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लगातार दूसरी बार गोवा के मुख्यमंत्री बनेंगे प्रमोद सावंत, बीजेपी विधायक दल की बैठक में हुआ नाम का ऐलान

गोवा में बीजेपी ने मुख्यमंत्री चेहरे का ऐलान कर दिया है। पार्टी ने एक बार फिर प्रमोद सावंत (Pramod Sawant) पर ही भरोसा जताया है। सावंत अब राज्य में दूसरी बार बीजेपी सरकार का नेतृत्व करेंगे।

सोमवार (21 मार्च, 2022) को हुई बीजेपी विधायक दल की बैठक में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और महाराष्ट्र के पूर्व पूर्व सीएम देवेंद्र फड़नवीस पार्टी पर्यवेक्षक के तौर पर मौजूद थे। बैठक में चर्चा के बाद प्रमोद सावंत को बीजेपी विधायक दल का नेता यानी सीएम के रूप में घोषित किया गया।

केंद्रीय पर्यवेक्षक नरेंद्र सिंह तोमर ने सावंत के नाम की घोषणा करते हुए कहा, “विश्वजीत राणे ने विधायक दल के नेता के रूप में प्रमोद सावंत के नाम का प्रस्ताव रखा। सभी ने सर्वसम्मति से सावंत को नेता चुना। वह अगले 5 वर्षों के लिए विधायक दल के नेता होंगे।”

गोवा के मनोनीत सीएम प्रमोद सावंत ने कहा, “मैं पीएम नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को धन्यवाद देना चाहता हूँ कि उन्होंने मुझे अगले 5 वर्षों तक गोवा के सीएम के रूप में काम करने का मौका दिया। मुझे खुशी है कि गोवा के लोगों ने मुझे स्वीकार किया है। मैं राज्य के विकास के लिए हर संभव प्रयास करूँगा।”

मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि बीजेपी ने गोवा के राज्यपाल से आज शाम को मिलने का वक्त माँगा है। इस मुलाकात में प्रमोद सावंत सीएम पद के लिए अपनी दावेदारी पेश करेंगे। वहीं माना जा रहा है कि सहयोगी दलों के साथ मिलकर बीजेपी गोवा में फिर से सरकार बनाने में कामयाब हो जाएगा।

बता दें कि हालिया चुनावों में बीजेपी को 40 सीटों में से 20 सीटें हासिल हुई हैं। ऐसे में उसे सरकार बनाने के लिए केवल एक और विधायक के सपोर्ट की जरूरत है, जिसे वह आसानी से हासिल कर सकती है।

गौरतलब है कि प्रमोद सावंत ने 2019 में मनोहर पर्रिकर की मृत्यु के बाद गोवा की बागडोर संभाली थी।

उत्तराखंड के नए सीएम के नाम पर लगी मुहर: बीजेपी विधायक दल की बैठक में लिया गया फैसला, एन बीरेन सिंह दूसरी बार बने मणिपुर के CM

उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के 10 दिन बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राज्य के नए मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा की है। भाजपा ने सोमवार (21 मार्च 2022) को देहरादून (Dehradun) में विधायक दल की बैठक में पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) पर एक बार फिर भरोसा जताते हुए उनके नाम पर मुहर लगा दी है। वहीं, एन बीरेन सिंह दूसरी बार मणिपुर के मुख्यमंत्री बन गए हैं। उन्होंने आज इंफाल में मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, देहरादून में पार्टी इकाई की बैठक में फैसले के बाद पर्यवेक्षक रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) और उपपर्यवेक्षक मीनाक्षी लेखी (Meenakshi Lekhi) ने यह घोषणा की। बताया जा रहा है कि नए सीएम की रेस में कार्यवाहक मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, सतपाल महाराज, पूर्व केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, सांसद अनिल बलूनी शामिल थे।

बता दें कि बीजेपी ने विधानसभा चुनाव में उत्तराखंड की 70 में से 47 सीटें अपने नाम की थीं। वहीं कॉन्ग्रेस के खाते में महज 19 सीटें आईं, जबकि बसपा को केवल 2 सीटों से ही संतुष्ट होना पड़ा था। हालाँकि, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खटीमा सीट से चुनाव हार गए थे। उनको कॉन्ग्रेस के भुवन कापड़ी ने 6,000 से ज्यादा वोटों से हराया था। उत्तराखंड के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है, जब कोई पार्टी लगातार दूसरी बार सरकार बना रही है।

