बिहार के शेखपुरा जिले में पुलिस के एक ASI (असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर) द्वारा अपने ही SP से रिश्वत माँगने का मामला प्रकाश में आया है। आरोपित पुलिसकर्मी को सस्पेंड कर दिया गया है और उसकी विभागीय जाँच की जा रही है। आरोपित ASI का नाम रणवीर प्रसाद है। सोशल मीडिया पर कई लोग इस घटना की तुलना गंगाजल फिल्म के अजय देवगन और दरोगा मंगनी राम की सीन से कर रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शेखपुरा के पुलिस अधीक्षक IPS कार्तिकेय शर्मा को कसार थाने में तैनात ASI की पहले से वसूली आदि की शिकायतें मिल रही थी। रणवीर प्रसाद पर आरोप था कि वो चाँदी पहाड़ से पत्थर और दस्त लेकर निकलने वाले वाहनों से वसूली करते हैं। इन आरोपों की पुष्टि के लिए वो स्वयं बाइक से उस रास्ते से गुजरे। इस दौरान वो बिना वर्दी के सिविल ड्रेस में थे।
बताया जा रहा है कि ASI रणवीर प्रसाद ने SP शेखपुरा को भी हाथ दे कर रोक दिया। इस दौरान उसने न सिर्फ पैसे की माँग की बल्कि उनसे हाथापाई पर भी उतारू हो गया। कुछ देर बाद उसको सामने अपने SP के होने की जानकारी हुई। लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। SP ने कार्तिकेय ने सहायक अवर निरीक्षक को सस्पेंड कर दिया है।
ऑपइंडिया ने इस घटना की पुष्टि के लिए पुलिस अधीक्षक शेखपुरा के सरकारी मोबाईल नंबर पर सम्पर्क किया तो वह नेटवर्क क्षेत्र से बाहर बताया। पुलिस अधीक्षक आवास पर लगे लैंडलाइन पर फोन करने के बाद टेलीफोन ड्यूटी कर्मचारी ने बाद में कॉल बैक कराने को कहा।
गौरतलब है कि वाहनों से अवैध वसूली के कारण ही 8 पुलिसकर्मियों को एक पखवाड़े पहले एसपी ने सस्पेंड कर दिया था। ये आठों पुलिसकर्मी शेखपुरा और चेहरा थाना क्षेत्र से जुड़े हुए थे। बताया जा रहा है कि आजकल एसपी खुद देर रात सड़कों पर निकल कर वसूली करने वाले पुलिसकर्मियों को रंगे हाथ पकड़ने में लगे हैं।
कश्मीर पंडितों के नरसंहार पर झूठ परोसने के बाद कॉन्ग्रेस को हर जगह से खरी-खोटी सुनने को मिल रही है। ऐसे में भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व खिलाड़ी वेंकटेश प्रसाद ने कॉन्ग्रेस पार्टी को धोया है। उन्होंने पार्टी के ओछेपन पर राय दी और कहा कि जब ऐसा लगता है कि पार्टी इससे ज्यादा नहीं गिर सकती तब ये दोबारा नीचता कर देते हैं।
When one feels, they have hit rock-bottom and can only rise from here, they invent ways to hit newer lows. A pity they choose to hurt sentiments of Kashmiri Pandits again. #KashmirFiles is an eye-opener and probably just a tip of the iceberg. https://t.co/GwR1JHqE5T
वेंकटेश प्रसाद ने लिखा, “जब ऐसा सोचो कि इन्होंने अपनी नीचता के चरम को छू लिया है और अब वह उठना शुरू करेंगे तो ये नए तरीके खोज लेते हैं कि कैसे खुद को और नीचे गिराएँ। अफसोस की बात है कि इन्होंने कश्मीरी पंडितों की भावनाओं को आहत करने का विकल्प चुना। कश्मीर फाइल्स आँख खोलने वाली फिल्म है या शायद सिर्फ हिमखंड का एक सिरा है।”
बता दें कि द कश्मीर फाइल्स फिल्म की अपार सफलता के बाद कॉन्ग्रेस पार्टी ने इस्लामी कट्टरपंथियों के बचाव में धड़ाधड़ ट्वीट करके ये साबित करने की कोशिश की थी कि 1990 में जो कुछ भी कश्मीर में हुआ उसके पीछे इस्लामी कट्टरपंथी नहीं बल्कि आरएसएस से जुड़े राज्यपाल जगमोहन और भाजपा जिम्मेदार थे। पार्टी ने ‘कश्मीर फाइल्स बनाम सच’ हैशटैग के साथ 9 ट्वीट किए और दावा किया कि जो वो बता रहे हैं वहीं कश्मीरी पंडितों के मामले के तथ्य हैं।
प्रोपेगेंडा चलाने के लिए कॉन्ग्रेस ने बिन सोचे कुछ भी ट्वीट किए जिसकी वजह से बाद में उन्हें अपना पहला ट्वीट डिलीट तक करना पड़ा। इस ट्वीट में कॉन्ग्रेस केरल ने कहा था कि भले ही 1990 से 2007 के बीच आतंकियों ने 399 कश्मीरी पंडितों को मारा लेकिन इतने ही अंतराल में 15000 मुस्लिम भी आतंकियों द्वारा मारे गए। अब ये ट्वीट कॉन्ग्रेस के अकॉउंट पर नहीं है जबकि बाकी ट्वीट इस पर अब भी हैं।
इस हैंडल से किए गए लगातार 9 ट्वीट का सारांश यही है कि कश्मीर में 90 के दशक में कश्मीरी हिंदुओं के साथ जो हुआ वैसा कश्मीरी मुस्लिमों के साथ भी हुआ था। इसके अलावा पंडितों के पलायन के लिए भाजपा जिम्मेदार है इस्लामी कट्टरपंथी नहीं। भाजपा ने अपने प्रोपेगेंडे के लिए इस मामले को भुनाया जबकि कॉन्ग्रेस पार्टी जी जान लगाकर उनकी मदद में जुटी थी।
विवेक अग्निहोत्री की फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ ने 3 दिनों में दुनिया भर में 31.60 करोड़ रुपए का कारोबार कर लिया है और इस फिल्म का असर न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया में हो रहा है। नब्बे के दशक में घाटी में कश्मीरी पंडितों के नरसंहार पर बनी इस फिल्म का ही असर है कि अमेरिका के ‘Rhode Island House of Representatives (रोड आइलैंड हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स)’ में कश्मीरी पंडितों के पक्ष में एक प्रस्ताव पारित हुआ है।
