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तालिबानी फरमान के बाद मर्द के कपड़ों में काबुल की सड़कों पर घूम रहीं अफगानी औरतें, घर से अकेले निकलने पर है पाबंदी

अफगानिस्तान (Afghanistan) पर काबिज होने के बाद तालिबान (Taliban) ने औरतों पर कई तरह की पाबंदियाँ थोपी है। वे घर से अकेले नहीं निकल सकतीं। बाहर जाना जरूरी हो तो किसी मर्द रिश्तेदार को साथ रखना होगा। वाहनों में केवल वहीं औरत बैठ सकती हैं, जिसने हिजाब पहन रखा हो। यहाँ तक की महिला टीवी पत्रकारों को भी हिजाब पहनकर ही रिपोर्टिंग करने का फरमान है।

इन फरमानों ने उनकी औरतों की जिंदगी और दुश्वार कर दी है जो अकेली और युवा हैं। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की वेबसाइट द नेशनल (The National) ने एक ऐसी ही औरत की कहानी प्रकाशित की है। तालिबान के डर की वजह से उसकी असली पहचान का खुलासा नहीं किया गया है। रिपोर्ट में उसे राबिया बाल्कि (Rabia Balkhi)  नाम दिया गया है। राफिया अफगानिस्तान की एक मशहूर कवियत्री रहीं हैं।

रिपोर्ट के अनुसार 29 साल की राबिया अफगानी मर्दों की तरह ढीला-ढाला कुर्ता-पायजामा पहनकर काबुल की सड़कों पर निकलती हैं। चेहरे पर मास्क लगाकर रखती हैं। सड़क पर चलते वक्त अपनी नजर झुकाए रखती हैं ताकि किसी से आँख न मिले।

राबिया तलाकशुदा हैं। एक बच्ची की अम्मी हैं। काबुल में छिपकर रहती हैं। तालिबान के कब्जे से पहले वह काबुल में नहीं रहती थीं। एक एनजीओ के दफ्तर में काम करती थी। उन्होंने द नेशनल को बताया, “मुझे वे धमका रहे थे। दोबारा निकाह करने के लिए कह रहे थे। तालिबान के डर से मैं काबुल आ गई। किसी तरह जिंदगी गुजार रही थी। लेकिन मेरी मुश्किल तब बढ़ गई जब दिसंबर में तालिबान ने फरमान निकाला कि कोई भी औरत बिना महरम (मर्द अभिभावक) के बिना घर से निकल नहीं सकती। जग​ह-जगह​ गाड़ियों की जाँच की जाने लगी। मैं तलाकशुदा हूँ। कोई मेहरम नहीं है। आखिर मैं क्या करती?”

राबिया के अनुसार उन्होंने इसका विरोध करने का फैसला किया। मर्दों की तरह कपड़े पहने। एक सहेली ने फोटो क्लिक की और उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। पोस्ट में बताया कि वह महिला हैं और उनका कोई महरम नहीं हैं। राबिया के अनुसार इसके बाद कई औरतें उनका साथ देने आगे आईं। कुछ औरतों ने काबुल में तालिबान के खिलाफ प्रदर्शन किया, जिसमें राबिया भी शामिल हुईं। इन औरतों ने मर्दों की तरह ही कपड़े पहन रखे थे। कुछ ने उन्हें ऑनलाइन सपोर्ट भी दिया।

राबिया ने बताया कि इस प्रदर्शन के बाद तालिबान ने उन्हें पहचान लिया। खोजते हुए घर तक पहुँच गए। गिरफ्तार किया। थप्पड़ मारे। दूसरी प्रदर्शनकारी औरतों के बारे में पूछा। तालिबान के चंगुल से छूटने के बाद से राबिया अपनी बेटी को लेकर छिपती फिर रही हैं। वह कहती है, “आज मेरे पास कुछ नहीं है। न घर और न नौकरी। मुल्क भी अब मेरा कहाँ रहा? मैं काबुल की सड़कों पर मर्दों के कपड़े पहनकर निकलती हूँ। किसी से भी नजर मिलाने से बचती हूँ। चेहरे पर मास्क रहता है।”

बताया जाता है कि तालिबान प्रदर्शन में शामिल हुई अन्य औरतों की भी तलाश कर रहा है। एक ऐसी ही औरत जिसकी पहचान रिपोर्ट में लिली हमीदी बताया गया है ने कहा, “ये फरमान औरतों के लिए बेहद मुश्किल हैं। खासकर उनके लिए जिनके पास महरम नहीं हैं। हम तालिबान को बताना चाहते हैं कि वे प्रतिबंध लगाकर हमारे अधिकार नहीं छीन सकते।”

गौरतलब है कि अगस्त 2021 में तालिबान के अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज होने के बाद से ही वहॉं से लगातार औरतों के दमन की खबरें आ रही हैं। कई ऐसे मामले भी सामने आए हैं जब औरतों को उनके घरों से उठाकर तालिबा​नियों के साथ निकाह को मजबूर किया गया। अफगान पुलिस में रही एक महिला जो जान बचाकर किसी तरह भारत आने में कामयाब रहीं थी ने बताया था, “वे (तालिबान) शवों का भी बलात्कार करते हैं। उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह व्यक्ति जिंदा है या नहीं… क्या आप इसकी कल्पना कर सकते हैं?”

