कहा कि हर दिन ड्यूटी के दौरान तिलक चांदलो लगाना बेहद खास है। मेरे आसपास के लोग बधाई दे रहे हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि मैंने इस धार्मिक आस्था की मंजूरी के लिए कितनी मेहनत की है। यह मेरा मार्गदर्शन करता है। इसके साथ ही इसने मुझे बहुत अच्छे दोस्त और इस दुनिया में मैं कौन हूँ, इसकी समझ दी है।

बता दें कि शाह का पालन-पोषण मिनेसोटा के एक गुजराती परिवार में हुआ है। यह परिवार बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तन स्वामीनारायण संस्थान से जुड़ा है। इस संसथान का प्रतीक चंदन तिलक है। शाह अमेरिकी एयरफोर्स के मेडिकल स्क्वाड्रन में बतौर टेक्निकल स्टाफ तैनात हैं। जून 2020 में सैन्य प्रशिक्षण शुरू होने के बाद उन्होंने वर्दी के साथ तिलक लगाने की अनुमति देने का आग्रह किया था।

गौरतलब है कि इसी तरह पिछले साल एक 26 वर्षीय सिख को अमेरिकी नौसेना में कुछ शर्तों के साथ पगड़ी पहनने की इजाजत दी गई थी। इस तरह की अनुमति हासिल करने वाले मरीन कोर के 246 साल के इतिहास में लेफ्टिनेंट सुखबीर तूर पहले व्यक्ति थे। इसके बाद तूर ने एक इंटरव्यू में कहा था, “आखिरकार मुझे मेरी आस्था और देश में से किसी एक को चुनने की नौबत नहीं आई। मैं जैसा हूँ, वैसा ही रहते हुए दोनों का सम्मान करता हूँ।’ हालाँकि इस अनुमति को हासिल करने के लिए उन्हें काफी लंबा संघर्ष करना पड़ा था।

‘घटनास्थल पर कैमरे लगाओ, रिकॉर्डिंग करो’ : बीरभूम घटना पर HC ने बंगाल सरकार से माँगी रिपोर्ट, 24 घंटे का समय

पश्चिम बंगाल में 8 लोगों को जिंदा जलाए जाने के घृणित अपराध मामले में बंगाल हाई कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए बुधवार (23 मार्च 2022) को सुनवाई की। राज्य की ओर से पेश वकील ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि जाँच के लिए कदम उठा लिए गए हैं। फॉरेंसिंक टीम भी पड़ताल कर रही है। रिपोर्ट 1-2 दिन में आ जाएगी।

सीबीआई केस लेने को तैयार

राज्य वकील ने कोर्ट से अपील की कि इस केस को पहले ही दिन किसी और एजेंसी को न दिया जाए। उन्होंने अपनी तरह से कहा घटना का सारा सच सामने जल्द से जल्द आना चाहिए। चाहे जो करना पड़े। इस सुनवाई में सीबीआई ने भी कोर्ट को कहा कि वो ये केस लेने के लिए तैयार हैं। कोर्ट ने सुनवाई में चश्मदीद का नाम किसी कीमत पर न खोलने की बात की।

बार एंड बेंच के ट्वीट के अनुसार, सुनवाई के दौरान एक याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि इस मामले में सबसे ज्यादा परेशान करने वाली चीज ही यही है कि इसमें पुलिस की भूमिका है। ऐसे में पुलिस को स्वतंत्र रूप से कार्य करने के लिए निर्देश जारी करने की आवश्यकता है। कोर्ट ने मामले में हर पक्ष को सुनकर कहा कि निष्पक्ष जाँच सुनिश्चित करने के लिए और याचिकाओं को पंजीकृत किया गया है। घटना के लिए जिम्मेदार लोगों का पता लगाया गया है और कानून के हिसाब से उन्हें सजा दी जाएगी।

बंगाल सरकार द्वारा गठित SIT सदस्यों पर संदेह

सुनवाई में बताया गया कि घटना के दो चश्मदीद थे। इनमें एक की मृत्यु हो गई और दूसरा नाबालिग है जिसे बचाने की सुरक्षित रखने की जरूरत है। याचिकाकर्ता की माँग है की सीएफएसएल दिल्ली की फॉरेंसिंक टीम को सबूत जुटाने के लिए बुलाया जाना चाहिए क्योंकि गठित की गई एसआईटी पर गंभीर संदेह है।

याचिका में उल्लेख है कि इस एसआईटी का एक सदस्य ज्ञानवंत सिंह भी है जिस पर साल 2007 में रिजवानुर रहमान नामक व्यक्ति के हत्या के आरोप हैं। वहीं अगला संजय सिंह है जिसे ईसीआई ने 2021 में चुनाव में हस्तक्षेप करने पर हटा दिया था। याचिका में दावा है कि जो भी एसआईटी गठित होती है उसमें इस ज्ञानवंत सिंह को जरूर शामिल किया जाता है।

