केंद्र की मोदी सरकार ने जब से लड़कियों की शादी की उम्र 18 से बढ़ाकर 21 वर्ष करने का निर्णय लिया है उसी के बाद से जगह-जगह निकाह (Nikah) के मामलों में इज़ाफा देखने को मिल रहा है। हालात ये है कि अकेले मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में एक महीने के भीतर ही निकाह करने वालों की संख्या 700 फीसदी बढ़ गई है। अक्टूबर से दिसंबर 2021 के दौरान मस्जिदों में हुए निकाह के आँकड़ों की स्टडी से ये चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य प्रदेश के भोपाल, रायसेन, विदिशा समेत 10 शहरों से कलेक्ट किए गए आँकड़ों से पता चला है कि इन शहरों में निकाह मामलों में 42 फीसदी से 700 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है। इसमें से सबसे अधिक मामले राजधानी भोपाल से सटे रायसेन जिले में बढ़े हैं। वहाँ 700 फीसद वृद्धि दर्ज की गई।
अचानक से निकाह में आई तेजी को लेकर भोपाल की मसाजिद कमेटी के सचिव यासिर अराफात बताते हैं कि अकेले भोपाल में दिसंबर में निकाह के लिए 950 रजिस्ट्रेशन हुए हैं। इनमें से अधिकतर ने निकट तारीखों में ही निकाह करवाने की माँग की है। इसकी वजह के बारे में अराफात कहते हैं कि एक तो लड़कियों की शादी की मिनिमम आयु 21 साल करने का डर है और दूसरा कोरोना के चलते लॉकडाउन का भी डर सता रहा है।
मध्य प्रदेश के 10 जिलों में बढ़े निकाह के मामले (साभार: दैनिक भास्कर)
पीएम मोदी के फैसले का दिख रहा असर
सूफी इस्लामिक बोर्ड के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हाफिज मोहम्मद दानिश के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निकाह के लिए जो उम्र सीमा तय कर दी है, उसके कारण निकाह की संख्या में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। इसकी दूसरी वजह लॉकडाउन का डर भी है।
इसको लेकर भोपाल के जिंसी के रहने वाले रियाज कुरैशी ने कहा कि उनका निकाह माहविया के साथ तय हुआ था, लेकिन कुछ साल के बाद इसे होना था। हालाँकि, 21 साल की उम्र सीमा तय होने के बाद पिछले महीने ही परिजनों ने निकाह करा दिया।
गौरतलब है कि सरकार के इस फैसले का असर हरियाणा में भी देखा जा रहा है। प्रदेश के मेवात जिले में लोग इस विधेयक के कानून बनने से पहले ही अपनी लड़कियों की शादी करा देना चाहते हैं। पिछले महीने मुस्लिम बहुल नूँह में तो लोग ऐसे लड़कों की तलाश में थे जो 2 दिनों में निकाह के लिए तैयार हों।
पिता की हत्या का बदला लेने के लिए अपराध की दुनिया में पाँव जमाने वाला ‘बृजेश सिंह’ आज पू्र्वांचल के बाहुबली नेताओं की लिस्ट में शुमार एक बड़ा नाम है। यूपी में 3-4 दशक पहले का दौर यदि पढ़ने की कोशिश करें तो मालूम चलेगा कि कैसे एक कॉलेज में पढ़ने वाला लड़का एक ऐसा माफिया बनकर उभरा जिसने बाद में मुख्तार अंसारी जैसे खूँखार माफिया पर न केवल बंदूक तानी बल्कि उससे बदला लेने के लिए राजनीति में निर्दलीय एंट्री भी मार ली। इससे पहले उसका नाम ‘जेजे अस्पताल हत्याकांड’ से लेकर तमाम हत्याओं में शामिल था। कुछ बाहुबली नेताओं के पास उसने बतौर शूटर भी काम किया हुआ था। मगर, बाद में उसका दबदबा ऐसा बढ़ा कि वो खुद बाहुबली कहा जाने लगा। इस समय यही बृजेश विधान परिषद का सदस्य है और योगी सरकार में अन्य माफिया नेताओं की तरह जेल में बंद भी।
बृजेश सिंह के आपराधिक जीवन की बात करें तो कहा जाता है कि उस पर 30 से अधिक संगीन आपराधिक मामलों में टाडा, मकोका और गैंग्सटर एक्ट के तहत हत्या, अपहरण, हत्या का प्रयास, हत्या की साजिश, दंगा भड़काने , फर्जी दस्तावेज बनवाने, फर्जीवाड़ा करने के मामले दर्ज हैं। एक समय ऐसा था कि उसे पकड़ने के लिए यूपी पुलिस ने 5 लाख रुपए का ईनाम घोषित किया हुआ था। उसके खिलाफ कई मामले ऐसे थे जिनमें गवाह अपराध के समय कुछ और बयान देते थे लेकिन मामले की सुनवाई होते-होते वो अपने बयान से पलट जाते थे और बृजेश सिंह फिर बरी हो जाता था।
