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‘जवान लड़कियों के सामने मास्टरबेशन करता है ओबेद, कई बनीं शिकार’: उर्फी जावेद ने शेयर किए स्क्रीनशॉट्स, कास्टिंग डायरेक्टर पर आरोप

बिग बॉस ओटीटी से मशहूर हुई उर्फी जावेद सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहती हैं। वह अक्सर अपने फैंस के लिए अपनी खास तस्वीरें और वीडियो शेयर करती रही हैं, लेकिन इस बार उर्फी जावेद एक कास्टिंग डायरेक्टर पर शारीरिक शोषण का आरोप लगाने की वजह से चर्चा में हैं। उन्होंने कास्टिंग डायरेक्टर ओबेद अफ्रीदी पर आरोप लगाया है कि वह उनके जैसी लड़कियों को शारीरिक संबंध बनाने के लिए कहते हैं।

फोटो साभार- उर्फी जावेद इंस्टाग्राम

उन्होंने कहा कि उनके जैसी मुंबई आई यंग लड़कियों से ओबेद ने सेक्शुअल फेवर माँगा था। उर्फी ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरी पर कई स्क्रीनशॉट्स भी शेयर किए हैं, जहाँ वह बता रही हैं कि डायरेक्टर ने उनसे गलत व्यवहार किया और गंदी बातें भी की। साथ ही ये भी आरोप लगाया कि अफरीदी ने एक म्यूजिक वीडियो में कॉम्प्रोमाइज (‘बादशाह’ के साथ) करने के लिए भी कहा था।

फोटो साभार- उर्फी जावेद इंस्टाग्राम

उर्फी ने स्क्रीनशॉट में जिस तरह से डायरेक्टर को एक्सपोज किया है, उसके लिए ओबेद उनका मजाक उड़ा रहे हैं। डायरेक्टर ने लिखा कि उर्फी के पोस्ट पर कोई भी ध्यान नहीं देगा। लेकिन उर्फी ने उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया और उन स्क्रीनशॉट्स को भी शेयर किए, जिसमें बाकी लड़कियों ने अफरीदी के खिलाफ खुलकर बोला है।

फोटो साभार- उर्फी जावेद इंस्टाग्राम

दरअसल, उर्फी के इस खुलासे के बाद कई लड़कियों ने उनके साथ आपबीती शेयर किया। इसमें उन्होंने बताया कि डायरेक्टर ओबेद अफ्रीदी ने कैसे उसका यौन उत्पीड़न किया। उर्फी ने उनकी आपबीती को भी शेयर किया है। इसमें देखा जा सकता है कि कथित तौर पर ओबेद अफ्रीदी ने एक्टिंग के बदले में किसी से साथ सोने की माँग की तो कभी सेक्स वीडियो कॉल की माँग की। उर्फी का गुस्सा यहीं पर नहीं खत्म हुआ, उन्होंने पंजाबी इंडस्ट्री पर भी सवाल उठाए। एक्ट्रेस ने कहा कि आखिर पंजाबी इंडस्ट्री इतने घटिया लोगों को क्यों हायर कर रही है, ऐसे लोगों की जगह जेल में है।

फोटो साभार- उर्फी जावेद इंस्टाग्राम

इसके अलावा उर्फी ने यह भी बताया कि उन्होंने जब अपने पैसे माँगे, तो अफरीदी ने उन पर, उनके कपड़ों पर भद्दे और घटिया कमेंट करने शुरू कर दिए। उर्फी ने एक लंबा-चौड़ा पोस्ट भी लिखा है। उन्होंने बताया है कि वह ये सब पैसों के लिए नहीं कर रही हैं, जो अफ्रीदी के पास बाकी हैं। वह ये सब इसलिए कर रही हैं क्योंकि आरोपित ‘सेक्शुअल प्रीडेटर’ है।

फोटो साभार- उर्फी जावेद इंस्टाग्राम

वह लिखती हैं, “मैंने बहुत सारे लोगों के साथ काम किया है। फिर मैं आप पर क्यों आरोप लगाउँगी, जबकि सब कुछ अच्छे से खत्म हो गया है। यह उस पैसे के बारे में भी नहीं है जो उसके पास बाकी हैं। मेरे पास सबूत हैं, जहाँ उसने यंग लड़कियों के सामने मास्टरबेट किया। इसके बाद उसने वीडियो मीटिंग के लिए कहा। मैं उसके (ओबेद अफ्रीदी) खिलाफ लड़ाई लड़ूँगी और सभी को बताना चाहूँगी कि लड़कियाँ उसके आस-पास सुरक्षित नहीं हैं। मैं मेहनत से अपना काम करती हूँ और अपने खुद के पैसे माँग रही हूँ। यह कोई जुर्म नहीं है। लेकिन जवान लड़कियों का उत्पीड़न करना गुनाह है।”