नई दिल्ली में फिल्म को लेकर आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने बताया कि अमेरिका में अब तक पाकिस्तान और भारत के कुछ देश विरोधी तत्वों द्वारा ये अफवाह फैलाई गई कि कश्मीर को भारत ने जबरन अपना हिस्सा बना रहा है और वहाँ अत्याचार हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि कश्मीर में इंटरनेट-4G न होने की बातें फैलाई जाती हैं और हम भी NYT और वाशिंगटन पोस्ट जैसे मीडिया संस्थानों के फेर में फँस गए।
निर्देशक विवेक अग्निहोत्री का कहना है कि हमने अब तक ये नहीं पूछा कि कश्मीर से भगा दिए गए लाखों पंडित अब तक वहाँ वापस क्यों नहीं गए? इसी क्रम में उन्होंने ‘रोड आइलैंड’ की चर्चा करते हुए बताया कि ये अमेरिका का सबसे ज्यादा लोकतांत्रिक, उदार और प्रगतिशील राज्य है। उन्होंने जानकारी दी कि अमेरिका के जो भी डेमोक्रेट राष्ट्रपति की उम्मीदवारी के लिए खड़े होते हैं, वो अपना चुनाव प्रचार अभियान वहीं से शुरू करते हैं।
उन्होंने बताया कि जॉन ऍफ़ केनेडी ने भी वहीं से चुनाव प्रचार अभियान शुरू किया था। विवेक अग्निहोत्री ने बताया कि अमेरिका में ये मिथक बन गया है कि डेमोक्रेट भारत को पसंद नहीं करते। हालाँकि, उन्होंने ये भी बताया कि 2014 के बाद भारत को जिस तरह का वैश्विक नेतृत्व मिला है, उसके बाद से वहाँ चीजें बदल रही हैं। ‘रोड आइलैंड’ के ‘हाउस ऑफ रिप्रेजेन्टेटिव’ ने एक उद्घोषणा ‘द कश्मीर फाइल्स’ के लिए जारी की है।
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में डॉक्टर सुरिंदर कौल भी मौजूद थे, जो ‘ग्लोबल कश्मीरी पंडित्स डायस्पोरा’ के अध्यक्ष हैं। उन्होंने इस उद्घोषणा को दिखाया भी। वहाँ के डेमोक्रेट और रिपब्लिकन के साथ-साथ स्पीकर ने भी इस पर हस्ताक्षर किए हैं। अग्निहोत्री ने कहा कि भारत की अखण्डता के लिए पिछले 70 वर्षों में इतनी बड़ी जीत आज तक नहीं हुई। हम नीचे उस उद्घोषणा को संलग्न कर रहे हैं, जिसे आप देख सकते हैं कैसे ‘Rhode Island House of Representatives’ ने इसे जारी किया है।
कश्मीरी पंडितों के नरसंहार के सम्बन्ध में ‘रोड आइलैंड हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स’ द्वारा जारी की गई उद्घोषणा
इसमें लिखा है, “फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ का प्रीमियर, जिसमें 1990 में 5 लाख कश्मीरी पंडितों की इस्लामी गिरोहों द्वारा ‘नस्लीय रूप से सफाया’ की घटनाओं को चित्रित करते हुए आतंकवाद और कट्टरवाद के बारे में विस्तृत रूप से बताया गया है, जिनसे उन्हें शरणार्थियों की तरह अपना जीवन व्यतीत करने के लिए विवश होना पड़ा।” साथ ही इसमें निर्देशक विवेक अग्निहोत्री को बधाई भी दी गई है। इसमें स्पीकर ब्रायन पैट्रिक केनेडी के साथ-साथ अन्य अधिकारियों के भी हस्ताक्षर हैं।
डॉक्टर सुरिंदर कौल ने बताया कि कश्मीरी पंडितों के लिए सब दर्दनाक बात यही थी कि स्वतंत्र भारत में इसके बारे में किसी को जानकारी भी थी, जबकि पूरे समुदाय को अपनी आस्था की वजह से वहाँ से निकलना पड़ा। उन्होंने ध्यान दिलाया कि कैसे कश्मीरी पंडितों ने देश-राज्य के विकास में योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि हमने कभी बंदूक नहीं उठाई और हिंसा नहीं की और एक भी ऐसा ऐतिहासिक सबूत नहीं है कि किसी कश्मीरी हिन्दू ने एक पत्थर भी फेंका हो – लेकिन हमने अपने गुस्से को रखा और उसका सकारात्मक प्रयोग कर के देश-दुनिया के विकास में योगदान दिया।
उन्होंने कहा, “कई सारी फ़िल्में कश्मीर पर बनीं और मुझे बड़े दुःख से कहना पड़ता है कि उनमें आतंकवाद का महिमामंडन किया गया। मैंने कई बॉलीवुड निर्देशकों से संपर्क कर अपने दर्द को बताने का आग्रह किया, लेकिन इसे दरकिनार किया जाता रहा। हमारा समाज इसका ऋणी है कि विवेक अग्निहोत्री ने ये बीड़ा उठाया। हमारे समाज को पहली बार किसी ने सुना। अमेरिका की 16 स्क्रीनिंग्स में मुस्लिम तक शामिल हुए।”
उन्होंने बताया कि कई ऐसे डेमोक्रेट्स थे, जिन्हें कश्मीर के बारे में गलत जानकारी दी गई थी और उन्होंने इस फिल्म को देखने के बाद समझा कि सच्चाई क्या है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के नेताओं ने बताया कि उनके पास पाकिस्तानी गिरोह हमेशा आते रहते हैं और कश्मीर के बारे में अपना नैरेटिव बताते रहते हैं। इसके बाद निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने कहा कि पूरी दुनिया अर्मेनिया, रवांडा और यहूदी नरसंहार के बारे में जानती है, लेकिन कश्मीरी पंडितों के बारे में ऐसा नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि भारत में चंद लोग ये तय कर रहे थे कि क्या सही है और क्या गलत, लेकिन हमारी एकजुटता ने सबको बता दिया। उन्होंने कहा कि 80 साल की महिलाओं से लेकर 18 वर्ष की लड़कियों तक आपस में जुड़ गए हैं और दुनिया के कई लोग (श्वेत-अश्वेत) फिल्म देख रहे रो रहे हैं कि ये हमें पहले क्यों नहीं बताया गया। अमेरिका के एक नेता ने कहा कि भारत की प्राणी सरकारों ने पहले कभी नहीं बताया कि कश्मीर भारत का अखंड हिस्सा है।
