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‘इस्लाम के लिए खतरनाक है पद्मासन और श्वानासन’: कुवैत की सरकार ने योग शिविर को रोका, मुल्ला-मौलवियों के खिलाफ सड़क पर महिलाएँ

कुवैत की सरकार ने योग से जुड़े एक कार्यक्रम को रद्द कर दिया, जिसके बाद बड़ी संख्या में महिलाएँ इस्लामी कट्टरपंथियों के खिलाफ सड़क पर उतर गई हैं। शेखों द्वारा शासित इस क्षेत्र में महिलाएँ अपने अधिकारों के लिए एक प्रकार का सांस्कृतिक युद्ध लड़ रही हैं। हाल ही में एक योग शिक्षक ने महिलाओं के लिए योग से जुड़े एक कार्यक्रम का विज्ञापन दिया, जिसके बाद यहाँ के मुल्ला-मौलवी इसे इस्लाम का अपमान बता रहे हैं। इसके बाद सरकार ने इस ‘योग रिट्रीट’ को प्रतिबंधित कर डाला।

पद्मासन और श्वानासन जैसी मुद्राओं को यहाँ के लोग इस्लाम के लिए खतरनाक बता रहे हैं। रेगिस्तान में योग शिविर का कार्यक्रम रद्द होने के बाद महिलाओं में आक्रोश है। कुवैत ने नेताओं ने भी मुल्ला-मौलवियों के डर से इसके खिलाफ बयान दिए। इस इस्लामी मुल्क में पुरुषों का वर्चस्व है। यहाँ के कट्टरपंथी कह रहे हैं कि महिलाएँ ये सब कर के देश की संस्कृति पर हमला बोल रही हैं। कुवैत में महिला अधिकारों की एक्टिविस्ट नजीबा हयात का कहना है कि कट्टरपंथियों की इन हरकतों से मुल्क पीछे जा रहा है।

कुवैत के संसद के बाहर जिन महिलाओं ने विरोध प्रदर्शन किया, उसमें मुख्य नामों में वो भी शामिल थीं। कुवैत में महिलाओं को ज्यादा अधिकार ही नहीं दिए गए हैं। सऊदी अरब और ईराक जैसे कट्टर इस्लामी मुल्कों की महिलाओं के पास भी कुवैत से ज्यादा अधिकार हैं। जनवरी 2022 में सऊदी अरब में पहली बार ‘ओपन एयर योग फेस्टिवल’ आयोजित हुआ था। एबालिश 153 नाम के संगठन की संस्थापक अलानौद अलशारेख का कहना है कि महिलाएँ यहाँ पहले से ही नाराज़ हैं।

कुवैत में महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों पर तो समान ही दंड है, लेकिन महिलाओं द्वारा किए जाने वाले अपराधों पर कड़ी सज़ा मिलती है। यहाँ के अनुच्छेद-153 में कहा गया है कि अगर किसी महिला की हाय इसलिए की जाती है कि उसके किसी अन्य पुरुष के साथ अवैध संबंध है तो दोषी को अधिकतम तीन साल की कैद और 46 डॉलर (3426.54 रुपए) का जुर्माना चुकाना होगा। इसे हटाए जाने के बाद मुल्ला-मौलवियों के दबाव में फिर से लागू कर दिया गया था।

‘बंद हो राना अय्यूब की कानूनी प्रताड़ना, हिन्दू राष्ट्रवादी समूह दे रहे रेप-हत्या की धमकी’: UN ने फैलाया प्रोपेगंडा तो भारत ने लगाई लताड़

संयुक्त राष्ट्र के ट्विटर हैंडल ‘यूएन जिनेवा’ ने पत्रकार राना अय्यूब को लेकर भारत विरोधी बातें की है, जिसके बाद भारत ने भी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। ‘UN Geneva’ ने ‘संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों’ के हवाले से दावा किया है कि पत्रकार राना अय्यूब के खिलाफ ऑनलाइन निष्ठुर तरीके से महिला विरोधी और सांप्रदायिक हमले किए जा रहे हैं, जिनकी भारतीय प्रशासन द्वारा अच्छे तरीके से त्वरित जाँच की जानी चाहिए। साथ ही राना अय्यूब के खिलाफ ‘न्यायिक प्रताड़ना’ भी ख़त्म करने की बात की है।

भारत ने UN के इस प्रोपेगंडा का तगड़ा जवाब दिया है। आधिकारिक ट्विटर हैंडल ‘इंडिया एट यूएन, जिनेवा’ ने इस ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राना अय्यूब के खिलाफ ‘न्यायिक प्रताड़ना’ की बातें न सिर्फ आधारहीन हैं, बल्कि अनुचित भी हैं। भारत ने कहा कि यहाँ कानून का राज है, लेकिन ये भी स्पष्ट है कि कानून से ऊपर कोई भी नहीं है। भारत ने कहा कि यूएन के विशेषज्ञों से ये उम्मीद की जाती है कि उनका उद्देश्य अच्छा हो और उनके पास पुष्ट सूचनाएँ हों।