‘ब्लैक में टिकट काटने वाले ने काटी CM योगी की Video’ : AAP नेता संजय सिंह की हरकत पर भड़के लोग, दिखाई- ‘आपिया औकात’

आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने सोशल मीडिया पर उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री को राजपूत जाति का नेता दिखाने के लिए एक इंटरव्यू की छोटी क्लिप काटकर शेयर की है। इस वीडियो में सीएम योगी बताते नजर आ रहे हैं कि जब कोई उन्हें राजपूतों की पॉलिटिक्स करने वाला कहता है तो उन्हें कोई दुख नहीं होता। इस क्लिप के साथ संजय सिंह ने लिखा, “ये देखिए आदित्यनाथ जी ने साफ़ कर दिया की कोई भी इनको कहे कि ‘ये सिर्फ़ क्षत्रियों के नेता हैं तो इनको बुरा नही लगता’ आपको तो 24 करोड़ लोगों का नेता होना चाहिए आदित्यनाथ जी। क्या सबका साथ सबका विकास का नारा दिखावा मात्र है?”

अब जिस क्लिप पर संजय सिंह ने योगी आदित्यनाथ से सवाल किया है कि क्या ‘सबका साथ सबका विकास’ का नारा दिखावा मात्र है उसी इंटरव्यू के उसी स्लॉट की थोड़ी लंबी वीडियो शेयर करते हुए भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने बताया कि कैसे संजय सिंह झूठ फैला रहे हैं। अपने ट्वीट में बग्गा ने लिखा , “संजय माना तू सिनेमा के बाहर टिकट काटता था लेकिन वीडियो क्यों काट दिया।”

इस वीडियो में योगी आदित्यनाथ को साफ कहते सुना जा सकता है कि जब लोग उन्हें राजपूतों की पॉलिटिक्स करने वाला कहते हैं तो उन्हें कोई दुख नहीं होता। वह आगे बोलते हैं, “क्षत्रिय जाति में पैदा होना कोई पाप थोड़े ही है। इस देश की ऐसी जाति है जिसमें भगवान ने जन्म लिया है। बार-बार जन्म लिया है। अपनी जाति पर स्वाभिमान तो हर जाति के लोगों को होना चाहिए।”

अपनी बात आगे जारी रखते हुए उन्होंने कहा, “मैंने प्रदेश के अंदर बिना भेदभाव के बिना चेहरा देखे हर जाति, हर मत, हर मजहब के लोगों के हितों के लिए हमारी सरकार ने काम किया है। मैं मानता हूँ कि जाति-जाति की बात वे लोग करते हैं जो जब अवसर मिलता है तो सिर्फ अपने परिवार की बातें करते हैं। वे लोग जाति के लिए भी कार्य नहीं करते। हमने अगर 43 लाख लोगों के लिए आवास बनाए तो इसमें क्षत्रिए तो 1 फीसद भी नहीं हैं। ये किसी गरीब, दलित, अल्पसंख्यक, पिछड़े के ही बने हैं। 2 करोड़ 61 लाख शौचालय भी इन्हीं लोगों के बने हैं। 15 करोड़ों को खाद्यान्न मिले हैं वो किसी का चेहरा जाति देखकर नहीं दिया गया। सरकार ने सबका साथ सबका विकास के भाव के साथ कार्य किया है, उसी के साथ कार्यक्रम को आगे बढ़ाया जाएगा।”

बता दें कि संजय सिंह के झूठ से पर्दा उठने के बाद अब सोशल मीडिया पर लोग आम आदमी पार्टी को भला-बुरा बोल रहे हैं। कोई उन्हें झूठ का सबसे बड़ा सिपाही बता रहा है और जो लोग संजय सिंह के फैलाए झूठ में आ रहे हैं उन्हें पूरी वीडियो और रिप्लाई देखने का सुझाव दे रहे हैं। एक यूजर संजय सिंह को टिकट ब्लैकर कहते हुए भारतीयों को दिखाता है कि कैसे खुलेआम एक वीडियो को एडिट करते शेयर किया जा रहा है ताकि भारत जाति में बँटे। वहीं एक यूजर इस हरकत को आपिया संजय सिंह औकात बताते हुए लिखते हैं टिकट ब्लैक से वीडियो क्रॉप तक।

ट्रांसजेंडर तैराक थॉमस के पास पुरुष जननांग, लॉकर रूम में वह ढँकती नहीं’: पेन्सिलवेनिया टीम की महिला तैराकों ने कहा- लॉकर रूम में हम असहज

अमेरिका के पेन्सिलवेनिया यूनिवर्सिटी के महिला तैराकों का कहना है कि उनकी टीममेट ट्रांसजेंडर महिला तैराक लीया थॉमस के पास पुरुष जननांग है और इसे वह ढँकती नहीं हैं। उनका यह भी आरोप है कि वह अभी भी महिलाओं के प्रति आकर्षित होती हैं और उनकी एक गर्लफ्रेंड भी है। इसलिए उनके साथ लॉकर रूम शेयर करने में वे असहज महसूस करती हैं।

