Home Blog Page 2885

कृष्णा, सचिन, साहुल पर चाकुओं से हमला… क्योंकि The Kashmir Files देख लगाए देशभक्ति के नारे: आरोपितों को खोज रही UP पुलिस

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में द कश्मीर फाइल्स (The Kashmir Files) फिल्म देख कर लौट रहे 3 युवकों पर चाकुओं से वार किया गया। हमले में तीनों पीड़ित घायल हो गए हैं। उनका इलाज स्थानीय अस्पताल में चल रहा है। पुलिस ने केस दर्ज कर के आरोपितों की तलाश शुरू कर दी है। हमले के आरोपित समुदाय विशेष से बताए जा रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना शुक्रवार (18 मार्च) की है। कुशीनगर के फजिलगंज कस्बे के एक सिनेमा हॉल में द कश्मीर फाइल्स फिल्म लगी है। रात में इस फिल्म का अंतिम शो देख कर 3 युवक देशभक्ति का नारा लगाते हुए बाहर निकल रहे थे। ये सभी युवक स्थानीय जोकवा बाजार के रहने वाले हैं। इनके द्वारा लगाए जा रहे नारे एक वर्ग विशेष को नागवार गुजरा। इस बात पर दोनों पक्षों में बहस शुरू हो गई।

कुछ ही देर बाद वर्ग विशेष के लोगों द्वारा तीनों युवकों पर हमला कर दिया गया। हमले के लिए चाकुओं का इस्तेमाल किया गया। हमले में साहुल जायसवाल, कृष्णा जायसवाल और सचिन बुरी तरह से घायल हो गए। घायलों को स्थानीय गाँव वालों ने अस्पताल पहुँचाया।

तीनों घायलों को स्थानीय फ़ाज़िलनगर स्वास्थ्य केंद्र पर प्राथमिक इलाज के बाद मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया है। SHO पटहेरवा अखिलेश कुमार सिंह ने भी घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस प्रयास कर रही है।

हैदर फिल्म वाला ‘हीरो बच्चा’… बाद में बन गया आतंकी, इंडियन आर्मी ने ठोक दिया

अब जब ‘The Kashmir Files’ दुनिया भर में बॉक्स ऑफिस पर कमाल कर रही है और फिल्म ने मात्र 8 दिनों में 117 करोड़ रुपए का कारोबार सिर्फ भारत में किया है, ये चर्चा जोर पकड़ रही है कि भला इससे पहले पिछले 30 वर्षों में कश्मीर पर बनी फिल्मों में कभी कश्मीरी पंडितों के नरसंहार को क्यों नहीं दिखाया गया। इसी तरह की एक फिल्म ‘हैदर’ थी, जिसमें अभिनय करने वाला साकिब बिलाल शेख नाम के एक युवक आतंकवादी ही बन बैठा।

‘हैदर’ फिल्म के जरिए निर्देशक विशाल भारद्वाज ने भारतीय सेना को बदनाम करने की भरसक कोशिश की थी। इसमें कश्मीर के सभी मुस्लिमों को ‘पीड़ित’ और भारतीय सेना को ‘विलेन’ दिखाया गया था, जो पाकिस्तान का भी नैरेटिव रहा है। पाकिस्तानी-अमेरिकी बशरत पीर द्वारा लिखे गए ‘हैदर’ को शेक्सपियर के नाटक ‘हेलमेट’ के रूपांतरण के रूप में बेचा गया था। साकिब बिलाल शेख ने इसमें एक छोटे से किरदार में काम किया था

आपको ये जान कर आश्चर्य होगा कि इसी साकिब बिलाल शेख ने बाद में आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैय्यबा ज्वाइन कर लिया था। इसमें दिखाया गया था कि वो बस से उतर कर हिंसा से बच कर भाग रहा है। उसमें उसे ‘चॉकलेट बॉय’ का किरदार दिया गया था। वो हाजिन बांदीपोरा के हाजिन का रहने वाला था। प्रोपेगंडा फिल्म में भले उसे हिंसा से भागते हुए दिखाया गया, असल जीवन में वो खुद हिंसक हो उठा था। उसे दिसंबर 2014 में भारतीय सेना ने एक पाकिस्तान आतंकवादी के साथ मार गिराया।

