Home Blog Page 3004

‘सरकार मुस्लिमों के खिलाफ, हमें खून बहाना होगा’: दिल्ली हिंदू विरोधी दंगों की उमर खालिद ने की थी प्लानिंग, कोर्ट में अहम सबूत पेश

दिल्ली की एक अदालत (Delhi Court) ने बुधवार (2 फरवरी 2022) को जेनएनयू (JNU) के पूर्व छात्रनेता उमर खालिद (Umar Khalid) की जमानत याचिका पर सुनवाई की। खालिद पर दिल्ली दंगों के मामले में आईपीसी और यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया है। दिल्ली पुलिस की ओर से आज अदालत में पेश हुए स्पेशल पब्लिक प्रोसेक्यूटर अमित प्रसाद ने हिंदू विरोधी दिल्ली दंगों के आरोपित उमर खालिद की जमानत याचिका का विरोध करते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत के समक्ष और कई अहम सबूत पेश किए।

अभियोजक ने 15 और 16 जनवरी 2020 को चाँदबाग में हुई एक बैठक पर चर्चा करते हुए अपने तर्क देना शुरू किया। उन्होंने कहा कि एक गवाह ने बताया है, “विरोध प्रदर्शन के लिए डंडे, पत्थर, लाल मिर्च और तेजाब इकट्ठे किए गए।” इस दौरान अभियोजक ने हैरानी जताई कि आखिर विरोध के लिए इन चीजों को इकट्ठा करने का क्या उद्देश्य था, जिसे उमर खालिद जैसे आरोपित ने शांतिपूर्ण करार दिया था। उन्होंने आगे कहा कि गवाह ने यह भी खुलासा किया था कि साजिशकर्ताओं ने महिलाओं और पुरुषों को एकत्रित कर उन्हें लाठी, पत्थर इत्यादि सौंपे थे।

अमित प्रसाद ने सवाल किया, आखिरकार लाठी, डंडे और लाल मिर्च के साथ किया गया विरोध प्रदर्शन किस प्रकार से शांतिपूर्ण हो सकता है? इस दावे की पुष्टि करने के लिए कि उमर खालिद ने सांप्रदायिक दंगों की एक बड़ी साजिश रची थी, एसएसपी अमित प्रसाद ने एक चश्मदीद गवाह का बयान पढ़ा, जिसने पुष्टि की थी कि उमर खालिद ने एक बैठक के दौरान कहा था, “सरकार मुसलमानों के खिलाफ है, भाषण से काम नहीं चलेगा, हमें खून बहाना होगा।”

दिल्ली दंगों में उमर खालिद की भूमिका और साजिश की परतें खोलने के लिए अमित प्रसाद ने कड़कड़डूमा कोर्ट में कई वॉट्सऐप चैट, गवाहों के बयान और सीसीटीवी फुटेज भी पेश किए। इनमें साफ दिख रहा है कि उमर खालिद ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के नाम पर दंगे भड़काने की सुनियोजित साजिश रची थी।

प्रसाद ने अदालत को आगे बताया कि जामिया कोऑर्डिनेशन कमेटी (JCC) और दिल्ली प्रोटेस्ट सपोर्ट ग्रुप (DPSG) सहित विभिन्न व्हाट्सएप ग्रुपों को विरोध करने वाले स्थानों के बारे में एक दूसरे से संपर्क करने के लिए बनाया गया था। उन्होंने कहा कि जामिया जागरूकता अभियान दल भी विरोध करने वाले स्थानों के बारे में जानने और लोगों को अपनी साजिश का हिस्सा बनाने के लिए किया गया था। प्रसाद ने कोर्ट में सबूत के तौर पर दिल्ली प्रोटेस्ट सपोर्ट ग्रुप (डीपीएसजी) के उस मैसेज का स्क्रीनशॉट भी शेयर किया गया, जिसमें लिखा है, “आग लगाने की पूरी तैयारी है।” यह मैसेज 16 और 17 फरवरी 2020 को एक ओवैस सुल्तान खान नाम के शख्स द्वारा किया गया था।

रिपोर्ट्स के अनुसार, 2020 की शुरुआत में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़के हिंदू विरोधी दंगों के सिलसिले में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। 100 पन्नों की चार्जशीट में उमर खालिद पर दिल्ली की सड़कों पर दंगे भड़काने, दंगों की साजिश रचने, देश विरोधी भाषण देने और अन्य आपराधिक धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे। कट्टरपंथी मुस्लिम और हिंदू विरोधी दिल्ली दंगों के आरोपित उमर खालिद ने कथित तौर पर पुलिस के सामने कबूल किया है कि वह मुस्लिम समूहों को संगठित करने, उन्हें उकसाने और बड़े पैमाने पर हिंसा की साजिश रचने में शामिल था।

