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कर्नाटक में बवाल के बीच MP के स्कूलों में बैन होगा बुर्का? शिक्षा मंत्री ने कहा- ये यूनिफॉर्म का हिस्सा नहीं, लागू होगा ड्रेस कोड

कर्नाटक के कॉलेज में बुर्का पहन कर क्लास में बैठने के लिए शुरू हुए विवाद ने विभिन्न राज्यों को सचेत कर दिया है। इसी क्रम में मध्य प्रदेश सरकार हिजाब को बैन करने पर विचार कर रही है। राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा है कि छात्रों को केवल स्कूल ड्रेस पहनने की अनुमति दी जाएगी और हिजाब स्कूल ड्रेस का पार्ट नहीं है।

स्कूल शिक्षा विभाग अब स्कूलों की जाँच करेंगे और देखेंगे कि क्या स्कूल संबंधी गाइडलाइन्स का पालन किया जा रहा है। मंगलवार को स्कूल शिक्षा मंत्री ने मीडिया द्वारा स्कूलों में हिजाब पर सवाल किए जाने पर साफ कहा कि हिजाब स्कूल की ड्रेस नहीं है। 

कर्नाटक के पूरे मसले को देखते हुए उन्होंने कहा कि विभाग एक यूनिफॉर्म ड्रेस कोड पर काम कर रहा है और इसका किसी मजहब या समुदाय से कोई लेना-देना नहीं है। परमार ने वीडियो बयान में कहा कि विभाग स्कूल के ड्रेस कोड पर काम कर रहा है जो कि सिर्फ एकरूपता और समानता लाने के लिए है। हिजाब बैन किए जाने के सवाल पर परमार ने कहा कि यूनिफॉर्म किसी समुदाय की नहीं होती, ये सबके लिए है। लेकिन ये देखना दुखद है कि लोग इसे कम्युनिटी से जोड़ रहे हैं।

इस पूरे मामले पर भोपाल मध्य से कॉन्ग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने मंत्री के इस पूरे बयान को दुखद बताया है। आरिफ मसूद का कहना है कि लड़कियाँ जब ढकी होती हैं तो अच्छी लगती है। वह बोले कि परमार को शिक्षा के स्तर पर सोचना चाहिए।ये एक सच्चाई है कि हिजाब ने कभी भी शिक्षा को पिछले 70 सालों में कोई नुकसान नहीं पहुँछाया। एक समय था जब लोगों को मास्क लगाने की सलाह दी जाती थी। कॉन्ग्रेस विधायक ने कहा कि अगर ऐसा कुछ लागू किया गया तो उसका विरोध किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि कर्नाटक के उडुपी में स्थित पी यू कॉलेज से शुरू हुए पूरे विवाद ने अब राज्य को जगह-जगह सुर्खियों में ला दिया है। कल इसी विषय पर कर्नाटक हाईकोर्ट में सुनवाई हुई जबकि सीएम बोम्मई ने कहा, “मैं सभी स्कूल-कॉलेजों के छात्रों, शिक्षकों और प्रबंधन के साथ-साथ कर्नाटक की जनता से आग्रह करता हूँ कि राज्य में शांति और सामंजस्य बनाए रखें। मैंने अगले 3 दिनों के लिए सभी कॉलेजों और हाई स्कूलों को बंद करने का आदेश जारी किया है।”

नोट: भले ही इस विरोध प्रदर्शन को ‘हिजाब’ के नाम पर किया जा रहा हो, लेकिन मुस्लिम छात्राओं को बुर्का में शैक्षणिक संस्थानों में घुसते हुए और प्रदर्शन करते हुए देखा जा सकता है। इससे साफ़ है कि ये सिर्फ गले और सिर को ढँकने वाले हिजाब नहीं, बल्कि पूरे शरीर में पहने जाने वाले बुर्का को लेकर है। हिजाब सिर ढँकने के लिए होता है, जबकि बुर्का सर से लेकर पाँव। कई इस्लामी मुल्कों में शरिया के हिसाब से बुर्का अनिवार्य है। कर्नाटक में चल रहे प्रदर्शन को मीडिया/एक्टिविस्ट्स भले इसे हिजाब से जोड़ें, ये बुर्का के लिए हो रहा है।

उत्तर प्रदेश में बम ब्लास्ट की साजिश का पर्दाफाश, NIA ने अलकायदा आतंकी तौहीद अहमद शाह को गिरफ्तार किया: कश्मीर का है रहने वाला

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने सोमवार (7 फरवरी 2022) को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आईईडी विस्फोट की साजिश में शामिल अलकायदा (Al-Qaeda) के एक सदस्य को गिरफ्तार किया। जाँच एजेंसी के एक अधिकारी ने मंगलवार (8 फरवरी, 2022) को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले के निवासी तौहीद अहमद शाह (Tawheed Ahmad Shah) को गिरफ्तार किया गया। इससे पहले एनआईए ने इस मामले में 5 आरोपितों को गिरफ्तार किया था, जिनके खिलाफ 5 जनवरी 2022 को चार्जशीट दाखिल की गई थी।

