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‘शादी की उमर है और बुड्ढे को लाइक कर रही’ – PM मोदी को पसंद करने पर महिला क्रिकेट कप्तान मिताली राज को गाली

क्रिकेट के मैदान में अपने दमदार प्रदर्शन के लिए सबकी वाहवाही लूटने वाली भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान मिताली राज (Mithali Raj) का सोशल मीडिया पर एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है। दरअसल, ट्विटर पर उन्होंने अपने पसंदीदा नेता के बारे में बताया है… और वह कोई और नहीं बल्कि अपने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं।

मिताली राज ही नहीं देश के अधिकतर सेलिब्रिटी और किक्रेटर्स के भी पसंदीदा नेता पीएम मोदी ही हैं। ट्विटर के जरिए एक प्रशंसक ने मिताली राज से उनके पसंदीदा नेता का नाम पूछा था, जिसके जवाब में उन्होंने लिखा, “हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी।”

सोशल मीडिया यूजर्स को उनका जबाव काफी पसंद आया है। एक यूजर ने क​हा, “मैम हमें आप पर गर्व है।”

एक और यूजर ने मिताली राज की तारीफ करते हुए लिखा, “मैम अब आपको संघी, भक्त और अंधभक्त न जाने क्या-क्या कहा जाएगा, लेकिन हम हमेशा आपके साथ रहेंगे।”

वहीं कुछ ट्रोल्स ऐसे भी हैं, जिन्हें पीएम मोदी की प्रशंसा रास नहीं आई और उन्होंने महिला खिलाड़ी को ट्रोल करना शुरू कर दिया।

बता दें कि मिताली राज ने ट्विटर पर एक दर्शक को जवाब देते हुए अपने फेवरेट पुरुष और महिला खिलाड़ियों के नाम भी बताए। मिताली राज से एक प्रशंसक ने सवाल पूछा कि आपके पुरुष और महिला क्रिकेटरों में कौन फेवरेट है? जिस पर मिताली राज ने ऑस्ट्रेलिया की पूर्व दिग्गज बल्लेबाज कैरेन रोल्टन, पूर्व भारतीय क्रिकेटर नीतू डेविड और मौजूदा क्रिकेटर्स में इंग्लैंड की कैथरीन ब्रंट व ऑस्ट्रेलिया की कप्तान मैग लैंगिंग का नाम बताया।

नैनी ने 8 महीने की बच्ची को पटका, बिस्तर पर कई बार सिर दे मारा, बाल नोचे, थप्पड़ मारे: कैमरे में कैद हुई घटना, ICU में चल रहा इलाज

गुजरात के सूरत से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ एक नैनी ने 8 महीने के शिशु को पटक दिया (Nanny Assaults Kid) और कई बार बिस्तर पर उसका सिर दे मारा। इस घटना का वीडियो (Video) भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें महिला केयरटेकर को छोटे से बच्ची के सिर को बार-बार बिस्तर से दे मारते हुए और फिर नीचे पटकते हुए देखा जा सकता है। इस घटना के कारण बच्ची का ब्रेन हेमरेज हो गया। एक स्थानीय प्राइवेट अस्पताल में बच्चे का इलाज चल रहा है।

बच्ची को फ़िलहाल ICU में रखा गया है और उसकी हालत नाजुक है। ये घटना सूरत के रांदेर पालनपुर पाटिया की है। बच्ची के माता-पिता दोनों ही नौकरी करते हैं और इसीलिए उन्होंने बच्चों की देखभाल करने के लिए एक नैनी रखी हुई थी। कुछ पड़ोसियों ने उन्हें बताया था कि उनके दफ्तर में रहने के दौरान घर में से बच्चों के रोने की आवाज़ें आती हैं। इसके बाद पति-पत्नी ने घर में एक CCTV कैमरा इनस्टॉल करवाया। इसी कैमरे में ये घटना कैद हो गई है।

इस वीडियो में केयरटेकर को बच्ची की पिटाई करते हुए देखा जा सकता है। वो बार-बार बच्ची के सिर को बिस्तर पर मार रही होती है। इसके साथ-साथ वो बच्ची के बाल नोच रही होती है और उस पर ताबड़तोड़ थप्पड़ भी बरसाती है। फिर वो बच्ची को निर्दयता के साथ इधर-उधर हिलाती है। इस घटना के बाद बच्ची के माता-पिता ने पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। गुजरात पुलिस ने महिला को हिरासत में ले लिया है। जाँच के बाद आगे की कार्रवाई की जा रही है।

बच्ची की दादी कलाबेन पटेल ने ‘इंडिया टुडे’ से बात करते हुए बताया, “आरोपित कोमल चंदलेकर को तीन महीने पहले ही हायर किया गया था। शुरुआत में कोमल उन बच्चों की देखभाल किया करती थी। हालाँकि, बच्चे इस दौरान लगातार रोते रहते थे, इसीलिए संदेह पैदा हुआ। फिर CCTV लगवाया गया और ये मामला सामने आया।” पिता मितेश पटेल ने रांदेर पुलिस थाने में हत्या के प्रयास के आरोप में FIR दर्ज कराई है। आरोपित महिला 5 वर्षों से शादीशुदा है, लेकिन उसका कोई बच्चा नहीं है।

