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‘लाल टोपी के कारनामे’: सपा कार्यकर्ता ने बुर्कानशीं महिला की पीठ पर चिपकाया स्टीकर, समर्थकों ने कहा – ये सहकर्मी के साथ मजाक

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में राह चलती महिला के साथ समाजवादी पार्टी के नेताओं द्वारा बदसलूकी का वीडियो सामने आया है। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण और युवा मामलों एवं खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने इस वीडियो को सोशल मीडिया पर डालते हुए लिखा, “यही है लाल टोपी के काले कारनामे। एक राह चलती महिला के साथ सपा नेता की बदसलूकी देखिए। जहाँ भरे हों ऐसे मनचले, यूपी क्यों उनके साथ चले?” कुछ लोगों ने दावा किया कि ये महिला उनकी सहकर्मी है और ये एक छोटा सा मजाक था।

बताया जा रहा है कि ये वीडियो लखनऊ पश्चिमी विधानसभा क्षेत्र का है। यहाँ से अरमान खान सपा के उम्मीदवार हैं। वीडियो में सपा कार्यकर्ता ‘डोर टू डोर’ अभियान चलते हुए नजर आ रहे हैं। उनके साथ में एक बुर्का पहनी हुई महिला भी दिख रही हैं। लोगों का कहना है कि उक्त महिला के साथ जो हरकत की गई, वो बदतमीजी है। दरअसल, उस वीडियो में एक सपा कार्यकर्ता बुर्कानशीं महिला की पीठ पर स्टीकर चिपका देता है और फिर आगे बढ़ जाता है।

बता दें कि अरमान खान ने 2017 में मायावती की ‘बहुजन समाज पार्टी (BSP)’ से चुनाव लड़ा था। हार के बाद 2018 में वो अखिलेश यादव की सपा में शामिल हो गए। वो एक प्राइवेट सुरक्षा एजेंसी का संचलान करते हैं। उनका कहना है कि जीत के बाद हर घर को शुद्ध पानी उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिकता होगी। उन्होंने महिला सुरक्षा पर ‘पुलिस की कार्यशैली’ ठीक करने की भी बड़ी-बड़ी बातें की थीं। उन्होंने पानी की निकासी के लिए नाले और नालियाँ बनवाने का भी वादा किया है। उनका मुकाबला भाजपा के अंजनी श्रीवास्तव से है।

महिला अधिकार कार्यकर्ता सैय्यद उज़्मा परवीन ने इस घटना का विरोध करते हुए कहा, “171 पश्चिम लखनऊ विधानसभा में सपा के प्रत्याशी के कार्यकर्ताओं ने महिला के हिजाब पर स्टीकर चिपकाया। हमारी महिलाओं से ही कन्विंसिंग कराते हैं और उन्हीं की इज्ज़त नहीं करते। सपा सरकार पहले महिलाओं की इज्ज़त करना सीखें फिर उनके बाप और भाइयों का वोट ले। सपा समर्थकों का ये भी कहना है कि महिला के साथ बदतमीजी नहीं की गई और ये आपसी मजाक था। जबकि अन्य लोगों ने इसे महिलाओं का अपमान बताया।

महाराष्ट्र: अन्ना हजारे 14 फरवरी से करेंगे भूख हड़ताल, सुपरमार्केट में वाइन की बिक्री का कर रहे हैं विरोध

महाराष्ट्र के सुपरमार्केट्स में वाइन बेचने के राज्य सरकार के फैसले का समाजसेवी अन्ना हजारे (Anna Hazare) ने विरोध किया है। एक तरफ सरकार के इस फैसले को लेकर विपक्ष महा विकास अघाड़ी (MVA) सरकार पर लगातार निशाना साध रहा है, वहीं अब अन्ना हजारे के मोर्चा खोलने से सरकार सकते में है। अन्ना हजारे ने कहा है कि वह सुपरमार्केट और वॉक-इन स्टोर के जरिए शराब बेचने के महाराष्ट्र सरकार के फैसले के खिलाफ 14 फरवरी से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल करेंगे।

इससे पहले अन्ना हजारे ने इस पॉलिसी को लेकर कहा था कि नशामुक्ति की दिशा में काम करना सरकार का कर्तव्य है, लेकिन यह देखकर दुख होता है कि सरकार वित्तीय लाभ के लिए फैसले ले रही है, जिसके कारण शराब की लत लगेगी। उन्होंने कहा कि ऐसे फैसले राज्य को किस दिशा में ले जाएँगे यह बड़ा सवाल है? इस दौरान उन्होंने फैसले के खिलाफ अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठने की चेतावनी दी थी।

हजारे ने कहा कि उन्होंने 3 फरवरी को शराब नीति का विरोध करते हुए सीएम को पहला पत्र भेजा था, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने कहा था, “मैं एक रिमांडर लेटर भेज रहा हूँ, क्योंकि राज्य सरकार से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। राज्य सरकार ने हाल ही में सुपरमार्केट और किराने की दुकानों में शराब की बिक्री की अनुमति देने का फैसला किया है। यह निर्णय राज्य के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है और यह आने वाली पीढ़ियों के लिए खतरनाक होगा। इस फैसले का विरोध करने के लिए मैंने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर जाने का फैसला किया। मैंने इस संबंध में सीएम और डिप्टी सीएम (अजीत पवार) को एक पत्र भेजा था, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।”

इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि शराब बिक्री के फैसले के खिलाफ महाराष्ट्र में एक साथ आंदोलन शुरू किया जाएगा। अन्ना हजारे ने पिछले साल भी सरकार के आदेशों पर सवाल उठाया था। उन्होंने एक बयान में कहा था कि शराब की दुकानों में लंबी लाइनें राज्य सरकार को ठीक लगती हैं, लेकिन मंदिरों को खोलना उसे सही नहीं लगता।

बता दें कि महाराष्ट्र में सुपरमार्केट और किराना दुकानों में शराब की बिक्री की अनुमति दी गई है। इसके लिए राज्य मंत्रिमंडल ने प्रस्ताव पास किया है। ठाकरे सरकार के इस फैसले को लेकर महाराष्ट्र की सियासत में घमासान मचा हुआ है। बीजेपी ने भी इस फैसले की आलोचना की थी। भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने इस फैसले की आलोचना करते हुए महाराष्ट्र को ‘मद्य-राष्ट्र (शराब राज्य)’ बनाने का भी आरोप लगाया। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि महा विकास आघाड़ी सरकार ने महामारी के दो साल के दौरान लोगों की मदद नहीं की, लेकिन इसकी प्राथमिकता शराब की बिक्री को बढ़ावा देना है।

वहीं शिवसेना सांसद संजय राउत (Sanjay Raut) ने इस फैसले के बचाव में अजीबोगरीब तर्क देते हुए कहा था कि वाइन, शराब (liquor) नहीं है और इसकी बिक्री बढ़ने से किसानों को फायदा होगा। संजय राउत ने समाचार एजेंसी ANI से कहा कि सरकार ने किसानों की आय को दोगुना करने के लिए यह निर्णय लिया है। उन्होंने कहा, “वाइन, शराब नहीं है। अगर वाइन की बिक्री बढ़ती है तो इसका फायदा किसानों को मिलेगा। हमने किसानों की आय को दोगुना करने के लिए ऐसा किया है।”

‘आजम खान की बुराई करने वाले लोगों का कर दो हुक्का-पानी बंद’ : शौहर के नाम पर डॉ तंजीन फातिमा ने समर्थकों को भड़काया, कहा- कोर्ट में नहीं मिलेगा इंसाफ

समाजवादी पार्टी सांसद आजम खान इस बार जेल से चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में रामपुर शहर की विधायक और उनकी बीवी डॉ तंजीन फातिमा ने अपने शौहर के लिए ग्राउंड पर उतरकर प्रचार करना शुरू कर दिया है। तंजीन फातिमा ने एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जो लोग आजम खान के जेल जाने से खुश हैं, उनका बुरा चाहते हैं, उनका सामाजिक तौर पर बहिष्कार होना चाहिए। 

डॉ तंजीन ने सभा में उन लोगों पर निशाना साधा जो उनके शौहर को मिली सजा से सहमत हैं। उन्होंने अपने समर्थकों से कहा, “ऐसे लोगों का हुक्का-पानी बंद करें। उनके यहाँ शादी-विवाह में न जाएँ। ऐसे लोग आपकी खुशियों से भी चिढ़ते हैं। उनके घरों के शादी-ब्याह से अलग हो जाएँ। उनसे बोलें कि जब तुम हमारी खुशी में शामिल नहीं हो सकते तो हम तुम्हारी खुशी में शामिल नहीं होंगे।”

आजम खान के प्रचार में उतरीं उनकी बीवी डॉ तंजीन ने न्याय व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा, “इस सरकार में इंसाफ मिल पाना बहुत मुश्किल है… अगर आपको आजम खान को बाहर लेकर आना है तो समाजवादी पार्टी को वोट देना होगा।”

इसके बाद डॉ. तंजीन ने अपने समर्थकों को गृहमंत्री अमित शाह के शब्द याद दिलाए जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर आजम खान को अंदर रखना है तो वोट दो। इस बात को याद दिलाते हुए तंजीन ने कहा, “जब गृहमंत्री ऐसा कह सकते हैं तो इसका मतलब है कि न्यायालय की कोई भूमिका ही नहीं रही है। न्यायालय की भूमिका ही खत्म हो गई है और इंसाफ माँगने के लिए हमारा न्यायालय जाना बेकार है।”

वह कहती हैं कि आजम खान और अन्य जेल में बंद अन्य बेगुनाहों को इंसाफ नहीं मिल पा रहा। आगे वह अपने समर्थकों को भड़काते हुए कहती हैं, “आप सभी आजम के हिमायती हैं इसलिए आपको भी इस सरकार में इंसाफ नहींं मिल सकता। इसलिए ज़रूरत इस बात की है कि एकतरफा होकर समाजवादी पार्टी को वोट दें।” तंजीन फातिमा ने कहा, “मैं आप लोगों के बीच ज्यादा नहीं आ पाई, ज्यादा राब्ता नहीं रहा।”

