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इमरान खान की पुतिन से मुलाकात पड़ी भारी: US फेडरल रिजर्व ने पाकिस्तान के नेशनल बैंक पर लगाया 55 मिलियन डॉलर का जुर्माना

पूर्वी यूक्रेन में रूसी सैनिकों द्वारा चल रहे ‘स्पेशल मिलिट्री ऑपरेशन’ के बीच रूस में मेहमानवाजी का लुत्फ उठा रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को अमेरिका ने बड़ा झटका दिया है। अमेरिका ने पाकिस्तान के नेशनल बैंक (NBP) और इसकी न्यूयॉर्क ब्रांच पर $55 मिलियन का जुर्माना लगाया है। इस संबंध में जारी रिपोर्ट के अनुसार, यूएस फेडरल रिजर्व और न्यूयॉर्क स्टेट डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज द्वारा यह जुर्माना एंटी मनी लॉन्ड्रिंग नियमों का उल्लंघन करने पर लगाया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक फेडरल रिजर्व ने 20.4 मिलियन डॉलर का जुर्माना लगाया है तो वहीं न्यूयॉर्क स्टेट डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज ने पाकिस्तान के नेशनल बैंक ने $35 मिलियन का भुगतान करने के लिए कहा है। 4 मार्च, 2021 को की गई जाँच के आधार पर जारी किए गए आदेश में कहा गया है कि NBP ने 16 मार्च, 2016 को ‘कमियों’ को ठीक करने के लिए अधिकारियों के साथ एक लिखित समझौता किया था। हालाँकि, हाल की जाँच में पाया गया है कि NBP ‘लिखित समझौते के प्रत्येक प्रावधान का पूर्ण अनुपालन करने’ में विफल रहा है।

आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि चूँकि पाकिस्तान का नेशनल बैंक अमेरिकी कानूनों का पालन करने में विफल रहा है। यूएस फेडरल रिजर्व ने एनबीपी को कॉरपोरेट गवर्नेंस और मैनेजमेंट ओवरसाइट में सुधार करने का आदेश दिया है। रिजर्व बैंक ने एनबीपी से आदेश के 60 दिनों के भीतर अपनी सिफारिशों को लागू करने की माँग की है। इसमें NBP को दस दिनों के भीतर एक अधिकारी को नामित करने के लिए भी कहा है जो रिजर्व बैंक की लिखित योजनाओं को ‘कोऑर्डिनेट और सबमिट करने के लिए जिम्मेदार’ होगा। इस बीच, NYDFS के अधीक्षक एड्रिएन ए हैरिस ने घोषणा की कि NBP और उसकी न्यूयॉर्क शाखा द्वारा लगाए गए दंड का भुगतान करने के लिए सहमत हो गई है। 

गौरतलब है कि इमरान खान बुधवार (24 फरवरी 2022) को दो दिवसीय यात्रा पर रूस पहुँचे। हालाँकि, मॉस्को पहुँचने के कुछ ही घंटों बाद, रूसी राष्ट्रपति ने पूर्वी यूक्रेन में ‘स्पेशल मिलिट्री ऑपरेशन’ का आदेश दिया। वर्तमान हालात में व्लादिमीर पुतिन और इमरान खान की मुलाकात के सामरिक मायने निकाले जा रहे हैं। बाद में व्लादिमीर पुतिन ने क्रेमलिन में प्रधानमंत्री खान के साथ आमने-सामने बैठक की।

केरल: दिव्यांग बेटी का बीमार माँ के सामने रेप, पीड़ित परिवार को शिहाब की जमानत के बाद ‘बदले’ का डर

केरल के मलप्पुरम (Mallapuram Kerala) में एक शारीरिक और मानसिक दिव्यांग लड़की का उसकी माँ के के सामने रेप करने का मामला सामने आया है। पीड़िता की माँ पैरालिसिस (लकवा) से ग्रसित बताई जा रही है। आरोपित का नाम मुत्तलन शिहाब है और उसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। शिहाब पर पहले से ही कई केस दर्ज हैं। पीड़ित परिवार को डर है कि आरोपित जेल से आकर उनसे बदला लेगा। घटना 22 फरवरी (मंगलवार) की बताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, घटना मलप्पुरम जिले के अरीकोड के कावानुर की है। आरोपित रात लगभग 2 बजे पीड़िता के घर में किराए पर रहने वालों के दरवाजे से घुसा था। उसने पीड़िता के मुँह और नाक को दबा दिया और उसे चुप रहने की धमकी दी। जैसे-तैसे वह आरोपित के हाथों से निकलकर भागी, लेकिन आरोपित ने पीछा कर उसे पकड़ लिया और उसके साथ रेप किया। रेप के बाद किसी को भी बताने पर उसे मार डालने की धमकी भी दी गई।