बता दें कि पिछले साल उमर खालिद ने खुद अपने आरोपों को स्वीकार किया था कि उसने मुस्लिम संगठनों को संगठित करने में अहम भूमिका निभाई थी। खालिद ने दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों में मुस्लिमों को नए कानून के खिलाफ भड़का कर हिंसा की साजिश रचने और महिलाओं व बच्‍चों का इस्‍तेमाल कर पूरी दिल्ली में चक्का जाम करने से संबंधी भी कई खुलासे किए थे।

‘5 साल में पूरी हिन्दूगर्दी मचाई हुई है’: सपा MLA रफीक अंसारी ने कहा – मुस्लिमों को दबाने की कोशिश कर रही योगी सरकार

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बुधवार (2 फरवरी 2022) को समाजवादी पार्टी (SP) के विधायक रफीक अंसारी की ‘हिंदूगर्दी’ टिप्पणी के लिए उन्हें फटकार लगाई। बीजेपी के शहजाद पूनावाला ने ट्विटर पर कहा, “यह हिंदू के नफरत का असली चेहरा है, जिन्ना को समाजवादी पार्टी से प्यार है।”

उत्तर प्रदेश में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और बीजेपी पर निशाना साधते हुए मेरठ के सपा विधायक रफीक अंसारी ने कहा था, “5 साल में सरकार हिंदूगर्दी मचाई हुई है। हर थाने में हिंदूगर्दी मचाई है। अगर ये सरकार बन गई तो मेरठ के अंदर गुंडा बन जाएगी। यकीन मानिए मेरठ का नौजवान, मेरठ का मुसलमान कभी किसी से दबा नहीं है, लेकिन इस सरकार ने आपको दबाने का काम किया, आपको कुचलने का काम किया, आपको खत्म करने का काम किया। ये हालात बहुत खराब हैं। लेकिन इस सरकार से लड़ने से कोई ताकत हमें नहीं रोक सकता।”

अंसारी की टिप्पणियों ने एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है और भाजपा ने इसे हिंदू घृणा का एक उदाहरण बताया है। बता दें कि यह वीडियो भाजपा नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक बृजलाल द्वारा चुनावों में गुंडों, दंगाइयों और हिस्ट्रीशीटरों को टिकट देने के लिए सपा पर आरोप लगाने के कुछ हफ्ते बाद आया है। उन्होंने कहा था कि सपा की मंशा आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों को अवसर देकर गुंडाराज और दंगाराज को वापस लाने की है।

बृजलाल ने मेरठ से कुछ सपा उम्मीदवारों रफीक अंसारी, कैराना से नाहिद हसन, धौलाना से असलम चौधरी, बुलंदशहर से हाजी यूनुस, लोनी से मदन भैया, साहिबाबाद से अमरपाल, सयाना से दिलनवाज का नाम लेते हुए सवाल किया था, “ये लोग कौन हैं? यह हिस्ट्रीशीटर, गैंगस्टर और शातिर अपराधियों की लिस्ट है।”

इसके अलावा, सीएम योगी आदित्यनाथ ने 29 जनवरी को सपा उम्मीदवारों पर निशाना साधते हुए कहा था कि अगर अपराधी विधायक बने तो चारों ओर खतरे का माहौल होगा। उन्होंने अपराधियों को टिकट देने के लिए बसपा को भी आड़े हाथों लिया था और कहा था कि बसपा और सपा में ‘सबसे बड़े अपराधी को टिकट देने’ को लेकर कॉम्पीटीशन है।

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा के सभी 403 सीटों पर 10 फरवरी से 7 मार्च तक सात चरणों में चुनाव होने हैं। 10 मार्च, 2022 को मतों की गिनती की जाएगी और परिणाम घोषित किया जाएगा।

सचिन वाजे को बहाल करने के लिए CM उद्धव ठाकरे, आदित्य ठाकरे और अनिल देशमुख ने दिए थे निर्देश: परमबीर सिंह का ED के सामने बड़ा खुलासा

मुंबई में 100 करोड़ रुपए की वसूली के मामले में फँसे राज्य के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख (Anil Deshmukh) के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) के आऱोपों की जाँच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (Enforecement Directorate) के सामने मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह (Parambir Singh) ने धमाकेदार खुलासा किया है। उन्होंने ईडी के सामने महाराष्ट्र की MVA सरकार पर हमला करते हुए आरोप लगाया कि उन्हें महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Udhhav Thackeray) और राज्य के पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे और अनिल देशमुख ने सचिन वाजे को नौकरी पर बहाल करने का निर्देश दिया था।

परमबीर सिंह ने कहा कि उद्धव ठाकरे ने व्यक्तिगत तौर पर उन्हें सचिन वाजे को बहाल कर उसे महत्वपूर्ण विभाग और अहम पद देने का निर्देश दिया था। दरअसल, मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय ने चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें इस बात का जिक्र किया गया था कि ईडी ने सिंह से एपीआई सचिन वाजे की बहाली में उनकी भूमिका के बारे में बताने के लिए कहा था।

