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‘शेरनी हूँ, डरती नहीं शिकार करती हूँ’: सपा पर भड़की अपर्णा यादव, बोलीं- जब राजपूत युद्ध में जाते थे तो यादव सेना का नेतृत्व करते थे

उत्तर प्रदेश में जारी विधानसभा चुनावों (Uttar Pradesh Assembly Election 2022) में भाजपा का प्रचार कर रही सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) की बहू अपर्णा यादव (Aparna Yadav) ने सपा मुखिया अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) पर कड़ा प्रहार किया है। सपा कार्यकर्ताओं द्वारा उकसाए जाने के बाद अपर्णा ने कहा कि वह शेरनी हैं और शिकार शेरनी ही करती है।

दरअसल, अपर्णा यादव गुरुवार (3 फरवरी 2022) को यूपी के बाराबंकी के मोथरी में जब वह भाजपा प्रत्याशी अरविंद मौर्य के लिए चुनाव प्रचार करने गईं तो सपा कार्यकर्ताओं ने उनकी सभा में ‘अखिलेश यादव जिंदाबाद’ के नारे लगाने लगे। सभा खत्म करने के बाद लौटने के वक्त भी सपा कार्यकर्ताओं ने यह उपद्रव जारी रखा। इस मामले में पुलिस ने एक सपा कार्यकर्ता को हिरासत में भी लिया है।

उसके बाद खजूर गाँव में प्रचार के दौरान उन्होंने सपा पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “शेर जब चलता है तो अकेले शिकार करता होगा, मगर जंगल में शेरनी ही शिकार करती है। अपर्णा यादव शेरनी है। मैं डरती नहीं हूँ किसी से, क्योंकि मेरे साथ राष्ट्रवाद है। मेरे साथ आदरणीय प्रधानमंत्री जी विजन है- सबका साथ, सबका विश्वास और सबका विकास।” उन्होंने कहा कि योगी सरकार में सरकार में सपा के गुंडे अपनी जान की भीख मांग रहे हैं।

यादव मतदाताओं को भाजपा को वोट देने की अपील करते हुए अपर्णा यादव ने कहा, “यहाँ पर यादव ज्यादा हैं और मैं भी यादव हूँ। हम यादवों का इतिहास रहा है कि जब भी लड़ाई होती थी और राजपूतों की जब सेना चलती थी तो उसका नेतृत्व यादव करते थे।” उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि पूरी बिरादरी भाजपा का साथ देकर पीएम मोदी और  सीएम योगी के हाथों को मजबूत करे।उन्होंने भाजपा प्रत्याशी को जिताने की अपील की।

पाकिस्तान में क्रिकेट खेलने जाएगी ऑस्ट्रलिया, ठीक एक महीने पहले 155 km/h वाले सबसे तेज पाक बॉलर पर लगवाया बैन

पाकिस्तान (Pakistan) के तेज गेंदबाज मोहम्मद हसनैन (Mohammad Hasnain) 155 किलोमीट प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद डालकर चर्चा में आए थे। लेकिन पिछले कुछ समय से वो अपने गेंदबाजी एक्शन की वजह से विवादों में थे। अब हसनैन पर पाकिस्तान सुपर लीग, बिग बैश के साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गेंदबाजी पर प्रतिबंध (Ban) लगा दिया गया है। हसनैन की बॉलिंग एक्शन की जाँच के बाद उनके खिलाफ ये एक्शन लिया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, 2 जनवरी 2022 ऑस्ट्रेलिया के एडिलेड स्ट्राइकर्स और सिडनी सिक्सर्स के बीच मैच खेला गया था, जिसमें हसनैन के बॉलिंग एक्शन को गैर कानूनी पाया गया था। इसके बाद पाकिस्तान के लाहौर स्थित लाहौर यूनिवर्सिटी ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज (LUMS) में ICC से मान्यता प्राप्त बायोमैकेनिक्स प्रयोगशाला में उनके बॉलिंग एक्शन की जाँच की गई और उसकी रिपोर्ट ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट (सीए) को भेजी गई, जिसमें ऑस्ट्रेलिया में भी इसकी जाँच हुई, जिसमें पाकिस्तानी गेंदबाज के बॉलिंग एक्शन को अवैध पाया गया।

इस मामले में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने कहा, “PCB को आज मोहम्मद हसनैन की जाँच रिपोर्ट क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया से मिली, जिसमें कहा गया था कि उनकी गुड लेंथ डिलीवरी, फुल लेंथ डिलीवरी, धीमी बाउंसर और बाउंसर के लिए उनकी कोहनी का विस्तार 15-डिग्री की सीमा से अधिक था।”

गौरतलब है कि हसनैन को सबसे पहले पिछले महीने बिग बैश लीग में अंपायरों ने पकड़ा था। वहाँ वह सिडनी थंडर के लिए खेल रहे थे। आमतौर पर उनकी जाँच ऑस्ट्रेलिया में ही होनी थी, लेकिन वह पीएसएल में खेलने के लिए वापस पाकिस्तान जाने वाले थे, इसलिए यह तय किया गया कि लाहौर में ही टेस्ट होगा। अवैध गेंदबाजी एक्शन पर आईसीसी के नियमों के अनुसार, पीसीबी उन्हें अपने घरेलू टूर्नामेंट में गेंदबाजी जारी रखने की अनुमति दे सकता है। लेकिन, पीसीबी ने भी उन पर बैन लगाया है।