साकिब बिलाल शेख थिएटर आर्टिस्ट के रूप में काम किया करता था और उसके आतंकवादी बनने के कारण किसी को नहीं पता। फुटबाल, कबड्डी और ताइक्वांडो खेलने वाला साकिब अगस्त 2014 में अपने घर से अचानक लापता हो गया था। उसके साथ एक अन्य युवक भी लापता हुआ था। 11वीं में गणित लेकर पढ़ने वाले साकिब बिलाल शेख एक संपन्न किसान परिवार से था। उसके लापता होने के बाद उसकी वापसी के लिए उसकी अम्मी कई पीर-फकीरों के पास भटकी थी और ताबीज लिए थे।

बता दें कि शाहिद कपूर के मुख्य किरदार वाली फिल्म ‘हैदर’ के गाने ‘बिस्मिल’ को मार्तंड सूर्य मंदिर में फिल्माया गया था। इसमें शाहिद कपूर डरावनी वेशभूषा में डांस करते हैं। फिल्म में उनका किरदार मुस्लिम होता है। साथ ही बैकग्राउंड में मंदिर में ही काले कपड़ों में ‘शैतान’ जैसी आकृति खड़ी दिखाई गई है। इस गाने में के के मेनन, तब्बू और श्रद्धा कपूर भी बैठे दिखाई देते हैं। इसे लेकर तब विरोध बी खूब हुआ था, लेकिन इसे दबा दिया गया था। इस फिल्म के बाद उस प्राचीन मंदिर का नाम ‘शैतान की गुफा’ कहा जाने लगा था।

बेगूसराय में 300 की मुस्लिम भीड़ ने तलवार, चाकू के साथ हिंदुओं पर बोला हमला, 20 घायल: गिरिराज सिंह ने पूछा- हिंदू कहाँ चला जाए

बिहार के बेगूसराय के मुफ्फसिल थाना अंतर्गत रजौरा गाँव में होली के शुभ अवसर पर मुस्लिमों की भीड़ ने हिंदुओं पर हमला बोल दिया। बताया जा रहा है कि ये झगड़ा बच्चों के बीच शुरू हुआ था लेकिन बाद में दूसरे समुदाय ने धारधार हथियार समेत लाठी डंडा लेकर हिंदू समुदाय के लोगों पर हमला बोला और घटना में 20 से अधिक हिंदू घायल हो गए। कुछ की स्थिति अब भी नाजुक है और कुछ को सिटी स्कैन करवाकर न्यूरो सर्जन के पास रेफर किया गया है।

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ये मारपीट दो बच्चों के मामूली विवाद पर शुरू हुई जिसके बाद मुस्लिम समुदाय के लोगों ने हमला करके कई लोगों को घायल कर दिया। हमले के समय तलवार, राइफल, लाठी, डंडे प्रयोग में लाए गए। पीड़ितों को इलाज के लिए सदर अस्पताल के साथ निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया है।

कई रिपोर्ट में इस घटना को दो पक्षों के बीच की झड़प बताया जा रहा है। वहीं, बजरंग दल द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, घटना के समय 300 की संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने सरस्वती मंदिर के पास हिंदुओं के ऊपर हमला किया जिससे 20 से ज्यादा हिंदू घायल हुए। उनका कहना है कि रजौरा एक संवेदनशील जगह है। घटना के बावजूद पुलिस मूकदर्शक बनी हुई है। हिंदूवादी कार्यकर्ताओं का कहना है कि प्रशासन के ढुलमुल रवैये के कारण इलाके में ऐसी स्थिति बनी। हमले के बाद हिंदू समाज भयभीत है।