दलीलों में कोर्ट के सामने ये भी कहा गया कि चश्मदीदों को पहले ही धमकी मिलने लगी है कि उन्होंने अपना गाँव तक छोड़ना शुरू कर दिया है। कोर्ट से स्थानीयों के लिए सुरक्षा की माँग की। कोर्ट ने इस पर आदेश दिए कि ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए इंतजाम हों, उनकी विश्वास बहाली के लिए कदम उठाए जाएँ। कोर्ट ने माना कि डीजीपी जैसे अधिकारी बिन जाँच के बयान दे रहे हैं कि मामले में कोई राजनैतिक कोण नहीं है, जो कि बिलकुल गलत है।

अगले आदेश तक इलाके की हो रिकॉर्डिंग

पूरे मामले में पक्षों की दलील सुन कोर्ट ने राज्य सरकार को जाँच का मौका दिया है। कोर्ट ने कल 2 बजे तक इस संबंध में रिपोर्ट देने को कहा है। कोर्ट ने आदेश दिए हैं कि डिस्ट्रिक्ट जज की देखरेख में घटनास्थल पर पर्याप्त मेमोरी वाले कैमरे लगाए जाएँ और अगले आदेश तक इलाके की रिकॉर्डिंग की जाए। इसके अलावा दिल्ली से सीएफएसएल की टीम स्पॉट पर जाए और जरूरी सामग्रजी जुटा कर बिना देरी के जाँच करे।

बता दें कि अब इस मामले की सुनवाई कल यानी कि 24 मार्च को 2 बजे होगी। कोर्ट ने इन 24 घंटों (24 मार्च को 2 बजे तक के बीच) में राज्य को रिपोर्ट तैयार करने का समय दिया है और बाकी आदेशों का पालन करने को कहा है। कोर्ट ने ये भी सुनिश्चित करने को कहा है कि चश्मदीदों पर किसी तरह धमकाया न जाए और न ही कोई उन्हें प्रभावित करे। कोर्ट ने कहा कि सच जरूर सामने आना चाहिए।

घटना के बाद स्थानीयों ने छोड़े घर

उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल के बीरभूम के रामपुरहाट में टीएमसी नेता भादू शेख की बम हमले मौत के बाद हिंसा मचाई गई। उपद्रवियों ने टीएमसी नेता की मौत का बदला लेने के लिए इलाके के कई घरों को आग में झोंका जिसमें दावा है कि कुल 12 लोग जलकर मर गए। वहीं पुलिस मृतकों की संख्या 8 बताने में लगी है। सामने आए विजुअल्स बेहद परेशान करने वाले हैं जिसमें पुलिस घर के अंदर से मृतकों के कंकाल निकाल रही है। लोग इतना डरे हैं कि उन्होंने अपने घरों को छोड़कर दूसरी जगह जाना शुरू कर दिया है। स्थानीयों का कहना है कि वो भय से अपने घरों को छोड़ रहे हैं। पुलिस ने उन्हें किसी तरह की सुरक्षा नहीं दी। अगर दी होती तो ये सब नहीं होता।

अजमेर में नाबालिग लड़की का बलात्कार और गला रेत कर हत्या: अरशद खान ने इंस्टाग्राम से की थी दोस्ती, बना रहा था निकाह का दबाव

राजस्थान के अजमेर से रेप और हत्या की घटना सामने आई है, जहाँ अरशद खान नाम के मुस्लिम युवक ने 17 वर्षीय लड़की के साथ रेप करने के बाद चाकू से गला रेतकर उसकी बेरहमी से हत्या कर दी। इसके बाद खुद भी आत्महत्या करने की कोशिश की। पुलिस ने आरोपित को हिरासत में ले लिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, ये घटना अजमेर जिले के पीसांगन थाना क्षेत्र की है। आरोपित उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के सराय सुल्तान, बिलग्राम मल्लावां का रहने वाला है। वहीं नाबालिग लड़की अजमेर में पाली के रास की रहने वाली है। दोनों की दोस्ती इंस्टाग्राम के जरिए हुई थी। वो ट्यूशन टीचर थी। दोस्ती के बाद आरोपित अरशद लड़की से शादी करना चाहता था, लेकिन नाबालिग इसके लिए तैयार नहीं थी और हर बार वो इसे टाल देती थी।

इसी क्रम में मंगलवार (22 मार्च, 2022) को अरशद खान ने उसे मिलने के लिए बुलाया। जब पीड़िता वहाँ पहुँची तो उसने फिर से वही शुरू कर दी और उससे शादी करने के लिए कहने लगा। लेकिन जब पीड़िता नहीं मानी तो उसने पहले उसका रेप किया और फिर चाकू से उसका गला रेतकर उसकी हत्या कर दी।

जंगल में मिली लाश

पुलिस का कहना है कि करनोस में धुंवाड़िया गाँव के कन्नौज के पास रास-मांगलियावास हाईवे से 100 मीटर अंदर जंगल में लड़की का शव मिला। अजमेर के एसपी विकास सांगवान के मुताबिक, आरोपित हत्या करने के बाद वहाँ से भागा नहीं, बल्कि वो वहीं पर बैठा रहा। वो अपने ही शरीर पर चाकू से वार कर आत्महत्या करने की कोशिश कर रहा था।