आगे उन्होंने अपने घर के हालात बयां किए। वह बोलीं, “शौहर जेल में है। मेरा बेटा और मै खुद जेल में थी। ये सरकार बहुत ही जालिम सरकार है और जाहिल ही नहीं बल्कि एक बहुत ही खुदगर्ज सरकार है। ये देश हित मे कुछ नहीं करना चाहती है। ये केवल उस नीति को अपना रहे हैं जिस नीति को अंग्रेजों ने अपनाया, फुट डालो ओर शासन करो।”

‘लता मंगेशकर राजनेता नहीं, श्मशान बन जाएगा शिवाजी पार्क, ये खेल के मैदान का अतिक्रमण’: स्मारक के विरोध में अजीब तर्क दे रहे महाराष्ट्र के नेता

सुर सम्राज्ञी लता मंगेशकर के निधन के बाद उनकी मेमोरियल बनाने को लेकर राजनीति शुरू हो गई है। भाजपा और कॉन्ग्रेस के नेता ने शिवाजी पार्क में लता मंगेशकर का स्मारक बनाने की माँग की है। वहीं, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे), शिवसेना और बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के पोते प्रकाश अंबेडकर ने इसे राजनीति से प्रेरित बताते हुए विरोध किया है।

बहुजन आघाडी के नेता और भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर के पोते प्रकाश अंबेडकर ने कहा कि शिवाजी पार्क को पार्क ही रहने देना चाहिए, उसके कब्रिस्तान नहीं बनाना चाहिए। खेल मैदान में खेला जाना चाहिए और स्मारक के लिए कई स्थान हैं। अंबेडकर ने कहा, लता मंगेशकर जिंदा थी तो मुझे पूछना चाहिए था कि उन्होंने बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर का गाना क्यों नहीं गाया। प्रकाश अंबेडकर ने कहा कि लता मंगेशकर ने ना बाबा साहेब के गीत गाए और ना ही सरदार पटेल और पंडित जवाहरलाल नेहरू के।

भाजपा विधायक राम कदम और कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने माँग की है कि दादर स्थित शिवाजी पार्क में जहाँ लता मंगेशकर का अंतिम संस्कार किया गया है, वहीं उनका स्मारक बनाया जाए। राम कदम की माँग को शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने छींटाकशी बताया है।

प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, “हमारी पार्टी का और लता मंगेशकर जी का बहुत ही गहरा रिश्ता था। उन्हें जो रेस्पेक्ट मिलना चाहिए उसका पूरी तरह सम्मान करेंगे।” चतुर्वेदी ने कहा कि जब पूरा देश उनके गम में गमगीन है, ऐसे में स्मारक की माँग करना ठीक नहीं है। इस तरह की चर्चा का यह सही समय नहीं है।

शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा कि लता मंगेशकर करोड़ों लोगों की दिलों में हैं और उन्हें कभी भुलाया नहीं जा सकता, वो कोई राजनेता नहीं थीं कि उनकी स्मारक बनाने की माँग की जा रही है। उन्होंने कहा कि स्मारक बनाने की माँग करके राजनीति नहीं होनी चाहिए। उनके स्मारक को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर विचार करने की जरूरत है।

उधर राज ठाकरे की मनसे का भी कहना है कि शिवाजी पार्क को राजनीति की बलि नहीं चढ़ाने दिया जाएगा। मनसे का कहना है कि शिवाजी पार्क खेल के लिए है, इसलिए इसका अतिक्रमण नहीं होना चाहिए। पार्टी नेता संदीप देशपांडे का कहना है कि बाला साहेब ठाकरे और लता मंगेशकर खेलप्रेमी थे। उन्हें यह सब पसंद नहीं आता। देशपांडे ने कहा कि शिवाजी पार्क के लिए दादर के लोगों ने संघर्ष किया है और इसे अतिक्रमण से बचाया है।

बता दें कि शिव सेना प्रमुख बाला साहेब ठाकरे का स्मारक शिवाजी पार्क में ही है। बाला साहेब के बाद लता मंगेशकर दूसरी ऐसी व्यक्ति हैं, जिनका अंतिम संस्कार शिवाजी पार्क में किया गया है। बाला साहेब के अंतिम संस्कार वाले स्थान से कुछ ही दूरी पर लता मंगेशकर का अंतिम संस्कार किया गया था। लता मंगेशकर का रविवार (6 फरवरी) को 92 वर्ष की आयु में देहांत हो गया था।

धर्मांतरण कर हो गए ईसाई, कागज पर बने हुए हैं दलित: पंजाब के एक बड़े समूह का हाल, उठा रहे योजनाओं का लाभ भी

पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले एक ऐसे समुदाय को लेकर चर्चा चल रही है, जो खुद को दलित भी बताता है और ईसाई भी। भारत-पाकिस्तान सीमा से लगे गुरदारसपुर जिले में ईसाइयों की संख्या अधिक बताई जाती है। आँकड़ों की मानें तो राज्य में 1.26% ईसाई है। हालाँकि, पंजाब के प्रमुख राजनीतिक दल ईसाइयों को शायद ही टिकट देते हैं। पंजाब के विधानसभा में पिछले कई वर्षों से कोई ईसाई विधायक नहीं पहुँचा है। ईसाई भी यहाँ तीन प्रमुख समूहों में बँटे हुए हैं।