फोटो साभार- उर्फी जावेद इंस्टाग्राम

इसके बाद बाद ओबेद अफ्रीदी ने उर्फी जावेद के पोस्ट का देकर अपने इंस्टा स्टोरी पर लिखा, “लोगों को पास जलने के सिवा कोई काम नहीं है। थोड़ी बड़ी हो जाओ लड़कियों। पहले काम के लिए पूछो और फिर जब हम तुम्हें रिजेक्ट कर दें तो उल्टा-सीधा बोलो लोगों के लिए।”

फोटो साभार- उर्फी जावेद इंस्टाग्राम

इसके अलावा उर्फी जावेद ने अपनी पोस्ट में कास्टिंग डायरेक्टर ओबेद अफ्रीदी के खिलाफ और भी कई बातें लिखी हैं। सोशल मीडिया पर उनका यह पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है। अभिनेत्री के फैंस उनके पोस्ट पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। आपको बता दें कि उर्फी जावेद अक्सर अपने कपड़ों को लेकर भी सुर्खियों में रहती हैं। वह अलग-अलग ड्रेस और स्टाइल में अपनी तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर करती रहती हैं।

‘हस्ताक्षर नहीं मैच हो रहे थे, चेहरा भी छिपा रखा था’: सामने आया बैंक में हिजाबी महिला के हंगामे का सच, अब्बू-भाई को भी बुलाया था

कर्नाटक (Karanataka) के उडुपी जिले से शुरू हुआ हिजाब (Hijab) का विवाद बिहार (Bihar) में प्रवेश कर गया है। प्रदेश के बेगूसराय जिले के यूको बैंक में पैसे निकालने के लिए आई मुस्लिम लड़की के हस्ताक्षर में फर्क दिख रहा था, जिस पर बैंक के मैनेजर ने उसकी पहचान करने के लिए उसे हिजाब उतारकर चेहरा दिखाने को कह दिया। बस फिर क्या था मुस्लिमों ने इस मामले को कर्नाटक हिजाब विवाद से जोड़कर बैंक के अंदर हंगामा करना शुरू कर दिया।

रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला बेगूसराय जिले के मंसूर चौक स्थित यूको बैंक का है। जहाँ 10 फरवरी 2022 को कस्तूरी गाँव के रहने वाले मतीन आलम की बेटी शमा तबस्सुम हिजाब पहनकर बैंक में पैसे निकालने के लिए गई थी। लड़की का आरोप है कि घटना वाले दिन वो हिजाब पहनकर में पैसे निकालने के लिए गई थी। जैसे ही उसका नंबर आया तो वो कैशियर के पास गई, लेकिन कैशियर ने उससे कहा कि हिजाब खोलो तो ही पैसे देंगे, अन्यथा नहीं। शमा तबस्सुम ने कहा, “कैशियर के पैसे देने से मना करने के बाद मैंने उससे कहा कि पैसे तो आपको देने ही पड़ेंगे। फिर मैंने अपने अब्बू और भैया को फोन कर इसकी जानकारी दी। वो लोग आए और बैंक में हंगामा किया तो बाद में बैंक मैनेजर ने पैसे दिए।”

घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें देखा जा सकता है कि बैंक के कर्मचारी बैंक के अंदर वीडियो बनाने के लिए मना कर रहे हैं। लेकिन इसके बाद मुस्लिम पक्ष कह रहा है कि वो वीडियो बनाना बंद नहीं करेगा। वो लोग इसे फेसबुक पर शेयर करेंगे। एक व्यक्ति जो खुद को लड़की का पिता बताता है वो कहता है कि आप हमें लिखकर दीजिए कि बैंक के अंदर हिजाब की इजाजत नहीं है। लड़की का पिता कहता है कि यहीं से अभी तक हमारा पैसे का लेनदेन होता था, लेकिन कोई दिक्कत नहीं हुई। अब ये लोग हिजाब निकालने के लिए कह रहे हैं। ये कर्नाटक से आया है। हम थाने जाएँगे। नहीं तो ये लोग मुझे सरकार का निर्देश दिखाएँ।

हालाँकि इस मामले में बैंक की ओर से भी स्पष्टीकरण जारी किया गया है। बैंक के मैनेजर रितेश कुमार ने इस मामले को बेबुनियाद बताते हुए कहा, “आइडेंटिटी कन्फर्म करने के लिए हिजाब निकालने के लिए कहा गया था। क्योंकि, हस्ताक्षर थोड़े से अलग थे। इसीलिए कैशियर ने आइडेंटिटी प्रूफ के तौर पर चेहरा दिखाने के लिए कहा था। हमारा हिजाब विवाद से कोई लेना-देना नहीं है।”

