उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को और गोरखनाथ मंदिर को बम से उड़ाने की धमकी दी गई है। ये धमकी लेडी डॉन नामक ट्विटर हैंडल से आई है। यूपी पुलिस इस ट्वीट के बाद से सतर्क है। धमकी के मद्देनजर पुलिस द्वारा गोरखनाथ मंदिर में चेकिंग कराई गई और इसकी सुरक्षा को बढ़ाया गया है। पुलिस ने इस केस को दर्ज कर लिया है। अब आगे जाँच की जा रही है।
हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को सोशल मीडिया साइट पर एक के बाद एक तीन ट्वीट किए गए थे। इनमें यूपी विधानसभा लखनऊ, रेलवे स्टेशन और बस अड्डे में बम लगाए जाने की बात थी। इसके अलावा इसमें योगी आदित्यनाथ की हत्या की बात और गोरखनाथ मंदिर को बम धमाके में उड़ाने की बात कहते हुए लिखा गया था कि गोरखनाथ मठ में आठ जगह सुलेमान भाई ने बम लगा दिया है। इन ट्विट्स को देखते ही यूपी पुलिस एक्शन में आ गई और मठ में जाँच कराई गई।
लखनऊ। गोरखनाथ मंदिर और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बम से उड़ाने की धमकी से सनसनी फैल गई है। शुक्रवार रात लेडी डॉन नामक एक ट्विटर हैंडल से ट्वीट सामने आते ही पुलिस अलर्ट हो गई। इस ट्वीट में लखनऊ विधानसभा और मेरठ में भी बम धमाका करने की धमकी दी गई थी। @Uppolice
रिपोर्ट के मुताबिक गोरखपुर एसएसपी डॉ विपिन ताडा ने बताया कि उन्होंने ट्वीट सामने आने के बाद मंदिर और अन्य जगहों पर चेकिंग कराई है। कहीं कुछ भी आपत्तिजनक नहीं मिला है। यह ट्वीट किसी की हरकत हैं। केस दर्ज कर पुलिस जाँच कर रही है। जल्द ही आरोपितों को पकड़ा जाएगा।
गौरतलब है कि पिछले साल भी अप्रैल में एक शाम पुलिस कंट्रोल रूम के वॉट्सएप नंबर पर एक अंजान नंबर से सीएम योगी को जान से मारने की धमकी दी गई थी। मैसेज में धमकी देने वाले ने ये भी कहा था कि वो वारदात को 4 दिन में अंजाम देगा। अगर उसका कुछ करना है तो चार दिन में ही कर लिया जाए।
महाराष्ट्र (Maharashtra) में ऑनलाइन परीक्षा के लिए 10वीं और 12वीं के छात्रों को भड़काने के मामले में गिरफ्तार किए गए यूट्यूबर (You Tuber) विकास फाटक उर्फ हिंदुस्तानी भाऊ (Vikas Fhatak alias Hindustani Bhau) को शनिवार (5 फरवरी 2022) की दोपहर को बांद्रा में मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
हिंदुस्तानी भाऊ (41) को जेल से बाहर निकालने के लिए उनके वकील महेश मुले ने जमानत के लिए मजिस्ट्रेट कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जिसकी सुनवाई सोमवार को तय की गई है। लेकिन तब तक फाटक को जेल में रहना पड़ेगा।
उल्लेखनीय है कि हिंदुस्तानी भाऊ के खिलाफ पुलिस ने आईपीसी की धारा 353, 332, 427, 109 और 114, 143, 145, 146, 149 गैरकानूनी रूप से इकट्ठा होने और दंगों के लिए उकसाने के अलावा महामारी एक्ट 188, 269, 270 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने उनके खिलाफ सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान की रोकथाम अधिनियम 1984 की धारा 3 (नुकसान पहुँचाना) के तहत भी मामला दर्ज किया है।
क्या है पूरा मामला
गौरतलब है कि कोरोना के दौरान सरकार ने सभी तरह की परीक्षाओं को ऑनलाइन कर दिया था। लेकिन अब जब हालात सामान्य हो रहे हैं तो महाराष्ट्र सरकार का प्रस्ताव है कि कॉलेज में ही परीक्षाएँ आयोजित की जाएँ। लेकिन, 10वीं और 12वीं के छात्र इसका विरोध कर रहे हैं। सोमवार (31 जनवरी, 2022) को धारावी में शिक्षा मंत्री वर्षा गायकवाड़ के घर के बाहर जमा हुए छात्रों ने जमकर हंगामा किया। उस दौरान करीब 1000 से 1500 छात्र मंत्री के घर के आसपास इकट्ठे हुए थे। बाद में पुलिस ने छात्रों पर लाठीचार्ज भी किया।
इस मामले में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर यूट्यूबर ‘हिंदुस्तानी भाऊ’ का नाम सामने आया। जिसके बाद एक्शन लेते हुए महाराष्ट्र पुलिस ने विकास पाठक को गिरफ्तार कर लिया। हालाँकि, बुधवार (2 फरवरी 2022) को कोर्ट में विकास पाठक ने बिना शर्त माफी भी माँग ली थी। पाठक के वकील ने कोर्ट में दलील दी थी कि कारण सही था, लेकिन इसका दुरुपयोग करते हुए प्रदर्शन को दंगे में बदल दिया गया।
फ्रांसीसी सरकार ने कट्टरपंथ से लड़ने के लिए इस्लाम को लेकर बड़ा फैसला किया है। शनिवार (फरवरी 5, 2022) को वहाँ की सरकार ने इस्लाम को अपने मुताबिक ढालने के लिए एक निकाय को पेश किया जिसमें इमाम, कुछ सामान्य जन और महिलाएँ होंगी। इस नए निकाय का नाम ‘फोरम ऑफ इस्लाम इन फ्रांस’ है।