इनमें सबसे पहला वर्ग वो है, जिनके पूर्वजों ने अंग्रेजों के शासनकाल के दौरान ही ईसाई मजहब अपना लिया था। दूसरे गरीब और अशिक्षित समाज से आते हैं, जिन पर डेरों का अच्छा-खासा प्रभाव है। अब तीसरा सबसे बड़ा समूह जो है, वो ‘दलितों’ का है। इन्होंने आधिकारिक रूप से तो ईसाई धर्मांतरण नहीं किया है, लेकिन वो ईसाई मजहब के हिसाब से ही चलते हैं। राज्य में की ऐसा ईसाई नेता या फिर चर्चा नहीं है, जिसका पंजाब के सभी ईसाइयों में प्रभाव हो।

दलितों के नाम पर राजनीति करने वाली मायावती की ‘बहुजन समाज पार्टी (BSP)’ के महासचिव रहे रोहित खोखर का कहना है कि ईसाई समुदाय के 98% लोग दलित बैकग्राउंड से ही आते हैं। अब रोहित खोखर ‘आम आदमी पार्टी (AAP)’ का हिस्सा हैं। उनका कहना है कि भले ही इन्होंने ईसाई मजहब अपना लिया हो, लेकिन जाति व्यवस्था से वो पीछे नहीं छूटे हैं। उनका दावा है कि सिख हों या ईसाई, जाति हर मजहब में बनी रहती है। उन्होंने ऐसे समूहों को आरक्षण देने की भी वकालत की।

रोहित खोखर ने कहा कि ये वर्ग आधिकारिक रूप से धर्मांतरण भी नहीं कराना चाहता है। यहाँ तक कि वो मतदान के वक्त ही तय करते हैं कि किस मुद्दे के आधार पर वोट देना है। बकौल रोहित खोखर, अगर धार्मिक उत्पीड़न मुद्दा है तो वो एक ईसाई के रूप में मतदान करेंगे। वहीं अगर मुद्दा दलित अधिकार से जुड़ा है, तब वो दलित के रूप में वोट करेंगे। रोहन जोसफ गुरदासपुर में कॉन्ग्रेस पार्टी के जिलाध्यक्ष हुआ करते थे, लेकिन अब वो अकाली दल में शामिल हो चुके हैं।

उनका दावा है कि ईसाई समुदाय अब धीरे-धीरे कॉन्ग्रेस से दूर होता चला जा रहा है। जबकि रोहित खोखर का कहना है कि 2020 में अनवर मसीह के विरुद्ध दर्ज किए गए मामले के बाद ईसाई समुदाय अकालियों की तरफ से विश्वासघात महसूस कर रहे हैं। बता दें कि अनवर मसीह अकाली दल के दिग्गज नेता और मंत्री रहे बिक्रम सिंह मजीठिया के करीबी हैं। उन्हें 2014 में ‘अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड’ में नियुक्त किया गया था। 2020 में उनकी इमारत से 197 किलोग्राम हेरोइन बरामद की गई।

रोहित खोखर का दावा है कि पंजाब में AAP की लहर चल रही है, लेकिन कॉन्ग्रेस द्वारा दलित नेता चरणजीत सिंह चन्नी के चेहरे पर दाँव खेलने के कारण अरविंद केजरीवाल की पार्टी को नुकसान हो सकता है। उनका आकलन है कि इससे AAP के पक्ष में मतदान का मन बनाए दलितों का एक समूह अपना वोट कॉन्ग्रेस को दे सकता है। पंजाब विधानसभा चुनाव में कई ईसाई नेता निर्दलीय ताल ठोक रहे हैं। डोमिनिक मट्टू भी उनमें से एक हैं। उनका कहना है कि AAP और भाजपा गठबंधन का हिस्सा पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की नई पार्टी ‘पंजाब लोक कॉन्ग्रेस’ ने उन्हें टिकट नहीं दिया।

इसी तरह अजनाला से सोनू जाफर निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। उनका कहना है कि राजनीतिक दलों ने उन्हें भी टिकट नहीं दिया। अनौपचारिक रूप से धर्मांतरण करा चुके दलित समुदाय के कई लोग अपनी जाति की पहचान और मिल रहे लाभ से वंचित होने के डर से अपना रजिस्ट्रेशन ईसाई के रूप में नहीं कराते हैं। ईसाई नेताओं का कहना है कि इससे सरकारी आँकड़ों में ईसाइयों की जनसंख्या कम होती है और इसीलिए इस समाज को टिकट राजनीतिक दलों से नहीं मिलता।

इंस्टाग्राम किड्स को बंद करो: जुकरबर्ग को 70 धार्मिक नेताओं का पत्र, बाइबिल-कुरान-पोप का दिया हवाला

फेसबुक (Facebook) की बच्चों को लेकर बनी ‘इंस्टाग्राम किड्स’ (Instagram Kids) योजना मुश्किल में पड़ती जा रही है। इसका लगातार विरोध किया जा रहा है। इसी क्रम में एडवोकेसी समूह फेयरप्ले और चिल्ड्रेन्स स्क्रीन टाइम एक्शन नेटवर्क (CSTAN) के साथ-साथ पादरी, रब्बी और अन्य धार्मिक नेताओं ने फेसबुक (मेटा) के सीईओ मार्क जुकरबर्ग को एक पत्र लिखकर कंपनी से इसे स्थायी तौर पर बंद करने का आग्रह किया है।