‘स्टेट ऑफ रोड हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स’ की उद्घोषणा के साथ अनुपम खेर, पल्लवी जोशी, विवेक अग्निहोत्री और सुरिंदर कौल (बाएँ से दाएँ)
विवेक अग्निहोत्री ने कहा, “जो भारत की पहले की सरकारें करने में सफल नहीं हुईं, वो अमेरिका ने कर दिखाया। इसके बाद भी कोई बोले कि नहीं ऐसा नहीं हुआ था, तो ये सरासर झूठ है।” वहीं अनुपम खेर ने कहा कि बदलाव काफी धीमी होती है, इसीलिए हम नहीं तो हमारे बच्चे भी कश्मीर में वापस जाकर रहें तो ये हमारी सफलता होगी। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे 800 वर्षों तक इस्लामी अक्रताओं और फिर 200 वर्षों तक अंग्रेजों ने भारत पर राज किया।
उन्होंने कहा कि हमने विद्या का इस्तेमाल किया, ज्ञान का इस्तेमाल किया – तब जाकर ये सकारात्मक परिणाम आए। उन्होंने बताया कि विवेक अग्निहोत्री ने 700 पीड़ितों को ढूँढ कर उनसे बातें की और इस फिल्म के लिए 4 वर्षों तक रिसर्च किया। विवेक अग्निहोत्री ने कहा कि जिस दिन हम सत्य को समझ जाएँगे, भारत बड़ी ताकत बन जाएगा। उन्होंने कहा कि सिर्फ भारत में ही भारत की बुराई होती है, जबकि विदेश में इसकी छवि अच्छी है और वहाँ के आम लोग भारत का नाम सुनते ही इसे ‘योग और अध्यात्म’ की भूमि के साथ-साथ ‘लैंड ऑफ मोदी’ भी बोलते हैं।
विवेक अग्निहोत्री की ‘द कश्मीर फाइल्स’ शुक्रवार (11 मार्च, 2022) को रिलीज हुई और आज फिल्म को लेकर दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस था वहीं तेजी से लोगों के बीच पहुँच रही इस फिल्म को लेकर निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने इसे सबसे बड़ा सॉफ्ट पॉवर बताया। उन्होंने हैदराबाद की एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि जब बात कश्मीरी पंडितों के नरसंहार पर फिल्म बनाने की आई तो बिना ग्लोबल कश्मीरी पंडित डायस्पोरा के यह संभव ही नहीं था।
उन्होंने अमेरिका में कोविड के समय के फिल्म स्क्रीनिंग को लेकर बताया कि जैसे अमेरिका ने वर्ल्ड वॉर को सॉफ्ट पावर के रूप में इस्तेमाल किया वही काम इस फिल्म ने अमेरिका में किया। जहाँ पूरे अमेरिका में 36 संस्थाओं ने जगह-जगह द कश्मीर फाइल्स की स्क्रीनिंग की थी।
विवेक अग्निहोत्री ने फिल्म के सॉफ्ट पावर पर बात करते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस में रोड आइलैंड की बात की जहाँ ऑफिसियली यह फील देखने के बाद सराहा गया। उन्होंने कहा, “32 वर्षों में पहली बार, दुनिया के किसी भी राज्य ने, वह भी संयुक्त राज्य अमेरिका के सबसे लोकतांत्रिक और लिबरल राज्य – रोड आइलैंड ने, #TheKashmirFiles नामक एक बहुत छोटी फिल्म के कारण, आधिकारिक तौर पर हिंदुओं के कश्मीर में नरसंहार को मान्यता दी है।”
HISTORIC: First time in 32 years, any state in the world, the democratic & liberal state of USA -Rhode Island, has officially recognised Kashmir Genocide due to a very small film. Pl read this and decide who is the persecutor and who should get the punishment. This is #NewIndiapic.twitter.com/GIuJgB48JK
— Vivek Ranjan Agnihotri (@vivekagnihotri) March 14, 2022
उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में वह प्रमाण पत्र भी लोगों को दिखाया और कहा, “कृपया इस आधिकारिक घोषणा को पढ़ें और तय करें कि उत्पीड़क कौन है और किसे सजा मिलनी चाहिए। मानवतावाद के इर्द-गिर्द केंद्रित नए नेतृत्व और प्रभावशाली विदेश नीतियों की बदौलत यह संभव हुआ है।” यह है बदलते भारत की सॉफ्ट पावर।
2018-19 के दौर में एक बार फिर जब अमेरिका के न्यूयॉर्क में फ्री कश्मीर को लेकर एक मुहीम चलाई गई तो टाइम्स स्कॉयर पर एक बहुत बड़ी ‘फ्री कश्मीर’ की होर्डिंग लगी थी। वहीं जब इस फिल्म को अमेरिका में लोगों ने देखा तो चंदा जोड़कर अमेरिका के उसी टाइम्स स्कॉयर की साइट पर 26 जनवरी, 2022 को ‘द कश्मीर फाइल्स‘ की होर्डिंग लगाई गई। और पहली बार अमेरिका में कश्मीर का पूरा मैप दिखाया गया। जो सबसे बड़ी डिप्लोमेटिक जीत थी।
It is a masterpiece! A thought provoking film. What #Schindlerslist's List did to Holocaust, #KashmirFiles will do the same for Kashmiri Pandits' mass genocide!!!