बता दें कि रजौरा से आई हिंसा की खबर के बाद केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह पीड़ितों से मिलने अस्पताल गए। वहाँ उन्होंने हालात देखते हुए सीएम नीतिश और जिला प्रशासन से सवाल किया। उन्होंने पूछा कि अगर रजौरा में हिंदू सुरक्षित नहीं बचे तो वहाँ से कहाँ जाएँ। वह बोले कश्मीर फाइल्स देखने के बाद रात भर सो नहीं सका लगा, सोचा हिंदू जाए तो कहाँ जाए। पाकिस्तान में हिंदू को मारा गया, काटा गया, धर्म परिवर्तन कराया गया। बांग्लादेश में मंदिर तोड़ा गया। बेगूसराय में बच्चों के विवाद में एक जुट होकर हिंदू पर हथियार और तलवार से हमला किया गया। 

वह कहते हैं कि अगर प्रशासन ने मामले में लीपापोती की तो वह कोई भी कदम उठाने को मजबूर होंगे।  इस मामले में लीपापोती नहीं होनी चाहिए। प्रशासन बताए कि हिंदू जाए तो जाए कहाँ। पूरे मामले में जो भी साजिशकर्ता हैं, उनके खिलाफ़ जाँच कर उचित कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए। वरना वह अहिंसात्मक रूस से कार्रवाई को मजबूर होंगे। उन्होंने कश्मीर का मुद्दा उठाकर कहा कि कश्मीर में सहते सहते हिंदुओं के साथ क्या हो गया, इसलिए वह इंसाफ की भीख माँगने आए हैं और उन्हें इस मुद्दे पर न्याय चाहिए।

‘₹8 करोड़ में बेच दिए टिकट’: प्रदेश अध्यक्ष ने इस्तीफा देकर खोली अखिलेश यादव-जयंत चौधरी की पोल, किए कई खुलासे

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में हार के बाद समाजवादी पार्टी और ‘राष्ट्रीय लोकदल (RLD)’ गठबंधन के बीच दरार आनी शुरू हो गई है। पिछले साढ़े 5 वर्षों से RLD के प्रदेश अध्यक्ष रहे मसूद अहमद ने अपने पद और पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने 7 पन्ने के एक पत्र को भी सार्वजनिक किया है, उन्होंने आरोप लगाया है कि जयंत चौधरी और अखिलेश यादव ने पैसे लेकर टिकट बाँटे। उनका आरोप है कि हापुड़ की सीट को 8 करोड़ रुपए में बेचा गया।

साथ ही उन्होंने इस गठबंधन में दलितों और मुस्लिमों को नज़रअंदाज़ किए जाने का भी आरोप लगाया। साथ ही उन्होंने कहा कि ‘भीम आर्मी’ के संस्थापक चंद्रशेखर आज़ाद रावण को गठबंधन में साथ नहीं लेने से नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि चुनाव के ऐन वक्त पर भाजपा छोड़ कर सपा में गए स्वामी प्रसाद को अचानक कुशीनगर के फाजिलनगर भेजे जाने से उनकी हार हुई। साथ ही SBSP अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर की ‘ओछी बयानबाजी’ को भी हार के लिए जिम्मेदार ठहराया।

उन्होंने बताया कि गठबंधन में कम सीटें मिलने के कारण पार्टी के नेताओं ने RLD के अकेले चुनाव लड़ने की सलाह दी थी, लेकिन जयंत चौधरी ने बात नहीं मानी। उन्होंने बताया कि 12 जनवरी, 2022 को अखिलेश यादव से संपर्क करने पर उन्होंने साथी दलों से सीटों को लेकर चर्चा से इनकार कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि 10 सपा नेताओं को रालोद के टिकट पर लड़ाया गया, जबकि रालोद के एक भी नेता सपा के सिंबल पर नहीं लड़ाए गए।