बिहारी लड़के ने 51 सेकेंड तक हैक किया गूगल, मिली ₹3.66 करोड़ की नौकरी: वायरल न्यूज का सच

बिहार के बेगुसराय का एक लड़का ऋतुराज इन दिनों सोशल मीडिया पर छाया हुआ है। वायरल संदेशों में उसे लेकर दावा किया जा रहा है कि उसने हाल में गूगल को पूरे 51 सेकेंड के लिए हैक करके अमेरिका में बैठे अधिकारियों को ऐसा हिलाया कि उन्होंने ऋतुराज को गूगल में नौकरी करने के लिए 3.66 करोड़ का पैकेज ऑफर किया और उसका वीजा भी बनवा दिया।

वायरल संदेश ऐसा है कि कोई भी पढ़कर इसे अचंभित हो जाए लेकिन हकीकत क्या है इसका खुलासा हाल में हुआ जब मीडिया वाले ऋतुराज के पास असलियत जानने पहुँचे। ऋतुराज ने मीडिया को जानकारी दी कि उन्होंने गूगल में एक बग की खोज की थी जिसकी पुष्टि गूगल द्वारा भी की गई है। ऋतुराज ने कहा कि गूगल में बग की खोज करने के बाद उन्हें रिसर्चर के तौर पर जरूर शामिल किया गया है लेकिन ये खबर पूरी तरह से भ्रामक है कि उन्हें करोड़ों की नौकरी ऑफर हुई और उन्हें पासपोर्ट बनाकर अमेरिका बुलाया गया।

वायरल होता संदेश

ऋतुराज को लेकर फैलाई जा रही खबर पूरी तरह गलत है। वह खुद बताते हैं कि बग खोजने में और उसको हैक कर लेने में बहुत अंतर होता है। उन्होंने सिर्फ बग की खोज की है। रातों-रात पासपोर्ट बनाने की बात और नौकरी या इनाम मिलने की बातें अभी तक सच नहीं हैं। इतना हीं नहीं वायरल संदेश में दावा है कि ऋतुराज आईआईटी मणिपुर से पढ़ रहे हैं जबकि हकीकत में मणिपुर में कोई आईआईटी है ही नहीं। वे तो मणिपुर ट्रिपल आईटी से बी टेक कर रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, ऋतुराज बेगूसराय शहर के मुंगेरीगंज के रहने वाले हैं। उनके पिता का नाम राकेश चौधरी है। वह बताते हैं कि उनका सपना हमेशा से ही हैकर बनने का था। उन्होंने कई कंपनियों की साइट्स में गलतियाँ खोजीं हैं। पिछले कुछ समय से वो गूगल में गलतियाँ खोजना चाहते थे। हाल में उन्हें साइट पर एक बग नजर आ ही गया। जिसके बाद उन्होंने इसे हाईलाइट कर इसकी जानकारी गूगल को दी। ऋतुराज के मेल पर गूगल ने जब काम किया तो पाया कि बिहार के बेगुसराय के लड़के द्वारा खोजी गई खामी सही है और उनकी टीम इसे सही करने के काम में जुट गई है। इसके साथ ही गूगल ने बताया कि वो ऋतुराज को रिसर्चर के तौर पर शामिल करते हैं।

‘मस्जिद में महिलाओं की एंट्री के लिए क्यों नहीं लड़ते’: राहुल गाँधी की ‘हिजाब राजनीति’ पर बोले कर्नाटक के मंत्री – ये अशांति की साजिश

कर्नाटक के स्कूल-कॉलेजों में कुछ मुस्लिम छात्राएँ हिजाब पहन कर जाने के लिए अड़ी हैं, जबकि उन शैक्षिक संस्थानों के प्रशासन का कहना है कि ये यूनिफॉर्म का हिस्सा नहीं है। चूँकि कर्नाटक में भाजपा की सरकार है, इसीलिए इस मामले में मीडिया गिरोह से लेकर तमाम विपक्षी नेता तक कूद गए हैं। राहुल गाँधी ने इसे हिन्दू त्योहार सरस्वती पूजा से जोड़ते हुए छात्राओं के भविष्य से खिलवाड़ करार दिया। अब कर्नाटक के मंत्री वी सुनील कुमार ने उन्हें जवाब दिया है।

मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई की सरकार में कन्नड़, संस्कृति और ऊर्जा मंत्रालय संभाल रहे सुनील कुमार ने शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब की अनुमति दिए जाने के लिए एक्टिविज्म चला रहे लोगों को चुनौती दी है कि वो मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश के लिए भी इसी तरह का अभियान चलाएँ। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता सिद्दारमैया भी इस मामले में राज्य सरकार को दोष दे रहे हैं। मंत्री सुनील कुमार ने आरोप लगाया कि कर्नाटक में अशांति फैलाने के लिए हिजाब वाला मामला उठाया जा रहा है।