Hats off to Vivek Agnihotri for making such film….
प्रेस कॉन्फ्रेंस में फिल्म निर्देशक विवेक रंजन अग्निहोत्री ने कश्मीर पर झूठी नैरेटिव चलाने वाले वामपंथी इकोसिस्टम पर भी प्रहार किया। जो अक्सर फ्री इंटरनेट, फ्री कश्मीर की बात करके कश्मीरी पंडितों के नरसंहार से कन्नी काट जाते हैं।
कश्मीरी पंडितों के साथ 90 के दशक में हुई इस्लामी बर्बरता को छिपाने के लिए केरल कॉन्ग्रेस समेत कई सेकुलरवादी राज्य के तत्कालीन राज्यपाल जगमोहन मल्होत्रा को जिम्मेदार बता रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि जगमोहन आरएसएस से थे और वीपी सरकार में उन्हें ही कश्मीर भेजा गया था जिसके बाद हिंदुओं का सारा पलायन हुआ।
भाजपा पर या राज्यपाल रहे जगमोहन पर ये गंभीर आरोप हाल फिलहाल के नहीं हैं। लंबे समय से इस्लामी कट्टरपंथियों के बचाव में ये तर्क पेश किए जाते रहे और आज द कश्मीर फाइल्स आने के बाद फिर से यही सब शुरू हो गया है। केरल कॉन्ग्रेस के ट्विटर से खुलेआम पूरे नरसंहार का ठीकरा बीजेपी पर फोड़ा गया और जनता को भ्रमित करने का काम हुआ। इसके बाद कई कॉन्ग्रेसी अपनी थ्योरी लेकर आए।
इससे पहले कोई इन कॉन्ग्रेसियों द्वारा गढ़े तर्क में 1 प्रतिशत की सच्चाई खोजे कुछ तथ्य उसे मालूम होने चाहिए। सबसे पहले तो जैसा कि कॉन्ग्रेस ने जगमोहन पर दावा किया कि उनके आने के बाद पलायन होना शुरू हुआ, उस बिंदु की हकीकत यह है कि जगमोहन बतौर जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल बनकर 21 जनवरी 1990 को श्रीनगर पहुँचे थे लेकिन कश्मीरी पंडितों का पलायन 1988-89 से शुरू हो गया था।
दूसरी बात ये कि जैसा कॉन्ग्रेस समझा रही है कि जगमोहन भाजपा के, आरएसएस के, वीपी सरकार के नुमाइंदे थे और उनके जाने से घाटी में आतंक फैला…तो सच्चाई ये है कि भाजपा का दामन उन्होंने कुछ साल बाद थामा उससे पहले वह कॉन्ग्रेस के चहेते थे और आपातकाल के दौरान इंदिरा गाँधी-संजय गाँधी के दुलारों में से एक थे।
एक बात और गौर करिए कि पहली बार जगमोहन को जम्मू-कश्मीर का राज्यपाल नहीं बनाया गया था, खुद इंदिरा गाँधी ने उन्हें पहली बार जम्मू-कश्मीर का राज्यपाल तब बनाया था। जब वह फारूख अब्दुल्ला को हटाकर उनके बहनोई गुल शाह को मुख्यमंत्री बनाना चाहती थीं। रिश्ते में इंदिरा के भाई तत्कालीन राज्यपाल बीजू नेहरू ने ऐसा करने से इनकार कर दिया तो उनकी जगह जगमोहन लाए गए जो 1989 तक अपने पद पर रहे।
इसके बाद 1990 में वे दोबारा राज्यपाल बने। तब केन्द्र में वीपी सिंह की सरकार थी और वह भाजपा के समर्थन से चल रही थी। यह भी सच है कि उनके इस कार्यकाल में कश्मीरी पंडितों का बड़े पैमाने पर पलायन हुआ। लेकिन, उसका दूसरा पहलू ऊपर वाला भी है कि उनके राज्यपाल बनने से पहले 1987-88 से ही पंडितों ने घाटी छोड़ना शुरू कर दिया था।
14 सितंबर 1989 को भाजपा नेता पंडित टीका लाल टपलू की निर्मम हत्या कर दी गई थी। इसके कुछ समय बाद ही जज नीलकंठ गंजू की हत्या कर दी गई। गंजू ने जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के नेता मकबूल भट्ट को मौत की सजा सुनाई थी। जुलाई से नवंबर 1989 के बीच 70 अपराधी जेल से रिहा किए गए थे। घाटी में हमें पाकिस्तान चाहिए। पंडितों के बगैर, पर उनकी औरतों के साथ जैसे नारे लग रहे थे। ऐसे माहौल में श्रीनगर पहुॅंचे जगमोहन ने कश्मीरी पंडितों को घाटी से सुरक्षित निकलने का मौका मुहैया कराया, जिसके लिए कश्मीरी पंडित उन्हें आज भी अपना मसीहा मानते हैं और उनके प्रयासों की सराहना करते हैं।
मालूम हो कश्मीर में आए इस दौर के बीतने के कुछ साल बाद जगमोहन भाजपा में शामिल हुए थे और वाजपेयी सरकार में मंत्री बने थे। ऐसे में जाहिर है कि उन्हें कॉन्ग्रेस की नजरों में विलेन बनना ही था। एक ऐसा विलेन जिसके निधन के बाद भी कॉन्ग्रेस उस पर दाग लगाने से पीछे नहीं हट रही और खुद इस्लामी आतंकियों के कुकर्मों को छिपाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही जबकि सच्चाई ये है कुछ परिवारों की गलती से बदतर हुए हालात पर काबू पाने के लिए जगमोहन दूसरी बार श्रीनगर भेजे गए।
परिवारों की साठ-गाँठ और घाटी में कट्टरपंथ
