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‘…तो बंदी छोड़ के PM बन जाता’: मुनव्वर फारुकी ने यहूदियों के नरसंहार का उड़ाया मजाक, गुजरातियों और स्वस्तिक का भी किया अपमान

स्टैण्डअप कॉमेडियन मुनव्वर फारुकी (Munawar Faruqui) को तो सभी जानते हैं। अक्सर अपने विवादास्पद बयानों को लेकर चर्चा में रहता है। 1 फरवरी 2022 को फारुकी ने अपने YouTube चैनल पर एक शो की रिकॉर्डिंग अपलोड की, जिसमें उसने ‘द होलोकॉस्ट’ का मजाक उड़ाया। 18 मिनट के अपने शो में कॉमेडियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) से लेकर हिटलर तक को नहीं छोड़ा। फारुकी ने अनुमान लगाया कि हिटलर (Hitler) अगर गुजराती होता तो किस तरह के हालात होते।

वीडियो में फारुकी ने कहा, “अगर हिटलर गुजराती होता तो दूसरा विश्व युद्ध नहीं होता। मेरे पास एक इसकी थ्योरी है। उसका नाम हितेश होता। उसकी हिटलर-शैली की मूँछें होंगी, बिल्कुल जेठालाल। हिटलर का एक प्रतीक था, ‘हिटलर की जय हो’, हितेश के पास ‘रोकड़ा’ होता, हितेश महान व्यक्ति होता।”

मुनव्वर फारुकी ने हिटलर के होलोकॉस्ट के बारे में बात की, जिसके गैस चेंबरों में लाखों यहूदियों की नाजी सेना ने हत्या कर दी थी। उसने आगे कहा, “क्या आप लोग होलोकॉस्ट के बारे जानते हैं? मैं आपको इसके बारे में बताऊँगा। हिटलर ने गैस चेंबर बना रखा था, जिसमें उसने यहूदियों को मार डाला था। हितेश होता तो होलोकॉस्ट नहीं होता। इसे ‘हालो हालो कास्ट’ होता (हालो ‘लेट्स गो’ के लिए बोलचाल का गुजराती शब्द है)। वहाँ पर खाने काउंटर लगे हुए होते ढोकला, खाखरा। यहूदियों को हितेश इतना ढोकला खिला देता कि वो गैस से ही मर जाते।”

कॉमेडियन के मुताबिक, हिटलर शुद्ध शाकाहारी था। पशु प्रेमी था। यह एक फ*ग गुजराती चीज है। वो अपना खुद का रेस्टोरेंट खोल सकता था। स्वास्तिक शुद्ध शाकाहारी। दरअसल, फारुकी य़ह बताने की कोशिश कर रहा था कि हिटलर ने पवित्र हिंदू प्रतीक स्वास्तिक का इस्तेमाल किया था, हकीकत में वह यह एक ईसाई झुका हुआ क्रॉस या हेकेनक्रेज़ था।

मुनव्वर फारुकी ने अनुमान लगाया कि हिटलर ने जब कैदियों को डिटेंशन सेंटर में डाला होगा तो क्या कहा होगा, “हिटलर ने कहा होगा कैदियों को खाना मत दो गा@#ड मार दो। लेकिन हितेश बोला होगा खाना दो, थोड़ा खांड डाल दो।”

विवादित कॉमेडियन यहीं नहीं रुका। उसने आगे स्वर्गीय बिजनेसमैन धीरूभाई अंबानी का मजाक बनाया। उसने कहा, “किसी को पता है हिटलर का ड्रीम क्या था? ‘कर लो दुनिया मुठी में’। ये गुजरातियों के सपने की तरह है। लेकिन अगर वह गुजराती होता तो किसी को मारकर दुनिया मुट्ठी में नहीं करता। सिम कार्ड बेचता और दुनिया मुट्ठी में कर लेता। सिम कार्ड बेचो, किसी को फंड दो, वो लोग मारेंगे न सबको।” बता दें कि रिलायसं मोबाइल ने साल 2002 में ‘कर लो दुनिया मुट्ठी में’ का स्लेगन दिया था।

इसके साथ ही फारुकी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी मजाक उड़ाया और कहा हिटलर की मौत कैसे हुई थी? भारत में 71 सुसाइड दो कारणों से होता है। प्यार और पैसा। फारुकी के मुताबिक, “हिटलर ने आत्महत्या कर ली थी। लेकिन अगर वो एक गुजराती होते और पैसे की हानि होती तो वो देश छोड़ देता, लेकिन आत्महत्या नहीं करता। लव लॉस में एक गुजराती खुद बंदी छोड़ के प्रधानमंत्री बन जाता।”

वीडियो के अंत में मुनव्वर फारुकी ने मुस्लिम कार्ड खेलते हुए कहा कि अगर कोई मुस्लिम है और बैचलर हो तो आपको घर नहीं मिलेगा। लेकिन अगर तुम गुजराती हो और तुम्हारी बीवी नहीं है, फिर भी तुम्हें देश चलाने के लिए मिल सकता है।

गोधरा कांड के पीड़ितों का भी उड़ाया था मजाक

ये कोई पहली बार नहीं है, जब मुनव्वर फारुकी ने दूसरों का मजाक बनाया हो। इससे पहले स्टैण्ड-अप कॉमेडियन ने 2020 में गोधरा नरसंहार के पीड़ितों का मजाक उड़ाया था, जहाँ अयोध्या से लौट रहे 58 हिंदुओं को मुस्लिम भीड़ ने जिंदा जला दिया था। उसके इसी तरह के विवादास्पद कृत्यों के कारण कई बार हिंदू संगठनों ने उसे शो करने से रोक दिया था।

सिद्धू के सलाहकार मुस्तफा ने गुरु ग्रंथ साहिब को कहा ‘किताब’: सिखों ने बताया ‘बेअदबी’, हिंदुओं को घर में घुसकर मारने की दे चुके हैं धमकी