फेयरप्ले द्वारा लिखे गए पत्र में 70 से अधिक धार्मिक नेताओं के हस्ताक्षर हैं। इस पत्र में कहा गया है, “सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लाभ कमाने के उद्देश्य के लिए जिस तरह से अपरिपक्व बच्चों को टार्गेट करता है और अनैतिक रूप से डेटा को एकत्रित करता है, उससे बच्चों की अच्छाई के लिए यह सही उपकरण नहीं है। “

हाल के महीनों में इंस्टाग्राम (Instagram) और उसकी पैरेंट कंपनी फेसबुक (मेटा) के व्हिसिलब्लोअर फ्रांसिस हॉगेन द्वारा लीक किए गए आंतरिक दस्तावेजों के बाद बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, प्लेफॉर्म की बॉडी इमेज और इनकी सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। पिछले साल दिसंबर में बच्चों की ऑनलाइन सेफ्टी को लेकर एक सीनेट पैनल ने इंस्टाग्राम के प्रमुख एडम मोसेरी से पूछताछ की थी। संभावित जोखिम को ध्यान में रखते हुए मेटा की भी जाँच की जा रही है।

हालाँकि, लीक डॉक्यूमेंट पर मेटा ने स्पष्टीकरण दिया था कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल कंपनी की इमेज को धूमिल करने के लिए किया जा रहा है। अपने विवादित ‘इंस्टाग्राम किड्स’ का बचाव करते हुए कंपनी ने ये भी कहा था कि उसका मकसद यूथ यूजर्स को बातचीत करने के लिए एक सुरक्षित और समर्पित फील्ड देना है। बता दें कि पत्र में धार्मिक नेताओं ने बाइबिल, कुरान, पोप फ्रांसिस और बौद्ध भिक्षु थिच नहत हान के संदर्भों का जिक्र किया गया था।

गौरतलब है कि दूसरी सोशल मीडिया साइटों की तरह ही इंस्टाग्राम ने भी 13 साल से कम उम्र के बच्चों के प्लेटफॉर्म के उपयोग को प्रतिबंधित कर रखा है। हालाँकि, बाद में कंपनी ने 13 साल के बच्चों को टार्गेट कर ‘इंस्टाग्राम किड्स’ को लॉन्च करने की योजना बनाई थी। अमेरिका में इसका काफी विरोध हुआ, जिसके बाद इसे रोक दिया गया है।

जमात ने की इस्लामी ड्रेस की डिमांड, दिसंबर से पहनने लगीं बुर्का: अल्लाह हू अकबर वाली लड़की को जमीयत देगा ₹5 लाख, पाकिस्तान से भी वाहवाही

कर्नाटक में शुरू हुए बुर्के विवाद के कनेक्शन धीरे-धीरे इस्लामी कट्टरपंथियों से जुड़ते जा रहे हैं। पिछले दिनों एक रिपोर्ट सामने आई थी जिसमें बताया गया था कि कैसे हिजाब पहन कर क्लास में बैठने की जिद्द करने वाली मुस्लिम छात्राएँ पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के छात्र संगठन ‘कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया’ से संपर्क में आई थीं। उसके बाद उन्हें हिजाब पहनने का ख्याल आना शुरू हुआ और इसके बाद उन्होंने अपनी स्कूल यूनिफॉर्म रूल्स को ताक पर रख कर अपनी जिद्द पकड़ ली। उनके द्वारा शुरू किए गए इस बवाल के बाद जब हिंदुओं ने इसका विरोध किया, तो कुछ जगह उन पर पत्थरबाजी हुई और एक जगह एक मुस्लिम छात्रा हिंदू भीड़ के आगे आकर अल्लाह-हू-अकबर का नारा देकर पाकिस्तान तक में फेमस हो गई।

हिजाब पहनने की माँग शुरू हुई CFI काउंसलिंग के बाद

बता दें कि कॉलेज प्रशासन का कहना है कि कॉलेज में 150 के करीब मुस्लिम छात्राएँ हैं लेकिन कभी ऐसी माँग नहीं की गई। कॉलेज के अनुसार, ये 8 लड़कियाँ सीएफआई से जुड़ी हुई हैं। लड़कियों ने भी माना है कि इन्होंने कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया के लोगों से काउंसलिंग ली थी। इनका कहना है कि शुरू में इन्हें लगा कि इनके अभिभावकों ने कोई फॉर्म साइन किया है जिसमें हिजाब पहनना प्रतिबंधित है। लेकिन बाद में पता चला कि ऐसा कुछ नहीं है। लड़कियों के अनुसार हिजाब के लिए उनके घरवालों ने कॉलेज से बात की थी मगर उसकी सुनवाई नहीं हुई। इसलिए वह स्कूल में खुद ही हिजाब पहनकर आ गईं। रिपोर्ट बताती है कि अक्टूबर के माह में कुछ मुस्लिम लड़कियों ने एबीवीपी के प्रोटेस्ट में भाग लिया था। जब पीएफआई ने इसे देखा तो वो नाराज हो गए और बताया कि मुस्लिमों को नहीं पता था कि वो एबीवीपी का प्रदर्शन है। उनकी सीएफआई द्वारा काउंसलिंग कर दी गई है।