अब पाकिस्तान क्रिकेट खेलने जाएगा ऑस्ट्रेलिया

पाकिस्तान के एक गेंदबाज को बैन करवाने के बाद अब ऑस्ट्रेलिया की टीम अगले महीने पाकिस्तान क्रिकेट सीरीज खेलने के लिए जाएगी। शुक्रवार (4 फरवरी 2022) को सीए के निदेशकों के बोर्ड ने यह फैसला लिया। इसके तहत ऑस्ट्रेलिया पाकिस्तान में तीन टेस्ट, तीन ओडीआई और एक टी-20 खेलेगा। उल्लेखनीय है कि आखिरी बार 1998 में ऑस्ट्रेलायाई टीम ने पाकिस्तान का दौरा किया था। अब 24 साल बाद एक बार फिर से ऑस्ट्रेलिया के क्रिकेटर पाकिस्तान में खेलेंगे।

बिकिनी में सारा अली खान, स्पॉट गर्ल को स्विमिंग पूल में धक्का देकर गिराया: लोगों ने कहा- ‘प्रैंक नहीं, बदतमीजी’

बॉलीवुड एक्ट्रेस सारा अली खान ने हाल ही में इंस्टा स्टोरी पर एक वीडियो शेयर किया, जिसे लेकर उन्हें काफी ट्रोल किया जा रहा है। एक्ट्रेस ने गुरुवार (3 फरवरी 2022) को फैंस के लिए आस्क में सेशन रखा था, जिसमें उन्होंने फैंस को खुद से सवाल करने की आजादी दी थी। इसी दौरान सारा के एक फैन ने उनसे उनके सबसे बुरे प्रैंक के बारे में पूछा।

यूजर ने सारा अली खान से सवाल किया- ‘सेट पर किए अपने सबसे बुरे प्रैंक के बारे में बताइए।’ इस पर सारा ने एक वीडियो शेयर किया, जो अब वायरल हो गया है। वीडियो में सारा व्हाइट बिकिनी में स्पॉट गर्ल के साथ पूल के किनारे खड़ी नजर आ रही हैं। कैमरे के लिए पोज देते हुए सारा स्पॉट गर्ल झारू के कंधे पर हाथ रखती हैं और फिर उन्हें पूल में धक्का दे देती हैं।

हालाँकि, इसके बाद सारा खुद भी पूल में कूद जाती हैं। स्पॉट गर्ल अचानक हुई इस घटना से हैरान रह जाती हैं, वहीं सारा उनसे सॉरी कहते नजर आती हैं। लेकिन, सारा का यह मजाक कुछ लोगों को बिलकुल पसंद नहीं आया। कई वीडियो पर कमेंट करते हुए सारा के इस मजाक को बचकाना और गलत बता रहे हैं।

वहीं एक यूजर ने लिखा, “ये प्रैंक था? ये प्रैंक नहीं है ये बदतमीजी है।” इसी के साथ एक यूजर ने लिखा है, “माफ करिएगा सारा लेकिन ये आपने बहुत गलत किया है। क्या आपके साथ ऐसा होता तो आप बर्दाश्त कर पाती?” सारा अली खान का ये वीडियो सामने आने के बाद मिनटों में ही सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा है। 

वर्कफ्रंट की बात करें तो सारा अली खान जल्द ही विक्की कौशल (Vicky Kaushal) के साथ फिल्म ‘लुका छुपी 2’ में दिखाई देंगी। हाल ही में उनकी फिल्म ‘अतंरगी रे’ रिलीज हुई थी।

भाई को जेल से छुड़ाने के लिए मंत्री का हनीट्रैप, डीजे गर्ल के सहारे डॉक्टर से ले चुका है ₹1 करोड़: फोन में कई लड़कियों के अश्लील वीडियो

राजस्थान (Rajasthan) के मंत्री रामलाल जाट (Ramlal Jat) को हनीट्रैप में फँसाने के मामले में गिरफ्तार मास्टरमाइंड अक्षत शर्मा (Akshat Sharma) के लेकर लगातार खुलासे हो रहे हैं। वह हाईप्रोफाइल लोगों को फँसाने के लिए कई मॉडल को फँसा रखा था। इन मॉडल को फँसाने के लिए उसने चेेंजिंग रूम और बाथरूम सहित कई जगहों पर कैमरे लगा रखे थे। इन अश्लील तस्वीरों के जरिए वह मॉडल को ब्लैकमेल कर दूसरे लोगों को हनीट्रैप में फँसाने के लिए भेजता था। उसके मोबाइल फोन से ऐसे कई वीडियो मिले हैं।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, अक्षत अपने भाई को जेल से छुड़वाना चाहता था। इसी के लिए उसने दीपाली और झील नाम की दो महिलाओं को मंत्री रामलाल जाट के पास भेजा था। इससे पहले वह मंत्री के शेड्यूल को लगातार फॉलो कर रहा था। अक्षत आत्महत्या की कोशिश करने वाली मॉडल गुनगुन उपाध्याय (Gungun Upadhyay) को इसी काम के लिए मंत्री के पास भेजने का दबाव बना रहा था।