अपराध की दुनिया में वाराणसी के लड़के बृजेश सिंह की एंट्री
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 1984 में बृजेश सिंह कॉलेज में था जब उसके पिता व धौरहरा गाँव निवासी रवींद्र नाथ सिंह को स्थानीय राजनीतिक रंजिश के चलते मौत के घाट उतारा गया। पिता की हत्या के बाद बृजेश के सिर पर ऐसा खून सवाल हुआ कि बीएससी करने वाले लड़के ने पढ़ाई छोड़ दी और निकल पड़ा अपने पिता के हत्यारे को मारने। घटना के एक साल के भीतर बृजेश ने अपने पिता के हत्यारे को मौत के घाट उतार दिया था और 1986 तक वो लोग भी बुरी तरह मारे जा चुके थे जिन्होंने उस हत्यारे का साथ देकर रवींद्र नाथ को मारा था।
इस घटना के बाद बृजेश पकड़ा गया और उसे जेल भेजा गया। पुलिस को लगा कि शायद इस गिरफ्तारी से हत्याओं का सिलसिला रुकेगा। लेकिन नहीं! जेल में तो उसकी मुलाकात हिस्ट्रीशीटर त्रिभुवन सिंह से हो गई। त्रिभुवन भी अपने पिता और भाइयों के कातिलों को मारने के लिए साजिश रच रहा था लेकिन कामयाब उसके हाथ नहीं लगी।
बृजेश की कहानी सुन उसे एहसास हुआ कि उसे मंजिल मिल सकती है। त्रिभुवन ने बृजेश को ऑफर दिया कि वो उसे संरक्षण दे सकता है मगर इसके बदले उसे उसके पिता और भाइयों के कातिलों साधु सिंह और मखनू सिंह को मारना होगा जो कि एक समय में मुख्तार अंसारी के आपराधिक गुरू थे।
बस फिर क्या! साल 1988 का दौर आया। बृजेश भी पुलिस की हिरासत से फरार हो गया। उसने सबसे पहले साधु सिंह को मारने के लिए साजिश रची और पुलिस की हिरासत में अस्पताल लाए गए साधु सिंह को गोलियों से भूनकर मौत के घाट उतार दिया। कहा जाता है कि इस काम के लिए उसने पुलिस का भेष धारण करके ही अस्पताल में एंट्री ली थी और इसी घटना ने उसे मुख्तार का दुश्मन बनाने में बिहार तक दहशत कायम करने में मदद की थी।
बृजेश सिंह के अपराध और मुख्तार अंसारी के साथ हुई भिड़ंत
साल 1992 में बृजेश का नाम फिर एक घटना मे उछला। ये घटना थी- जेजे अस्पताल हत्याकांड। सितंबर 1992 की एक रात 20 से अधिक लोगों ने जेजे अस्पताल के वार्ड नंबर 18 में घुसकर शैलेश हलदरकर को मौत के घाट उतारा। शैलेश बंबई के अरुण गवली गैंग का हिस्सा था जिसकी हत्या का मकसद दाऊद इब्राहिम के रिश्तेदार इस्माइल पारकर की हत्या का बदला लेने के लिए की गई थी।
पूरी घटना में दो हवलदार भी मारे गए थे। ये वो घटना थी जिसमें पहली दफा एके-47 इस्तेमाल हुई और एक ही रात में 500 से ज्यादा गोलियाँ चलीं। इस घटना ने बृजेश को दाऊद के जितना करीब लाया था उतना ही मुंबई में हुए सीरियल ब्लास्ट के बाद दोनों अलग हो गए। मतभेद इतने बढ़े कि दोनों एक दूसरे के दुश्मन बन गए।
बीच में बृजेश सिंह ने धनबाद के झरिया में बाहुबली विधायक सूर्यदेव सिंह के कारोबार को संभाला और शूटर के तौर पर काम करते हुए 6 हत्या के मामलों में नामजद हुआ। बाद में यही बृजेश, सूर्यदेव के बेटे राजीव रंजन के अपहरण और हत्याकांड का मास्टरमाइंड मालूम चला। इसके बाद बृजेश दोबारा पूर्वांचल की ओर चला और यहाँ से शुरू हुआ मुख्तार अंसारी से भिड़ने का सिलसिला। साल 2002 में चट्टी कांड हुआ जब बृजेश सिंह और मुख्तार की सीधी गैंगवार हुई।