एनआईए अधिकारी ने कहा, “उत्तर प्रदेश के आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) ने पिछले साल 14 जुलाई को अलकायदा से जुड़े तीन संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया था। इनकी पहचान शकील, मो मुस्तकीम और मुईद के तौर पर हुई थी। इन तीनों ने लखनऊ में आतंकवादी घटना को अंजाम देने के लिए अल-कायदा के सहयोगी संगठन अंसार गजवतुल हिंद (एजीएच) के लिए सदस्यों की भर्ती करने की साजिश रची थी।”

एनआईए अधिकारी ने यह भी बताया कि तौहीद उत्तर प्रदेश में हमलों के लिए इस्तेमाल होने वाले हथियारों, गोला-बारूद और विस्फोटक सामग्री की खरीद सहित एजीएच के नाम पर भर्ती और आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने का मास्टरमाइंड था।

‘PM मोदी कुछ भी बोलते रहते हैं, चुनाव लड़ के संसद में आकर जवाब दूँगा’: व्हीलचेयर से पटना पहुँचे लालू यादव ने दिखाई हेकड़ी

राजद सुप्रीमो लालू यादव मंगलवार (8 फरवरी, 2022) की शाम को बिहार की राजधानी पटना पहुँचे। राजद कार्यकर्ताओं ने काफी गर्मजोशी से उनका स्वागत किया। पटना पहुँचने से पहले उन्होंने दिल्ली में पत्रकारों के साथ भी बातचीत की। इस दौरान उन्होंने सक्रिय राजनीति में वापसी करने और चुनाव लड़ने तक की भविष्यवाणी कर डाली। उन्होंने कहा कि अदालत से उन्हें चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं मिली है, ऐसे में अनुमति मिलते ही वो चुनाव लड़ कर संसद आएँगे।

लालू यादव ने कहा, “लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कुछ भी बोलते रहते हैं। मैं संसद में पहुँच कर उनकी बातों का जवाब दूँगा।” इस दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी निशाना साधा। यूपी विधानसभा चुनाव से पहले लालू यादव ने कहा कि सीएम योगी की बातों से लगता है कि वो नर्वस हो गए हैं। उन्होंने कहा कि अब ये साफ़ लग रहा है कि उत्तर प्रदेश में भाजपा का सफाया होने वाला है। लालू यादव पटना में व्हीलचेयर से एयरपोर्ट से बाहर निकले।

राजद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में पूर्व उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को पार्टी की कमान दिए जाने की चर्चा के सम्बन्ध में लालू यादव ने कहा कि मीडिया में ये बातें आती रहती हैं। उन्होंने दावा किया कि राजद के राष्ट्रीय अधिवेशन का ये मुद्दा ही नहीं है। उन्होंने कहा कि पहले भी ये चीज साफ़ की जा चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और जदयू साथ आने के बावजूद बिहार को विशेष राज्य का दर्जा नहीं दिला रहे हैं। उन्होंने भाजपा पर गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा मिलना चाहिए।

पटना पहुँचने पर लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव समेत राजद के कई नेताओं ने उनका स्वागत किया। लालू यादव एयरपोर्ट से 10 सर्कुलर रोड स्थित अपने आवास पहुँचे। वहाँ उन्होंने अपनी पार्टी के कई नेताओं से मुलाकात की। राज्यसभा सांसद डॉक्टर मीसा भारती भी उस दौरान वहाँ मौजूद थीं। एयरपोर्ट पर लालू यादव के समर्थकों की भी भीड़ जुट गई थी। 15 फरवरी को लालू यादव को चारा घोटाला मामले में राँची की एक अदालत में भी पेश होना है।

‘मानवाधिकार की धज्जियाँ उड़ाती हैं पैगम्बर की बायोग्राफी’: केरल में 2000 लोगों ने छोड़ा इस्लाम, किए जा रहे प्रताड़ित

केरल की आयशा मर्केराउज इस्लाम छोड़कर नास्तिक बन गई है। उन्होंने दैनिक भास्कर को बताया कि वह करीब 10 सालों से ऊहापोह की स्थिति में थीं। इस्लाम को लेकर उनके भीतर सवाल ही सवाल थे, जिसके चलते उन्होंने कुछ साल पहले पैगंबर मोहम्मद की बायोग्राफी पढ़ी। उनका कहना है कि जैसे-जैसे मैं इस किताब को पढ़ती गई, मेरा इरादा पक्का होता गया। उन्होंने बताया कि उस किताब में दासता और औरतों को लेकर जो बातें लिखी गई हैं, वह मानवाधिकारों की धज्जियाँ उड़ाती है।

आयशा का कहना है, “इसलिए, मैंने दिसंबर 2021 में मस्जिद जाकर इस्लाम छोड़ने का फैसला किया।” आयशा की ही तरह केरल के कई ऐसे लोग हैं, जो इस्लाम छोड़ चुके हैं, लेकिन इस मजहब को छोड़ने वालों के साथ मुस्लिम लोग बहुत बुरा बर्ताव करते हैं। आयशा बताती हैं कि मेरे घर वाले बातचीत तो करते हैं, पर अब पहले वाली बात नहीं रही।