भीलवाड़ा का रहने वाला पेशेवर ब्लैकमेलर अक्षत इसके पहले जयपुर में एक डॉक्टर को हनीट्रैप में फँसाकर 1 करोड़ रुपए वसूल चुका है। उसने डॉक्टर से 2 करोड़ रुपए माँगे थे, लेकिन 1 करोड़ पर डील फाइनल हुई थी। इसके लिए उसने एक डीजे गर्ल को मोहरा बनाया था।

दरअसल, अक्षत अपनी पत्नी का इलाज कराने डॉक्टर की पत्नी के पास ले गया था और डॉक्टर के पास खूब पैसे देखकर उसने ब्लैकमेल करने का प्लान बनाया था। अक्षत डीजे गर्ल को ब्लैकमेलिंग के लिए तैयार किया और उसे मरीज बनाकर डॉक्टर के पास ले गया। बाद में डॉक्टर को फँसाकर एक होटल में रात गुजारी और वहाँ उसका अश्लील फोटो लेकर ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया।

उदयपुर में प्रोडक्शन हाउस चलाने वाला आरोपित अक्षत मॉडलिंग के नाम पर लड़कियों को बुलाता था। इस दौरान लड़कियों का मेकअप ब्यूटीशियन दीपाली करती थी। इन लड़कियों को अलग-अलग कपड़े पहना कर शूट करता और जब लड़कियाँ कपड़े बदलतीं तो गुप्त कैमरे से उनका अश्लील वीडियो बना लेता।

बता देें कि उदयपुर की ब्यूटीशियन दीपाली (Deepali) और कथित पत्रकार अक्षत शर्मा (Akshat Sharma) राज्य के राजस्व मंत्री रामलाल जाट (Ramlal Jat) को हनीट्रैप में फँसाने के लिए गुनगुन पर दबाव डाल रहे थे और पत्रकार के रूप में मॉडल को भेजकर मंत्री के साथ रात गुजरवाना चाहते थे। रामलाल जाट वही मंत्री हैं, जिन्हें उनकी महिला मित्र की आत्महत्या के कारण अपना मंत्री पद गँवाना पड़ा था।

गैर-ब्राह्मण को गुरु बनाया, महिलाओं को सशक्त किया: जानिए कौन थे ‘Statue Of Equality’ वाले संत रामानुज

हैदराबाद में संत रामानुजाचार्य (Ramanujacharya) की प्रतिमा का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों होने वाला है, जिसे ‘Statue Of Equality’ नाम दिया गया है। 11वीं सदी के महान दार्शनिक और समाज सुधारक रामानुज (Ramanuja) की ये प्रतिमा 216 फ़ीट की है। कर्नाटक के रंगा रेड्डी जिले के मुचिंतल स्थित ‘चिन्ना जीयर स्वामी आश्रम’ में इस प्रतिमा का निर्माण किया गया है। 1017 ईस्वी में जन्मे संत रामानुजाचार्य की 1000वीं जन्म जयंती पर ये कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।

इस प्रतिमा को ‘पंचलौह’ (सोना, चाँदी, ताम्बा, पीतल और जस्ता) से तैयार किया गया है। धातुओं से बनी विश्व की सबसे ऊँची प्रतिमाओं में इसका स्थान होगा। 54 फिट ऊँचे ‘भद्रा वेदी’ को इसका आधार बनाया गया है। उसके अंदर एक वैदिक डिजिटल लाइब्रेरी और रिसर्च सेंटर भी है। इसमें प्राचीन सनातन ग्रंथों से लेकर रामानुजाचार्य के जीवन से सम्बंधित दस्तावेज होंगे। आइए, आज हम आपको बताते हैं कि भक्ति काल को नई दिशा देने वाले संत रामानुजाचार्य थे कौन और उनका जीवन कैसा था।

संत रामानुजाचार्य का जीवनकाल 120 वर्षों का था। उन्होंने 1137 ईस्वी में अपने शरीर का त्याग किया था। वैष्णव समाज के प्रमुख संतों में उनका नाम लिया जाता है। 16 वर्ष की उम्र में उन्होंने विद्वान यादव प्रकाश को कांची में अपना गुरु बनाया था। हालाँकि, वो अपने गुरु के ‘अद्वैत वेदांत’ के सिद्धांतों से सहमत नहीं थे। उन्होंने तमिल के ‘अलवर’ परंपरा के संतों नाथमुनि और यमुनाचार्य के नक्शेकदम पर चलने का निर्णय लिया। उन्हें ‘विशिष्ट अद्वैत’ सिद्धांत का जनक माना जाता है।

रामानुजाचार्य ने जाति विभेद के खिलाफ अभियान चलाया और महिलाओं को सशक्त करने के लिए जीवन भर परिश्रम किया। इस्लामी आक्रांता जब भारत में पाँव पसारने के लिए बेताब थे, ऐसे समय में उन्होंने भारत की जनता के भीतर की धार्मिक भावनाओं को और प्रबल किया। उन्होंने हर वर्ग के लोगों के बीच ‘मुक्ति और मोक्ष’ के मंत्रों के बारे में सार्वजनिक रूप से बताया। उनका कहना था कि ये चीजें गोपनीय नहीं रहनी चाहिए, सभी वर्गों के लोगों को इसका लाभ मिलना चाहिए।

