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भाजपा नेता कपिल मिश्रा और अनुराग ठाकुर के खिलाफ FIR की माँग वाली याचिका खारिज: ‘भड़काऊ’ भाषण का लगाया था आरोप

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने गुरुवार (24 फरवरी) को एक अभियोग आवेदन पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें साल 2020 में दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों (Delhi Anti Hindu Riot) के दौरान कथित भड़काऊ भाषण देने के वाले भाजपा के विभिन्न नेताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की माँग की गई थी। अदालत ने कहा कि इस याचिका को भविष्य के लिए लंबित नहीं रखा जाएगा।

अदालत शेख मुज्तबा फारूक द्वारा दायर एक लंबित मामले में एक वकील की ओर से दायर एक हस्तक्षेप आवेदन पर सुनवाई कर रही थी, जिसने भाजपा अधिकारियों अनुराग ठाकुर, कपिल मिश्रा, परवेश वर्मा और अभय वर्मा के खिलाफ FIR दर्ज करने और जाँच की माँग की थी।

याचिका दायर करने वाले वकील की ओर से अदालत में पेश होने वाले अधिवक्ता पवन नारंग के अनुसार, याचिकाकर्ता फारूक के पास याचिका दायर करने का अधिकार नहीं है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले में कहा गया है कि जो लोग पुलिस के पास भी नहीं गए हैं, उनकी जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया जाना चाहिए। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी की पीठ ने अभियोग आवेदन पर विचार करने से इनकार कर दिया।

हालाँकि, इस मामले में सोमवार (28 फरवरी) को सुनवाई होगी। अदालत 2020 के दिल्ली हिंदू विरोधी दंगों की स्वतंत्र एसआईटी जाँच की माँग करने वाली याचिकाओं के एक और समूह पर सुनवाई जारी रखेगी।

ध्यान देने वाली बात है कि पिछले साल दिसंबर में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट को उस लंबित याचिका पर ‘तीन महीने के भीतर’ तय करने के लिए कहा था, जिसमें भाजपा नेताओं कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर, परवेश वर्मा और अभय वर्मा के खिलाफ FIR दर्ज करने की माँग की गई थी। इस दंगे को 23 से 26 फरवरी 2020 के बीच पूर्वोत्तर दिल्ली में इस्लामवादियों द्वारा किए गए हिंदू विरोधी दंगों को अंजाम दिया गया था।

यहाँ बताना जरूरी है कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों की जाँच कर रही दिल्ली पुलिस ने जुलाई 2020 में दिल्ली उच्च न्यायालय को सूचित किया था कि उसे ‘कार्रवाई योग्य सबूत’ नहीं मिला है, जिससे पता चले कि इन नेताओं द्वारा इन दंगों में कोई भूमिका निभाई गई है।

दिल्ली दंगों के लिए बीजेपी नेता कपिल मिश्रा और अनुराग ठाकुर पर गलत आरोप

दिसंबर 2019 में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के पारित होने के बाद शुरू हुआ दिल्ली में सीएए विरोधी प्रदर्शन हिंसक हो गया। 24 फरवरी 2020 को राष्ट्रीय राजधानी की सड़कों पर भीड़ ने जमकर उत्पात मचाया था। उसके बाद वामपंथी मीडिया और लिबरल्स ने यह दावा करते हुए भाजपा नेता अनुराग ठाकुर और कपिल मिश्रा को फँसाने की कोशिश की कि इनके ‘भड़काऊ’ बयान के बाद ही दंगे भड़के।

दिलचस्प बात यह है कि वामपंथी मीडिया ने यह स्वीकार करने से पूरी तरह से इनकार कर दिया कि चार्जशीट में साफ तौर पर उल्लेख किया गया है कि कैसे मुस्लिम नेताओं और वामपंथियों ने 5 दिसंबर 2019 तक हिंसा की योजना बनाना शुरू कर दिया था और हिंदू विरोधी दंगों तक मुस्लिम भीड़ द्वारा हिंसा की घटनाओं को लगातार अंजाम दिया जा रहा था।

‘कल जुम्मा है, माई लॉर्ड हिजाब पहनने की इजाजत दें’: कर्नाटक बुर्का विवाद में HC में कुरान और हदीसों का दिया गया हवाला, शुक्रवार को फिर होगी सुनवाई

हिजाब विवाद पर कर्नाटक हाईकोर्ट में गुरुवार को 10वीं सुनवाई खत्म हो गई है। वहीं इस मामले में कल सुनवाई पूरी होने की उम्मीद है। आज कोर्ट में अपनी दलीलें पेश करते हुए हिजाब के समर्थन में वरिष्ठ वकील कामत ने कुरान और हदीसों का भी हवाला दिया। जैसे ही कोर्ट ने कहा कि कल ढाई बजे हम बाकी याचिकाकर्ताओं को सुनेंगे। वहीं एडवोकेट कुलकर्णी ने हस्तक्षेप करते हुए कहा, “कल जुम्मा है, माय लॉर्ड कृपया कल हिजाब पहनने की अनुमति दें।”

वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने अपने दलीलों में दावा किया कि राज्य सरकार ने ड्रेस कोड के संबंध में 5 फरवरी, 2022 के सरकारी आदेश के संबंध में सरकार ने 90 प्रतिशत अपना रुख छोड़ दिया था। वहीं कामत ने यह भी कहा कि पर्दा और बुर्का एक आवश्यक धार्मिक प्रथा नहीं है बल्कि हिजाब है। यह बात कहने के लिए मैंने निर्णय पेश किए हैं। लेकिन उत्तरदाताओं ने यह कहते हुए किसी निर्णय का हवाला नहीं दिया कि हिजाब एक आवश्यक धार्मिक प्रथा नहीं है।

कामत ने हिजाब का बचाव करते हुए, कुरान और हदीस का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा, हदीस कुरान के समान ही महत्त्व रखता है। अध्याय 12, के आयत नंबर 24, 31 में समझाया गया है कि कैसे आयशा भी इसे पहनती थीं (आयशा पैगंबर मुहम्मद की पत्नी है) ताकि शरीर, चेहरे, गर्दन और छाती पर पर्दा रखने के लिए …. (…) और उनके सर ढके हुए हों।”

कामत ने अपनी दलीलों में यह भी कहा कि हिजाब अरबी शब्द खिमार से निकला है.. यह एक घूंघट की तरह है.. जो सिर और छाती को ढकता है। आगे, शायरा बानो का फैसला कहता है कि कुरान में जो कुछ भी है उसका पालन किया जाना चाहिए।

दूसरी तरफ कर्नाटक पुलिस की सलाह के बावजूद हिजाब सुनवाई को लेकर भड़काऊ ट्वीट करने वाले एक्टर चेतन कुमार को गिरफ्तार किया गया है।

अब सिख लड़की को कहा, हटाएँ पगड़ी

वहीं अब बेंगलुरू के एक कॉलेज में सिख छात्रा को भी गड़ी उतारकर आने को कहा है। बेंगलुरू के माउंट कार्मेल पीयू कॉलेज ने एक अमृतधारी सिख छात्रा को कहा है कि वह कक्षा में पगड़ी पहनकर ना आए। कॉलेज ने इसको लेकर हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश का हवाला दिया है।

कर्नाटक में कॉलेजों में हिजाब बैन को लेकर चल रही बहस के बीच नया विवाद सामने आया है। बेंगलुरु के एक कॉलेज में 17 साल की अमृतधारी (बपतिस्मा प्राप्त) सिख लड़की को पगड़ी हटाने के लिए कहा गया। कॉलेज का कहना था कि उसे 10 फरवरी को दिए गए हाई कोर्ट के आदेश का पालन करना होगा, जिसमें समान ड्रेस कोड की बात कही गई है। बता दें कि कर्नाटक हाई कोर्ट के आदेश में छात्रों को भगवा शॉल, हिजाब और धार्मिक झंडे या इस तरह के किसी धार्मिक परिधानों को कॉलेजों की कक्षाओं में पहनने से रोकता है।

हिजाब के लिए CFI भड़का रहा है छात्राओं को

वहीं कल बुधवार को हुई सुनवाई में वकील नागानंद ने कोर्ट को बताया कि सीएफआई के लोग कॉलेज में हिजाब को अनुमति दिलवाना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि साल 2004 में कॉलेजों में यूनिफॉर्म को अनिवार्य किया गया था। तब से वही यूनिफॉर्म कॉलेज में पहनी गई। लेकिन अब सीएफआई हिजाब के लिए लोगों को भड़का रहा है। उन्होंने बताया कि सीएफआई ने कुछ शिक्षकों को भी इतना धमकाया है कि वो एफआईआर करने से डर रहे हैं।

भेदभाव मिटाने के लिए तय होती है यूनिफॉर्म

कल की सुनवाई में वरिष्ठ वकील साजन पोवैया ने सीडीसी के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की ओर से कहा कि वो नागानंद द्वारा कही गई हर बात से सहमत हैं। उन्होंने अनुच्छेदों का उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य किसी को ये नहीं कह सकता कि वो मुस्लिम क्यों है, लेकिन राज्य किसी पहनावे पर प्रतिबंध लगा सकता है। पोवैया ने बताया कि भेदभाव मिटाने के लिए यूनिफॉर्म तय की जाती है। उन्होंने पूछा कि क्या अगर हिजाब पहनने से किसी को रोका जाए तो इसका अर्थ ये है कि मजहब में बदलाव किया जा रहा है या ये है जो हिजाब नहीं पहनते हैं वो मजहब नहीं मानते? कोई मुस्लिम बच्चा हिजाब पहनेगा और हिंदू भगवा स्कॉर्फ तो ये दोनों ही चीजें ठीक नहीं हैं। आर्टिकल 25 मजहब को मानने का अधिकार देता है। मजहबी पोषाक पहनने का नहीं। उन्होंने कहा कि वह छात्रों को फिजिक्स, केमेस्ट्री और ज्योग्राफी नहीं पढ़ाते हुए ये नहीं कह सकते हैं कि वो लोग मजहबी कपड़ों में आएँ। स्कूलिंग सिर्फ शैक्षिक ही नहीं बल्कि पूरे विकास से संबंधित है।

कॉन्ग्रेस के राजस्थान में राजीनामे का दबाव ऐसा कि जिसकी 5 साल की बच्ची से रेप, उसको ही छोड़ना पड़ा गॉंव

कॉन्ग्रेस शासित राजस्थान महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में देश के शीर्ष राज्यों में है। हालत ऐसी है कि फरियाद लेकर पुलिस थाने आई महिला से रेप करने का मामला भी सामने आ चुका है। अब इसी राजस्थान से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें पीड़ित परिवार पर राजीनामे का लिए इतना दबाव बनाया गया कि वह गाँव छोड़कर जाने को विवश हो गया।