मसूद अहमद ने बाहरियों को टिकट वितरण में प्राथमिकता दिए जाने का आरोप लगाया। उनका आरोप है कि दिल्ली के कार्यालय में बैठे नेता टिकट के लिए करोड़ों की माँग करने लगे। उन्होंने उदाहरण दिया कि गजराज सिंह के पार्टी में शामिल होने के दो घंटे के भीतर उन्हें टिकट दे दिया गया। उन्होंने कहा कि जाट समुदाय में ऐसा सन्देश गया कि जयंत चौधरी ने अखिलेश यादव के समक्ष घुटने टेक दिए हैं। उन्होंने कहा कि शिवपाल यादव के अपमान से भी गलत सन्देश गया।

मुस्लिम भीड़ की आदिवासियों से झड़प, गोली चलने से एक की मौत, 50 घायल: कई घरों, दुकानों और गाड़ियों को भी फूँका

मध्य प्रदेश के रायसेन में आदिवासी समुदाय और मुस्लिम समुदाय के लोगों के बीच हुई झड़प में एक आदिवासी व्यक्ति की जान चली गई। मामला शुक्रवार (मार्च 18, 2022) देर रात का है। घटना में 1 व्यक्ति की मौत के अलावा 50 लोगों के घायल होने की खबर है। स्थिति नियंत्रित करने के लिए इलाके में इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई हैं। तनाव शांत कराने के लिए 4 थानों की पुलिस मौके पर मौजूद है। प्रशासन ने उपद्रवियों को सबक सिखाने के लिए उनके मकानों पर कार्रवाई करनी शुरू कर दी है। इस बीच मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी हमीदिया अस्पताल जाकर घायलों से मुलाकात की है।

जानकारी के मुताबिक, जिला मुख्यालय से करीब 100 किमी दूर आदिवासी अंचल प्रतापगढ़ जैथारी के पास एक गाँव है खमरिया पौड़ी। वहीं पर देर रात आदिवासी समाज के दो लड़के गली से निकल रहे थे कि तभी दूसरे समुदाय के लोगों की उनसे कहासुनी हो गई और सामने वाले पक्ष ने उन लड़कों पर हाथ उठा दिए। इसके बाद आदिवासी लड़कों ने 5-6 दोस्तों को बुलाया। फिर दोनों पक्षों में मारपीट हुई, जिसकी सुलाह बड़े-बुजुर्गों ने करवाई।

इतनी देर में दोनों तरफ के सैकड़ों लोग लाठी-डंडे लेकर मौके पर आमने-सामने आ गए थे। दोनों पक्षों की ओर से लाठी, कुल्हाड़ी का इस्तेमाल किया गया कि तभी दूसरे समुदाय में से किसी ने गोली चला दी। इसी गोलीबारी के कारण राजू नामक आदिवासी व्यक्ति की मौत हो गई। वहीं कई अन्य घायल हुए। 

इस दौरान कुछ लोगों ने दुकानों, घरों व मोटर साइकल में भी आग लगाई। थोड़ी देर बाद पुलिस को इस संबंध में जानकारी दी गई और पुलिस के आने के बाद गंभीर रूप से घायल लोगों को अस्पताल पहुँचाया गया। शनिवार सुबह इलाके में 4 थानों की पुलिस तैनात हुई। वहीं दोनों पक्षों के कुछ लोगों पर मामले दर्ज करते हुए उन्हें हिरासत में लिया गया। कुछ लोगों का इस बीच सिलवानी शासकीय अस्पताल में इलाज चल रहा है। वहीं 30 से ज्यादा लोग भोपाल के हमीदिया अस्पताल में रेफर हैं। 

पुलिस की कार्रवाई में अब तक दो हथियार, 12 बोर की रायफल, 2 ट्रेक्टर, एक बोलेरी पिकअप को जब्त किया गया है। कुल 20 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ हो रही है। प्रशासन ने अपनी कार्रवाई करते हुए आरोपितों के मकानों पर एक्शन लिया है। दूसरी ओर घायलों का हाल जानने के लिए खुद शनिवार दोपहर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान हमीदिया अस्पताल गए। पीड़ितों से मुलाकात करने के बाद उन्होंने मृतक के परिवार को 5 लाख रुपए, 3 गंभीर घायल को 2-2 लाख रुपए और बाकी घायलों के लिए 50-50 हजार रुपए की आर्थिक मदद का ऐलान किया है। साथ ही डॉक्टरों को बेहतर इलाज देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आरोपितों को बख्शा नहीं जाएगा।