जनवरी 2022 से केरल में एक संगठन लगातार चर्चा में बना हुआ है। उसका नाम ‘एक्स मुस्लिम्स ऑफ केरल’ (Ex-Muslim of Kerala) है। इस संगठन के अध्यक्ष डॉक्टर आरिफ हुसैन थेरुवथ कहते हैं, “पिछले एक साल में केरल में रिकॉर्ड 300 लोग इस्लाम छोड़ चुके हैं। आँकड़ों से इतर बात करें तो करीब 2000 लोग हमारे संपर्क में हैं, जो इस्लाम छोड़ चुके हैं। ऐसे भी बहुत लोग होंगे जो हमारे संपर्क में नहीं आ पाए हैं।”

डॉ. आरिफ आगे कहते हैं, “लोग इसलिए अपनी पहचान छिपाकर रखते हैं, क्योंकि समाज ऐसे लोगों को काफिर (नास्तिक) और अनैतिक करार दे देती है। यही नहीं, उस शख्स का बहिष्कार किया जाता है। उसके प्रॉपर्टी समेत तमाम तरह के अधिकार उससे छीन लिए जाते हैं। शारीरिक, सामाजिक और मानसिक हर तरह से उसे प्रताड़ित किया जाता है।” वे कहते हैं कि वैसे तो हर धर्म नास्तिक लोगों के साथ भेदभाव करता है, लेकिन इस्लाम इस मामले में कट्टर है, जो लोग इस्लाम छोड़ देते हैं, लोग उनके साथ बहुत बुरा व्यवहार करते हैं।

पूरे भारत में हजारों लोग इस्लाम छोड़ चुके हैं, लेकिन डर के कारण खुलकर नहीं बोल रहे। आरिफ यह भी कहते हैं, “इस्लाम में पैगंबर मोहम्मद की बातों को पत्थर की लकीर मानते हैं, लेकिन उनके जीवन को ध्यान से पढ़ें तो उनके अपने कैरेक्टर पर ही सवाल खड़े होते हैं।”

संगठन के प्रेसिडेंट का दावा है कि केरल में यह संस्था पहली बार खुलकर सामने आई है, लेकिन काम करीब 10 साल से चल रहा है। पूरे भारत में भी ‘एक्स मुस्लिम्स ऑफ इंडिया’ नाम से यह संस्था चल रही है। यह संगठन अभी छिपकर काम करता है, पर जल्द ही केरल की तरह पूरे भारत में इस संगठन को पहचान के साथ सामने लाया जाएगा। फिलहाल तमिलनाडु में इस संगठन के रजिस्ट्रेशन का काम जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा।

बता दें कि केरल में इस्‍लाम को छोड़ने वाले लोगों के लिए ‘एक्स मुस्लिम्स ऑफ केरल (Ex-Muslim of Kerala)’ नाम का संगठन बनाया गया है। इसका उद्देश्य इस्लाम छोड़ने वाले लोगों को सहायता प्रदान करना और उन्‍हें समर्थन देना है।

‘उन्हें हमारी अर्थव्यवस्था को अवरुद्ध करने का अधिकार नहीं’: ट्रकर्स प्रदर्शन से भड़के कनाडा के PM ट्रूडो, ‘किसान आंदोलन’ का किया था समर्थन

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो (Justin Trudeau) ने कोविड-19 प्रतिबंधों के खिलाफ ओटावा में प्रदर्शन कर रहे हजारों ट्रक ड्राइवरों को रोकने की माँग की है। ट्रक ड्राइवरों के प्रदर्शन के बाद से ट्रूडो कहीं गुप्त स्थान पर चले गए थे। कई दिनों बाद प्रधानमंत्री ट्रूडो ने संसद के हाउस ऑफ कॉमन्स में (House of Commons) में अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा, “ट्रक ड्राइवरों के प्रदर्शन रोकना होगा।”

उन्होंने इस बात की जानकारी देते हुए अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा, “आज रात हाउस ऑफ कॉमन्स में मैंने ओटावा में जारी स्थिति के बारे में बात की। मैंने कहा कि कनाडा के लोगों को विरोध करने, अपनी सरकार से असहमत होने और अपनी आवाज उठाने का अधिकार है, लेकिन उन्हें हमारी अर्थव्यवस्था, हमारे लोकतंत्र या फिर हमारे दूसरे नागरिकों के रोजमर्रा के जीवन को अवरुद्ध करने का अधिकार नहीं है। इसे रोकना होगा।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं स्पष्ट कहता हूँ, स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए जिन भी संसाधनों की आवश्यकता होगी, हमारी सरकार उसकी व्यवस्था करेगी। हम यहाँ ओटावा के लोगों और देश भर में हमारे लोगों के लिए ही हैं।”

दरअसल, 6 फरवरी 2022 को ओटावा के मेयर जिम वॉटसन ने आपातकाल घोषित कर दिया था। ट्रक वाले 10 दिन से ओटावा में आंदोलन कर रहे हैं। इसको लेकर जिम वॉटसन ने कहा था कि शहर को घेरकर किए जा रहे आंदोलन के चलते यह फैसला लिया गया है। उन्होंने अपने बयान में कहा था, “आपातकाल घोषित किए जाने से साफ है कि इस तरह चल रहे प्रदर्शन लोगों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं। ऐसे मौके पर कनाडा सरकार को सख्त कदम उठाने की जरूरत है, ताकि लोगों की मदद की जा सके।”