ईडी को दिए जवाब में परमबीर सिंह ने बताया, “मैं बताता हूँ कि सचिन वाजे को जून 2020 के महीने में समीक्षा बैठक के बाद बहाल किया गया था, जहाँ निलंबन के सभी मामलों की समीक्षा मुंबई के पुलिस कमिश्नर, कुछ संयुक्त सीपी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की एक समिति द्वारा की जाती है। ये लोग कमिटी के मेंबर थे”

परमबीर सिंह ईडी के सामने इस बात को स्वीकार करते हैं कि उनके ऊपर सचिन वाजे को फिर से बहाल करने के लिए गृह मंत्री अनिल देशमुख ने डायरेक्ट दबाव बनाया था। सिंह ने कहा कि उन्हें आदित्य ठाकरे और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे भी डायरेक्टली इंस्ट्रक्शन देते थे। मुझे मुंबई पुलिस की अपराध शाखा में उनकी पोस्टिंग के लिए और वहाँ कुछ महत्वपूर्ण इकाइयों का प्रभार देने के लिए भी निर्देश मिले थे। परमबीर सिंह ने जाँच एजेंसी को बताया कि मुंबई पुलिस की क्राइम इंटेलीजेंस यूनिट के पास कई सारे अहम मामले थे, जिसकी अध्यक्षता सीएम और गृह मंत्री के निर्देश पर सचिन वाजे ने की थी। वो सीधे उद्धव ठाकरे औऱ देशमुख को रिपोर्ट करता था। इसके अलावा वाजे की बहाली के लिए अनिल देशमुख ने उनसे 2 करोड़ रुपए माँगे थे।

गौरतलब है कि मार्च 2021 में परमबीर सिंह ने लेटर बम फोड़ा था, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि गृह मंत्री अनिल देशमुख सचिन वाज़े को हर महीने 100 करोड़ रुपए इकट्ठा कर उन्हें देने के आदेश दिए थे। इसके बाद ही सीबीआई ने केस दर्ज कर अनिल देशमुख को पूछताछ के लिए तलब किया था।

‘कारण सही, लेकिन प्रदर्शन को दंगे में बदल दिया गया’: ‘हिंदुस्तानी भाऊ’ ने कोर्ट में बिना शर्त माँगी माफी, छात्रों को उकसाने के लिए जेल में है बंद

मुंबई में छात्रों को सड़कों पर उतर कर विरोध प्रदर्शन के लिए उकसाने के मामले में गिरफ्तार ‘हिंदुस्तानी भाऊ’ के नाम से सोशल मीडिया पर मशहूर विकास पाठक ने बुधवार (2 फरवरी 2022) को कोर्ट में बिना शर्त माफी माँग ली। इस बात की जानकारी पाठक के वकील महेश मुल्या ने दी है। उन्होंने कहा कि कारण सही था, लेकिन इसका दुरुपयोग करते हुए प्रदर्शन को दंगे में बदल दिया गया।

हिंदुस्तानी भाऊ और इकरार खान को कक्षा 10 और 12 के छात्रों को ऑनलाइन परीक्षा की माँग करने के लिए भड़काने पर मंगलवार (1 फरवरी) को गिरफ्तार किया गया था। इन दोनों के आह्वान पर मुंबई के धारावी में छात्रों की बड़ी सभा हुई थी और इस जगह ये लोग भी मौजदू थे। बाद में छात्र शिक्षा मंत्री वर्षा गायकवाड़ के घर के बाहर जमा हो गए। नागपुर में भी ऐसी ही भीड़ ने दो बसों में तोड़फोड़ की।

पाठक ने 24 जनवरी को अपलोड किए गए अपने वीडियो में कहा था, “इन दो वर्षों में कई लोगों की मौत कोविड के कारण हुई। अब तक, परिवार सदमे से उबर रहे हैं। और अब ओमाइक्रोन का नया नाटक शुरू हो गया है। यह क्या है? सरकार लोगों से घर के अंदर रहने का आग्रह कर रही है, फिर वह छात्रों की परीक्षा ऑफलाइन क्यों ले रही है?” पाठक ने यूट्यूब पर इस वीडियो को ‘परीक्षा रद्द करो। बच्चों के जान के साथ मत खेलो वर्ना होगा फिर से आंदोलन’ के नाम से साझा किया था। वीडियो को बुधवार तक करीब 4.15 लाख से अधिक बार देखा जा चुका है।

बता दें कि पाठक ने छात्रों को सलाह दी थी कि अगर महाराष्ट्र सरकार ऑनलाइन परीक्षा के लिए नहीं मानती है तो वे सड़क पर उतर कर विरोध प्रदर्शन करें। उन्होंने खुद लाखों छात्रों के साथ शिक्षा मंत्री के घर के बाहर विरोध प्रदर्शन की बात कही थी। बीड़ में भी जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंप कर छात्रों ने ऑनलाइन परीक्षाएँ आयोजित करने की माँग की थी। 