भरतपुर के चिकसाना थाना क्षेत्र के इस पीड़ित परिवार की एक 5 साल की बच्ची के साथ 22 फरवरी 2022 को रेप किया गया। आरोपित शराबी और गाँव का ही है। बताया जाता है कि शौच के लिए खेत गई बच्ची से उसने दुष्कर्म किया। बच्ची को खोजने आई माँ को देखकर आरोपित भाग निकला। हालॉंकि बाद में पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

घर आकर पीड़िता की माँ ने बेटी से घटना की जानकारी ली। बच्ची ने आरोपित का नाम बताया। बच्ची के परिवार वाले आरोपित के घर शिकायत ले कर गए तो उन्हें ही उल्टे गाली-गलौज दे कर भगा दिया गया। आखिरकार पीड़ित परिवार ने आरोपित के विरुद्ध चिकसाना थाने में FIR दर्ज करवाई।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक घटना के बाद पीड़ित परिवार पर लगातार समझौते का दबाव बनाया गया। इसके चलते पीड़िता का परिवार गाँव छोड़ कर कहीं चला गया है। फ़िलहाल बच्ची का मकान खाली पड़ा है। चिकसाना के SHO के मुताबिक, “बच्ची का मेडिकल परीक्षण करवाया गया है। आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है।”

जो भी लड़ना चाहेंगे सबको देंगे हथियार: यूक्रेन के राष्ट्रपति का ऐलान, रूसी हमले के बाद 18000 भारतीय भी फँसे

रूस यूक्रेन पर हमला कर चुका है औऱ वह लगातार एक-एक कर उसके शहरों पर हमले करके उन्हें अपने कब्जे में ले रहा है। रसियन फोर्सेस ने यूक्रेन के हथियार कारखाने को नष्ट कर दिया है। इस हमले के बाद अब देश के राष्ट्रपति व्लदिमीर ज़ेलेंस्की ने अपने नागरिकों से भी देश की रक्षा के लिए हथियार उठाने की अपील की है।

उन्होंने एक ट्वीट में कहा के वो उन सभी लोगों को हथियार देंगे जो आगे आकर यूक्रेन की रक्षा के लिए लड़ना चाहेंगे। उन्होंने लोगों से शहरों के चौकों में यूक्रेन का समर्थन करने के लिए तैयार रहने को कहा है।

अपने दूसरे ट्वीट में ज़ेलेंस्की ने कहा कि उनकी सरकार क्षेत्रीय रक्षा के हिस्से के रूप में देश की रक्षा में हथियार उठाने वाले किसी भी नागरिक के खिलाफ प्रतिबंधों को हटाएगी।

इससे पहले यूक्रेन ने रूस के हमले के बाद उसके साथ सभी तरह के संबंधों को तोड़ने का ऐलान किया था। गौरतलब है कि रूस यूक्रेन के लगभग सभी प्रमुख शहरों में बड़े पैमाने पर हमले कर रहा है। हालाँकि, बावजूद इसके वो लगातार नागरिकों पर हमले करने की बात से इनकार कर रहा है औऱ यह दावा कर रहा है कि वो केवल यूक्रेनी सैन्य प्रतिष्ठानों को टार्गेट कर हमले कर रहा है।

हमले से पहले रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन के सैनिकों को सरेंडर करने के लिए कहा था।

कई लोग मारे गए

रिपोर्ट के मुताबिक, रूस के हमले में यूक्रेन के अब तक 40 सैनिकों के मारे जाने की खबर है। जबकि इस हमले में 10 नागरिकों के भी मारे जाने की खबर है। वहीं यूक्रेन ने भी रूस के 50 सैनिकों और 6 फाइटर जेट्स और टैंकों को तबाह करने का दावा किया है।

इस बीच यूक्रेन में भारत के दूतावास ने ये भी स्पष्ट कर दिया है कि रूसी हमले के बीच भी एम्बेसी को बंद नहीं किया जाएगा। भारत सरकार वहाँ फंसे 18000 लोगों को लगातार वहाँ से निकालने की कोशिश कर रही है।

दिल्ली पुलिस ने पकड़े 13 आतंकवादी, 2 को पाकिस्तान में मिली थी ट्रेनिंग: ‘सेफ सिटी प्रोजेक्ट’ के तहत CCTV बनेगा पहरेदार

दिल्ली पुलिस ने 24 फरवरी 2022 (गुरुवार) को अपनी सालाना प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान दिल्ली के पुलिस कमिश्नर राकेश अस्थाना ने आतंकवाद, अपराध, हिंसा, साइबर क्राइम से जुड़े अपराधों पर की गई कार्रवाई की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दिल्ली पुलिस ने साल 2021 में 13 आतंकवादियों को पकड़ा। इनमें से दो को पाकिस्तान में आईएसआई ने ट्रेनिंग दी थी। इनके नाम ओसामा और ज़ीशान कमर हैं। इसके अलावा एक पाकिस्तानी मूल के आतंकवादी मोहम्मद अशरफ को भी गिरफ्तार किया गया है। वह भारत में अली अहमद नूर के नाम से रहकर स्लीपर सेल तैयार करने में जुटा था। दिल्ली पुलिस ने खालिस्तान कमांडो फ़ोर्स (KCF) और कुकी नेशनल फ्रंट (KNF) के आतंकियों को भी पकड़ा है।