बता दें कि कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने वर्ष 2020 में भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करते हुए दिल्ली में चल रहे ‘किसान आंदोलन’ के समर्थन में अपना बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि स्थिति चिंताजनक है और कनाडा हमेशा शांतिपूर्ण ढंग से विरोध प्रदर्शन का समर्थन करता है।

₹50000 करोड़ की जमीन को दरगाह की बता रहा था वक्फ बोर्ड, सुप्रीम कोर्ट ने दिया झटका: सुलझा 33 साल पुराना विवाद

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (8 फरवरी, 2022) को मानिकोंडा जागीर की जमीन से जुड़ी एक दशकों पुरानी याचिका पर सुनवाई करते हुए अहम फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना की राज्य सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये सारी जमीनें राज्य सरकार के स्वामित्व में आती हैं। आंध्र प्रदेश वक्फ बोर्ड ने दावा किया था कि मनिकोंडा गाँव की 1654.32 एकड़ की जमीन दरगाह हजरत हुसैन शाह वली की है। उच्चतम न्यायालय ने इसे नकार दिया।

जस्टिस हेमनाथ गुप्ता और जस्टिस वी रामासुब्रमण्यन की खंडपीठ ने इस मामले में अंतिम फैसला सुनाया। इससे कई सार्वजनिक और प्राइवेट संस्थानों के साथ-साथ जमीन का मालिकाना हक़ रखने वाले कई आम नागरिकों को भी राहत मिली है। जिस जमीन को लेकर सारा विवाद था, वो मनिकोंडा जागीर नामक गाँव में स्थित है। ये इलाका तेलंगाना के रंगारेड्डी जिले के गांडीपेट मंडल में पड़ता है। आज के हिसाब से इस जमीन की कीमत 50,000 करोड़ रुपए के आसपास है।

दरगाह हजरत सैयद हुसैन शाह वली और राज्य सरकार के बीच के विवाद को सुलझाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये सारी जमीन तेलंगाना सरकार की है। सरकार ने ई-ऑक्शन के माध्यम से कई लोगों को इस जमीन के कुछ हिस्से बेचे थे। कई कंपनियों ने भी कुछ हिस्से खरीदे थे, तो वहीं कुछ संस्थानों को भी दिए गए थे। इनमें ‘लैंको हिल्स’, ‘जन चैतन्य हाउसिंग प्राइवेट लिमिटेड’, ‘TNGOS हाउसिंग सोसाइटी’, ‘हैदराबाद पब्लिक सर्विसेज कोऑपरेटिव सोसाइटी’, Phoenix, विप्रो, ISB स्कूल और उर्दू विश्वविद्यालय शामिल हैं।

ये मामला तब प्रकाश में आया था, जब राज्य सरकार ने ‘लैंको हिल्स’ को इंटीग्रेटेड टाउनशिप बसाने के लिए इसमें से कुछ जमीन बेची थी। इसके अलावा ‘Emaar’ नाम का एक विवादित प्रोजेक्ट भी इसी जमीन पर सामने आया था। अदालत ने कहा कि ‘तेलंगाना स्टेट इंडस्ट्रियल इंफ्रास्टक्टर कॉस्पोरेशन’ जमीन का इस्तेमाल कर सकता है। वक्फ बोर्ड ने एक अधिसूचना जारी कर के इस जमीन के स्वामित्व का दावा किया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने ‘अवैध’ बता दिया।

ये गैजेट अधिसूचना 1989 में आंध्र प्रदेश के वक्फ बोर्ड ने जारी की थी। इसमें 5506 स्क्वायर यार्ड्स की जमीन को इसने अपना बताया था। 2016 में इसमें एक और परिशिष्ट जोड़ा गया था, जिसमें बताया गया था कि मनिकोंडा जागीर, राजेंद्रनगर मंडल की 1654.32 एकड़ जमीन भी उसी की है। दरगाह में मानने वाले एक व्यक्ति ने भी सरकार द्वारा संस्थानों को जमीन दिए जाने को अवैध बताते हुए हाईकोर्ट का रुख किया था। राज्य सरकार ने अपील दायर की, जिसके बाद अदालत ने इस जमीन पर स्टे लगा दिया था।

‘अल्लाहु अकबर’ का नारा लगाने वाली बुर्के में लिपटी मुस्लिम लड़की ‘बहादुर’ और शांति से विरोध कर रहे हिन्दू ‘आतंकी’: वाह रे मीडिया!

कर्नाटक में मुस्लिम छात्र-छात्राओं का हिंसक प्रदर्शन चल रहा है। उनकी माँग है कि उन्हें बुर्के और हिजाब में शैक्षणिक संस्थानों में घुसने दिया जाए। इसके लिए कॉलेजों में पत्थरबाजी की जा रही है। भगवा शॉल या स्कार्फ़ पहन कर विरोध जता रहे छात्रों के साथ मारपीट की जा रही है। पुलिस को धता बताया जा रहा है। स्कूल-कॉलेजों के नियम-कानूनों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं। अदालत में कुरान से तर्क दिए जा रहे हैं। और मीडिया बुर्का को ‘बहादुरी का प्रतीक’ बनाने में लगा हुआ है।

ऐसे ही एक मीडिया पोर्टल का नाम है ‘जनता का रिपोर्टर’, जो जनता के बारे में बात करने की बजाए इसके अलावा सब कुछ के बारे में बातें करता है। उसने अपनी खबर में घोषित कर दिया कि कर्नाटक के मांड्या में ‘अल्लाहु अकबर’ का नारा लगाने वाली बुर्के में लिपटी मुस्लिम छात्रा ‘बहादुर’ है और हिन्दू छात्रों ने इसका विरोध किया और ‘जय श्री राम’ का नारा लगाया तो वो ‘आतंकवादी’ हैं। अर्थात, शरिया के हिसाब से अनिवार्य बताया जा रहा बुर्का मुस्लिम महिलाओं के लिए चॉइस नहीं, फिर भी ‘बहादुरी’?