मानसिक और शारीरिक रूप से दिव्यांग पीड़िता को 3 महीने पहले भी आरोपित द्वारा प्रताड़ित किया गया था, तब वह डर से आवाज नहीं उठा पाई थी। पीड़िता अपनी गंभीर रूप से बीमार माँ के साथ रहती है और उसकी सेवा करती है। पीड़िता की माँ बिस्तर से उठ भी नहीं पाती। अपनी बेटी के साथ हुए दुष्कर्म के बाद बीमार माँ केवल रो रही है।

भाजपा की केरल शाखा ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा, “मलप्पुरम में बीमार माँ के सामने उसकी बेटी की बेरहम प्रताड़ना हुई। यह दुखद है। यह घटना इस बात का सबूत है कि केरल में कुछ भी हो सकता है।”

‘…सब डरते हैं’: यूक्रेन के राष्ट्रपति बोले- सबने अकेला छोड़ दिया, पहले दिन 137 मौतें-कीव में घुसी रूसी सेना

यूक्रेन पर रूस के हमले का आज (25 फरवरी 2022) दूसरा दिन है। आज रूस की तरफ से हमलों की इंटेसिटी काफी बढ़ गई है। सुबह से यूक्रेन की राजधानी कीव में बड़े धमाके सुने गए हैं। कई रिपोर्टों में कीव में रूसी सेना के दाखिल होने की बात कही जा रही है। शहर में एक के बाद मिसाइलों से हमले हो रहे हैं। लोग घरों में दुबके हुए हैं। खाने-पीने से लेकर जरूरत की और भी चीजों की कमी के बावजूद लोग घरों से नहीं निकल रहे हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने बताया कि रूस के हमले में पहले दिन (24 फरवरी 2022) 137 नागरिक और सैन्यकर्मी मारे गए हैं।

राष्ट्र के नाम एक भावनात्मक संबोधन में जेलेंस्की ने कहा, “दुख की बात है कि आज हमने 137 हीरो, अपने नागरिकों को खो दिया। उनमें से दस अधिकारी थे। 316 लोग घायल हुए हैं। द्वीप की रक्षा करते हुए, हमारे सभी बॉर्डर गार्डों की वीरतापूर्वक मृत्यु हो गई। लेकिन उन्होंने सरेंडर नहीं किया है। उन सभी को मरणोपरांत यूक्रेन के हीरो की उपाधि से सम्मानित किया जाएगा।”

उन्होंने आगे कहा, “यूक्रेन के लिए अपनी जान देने वालों को हमेशा याद किया जाए। मैं राजधानी में रहता हूँ, मेरा परिवार भी यूक्रेन में है, मेरे बच्चे यूक्रेन में हैं। मेरा परिवार देशद्रोही नहीं है, वे यूक्रेन के नागरिक हैं। वे वास्तव में कहाँ हैं, मुझे यह कहने का कोई अधिकार नहीं है।” यूक्रेन के राष्ट्रपति ने आगे जोर देते हुए कहा, “प्राप्त जानकारी के अनुसार, दुश्मन ने मुझे टारगेट नंबर 1 के रूप में, मेरे परिवार को टारगेट नंबर 2 के रूप में चिह्नित किया है। वे स्टेट के मुखिया को नष्ट करके यूक्रेन को राजनीतिक रूप से नुकसान पहुँचाना चाहते हैं।”

उन्होंने अफसोस जताया कि कैसे दुनिया ने इतने महत्वपूर्ण समय में यूक्रेन को अकेला छोड़ दिया। राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा, “हमें अपने राज्य की रक्षा के लिए अकेला छोड़ दिया गया है। हमारे साथ लड़ने के लिए कौन तैयार है? मुझे कोई नहीं दिख रहा है। यूक्रेन को नाटो सदस्यता की गारंटी देने के लिए कौन तैयार है? हर कोई डरता है।”

इधर रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने दावा किया है कि रूस ने यूक्रेन के 70 सैन्य ठिकानों को पूरी तरह तबाह कर दिया है। उसके बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने ट्वीट कर कहा है कि रूस उनके चेरनोबिल परमाणु संयंत्र पर कब्जा करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि साल 1986 की त्रासदी को दोहराया न जाए सके इसके लिए यूक्रेन के जवान अपनी जान की बाजी लगा रहे हैं। रूस के इस हमले को उन्होंने पूरे यूरोप के खिलाफ युद्ध की घोषणा बताया है।

‘चलता उसी का है जो इनके सामने झुकता है’: विवेक अग्निहोत्री ने बताए वे नाम जो चलाते हैं बॉलीवुड, ‘शूर्पणखा’ की कारस्तानी भी बताई

राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म निर्देशक विवेक रंजन अग्निहोत्री की फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ की 21 फरवरी 2022 ट्रेलर रिलीज हुई थी। उन्होंने पिछले दिनों फिल्म समीक्षक अनुपमा चोपड़ा को ‘शूर्पणखा’ बताते हुए फिल्म को नुकसान पहुँचाने की कोशिश का आरोप लगाया था। अब उन्होंने एक वीडियो जारी कर चोपड़ा की कारस्तानी के बारे में विस्तार से बताया है। साथ ही उनलोगों के नाम भी बताए हैं जो कथित तौर पर बॉलीवुड को चलाते हैं। उसके नियम-कायदे सेट करते हैं।

विवेक अग्निहोत्री ने गुरुवार (24 फरवरी 2022) को जारी वीडियो में कहा कि वे अपनी फिल्म के दर्शक से सीधा संपर्क रखते हैं। जो दर्शक अच्छी कंटेन्ट वाली फिल्म देखना चाहते हैं, वे उनसे डायरेक्ट कॉन्टैक्ट रखते हैं। निर्देशक ने कहा कि आज के समय में सिर्फ ट्विटर या इंस्टाग्राम पर प्रचार करके फिल्म के बारे में जागरूकता नहीं फैलाया जा सकता। फिल्म के बारे में हर एक को पता चले और वह थिएटरों तक आए, इसके लिए लड़ाई बॉलीवुड के महारथी, जो करोड़ों-करोड़ों में खेलते हैं, उनके साथ है। दुर्भाग्य से इनलोगों ने सारा का सारा मीडिया खरीद रखा है।

इस दौरान उन्होंने करण जौहर (धर्मा प्रोडक्शन), यशराज प्रोडक्शन, विधु विनोद चोपड़ा का नाम लेते हुए कहा कि बॉलीवुड में 4-5 ऐसे बड़े प्रोडक्शन हाउस हैं जो बॉलीवुड का नियम सेट करते हैं। ये तय करते हैं कि किसका करियर यहाँ चलेगा और किसका नहीं चलेगा। जिसका ये चाहते हैं कि न चले, उसको ये खत्म करने की कोशिश करते हैं। चलता उसी का है, जो इनके सामने झुकता है।

उन्होंने आगे कहा, “विवेक रंजन अग्निहोत्री न कभी इनके सामने झुका है और न कभी झुकेगा। इसका परिणाम यह है कि मुझे इसका हर्जाना भरना पड़ता है।” उन्होंने कहा ट्विटर ने उन्हें अनुपमा चोपड़ा के Film Companion का ट्वीट पढ़ने के लिए रिकमेंड किया, जिसमें गहराइयाँ की तारीफ थी। वह फिल्म जिसे पब्लिक ने उठाकर कचड़े के डब्बे में फेंक दिया, उसे यह लोग मार-मार कर हिट करवाने की कोशिश कर रहे हैं। 

अग्निहोत्री ने कहा, “मैंने सोचा Film Companion हर फिल्म के बारे में लिखता है तो हमारा ट्रेलर, जिसे 12 से 24 घंटे में 7.8 मिलियन व्यूज मिल गए थे, उसके बारे में कुछ तो लिखा होगा। ट्रेलर के बारे में लोग तारीफ कर रहे हैं कि कश्मीर के बारे में इससे ज्यादा सच्चाई कहीं देखी नहीं तो मैंने सोचा कि जिस महिला की शादी एक कश्मीरी पंडित (विधु विनोद चोपड़ा) से हुई है, जिसने कश्मीर के ऊपर दो बड़ी-बड़ी फिल्में बनाई हैं। उनकी साइट पर कश्मीर फाइल्स के ट्रेलर के बारे में कुछ तो लिखा होगा। मैंने जाकर चेक किया।”

इसके बाद अग्निहोत्री ने वीडियो में बताया है कि कैसे  Film Companion ने ‘गहराइयाँ’ के बारे में ट्वीट्स की लाइन लगा दी। वहीं कश्मीर फाइल्स के बारे में एक ट्वीट किया था। उसमें भी उनकी पिछली फिल्म ‘द ताशकंद फाइल्स’ की समीक्षा छापी थी और उसे ‘ए सेकेंड-हैंड हिस्ट्री लेसन इन थर्ड-रेट पॉलिटिक्स’ करार दिया था। उन्होंने कहा, “यह काम या तो कोई पागल कर सकता है या फिर पूरी तरह से पैसों से बिका हुआ आदमी करता है या एक बहुुत ही शैतान बुद्धि वाला व्यक्ति करता है। शैतान बुद्धि वाला जो आदमी है, उसे मैं अर्बन नक्सल बोलता हूँ।”

आगे उन्होंने विधु विनोद चोपड़ा की फिल्म ‘शिकारा’ और अपनी ‘ताशकंद फाइल्स’ की बात करते हुए कहा कि इसकी IMDB में रेटिंग 3.9 है, जबकि ‘ताशकंद फाइल्स’ की रेटिंग 7.9 है। अनुपमा को निशाने पर लेते हुए उन्होंने कहा, “अपने पति के फिल्म के Conflict of interest होने के बावजूद इन्होंने इतना प्रमोट करने की कोशिश की।” इसके बाद उन्होंने दिखाया कि चोपड़ा की फिल्म देखने के बाद कश्मीरी पंडितों ने किस तरह से रिएक्ट किया था। 