वहीं अब इस मुद्दे पर राजनीति भी तेज हो गई है। बिहार में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस मुद्दे पर सीएम नीतीश कुमार को घेरने की कोशिश की। उन्होंने ट्वीट किया, “माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी, कुर्सी की ख़ातिर आप बिहार में यह सब क्या करवा रहे हैं? माना आपने अपना विचार, नीति, सिद्धांत और अंतरात्मा सब भाजपा के पास गिरवी रख दिया है लेकिन संविधान की जो शपथ ली है कम से कम उसका तो ख़्याल रखिए। इस कुकृत्य के दोषी लोगों को गिरफ़्तार कीजिए।”

‘तुम सब चले जाओ, ये जगह पाकिस्तान बनेगी’ : गुजरात के वकील सोहिल हुसैन ने हिंदू पड़ोसियों को चाकू लेकर धमकाया, तोड़ता है भगवान गणेश की मूर्ति

गुजरात के राजकोट में सोहिल हुसैन मोर (Sohil Hussain Mor) नामक वकील के ख़िलाफ़ दो अलग एफआईआर हुई हैं। सोहिल पर आरोप है कि उसने न केवल अपने सोसायटी में रहने वाले हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत किया बल्कि मारपीट भी की और साथ में पुलिस वाले को उसका काम करने से भी रोका। घटना रविवार (20 फरवरी 2022) की है जब श्यामा प्रसाद मुखर्जी नगर आवास के पास शाम के समय हंगामा हुआ।

सोहिल हुसैन ने कथिततौर पर वॉट्सऐप ग्रुप में छत्रपति शिवाजी महाराज के ऊपर आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था। ग्रुप की सदस्य ज्योति सोढा ने जब इस मुद्दे पर आवाज उठाई और मोर को कॉल करके अपनी नाराजगी व्यक्त करने की कोशिश की तो मोर ने उन्हें कहा, “ये देश पाकिस्तान बन गया है और तुम लोगों को देश छोड़कर चला जाना चाहिए।”

न्यूज 18 गुजराती द्वारा साझा की गई ऑडियो रिकॉर्डिंग में मोर ने महिला से गु्स्से में कहा कि ऐसे पोस्ट आते ही रहेंगे। वह बोला, “ये नया पाकिस्तान बन गया है। यहाँ सब मुस्लिम हैं। हिंदुओं को यहाँ से चले जाना चाहिए।” जब महिला ने हैरानी से पूछा कि आखिर वो ऐसी बातें क्यों कर रहा है तो मोर ने फिर कहा, “जो है वो है। यहाँ से अब जाओ।”

सोसायटी के एक शख्स ने मीडिया से बातचीत में बताया कि इस प्रकार की बयानबाजी उस शख्स की ओर से आई है जो कि कोई जाहिल नहीं बल्कि पढ़ा-लिखा वकील है। चश्मदीदों ने कहा, “वो हमेशा हमारे साथ नॉर्मल रहता था। लेकिन कुछ समय से उसने कट्टरपंथियों वाले शब्द प्रयोग करने शुरू कर दिए और अपनी वेषभूषा भी बदल दी। उसने भगवान के फोटो फ्रेम और भगवान गणेश की प्रतिमा को तोड़ने का काम भी किया था।”

चश्मदीद ने बताया कि भगवान गणेश की हर मूर्ति को तोरण से सोहिल ने तोड़ने का काम किया है। सोसायटी के हिंदुओं को शक है कि हुसैन के ऐसे कट्टर विचारों के पीछे कोई बड़ा रैकेट हो सकता है। चश्मदीद बताते हैं, “जैसे किशन भरवड के मामले में पाकिस्तान का नाम सामने आया है…। ये कह रहा है कि ये पूरी सोसायटी को पाकिस्तान में बदल देगा और हिंदुओं को यहाँ से जाना चाहिए। तुम मुझे कब तक रोक पाओगे। मुझे सपोर्ट करने वाली बड़ी फौज है।”

रिपोर्ट के अनुसार, मोर ने अपनी वॉट्सऐप डीपी पर भी I Support hijab लगा रखा है। सोढा रविवार को जब मोर से बात करने गईं तो मोर नाराज हो गया और उन्हें चाकू से मारने की धमकी। इसके बाद हंगामा मचाया गया और भगवान गणेश की मूर्ति भी तोड़ दी। जल्द से जल्द इस संबंध में पुलिस को सूचित किया गया। पुलिस कॉन्सटेबल ने इस बीच मामला सुलझाने का प्रयास किया मगर मोर बीच में आया और उन्हें भी पीटा। रविवार को विभिन्न धाराओं मे कॉन्सटेबल डंगार पर मामला दर्ज हुआ और सोमवार को उसकी गिरफ्तारी हुई।

‘समय काटने का जरिया बन गया है अदालत को कोसना’: अजीत भारती के खिलाफ चलेगा कोर्ट की अवमानना का मामला, AG ने दी सहमति

अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने पत्रकार अजीत भारती के खिलाफ ‘अदालत के अवमानना’ के आरोप में आपराधिक मामला चलाने के लिए अपनी सहमति दे दी है। आरोप है कि कई YouTube सहित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर साझा किए गए एक वीडियो में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का अपमान किया। प्रतीक कुमार नाम के एक अधिवक्ता द्वारा भेजे गए पत्र पर अटॉर्नी जनरल ने ‘कंटेम्प्लट ऑफ कोर्ट एक्ट’ के अनुच्छेद-15 के तहत अपनी सहमति प्रदान की।

इस दौरान केके वेणुगोपाल ने कहा कि अजीत भारती के द्वारा दिए गए बयान अश्लील, निंदापूर्ण और उपद्रवी होने के साथ-साथ अशिष्ट भी हैं। उन्होंने कहा कि बिना किसी शक के ये बातें सुप्रीम कोर्ट की गरिमा को गिराती है। उनका कहना है कि लोगों का सुप्रीम कोर्ट में जो विश्वास है, उसे अजीत भारती के बयान गंभीर रूप से नीचा दिखाते हैं। केके वेणुगोपाल ने कहा कि अदालत की अवमानना का मामला चलाने के लिए वो पहले ही अपनी सहमति प्रदान कर चुके हैं।

उन्होंने कहा, “अदालत को कोसना कुछ लोगों के लिए समय काटने का जरिया बन गया है।” बता दें कि ‘न्यायिक अवमानना अधिनियम (Contempt of Courts Act), 1971’ के अनुच्छेद-15 के अनुसार, किसी व्यक्ति द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर किए गए ‘अदालत की आपराधिक अवमानना’ का मामला चलाने के लिए अटॉर्नी जनरल की सहमति अनिवार्य होती है। इसके बाद ही इस पर सुनवाई शुरू होती है। ये दूसरी बार है, जब ‘DOpolitics’ के सह-संस्थापक के विरुद्ध ऐसा मामला चलाने के लिए अटॉर्नी जनरल ने अपनी सहमति दी है।

AG का कहना है कि उस वीडियो में सुप्रीम कोर्ट के सम्बन्ध में कही गई बातें ‘निम्न स्तर’ की थीं। बता दें कि इस वीडियो को अब 5 लाख से भी अधिक लोग देख चुके हैं। AG का कहना है कि इस वीडियो का उद्देश्य स्पष्ट रूप से पूरे न्यायपालिका को बदनाम करना था। इस वीडियो को 24 जून, 2021 को ‘Ajeet Bharti Roasts Supreme Court, High Courts | Rana Ayub, Zubair, Twitter Bail | Karnataka HC’ के साथ यूट्यूब पर डाला गया था।

नौकर-ड्राइवर को घर खरीदना था, भारतीय बैंक के CEO ने दे दिए 3.95 करोड़ रुपए के शेयर

प्राइवेट सेक्टर के बैंक आईडीएफसी फर्स्ट बैंक (IDFC First Bank) के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ वी वैद्यनाथन (V Vaidyanathan) चर्चा में हैं। उन्होंने अपनी दरियादिली का नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। दरअसल वैद्यनाथन ने अपने ड्राइवर, ट्रेनर और घर में काम करने वाले दूसरे हाउसहेल्प को 3.95 करोड़ रुपए के बैंक के शेयर गिफ्ट किए हैं। उन्होंने 5 लोगों को करीब 9 लाख शेयर बाँटे हैं। खास बात यह है कि इन पाँचों लोगों का IDFC FIRST Bank से कोई लेनादेना नहीं है।

बैंक ने एक एक्सचेंज फाइलिंग में कहा, “हम यह सूचित करना चाहते हैं कि मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ वी वैद्यनाथन ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक लिमिटेड के 9 लाख इक्विटी शेयर नीचे दिए गए व्यक्तियों को 21 फरवरी, 2022 को उपहार में दिए हैं।”

बैंक ने सोमवार को रेगुलेटर को दी गई जानकारी में बताया कि वैद्यनाथन ने 3 लाख शेयर अपने ट्रेनर रमेश राजू को दिए हैं। 2 लाख शेयर घर में काम करने वाले प्रांजल नरवेकर और ड्राइवर अलगारसामी सी मुनापर को दिए हैं। इसके अलावा 1-1 लाख शेयर सपोर्ट स्टाफ दीपक पथारे और संतोष जगोले को दिए हैं।

BSE पर सोमवार के बंद भाव के मुताबिक देखें तो IDFC FIRST Bank के एक शेयर की कीमत 43.90 रुपए है। इस हिसाब से वैद्यनाथन ने 3,95,10,00 रुपए के 9 लाख शेयर अपने लिए काम करने वालों के बीच बाँटा है। इसके अलावा बैंक ने ये भी बताया कि रुकमणी सोशल वेलफेयर ट्रस्ट ने भी सामाजिक कल्याण के लिए 2 लाख इक्विटी शेयर दिए हैं।