उन्होंने कहा, “एक तरफ ये कट्टरपंथी समाज के हर क्षेत्र में महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाते हैं, वहीं दूसरी तरफ वो चाहते हैं कि शैक्षिक संस्थानों के नियम-कानून भी वही तय करें। सरकार को ये स्वीकार्य नहीं है। मैं उन मुस्लिम महिलाओं से पूछना चाहता हूँ, जिन्हें ‘तीन तलाक’ की बेड़ियों से मुक्त किया गया है। मोदी सरकार ने ये कर के दिखाया है। मुस्लिम महिलाएँ इसे समझें और समाज की मुख्यधारा में शामिल हों। SDPI और सिद्दारमैया जैसों के दबाव में न आएँ।”

मंत्री ने कहा कि छात्राओं के हिजाब अथवा बुर्का पहनने पर कोई रोक नहीं है, लेकिन शैक्षिक संस्थानों के परिसरों के भीतर तक ही -कक्षाओं के अंदर नहीं। उन्होंने कहा कि इन शैक्षिक संस्थानों के ड्रेस कोड्स शुरू से रहे हैं और अब सरकार इस सम्बन्ध में फ्रेमवर्क भी दे रही है। उधर दक्षिण कन्नड़ के सांसद और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नलिन कुमार कटील ने भी स्पष्ट किया कि सरकार दूसरा तालिबान नहीं बनने देगी। उन्होंने विद्यालयों को ‘सरस्वती मंदिर’ बताते हुए कहा कि छात्रों को वहाँ के नियम-कानून का पालन करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जब स्कूल-कॉलेजों के दिशानिर्देशों का पालन नहीं करना है तो वो लोग कुछ और करें, क्योंकि सरकार यहाँ एक और तालिबान का निर्माण नहीं होने देगी। उन्होंने कहा कि ‘टीपू जयंती’ मनाने वाले और खास समुदाय के लिए ‘शादी भाग्य’ योजना लाने वाले सिद्दारमैया अब हिजाब की बातें कर रहे हैं। वहीं सुनील कुमार ने कहा कि सिर्फ कुछ लोग मिल कर नहीं तय करेंगे कि स्कूल-कॉलेजों में क्या पहनना है और सरकार इसे बर्दाश्त नहीं करेगी।

केरल के वायनाड से सांसद राहुल गाँधी ने अपनी ट्वीट में लिखा था, “छात्राओं की शिक्षा के बीच हिजाब को आने देना भारत के बेटियों का भविष्य बर्बाद करने जैसा है। माँ सरस्वती सबको ज्ञान देती है, किसी में भेदभाव नहीं करती।” वहीं तथाकथित पत्रकार रोहिणी सिंह भी पहले तो बुर्का/हिजाब का विरोध करते हुए इसे महिलाओं के साथ जबरदस्ती के रूप में देखती थीं, लेकिन अब मामला भाजपा सरकार के खिलाफ है तो उन्होंने इसका समर्थन करना शुरू कर दिया है।

भले ही इस विरोध प्रदर्शन को ‘हिजाब’ के नाम पर किया जा रहा हो, लेकिन मुस्लिम छात्राओं को बुर्का में शैक्षणिक संस्थानों में घुसते हुए और प्रदर्शन करते हुए देखा जा सकता है। इससे साफ़ है कि ये सिर्फ गले और सिर को ढँकने वाले हिजाब नहीं, बल्कि पूरे शरीर में पहने जाने वाले बुर्का को लेकर है। हिजाब सिर ढँकने के लिए होता है, जबकि बुर्का सर से लेकर पाँव। कई इस्लामी मुल्कों में शरिया के हिसाब से बुर्का अनिवार्य है। कर्नाटक में चल रहे प्रदर्शन को मीडिया/एक्टिविस्ट्स भले इसे हिजाब से जोड़ें, ये बुर्का के लिए हो रहा है।

हिजाब-टोपी पहननी है तो मदरसे जाओ, शरिया चाहिए तो पाकिस्तान जाओ: BJP सांसद प्रताप सिम्हा

कर्नाटक (Kranataka) के उडुपी जिले के पीयू कॉलेज में हिजाब (Hijab) पहनने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मैसुरु से भाजपा सांसद प्रताप सिम्हा (Pratap Simha) ने राज्य में सबके लिए एक समान नियमों को लागू करने के कर्नाटक सरकार के फैसले का समर्थन किया है। हिजाब विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि यदि अन्य समुदाय के विद्यार्थी नौकरी पाने के लिए शैक्षणिक संस्थानों में आते हैं तो मुस्लिम छात्राएँ हिजाब पहनने के लिए कॉलेज आना चाहते हैं।

मुस्लिम छात्रों की मानसिकता को लेकर प्रताप सिम्हा ने आगे कहा, “आप हिजाब, बुर्का, पायजामा या फिर टोपी, जो आपको पसंद हो उसे पहन सकते हैं, लेकिन आप ये सब मदरसे में जाकर कर सकते हैं। शिक्षा प्रणाली नियमों के अनुसार चलती है, चाहे वह निजी संस्थान हों या फिर सार्वजनिक संस्थान। हर छात्र का फर्ज है कि वह ड्रेस कोड के नियमों का पालन करे।”