खुद बाबासाहब डॉक्टर भीमराव आंबेडकर ने लिखा है कि हिन्दू धर्म में समता की दिशा में संत रामानुजाचार्य ने महत्वपूर्ण कार्य किए और उन्हें लागू करने का प्रयास भी किया। उनकी 1000वीं जयंती पर डाक टिकट जारी करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका जिक्र भी किया था। उन्होंने गैर-ब्राह्मण कांचीपूर्ण को अपना गुरु माना। उनके भोजन करने के पश्चात पत्नी द्वारा घर को शुद्ध करते हुए देख कर वो विचलित हुए। संन्यास लेकर उन्होंने जनसेवा को अपना ध्येय बना लिया।

डॉक्टर आंबेडकर लिखते हैं, “तिरुवल्ली में एक दलित महिला के साथ शास्त्रार्थ के बाद उन्होंने उक्त महिला से कहा कि आप मेरे से ज्यादा ज्ञानी हैं। इसके बाद संत रामानुजाचार्य ने उक्त महिला को दीक्षा दी और उसकी मूर्ति बना कर मंदिर में स्थापित किया। उन्होंने धनुर्दास नाम के पिछड़े समाज के व्यक्ति को अपना शिष्य बनाया। नदी में स्नान करने के बाद वो अपने इसी शिष्य के माध्यम से वापस आते थे।” अब समता का सन्देश देने वाले रामानुजाचार्य की प्रतिमा पूरे विश्व को उनके सिद्धांतों का साक्षात्कार करने की प्रेरणा देगी।

रामानुजाचार्य ने वेदों की परंपरा को भक्ति से जोड़ा। जगद्गुरु शंकराचार्य के बाद उनका ही नाम प्रमुखता से लिया जाता है। उन्होंने भक्ति आंदोलन से पिछड़े समाज को जोड़ कर कुलीन वैदिक आंदोलन के साथ उसके सेतु का निर्माण किया। उनका जन्म मद्रास से कुछ दूरी पर स्थित ‘पेरबुधूरम’ में हुआ था। उनके पिता का नाम आसुरीदेव दीक्षित और माता का नाम काँतिमति था। उनका मामा शैलपूर्ण एक संन्यासी थे और माँ के नाना यमुनाचार्य एक बड़े संत थे।

8 वर्ष की उम्र में जनेऊ संस्कार के साथ ही उन्हें वेदों की शिक्षा देने का कार्य शुरू कर दिया गया था। बाल्यकाल में ही सब उनकी बुद्धिमत्ता और स्मरणशक्ति के कायल हो गए थे। 16 वर्ष की उम्र में रक्षाम्बा नामक की लड़की से उनका विवाह हुआ था। उन्हें वैष्णव संप्रदाय की दीक्षा दी गई। श्रीरंगम में अपने निधन से पहले यमुनाचार्य ने रामानुजाचार्य के लिए तीन सन्देश छोड़े थे – वेदांत सूत्रों के भाष्य की रचना करो, आलवारों के भजन संग्रह को संकलित कर ‘पंचम वेद’ के नाम से लोकप्रिय बनाओ और मुनि पराशर के नाम पर किसी विद्वान का नामकरण करो।

इसके बाद उन्होंने कांची लौट कर उन्होंने द्रविड़ भाषा में आलवारों द्वारा रचित 4000 भजन का एक संग्रह तैयार किया। यामुनाचार्य की रिक्त गद्दी पर उन्हें ही स्थान मिला। भगवान रंगनाथ के मंदिर के प्रबंधन की पूरी जिम्मेदारी उनके कन्धों पर आ गई, जिसे उन्होंने अच्छी तरह सँभाला। मंदिर की पूरी आय को वो मंदिर के लिए ही खर्च करते थे और खुद भिक्षा से जीवन व्यतीत करते थे। उन्हें कुछ रहस्य मंत्र इस शर्त पर मिले थे कि वो किसी को बताएँगे नहीं, लेकिन एक सभा में उन्होंने ये मंत्र जनता के लिए सार्वजनिक कर दिया।

उन्होंने कहा कि जब इस मंत्र से स्वर्ग प्राप्त होता है तो ये सभी को सुनना चाहिए। वो इसके लिए संतों द्वारा दंड के लिए तैयार हो गए। उन्होंने वेदांत सूत्रों पर ‘श्री भाष्य’ की रचना की और अपने एक शिष्य कुरेश के बेटे का नाम पराशर रखा। उन्होंने भक्ति को मुक्ति का साधन बताते हुए इसे ज्ञान के ऊपर तरजीह दिया। उन्होंने भारत यात्रा कर के कई विद्वानों से सशस्त्र किया। जब वो श्रीरंगम वापस लौटे, तब तक भारत के कई हिस्सों में उनके असंख्य शिष्य हो गए थे।

उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता पर ही भाष्य लिखा। ‘वेदांत सार’ में उन्होंने अपने सिद्धांतों को आम लोगों को सरल भाषा में समझाया। उन्होंने ईश्वर को सगुण माना और ये भी कहा कि उसमें कोई अवगुण नहीं है। उन्होंने ईश्वर को श्रेष्ठों से भी श्रेष्ठ करार दिया। उन्होंने कहा कि दोषहीन, शुद्ध, सर्वश्रेष्ठ, निर्मल और एकरूप ब्रह्म को जानने वाले को ही सच्चा ज्ञानी बताया। उन्होंने शंकराचार्य के कई सिद्धांतों का खंडन कर के अपने सिद्धांत भी दिए। सनातन परंपरा में ऐसा होता रहा है।