अस्थाना ने साइबर क्राइम को नेशनल सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताते हुए कहा कि दिल्ली पुलिस की साइबर सेल को 1,15,2013 कॉल मिले। इनमें से 24,219 फाइनेंसियल फ्रॉड के थे। इन मामलों में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने 4.31 करोड़ रुपए फ्रीज किए।

बच्चों की सुरक्षा से जुड़े अभियानों की जानकारी देते हुए दिल्ली पुलिस ने बताया, “दिल्ली पुलिस के विभिन्न थानों में कुल 187 केस दर्ज किए गए। ये सभी बाल अपराध से जुड़े हुए थे। इन सभी में प्रभावी पैरवी और कार्रवाई की गई। इस कार्रवाई में कुल 127 आरोपितों की गिरफ्तारी की गई है। इसी के साथ ऑनलाइन अभियान चला कर इन अपराधों के प्रति लोगों को सजग किया गया।”

महिला अपराधों की रोकथाम के लिए पिंक बूथ

दिल्ली पुलिस के मुताबिक महिलाओं के प्रति अपराधों को रोकने के लिए पिंक बूथ की स्थापना की गई। इन बूथों में महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। यहाँ से महिलाओं को एमरजेंसी नंबर 1090 के प्रति भी जागरूक किया जा रहा। अब तक कुल 48 पिंक बूथ स्थापित किए गए हैं। बाकी अन्य की स्थापना पर तेजी से काम चल रहा है। इन बूथों पर जाने वाली महिलाओं को पुलिस स्टेशनों में भागदौड़ करने की जरूरत नहीं है।

पूरी दिल्ली पर नजर रखने की तैयारी

दिल्ली पुलिस ने बताया, “CCTV कैमरों के माध्यम से पूरी दिल्ली पर नजर रखने की तैयारी है। फिलहाल दिल्ली में 15215 CCTV कैमरों से दिल्ली पुलिस हर संदिग्ध हरकत पर नजर रख रही है। अब इसमें 10000 कैमरे और जोड़े जाएँगे। इसे ‘सेफ सिटी प्रोजेक्ट’ का नाम दिया गया है। इस से लॉ एन्ड आर्डर, ट्रैफिक और किसी विषम स्थिति को सुधारने में मदद मिलेगी।”

इसी के साथ दिल्ली पुलिसकर्मियों के परिवारों के लिए चल रही योजनाओं, साइबर अपराध पर रोकथाम के आँकड़े, गुमशुदा बच्चों की खोजबीन, पुलिसकर्मियों के स्वास्थ्य की जाँच, क्षेत्रीय और संगठित अपराधों पर की गई कार्रवाई की जानकारी भी साझा की गई। पुलिस और पब्लिक के बीच संवाद और सुधारने की दिशा में भी जोर दिया गया।

महाभारत और चाणक्य का हवाला दे यूक्रेन की PM मोदी से गुहार, कहा- पुतिन आपके दोस्त, उनसे हमारे राष्ट्रपति जेनेंस्की की बात करवा दीजिए

रूस ने यूक्रेन पर हमला कर दिया है। राजधानी कीव सहित यूक्रेन के सैन्य प्रतिष्ठानों और हवाई अड्डों पर भी धमाके की खबरें हैं। ऐसे संकट में यूक्रेन ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप के लिए अनुरोध किया है। रूस के हमले से थर्राए यूक्रेन ने चाणक्य और महाभारत का जिक्र कर भारत से मदद की गुहार लगाई है। यूक्रेन के राजदूत ने कहा कि मुझे नहीं पता कि दुनिया के कितने नेताओं को पुतिन गंभीरता से लेते हैं लेकिन मोदी जी का स्टेटस अलग है। उनकी बात पुतिन को सुननी चाहिए। हम भारत सरकार से ऐसे कदम की उम्मीद लगाए हैं।

नई दिल्ली में तैनात यूक्रेन के राजदूत डॉ इगर पोलिखा (Dr Igor Polikha) ने पीएम मोदी से इस मामले में मदद माँगी है। यूक्रेन के राजदूत ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ब्लादिमीर पुतिन से दोस्ती का रिश्ता है। वह स्थिति को और बिगड़ने से बचाने में अहम रोल निभा सकते हैं। यूक्रेन के राजदूत इगर पोलिखा ने कहा, “हमारी पीएम मोदी से अपील है कि वह तुरंत रूसी राष्ट्रपति पुतिन और हमारे राष्ट्रपति जेनेंस्की के बीच बात करवाएँ।”

दरअसल, रूस-भारत के दशकों पुराने मजबूत संबंध और पीएम मोदी की रूस के राष्ट्रपति पुतिन के साथ घनिष्ठता देख यूक्रेन चाहता है कि वह इस युद्ध को रोकने के लिए आगे आएँ। भारत में यूक्रेन के राजदूत इगर पोलिखा (Dr Igor Polikha) ने कहा कि महाभारत को याद कीजिए। महाभारत के युद्ध से पहले भी शांति की कई कोशिशें हुई थीं। दुर्भाग्य से महाभारत में शांति की वह कोशिशें सफल नहीं हो सकी थीं, लेकिन मुझे उम्मीद है कि इस मामले में ऐसी बातचीत सफल रहेगी।