मैसुरु के सांसद ने आगे कहा, “अगर आप अभी भी शरिया कानून का पालन करने के इच्छुक हैं तो हमने आपको 1947 में एक अलग देश पहले ही दे दिया है। आप भारत छोड़ सकते थे। यदि आप यहाँ रहना चाहते हैं तो आपको इस देश के नियमों और शर्तों का पालन करना होगा। देश को धार्मिक आधार पर अलग किया गया था। तीन में से दो क्षेत्र एक ही समुदाय को दिए गए थे। आप तब उन देशों में जा सकते थे। अभी आप लोग यहाँ क्यों हो?” शिक्षण संस्थानों में सरस्वती पूजा और अन्य हिंदू त्योहारों को मनाने के मुद्दे पर प्रताप सिम्हा ने जोर देकर कहा कि वर्तमान भारत अंग्रेजों का गुलाम नहीं है, यह आजाद भारत है। हिन्दू धर्म भारत का सबसे बड़ा और मूल धार्मिक समूह है।

उन्होंने कहा, “क्या हिंदू अपने रीति-रिवाजों और परंपराओं का पालन करने के लिए मक्का, मदीना, बेथलहम की यात्रा करते हैं?” प्रताप सिम्हा ने कहा कि भारत हिंदू मूल्यों और परंपराओं का प्रतिनिधित्व करता है। इस्लाम और ईसाई धर्म वाले यहाँ शरण लेने के लिए दूर-दूर से आए हैं, इसलिए वे इस भूमि की संस्कृति और परंपराओं पर सवाल नहीं उठा सकते हैं। सिम्हा ने कड़े शब्दों में कहा, “इस्लाम और ईसाई धर्म के लोग इस धरती पर विदेशी हैं। इस्लामिक आक्रमणकारियों ने 700 से अधिक सालों से हम पर इस्लाम मजहब थोपने की कोशिश की है। हालाँकि, हम मजबूती के साथ अपने धर्म के साथ जुड़े रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “मुस्लिमों ने ईरान, इराक, यूनानियों और रोमन जैसी महान सभ्यताओं को नष्ट कर दिया, लेकिन आप हिंदू सभ्यता को नहीं छू सके। आप इस धरती पर शरणार्थी बनकर आए हैं, आपको हिंदू धर्म पर सवाल उठाने का कोई अधिकार नहीं है। संविधान केवल 1950 के दशक में आया है, जो आपको हिंदुओं के समान अधिकार देता है, लेकिन आपको हिंदुओं की संस्कृति पर सवाल उठाने का अधिकार नहीं है। अगर आप नियमों का पालन नहीं कर सकते हैं तो मदरसे में जाएँ।”

पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस (Congress) के वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया (Siddaramaiah) के कॉलेजों में मुस्लिम छात्राओं के हिजाब पहनने का समर्थन करने पर प्रताप सिम्हा ने कहा, “सिद्धारमैया अपनी सुविधा के हिसाब से राजनीति करते हैं और सत्ता के लिए सिद्धारमैया अपना नाम बदलकर ‘सिद्दा-रहीम-अय्या’ भी कर सकते हैं।”

क्या है मामला

पीयू कॉलेज का यह मामला सबसे पहले 2 जनवरी 2022 को सामने आया था, जब 6 मुस्लिम छात्राएँ क्लासरूम के भीतर हिजाब पहनने पर अड़ गई थीं। कॉलेज के प्रिंसिपल रूद्र गौड़ा ने कहा था कि छात्राएँ कॉलेज परिसर में हिजाब पहन सकती हैं, लेकिन क्लासरूम में इसकी इजाजत नहीं है। प्रिंसिपल के मुताबिक, कक्षा में एकरूपता बनाए रखने के लिए ऐसा किया गया है। इसी क्रम में मुस्लिम छात्रा ने हाई कोर्ट में भी याचिका दायर कर कॉलेज पर भेदभाव का आरोप लगाया था। हालाँकि, इस बीच इस्लामीकरण के प्रतीक हिजाब के विरोध में 2 फरवरी को उडुपी के कुंडापुर सरकारी कॉलेज के 100 से अधिक छात्र भी भगवा तौलिया कंधे पर डालकर कॉलेज पहुँच गए।

भले ही इस विरोध प्रदर्शन को ‘हिजाब’ के नाम पर किया जा रहा हो, लेकिन मुस्लिम छात्राओं को बुर्का में शैक्षणिक संस्थानों में घुसते हुए और प्रदर्शन करते हुए देखा जा सकता है। इससे साफ़ है कि ये सिर्फ गले और सिर को ढँकने वाले हिजाब नहीं, बल्कि पूरे शरीर में पहने जाने वाले बुर्का को लेकर है। हिजाब सिर ढँकने के लिए होता है, जबकि बुर्का सर से लेकर पाँव। कई इस्लामी मुल्कों में शरिया के हिसाब से बुर्का अनिवार्य है। कर्नाटक में चल रहे प्रदर्शन को मीडिया/एक्टिविस्ट्स भले इसे हिजाब से जोड़ें, ये बुर्का के लिए हो रहा है।