दरअसल, उस समय मुख्तार की गाड़ी को रेलवे फाटक के बीच रोककर ट्रक से कुछ लोग निकले और अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी इस दौरान मुख्तार भी अपने वाहन से उतरा और राइफल लेकर मोर्चा संभाला। हमलावरों ने मुख्तार के एक गनर को मारा जबकि गोलीबारी में मुख़्तार ने भी एक हमलावर की हत्या कर दी और साथ ही बृजेश के विरुद्ध मामला भी दर्ज कराया। बाद में बृजेश अंडरग्राउंड हो गया। कई बार उसकी मौत की अफवाह उड़ी। हालाँकि 2008 में बृजेश सिंह का नाम उसकी गिरफ्तारी के साथ फिर उछला और सब हिल गए।
साल 2016 में बृजेश सिंह की राजनीति में हुई एंट्री
साल 2013 को वो समय भी आया जिसने बृजेश का राजनीति की ओर रुख कराया। उस समय पहले मई में बृजेश के सबसे खास शूटर अजय खलनायक पर जानलेवा हमला किया गया और दर्जनों गोलिया दागरकर उसे मौत के घाट उतार दिया गया। फर 3 जुलाई 2013 को उसके चचेरे भाई सतीश सिंह की वाराणसी में गोली मारकर हत्या कर दी गई। जब वह अपने भाई की 13वीं में पहुँचा तो उसका हाल देकर हिल गया और उसने फैसला किया कि मुख्तार से यदि बदला लेना है तो राजनीति में घुसना होगा। इस फैसले के बाद बृजेश सिंह ने MLC का पर्चा भरा और मुख्तार के ख़िलाफ़ अपनी जंग को कोल्ड वार में बदल दिया।
सेंट्रल जेल में बंद है यूपी का बाहुबली नेता बृजेश सिंह
मालूम हो कि इस समय योगी सरकार में अन्य माफिया नेताओं की भाँति बृजेश सिंह भी जेल की सलाखों के पीछे बंद हैं। वह गाजीपुर जिले के हत्या और जानलेवा केस के एक मुकदमे में वाराणसी के सेंट्रल जेल में सदा काट रहा है। पिछले माह उसने विधान परिषद के शीतकालीन सत्र में भाग लेने के लिए प्रयागराज की एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट में अनुमति माँगी थी। हालाँकि कोर्ट ने इस प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने भी कहा कि विधान परिषद का कोई भी सदस्य यदि किसी आपराधिक मामले में जेल में बंद है तो उसे सदन की कार्यवाही में भाग लेने का अधिकार नहीं है।
अभिनेत्री के अपहरण और यौन शोषण के बाद जाँच टीम की हत्या की साजिश के आरोप में मलयालम अभिनेता दिलीप को गिरफ़्तारी से राहत मिली है। केरल उच्च-न्यायालय ने कहा है कि 27 जनवरी, 2022 तक उन्हें गिरफ्तार न किया जाए। केरल हाईकोर्ट में ये मामला फिल्म निर्देशक बालाचंदर के उस बयान के बाद चल रहा है, जिसमें उन्होंने कहा था कि दिलीप जाँच टीम के अधिकारियों की हत्या की साजिश रच रहे हैं। इसके सबूत के रूप में ऑडियो और वीडियो क्लिप्स भी अदालत को उपलब्ध कराए गए हैं।
जबकि दिलीप के अधिवक्ता का कहना था कि इन सबूतों के बावजूद कहीं भी ऐसा साबित नहीं होता कि इसमें हत्या की साजिश रची गई। इसीलिए, इस मामले में जाँच जारी रखते हुए मुख्य आरोपित को हिरासत में न रखने की माँग की गई। केरल के DGP ने उच्च-न्यायालय को सील्ड कवर में एक सबूत सौंपा और कहा कि जाँच जरूरी है। हालाँकि, अदालत ने इसके बारे में जानकारी सार्वजनिक नहीं की। अदालत ने माना कि जब आरोपित की सुरक्षा अंतरिम जमानत करता है तो जाँच मुश्किल हो जाती है।
पुलिस ने कहा कि बिना हिरासत में लिए हुए उपुयक्त जाँच नहीं की जा सकती। ये भी कहा गया कि आरोपित काफी प्रभावशाली व्यक्ति है और यौन शोषण के मामले में बड़ी संख्या में गवाह भी पलट गए हैं। हालाँकि, केरल उच्च-न्यायालय ने गुरुवार (27 जनवरी, 2021) तक दिलीप की गिरफ़्तारी पर रोक लगा दी। साथ ही आदेश दिया कि 23, 24 और 25 जनवरी को वो जाँच अधिकारी के समक्ष पेश होकर पूछताछ का सामना करें। सुबह 9 बजे से रात 8 बजे तक उन्हें पेश होना पड़ेगा।
INTERIM ORDER (contd) "It is made clear that petitioner shall fully cooperate with investigation. Any attempt to interfere with course of investigation will be viewed very seriously by this court. Senior PP shall place a report of any material of investigation in a sealed cover."