याद कीजिए, कैसे जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों के हिंसक प्रदर्शन और भड़काऊ नारेबाजी में शामिल आयशा रेना और लदीदा फरजाना को प्रोपेगंडा पत्रकार ‘बरखा दत्त’ ने ‘Shero’ बताया था। जबकि आयशा जहाँ आतंकी याकूब मेमन की समर्थक है, वहीं लदीदा ने राम मंदिर को लेकर नफरत दिखाई थी। दुनिया भर में आतंकी संगठन ‘अल्लाहु अकबर’ बोल कर गला रेत देते हैं, लेकिन ये मीडिया के गिरोह विशेष की नजर में ‘प्रोग्रेसिव’ है। बुर्का पहनना इस्लाम में महिलाओं की मजबूरी है, लेकिन ये ‘आधुनिकता’ और ‘चॉइस’ है।

जो पत्थरबाजी कर रहे हैं और हिंसा कर के अपनी बात मनवाने के लिए दबाव डाल रहे हैं, उन्हें ‘बहादुर’ बताया जा रहा है। और, जो शांतिपूर्ण ढंग से प्रतीकों का इस्तेमाल कर के विरोध जता रहे हैं, उन्हें सिर्फ हिन्दू होने की वजह से आतंकवादी कह दिया जा रहा है। ये इन मीडिया संस्थानों का दोहरा रवैया ही है कि जिस बुर्के में लिपट कर रहने के लिए इस्लाम में महिलाओं को मजबूर किया जाता है, उसके लिए ये आवाज़ उठा रहे हैं। इसमें कई ऐसे एक्टिवस्ट्स भी शामिल हैं, जो ‘घूँघट प्रथा’ का विरोध करते नहीं थकते।

हिन्दू छात्रों को ‘जनता का रिपोर्टर’ ने बताया ‘आतंकवादी’

बाद में ‘जनता का रिपोर्टर’ ने अपनी हैडिंग में बदलाव करते हुए ‘आतंकवादी’ की जगह ‘छात्र’ कर दिया। लेकिन, ट्विटर पर मुस्लिम छात्रा को ‘शेरनी’ बताया जा रहा है। मीडिया संस्थान ने हिन्दू छात्रों को आतंकवादी बताने के लिए न कोई माफ़ी माँगी और न ही इस पर स्पष्टीकरण दिया। हिन्दू हैं, उनसे भला कैसा डर। क्या भगवा रंग आतंकवाद का प्रतीक है? ये तो छत्रपति शिवाजी और महाराणा प्रताप का अपमान होगा। क्या ‘जय श्री राम’ कहना आतंकवाद है, जबकि इससे किसी को कोई नुकसान नहीं पहुँचाया जाता।

वहीं कर्नाटक उच्च-न्यायालय में लड़कियों के बुर्का को सही ठहराने के लिए दलीलें हदीस से लेकर माहवारी तक पहुँच गईं। मुस्लिम लड़कियों की माँग को जायज बताने के लिए उनकी ओर से पेश वकील देवदत्त कमात ने केरल हाईकोर्ट के फैसले में दिए गए हदीस के हवाले का उल्लेख करते हुए कहा कि लड़कियों की माहवारी शुरू होने के बाद उनके लिए ये ठीक नहीं है कि वो अपने हाथ को छोड़कर शरीर का कोई भी अंग किसी को दिखाएँ। ये साबित करने का प्रयास किया गया कि ये कुरान द्वारा निर्देशित जरूरी मजहबी क्रिया है।

भले ही इस विरोध प्रदर्शन को ‘बुर्का’ के नाम पर किया जा रहा हो, लेकिन मुस्लिम छात्राओं को बुर्का में शैक्षणिक संस्थानों में घुसते हुए और प्रदर्शन करते हुए देखा जा सकता है। इससे साफ़ है कि ये सिर्फ गले और सिर को ढँकने वाले बुर्का नहीं, बल्कि पूरे शरीर में पहने जाने वाले बुर्का को लेकर है। बुर्का सिर ढँकने के लिए होता है, जबकि बुर्का सर से लेकर पाँव। कई इस्लामी मुल्कों में शरिया के हिसाब से बुर्का अनिवार्य है। कर्नाटक में चल रहे प्रदर्शन को मीडिया/एक्टिविस्ट्स भले इसे बुर्का से जोड़ें, ये बुर्का के लिए हो रहा है।

किसानों को FREE बिजली, छात्राओं को स्कूटी, होली-दिवाली पर मुफ्त सिलिंडर, ‘लव जिहाद’ पर सज़ा: यूपी में BJP का संकल्प-पत्र