पीठ दिखाती, स्तन छिपाती औरतें: आतंकी यासीन मलिक की पाकिस्तानी बीवी को जानते हैं आप, देखी है उसकी अधनंगी पेंटिंग्स

कश्मीर के अलगाववादी नेता व कश्मीरी पंडितों के नरसंहार के आरोपित आतंकी यासीन मलिक की बीवी मुशाल हुसैन मलिक अक्सर अपनी भारत विरोधी मानसिकता की वजह से सुर्खियों में आती हैं। हाल में उन्होंने कुछ ट्वीट करके भारत के ख़िलाफ़ प्रोपेगेंडा फैलाना चाहा था। इससे पहले वह अधनंगी पेंटिंग्स बनाने के कारण चर्चा में कई बार रह चुकी हैं।

मौजूदा जानकारी के अनुसार, अलगाववादी नेता की पाकिस्तानी बीवी मुशाल 6 साल की उम्र से पेंटिंग बनाती हैं और उनकी खासियत ही ये है कि वो अधनंगी औरतों की पेंटिंग बनाती हैं। उनकी कुछ पेंटिंग में जो महिला दिखती है उसे पीठ दिखाते, स्तन छिपाते देखा जा सकता है। वह पेस्टल, चारकोल के अलावा ग्लास पेंटिंग भी करती हैं वरना पहले वो वाटर कलर पेटिंग्स तक सीमित थीं।

मुशाल की पेटिंग्स (साभार: starsunfolded)
मुशाल की पेटिंग्स (साभार: starsunfolded)

मुशाल की कुछ पेंटिंग्स में कश्मीर को लेकर उनका जो एजेंडा है वो साफ दिखाई देता है। वह फिलहाल पीस एंड कल्चर ऑर्गेनाइजेशन की अध्यक्ष हैं और उनके संबंध कई वरिष्ठ राजनेताओं व ब्यूरोक्रेट्स से भी हैं। आपको जानकर शायद हैरानी न हो, कश्मीर में आतंक मचाने वाले आतंकियों को मुशाल कश्मीरी स्वतंत्रता सेनानी के तौर पर देखती हैं और बुरहान वानी जैसे आतंकी को श्रद्धांजलि देती रहती हैं। एक बार मुशाल ने कहा था, “बुरहान एक क्रांतिकारी प्रतीक और आइकन था जिसने कश्मीर के लिए बलिदान दिया।”

मुशाल की पेटिंग्स (साभार: starsunfolded)

कश्मीर के ख़िलाफ़ फैलाई फर्जी खबर

कुछ दिन पहले ही 80 हजार फॉलोवर्स वाली मुशाल ने ट्वीट में दावा किया था कि  कि 1989 से लेकर अब तक कश्मीर में भारतीय सेना ने 11, 250 औरतों का रेप किया है जबकि 22 हजार से ज्यादा औरतें सेना के कारण विधवा हो गई हैं। उनके ट्विटर पर उन्हें अपनी पहचान प्राउड वाइफ ऑफ यासीन मलिक बताते देखा जा सकता है।

यासीन मलिक और मुशाल मलिक का निकाह

बता दें कि यासीन मलिक और मुशाल मलिक की जान पहचान 2005 में हुई थी। इसके बाद दोनों ने साल 2009 में निकाह किया। ये पूरी निकाह सेरेमनी लाइव टेलीकास्ट हुई थी। निकाह के समय मुशाल की उम्र 23 थी और यासीन 42 साल का था। निकाह के समय तक जहाँ यासीन अलगाववादी होने के चलते पाकिस्तान में एक जाना-माना नाम था वहीं उसकी बीवी रावलपिंडी की ही थी लेकिन लोग उन्हें कम जानते थे। मुशाल ने एक बार बताया था कि उन्हें यासीन की एक स्पीच पसंद आई थी। फिर उन्होंने उससे ऑटोग्राफ माँगा और नजदीकियाँ बढ़ने पर दोनों ने निकाह कर लिया। मुशाल की माँ पाकिस्तान मुस्लिम लीग की पूर्व महासचिव रह चुकी हैं जबकि भाई यूएस में प्रोफेसर और नेवल ऑफिसर है।

लंदन के स्टूडेंट्स फ्लैट में मिली 19 साल की सबिता की लाश, बॉयफ्रेंड मारूफ को पुलिस ने पकड़ा