साथ ही स्पष्ट निर्देश दिए गए कि याचिकाकर्ता जाँच में सहयोग करे। अदालत ने चेताया कि जाँच में किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप को वो गंभीरता से लेगी। साथ ही पुलिस से कहा कि वो आगे भी सबूत को सील्ड कवर में पेश करे। अदालत ने चेताया कि जाँच में गड़बड़ी किए जाने पर जमानत ख़ारिज कर दी जाएगी। अदालत अब इस मामले को 27 जनवरी को ही सुनेगी। दिलीप ने आरोप लगाया कि घटना के 5 साल बाद नई कहानी रची जा रही है। पुलिस ने आश्वासन दिया था कि हिरासत की अनुमति मिलने पर आरोपित को प्रताड़ित नहीं किया जाएगा।
बता दें कि
दक्षिण भारतीय फिल्मों में काम करने वाली भावना ने आरोप लगाया था कि 17 फरवरी, 2017 की रात 4 लोगों ने गाड़ी में उनका अपहरण किया और उनका यौन शोषण किया। इसके बाद वो वहाँ से भाग निकले। कुछ लोगों ने अभिनेत्री को ब्लैकमेल करने के लिए इस घटना का वीडियो बना लिया। अभिनेता दिलीप पर व्यक्तिगत दुश्मनी में इस घटना को अंजाम दिलवाने के आरोप हैं। आरोप है कि दिलीप ने बदला लेने के लिए ऐसा करने के लिए रुपए दिए थे।
फिल्मों में आने से पहले दिलीप स्टेज शोज किया करते थे। कई नेताओं-अभिनेताओं की उन्होंने मिमिक्री की। 1994 में उन्होंने कॉमेडी फिल्म ‘Manathe Kottaram’ में उन्होंने ‘दिलीप’ का किरदार निभाया, जिसके हिट होने के बाद यही उनका स्क्रीन नाम बन गया। असल में उनका नाम गोपालकृष्णन है। उन्होंने अपनी सह-अभिनेत्री मंजू वॉरीयर से शादी की (जिनसे बाद में तलाक हो गया और दूसरी अभिनेत्री से शादी की)। मलयालम सुपरस्टार ममूटी और मोहनलाल के बाद दिलीप तेज़ी से उभरे। उन्होंने अपनी प्रोडक्शन कंपनी शुरू की।
उत्तराखंड (Uttarakhand) के हरिद्वार में पिछले महीने हुई धर्म संसद (Dharm Sansad) के बाद उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के अलीगढ़ जिले में 22 और 23 जनवरी 2022 को होने वाली धर्म संसद को कोरोना के चलते रद्द कर दिया गया है। इसको लेकर धर्म संसद की आयोजक महामंडलेश्वर अन्नपूर्णा भारती उर्फ पूजा शकुन पांडे (Pooja Shakun Pandey) ने कहा है कि विधानसभा चुनाव के पहले चरण में ही अलीगढ़ में वोटिंग होनी है। साथ ही कोरोना की तीसरी लहर भी है। उन्होंने कहा, “सबसे अहम बात ये कि मेरे दो शेर योद्धा उत्तराखंड की जेलों में बंद है।”
अन्नपूर्णा भारती यति नरसिंहानंद सरस्वती (Yati Narsinghanand) और जीतेंद्र नारायण त्यागी के जेल में बंद होने के कारण निर्णय लिया है कि अलीगढ़ धर्म संसद को रद्द किया जाएगा। उन्होंने ये भी कहा कि महाराजजी के बाहर आने के बाद समय तय कर धर्म संसद आयोजित की जाएगी। गौरतलब है कि इससे पहले शुक्रवार (21 जनवरी 2022) को सुप्रीम के खिलाफ कथित टिप्पणी के मामले में अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल (KK Venugopal) को यति नरसिंहानंद सरस्वती के खिलाफ कार्रवाई को पत्र लिखा गया था।