जानकारी के मुताबिक, फ्रांस के आंतरिक मंत्रालय ने इस निकाह को पेश किया, जिसके बाद समर्थकों ने कहा कि ये फैसला देश और इसके 5 मिलियन मुसलमानों को सुरक्षित और विदेशी प्रभाव से मुक्त रखेगा। इससे सुनिश्चित होगा कि फ्रांस में मुस्लिम प्रथाएँ सार्वजनिक जीवन में धर्मनिरपेक्षता वाले देश के मूल्यों का पालन करें।
इस नए निकाय में इमाम, समाज के प्रभावशाली लोग, प्रमुख बुद्धिजीवी और व्यापारिक नेता शामिल होंगे। फ्रांसीसी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इसके सभी सदस्यों को सरकार द्वारा चुना जाएगा, जिसमें कम से कम एक चौथाई महिलाएँ होंगी। इस मामले पर मुस्लिम उलेमाओं समेत आलोचकों का कहना है कि इस तरह इस्लाम को ढालने की कोशिश फ्रांसीसी राष्ट्रपति इम्मैनुअल मैक्रों की कोशिश है जिससे वो दक्षिणपंथी लोगों का समर्थन पा सकें।
फ्रांसीसी सरकार द्वारा पेश किया गया ये नया निकाय काउंसिल फॉर मुस्लिम फेथ को रिप्लेस करेगा जिसकी स्थापना 2003 में की गई थी। आंतरिक मंत्री गेराल्ड डर्मेनिन ने इसे लेकर कहा कि वो इस्लाम पर बाहरी देशों के प्रभाव पर विराम लगाकर एक क्रांति लाना चाहते हैं। इस्लाम विदेशियों का मजहब नहीं है। ये फ्रांसीसी मजहब हैं जो विदेशी धन और किसी भी विदेशी प्राधिकरण पर निर्भर नहीं होना चाहिए। बता दें कि कई मजहबी इमारतें गल्फ देशों से फंड पाकर यूरोप में बनाई जाती हैं जिसके कारण इस्लामी कट्टरपंथ को पैर पसारने की जगह मिलती हैं। इस निकाय का काम होगा कि फ्रांस में मुस्लिम की प्रथाएँ धर्मनिरपेक्ष देश के मूल्यों के तहत हों।
फ्रांस में कट्टरपंथियों से लड़ने के लिए मस्जिदें बंद
गौरतलब है कि फ्रांस लंबे समय से इस्लामी कट्टरपंथियों से लड़ने की कोशिशों में लगा हुआ है। पिछले दिनों फ्रांस सरकार ने ‘कट्टरपंथी इस्लाम’ को पनाह देने और ‘आतंकवादी हमलों को वैध ठहराने’ के लिए ले मैंस के पास एलोनेस में एक मस्जिद को बंद करने का आदेश दिया था। गृह मंत्री डारमैनिन ने तब मस्जिद बंद का समर्थन करते हुए ट्विटर पर लिखा था, “इस मस्जिद में फ़्रांस के प्रति घृणा पैदा करने वाले संदेशों के जरिए भड़काया गया।”
चीन में इस्लाम कट्टरपंथ से लड़ने के लिए उइगरों पर अत्याचार
मालूम हो कि फ्रांस अकेला ऐसा देश नहीं है इस्लामी कट्टरपंथ से निपटने के लिए उसे अपने तौर-तरीके में ढालने के लिए प्रयासरत हो। चीन में भी हम देख चुके हैं कि इस्लाम के चरमपंथ से बचने के लिए वहाँ उइगरों पर कम्युनिस्ट पार्टी तमाम अत्याचार करती रही है। एक रिपोर्ट के अनुसार चीन ने उइगरों को आतंकी और इस्लामी तौर पर कट्टर बताया था और कहा था कि ये लोग मजहब को कानून से ऊपर मानते हैं।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (Uttar Pradesh Assembly Election-2022) के मद्देनजर शनिवार (5 फरवरी 2022) भाजपा (BJP) की स्टार प्रचारक और इंटरनेशनल रेसलर बबीता फोगाट (Babita Phogat) ने मेरठ में डोर टू डोर प्रचार किया। इस दौरान RLD के कार्यकर्ताओं ने उनके काफिले पर हमला कर दिया और उनके साथ मारपीट की और पथराव किया गया, जिसमें कई लोगों के घायल होने की खबर है।
रिपोर्ट के मुताबिक, भाजपा नेताओं के साथ दुर्व्यवहार की यह घटना उस वक्त हुई जब बबीता फोगाट मेरठ के सिवालखास विधानसभा क्षेत्र के दबथुआ में बीजेपी उम्मीदवार के लिए प्रचार करने के लिए गई थीं। जिस वक्त बबीता फोगाट प्रचार कर रही थीं, उसी दौरान राष्ट्रीय लोक दल के समर्थक लाठी-डंडों के साथ वहाँ पहुँच गए और नारेबाजी करते हुए मारपीट शुरू कर दी। इस हमले में कई लोग घायल भी हुए हैं, जिन्हें इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है।
इस मामले में आरएलडी के गुंडों के खिलाफ सरधना थाने में केस रजिस्टर कराया गया है। पुलिस ने मामले की छानबीन शुरू कर दी है। पुलिस ने कहा है कि विवाद बढ़ने के बाद बबीता वहाँ से गाड़ी में बैठकर चली गई थीं, जिससे वो सुरक्षित हैं। हालाँकि, इस हमले में तीन महिलाओं समेत पाँच लोगों के घायल होने की खबर है।
बुरी संगत का असर दिखा रहे जयंत चौधरी (Jayant Chaudhary)
इस घटना के बाद भाजपा नेता बबीता फोगाट ने आरएलडी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने जयंत चौधरी की कटु आलोचना करते हुए कहा, “मेरी गाड़ी की लाइट तोड़ी गई। काफिले की अन्य गाड़ियों को भी तोड़ा गया। मामले में हमने FIR दर्ज़ कराई है। सपा और RLD ने आज साबित कर दिया है कि ये लोग गुंडागर्दी फैलाते हैं।”
