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लता मंगेशकर के सम्मान में काली पट्टी बाँध खेलेंगे भारत-वेस्ट इंडीज के खिलाड़ी, आधा झुका रहेगा तिरंगा

स्वर कोकिला लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) के देहांत पर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) उन्हें सम्मान देने जा रहा है। इसके तहत रविवार (6 फरवरी 2022) को गुजरात के अहमदाबाद स्थित नरेंद्र मोदी स्टेडियम में भारत और वेस्टइंडीज के बीच होने वाले वनडे मैच के दौरान सभी खिलाड़ी अपनी बाँह पर काली पट्टी बाँध लता मंगेशकर को श्रद्धांजलि देंगे। इसकी जानकारी बीसीसीआई के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने दी।

उन्होंने कहा, “लता मंगेशकर के सम्मान में आज अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में भारत और वेस्टइंडीज के बीच होने वाले मैच में हमारे खिलाड़ी काली पट्टी बाँधेंगे। राष्ट्रीय ध्वज भी आधा झुका रहेगा।” उन्होंने कहा कि इसके लिए खिलाड़ियों को निर्देशित कर दिया गया है।

राजीव शुक्ला ने कहा, “जब हम एक गेम हार जाते थे तो वह मुझे फोन करती थीं और पूछती थीं कि राजीव जी, हमने यह गेम कैसे खो दिया? हमें इसे आराम से जीतना चाहिए था। इतने रन बन सकते थे। उनके दिल में क्रिकेट का एक विशेष स्थान था।” बीसीसीआई अध्यक्ष और सचिव ने कहा है कि भारतीय खिलाड़ी वेस्ट इंडीज के खिलाफ अपने मैच के दौरान काली पट्टी बाँधेंगे।

गौरतलब है कि लता दीदी के नाम से मशहूर स्वर कोकिला लता मंगेशकर का रविवार (6 फरवरी 2022) को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्‍पताल में निधन हो गया। ‘भारत रत्‍न’ से सम्‍मानित दिग्गज गायिका लता मंगेशकर को 8 जनवरी 2022 को कोरोना संक्रमित पाए जाने पर हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। बाद में उन्हें न्यूमोनिया हो गया था, जिससे उनकी हालत बिगड़ने लगी। इसके बाद उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था। उनकी हालत में सुधार के बाद वेंटिलेटर सपोर्ट भी हट गया था, लेकिन 5 फरवरी को उनकी स्थिति बिगड़ने लगी और उन्हें फिर से वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया। आखिरकार, 6 फरवरी को ‘स्वर कोकिला’ ने अंतिम साँस ली।

‘अखिलेश यादव को कर देंगे बर्बाद’ : सपा से टिकट कटने पर नाराज शारदा शुक्ला ने दी धमकी, भाजपा प्रत्याशी को दिया समर्थन

समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता शारदा प्रताप शुक्ला (Sharda Pratap Shukla) ने यूपी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर सपा से टिकट न मिलने पर अखिलेश यादव को धमकी दी है कि वो उनको बर्बाद कर देंगे। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के बाद सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र से मैदान में उतारे गए राजेश्वर सिंह को अपना समर्थन दिया है। शुक्ला ने राजेश्वर को अपना दामाद बताते हुए कहा कि वे उन्हें जितवाकर विधानसभा पहुँचाएँगें।

बता दें सपा सरकार में मंत्री पद पर रह चुके शारदा प्रताप शुक्ला को शिवपाल सिंह यादव का करीबी माना जाता है। वह सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र से विधायक भी रहे हैं। इस बार भी उन्हें इसी सीट से टिकट चाहिए थी। हालाँकि, अखिलेश यादव की पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दी, जिसके बाद उन्होंने नाराजगी में भाजपा  के कार्यालय पहुँच उनकी सदस्यता ले ली। 

शुक्ला के भाजपा से जुड़ते समय भाजपा प्रत्याशी राजेश्वर सिंह भी कार्यक्रम में मौजूद थे जिसके बाद शारदा प्रताप शुक्ला ने कहा, “राजेश्वर सिंह मेरे दामाद हैं। जिस तरह से स्वाती सिंह को जिताकर विधानसभा भेजा था, वैसे ही राजेश्वर सिंह को भी जिताऊँगा।”

समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “राजनीति हमें विरासत में नहीं मिली, बल्कि मेहनत से मिली है। अब सपा अध्यक्ष को बर्बाद कर देंगे।” आगे शुक्ला ने डॉ राम मनोहर लोहिया के विचारों की तुलना प्रधानमंत्री मोदी के विचारों से की। उन्होंने कहा कि डॉ राम मनोहर लोहिया से पीएम मोदी के विचार मिलते हैं, इसलिए भाजपा में शामिल हुए। जानकारी के मुताबिक शारदा प्रताप शुक्ला के भाजपा में आने के साथ ही प्रसपा के उन्नाव जिलाध्यक्ष व पूर्व लोकसभा प्रत्याशी सतीश कुमार और उनके तमाम समर्थक भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हैं। 