‘राम दरबार’ पर चला राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार का बुलडोजर, हिन्दुओं का प्रदर्शन: बोली BJP – निशाचरी करतूत

राजस्थान में सालासर रोड पर स्थित सुजानगढ़ के प्रवेश द्वार पर स्थित ‘राम दरबार’ की प्रतिमा तोड़े जाने के बाद विपक्ष राजस्थान सरकार पर हमलावर है। बुधवार (16 मार्च, 2022) की शाम से ही इस पर विवाद चालू है। वीडियो वायरल होने के बाद हिन्दू कार्यकर्ताओं ने सुजानगढ़-सालासर रोड को जाम कर के विरोध प्रदर्शन किया। डेढ़ घंटे तक लगा जाम रात पौने आठ में खुल सका। धरने के दौरान हनुमान चालीसा का पाठ भी हुआ।

दोनों तरफ से वाहनों की लम्बी कतारें लग गईं, जिस कारण तीन किलोमीटर लम्बे जाम से निपटना प्रशासन के लिए भी मुश्किल हो गया। पुलिस से आक्रोशित हिन्दू कार्यकर्ताओं ने माँग की कि वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर बुलाया जाए। डी एईएन बाबूलाल वर्मा व जेईएन नंदलाल मुवाल को सड़क पर बिठा कर उनसे ‘राम दरबार’ की प्रतिमा को तोड़ने का कारण पूछा गया। एईएन ने सड़क के चौड़ीकरण की बात करते हुए हाथ जोड़ कर माफ़ी माँगी।

उक्त सड़क को फोरलेन बनाया जा रहा है। पीडब्ल्यूडी के ठेकेदार ने सम्मानजनक तरीके से मूर्तियों को कहीं और स्थानांतरित किए जाने की बजाए जेसीबी का इस्तेमाल कर के भगवान राम और उनके दरबार की प्रतिमाओं सहित प्रवेश द्वार को ध्वस्त कर दिया। एईएन ने आश्वासन दिया कि सड़क का काम पूरा होने के बाद जो प्रवेश द्वार बनाएगा, उसमें भी राम दरबार की प्रतिमाएँ स्थापित की जाएँगी। हालाँकि, उन्होंने इसे लिखित में देने से इनकार कर दिया।

उन्होंने उच्चाधिकारियों से बात करने का बहाना बनाया, तो एसडीएम ने प्रशासन से बात कर के मामले को सुलझाने की बात कही। भाजपा ने इस घटना को राजस्थान में अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार की ‘निशाचरी करतूत’ करार दिया। एईएन ने पहले कहा था कि ‘राम दरबार’ प्रवेश द्वार पर मौजूद ही नहीं था, लेकिन फिर उन्हें माफ़ी माँगनी पड़ी। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। भाजपा ने कहा कि ‘राम दरबार’ पर बुलडोजर चलाने की घटना को माफ़ नहीं किया जाएगा।

‘होली हमारा त्योहार नहीं, मैं शुभकामना नहीं दूँगा’: हाथ में से कलावा काटकर फेंकने वाले सपा के MLA बोले- मैं इसे नहीं मानता

उत्तर प्रदेश में भाजपा की जीत क्या हुई, समाजवादी पार्टी के विधायक खुलेआम हिंदू विरोध पर उतर आए। फूलपुर पवई से निर्वाचित सपा विधायक और बाहुबली नेता रमाकांत यादव ने ऐसी बात कह दी है, जिससे राजनीतिक माहौल गरमा सकता है। उन्होंने कहा कि होली का त्योहार नहीं मनाना चाहिए। उन्होंने शुभकामना संदेश देने से भी मना कर दिया।