सऊदी से फंड पाने वाले संगठन जमात-ए-इस्लामी हिंद चाहता है स्कूलों में बुर्का

जानकारी के अनुसार, इस पूरे मामले में न केवल कट्टरपंथी समूह पीएफआई का छात्र संगठन अपनी भूमिका अदा कर रहा है बल्कि जमात-ए-इस्लामी हिंद भी लड़कियों को हिजाब पहनाने के लिए सक्रिय है। 30 दिसंबर 2021 को इसके छात्र संगठन ‘स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गेनाइजेशन’ ने प्रशासन अधिकारियों से इस्लामी ड्रेस कोड लागू करवाने के लिए मुलाकात की थी। ये जमात-ए- इस्लामी हिंद के बारे में बता दें कि इन्हें इस्लामी ड्रेस कोड लागू करवाने के लिए सऊदी अरब से पैसा आता है। ये खुलासा पिछले वर्ष क्लबहाउस चर्चा के समय हआ था कि इन संगठनों को जेद्दाह की अब्दुल आजिज यूनिवर्सिटी से फंड आता है। इस संगठन को भारत सरकार ने बैन भी किया हुआ है

अल्लाह-हू-अकबर कहने वाली मुस्कान को जमीयत उलेमा-ए-हिंद से 5 लाख रुपए का इनाम

इतना ही नहीं, हाल में चल रहे विवाद में एक मुस्कान खान की वीडियो वायरल हुई थी जो हिंदू भीड़ के सामने जाकर अल्लाह हू अकबर का नारा लगा रही थी। उसकी वीडियो देखने के बाद कट्टरपंथियों का परा समूह इतना खुश है कि मुस्कान खान को 5 लाख रुपए का इनाम देने की घोषणा की है। जमीयत उलेमा ए हिंद के ट्वीट में देखा जा सकता है कि हिजाब को बुनियादी अधिकार बताते हुए कहा गया कि इससे किसी को वंचित नहीं रखा जा सकता। बुर्का पहन सड़क पर उतरी मुस्कान खान की तारीफें पाकिस्तान में भी हुई हैं। उनके द्वारा लगाए गए अल्लाह हू अकबर के नारे को ‘हिंदुत्व को जवाब’ बताया जा रहा है। मुश्ताक अहमद उसके लिए लिखथे हैं कि ये लड़की हिंदुत्व के घोर अंधेरे में उनके लिए एक उजाला है।

तो अब बिकनी में क्लास करेंगी छात्राएँ? प्रियंका गाँधी के बयान पर लोगों ने पूछा, मलाला ने कहा – हाशिए पर जा रहीं मुस्लिम महिलाएँ

कर्नाटक से शुरू हुए बुर्का विवाद को लेकर पूरे देश में बहस और हंगामा जारी है। विवाद पर लोग कई तरह की प्रतिक्रियाएँ दे रहे हैं। अब इस मामले में पाकिस्तान की सामाजिक कार्यकर्ता मलाला यूसुफजई के साथ ही कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी ने भी ट्वीट किया है। मलाला ने जहाँ स्कूलों में लड़कियों को हिजाब पहनकर प्रवेश देने से रोकने को भयावह बताया तो वहीं प्रियंका गाँधी का कहना है कि महिलाओं को अपने हिसाब से कपड़े पहनने का हक है।

मामले पर टिप्पणी करते हुए मलाला यूसुफजई ने ट्वीट किया, “हिजाब पहनी हुई लड़कियों को स्कूलों में एंट्री देने से रोकना भयावह है। कम या ज्यादा कपड़े पहनने के लिए महिलाओं का वस्तुकरण (Objectification) किया जा रहा है। भारतीय नेताओं को मुस्लिम महिलाओं को हाशिए पर जाने से रोकना चाहिए।”

वहीं प्रियंका गाँधी ने लिखा, “चाहे वह बिकिनी हो, घूँघट हो या फिर जींस या फिर हिजाब. यह महिला को तय करना है कि उसे क्या पहनना है। यह हक उनको भारत के संविधान ने दिया है। महिलाओं को प्रताड़ित करना बंद करो।” ट्वीट के अंत में प्रियंका ने अपने कैंपेन का हैशटैग ‘लड़की हूँ, लड़ सकती हूँ’ भी लगाया है।

हालाँकि प्रियंका गाँधी के ट्वीट पर लोगों ने काफी तीखे कमेंट्स किए और सवाल भी पूछे। एक यूजर ने लिखा, “यार तुम पप्पू पिंकी ने मन बना लिया है कॉन्ग्रेस को और गर्त में डालने का, भारत में ऐसा कोई स्कूल नहीं है जहाँ बिकनी पहन के बच्चे स्कूल जाते हैं, हाँ अगर आपके बच्चे अगर इटली मे पढ़े हों बिकनी मे तो ये अलग बात है।”