कॉन्ग्रेस में टिकट बँटवारे पर घमासान: गाँधी परिवार के करीबी के साथ UP के बलरामपुर में मारपीट, चार लोग पार्टी से निष्कासित

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों (Uttar Pradesh Assembly Election) के हलचल के बीच कॉन्ग्रेस (Congress) के एक राष्ट्रीय पदाधिकारी के साथ उनकी ही की पार्टी के कार्यकर्ताओं ने मारपीट और अभद्रता की। इस पर कॉन्ग्रेस ने कार्रवाई करते हुए चार कार्यकर्ताओँ को बाहर का रास्ता दिखा दिया है।

प्रदेश के बलरामपुर में वीआईपी गेस्ट हाउस में कॉग्रेस के राष्ट्रीय सचिव सत्य नारायण पटेल के साथ मारपीट करने के मामले में पार्टी ने जिलाध्यक्ष अनुज सिंह, जिला उपाध्यक्ष अख्तर हुसैन, जिला महासचिव विनय मिश्रा और सेवा दल के अध्यक्ष दीपक मिश्रा को 6 साल के लिए पार्टी से निकाल दिया है। वहीं, अनुज सिंह ने इन आरोपों को निराधार बताया है।

कॉन्ग्रेस ने जिले के सभी विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी तय कर दिए हैं। बलरामपुर से बविता आर्य, उतरौला से धीरेन्द्र प्रताप सिंह धीरू, तुलसीपुर से दीपेन्द्र सिंह दीपांकर और गैसड़ी से डॉ. इस्तियाक अहमद खाँ को टिकट दिया है। बताया जाता है कि इसी सिलसिले में शुक्रवार (4 फरवरी 2022) को श्रावस्ती स्थित वीआईवी गेस्ट हाउस में पार्टी के राष्ट्रीय सचिव सत्य नारायण पटेल कार्यकर्ताओं, आवेदकों और प्रत्याशियों के साथ अलग-अलग विचार विमर्श कर रहे थे। इसी दौरान ये सभी आरोपी वहाँ पहुँच गए और उनके साथ मारपीट की।

कॉन्ग्रेस अनुशासन समिति का कहना है कि इन लोगों ने राष्ट्रीय सचिव के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए उन पर हमला किया और मारपीट की। यह घटना घोर अनुशासनहीनता है। अनुज कुमार सिंह ने अपने आवास पर पत्रकारों को बताया कि उनके ऊपर लगाए सारे आरोप निराधार हैं। उन्होंने कोई अनुशासनहीनता नहीं की है। टिकट बँटवारे को लेकर कार्यकर्ताओं में थोड़ी बहुत नाराजगी जरूर थी।

अनुज ने कहा, “30 साल से मैं पार्टी का अनुशासित सिपाही रहा हूँ। मेरे खिलाफ लगाए गए सारे आरोप बेबुनियाद हैं। उनसे मारपीट नहीं की गई, बल्कि उनसे कुछ लोग अभद्रता कर रहे थे और वे उन्हें बचाने के प्रयास कर रहे थे। मैंने अपनी बात पार्टी फोरम पर रखी है और सोनिया गाँधी जी के समक्ष भी अपनी बात रखूँगा।”

बता दें कि कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय सचिव सत्यनारायण पटेल मध्य प्रदेश के इंदौर शहर से दो बार कॉन्ग्रेस के टिकट पर विधायक रहे हैं। उन्हें सोनिया गाँधी और प्रियंका गाँधी का बेहद खास माना जाता है।

तब संगीत की दुनिया में दुर्रानी का था जलवा, लता मंगेशकर को किया था अपमानित: सुर साम्राज्ञी के जीवन के कुछ अनसुने किस्से

बॉलीवुड की मशहूर गायिका और स्वर कोकिला लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) का रविवार (6 फरवरी, 2022) को निधन हो गया है। कई दिनों से मुबंई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती गायिका की स्थिति में सुधार नहीं होने के बाद वह हफ्तों से आईसीयू में थीं, जहाँ आज सुबह 8 बजकर 12 मिनट पर 92 साल की उम्र में उन्होंने अंतिम साँस ली। भले ही वह अब हमारे बीच नहीं रहीं, लेकिन उनकी सुरीली आवाज हमेशा लोगों के जेहन में जिंदा रहेगी। आज हम आपको उनसे जुड़े कुछ ऐसे ही किस्से बताने जा रहे हैं, जिसे आप इससे पहले नहीं जानते होंगे।