पंजाब के मलेरकोटला से कॉन्ग्रेस उम्मीदवार एवं कैबिनेट मंत्री रजिया सुल्ताना (Razia Sultana) के पूर्व डीजीपी पति और पंजाब कॉन्ग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) के सलाहकार मोहम्मद मुस्तफा (Mohammad Mustafa) अपने विवादित बयानों के कारण अक्सर विवादों में रहते हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बार उन्होंने श्री गुरु ग्रंथ साहिब को लेकर विवादित बयान दिया है। मोहम्मद मुस्तफा ने एक चुनावी सभा के दौरान श्री गुरु ग्रंथ साहिब को किताब कह दिया और वहाँ मौजूद मुस्लिम समुदाय से कहा, “मैं अल्लाह से दुआ करता हूँ कि मुस्लिम समुदाय को भी ऐसा जज्बा मिले, जैसे सिख अपनी किताब के लिए कुछ भी कर देते हैं।”

विवादित छवि वाले मुस्तफा के बयान पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने आपत्ति जताई है। कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने मोहम्मद मुस्तफा और नवजोत सिंह सिद्धू से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के लिए सिख समुदाय से माफी माँगने को कहा है। उन्होंने कहा, “सिख धर्म में श्री गुरु ग्रंथ साहिब कोई किताब नहीं है, बल्कि गुरु का रूप है और ऐसे में गुरु की तुलना एक किताब से करने पर एसजीपीसी को सख्त ऐतराज है।”

हरजिंदर सिंह धामी ने आगे कहा कि सिखों के 10वें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब को गुरुत्व प्रदान किया था। उन्होंने सिख समुदाय से गुरु के रूप में पवित्र ग्रंथ का पालन करने के लिए कहा था। ऐसे में जीवित गुरु को एक किताब बुलाना, मोहम्मद मुस्तफा की छोटी मानसिकता को दर्शाता है। उनके बयान से सिख समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुँची है।

बता दें कि इससे पहले, नवजोत सिंह सिद्धू के करीबी मोहम्मद मुस्तफा पर पुलिस ने जनवरी 2022 को मलेरकोटला के बाघवाला मोहल्ला में भड़काऊ भाषण देने के लिए मामला दर्ज किया था। मुस्तफा के हिंदुओं को धमकी देने वाले भाषण की क्लिप सोशल मीडिया पर भी काफी वायरल हुई थी।

मोहम्मद मुस्तफा ने कहा था, “अल्लाह की कसम खाकर कहता हूँ कि इनका कोई जलसा नहीं होने दूँगा। मैं कौमी फौजी हूँ। मैं आरएसएस (RSS) का एजेंट नहीं हूँ, जो डर कर घर में घुस जाऊँगा। अगर इन्होंने दोबारा ऐसी हरकत की तो खुदा की कसम इनके घर में घुसकर इन्हें मारूँगा। आज मैं इन्हें सिर्फ वॉर्निंग दे रहा हूँ। मैं वोटों के लिए नहीं लड़ रहा हूँ, मैं कौम के लिए लड़ रहा हूँ।”

कॉन्ग्रेस सत्ता में आई तो उत्तराखंड में खुलेगा मुस्लिम विश्वविद्यालय: पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने किया वादा

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले, कॉन्ग्रेस नेता हरीश रावत ने मुख्यमंत्री के रूप में चुने जाने पर राज्य में एक मुस्लिम विश्वविद्यालय खोलने का वादा किया है। कॉन्ग्रेस नेता अकील अहमद ने बुधवार (2 फरवरी 2022) को सहसपुर निर्वाचन क्षेत्र से अपना नामांकन वापस ले लिया और कहा कि रावत ने उनसे वादा किया है कि अगर कॉन्ग्रेस सत्ता में आई तो मुस्लिम छात्रों के लिए एक विश्वविद्यालय बनाया जाएगा।

उत्तराखंड बीजेपी ने सहसपुर निर्वाचन क्षेत्र से कॉन्ग्रेस नेता आर्येंद्र शर्मा का समर्थन करते हुए अकील अहमद का एक वीडियो पोस्ट किया और कहा कि कॉन्ग्रेस का केवल एक एजेंडा है और वह है राज्य में मुस्लिम विश्वविद्यालय बनाना। उत्तराखंड बीजेपी ने ट्वीट में लिखा, “चार धाम और कॉन्ग्रेस का एक ही काम- उत्तराखंड में मुस्लिम यूनिवर्सिटी का निर्माण!”

वीडियो के अनुसार, जब पूर्व सीएम और कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने सहसपुर के रहने वाले अकील अहमद की 12 माँगों को मान लिया तो उन्होंने 2022 के विधानसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन वापस ले लिया। अहमद ने पुष्टि की कि राज्य कॉन्ग्रेस नेता देवेंद्र यादव ने भी उनकी 12 माँगों में से एक मुस्लिमों के लिए विश्वविद्यालय खोलने की उनकी माँगों का समर्थन किया।

उन्होंने सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में कहा, “मैं सहसपुर निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ने के लिए आर्येंद्र शर्मा का समर्थन करने के लिए तैयार हूँ। मुझे कोई दिक्कत नहीं है क्योंकि हरीश रावत जी और देवेंद्र यादव ने मेरी माँगों को मान लिया है। रावत जी ने उत्तराखंड में मुस्लिम छात्रों के लिए विश्वविद्यालय बनाने का वादा किया है। मुझे और कुछ नहीं चाहिए।”

मीडिया रिपोर्टों में बताया जा रहा है कि राज्य में कॉन्ग्रेस उत्तराखंड में अल्पसंख्यकों के गढ़ में कुछ सीटों पर वोटों के बँटवारे को लेकर चिंतित है, जिसमें सपा, बसपा और AIMIM जैसे प्रतिद्वंद्वियों ने मुस्लिम उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है।