इस मामले में यति नरसिंहानंद सरस्वती के खिलाफ सामाजिक कार्यकर्ता शची नेल्ली ने वेणुगोपाल को पत्र लिखा था। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट की अवमानना के मामले में केस चलाने के मामले में केस चलाने के लिए अदालत की अवमानना अधिनियम की धारा 15 के तहत अटॉर्नी जनरल या सॉलिसिटर जनरल की इजाजत आवश्यक है।
क्या कहा था महंत यति नरसिंहानंद ने
शिकायतकर्ता नेल्ली के मुताबिक, यति नरसिंहानंद ने विशाल नाम के एक व्यक्ति को दिए इंटरव्यू में सुप्रीम कोर्ट और संविधान के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की थी। नरसिंहानंद सरस्वती से हरिद्वार धर्म संसद की कार्रवाई को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट, इस संविधान पर हमें कोई भरोसा नहीं है। ये संविधान हिंदुओं को खा जाएगा, इस देश के 100 करोड़ हिंदुओं को खा जाएगा। इस संविधान में विश्वास करने वाले सारे लोग मारे जाएंगे। जो लोग इस सिस्टम पर, नेताओं पर, पुलिस, फौज और सुप्रीम कोर्ट में भरोसा करेगा, वे सभी कुत्ते की मौत मरने वाले हैं।
राजधानी दिल्ली के गीता कालोनी थाना क्षेत्र में एक 4 साल की नाबालिग बच्ची के साथ रेप की घटना सामने आई है। आरोप नसरूल नाम के एक 30 वर्षीय व्यक्ति पर है। घटना के विरोध में बड़ी संख्या में लोगों ने गीता कॉलोनी थाने के आगे प्रदर्शन किया है। पुलिस ने आरोपित नसरूल को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस पर पीड़ित परिवार के लोगों की भी पिटाई का आरोप है। घटना 20 जनवरी (गुरुवार) की है।
गीता कॉलोनी के अंदर 3 साल की बच्ची मासूम बच्ची के साथ रेप आरोपी का नाम नूरुल इस्लाम आप सभी भाइयों से हाथ जोड़कर विनती है इस वीडियो को और मेरे इस मैसेज को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि बच्ची को इंसाफ मिल सके…..@DelhiPolice@cbipic.twitter.com/amQ2PZTRE8
पीड़िता की माँ ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत के मुताबिक, “घटना दोपहर लगभग 1.30 की है। मेरी बेटी घर के बाहर खेल रही थी। मैंने उसे आवाज लगाई तो वह घबराई हुई मेरे पास आई। वह मेरे लगे लग कर लम्बी – लम्बी साँसे लेने लगी। मेरे सवाल करने पर बेटी ने बताया कि मास्टर अंकल (नसरूल) ने अपनी सू-सू मेरी सू-सू में डाला और मेरी पेंटी में भी सू-सू डाला। मैंने यह बात अपने पति को बताई। मेरे पति मास्टर अंकल को पकड़ लाए। मेरी बेटी ने मास्टर अंकल को पहचान लिया। फिर हम थाने आ गए। मैंने अपनी बेटी की जाँच अस्पताल में करवाई। मास्टर अंकल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।”
FIR