लंदन में भारतीय मूल की एक ब्रिटिश नागरिक की लाश मिली है। हत्या के सिलसिले में पुलिस ने महीर मारूफ को पकड़ा है। मृतका की पहचान 19 साल की सबिता थानवानी (Sabita Thanwani) के तौर पर हुई है। वह लंदन विश्वविद्यालय (London University) से पढ़ाई कर रही थी। उसकी लाश छात्रों के लिए बने फ्लैट्स से मिली है। स्कॉटलैंड यार्ड द्वारा गिरफ्तार किया गया मारूफ (Maher Maaroufe) ट्यूनीशियाई मूल का है।

पुलिस ने बताया कि भारतीय मूल की ब्रिटिश नागरिक सबिता थानवानी (Sabita Thanwani,19) शनिवार (19 मार्च 2022) को लंदन के क्लर्केंवेल इलाके के आर्बर हाउस में छात्रों के लिए बने एक फ्लैट में मृत मिली थीं। उनकी गर्दन पर गंभीर चोटों के निशान थे। इसके बाद मेट्रोपोलिटन पुलिस ने 22 वर्षीय महीर मारूफ की धरपकड़ के लिए तत्काल एक अपील जारी की थी। संदिग्ध से सीधे अपील में पुल‍िस ने कहा था, “हम महीर मारूफ को तुरंत पुलिस स्टेशन में उपस्थित होने की अपील करते हैं। यदि आप इस मैसेज को देखते हैं तो अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन में जाएँ।”

बताया जा रहा है कि मारूफ और सबिता के बीच प्रेम प्रसंग चल रहा था। अधिकारियों ने रविवार (20 मार्च 2022) को मारूफ को क्लर्केंवेल के उसी इलाके से गिरफ्तार किया, जहाँ से एक दिन पहले सबिता का शव बरामद हुआ था। मेट्रोपोलिटन पुलिस की विशेष अपराध शाखा की डिटेक्टिव चीफ इंस्पेक्टर लिंडा ब्रैडली ने कहा, “सबिता के परिवार को इस घटना की जानकारी दे दी गई है। उनके प्रति हमारी गहरी संवेदनाएँ हैं। मैं इस बेहद मुश्किल समय में हर किसी से उनकी निजता का सम्मान करने की अपील करूँगी।” उन्होंने बताया, “मारूफ और सबिता के बीच प्रेम संबंध थे, लेकिन मारूफ छात्र नहीं है। वह एक ट्यूनीशियाई नागरिक है।”

उल्लेखनीय है कि सबिता लंदन विश्वविद्यालय से साइकोलॉजी की पढ़ाई कर रही थी। वह फर्स्ट ईयर की छात्रा थी। उसे शुक्रवार को कथित तौर पर मारूफ के साथ देखा गया था। फिलहाल हत्या के कारण का पता नहीं चल पाया है। जाँच जारी है।

का वर्षा जब कृषि सुखाने: फार्म लॉ की वापसी के बाद सुप्रीम कोर्ट पैनल की रिपोर्ट जारी, बताया- 73 में से 61 किसान संगठन कानून समर्थक

कृषि कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमिटी के सदस्य अनिल घनवटे (Anil Ghanwate) ने सीलबंद रिपोर्ट को सोमवार (21 मार्च 2022) को सार्वजनिक कर दिया। रिपोर्ट में दावा किया गया कि देश भर के 86 फीसदी किसान संगठन सरकार के तीनों कृषि कानूनों से खुश थे। ये किसान संगठन करीब 3 करोड़ किसानों का प्रतिनिधित्व कर रहे थे।

यह रिपोर्ट तब आई है जब कृषि कानूनों के वापसी के भी 5 महीने बीत चुके हैं। ऐसे कहा जा रहा है कि का वर्षा जब कृषि सुखाने। आपको याद होगा जब कथित किसान संगठनों ने दिल्ली को घेर रखा था, हिंसा-हुड़दंग की खबरें लगातार आ रही थी तब कई लोगों ने इस मामले में दो टूक फैसले नहीं लेने पर सुप्रीम कोर्ट की आलोचना की थी।

हालाँकि, अब इस रिपोर्ट की उतनी प्रासंगिकता नहीं रह गई है। इन तीनों कृषि कानूनों के विरोध में कुछ किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए सरकार ने नवंबर 2021 में इन कानूनों को रद्द करने का ऐलान किया था।