आजमगढ़ को लेकर यादव ने कहा, “मैं खुद होली नहीं मनाता हूँ और लोगों को होली का त्योहार मनाने से मना भी करता हूँ। होली हम लोगों का त्योहार नहीं है।” उन्होंने आगे कहा, “होली लोग क्यों मनाते हैं? हम इससे बहुत दु:खी हैं। यही कारण है कि लोगों को होली का त्योहार मनाने से मना करते हैं।”

त्योहार में भी जबरन राजनीति घुसाने की कोशिश करते हुए रमाकांत यादव ने कहा, “हम बाबा साहेब के अनुयायी हैं। हम इनकी जयंती पर शुभकामना संदेश देंगे। 14 अप्रैल को बाबा साहेब का जन्मदिन आ रहा है। सभी लोग बाबा साहेब अंबेडकर की जयंती मनाएँ।” 

यह पहली बार नहीं है कि रमाकांत यादव ने इस तरह का बयान दिया हो। इससे पहले उन्होंने अपने हाथ में से कलावा (रक्षासूत्र) को काट कर फेंक दिया था। उस दौरान यादव ने कहा था, “हम लोग शूद्र हैं।” जब देश में कोरोना के कारण सरकार लॉकडाउन लगा रही थी, तब यादव ने कहा था कि कोरोना अगर उनके पास आ जाए तो वह गले लगा लें। उन्होंने पीएम मोदी और सीएम योगी को लेकर आपत्तिजनक बयान देते हुए कहा था, “जिस गाड़ी में बीजेपी की झंडी, उस गाड़ी में देश का सबसे बड़ा पाखंडी।”

लोगों के बीच दहशत का एक नाम रमाकांत यादव, आजमगढ़ से 4 बार सांसद और 4 बार विधायक रहे है। इस बार के चुनाव में समाजवादी पार्टी ने उन्हें फूलपुर पवई विधानसभा से अपना उम्मीदवार घोषित किया था। इस सीट से यादव ने बीजेपी के रामसूरत राजभर को 25,306 वोटों से हरा दिया था। 

500-600 की भीड़ ने तोड़ी दीवार, चुप रही पुलिस: बांग्लादेश के मंदिर को अब भी मिल रही धमकियाँ, PM मोदी से मदद की गुहार

बांग्लादेश के ढाका में इस्कॉन मंदिर पर हुए हमले के बाद मंदिर के स्वास्थ्य अधिकारी रसमणि केशवदास ने अपने देश की प्रधानमंत्री शेख हसीना और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मदद की गुहार लगाई है। उन्होंने जानकारी दी है कि दो दिन पहले सैंकड़ों की भीड़ द्वारा मंदिर पर हमला किए जाने के बाद पुलिस में शिकायत हुई थी और सुरक्षा हेतु कदम उठाते हुए 10 पुलिसकर्मियों की तैनाती भी हुई थी। लेकिन बावजूद इसके अब भी मंदिर को धमकियाँ आ रही हैं।

उन्होंने बताया कि इस कृत्य में कोई हाजी शफीउल्लाह नाम का व्यक्ति और उसी का एक आदमी अशरफ सूफी शामिल हैं। वह आरोप लगाते हैं कि ये लोग उनपर लंबे समय से मंदिर छोड़ने का दबाव बना रहे थे इसके लिए उन्हें पैसे भी ऑफर किए गए थे। लेकिन मंदिर से जुड़े अधिकारी कहते हैं कि ये उनका मंदिर है और वो इसे नहीं छोड़ेंगे।

स्थानीय पुलिस ने नहीं की कार्रवाई

केशवदास ने आरोप मढ़ा कि स्थानीय पुलिस ने मंदिर की तोड़फोड़ में उपद्रवियों को समर्थन दिखाया और मंदिर को बचाने से मना किया। अभी तक भी कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। इस्कॉन मंदिर के स्वास्थ्य अधिकारी के ताजा बयान के अनुसार उन्होंने कहा,  “उस दिन इन दोनों (हाजी शफीउल्लाह और अशरफ सूफी) ने 500-600 के साथ मंदिर की दीवार तोड़ी। हमारे दो लोगों ने जब उन्हें रोकने का प्रयास किया तो उन्हें भी मारा गया। यही रवैया उनका पुलिस के सामने भी था।”

