त्रिपुरा की बिप्लब देब की सरकार (Tripura Government) ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में जवाब दाखिल राज्य में हुई हिंसा के लिए SIT गठित कर जाँच की माँग करने के लिए दी गई जनहित याचिका को खारिज करने और भारी जुर्माना लगाने की माँग की है। सरकार द्वारा दाखिल जवाब में कहा गया है कि याचिकाकर्ता पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद की हिंसा पर चुप्प हैं, लेकिन तथाकथित जनहितैषी लोग जनहित याचिका का गलत इस्तेमाल करते हुए खतरनाक मिसाल पेश कर रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, याचिकाकर्ता का नाम एहतेसाम हाशमी है। त्रिपुरा सरकार के मुताबिक, “याचिका को नेेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गेनाइजेशन, सीएफडी और पीपुल्स यूनियन फॉर लिबर्टीज द्वारा प्रायोजित है और इसे हाशमी ने 3 वकीलों के साथ मिलकर कथित फाइंडिंग रिपोर्ट्स के आधार पर ‘ह्यूमैनिटी अंडर अटैक इन त्रिपुरा- #मुस्लिम लाइव्स मैटर’ के नाम से तैयार किया है। यह जनहित याचिका स्वंयभू है।”
त्रिपुरा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए गए अपने हलफ़नामे में आगे कहा, “यह जनहित याचिका प्रक्रिया का दुरूपयोग है। जब अदालतों ने अख़बारों की दलीलों के आधार पर दाखिल PIL सुनने से मना कर दिया, तब यह नया तरीका अपनाया गया है। यह तथाकथित जन हितैषी लोगों की नई रणनीति है। इसमें अपने ही लोगों द्वारा अपनी ही रिपोर्ट बना ली जाती है। ऐसी रिपोर्ट पूर्व नियोजित होती हैं। साथ ही इनके द्वारा दाखिल की गई याचिकाओं में अपने फायदे छिपे होते हैं।”
त्रिपुरा सरकार ने हलफनामे में आगे कहा, “इस याचिका में घटनाओं को एकतरफा और तोड़-मरोड़ कर दिखाया गया है। कानूनी तौर पर याचिका में किए गए दावों में सच्चाई नहीं है। यह हैरानी की बात है कि बंगाल में चुनावों के बाद जो हिंसा हुई थी उसके लिए कोई भी याचिकाकर्ता सामने नहीं आया। त्रिपुरा जैसे छोटे राज्य के लिए ही अचानक कुछ तथाकथित लोग जाग गए।” त्रिपुरा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि बांग्लादेश में दुर्गा पूजा पंडालों में तोड़फोड़ और हिंसा की खबरों के बाद त्रिपुरा में कुछ हिंसक घटनाएँ हुई थीं। उन मामलों में कार्रवाई की जा रही है।
हलफनामे में आगे है, “त्रिपुरा हाईकोर्ट ने इस हिंसा का स्वतः संज्ञान पहले ही ले लिया है। वहाँ पर कार्रवाई चल रही है। बेहतर होगा कि याचिकाकर्ता वहाँ की कार्रवाई में अपनी भागीदारी दर्ज कराएँ। ऐसा ही कोलकाता नगरपालिका चुनावों के दौरान भी हुआ था। तब बड़े पैमाने पर हुई हिंसा की स्वतंत्र जाँच की माँग के साथ लगी जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने विचार से इंकार कर दिया था। साथ ही मामले को उच्च न्यायालय में वापस कर दिया था। इसलिए यहाँ याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट को उलझाने का प्रयास न करें।”
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस चंद्रचूड़ की बेंच ने त्रिपुरा हिंसा मामले में दाखिल PIL के बाद नवम्बर 2021 में त्रिपुरा सरकार को नोटिस जारी किया था। याचिका में त्रिपुरा पुलिस पर हिंसा करने वालों के खिलाफ ठोस कार्रवाई न करने का आरोप लगाया गया था। साथ ही त्रिपुरा के विभिन्न हिस्सों में मुस्लिमों पर सुनियोजित हमले किए जाने का दावा किया गया था। यह हिंसा अक्टूबर 2021 में हुई थी।
मुंबई पुलिस (Mumbai Police) ने कोलकाता के न्यू मार्केट इलाके के एक होटल से दंपती सैयद यूसुफ जमाल और उसकी पत्नी नाज सैयद को गिरफ्तार किया है। इन पर एक महिला से दुष्कर्म करने और उसे ब्लैकमेल करने का आरोप है। मुबंई पुलिस ने कोलकाता पुलिस की मदद से होटल से कुछ वीडियो भी बरामद किए हैं। सिटी कोर्ट में पेश करने के बाद दंपती को ट्रांजिट रिमांड पर मुंबई लाया गया है। पीड़िता द्वारा मुंबई के नागपारा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराने के बाद यह मामला प्रकाश में आया। उसने आरोप लगाया है कि यूसुफ अपनी बीवी के सामने उसके साथ दुष्कर्म करता था और नाज उनका वीडियो बनाती थी।