विरोध प्रदर्शन के दंगे का रूप धारण करते ही मुंबई पुलिस ने पाठक के खिलाफ कार्रवाई की बात कही थी। इसके बाद छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बीच मुंबई की धारावी पुलिस ने विकास पाठक को गिरफ्तार लिया था। उन पर आईपीसी की कई धाराओं में मुकदमा दर्ज करते हुए गिरफ्तार कर लिया गया था।

चुनाव प्रचार के 10 कार्यक्रम छोड़कर वैष्णो देवी चले गए सिद्धू, पंजाब कॉन्ग्रेस में इलेक्‍शन से पहले कलह: अटकलों का बाजार गर्म

पंजाब के अमृतसर पूर्वी से कॉन्ग्रेस प्रत्याशी नवजोत सिंह सिद्धू बुधवार (2 फरवरी 2022) को अचानक चुनाव प्रचार छोड़ माता वैष्णो देवी के दर्शन करने रवाना हो गए। इसके बाद राजनीतिक चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है कि कहीं कॉन्ग्रेस सीएम फेस की घोषणा तो नहीं करने वाली है। माता वैष्णो देवी जाने को लेकर सिद्धू ने खुद ट्विटर पर पोस्ट भी डाली है। उन्होंने माता वैष्णो देवी दरबार जाने के बारे में लिखते हुए माता वैष्णो देवी से प्रार्थना की कि वे दुष्टों का विनाश करें, पंजाब का कल्याण करें और धर्म की स्थापना करें। 

राजनीति के विशेषज्ञ इसे पंजाब कॉन्ग्रेस कुर्सी को लेकर मचे घमासान के नतीजे के रूप में देख रहे हैं। बता दें कि कॉन्ग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री चेहरे के लिए आम आदमी पार्टी (AAP) की तर्ज पर आनलाइन सर्वे करवाया जा रहा है। कॉन्ग्रेस कभी भी पंजाब में सीएम फेस की घोषणा कर सकती है।

सुबह पूर्व पंजाब कॉन्ग्रेस प्रधान सुनील जाखड़ ने यह कहकर राजनीतिक खलबली मचा दी कि पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह के त्याग पत्र के बाद उन्हें 42 विधायकों का समर्थन हासिल था लेकिन सीएम बने 2 विधायकों के समर्थन वाले चरणजीत सिंह चन्नी। सुखजिंदर सिंह रंधावा को 16 और नवजोत सिंह सिद्धू को मात्र 6 विधायकों ने अपना समर्थन दिया था। 

दस निर्धारित कार्यक्रम छोड़कर माता वैष्णो देवी गए सिद्धू

सिद्धू के बुधवार के शेड्यूल के मुताबिक हलके की विभिन्न वार्डों में दस के लगभग कार्यक्रम निर्धारित थे। सुबह डीसीसी की पूर्व प्रधान व पार्षद जतिंदर सोनिया के निवास पर रखे गए पहले ही कार्यक्रम में वह नहीं पहुँचे। पता करने पर जानकारी मिली कि सिद्धू माँ वैष्णों देवी के दर्शनों को चले गए हैं। उनके अचानक यूँ हलके विधानसभा से जाने से कई तरह की चर्चाएं की जा रही हैं। कॉन्ग्रेस की पूर्व शहरी प्रधान व पार्षद जतिंदर सोनिया ने बताया कि उनके घर पर सिद्धू के आने की जानकारी मिली थी। वैसे मंगलवार (1 फरवरी 2022) को कार्यक्रम था, जिसमें सिद्धू को आना था, पर वह नहीं आए। बुधवार (2 फरवरी 2022) को उनके आने की उम्मीद थी, पर कोई सूचना नही दी थी।

अकाली दल के बिक्रम मजीठिया ने दी है सिद्धू को चुनौती

बता दें कि मंगलवार को शिअद महासचिव व हलके से शिरोमणि अकाली दल के प्रत्याशी बिक्रम सिंह मजीठिया ने घोषणा की थी कि वह सिद्धू की चुनौती स्वीकार करते हैं। वह सिर्फ पूर्वी हलके की सीट से ही चुनाव लड़ेंगे। उनके पुराने विधानसभा क्षेत्र मजीठा से उनकी पत्नी मैदान में रहेंगी। सिद्धू मंगलवार को अमरगढ़ में आयोजित रैली में भाग लेने के लिए गए हुए थे, ऐसे में बुधवार को उनके अपने हलके में निकलने का कार्यक्रम था। पूर्वी हलके से मजीठिया के मैदान में उतरने के बाद यहाँ मुकाबला काफी कड़ा हो गया है।

‘भाग्य अच्छा था कि बच गया’: हनीट्रैप मामले पर बोले कॉन्ग्रेसी मंत्री रामलाल, 2011 में महिला मित्र की सुसाइड पर छोड़ना पड़ा था मंत्री पद