रामानुजाचार्य ने अपने बोधयानवृत्ति को कंठस्थ करने वाले एक शिष्य की मदद से श्रीभाष्य की रचना की थी। उत्तर भारत में श्रीराम की आराधना के पीछे भी उनका योगदान माना जाता है। उनकी ही शिष्य परंपरा की 14वीं पीढ़ी में संत रामानंद हुए थे, जिनके शिष्य कबीर थे। रामानुज तमिल ब्राह्मण समुदाय से ताल्लुक रखते थे। कांचीपुरम के वरदराज पेरुमल मंदिर में वो वर्षों तक पुजारी रहे। वो जीवन भर वैष्णव समाज के स्तंभ रहे। ईर्ष्या और उनके बढ़ते प्रभाव के कारण कई बार उनकी हत्या की भी कोशिश हुई।

रामानुजाचार्य की 1000वीं जयंती उत्सव के मौके पर 2 फरवरी से समारोह का आयोजन किया जाएगा। इसे ‘रामानुज सहस्राब्दी समारोहम’ नाम दिया गया है। इस मौके पर रामानुजाचार्य की दो मूर्ति का अनावरण किया जाएगा। 216 फीट ऊँची मूर्ति सोना, चाँदी, ताँबा, पीतल और जस्ते की बनी हुई है। जबकि दूसरी मूर्ति मंदिर के गर्भगृह में स्थापित की जाएगी। जो रामानुजाचार्य के 120 सालों की यात्रा की याद में 120 किलो सोने से निर्मित की गई है।

ओवैसी पर हमले के बाद केंद्र ने दी Z सिक्योरिटी, राम मंदिर पर असदुद्दीन के भड़काऊ भाषण से आहत थे हमलावर: सुरक्षा लेने इनकार

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों (Uttar Pradesh Assembly election 2022) के बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी (Asadudin Owaisi) के काफिले पर फायरिंग मामले में गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपितों में से एक पर पहले से ही धारा 307 के तहत केस दर्ज है। वहीं ओवैसी की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उन्हें Z श्रेणी की सुरक्षा कवर देने का फैसला किया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, औवैसी पर फायरिंग के मामले में उत्तर प्रदेश के एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार ने शुक्रवार (4 फरवरी 2022) को कहा कि एक आरोपित का नाम सचिन और दूसरे का नाम शुभम है। दोनों के खिलाफ हत्या की कोशिश के मामले में धारा 307 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। खास बात यह है कि इसमें से सचिन पहले से ही 307 का आरोपित है। सचिन नोएडा के बादलपुर का रहने वाला है। उसका कहना है कि उसने एलएलएम किया हुआ है, जिसकी जाँच की जा रही है।

वहीं दूसरा आरोपित शुभम सहारनपुर का रहने वाला है औऱ वो 10वीं पास है। उसका कोई भी आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। एडीजी प्रशांत कुमार के मुताबिक, दोनों आरोपित एक दूसरे को पहले से जानते थे और वो हिंदू धर्म पर ओवैसी के बयानों से आहत थे। दोनों ने पुलिस को बताया है कि 2013-14 में राम मंदिर को लेकर ओवैसी ने जो बयान दिया था, उससे ये दोनों आहत थे। पुलिस ने दो हथियार और एक ऑल्टो कार बरामद की है।

केंद्र ने दी Z सुरक्षा, ओवैसी ने किया इनकार

इस बीच AIMIM सांसद की सुरक्षा के मद्देनजर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उन्हें Z सुरक्षा दी है। इसके तहत अब से केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के 22 जवान हर वक्त उनके साथ रहेंगे। हालाँकि, असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र की सुरक्षा लेने से इनकार कर दिया है। ओवैसी ने ट्वीट किया, “ना डरने वाला हूँ, ना सिक्योरिटी लेने वाला हूँ। मैं अपना चुनाव प्रचार जारी रखूँगा। अगर किसी माई के लाल में दम है तो मार के दिखाए मुझे।”

क्या है पूरा मामला

गौरतलब है कि गुरुवार (3 फरवरी 2022) को ओवैसी यूपी के मेरठ से अपना कार्यक्रम खत्म कर दिल्ली लौट रहे थे, उसी दौरान पिलखुवा प्लाजा के पास यह घटना हुई। इस मामले की जानकारी ओवैसी ने खुद ही ट्वीट के जरिए दी। उन्होंने कहा कि कुछ देर पहले छिजारसी टोल गेट पर मेरी गाड़ी पर गोलियाँ चलाई गई। 4 राउंड फ़ायर हुए। 3-4 लोग थे, सब के सब भाग गए और हथियार वहीं छोड़ गए। मेरी गाड़ी पंक्चर हो गई, लेकिन मैं दूसरी गाड़ी में बैठ कर वहाँ से निकल गया। हम सब महफ़ूज़ हैं। अलहमदुलिलाह।

फरहान अख्तर और शिबानी दांडेकर का निकाह पक्का, जावेद अख्तर ने खुद बताया वेडिंग प्लान