बता दें कि यह रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पिछले साल 21 मार्च को सीलबंद लिफाफे में जमा कर दी गई थी लेकिन इस रिपोर्ट में क्या थी, इसके बारे में लोगों को पता नहीं था। सोमवार को कमिटी के एक सदस्य अनिल घनवटे ने इस रिपोर्ट को सार्वजनिक कर दी। अनिल घनवटे ने कहा, “19 मार्च, 2021 को हमने सर्वोच्च न्यायालय को रिपोर्ट सौंपी। हमने शीर्ष अदालत को तीन बार पत्र लिखकर रिपोर्ट जारी करने का अनुरोध किया। लेकिन हमें कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।” आगे उन्होंने कहा, “मैं आज यह रिपोर्ट जारी कर रहा हूँ। तीन कानूनों को निरस्त कर दिया गया है। इसलिए अब कोई प्रासंगिकता नहीं है।” उनके मुताबिक, रिपोर्ट भविष्य में कृषि क्षेत्र के लिए नीतियाँ बनाने में मदद करेगी।

घनवटे ने कहा कि कानूनों को निरस्त करके नरेंद्र मोदी सरकार (PM Narendra Modi) ने बड़ी राजनीतिक भूल की है। घनवटे ने माना है कि इस रिपोर्ट से किसानों को कृषि कानूनों के लाभ के बारे में समझाया जा सकता था और इनको रद्द होने से रोका जा सकता था।

सुप्रीम कोर्ट ने 12 जनवरी 2021 को किसान आंदोलन को लेकर एक कमिटी का गठन किया था। इस कमिटी में कृषि विशेषज्ञ अशोक गुलाटी, डॉ. प्रमोद कुमार जोशी और अनिल घनवटे शामिल थे। सुप्रीम कोर्ट ने 4 सदस्यीय टीम बनाई थी, लेकिन किसान नेता भूपिंदर सिंह मान ने इससे खुद को अलग कर लिया था।

कानून को रद्द न करने की सिफारिश

घनवटे के मुताबिक सीलबंद रिपोर्ट में भी कृषि कानूनों को रद्द न करने की सलाह दी थी। घनवट ने कहा है कि इन कृषि कानूनों को रद्द करना या लंबे समय तक लागू न करना उन लोगों की भावनाओं के खिलाफ है जो इसका मौन समर्थन करते हैं। घनवटे में कहा कि इस रिपोर्ट को तैयार करने से पहले कमेटी के सामने जो 73 कृषि संगठन से बातचीत हुई थी। ये देश के साढ़े 3 करोड़ किसानों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनमें से 61 किसान संगठनों ने मोदी सरकार द्वारा लाए गए कृषि कानूनों का समर्थन किया था।

अधिकांश आंदोलनकारी किसान पंजाब और उत्तर भारत से आए थे, जहाँ के लिए MSP एक महत्वपूर्ण पहलू है। लेकिन इन किसानों को वामपंथी नेताओं ने गुमराह किया। साथ ही ये भी भ्रम फैलाया कि इससे MSP खत्म हो जाएगा। जबकि कानून में कुछ भी ऐसा नहीं था। अनिल घनवटे ने कहा कि उत्तर भारत के जिन किसानों में कृषि कानूनों को लागू नहीं होने दिया उन्होंने खुद की आय को बढ़ाने का मौका खो दिया।

विरोध के बाद मोदी सरकार ने वापस लिया था कानून

मालूम हो कि केंद्र की मोदी सरकार ने 19 नवंबर 2021 को तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का फैसला लिया था। उन्होंने देश को संबोधित करते हुए आंदोलनरत किसानों से अपने-अपने घर लौटने का आग्रह किया था। साथ ही पीएम ने यह भी कहा था कि किसानों के एक वर्ग को इन कानूनों के बारे में नहीं समझा पाने के लिए देश से माफी माँगते हैं।

​जो यूनिवर्सिटी 3200 लोगों की जान खतरे में डालने को लेकर हुआ था चर्चित, उसके चासंलर को भी AAP ने दिया राज्यसभा का टिकट

पंजाब ​के हालिया विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी (AAP) ने बड़ी जीत हासिल की है। भगवंत मान के नेतृत्व में नई सरकार के गठन के बाद पार्टी ने अब प्रदेश की सभी पाँच राज्यसभा सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए भी उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। इनके नाम हैं: अशोक मित्तल, संदीप पाठक, संजीव अरोड़ा, हरभजन सिंह और राघव चड्ढा। इनमें से मित्तल उसी लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के चांसलर हैं जिसे पंजाब सरकार ने कोरोना काल में नियमों की अनदेखी की वजह से शो कॉज नोटिस जारी किया था। बता दें कि पंजाब में राज्यसभा की पाँच सीटों के लिए 31 मार्च को चुनाव होगा। 

