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2.5 साल में 6 करोड़ घरों तक पीने का शुद्ध पानी, ‘नमामि गंगे’ की 183 परियोजनाएँ पूरी: ‘विश्व जल दिवस’ पर जानिए क्या कर रही मोदी सरकार

पूरी दुनिया में 22 मार्च को ‘विश्व जल दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। भारत में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर याद दिलाया कि माताओं एवं बहनों के जीवन को आसान बनाने में ‘जल जीवन मिशन’ अत्यंत प्रभावी साबित हो रहा है और जन–जन की भागीदारी से घर-घर नल से जल पहुँचाने का संकल्प पूरा होगा। एक आँकड़ा बता दें कि पिछले 2.5 वर्षों में 6 करोड़ परिवारों तक ‘नल जल कनेक्शन’ पहुँचाया गया है।

लेकिन, ये भी एक सच्चाई ही है कि आज़ादी के 70 वर्ष हो जाने के बावजूद 19 करोड़ ग्रामीण घरों में से सिर्फ 3.23 करोड़ ही ऐसे थे, जहाँ पीने का शुद्ध पानी पहुँच पाता था। मोदी सरकार की ‘कृषि सिंचाई योजना’, ‘हर खेत को पानी’, ‘More Crop Per Drop’ अभियान, ‘नमामि गंगे मिशन’, ‘जल जीवन मिशन’, ‘अटल भूजल योजना’, वर्षा जल संग्रह के लिए ‘Catch The Rain’ और नदियों को जोड़ने के अभियान के माध्यम से जल संरक्षण और इसकी सहज उपलब्धता की ओर कदम बढ़ाए जा रहे हैं।

मोदी सरकार की योजनाओं का प्रसार इतना व्यापक है कि सुदूर लेह के स्कम्फुक नुब्रा गाँव की महिलाएँ भी कहती हैं कि पहले उन्हें पानी के लिए कई किलोमीटर चलना पड़ता है, लेकिन अब उनके घर तक स्वच्छ जल आ रहा है। ओडिशा के गजपति स्थित मधुराम्बा में 2018 तक मात्र 4 चापाकल ही पीने के पानी का स्रोत थे, लेकिन ‘हर घर जल’ से चीजें आसान हो गईं। गुजरात के वड़ोदरा में 100 स्कूलों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग होती है, जिससे प्रतिदिन 10 करोड़ लिटर पानी बचाया जा रहा है।

देश भर में कई ‘जल योद्धा’ तैयार किए गए। जैसे उत्तर प्रदेश के हमीरपुर स्थित पचखुरा निवासी स्वामी कृष्णानंद ने 250 वर्ष पुराने 2.7 एकड़ के तालाब को 8 फ़ीट गहराया बनाया। इस काम में पूरे 2 साल लगे। बाँदा के जाखणी में 6 तालाबों और 30 कुँओं को पुनर्जीवित किया गया। सूखे बुंदेलखंड में ये बड़ी उपलब्धियाँ हैं। आज 1.36 लाख गाँवों में पीने का स्वच्छ पानी नल के माध्यम से पहुँचा है और कुल 9 करोड़ घरों को ये सुविधा मिली है।

अब तक साढ़े 8 लाख स्कूलों और 8.70 लाख आंगनबाड़ी केंद्रों तक स्वच्छ पानी की व्यवस्था पहुँच चुकी है। पाइपलाइन की फिटिंग, रख-रखाव और इलेक्ट्रिसिटी सहित कई क्षेत्रों में इन योजनाओं से रोजगार भी मिल रहा है। ‘जल शक्ति मंत्रालय’ ने अब तक 3.82 लाख ‘विलेज एक्शन प्रोग्राम (VAP)’ तैयार किए हैं और 4.69 लाख ‘पानी समितियाँ’ काम कर रही हैं। पंजाब, गुजरात, बिहार और हिमाचल प्रदेश में तो 90% घरों तक पीने का स्वच्छ जल पहुँच चुका है।

ऐसे 4378 शहर हैं, जहाँ के सभी घरों में स्वच्छ पीने का पानी पहुँचाया जा रहा है। सेंसर आधारित व्यवस्था से लेकर आधार कार्ड के द्वारा पहचान तक, तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। पानी समितियों में 50% महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। ‘अटल बहुजन योजना’ के तहत उन इलाकों के भूजल स्तर को ऊपर लाया जाएगा, जहाँ ये कम है। पाँच नदियों को जोड़ने की योजना से 11 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होगी, 62 लाख लोगों को शुद्ध जल मिलेगा और 103 मेगावाट बिजली का भी उत्पादन होगा।