वीडियो में वे कहते हैं, “अब मुझे ये बताइए कि जिसके पति ने कश्मीरी नरसंहार पर दो फिल्में बनाई। पहली फिल्म में आतंकी को जस्टिफाइ किया, कश्मीरी पंडितों के दर्द के बारे में एक शब्द नहीं बोला और दूसरी फिल्म में उन्होंने जवाब दिया क्या फर्क पड़ता है, जिन लोगों ने तुम्हारी माँ का रेप किया, भाइयों को काट डाला, पिताजी को 50 टुकड़ों में काटकर फेंक दिया, उन लोगों से गले मिलो और आइ लव यू बोलकर मूव ऑन करो। इसको आपने क्या करण जौहर की फिल्म समझ रखा है। आप गहराइयाँ जैसी फिल्मों को प्रमोट करती हैं और जब कश्मीरी फाइल्स की बारी आती है, जिससे 10 लाख कश्मीरियों की भावनाएँ जुड़ी हुई हैं, जिस समस्या को लेकर भारत का हर युवा, हर व्यक्ति परेशान है, पीड़ित है, उस फिल्म को रिलीज होने से पहले, जिसको आपने देखा तक नहीं है, उसके साथ ऐसा क्यों?” 

निर्देशक ने कहा, “आपमें अगर जरा सा भी फिल्म को लेकर प्यार है, तो एक स्वतंत्र फिल्ममेकर, जिसका बायकॉट किया है आप और आपके बॉलीवुड ने, मैं आपको चैलेंज करता हूँ कि मुझसे कहीं भी खड़े होकर सिनेमा की बात कर लो।”

बता दें कि इससे पहले अग्निहोत्री ने बुधवार (23 फरवरी) को Film Companion की प्रमुख अनुपमा चोपड़ा के खिलाफ ट्वीट करते हुए आरोप लगाया कि वह उनकी फिल्म को टारगेट करने के लिए पीछे से ‘गंदी चाल’ चल रही हैं। विवेक अग्निहोत्री ने अनुपमा को ‘शूर्पणखा’ कहते हुए पूछा, “अगर आप में हिम्मत है तो ‘द कश्मीर फाइल्स’ को खुलेआम नुकसान पहुँचाओ। कृपया पीछे से गंदी हरकतें करना बंद कर दो। आपकी एकमात्र योग्यता यह है कि आपकी शादी एक ऐसे निर्माता से हुई है, जिसने केपी (कश्मीरी पंडित) होने के बावजूद केपी की पीठ में छुरा घोंपा है।”

बिहार में इतने बम कहाँ से आ रहे? अब खगड़िया में कार्टून से गिरे धड़ाधड़ बम, 3 धमाके-बच्चों समेत कई घायल

बिहार के खगड़िया जिले में 3 बम ब्लास्ट की सूचना है। इन ब्लास्ट में अब तक 4 बच्चों सहित 14 लोगों के घायल होने की खबर है। घायलों में 2 की हालत गंभीर है। प्रत्यक्षदर्शियों ने 20 से 23 बमों के जमीन में गिरने की बात कही है। पुलिस बल मौके पर पहुँच कर जाँच कर रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटनास्थल नगर थाना क्षेत्र के बखरी बस स्टैंड के पास झुग्गियों का इलाका है। यहीं की एक झुग्गी में रहने वाले 25 साल के सतीश सदा कचरा बीनने का काम करते हैं। गुरुवार (24 फरवरी 2022) को वे कचरा बीन कर घर पहुँचे। उनके हाथ में एक कार्टून था जिसमें बम रखे होने की बात कही जा रही है। उन्होंने कार्टून को झोपडी में लगे बाँस से लटका दिया। कुछ देर बाद वह कार्टून जमीन पर गिर गया और ब्लास्ट हो गया

SP खगड़िया अमितेश कुमार ने बताया कि बम कम क्षमता के थे। लेकिन यह जाँच का विषय है कि इतनी संख्या में ये कहाँ से आए। वहीं स्थानीय समाचार चैनल खबर हर पल से बात करते हुए खगड़िया के जिलाधिकारी ने बताया कि रेलवे ट्रैक के पास रखी पटरियों के पास भी कुछ पटाखे नुमा मार्क मिले हैं। FSL जाँच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। एहतियातन इलाके को खाली करा दिया गया है।