गौरतलब है कि उत्तराखंड में मुस्लिम विश्वविद्यालय खोलने का समर्थन कर रही कॉन्ग्रेस ने कर्नाटक में संस्कृत विश्वविद्यालय बनाने के प्रस्ताव का विरोध किया था। 16 जनवरी को, कर्नाटक सरकार द्वारा कर्नाटक संस्कृत विश्वविद्यालय के स्थायी परिसर के लिए 100 एकड़ भूमि आवंटित किए जाने के बाद कर्नाटक कॉन्ग्रेस के प्रवक्ता नटराज गौड़ा ने राज्य सरकार के इस फैसले का विरोध करते हुए कहा था कि राज्य को इसकी ज़रूरत ही नहीं है। उन्होंने इसे ‘बेकार’ बताते हुए कहा कि कर्नाटक के बच्चों को संस्कृत पढ़ाना ‘धर्मांधता’ की साजिश का एक हिस्सा है। उन्होंने सरकार को इसके उलट पर्यटन को बढ़ावा देने की सलाह दी।

उत्तराखंड विधानसभा के 70 सदस्यों के चुनाव के लिए इस साल 14 फरवरी को उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव होंगे। नतीजे 10 मार्च को घोषित किए जाएँगे।

मातम में भी सेक्स: बिक्री के लिए ताबूत के साथ बिकनी मॉडल, भड़के लोग, बोले- अंतिम संस्कार कराने वाली रूसी कंपनी भूली दायरा

बजारवाद में संवेदनाओं के लिए नहीं, सिर्फ व्यापार की गुंजाइश है। मौत जीवन का अंतिम सत्य है, लेकिन संबंधित परिवार के लिए यह भावनात्मक रूप से दुखदाई होता है। जब मौत को भी बाजार में बेचा जाने लगे तो लोग मौत का उपहास समझते हैं। अंतिम संस्कार कराने वाली रूस की कंपनी (Russian funeral company ad) ने कुछ ऐसा ही उपहास उड़ाया है। रूस की कंपनी ने अपने विज्ञापन में ताबूत के साथ कई अर्द्धनग्न मॉडल को दिखाया है, जिसको लेकर विवाद हो गया है।

रूस की होरोनिम अंडरटेकर्स (HORONIM.RU undertakers) नामक कंपनी ने अपने विज्ञापन में बिकनी पहनी महिलाओं (Bikini models) को ताबूत के साथ दिखाया है। कंपनी द्वारा अपने इंस्टाग्राम पर डाले गए विज्ञापन वाले वीडियो में ये मॉडल ताबूत पर बैठी हुई, लेटी हुई कई तरह की आपत्तिजनक मुद्राओं में नजर आ रही हैं। इतना ही नहीं, वीडियो में बिकनी मॉडल अंतिम संस्कार में इस्तेमाल होने वाली अन्य चीजों के साथ भी पोज देती दिख रही हैं। 

रूस के मॉस्को (Moscow, Russia) स्थित इस कंपनी ने विज्ञापन के जरिए दी जाने वाली जाने वाली डिस्काउंट के बारे में बताया है। विज्ञापन में बताया है कि कंपनी हर उम्र के नागरिकों के अंतिम संस्कार के खर्चों में कटौती कर रही है। इसके साथ ही कंपनी ने अपने एड में यह भी बताया है कि कंपनी के पास प्रशिक्षित एजेंट्स हैं, जो अंतिम संस्कार की पूरी प्रक्रिया को ऑर्गेनाइज करते हैं।

कंपनी के इस वीडियो पर लोगों ने आपत्ति जाहिर की हुई है। गुस्साए लोगों ने अंतिम संस्कार करने वाली रूसी कंपनी कंपनी को सोशल मीडिया पर ट्रोल करना शुरू कर दिया है। लोगों ने पूछा कि क्या मातम में भी सेक्स बिकता है? कुछ यूजर ने कहा कि कंपनी का दिमाग खराब हो गया है तो एक यूजर ने कहा कि दुनिया पागल हो गई है और लोग अपना दायरा भूल चुके हैं। वहीं, एक अन्य यूजर ने लिखा कि ऐसी दुख भरी और निजी चीज के विज्ञापन के लिए सेमी न्यूड मॉडल की क्या जरूरत है। यह बकवास विज्ञापन है जो मृत लोगों और उनके परिवारों का मजाक बना रहा है।

सूर्य नमस्कार को कॉन्ग्रेस MLA आरिफ मसूद ने बताया इस्लाम विरोधी : HC ने फटकारा, कहा- सूर्य उपासना विशुद्ध योग

मध्य प्रदेश के भोपाल से कॉन्ग्रेस विधायक आरिफ मसूद (Arif Masood) ने आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर 1 जनवरी से 7 फरवरी तक सभी सरकारी शिक्षण संस्थानों में आयोजित होने वाले सूर्य नमस्कार (Surya Namaskar) कार्यक्रम का विरोध करते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।

हाईकोर्ट ने मंगलवार (1 फरवरी 2022) को इस मामले पर सुनवाई करते हुए कॉन्ग्रेस विधायक आरिफ मसूद की याचिका पर कहा, ”सूर्य नमस्कार विशुद्ध रूप से योग है, इसमें कहीं भी धार्मिक उपासना नहीं है। सूर्य नमस्कार वस्तुत: स्वास्थ्य और जीवन की जरूरत है।” इसके साथ ही कोर्ट ने मसूद के इस तर्क को भी खारिज कर दिया है कि इससे उनके धर्म के लोगों की धार्मिक भावनाएँ आहत होती हैं।

याचिका में मसूद ने ये भी कहा है, “सूर्य नमस्कार को सूर्य पूजा माना जाता है। सूरज की पूजा करना इस्लाम के खिलाफ है। संविधान हमें सरकारी शिक्षण संस्थानों में किसी विशेष धर्म की शिक्षा या किसी विशेष समूह की मान्यताओं के आधार पर कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति नहीं देता है।”