गंगा नदी को बचाने के लिए अब तक ‘नमामि गंगे’ के तहत 28 रिवर फ्रंट डेवलपमेंट, 182 घाट एवं 112 श्मशानों का निर्माण, कई सफाई परियोजनाओं, डॉल्फिन संरक्षण परियोजना, 2300 करोड़ रुपए की लागत से गंगा नदी के किनारे जंगल विस्तार सहित 183 परियोजनाओं को पूरा कर लिया गया है और 150 प्रगति पर है। जनता की, खासकर महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। खेती के लिए सिंचाई का पानी उपलब्ध कराने को भी मोदी सरकार गंभीर है।

पति को मार खून से सना चावल खिलाया… कश्मीरी हिंदुओं के साथ बर्बरता सुन दहल गए थे दर्शन कुमार, कहा- खुद से बड़बड़ाने लग गया था

इस्लामी आतंकियों ने कश्मीरी हिंदुओं के साथ जो बर्बरता की थी, उसे विवेक अग्निहोत्री की ‘द कश्मीर फाइल्स (The Kashmir Files)’ ने जुबान देने का काम किया है। इन्हीं बर्बर घटनाओं में से एक में आतंकियों ने एक कश्मीरी पंडित की हत्या के बाद उनके खून से सना चावल उनकी पत्नी को खिलाया था। अभिनेता दर्शन कुमार ने बताया है कि इस घटना के बारे में सुनकर वे दहल उठे थे। उन्हें उस रात नींद नहीं आई थी।

दर्शन कुमार ने द कश्मीर फाइल्स में कृष्णा पंडित का किरदार निभाया है, जो अपने माता-पिता और भाई के मौत की सच्चाई का पता लगाने की कोशिश करता है। इस भूमिका का उन्होंने जिस तरीके से निर्वाह किया है उसकी काफी तारीफ हो रही। दैनिक भास्कर को दिए इंटरव्यू में दर्शन कुमार ने विस्तार से इस फिल्म से जुड़े अपने अनुभवों को साझा किया है।

दर्शन कुमार ने इंटरव्यू में जिस वाकये का जिक्र किया है वह फिल्म में भी दर्शाया गया है। इसमें एक महिला को जबरदस्ती उसके पति के खून में सना चावल खाने को मजबूर किया जाता है। यह घटना साल 1990 की है, आतंकी बीके गंजू को तलाश करते हुए आए, लेकिन वो चावल की बोरी में छिप गए। इस्लामिक आतंकियों ने उन्हें कई गोलियाँ मारी और खून से सने उस चावल को उनकी पत्नी को खाने पर मजबूर किया।

इंटरव्यू में दर्शन कुमार ने बताया है कि वे ‘द कश्मीर फाइल्स’ के अपने रोल को करियर का सबसे मुश्किल रोल मानते हैं। उन्होंने बताया है कि शूटिंग के दौरान वे लगभग डिप्रेशन में चले गए थे। रात-रात भर सो नहीं पाते थे। फिल्म की शूटिंग के दौरान उन्हें किसी भी रात ठीक से नींद नहीं आई। रात को उठ-उठ कर बुदबुदाने लगते थे। इससे उबरने के लिए उन्हें लगभग दो सप्ताह तक मेडिटेशन का सहारा लेना पड़ा।  

दैनिक भास्कर से बात करते हुए उन्होंने बताया कि जब डायरेक्टर विवेक रंजन अग्निहोत्री ने उन्हें पीड़ितों का वीडियो दिखाया तो वह स्तब्ध रह गए। वह कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं थे। वह बताते हैं कि पति को मार कर उसके खून से सने चावल को उसकी पत्नी को खिलाने की घटना देखकर वह सन्न रह गए थे। उन्होंने कहा है कि पहले तो वे इसे लेकर काफी उत्साहित थे, लेकिन स्क्रिप्ट पढ़ने के बाद वह अंदर तक हिल गए। जब वह स्क्रिप्ट पढ़ रहे थे तो उन्होंने वही दर्द महसूस किया।

इंटरव्यू के दौरान दर्शन ने बताया कि उन्होंने 13 पेज के स्क्रिप्ट को एक ही टेक में कर लिया। उन्होंने बताया कि सभी कलाकारों का फोकस इस बात पर था कि इस सच्ची कहानी को सही तरीके से लोगों तक पहुँचाई जा सके। इसके लिए सभी ने काफी मेहनत की। जब वह होटल में आराम करते था तब भी किरदार में रहने की कोशिश करते थे। वह कहते हैं कि इस फिल्म ने उनकी जिंदगी बदल दी। अब उनके पास ए लिस्टेड निर्देशकों के कॉल आते हैं। अपने जीवन में आए इस परिवर्तन से वह काफी खुश है।