विंटर ओपलंपिक में लाइव रिपोर्टिंग कर रहे डच पत्रकार को चीनी गार्ड खींच ले गए: अमेरिका ने अपने खिलाड़ियों से कहा- वहाँ मानवाधिकार की बात ना करें

विंटर ओलंपिक 2022 (Winter Olympic 2022) चीन (China) में हो रहा है, जिसे दुनिया भर के पत्रकार कवर करते हैं। लेकिन कम्युनिस्ट विचारधारा का पालन करने वाले चीन को लोकतंत्र और मीडिया की स्वतंत्रता कहाँ से भाएगा। यही हुआ बीजिंग में विंटर ओलंपिक कवर कर रहे एक डच रिपोर्टर के साथ। ओलंपिक की ओपनिंग सेरेमनी की लाइव कवरिंग के दौरान चीन की पुलिस द्वारा उसे जबरदस्ती पकड़ लिया गया।

रिपोर्ट के मुताबिक, घटना शुक्रवार (4 फरवरी 2022) की है, जब ओलंपिक की ओपनिंग सेरेमनी के दौरान डच पब्लिक ब्रॉडकास्टिंग करेस्पॉन्डेंट सोजर्ड डेन दास ने अपनी रिपोर्टिंग कर रहे थे। रिपोर्टिंग के दौरान एक चीनी गार्ड उन्हें जबरदस्ती पीछे धकेलते हुए वहाँ से पकड़ ले गया। इसका वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में दिख रहा है कि वह अपनी बाँह पर लाल पट्टी बाँध रखी है और मैंडरिन भाषा में कुछ कह रहा था।

नॉस न्यूज जर्नल ने सोजर्ड दास को चाइनीच अधिकारियों द्वारा प्रताड़ित किए जाने पर कहा, “हमारे संवाददाता @sjoerddendaas को NOS जर्नल में दोपहर 12.00 बजे सिक्योरिटी गार्डों ने कैमरे से बाहर खींच लिया था। दुर्भाग्य से चीन में पत्रकारों के लिए यह एक डेली रियलिटी बनता जा रहा है। अच्छी बात यह थी कि वो अपनी स्टोरी खत्म कर पाए।”

हालाँकि, आखिर चाइनीज गार्ड ने एक विदेशी पत्रकार के साथ इस तरह का दुर्व्यवहार क्यों किया यह स्पष्ट नहीं हो पाया है। डेन दास के साथ यह घटना बर्ड्स नेस्ट स्टेडियम के बाहर हुई थी। इतना ही नहीं तानाशाही व्यवस्था में विश्वास रखने वाले चीन के डर का इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि उसने विंटर ओलंपिक के दौरान अंतरराष्ट्रीय एथिलीटों को चीन के आक्रामक, उकसावे, उत्पीड़न और नरसंहार के बारे में बात नहीं करने का आदेश दिया था। चीन की सरकार को क्रूर बताते हुए अमेरिका ने भी अपने खिलाड़ियों को वहाँ के मानवाधिकारों के उल्लंघन के बारे में बात नहीं करने की चेतावनी दी है।

अंतर्राष्ट्रीय मीडिया ने कहा वामपंथी गुंडा (Communist Goons)

चीनी सुरक्षाबलों की इस हरकत को डेली मेल ने गुंडागर्दी करार दिया है। डेली मेल ने इस रिपोर्ट में हेडलाइन दी ‘बीजिंग विंटर ओलंपिक के बाहर से लाइव प्रसारण करते समय कम्युनिस्ट गुंडे एक डच रिपोर्टर को खींच कर ले गए’। इसके अलावा रिपोर्ट में इस बात की आशंका जताई गई है कि पीड़ित रिपोर्टर बर्ड्स नेस्ट स्टेडियम के बजाय सड़क पर एक अंधेरे स्थान पर लाइव कर रहे थे। पहले ही कई देश चीन के शिनजियांग में उइघुर मुस्लिमों के नरसंहार के विरोध में चीन का कई देश बहिष्कार कर रहे हैं।

दो बच्चों के अब्बा जुनैद इक़बाल चौहान ने 6 महीने तक किया नाबालिग का रेप: कोचिंग जाते समय करता था पीछा, गुजरात पुलिस ने दबोचा

गुजरात (Gujrat) में राजकोट जिले की जसदण तहसील में नाबालिग लड़की को बरगला कर उसके साथ 6 महीने तक रेप (Rape) करने का मामला प्रकाश में आया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जसदण के ही मुस्लिम आरोपित जुनैद इकबाल चौहान पहले से शादीशुदा है। पुलिस ने आरोपित को केस दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया है।

बताया जाता है कि आरोपित जुनैद (29) जसदण की गबनशाह सोसायटी का रहने वाला है। वहीं पास की ही रहने वाली सगीरा (16) प्रतिदिन शहर के ही एक ट्यूशन में पढ़ने के लिए जाती थी। वो प्रतिदिन सगीरा को आते-जाते देखता था तो उसके प्रति उसका हवस बढ़ता चला गया। बताया जा रहा है कि उसे सगीरा से ‘एकतरफा प्यार’ हो गया था। आरोपित प्रतिदिन सगीरा के कोचिंग जाते वक्त उसका पीछा करता था। एक दिन किसी तरह से जुगाड़ करके उसने उसका मोबाइल नंबर ढूँढ निकाला।