इस पर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि मलिमठ और जस्टिस पीके कौरव की डिवीजन बेंच ने विधायक आरिफ मसूद की याचिका पर सुनवाई करते हुए आगे कहा कि सूर्य नमस्कार करने के लिए किसी को भी बाध्य किया जा रहा है, ऐसा कहाँ लिखा गया है। ​यदि लिखा गया है कि तो दिखाएँ। इस पर याचिकाकर्ता ने कुछ दस्तावेज पेश करने के लिए अदालत से समय माँगा है। इस मामले की अगली सुनवाई 8 फरवरी को होगी

बता दें कि इससे पहले पिछले महीने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने 1 से 7 जनवरी के बीच स्कूलों में ‘सूर्य नमस्कार’ आयोजित करने के केंद्र सरकार के फैसले पर आपत्ति जताई थी। मोदी सरकार के फैसले का विरोध करते हुए बोर्ड ने कहा था, “इस्लाम सूर्य नमस्कार की इजाजत नहीं देता, क्योंकि यह सूर्य पूजा का ही रूप है।”

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने एक बयान जारी कर यह भी कहा था, “भारत एक धर्मनिरपेक्ष, बहु धार्मिक और बहु सांस्कृतिक देश है। इन्हीं सिद्धांतों पर हमारा संविधान लिखा गया है। स्कूल पाठ्यक्रमों को भी इसका ध्यान रखकर बनाया गया है, लेकिन यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि वर्तमान सरकार इस सिद्धांत से भटक रही है।”

कैटी पेरी से लेकर एंजेलिना जोली तक: हॉलीवुड के वो सितारे जिन्होंने संस्कृत में गुदवा रखें हैं टैटू, जानिए किसने क्या लिखवाया

भारतीय संस्कृति और संस्कृत की दीवानी तो पूरी दुनिया है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि हॉलीवुड के बड़े-बड़े स्टार संस्कृत के श्लोकों और शब्दों को अपने शरीर पर टैटू के रूप में गुदवाते हैं। इन शब्दों के बड़े ही गहरे अर्थ होते हैं। अमेरिका की फेमस सिंगर केटी पेरी और रिहाना से लेकर एंजिलिना जोली व लेडी गागा तक सभी ने अपने शरीर पर संस्कृत के शब्दों का टैटू बनवा रखा है।

एंजेलिना जोली

एंजेलिना जोली हॉलीवुड की फैमस एक्ट्रेस हैं। उन्होंने अपने पहले बेटे मैडॉक्स के सम्मान में अपने हाथ पर संस्कृत में टैटू बनवाया है। लेकिन अब अपने पहले पति ब्रैड पिट से जुड़ी यादों को मिटाने के लिए एंजेलिना जोली उनसे जुड़े एक टैटू को मिटाने जा रही हैं।

एंजेलिना जोली (साभार: एबीपी)

रिहाना

भारत में किसानों के आदोलन के दौरान टूलकिट का समर्थन कर सुर्खियाँ बटोरने वाली बार्बेडियन सिंगर और एक्ट्रेस रिहाना का भी संस्कृत से लगाव है। रिहाना ने अपनी कमर की दाहिनी तरफ भगवद गीता का एक श्लोक गोदवाया है। हालाँकि, ये श्लोक आधा-अधूरा होने के साथ ही गलत है।

सिंगर रिहाना (साभार: ईटी)

जेसिका अल्बा

हॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री जेसिका अल्बा भी संस्कृत से प्रभावित हैं। उन्होंने अपनी कलाई पर ‘पद्म’ गोदवा रखा है। इसका अर्थ ‘कमल’ होता है। हिंदू धर्म में कमल को माँ लक्ष्मी से जोड़ा गया है और माँ लक्ष्मी को सुख, सम्पदा और वैभव की देवी माना जाता है। जेसिका अल्बा अभिनेत्री होने के साथ ही एक सफल बिजनेस वुमन भी हैं।

जेसिका अल्बा (साभार: एबीपी)

केटी पैरी

केटी पैरी अमेरिकी की प्रसिद्ध गायिका और सॉन्ग राइटर हैं। उन्होंने अपने पति रसेल ब्रांड के प्रति अपने प्रेम को दर्शाने के लिए अपने बाएँ हाथ पर संस्कृत शब्द ‘अनुगच्छति प्रवाह’ गुदवा रखा है। इसका हिंदी अर्थ ‘समय के साथ आगे बढ़ते जाना’ है। केटी पैरी के पति रसेल ब्रांड ने भी यही टैटू अपने हाथ पर बनवा रखा है। लंदन में जन्मे रसेल हिंदुत्व में विश्वास करते हैं और हिंदू धर्म को मानते हैं।

केटी पैरी (साभार: द सिल्वर फर्न)

अलीसा मिलानो

मशहूर फैशन डिजाइनर लिन मिलानों की बेटी अलीसा मिलानों ने अपनी गर्दन पर और बाएँ हाथ ‘ॐ’ गुदवा रखा है। सनातन धर्म में ॐ का एक विशेष महत्व है।

अलीसा मिलानो (साभार: टीओआई)

माइली साइरस

अमेरिकन एक्ट्रेस, कम्पोजर और सिंगर माइली साइरस ने भी अपनी कलाई पर ॐ का टैटू बनवा रखा है। इसके अलावा उन्होंने अपने दाहिने हाथ पर ‘कर्म’ टैटू बनवा रखा है।

माइली साइरस (साभार: एबीपी)

वेनेसा हडजन्स

म्यूजिकल स्टार वेनेसा हडजन्स ने भी अपने हाथ में ॐ लिखवाया है। हालाँकि, उन्होंने कुछ इस तरह से ॐ लिखवाया है कि वो नमस्कार करेंगी तो ही वो पूरा होगा।