बैंक ने रेगुलेटर को बताया कि इस तरह IDFC FIRST Bank के 11 लाख इक्विटी शेयर अलग-अलग लोगों को बाँटे गए हैं। गौर करने वाली बात यह है कि इन लेनदेन से वी वैद्यनाथन द्वारा प्राप्त कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष लाभ नहीं है। उन्होंने इससे पहले भी कुछ इंडिविजुअल्स को IDFC FIRST Bank के अपने शेयर गिफ्ट किए थे।

वैद्यनाथन ने दिलाई है IDFC FIRST Bank को पहचान

गौरतलब है कि वैद्यनाथन ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक को एक नई पहचान दिलाई है। उन्होंने पहले कैपिटल फर्स्ट की शुरुआत की थी, जिसे दिसंबर 2018 में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में विलय कर दिया गया।

माहौल बदला पर आज भी ‘डर’ में जीता है विनोद कुमार का मोहल्ला, मुस्लिम भीड़ ने कर दी थी हत्या: दिल्ली दंगों के 2 साल

फरवरी 2020 में दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों में ब्रह्मपुरी के रहने वाले विनोद कुमार की भी जान चली गई थी। मुस्लिम भीड़ ने उन्हें पीट-पीट कर मार डाला था। उस समय वो अपने बेटे नितिन उर्फ मोनू के साथ घर लौट रहे थे। आज इन दंगों के भले ही 2 साल बीत गए हों, लेकिन नितिन कुमार और उनके परिवार का दर्द अभी भी ताजा है।

ब्रह्मपुरी की ‘खजूर वाली गली’ सीलमपुर मेट्रो स्टेशन से यहीं कोई 5 किलोमीटर की दूसरी पर स्थित है। इसी गली में थोड़ा आगे जाने पर नितिन कुमार उर्फ मोनू का घर है। घर के ऊपर शुभ-लाभ लिखा हिन्दू प्रतीक चिह्नों वाला स्टीकर लगा है। देवी-देवताओं की तस्वीरें भी दरवाजे पर लगी हुई हैं। फूल की एक माला दरवाजे के ऊपर टँगी है। बिल्कुल उसी तरह का यह घर जैसा धर्म में आस्था रखने वाले, गौरव करने वाले सामान्य हिंदुओं का होता है।

मोहल्ले में विनोद कुमार का नाम लेते ही लोग भावुक हो जाते हैं और आह भरते हुए बताते हैं कि कैसे दंगे में उनकी जान चली गई थी। हालाँकि, ऑन कैमरा कोई इस बारे में कुछ बोलने को तैयार नहीं है, जिससे पता चलता है कि दो साल भी किस तरह लोग डरे हुए हैं यहाँ पूछने पर कोई भी बता देगा कि ‘DJ वाले’ विनोद कुमार का घर कौन सा है। परिवार का गुजर-बसर DJ सर्विस पर ही निर्भर है। अफसोस वो भी अब ठप्प पड़ा हुआ है।

नितिन कुमार का कहना है कि उनके परिवार में फ़िलहाल 5 लोग हैं और घर की आर्थिक स्थिति भी खराब है। उन्होंने कहा कि कोई नौकरी न होने की वजह से उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि उस घटना के बाद से माहौल बिगाड़ने वाली कोई बात नहीं हुई या धमकी वगैरह तो नहीं मिली, लेकिन घर की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई है। उन्होंने बताया कि उनके पिता की हत्या के बाद सरकार से बतौर मुआवजा 10 लाख रुपए मिले थे।

वो बताते हैं कि इसके अलावा उन्हें कहीं से कोई मुआवजा नहीं मिला। कोरोना के कारण घर की आर्थिक स्थिति और खराब हो गई है। मोनू इसका कारण बताते हैं कि कोरोना काल में शादी-विवाह ज्यादा हुए नहीं और DJ सर्विस का बिजनेस इस कारण ठप्प पड़ गया। मोनू कुमार के दो बेटे भी हैं। एक 6 साल का है और एक मात्र 1 साल का है। ऐसे में उन्हें बड़े बेटे की पढ़ाई की भी चिंता है। इनके अलावा उनकी माँ और पत्नी भी घर में हैं। कमाने वाले वो अकेले हैं।

दिल्ली दंगों में मुस्लिम भीड़ द्वारा मार डाले गए विनोद कुमार के बेटे नितिन कुमार उर्फ़ मोनू

वो बताते हैं कि उन्हें इस घटना के बाद से परेशान नहीं किया गया और 2 सालों में इलाके का माहौल भी काफी बदल गया है। बता दें कि इस हत्याकांड में 12 लोगों को आरोपित बनाया गया था। अप्रैल 2021 में इनमें से 7 को ये कहते हुए अदालत ने जमानत दे दी थी कि कोरोना के कारण ट्रायल में देरी हो रही है और इसीलिए इन्हें इतने लंबे समय तक हिरासत में नहीं रखा जा सकता। सागीर अहमद, नावेद खान, जावेद खान, अरशद, गुलजार, मोहम्मद इमरान और चाँद बाबू नामक आरोपितों को अदालत ने जमानत दे दी थी।