विवादों में रही है लवली यूनिवर्सिटी

अशोक मित्तल ने लॉ में ग्रेजुएशन किया है। उनका परिवार बँटवारे बाद पाकिस्तान से पंजाब आया था। उनके पिता स्वर्गीय बलदेव राज मित्तल ने 500 रुपए उधार लेकर जालंधर में मिठाई की दुकान शुरू की थी। लवली स्वीट्स से लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के सफर की शुरुआत 2001 में हुई। लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी इस समय देश की सबसे बड़ी प्राइवेट यूनिवर्सिटी में से एक है। यह पंजाब के कपूरथला जिले के फगवाड़ा में स्थित है। 600 एकड़ में फैली इस यूनिवर्सिटी में 50 से ज्यादा देशों के छात्र पढ़ते हैं। दो साल पहले यह यूनिवर्सिटी खासा विवादों में रही। वर्ष 2020 में पंजाब सरकार ने कोरोना काल में लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी को कैंपस बंद नहीं करने पर नोटिस जारी किया था। नोटिस में कहा गया था कि यूनिवर्सिटी की इस लापरवाही से वहाँ पढ़ने वाले करीब 3200 छात्र-छात्राओं, शिक्षक, स्टाफ और कर्मचारियों की जान खतरे में पड़ गई है।

संदीप पाठक

डॉ. संदीप पाठक दिल्ली आईआईटी (Delhi IIT) में फिजिक्स के प्रोफेसर हैं। वह पिछले तीन साल से आम आदमी पार्टी (AAP) के कोर ग्रुप में हैं और बेहद कम समय में ही वह ‘आप’ के खास रणनीतिकार बन गए हैं। संदीप पाठक अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान के करीबी माने जाते हैं। उन्होंने पंजाब में आप (AAP) की जीत में बड़ी भूमिका निभाई है। कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से पीएचडी करने वाले पाठक छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले के लोरमी के रहने वाले हैं। उनके पिता शिवकुमार पाठक किसान हैं। बताया जाता है कि 4 अक्टूबर 1979 को जन्मे संदीप कई सालों से पंजाब में आम आदमी पार्टी के साथ बिना लाइमलाइट में आए चुपचाप काम कर रहे थे।

संजीव अरोड़ा, हरभजन सिंह और राघव चड्ढा


संजीव अरोड़ा लुधियाना के जाने-माने टेक्सटाइल कारोबारी हैं। महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के प्रति जागरूकता फैलाने के साथ-साथ वह कृष्णा प्राण ब्रेस्ट कैंसर चैरिटेबल ट्रस्ट भी चला रहे हैं। पूर्व भारतीय क्रिकेट हरभजन सिंह को भी आम आदमी पार्टी ने पंजाब (Punjab) से अपना राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। हरभजन सिंह ने पीली पगड़ी में ‘आप’ के उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल किया। हरभजन के साथ पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान भी थे। राघव चड्ढा को ‘आप’ ने पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए प्रदेश का सह प्रभारी नियुक्त किया गया था। चड्ढा ‘आप’ के प्रवक्ता भी हैं।

‘दिल का दौरा पड़ने से बेहोश हुए स्वामी प्रसाद मौर्य, लखनऊ के मेदांता अस्पताल में भर्ती’ : जानिए क्या है सपा नेता की बीमारी का सच

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में करारी हार का सामना करने वाले समाजवादी पार्टी नेता स्वामी प्रसाद मौर्य सोशल मीडिया पर कल अचानक चर्चा में आए जब लोगों ने दावा करना शुरू किया कि उन्हें हार्ट अटैक आ गया है। कई ट्विटर हैंडल से कहा गया कि सपा नेता पहले दिल का दौरा पड़ने पर बेहोश हुए और फिर उन्हें मेदांता ले जाया गया। बात ने इतना तूल पकड़ा कि खुद मौर्य को अपनी तबीयत की जानकारी ट्विटर पर देनी पड़ी।

नीचे सोशल मीडिया यूजर्स के ट्वीट देख सकते हैं। लोगों ने एक के बाद एक ट्वीट करके बताया कि स्वामी प्रसाद को हार्ट अटैक आया है। किसी ने ये खबर सुन कर कहा, “अब पछताने से क्या होगा जब चिड़िया चुग गई खेत।”

एक यूजर ने लिखा, “स्वामी प्रसाद मौर्य को दिल का दौरा पड़ा, बेहोशी अवस्था में लखनऊ के मेदांता में भर्ती कराया गया… सत्ता छूटी, विधायिकी भी छिनी तो बेचारे को सदमा लगेगा ही… बिन विचारे जो करे सो पीछे पछताए।”