उन्होंने कहा, “यूक्रेन भारत की तरह लोकतांत्रिक देश है। मैं भारत में राजदूत हूँ। हमारे लिए भारत स्पेशल है। भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनना चाहता है। भारत दुनिया में काफी प्रभावशाली देश है।” उन्होंने चाणक्य का जिक्र करते हुए कहा, “मैंने आपका इतिहास पढ़ा है। यहाँ चाणक्य 2400 साल पहले हुए। जब यूरोप में कोई सभ्यता नहीं थी, यहाँ भारत में विद्वान हुए।”

यूक्रेन के राजदूत ने कहा, “हमारे पास पुष्ट जानकारी है कि कई यूक्रेनियन सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमले हुए हैं। बम और मिसाइल हमलों से सैन्य हवाई अड्डों, सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया है। कुछ हमले राजधानी के उपनगरीय इलाके में भी हुए हैं। कुछ हमले यूक्रेन की सीमा में काफी अंदर भी हुए हैं। हालात काफी बदल चुके हैं। आखिर तक हमारे राष्ट्रपति रूस के साथ द्विपक्षीय बातचीत के लिए कहते रहे लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। आज सुबह 5 बजे से यह आक्रामक कार्रवाई शुरू हुई।”

क्या है भारत का स्टैंड

भले ही यूक्रेन के राजदूत की तरफ से पीएम मोदी से मदद की गुहार लगाई गई है, लेकिन भारत का इस पूरे मामले पर न्यूट्रल रुख है। भारत ने अभी तक किसी भी पक्ष की तरफ से नहीं बोला है। साथ ही पीएम मोदी ने भी अब तक इस घटनाक्रम को लेकर कोई ट्वीट या सन्देश नहीं दिया है। साथ ही विदेश राज्य मंत्री की तरफ से भी साफ किया गया कि यूक्रेन मामले पर फिलहाल हम न्यूट्रल हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि, शांति बनाए रखने के लिए कोशिशें जारी रहनी चाहिए।

गौरतलब है कि यूक्रेन की राजधानी कीव समेत कई जगह हुए धमाकों के बाद यूक्रेन में मार्शल ला लगा दिया गया है। इतना ही नहीं यूक्रेन ने दावा किया है कि उन्होंने 5 रूसी विमानों और एक रूसी हेलीकाप्टर को मार गिराया है। साथ ही यूक्रेन ने दावा किया है कि उनके हमले में 50 रूसी सैनिक भी मारे गए हैं। वहीं यूक्रेन के भी 40 सैनिक और 10 सिविलियन के मारे जाने की खबर भी सामने आई है।

कनाडा में भारतीय मूल के रेडियो होस्ट पर हमला, दीप सिद्धू के प्रार्थना सभा में खालिस्तानी झंडे और भारत विरोधी नारे का किया था विरोध

कनाडा (Canada) में भारतीय मूल के रेडियो होस्ट दीपक पुंज को खालिस्तान (Khalistan) का विरोध करना भारी पड़ गया है। खालिस्तान की आलोचना करने के कारण बुधवार (23 फरवरी 2022) को उन पर ग्रेटर टोरंटो एरिया में हमला किया गया। दीपक पुंज ‘फ्रंटलाइन रेडियो’ में पंजाबी भाषा के टॉक शो को होस्ट करते हैं। पुंज ने अपने शो में रविवार (20 फरवरी 2022) को ब्रैम्पटन (कनाडा) में घटी एक घटना की आलोचना की थी, जहाँ पर खालिस्तानी झंडे फहराए गए थे और भारत विरोधी नारेबाजी की गई थी।

शो करने के अगले दिन बुधवार को पुंज अन्य दिनों की भाँति ही अपनी स्टूडियो वाली बिल्डिंग की तरफ जा रहे थे। तभी तीन अज्ञात लोगों ने उन पर हमला कर दिया। हमलावरों ने उन पर तमंचा और खाली शराब की बोतल से वार किया। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, हमलावरों ने वारदात से पहले उनसे पूछा कि क्या उन्होंने इस विषय पर कोई शो किया है और इसके बाद हमला कर दिया। इस दौरान हमलावर अंग्रेजी और पंजाबी में बात कर रहा था।

पुंज ने घटना की सूचना स्थानीय कानून प्रवर्तन को दी। इसके साथ ही उन्होंने पुलिस को उस गाड़ी की लाइसेंस प्लेट के अंतिम तीन नंबर भी दिए, जिसमें हमलावर सवार होकर आए थे। फिलहाल पुलिस घटना की जाँच कर रही है। रेडियो होस्ट पुंज ने कहा, “मुझे इसलिए परेशान किया जा रहा है, क्योंकि मैं पंजाब से हूँ और मैं खालिस्तान का विरोध करता हूँ।”

गौरतलब है कि पंजाबी एक्टर दीप सिद्धू (Deep Sidhu) की मौत के बाद उनके लिए कनाडा (Canada) में आयोजित की गई प्रार्थना सभा में खालिस्तानी झंडों (Khalistani Flag) के साथ भारत विरोधी नारे लगाए गए थे। हैरानी की बात है कि ग्रेटर टोरंटो में हुए इस कार्यक्रम में स्थानीय मेयर भी शामिल हुए थे। इस पूरे मामले पर भारत ने चिंता व्यक्त की थी और कनाडा सरकार को इस बारे में अवगत कराया था। भारत सरकार की चिंता अलगाववादी खालिस्तान आंदोलन के झंडों के बीच मेयर ब्राउन के भाषण को लेकर थी। दीपक पुंज ने भी इसी की आलोचना की थी। 