‘बेटी की सुरक्षा में जो बनेगा रोड़ा, मामा का बुलडोजर बनेगा हथौड़ा’: MP में शिवराज का नया अवतार, भोपाल में लगे होर्डिंग

उत्तर प्रदेश के हालिया विधानसभा चुनावों के दौरान बुलडोजर की खूब चर्चा हुई थी। इसकी वजह योगी सरकार के कार्यकाल में अपराधियों, माफियाओं की अवैध संपत्ति पर हुई कार्रवाई रही। अब मध्य प्रदेश में भी बुलडोजर सुर्खियों में है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को ‘बुलडोजर मामा’ बताया जा रहा है।

राजधानी भोपाल में बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा के आवास के बाहर होर्डिंग लगाकर सीएम शिवराज के नए अवतार को दर्शाया गया है। इस पर लिखा है, “बहन बेटी की इज्जत से जिसने किया खिलवाड़, बुलडोजर पहुँचेगा उसके द्वार… बेटी की सुरक्षा में जो बनेगा रोड़ा, मामा का बुलडोजर बनेगा हथौड़ा।”

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की इस नई छवि की वजह हालिया मामलों में आरोपितों के​ खिलाफ कार्रवाई में बुलडोजर का इस्तेमाल होना है। रायसेन में होली के दिन सांप्रदायिक हिंसा फैलाने वाले आरोपितों के घर-दुकानों के उन हिस्सों को बुलडोजर से जमींदोज कर दिया गया था जो अतिक्रमण कर बनाए गए थे। इसी तरह सिवनी जिले के कुरई थाना क्षेत्र में दुष्कर्म के आरोपित का अवैध निर्माण धराशायी किया गया। श्योपुर में भी नाबालिग के साथ गैंगरेप के तीन आरोपितों के अवैध निर्माण बुलडोजर के जरिए गिरा दिए थे।

उल्लेखनीय है कि यूपी विधानसभा चुनावों के नतीजे आने के बाद सीएम योगी के समर्थकों ने बुलडोजर को भाजपा की जीत के प्रतीक के तौर पर पेश किया था। योगी को उनके समर्थक ‘बुलडोजर बाबा’ भी कहते हैं। अब यह मध्य प्रदेश की बीजेपी सरकार की भी पहचान बनती दिख रही है।

कौन हैं MLA सरबत करीम अंसारी, जो ‘ईश्वर’ के नाम शपथ 3 बार में भी पूरा नहीं कर पाए

उत्तराखंड के विधानसभा चुनाव में इस बार बसपा अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में सफल रही। बसपा को दो ही सीट पर जीत मिली, जिसकी बदौलत बसपा ने विधानसभा में 5 साल के अंतराल के बाद फिर से अपनी उपस्थिति सुनिश्चित की है। हरिद्वार के मंगलौर व‍िधानसभा सीट से जीत के आए बीएसपी के उम्मदीवार सरबत करीम अंसारी तीन बार में भी अपना शपथ ग्रहण पूरा नहीं कर पाए।

पहली बार में हिंदी में ईश्वर के नाम पर शपथ लेते हुए ठीक से नहीं पढ़ पाए। फिर दोबारा-तिबारा करके जैसे-तैसे शपथ ग्रहण पूरा किया। हालाँकि, इस दौरान प्रोटेम स्पीकर बंशीधर भगत लगातार मदद करते नजर आए। लेकिन कभी पन्ना फटा है, तो कभी कठिन या कटा हुआ कहते नजर आए। अंत में प्रोटेम स्पीकर ने जैसे तैसे शपथ ग्रहण पूरा कराया।

नीचे वीडियो में आप उन्हें शपथ लेते हुए देख भी सकते हैं। अंत में प्रोटेम स्पीकर को खुद ही बोलकर सरबत करीम अंसारी को शपथ दिलाकर, खुद ही बधाई दी।

बता दें कि उत्तराखंड व‍िधानसभा चुनाव 2022 में मंगलौर व‍िधानसभा सीट पर बीएसपी के उम्मदीवार ने जीत दर्ज की है। बीएसपी उम्मीदवार सरबत करीम अंसारी ने काजी न‍िजामुद्दीन को 598 वोटों से हराया था। सरबत करीम अंसारी को 32,660 वोट और काजी न‍िजामुद्दीन को 32,062 वोट मिले।