जगदीश मगनानी ने ट्वीट करते हुए स्वामी प्रसाद के लिए लिखा, “अभी तो जाँच शुरू हुई है और ये अस्पताल में बुकिंग भी करवा लिया।”

एम राजकुमार ने इस खबर पर लिखा, “क्यों घुटन हो रही है बीजेपी से हटकर।”

स्वामी प्रसाद मौर्य ने किया खबर का खंडन

इन ट्वीट के अलावा भी सोशल मीडिया पर तमाम ट्वीट हैं जहाँ से स्वामी प्रसाद मौर्य को दिल का दौरा पड़ने की खबर बताई गई। लोग उन्हें कॉल मैसेज करके उनकी चिंता करने लगे। जिसके बाद समाजवादी पार्टी नेता ने एक ट्वीट में बताया कि जो बातें सोशल मीडिया पर हो रही हैं वो झूठी हैं। उन्हें दिल का दौरा नहीं पड़ा।

उन्होंने कहा, “मेरा दिल इतना कमजोर नहीं है कि कायरों के डर से मुझे दिल का दौरा पड़ेगा। ऐसी झूठी खबर फैलाने वाले लोग कृपया कायरता का प्रदर्शन ना करें। मैं पूर्ण स्वस्थ हूँ और अभी भी आवास पर कार्यकर्ताओं से मिल रहा हूँ।”

उल्लेखनीय है योगी सरकार में मंत्री पद संभालने के बावजूद चुनाव के समय पार्टी का दामन छोड़ने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य को सपा में शामिल होने के बाद हार का सामना करना पड़ा था। इन चुनावों से पहले उन्हें ओबीसी वर्ग में बड़ा नेता माना जाता था, लेकिन इन चुनावों में हुई फजीहत के बाद उनका जगह जगह मजाक बन रहा है।

‘मुझे कश्मीर फाइल्स से नफरत है, इसने सब बर्बाद कर दिया’: RGV के ‘रिव्यू’ पर बोले विवेक अग्निहोत्री- इसलिए मैं आपसे प्यार करता हूँ

निर्देशक विवेक रंजन अग्निहोत्री की चर्चित फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ (The Kashmir Files) दर्शकों को खासा पसंद आ रही है। बॉक्स आफिस पर भी इसने कमाई में हिंदी सिनेमा के कई दिग्गजों की फिल्म को पछाड़ रखा है। एक तरफ इस फिल्म ने कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार को आवाज देने का काम किया है, दूसरी तरफ इस फिल्म को लेकर भी तरह-तरह की प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही है। इस बीच निर्माता-निर्देशक राम गोपाल वर्मा ने भी फिल्म पर अपना रिव्यू दिया है।

बकौल वर्मा यह पहला मौका है जब उन्होंने किसी फिल्म का रिव्यू किया है। वीडियो की शुरुआत में ‘सत्या’ फेम वर्मा कहते हैं, “मैं अपने करियर में पहली बार किसी फिल्म का रिव्यू कर रहा हूँ। मैं फिल्म के सब्जेक्ट या विवादित कंटेंट का रिव्यू नहीं करता। मैं एक फिल्ममेकर के तौर पर रिव्यू करना चाहता हूँ कि फिल्म कैसी बनी है।”

वे कहते हैं, “द कश्मीर फाइल्स ने सभी नियमों को ध्वस्त कर दिया है। फिल्म में कलाकार नहीं हैं। डायरेक्टर ने दर्शकों को प्रभावित करने की जरा भी कोशिश नहीं की, जो कि हर फिल्ममेकर करता है। अब जब भी कोई डायरेक्टर फिल्म बनाने की कोशिश करेगा तो ‘द कश्मीर फाइल्स’ का रिफरेंस लेगा और इसे स्टडी करेगा।”

राम गोपाल वर्मा आखिर में कहते हैं, “मुझे कश्मीर फाइल्स से नफरत है, क्योंकि इसने वो सब बर्बाद कर दिया, जो मैंने सीखा था, जो मुझे लगता था कि सही है। अब मैं पीछे जाकर खुद को रीइनवेंट नहीं कर सकता। न फिर से सोच सकता हूँ। इसलिए मुझे द कश्मीर फाइल्स से नफरत है चाहे वह डायरेक्टर हो, एक्टिंग स्टाइल हो या इसका स्क्रीनप्ले हो। द कश्मीर फाइल्स से जुड़े हर इंसान से मुझे नफरत है, लेकिन मुझे विवेक अग्निहोत्री से प्यार है कि उन्होंने यह फिल्म बनाई।”