ऐसे मिला ‘मंगेशकर’ नाम का टाइटल

लता मंगेशकर का जन्म 28 सितम्बर, 1929 को मध्य प्रदेश के इंदौर में हुआ था। उनकी माता का नाम शेवन्ती देवी था और पिता का नाम पंडित दीनानाथ मंगेशकर था। लता जी के पिता को अपने पिता पक्ष से ज्यादा माता पक्ष से लगाव था। दीनानाथ की माँ येसूबाई देवदासी थीं। वो गोवा के ‘मंगेशी’ गाँव में रहती थीं। वो मंदिरों में भजन-कीर्तन कर जिंदगी का गुजारा करती थीं। बस यहीं से दीनानाथ को ‘मंगेशकर’ नाम का टाइटल मिला। दीनानाथ मंगेशकर गायक के साथ थिएटर कलाकार भी थे, जिन्होंने मराठी भाषा में कई संगीतमय नाटकों का निर्माण किया था।

लता मंगेशकर, अपने पिता की पाँच संतानों में सबसे बड़ी थीं। लता के छोटे-भाई बहनों ने भी उनके नक्शे कदम पर चलते हुए संगीत की दुनिया में कदम रखा और देश के मशहूर गायक बने। स्टारडस्ट को दिए एक पुराने इंटरव्यू में उन्होंने (गायिका) बताया था, “एक बार मेरे पिता ने अपने शिष्य को एक राग का अभ्यास करने के लिए कहा था। उस वक्त मैं पास में खेल रही थी, अचानक मैं उस राग को दोहराने लगी था। जब मेरे पिता ने मुझे वह राग दोहराते हुए देखा तो वह बहुत खुश हुए, उन्होंने अपनी ही बेटी में एक शिष्य को खोज लिया था।

नौशाद के साथ गाना रिकॉर्ड करते समय लता हो गई थीं बेहोश

लता ने अपने करियर का पहला गाना ‘नाचू या गाड़े, खेलो सारी मणि हौस भारी’ 1942 में आई एक मराठी फिल्म ‘किटी हसाल’ के लिए रिकॉर्ड किया था, लेकिन दुर्भाग्यवश इस गाने को फिल्म के फाइनल कट से हटा दिया गया था। उन्होंने फ़र्स्टपोस्ट को दिए इंटरव्यू में इसका खुलासा किया था कि संगीतकार नौशाद के साथ एक गाना रिकॉर्ड करते समय वह एक बार बेहोश हो गई थीं।

उन्होंने कहा था, “हम गर्मी की दोपहर में एक गाना रिकॉर्ड कर रहे थे। आप जानते हैं कि गर्मियों में मुंबई कैसे हो जाती है। उन दिनों रिकॉर्डिंग स्टूडियो में एसी (AC) नहीं होता था। यहाँ तक कि फाइनल रिकॉर्डिंग के दौरान सीलिंग फैन को भी बंद कर दिया गया था। बस, फिर क्या था, मुझे इतनी गर्मी लगी कि मैं बेहोश हो गई।”

नूरजहाँ, शमशाद बैगम जैसी भारी आवाज वाली गायिकाओं के कारण हुईं रिजेक्ट

कहा जाता है कि जिस समय लता मंगेशकर ने बॉलीवुड इंडस्ट्री में प्ले बैक सिंगर के तौर पर एंट्री की थी, उस वक्त उन्हें उनकी पतली आवाज के कारण रिजेक्ट कर दिया गया था। दरअसल, उस दौर में नूरजहाँ और शमशाद बैगम जैसी भारी आवाज वाली गायिकाओं का दबदबा था। वहीं, ट्रेजेडी किंग दिवंगत अभिनेता दिलीप कुमार और संगीतकार मदन मोहन को लता मंगेशकर अपने भाई की तरह मानती थीं। रक्षाबंधन के मौके पर लता ने इन दोनों को राखी भी बाँधती थीं। लता मंगेशकर को गायन के साथ-साथ फोटोग्राफी का भी शौक था।

दुर्रानी के बेहूदा मजाक ‘तुम कैसे सफेद चादर लपेटकर चली आती हो’ का दिया था करारा जवाब