मंगलौर उत्तराखंड की मुस्‍ल‍िम बहुल सीटों में शामिल है। उत्तराखंड व‍िधानसभा की ये ऐसी सीट हैं, ज‍िस पर लंबे समय से कॉन्ग्रेस और बीएसपी के बीच मुकाबला होता रहा है। इस बार भी कॉन्ग्रेस के ट‍िकट पर काजी न‍िजामुद्दीन ने चुनाव लड़ा था, तो वहीं बीएसपी के ट‍िकट पर सरबत करीम अंसारी और बीजेपी के ट‍िकट पर द‍िनेश पंवार चुनाव मैदान में थे। जिसमें करीम अंसारी ने बाजी मारी।

बसपा के हाथ उत्तराखंड के जो दो सीट लगे उनमें लक्सर सीट से मोहम्मद शहजाद और मंगलौर सीट पर सरबत करीम अंसारी जीतने वालों में शामिल हैं। इन दोनों सीट पर जीत के साथ बसपा ने एक बार फिर विधानसभा पहुँचने में सफलता पाई है।

इस प्रकार उत्तराखंड में हुए विधानसभा चुनावों में बसपा का प्रदर्शन तीसरे प्रमुख राजनीतिक दल के रूप में रहा। जहाँ वर्ष 2002 में हुए पहले चुनाव में बसपा ने सात सीटें जीती थी। वर्ष 2007 में बसपा ने आठ सीटों पर कब्जा जमाया। वहीं वर्ष 2012 में बसपा का वोट बैंक तो बढ़ा, लेकिन उसकी सीटों की संख्या घट कर तीन रह गई थी।

गौरतलब है कि वर्ष 2017 में मोदी मैजिक के सामने बसपा भी अपना खाता नहीं खोल पाई थी। वहीं मौजूदा विधानसभा चुनाव में बसपा ने पिछले चुनाव से बेहतर प्रदर्शन करते हुए दो सीटों पर जीत दर्ज की है।

18 साल की पूजा को बीच सड़क पर मार दी गोली, क्योंकि उसे अगवा नहीं कर पाया वाहिद: पाकिस्तान की घटना

पाकिस्तान के सिंध प्रांत में 18 साल की हिंदू लड़की की गोली मारकर हत्या कर दी गई। रिपोर्टों में उसकी पहचान पूजा कुमारी ओड के तौर पर की गई है। घटना सोमवार (21 मार्च 2022) की है। सुक्कुर जिले के रोही में पूजा का अपहरण करने की कोशिश की गई। इसमें नाकाम रहने पर उसे बीच सड़क पर ही गोली मार दी गई।

पाकिस्तानी पत्रकार नायला इनायत के मुताबिक वाहिद बख्श लशारी ने पूजा का अपहरण करने की कोशिश की। इसका विरोध करने पर उसे अपनी जान गँवानी पड़ी। पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदू लड़कियों को अगवा कर उनसे जबरन निकाह करना तथा उनका धर्म परिवर्तन करवाना आम बात है।

द फ्राइडे टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में हर साल अल्पसंख्यक महिलाओं खासकर सिंध में हिंदुओं का अपहरण किया जाता है। मजहबी कट्टरपंथियों द्वारा उनका जबरन धर्म परिवर्तन किया जाता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यक लंबे समय से जबरन निकाह और धर्मांतरण से पीड़ित हैं। पीपुल्स कमिशन फॉर माइनॉरिटीज राइट्स और सेंटर फॉर सोशल जस्टिस के अनुसार 2013 और 2019 के बीच जबरन धर्मांतरण की 156 घटनाएँ सामने आईं। 2019 में सिंध सरकार ने दूसरी बार जबरन धर्मांतरण और निकाह को प्रतिबंधित करने का प्रयास किया, लेकिन मजहबी कट्टरपंथियों ने इसका विरोध किया।

गौरतलब है कि हाल ही में सिंध से ही जबरन धर्म परिवर्तन के लिए दो नाबालिग हिंदू लड़कियों के अपहरण का मामला सामने आया था। सिंध के खैरपुर से आरती मेघवार (14वर्ष ) और घोटकी से राबिया भील (13) का अपहरण कर लिया गया था। उससे पहले बिंदिया नाम की लड़की को उठाया गया था।