जयंत चौधरी जी आप अपने मां-बाप के संस्कार भूल गए हैं। बुरी संगत का असर आप दिखाने लग गए हैं: भारतीय महिला पहलवान और भाजपा नेता बबीता फोगाट, मेरठ, उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में बहुजन समाज पार्टी (बसपा/BSP) की स्थिति से आज सब अच्छे से वाकिफ हैं। प्रचार में दिन पर दिन तेजी तो छोड़िए बसपा के नाम पर होने वाली किसी रैली की खबर भी मुश्किल से खबरों में आ रही है। पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने ही दो दिन पहले इन चुनावों के मद्देनजर आगरा रैली की तो लगा चुनावी पार्टी होने के नाते कोई औपचारिकता है जिसे प्रचार के दौरान पूरा किया जा रहा है, वरना उनका इससे भी मन उठ गया है…।
इन चुनावों में बसपा के जो हाल हैं उन्हें देखना देश के लिए इसलिए भी अचंभित करने वाला है क्योंकि इस पार्टी का गठन एक सपने के साथ दलित नेता कांशीराम द्वारा किया गया था। उनके प्रयासों का ही नतीजा था कि एक समय तक बहुजन समाज पार्टी ने अन्य सभी पार्टियों को पछाड़कर अपनी जगह कायम की थी। लेकिन आज उनकी विचारधारा से भटकने के बाद पार्टी के हाल ऐसे हैं कि कोई न उन्हें पूछ रहा है और न कोई उनका साथ दे रहा है। हर जगह पार्टी के हाल खस्ता हैं और कुर्सी की लड़ाई में उनका दूर-दूर तक नाम नहीं है।
आइए यूपी चुनावों से पहले आज एक बार फिर उस दौर को याद करें जब सत्ता के लिए संघर्ष करने वाली बहुजन समाज पार्टी का गठन हुआ था और दलितों के सबसे बड़े नेता कांशीराम ने मायावती को राजनीति में एंट्री दिलाकर उन्हें दलितों का चेहरा बनाया था।
कांशीराम द्वारा बहुजन समाज पार्टी का गठन और मायावती की एंट्री
वो समय 1984 का था जब डॉ भीम राव अंबेडकर के बाद सबसे बड़े दलित नेता कांशीराम ने बहुजन समाज पार्टी की शुरुआत की थी। कांशीराम ही वह शख्सियत थे जिन्होंने विभिन्न पार्टियों में मौजूद दलित नेताओं को छांटकर उन्हें महसूस कराया कि एक पार्टी ऐसी होनी चाहिए जो दलितों के लिए समर्पित हो। अपने जमीनी कार्यों की बदौलत 14 अप्रैल 1984 को उन्होंने बहुजन समाज पार्टी को राजनीति अखाड़े में उतारा और तमाम दलित हितैषियों को अपने साथ जोड़ते गए। इसी क्रम में उन्हें आईएएस बनने का सपना देखने वाली मायावती भी मिलीं, जहाँ कांशीराम ने मायावती की क्षमता देख उनसे कहा कि अगर वो उनके साथ जुड़ती हैं तो वो उस मुकाम तक जाएँगी जहाँ सैंकड़ों आईएएस उनके आदेशों का पालन करेंगें।
बताया जाता है कि आपातकाल के बाद राजनीति के चर्चित नाम राजनारायण ने दिल्ली की उस सभा को संबोधित करते हुए बार-बार ‘हरिजन’ शब्द का प्रयोग किया था, जहाँ मायावती भी मौजूद थीं और जिन्होंने राजनारायण को टोंकते हुए उन्हें हरिजन शब्द इस्तेमाल करने पर जमकर कोसा था। इसके बाद मायावती की जगह-जगह तारीफें हुईं और कांशीराम को भी इस संबंध में पता चला। मायावती की बेबाकी देख कांशीराम उनसे मिलने उनके घर गए और उन्हें अपने साथ जुड़ने को कहा। हालाँकि मायावती ने उन्हें बताया कि वो IAS बनना चाहती हैं, जिस पर कांशीराम ने उन्हें समझाया कि अगर वह उनके साथ जुड़ती हैं तो कई आईएएस उनके आदेशों को मानेंगे।
मायावती का चुनावी सफर
कांशीराम के कहने पर मायावती की जब राजनीति में एंट्री हुई तो धीरे-धीरे दलितों के बीच वह बड़ा चेहरा बनतीं गई। 1984 में बसपा ने उन्हें कैराना से चुनाव लड़ाया। 1985 में वो बिजनौर से उतारी गईं और 1987 में उन्होंने हरिद्वार में अपनी किस्मत आजमाई। हालाँकि राजनीति में उन्हें पहली सफलता 1989 को मिली जब वो बिजनौर से जीतीं। इसके बाद 1994 में भी वो राज्यसभा के लिए चुनीं गई। लेकिन असली किस्मत उनकी तब पलटी जब बसपा ने 3 जून 1995 को मायावती को यूपी का मुख्यमंत्री बना दिया।
देश के सबसे बड़े राज्यों में शुमार यूपी की मुख्यमंत्री बनने के बाद मायावती की लोकप्रियता अलग स्तर पर पहुँच गई थी। उधर गेस्ट हाउस कांड के कारण भी उनकी चर्चा जगह-जगह थी। साल 1997 में मायावती ने दोबारा सीएम पद की शपथ ली। फिर 15 दिसंबर 2001 को वो दिन भी आया जब कांशीराम ने मायावती को इस पार्टी का प्रमुख बना दिया और कुछ सालों में धीरे-धीरे राजनीति से गायब होते गए। पार्टी में उनकी सक्रियता खत्म होते ही पार्टी के दिन भी ढलने लगे। मायावती के नेतृत्व में न केवल बसपा पर कांशीराम की विचारधारा से भटकने के आरोप लगे बल्कि 2006 में दलितों के दिग्गज नेता की मृत्यु के बाद उसके इल्जाम से भी मायावती अछूती नहीं रहीं।
कांशीराम की मौत के लिए मायावती जिम्मेदार?