भारत ने स्पष्ट किया कि भ्रामक नैरेटिव को आगे बढ़ाने से ‘यूएन जिनेवा’ की प्रतिष्ठा को ठेस ही पहुँचेगी। यूएन के एक लेख में राना अयूब को ‘इवेस्टीगेटिव जर्नलिस्ट’ और ‘मानवाधिकार का बचाव करने वाली’ बताया गया है। साथ ही उन्हें ‘अति दक्षिणपंथी हिन्दू राष्ट्रवादी समूहों की पीड़िता’ करार देते हुए लिखा है कि अल्पसंख्यक मुस्लिमों की स्थिति पर आवाज़ उठाने के लिए उन्हें धमकियाँ मिल रही हैं। साथ ही हिजाब के समर्थन और कोरोना से निपटने के मामले में सरकार की आलोचना को भी इसकी वजह बताया गया है।

संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने लिखा है, “जनता से जुड़े मुद्दों को दिखाने के लिए राना अय्यूब के प्रयास और सत्ता की जिम्मेदारी पर सवाल उठाने के कारण व्यवस्थित ऑनलाइन समूह उन्हें हत्या और बलात्कार की धमकियाँ दे रहे हैं। जाँच की अनुपस्थिति और कानून द्वारा उनकी प्रताड़ना से आरोपितों को और प्रोत्साहन ही मिला है। क्राउड फंडिंग में टैक्स चोरी से जुड़े झूठे आरोप लगा कर 6 महीने के भीतर दूसरी बार उनके बैंक खाते सीज कर लिए गए। हमने पहले भी इस सम्बन्ध में भारत सरकार को लिखा है। सरकार उनका बचाव करने में अक्षम रही है।”

जिनेवा में भारत के परमानेंट मिशन द्वारा अब एक ‘नोट वर्बल’ (पढ़ा जाने वाला बयान) के जरिए भी इस मुद्दे को उठाने का निर्णय लिया है। साथ ही जिनेवा में स्थित संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों के समक्ष भी इस मामले को उठाया जाएगा। याद दिला दें कि लोगों की मदद के नाम पर ‘केटो’ क्राउडफंडिंग वेबसाइट के जरिए धन की उगाही और पैसे की गड़बड़ी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा प्रोपेगेंडा पत्रकार राणा अयूब की 1.77 करोड़ रुपए की संपत्ति को जब्त किए जाने के बाद से वो लगातार विक्टिम कार्ड खेल रही हैं। 

‘इस्लाम से बाहर जाने का रास्ता खुला है’: सबरीमाला मंदिर में आरिफ मोहम्मद खान ने किया दर्शन, भड़के सुन्नी नेता ने याद दिलाया शरिया

सुन्नी नेता अब्दुल हमीद फैजी अंबालाक्कदावु ने सबरीमाला मंदिर जाने के लिए केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान पर हमला करते हुए कहा कि इस्लाम से बाहर जाने का रास्ता खुला हुआ है।

केरल के राज्यपाल की सबरीमाला यात्रा पर मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए अंबालाक्कदावु ने कहा कि आरिफ मोहम्मद आरिफ खान ने सभी अनुष्ठानों का पालन किया था जो एक धर्मनिष्ठ हिंदू करते हैं। सुन्नी नेता ने कहा, “प्रिय दोस्तों, हमने राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान को हाल ही में सबरीमाला मंदिर में पूजा करते हुए देखा। हमने उन्हें सभी रस्मों को सच्चे रूप में करते हुए और इस तरह से उन्होंने इस्लाम से बाहर जाने का रास्ता खोल दिया है।”

“राज्यपाल के नाम से यह धारणा बनेगी कि वह आस्था से मुसलमान हैं। उसके पास पैगंबर मुहम्मद का नाम है और आरिफ वह शब्द है जो उस व्यक्ति को संदर्भित करता है जो अल्लाह को बहुत करीब से जानता है।” अंबालाक्कदावु ने कहा, हिजाब पर राज्यपाल की टिप्पणी को किसी मुस्लिम द्वारा की गई टिप्पणी के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।

विशेष रूप से, केरल के राज्यपाल ने कर्नाटक में हिजाब समर्थक आंदोलन के खिलाफ मुखर होकर कहा था कि अगर ‘हिजाब के अधिकार’ के तर्क को स्वीकार कर लिया जाता है तो मुस्लिम महिलाएँ हार जाएँगी। इसके अलावा, उन्होंने निहित स्वार्थों के लिए हिजाब मुद्दे का फायदा उठाने के लिए कॉन्ग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को भी लताड़ा था