डेली मेल के साथ बातचीत में एक महिला तैराक ने कहा कि लीया जब खुद को तौलिया में रखती है, तब उसका नग्न शरीर का अधिकांश हिस्सा दिखता है और कई लोगों ने उसके पुरुष जननांग को देखा है। महिला तैराकों का कहना है कि इसकी शिकायत उन्होंने टीम के कोच से की, लेकिन उन्होंने इस पर ध्यान नहीं दिया।

महिला तैराक ने आगे बताया कि लीया को इस बात का फर्क नहीं पड़ता है कि उसके कारण दूसरों पर क्या प्रभाव पड़ता है। यह वास्तव में परेशान करने वाला है। थॉमस के साथ 35 महिला तैराक अपना लॉकर रूम शेयर करने के लिए विवश हैं। टीममेट का यह भी कहना है कि थॉमस महिलाओं के अटेंशन को एन्जॉय करती हैं।

22 वर्षीय थॉमस ने इस मामले पर सार्वजनिक रूप से बात नहीं की है। माना जा रहा है कि ‘स्पोर्ट्स इलस्ट्रेटेड’ के साथ एक जैविक पुरुष के रूप में ट्रांसजेंडर होने की अपनी कहानी साझा करने के लिए उन्होंने एक समझौता किया है।

बता दें कि थॉमस पहले तीन साल तक तक पुरुष तैराकी टीम की हिस्सा थीं, लेकिन बाद में उन्हें महिला तैराकी में शामिल कर लिया गया। महिला तैराकी टीम में आने के बाद उन्होंने टीम के कई रिकॉर्ड को तोड़ा। कहा जा रहा है कि इसके कारण भी उन पर आरोप लगाए जा रहे हैं।

ISIS का काम कर रहे 8 के खिलाफ NIA की चार्जशीट, कॉन्ग्रेस के पूर्व विधायक की बहू भी शामिल: आतंकियों की भर्ती में लगे थे

खूँखार आतंकवादी संगठन ISIS में भर्ती के लिए साजिश रचने के मामले में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने चार्जशीट दाखिल कर दिया है। इसमें कर्नाटक से कॉन्ग्रेस के टिकट पर विधायक रहे लेखक बीएम इदिनाबा के परिवार के लोगों समेत 8 लोगों के नाम शामिल किए गए हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसमें दीप्ति मारला और अम्मार अब्दुल रहमान के नाम भी हैं। दीप्ति मारला के पति अनस, अब्दुल रहमान बीएम बाशा के बेटे हैं। वहीं बीएम बाशा के अब्बू इदिनाबा कॉन्ग्रेस के पूर्व विधायक थे। इसके अलावा अम्मार रहमान अनस का भाई है। बता दें कि 2009 में इदिनाबा की मौत हो गई थी।

इन सब के अलावा चार्जशीट में मोहम्मद वकार लोन, मिजा सिद्दीकी, शिफा हारिस, ओबैद हामिद मट्टा, मदेश शंकर और मुजमिल हसन भट को शामिल किया गया है। इस मामले में NIA ने कहा है, “जाँच से पता चला है कि चार्ज किए गए सभी आठ आरोपित ISIS से जुड़े हैं और ISIS के कंट्रोल्ड वाले एरिया में हिजरत करने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए कट्टरपंथी, भर्ती, आतंकी फंडों को मैनेज करने और अपनी तरह की ही विचारधारा वाले भोले-भाले मुस्लिम युवाओं को ISIS में शामिल होने के लिए तैयार करने में शामिल थे।”

जाँच एजेंसी को इस केस की जाँच के दौरान पता चला कि जब ईराक और सीरिया में ISIS की जमीन दरकी है उसके बाद दीप्ति मारला उर्फ मरियम और मोहम्मद अमीन ने जनवरी और मार्च 2020 में हिजरा (धार्मिक प्रवास), आतंकवादी घटनाओं से जुड़ने और ISIS की गतिविधियों का समर्थन करने के लिए कश्मीर का दौरा किया था।

NIA ने पूर्व कॉन्ग्रेस विधायक के परिवार के सदस्य को किया था गिरफ्तार

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने सोमवार (3 जनवरी 2022) को कर्नाटक में छापेमारी कर दीप्ति उर्फ मरियम को गिरफ्तार किया था। वह बीएम बाशा की बहू और अब्दुल रहमान की बीवी है। बाशा कॉन्ग्रेस से विधायक रहे प्रसिद्ध कन्नड़ लेखक बीएम इदिनाबा के बेटे हैं। मरियम को आतंकवादी संगठन ISIS से संबंधों के आरोप में हिरासत में लिया गया था। वह कर्नाटक के मेंगलुरु के पास मस्तीकट्टे गाँव में रहती थी। मरियम पहले हिंदू थी, लेकिन इस्लाम के प्रभाव में आने के बाद उसने धर्मान्तरण कर इस्लाम अपना लिया था।