बिहार में हाल में हो चुकी है बम ब्लास्ट की कई घटनाएँ

खगड़िया में बम ब्लास्ट की घटनाओं से पहले भी बिहार के कई स्थानों पर बम मिलने और ब्लास्ट जैसी घटनाएँ हो चुकी हैं। जून 2021 में बिहार के बाँका जिले में टाउन थाना क्षेत्र के नवटोलिया में नूरी मस्जिद इस्लामपुर परिसर के आगे एक मदरसे में बम विस्फोट हुआ था। इस ब्लास्ट में मदरसे के मौलवी मोहम्मद मोमिद सहित कई लोग घायल हुए थे। वहीं 10 जून 2021 में बिहार के ही अररिया जिले के बैरगाछी थाना क्षेत्र के त भुवनेश्वरी रामपुर गाँव में झोले में रखा एक बम फट गया था। इस धमाके में मोहम्मद अफरोज नाम का शख्स बुरी तरह घायल हो गया। बाद में बताया गया कि अफरोज झोले में बम ले जा रहा था। लेकिन सरिया से टकराकर वह उसके हाथ में ही फट गया। दो जिंदा बम भी बरामद किया गया था।

17 जून 2021 को दरभंगा जंक्शन पर बम ब्लास्ट हुआ था। पुलिस जाँच में पाया गया था कि दरभंगा के मोहम्मद सुफियान के लिए सिकंदराबाद से एक रजिस्टर्ड पार्सल आया था। उसी में विस्फोट हुआ था। 20 जून 2021 को बिहार के सिवान में हुसैनगंज थाना क्षेत्र के जुड़कन गाँव में विस्फोट हुआ था। जाँच में सामने आया कि घटना के समय विनोद माँझी अपने बेटे सत्यम को लेकर गाँव की दुकान पर बिस्किट खरीदने गए थे। उसी दौरान उनकी मुलाकात सगीर साई नाम के व्यक्ति से हुई और उसने एक एक झोला दे दिया। सगीर ने किसी व्यक्ति का नाम लेते हुए कहा कि वह आएगा तो ये झोला उसे दे देना है। इसी बीच झोले में रखा बम ब्लास्ट हो गया।

बेदाग रहा है करियर, अब न हो 33 साल पुराने मामले में सजा: सुप्रीम कोर्ट से सिद्धू की गुहार, बुजुर्ग की हुई थी मौत

पंजाब कॉन्ग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने 33 साल पुराने रोड रेज मामले में सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है। इसमें पुनर्विचार याचिका खारिज करने की अपील की है। अपने राजनीतिक और खेल करियर को बेदाग बताते हुए कहा है कि सांसद के रूप में भी उनका रिकॉर्ड बेजोड़ रहा है। सिद्धू ने शीर्ष अदालत से कहा है कि वे कानून का पालन करने वाले नागरिक हैं। इस मामले में उन पर जुर्माना लगाया जा चुका है। अब उन्हें आगे सजा नहीं होनी चाहिए।

1988 के रोड रेज केस में सिद्धू पर ₹1,000 का जुर्माना लगाया गया था। इसके खिलाफ पीड़ित परिवार ने रिव्यू पेटिशन दाखिल की थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पीड़ित परिवार की याचिका पर सिद्धू को सितम्बर 2018 में नोटिस मिली थी। इस घटना में 65 वर्षीय बुजुर्ग गुरनाम सिंह की मृत्यु हो गई थी। मामले में सिद्धू के साथ उनके साथी रुपिंदर सिंह संधू भी आरोपित हैं।

नोटिस के जवाब में सिद्धू ने कहा है, “एक राजनेता के तौर पर मैंने बहुत सारे सामाजिक और जनहित के काम किए हैं। मैंने तमाम जरूरतमंदों की सेवा की है। कई प्रोजेक्टों को स्थापित करने में सहयोग प्रदान किया है। इसलिए मैं अब और अधिक दंडित किए जाने योग्य नहीं हूँ। आरोपी और पीड़ित के बीच कोई पुरानी दुश्मनी नहीं थी। साथ ही मेरे द्वारा किसी भी हथियार का इस्तेमाल नहीं किया गया था।”

इस मामले की सुनवाई जस्टिस ए एम् खानविलकर और जस्टिस संजय किशन कौल की बेंच कर रही है। मई 2018 में सुप्रीम कोर्ट से ही सिद्धू को ₹1,000 जुर्माना भरने का दंड मिला था। सिद्धू पर धारा 323 IPC के तहत कार्रवाई हुई थी। इसमें अधिकतम 1 साल की जेल और ₹1,000 जुर्माना या दोनों एक साथ की सजा होती है। पीड़ित परिवार की तरफ से एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा बहस कर रहे हैं। पीड़ित परिवार ने सुप्रीम कोर्ट से सभी सबूतों की एक बार फिर से जाँच की माँग की है।

700 से अधिक केस, 2456 गिरफ्तारियाँ, 100 चार्जशीट; 1356 हैं सलाखों के पीछे: दिल्ली दंगों की दूसरी बरसी पर राकेश अस्थाना ने किया खुलासा