आरिफ मोहम्मद खान के खिलाफ हमले को जारी रखते हुए, सुन्नी नेता ने आगे कहा कि राज्यपाल इस्लाम का उपहास कर रहे हैं कि यह उन्हें भाजपा में नए स्थान दिलाएगा। सुन्नी नेता ने कहा, “इस्लाम में एक शर्त है कि अगर कोई मुसलमान दूसरे धर्मों के पूजा स्थल पर जाता है, उनके रीति-रिवाजों का पालन करता है और उनकी तरह कपड़े पहनते हैं तो वह इस्लाम से बाहर हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “यह एक निर्विवाद तथ्य है कि यदि कोई इस्लाम के मूल सिद्धांतों पर सवाल उठाता है, तो वह धर्म से बाहर हो जाएगा। मैं यह नहीं कह रहा हूँ कि आरिफ मोहम्मद खान गैर-मुस्लिम या काफिर बन गए हैं। फतवे जारी करना धार्मिक विद्वानों पर निर्भर है। मैं केवल शरिया कानूनों की बात कर रहा हूँ।”

अंबालाक्कदावु ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि हिजाब और शरीयत के बारे में बोलने वाले खान इस्लामी विद्वान हैं या नहीं। उन्होंने अपने कामों से इस्लाम के बाहर जाने का काम किया है।

ड्रग्स के 60 कैप्सूल अपने प्राइवेट पार्ट में छिपा कर तस्करी कर रही थी महिला, कीमत ₹16 करोड़: एयरपोर्ट पर धराई

राजस्थान में एक अफ़्रीकी महिला धराई थी, जो अपने प्राइवेट पार्ट में ड्रग्स वाले 60 कैप्सूल्स छिपा कर तस्करी कर रही थी। जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उक्त महिला को पकड़ा गया है। आरोपित महिला अफ्रीका की रहने वाली है। शनिवार (19 फरवरी, 2022) की देर रात वो महिला वहाँ पहुँची थी। जाँच के दौरान ‘डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI)’ की टीम ने महिला को पकड़ने में सफलता पाई। वहाँ से उसे सवाई मानसिंह अस्पताल लेकर जाया गया।

वहीं पर डॉक्टरों की टीम ने महिला के प्राइवेट पार्ट में छिपा कर रखे गए 60 कैप्सूल्स निकालने में सफलता पाई। ये महिला युगांडा की रहने वाली है। उसका नाम अमानी हैवेंस लोपेज है, जो UAE के शारजाह से फ्लाइट लेकर तड़के सुबह 3 बजे जयपुर पहुँची थी। इन कैप्सूल्स में दो किलो ड्रग्स बरामद किए गए है। इसकी कीमत 16 करोड़ बताई जा रही है। महिला फ़िलहाल सवाई मानसिंह अस्पताल में ही भर्ती है और उसके स्वास्थ्य पर डॉक्टर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

DRI की टीम लगातार इस मामले पर नजर बनाई हुई है। महिला के प्राइवेट पार्ट से कैप्सूल्स को निकालने में 2 दिन लग गए। फ़िलहाल वो अस्पताल के जनरल वार्ड में भर्ती है। उसकी उम्र 31 वर्ष है। दिसंबर 2021 में भी कस्टम की टीम ने जयपुर एयरपोर्ट से 90 करोड़ रुपए के ड्रग्स बरामद किए थे। केन्या की एक महिला पैसेंजर 12.9 किलोग्राम हेरोइन की तस्करी करते हुए धराई थी। लुकआउट नोटिस के बाद ये कार्रवाई हुई थी। इस एयरपोर्ट पर सोने की तस्करी भी बड़ी मात्रा में आता है।

‘तमिलनाडु पुलिस करती रही लावण्या के परिवार की ही जाँच’: दादी ने कहा- ‘मरने से पहले चाचा को बताया था ईसाई न बनने पर स्कूल में मिली प्रताड़ना’

तमिलनाडु की 17 वर्षीय छात्रा लावण्या आत्महत्या केस में नया मोड़ आया है। लावण्या की दादी ने भी परिवार द्वारा लगाए जा रहे धर्मान्तरण के दबाव के आरोपों को सही बताया है। यह बयान उन्होंने एक यूट्यूब चैनल चाणक्या पर एक इंटरव्यू के दौरान दिया है। लावण्या की दादी मंगयरकार्षि (Mangayarkarasi) ने कहा कि अस्पताल में इलाज के दौरान लावण्या ने अपने चाचा को खुद पर ईसाई बनने के दबाव के चलते जहर खाने की बात बताई थी।