वेनेसा हडजन्स (साभार: एबीपी)

एडम लेविन

इसके अलावा हॉलीवुड स्टार सिंगर एडम लेविन की टैटू के प्रति दीवानगी इस कदर है कि उन्होंने अपने पूरे शरीर पर टैटू गुदवा रखे हैं। एडम ने अपने सीने पर संस्कृत शब्द ‘तपस’ लिखवा रखा है।

एडम लेविन (साभार: एबीपी)

लेडी गागा

फेमस अमेरिकन पॉप स्टार लेडी गागा भी संस्कृत में रुचि रखती हैं। एक बार उन्होंने संस्कृत में ट्वीट किया था। ‘लोक: समस्त: सुखिनों भवन्तु’ इसका हिंदीं अर्थ है ‘सभी लोग सुखी हों।’ लेडी गागा वो अमेरिकन सिंगर हैं, जिन्होंनों कई ग्रेमी और ऑस्कर अवॉर्ड जीते हैं।

लेडी गागा (साभार: ईटी)

मैडोना

इसी तरह से पॉप स्टार मैडोना ने भी अपने एक गाने ‘रे ऑफ लाइट’ में संस्कृत की एक कविता का इस्तेमाल किया था। उन्होंने आदि शंकराचार्य के श्लोकों को शामिल किया था।

मैडोना (साभार: हार्पर्स बाजार)

ब्रिटनी स्नॉ

हॉलीवुड एक्ट्रेस और प्रोड्यूसर ब्रिटनी स्नॉ ने भी अपने पैर में ‘अभय’ शब्द लिखवा रखा है, जिसका शाब्दिक अर्थ है जिसे कोई भय न हो।

ब्रिटनी स्नॉ (साभार: एबीपी)

‘यूरोप की लाइब्रेरी की एक अलमारी पूरे भारतीय साहित्य से सर्वश्रेष्ठ’: मैकाले ने संस्कृत को बताया था असभ्य और दरिद्र, विज्ञान से दूर

आपने थोमस बैबिंगटन मैकाले (Thomas Babington Macaulay) का नाम सुना है? उसे ब्रिटेन में ‘लॉर्ड मैकाले’ भी कहते हैं। अक्टूबर 1800 में जन्मा यही वो व्यक्ति है, जिसने भारतीय शिक्षा पद्धति को तबाह करने के लिए यहाँ शिक्षा के पश्चिमी तौर-तरीके अपनाने के लिए लोगों को मजबूर किया। वो एक ब्रिटिश इतिहासकार और राजनेता था, जिसने अपनी थ्योरी में कहा कि ब्रिटेन सभ्यता के उच्चतम स्तर को दर्शाता है। भारत को लेकर उसके अंदर खासी हीन भावना भरी हुई थी। उसने कई सनातन धार्मिक ग्रंथों के उलटे-पुलटे अंग्रेजी अनुवाद भी किए।

2 फरवरी, 1835 को वो ‘Macaulay’s Minute’ लेकर आया था, जिसमें उसने भारत के प्रति घृणा भरे तर्क देकर ये साबित करने की कोशिश की थी कि अंग्रेजी शिक्षा ही शिक्षा है और दुनिया भर में किसी भी व्यक्ति को यही शिक्षा कुलीन बना सकती है, प्रतिष्ठा दिला सकती है। भारत में कर्म आधारित शिक्षा, गुरुकुलों और गुरु-शिष्य परंपरा को मिटाने के लिए उसने दिन-रात एक के दिए। आइए, सबसे पहले हम आपको बताते हैं कि आखिर उस ‘Macaulay’s Minute’ में था क्या।

तत्कालीन ब्रिटिश सरकार में ‘काउंसिल ऑफ इंडिया’ के सदस्य होने के नाते उसने अपने द्वारा पेश किए गए इस प्रस्ताव में कहा था कि एक अच्छे यूरोपियन पुस्तकालय की एक अलमारी पूरे भारत और अरब के साहित्य से ज्यादा समृद्ध है। उसने इस बात पर आपत्ति जताई थी कि आखिर किसी भारतीय को ‘शिक्षित’ कैसे कहा जा सकता है, जब तक वो मिल्टन की कविताओं, लोकी के मेटाफिजिक्स और न्यूटन के फिजिक्स से वाकिफ न होकर अपनी ‘पवित्र पुस्तकों’ में केवल कुश घास का उपयोग और देवताओं को भोजन चढ़ाना ही सीखा हो।

यहाँ हम आपको मैकाले के उस मिनट के कुछ बिंदुओं के बारे में बता रहे हैं, जिसमें उसने भारत के प्रति अपनी घृणा का प्रदर्शन किया है। उसने अपने दूसरे ही पॉइंट में कहा था कि विज्ञान सहित अन्य भाषाओं की शिक्षा भी अंग्रेजी में ही दी जानी चाहिए, जो कि एक समृद्ध भाषा है। तीसरे पॉइंट में उसने कहा था कि भारत में ‘साहित्य को समृद्ध करने’ और ब्रिटिश शासित क्षेत्रों के लोगों का ‘विज्ञान से परिचय कराना और इससे सम्बंधित ज्ञान देना’ ही इस बिल का उद्देश्य है।

उसने कहा था कि अरबी और संस्कृत में शिक्षा देने का अर्थ होगा और नीचे जाना। उसने कहा था कि इन दोनों भाषाओं में शिक्षा देने का अर्थ होगा कि फिर इसका कोई उपयोग नहीं रह जाएगा। उसने अपने इस मिनट में कई बार अरबी और संस्कृत भाषाओं के लिए घृणास्पद शब्दों का प्रयोग किया है। उसने कहा था कि भारत की मातृभाषाओं में लेशमात्र भी विज्ञान और साहित्य सम्बंधित ज्ञान नहीं है, साथ ही ये इतनी घटिया असभ्य हैं कि अगर उन्हें समृद्ध बनाने की कोशिश की जाए तब भी अनुवाद लगभग असंभव हो जाएगा।