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मंगलवार (8 फरवरी 2022) को उत्तर प्रदेश चुनाव को लेकर अपना चुनाव घोषणा पत्र जारी कर दिया। भाजपा ने अपने इस घोषणा पत्र का नाम ‘लोक कल्याण संकल्प पत्र’ दिया है। इस अवसर पर बीजेपी के वरिष्ठ नेता और गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह समेत अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद थे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ‘लोक कल्याण संकल्प पत्र’ जारी किया।

इस संकल्प पत्र में बीजेपी ने प्रदेश में फिर से सरकार बनने पर अगले पाँच साल में किसानों को सिंचाई के लिए मुफ्त बिजली देने का वादा किया है। इसके साथ ही गन्ना किसानों को 14 दिनों के अंदर भुगतान की बात कही गई है। बीजेपी ने मेधावी छात्राओं के लिए मुफ्त स्कूटी और 60 साल से ज्यादा उम्र की महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा वादा किया है।

रामायण विश्वविद्यालय की स्थापना

भाजपा के नए संकल्प पत्र में मुख्य रूप से कथित ‘लव जिहाद’ के दोषी लोगों को कम से कम 10 वर्षों की सजा और एक लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान करने, अयोध्या में भगवान राम से संबंधित संस्कृति शास्त्रों तथा धार्मिक तथ्यों पर शोध के लिए रामायण विश्वविद्यालय की स्थापना करने और वर्ष 2025 के महाकुंभ का विश्व स्तरीय सुविधाओं के साथ भव्य आयोजन करने का वादा किया गया है।

सिंचाई के लिए मुफ्त बिजली 

इसके अलावा संकल्प पत्र में अगले पाँच वर्षों तक किसानों को सिंचाई के लिए मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने, 25,000 करोड़ रुपए की लागत से सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि अवसंरचना मिशन संचालित करने का वादा किया है। साथ ही बीजेपी ने 5000 करोड़ की लागत से गन्ना मिलों के नवीनीकरण मिशन के तहत चीनी मिलों का नवीनीकरण और आधुनिकीकरण करने, प्रदेश में छह मेगा फूड पार्क विकसित करने और निषाद राज बोर्ड सब्सिडी योजना शुरू करके मछुआरों को एक लाख रुपए तक की नाव 40 प्रतिशत सब्सिडी पर उपलब्ध कराने का वादा किया गया है। 

मेधावी छात्राओं को स्कूटी

संकल्प पत्र में मेधावी छात्राओं को रानी लक्ष्मीबाई योजना के तहत मुफ्त स्कूटी देने का वादा करने के साथ ही मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के तहत दी जाने वाली सहायता राशि को 15,000 रुपए से बढ़ाकर 25,000 रुपए करने का वादा किया गया है। घोषणा पत्र में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के सभी लाभार्थियों को होली और दीपावली पर दो मुफ्त रसोई गैस सिलेंडर देने, 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को सार्वजनिक परिवहन में मुफ्त यात्रा की सुविधा देने और विधवा और निराश्रित महिलाओं की पेंशन को बढ़ाकर डेढ़ हजार रुपए प्रतिमाह करने का वादा भी किया गया है।

प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट विद्यालय के तौर पर विकसित किया जाएगा

घोषणा पत्र में प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट विद्यालय के तौर पर विकसित करने, हर मंडल में कम से कम एक विश्वविद्यालय की स्थापना करने, सभी महापुरुषों और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की जीवन कथा को शैक्षिक पाठ्यक्रम में शामिल करने और सभी सरकारी विभागों में खाली पदों को जल्द से जल्द भरने का भी संकल्प लिया गया है। इसके अलावा हर ग्राम पंचायत में जिम और खेल का मैदान स्थापित करने, हर विकासखंड में क्रिकेट प्रशिक्षण की व्यवस्था करने तथा प्रदेश में विभिन्न खेलों के लिए अकादमी की स्थापना करने, स्कूल और कॉलेज स्तर पर योग शिक्षकों की नियुक्ति करने, प्रदेश में 30,000 करोड़ रुपए की लागत से छह धन्वंतरि मेगा हेल्थ पार्क स्थापित करने, राज्य में 6000 डॉक्टरों और 10,000 पैरामेडिकल स्टाफ की जल्द नियुक्ति करने का वादा भी किया गया है।

हम वही करते हैं जो हम कहते हैं: शाह

इस मौके पर अमित शाह ने कहा कि यह सिर्फ एक घोषणा पत्र नहीं है, बल्कि यूपी सरकार का संकल्प है। उन्होंने जानकारी दी कि 2017 के ‘संकल्प पत्र’ में कुल 212 संकल्प थे, जिनमें से 92 पूरे हो चुके हैं। उन्होंने कहा, “हम वही करते हैं जो हम कहते हैं।”

यूपी में कानून का राज: शाह

अमित शाह ने सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि 5 साल की सरकार चलने के बाद अब UP में माफिया पलायन कर गए हैं और कानून का राज है। डकैती के मामलों में 57%, लूट के मामलों में 70%, हत्या मामलों में 30%, अपहरण मामलों में 52%, दहेज-मृत्यु मामलों में 8% और दुष्कर्म मामलों में 42% की कमी दर्ज की गई है।