पीड़िता ने बताया कि दंपती ने उसे धमकी दी थी कि अगर उसने इस बारे में पुलिस में शिकायत की तो वे सभी वीडियो इंटरनेट पर अपलोड कर देंगे। महिला ने अपनी शिकायत में यह भी कहा कि उन दोनों ने उसे ब्लैकमेल भी किया और उससे करीब 1.5 करोड़ रुपए वसूले। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि वे काला जादू भी करते थे।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, वर्ष 2015 में पीड़ित महिला एक पार्टी में यूसुफ से मिली थी। इसके बाद फोन पर दोनों में बातचीत शुरू हो गई। कुछ दिनों बाद यूसुफ ने पीड़िता को अपनी बीवी से मिलवाने के बहाने मुंबई के बाइकाला (पूर्वी) थाना क्षेत्र के डॉ. बाबा साहब अंबेडकर रोड स्थित अपने घर पर बुलाया। इसके बाद उसने उसे शरबत में नशीला पदार्थ मिला कर पीने को दिया, जिससे वह बेहोश हो गई। जब वह होश में आई, तो युसूफ और उसकी बीवी नाज ने उसे एक अश्लील वीडियो दिखाया।
इस वीडियो में यूसुफ उसके साथ दुष्कर्म करता दिख रहा था। बाद में दोनों उसे वीडियो अपलोड करने की धमकी देकर ब्लैकमेल करने लगे। पीड़िता बदनामी के डर से उसे पैसे देती रही। इसके अलावा यूसुफ जब-जब पीड़ित महिला को बुलाता था, उसे मजबूरन उसके पास आना पड़ता था। हर बार आरोपित उसके साथ दुष्कर्म करता और उसकी बीवी उसका वीडियो बनाती थी।
वहीं, पुलिस का इस मामले में कहना है कि दंपती महिला की नाबालिग बेटी के साथ भी दुष्कर्म कर उसका वीडियो बनाना चाहता था, लेकिन इसके बाद महिला चुप नहीं रही। उसने आरोपितों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद दंपती मुंबई से फरार हो गया और कोलकाता के न्यू मार्केट इलाके के दो होटलों में अलग-अलग रहने लगा। मुंबई पुलिस को जब इसका सूचना मिली तो उन्होंने कोलकाला पुलिस की मदद से इन्हें शनिवार (22 जनवरी 2022) शाम को गिरफ्तार कर लिया। कोलकाता पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कि मुंबई पुलिस हमसे मदद चाहती थी और हमने उनका सहयोग किया। दंपति को गिरफ्तार कर लिया गया है।
उत्तर प्रदेश में कानपुर के कुख्यात अपराधी विकास दुबे (Vikas Dubey) के मरने के 6 महीने के बाद दिवंगत राज्य मंत्री संतोष शुक्ला (Santosh Shukla) के भाई ने अपनी पीड़ा व्यक्त की है। मनोज शुक्ला ने दैनिक भास्कर में अपने भाई की हत्या और वर्ष 2001 में गैंगस्टर विकास दुबे का प्रदेश में किस प्रकार आतंक था इस बारे में लिखा है।
उन्होंने लिखा, “उत्तर प्रदेश में वर्ष 2001 में गैंगस्टर विकास दुबे का बोलबाला था। उसे पुलिस और नेताओं की शह मिली हुई थी, जिसके चलते प्रदेश में उसका लूटपाट, हत्या और वसूली धंधा था। उस दिन दोपहर के करीब 2 बज रहे थे। मेरे पास किसी अंजान शख्स का फोन आया कि भैया की हत्या हो गई है। मैं भागते हुए शिवली थाने गया। वहाँ देखा कि भैया की खून से लथपथ लाश पड़ी है। विकास दुबे ने मेरे भैया की छाती में 5 गोलियाँ दागी थीं।” इस मामले में 25 पुलिसकर्मी गवाह थे, लेकिन सब के सब पलट गए।
मनोज शुक्ला बताते हैं कि भैया की लाश देखकर मैं बेहोश हो गया। मुझे 4 वर्षों तक तो नींद ही नहीं आई। रात भर जागता रहता था। मेरे भाई संतोष शुक्ला उस वक्त यूपी की राजनाथ सरकार में राज्यमंत्री थे। आजादी के बाद यह पहली बार था, जब पुलिस थाने में किसी राज्यमंत्री की हत्या हुई थी, लेकिन पुलिस और सरकार के लिए यह महज एक हत्या थी, जिसने मेरे परिवार की नींव को हिला दिया था। हम आज तक उनकी कमी महसूस करते हैं।
उन्होंने बताया कि वाजपेयी जी प्रेम से मेरे भैया को कालिया कहते थे, क्योंकि उनका रंग गहरा था। पार्टी में उनकी गहरी पैठ थी। प्रशासन भी उनकी बात को नहीं काटता था। भाई ने बताया कि 12 अक्टूबर 2001 की बात है भैया को शिवली नगर पंचायत से जीत दर्ज करने वाले लल्लन वाजपेयी का फोन आया कि उसका घर विकास दुबे ने चारों ओर से घेर रखा है और वह उसे मार देगा। भैया ने न आव देखा न ताव और अपनी गाड़ी उठाकर चल दिए। वे सीधा शिवली थाने पहुँचे। वहाँ विकास दुबे भी पहुँच गया और पुलिस वालों की मौजूदगी में उसने भैया की छाती में 5 गोलियाँ दाग दी। मौके पर ही भैया की मौत हो गई। उसके बाद वहाँ भगदड़ मच गई और पुलिस वाले भी भाग गए।