हाल ही में एक सड़क हादसे में दीप सिद्धू की मौत हो गई थी। केंद्र की मोदी सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों के विरोध में हुए किसान आंदोलन का वह प्रमुख चेहरा थे। 26 जनवरी 2021 के दिन निकाली गई ट्रैक्टर परेड के दौरान लाल किले पर व दिल्ली के अंदर हुई हिंसा के मामले में दीप सिद्धू का नाम था। इस मामले में वह मुख्य आरोपित थे और उन्हें जेल जाना पड़ा था। उनके अंतिम संस्कार में भी ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगे थे।

‘गोरखपुर में BSP कार्यकर्ता को जलाया’: बिहार की फोटो दिखाकर BJP को कर रहे थे बदनाम, UP पुलिस ने बताया सच

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों (Uttar Pradesh Assembly election 2022) के बीच प्रदेश में भाजपा (BJP) की छवि को धूमिल करने के लिए फेक इमेज सोशल मीडिया पर वायरल की जा रही है। दावा किया जा रहा है कि यह इमेज गोरखपुर में एक बसपा (BSP) कार्यकर्ता का है, जिसे भाजपा को वोट नहीं देने के कारण जिंदा जला दिया गया। उत्तर प्रदेश पुलिस (UP Police) की फैक्ट चेक टीम ने इसे फर्जी बताया है।

यूपी पुलिस ने बताया कि वायरल तस्वीर गोरखपुर की नहीं, बल्कि बिहार की है। यूपी पुलिस ने बताया कि फेक न्यूज फैलाने के मामले में गोरखपुर पुलिस ने यूजर के खिलाफ केस दर्ज किया है। इसके साथ ही पुलिस ने लोगों से फर्जी खबरें नहीं फैलाने की अपील की गई है।

इस घटना को लेकर गोरखपुर पुलिस ने ट्वीट कर कहा, “ऐसी कोई घटना नहीं हुई। गोरखपुर पुलिस ऐसे भ्रामक पोस्ट को खारिज करती है। सोशल मीडिया पर फर्जी खबरें फैलाने वालों के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू कर दी गई है।”

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही फेक न्यूज

इस तस्वीर के माध्यम से भाजपा को दोषी ठहराते हुए सोशल मीडिया पर लगातार फेक न्यूज फैलाई जा रही है कि गोरखपुर में भाजपा को वोट नहीं देने पर बसपा के एक कार्यकर्ता को जिंदा जला दिया गया। विक्रम सिंह बदलापुर नाम के एक ट्विटर यूजर ने लिखा, “आज गोरखपुर में एक बसपा समर्थक को जिंदा जला दिया गया। पुलिस जबरन मामला शांत करा रही है। इसका सिर्फ इतना कसूर था कि जब एक बीजेपी नेता ने पूछा कि वोट किसे दोगे तो दलित ने बोला- हम बसपा को वोट देंगे। ये मामला गोरखपुर ग्रामीण के नारायणपुर गाँव का है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं दी गई। इसकी निष्पक्ष जाँच हो।” हालाँकि, बाद में ट्विटर ने नियमों का उल्लंघन करार देते हुए उसकी पोस्ट को डिलीट कर दिया।

फिलहाल इस पोस्ट को हटा दिया गया है।

ऐसा नहीं है कि इस तरह की फेक न्यूज को केवल विक्रम ने ही वायरल किया था। खबर लिखे जाने तक इस तरह के 6 और ट्वीट थे। इनमें से दो को गोरखपुर पुलिस ने फर्जी खबर नहीं फैलाने को लेकर चेताया था।

साभार: ट्विटर
साभार: ट्विटर
साभार: ट्विटर

फेक न्यूज की सच्चाई

जिस न्यूज को सोशल मीडिया पर वायरल कर उसे गोरखपुर का बताया जा रहा है, वह बिहार के समस्तीपुर जिले की एक घटना की तस्वीर है। समस्तीपुर में जेडीयू के एक नेता की हत्या कर उसे जला दिया गया था। बाद में पुलिस ने कल्याणपुर थाना क्षेत्र के बूढ़ी गंडक नदी के पास स्थित वासुदेवपुर गाँव में एक सुनसान घर से जला हुआ शव बरामद किया था। मृतक की पहचान जेडीयू नेता 34 वर्षीय मोहम्मद खलील आलम रिजवी के रूप में हुई थी। ये वारदात मुशरीघरारी थाना क्षेत्र के ग्राम हुदिया की है। इसको लेकर साम्प्रदायिक एंगल देने की कोशिश की कोशिश भी की गई थी, लेकिन बिहार पुलिस ने इस प्रोपेगेंडा का भांडाफोड़ कर दिया था।

स मामले में अधिक जानकारी के लिए ऑपइंडिया ने गागाहा पुलिस स्टेशन से संपर्क की कोशिश की, लेकिन संपर्क नहीं हो सका।

‘WhatsApp ग्रुप में मैसेज के लिए एडमिन जिम्मेदार नहीं’: केरल हाईकोर्ट ने कहा- एडमिन और सदस्यों के बीच मालिक-नौकर का संबंध नहीं