उन्होंने बताया कि मंदिर को लेकर धमकियाँ अब भी आ रही हैं। कोई उनकी सुनने को तैयार नहीं है। दो लोग अस्पताल में भर्ती किए गए हैं जिनकी हालात में सुधार है। वहीं गुंडे अब भी मंदिर से जुड़े लोगों को मारने की धमकी दे रहे हैं। कुछ सुरक्षा मिली है पर फिर भी उनमें डर है। वह पीएम शेख हसीना और पीएम मोदी से मदद की अपील करते हैं।

बता दें कि गुरुवार को रात 8 बजे घटित इस घटना के कुछ समय बाद भारतीय सरकारी सूत्रों ने एएनआई को बताया कि वह ढाका में अधिकारियों के साथ, वरिष्ठ राजनेताओं के साथ और अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों के साथ संपर्क में हैं। कोलकाता के इस्कॉन मंदिर के उपाध्यक्ष रामधरण दास ने इस घटना की निंदा की और कहा कि ये हमला काफी चिंताजनक है।

मंदिर अधिकारियों से ऑपइंडिया की बात

गौरतलब है कि बांग्लादेश (Bangladesh) की राजधानी ढाका के वारी इलाके में लालमोहन साहा स्ट्रीट पर स्थित इस्कॉन मंदिर (ISKCON Temple) पर मुस्लिम कट्टरपंथियों की भीड़ ने 17 मार्च (गुरुवार) हमला किया था। वीडियो में कट्टरपंथियों की भीड़ ‘नारा-ए-तकबीर, अल्लाह हु अकबर’ के उन्मादी नारे लगा रही थी। ऑपइंडिया ने जब इस संबंध में मंदिर के प्रशासनिक सदस्यों से बात की तो उन्होंने हमें बताया था, “इस मंदिर की जमीन पर चरमपंथियों की बहुत पहले से नजर है। इससे पहले भी उन्होंने यहाँ कब्जा करने का प्रयास किया है, जिसकी शिकायत हमने दर्ज करवाई थी। कल () शाम को उन्होंने मंदिर पर हमला कर के यहाँ लूटपाट की है।”

उत्तर प्रदेश में लाठी-डंडों से पीट कर साधु की हत्या, मंदिर परिसर में मिला लहूलुहान शव: कुटिया में रहते थे

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में एक साधु की लाठी-डंडों से पीट कर हत्या कर दी गई है। साधु का शव मंदिर परिसर में लहूलुहान हालत में मिला है। पुलिस ने शव को कब्ज़े में ले कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। इस हत्याकांड में पुलिस अभी किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुँच पाई है। पुलिस ने घटना पर 19 मार्च, 2022 (शनिवार) को बयान दिया है।

बागपत पुलिस अधीक्षक के मुताबिक, “दोघट थाना क्षेत्र के निरपुडा ग्राम के जंगल में कमरे में बाबा की डेड बॉडी मिलने की सूचना मिली। घटनास्थल का तत्काल निरीक्षण किया गया। फील्ड यूनिट,डॉग स्क्वाड को मौके पर बुलाया गया। पूछताछ में मंदिर पर चढ़ावे को लेकर विवाद प्रकाश में आया है। मामले की जाँच की जा रही है।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, “ये घटना बागपत जिले के दोघट थाना क्षेत्र की है। यहाँ के गाँव निरपुडा से सटे जंगल में भूमिया मंदिर है। एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक मृत साधु का नाम लालूनाथ था। उनकी उम्र लगभग 40 वर्ष थी। पहले वो रमाला थानाक्षेत्र के गाँव किशनपुर बराल के एक मंदिर में रहते थे। लगभग 7 माह पहले वो निरपुड़ा गाँव के जंगल स्थित भूमिया कुटिया में रहने आए थे। यहाँ वो अकेले ही रहते थे।