मोबाइल नंबर मिलने के बाद उसने पीड़िता से कॉन्टैक्ट किया और धीरे-धीरे उसे अपने जाल में फँसाया। जब उसे लगा कि लड़की उसके जाल में फँस चुकी है तो उसने सगीरा को मिलने के बहाने एक गेस्ट हाउस पर बुलाया और वहाँ उसके साथ रेप किया। इसके बाद तो उसकी आदत सी बन गई। वो लगातार 6 महीने तक पीड़िता का बार-बार रेप करता रहा। लेकिन, बाद में उसकी प्रताड़ना से तंग आकर एक दिन सगीरा ने अपने परिजनों को इसके बारे में बताया। इसके बाद नाबालिग के घरवालों ने इसकी शिकायत पुलिस में की।

दो बच्चों का बाप है जुनैद

महत्वपूर्ण तथ्य ये है कि 16 वर्षीय नाबालिग से ज्यादती करने वाला जुनैद इकबाल चौधरी पहले से शादीशुदा है और उसके दो बच्चे भी हैं। वो मजदूरी का काम करता है। फ़िलहाल इस मामले में पुलिस ने केस दर्ज उसे गिरफ्तार कर लिया है। आरोपित के खिलाफ इंडियन पीनल कोड (IPC) की धारा 376 (2-N), 354 (D) और POCSO एक्ट-2012 की धारा 4 और 6 के तहत केस दर्ज किया गया है।

‘हिजाब अच्छा तो पुरुष क्यों नहीं पहनते?’: कर्नाटक BJP सरकार को बदनाम करने के लिए ‘2 BHK’ ने बदली राय, सरस्वती पूजा पर प्रोपेगंडा

तथाकथित पत्रकार रोहिणी सिंह आजकल लगातार हिजाब और बुर्का के समर्थन में लगी हुई हैं। कर्नाटक में भाजपा सरकार पर निशाना साधने के लिए वो ऐसा कर रही हैं। खास बात ये है कि यही रोहिणी सिंह पहले इन चीजों का विरोध करती थीं, लेकिन अब चूँकि मामला एक भाजपा शासित राज्य का है – इसीलिए, उन्हें अपना उल्लू सीधा करने का एक अच्छा मौका दिख गया है। अब तो उन्होंने हिन्दू त्योहार ‘सरस्वती पूजा (वसंत पंचमी)’ का सहारा लेकर भी प्रोपेगंडा फैलाना शुरू कर दिया है।

सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाले अंकुर सिंह ने रोहिणी सिंह को ‘2 BHK’ बताते हुए उनके इस दोहरे रवैये की पोल खोली है। इसके लिए उन्होंने उनके कुछ पुराने ट्वीट्स भी साझा किए। शनिवार (5 फरवरी, 2022) को किए गए ट्वीट में रोहिणी सिंह ने लिखा है, “आज सरस्वती पूजा है। आज के दिन भी उन युवा महिलाओं (छात्राओं) के लिए कॉलेज के दरवाजे बंद रहेंगे, सिर्फ इसीलिए क्योंकि वो कौन हैं और क्या पहनते हैं। भारत, आपको ‘सरस्वती पूजा’ की शुभकामनाएँ।” उनके इस ट्वीट पर लोगों ने तीखी प्रतिक्रियाएँ दी हैं।

अब बात करते हैं 22 सितंबर, 2019 को किए गए उनके एक ट्वीट की। इस ट्वीट में उन्होंने एक अन्य वीडियो ट्वीट को कोट किया था, जिसमें हिजाब और महिलाओं के बारे में बताया गया था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए रोहिणी सिंह ने कहा था, “लोल! अगर हिजाब एक अच्छा विकल्प है तो फिर पुरुष इसे क्यों नहीं पहनते हैं?” वहीं 17 फरवरी, 2020 को इसके लिए वो इस्लामी कट्टरपंथी नेता वारिस पठान के साथ बहस कर रही थीं और बुर्का-हिजाब का विरोध कर रही थीं।

इस ट्वीट में वारिस पठान ने बुर्का/हिजाब को इस्लाम में महिलाओं के लिए अनिवार्य बताते हुए कहा था कि हमारी माँ-बहनें इसे स्वेच्छा से पहनती हैं, न कि उन पर इसके लिए कोई दबाव बनाया जाता है। इस पर रोहिणी सिंह ने उत्तर दिया था, “माँ-बहनों के पास इतना ‘फ्री चॉइस’ है कि अगर उन्होंने इसे पहनने से इनकार किया तो उन्हें इस्लाम से बेदखल होने और अपना नाम बदलने के लिए कहा जाएगा।” दरअसल, वारिस पठान ने भारत में शरणार्थी के रूप में रह रहीं बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन को ये सलाह दी थी।