इसी तरह 15 साल की हिंदू लड़की पायल कुमारी का भी सिंध के गोथ वाली मुहम्मद पटाफी से अपहरण किया गया था। फिर जबरन धर्मांतरण के बाद उसका निकाह करवा दिया गया। नजमा कोहली का अपहरण कर उससे भी इस्लाम कबूल करवाया गया था। फिर फातिमा नाम देकर 35 वर्षीय अमानुल्लाह से उसका निकाह करावाया गया था।

‘द कश्मीर फाइल्स’ से डरी कॉन्ग्रेस सरकार: राजस्थान के कोटा में 1 महीने के लिए धारा 144, 5 से अधिक के जमा होने पर पाबंदी

राजस्थान के कोटा जिले के सिनेमाघरों में ‘द कश्मीर फाइल्स’ की स्क्रीनिंग के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के मद्देनजर अधिकारियों ने 22 मार्च से 21 अप्रैल तक जिले भर में CRPC की धारा 144 लगाने का सोमवार (21 मार्च, 2022) को आदेश दिया है। कोटा के जिलाधिकारी ने एक आदेश में कहा कि द कश्मीर फाइल्स की स्क्रीनिंग के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मंगलवार 22 मार्च से 21 अप्रैल तक धारा 144 लागू है। जिसके तहत कहीं भी 5 लोगों से ज्यादा लोग जमा नहीं हो सकते हैं।

राजस्थान सरकार के अधिकारियों द्वारा कहा जा रहा है कि यह कदम कई त्योहारों से पहले सावधानी बरतने के लिए उठाया गया है। साथ ही नए आदेश के मुताबिक यह भी कहा गया है कि फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ देखने के लिए भीड़ नहीं जुटनी चाहिए।

जिला कलेक्टर एवं जिलाधिकारी (कार्यवाहक) राजुकमार सिंह की ओर से जारी आदेश में भीड़ के जमा होने, विरोध-प्रदर्शन करने, जुलूस और मार्च निकालने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। हालाँकि, इस दौरान चेती चंद, महावीर जयंती, गुड फ्राइडे, बैसाखी, जुमा-तुल-विदा के त्योहार भी पड़ेंगे। आधिकारिक आदेश में कहा गया है कि यह आदेश सरकारी कामों जैसे कोविड टीकाकरण और पुलिस कार्यक्रमों पर लागू नहीं होगा।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस पाबंदी को लेकर फिल्म डायरेक्टर विवेक रंजन अग्निहोत्री ने भी अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है। ‘द कश्मीर फाइल्स’ के डायरेक्टर विवेक रंजन अग्निहोत्री ने सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से इस मामले में दखल देने की माँग की है।

वहीं इस मामले को लेकर बीजेपी विधायक रामलाल शर्मा ने कहा, “राजस्थान सरकार का मानसिक दिवालियापन निकल चुका है। जिस तरह के सरकारी आदेश आ रहे हैं उनकी पालना होगी या अवहेलना? ऐसे आदेश राजस्थान सरकार की मानसिकता का परिचय दे रहे हैं। धारा 144 लगा कर क्या साबित कर रहा प्रशासन? क्या केवल कोटा में ही मनाए जाएँगे त्योहार?”

रामलाल ने राजस्थान सरकार से माँग करते हुए कहा, “अगर कॉन्ग्रेस की अशोक गहलोत सरकार कश्मीर फाइल को प्रतिबंधित करना चाहती है तो अपनी मंशा साफ करे और अगर ऐसा नहीं है तो सरकार इस आदेश को वापस ले।”

यही नहीं बीजेपी से कोटा उत्तर पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजाल ने भी धारा 144 लागू करने के राजस्थान सरकार के आदेश पर निशाना साधा और कहा, “मंगलवार को कोटा उत्तर विधानसभा क्षेत्र में एक विशाल ‘चंडी मार्च’ निकाला जाएगा। इसलिए धारा 144 लगाई गई थी और ‘द कश्मीर फाइल्स’ सिर्फ एक बहाना है।”

गौरतलब है कि 11 मार्च को सिनेमाघरों में रिलीज हुई ‘द कश्मीर फाइल्स’ को मध्य प्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, गुजरात, त्रिपुरा, गोवा, उत्तराखंड में टैक्स फ्री कर दिया गया है। फिल्म 1990 में कश्मीरी पंडितों के नरसंहार पर है और इसे डायरेक्टर विवेक रंजन अग्निहोत्री द्वारा निर्देशित किया गया है। फिल्म की मुख्य भूमिकाओं में अनुपम खेर, मिथुन चक्रवर्ती, पल्लवी जोशी हैं।