NIA ने कहा कि गिरफ्तारी मार्च 2021 में दर्ज एक मामले के संबंध में की गई थी। इस ऑपरेशन की कमांड NIA के डिप्टी एसपी कृष्ण कुमार को दी गई थी। उन्हीं के नेतृत्व में टीम ने उसके घर की तलाशी ली। इस दौरान सुरक्षा एजेंसी ने कई दस्तावेज जब्त किए। NIA ने मेंगलुरु की एक स्थानीय अदालत से मरियम को रिमांड पर लिया और पूछताछ के लिए नई दिल्ली ले गई।

गौरतलब है कि NIA ने अगस्त में भी इस घर पर छापा मारा था और रहमान के चचेरे भाई अम्मार को कथित ISIS लिंक के आरोप में गिरफ्तार किया था। NIA ने उस समय मरियम से पूछताछ की थी, लेकिन उसे हिरासत में नहीं लिया था। रिपोर्टों से पता चलता है कि पिछले पाँच महीनों में पर्याप्त सबूत जुटाने के बाद एजेंसी ने उसे गिरफ्तार किया।

NIA अब तक 11 लोगों को कथित तौर पर फंड जुटाने, कट्टरपंथ का प्रसार करने और लोगों को आतंकी संगठन ISIS में शामिल होने के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार कर चुकी है। ऐसी आशंका है कि अम्मार की भतीजी अजमाला केरल के कासरगोड के उन 13 लोगों में से एक है, जो 2016 में ISIS में शामिल होने के लिए देश छोड़कर भाग गए थे। 2017 में NIA द्वारा दायर चार्जशीट के अनुसार, अजमाला और उसके पति शिफास केपी ने मई 2016 में भारत छोड़ दिया था और अफगानिस्तान के नंगरहार प्रांत में जाकर ISIS में शामिल हो गया था। उस दौरान कुल मिलाकर 21 लोग ISIS में शामिल होने के लिए देश छोड़कर भाग गए थे।

इस मामले में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने पिछले साल स्वत: संज्ञान लिया था, जिसमें ये पता चला था कि मोहम्मद अमीन अपने सहयोगियों के साथ मिलकर ISIS में लोगों की भर्ती के लिए इंस्टाग्राम, हूप और टेलीग्राम सहित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दुष्प्रचार कर रहे थे।

‘काशी-मथुरा बाकी है’: NBT के पत्रकार ने बांग्लादेश की तस्वीर शेयर कर यूपी पुलिस पर लगाए आरोप, हिन्दू धर्म पर भी कसा तंज

हाल ही में उत्तर प्रदेश और बिहार में भारतीय रेलवे के खिलाफ छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया। गणतंत्र दिवस (26 जनवरी, 2022) को ही प्रदर्शनकारी छात्र सड़कों पर उतर आए और ट्रेनों में आगजनी शुरू कर दी। पुलिस के साथ उनकी झड़पें हुईं। कुछ नेताओं और कोचिंग शिक्षकों पर उन्हें भड़काने के आरोप लगे। RRB (रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड) की नियुक्ति प्रक्रिया में गड़बड़ी को लेकर ये आरोप लगे। इसी बीच मीडिया के एक हिस्से ने भी जम कर अफवाह फैलाई।

छात्रों का कहना था कि परीक्षा की अधिसूचना में ये नहीं बताया गया था कि ‘Group D’ के लिए CBT-I की परीक्षा निकालने के बाद उन्हें एक और परीक्षा देनी होगी। 14 जनवरी को इस परीक्षा के परिणाम आए थे। इसके लिए अधिसूचना 2019 में ही आई थी। प्रयागराज में हिंसा के बाद छात्रों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। उन पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई भी हुई। लेकिन, मीडिया का एक वर्ग इसे लेकर फेक न्यूज़ फैलाने में लग गया और मोदी सरकार के अलावा हिन्दू धर्म पर भी तंज कसने लगा।

‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ अख़बार के हिंदी प्रारूप ‘नवभारत टाइम्स (NBT)’ के पत्रकार ने छात्रों पर तथाकथित पुलिस बर्बरता दिखाने के लिए एक ऐसी तस्वीर का सहारा लिया, जिसके इस मुद्दे से कोई लेनादेना था ही नहीं। उन्होंने जो तस्वीर शेयर की, उसमें एक व्यक्ति घायल अवस्था में बिस्तर पर पड़ा हुआ है और एक महिला ने उसके सिर पर हाथ रखा हुआ है। ये करतूत पत्रकार अनूप पांडेय की है, जिनके द्वारा शेयर की गई इस तस्वीर में घयल युवक की पीठ पर पिटाई के लाल निशान दिख रहे हैं।

फेक न्यूज़ के साथ उन्होंने कैप्शन में लिखा, “नौकरी लेकर क्या कीजिएगा? अभी काशी-मथुरा बाकी है।” अब आपको बताते हैं इस तस्वीर की सच्चाई। लोगों ने अनूप पांडेय को सोशल मीडिया पर ही बता दिया कि ये तस्वीर पुरानी है और पहले भी कई बार शेयर हो चुकी है। मलेशिया के एक मीडिया संस्थान ने बताया था कि ये तस्वीर बांग्लादेश की है। जब लोगों ने सचाई सामने रखी तो NBT के पत्रकार ने इसे डिलीट कर दिया। ‘दैनिक जागरण’ ने भी इस तस्वीर को रजनीश भारती का बता कर साझा किया।