भैया मेरे लिए माँ-बाप भाई सब थे, उनके जाने के बाद सब खत्म हो गया। मैं बीमार रहने लगा था। कई बार शादियों या दूसरे कार्यक्रमों में विकास दुबे से मेरा सामना हुआ। मुझे उसे देखकर घृणा होती थी, नफरत होती थी। उसकी वजह से मेरे परिवार का काफी नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई आज तक नहीं हो सकी है। जी करता था उसे गोलियों से भून दूँ। फिर एक दिन विकास दुबे के एनकाउंटर की खबर आई, उस दिन मुझे चैन मिला, सुकून आया, शांति आई।
अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh) के सियांग जिले से हाल ही में चीन की पीपुल लिबरेश आर्मी (PLA) द्वारा अपहरण किए गए 17 वर्षीय मिरांग तरोन को चीनी PLA ने वापस लौटाने की बात कही है। 4 कोर मुख्यालय में डिफेंस PRO लेफ्टिनेंट कर्नल हर्षवर्धन पांडे ने कहा है कि भारतीय सेना ने PLA में अपने समकक्ष से बात की है, जिसके बाद दोनों देशों के बीच प्रोटोकॉल के तहत उसकी सुरक्षित रिहाई को लेकर सहमति बनी है।
हालाँकि, भारत वापस लौटने में मिरांग तरोन को समय लग सकता है। कर्नल हर्षवर्धन के मुताबिक, चीन से लड़के की रिहाई में सात से 10 दिन लग सकते हैं। बता दें कि दो दिन पहले (20 जनवरी 2022) को चीनी PLA ने अरुणाचल के किशोर मिरांग तरोन का अपहरण कर लिया था, जिसके बाद भारत सरकार ने इस मामले को चीन के समक्ष उठाया और उसकी रिहाई की माँग की।
Days after abduction of Indian by China’s PLA, Defence ministry informs he has been located by the Chinese side, to return soon.
लेकिन बाद में इस घटना को लेकर चीनी विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर इस घटना से साफ इनकार कर दिया। इसके साथ ही चीनी विदेश मंत्रालय ने ये भी कहा कि PLA अपनी सीमाओं की सुरक्षा करता है और अवैध घुसपैठ की कोशिशों पर लगाम लगाता है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी चीनी PLA इस तरह की हरकत कर चुकी है। इससे पहले सितंबर 2020 में अरुणाचल प्रदेश के सुबनसिरी जिले से चीनी आर्मी ने पाँच लोगों का किडनैप कर लिया था। बाद में उस वक्त के गृह राज्य मंत्री किरेन रिजिजू ने उनकी रिहाई करवाई थी। बहरहाल इस घटना के बाद सियासी बवाल खड़ा कर सरकार को बदनाम करने की कोशिश भी की गई।
राहुल गाँधी ने पीएम को लेकर की बदजुबानी
मिरांग तरोन को किडनैप किए जाने की घटना के बाद तो जैसे कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी को संजीवनी मिल गई। उन्होंने मौका न गंवाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बदजुबानी हमला किया और उनकी क्षमता पर सवाल खड़ा कर दिया। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि गणतंत्र दिवस से कुछ दिन पहले भारत के एक भाग्य विधाता का चीन ने अपहरण किया है, हम मिराम तरोन (Mirang Taron) के परिवार के साथ हैं और उम्मीद नहीं छोड़ेंगे, हार नहीं मानेंगे। PM की बुजदिल चुप्पी ही उनका बयान है- उन्हें फर्क नहीं पड़ता!
30 साल के एक मुस्लिम युवक ने जब ये बात मुझसे कही तो मैं थोड़ा चौंक गया।
इसी मंगलवार को मुंबई में परेल से छत्रपति शिवाजी महाराज हवाई अड्डा जाने के लिए मैंने टैक्सी मँगाई थी। चूँकि उबर की ये टैक्सी मेरे बेटे ने बुक की थी इसलिए मुझे चालक का नाम नहीं पता था। मुझे टैक्सी चालकों से गपशप करना अच्छा लगता है। इस दौरान अक्सर ज़िन्दगी की ऐसी तसवीरें देखने को मिल जाती हैं जिनसे हम अन्यथा वंचित रहते हैं।
इसीलिए बातचीत शुरू करने के लिए आदतन मैंने चालक से नाम पूछा था। उसने बड़े नम्र और मीठे लहजे में कहा था, “समीर सर।” मुंबई में बेहद सधी और साफ़ हिंदी बोलते देख मुझे लगा कि वो उत्तर प्रदेश से है। दो यूपी वाले मिलें और राजनीति की बातें न हो ऐसा कैसे हो सकता है? बात आगे बढ़ी तो सहज ही उत्तर प्रदेश के चुनाव का ज़िक्र भी होना ही था।
मैंने उससे कहा, “इस बार अखिलेश और योगी में मुकाबला कड़ा दिखाई देता है।”
समीर ने सहजता से कहा, “आपको मुकाबला कितना भी कड़ा दिखाई देता हो, योगी ही जीतेंगे।”
मैंने पूँछा, “क्यों?”