‘दिल्ली की 16 मस्जिदों में नहीं पढ़ने दी गई शब-ए-बारात की नमाज’: जफरुल इस्लाम ने कहा- ये ठीक बात नहीं है, 50 साल में ऐसा पहली बार हुआ

दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष जफरुल इस्लाम खान (Zafarul Islam Khan) ने रविवार (20 मार्च 2022) को उर्दू अखबार की एक कटिंग ट्वीट कर पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर लिखा, “शब-ए-बारात के दिन दिल्ली के पंचशील इलाके की 16 मस्जिदों में पुलिस ने नमाज नहीं पढ़ने दी।”

इस्लाम ने कहा कि मस्जिद वालों से कहा जा सकता था कि वे देर से नमाज पढ़वा दें। जुमे (शुक्रवार) की नमाज एक से दो बजे होती है, जिसे तीन बजे तक कराया जा सकता था, लेकिन उन्होंने (पुलिस) ने इसे पूरा ही बंद करा दिया, जो ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि यह केवल मस्जिद की बात नहीं है। कल इसी तरह मंदिर, गिरिजाघर या गुरुद्वारा को भी वे बंद करा सकते हैं।

जफरुल इस्लाम यही नहीं रुके उन्होंने आगे कहा कि हम समझ सकते हैं कि शब-ए-बारात और होली एक ही दिन थी। इसलिए हो सकता है कि पुलिस ने विवाद होने के डर से यह निर्णय लिया हो, लेकिन मेरी व्यक्तिगत राय है कि यदि उस दिन मस्जिद के सामने पुलिस वाले होते तो जुमे की नमाज पढ़ने में कोई दिक्कत नहीं होती। वहीं, पंचशील पुरानी मस्जिद के इमाम हबीब इलाही का कहना है कि हमारे यहाँ जुमे के दिन मस्जिद को नमाज के लिए बंद करा दिया गया। पचास साल में ऐसा पहली बार हुआ है, जब हमें यहाँ नमाज पढ़ने से रोका गया।

दूसरी ओर जफरुल इस्लाम के आरोपों पर दिल्ली पुलिस ने अपना स्पष्टीकरण दिया है। पुलिस ने कहा कि इससे पहले कई बार शब-ए-बारात के मौके पर बाइकर्स हुड़दंग करते देखे गए हैं, जिससे कानून-व्यवस्था बिगड़ने का डर बना रहता है। शुक्रवार को शब-ए-बारात के साथ होली भी थी। भले ही कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए थे, लेकिन कानून-व्यवस्था को देखते हुए ही लोगों को देर शाम इन इमारतों में दाखिल नहीं होने दिया गया।

दिल्ली पुलिस की पीआरओ सुमन नलवा का कहना कि जफरुल इस्लाम जिन मस्जिदों की बात कर रहे हैं, वे सभी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की निगरानी वाले स्मारक हैं। इनमें सूरज उगने से पहले और दिन ढलने के बाद प्रवेश नहीं करने दिया जाता है।

काशी के 125 वर्षीय योग गुरु स्वामी शिवानंद को राष्ट्रपति कोविंद ने पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया, PM मोदी भी हुए नतमस्तक: देखें वीडियो

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (President Ram Nath Kovind) ने सोमवार (22 मार्च 2022) को राष्ट्रपति भवन में आयोजित पुरस्कार समारोह में काशी के 125 वर्षीय योग गुरु स्वामी शिवानंद (Swami Sivananda) समेत कई हस्तियों को पद्म पुरस्कारों से सम्‍मानित किया।

राष्ट्रपति भवन में सम्मान समारोह के दौरान जब राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने योग गुरु स्वामी शिवानंद को पद्मश्री से सम्मानित करने के लिए उनके नाम की घोषणा की, तो वह बड़ी ही फुर्ती के साथ अपनी कुर्सी से उठे और तीन बार अपना शीश झुकाया। सबसे पहले उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के सामने शीश झुकाया। इस दौरान PM ने भी कुर्सी से उठकर स्वामी शिवानंद को प्रणाम किया। इस मौके पर उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू और गृह मंत्री अमित शाह समेत कई नेता उनके सम्मान में अपनी कुर्सी से उठ गए थे और तालियों से उनका अभिवादन किया।