स्वयं दलित नेता के परिजनों ने उनकी मृत्यु के लिए मायावती को जिम्मेवार माना। साल 2014 की एक रिपोर्ट के अनुसार, कांशीराम के परिजनों ने मायावती पर आरोप लगाया था कि पार्टी में रहते हुए मायावती ने कांशीराम पर पार्टी अध्यक्ष बनने के लिए दबाव बनाया था। इसके साथ ही उन्हें तड़पाकर मारने, उन्हें उनकी माँ से अलग रखने, उनकी जुबान बंद करने की जिम्मेदार भी मायावती को कहा जाता है। साल 2014 में कांशीराम के परिवार ने मायावती को तानाशाह बताते हुए दावा किया कि वो मायावती हीं थीं जिन्होंने कांशीराम को उनकी माँ से अलग किया था और बाद में उनकी माँ उनके गम में चल बसीं थीं।
बसपा का UP में गिरता ग्राफ
कांशीराम की मौत के अगले ही साल 2007 में मायावती ने राज्य में 206 सीटों के साथ एक बड़ी जीत हासिल की थी, मगर उसके बाद के सालों में बसपा का ग्राफ राज्य में लगातार गिरता गया। 2012 में समाजवादी पार्टी ने मोर्चा मारा और 2017 में भारतीय जनता पार्टी ने राज्य में प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाई। वहीं, कांशीराम की वो बसपा डूबती गई जिसे लेकर कभी अनुमान थे कि वो बहुजनों की राजनीति कर नई ऊँचाई हासिल करेगी।
आज साल 2022 के यूपी चुनावों में भी बहुजन समाज पार्टी की हालत एकदम खस्ता है। मायावती की बसपा से तमाम नेता अलविदा कह रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार साल 2017 के चुनावों में बहुजन समाज पार्टी के 19 विधायक चुने गए थे लेकिन आज इन पार्टी विधायकों की संख्या केवल और केवल 4 ही बाकी बची है। लोग हैरान है कि जो मायावती राज्य में 4 बार शासन कर चुकी हैं। पार्टी को उभारने के लिए 4 बार प्रदेश अध्यक्षों को बदल चुकी हैं। उनकी पार्टी की हालत इतनी खस्ता कैसे है कि अब उसमें केवल 4 विधायक ही शेष हैं, जिनके कारण वह न केवल कॉन्ग्रेस बल्कि भाजपा की सहयोगी पार्टी अपना दल तक से पीछे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (5 फरवरी, 2022) को विशिष्टाद्वैतवाद का विचार देने वाले महान संत रामानुजाचार्य की प्रतिमा का अनावरण किया। यह प्रत्येक हिन्दू के लिए गौरव का क्षण है क्योंकि इस्लामी आक्रांता जब भारत में पाँव पसारने के लिए लालायित थे, ऐसे समय उन्होंने भारतीयों के हृदय में भक्ति का संचार किया और धार्मिक भावनाओं को और अधिक प्रबल किया। स्वामी रामकृष्णानन्द लिखित श्रीरामनुज चरित में रामानुजाचार्य के जीवन का एक प्रसंग है, जब मेलकोट में यादवाद्रिपति की बंद हो चुकी पूजा और उत्सवों को उन्होंने वापस प्रारंभ करवाया।
इसके लिए वे दिल्ली के सुल्तान से भी भिड़ गए थे। दिल्ली के सुल्तान ने रामानुजाचार्य के पीछे अपने सैनिक भेजे किन्तु वे रामचानुजचार्य का कुछ नहीं बिगाड़ पाए। उल्टा सुल्तान की पुत्री ही रामानुजाचार्य से इतनी प्रभावित हो गई कि उसने अपना घर-बार सब छोड़ दिया और यादवाद्रिपति के विग्रह में रम गई। अपनी दिग्विजयी यात्रा के दौरान सन 1012 में रामानुज यादवाद्रि यानी आज के मेलकोट पहुँचे। वहाँ भ्रमण करते हुए उन्होंने दीमकों की एक बाँबी के स्तूप के नीचे एक देव विग्रह देखा।
आचार्यश्री ने उसका निर्मल जल के प्रक्षालन से उसका उद्धार किया और उस मनोहर जीवंत विग्रह को दर्शन के लिए स्थापित कर दिया। उस दौरान गाँव के वयोवृद्ध लोगों ने उन्हें बताया कि इस पर्वत पर पहले यादवाद्रिपति की पूजा हुआ करती थी, परन्तु मुस्लिमों के यहाँ आकर समस्त देव विग्रह तोड़ते रहने के कारण विष्णु-विग्रह के सेवक, विग्रह को एक गुप्त स्थान में रखकर अन्यत्र चले गए। तब से उनकी पूजा और उत्सव बंद हैं। ग्रामीणों ने बताया कि उन्हें अब निश्चित रूप से लग रहा है कि ये ही वे यादवाद्रिपति हैं और आपके जैसे महापुरुष के आगमन से वे पुनः भक्तों की सेवा ग्रहण करने को उपस्थित हुए हैं।”
PM @NarendraModi ji inaugurated the 216-ft 'Statue Of Equality' dedicated to the 11th century Bhakti Saint Sri Ramanujacharya at Hyderabad today.