विवेक रंजन अग्निहोत्री ने अपने ट्विटर अकाउंट पर राम गोपाल वर्मा का यह वीडियो शेयर किया है। साथ ही लिखा है, “आपको द कश्मीर फाइल्स से नफरत है, इसलिए मैं आपसे प्यार करता हूँ।”

बता दें कि कश्मीरी पंडितों के नरसंहार पर बनी ‘द कश्मीर फाइल्स’ फिल्म की बॉक्स ऑफिस पर कमाई जारी है। इस फिल्म को कई राज्यों टैक्स फ्री भी कर दिया गया है। प्रधानमंत्री मोदी से लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी इस फिल्म की सराहना की है। यही नहीं, आरआरआर फिल्म के प्रमोशन के लिए मीडिया के बीच पहुँचे बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान से जब द कश्मीर फाइल्स को लेकर सवाल पूछे गए तो उन्होंने कहा, “मैं जरूर देखूँगा उसे, क्योंकि वो इतिहास का वो हिस्सा है जिससे हमारा दिल दुखता है। कश्मीर में जो कश्मीरी पंडितों के साथ हुआ है वो यकीनन दुख की बात है। उस टॉपिक पर अगर कोई फिल्म बनी है तो यकीनन हर हिंदुस्तानी को उसे देखना चाहिए। हर हिंदुस्तानी को याद करना चाहिए कि एक इंसान पर अत्याचार हो तो उस पर क्या बीतती है।”

भारत को ऑस्ट्रेलिया ने सौंपी भगवान शिव, विष्णु और जैन परंपरा की 29 प्राचीन मूर्तियाँ, PM मोदी ने निरीक्षण कर दिया विशेष धन्यवाद

ऑस्ट्रेलिया (Australia) से 29 प्राचीन पुरावशेषों (Antiquities) को भारत (India) लाया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Pm Narendra Modi) ने ऑस्ट्रेलिया से वापस लाई गईं इन प्राचीन मूर्तियों का निरीक्षण किया। बताया जा रहा है कि ये पुरावशेष अलग-अलग समय अवधि के हैं। इनमें से कुछ 9-10वीं शताब्दी ई. पूर्व के भी हैं। 

ऑस्ट्रेलिया से लाए गए पुरावशेष 6 श्रेणियों में हैं। ये श्रेणियाँ शिव और उनके शिष्य, शक्ति की पूजा, भगवान विष्णु और उनके रूप, जैन परंपरा, चित्र और सजावटी वस्तुओं के तौर पर हैं।

ये पुरावशेष विभिन्न प्रकार के बलुआ पत्थर, संगमरमर, कांस्य, पीतल, कैनवास पर बनीं मूर्तियाँ और पेंटिंग हैं। बताया जा रहा है कि ये मूर्तियाँ और पेंटिंग्स राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल से हैं। 

प्रधानमंत्री कार्यालय ने इसकी जानकारी देते हुए ट्वीट किया, “प्राचीन भारतीय कलाकृतियों को लौटाने की पहल के लिए मैं आप को विशेष रूप से धन्यवाद देना चाहता हूँ। इनमें राजस्थान, पश्चिम बंगाल, गुजरात, हिमाचल प्रदेश के साथ कई अन्य भारतीय राज्यों से अवैध तरीकों से निकाली गई सैकड़ों वर्ष पुरानी मूर्तियाँ और चित्र हैं।”

पीएम मोदी और स्कॉट मॉरिसन वर्चुअल समिट में होंगे शामिल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन 21 मार्च को भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच होने वाले दूसरे वर्चुअल समिट में हिस्सा लेंगे। इससे पहले दोनों देशों के बीच 4 जून 2020 को पहला वर्चुअल शिखर सम्मेलन हुआ था। इसमें दोनों देशों के बीच संबंधों को नया आयाम मिला था। 

इस वर्चुअल समिट में दोनों नेता व्यापक रणनीतिक साझेदारी के तहत विभिन्न पहलों पर हुए कामों की समीक्षा करेंगे। यह समिट भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच कई क्षेत्रों में नई पहल और सहयोग को भी आगे ले जाएगा। दोनों नेता आपसी हित के क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चा करेंगे।

जिसके साथ खेलता-जो देते थे पढ़ाई के पैसे, एक दिन उसी कश्मीरी पंडित को गोली मारने पहुँच गया बिट्टा कराटे: अमित की हत्या क्यों, 32 साल बाद खुला राज