यूट्यूब चैनल चाणक्या ने यह इंटरव्यू रविवार (20 फ़रवरी) को प्रकाशित किया है। लावण्या की दादी ने आरोप लगाया, “मद्रास हाईकोर्ट द्वारा केस CBI को ट्रांसफर किए जाने के बाद भी तमिलनाडु पुलिस हम लोगों के ही घर की तलाशी ले रही है। साथ ही हमारे ही परिवार से पूछताछ कर रही है। सर्वनन नाम का एक पुलिस अधिकारी हमारे पास जाँच के लिए आया। मैंने उसको बताया कि मुझे केस के बारे में कुछ भी नहीं पता। एक अन्य महिला पुलिसकर्मी जाँच के लिए मुझे अपने साथ ले गई। मैं अधिकतर समय चुप रही तो उन्होंने मेरी बहन के पति के बारे में पूछताछ शुरू कर दी जो कोयंबटूर में थे। फिर उन्होने मुझे सब कुछ बता देने को कहा। 10 फरवरी को चाणक्या को इंटरव्यू देने तक पुलिसकर्मी लगातार हमारे घर आ रहे थे। हर दिन 4 – 5 पुलिसकर्मी हमारे घर आते थे। वो सब एक जैसा ही सवाल-जवाब करते थे। इसमें एक सब इंस्पेक्टर प्रमुख था। वो 2 – 3 सिपाहियों के साथ लगातार आता जाता था। और बार-बार एक ही सवाल पूछता था।”

मृतका लावण्या तंजावुर के सेक्रेड हार्ट हायर सेकेंडरी स्कूल की छात्रा थी। उन्होंने जहर खा कर जान दे दी थी। मौत से पहले अपने अस्पताल में दिए बयान में उन्होंने अपनी प्रताड़ना के बारे में बताया था। लावण्या ने आरोप लगाया था कि उनसे टॉयलेट की सफाई करवाई जाती थी। ऐसा इसलिए होता था क्योंकि उन्होंने ईसाई बनने से मना कर दिया था।

लावण्या के साथ हुई अपनी अंतिम मुलाक़ात के बारे में बताते हुए उनकी दादी ने कहा, “मैं उस से अंतिम बार तब मिली जब उसको इलाज के लिए तंजावुर के अस्पताल में भर्ती करवाया गया था।”

गौरतलब है कि मद्रास हाईकोर्ट ने यह केस CBI को ट्रांसफर करते हुए तमिलनाडु सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की आलोचना की थी। इस मामले में धर्मान्तरण के एंगल को भी छिपाने का प्रयास किया गया था। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया था कि पीड़िता का मृत्यु पूर्व बयान नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। न्यायालय ने तमिलनाडु पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए थे। इन आदेशों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में भी अपील का तमिलनाडु सरकार को कोई खास फायदा नहीं हुआ।

शुरू हो गई रूस-यूक्रेन में गोलीबारी: अमेरिका का दावा – यूक्रेन के लोगों की हिट लिस्ट तैयार कर चुका है रूस, 15 लाख सैनिक तैयार

रूस और यूक्रेन के बीच इन दिनों युद्ध का माहौल बना हुआ है। यूक्रेन के राष्ट्रपति ने रूस को बातचीत का प्रस्ताव भी भेजा है। वहीं यूक्रेन के दो सैनिकों की मौत के बाद स्थिति ज्यादा गंभीर नजर आने लगी है। रूस दावा कर चुका है कि वह अपनी सेना पीछे हटा रहा है लेकिन अमेरिका का कहना है कि सच कुछ और है। व्लादिमीर पुतिन की कथनी और करनी में अंतर है। अब अमेरिकी खुफिया एजेंसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि रूस ने अपनी सेना को युद्ध के लिए आगे बढ़ने का आदेश दे दिया है। 

यूक्रेन में टारगेट किलिंग करेगा रुस: अमेरिका का दावा

अमेरिकी खुफिया विभाग का कहना है कि रूसी सेना को हमले का आदेश दे दिया है और योजना के अंतिम चरण में काम चल रहा है। इसके साथ ही अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख को भेजे पत्र में दावा किया है कि रूस जंग के दौरान यूक्रेन में कुछ चुनिंदा लोगों को मार देगा। कुछ लोगों को शिविरों में भेजा जाएगा। इन सब के नामों की लिस्ट तैयार कर ली गई है, यानी यह एक टारगेट किलिंग होगी। इससे पहले NATO ने भी ऐसी ही आशंका जाहिर की थी। पत्र में यह भी दावा किया गया है कि रूसी सेना शांतिपूर्ण विरोध को खत्म करने के लिए घातक उपाय करेगी।

जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत बाथशेबा नेल क्रोकर ने इस बात की चेतावनी दी है कि यदि रूस, यूक्रेन पर हमला करता है और उस पर कब्जा करता है तो यूक्रेनी लोगों पर अत्याचार का पहाड़ टूट सकता है। उन्हें अपहरण या यातना का सामना करना पड़ सकता है। यहां रूस की अगुआई में बनी सरकार नाखुश लोगों, धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों को निशाना बना सकती है। हालाँकि प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने अमेरिकी खुफिया की इन रिपोर्टों को खारिज कर दिया है।

बता दें कि कुछ दन पहले अमेरिका ने कहा था कि रूस ने यूक्रेन के बॉर्डर पर 15 लाख सैनिक लगा दिए हैं। इसमें से आधे सैनिक अटैक पोजीशन पर हैं। हालाँकि रूस ने इस बात से इनकार किया था। उसने यूक्रेन से आश्वासन माँगा था कि वह कभी NATO में शामिल नहीं होगा।

रूस क्यों कर रहा है यूक्रेन के नाटो से जुड़ने का विरोध?

यूक्रेन की रूस के साथ 2 हजार किलोमीटर से ज्यादा लंबी सीमा है। रूस को डर है कि अगर यूक्रेन नाटो से जुड़ा तो नाटो सेनाओं की पहुँच रूसी सीमा तक हो जाएगी। ऐसे में यूक्रेन से लड़ाई की सूरत में नाटो के देश रूस के खिलाफ युद्ध छेड़ सकते हैं, जो रूस की सुरक्षा के लिए बिलकुल अच्छा नहीं होगा। अगर यूक्रेन NATO में शामिल हो गया, तो रूस की राजधानी मॉस्को की पश्चिमी देशों से दूरी केवल 640 किलोमीटर रह जाएगी। अभी ये दूरी करीब 1600 किलोमीटर है। यही वजह है कि रूस यूक्रेन के नाटो से जुड़ने को लेकर चेतावनी जारी करता रहा है। रूस इस बात की गारंटी चाहता है कि यूक्रेन कभी भी नाटो से नहीं जुड़ेगा।

यूक्रेन की सीमा पर तैनात हैं कितने रूसी सैनिक?

अमेरिका का दावा है कि पिछले दो महीने से यूक्रेन की सीमा पर रूस के 1.50 लाख से ज्यादा सैनिक तैनात हैं। इनमें से हजारों की संख्या में सैनिक यूक्रेन के करीब और रूसी कब्जे वाले शहर क्रीमिया में तैनात हैं। साथ ही यूक्रेन की सीमा के आसपास रूस ने अपने इलाके में कई फाइटर जेट भी तैनात कर रखे हैं। सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि रूस के फाइटर जेट एकदम हमले के लिए तैयार मोड में रखे गए हैं।

रूस ने लगाया यूक्रेन पर गोलीबारी का आरोप

रूस का आरोप है कि यूक्रेन की तरफ से सीमापार जबरदस्त गोलीबारी की गई जिसकी वजह से उसे नुकसान हुआ है। रूसी समाचार एजेंसियों ने सुरक्षा सेवा के हवाले से खबर दी कि 21 फरवरी की सुबह 9:50 बजे यूक्रेन से दागे गए एक अज्ञात गोले ने रूसी-यूक्रेनी सीमा से लगभग 150 मीटर की दूरी पर रोस्तोव क्षेत्र में FSB सीमा रक्षक सेवा द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली सीमा सुविधा को पूरी तरह से नष्ट कर दिया। FSB ने पुष्टि की है कि शनिवार को रूसी रोस्तोव क्षेत्र में दो गोले दागे गए थे। रूस की जाँच समिति ने यूक्रेनी क्षेत्र से रूसी क्षेत्र पर गोलाबारी पर आपराधिक कार्यवाही शुरू कर दी है।

रूस ने यूक्रेन पर गोलीबारी का आरोप लगाया

समिति ने कहा कि शनिवार सुबह यूक्रेन के क्षेत्र में अज्ञात व्यक्तियों ने कई रॉकेट लांचरों का उपयोग करते हुए रोस्तोव क्षेत्र के सीमावर्ती क्षेत्रों पर गोलियाँ चलाईं। हालाँकि, कोई नागरिक हताहत नहीं हुआ। जानकारी के अनुसार घटना स्थल का अभी भी निरीक्षण किया जा रहा है। वहीं यूक्रेन ने रूस के इन आरोपों को खारिज किया है। यूक्रेन के विदेश मंत्री ने कहा कि हम रूसी क्षेत्र में किसी भी कथित यूक्रेनी गोलीबारी के सभी आरोपों का दृढ़ता से खंडन करते हैं।

रूस-यूक्रेन विवाद में भारत है किसके साथ?