वहीं 16 अक्टूबर, 2019 को किए गए एक ट्वीट में में रोहिणी सिंह ने ये समझने की सलाह दी थी कि ‘चॉइस’ भी सामाजिक परिवेश के हिसाब से होती हैं। उन्होंने लिखा था कि महिलाओं को सामाजिक रूप से ऐसे ही ढाल दिया गया है कि उन्हें कुछ निश्चित ‘चोइसज’ बनाने पड़ते हैं। उन्होंने बुर्का/घूँघट का विरोध करते हुए कहा था कि इससे महिलाओं को अपनी इज्जत साबित करने की जिम्मेदारी दे दी जाती है। उन्होंने इसे ‘खराब चॉइस’ बताते हुए कहा था कि उनकी यही राय है।

बता दें कि कर्नाटक के स्कूल-कॉलेजों में मुस्लिम छात्राएँ जबरन हिजाब पहन कर आना चाह रही हैं, लेकिन इन शैक्षिक संस्थानों का कहना है कि ये यूनिफॉर्म का हिस्सा नहीं है। हिन्दू छात्रों ने भी भगवा स्कॉर्फ और शॉल पहन कर आकर इसका विरोध जताया। राहुल गाँधी भी माँ सरस्वती का नाम लेकर इस मामले में राजनीति खेल रहे हैं। इस्लाम में महिलाओं पर अत्याचार को भूल कर अब मीडिया के गिरोह विशेष के पत्रकार खुल कर बुर्का/हिजाब के समर्थन में आ गए हैं।

भले ही इस विरोध प्रदर्शन को ‘हिजाब’ के नाम पर किया जा रहा हो, लेकिन मुस्लिम छात्राओं को बुर्का में शैक्षणिक संस्थानों में घुसते हुए और प्रदर्शन करते हुए देखा जा सकता है। इससे साफ़ है कि ये सिर्फ गले और सिर को ढँकने वाले हिजाब नहीं, बल्कि पूरे शरीर में पहने जाने वाले बुर्का को लेकर है। हिजाब सिर ढँकने के लिए होता है, जबकि बुर्का सर से लेकर पाँव। कई इस्लामी मुल्कों में शरिया के हिसाब से बुर्का अनिवार्य है। कर्नाटक में चल रहे प्रदर्शन को मीडिया/एक्टिविस्ट्स भले इसे हिजाब से जोड़ें, ये बुर्का के लिए हो रहा है।

कनाडा में धरना-प्रदर्शन करने वाले ट्रक ड्राइवरों के ₹67 करोड़ जब्त, सरकार और GoFundMe का निर्देश: फेसबुक ने पेज भी हटाया

कनाडा में ट्रक काफिलों के लिए फंड एकत्रित करने के लिए शुरू किया गया अभियान अब ऑनलाइन फंड रेजिंग साइट ‘GoFundMe’ प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया है। इस कार्रवाई के पीछे का कारण साइट ने ‘शर्तों के उल्लंघन’ को बताया है। इससे पहले ऑनलाइन फंड रेजिंग साइट ने कहा था कि वे उन ट्रक ड्राइवरों द्वारा एकत्रित किए गए 10 मिलियन डॉलर (₹ 74,64,24,500) फंड की समीक्षा करेंगे, जो कनाडा सरकार के विरुद्ध इस समय प्रदर्शन कर रहे हैं।

अपने बयान में GoFundMe वेबसाइट ने कहा कि वे शांतिपूर्व प्रदर्शन का समर्थन करते हैं और जब उनकी साइट से स्वतंत्रता काफिला 2022 (‘फ्रीडम कान्वॉइ’) नाम से फंड रेज होना शुरू हुआ तो उन्हें यही लगा था कि ये फंड शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए है। बयान में कहा गया, “अब हमारे पास कानून प्रवर्तन के सबूत हैं कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन एक व्यवसाय बन गया है जिसमें पुलिस रिपोर्ट के अनुसार हिंसा व अन्य गैरकानूनी गतिविधियाँ शामिल हैं।”

कनाडाई सरकार के निर्देश

बता दें कि ‘GoFundMe’ वेबसाइट को प्रदर्शनकारियों के लिए फंड रेज करने से रोकने के लिए ओटावा के मेयर जिम वॉटसन ने निर्देश दिए थे और ट्रक चालकों को वो पैसा देना से मना किया था जो कि साइट पर इकट्ठा हुआ। इसके बाद साइट ने अपनी विश्वसनीयता का दावा करते हुए कहा कि वो स्थानीय अधिकारियों के साथ काम करते हैं ताकि उनके पास जमीनी घटनाओं की विस्तृत तथ्यात्मक समझ हो। आगे बयान में लिखा गया कि साइट ने प्रासंगिक त्थ्यों की समीक्षा की और स्थानीय कानून प्रवर्तन व शहर के अधिकारियों के साथ चर्चा के बाद पाया कि ये फंड रेजर उनकी सेवा शर्तों का उल्लंघन करता है। इसलिए इसे मंच से हटाया जाता है। इसी के साथ साइट ने ट्रक ड्राइवरों के लगभग 9 मिलियन डॉलर (₹67,17,82,050) जब्त कर लिए।