इसके बाद योग गुरु शिवानंद ने दो बार झुककर राष्ट्रपति को दंडवत प्रणाम किया। यह दृश्य देख राष्ट्रपति कोविंद भी अपनी कुर्सी से उठ खड़े हुए और आगे बढ़कर स्वामी शिवानंद को उठाया और पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया। बताया जाता है कि बाबा शिवानंद कबीरनगर इलाके के रहने वाले हैं, वह 125 साल की उम्र में भी पूरी तरह से स्वस्थ हैं।

जानकारी के मुताबिक, स्वामी शिवानंद की जन्मतिथि आधार कार्ड पर 8 अगस्त 1896 दर्ज है। उनका जन्म बंगाल के श्रीहट्टी जिले में हुआ था। भूख की वजह से माता-पिता की मौत होने के कारण वह आधा पेट भोजन ही करते हैं। माता-पिता की मौत के बाद वह बंगाल से काशी आ गए और यहाँ पर गुरु ओंकारानंद से दीक्षा ली। 1925 में अपने गुरु के आदेश पर वह दुनिया भ्रमण पर निकले और करीब 34 साल तक देश-विदेश घूमते रहे।

बता दें कि पद्म पुरस्कार तीन श्रेणियों में प्रदान किए जाते हैं। पहला पद्म विभूषण, दूसरा पद्म भूषण और तीसरा पद्म श्री। आज दो हस्तियों को पद्म विभूषण, आठ को पद्म भूषण और 54 को पद्म श्री से सम्‍मानित किया गया।

‘व्लादिमीर पुतिन को जहर देकर मारना चाहते हैं रूसी अधिकारी’: यूक्रेन का दावा- राष्ट्रपति ने पर्सनल स्टाफ के 1000 कर्मचारियों को काम से निकाला

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपने पर्सनल स्टाफ के लगभग 1000 सदस्यों को हटा दिया है। दरअसल पुतिन को डर है कि कहीं ये लोग उन्हें जहर न दे दें। जिन लोगों को हटाया गया है उनमें बॉडी गार्ड, कुक, कपड़े धोने वाले और निजी सचिव शामिल है।

इन सभी को फरवरी महीने में ही हटाया गया है। हटाए गए लोगों की जगह जिन्हें रखा गया है उनके बारे में पूरी तहकीकात की गई है। बता दें कि यूक्रेन पर हमले की वजह से रूस और उसके सहयोगियों पर दुनिया भर में कठोर प्रतिबंध लगाए हैं।

इधर यूक्रेन के एक इंटेलीजेंस बॉडी ने दावा किया है कि क्रेमलिन के अंदरूनी लोग व्लादिमीर पुतिन को जहर देकर हटाने की साजिश रच रहे हैं। यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय के मुख्य खुफिया निदेशालय के अनुसार, उच्च श्रेणी के रूसी अधिकारियों के प्रभावशाली सदस्यों के एक समूह ने राष्ट्रपति को हटाने के उद्देश्य से एक योजना बनाई है।

इस समूह का लक्ष्य पुतिन को जल्द से जल्द सत्ता से हटाना और पश्चिम के साथ आर्थिक संबंध बहाल करना है। खुफिया जानकारी के अनुसार, शक्तिशाली अंदरूनी सूत्र युद्ध के प्रभाव और रूसी अर्थव्यवस्था पर उसके बाद के प्रतिबंधों से निराश हैं।

यूक्रेनी खुफिया एजेंसी का कहना है कि FSB के निदेशक ऑलेक्ज़ेंडर बोर्तनिकोव पुतिन को बदलने के लिए चुने गए व्यक्ति हैं। राष्ट्रपति का पद सँभालने से पहले पुतिन रूसी खुफिया एजेंसी के निदेशक थे और उन्होंने और बोर्तनिकोव दोनों ने केजीबी में लेनिनग्राद में एक साथ काम किया था।

अमेरिकी सांसद ने जताया संदेह

उल्लेखनीय है कि अमेरिका के साउथ कैरोलिना के सांसद लिंडसे ग्राहम ने रूस के राष्ट्रपति की हत्या की अपील की थी। ग्राहम ने इस महीने की शुरुआत में पुतिन की तुलना तानाशाह एडोल्फ हिटलर से की थी। उन्होंने कहा था कि युद्ध को खत्म करने का एकमात्र तरीका ये है कि कोई इस व्यक्ति की हत्या कर दे। लिंडसे ने ट्वीट किया था, “इन सब को खत्म करने का सिर्फ एक तरीका ये है कि कोई पुतिन को बाहर निकाल दे। यह आप अपने देश के लिए करेंगे, दुनिया के लिए करेंगे।”