राजस्थान (Rajasthan) के जोधपुर में सातवीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या करने की कोशिश करने वाली मॉडल गुनगुन उपाध्याय (Gungun Upadhyay) को लेकर चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। बताया जा रहा है कि उदयपुर की ब्यूटीशियन दीपाली (Deepali) और कथित पत्रकार अक्षत शर्मा (Akshat Sharma) राज्य के राजस्व मंत्री रामलाल जाट (Ramlal Jat) को हनीट्रैप में फँसाने के लिए गुनगुन पर दबाव डाल रहे थे और पत्रकार के रूप में मॉडल को भेजकर मंत्री के पास सुलाना चाहते थे। रामलाल जाट वही मंत्री हैं, जिन्हें उनकी महिला मित्र की आत्महत्या के कारण अपना मंत्री पद गँवाना पड़ा था।

भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, गुनगुन को रिपोर्टर बनाकर मंत्री के पास भेजने की योजना थी। मॉडल पर मंत्री के साथ सोने के लिए भी दबाव बनाया जा रहा था। लेकिन मॉडल समय रहते भीलवाड़ा से निकल गई और प्लान चौपट हो गया। दोनों ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि वे रामलाल जाट को हनीट्रैप में फँसाना चाहते थे। जोधपुर डीसीपी भुवन भूषण के अनुसार दो अन्य लड़कियों के साथ दीपिका और अक्षत ने भीलवाड़ा के सर्किट हाउस में रामलाल जाट से मुलाकात भी की थी। उन्हें कुछ दस्तावेज दिखाए थे, लेकिन जाट ने बताया कि यह मामला उनसे जुड़ा नहीं है और बात आगे नहीं बढ़ पाई।

गिरफ्तार अक्षत उर्फ सागर उर्फ चिनू उर्फ नितिन शर्मा अपने आप को पत्रकार और लाइजनर बताता था और रिपोर्टर बनाने की आड़ में वह लड़कियों को फँसाने का काम करता था। फिर इनका इस्तेमाल वह हनीट्रैप के लिए करता था। आरोपित अक्षथ के खिलाफ साल 2016 और 2019 में हनीट्रैप के मामले दर्ज हो चुके हैं। 2016 में जयपुर में सामने आए हनीट्रैप के मामले में 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया था और इसमें अक्षत मास्टरमाइंड था। बताया जा रहा है कि अक्षत और दीपाली मिलकर गैंग चलाते हैं। इस मामले में मॉडल ने पुलिस को और भी नाम बताए हैं। पुलिस उनको पकड़ने के लिए दबिश दे रही है।

मॉडल गुनगुन कुछ महीने पहले पहले एक शूट के लिए जयपुर आई थी और यहीं दीपाली ने उसका मेकअप किया था। इसके बाद दोनों की पहचान हो गई। उसके बाद दीपाली ने मॉडल को शूट के लिए दीपावली के बाद उदयपुर बुलाया। इस दौरान उसने 5 लड़कियों को 15 दिनों तक उदयपुर में रखा और शूट के लिए अच्छा पेमेंट भी दिलवाया। इसके बाद मॉडल दीपाली पर विश्वास बढ़ गया।

उसके बाद जनवरी में गुनगुन को साड़ी और ज्वैलरी के शूट के लिए उदयपुर में बुलाया गया। फिर उसे भीलवाड़ा लेकर दोनों गए और सर्किट हाउस के सामने एक होटल में ठहरे। वहाँ नहाते हुए आरोपितों ने मॉडल का वीडियो बना लिया। यहीं पर आरोपितों ने मॉडल पर मंत्री के साथ रिपोर्टर के रूप में मिलने और फिर उन्हें फँसाकर रात बिताने के लिए ब्लैकमेल करने लगे। हालाँकि, मॉडल तैयार नहीं हुई और भीलवाड़ा से निकलकर जोधपुर चली गई और सातवीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या करने की कोशिश की।

दैनिक भास्कर से बात करते हुए मंत्री रामलाल जाट ने बताया, “किसी न्यूज एजेंसी का नाम लेकर एक व्यक्ति ने मुझसे बात की थी। जब मैं भीलवाड़ा था तो शाम को आठ बजे बाद दो लड़कियों को मिलने भेजने की बात कही। मैंने रात में मिलने से मना कर दिया और उन्हें सुबह जनसुनवाई में मिलने के लिए कहा। भीलवाड़ा में जनसुनवाई के दौरान दो लड़कियाँ मिलने के लिए आईं। उन्होंने कोई पुलिस का काम बताया। मैंने जनसुनवाई में ही संबंधित अफसर से बात की तो कहा गया कि यह काम नहीं हो सकता। मैंने दोनों लड़कियों को बता दिया कि यह काम नहीं हो सकता। मैं दोनों को नहीं जानता।