जी हाँ, शुरुआत में जब पाकिस्तानी कबायली सेना ने हमला किया तो कश्मीर के महाराजा हरि सिंह (उनके बेटे कर्ण सिंह कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं) ने भारत के साथ विलय की संधि की। तब, शेख अब्दुल्ला कश्मीर के प्रधानमंत्री बने जिन्हें नेहरू का समर्थन हासिल था। बाद में दोनों के रिश्तों में कड़वाहट आ गई। 1953 में अब्दुल्ला गिरफ्तार कर लिए गए।
फिर इंदिरा गाँधी का दौर आया। नेहरू की बेटी इंदिरा ने शेख अब्दुल्ला से सुलह कर ली। उन्हें 1975 में कश्मीर का मुख्यमंत्री बनाया। यह रिश्ता इंदिरा ने शेख अब्दुल्ला के बेटे फारूक के साथ भी शुरुआत में निभाया। फिर इंदिरा ने 1984 में कैसे फारूख को हटाकर गुल शाह को सीएम बनवाया। शाह ने जम्मू के न्यू सिविल सेक्रेटेरिएट एरिया के एक प्राचीन मन्दिर परिसर के भीतर मस्जिद बनाने की अनुमति दे दी ताकि मुस्लिम कर्मचारी नमाज पढ़ सकें। इस फैसले का जम्मू में विरोध हुआ और दंगे भड़क गए। घाटी में पंडितों पर अत्याचार का सिलसिला यहीं से शुरू हुआ।इंदिरा की हत्या के बाद फारूक ने उनके बेटे राजीव से दोस्ती गांठी और 1986 में दोबारा सीएम बने। इधर, पंडितों के खिलाफ अलगाववादियों की साजिश चरम पर पहुॅंच गई थी। कई कश्मीरी पंडितों को मारा गया, लेकिन फारूक अब्दुल्ला ने कुछ नहीं किया।
संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण सोमवार (14 मार्च 2022) को शुरू हुआ। विधानसभा चुनावों में BJP के शानदार प्रदर्शन का असर सत्र के पहले दिन सदन में भी देखने को मिला। लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाजपा सांसदों एवं केंद्रीय मंत्रियों ने जोरदार स्वागत किया। प्रधानमंत्री मोदी के सदन में दाखिल होते ही सांसदों ने ‘भारत माता की जय और मोदी, मोदी’ के नारे लगाते हुए खड़े होकर उनका अभिवादन किया। इस दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह सहित कई केंद्रीय मंत्री सदन में मौजूद थे।
Prime Minister Narendra Modi welcomed by the BJP MPs in Lok Sabha, amid chants of “Modi, Modi”, following the party’s victory in assembly elections in Goa, Manipur, Uttarakhand, and Uttar Pradesh. pic.twitter.com/IZuF36mDNB
दिलचस्प बात यह है कि जब पीएम मोदी सदन में आए और लोकसभा सांसद ‘मोदी-मोदी’ के नारे लगा रहे थे और अपनी मेज थपथपा रहे थे तो सदन सदन की कार्यवाही देख रहे विदेशी प्रतिनिधि काफी कौतूहल में नजर आए। ‘मोदी-मोदी’ के नारों के नारों के बीच प्रधानमंत्री ने लोगों का हाथ जोड़कर अभिवादन किया। पीएम के बैठने के बाद काफी देर तक सांसद मेज थपथाते रहे। वहीं लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला इसे देख मुस्कुरा रहे थे।
भाजपा की चार राज्यों में बड़ी जीत
भाजपा ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में जीत हासिल की है, जबकि आम आदमी पार्टी (AAP) पंजाब में विजयी हुई है। उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में से भाजपा ने 255 सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि उत्तराखंड में 70 में से 47 सीटों पर जीत दर्ज की है। गोवा की बात करें तो पार्टी ने 40 में से 20 सीटें जीती हैं, जबकि 2 निर्दलीय विधायकों ने पहले ही भाजपा को समर्थन देने का ऐलान कर दिया था। मणिपुर में पार्टी को 60 में से 32 सीटों पर जीत मिली है।
जब भी कश्मीरी पंडित के बारे में चर्चा होती है तो देश के लाखों करोड़ों लोगों की आँखें नम हो जाती हैं। ‘द कश्मीर फाइल्स’ की रिलीज के बाद यह एक बार फिर से चर्चा में है। फिल्म निर्माता विवेक अग्निहोत्री ने इसमें कश्मीरी पंडितों के नरसंहार और 1990 में घाटी से उनके पलायन के दर्द और पीड़ा को पर्दे पर उतारा है। कश्मीरी हिंदुओं पर इस्लामिक आतंकवाद की बर्बरता की सैंकड़ो कहानियाँ है जिन्हें सुनकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएँगे। ऐसी ही एक कहानी है- कश्मीरी पंडित गिरिजा कुमारी टिक्कू की। उनका सामूहिक बलात्कार किया गया, यातनाएँ दी गई, बढ़ई की आरी से उन्हें दो भागों में चीर दिया गया, वो भी तब जब वो जिंदा थी। ये खबर कभी अखबारों में नहीं दिखी।