दिल्ली में हुए दंगा के दो साल के बीत चुके हैं इसको लेकर अभी भी अदालत में लगातार सुनवाइयाँ की जा रही हैं। इसी क्रम में इन दंगों को लेकर पुलिस द्वारा लिए गए एक्शन को लेकर खुलासा किया गया है। दिल्ली पुलिस के कमिश्नर राकेश अस्थाना ने कहा है कि उसने हिंसा के सिलसिले में 2,456 लोगों को गिरफ्तार किया था। इसमें से 1053 लोगों को रिहा किया गया था, जबकि 1356 आरोपित अभी ज्यूडिशियल कस्टडी में हैं।

एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस के कमिश्नर राकेश अस्थाना ने इसको लेकर जानकारी देते हुए कहा, “जहाँ तक पूर्वोत्तर दिल्ली दंगों का सवाल है, हमने 700 से अधिक मामले दर्ज किए थे। इनमें से करीब 62 मामलों की जाँच क्राइम ब्रांच कर रहा है। एक बड़ी साजिश के एक मामले की जाँच स्पेशल सेल कर रही है। बाकी मामलों की स्थानीय पुलिस थाना स्तर पर जाँच की जी रही है।”

अस्थाना के मुताबिक, दिल्ली दंगों के मामले में दिल्ली पुलिस पहले से ही 100 चार्जशीट फाइल कर चुकी है। इसके अलावा जाँच को सफल बनाने के लिए डीसीपी नॉर्थ और स्पेशल सीपी के तहत एक विशेष टीम का गठन किया गया और कई पूरक आरोप पत्र दायर किए गए। 2456 गिरफ्तारियाँ की गईं, जिनमें से 1053 को जमानत पर रिहा कर दिया गया। 1356 अभी भी न्यायिक हिरासत में हैं।

दिल्ली पुलिस कमिश्नर कहते हैं कि दिल्ली दंगों के मामले में 1610 आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी, जिसमें से 338 मामलों में संज्ञान लिया गया था। जिन सभी मामलों में चार्जशीट दायर की गई थी, उनमें से 100 के खिलाफ आरोप तय किए गए हैं और ट्रायल शुरू हो गया है। इनमें दो मामलों में अपराध सिद्ध हो गए हैं। बता दें कि दिल्ली पुलिस कमिश्नर राकेश अस्थाना दिल्ली पुलिस की वार्षिक प्रेस ब्रीफिंग में बोल रहे थे।

गौरतलब है कि दिल्ली दंगे के मुख्य साजिशकर्ताओं में एक उमर खालिद को लेकर हाल ही में कोर्ट में खुलासा किया गया था, जो दंगे के जरिए माहौल बिगाड़कर मुस्लिमों के लिए एक अलग देश बनाने की साजिश रच रहे थे।

रूसी राष्ट्रपति पुतिन से बात करेंगे PM मोदी, भारतीयों को निकालने की तैयारी: यूक्रेनी राष्ट्रपति बोले- चेरनोबिल परमाणु संयंत्र पर कब्जे की कोशिश

यूक्रेन (Ukraine) में रूस के हमले के बीच वहाँ फँसे भारतीय लोगों के लिए भारत की मोदी सरकार (Modi Government) ने प्रयास शुरू कर दिए हैं। उक्रेन की राजधानी कीव स्थित भारतीय दूतावास ने लगभग 200 विद्यार्थियों को दूतावास के नजदीक स्थित एक स्कूल में रखा है। वहीं, जारी तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) आज रात रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) से बात कर सकते हैं। उधर रूस ने दावा किया है कि उसने उक्रेन के 70 सैन्य ठिकानों को बर्बाद कर दिया है। साथ ही रूस ने अपने नागरिकों को युद्ध विरोधी प्रदर्शन में शामिल नहीं होने की चेतावनी दी है।

युद्धग्रस्त यूक्रेन की राजधानी कीव में भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने वहाँ पढ़ाई करने गए 200 भारतीय छात्र-छात्राओं को दूतावास के नजदीक एक स्कूल में रखा है, ताकि उन्हें सुरक्षित रखा जा सके। इस संबंध में वहाँ के भारतीय दूतावास ने इसका एक वीडियो जारी है, जिसमें इकट्ठा हुए विद्यार्थियों को देखा जा सकता है।

विदेश मंत्रालय के हर्ष सिंगला का कहना है कि कीव में भारतीय दूतावास पूरी सक्षमता के साथ काम कर रहा है। वहाँ फँसे भारतीयों के लिए कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। साथ ही भारतीयों को वहाँ से निकालने के लिए भारतीय अधिकारियों को तैनात किया गया। सीमा के पास वहाँ कैंप बनाए जा रहे हैं। वहाँ से भारतीयों को निकाला जाएगा।

इधर रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने दावा किया है कि रूस ने यूक्रेन के 70 सैन्य ठिकानों को पूरी तरह तबाह कर दिया है। उसके बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने ट्वीट कर कहा है कि रूस उनके चेरनोबिल परमाणु संयंत्र पर कब्जा करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि साल 1986 की त्रासदी को दोहराया न जाए सके इसके लिए यूक्रेन के जवान अपनी जान की बाजी लगा रहे हैं। रूस के इस हमले को उन्होंने पूरे यूरोप के खिलाफ युद्ध की घोषणा बताया है।