खास बात ये है कि इस तस्वीर का फैक्ट चेक पश्चिम बंगाल पुलिस भी मार्च 2020 में कर चुकी है। तब ये कह कर इसे फैलाया जा रहा था कि बंगाल पुलिस ने इस युवक का ऐसा हाल किया है। तब पश्चिम बंगाल पुलिस ने चेतावनी दी थी कि फेक न्यूज़ फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ‘दैनिक जागरण’ ने भी इस तस्वीर को प्रयागराज का बता कर पेश किया। अनूप पांडेय ने ट्वीट डिलीट कर के कोई स्पष्टीकरण भी नहीं दिया और अख़बार की कतरन साझा करते नजर आए।

पैगंबर मुहम्मद पर पोस्ट तो हत्या? रिवॉल्वर-गोली देने वाला मौलवी अरेस्ट – किशन भरवाड मर्डर मामले में तीसरी गिरफ्तारी

गुजरात के अहमदाबाद में हुए किशन भरवाड की हत्या के मामले में हथियार उपलब्ध करवाने वाले मौलवी को गिरफ्तार कर लिया गया है। यह जानकारी गुजरात के गृह राज्यमंत्री हर्ष संघवी ने दी है। घटना को अंजाम देने वाले दोनों शूटरों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस द्वारा यह तीसरी गिरफ्तारी की गई है। आरोपित मौलवी अहमदाबाद के जमालपुर का रहने वाला है। 27 वर्षीय किशन भरवाड की 25 जनवरी 2022 को अहमदाबाद के धंधुका शहर के मोढवाडा-सुंदकुवा इलाके में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

हर्ष संघवी ने किशन के परिवार से उनके गाँव सचाना जा कर मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने मीडिया से कहा, “हत्यारे काफी युवा थे। उन्हें 20 दिन की बेटी के पिता की हत्या करने के लिए मौलवी द्वारा प्रेरित किया गया था। मौलवी का काम लोगों को सही राह दिखाना होता है। यह काफी हैरत भरा खुलासा है कि एक मौलवी ने हमलावरों को हथियार दिलाए। सरकार किसी भी हाल में उन्माद को बढ़ावा नहीं देने देगी। हम किशन के परिवार को जल्द ही न्याय दिलाएँगे।”

हर्ष संघवी ने आगे कहा, “पुलिस ने बहुत कम समय में कई टीमों का गठन किया। इस केस में शामिल हर आरोपित तक पहुँचना पुलिस का टारगेट था। कुछ हत्या बदला लेने के लिए की जाती हैं। कुछ हत्याएँ गुस्से में होती हैं। लेकिन यह घटना अलग थी। यह एक साजिश थी। आखिरकार हम इसकी जड़ तक पहुँच ही गए।”

घटना के बारे में आगे जानकारी देते हुए हर्ष संघवी ने कहा, “लाखों युवा जहाँ गुजरात के विकास में भागीदारी सुनिश्चित कर रहे हैं तो वहीं कुछ गुमराह हत्या करने के लिए प्रेरित किए जा रहे हैं। हमलावरों को मौलवी ने रिवॉल्वर के साथ 5 गोलियाँ दी थीं। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सीआर पाटिल ने इस केस की गंभीरता से जाँच के आदेश दिए हैं। इसी आधार पर गुजरात ATS और अहमदाबाद क्राइम ब्रान्च को केस सौंपा गया है। मैंने मृतक किशन की बेटी के सिर पर हाथ रखा। साथ ही संकल्प लिया है कि किशन के हत्यारों को सज़ा जरूर मिलेगी। मैं सभी से निवेदन करता हूँ कि अगर उनके पास इस केस से जुड़ी कोई भी जानकारी है तो वो हमसे साझा करें।”

संघवी ने आगे कहा, “प्रदेश सरकार ने जिला पुलिस प्रशासन से स्पेशल सरकारी वकील नियुक्त करने को कहा है। प्रदेश सरकार आरोपितों को दण्डित करने के लिए सबसे अच्छा वकील नियुक्त करेगी। मैं इस केस की जाँच कर रहे अहमदाबाद पुलिस के जवानों को भी धन्यवाद करता हूँ, जो 3 दिनों से अपने घर नहीं गए। मैंने सभी धर्मगुरुओं से शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की है।”

गौरतलब है कि इस घटना में एक अन्य मौलवी के शामिल होने की खबर है। वह मुंबई का रहने वाला बताया जा रहा है। उस पर हत्या का आदेश देने का आरोप है। किशन ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट अपलोड किया था, जिसके बाद से वह इस्लामी कट्टरपंथी के निशाने पर थे। बताया गया कि किशन ने जो वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड किया था, वो पैगंबर मुहम्मद से संबंधित था। किशन की पोस्ट पर कई लोगों ने आपत्ति जताई थी। पुलिस ने भी किशन के खिलाफ एक्शन लिया था। पोस्ट के बाद से ही किशन को जान से मारने की धमकियाँ मिल रही थीं।