केरल हाईकोर्ट (Kerala High Court) ने बुधवार (23 फरवरी) को एक फैसले में कहा है कि व्हाट्सएप ग्रुप में किसी अन्य सदस्य द्वारा आपत्तिजनक मैसेज भेजने पर ग्रुप एडमिन सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं माना जाएगा। न्यायालय के अनुसार, ग्रुप एडिमन का अधिकार किसी को सदस्य के रूप में जोड़ने या निकालने तक सीमित है। किसी के द्वारा उसमें क्या पोस्ट किया जा रहा है, ये एडमिन के नियंत्रण से बाहर है।

दरअसल, न्यायालय मार्च 2020 के एक मामले में सुनवाई कर रहा था, जिसमें फ्रेंड्स नाम के एक व्हाट्सएप ग्रुप में एक ग्रुप मेंबर द्वारा बच्चों के अश्लील वीडियो शेयर कर दिए गए थे। इसमें ग्रुप के को-एडमिन को भी पुलिस ने आरोपित बनाया गया था। इसके बाद को-एडमिन ने केरल हाईकोर्ट की शरण ली थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2020 में फ्रेंड्स नाम के व्हाट्सएप ग्रुप में 2 एडमिन में से एक ने बच्चों की अश्लीलता से जुड़े वीडियो शेयर किए थे। इस मामले में वीडियो शेयर करने वाले के खिलाफ पुलिस ने IT एक्ट अधिनियम, 2000 की धारा 67 बी (ए), (बी) और (डी) और यौन अपराध से बच्चों के संरक्षण अधिनियम (POCSO) की धारा 13, 14 और 15 के तहत FIR दर्ज की थी। पुलिस ने दोनों एडमिन को मामले में आरोपित बनाया था।

न्यायाधीश ने आगे कहा, “ऐसा कोई भी कानून नहीं है, जिसके तहत एडमिन को किसी अन्य सदस्य द्वारा भेजे गए मैसेज का जिम्मेदार ठहराया जा सके। एडमिन किसी संदेश को प्राप्त या प्रसारित नहीं करता। संदेश भेजने वाले और एडमिन के बीच कोई मालिक-नौकर का रिश्ता नहीं होता। किसी के द्वारा भेजे गए संदेश को सेंसर करना भी एडमिन के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।”

न्यायाधीश के मुताबिक, “यह साबित नहीं हो पाया कि याचिकाकर्ता ने अश्लील सामग्री को प्रकाशित या प्रचारित किया था। साथ ही यह भी तय नहीं हो पाया कि याचिकाकर्ता ने इसे इंटरनेट से खोजा या डाउनलोड किया हो। याचिकाकर्ता किसी अपराध में सीधे तौर पर साबित होता नहीं दिख रहा।”

इसी के साथ याचिकाकर्ता पर चल रही करवाई को निरस्त कर दिया गया। इस मामले की सुनवाई जस्टिस जस्टिस कौसर एडप्पागथ ने की। याचिकाकर्ता की तरफ से एडवोकेट अनिल कुमार एम शिवरामन और सी चंद्रशेखरन ने बहस की। वहीं, सरकार की तरफ से एमके पुष्पलता ने पक्ष रखा।

बलिदानी पिता की याद में बच्चों ने सजा दी दीवारें, पर नेताओं ने पूरे नहीं किए वादे: रतन लाल की पत्नी को केजरीवाल ने नहीं दी नौकरी

दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों के दौरान 24 फरवरी 2020 को भीड़ ने मौजपुर इलाके में पुलिस पर हमला किया था। इसी हमले में बलिदान हो गए थे दिल्ली पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल। 42 वर्ष की आयु में बलिदान हुए रतन लाल दिल्ली के बुराड़ी स्थित अमृत विहार में अपने परिवार के साथ रहते थे।

आज भी रतन लाल का परिवार अमृत विहार के उसी घर में रहता है। दो साल बाद जब हम इस परिवार से मिलने अमृत विहार पहुँचे तो घर के बाहर निर्माण कार्य चल रहा था। सड़कें खुदी हुई थी। ऊबड़-खाबड़ रास्ते से गुजर जब हमने दो कमरे के उस मकान में प्रवेश किया तो उसकी दीवारें बलिदानी रतन लाल के चित्रों से सजी हुईं थी। हमें बताया गया बच्चों ने अपने पिता की याद में ये बनाए हैं।

घर के हर हिस्से में रतन लाल की तस्वीरें

केजरीवाल ने नहीं पूरा किया नौकरी का वादा

बलिदानी रतन लाल की पत्नी पूनम ने ऑपइंडिया को बताया, “मैं नहीं चाहती कि उन पुराने दिनों को याद करूँ। बहुत मुश्किल से मैं उन घटनाओं की याद से उबरने का प्रयास कर रही हूँ। जैसे-तैसे अब मैंने अपने बच्चों के लिए खुद को सँभाला है। सरकार ने जो वादे किए थे उनमे से कई अब तक पूरे नहीं हुए हैं। दिल्ली सरकार से एक करोड़ रुपए दो हिस्सों में मिले। अन्य कई लोगों ने भी उस समय कई वादे किए थे जो पूरे नहीं हुए। बुराड़ी में इनके (रतन लाल) के नाम से सड़क पर गेट बनवाने को बोला गया था पर वो भी नहीं हुआ। केजरीवाल (दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल) ने भी शिक्षा के हिसाब से 1 महीने में नौकरी देने को कहा था। पर वो भी नहीं हुआ।”