वहीं, इस घटना को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रूस के राष्ट्रपति से आज रात बात करेंगे। विदेश मंत्रालय ने भी इसकी पुष्टि की है। यूक्रेन के हालात पर पीएम ने दिल्ली में उच्चस्तरीय बैठक की। इस बैठक में प्रधानमंत्री के अलावा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ-साथ इन तीनों मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। बता दें कि आज ही यूक्रेन के राष्ट्रपति ने महाभारत और चाणक्य का हवाला देते हुए युद्ध रोकने के लिए प्रधानमंत्री मोदी से हस्तक्षेप करने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि पुतिन पीएम मोदी का सम्मान करते हैं और वे पीएम की मोदी की बात जरूर मानेंगे।

यूक्रेन पर आक्रमण के बीच रूसी अधिकारियों ने युद्ध विरोधी सहानुभूति रखने वाले लोगों को विरोध प्रदर्शन के लिए इकट्ठा होने पर कार्रवाई की चेतावनी दी है। दरअसल, रूस के कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर इस हमले को लेकर रूस के खिलाफ सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन करने की अपील की थी। वहीं, स्वतंत्रता अधिकार समूह का कहना है कि युद्ध विरोधी प्रदर्शन के लिए रूस में कम से कम 27 लोगों को अभी तक गिरफ्तार किया गया है।

  

कभी यूक्रेन ने किया था भारत के परमाणु परीक्षणों का विरोध, अब पीएम मोदी से रूस को रोकने के लिए माँग रहा मदद

रूस यूक्रेन पर लगातार हमले कर रहा है और उसके सैनिकों से सरेंडर करने के लिए कह रहा है। ऐसे में यूक्रेन दुनियाभर की सभी प्रमुख शक्तियों से रूस को रोकने की अपील कर रहा है। उसने भारत सरकार से भी रूस पर दवाब बनाने का आग्रह किया है।

यूक्रेनी राष्ट्रपति व्लोदिमीर ज़ेलेंस्की के नेतृत्व वाली सरकार ने भारत से रूस से शांति के लिए बातचीत करने का उनुरोध करते हुए कहा कि भारत का रूस के साथ अच्छा संबंध है।

गुरुवार (24 फरवरी 2022) को भारत में यूक्रेन के राजदूत इगोर पोलिखा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से रूस के साथ तनाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का आग्रह करते हुए कहा कि मोदी और पुतिन एक-दूसरे का सम्मान करते हैं। दरअसल, यूक्रेन भारत के प्रभाव को स्वीकार कर रहा है औऱ चाहता है कि पीएम मोदी इसके लिए कदम उठाएँ।

इससे पहले कि यूक्रेन के ऊपर बात करें हम दोनों देशों के बीच संबंधों पर नजर डालते हैं। क्योंकि, पहले भारत के साथ यूक्रेन के संबंध अच्छे नहीं थे। उल्लेखनीय है कि जब भारत ने परमाणु परीक्षण किया था तो यूक्रेन उन देशों में से एक था जिसने 1998 में भारत के परमाणु परीक्षणों का कड़ा विरोध किया था और 1998 के परमाणु परीक्षण के बाद सुरक्षा परिषद में भारत के कदम की निंदा की थी।

गौरतलब है कि साल 1998 में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली भारत सरकार ने ‘ऑपरेशन शक्ति’ के नाम से पाँच परमाणु परीक्षण कर पूरी दुनिया को चौंका दिया था। उस दौरान यूक्रेन 25 अन्य देशों के साथ भारत के परमाणु परीक्षणों की कड़ी निंदा करते हुए संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव 1172 के पक्ष में मतदान किया था। इसके तहत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पारित किए गए इस प्रस्ताव में माँग की गई थी भारत अपने परमाणु परीक्षणों पर रोक लगाए और एनपीटी और सीटीबीटी पर हस्ताक्षर करे।

इसके अलावा प्रस्ताव में भारत से परमाणु कार्यक्रमों को रोकने, परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम बैलिस्टिक मिसाइलों के विकास और उत्पादन पर भी रोक लगाने को कहा गया था। इन सब में यूक्रेन ने संयुक्त राष्ट्र का साथ दिया था।

जैसै कि आज हम सभी कह रहे हैं कि रूस के हमले के कारण यूक्रेन एक बड़े संकट का सामना कर रहा है। दरअसल, यूक्रेन अपने शक्तिशाली दोस्तों के साथ रहना चाहता है, लेकिन संयुक्त राज्य अमेरिका को न तो दुनिया में कोई सम्मान मिलता है औऱ न ही उसका वैश्विक आधिपत्य है। वहीं करीब 22 साल पहले भारत की सुरक्षा जरूरतों के खिलाफ खड़े होने वाला यूक्रेन आज चाहता है कि भारत उसका साथ दे।