It is a पंचलोह structure promoting the idea of equality in all aspects of life.
रामानुजाचार्य के प्रभाव से थोड़े ही दिनों के भीतर वहाँ एक सुन्दर तथा विषय मंदिर बन गया किन्तु बात यहाँ रुकी नहीं। दक्षिणी भारत के प्रत्येक मंदिर में हर देवता के दो विग्रह होते हैं। एक को ‘अचल’ कहते हैं, जो मंदिर के बाहर नहीं आते और दूसरे को ‘सचल’ कहा जाता है, जिन्हें उत्सव के समय बाहर लाया जाता है। इसी कारण इन्हें उत्सव-विग्रह भी कहते हैं। यादवाद्रिपति का अचल-विग्रह मंदिर में स्थापित हो चुका था, किन्तु सचल-विग्रह दिल्ली का सुल्तान लूट ले गया था।
इसीलिए, भगवान मंदिर के बाहर जाकर भक्तों एवं पतितजनों को निर्मल तथा आशीर्वादयुक्त नहीं कर पा रहे थे। इतना जानते ही रामानुज ने अपने शिष्यों को लेकर दिल्ली की ओर प्रस्थान किया। दो माह बाद वे नगर में पहुँचे। कहा जाता है कि रामानुज की अंगकान्ति, विद्वत्ता तथा प्रभाव देखकर सुल्तान दंग रह गया और उसने यादवाद्रिपति के सचल-विग्रह को ले जाने की अनुमति दे दी। रामानुज को उस कक्ष में ले जाया गया जहाँ भारतवर्ष के अनेक देवालयों से लुटे हुए विग्रह संग्रहित थे।
वहाँ इस छोर से उस छोर तक ढूँढने पर भी श्री रामानुज को अपना इच्छित विग्रह नहीं मिला। इसका कारण था कि यादवाद्रिपति के सचल-विग्रह को सुल्तान की पुत्री लचिमार बीबी एक खिलौने के रूप में उपयोग में ला रही थी। जब सुल्तान ने अपनी पुत्री का परमप्रिय विग्रह दिखाया तो रामानुज तत्काल ही समझ गए कि यही यादवाद्रिपति के सचल-विग्रह ‘सम्पत-कुमार’ हैं। रामानुजाचार्य ने उस विग्रह को लेकर यादवाद्रि की ओर प्रस्थान किया किन्तु जब लचिमार बीबी को इस विषय में ज्ञात हुआ तो वे व्याकुल हो गईं और उनके दुःख की सीमा ना रही।
लचिमार बीबी के दुःख को देखकर सुल्तान ने अपनी सेना की एक टुकड़ी को आदेश दिया कि तुम लोग शीघ्र ही उस ब्राह्मण के हाथ से मूर्ति छीन लाओ। सुल्तान की उस टुकड़ी के साथ लचिमार बीबी भी चल पड़ी किन्तु तब तक रामानुज बहुत आगे निकल गए थे। मार्ग में वे निश्चित रूप से सुल्तान की सेना के हाथों चढ़ जाते किन्तु चाण्डालों से उन्हें विशेष सहायता मिली जिस कारण वे विग्रह के साथ स्वदेश पहुँचने में सफल हुए। सुल्तान ने सोचा था कि कदाचित अभीष्ट वस्तु के प्राप्त हो जाने के बाद लचिमार बीबी का उन्माद शांत हो जाएगा।
किन्तु, रामानुज ने जिस अपार शोक-सागर में उसे डुबो दिया था उस कारण अब वह प्राणों से अधिक ‘सम्पत-कुमार’ के विग्रह में विस्मय हो चुकी थी। अब लचिमार बीबी का संसार-वन में भ्रमण समाप्त हो चूका था, उसके प्राणों की साध पूरी हो चुकी थी। उसने अपने यवन-देह को शुद्ध कर लिया था। अंततः उसका पूत-अंग श्रीमत सम्पत-कुमार के अंग में विलीन हो गया। आज भी सुल्तान की पुत्री का विग्रह दक्षिण के वैष्णव मंदिरों में पूजित होकर हिन्दू धर्म की सार्वभौमिकता को प्रकट कर रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (5 फरवरी, 2022) को तेलंगाना में रामानुजाचार्य की ‘Statue Of Equality’ का अनावरण किया। 11वीं शताब्दी के महान वैष्णव संत व दार्शनिक रामानुजाचार्य ने विश्व को समता का सन्देश दिया था। मुचिंतल के ‘चिन्ना जीयर स्वामी परिसर’ में इस प्रतिमा का अनावरण हुआ है। इसके साथ 108 मंदिर भी बनाए गए हैं। इसमें 1000 करोड़ रुपए का खर्च आया है। ये प्रतिमा 216 फ़ीट की है। पीएम मोदी फ़िलहाल तेलंगाना दौरे पर हैं।
इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि आज माँ सरस्वती की आराधना के पावन पर्व, बसंत पंचमी का शुभ अवसर है और माँ शारदा के विशेष कृपा अवतार श्री रामानुजाचार्य जी की प्रतिमा इस अवसर पर स्थापित हो रही है। उन्होंने सभी को बसंत पंचमी की विशेष शुभकामनाएँ भी दी। उन्होंने कहा कि जगद्गुरु श्री रामानुजाचार्य जी की इस भव्य विशाल मूर्ति के जरिए भारत मानवीय ऊर्जा और प्रेरणाओं को मूर्त रूप दे रहा है और रामानुजाचार्य जी की ये प्रतिमा उनके ज्ञान, वैराग्य और आदर्शों की प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि भारत एक ऐसा देश है, जिसके मनीषियों ने ज्ञान को खंडन-मंडन, स्वीकृति-अस्वीकृति से ऊपर उठकर देखा है। हमारे यहाँ अद्वैत भी है, द्वैत भी है। और, इन द्वैत-अद्वैत को समाहित करते हुये श्रीरामानुजाचार्य जी का विशिष्टा-अद्वैत भी है। पीएम मोदी ने आगे कहा कि एक ओर रामानुजाचार्य जी के भाष्यों में ज्ञान की पराकाष्ठा है, तो दूसरी ओर वो भक्तिमार्ग के जनक भी हैं। उन्होंने कहा कि एक ओर वो समृद्ध संन्यास परंपरा के संत भी हैं, और दूसरी ओर गीता भाष्य में कर्म के महत्व को भी प्रस्तुत करते हैं – वो खुद भी अपना पूरा जीवन कर्म के लिए समर्पित करते हैं।
बकौल पीएम मोदी, आज जब दुनिया में सामाजिक सुधारों की बात होती है, प्रगतिशीलता की बात होती है, तो माना जाता है कि सुधार जड़ों से दूर जाकर होगा। लेकिन, जब हम रामानुजाचार्य जी को देखते हैं, तो हमें अहसास होता है कि प्रगतिशीलता और प्राचीनता में कोई विरोध नहीं है। उन्होंने कहा कि ये जरूरी नहीं है कि सुधार के लिए अपनी जड़ों से दूर जाना पड़े। बल्कि जरूरी ये है कि हम अपनी असली जड़ो से जुड़ें, अपनी वास्तविक शक्ति से परिचित हों।
प्रधानमंत्री ने कहा, “आज रामानुजाचार्य जी विशाल मूर्ति ‘Statue of Equality’ के रूप में हमें समानता का संदेश दे रही है। इसी संदेश को लेकर आज देश ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, और सबका प्रयास’ के मंत्र के साथ अपने नए भविष्य की नींव रख रहा है। विकास हो, सबका हो, बिना भेदभाव हो। सामाजिक न्याय, सबको मिले, बिना भेदभाव मिले। जिन्हें सदियों तक प्रताड़ित किया गया, वो पूरी गरिमा के साथ विकास के भागीदार बनें, इसके लिए आज का बदलता हुआ भारत, एकजुट प्रयास कर रहा।”
Statue Of Equality: कौन थे संत रामानुजाचार्य?
इस प्रतिमा को ‘पंचलौह’ (सोना, चाँदी, ताम्बा, पीतल और जस्ता) से तैयार किया गया है। धातुओं से बनी विश्व की सबसे ऊँची प्रतिमाओं में इसका स्थान होगा। 54 फिट ऊँचे ‘भद्रा वेदी’ को इसका आधार बनाया गया है। उसके अंदर एक वैदिक डिजिटल लाइब्रेरी और रिसर्च सेंटर भी है। इसमें प्राचीन सनातन ग्रंथों से लेकर रामानुजाचार्य के जीवन से सम्बंधित दस्तावेज होंगे। 1017 ईस्वी में जन्मे संत रामानुजाचार्य का निधन 1137 ईस्वी में हुआ था। संत रामानुजाचार्य का जीवनकाल 120 वर्षों का था।
रामानुजाचार्य ने जाति विभेद के खिलाफ अभियान चलाया और महिलाओं को सशक्त करने के लिए जीवन भर परिश्रम किया। इस्लामी आक्रांता जब भारत में पाँव पसारने के लिए बेताब थे, ऐसे समय में उन्होंने भारत की जनता के भीतर की धार्मिक भावनाओं को और प्रबल किया। उन्होंने हर वर्ग के लोगों के बीच ‘मुक्ति और मोक्ष’ के मंत्रों के बारे में सार्वजनिक रूप से बताया। उनका कहना था कि ये चीजें गोपनीय नहीं रहनी चाहिए, सभी वर्गों के लोगों को इसका लाभ मिलना चाहिए।
खुद बाबासाहब डॉक्टर भीमराव आंबेडकर ने लिखा है कि हिन्दू धर्म में समता की दिशा में संत रामानुजाचार्य ने महत्वपूर्ण कार्य किए और उन्हें लागू करने का प्रयास भी किया। उनकी 1000वीं जयंती पर डाक टिकट जारी करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका जिक्र भी किया था। उन्होंने गैर-ब्राह्मण कांचीपूर्ण को अपना गुरु माना। उनके भोजन करने के पश्चात पत्नी द्वारा घर को शुद्ध करते हुए देख कर वो विचलित हुए। संन्यास लेकर उन्होंने जनसेवा को अपना ध्येय बना लिया।
उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता पर ही भाष्य लिखा। ‘वेदांत सार’ में उन्होंने अपने सिद्धांतों को आम लोगों को सरल भाषा में समझाया। उन्होंने ईश्वर को सगुण माना और ये भी कहा कि उसमें कोई अवगुण नहीं है। उन्होंने ईश्वर को श्रेष्ठों से भी श्रेष्ठ करार दिया। उन्होंने कहा कि दोषहीन, शुद्ध, सर्वश्रेष्ठ, निर्मल और एकरूप ब्रह्म को जानने वाले को ही सच्चा ज्ञानी बताया। उन्होंने शंकराचार्य के कई सिद्धांतों का खंडन कर के अपने सिद्धांत भी दिए। सनातन परंपरा में ऐसा होता रहा है।
जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) में पाकिस्तान (Pakistan) ही अशांति फैलाता रहा है, इसको लेकर समय-समय पर आवाजें उठती रही है। इसी क्रम में जम्मू-कश्मीर नेशनल इंडिपेंडेंस अलायंस (JKNIA) के अध्यक्ष महमूद कश्मीरी (Mahmood Kashmiri) ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान पर जमकर हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कश्मीर को बर्बाद करने के पीछे पाकिस्तान का ही हाथ है।
सामाजिक कार्यकर्ता और ऑवर वॉयस के होस्ट डॉ शब्बीर चौधरी के द्वारा आयोजित कार्यक्रम में महमूद कश्मीरी ने कहा कि पाँच फरवरी को मनाए जाने वाले एकजुटता दिवस पाखंड दिवस के तौर पर सेलिब्रेट किया जाना चाहिए। उन्होंने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर का जिक्र करते हुए कहा कि गिलगिट-बाल्टिस्तान के लोग गुलाम हैं, उन्हें बोलने तक की आजादी नहीं है। पाकिस्तान आवाज उठाने पर वहाँ के लोगों पर देशद्रोह का केस ठोंक देता है। ऐसे में यह स्पष्ट है कि किस तरह की एकजुटता वो कश्मीर के लोगों के साथ दिखा रहे हैं।
कश्मीरी कहते हैं कि पीओके के लोगों को अगर हथियारों के साथ जीवन जीना पड़ रहा है तो इसका अर्थ यह है कि वहाँ कुछ भी ठीक नहीं है। उनका कहना है कि पीओके में लोगों को न तो ठीक से बिजली मिलती है और न ही पानी। मंगला बाँध का काम अभी तक पूरा नहीं हो सका है। उन्होंने लोगों से पाकिस्तान सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद करने का आह्वान किया।
कश्मीरी ने दो टूक कहा कि कश्मीर विवाद को पाकिस्तान ने ही पैदा किया है। सच बोलने या अपने अधिकारों की माँग करने वालों की आवाज को पाकिस्तान दबा देता है। उन्होंने बलूचिस्तान का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसा ही हाल बलूचिस्तान में भी है। वहाँ भी लोगों की स्वतंत्रता को कुचला जा रहा है। उन्हें पाकिस्तान से दिक्कत है।
गौरतलब है कि महमूद कश्मीरी पाकिस्तान सरकार के खिलाफ पहले भी आवाज उठाते रहे हैं। साल 2019 में भी उन्होंने पाकिस्तान पर भेदभाव का आरोप लगाया था। एक वीडियो में उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान में उन्हें बोलने तक की इजाजत नहीं है।
शिवसेना (Shivsena) सांसद संजय राउत (Sanjay Raut) और उनके परिवार पर 100 करोड़ रुपए के कोविड केयर सेंटर घोटाले (Covid Care Centre Scam) का आरोप लगाने के बाद पूर्व सांसद और महाराष्ट्र (Maharashtra) भाजपा के नेता किरीट सोमैया ने शिवसेना के गुंडों द्वारा उन पर हमला करने का आरोप लगाया है। सोमैया ने ट्विटर के जरिए इसकी जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि पुणे महानगर पालिका में उनके साथ यह घटना हुई है।
इससे पहले सोमैया ने संजय राउत पर 100 करोड़ रुपए के घोटाले का आऱोप लगाया था। इस मामले में सोमैया ने नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी में भी शिकायत की है। साथ ही उन्होंने मामले की जाँच की माँग भी की है। बीजेपी नेता ने आरोप लगाया था कि संजय राउत के करीबी सुजीत पाटकर को फेक डॉक्यूमेंट के आधार पर काम मिला है। उनका कहना था कि राउत ने लाइफ लाइन हॉस्पिटल मैनेजमेंट के नाम से साझेदारी फर्म बनाने का जो दावा किया था वो गलत है। राउत ने मुंबई के दहिसर वर्ली एनएससीआई महालक्ष्मी रेस कोर्स मुलुंड कोविड केयर सेंटर का काम मिलने का दावा किया था।
वाइन कंपनी में पार्टनरशिप का आऱोप लगा चुके हैं सोमैया