बॉलीवुड अभिनेता-निर्देशक फरहान अख्तर (Farhan Akhtar) 21 फरवरी 2022 को शिबानी दांडेकर के साथ शादी करने जा रहे हैं। अपनी पहली पत्नी अधुना से 2017 में अलग होने के बाद फरहान-शिबानी की यह जोड़ी तीन साल से अधिक समय से रिलेशनशिप में है। हालाँकि, दोनों ने अभी तक अपने निकाह की ऑफिशियल अनाउंसमेंट नहीं की है। लेकिन अब फरहान के अब्बू जावेद अख्तर (Javed Akhtar) ने इस शादी की पुष्टि कर दी है।

जावेद अख्तर ने बताया कि फरहान अपनी गर्लफ्रंड शिबानी से 21 फरवरी को शादी करेंगे जिसका आयोजन खंडाला वाले घर में होगा। जावेद अख्तर ने बॉम्बे टाइम्स को मीडिया में चल रही ऐसी खबरों की पुष्टि करते हुए उन्होंने वेडिंग प्लान की पूरी डिटेल्स भी बताई है। उन्होंने कहा, “हाँ, शादी हो रही है। शादी की तैयारियों का ध्यान वेडिंग प्लानर की तरफ से रखा जा रहा है।”

उन्होंने आगे कहा, “कोरोना की मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखते हुए यह स्पष्ट है कि हम बड़े पैमाने पर किसी इवेंट को अंजाम नहीं दे सकते हैं। इसलिए हम केवल कुछ लोगों को बुला रहे हैं। यह एक बहुत ही सिंपल आयोजन होने वाला है। हालाँकि, अभी तक तो किसी को इनवाइट नहीं किया गया है।”

शुलभा और शशिधर दांडेकर की बेटी और अपनी होने वाली बहू शिबानी के बारे में बात करते हुए जावेद अख्तर ने कहा, “वह बहुत अच्छी लड़की है। हम सभी उसे बहुत पसंद करते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि फरहान और उसकी बहुत अच्छी बनती है, जो बहुत अच्छी बात है।”

वहीं बॉलीवुड में इस बात की भी चर्चा है कि इस जोड़े की कोर्ट मैरिज होगी। इसके लिए फरहान और शिबानी ने जनवरी में ही कोर्ट मैरिज का आवेदन दिया था।

बता दें कि शिबानी और फरहान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी एक-दूसरे के लिए प्यार को जाहिर करते रहे हैं। अक्सर यह जोड़ी अपनी बॉन्डिंग दिखाने के लिए इंस्टाग्राम पर मस्ती भरी तस्वीरें और वीडियो शेयर करती रहती है।

गौरतलब है कि फरहान अख्तर की ये दूसरी शादी है। फरहान ने इससे पहले हेयर स्टाइलिस्ट अन्न भबानी और आशीष भबानी के बेटी अधुना भबानी से साल 2000 में शादी की थी। 16 साल बाद 2017 में एक-दूसरे को तलाक दे दिया। दोनों की दो बेटियाँ है, जिनके नाम शाक्या और अकीरा हैं।

फिल्मों की बात करें तो फरहान पिछली बार फिल्म ‘तूफान’ में नजर आए थे जिसमें उन्होंने मृणाल ठाकुर के साथ काम किया था। हालाँकि, राकेश ओम प्रकाश मेहरा के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने कोई खास कमाल नहीं किया था। वहीं इन दिनों वह अपनी नई फिल्म ‘जी ले जरा’ को लेकर चर्चा में हैं जिसमें प्रियंका चोपड़ा, कैटरीना कैफ और आलिया भट्ट जैसे सितारे नजर आएँगे।

हिंदी सुन कर भड़के कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को कहा- लोगों का अपमान हुआ

हिंदी और अंग्रेजी भाषा को लेकर दो पूर्व सहयोगियों के बीच गुरुवार (3 फरवरी 2022) को लोकसभा में कार्यवाही के दौरान बहसबाजी हो गई। संसद में प्रश्नकाल के दौरान अंग्रेजी में प्रश्न पूछे गए। इसका उत्तर केंद्रीय उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) ने हिंदी में दिया तो कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर (Congress Leader Shashi Tharoor) भड़क गए। वे इसे अपमान बताते हुए नाराज हो गए।

दरअसल, पोल्‍लाची (तमिलनाडु) से डीएमके सांसद केएस सुंदरम ने कोयंबटूर से इंटरनेशन फ्लाइट शुरू होने को लेकर अंग्रेजी में सवाल किया। इसका उत्तर केंद्रीय मंत्री ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया ने हिंदी में दिया। इसके बाद डिं‍डिगुल (तमिलनाडु) से डीएमके के ही एक और सांसद पी वेलुसामी ने अंग्रेजी में सवाल‍ किया। यह उड़ान योजना से जुड़ा था। इस प्रश्न का उत्तर भी सिंधिया ने हिंदी में दिया।

मध्य प्रदेश के गुना से लोकसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया जवाब देकर बैठे ही थे कि केरल के तिरुवनंतपुरम से कॉन्ग्रेस थरूर उखड़ गए। कॉन्ग्रेस के दोनों पुराने सहयोगियों के बीच तनाव उभर आया और दोनों के बीच बहस होने लगी। ज्योतिरादित्य पहले कॉन्ग्रेस में थे और 2012 से 2014 तक मनमोहन सिंह सरकार में उनके पास ऊर्जा मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार था।