योगी सरकार ने किसानों के लिए बहुत काम किया: शाह

उन्होंने आगे कहा कि योगी सरकार ने लगभग 86 लाख लघु और सीमांत किसानों का 36 हज़ार करोड़ रुपए का कर्ज़ा माफ किया है और लगभग 4.72 लाख करोड़ रुपए किसानों को उपलब्ध कराने का काम किया है। उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में किसानों और खेती के लिए बहुत काम किए गए हैं। अमित शाह ने कहा, “प्रधानमंत्री ने किसानों के लिए हर साल 6,000 रुपए उनके अकाउंट में भेजने का काम किया है। जिससे छोटे और मंझले किसानों को ऋण मुक्त होने का फायदा मिला है।”

 UP में दंगे समाप्त हुए: CM योगी

वहीं इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “आज जब उत्तर प्रदेश में भाजपा के 5 साल बीत रहे हैं तो हम कह सकते हैं कि आज उत्तर प्रदेश में कानून का राज है। आज हर बहन, बेटी अपने आप को सुरक्षित महसूस कर सकती है। 2012 से 2017 के बीच UP में 700 से अधिक दंगे हुए, सैकड़ों लोग मारे गए। महीनों तक UP में कर्फ्यू रहता था। व्यापारी पलायन करते थे और बेटियाँ स्कूल नहीं जा पाती थीं। आज 5 साल बाद UP में दंगे समाप्त हुए हैं। यूपी में आज कर्फ्यू नहीं बल्कि धूम-धड़ाके से काँवड़ यात्रा निकलती है।”

‘माहवारी के बाद लड़की नहीं दिखा सकती कोई अंग’: बुर्का विवाद पर HC में मँगवाई गई कुरान, आयतें भी पढ़ी गईं, हदीस से हुए तर्क

कर्नाटक के पी यू कॉलेज में बुर्का पहनकर एंट्री न मिलने पर कर्नाटक हाईकोर्ट पहुँची रेशम फारूक की याचिका पर आज (फरवरी 8, 2022) अदालत में चली सुनवाई में लड़कियों के बुर्का को सही ठहराने के लिए दलीलें हदीस से लेकर माहवारी तक पहुँच गईं। अदालत में दलील देते हुए ‘सेकुलर सोच’ तक को मजहबी प्रथाओं से अलग रखने को कहा गया।

मुस्लिम लड़कियों की माँग को जायज बताने के लिए उनकी ओर से पेश वकील देवदत्त कमात ने केरल हाईकोर्ट के फैसले में दिए गए हदीस के हवाले का उल्लेख करते हुए कहा कि लड़कियों की माहवारी शुरू होने के बाद उनके लिए ये ठीक नहीं है कि वो अपने हाथ को छोड़कर शरीर का कोई भी अंग किसी को दिखाएँ। वकील ने कोर्ट में दलील दी कि सेकुलर सोच ये तय नहीं करती कि मजहब के लिए क्या सही है और क्या नहीं। उन्होंने कहा कि मजहबी अभ्यासों को सेकुलर विचारों के आधार पर नहीं आँका जाना चाहिए।

वहीं राज्य की ओर से पेश हुए एडवोकेट जनरल ने छात्रों द्वारा हाईकोर्ट में की गई माँग को लेकर कहा कि अगर छात्रों को किसी तरह की छूट चाहिए तो भी उन्हें कॉलेज डेवलपमेंट कमेटी के पास जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उन्होंने इस मामले में हस्तक्षेप नहीं किया क्योंकि ये अधिकार उनकी ओर से कॉलेज डेवलपमेंट कमेटी को दिए गए हैं कि वो निर्णय लें कि बच्चों की यूनिफॉर्म क्या होगी। जबकि, राज्य द्वारा याचिका का विरोध किए जाने पर वकील देवदत्त कमात ने कहा कि राज्य इस मामले में सहज नहीं है इसलिए वे इस याचिका का विरोध कर रहे हैं।

लड़कियों को कॉलेज बुर्का पहनने की परमिशन दिलवाने के लिए उनके वकील ने संविधान के कुछ अनुच्छेदों का हवाला दिया। कमात ने दलील दी कि बुर्का अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता अनुच्छेद 19 (1) के तहत संरक्षित है। इसे केवल अनुच्छेद 19 (6 ) के आधार पर ही प्रतिबंधित किया जा सकता है।

कमात ने बुर्का को जायज ठहराने के लिए मद्रास, बॉम्बे और केरल हाईकोर्ट के फैसलों का उदाहरण देकर साबित करने का प्रयास किया कि ये कुरान द्वारा निर्देशित जरूरी मजहबी क्रिया है। कमात की ओर से बुर्का को सही ठहराने के लिए सुप्रीम कोर्ट के पुट्टास्वामी फैसले का हवाला दिया गया। वकील ने अपने तर्क देते हुए कहा बुर्का पहनना निजता के अधिकार का एक पहलू है जिसे सुप्रीम कोर्ट के पुट्टास्वामी फैसले द्वारा अनुच्छेद 21 के हिस्से के रूप में मान्यता दी गई।