जानकारी के लिए बता दें कि इस फंड को इकट्ठा करने का काम तमारा रिच द्वारा एक संयोजक के तौर पर और बीजे डिचर द्वारा एक टीम सदस्य के तौर पर किया जा रहा था। जिस समय साइट ने इसे रोका तब तक इस पर 10 मिलियन डॉलर रेज हो चुके थे, जिनमें से 1 मिलियन डॉलर प्रदर्शन के लिए जारी किए गए थे जिसमें ये योजना थी कि पैसे का इस्तेमाल शांतिपूर्वक विरोध करने वाले लोगों के लिए ईंधन की लागत को कवर करने के लिए किया जाएगा।

फेसबुक ने हटाया प्रदर्शनकारियों का पेज

GoFundMe द्वारा इस प्रकार सारे अभियान को रोकने पर अरबपति एलन मस्क ने उन्हें ‘प्रोफेशनल चोर’ कहा है जबकि केवल गो फंड मी वेबसाइट अकेली ऐसी साइट नहीं है जिन्होंने इस तरह के काफिले में शामिल प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध कदम उठाए हों, फेसबुक ने भी बुधवार को अपने प्लेटफॉर्म से ‘Convoy to Dc’ पेज को हटा दिया था जो कि यूएसए में वैक्सीन रूल्स के विरुद्ध होना था, जिसके बाद ट्रक वालों ने फेसबुक के इस कदम पर उन्हें लताड़ लगाई।

ये स्वतंत्रता काफिला कैलिफोर्निया से वॉशिंगटन डीटी तक निकाला जाना था। कथिततौर पर ये प्रदर्शन कनाडा के ट्रक चालकों से प्रेरित था जो हाल में वैक्सीन जनादेश के विरोध में सड़कों पर उतरे थे। फेकबुक पर इल्जाम है कि उन्होंने सिर्फ पेज को ही अपने प्लेटफॉर्म से नहीं हटाया बल्कि जेरेमी जॉनसन नाम के व्यत्ति जिन्होंने उस पेज को बनाया था उसे भी हटा दिया है। इस पर जॉनसन ने कहा, “वे केवल उन लोगों को शांत कराना चाहते हैं जो सच बोलते हों।”

राष्ट्र विरोधी गतिविधियों का महिमामंडन, खबरों के नाम पर भड़काऊ कंटेंट: ‘द कश्मीर वाला’ का संपादक फहद शाह गिरफ्तार

जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में न्यूज पोर्टल ‘द कश्मीर वाला’ के संपादक फहद शाह को शुक्रवार (4 फरवरी 2022) को गिरफ्तार कर लिया गया। जम्मू-कश्मीर पुलिस के अनुसार, फहद शाह पर राष्ट्र विरोधी गतिविधियों का महिमामंडन करने और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (फेसबुक) पर भड़काऊ कंटेंट शेयर करने के आरोप हैं। पुलिस ने बताया, “पत्रकार ने कानून-व्यवस्था बिगाड़ने के लिए और जनता को उकसाने के लिए आपराधिक इरादे से यह कृत्य किया।”

पुलवामा जिला पुलिस द्वारा जारी बयान में कहा गया है, “कुछ फेसबुक यूजर्स और पोर्टल जनता के बीच भय का माहौल पैदा करने के लिए आपराधिक इरादे से तस्वीरें, वीडियो और पोस्ट सहित राष्ट्र विरोधी सामग्री अपलोड कर रहे हैं। इस तरह अपलोड की गई सामग्री कानून व्यवस्था बिगाड़ने के लिए जनता को उकसा सकती है।” पोर्टल की सामग्री को लेकर पुलिस पहले ही तीन बार फहद को तलब कर चुकी है। 31 जनवरी को उसे पुलवामा पुलिस ने बुलाया और पूछताछ के बाद छोड़ दिया था।

इसके बाद पुलिस ने एक फरवरी को शाह को पूछताछ के लिए बुलाया। उसके बाद बयान दर्ज कराने के लिए उसे 4 फरवरी को पुलवामा पुलिस स्टेशन बुलाया गया और फिर उसे हिरासत में ले लिया गया। पुलिस के अनुसार, एफआईआर संख्या 19/2022 के तहत मामले की जाँच के दौरान शाह को हिरासत में लिया गया है। वहीं, पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने पुलिस के इस कदम की निंदा करते हुए कहा कि सच के साथ खड़ा होना अब राष्ट्र विरोधी हो गया है। सरकार को आईना दिखाना भी राष्ट्र विरोधी कृत्य है।

बता दें कि फहद ऑनलाइन समाचार पोर्टल ‘द कश्मीर वाला’ के संपादक हैं, जो वर्ष 2011 में शुरू हुआ था। यह जम्मू-कश्मीर में समाचार और अन्य सामाजिक-सांस्कृतिक खबरों को कवर करने का दावा करता है। इस पोर्टल ने 5 अगस्त, 2019 को मोदी सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 निरस्त करने के फैसले का भी विरोध किया था। पिछले महीने, ‘द कश्मीर वाला’ के एक ट्रेनी रिपोर्टर सज्जाद गुल को भी अपने ट्वीट के माध्यम से कथित तौर पर लोगों को सरकार के खिलाफ भड़काने और नफरत फैलाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। साथ ही इसके पत्रकार यशराज शर्मा पर भी केस दर्ज हो चुका है।