पीड़िता की काउंसलिंग भी करवाई गई। आरोपित नसरूल सफेदा झुग्गी, गीता कालोनी, शाहदरा का रहने वाला है। पुलिस ने नसरूल पर 376 AB IPC के साथ 6 पॉक्सो एक्ट में कार्रवाई की है। इस केस की जाँच महिला सब इंस्पेक्टर शिल्पी गुप्ता को सौंपी गई है।
पीड़ित बच्ची के पिता ने ऑपइंडिया को अपने साथियों पर पुलिस के लाठीचार्ज के बारे में बताया
इस घटना के विरोध में घटनास्थल से तमाम लोग थाने के आगे जमा हो गए। वो पुलिस से नसरूल पर FIR दर्ज में देरी का कारण पूछने लगे। जब काफी देर तक उन्हें कोई जवाब नहीं मिला तब गीता कॉलोनी थाने के आगे नारेबाजी शुरू हो गई। इस दौरान कुछ लोगों ने सड़क जाम करने का प्रयास किया। जाम को खुलवाने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया। लाठीचार्ज में पीड़ित पक्ष के कुछ लोगों को चोटें आईं। पीड़िता के पिता ने इस बात की जानकारी ऑपइंडिया को घटना के दिन रात में लगभग 8 बजे देते हुए कहा, “मैं ट्रांसपोर्ट का काम करता हूँ। मेरी बेटी लगभग 4 साल की है। मेरी मदद के लिए कोई भी नहीं आया। आरोपित मोहम्मडन है। वो मास्टर जी के यहाँ रहता था। उसका नाम नसरूल इस्लाम है। आरोपित मेरे घर के पास में रहता है। मेरे सपोर्ट में जितने लोग आये हैं उन पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। मेरी मम्मी को भी मारा गया।”
सफेदा झुग्गी गीता कॉलोनी के राजकुमार प्रधान ने पुलिस पर लगाया पिटाई का आरोप
पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों में राजकुमार भी शामिल थे। राजकुमार ने ऑपइंडिया को बताया, “मेरे पड़ोस की बच्ची थी ये। लड़की मेडिकल करवाने गई थी। उस समय कुछ स्थानीय लोग आक्रोशित हुए। उसके बदले SHO साहब ने अपने पुलिस स्टाफ को ले कर हमें पीटना चालू कर दिया। हमारे बेटे को भी अंदर ले जा कर 10-20 थप्पड़ मारे गए। हमें अंदर घसीटा गया पर मेरा शरीर भारी होने के कारण हमें यहीं छोड़ दिया। मुझ से पूछा गया कि यहाँ से जाने का क्या लेगा? मुझ पर पब्लिक को भड़काने का आरोप लगाया गया। आरोपित को बच्ची के परिवार वाले ही पकड़ कर दिए हैं। नसरूल सिलाई का काम करता है। बच्ची को इंजेक्शन आदि दिया गया है।”
राजकुमार प्रधान ने पुलिस पर लगाया पिटाई का आरोप
आम आदमी पार्टी के विधायक पर लगाया राजनैतिक दबाव बनाने का आरोप
घटना की सूचना पर मौके पर गए आम आदमी पार्टी के विधायक एस के बग्गा को पीड़ित परिवार का भारी विरोध झेलना पड़ा। उनके द्वारा वहाँ लोगों से की जा रही अपील बेअसर रही। मौके पर मौजूद लोग उनके खिलाफ भी नारेबाजी शुरू कर दिए। पीड़ित परिवार और वहाँ मौजूद प्रदर्शनकारियों ने ऑपइंडिया को बताया, “आप विधायक बग्गा राजनैतिक दबाव बना रहे हैं हम पर। वो हमें यहाँ से जाने और खुद सब देख लेने की बात कह रहे हैं। वो हमें यहाँ से हटाना चाह रहे हैं लेकिन हम कार्रवाई होने तक कहीं नहीं जाने वाले।”
ACP ने कहा बच्ची मर गई क्या ?