बता दें कि अदालत ने आज इस मामले की सुनवाई में करते हुए टिप्पणी की थी कि वो हर भावना को किनारे रखकर संविधान के अनुरूप फैसला लेंगे। जस्टिस कृष्णा एस दीक्षित ने कहा था कि संविधान भगवद गीता से ऊपर है और वह उस शपथ के साथ जाएँगे जो संविधान के मद्देनजर उन्होंने ली। इस सुनवाई के दौरान मामले को समझने के लिए कोर्ट ने बकायदा कुरान की एक कॉपी मँगवाई।

इसके बाद उसके आधार पर आगे की सुनवाई को शुरू किया गया। इस सवाल पर कि क्या बुर्का जरूरी है? कुरान की आयतों के माध्यम से बताया गया कि कुरान की आयत 24.31 और 24.33 ‘हेड स्कॉफ’ की बात करता है। इनमें बताया गया है कि कैसे गले के नीचे का हिस्सा अपने शौहर के अलावा पराए मर्द को नहीं दिखना चाहिए। अब जानकारी के मुताबिक कोर्ट इस मामले में न्यायधीश को दी गई कुरान की प्रति की पुष्टि करेंगे कि वो प्रमाणिक संस्करण है। कोर्ट ने कहा कि उन्हें जनता की बुद्धिमता और सद्गुण पर पूरा भरोसा है। उन्हें उम्मीद है उनकी बात को अमन में लिया जाएगा।

हिजाब नहीं बुर्के की है माँग

भले ही इस विरोध प्रदर्शन को ‘बुर्का’ के नाम पर किया जा रहा हो, लेकिन मुस्लिम छात्राओं को बुर्का में शैक्षणिक संस्थानों में घुसते हुए और प्रदर्शन करते हुए देखा जा सकता है। इससे साफ़ है कि ये सिर्फ गले और सिर को ढँकने वाले बुर्का नहीं, बल्कि पूरे शरीर में पहने जाने वाले बुर्का को लेकर है। बुर्का सिर ढँकने के लिए होता है, जबकि बुर्का सर से लेकर पाँव। कई इस्लामी मुल्कों में शरिया के हिसाब से बुर्का अनिवार्य है। कर्नाटक में चल रहे प्रदर्शन को मीडिया/एक्टिविस्ट्स भले इसे बुर्का से जोड़ें, ये बुर्का के लिए हो रहा है।

UP में पहले चरण के मतदान से पहले आ गया रूझान: सर्वे में BJP की वापसी के आसार, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी आगे

उत्तर प्रदेश में पहले चरण का चुनाव प्रचार थम चुका है। 10 फरवरी 2022 को 58 सीटों पर वोट पड़ेंगे। उससे पहले टाइम्स नाऊ-वीटो (Times Now-Veto Survey) का ताजा सर्वे सामने आया है। इसने एक बार फिर से प्रदेश में बीजेपी की वापसी के आसार जताए हैं। राज्य (Uttar Pradesh Assembly Election-2022) में सात चरणों में चुनाव होना है। नतीजे 10 मार्च को आएँगे।

सर्वे में अनुमान लगाया गया है कि प्रदेश में बीजेपी को कुल 222-234 सीटें, समाजवादी पार्टी और उसके गठबंधन सहयोगियों को 138-160 सीटें, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) को 11-16, कॉन्ग्रेस को 8-9 व अन्य के खाते में 2-6 सीटें जा सकती हैं। प्रथम चरण का मतदान पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इलाकों में होगा। इसी तरह एबीपी सी वोटर के सर्वे में उत्तर प्रदेश में भाजपा को 225 से 237 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है।

साभार: एबीपी

टाइम्स नाऊ के सर्वे के मुताबिक, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बीजेपी करीब 50-51 सीटों पर जीत का परचम लहरा सकती है। सपा गठबंधन 40-42 सीटों पर जीत हासिल कर सकता है। जाटलैंड कहे जाने वाले पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बसपा को 2-3, कॉन्ग्रेस को 3 और अन्य को 1-2 सीटों पर जीत हासिल हो सकती है।

सेंट्रल उत्तर प्रदेश की बात करें तो सर्वे के अनुसार यहाँ पर सत्तारूढ़ भाजपा 20-21 सीटों पर जीत हासिल कर सकती है, जबकि सपा 11-15, बसपा 0-1 और कॉन्ग्रेस 1-2 सीटों पर जीत हासिल कर सकती है। अवध क्षेत्र में बीजेपी के 61-64 सीटें जीतने का अनुमान लगाया गया है। सपा के खाते में 29-34 सीटें जा सकती हैं। वहीं बसपा 2-3 औऱ कॉन्ग्रेस 1 सीटों पर सिमट सकती है। इसके अलावा रूहेलखंड क्षेत्र में बीजेपी को कुल 42 फीसदी, सपा गठबंधन को 34 फीसदी, बसपा को 12 फीसदी कॉन्ग्रेस को 8 और अन्य को 4 फीसदी वोट मिलने की उम्मीद है।

इससे पहले टाइम्स नाऊ-वीटो ने पिछले महीने 29 जनवरी को चुनावी सर्वे किया था, जिसके मुताबिक, 52.3 % लोगों ने प्रदेश में भाजपा सरकार के वापसी की उम्मीद व्यक्त की थी। सर्वे में प्रदेश में बीजेपी को 212-231 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया था।