गिरिजा के परिवार ने तीन दशकों से अधिक समय तक चुप रहने के बाद आखिरकार इस घटना पर अपना दर्द बयाँ किया। विवेक अग्निहोत्री ने ऑपइंडिया के सीईओ राहुल रौशन के साथ बातचीत में बताया कि उनका परिवार फिलहाल अमेरिका में है। गिरिजा टिक्कू के भाई-बहन भी फिल्म की स्क्रीनिंग देखने आए थे। विवेक अग्निहोत्री ने उनको रुकने के लिए भी बोला, लेकिन वह नहीं रुके। वह चले गए। हालाँकि, बाद में उन्होंने उनको मैसेज करके कहा, “पिछले 32 साल से परिवार में किसी ने कभी गिरिजा दीदी का नाम नहीं लिया और इस विषय पर कभी कोई बात नहीं हुई। फिल्म देखने के बाद पहली बार हमलोग रात में बैठकर उनके बारे में बात की। हम लोग रोए और ऐसा लगता है कि हमारी फैमिली में हीलिंग प्रोसेस (Healing Process) शुरू हो गया।” वीडियो में यह बात आप 12 मिनट के बाद सुन सकते हैं।
इसके अलावा विवेक ने कश्मीर में 90 के दशक में हुए नरसंहार पर बात करते हुए कहा कि हिंदुओं के प्रति नफरत का भाव स्पष्ट था। संदेश साफ था या तो धर्म बदलो या कश्मीर छोड़ दो। जो यह स्वीकार नहीं करते उन्हें मार दिया जाता। हिंदुओं को अपने घर की महिलाओं को घाटी में छोड़ कश्मीर छोड़ने तक की धमकियाँ दी गई। कश्मीर में हुए नरसंहार में हिंदुओं के साथ-साथ सिख समुदाय के लोग भी मारे गए। सिखों की हत्या भी उनके धर्म की वजह से हुई ना कि आर्थिक वजहों से, जैसा कि बरखा दत्त जैसे लोग बताते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि 2020 में एक बड़े ओटीटी प्लेटफॉर्म ने फिल्म के राइट्स खरीदने के लिए संपर्क किया। मगर उनकी शर्त थी कि वो फिल्म में इस्लामी आतंकवाद हटाकर हिंदू आतंकवाद शब्द का इस्तेमाल करेंगे। हालाँकि, अग्निहोत्री ने इससे साफ इनकार कर दिया। इसे आप वीडियो में 27 मिनट के बाद सुन सकते हैं।
वहीं फिल्म देखने के बाद गिरिजा के परिवार ने इस घटना पर चुप्पी तोड़ी। उनकी भतीजी सीधी रैना ने इंस्टाग्राम पोस्ट शेयर किया। इसमें उन्होंने कहा कि उनके परिवार को अभी भी न्याय का इंतजार है। पोस्ट में वह कहती हैं, द कश्मीर फाइल्स दुनिया भर में रिलीज हो गई है। यह फिल्म उन भयानक रातों को दिखाती है जिनसे न केवल उनका परिवार गुजरा बल्कि हर कश्मीरी पंडित परिवार गुजरा। उनके पिता की बहन गिरिजा टिक्कू, एक यूनिवर्सिटी में लाइब्रेरियन थीं। वह अपनी सैलरी लेने के लिए गई थीं। वापस आते वक्त वह जिस बस में सवार थी, उसे रोक दिया गया और इसके बाद जो हुआ, उसे सोचकर अभी भी उनकी रुह काँप जाती है, आँख आँसुओं से और मन घृणा से भर उठता है।
सीधी रैना ने बताया कि उनकी बुआ को एक टैक्सी में फेंक दिया गया था, जिसमें 5 आदमी थे (उनमें से एक उसका सहयोगी था)। उन लोगों ने उन्हें प्रताड़ित किया, उनके साथ बलात्कार किया और फिर बढ़ई की आरी से उन्हें जिंदा काटकर बेरहमी से उनकी हत्या कर दी। वह कहती हैं, “आज तक मैंने अपने परिवार के किसी व्यक्ति को इस घटना के बारे में बोलते नहीं सुना। मेरे पिता मुझसे कहते हैं कि हर भाई इतनी शर्म और गुस्से में जी रहा था कि मेरी बुआ को न्याय दिलाने के लिए कुछ नहीं किया गया।” उन्होंने आगे लोगों से अपील की है कि वह अपने परिवार और दोस्तों के साथ फिल्म देखने के लिए जरूर जाएँ।
उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीजेपी फिर से सत्ता में लौटने में कामयाब रही है। इसके साथ ही उनके विरोधी झूठे दावे करने के काम पर जुट गए हैं। सोशल मीडिया में दावा किया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में अब पुलिसकर्मी 60 की जगह 50 साल में रिटायर होंगे। उत्तर प्रदेश पुलिस ने ट्वीट कर इन दावों को अफवाह बताया है। साथ ही बिना सत्यापन इसे शेयर करने के लिए चेताया भी है।
खुद को किसान नेता बताने वाले राजस्थान के हिम्मत सिंह गुर्जर ने अपने ट्वीट में लिखा है, “UP चुनाव जीतने की खुशी में भाजपा सरकार ने दिया पुलिसकर्मियों को बहुत बड़ा तोहफा। पुलिसकर्मियों में खुशी की लहर। 60 साल की जगह अब 50 साल की उम्र में पुलिसकर्मियों की रिटायर अवधि होगी। तोहफा पर तोहफा।” ट्वीट के साथ उसने DGP ऑफिस का एक लेटर भी अटैच किया है जिस पर 10 मार्च 2022 की तारीख अंकित है।
UP चुनाव जितने की ख़ुशी में भाजपा सरकार ने दिया पुलिसकर्मियों को बहुत बड़ा तोहफ़ा.. पुलिसकर्मियों में खुशी की लहर 60 साल की जगह अब 50 साल की उम्र में पुलिसकर्मियों की रिटायर अवधि होगी..
— Mohd Tauheed Siddiqui (@MohdTauheedSid2) March 12, 2022
नौशाद आलम ने लिखा है, “योगी सरकार अब पुलिस कर्मियों को 60 नहीं, बल्कि 50 साल में ही रिटायर करने जा रही है।”
योगी सरकार अब पुलिस कर्मियों को 60 नहीं बल्कि 50 साल में ही रिटायर करने जा रही है।
जाओ गुरू 5 किलो राशन लेके घूमौ ?