मौके पर प्रदर्शन कर रहे जनसमूह में से भारत चौहान नाम के स्थानीय व्यक्ति और कुछ अन्य लोगों ने आरोप लगाया कि उनकी नाराजगी ACP के बयान से है। ये आरोप लगाने वालों में बच्ची के मामा भी शामिल हैं। आरोपित पर कार्रवाई की माँग के दौरान ACP ने ‘बच्ची मर गई क्या’ जैसी बातें बोलीं। भीड़ बार-बार बोल रही थी कि जब तक कार्रवाई की पुष्टि नहीं हो जाती तब तक हम नहीं जाने वाले। साथ ही वहाँ इसी गुस्से में ‘दिल्ली पुलिस हाय-हाय’ के भी नारे लग रहे थे। मौके पर मौजूद जनसमूह ‘नसरूल को फाँसी दो’ की माँग कर रहा था।
प्रदर्शनकारी कह रहे थे ‘हमें चाहिए योगी आदित्यनाथ’
ऑपइंडिया की कवरेज के दौरान थाने के आगे जमा प्रदर्शनकारी योगी-योगी के नारे लगाते दिखाई दिए। उनमें से कई युवा ‘दिल्ली में भी योगी आदित्यनाथ’ को को लाने की बात कहते सुनाई दिए। वो दिल्ली का CM योगी को बनाने के नारे भी लगा रहे थे।
पुलिस ने पीड़ितों को ही लाठी दिखा कर कहा, “देखता हूँ कि ये कैसे नहीं मानते हैं”
गीता कॉलोनी थाने का स्टॉफ पीड़ित के परिजनों को धमकाता हुआ
ऑपइंडिया के पास मौजूद एक वीडियो में पुलिसकर्मी हाथों में डंडा लिए दिखाई दे रहा है। वह बाकी पुलिसकर्मियों से कह रहा है कि, “देखता हूँ कि ये कैसे नहीं मानते हैं।’ यह चेतावनी पीड़ित के परिजनों को तब दी जा रही थी जब वो सड़क पर जाम लगाने की कोशिश कर रहे थे। इसी के बाद पुलिस द्वारा लाठीचार्ज किया गया।
दिल्ली प्रदेश महिला कॉन्ग्रेस ने इस घटना पर संज्ञान लिया है। इस मामले में उनके एक प्रतिनिधि मंडल ने गीता कॉलोनी थाने में पुलिस अधिकारियों से मुलाक़ात की है। 21 जनवरी (शुक्रवार) को मुलाक़ात की है।
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के मेरठ जिले में घर के अंदर घुसकर एक युवती से गैंगरेप (Gangrape) करने की कोशिश करने के आरोप में पुलिस ने मारूफ को गिरफ्तार कर लिया। हालाँकि, उसके दो अन्य साथी अभी भी फरार हैं। आरोपित पर गैंगरेप करने में विफल रहने पर लड़की को जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप है।
रिपोर्ट के मुताबिक, घटना करीब दो महीने पुरानी और मेरठ के लिसाड़ीगेट इलाके के श्यामनगर की है। जहाँ 22 नवंबर 2021 को पीड़िता अपने घर में अकेली ही थी। उसी दौरान अपने दो अन्य साथियों के साथ आरोपित मारूफ पीड़िता के घर में घुस गया। उसने उसके साथ जबरदस्ती की। उसके कपड़े फाड़ डाले और उसका गैंगरेप करने की कोशिश की। हालाँकि, पीड़िता ने खुद को बचाने के लिए चिल्लाई तो आरोपित उसे घर में ही छोड़कर वहाँ से फरार हो गए।
जाते-जाते उसे धमकी दी कि अगर इसके बारे में उसने किसी के सामने अपना मुँह खोला तो उसकी हत्या कर देंगे। शुक्रवार (21 जनवरी 2022) को आरोपित को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इस मामले में पुलिस का कहना था कि आरोपित के खिलाफ मिले सबूतों के आधार पर यह गिरफ्तारी की गई है औऱ जल्द ही दो अन्य आरोपितों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
बालिग है पीड़िता
दुष्कर्म की कोशिश के मामले में कोतवाली थाने की सर्किल ऑफिसर अरविंद चौरसिया ने कहा है कि दो महीने पहले पीड़िता की माँ पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराने के लिए गई थी। उस वक्त उसने पीड़िता को नाबालिग बताते हुए कहा था कि उसकी उम्र 16 साल है। हालाँकि, बाद में जब पुलिस द्वारा पीड़िता के आधार कार्ड की जाँच की गई तो पता चला कि वो 19 साल की है। बहरहाल, कोर्ट में पीड़िता के बयान को दर्ज कराया गया है और उसी के आधार पर कार्रवाई की जा रही है।
मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) कॉन्ग्रेस (Congress) की नेता नूरी खान (Noori Khan) का नया वीडियो सामने आया है, जिसमें वो प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार (Shivraj Singh Chauhan Government) के खिलाफ शिप्रा नदी में जल सत्याग्रह करती दिख रही हैं। मोक्षदायिनी शिप्रा नदी के जल में नूरी ने अपना सत्याग्रह शुरू ही किया था कि अचानक से वो नदी की तरफ सरक गई और डूबने लगीं। उन्हें डूबता देख कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने नदी में छलाँग लगाकर उन्हें बचाया।