भारतीय से पहले खुद को मुस्लिम बताने वाले माविया अली को अखिलेश ने देवबंद से बनाया उम्मीदवार, कार्तिकेय पहले ही सपा से कर चुके थे नामांकन

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों (Uttar Pradesh Assembly Election) में सीटों पर दावेदारी को लेकर समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) में घमासान मचा हुआ है। प्रदेश के दवबंद सीट से पार्टी ने अपनी प्रत्याशी को बदलकर माविया अली (Maviya Ali) को अपना उम्मीदवार बना दिया और आखिरी दिन उन्होंने अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया। इसको लेकर कार्तिकिये राणा और अली के बीच घमासान मच गया है। इसके पहले मुजफ्फरनगर में पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने घोषणा की थी कि राणा ही इस सीट से पार्टी के उम्मीदवार होंगे।

बता दें कि माविया अली वही व्यक्ति हैं, जिन्होंने कहा था, “मैं पहले मुसलमान हूँ, उसके बाद भारतीय। कोई हमारे ऊपर जबरदस्ती नहीं कर सकता।” अली के इस बयान पर भारी विवाद हुआ था। शुक्रवार (28 जनवरी 2022) को अली ने कहा कि वही पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार हैं। सपा में टिकट के बदलाव की बात सामने आने के बाद अली के समर्थकों ने ढोल-नगाड़े के साथ गुरुवार की रात मिठाइयाँ बाँटी थी। इस दौरान भारी संख्या में उनके समर्थक इकट्ठा हो गए। बाद में पुलिस ने उन सबको भगाया और कोरोना के उल्लंघन को लेकर 22 नामजद समर्थकों के अलावा 50 अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की थी।

इसको लेकर कार्तिकेय राणा ने कहा था कि लोगों को अफवाहों से बचना चाहिए। कार्तिकेय राणा 3 दिन पहले समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी के रूप में नामांकन पत्र दाखिल किया था। बाद में सपा सुप्रीमो ने माविया अली को अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया। अली के साथ नामांकन दाखिल करने के लिए पहुँचे समाजवादी पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष जगपाल दास गुर्जर ने कहा कि अखिलेश यादव के निर्देश के बाद उनको देवबंद विधानसभा से प्रत्याशी घोषित किया गया। एक ही सीट से दो-दो दावेदारों के आपसी संघर्ष के बावजूद गुर्जर ने कहा कि समाजवादी पार्टी में कोई गुटबाजी नहीं है।

गौरतलब है कि माविया अली कभी पूर्व मंत्री स्वर्गीय राजेंद्र राणा के बेहद करीबी हुआ करते थे। 2012 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में देवबंद नगरपालिका परिषद का सभासद रहते हुए माविया ने राजेंद्र राणा के चुनाव की कमान संभाली थी। राणा चुनाव जीतकर प्रदेश सरकार में मंत्री बने। इसके बाद हुए नगरपालिका चुनाव में माविया अली ने चुनाव जीतकर चैयरमैन बन गए।

माविया अली वही व्यक्ति हैं, जिन्होंने 2017 जिन्होंने खुद को पहले मुसलमान, फिर भारतीय बताया था। योगी सरकार ने 2017 के बाद कहा था कि स्वतंत्रता दिवस पर सभी मदरसों में राष्ट्रगान हो और उसकी वीडियो बनाई जाए। इस पर माविया अली ने कहा था, “मैं पहले मुसलमान हूँ, उसके बाद भारतीय। कोई हमारे ऊपर जबरदस्ती नहीं कर सकता।” असम के सांसद बदरुद्दीन अजमल ने उन पर आरोप लगाया था कि वीडियो के जरिए उन्हें ब्लैकमेल कर उनकी जमीन हड़पना चाहते हैं।

आपके पास है बिजनेस आइडिया तो इनके पास है पैसा, पर किसका ‘माल’ बाँट रहे शार्क टैंक इंडिया के 7 शार्क्स: जानिए सब कुछ

शार्क टैंक इंडिया (Shark Tank India)। एक बिजनेस रियलिटी शो। सोनी टीवी (Sony TV) पर शुरू हुए इस शो की आजकल काफी चर्चा है। आगे बढ़ने से पहले बता दें कि भले भारतीय टीवी दर्शकों के लिए यह नया हो, पर दुनिया के कई देशों में इस तरह के शो पहले धूम मचा चुके हैं। वैसे भी हमारी टीवी इंडस्ट्री में जो रियलिटी शो आते हैं वे विदेश की नकल भर ही होते हैं।

शार्क टैंक इंडिया का मकसद

शार्क टैंक इंडिया का मकसद ऐसे लोगों को फंड प्रदान करना है, जिनके पास बिजनेस आइडियाज हैं। जो अपने उद्यम की शुरुआत करना चाहते हैं या उसका विस्तार करना चाहते हैं। इसमें प्रतिभागी अपने आइडियाज शार्क्स/जजों के सामने प्रस्तुत करते हैं। आइडिया पसंद आने पर जज करोड़ों का निवेश करने से भी नहीं हिचकते।