इसके तीन महीने बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने साबिर अली, महताब और रईस अहमद नामक तीन अन्य आरोपितों को भी जमानत दे दी। ब्रह्मपुरी के गली नंबर-1 में ये घटना हुई थी। हाई कोर्ट का कहना है कि इसके कोई शुरुआती सबूत नहीं हैं कि आरोपित वहाँ पर हथियारों से लैस होकर मौजूद थे। इनमें से दो के वकीलों का कहना है कि उनके मुवक्किल भीड़ देख कर सिर्फ जानकारी लेने निकले थे। नितिन और उनके पिता के ऊपर पत्थरबाजी भी की गई थी। नितिन भी इस हमले में बुरी तरह घायल हो गए थे।

वोटिंग वाले दिन कार सीज, अब पंजाब पुलिस ने की FIR दर्ज: बहन के लिए प्रचार करने निकले सोनू सूद पर लगातार कार्रवाई

पंजाब में मतदान वाले दिन अपनी गाड़ी में बैठकर मतदाताओं के बीच घूमने वाले सोनू सूद के ख़िलाफ़ पंजाब पुलिस ने FIR दर्ज की है। पुलिस का कहना है कि मतदान वाले दिन सोनू को आचार संहिता का उल्लंघन करते हुए पकड़ा गया था। नियम के अनुसार 1 गाड़ी में 4 लोगों से ज्यादा नहीं घूम सकते। मगर, उस दिन सोनू की गाड़ी में 4 से ज्यादा लोग थे। उन पर आरोप लगा था कि सोनू अपनी बहन मालविका के लिए लोगों के बीच जाकर प्रचार कर रहे थे, उन्हें प्रभावित कर रहे थे। अब इसी मामले में अभिनेता के विरुद्ध आईपीसी की धारा 188 के तहत केस दर्ज किया गया है।

इससे पहले 20 फरवरी 2022 को पंजाब में वोटिंग वाले दिन सोनू सूद की गाड़ी को सीज करके उसे थाने में खड़ा किया गया था और उन्हें दूसरी कार से घर भेज दिया गया था। उनके विरुद्ध अकाली दल के पोलिंग एजेंट दीदार सिंह ने चुनाव आयोग से शिकायत की थी। उन्हीं का आरोप था कि सोनू अपनी बहन के लिए प्रचार कर रहे हैं। मतदाताओं की प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। आरोपों को जायज पाने के लिए बाद सोनू की कार सीज की जाने की कार्रवाई हुई थी।

सोनू सूद ने भी आरोप लगाया था कि पोलिंग बूथ के बाहर पैसे बांटे जा रहे हैं। इसलिए वह घर से बाहर निकले ताकि पता लगा सकें कि चुनाव निष्पक्ष हो रहे हैं। मालूम हो कि सोनू सूद मोदा के मतदाता नहीं हैं। बावजूद इसके उन्हें पोलिंग बूथ में जाते देखा गया तो प्रचार का आरोप लगाया गया। इसके बाद उनके ऊपर कार्रवाई हुई

गौरतलब है कि सोनू की बहन मालविका का मुकाबला मोगा सीट की भाजपा प्रत्याशी हरजोत कमल से है। ऐसे में सोनू सूद ने अपनी बहन के लिए क्षेत्र में बढ़ चढ़ कर प्रचार किया है। लेकिन मतदान के दिन भी घर से बाहर निकलकर लोगों से मिलने पर उनके ख़िलाफ़ शिकायत मिली और अब पंजाब पुलिस ने इस एफआईआर को दर्ज किया।

बुर्का पहन कर हिजाब बैन का कर रहे थे विरोध, पुलिस ने उठवाया नकाब तो 40% निकले मर्द – Fact Check

कर्नाटक के हिजाब विवाद को लेकर इन दिनों सोशल मीडिया पर कई तरह की गलत जानकारियाँ लगातार शेयर की जा रही हैं। इन गलत जानकारियों से लोगों को भड़काने की कोशिश भी हो रही है। ऐसी ही एक वायरल पोस्ट इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर की जा रही है। 

सोशल मीडिया पर किया जाने वाला दावा

यह वीडियो इस दावे के साथ वायरल की जा रही है कि कर्नाटक पुलिस ने शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब प्रतिबंध का विरोध करने वाले मुस्लिमों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए लोग बुर्का पहने हुए थे और बुर्का उतारने पर पता चलता है कि उनमें से 40% पुरुष थे।

वायरल वीडियो का दावा है फेक

कर्नाटक पुलिस की फैक्ट चेक साइट के अनुसार यह वीडियो कर्नाटक की नहीं, बल्कि तेलंगाना की है। घटना 18 अगस्त 2020 की है। वीडियो में दिख रहे व्यक्ति को तेलंगाना से गिरफ्तार किया गया था। वह आंध्र प्रदेश में शराब की तस्करी करने की कोशिश कर रहा था। उसने खुद की पहचान को छिपाने के लिए बुर्का पहन रखा था।