लिंडसे ग्राहम ने कहा था कि पुतिन को जहर देने या दिलवाने का काम किसी विदेशी सरकार द्वारा नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा, “क्रेमलिन (रूसी राष्ट्रपति कार्यालय) के भीतर से इसका प्रयास होगा। फ्रांस के एक खुफिया एजेंट का भी दावा है कि क्रेमलिन के अंदर के लोग तख्तापलट कर सकते हैं। वह पुतिन को सत्ता से बेदखल करने के लिए रूसी राष्ट्रपति की हत्या भी कर सकते हैं।” जहर की बात इसलिए मजबूत होती है क्योंकि रूसी सरकार अपने दुश्मनों को जहर देकर मारने के लिए ही जानी जाती है। इस फ्रेंच एजेंट का कहना है कि रशियन इंटेलिजेंस इकलौती ऐसी एजेंसी है जो जहर का इस्तेमाल करती है।

जहर दिए जाने की घटनाओं को पहले क्रेमलिन ​​​​​​​से जोड़कर देखा जाता था। क्रेमलिन के आलोचकों को नर्व एजेंट नोविचिक दिया जाता था।​​​​​​​ पुतिन के सबसे बड़े आलोचक एलेक्सी नवालनी को अगस्त 2020 में नोविचिक दिया गया था, लेकिन इलाज मिलने की वजह से वह जीवित बच गए थे। अभी वह रूस की एक जेल में बंद हैं।

बहलोलपुर में शिवलिंग तोड़ा, मूर्तियाँ खंडित की, फर्श पर मिले खून के निशान: एक्शन में आई नोएडा पुलिस, मीट की दुकानों पर चला बुलडोजर

उत्तर प्रदेश में नोएडा (Noida) के बहलोलपुर गाँव में स्थित शिव मंदिर के अंदर शिवलिंग और भगवान की अन्य मूर्तियों को खंडित (Vandalizing Shiv Temple) करने का मामला सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, असामाजिक तत्वों ने शिव मंदिर में रविवार (20 मार्च 2022) रात को तोड़फोड़ की। उन लोगों ने शिवलिंग और मंदिर में रखी मूर्तियाँ भी खंडित कर दीं। इसके अलावा मंदिर के फर्श पर खून के निशान भी मिले।

सोमवार (21 मार्च 2022) सुबह जब ग्रामीण मंदिर पहुँचे, तो वे भगवान की खंडित मूर्तियाँ देखकर आग बबूला हो गए। इसके बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर एकत्रित हो गए और हंगामा करने लगे।

वहीं, मंदिर के अंदर मांस फेंके जाने की भी खबर है। इस घटना के सामने आने के बाद आज दोपहर को पुलिस ने बहलोलपुर में स्थित मीट की दुकानों पर बुलडोजर चलाकर उन्हें ध्वस्त कर दिया।

पुलिस उपायुक्त (मध्य नोएडा) हरीश चंदर ने बताया, “स्थानीय पुलिस को बहलोलपुर गाँव में एक शिव मंदिर के अंदर तोड़फोड़ के बारे में सूचना मिली थी। इसके बाद फोरेंसिक विशेषज्ञों और डॉग स्क्वॉड के साथ पुलिस की एक टीम तुरंत घटनास्थल पहुँची, जहाँ भगवान की मूर्ति उन्हें क्षतिग्रस्त मिली।”

वहीं, अपर पुलिस उपायुक्त (जोन द्वितीय) इला मारन का कहना है, “घटनास्थल पर खून के धब्बे भी मिले हैं, जो प्रथम दृष्टया मानव के खून की तरह दिखते हैं। जाहिर है, शीशे में रखी मूर्ति को निकालने के लिए जिस व्यक्ति ने शीशा तोड़ा होगा, उसे चोट लग गई होगी और उसका खून फर्श पर गिर गया होगा।”

डीसीपी चंदर ने आगे कहा कि पुलिस मामले में हर दृष्टिकोण से जाँच कर रही है। उन्होंने मंदिर परिसर के अंदर मांस का एक टुकड़ा होने और घटना के वक्त मंदिर के पुजारी को बंधक बनाए जाने की अफवाह को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने मंदिर के पुजारी से भी संपर्क किया है, जो रात में अपने घर चला गया था और सुबह मंदिर आने पर उसने तोड़फोड़ देखी। गाँव में कानून-व्यवस्था की स्थिति नियंत्रण में है और मामले में प्राथमिकी दर्ज कर आगे की जाँच की जा रही है।