दिल्ली पुलिस ने विपत्ति में दिया साथ

पूनम ने आगे बताया, “दिल्ली पुलिस ने बहुत मदद की है। नए DCP साहब संजय सिंह ने भी मेरी काफी मदद की है। DCP साहब ने इनके (रतन लाल) नाम से पिछले 15 अगस्त को मेडल भी निकाला है। इस मेडल को CP साहब (पुलिस कमिश्नर दिल्ली) ने भी अप्रूव कर दिया है। अब दिल्ली में पुलिस वालों को इनके नाम से मेडल दिए जाएँगे। ये जानकर ख़ुशी होती है। अभी उनके नाम को बहुत मान-सम्मान मिला है। लेकिन जो ‘शहीद’ का सर्टिफिकेट बोला गया था वो अभी तक नहीं मिला है। गैलेंट्री अवार्ड 15 अगस्त को तो दिया गया है, लेकिन उसके फायदे नहीं मिल रहे हैं। उसका अभी तक एप्रूवल नहीं हुआ है। फैमिली जैसे-तैसे चल रही है। घर का सदस्य चला जाता है तो पता ही है कि कैसे चलता है।”

बेटे को भी भेजेंगी दिल्ली पुलिस में

पूनम ने आगे बताया, “उनकी (रतन लाल) पेंशन से घर का खर्च चल रहा है। मैं कहीं नौकरी नहीं कर रही हूँ। घर पर रह कर बच्चों का ध्यान रखना सबसे ज्यादा जरूरी है मेरे लिए। दिल्ली पुलिस ने एक नौकरी दी है। उस नौकरी को मैंने अपने बेटे के लिए सुरक्षित रखी है। जब वो 18 साल का होगा तब भर्ती होगा। अभी बेटा 11 साल का है और कक्षा 5 में है। मेरी बड़ी बेटी क्लास 9, छोटी बेटी क्लास 7 में है।”

‘अभिनंदन ने इनके जैसी मूँछें रखी होंगी’

बलिदानी रतन लाल की मूँछे विंग कमांडर अभिनंदन जैसी होने की बात पर उनकी पत्नी पूनम ने बताया, “इनकी (रतन लाल) मूँछें अभिनंदन के पहले से थीं। इन्होने 2007 से ही मूँछें रख ली थीं। बनने में कुछ समय लगा भी था। ये कह सकते हैं कि अभिनंदन ने इनके जैसी मूँछें रखी होंगी।”

गोली वाली वीडियो डिलीट

पूनम ने बताया, “24 फ़रवरी 2020 को ही GTB अस्पताल में पता चल गया था कि उन्हें (रतन लाल) गोली लगी है। ये तमाम न्यूज़ में आ भी चुका था। वीडियो भी आई थी यूट्यूब पर। मेरी गलती थी कि मैंने उसे सेव नहीं किया। गोली लगने वाली वो सारी वीडियो यूट्यूब से गायब हो चुकीं हैं। मैंने काफी खोजा पर मुझे अब मिल नहीं रही।”

सरकार से पेंडिंग घोषणाएँ पूरी करने की मॉंग

पूनम ने ऑपइंडिया के माध्यम से सरकार से लंबित घोषणाओं को पूरा करने की माँग की है। उन्होंने कहा, “शुक्रगुजार हूँ कि मुझे जेपी नड्डा का प्रशस्ति पत्र आया। लेकिन उनके वादे अभी पूरे नहीं हुए। मैं 16 दिसंबर 2021 को अपनी माँगों को लेकर अमित शाह जी से मिली थी। तब उन्होंने मुझे माँगों के पूरा होने का आश्वासन दिया था। अभी तक शहीद के दर्जे का कोई लिखित सर्टिफिकेट नहीं दिया गया है। केंद्र सरकार ने भी ₹1cr (1 करोड़) के लिए कहा था। उसका अभी भी कुछ नहीं हुआ।”

राजस्थान के रहने वाले थे रतन लाल

रतन लाल साल 1998 बैच के सिपाही थे। हमले के समय वो ACP कार्यालय गोकुलपुरी में तैनात थे। मूल रूप से वो राजस्थान के सीकर के रहने वाले थे। उनके गाँव का नाम तिहावली है। उनका दिल्ली के बुराड़ी स्थित अमृत विहार में खुद का घर है। उसके 2 बेटियाँ और 1 बेटा है। तीनों बच्चे फिलहाल पढ़ाई कर रहे हैं।

24 फरवरी 2020 को दिल्ली के उत्तर पूर्वी इलाके मौजपुर में भीड़ ने वहाँ तैनात पुलिसकर्मियों पर अचानक ही हमला कर दिया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक रतन लाल की मृत्यु गोली लगने से हुई थी। रतन लाल पर हुए हमले का वीडियो भी सोशल मीडिया में काफी वायरल हुआ था।

इस हमले में पुलिस ने सलीम मलिक उर्फ मुन्ना, मोहम्मद जलालुद्दीन उर्फ गुड्डू भाई, मोहम्मद अयूब, मोहम्मद यूनुस, आरिफ, मोहम्मद दानिश और मोहम्मद सलीम खान को गिरफ्तार किया था। चार्जशीट में कुल 17 आरोपित थे। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 12 मार्च 2020 को संसद में जानकारी दी थी कि रतन लाल केस के सभी आरोपितों को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।