गुस्साए थरूर ने कहा कि कृपया हिंदी में जवाब ना दें। यह लोगों का अपमान है। मंत्री अंग्रेजी में बोलते हैं। इसका जवाब देते हुए सिंधिया ने कहा कि सदन के सदस्य के लिए टिप्पणी करना अजीब बात है। उन्होंने कहा, “मैं हिंदी में बोलता हूँ तो सदन के सदस्य को आपत्ति है, जबकि सदन में एक अनुवादक भी है।”

दोनों के बीच जारी गर्मागर्म बहस को देखते हुए सदन के स्पीकर ने तुरंत हस्तक्षेप किया। स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि हिंदी में जवाब देना अपमान नहीं है।

कर्नाटक में स्कूल का विवाद कॉलेज तक पहुँचा, हिजाब में पहुँचीं 20 मुस्लिम छात्राएँ: प्राचार्य ने कहा – यूनिफॉर्म में आओ

कर्नाटक के उडुपी के स्कूल से शुरू हुआ हिजाब विवाद पूरे कर्नाटक में फैल गया है। गुरुवार (3 फरवरी 2022) सुबह कर्नाटक के उडुपी जिले के कुंडापुर के भंडारकर कॉलेज में हिजाब पहनी 20 से अधिक छात्राओं को कालेज में प्रवेश करने से रोक दिया गया। बताया जा रहा है कि कॉलेज में बुर्का या हिजाब पहनकर आने वाली छात्राओं को ‘भंडारकर्स कालेज’ के प्राचार्य ने प्रवेश द्वार पर रोक दिया। 

प्राचार्य ने छात्राओं से कहा कि शासन के आदेश व कालेज के दिशा-निर्देशों के अनुसार उन्हें कक्षाओं में यूनिफॉर्म में आना होगा। इस पर छात्राओं का तर्क था कि वे लंबे समय से हिजाब में कालेज आ रही हैं, और उन्हें अनुमति दी जानी चाहिए। लेकिन प्राचार्य ने उनके कालेज में प्रवेश से इनकार कर दिया।

मुस्लिम छात्राओं के अभिभावकों के साथ भाजपा विधायक हालादि श्रीनिवास शेट्टी की अध्यक्षता में इस मुद्दे पर बैठक बेनतीजा रही। शेट्टी ने अब राज्य के शिक्षा मंत्री बीसी नागेश से इस मुद्दे पर हस्तक्षेप की माँग की है। शिक्षा मंत्री ने कालेज के अधिकारियों से स्पष्ट रूप से कह दिया है कि छात्राएँ केवल यूनिफार्म में आ सकती हैं। न तो वे हिजाब पहनकर आ सकती हैं और न ही भगवा शाल की अनुमति दी जाएगी।

इससे पहले चिक्कमंगलुरु के एक कालेज में हिजाब पहनकर आने वाली लड़कियों के खिलाफ विरोध करते हुए कालेज के छात्र भगवा रंग का शॉल पहन कर कालेज पहुँचे थे। इसे लेकर मंगलवार को कई छात्रों ने धरना भी दिया। इसके बाद पुलिस ने कालेज परिसर में प्रवेश किया और स्थिति को नियंत्रित में लिया। विरोध के बीच कालेज के प्राचार्य एमजी उमाशंकर ने छात्रों को आंदोलन वापस लेने के लिए राजी किया था।

जनवरी में चिकमंगलूर के कुछ स्टूडेंट्स ने कैंपस में हिजाब पहनने वाली लड़कियों के खिलाफ विरोध दर्ज कराने के लिए भगवा शॉल पहनना शुरू कर दिया था। यह मामला अब पूरे राज्य में फैल चुका है। हिजाब बनाम भगवा गमछा बन चुका यह विरोध अब तक हुबली, उडुपी, कुंडापुर के स्कूल और कॉलेज में सामने आ चुका है। जहाँ हिजाब के विरोध में स्टूडेंट्स भगवा शॉल या गमछा पहनकर कैंपस में आ रहे हैं।

वहीं श्रीराम सेना के अध्यक्ष प्रमोद मुतालिक ने मंगलवार (1 फरवरी) को कहा कि हिजाब पहनकर कॉलेज आने वालों को बाहर का रास्ता दिखा देना चाहिए। मुतालिक ने कहा, यह उन्हें (छात्राओं को) आतंकवादी के स्तर पर ले जाने की मानसिकता है। आज वे हिजाब कह रहे हैं, कल बुर्का माँगेंगे, फिर नमाज और मस्जिद पर अडेंगे। यह स्कूल है या आपका धार्मिक केंद्र है?”

कुछ इस तरह से शुरू हुआ था हिजाब पर विवाद

बता दें कि कर्नाटक में हिजाब पहनने पर विवाद की शुरुआत उडुपी जिले के सरकारी पीयू कालेज में मुस्लिम समुदाय की 6 छात्राओं को हिजाब पहनने पर कक्षाओं में प्रवेश न करने देने से हुआ था। इसके चलते हिजाब पहनने वाली छात्राओं को ऑनलाइन क्लास का विकल्प अपनाने को कहा गया था। छात्राओं ने कालेज के फैसले को मानने से इनकार कर दिया था और हाई कोर्ट में इसके खिलाफ याचिका भी दायर की है। इसके साथ ही छात्राओं ने इस फैसले के विराध में कक्षाओं का बहिष्कार कर रखा है।