रामलाल ने आगे बताया कि उसके लड़कियों ने अपने कथित ‘बॉस’ से फोन पर बात करवाई। मंत्री ने बताया कि उस व्यक्ति ने दोनों लड़कियों से अकेले में मिलने के बोला। उसके बाद आई एक लड़की जिद करने लगी, लेकिन वे उठकर दूसरे लोगों से मिलने चले गए। उन्होंने कहा कि उनका भाग्य अच्छा था।

बता दें कि रामलाल जाट वही व्यक्ति हैं, जिन पर साल 2011 में एक महिला के साथ संबंधों का आरोप लगा था और इस कारण उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। रामलाल पर आरोप लगा था कि भीलवाड़ा डेयरी के तत्कालीन चेयरमैन की पत्नी के साथ उनके अंतरंग संबंध हैं। किसी बात पर दोनों के बीच झगड़ा भी हो गया था। इसके बाद उनकी महिला मित्र ने जहर खा ली थी और रामलाल जाट उस महिला मित्र को खुद लेकर अस्पताल ले गए थे, लेकिन इलाज के दौरान महिला मित्र की मौत हो गई थी। 

उधर 7वीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या करने की कोशिश करने वाली गुनगुन की हालत में सुधार हो रहा है। गंभीर रूप से घायल होने के बाद मंगलवार (1 फरवरी) को उन्हें 30 यूनिट ब्लड की जरूरत थी और शहर के 29 लोगों ने आगे आकर अपना ब्लड डोनेट किया। मंगलवार को मजिस्ट्रेट ने मॉडल का बयान लिया। आरोपियों को आवश्यक कानूनी कार्रवाई के तहत जल्द ही कोर्ट में पेश किया जाएगा।

‘रुपए दो या अवैध संबंध बनाओ’: राजस्थान में सूदखोर से परेशान विधवा ने फाँसी लगा कर की आत्महत्या, अनाथ हुए दो बच्चे

राजस्थान (Rajasthan) के पाली (Pali) जिले से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली एक घटना सामने आई है। यहाँ एक सूदखोर से तंग आकर महिला ने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। न्यूज 18 हिंदी की रिपोर्ट के अनुसार, आरोपित सूदखोर महिला को आए दिन अवैध संबंध बनाने के लिए परेशान किया करता था और उससे कहता था, “रुपए दो या संबंध बनाओ।” इससे तंग आकर महिला को आत्महत्या जैसा खौफनाक कदम उठाना पड़ा।

बताया जा रहा है कि सोजत सिटी थाने के रूदिया गाँव के रहने वाले धर्माराम देवासी की करीब तीन म​हीने पहले बीमारी से मौत हो गई थी। पति की मौत के बाद पत्नी मंजू देवासी पर दोनों बच्चों की जिम्मेदारी आ गई। वह मवेशी चराकर बच्चों का पालन-पोषण कर रही थी। एक दिन अचानक बिजवाड़िया का रहने वाला बिरमाराम जाट उसके घर पहुँचा और बोला कि मैंने तुम्हारे पति को पैसे उधार में दिए थे, उनकी तो मौत हो गई, लेकिन अब तुम्हें ही बकाया रुपए का भुगतान करना होगा। इस बात पर पत्नी ने उसे रुपए देने से इनकार कर दिया।

इसके बाद दोनों में पैसों को लेकर बहस हो गई और आरोपित ने महिला को अपने सारे रुपए वसूलने की धमकी दी। वह बार-बार फोन करके महिला को पैसों के लिए तंग करने लगा। इसके बाद तो हद ही हो गई। एक दिन सूदखोर ने महिला से कहा कि रुपए नहीं दे सकती, तो मेरे साथ अवैध संबंध रखो, मैं तुमसे पैसे नहीं लूँगा। इस बात पर महिला नाराज हो गई और उसे कभी भी घर नहीं आने को ​कहा।

इसके बाद अवैध संबंध बनाने के दबाव से परेशान होकर महिला ने अपनी माँ और पड़ोसियों को अपनी पूरी कहानी बताई। उन्होंने भी सूदखोर को परेशान नहीं करने की हिदायत दी, लेकिन वो नहीं माना। इससे तंग आकर एक दिन ​महिला ने फाँसी लगा ली। पुलिस ने मृतका की माँ की शिकायत के आधार पर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।

’10 मार्च के बाद सारी गर्मी शांत कर देंगे’: बुलंदशहर में गरजे CM योगी – सत्ता में रहते दंगाइयों को सम्मान दे रहा था ‘लखनऊ वाला लड़का’