उसने कहा था कि बहस इस ओर केंद्रित रहनी चाहिए कि आखिर किस भाषा में भारतीयों को शिक्षा देना ठीक रहेगा – अरबी और संस्कृत, या फिर अंग्रेजी। उसने ये भी कबूल किया था कि उसे संस्कृत और अरबी का कोई ज्ञान नहीं है, लेकिन सभी ये मानते हैं कि अंग्रेजी भाषा का साहित्य सबसे ज्यादा समृद्ध है। उसने कहा था कि पूर्व के लोग साहित्य के मामले में पद्य में अभ्यस्त रहे हैं, लेकिन इनकी अंग्रेजी पोएट्री से कोई तुलना नहीं है। उसका कहना था कि जहाँ संस्कृत साहित्य सिर्फ कल्पनाओं पर आधारित है, वहीं अंग्रेजी भाषा में वास्तविकता और सिंद्धान्तों को प्रमुखता दी जाती है।

इसी आधार पर उसने यूरोपीय भाषाओं को सर्वोत्तम माना था। उसने कहा था कि इस मामले में कोई दूसरा पक्ष बनता ही नहीं है, क्योंकि हमें ऐसे लोगों को ‘शिक्षित’ करना है जिन्हें उनकी मातृभाषा में शिक्षा नहीं दी जा सकती और उन्हें विदेशी भाषाओं का ज्ञान देना ही पड़ेगा। उसने कहा था कि अंग्रेजी भाषा की श्रेष्ठता के बारे में कुछ बताने की ही ज़रूरत नहीं है। उसने मानना था कि शासन व्यवस्था, न्याय, नैतिकता और मानव सिद्धांतों को लेकर भारत में कभी कुछ रहा ही नहीं।

उसने कहा था कि भारत में सत्ता की भाषा अंग्रेजी है और सरकारी पदों पर बैठे उच्च स्तर के नेता/अधिकारी इस भाषा का प्रयोग करते हैं। उसने कहा था कि अब ये भाषा व्यापार की भी बन जाएगी, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका में अपना साम्राज्य विस्तार कर रहीं दो बड़ी यूरोपियन ताकतों की भी भाषा यही है और भारत के साथ उनका कारोबार महत्वपूर्ण होता जा रहा है। उसने खुद ही मान लिया था कि किसी को कुछ सिखाने और सभ्य बनाने के लिए अंग्रेजी का ही सहारा लेना पड़ेगा।

उसने भारतीय धर्मग्रंथों का भी मजाक बनाते हुए कहा था कि पूरी दुनिया में ये स्वीकार्यता है कि संस्कृत में ऐसी कोई पुस्तक है ही नहीं, जिसकी तुलना किसी भी अंग्रेजी पुस्तक से की जा सके। इसके लिए उसने 15वीं शताब्दी के अंत और 16वीं शताब्दी की शुरुआत के समय की बात करते हुए बताया था कि तब अधिकतर पढ़ने वाली चीजें ग्रीक और रोमन में ही थीं, ऐसे में अगर अंग्रेज विद्वानों ने थ्यूसीदाइदीज, प्लेटो, सिसरो और टैसिटस को नज़रअंदाज़ करते तो क्या हम उस स्थिति में पहुँचते जहाँ हम आज हैं?

बता दें कि थ्यूसीदाइदीज एक एथेनियन इतिहासकार था, वहीं प्लेटो भी ग्रीस का एथेनियन दार्शनिक था। सिसरो की बात करें तो वो रोमन दार्शनिक व प्रशासक था, वहीं टैसिटस रोमन इतिहासकार था। उसने दावा किया था कि जब अंग्रेजों के इतिहास का साहित्य समृद्ध नहीं था, तब से संस्कृत भाषा के साहित्य की तुलना की जाए तो भी यूरोपियन ही सर्वश्रेष्ठ होगा। उसने रूस का उदाहरण भी देते हुए कहा था कि वो पहले असभ्य लोगों का देश था, लेकिन अब सभ्य है।

मैकाले का मानना था कि पश्चिमी यूरोप की भाषाओं ने ही रूस को समृद्ध बनाया है और हिन्दुओं के मामले में भी यही होगा। उसने अपने देश को उच्च-स्तर के बुद्धिजीवियों का देश बताते हुए कहा था कि जब कोई उच्च-स्तर की सभ्यता किसी ‘अज्ञानी देश’ का शासन अपने हाथ में लेती है तो शिक्षकों को पढ़ाने के लिए उसी देश की भाषा का उपयोग करना होगा। उसने कहा था कि हमें इन लोगों पर अरबी और संस्कृत ‘थोपने’ की बजाए उन्हें ‘श्रेष्ठ’ बनाने के लिए अंग्रेजी का गया कराना होगा।

शायद मैकाले ने हो सकता है तब कालिदास का नाम न सुना हो, जिनकी संस्कृत रचनाओं का आज दुनिया की कई भाषाओं में अनुवाद हो चुके हैं। उसने आर्यभट्ट और ब्रह्मगुप्त जैसे विद्वान गणितज्ञों का नाम न सुना हो, जिन्होंने हजारों वर्ष पूर्व गणित के कथन सिद्धांतों को खोज निकाला था। उसने मनुस्मृति के बारे में न सुना हो, जिसमें हजारों वर्ष पूर्व शासन व्यवस्था की सारी बारीकियाँ समझाई गई थीं। इसके अलावा अर्थशास्त्र के बारे में उसने न सुना होगा, जिसमें हजारों वर्ष पूर्व शासन-सत्ता और टैक्स से लेकर सत्ताधीशों और प्रजा के कर्तव्यों और न्याय की बातें की गई हैं।

निकाह के कुछ दिन बाद ही पाकिस्तानी जफर ने 19 वर्षीय पत्नी को मार डाला, सबूत मिटाने के एसिड भरे टब में रखा शव: गिरफ्तार