शार्क टैंक इंडिया के 7 शार्क्स

सात शार्क्स (Sharks) हैं। इनके नाम हैं: अशनीर ग्रोवर, अमन गुप्ता, पीयूष बंसल, अनुपम मित्तल, नमिता थापर, विनीता सिंह और गजल अलघ। ये सभी देश के बड़े आंत्रप्रेन्योर हैं। अशनीर ग्रोवर (Ashneer Grover) भारतपे के फाउंडर हैं। IIT दिल्ली और IIM अहमदाबाद से पढ़े हैं। फिलहाल एक ऑडियो की वजह से विवादों में हैं। अमन गुप्ता (Aman Gupta) बोट ऑडियो के को-फाउंडर हैं। पीयूष बंसल (Piyush Bansal) लेंसकार्ट के CEO और फाउंडर हैं। अनुपम मित्तल (Anupam Mittal) पीपल ग्रुप-शादी डॉट कॉम के संस्थापक और सीईओ हैं। नमिता थापर (Namita Thapar) ग्लोबल फार्मा कंपनी एमक्योर फॉर्मास्यूटिकल की एक्जीक्युटिव डायरेक्टर हैं। विनीता सिंह (Vineeta Singh) सुगर कॉस्मेटिक्स और फैब बैग की को-फाउंडर हैं। गजल अलघ (Ghazal Alagh) ब्यूटी प्रॉडक्टस कंपनी ममाअर्थ (MamaEarth) की को-फाउंडर हैं।

किसका पैसा निवेश करते हैं शार्क्स?

शो के दौरान प्रतिभागियों का आइडिया पसंद आने के बाद शार्क्स के बीच उनके धंधे में निवेश करने और उसे अगले स्तर तक ले जाने को लेकर कभी-कभी होड़ भी दिखती है। कई लोग दावा करते हैं कि शार्क्स जो टीवी पर निवेश करते नजर आते हैं, असल में वह सोनी टीवी का पैसा है। सिद्धार्थ कन्नन ने एक इंटरव्यू के दौरान यह सवाल शादी डॉट कॉम के फाउंडर एवं सीईओ अनुपम मित्तल से पूछा भी था। उन्होंने इससे इनकार किया। मित्तल ने कहा, “देखो, ऐसा कैसे हो सकता है? ऐसा तो हो ही नहीं सकता है। चैनल के पास जितने पैसे थे आधे बच्चन साहब ले गए, आधे कपिल शर्मा ले गए। चैनल के पास तो कुछ बचा ही नहीं, तो हमको क्या देंगे? काश ऐसा होता।”

शार्क टैंक इंडिया में क्या होता है?

इस शो के दौरान प्रतिभागियों को आपस में मुकाबला नहीं करना होता है। हर प्रतिभागी को एक-एक कर मौका मिलता है। प्रतियोगी अपने धंधे के लिए निवेश जुटाने की कोशिश करते हुए सबसे पहले आइडिया को इस तरह से पेश करते हैं जो शार्क्स को लुभाए। ऐसा होने पर कितना निवेश चाहिए इसकी बात आती है। निवेश के बदले जज को उसमें कितनी हिस्सेदारी चाहिए ये बताई जाती है। इसके अलावा आपका बिजनेस कितना पुराना है, टर्नओवर क्या है, मार्केटिंग प्लान आदि से जुड़े सवाल पूछे जाते हैं। बातचीत के दौरान आने वाले ऐसे बिजनेस शब्द जो सामान्य लोगों की समझ में नहीं आते, उन्हें भी इस कार्यक्रम के दौरान आसान भाषा में समझाया जाता है।

बेटी से कर रहा था रेप, हथौड़ा से पति को मार डाला बीवी ने… तमिलनाडु पुलिस ने आत्मरक्षा बता किया रिहा

तमिलनाडु पुलिस ने उस महिला को रिहा कर दिया है, जिस पर अपने पति की हत्या का आरोप लगा था। पुलिस ने इसे आत्मरक्षा में उठाया गया कदम माना है। हत्या सिर पर हथौड़ा मार कर की गई थी। मृतक पति पर शराब पी कर आरोपित पत्नी को पीटने और अपनी ही बेटी के यौन शोषण के प्रयास का आरोप था। घटना गुरुवार (27 जनवरी) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आरोपित महिला की उम्र 41 वर्ष है। इसी मामले में उसकी बेटी को भी आरोपित किया गया था, जिनकी उम्र 20 साल है। मृतक शराबी पति अपनी पत्नी से शराब के पैसे माँगा करता था। न मिलने पर वह मारपीट करता था। घटना के दिन मृतक ने अपनी बेटी से रेप का प्रयास भी किया था। उस दौरान हुए विवाद में महिला ने अपने पति के सिर पर हथौड़े से वार कर दिया था। इसकी जानकारी महिला ने ही अपने पड़ोसियों को दी थी।