1940 के दशक में म्यूजिक की दुनिया में जीएम दुर्रानी का जलवा था। उस दौर में कोई नया म्यूजिक डायरेक्टर उनके पास पहुँचता तो दुर्रानी उसको जलील करने में कोई कसर नहीं छोड़ते थे। एक बार नौशाद साहब लता और दुर्रानी के गाने की रिकॉर्डिंग कर रहे थे। उस वक्त दुर्रानी का बर्ताव शर्मीली और विनम्र लता प्रति बेहद रूखा था। उनके व्यवहार में अहंकार झलकता था। नौशाद साहब खुद उस घटना के गवाह थे।

उन्होंने बताया था, “उस समय सिर्फ दो माइक होते थे। एक संगीतकारों के लिए, दूसरा गायकों के लिए इस तरह वे दोनों (दुर्रानी और लता) आमने-सामने खड़े थे। जैसे ही दुर्रानी की लाइन पूरी होती, वे उनके साथ काफी बुरा और अजीब व्यवहार करने लगते थे।” यही नहीं दुर्रानी ने लता के सादे पहनावे का मजाक उड़ाते हुए लखनवी उर्दू में कहा, “लता, तुम रंगीन कपड़े क्यों नहीं पहनती? तुम कैसे इस तरह सफेद चादर लपेटकर चली आती हो।” लेकिन लता मंगेशकर ने इंडस्ट्री में नई होने के बावजूद उनके इस बेहूदा मजाक को सहन नहीं किया। लता मंगेशकर ने कहा, “मैं सोचती थी कि ये आदमी मेरे पहनावे की जगह मेरे गायन पर ज्यादा ध्यान देगा। उसी पल मैंने फैसला किया कि मैं उस कलाकार के साथ फिर नहीं गाऊँगी।”

छोटे भाई-बहनों की जिम्मेदारी के चलते कभी शादी नहीं की

दादासाहब फाल्के और भारत रत्न अवॉर्ड से सम्मानित महान गायिका ने अपने सिंगिंग करियर में कई सदाबहार गाने गाए हैं, जो हमेशा संगीत प्रेमियों के बीच अमर रहेंगे। आप शायद नहीं जानते होंगे कि जन्म के समय लता जी का नाम हेमा रखा गया था। दरअसल, एक बार उनके पिता दीनानाथ ने ‘भावबंधन’ नाटक में काम किया, जिसमें एक फीमेल कैरेक्टर का नाम ‘लतिका’ था। दीनानाथ जी को ये नाम इतना पसंद आया कि उन्होंने जल्दी से अपनी बेटी ‘हेमा’ का नाम बदलकर ‘लता’ रख दिया।

लता मंगेशकर के बारे में यह भी कहा जाता है कि उन्होंने अपने छोटे भाई-बहनों की जिम्मेदारी के चलते कभी शादी नहीं की थी। आज तक को दिए एक इंटरव्यू में लता की बहन मीनाताई मंगेशकर ने कहा था- सब कुछ था लता के पास, पर हम लोग भी थे ना। वो हम लोगों को छोड़कर कुछ नहीं कर सकती थीं। वो शादी करतीं तो हम लोगों को छोड़कर कुछ नहीं कर सकती थीं। वो शादी करतीं तो हम लोगों से दूर हो जातीं। वो उन्हें नहीं चाहिए था। इसलिए दीदी ने शादी नहीं की

‘जो कर्म से बड़े होते हैं, उनका आशीर्वाद मिलना ज़रूरी होता है’: सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर ने PM मोदी के लिए क्यों कहा था ऐसा

सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर के निधन से पूरा देश स्तब्ध है और उनके योगदान को याद कर रहा है। 8 दशकों तक अपने सुरों से देश-दुनिया की सेवा करती रहन लता मंगेशकर के निधन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि वो अपने लिए इसे काफी सम्मान की बात समझते हैं कि उन्हें हमेशा लता मंगेशकर से प्यार मिला। उन्होंने कहा कि ‘लता दीदी’ के साथ उनकी मुलाकातें हमेशा यादगार बनी रहेंगी। पीएम मोदी ने उनके परिवार से भी बात कर के सांत्वना दी।

क्या आपको पता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लता मंगेशकर के बीच हमेशा से मधुर रिश्ते रहे हैं। सितंबर 2019 में अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में पीएम मोदी ने सुर साम्राज्ञी से बात करते हुए फोन कॉल की रिकॉर्डिंग भी शेयर की थी। लता मंगेशकर की जन्मदिन के मौके पर उन्होंने एक वाकया सुनाया। दरअसल, पीएम मोदी ने अमेरिका दौरे पर जाने से पहले ही लता मंगेशकर को आगामी जन्मदिन की बधाई दे दी थी क्योंकि जन्मदिन वाले दिन वह फ्लाइट में होते।