ऑस्ट्रेलिया में मेराज जफर नाम के एक 20 वर्षीय मुस्लिम ने अपनी 19 वर्षीय बीवी की हत्या कर दी और उसके शव को एसिड भरे बाथ टब में रख दिया। रविवार (30 जनवरी) को पश्चिमी सिडनी के उत्तरी पररामट्टा अपार्टमेंट में एसिड से भरे बाथटब में अर्निमा हयात मृत मिली थी। इसके बाद हत्या के आरोप में जफर को गिरफ्तार कर लिया गया है। वहीं, मेराज का एक पुराना मैसेज सामने आया है, जिसमें वह एक पॉकास्टर से अपने जीवन के बारे में बात करने के लिए आमंत्रित करने की विनती कर रहा है।

मेडिकल की पढ़ाई कर रही हयात हाल ही में ऑस्ट्रेलिया आई थी और कुछ सप्ताह पहले ही जफर से शादी की थी। हयात के परिजन अपनी बेटी को लेकर लगातार चिंतित थे। कई दिनों से उसके बारे में जानकारी नहीं मिलने पर परिजनों ने इसकी सूचना पुलिस को दी थी। पुलिस जब उसके फ्लैट में पहुँची तो वहाँ जफर नहीं मिला, लेकिन हयात का मृत शरीर एसिड से भरे एक बाथ टब में मिला था।

इस घटना के बाद पुलिस ने सोमवार (31 जनवरी) को जफर की तस्वीर जारी कर लोगों से उसके बारे में सूचना देने को कहा था। इसके बाद जफर ने खुद को पुलिस के हवाले कर दिया और कोर्ट ने भी मंगलवार को उसे जमानत देने से मना कर दिया।

पुलिस का कहना है कि हयात का शव मिलने से 24 घंटे पहले उसकी हत्या कर दी गई थी। पुलिस के अनुसार, उसकी हत्या शनिवार को दोपहर से लेकर शाम 5 बजे के बीच की गई थी। जफर ने अपने अपने दो बेटरूम के फ्लैट में हत्या के बाद हयात के शव को गलाने के लिए एसिड में डाल दिया था, ताकि उसके अवशेषों को खत्म किया जा सके। पुलिस का कहना है कि मामले की गहराई से जाँच चल रही है। इसके बाद पता चल पाएगा कि जफर ने हयात की हत्या क्यों की।

हयात के पिता अबू हयात और मां महफूजा अख्तर ने मंगलवार बताया था कि छह महीने पहले ही जफर के साथ रहने के लिए उसकी बेटी ने घर छोड़ दिया था। तब से उसके बारे में कुछ अता-पता नहीं था। वे लगातार अपनी अपनी बेटी से संपर्क करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उससे संपर्क नहीं हो पा रहा था।

जफर के पड़ोसियों का कहना है कि उसने बताया था कि वह पाकिस्तान का रहने वाला है और उसकी अंग्रेजी बहुत अच्छी नहीं है। वहीं, हयात बहुत अच्छी महिला और वह हमेशा खुश रहती थी। पड़ोसियों ने बताया कि वह अक्सर म्यूजिक बताया करती थी।

10000 साल में 1 गलती की गुंजाइश: रेल यात्रियों को मोदी सरकार देगी ‘कवच’, जानिए सब कुछ

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साल 2022 का बजट पेश करते हुए रेलवे के लिए कई अहम घोषणाएँ कीं। उन्होंने रेल मंत्रालय को 140367.13 करोड़ रुपए आवंटित करते हुए अगले तीन साल में 400 नई ‘वंदे भारत’ ट्रेनों को तैयार करने का ऐलान किया। साथ ही साथ पीएम गतिशक्ति योजना के तहत आने वाले वर्षों में 100 पीएम गति शक्ति कार्गो टर्मिनल तैयार किए जाने की बात की। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में ‘एक स्टेशन और एक उत्पाद’ को विकसित किया जाएगा। इसके अलावा जो सबसे महत्वपूर्ण घोषणा इस बजट में हुई वो यात्रियों के रेल सफर को सुरक्षित बनाने वाली तकनीक ‘कवच’ (KAWACH) को लेकर है।

पूर्वी रेलवे के जनरल मैनेजर अरुण अरोड़ा ने इस बजट को गेम चेंजिंग और ग्रोथ ओरिएंटेड बजट बताया। उन्होंने जानकारी दी कि रेलवे सुरक्षा के लिए विश्व स्तरीय तकनीक कवच (KAWACH) के तहत 2 हजार किलोमीटर के रेल नेटवर्क को लाया जाएगा। पीएचडी चैम्‍बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्‍ट्री (इंडस्ट्रियल अफेयर कमेटी) के चेयरमैन संदीप अग्रवाल ने बताया कि इस कवच से ट्रेन की गति में सुधार आने के साथ-साथ दुर्घटनाओं को भी रोका जा सकेगा।

क्या है रेलवे का ‘कवच (KAWACH) ‘ ?