— Naushad Alam Champarni (@alam_champarni) March 13, 2022
उत्तर प्रदेश पुलिस के वायरल फैक्ट चेक हैंडल द्वारा 13 मार्च (रविवार) को बताया गया ही, “पुलिसकर्मियों की सेवानिवृत्ति की आयु 60 वर्ष से घटाकर 50 वर्ष किए जाने की ख़बर पूर्णतया भ्रामक है। कृपया बिना सत्यापन के भ्रामक पोस्ट कर अफवाह न फैलाएँ।”
पुलिस ने अपने ट्वीट में कहा है, “सोशल मीडिया पर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पुलिसकर्मियों को 50 वर्ष में सेवानिवृत्त करने की अफ़वाह फैलाई जा रही है जो पूर्णतः तथ्यहीन है। ऐसा कोई आदेश सरकार के स्तर से निर्गत नहीं किया गया है। इस मामले में बताना है कि सरकारी सेवाओं में काबिलियत चेक करने के लिए अक्षम सरकारी कर्मचारियों के अनिवार्य रिटायरमेंट के लिए स्क्रीनिंग शासनादेश संख्या-13-45-85- कार्मिक- 1 दिनांक 26.10.1985 के अंतर्गत प्रदेश के हर डिपार्टमेंट में होती है।”
आगे कहा गया, “इस प्रक्रिया में ऐसे स्टाफ़ की स्क्रीनिंग होती है जिनकी उम्र आयु 50 साल हो चुकी है। साथ ही जिनकी सत्य निष्ठा संदिग्ध है और काम करने के तौर-तरीके भी विभाग और शासन के नियमों से नहीं होते। इस मामले में एक स्क्रीनिंग कमेटी गठित होती है। बाद में सामूहिक विचार विमर्श के बाद उन नामों पर विचार किया जाता है जो विभाग में बने रहने के योग्य नहीं होते। उन्हें ही अनिवार्य रिटायरमेंट दिया जाता है। यह सूचना पुलिस हेडक्वार्टर हर साल मँगाता है। इस साल भी ये सूचना मँगाई गई थी जिसको बिना सोचे समझे 50 साल में जबरन रिटायरमेंट जैसी भ्रामक खबरें फैलाई जा रही हैं। पुलिस मुख्यालय इन खबरों का खंडन करता है।”
शराबबंदी को लेकर अब मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने आक्रमक रूख दिखाते हुए भोपाल की शराब की एक दुकान पर पत्थर फेंकने का वीडियो वायरल हो रहा है। यह वीडियो भोपाल का है। वीडियो 13 मार्च (रविवार) का है जिसे खुद उमा भारती ने भी ट्वीट किया है। तोड़फोड़ के दौरान उनके साथ नारेबाजी करती लोगों की भीड़ दिखाई दे रही है।
2) मज़दूरों की बस्ती हैं, पास में मंदिर हैं, छोटे बच्चों के स्कूल हैं । जब लड़कियाँ और महिलायें छतों पर खड़ी होती हैं तो शराब पिये हुए लोग उनके तरफ़ मुँह करके लघुशंका करने के लिए खड़े होकर उनको लज्जित करते हैं ।
खुद उमा भारती के मुताबिक वीडियो भोपाल के बरखेड़ा पठानी क्षेत्र के आज़ाद नगर BHEL का है। उनके लिखा, “यहाँ मजदूरों की बस्ती में शराब की कई दुकानें हैं। ये एक बड़े अहाते में लोगों को शराब परोसते हैं। मजदूरों की बस्ती के पास में मंदिर भी है। यहाँ छोटे-छोटे बच्चों के स्कूल हैं। जब लड़कियाँ और महिलाएँ छत पर होती हैं तब शराब पी कर शराबी उनकी तरफ मुँह कर के टॉयलेट करते हैं। वो औरतों को लज्जित करते हैं। साथ ही मजदूर अपनी पूरी कमाई इन्हीं शराब की दुकानों पर खर्च कर देते हैं।”
4) इसलिए प्रशासन ने हर बार बंद करने का आश्वासन दिया, लेकिन कई साल हो गए यह नही हो पाया । आज मैंने प्रशासन को एक हफ़्ते के अंदर दुकान एवं आहाता बंद करने की चेतावनी दी हैं । @ChouhanShivraj@OfficeofSSC@BJP4MP@INCMP
उमा भारती ने आगे लिखा, “यह सरकारी नियमों के खिलाफ है। इलाके के कई लोगों ने इन चीजों का कई बार विरोध किया। उन्होंने धरने भी दिए। प्रशासन इन दुकानों को बार-बार बंद करवाने का बस आश्वासन ही दे पाया। लेकिन कई साल से कार्रवाई नहीं की गई। मैंने आज प्रशासन को इस आहाते को बंद करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है।” उमा भारती ने अपने ट्वीट में मुख्यमंत्री शिवराज चौहान, शिवराज चौहान के कार्यालय, मध्य प्रदेश भाजपा के साथ मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस को भी टैग किया है।
कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने उमा भारती की हिम्मत की दाद दी है।
उमा जी, आपकी बहादुरी की मैं दाद देता हूँ। यदि आपसे प्रेरणा ले कर आम जनता ने शराब दुकानों पर पत्थर मारे तो फिर उन्हें बचाने के लिए भी आपको आगे आना पड़ेगा। https://t.co/paLXehTrLy