यह घटना कर्नाटक में नहीं बल्कि आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले के पंचलिंगाला चेक पोस्ट पर हुई थी। ऐसे में इस वीडियो की सच्चाई जाने बिना लोग इसे खूब शेयर कर रहे हैं और पुलिस की आलोचना कर रहे हैं।

फोटो साभार: फेसबुक

गौरतलब है कि कर्नाटक में चल रहे बुर्का विवाद (Hijab Controversy) पर हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है। सोमवार (21 फरवरी 2022) को हाई कोर्ट में हुई सुनवाई एक बार फिर बिन किसी नतीजे पर पहुँचे टल गई। इस दौरान राज्य सरकार ने कोर्ट के सामने इस बात को स्पष्ट किया कि उन्होंने अपने 5 फरवरी वाले सरकारी आदेश में हिजाब पर प्रतिबंध नहीं लगाया है। उन्होंने सिर्फ कॉलेज विकास समितियों को यूनिफॉर्म पर निर्णय लेने का अधिकार दिया है।

हर्षा को मारने वाले काशिफ और नदीम गिरफ्तार: BJP नेता ने कहा- वही हाल हो जो हैदराबाद में रेप आरोपितों के साथ हुआ था

कर्नाटक में हुई बजरंग दल कार्यकर्ता हर्षा की हत्या के बाद मीडिया में आरोपितों की गिरफ्तारी की खबरों के बीच इनके नाम का खुलासा हुआ है। कुछ ट्विटर हैंडल्स पर दावा किया जा रहा है कि गिरफ्तार हुए आरोपितों के नाम काशिफ और सैयद नदीम हैं। पुलिस ने इनकी पहचान उजागर नहीं की है। लेकिन, कल पहले मीडिया में तीन लोगों के गिरफ्तार होने की बात सामने आई थी, फिर पब्लिक टीवी ने भी गिरफ्तार आरोपितों में से एक का नाम काशिफ बताया था। अब इंडिया टुडे की रिपोर्ट में भी इनमें दो का नाम काशिफ और नदीम ही बताया गया है।

जानकारी के मुताबिक, पुलिस थाने में पूछताछ के दौरान काशिफ ने माना कि वह अपने 4 साथियों के साथ मिलकर हर्षा को मारने कार में आया था। हर्षा रविवार को कैंटीन में चाय पी रहा था। वहीं उस पर धारधार हथियार से वार किए गए। इसके बाद वो सब घटनास्थल से फरार हो गए। अब आगे की पूछताछ के लिए दो आरोपितों को शिवमोगा बाहर ले जाने की बातें भी सामने आ रही हैं। इस बीच हर्षा की बहन ने जहाँ बताया कि उनका भाई श्रीराम का नाम जपते-जपते हिंदुओं के लिए मरा। वहीं मृतक के भाई ने बताया है कि हर्षा संगठन के काफी सक्रिय सदस्य थे। वह हिंदुओं के बारे में सोचते थे जिसकी वजह से उन्हें मरना पड़ा।

बता दें कि हर्षा की हत्या ने एक बार फिर से देश में कट्टरपंथी संगठनों को बैन करने की माँग को तेज कर दिया है। सोशल मीडिया पर जस्टिस फॉर हर्षा ट्रेंड हो रहा है। इस हैशटैग में हर्षा के लिए न्याय माँगते हुए लोग माँग कर रहे हैं कि पीएफआई, एसडीपीआई, सीएफआई को देश भर में बैन किया जाए। वरना हिंदुओं की लिंचिंग सामान्य होती जाएगी।

लोकसभा सदस्य प्रताप सिम्हा ने उठाई PFI-SDPI को बैन करने की माँग

इस संबंध में लोकसभा सदस्य व भाजपा नेता प्रताप सिम्हा का बयान भी सामने आया है। उन्होंने कहा है कि हर्षा की हत्या के बाद उन्हें शर्मिंदगी महसूस हो रही है कि राज्य में बीजेपी की सरकार है फिर भी ये सब नहीं रुक पा रहा। इससे पहले बंतवाला में प्रशांत पुजारी ने अपनी जान से हाथ थोड़ा। फिर सूरतकल में दीपक राव, बंगलुरु मं संतोष, मैसूर में राजू, कुशलनगर में प्रवीण पुजारी, कुत्तापा और उत्तर कन्नड में पराज मेश्ट्रू।