गैंगरेप का केस दर्ज

परिवार द्वारा गैंगरेप के आरोपों के बीच अब इस मामले में गैंगरेप और POCSO एक्ट के तहत केस दर्ज किया है। एडिशनल एसपी विकास सांगवान ने कहा है कि एक मुख्य आरोपित को हिरासत में लिया गया है। वहीं पाड़ित परिवार ने 50 लाख रुपए के मुआवजे की माँग की है।

बहरहाल पीड़िता के शव को जेएलएन अस्पताल की मॉर्च्युरी में रखा गया है। अस्पताल के बाहर पीड़िता के परिजन और गाँव वाले धरने पर भी बैठ गए हैं।

किस हाल में है वह कश्मीरी हिंदू महिला जिसे पति के खून से सना चावल खिलाया: बीके गंजू की भांजी का Video, बताया- आज भी ट्रॉमा में बेटियाँ

बीके गंजू (BK Ganjoo) वह नाम है, जिनकी कहानी विवेक अग्निहोत्री की फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स (The Kashmir Files)’ में भी दिखाई गई है। उनकी हत्या करने के बाद उनके खून से सना चावल खाने के लिए उनकी पत्नी को मजबूर किया गया था। अब एक वीडियो सामने आया है जिससे पता चला है कि गंजू की पत्नी और उनकी बेटियाँ आज भी उस ट्रॉमा से बाहर नहीं आ पाई हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो में एक लड़की बता रही है कि फिल्म में जो शख्स चावल के ड्रम में छिपे थे वह उसके अंकल थे। आगे वह कहती है कि बीके गंजू की मैं भांजी हूँ। वह मेरी मॉं के बहनोई थे। मैं बताते वक्त काँप रही हूँ, क्योंकि मैं पहली बार खुलेआम इस पर बात कर रही हूँ।

लड़की ने आगे बताया कि मेरे परिवार में कोई भी इस बारे में बात नहीं करना चाहता था। आज भी जब फिल्म रिलीज हुई, पूरे देश के लोग कश्मीरी पंडितों को सपोर्ट कर रहे हैं और सुन रहे हैं कि उस समय क्या हुआ था, तब जाकर मेरे माता-पिता ने इस बारे में बात की। मैंने उनसे पूछा कि उस समय आखिर क्या हुआ था। उन्होंने बताया कि गंजू की पत्नी और उनकी बेटियाँ अभी भी उस ट्रॉमा से बाहर नहीं आ पाई हैं। अब इस बारे में जानने के बाद लगा कि यह हमारे परिवार के लिए हीलिंग जैसा है, इसलिए इतने सालों से कोई भी इसके बारे में बात नहीं करना चाहता था।

मालूम हो कि बीके गंजू इंजीनियर थे। 19 मार्च 1990 को आतंकी बीके गंजू की हत्या करने उनके घर पर पहुँचे थे। इन आतंकियों में बिट्टा कराटे भी शामिल था। जब बीके गंजू को पता चला कि आतंकी उन्हें मारने के लिए उनके घर आ धमके हैं तो वह जान बचाने के लिए घर की तीसरी मंजिल में रखे चावल के ड्रम में छिप गए। आतंकी गंजू को नहीं खोज पाए। लेकिन उनके मुस्लिम पड़ोसी ने आतंकियों को बताया कि वह चावल के ड्रम में छिपे हैं। इसके बाद आतंकियों ने ड्रम पर ताबड़तोड़ गोलियाँ चलाकर उनकी हत्या कर दी थी। उन्होंने गंजू पर सरकार का मु​खबिर होने का आरोप भी लगाया था। यही नहीं उनके खून से सने चावल उनकी पत्नी को खिलाए थे।

द कश्मीर फाइल्स में कृष्णा पंडित का किरदार निभाने वाले अभिनेता दर्शन कुमार ने भी एक इंटरव्यू में इस घटना का जिक्र किया था। उन्होंने बताया ​था कि एक कश्मीरी पंडित की हत्या के बाद उनके खून से सना चावल उनकी पत्नी को खिलाया था। इस घटना के बारे में सुनकर वे दहल उठे थे। उन्हें उस रात नींद नहीं आई थी।

गौरतलब है कि द कश्मीर फाइल्स ने नब्बे के दशक में कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार को जुबान देने का काम किया है। पिछले दिनों गिरिजा टिक्कू के परिवार ने भी इस घटना पर चुप्पी तोड़ी थी। उनकी भतीजी सीधी रैना ने इंस्टाग्राम पोस्ट शेयर कर कहा था कि उनके परिवार को अभी भी न्याय का इंतजार है। गिरिजा टिक्कू को अगवा कर गैंगरेप किया गया था और फिर उन्हें जिंदा आरी से काट दिया गया था।