तब लता मांगशकार ने फोन कॉल पर पीएम मोदी से कहा था, “मैं यह जान कर काफ़ी ख़ुश हो गई थी कि आपका फोन आने वाला है। बस आपका आशीर्वाद चाहिए।” पीएम मोदी ने लता मंगेशकर को याद दिलाया था कि वह बड़ी हैं, और आशीर्वाद देने का फ़र्ज़ उनका बनता है। इसके जवाब में वयोवृद्ध गायिका ने कहा था, “उम्र में तो बहुत लोग बड़े होते हैं लेकिन जो कर्म से बड़े होते हैं, उनका आशीर्वाद मिलना ज़रूरी होता है।“ इस बातचीत को आप नीचे सुन सकते हैं।

लता मंगेशकर का जन्म 1929 में हुआ था। उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर मराठी और कोंकणी भाषा के लोकप्रिय संगीतकार हुआ करते थे। उनके दादा गणेश भट्ट गोवा स्थित मंगेशी मंदिर में पुजारी थे और शिवलिंग के जलाभिषेक की जिम्मेदारी संभालते थे। सुर साम्राज्ञी का जैम मध्य प्रदेश के इंदौर में हुआ था। मात्र 13 वर्ष की उम्र में हृदय रोग के कारण उनके पिता का निधन हो गया था। 1949 में ‘महल’ फिल्म में ‘आएगा आने वाला’ गाने से उन्होंने शोहरत बटोरी थी।

जिन लता मंगेशकर के लिए 2 दिन का राष्ट्रीय शोक… उनके निधन पर Ha-Ha रिएक्शन देने वालों को पहचानिए

लता मंगेशकर अब हमारे बीच नहीं रहीं। वो सिर्फ देश की बेटी नहीं थीं, भारत-रत्न भी थीं। 2 दिन का राष्ट्रीय शोक भी घोषित किया जा चुका है। उनकी याद में देश शोक में डूबा है… सिवाय कुछ ऐसे लोगों के, जिनकी मानसिकता बेहद जहरीली है। ऐसे लोग हँस रहे हैं, खुशियाँ मना रहे हैं।

लता मंगेशकर का नजरिया राष्ट्रवादी रहा था और उन्होंने कभी इसे छिपाया भी नहीं। पीएम मोदी उनके चहेते नेता थे, यह भी समय-समय पर सबको बताया। बस यही वजह है कि उनके निधन पर जहरीले लोग हँस रहे हैं, सोशल मीडिया पर ‘हाहा’ रिएक्शन दे रहे।

बॉलीवुड में काम करने के बावजूद वीर सावरकर को लेकर लता मंगेशकर ने हमेशा खुल कर अपनी बात रखी। अब उनके निधन पर इसे लेकर भी जहर उगला जा रहा है। वीर सावरकर को लता मंगेशकर पिता समान मानती थीं और सोशल मीडिया से लेकर मीडिया तक में यह बात दम-खम के साथ स्वीकारती भी थीं।

लता मंगेशकर ने अपने राष्ट्रवादी नजरिए को लेकर हमेशा से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का साथ दिया। आरएसएस की कार्यशैली से वो सदैव अपने आप को जोड़ती थीं। सरसंघचालक के साथ उनकी तस्वीरें भी मीडिया में आती थीं। अब इन्हीं चीजों को लेकर उनके निधन पर जहरीले लोग ‘ऊँ शांति’ या RIP जैसी श्रद्धांजलि देने से लोगों को बचने की सलाह दे रहे हैं।

लता मंगेशकर देश की सम्मान थीं। उन्हें अपने निधन पर चंद जयचंदों से श्रद्धांजलि की जरूरत नहीं। ऐसे जयचंद सोशल मीडिया पर रोते रहें, चिल्लाते रहें… इनके कुनबे के चंद लोगों के सिवाय इनकी कोई सुनता भी नहीं। बस इनकी पहचान जरूरी है, ताकि हम सावधान रहें।

जहाँ अभी हिजाब विवाद, वहाँ 2 महीने पहले मुस्लिमों ने हिंदुओं का किया था बहिष्कार… गोहत्या के खिलाफ प्रदर्शन से थे नाराज

कर्नाटक (Karnataka) के उडुपी जिले में हिजाब पहनकर स्कूल-कॉलेजों में जाने की इजाजत को लेकर मुस्लिम छात्राएँ प्रदर्शन (Protest Over Hijab) कर रही हैं। वहीं, कुछ महीने पहले उडुपी जिले के कुंडापुर में मुस्लिमों ने हिंदुओं से मछली खरीद का बहिष्कार कर दिया था, क्योंकि उन्होंने गोहत्या और मवेशी चोरी के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लिया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबि​क, 1 अक्टूबर 2021 को हिंदू जागरण मंच द्वारा तालुक के गंगोली में मवेशी चोरी और गोहत्या के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया गया था। प्रदर्शन में मछुआरे, मछली विक्रेता और महिलाओं सहित हजारों लोगों ने हिस्सा लिया था। इसके बाद क्षेत्र में रहने वाले मुसलमानों ने गंगोली बाजार से मछली खरीद का बहिष्कार कर दिया था। इतना ही नहीं, लोगों को भी हिंदू मछली विक्रेताओं से मछली नहीं खरीदने के लिए उकसा रहे थे।