भारत ने रूस-यूक्रेन विवाद में अब तक किसी भी पक्ष का समर्थन नहीं किया है, बल्कि उसने तटस्थ रुख अपना रखा है। भारत ने दोनों पक्षों से मामले के शांतिपूर्ण ढंग से निपटारे की अपील की है। भारत ने 2014 में रूस के क्रीमिया पर कब्जे के दौरान भी खुलकर रूस का विरोध नहीं किया था। यूक्रेन में 18 हजार मेडिकल स्टूडेंट्स समेत 20 हजार भारतीय फँसे हैं, जिन्हें सुरक्षित निकालना भारत की प्राथमिकता है।

‘जीवित वस्तु है हमारी पृथ्वी, बुद्धिमत्ता के साथ-साथ इसके पास तार्किक क्षमता भी’: वैज्ञानिक रिसर्च ने अथर्ववेद की बात पर लगाई मुहर

एक नए वैज्ञानिक शोध से पता चला है कि पृथ्वी एक ‘जीवित वस्तु’ है। रिसर्च के बाद एस्ट्रोबायोलॉजिस्ट ने पाया है कि जिस धरती पर हमलोग रहते हैं, वो न सिर्फ जीवित है बल्कि उसके पास अपनी बुद्धि भी है। वैज्ञानिकों ने इसे ‘प्लानटेरी इंटेलिजेंस’ नाम दिया है। जिसमें किसी भी ग्रह के पास सामूहिक ज्ञान से लेकर जानने-समझने की क्षमता की बात भी की गई है। इस रिसर्च को ‘इंटरनेशनल जर्नल ऑफ एस्ट्रोबायोलॉजी’ में प्रकाशित किया गया है। बता दें कि वेदों में ही पृथ्वी को जीवित मानते हुए इसे ‘भूदेवी’ कहा गया है। अर्थववेद में लिखा है कि पृथ्वी सिर्फ एक वस्तु नहीं, बल्कि जीवित प्राणी है।

इस रिसर्च पेपर में वैज्ञानिकों ने कहा है कि ऐसे कई सबूत मिले हैं जो बताते हैं कि पृथ्वी पर फंगी का अंडरग्राउंड नेटवर्क मौजूद है। ये आपस में लगातार ‘बातचीत’ करते रहते हैं। इससे रेखांकित किया गया है कि धरती के पास अपनी ‘अदृश्य बुद्धिमत्ता’ मौजूद है। इस पेपर को तैयार करने वाले ‘यूनिवर्सिटी ऑफ रोचस्टर’ के एडम फ्रैंक ने बताया कि हम सामुदायिक रूप से ग्रह के इंट्रेस्ट्स में उन्हें प्रतिक्रिया नहीं दे सकते। उनका इशारा उन मानवीय गतिविधियों की तरफ था, जिससे पृथ्वी पर असर पड़ रहा है।

धरती में ये बदलाव मानवीय गतिविधियों की वजह से पर्यावरण, प्रदूषण और संसाधनों के दोहन में आ रहे हैं। रिसर्च करने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि पृथ्वी की बुद्धि और ज्ञान को समझ कर हमें इसका भान होगा कि हम इसके साथ कैसा व्यवहार करें और इसकी मदद करने के साथ-साथ संसाधनों का उपयोग किस तरह से करें। उनका मानना है कि इससे मानवों को एलियंस की खोज में भी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि सच्ची ‘प्लानटोरी इंटेलिजेंस’ तभी देखने को मिलेगा, जब तकनीक के उच्च-स्तर पर पहुँची सभ्यता एक-दूसरे की हत्या नहीं करेगी।

रिसर्च के लेखकों का मानना है कि इस अध्ययन से क्लाइमेट चेंज से निपटने के तौर-तरीकों के साथ-साथ दूसरे ग्रहों पर जीवन की संभावनाएँ तलाशने में भी मदद मिलेगी। ऐसे ग्रह, जहाँ ‘जीवन’ और ‘बुद्धिमत्ता’ का विकास हो सके। ‘ग्रहीय बुद्धिमत्ता’ के कॉन्सेप्ट पर विचार करें तो पृथ्वी के पास तर्क-वितर्क की क्षमता के साथ-साथ फंगस के माध्यम से सूचनाओं के आदान-प्रदान की योग्यता भी है। ये ऐसा ही है, जैसे पेड़-पौधे फोटोसिंथेसिस के माध्यम से खुद को ज़िंदा रखते हैं।

राज्य में नहीं लगा हिजाब पर बैन, शैक्षणिक संस्थानों को दी गई ड्रेस कोड तय करने की आजादी: कर्नाटक HC में बुर्का विवाद पर लगातार 7वें दिन सुनवाई