‘दोबारा शुरू हो कश्मीरी हिन्दुओं के नरसंहार की जाँच’: राष्ट्रपति को पहुँची याचिका, पूछा- 33 साल बाद सिख दंगा ओपन हो सकता तो…

‘द कश्मीर फाइल्स (The Kashmir Files)’ फिल्म ने हिंसा और पलायन के शिकार कश्मीरी हिंदुओं का मामला उठाकर मामले को मुख्यधारा के बहस में ला दिया है। अब इस पूरे मामले की जाँच नए सिरे की कराने की माँग की जा रही है।

दिल्ली के वकील विनीत जिंदल ने साल 1990 में हुए कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार की दोबारा जाँच के लिए रामनाथ कोविंद (Ram Nath kovind) के पास याचिका भेजी है। अपनी याचिका में जिंदल ने इस पूरे नरसंहार की जाँच एसआईटी (SIT) कराने की माँग की है।

सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता जिंदल ने अपनी याचिका में कहा कि उस साल कश्मीर में हिंदुओं का बड़े पैमाने पर नरसंहार हुआ। इस हत्याकांड के बाद केंद्र और राज्य सरकारों ने कश्मीरी पंडितों को न्याय का भरोसा दिया, लेकिन कुछ नहीं हुआ। उन्होंने आगे कहा कि इस नरसंहार को लेकर 215 प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इन मामलों की जाँच जम्मू-कश्मीर पुलिस ने की थी, लेकिन वह आतंकवादियों को दंडित करने के लिए कोई उपाय करने में विफल रही।

जिंदल ने कहा कि अगर सिखों के नरसंहार के 33 साल बाद केस को ओपन किया जा सकता है और उसकी दोबारा जाँच हो सकती है तो 27 साल पहले कश्मीरी पंडितों के साथ हुई हिंसा के केस को खोला जा सकता है और इसकी दोबारा जाँच कराई जा सकती है। अधिवक्ता ने कहा कि यह एक भयानक घटना थी जब कश्मीरी पंडितों के साथ सामूहिक बलात्कार, हत्या, अपहरण ने उन्हें हमेशा के लिए सदमे में धकेल दिया।

वहीं, भरत गुप्ता नाम के एक यूजर ने ट्वीट कर सुप्रीम कोर्ट से अपील की कि इस मामले वह स्वत: संज्ञान लेते हुए कार्रवाई करे। उन्होंने लिखा, “मैं भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों से अपील करता हूँ कि वे 1990 में कश्मीर घाटी में हुए हिंदू नरसंहार का स्वत: संज्ञान लेते हुए आरोपितों की पहचान का आदेश दें। इतने सारे सबूतों के बीच नूरेमबर्ग ट्रायल की तरह आदेश देना उनका कर्तव्य है।”

इसका जवाब देतेे हुए कश्मीर फाइल्स के निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने कहा, “अगला कदम यह होना चाहिए। क्या कोई कानूनी विशेषज्ञ सलाह दे सकता है कि इस मसले को हम कैसे आगे बढ़ा सकते हैं?” इस पर सुप्रीम कोर्ट में वकील और भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय ने रास्ता बताया। उपाध्याय ने कहा, “पीड़ितों को जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल से NIA जाँच की सिफारिश करने का अनुरोध करना चाहिए। अगर उपराज्यपाल सिफारिश नहीं करते हैं तो पीड़ितों को जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना चाहिए। यदि जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय याचिका को खारिज करता है तो मैं उच्चतम न्यायालय में उपलब्ध हूँ।”

कश्मीर फाइल्स रिलीज होने के बाद से चर्चा में है। यह फिल्म 7 दिन में 100 करोड़ रुपए से अधिक की कमाई कर चुकी है।