भाजपा बिंदूर मंडल के पिछड़ा वर्ग मोर्चा ने इस घटना की निंदा की थी। उस दौरान विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और बजरंग दल ने गंगोली बंदरगाह से मछली खरीदने का बहिष्कार करने वाले मुसलमानों का कड़ा विरोध जताते हुए कहा था, “गंगोली में मछली बेचने वाले मछुआरों के साथ अन्याय किया जा रहा है, उन्हें बेवजह निशाना बनाया जा रहा है। मुसलमानों को हिंदू विक्रेताओं से मछली खरीदने से रोका जा रहा है, क्योंकि उन्होंने गोहत्या के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया था।”

इन दोनों संगठनों की कुंडापुर इकाइयों के नेताओं और नंदगोकुला काजू कारखाने के कर्मचारियों ने गंगोली मछली बाजार के मछुआरों के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद की थी। उन्होंने मछली बेचने वाली महिलाओं से कहा कि हिम्मत नहीं हारे। समय आने पर विभिन्न गाँवों के हिंदू मछली खरीदने के लिए गंगोली आएँगे।

विहिप के सदस्य प्रेमानंद शेट्टी ने मछली खरीद का बहिष्कार करने वाले मुस्लिमों की निंदा करते हुए कहा था कि मुसलमान ऐसा करके मछली बेचने वाली गरीब महिलाओं के साथ अन्याय कर रहे हैं। हिंदू संगठन मछली विक्रेताओं का समर्थन करने का संकल्प लेता है।

उन्होंने कहा, “हजारों वर्षों से इस समुदाय (मुस्लिमों) द्वारा देश में बहिष्कार को साजिश के तहत एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया गया है। साजिश है कि हिंदुओं को देश से अलग कर दो, लेकिन यह साजिश नाकाम होगी। इस विशेष समुदाय ने अब तक हमारे साथ होने का दिखावा करके हमारा विश्वास जीता, लेकिन अब अचानक यहाँ के व्यापारियों को कुचलने की कोशिश करने लगा। हम मछुआरे के साथ मजबूती से खड़े हैं।”

मामला तूल पकड़ने के बाद उडुपी जिले के भाजपा महासचिव सदानंद उप्पिनकुद्रु (Sadananda Uppinakudru) ने मछुआरों को भरोसा दिलाया था कि पार्टी के सदस्य हमेशा उनका समर्थन करेंगे। और इस निर्वाचन क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों से लोग बाजार में मछली खरीदने के लिए गंगोली आएँगे। यह बहिष्कार ज्यादा दिन नहीं चलेगा।

क्या है मामला

बता दें कि कर्नाटक के उडुपी के स्कूल से शुरू हुआ हिजाब विवाद पूरे कर्नाटक में फैल गया है। 3 फरवरी की सुबह कर्नाटक के उडुपी जिले के कुंडापुर के भंडारकर कॉलेज में हिजाब पहनी 20 से अधिक छात्राओं को कॉलेज में प्रवेश करने से रोक दिया गया था। पीयू कॉलेज का यह मामला सबसे पहले 2 जनवरी 2022 को सामने आया था, जब 6 मुस्लिम छात्राएँ क्लासरूम के भीतर हिजाब पहनने पर अड़ गई थीं।

कॉलेज के प्रिंसिपल रूद्र गौड़ा ने कहा था कि छात्राएँ कॉलेज परिसर में हिजाब पहन सकती हैं, लेकिन क्लासरूम में इसकी इजाजत नहीं है। प्रिंसिपल के मुताबिक, कक्षा में एकरूपता बनाए रखने के लिए ऐसा किया गया है। इसी क्रम में मुस्लिम छात्रा ने हाईकोर्ट में भी याचिका दायर कर कॉलेज पर भेदभाव का आरोप लगाया था। हालाँकि, इस बीच इस्लामीकरण के प्रतीक हिजाब के विरोध में 2 फरवरी को उडुपी के कुंडापुर सरकारी कॉलेज के 100 से अधिक छात्र भी भगवा स्कार्फ कंधे पर डालकर कॉलेज पहुँच गए।