कर्नाटक हिजाब विवाद पर आज (21 फरवरी 2022) हाईकोर्ट में हुई सुनवाई एक बार फिर बिन किसी नतीजे पर पहुँचे कल पर टल गई। इस दौरान राज्य सरकार ने कोर्ट के सामने इस बात को स्पष्ट किया कि उन्होंने अपने 5 फरवरी वाले सरकारी आदेश में हिजाब पर प्रतिबंध नहीं लगाया। उन्होंने सिर्फ कॉलेज विकास समितियों को यूनिफॉर्म पर निर्णय लेने का अधिकार दिया है।

सीजे ऋतुराज अवस्थी, जस्टिज जेएम खाजी, जस्टिस कृष्णा एस दीक्षित की बेंच के सामने एडवोकेट जनरल प्रभुलिंग नवदगी ने अपनी तमाम दलीलें रखीं। उन्होंने उन चार अवसरों का जिक्र किया जब कुरान को लेकर दी गई दलीलों को नकारा गया था। उन्होंने बताया कि हिजाब या तो इस्लाम में अनिवार्य हो सकता है या फिर वैकल्पिक। उन्होंने गौर करवाया है कि कैसे याचिकाकर्ता ने इस्लाम मानने वाले हर लड़की के लिए हिजाब को ड्रेस फॉरमैट में शामिल करने की माँग की है।

शुक्रवार की सुनवाई में एडवोकेट जनरल ने कोर्ट के सामने दलील दी कि राज्य सरकार का फैसला संस्थानों को यूनिफॉर्म तय करने की स्वतंत्रता देता है। कर्नाटक शिक्षा अधिनियम की प्रस्तावना धर्मनिरपेक्ष वातावरण को बढ़ावा देना है। उन्होंने राज्य का पक्ष रखते हुए बताया कि स्कूल-कॉलेजों में किसी धार्मिक पहचान वाले कपड़े को नहीं पहना जाना चाहिए।

उन्होंने सबरीमाला का उदाहरण दिया और कहा कि यदि कोई प्रथा वैकल्पिक है तो उसे धर्म में आवश्यक नहीं कहा जा सकता। आवश्यक होने का दावा किया जाने वाला ऐसा अभ्यास होना चाहिए कि उसके न होने से धर्म की प्रकृति ही बदल जाए। एजी ने कोर्ट के आगे तांडव नृत्य और सबरीमाला पर हुए फैसलों का उदाहरण दिया।

एजी बोले कि देश को बाँटने वाली धार्मिक प्रथाओं को कुचलना जरूरी है। उन्होंने कहा कि खाने-पीने या कपड़े पहनने के तरीके को धार्मिक प्रथा से नहीं जोड़ा जा सकता। उन्होंने आर्टिकल 25 से जुड़े पाँच फैसले भी कोर्ट में पढ़े और बताया कि परिवर्तनीय भाग या प्रथाएँ धर्म/मजहब का मूल नहीं हैं।

उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को हुई इस बहस के दौरान एक अन्य वकील ने कोर्ट के सामने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि लड़कियों को लोगों के सामने हिजाब उतारने के लिए कहा जा रहा है। उन्हें कम से कम एक अलग निजी जगह दी जानी चाहिए। टीवी चैनल जा रहे हैं और इसकी शूटिंग कर रहे हैं। यह बाल अधिकारों का हनन है। इस पर बेंच ने कहा आप जाएँ और सिर्फ टीवी चैनल के सामने बहस करें। बता दें कि शुक्रवार को कर्नाटक हाईकोर्ट में हिजाब विवाद पर लगातार 7वें दिन सुनवाई हुई है।

कर्नाटक में हिंदू युवक की हत्या के बाद 3 गिरफ्तार: हिंसा, आगजनी की खबरों के बीच ट्विटर पर ट्रेंड हुआ #JusticeForHarsha

कर्नाटक में बजरंग दल एक्टिविस्ट हर्षा की हत्या के बाद इलाके में तनाव का माहौल है। खबर है कि वहाँ प्रदर्शनकारियों ने काफी तोड़फोड़ की है और वाहनों में आग लगा दी है। लोगों की माँग है कि हर्षा को न्याय दिलाया जाए। इस बीच गृहमंत्री ने बताया कि हर्षा की हत्या मामले में पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।

गृह मंत्री अर्गा ज्ञानेंद्र ने कहा, “हमने 3 लोगों को गिरफ्तार किया है। मेरी जानकारी के अनुसार, इस हत्या में 5 लोग शामिल हैं। पूछताछ चल रही है। बहुत जल्द हम हत्या से संबंधित जानकारी प्राप्त करेंगे और जाँच के बाद ही कुछ कह पाएँगे।” गृहमंत्री ने कहा कि पुलिस को कुछ पुख्ता सबूत मिले हैं और घटना में शामिल लोगों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।