समीर ने जबाव दिया, “अयोध्या का टंटा जिस आसानी के साथ उन्होंने निपटाया है, और किसी मुख्यमंत्री के बूते की बात नहीं थी। नहीं तो ये यूँ ही लटकता रहता।”
उसकी बातों से मुझे लगा कि वह कोई योगी ‘भक्त’ या पुश्तैनी भाजपा समर्थक है। मैं उसकी राजनैतिक प्रतिबद्धता को लेकर मन ही मन में अनुमान लगा ही रहा था कि समीर ने खुद ही ऐलान किया कि वह मुसलमान होते हुए भी वे ये बात कह रहा है। इस बात पर मेरी उत्सुकता थोड़ी और बढ़ गई। उसने कहा कि उसका पूरा नाम है समीर मोहम्मद।
उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले की रानीगंज तहसील के सिंदौड़ा गाँव के रहने वाले समीर मोहम्मद मुंबई में टैक्सी चलाते हैं। अभी भी गाँव में भी उनका वोट है और ग्राम प्रधान के पिछले चुनाव में वे वहाँ वोट डालकर आए थे। गाँव आते-जाते रहते हैं। उनका पूरा परिवार अभी भी वहीं हैं। उन्होंने बताया कि परिवार में उनके माता पिता, दो बहनें, तीन भाई, पत्नी और चार साल की प्यारी बेटी शमा है।
उनके परिवार के पास गाँव में भी टैक्सी है, जिसे वे जब वहाँ होते हैं तो खुद चलाते हैं। नहीं तो उनके भाईबंद उस टैक्सी को चलाते हैं। प्रतापगढ़ से सुल्तानपुर होकर अयोध्या कोई 110 किलोमीटर की दूरी पर है। कोई डेढ़ दो घंटे में आप वहाँ पहुँच सकते है। उन्होंने बताया कि सवारियों को लेकर उनका अयोध्या आना जाना लगा ही रहता है।
मेरे मन में स्वाभाविक सवाल उठा कि राम मंदिर मसला हल होने से आखिर अयोध्या के आसपास रहने वाले एक मुसलमान युवक को भला क्या फायदा हो सकता है? इसलिए सीधे ही मैंने ये सवाल पूछ लिया। समीर ने मुझे समझाया कि जब वे पहले प्रतापगढ़ से अयोध्या टैक्सी लेकर जाते थे तो हिंदू मुसलमानों के बीच में एक अनकहा मगर स्पष्ट खिंचाव और तनाव रहता था। मुसलमान डरते थे कि कल ना जाने क्या हो? और हिंदू खीजते थे कि उनका मंदिर नहीं बन रहा। दशकों से बस इसके बहाने राजनीति का खेल हो रहा था।
उन्होंने कहा, “क्योंकि अब इस मुश्किल मसले का समाधान निकल गया है तो लम्बे समय से दोनों के बीच जड़ जमाए बैठा का वो खिंचाव भी दूर हो गया है। मामला सही तरीके से सुलट गया है और दोनों (समुदाय) ही आगे बढ़ गये हैं।”
मैं सोचने लगा कि जाने अनजाने में समीर मोहम्मद एक बड़ी बात कह गए हैं। उत्तरप्रदेश की राजनीति को सिर्फ खाँचों में बाँटकर रात दिन उसके विश्लेषण में लगे विशेषज्ञ इसे नहीं समझ पाते। असल बात है कि आम आदमी का मन हमेशा के लिए किसी संघर्ष, विवाद या झगड़े में नहीं पड़ा रहना चाहता। वह तो पैदा हुए तनावों को निपटा कर अपनी रोजमर्रा की ज़िन्दगी में आगे बढ़ना चाहता है। इसलिए चाहे निजी जिंदगी हो या फिर सामाजिक जीवन, उलझी डोरों को सुलझाने वालों को हमेशा समाज में आदर और सम्मान की नज़रों से देखा जाता है। हमारे साहित्य के वांग्मय में ही नहीं, ग्रामीण बोलचाल में भी पंच के ओहदे को इसीलिए मान दिया जाता है।
समीर के मुताबिक मोदी/योगी की जोड़ी ने देश के इस जटिलतम विवाद को गति, सहजता और सुगमता से समाधान की और बढ़ाया है। जिस सरलता से समीर मोहम्मद ने इसका विश्लेषण किया उसे इस तरह से मैंने कभी देख ही नहीं पाया था। राम मंदिर के मुद्दे पर शायद इसी नाते हमारा मीडिया, राजनेता, बुद्धिजीवी वर्ग और विश्लेषक एकांगी होकर सोचते रहे हैं। एक साधारण से दिखने वाले एक टैक्सी चालक ने मुझे एक नया नज़रिया देकर उस दिन एक गहरा सबक सिखा दिया।
समीर मोहम्मद ने एक पते की बात और कही। उन्होंने बताया कि उनका गाँव एक हिंदू बहुल गाँव है। उसमें हर जात बिरादरी के लोग रहते हैं। लेकिन कई साल से गाँव की प्रधानी एक मुसलमान के हाथ में है। उसने कहा कि जिस तरह गाँव में बाकी सारे लोग सगीर अहमद को वोट देकर ग्राम प्रधान बनाते हैं इसी तरह प्रदेश में मुसलमान भी योगी को वोट देंगे, इसमें हैरानी की बात क्यों होनी चाहिए?