भले ही इस विरोध प्रदर्शन को ‘हिजाब’ के नाम पर किया जा रहा हो, लेकिन मुस्लिम छात्राओं को बुर्का में शैक्षणिक संस्थानों में घुसते हुए और प्रदर्शन करते हुए देखा जा सकता है। इससे साफ़ है कि ये सिर्फ गले और सिर को ढँकने वाले हिजाब नहीं, बल्कि पूरे शरीर में पहने जाने वाले बुर्का को लेकर है। हिजाब सिर ढँकने के लिए होता है, जबकि बुर्का सर से लेकर पाँव। कई इस्लामी मुल्कों में शरिया के हिसाब से बुर्का अनिवार्य है। कर्नाटक में चल रहे प्रदर्शन को मीडिया/एक्टिविस्ट्स भले इसे हिजाब से जोड़ें, ये बुर्का के लिए हो रहा है।

‘मुझ पर अत्याचार करते हैं, गरीबों की जमीन कब्जाते हैं’: सपा प्रत्याशी रोशनलाल वर्मा पर बहू ने लगाया आरोप, कहा- उन्हें वोट ना दें

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों (Uttar Pradesh Assembly Election) से ठीक पहले भाजपा (BJP) छोड़कर समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) में शामिल हुए रोशन लाल वर्मा (Roshan Lal Verma) को उनके घर से ही चुनौती मिल रही है। वर्मा की बहू ने आरोप लगाया है कि उनके ससुर ने विधायक रहते गरीबों पर बहुत अत्याचार किए। गरीबों की जमीनों पर कब्जे किए।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, रोशन लाल की बहू ने उन्हें अत्याचारी बताया है। कहा कि वर्मा उन पर अत्याचार किए, उन्हें बहुत परेशान किए, क्योंकि वे उन्हें बहू नहीं मानते हैं। उनकी बहू ने इलाके के लोगों से वर्मा को वोट नहीं देने की अपील की।

बता दें कि रोशन लाल वर्मा शाहजहाँपुर के तिलहर विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी हैं। वहीं, उनकी बहू सरिता राष्ट्रीय समाज पक्ष पार्टी के टिकट पर चुनावी मैदान में हैं। बहू सरिता ने वर्मा के खिलाफ गाँव-गाँव प्रचार करना शुरू कर दिया है। इस दौरान वह अपने ससुर के अत्याचारों की कथा लोगों को सुना रही हैं।

सरिता का कहना है कि वह चुनावी मैदान में इसलिए उतरी हैं, ताकि उनके ससुर द्वारा कब्जा की गई जमीनों को वापस गरीबों को दिला सकें। उन्होंने कहा कि अगर वह जीतती हैं इलाके की जनता को अपने ससुर के अत्याचारों से बचाएँगी।

बता दें कि रोशन लाल वर्मा जनवरी में भाजपा छोड़कर समाजवादी पार्टी में चले गए थे। उन्हें अपना टिकट कटने का डर सता रहा था। वर्मा ने कहा था कि उनका टिकट अंत तक बना रहता, इस बात का उन्हें भरोसा नहीं था। अभी हाल ही में उनका दो वीडियो भी वायरल हुआ था, जिनमें वह मीडिया पर नाराजगी जाहिर कर रहे हैं और कुछ नेताओं के लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते दिख रहे हैं।

बता दें कि वर्मा पर निगोही थाने में दो और रोजा थाने में एक मुकदमा दर्ज है। इनमें से एक केस पुलिस के साथ मारपीट करने के संबंधित है। अगर उनकी संपत्ति की बात करें तो 2017 में रोशन लाल की कुल संपत्ति 37,29,059 रुपए और उनकी पत्नी के पास कुल 7,83,291 थी। इन 5 सालों में वर्मा और उनकी पत्नी की संपत्ति में बड़ा इजाफा हुआ है। वर्मा की संपत्ति 5 साल में दुगनी से अधिक होकर 48,45,685 रुपए हो गई है। वहीं, उनकी पत्नी की संपत्ति में भी दोगुनी बढ़ोत्तरी हुई है।

लता मंगेशकर का 92 साल की उम्र में निधन, PM मोदी ने याद किया उनका योगदान

सुर-साम्राज्ञी लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) का 92 साल की उम्र में रविवार (6 फरवरी 2022) को निधन हो गया। अपनी सुरीली आवाज से दुनिया भर में अपनी पहचान बनाने वाली गायिका ने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्‍पताल में अंतिम साँस ली।