सुनील यादव ने लिखा, “मुझे नहीं लगता आप स्कूल गई या नहीं (हो सकता है स्कूल आपके लिए घर आई हो) तो आपकों स्कूल युनिफार्म या स्कूल नियमों के बारे मे पता हो की स्कूल कैसे जाना होता है।”

एक यूजर ने तर्क दिया-संविधान स्कूल/कॉलेज को ड्रेस कोड जारी करने का अधिकार भी देता है जिसका पालन करना हर विद्यार्थी के लिए अनिवार्य है। चाहे बिकिनी पहनो या हिजाब लेकिन हर वस्त्र पहनने की एक जगह होती है। स्कूल में ड्रेस कोड मानना ही होगा।

एक यूजर ने तर्क दिया कि संविधान स्कूल/कॉलेज को ड्रेस कोड जारी करने का अधिकार भी देता है जिसका पालन करना हर विद्यार्थी के लिए अनिवार्य है। चाहे बिकनी पहनो या हिजाब लेकिन हर वस्त्र पहनने की एक जगह होती है। स्कूल में ड्रेस कोड मानना ही होगा।

वहीं एक यूजर ने राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के 2019 के एक बयान का जिक्र किया। इसमें राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा था कि समाज को एक महिला तो घूँघट में कैद करने का अधिकार नहीं है, नारी को घूँघट में कैद नहीं कर सकते। सुयश कुमार ने इसे शेयर करते हुए लिखा, “वाह दीदी, घूँघट और हिजाब में सोच का इतना फर्क क्यों।”

इससे पहले राहुल गाँधी ने इसी मामले पर ट्वीट करते हुए लिखा था, “हिजाब को शिक्षा के रास्‍ते में लाकर भारत की बेट‍ियों का भविष्‍य बर्बाद किया जा रहा है।” राहुल गाँधी ने भाजपा पर तंज कंसते हुए कहा था, “माँ शारदा सभी को बुद्धि दें।”

उल्लेखनीय है कि कर्नाटक के उडुपी में स्थित पीयू कॉलेज से शुरू हुए पूरे विवाद ने अब राज्य को जगह-जगह सुर्खियों में ला दिया है। इस मसले पर कर्नाटक हाईकोर्ट में सुनवाई जारी है। वहीं सीएम बोम्मई ने कहा, “मैं सभी स्कूल-कॉलेजों के छात्रों, शिक्षकों और प्रबंधन के साथ-साथ कर्नाटक की जनता से आग्रह करता हूँ कि राज्य में शांति और सामंजस्य बनाए रखें। मैंने अगले 3 दिनों के लिए सभी कॉलेजों और हाई स्कूलों को बंद करने का आदेश जारी किया है।”

नोट: भले ही इस विरोध प्रदर्शन को ‘हिजाब’ के नाम पर किया जा रहा हो, लेकिन मुस्लिम छात्राओं को बुर्का में शैक्षणिक संस्थानों में घुसते हुए और प्रदर्शन करते हुए देखा जा सकता है। इससे साफ़ है कि ये सिर्फ गले और सिर को ढँकने वाले हिजाब नहीं, बल्कि पूरे शरीर में पहने जाने वाले बुर्का को लेकर है। हिजाब सिर ढँकने के लिए होता है, जबकि बुर्का सर से लेकर पाँव। कई इस्लामी मुल्कों में शरिया के हिसाब से बुर्का अनिवार्य है। कर्नाटक में चल रहे प्रदर्शन को मीडिया/एक्टिविस्ट्स भले इसे हिजाब से जोड़ें, ये बुर्का के लिए हो रहा है।

एक नन ऐसी भी: जुआ खेलने के लिए ₹6 करोड़ की चोरी, लग्जरी ट्रिप पर उड़ाए स्कूल के पैसे

अमेरिका के कैलिफोर्निया में 80 साल की एक नन को जेल की सजा सुनाई गई है। एक कैथोलिक स्कूल का प्रिंसिपल रहते हुए सिस्टर मैरी मार्गरेट ने 835,000 डॉलर (करीब 6.23 करोड़ रुपए) की चोरी की। इस पैसे को जुआ खेलने और लग्जरी छुट्टियॉं बिताने पर खर्च किया।

रिपोर्ट के मुताबिक, मैरी मार्गरेट क्रेपर को 10 वर्षों के दौरान धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग का दोषी ठहराया गया। वह सेंट जेम्स कैथोलिक स्कूल में प्रिंसिपल थी। चोरी किए गए पैसे का इस्तेमाल नन ने आलीशान रिसॉर्ट्स लेक ताहो में लग्जरी ट्रिप लेने के लिए किया था। कोर्ट में मैरी मार्गरेट ने अपना जुर्म कबूल करते हुए कहा, “मैंने पाप किया है। मैंने कानून तोड़ा है और मेरे पास कोई बहाना नहीं है।” क्रैपर ने आगे कहा, “मेरे कार्य मेरी कसमों, मेरी आज्ञाओं, कानून और सबसे बढ़कर उस विश्वास का उल्लंघन था, जो इतने सारे लोगों ने मुझ पर कर रखा था। मैं गलत हूँ इतने सारे लोगों को दुख देने के लिए माफी चाहती हूँ।”