दिग्विजय सिंह ने लिखा, “उमा जी, आपकी बहादुरी की मैं दाद देता हूँ। यदि आपसे प्रेरणा ले कर आम जनता ने शराब दुकानों पर पत्थर मारे तो फिर उन्हें बचाने के लिए भी आपको आगे आना पड़ेगा।”
द कश्मीर फाइल्स की अपार सफलता के बाद कॉन्ग्रेस पार्टी ने इस्लामी कट्टरपंथियों के बचाव में धड़ाधड़ ट्वीट करके ये साबित करने की कोशिश की है कि 1990 में जो कुछ भी कश्मीर में हुआ उसके पीछे इस्लामी कट्टरपंथी नहीं बल्कि आरएसएस से जुड़े राज्यपाल जगमोहन और भाजपा जिम्मेदार थी। पार्टी ने ‘कश्मीर फाइल्स बनाम सच’ हैशटैग के साथ 9 ट्वीट किए और दावा किया कि जो वो बता रहे हैं वहीं कश्मीरी पंडितों के मामले के तथ्य हैं।
केरल कॉन्ग्रेस द्वारा किए गए ट्वीट में कश्मीरी पंडितों के नरसंहार को मुस्लिमों की हत्या से जोड़ा गया। पहले ट्वीट में कॉन्ग्रेस ने ये दिखाया है कि भले ही 1990 से 2007 के बीच आतंकियों ने 399 कश्मीरी पंडितों को मारा लेकिन इतने ही अंतराल में 15000 मुस्लिम भी आतंकियों द्वारा मारे गए।
अगले ट्वीट में कश्मीरी हिंदुओं के उस पलायन पर सफाई दी गई जिसमें लाखों कश्मीरी इसलिए घाटी से निकले थे क्योंकि रातोंरात मस्जिद से ऐलान हुए थे कि सभी कश्मीरी पंडित घाटी छोड़कर निकल जाएँ, वरना मारे जाएँगे। ऐसे दर्दनाक पलायन पर कॉन्ग्रेस ने सफाई दी कि वो सब तो आरएसएस से जुड़े तत्कालीन राज्यपाल जगमोहन की वजह से हुआ था जबकि सच ये है कि जगमोहन को राज्यपाल की कुर्सी 19 जनवरी 1990 को मिली और वे 21 जनवरी 1990 को श्रीनगर पहुँचे थे। इस बीच घाटी में कट्टरपंथियों का आतंक शुरू हो गया था।
तीसरे ट्वीट में कॉन्ग्रेस ने बताया कि आतंकी हमलों के बाद भाजपा ने पंडितों को सुरक्षा नहीं दी बल्कि भाजपा के जगमोहन ने उन्हें कहा कि वे लोग जम्मू में आकर रहें। ऐसे में जो पंडित परिवार वहाँ सुरक्षित नहीं महसूस कर रहे थे उन्होंने घाटी को छोड़ दिया।
कॉन्ग्रेस पार्टी ने इस ट्वीट के जरिए ये सुनिश्चित किया कि वो अपने समर्थकों को ये बताएँ कि कश्मीर में जो हिंदुओं के साथ हुआ वो आतंकियों ने किया। इस थ्रेड में कॉन्ग्रेस द्वारा बार-बार मुस्लिमों की हत्या का आँकड़ा देकर ये दिखाते रहने का प्रयास हुआ कि जो कश्मीरी हिंदुओं के साथ हुआ वही सब कश्मीरी मुस्लिमों ने भी सहा।
भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा की तस्वीर के साथ कॉन्ग्रेस ने कहा कि बीजेपी अयोध्या के राम मंदिर मामले पर देश के हिंदू-मुस्लिमों को बाँट रही थी और पंडितों वाला मामला बीजेपी प्रोपेगेंडे को चुनावों में फायदा देने वाला था।
कश्मीरी पंडितों के मुताबिक, उन्हें घाटी से निकालने के लिए कट्टरपंथियों की ट्रेनिंग बहुत पहले से शुरू हो गई थी। 1989 से भी बहुत पहले। लेकिन कॉन्ग्रेस के अगले ट्वीट में सारा ठीकरा भाजपा सरकार पर फोड़ते हुए ये बताया गया कि कैसे दिसंबर 1989 में वीपी सिंह सरकार आई और पंडितों के पलायन पर उन्होंने कुछ नहीं किया, सिर्फ 1990 के नवंबर तक वीपी सिंह को समर्थन देते रहे।
ट्वीट में भाजपा के लिए कहा गया, “भाजपा जो पंडितों के लिए मगरमच्छ के आँसू बहाती है। उसने दो बार केंद्र में और एक बार जम्मू-कश्मीर में सत्ता में आने के बाद भी उनकी वापसी के लिए कछ नहीं किया।” कॉन्ग्रेस की शिकायत ये भी है कि उन्होंने कश्मीरी पंडितों के लिए जो जो किया उसका सारा क्रेडिट भााजपा ने ले लिया जबकि यूपीए सरकार ने 15 हजार कश्मीरों को जॉब दी और 6000 पंडितों को जम्मू-कश्मीर सरकार में शामिल किया।
अपनी वाहवाही के लिए कॉन्ग्रेस ने बताया कि यूपीए सरकार ने पंडितों को 5,242 आवास दिए और उन्हें 5-5 लाख रुपए की मदद की, साथ ही 1, 168 करोड़ रुपए की छात्रों को स्कॉलरशिप, किसानों को सहायता और कल्याणकारी योजनाएँ दी।
उल्लेखनीय है कि केरल कॉन्ग्रेस डिजिटल मीडिया सेल के अध्यक्ष पार्टी के वरिष्ठ नेता शशि थरूर हैं। इस हैंडल से किए गए लगातार 9 ट्वीट का सारांश यही है कि कश्मीर में 90 के दशक में कश्मीरी हिंदुओं के साथ जो हुआ वैसा कश्मीरी मुस्लिमों के साथ भी हुआ था। इसके अलावा पंडितों के पलायन के लिए भाजपा जिम्मेदार है इस्लामी कट्टरपंथी नहीं। भाजपा ने अपने प्रोपेगेंडे के लिए इस मामले को भुनाया जबकि कॉन्ग्रेस पार्टी जी जान लगाकर उनकी मदद में जुटी थी।