समीर के तर्क में वाकई दम था। फिर भी मैंने उसे आगे कुरेदते हुए पूछा, “योगी और भाजपा को तुम अकेले ही समर्थन की बात कर रहे हो या फिर तुम्हारे बाकी कोई साथी भी ऐसी बात कहते हैं?” समीर का जवाब था कि उनका पूरा कुनबा एक साथ ही चलता है। उनके कुनबे और बिरादरी के लोगों को भाजपा और योगी से कोई मलाल नहीं है। असल बात तो ये है कि 2014 के बाद से प्रदेश के मतदाताओं का व्यवहार इस ओर साफ़ इशारा करता आ रहा है। जिसमें खासकर युवा वर्ग का मतदाता सिर्फ जात, बिरादरी और मजहब के आधार पर वोट नहीं डाल रहा। जरूरत उसके इस रुझान को साफ़ चश्मे से देखने भर की ही है।
एक बात और, इसी कालावधि में डिजिटल और सोशल मीडिया का असर भी अत्यंत प्रभावकारी हो गया है। जिसने संवाद में बिचौलियों की भूमिका को काफी सीमित कर दिया है। नए माध्यमों से जानकारी लेने वाले अब सीधे बात पहुँचा भी रहे हैं और ग्रहण भी कर रहे हैं। ये लोग अब पुराने वैचारिक जंजालों, पूर्वाग्रहों और राजनैतिक विचारों के बंदी नहीं हैं। उनका राजनीतिक व्यवहार एक बड़ी हद तक ‘उन्हें आज क्या मिला’ और ‘किसी ने उनके लिए अभी क्या किया’ इससे संचालित हो रहा हैं न कि पुरानी वैचारिक गठरियों से। समीर की बातों में इसी सोच की झलक मुझे मिली।
मैंने समीर से कहा कि लोग तो अखिलेश यादव और योगी के बीच कड़ी टक्कर बता रहे हैं। उसका कहना था कि कोई कैसी भी टक्कर बताए, योगी जैसा मुख्यमंत्री मिलना मुश्किल है। मैंने जब उससे इसका मतलब पूछा तो उसने कहा, “देखिए साहब हमारे राज्य में तो शासन धमक से ही चलता है। अगर अफसरों पर कड़ाई न करो तो राज चल ही नहीं सकता। योगी कि धमक ही अलग है। वो लगते हैं कि वाकई धाकड़ मुख्यमंत्री हैं।” उसने कहा कि उसे अच्छा लगता है कि योगी मुँह देखे का टीका नहीं करते। वो हरेक के मुँह पर उसके जैसी बात नहीं करते बल्कि अपने तरह से जो बात सही लगती है उसे करते हैं। वे ऐसा करते ही नहीं उसपर कड़ाई से अमल भी करवा लेते हैं।
समीर कि बातें दरअसल बहुत दिलचस्प होने के साथ साथ उन बहुत सी प्रचलित धारणाओं को भी तोड़ रहीं थीं जो अक्सर टीवी, अखबार और सोशल मीडिया पर चल रहीं अनर्गल बहसों ने हमारे मन में बिठा दीं हैं। ये कथित विशेषज्ञ राजनीति की चादर को बस सफ़ेद या काले रंग में पोतना चाहते हैं। जबकि राजनीति और जीवन तो अनेक रंगों से भरा एक इंद्रधनुष है। उसके पटल में अनेक रंगों और भावों की अनगिनत छटाएँ बिखरी हुईं हैं। यही नए रंग उस दिन मुझे समीर ने दिखाए।
चलते चलते समीर ने अपनी मीठी सी बेबाकी के अंदाज़ में दो भविष्यवाणियाँ भी की। पहली ये कि अगर योगी को 5 साल मिल गए तो “हमारे यूपी में भी गुजरात की तरह तरक्की हो जाएगी।” और दूसरी, कि अगर ऐसा हुआ तो फिर योगी के लिए दिल्ली बहुत दूर नहीं रहेगी। अब समीर मोहम्मद की भविष्यवाणी सही होगी कि नहीं ये तो वक्त ही बताएगा मगर उनकी बातें मुझे बेहद तर्कसंगत, समझदारी वाली और दिलचस्प लगीं। मैंने बाकायदा उनकी इजाजत से उनकी फोटो भी ली। उन्हीं की मर्ज़ी से ये बाते भीं साझा कर रहा हूँ।
पश्चिम बंगाल के भाटपारा में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जयंती कार्यक्रम में सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) कार्यकर्ताओं ने भाजपा नेताओं पर हमला बोल दिया। भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष और स्थानीय सांसद अर्जुन सिंह ने बताया कि रविवार (23 जनवरी, 2022) को सुबह साढ़े 10 बजे के करीब पार्टी के विधायक पवन सिंह नेताजी सुभाष चंद्र बोस को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि देने के लिए कार्यकर्ताओं के साथ गए थे, तभी TMC के गुंडों ने उन पर हमला बोल दिया।
TMC के गुंडों पर गोलीबारी करने के भी आरोप हैं। भाजपा का आरोप है कि ये सब कुछ पुलिस के सामने ही हुआ। भाजपा सांसद अर्जुन सिंह की गाड़ी को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया। प्रतिमा पर माल्यार्पण के दौरान ये घटना हुई। भाजपा के सांसद-विधायक को बचाने के लिए उनके सिक्योरिटी गार्ड को हवाई फायरिंग भी करनी पड़ी। इससे भाटपारा और नॉर्थ 24 परगना जिलों की राजनीति फिर से गरमा गई गई। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुकान्त मजूमदार ने कहा कि भाजपा नेता सुरक्षित नहीं हैं।