संघीय अदालत में सुनवाई के दौरान दोषी नन के वकील मार्क ब्रायन ने दलील दी कि उसे ‘जुए की लत’ थी और ये कोई बहाना नहीं, बल्कि एक स्पष्टीकरण है। जज ओटिस डी राइट ने कहा कि मार्गरेट कई दशकों तक एक अच्छी शिक्षिका रही। लेकिन, समय के साथ वो अपने कर्तव्यों से भटक गईं। अदालत ने क्रेपर को एक साल और एक दिन की सजा सुनाई है। इसके अलावा उसे स्कूल को $800,000 (करीब 59,764,816 रुपए) का भुगतान भी करना होगा। जज ने क्रेपर के 28 साल के करियर पर टिपप्णी करते हुए कहा कि हो सकता है कि इस दौरान उन्होंने हजारों छात्रों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डाला हो, लेकिन सच ये भी है कि ये भयानक उदाहरण भी छात्रों को प्रभावित करेगा।

पाकिस्तान में हिंदू शिक्षक को 25 साल की सजा: एहतेशाम ने लगाया था ईशनिंदा का आरोप, बाद में कहा था- मैंने झूठ बोला

पाकिस्तान (Pakistan) के सिंध प्रांत में ईशनिंदा (Blasphemy) के आरोप में मंगलवार (8 फरवरी 2022) को स्थानीय अदालत ने एक हिंदू शिक्षक को 25 साल की कारावास की सजा सुनाई। सिंध के घोटकी में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश मुर्तजा सोलंगी ने हिंदू शिक्षक नौतन लाल पर 50 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। वह विचाराधीन कैदी के तौर पर 2019 से जेल में बंद हैं। उनकी जमानत याचिका भी दो बार खारिज हो चुकी है।

बता दें कि एक निजी स्कूल के मालिक और प्रिंसिपल नौतन लाल पर मोहम्मद एहतेशाम नाम के एक छात्र ने उर्दू कक्षा के दौरान पैगंबर मोहम्मद का ‘अपमान’ करने का आरोप लगाया गया था। हालाँकि बाद में छात्र ने कहा था कि उसने झूठ बोला था।

पत्रकार आदित्य राज कौल ने बताया है कि पाकिस्तान की अदालत ने मोहम्मद एहतेशाम के कबूलनामे पर विचार नहीं किया और दबाव में नौतन लाल को दोषी ठहराया। सितंबर 2019 में सिंध पब्लिक स्कूल के एक हिंदू प्रिंसिपल के खिलाफ पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ कथित रूप से अपमानजनक टिप्पणी करने के लिए FIR दर्ज की गई थी।

छात्र द्वारा लगाए गए झूठे आरोप के बाद, घोटकी के निवासियों द्वारा हिंसा और तोड़फोड़ की गई। सड़कों पर विरोध-प्रदर्शन किया गया। स्कूल और क्षेत्र के एक हिंदू मंदिर को भी नुकसान पहुँचाया गया। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए लाल को पाकिस्तान दंड संहिता के अनुच्छेद 295 (C) के तहत हिरासत में लिया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, लाल को हिरासत में लेने के बाद उनसे घटना के बारे में पूछताछ की गई। साथ ही मोहम्मद एहतेशाम से भी पूछताछ की गई। मोहम्मद एहतिशाम ने तब आरोपों की पुष्टि की थी कि लाल ने पैगंबर के जीवन और दो पवित्र शहरों के बीच यात्रा पर एक पाठ के दौरान उनका ‘अपमान’ किया था। लेकिन जैसे ही यह मामला सोशल मीडिया और पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में बड़े पैमाने पर फैल गया, मोहम्मद एहतेशाम ने कबूल किया कि उसने झूठ बोला था। उसने सोशल मीडिया पर लिखा था, “नौतन सर ने ऐसा कुछ नहीं बोला था। मुझे तो सिर्फ पाठ याद नहीं था तो उन्होंने मुझ पर थोड़ा गुस्सा किया। फिर मुझे बहुत गुस्सा आया तो मैंने ऐसे ही वीडियो बना दी। मुझे माफ कर दें। मुझे नहीं पता था कि बात इतनी बढ़ जाएगी। नौतन सर मुझे माफ कर दें। प्लीज इस वीडियो को शेयर न करे। यह सब झूठ है।”

मोहम्मद एहतिशाम के सोशल मीडिया पोस्ट का स्क्रीनशॉट

उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यक ईसाई और हिंदू समुदाय के सदस्यों पर ‘ईशनिंदा’ के आरोपों को लेकर हमला करना, जेल भेजना और यहाँ तक कि उन्हें जान से मार देना भी आम बात है। 2021 में पैगंबर मोहम्मद के ‘अपमान’ के आरोप में पाकिस्तान में एक हिंसक भीड़ द्वारा एक श्रीलंकाई व्यक्ति को बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया गया था। यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन फॉर इंटरनेशनल रिलिजियस फ़्रीडम (USCIRF) के अनुसार, पाकिस्तान में ईशनिंदा के आरोपों के सिलसिले में 1990 से अब तक 75 से अधिक लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया है और 40 से अधिक या तो आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं या मौत की कगार पर हैं।