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में होने वाले विधानसभा चुनाव (Assembly Eelection) के मद्देनजर सियासी सरगर्मियाँ काफी तेज हैं, हर पार्टी अपने-अपने तरीके से प्रचार कर रही है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Aaditynath) ने बुधवार (2 फरवरी 2022) को बुलंदशहर में चुनावी जनसभा के दौरान समाजवादी पार्टी (Samajwadi party) पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने सपा-रालोद गठबंधन पर कहा कि कयामत के दिन तक सत्ता में आने का इनका सपना पूरा नहीं होने दूँगा। इसके साथ ही सीएम ने चेतावनी भी दी कि 10 मार्च के बाद इनकी सारी गर्मी को शांत कर देंगे।

करीब 18 मिनट के अपने भाषण के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुजफ्फरनगर के दंगे का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “जब 2013 में मुजफ्फरनगर में दंगे हुए थे, सचिन और गौरव नाम के दो युवकों की निर्मम हत्या हुई थी। लखनऊ वाला ये जो लड़का है न, तब ये सत्ता में था और हत्या करवा रहा था। हत्यारों को प्रश्रय दे रहा था। दंगाइयों को लखनऊ में बुलाकर उनका सम्मान कर रहा था। इन दंगाइयों के खिलाफ भाजपा का जो भी कार्यकर्ता आवाज उठा रहा था उनके खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज करके उन्हें जेल भेजा जा रहा था। दिल्ली वाला लड़का उस स्थिति में भी तमाशा बनाकर कहता था कि दंगाइयों के खिलाफ ज्यादा कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।”

विपक्ष को सड़ा गला बताते हुए सीएम योगी ने कहा कि एक बार फिर से ये लोग एक नए कवर के साथ सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा की माल तो वही सड़ा-गला है, लेकिन लिफाफा नया है, जिसने असुरक्षा, दंगा और माफिया दिए। साथ ही चेताते हुए कहा कि लेकिन इतना ध्यान रखो 10 मार्च के बाद पूरी गर्मी शांत करवा देंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा “हम एक तरफ विकास करेंगे। जेवर में इंटरनेशनल एयरपोर्ट बन रहा है, फिल्म सिटी भी बना रहे हैं। इसके अलावा हम डाटा सेंटर का भी निर्माण कर रहे हैं। पिछली सरकार तमंचे की फैक्ट्री चला रही थी, लेकिन यहीं पर हम डिफेंस कॉरिडोर दे रहे हैं। लेकिन बुलडोजर रुकेगा नहीं, माफिया के ऊपर बुलडोजर चलता रहेगा। चौराहे-चारे पर दंगाइयों की फोटो को फिर से लगाएँगे और नोटिस भेजेंगे कि बेटी तुमने ये किया था कभी और अब इसकी भरपाई भी कर लो। विकास के साथ-साथ माफिया के खिलाफ बुलडोजर भी है। ये वही चला सकता है जिसमें दम होगा।”

‘अब बाहुबली नहीं, बजरंग बली हैं’: यूपी में अमित शाह ने सपा-बसपा पर बोला हमला, कहा – योगी की सरकार में चलता है कानून का सिक्का

समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) पर अपराधी तत्वों को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने कहा कि उत्तर प्रदेश की मौजूदा योगी आदित्यनाथ सरकार में कानून का सिक्का चलता है। विपक्ष के शासन में हर जिले में एक बाहुबली, एक माफिया होता था और अब राज्य में बाहुबली नहीं बल्कि बजरंगबली दिखाई देते हैं। योगी ने बाहुबलियों के कब्जे से करीब 2,000 करोड़ की भूमि को छुड़ाकर गरीबों के आवास बनाए हैं।

उत्तर प्रदेश के बदायूँ के सहसवान के इस्लाम नगर में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रत्याशी डीके भारद्वाज के समर्थन में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि बुआ (मायावती)-बबुआ (अखिलेश यादव) की सरकारो में गुंडाराज था। जो जितना बड़ा दंगाई था, उसे उतना बड़ा सपाई समझा जाता था। गरीबों को कोई पूछने वाला नहीं था। 

उन्होंने कहा कि 2017 में राज्य की सत्ता में आई योगी सरकार ने माफिया और अपराधी तत्वों पर नकेल कसी। जिसका परिणाम है कि आज माफिया तीन जगह दिखाई देते हैं। वे या तो जेल में है या प्रदेश से बाहर है और या तो सपा का प्रत्याशी है।

गृहमंत्री ने कहा कि लोगों का कहना है कि अखिलेश जी का शासन आएगा तो यूपी में रेड लाइट और ग्रीन लाइट का शासन आ जाएगा। विकास के नाम पर वो रेड लाइट दिखा देंगे और बाहुबलियों व माफियाओं को ग्रीन लाइट दिखाकर वापस बुला लेंगे।

उन्होंने कहा, “अखिलेश जी, मुलायम जी मुख्यमंत्री थे तो इनके साथ आजम खान, अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी दिखते थे। लेकिन आप लोगों ने तीन साल से इन्हें देखा है क्या? भाजपा सरकार ने कानून का राज स्थापित किया है। सपा की सरकार में किसी एक जाति-धर्म का विकास होता था। बहनजी की सरकार आती थी तो किसी दूसरी जाति-धर्म का ही विकास होता था। आप प्रधानमंत्री मोदी जी को लाए हैं। उनका मंत्र है, सबका साथ-सबका विकास-सबका विश्वास-सबका प्रयास।”