At 10:30 am today our MLA Pawan Singh had gone to offer tribute to Netaji, when TMC's goons attacked him, fired at him, hurled bricks…They also attacked me when I reached. Everything was happening in front of the police…my car was broken: Arjun Singh, BJP vice president, WB pic.twitter.com/5GDr0sciCC
इन इलाकों में 2019 लोकसभा चुनाव और 2021 विधानसभा चुनाव में भी जम कर हिंसा हुई थी। अर्जुन सिंह ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सत्ताधारी पार्टी भाजपा नेताओं को अलग-थलग करने के लिए गंदे हथकंडे अपना रही है। उन्होंने कहा कि TMC वालों की ‘गुंडागिरी’ से लोग दरें, इसीलिए ये सब किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें रोकना संभव नहीं है। कुछ ही दिनों पहले TMC संयोजक असीम राय पर इसी इलाके में गोली चली थी। इसमें उनका सिर फट गया था।
पंजाब विधानसभा चुनाव (Punjab Assembly election 2022) को लेकर 22 किसान संगठनों के राजनीतिक मंच ‘संयुक्त समाज मोर्चा’ ने 35 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की है। इसमें पूर्व गैंगस्टर और लाल किला दंगे के आरोपी लखविंदर सिंह उर्फ लक्खा सिधाना (Lakha Sidhana) को मौड़ मंडी विधानसभा सीट से टिकट दिया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने पिछले साल गणतंत्र दिवस पर टैक्टर मार्च के दौरान लाल किले पर फैली हिंसा को लेकर लक्खा सिधाना के खिलाफ दंगा फैलाने और सरकारी कर्मचारियों पर हमले सहित कई मामले किए दर्ज थे। सिधाना इसके बाद फरार हो गया था। पुलिस ने उस पर 1 लाख रुपए का इनाम भी घोषित किया था। फरवरी 2021 में वह भटिंडा की रामपुर फूल विधानसभा के तहत आने वाले गाँव मेहराज में युवाओं की एक एक रैली को संबोधित करता हुआ नजर आया था।
हालाँकि, उस वक्त संयुक्त किसान मोर्चा जो कि कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन करने वाला प्रमुख संगठन था, उसने लक्खा से खुद को दूर कर लिया था। बताया जाता है कि लक्खा वर्ष 2012 में मनप्रीत बादल की पार्टी पीपल्स पार्टी ऑफ पंजाब (PPP) के टिकट पर रामपुरा फूल से चुनाव लड़ चुका है।
बता दें कि 26 जनवरी को दिल्ली के लाल किले पर हुई हिंसा के संबंध में पंजाबी अभिनेता दीप सिद्धू (Deep Sidhu) और गैंगस्टर लक्खा सिधाना (Lakha Sidhana) के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। मालवा यूथ फेडरेशन के प्रमुख लक्खा सिधाना, जो गाँवों में सामाजिक कल्याण के काम करने का दावा भी करता है, उस पर पंजाब में 25 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें हत्या, लूट, अपहरण, फिरौती जैसे अपराध शामिल हैं। यही नहीं, लक्खा पर आर्म्स एक्ट के मामले भी दर्ज हो चुके हैं और इसके लिए वो कई साल की सजा भी काट चुका है।
पंजाब के बठिंडा के सिधाना गाँव के मूल निवासी लखबीर सिंह सिधाना उर्फ लक्खा सिधाना ने सरकार और पुलिस पर ही किसानों के आंदोलन के खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगाते हुए दावा किया था कि उन्होंने हमेशा शांति का आह्वान किया है।
मध्य प्रदेश के इंदौर से लव जिहद का एक नया मामला सामने आया है। यहाँ पर अहमद फैज़ नाम के व्यक्ति पर अमन बनकर कंपनी सेक्रेटरी (CS) की छात्रा लड़की को धोखे में रखने और उसके साथ दुष्कर्म और अश्लील फोटो एवं वीडियो के जरिए ब्लैकमेलिंग करने के साथ-साथ धर्म परिवर्तन कराने का आरोप लगा है। केस दर्ज कर पुलिस ने शनिवार (22 जनवरी) को आरोपित फैज़ को कर लिया।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, 24 वर्षीया पीड़ित छात्रा CS की पढ़ाई के साथ-साथ एक होटल में नौकरी भी करती है। वह इंदौर के एमजी रोड इलाके में कोचिंग जाती थी। इस बीच अहमद फैज़ उससे अमन बनकर दोस्ती कर लेता है। पीड़िता ने बताया कि 2 साल पता नहीं चला कि फैज मुस्लिम है। वहअपने हाथ में रक्षा सूत्र बाँधता था और पीड़िता को धोखे में रखने के लिए पूजा पाठ भी करता था।