भले ही इस विरोध प्रदर्शन को ‘हिजाब’ के नाम पर किया जा रहा हो, लेकिन मुस्लिम छात्राओं को बुर्का में शैक्षणिक संस्थानों में घुसते हुए और प्रदर्शन करते हुए देखा जा सकता है। इससे साफ़ है कि ये सिर्फ गले और सिर को ढँकने वाले हिजाब नहीं, बल्कि पूरे शरीर में पहने जाने वाले बुर्का को लेकर है। हिजाब सिर ढँकने के लिए होता है, जबकि बुर्का सर से लेकर पाँव। कई इस्लामी मुल्कों में शरिया के हिसाब से बुर्का अनिवार्य है। कर्नाटक में चल रहे प्रदर्शन को मीडिया/एक्टिविस्ट्स भले इसे हिजाब से जोड़ें, ये बुर्का के लिए हो रहा है।

गोरखनाथ मंदिर में रुद्राभिषेक कर CM योगी ने भरा नामांकन का पर्चा, अमित शाह ने कहा – BJP फिर से जाएगी 300 पार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर शहर से विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन किया। उससे पहले उन्होंने गोरखनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की। उन्होंने शुक्रवार (4 फरवरी, 2022) को नामांकन के लिए पर्चा भरा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी नामांकन में मौजूद रहे। एयरपोर्ट पर उतरने के बाद अमित शाह और योगी आदित्यनाथ महाराणा प्रताप कॉलेज पहुँचे। अमित शाह ने कहा कि सीएम योगी के नामांकन के साथ ही भाजपा 300 सीटों के लक्ष्य के साथ यूपी में आगे बढ़ रही है।

उत्तर प्रदेश में पार्टी के चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान, प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह, गठबंधन साथी संजय निषाद और स्थानीय सांसद सांसद एवं भोजपुरी फिल्मों के अभिनेता रवि किशन भी नामांकन के दौरान मौजूद रहे। सीएम योगी ने याद दिलाया कि कैसे 2019 लोकसभा चुनाव में विपक्षी दलों की भविष्यवाणियों को चित कर 64 सीटें अपने नाम की। उन्होंने कहा कि बिना किसी भेदभाव के विकास परियोजनाएँ आगे बढ़ीं, जो ‘डबल इंजन’ की सरकार के कारण ही हो पाया।

उन्होंने बताया कि पिछले 5 वर्षों में सरकार और संगठन में बिना किसी भेदभाव के हर किसी की आस्था का सम्मान किया है और सुरक्षा की गारंटी दी है। नामांकन से पहले उन्होंने गोरखनाथ मंदिर में हवन-पूजन किया। अमित शाह इस दौरान डोर टू डोर कैम्पेन भी करेंगे। मौसम खराब होने के कारण इसे लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। सीएम योगी के 4 प्रस्तावकों में दलित, ब्राह्मण, कायस्थ और वैश्य समाज के लोग हैं। रैदास मंदिर के अध्यक्ष विश्वनाथ, शिक्षाविद मयंकेश्वर पांडेय, डॉक्टर मंगलेश श्रीवास्तव और सुरेंद्र अग्रवाल के नाम इनमें शामिल हैं।

चुनाव आयोग के दिशानिर्देशों का पालन करते हुए जनसभा में 1000 प्रतिनिधि शामिल हुए। इनमें व्यापारियों और डॉक्टरों समेत सभी वर्गों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सोशल मीडिया पर भी इस चुनावी जनसभा का प्रसारण हुआ। सीरम योगी आज मतदाता जागरूकता सम्मेलन और प्रबुद्ध वर्ग के लोगों को भी अलग-अलग सम्बोधित करेंगे। अगले दिन वो घर-घर जनसंपर्क पर निकलेंगे। मोहद्दीपुर गुरुद्वारा में सिख समाज के लोगों के साथ भी मुलाकात का समय निश्चित है।

गोरखनाथ मंदिर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रुद्राभिषेक भी किया। गोरखपुर सदर की सीट पर पिछले 33 वर्षों से भाजपा ही जीतती आ रही है। 1989 से ही ये भाजपा का गढ़ रहा है। नामांकन के दौरान अमित शाह ने कहा कि आज विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं है, उनको तो लगता है कोरोना के कारण सभाएँ सीमित हो गई हैं, लोगों के बीच जाना नहीं पड़ रहा है। उन्होंने कहा, मैं उनसे कहना चाहता हूं कि भैया जो प्रचार करना है कर लो, उत्तर प्रदेश की जनता भाजपा के साथ है, भाजपा को फिर से 300 के पार सीटें मिलने वाली हैं।”

उन्होंने कहा, “2 साल तक योगी जी ने यहाँ सुशासन की नींव डालने का काम किया, उसको देखते हुए 2019 के लोकसभा चुनाव में सारे विपक्षी दलों ने एकत्र होकर महागठबंधन बनाया। मोदी जी भी उत्तर प्रदेश से ही सांसद बनकर गए हैं। मोदी जी हमेशा कहते हैं कि जबतक उत्तर प्रदेश का विकास नहीं होता, देश का विकास असंभव है। मोदी जी हमेशा गरीब, पिछड़े, दलित, आदिवासी इनके उत्थान के लिए लगे रहे हैं। 2014, 2017 और 2019 तीनों चुनाव में उत्तर प्रदेश की जनता ने मोदी जी के नेतृत्व में यूपी के विकास का रास्ता तैयार कर प्रचंड बहुमत दिया है।”