बता दें कि सरकार ने कवच तकनीक के रूप में जो अपना प्लॉन बताया है उसके तहत 2 हजार किलोमीटर के रेलवे नेटवर्क को तैयार किया जाएगा। इससे यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा दोनों बेहतर होगी। साथ ही ट्रेन की गति में सुधार आएगा और दुर्घटनाएँ कंट्रोल की जा सकेंगी। जानकारी के मुताबिक कवच एक एंटी कोलिजन डिवाइस नेटवर्क है जो कि रेडियो कम्युनिकेशन, माइक्रोप्रोसेसर, ग्लोबर पोजिशनिंग सिस्टम तकनीक पर आधारित है

इस तकनीक की मदद से उम्मीद लगाई जा रही है कि रेलवे ‘जीरो एक्सीडेंट’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल होगा। इसके तहत जब दो आने वाली ट्रेनों पर इसका उपयोग होगा तो ये तकनीक उन्हें एक दूसरे का आँकलन करने में और टकराव के जोखिम को कम करने में ऑटोमेटिक ब्रेकिंग एक्शन शुरू कर देगी। इससे ट्रेनें टकराने से बच सकेंगीं। रेलवे मंत्री अश्विन वैष्णव ने इस तकनीक के संबंध में बताया कि ये SIL4 प्रमाणित है जिसका अर्थ है कि 10000 सालों में कोई एक गलती की संभावना है।

बता दें कि इससे पहले केंद्र सरकार ने साल 2017 में m-कवच ऐप को लॉन्च किया था। यह ऐप हैकर्स के जरिए होने वाले सायबर हमलों से बचाने का काम करती है। इसे भारत सरकार के सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्‍ड सिस्‍टम ने विकसित किया है। सरल भाषा में इसे मोबाइल सुरक्षा से जुड़ी ऐप कहा जा सकता है जिससे आप अनचाहे कॉल को ब्लॉक करने में मदद कर सकते हैं और थर्ड पार्टी को मोबाइल डेटा इस्तेमाल करने से रोक सकते हैं।

पाकिस्तान के दावत-ए-इस्लामी के लिए अहमदाबाद में 2000 से अधिक दान पेटियाँ, मुस्लिम युवाओं के ब्रेनवॉश के लिए होता है पैसों का इस्तेमाल: रिपोर्ट

पाकिस्तान के इस्लामिक संगठन दावत-ए-इस्लामी (DIE) को लेकर एक सनसनीखेज खुलासा हुआ है। ताजा जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान के इस इस्लामिक संगठन को दान करने के लिए अहमदाबाद में 2000 से अधिक दान पेटियाँ मिली हैं। गुजरात स्थित स्थानीय दैनिक संदेश में भी यह जानकारी दी गई है। बता दें कि यह वही संगठन है जो आतंकी गतिविधियों को उकसाने के लिए जाना जाता है। 

संदेश की रिपोर्ट के अनुसार, दान पेटियों में एकत्र किए गए धन को पाकिस्तान भेजा जाता है, फिर वहाँ से मुस्लिमों को इस्लामी शिक्षा प्रदान करने की आड़ में दुबई के रास्ते भारत वापस भेज दिया जाता है, लेकिन इसका इस्तेमाल मुुस्लिमों का ब्रेनवॉश करने के लिए किया जाता है। बताया जाता है कि मौलाना उस्मानी ही दावत-ए-इस्लामी का केंद्र चलाता है। मौलाना उस्मानी का नाम किशन भरवाड हत्याकांड में आरोपित के रूप में सामने आया है। आरोपित मौलाना उस्मानी ग़ज़वा-ए-हिंद के उस लक्ष्य की ओर काम कर रहा है, जो भारत को इस्लामिक स्टेट बनाने पर जोर देता है।

इस्लामिक संगठन पाकिस्तान के कराची शहर के बाहर स्थित है और इसकी शाखाएँ दुनिया भर में हैं। इसकी स्थापना 1981 में मौलाना अबू बिलाल मुहम्मद इलियास अटारी द्वारा की गई थी। इसे सूफी सिद्धांतों से प्रेरित एक पुनरुत्थानवादी संगठन के रूप में शुरू किया गया था। इसके अलावा, यह तब से एक चरमपंथी इस्लामी संगठन के रूप में विकसित हो गया है। जिसकी आतंकियों से खुले तौर पर संबंध हैं।

हाल ही में 2020 में, पेरिस में शार्ली हेब्दो हमले में शामिल एक आतंकवादी ने DIE के संस्थापक इलियास अटारी को अपना मार्गदर्शक बताया। मोहम्मद अशरफ नाम का एक पाकिस्तानी आतंकवादी भी इस संगठन से जुड़ा पाया गया था। उसे अक्टूबर 2021 में दिल्ली में गिरफ्तार किया गया था।

आतंकवाद निरोधी दस्ते की टीम ने किशन भरवाड मामले के एक अन्य आरोपित मौलवी अयूब के साथ जमालपुर का दौरा किया था, जिसने कथित तौर पर हत्यारों को बंदूक मुहैया कराई थी। एटीएस की टीम ने जमालपुर में होटल रियाज के पास उसके घर की भी तलाशी ली। उन्होंने मौलवी अय्यूब की हिंदी और गुजराती में लिखी किताब ‘जज्बा-ए-शहादत’ जब्त की है। उनके पास से एक एयरगन भी जब्त की गई, जिस पर वह शूटिंग का प्रैक्टिस करता था।

इसके अलावा आरोपित शब्बीर उर्फ ​​सबा चोपड़ा, इम्तियाज पठान, मौलाना अय्यूब जवरावाला, अजीम समा और कमर गनी उस्मानी और अन्य पर यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम) और GUJCTOC (गुजरात आतंकवाद और असंगठित अपराध नियंत्रण) के तहत आरोप लगाए गए हैं।

गौरतलब है कि 25 जनवरी, 2022 को कथित ईशनिंदा को लेकर बाइक सवार युवक किशन भरवाड की दो लोगों ने गोली मारकर हत्या कर दी। दरअसल, किशन ने एक वीडियो शेयर किया था जिसमें पैगंबर मुहम्मद की तस्वीर दिखाई दे रही थी। मुस्लिमों का दृढ़ विश्वास है कि पैगम्बर मुहम्मद का तस्वीर दिखाना या चित्र बनाना वर्जित है। इस्लामवादियों का मानना ​​​​है कि इस तरह का दृश्य दिखाना ईशनिंदा है और पैगम्बर मुहम्मद का ‘अपमान’ है, और ईशनिंदा करने वाले का सिर कलम करना उचित सजा है। वहीं आगे मामले की जाँच करने पर पता चला कि यह हत्या एक बड़ी साजिश का हिस्सा थी।