कुछ समय बाद वह पीड़िता को विश्वास में लेकर उसका शारीरिक शोषण शुरू कर देता है। लड़की का आरोप है कि अमन बने अहमद ने उसे नशीला पदार्थ खिला कर संबंध बनाए थे। इसी दौरान वो पीड़िता की अश्लील फोटो और वीडियो भी बना लेता था। कुछ समय बाद जब लड़की को आरोपित के मुस्लिम होने की जानकारी हुई तो उसने दूरी बनानी शुरू कर दी। लड़की ने आरोप लगाया कि अहमद उसका धर्म बदलकर उसे अपने साथ रखना चाहता था।
इसी बीच पीड़िता की शादी कहीं तय हो जाती है। लड़की की सगाई से नाराज अहमद ने लड़की के अश्लील फोटो और वीडियो लड़के के घरवालों को भेज दिए। इसके चलते पीड़िता की शादी टूट गई। रिश्ता टूट जाने के बाद लड़की अपने परिजनों के साथ शिकारपुरा थाने पहुँची। वहाँ पर आरोपित के खिलाफ दुष्कर्म, ब्लैकमेलिंग और मप्र धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 2021 की धाराओं के तहत पुलिस ने केस दर्ज किया। आरोपित के अब्बा का नाम शहनाज अहमद है, जो देवास के आदर्श नगर का निवासी है। आरोपित की गिरफ्तारी के साथ उसका लैपटॉप भी पुलिस ने बरामद कर लिया है।
इस मामले में थाना प्रभारी एमजी रोड डीवीएस नागर ने कहा, “बुराहनपुर की शिकारपुर पुलिस ने लड़की की शिकायत पर FIR दर्ज कर ली है। जीरो FIR के तहत केस यहाँ ट्रांसफर हुआ है। गिरफ्तार आरोपित से पूछताछ करते हुए गहनता से जाँच हो रही है। आरोपित का मोबाईल भी टेक्निकल जाँच के लिए भेजा गया है। जाँच के बाद इस केस में IT एक्ट व अन्य धाराएं भी बढ़ सकती हैं।”
पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज शोएब अख्तर (Shoaib Akhtar) ने विराट कोहली (Virat Kohli) के टेस्ट कप्तानी से इस्तीफा देने के फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) के मुताबिक, ओमान के मस्कट में रविवार (23 जनवरी 2022) को शोएब अख्तर ने कहा, “उन्होंने कप्तानी खुद नहीं छोड़ी है, बल्कि उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर किया गया। वह एक महान क्रिकेटर हैं। उनके अंदर कमाल की प्रतिभा है।”
#WATCH | Virat Kohli did not relinquish the captaincy himself. He was forced to do so… He is a great cricketer. I think he is going to come out of this: Former Pakistan fast bowler Shoaib Akhtar in Muscat, Oman pic.twitter.com/jbXU5My2bj
उन्होंने कहा, “बड़ा बंदा गिरता है, छोटा तो नहीं गिरता ना? बड़े लोगों पर बड़ी मुसीबत आती है। मैं उनके लिए बेहद दुखी हूँ। उन्हें इस स्थिति से निकलना चाहिए। विराट के साथ जो कुछ भी हुआ, उसे भूलकर उन्हें आगे बढ़ना चाहिए।”
अख्तर ने आज तक को दिए एक इंटरव्यू में बताया, “विराट के लिए वह एक मुश्किल समय था। मुझे पता था कि अगर वह टी-20 वर्ल्ड कप नहीं जीतते हैं तो यह उनके लिए एक बड़ी समस्या बन जाएगी और ऐसा हुआ भी। उनके खिलाफ लॉबी है और कुछ लोग उनके खिलाफ हैं। यही वजह है कि उन्होंने कप्तान का पद छोड़ दिया। अब जब यह हो गया है, तो उन्हें अभी कड़ी मेहनत करने की जरूरत है।”
बातचीत के दौरान उन्होंने बताया, “जब भी कोई खिलाड़ी स्टार का दर्जा प्राप्त करता है तो उसे हमेशा समस्याओं का सामना करना होता है, लेकिन डरने की बात नहीं है। अनुष्का बहुत अच्छी महिला हैं और विराट एक महान इंसान हैं। बस उन्हें साहस बनाए रखने की जरूरत है और किसी चीज से डरने की जरूरत नहीं है। पूरा देश उनसे प्यार करता है, यह उनके लिए परीक्षा की घड़ी है।”
अख्तर ने रोहित शर्मा को लेकर कहा कि वह एक महान खिलाड़ी हैं और इसमें कोई शक नहीं है। एक कप्तान के तौर पर वह कैसा प्रदर्शन करते हैं, यह तो समय ही बताएगा, लेकिन मुझे लगता है कि उनके कंधे पर बहुत बड़ी जिम्मेदारी है।
बता दें कि 15 जनवरी को विराट कोहली के भारतीय टेस्ट टीम की कप्तानी से इस्तीफा देने के बाद भारत के पूर्व कप्तान और दिग्गज खिलाड़ी कपिल देव ने कहा था, “कोहली काफी दिनों से दवाब में दिख रहे थे। अब उन्हें अपनी ईगो साइड में रखकर नए कप्तान के अंडर खेलना होगा।”