प्रताप सिम्हा ने याद दिलाया कि कैसे सिद्धारमैया सरकार में ऐसी घटनाओं के वक्त जब ये सब हुआ तो उन लोगों ने एसडीपीआई, केएफडी पर इल्जाम लगाए। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने 104 सीट पाई और सरकार बनी। उन्होंने याद दिलाया डीजी हल्ली और केजी हल्ली घटनाओं को। जहाँ पुलिस के साथ सामान्य जन कट्टरपंथियों द्वारा निशाना बनाए गए। सरकार ने वादा किया कि आरोपितों को पकड़ा जाएगा। एसडीपीआई और पीएफआई को बैन किया जाएगा। अब जब से हिजाब का मुद्दा शुरू हुआ है तभी से बेचैनी और असुरक्षा का भाव है।

उन्होंने अपनी ही सरकार से पूछा कि क्या अगर आज कह भी दिया जाएगा कि हम हर्षा के हत्यारों को पकड़ेंगे तो क्या लोग हम पर विश्वास करेंगे।। उन्होंने पूछा कि क्या अगर डीजी हल्ली और केजी हल्ली के समय एसडीपीआई और केएफडी बैन हुई होती तो क्या ऐसी घटनाएँ देखने को मिलतीं।  अगर अब भी हम सिर्फ एसडीपीआई और पीएफआई पर सिर्फ आरोप ही लगाएँगे तो हमारे कार्यकर्ताओं ने हमें सत्ता क्यों दी। उन्होंने क्यों हमारे लिए कैंपेन किए। उन्होंने कहा कि वो राज्य के सीएम पर भरोसा करते हैं क्योंकि उन्होंने एसडी हल्ली और केजी हल्ली के समय को देखा है और वह जानते हैं कि ये सब चीजें कैसे काम कर सरती हैं। 

प्रताप सिम्हा ने एसडीपीआई बैन की माँग करते हुए कहा कि 4 लोगों की गिरफ्तारी होना काफी नहीं है। जैसे हैदराबाद में रेप करने वालों के साथ हुआ। अगर वही कदम उठाए तभी इन लोगों को सबक मिलेगा। ये पूरा मीडिया मैनेजमेंट और भाषण किसी काम के नहीं है। 

रूस ने यूक्रेन को तोड़ा, Donetsk और Luhansk को माना स्वतंत्र देश: उधर सेना भेजने का आदेश, इधर UNSC की मीटिंग

डोनेत्स्क (Donetsk) और लुहांस्क (Luhansk) – ये दोनों नाम याद रखिए। परीक्षा में पूछे जा सकते हैं। ये दोनों नाम अब यूक्रेन के अलगाववादी क्षेत्र नहीं रहे। रूस के अनुसार अब डोनेत्स्क (Donetsk People’s Republic) और लुहांस्क (Luhansk People’s Republic) नए देश हैं।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने डोनेत्स्क (Donetsk) और लुहांस्क (Luhansk) को नए देश के रूप में मान्यता दी है। राष्ट्रपति पुतिन ने इन दोनों देशों में रूसी सेना भेजने का आदेश भी दे दिया है।

सब अभी के जैसा रहा तो नारंगी रंग से घिरे इलाके होंगे 2 नए देश, फोटो साभार: worldview.stratfor.com

रूस के इस फैसले के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की मीटिंग चल रही है। मीटिंग में रूस पर प्रतिबंध लगाने की बात अमेरिका और ब्रिटेन ने की है। यूक्रेन मसले पर UNSC में भारत की ओर से कहा गया कि सीमा-विवाद चिंता की बात है। साथ ही यूक्रेन में रह रहे 20000 से ज्यादा भारतीय छात्र और भारतीय लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता भी जताई गई।

रूस-यूक्रेन मसले पर चल रही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में यूक्रेन के राजदूत ने कहा कि वो शांति चाहते हैं। उनके अनुसार वो रूस के उकसावे के आगे झुकेंगे नहीं। उन्होंने कहा कि वो राजनीतिक और राजनयिक समझौते के लिए प्रतिबद्ध हैं।

रूस ने यूक्रेन सीमा-विवाद पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में बताया कि वो राजनयिक समाधान के लिए तैयार हैं। रूस के प्रतिनिधि ने हालाँकि यूक्रेन मसले पर पश्चिमी देशों और उनके अगुआ अमेरिका को घेरते हुए कहा कि वो नकारात्मक भूमिका निभा रहे हैं।

रूस पर दबाव बनाने के लिए अमेरिका ने प्रतिबंध वाली नीति अपनाई है। राष्ट्रपति जो बायडेन ने रूस द्वारा स्वतंत्र माने गए डोनेत्स्क (Donetsk) और लुहांस्क (Luhansk) के साथ अमेरिकी व्यापार और निवेश को प्रतिबंधित करने के लिए एक कार्यकारी आदेश जारी किया।

डोनेत्स्क (Donetsk) और लुहांस्क (Luhansk) को रूस द्वारा स्वतंत्र देश की मान्यता मिलने पर यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने कहा कि वो डरे नहीं हैं। इसके साथ ही उन्होंने उम्मीद की है कि विश्व के अन्य देश इस मसले पर यूक्रेन का साथ देंगे।