इससे पहले किरीट सोमैया ने ‘वाइन शराब नहीं’ टिप्पणी के लिए संजय राउत (Sanjay Raut) को फटकार लगाई थी। उन्होंने कहा था कि संजय राउत ऐसा इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि उनकी दो बेटियाँ एक वाइन कंपनी में पार्टनर हैं। इससे राउत के परिवार को सालाना 100 करोड़ रुपए का मुनाफा होगा।
किरीट सोमैया (Kirit Somaiya) ने 30 जनवरी 2022 को कहा था, “महाराष्ट्र सरकार ने यह फैसला संजय राउत के परिवार को फायदा पहुँचाने के लिए लिया है, जो एक वाइन कंपनी के साथ पार्टनरशिप में हैं। महाराष्ट्र के बड़े उद्योगपति अशोक गर्ग की मैगपाई ग्लोबल लिमिटेड नाम की वाइन कंपनी में संजय राउत की पार्टनरशिप है। उनका इस वाइन व्यवसाय में बड़ा इन्वेस्टमेंट है। संजय राउत की दोनों बेटियाँ और पत्नी कंपनी में डायरेक्टर के पद पर हैं। इस कंपनी का पब, क्लब्स, होटल और वाइन डिस्ट्रिब्यूशन का व्यवसाय है। वाइन व्यवसाय में बड़ा इन्वेस्टमेंट होने की वजह से ही संजय राउत मॉल्स और किराने की दुकानों में वाइन बिक्री के फैसले का समर्थन कर रहे हैं और महाराष्ट्र को ‘मद्यराष्ट्र’ बनाने में लगे हुए हैं।”
मध्य प्रदेश के अशोकनगर स्थित चंदेरी में एक ऐसा परिवार है, जिससे कई वादे कर के आमिर खान भूल गए। आज इस परिवार को खाने के लाले पड़े हैं। दिसंबर 2009 में रिलीज हुई उनकी फिल्म ‘3 इडियट्स’ तो आपको याद ही होगी। यहाँ एक बुनकर को उन्होंने अपना ‘दोस्त’ बनाया था। साथ ही निशानी के तौर पर एक अंगूठी भी दी थी, जिस पर ‘AK’ लिखा हुआ था। उनके घर खाना खाया था और फोन कर के कहा था, “जब भी ज़रूरत हो, इस दोस्त को याद करना।”
उस बुनकर का नाम था कमलेश कोरी, जिनकी कोरोना की दूसरी लहर के दौरान मौत हो गई। ये परिवार चंदेरी से 4 किलोमीटर दूर प्राणपुर में रहता है, जहाँ की झोंपड़ी में कमलेश कोरी की 50 वर्षीय पत्नी कमला बाई रहती हैं। उनके साथ उनका 9 साल का बेटा आशीष, 12 वर्ष की बेटी करिश्मा और 21 साल की संतोषी भी रहती है। संतोषी की मानसिक हालत स्वस्थ नहीं है। कमलेश कोरी की एक बेटी रामवती की शादी हो चुकी है। आर्थिक तंगी की वजह से आशीष और करिश्मा स्कूल भी नहीं जाते।
करीना कपूर ने कुछ दिनों पहले चंदेरी की एक साड़ी में सोशल मीडिया पर तस्वीर भी डाली थी। ये 6000 रुपए की थी, लेकिन आमिर खान ने कमलेश कोरी से इसे 25,000 रुपए देकर खरीदा था। साँस की बीमारी से पीड़ित कमलेश कोरोना की मार बर्दाश्त नहीं कर पाए और 31 मई, 2021 को चल बसे। इलाज का अभाव भी इसका कारण था। लॉकडाउन ने परिवार की आय के सारे द्वार बंद कर दिए। तब 9 साल की रही संतोषी के इलाज का आमिर खान ने वादा किया था, लेकिन आज 13 वर्षों बाद भी उन्होंने इस परिवार की कोई सुध नहीं ली।
‘दैनिक भास्कर’ की खबर के अनुसार, आमिर खान के दिए नंबर पर जब इस परिवार ने फोन किया तो नहीं लगा। कमला बाई का कहना है कि अगर आमिर खान अपना वादा निभाते हुए मदद कर दें तो न सिर्फ उनकी बेटी का इलाज हो जाएगा, बल्कि बच्चे पढ़-लिख भी लेंगे। उम्र ज्यादा होने के बावजूद वो कभी साड़ी तो कभी बीड़ी बना कर परिवार का गुजर-बसर कर रही हैं। आमिर खान का दिया एक कागज है पास में, जिसमें उनके हस्ताक्षर के साथ लिखा है – ‘मेरी शुभकामनाएँ हमेशा आपके साथ हैं। बहुत बहुत प्यार!’
आमिर खान और करीना कपूर ‘3 इडियट्स’ की शूटिंग के दौरान साड़ी की बुनाई देखने उनके घर आए थे। एक बार आमिर खान के बुलावे पर कमलेश कोरी मुंबई गए थे, लेकिन थोड़ी आर्थिक मदद के सिवा और कुछ नहीं मिला। अंगूठी देते हुए आमिर ने लिखा था कि ये मेरी निशानी है, जो हमेशा आपको मेरी याद दिलाएगी। मुंबई में आमिर खान के साथ चंदेरी के बुनकरों के लिए एक शोरूम खोलने की भी बात हुई थी, लेकिन आज तक इस पर काम नहीं हुआ। अभिनेता आज भी इस परिवार के लिए ‘अनरिचेबल’ हैं।