द कश्मीर फाइल्स के रिलीज होने के बाद तमाम कश्मीरी पंडित अपने-अपने अनुभव सोशल मीडिया पर साझा कर रहे हैं। इसी बीच JKLF के खूँखार आतंकी बिट्टा कराटे से जुड़ा एक और वाकया सामने आया है। कश्मीरी पंडितों की निर्मम हत्या करने वाले आतंकी बिट्टा कराटे ने कम से कम 20 कश्मीरी पंडितों को अपने हाथ से मारा था। इसी में एक अमित नाम का नौजवान लड़का भी था। अमित की हत्या के लिए कराटे ने कोई साजिश नहीं रची थी। उसे तो उस कश्मीरी पंडित को मारना था जिनके परिवार के साथ वो क्रिकेट खेलता था और जो उसे स्कूल जाने के लिए पैसे देते थे।

कश्मीर ओवरसीज ऑर्गेनाइजेशन के मेडिकल डायरेक्टर राजीव पंडित ने पहली बार बिट्टा कराटे से जुड़ी ये कहानी अपने ट्विटर पर साझा की है। राजीव ने बताया कि जिस शख्स के धोखे में कराटे ने अमित को मौत के घाट उतारा, वो उनके मामा थे। उन्होंने अपने ट्वीट में जानकारी दी कि कैसे बिट्टा की गोली से उनके मामा बचे और अमित की जान गई।

उन्होंने लिखा, “फारूख अहमद डार के आतंकी बनने से पहले वो सिर्फ अन्य बच्चों की तरह था जिसका घर का नाम बिट्टा था और वो श्रीनगर में मेरे परिवार के साथ क्रिकेट खेलता था। मेरे मामा उसे स्कूल जाने के लिए पैसे देते थे।”

राजीव के ट्वीट से मालूम चलता है कि कैसे बचपन में बिट्टा के संबंध राजीव पंडित के घर से ठीक-ठाक थे। लेकिन जब वो ट्रेनिंग कैंप से लौटा तो चीजें बदल गईं। वह लिखते हैं, “POK में बिट्टा की ट्रेनिंग के बाद जब वो लौटा तो उसे आदेश मिले कि वो मेरे मामा को मारे। बिट्टा के साथ JKLF का एक और आतंकी था जो मेरे मामा पर नजर बनाए हुए था। उसने मेरे मामा को घर से निकल कर हबा कदल चौहारे की ओर जाते देखा। उनकी योजना थी वो मेरे मामा को नजदीक से गोली मारेंगे।”

वह बताते हैं, “नजर बनाए रखने वाले ने मेरे मामा को 16 फरवरी 1990 को सुबह 9:30 बजे घर से जाते देखा, उन्होंने चमड़े की जैकेट पहनी थी। बिट्टा को ये सारी जानकारी दी गई और वह मामा को मारने आगे बढ़ा। लेकिन तभी बीच रास्ते में मामा को याद आया कि उनके बड़े भाई का जन्मदिन है इसलिए वह दोबारा से पूजा में शामिल होने वापस घर लौट गए। पीछा करने वाले ने ये नहीं देखा कि मामा वापस लौटे हैं। उनके पीछे एक 26 साल का नौजवान लड़का अनिल भान हबा कदल से निकल रहा था जिसने चमड़े की जैकेट पहनी हुई थी।” बिट्टा कराटे ने प्राप्त जानकारी के अनुसार चौराहे पर उस व्यक्ति को मौत के घाट उतार डाला जिसे वह राजीव पंडित का मामा मान रहा था।

राजीव पंडित लिखते हैं, “आप कभी भी उस माँ की चीख नहीं भूल सकते जिसने खून से सने अपने बेटे के शव को देखा। आतंकी जान गए कि उन्होंने गलत आदमी को मार दिया है। लेकिन अनिल का ही बलिदान था कि आज मेरे मामाजी जिंदा हैं।” वह इस घटना को याद करते हुए कहते हैं कि ये दुख न तो अनिल की माँ के हिस्से होना चाहिए और न ही उनके मामाजी। वह बताते हैं कि अमेरिका में 30 सालों से कश्मीरी पंडितों की आवाज बनते हुए उन्होंने ये कहानी कभी किसी को नहीं बताई थी क्योंकि उन्हें लगता था कि उनकी सुनवाई कभी नहीं होगी। वह कश्मीरी पंडितों की आवाज बनने के लिए विवेक अग्निहोत्री को आभार व्यक्त करते हैं।