‘भारत रत्‍न’ से सम्‍मानित दिग्गज गायिका लता मंगेशकर को 8 जनवरी 2022 को कोरोना संक्रमित पाए जाने पर हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। बाद में उन्हें न्यूमोनिया हो गया था, जिससे उनकी हालत बिगड़ने लगी। इसके बाद उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था। उनकी हालत में सुधार के बाद वेंटिलेटर सपोर्ट भी हट गया था, लेकिन 5 फरवरी को उनकी स्थिति बिगड़ने लगी और उन्हें फिर से वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया। आखिरकार, 6 फरवरी को ‘स्वर कोकिला’ ने अंतिम साँस ली।

बता दें कि लता मंगेशकर ने बॉलीवुड में करीब सात दशक तक अपनी मधुर आवाज से लोगों के दिलों पर राज किया है। वह दुनियाभर में ‘भारत की नाइटिंगेल’ के नाम से मशहूर हैं।

लता मंगेशकर और उनका परिवार उन लोगों में से हैं, जिन्होंने कभी भी कॉन्ग्रेस और उसके वफादारों के बनाए गए सिस्टम के प्रोपेगेंडा पर भरोसा नहीं किया। उन्होंने पाया कि वीर सावरकर भारत की स्वतंत्रता के लिए समर्पित देशभक्त और प्रतिभाशाली व्यक्ति थे, जो कविता और लेखन का कार्य भी करते थे।

स्वर कोकिला लता मंगेशकर और उनका परिवार वीर सावरकर के साथ अपने घनिष्ठ संबंधों को लेकर हमेशा गौरवान्वित रहा है। हर साल सावरकर की जयंती और पुण्यतिथि पर (28 मई और 26 फरवरी) लता मंंगेशकर हिंदुत्व के इस विचारक को सार्वजनिक तौर पर श्रद्धांजलि देने और अंग्रेजों के खिलाफ भारत के स्वतंत्रता संग्राम में उनके अमूल्य योगदान को दोहराने से कभी नहीं कतराती थीं।

5 विकेट, 35 रन… U-19 क्रिकेट वर्ल्ड कप में पोते ने तोड़ी इंग्लैंड की कमर, दादा ने 1948 में अंग्रेजों को हरा जीता था गोल्ड मेडल

भारत U-19 क्रिकेट का वर्ल्ड चैंपियन बन गया है। इंग्लैंड को फाइनल में हराकर भारतीय टीम ने 5वीं बार वर्ल्ड चैंपियन का खिताब अपने नाम किया। इंग्लैंड को 189 रन पर ऑल आउट करने के बाद भारतीय बल्लेबाजों ने 6 विकेट खो कर 195 रन बनाए और छक्के के साथ जीत दर्ज की।

फाइनल में भारत की ओर से राज बावा ने 31 रन देकर 5 विकेट लिए। साथ ही बल्लेबाजी में भी उन्होंने 35 रन बनाए। इस शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। राज बावा के दादाजी त्रलोचन बावा ओलंपिक के गोल्ड मेडलिस्ट थे। 1948 में जिस भारतीय हॉकी टीम ने ओलंपिक का गोल्ड मेडल जीता था, उस टीम में वो भी थे। 66वें मिनट में उन्होंने भारत की ओर से इंग्लैंड के खिलाफ चौथा गोल भी दागा था।

राज बावा दाएँ हाथ से बॉलिंग करते हैं जबकि बैटिंग वो बाएँ हाथ से करते हैं। युवराज सिंह इनके रोल मॉडल हैं। बाएँ हाथ के इस बल्लेबाज ने बाएँ हाथ के ही शिखर धवन का रिकॉर्ड भी इस अंडर-19 वर्ल्ड कप में तोड़ा। युगांडा के खिलाफ मैच में राज बावा ने 8 छक्के और 14 चौके की मदद से 162 रन बनाए। इस तरह अंडर-19 वर्ल्ड कप में भारत की ओर से एक मैच में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया।

कप्तान की बात करें तो यश धुल ने मोहम्मद कैफ, विराट कोहली, उन्मुक्त चंद और पृथ्वी शॉ की बराबरी कर ली है। सेमीफाइनल मैच में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शानदार 110 रन बना कर यश धुल ने अपनी बैटिंग और कप्तानी दोनों का जलवा दिखाया था।

U-19 क्रिकेट वर्ल्ड कप में भारतीय लड़कों की जीत अपने आप में एक रिकॉर्ड है। कुल 14 बार हुए U-19 क्रिकेट वर्ल्ड कप में से 5 बार भारत के लड़कों ने यह ट्रॉफी उठाई है। ऑस्ट्रेलिया ने 3 बार, पाकिस्तान ने 2 बार जबकि इंग्लैंड, साउथ अफ्रीका, वेस्ट इंडीज और बांग्लादेश ने 1-1 बार जीत दर्ज की है।