बॉलीवुड-हॉलीवुड एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा (Priyanka Chopra) और उनके पति निक जोनस (Nick Jonas) ने बीते दिनों सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर कर बताया कि वो सरोगेसी के जरिए एक बच्चे के माता-पिता बन गए हैं। इस खुशखबरी पर प्रियंका की कजिन मीरा चोपड़ा की प्रतिक्रिया सामने आई है। इंडिया टुडे को दिए एक इंटरव्यू में मीरा चोपड़ा (Meera Chopra) ने कन्फर्म किया है कि उनकी बहन को बेटी हुई है। उन्होंने बताया, “प्रियंका हमेशा से बहुत सारे बच्चे चाहती थीं। मैं उनके जीवन के नए अध्याय को लेकर काफी खुश हूँ। वह अपनी बेटी की सुपर मॉम बनने वाली हैं। उन्होंने अपने जीवन के हर हिस्से में बेहतरीन किया है। माँ बनना उनके पावरफुल व्यक्तित्व का एक्सटेंशन है। हम सभी को प्रियंका पर काफी गर्व है।”
वहीं, दूसरी ओर सरोगेसी के दुरुपयोग को लेकर मशहूर लेखिका तसलीमा नसरीन (Taslima Nasreen) ने बिना नाम लिए ट्विटर पर प्रियंका चोपड़ा को लताड़ा है। तसलीमा ने ट्वीट किया, “सरोगेसी गरीब महिलाओं के कारण संभव है। अमीर अपने फायदे के लिए समाज में गरीबी हमेशा बनाए रखना चाहते हैं। अगर आपको बच्चे पालने बेहद जरूरी हैं तो किसी बेघर बच्चे को गोद लें। बच्चों को आपके गुण विरासत में मिलने चाहिए- यह एक स्वार्थी और संकीर्णतावादी अहंकार है।”
Surrogacy is possible because there are poor women. Rich people always want the existence of poverty in the society for their own interests. If you badly need to raise a child, adopt a homeless one. Children must inherit your traits—it is just a selfish narcissistic ego.
लेखिका ने आगे लिखा, “उन माताओं को कैसा महसूस होता है, जब वे सरोगेसी के माध्यम से अपने रेडीमेड बच्चे प्राप्त करती हैं? क्या उनमें भी बच्चों के लिए वैसी ही भावनाएँ होती हैं जैसी कि बच्चों को जन्म देने वाली माँ के भीतर होती हैं?” सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में यूजर्स तसलीमा नसरीन के विचारों से सहमत नजर आए। उन्होंने इस तथ्य की ओर भी इशारा किया कि सरोगेसी का विकल्प अक्सर मेडिकल संबंधी परेशानियों के कारण चुना जाता है।
How do those mothers feel when they get their readymade babies through surrogacy? Do they have the same feelings for the babies like the mothers who give birth to the babies?
तसलीमा नसरीन यही नहीं रुकीं, उन्होंने सरोगेसी को लेकर रविवार (23 जनवरी 2022) को भी एक और ट्वीट किया। उन्होंने लिखा, “मैं तब तक सरोगेसी स्वीकार नहीं करूँगी, जब तक कि अमीर महिलाएँ सरोगेट मॉम नहीं बनतीं। मैं तब तक बुर्का स्वीकार नहीं करूँगी, जब तक पुरुष इसे प्यार से नहीं पहनेंगे। मैं तब तक वेश्यावृत्ति स्वीकार नहीं करूँगी, जब तक कि पुरुष वेश्यावृत्ति में नहीं आ उतर जाते और वे महिला ग्राहकों का इंतजार नहीं करते। तब तक मैं सरोगेसी, बुर्का, वेश्यावृत्ति को महिलाओं और गरीबों का सिर्फ शोषण ही मानूँगी।”
I won’t accept surrogacy until rich women become surrogate mom.I won’t accept burqa until men wear it out of love.I won’t accept prostitution until male prostitutions r built & men wait for female customers.Otherwise surrogacy,burqa,prostitution r just exploitation of women& poor
सरोगेसी का अर्थ यदि सामान्य भाषा में समझें तो जब एक महिला अपनी कोख में किसी और का बच्चा पालने के लिए समझौता करती है और फिर बच्चे के जन्म के बाद उन्हें सौंप देती है तो उस प्रक्रिया को ‘सरोगेसी’ कहा जाता है, जबकि बच्चा पैदा करने वाली औरत ‘सरोगेट मदर’ कहलाती है। सामान्यत: इस प्रक्रिया को उस समय इस्तेमाल किया जाता है, जब दंपत्ति को स्वास्थ्य संबंधी कोई समस्या हो, प्रेगनेंसी से महिला को खतरा हो या फिर औरत खुद अपनी इच्छा से बच्चे को जन्म न देना चाहती हो।
बता दें कि प्रियंका और अमेरिकी सिंगर निक जोनस ने शुक्रवार (21 जनवरी 2022) देर रात सोशल मीडिया पर वेलकम बेबी का मैसेज शेयर कर अपने फैंस को इसकी जानकारी दी थी। 39 वर्षीय एक्ट्रेस ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर लिखा था, “हमें यह बताते हुए बेहद खुशी है कि हमने सरोगेसी के जरिए अपने बच्चे का स्वागत किया है। हम सम्मान के साथ कहना चाहते हैं कि इस खास मौके पर आप हमारी प्राइवेसी का ख्याल रखें, क्योंकि हम अपने परिवार पर फोकस करना चाहते हैं। धन्यवाद।”