लेकिन जिस तरह से कहा जाता है कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में कोई स्थाई मित्र या स्थाई दुश्मन नहीं होते हैं, केवल स्थाई हित मायने रखते हैं।

कौन हैं ये तातार मुस्लिम? जो रूस के यूक्रेन पर हमले से सिहर उठे हैं: कभी स्टालिन ने 15 मिनट में बँधवा दिया था बोरिया-बिस्तर

दुनिया को जिस बात का डर था, वह हो गया है। रूस ने यूक्रेन पर हमला कर दिया है, दुनिया के तमाम देशों की अपील को दरकिनार करते हुए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन पर हमले का आदेश दिया। रूसी सेना ने तबाही मचाना शुरू किया तो यूक्रेन का मंजर पूरी तरह से बदल गया। इस युद्ध से क्रीमियाई तातार मुस्लिम भी सिहर उठे हैं।

1991 में यूक्रेन द्वारा खुद को स्वतंत्र देश घोषित किए जाने के बाद यूक्रेन लौटे 53 वर्षीय क्रीमियाई तातार मुस्लिम एरफान कुडुसोव ने अलजजीरा से बात करते हुए कहा, “जब बुजुर्गों ने पहली बार हवाई जहाज से उतरकर यूक्रेन की जमीन पर कदम रखा तो उन्होंने यूक्रेन की धरती को चूम लिया। लोग खुशी से रो रहे थे। वो अपने घर लौट आए थे।”

कौन हैं तातार मुस्लिम 

तातार मुस्लिम मंगोलों के वंशज हैं। जिन्होंने कई सदियों तक क्रीमिया पर शासन किया था। जब 1783 में रूस की महारानी ‘कैथरीन द ग्रेट’ ने क्रीमिया पर कब्जा किया, तब उनकी हैसियत घटने लगी थी। तातार अपने ही मुल्क़ में दोयम दर्ज़े के हो गए। वर्ष 1991 में सोवियत संघ विघटित हुआ। यूक्रेन रुस के तत्कालीन राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की महत्वाकांक्षा की जद में रहा।

तातार मुस्लिमों के पलायन का इतिहास

इधर 1922 में जोसेफ स्टालिन सोवियत संघ का सर्वेसर्वा बन गया। क्रीमिया के तातार भी जोसेफ स्टालिन के निशाने पर थे। वो बस एक मौका चाहता था। ये मिला एक रिपोर्ट की शक्ल में। अप्रैल 1944 में सीक्रेट सर्विस का मुखिया लावरेन्त बेरिया एक फाइल लेकर स्टालिन से मिला। इसमें उन तातार मुस्लिमों की लिस्ट थी, जिन्होंने जर्मन सेना का सहयोग किया था। स्टालिन ने फाइल पर नजर डाली और एक क्रूर आदेश लिखा। 

इसके बाद जब तातार लोग नींद की आगोश में थे, अचानक उनके दरवाजे खटखटाए जाने लगे। लोग अवाक रह गए। स्टालिन का फरमान था कि 15 मिनट में सामान समेटो और घर छोड़ दो। इन 180,000 बेघर अभागे तातारों को मालगाड़ियों में पशुओं की तरह ठूँस दिया गया। हफ्तों का कठिन कष्टप्रद सफर। कई तो यात्रा के दौरान ही मर गए। पूरे क्रीमिया से करीब 2.30 लाख तातार मुस्लिमों को उज्बेक प्रांत, उराल अंचल और साइबेरिया ले जाया गया। बाद में कुछ तातार लौटे भी, लेकिन व्लादिमीर पुतिन के क्रीमिया में आने के बाद तातारों के बुरे दिन फिर लौट आए। 

मार्च, 2014 में जनमत संग्रह हुआ और सेवस्तोपोल समेत क्रीमिया को रूस शासित प्रांत घोषित कर दिया गया। उसी साल यूक्रेन में सत्ता परिवर्तन हुआ। 1991 में सोवियत संघ से आजाद होने के बाद ये पहला मौका था, जब यूक्रेन में रूस विरोधी सरकार बनी। वहाँ पर उठे विरोधी स्वर को देखते हुए 2014 में ही रूस ने यूक्रेन पर हमला बोला और क्रीमिया पर कब्जा कर लिया। इसके बाद हालात और बिगड़ने शुरू हो गए। तातार मुस्लिमों को क्रीमिया छोड़कर यूक्रेन भागना पड़ा। रुस की तरफ से युद्ध की शुरुआत करने के बाद अब उन्हें एक बार फिर से पलायन का डर सता रहा है। पिछले वर्षों में लाखों की संख्या में तातार पलायन कर चुके हैं और बड़ी संख्या में तातार प्रताड़ित, कत्ल या गिरफ्तार हुए हैं।