पुलिस को इस घटना की जानकारी पड़ोसियों से हुई थी। पुलिस ने महिला और उसकी बेटी को हिरासत में ले लिया था। शुरुआत में पुलिस ने आरोपितों पर धारा 302 के तहत केस दर्ज किया था। लेकिन बाद में जाँच के दौरान प्रकाश में आए तथ्यों को ध्यान में रख कर पुलिस ने मानवता दिखाई। अब पुलिस IPC सेक्शन 100 के अंतर्गत इस केस में कार्रवाई कर रही है। महिला और उनकी बेटी को रिहा कर दिया गया है। पुलिस के मुताबिक अब महिला को दुबारा इस अपराध में गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।

आत्मरक्षा में हत्या पहला मामला नहीं

साल 2012 में मदुरै में ऐसी ही एक घटना हुई थी। उस समय भी एक महिला ने अपने शराबी पति की हत्या कर दी थी क्योंकि वो अपनी ही बेटी के साथ बलात्कार करने की कोशिश कर रहा था।

योगी यूपी के CM नंबर वन, 52.3% लोग फिर से चाहते हैं वापसी: उत्तराखंड और गोवा में भी लौट रही BJP, पंजाब में खिचड़ी जनादेश के आसार

पाँच राज्यों में विधानसभा चुनाव (Assembly Election 2022) के लिए प्रचार जोरों पर है। जिन राज्यों में चुनाव होने हैं, वे हैं: उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर। लोकसभा में सबसे ज्यादा सांसद भेजने वाली यूपी (UP Election 2022) के नतीजों पर सबकी नजरें टिकी हुई है। राज्य में सात चरणों में चुनाव होने हैं। पहले चरण की वोटिंग 10 फरवरी और अंतिम चरण का मतदान 7 मार्च को होगा। इससे पहले आए एक सर्वे में राज्य में योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) के नेतृत्व में फिर से बीजेपी की वापसी की बात कही गई है।

टाइम्‍स नाउ (Times Now) और वीटो (VETO) के सर्वे के अनुसार उत्तराखंड और गोवा में भी बीजेपी लौट रही है। वहीं पंजाब में किसी भी दल के स्पष्ट बहुमत मिलता नहीं दिख रहा है। इस सर्वे में उत्तर प्रदेश के सीएम पसंद के तौर पर योगी आदित्यनाथ अपने प्रतिद्वंद्वियों से काफी आगे हैं। सर्वे में शामिल लोगों में से 52.3 फीसदी का मानना है कि उन्हें दोबारा राज्य का मुख्यमंत्री बनना चाहिए। सपा प्रमुख अखिलेश यादव 36.2 फीसदी लोगों की पसंद बनकर उभरे। वहीं बसपा प्रमुख मायावती को 7.2 और कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी को 3.4 फीसदी लोगों ने अपनी पसंद बताया।

यूपी में विधानसभा की 403 सीटें हैं। सर्वे में बीजेपी को 212-231 सीटें मिलने का अनुमान लगाया है। साथ ही बताया गया है कि पार्टी 38.10 फीसदी वोट हासिल कर सकती है। सपा को 34.78 फीसदी वोट के साथ 147-158 सीटें मिलने की उम्‍मीद है। बीएसपी को 12.07 फीसदी वोट और महज 10-16 सीटें मिलने का अनुमान है। 8.66 फीसदी वोट शेयर के साथ कॉन्ग्रेस 9-15 और 6.40 फीसदी वोट के साथ अन्‍य 2-5 सीटों पर सिमट सकते हैं। सर्वे के अनुसार उत्तर प्रदेश के सभी हिस्सों में बीजेपी को बढ़त हासिल है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पूर्वांचल में उसे सपा से टक्कर मिलती दिख रही है। वहीं, अवध, सेंट्रल यूपी और रूहेलखंड में वह काफी आगे दिख रही है।

इसी तरह उत्‍तराखंड (Uttarakhand Election 2022)  में भी फिर से बीजेपी की सरकार बनती दिख रही है। राज्‍य की 70 विधानसभा सीटों में से पार्टी को 42-46 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है। कॉन्ग्रेस को 12-14, आम आदमी पार्टी (AAP) को 8-11 सीटें और अन्‍य को 2-5 सीटें मिल सकती है।

गोवा (Goa Election 2022) में भी बीजेपी को बहुमत मिलता दिख रहा है। राज्य की 40 विधानसभा सीटों में पार्टी को 20-23 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है। सर्वे के अनुसार कॉन्ग्रेस को 4-6, आप को 6-10 और अन्‍य को 5-6 सीटें मिल सकती है।

उत्तर प्रदेश के बाद इन चुनावों में जिस राज्य की सबसे ज्यादा चर्चा है वह पंजाब ((Punjab Assembly Election 2022) है। सर्वे के अनुसार इस राज्य की सत्ता में कॉन्ग्रेस की वापसी होती नहीं दिख रही। किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने की उम्मीद है। आप सबसे बड़े दल के तौर पर उभर सकती है। उसे 58 सीटें मिलने का अनुमान है। कॉन्ग्रेस को 44, अकाली दल को 12, बीजेपी को दो और अन्य को एक सीट मिलने की उम्मीद है। राज्य में विधानसभा की 117 सीटें हैं।