गृह मंत्री ने कहा, “सपा-बसपा के शासन में उत्तर प्रदेश माफियाओं का सेंटर बन गया था। यूपी में आए दिन दंगे होते थे, बहन-बेटियों का सम्मान नहीं था, भूमाफिया गरीबों की भूमि हड़पते थे। बहनजी की और अखिलेश जी की सरकार में गुंडे उत्तर प्रदेश के लोगों को परेशान करते थे। यूपी में माफियाओं से पुलिस डरती थी। योगी आदित्यनाथ जी की सरकार में माफिया उत्तर प्रदेश से पलायन कर गए हैं।”

केंद्रीय मंत्री ने बुधवार (2 फरवरी 2022) को यूपी के अतरौली में भी रैली को संबोधित किया। उन्होंने कहा, “अखिलेश जी कोरोना टीके को लेकर देश और उत्तर प्रदेश को गुमराह किया, लेकिन बाद में खुद भी टीका लगवाया। अगर लोग उनके कहने पर टीका न लगाते तो क्या लोगों की जान बच पाती?”

गृह मंत्री ने कहा कि 2014, 2017, 2019 के चुनाव उत्तर प्रदेश की किस्मत बदलने वाले चुनाव रहे हैं। बुआ-भतीजा की सरकारें, जातिवादी सरकारें यूपी का भला नहीं कर सकती थीं। यूपी बीमारू राज्य की श्रेणी में आ गया था। भाजपा की सरकार ने बदलाव लाने का काम किया है।

₹300 करोड़ की क्रिप्टोकरेंसी के लिए महाराष्ट्र पुलिस के सिपाही ने कारोबारी को अगवा किया: साइबर सेल में रहते हासिल की थी जानकारी

क्रिप्टोकरेंसी की बढ़ती डिमांड के चलते महाराष्ट्र के पुणे में एक शेयर कारोबारी का अपहरण करने की खबर सामने आई है। हैरानी की बात तो यह है कि यह अपहरण किसी और ने नहीं, ​बल्कि महाराष्ट्र पुलिस (Maharashtra Police) के एक सिपाही ने किया है। पिंपरी चिंचवाड़ के वाकाड थाना पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, महाराष्ट्र पुलिस के सिपाही का नाम दिलीप तुकाराम खंडारे है। वह पुणे में साइबर क्राइम सेल के साथ भी काम कर चुका है। जैसे ही उसे जानकारी मिली कि शेयर कारोबारी विनय नाइक के पास 300 करोड़ रुपए की क्रिप्टोकरेंसी (बिटकॉइन) है, उसने 7 अन्य लोगों के साथ मिलकर उसका अपहरण करने की योजना बना ली। इसके बाद आरोपित खंडारे ने अपने साथियों के साथ मिलकर 14 जनवरी को पुणे के एक होटल से विनय का अपहरण कर लिया।

बुधवार (2 फरवरी 2022) को पुणे पुलिस जोन-2 के उपायुक्त (DCP) आनंद भोइटे ने बताया कि शेयर कारोबारी को अगवा करने वाले कॉन्स्टेबल दिलीप तुकाराम खंडारे के साथ सुनील राम शिंदे, वसंत श्याम चव्हाण, फ्रान्सिस टिमोटी डिसूजा, मयूर महेंद्र शिर्के, प्रदीप काशीनाथ काटे, संजय उर्फ निकी राजेश बंसल और शिरीष चंद्रकांत खोत को गिरफ्तार कर लिया गया है।

वहीं, पिंपरी चिंचवाड़ के पुलिस कमिश्नर कृष्ण प्रकाश ने बताया कि कॉन्स्टेबल दिलीप तुकाराम खंडारे ही इस पूरे केस का मास्टरमाइंड है। उसने विनय नाइक के अपहरण के बाद बिटकॉइन (Bitcoin) बेचने की कोशिश भी की थी। वहीं, खंडारे को साल 2019 में 10,000 रुपए का रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया था।

बता दें कि क्रिप्टोकरेंसी एक प्रकार की डिजिटल कैश प्रणाली है। यह एक निजी कंप्यूटर चेन से जुड़ी हुई होती है और कंप्यूटर एल्गोरिदम पर बनी होती है। क्रिप्टोकरेंसी पर किसी भी देश या सरकार का कोई नियंत्रण नहीं होता है। कई देश इसे लीगल कर चुके हैं। क्रिप्टोकरेंसी का आज सबसे आसान और लोकप्रिय तरीका क्रिप्टो एक्सचेंज हैं, जिसके जरिए इसे खरीदना और बेचना आसान हो गया है।