हर्षा की हत्या के बाद बता दें सोशल मीडिया पर JusticeForHarsha ट्रेंड कर रहा है। इस ट्वीट में सोशल मीडिया यूजर्स हर्षा के लिए इंसाफ माँग रहे हैं। साथ ही उन हिंदू चेहरों को याद कर रहे हैं जिन्हें पिछले सालों में कट्टरपंथियों ने मौत के घाट उतारा।

हर्षा की हत्या

गौरतलब है कि कर्नाटक में चल रहे हिजाब विवाद के बीच वहाँ शिवमोगा क्षेत्र में 26 वर्षीय बजरंग दल कार्यकर्ता हर्षा की हत्या का मामला प्रकाश में आया था। ये घटना रविवार (20 फरवरी 2022) रात करीब 9 बजे घटी थी। इलाके में तनाव देखते हुए पुलिस ने वहाँ सुरक्षा बढ़ा दी है। 

शिवमोगा में हर्षा की चाकुओं से गोद कर हत्या के बाद उपद्रवियों ने क्षेत्र में कई जगह गाड़ियों में तोड़फोड़ की। उनमें आग लगाई, जिसे बाद में फायर ब्रिगेड द्वारा बुझवाया गया। पुलिस ने स्थिति कंट्रोल करने के लिए इलाके में 144 लगाई हुई है। कॉलेजों में भी सोमवार का अवकाश घोषित है।

श्रीराम नाम जपते-जपते हुए हर्षा की मौत

बजरंग दल कार्यकर्ता की हत्या के बाद उनकी बहन ने कहा, “मेरा छोटा भाई मर गया क्योंकि वो जय श्रीराम बोलता था। वो गया क्योंकि वो हिंदू हर्षा था। कल रात वह खाना खाने गया। करीब साढ़े 8 बढ़े हमें एक वीडियो आई और लोगों ने बताया कि मेरा भाई मार दिया गया है। विश्वास नहीं होता कि लोग इतने क्रूर कैसे हो जाते हैं। क्या उनके पास बच्चे नहीं है। मैं प्रार्थना करती हूँ कि हिंदू-मुस्लिम समुदाय का हर युवा अच्छा बच्चा बने। बाकी का भूल जाओ। “

प्रकाश पर कर्नाटक में धारदार हथियारों से हमला, क्योंकि उसने टीपू सुल्तान से जुड़ी पोस्ट पर दी ‘स्माइली’

कर्नाटक के बागलकोट में एक हिंदू युवक पर भीड़ ने हमला कर दिया। वजह थी टीपू सुल्तान से संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट पर टिप्पणी करना। दरअसल शनिवार (19 फरवरी 2022) को प्रकाश लोनारे नाम के युवक ने कट्टर इस्लामी शासक टीपू सुल्तान से जुड़ी एक पोस्ट पर कथित तौर पर एक ‘स्माइली इमोजी’ कमेंट कर दिया। इससे नाराज होकर 15-20 लोगों के एक समूह ने उस पर हमला कर दिया। पत्रकार चिरू भट ने ट्विटर पर इस खबर को शेयर किया है।

स्थानीय पत्रकार सोमशेखर के मुताबिक, टीपू सुल्तान से जुड़ी पोस्ट पर प्रकाश के कमेंट से उसके कट्टर इस्लामी शासक के फॉलोअर्स नाराज हो गए। इसके बाद आक्रोशित भीड़ ने प्रकाश का विरोध किया और बहस करने के बाद उस पर धारदार हथियारों से हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल प्रकाश को अस्पताल में भर्ती कराया गया। स्थानीय विधायक वीरन्ना चरन्तिमथा और राष्ट्रीय हिंदू सेना प्रमुख प्रमोद मुतालिक ने रविवार (20 फरवरी 2022) को उससे मुलाकात की। आरोपित के खिलाफ बागलकोट सिटी थाने में मामला दर्ज किया गया है।

गौरतलब है कि टीपू सुल्तान हिंदुओं पर अत्याचार के लिए कुख्यात है। लेकिन कर्नाटक में जब सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार चल रही थी तो उसकी जयंती को राज्य उत्सव के रूप में मनाने का फैसला किया गया था। इसके बाद राज्य में बड़े पैमाने पर हंगामा हुआ था। 2015 में इसके खिलाफ आंदोलन में हुआ। इस दौरान हुए झड़पों में दो लोग मारे गए थे, जिनमें से एक विश्व हिंदू परिषद का सदस्य था।

उल्लेखनीय है कि प्रकाश पर हमले की खबर तब सामने आई जब शिवमोगा में बजरंग दल के 26 वर्षीय कार्यकर्ता हर्षा की एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर हत्या कर दी गई। हर्षा ने हाल में अपने फेसबुक प्रोफाइल पर हिजाब का विरोध करते हुए ड्रेस कोड का समर्थन किया था। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में हर्षा की यह फेसबुक पोस्ट ही उनकी हत्या की वजह बताई गई है।