रिपोर्ट के मुताबिक, नूरी को अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है, जहाँ उनकी हालत ठीक बताई जा रही है। कॉन्ग्रेस नेत्री नूरी खान प्रियंका गाँधी के ‘लड़की हूँ लड़ सकती हूँ’ के नारे के साथ सत्याग्रह करने के लिए शिप्रा नदी के रामघाट पर गई थीं। साथ में उनके साथ सैकड़ों की संख्या में कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ता भी हाथों में तख्तियाँ लिए नदी के किनारे बैठे दिखे। नूरी खान शिप्रा नदी को स्वच्छ करने के लिए सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रही हैं।
कॉन्ग्रेस नेत्री आरोप है कि शिप्रा नदी में खानों के गंदे पानी को आने से रोकने के लिए खान डायवर्जन योजना में 100 करोड़ रुपए खर्च किए गए। इसके अलावा 500 करोड़ रुपए केवल शिप्रा के अविरल बहाब को बनाए रखने के लिए खर्च किए गए, लेकिन नदी की हालत जस की तस है। नूरी का कहना है कि शिवराज सरकार नदी के शुद्धिकरण के नाम पर किए गए 600 करोड़ रुपए के भ्रष्टाचार का हिसाब दे।
पद नहीं मिलने पर दिया था इस्तीफा
उल्लेखनीय है कि ये वही नूरी खान हैं, जिन्होंने हाल ही में पार्टी में बड़ा पद नहीं मिलने पर कॉन्ग्रेस से इस्तीफा दे दिया था। नूरी का आरोप था कि मुस्लिम होने के कारण उन्हें पार्टी में बड़ा पद नहीं दिया जाता है। हालाँकि, इसके मात्र दो घंटे के भीतर राज्य के कॉन्ग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ (Kamalnath) ने नूरी से बात कर उन्हें पार्टी में बड़ा ओहदा देने का भरोसा दिया। इसके बाद उन्होंने अपना इस्तीफा वापस ले लिया।
बहरहाल नूरी को मध्य प्रदेश महिला कॉन्ग्रेस का प्रदेश उपाध्यक्ष बना दिया गया है। इसको लेकर नूरी ने ट्वीट कर पार्टी का शुक्रिया भा अदा किया।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (UP Assembly Election 2022) के लिए समाजवादी पार्टी ने रामपुर शहर विधानसभा सीट से जेल में बंद आजम खान (Azam Khan) को भी चुनावी मैदान में उतारा है। ये वही आजम खान हैं, जिनका मुजफ्फरनगर दंगों (Muzaffarnagar Riots) में नाम सामने आया था। उन पर सपा के शासनकाल के दौरान दंगाइयों को बचाने और पुलिसकर्मी को निलंबित कराने के आरोप लगे थे।
बात वर्ष 2013 की है। यूपी की तत्कालीन सरकार के कद्दावर मंत्री आजम खान पर मुजफ्फरनगर के प्रभारी मंत्री रहते हुए तत्कालीन डीएम और एसएसपी का तबादला कराने, हिरासत में लिए गए मुस्लिम युवकों को दबाव देकर छुड़वाने और पाँच इंस्पेक्टरों का जबरन तबादले कराने के आरोप लगे थे। मुजफ्फरनगर दंगे की जड़ माने जाने वाले कवाल कांड में दो ममेरे भाइयों- सचिन व गौरव और दूसरे पक्ष से शाहनवाज की मौत के बाद अखिलेश सरकार की काफी थू-थू हुई थी।
मामले से संबंधित एक स्टिंग ऑपरेशन में पुलिसवालों को आजम खान का नाम लेते हुए देखा गया था, पर एसआईटी ने इसमें उनकी कोई भूमिका नहीं मानी थी। वहीं, बीजेपी सांसद संजीव बालियान और विरोधी दलों ने भी आजम खान पर आरोप लगाया था कि उन्होंने तत्कालीन डीएम सुरेंद्र सिंह और एसएसपी मंजिल सैनी का तबादला करवाया था।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आजम खान को नोटिस जारी किया था
मालूम हो कि इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी के मंत्री आजम खान को नोटिस भी जारी किया था। साथ ही कोर्ट ने मुजफ्फरनगर दंगों के मामलों में निलंबित किए गए पाँच पुलिसवालों के निलंबन पर रोक लगा दी थी। उस दौरान पुलिसवालों ने आरोप लगाया था कि यह निलंबन यूपी के मंत्री आजम खान के इशारे पर किया गया था और उन्हीं के दबाव के चलते उन सात लोगों को रिहा किया गया था, जिन पर सचिन और गौरव की हत्या का आरोप लगा था। कहा जा रहा था कि इसी वजह से इलाके में दंगे भड़के थे। इन दंगों में लगभग 65 लोग मारे गए थे और करीब 45 हजार लोग विस्थापित हुए थे।
राकेश टिकैत ने भी सपा नेता पर लगाया था आरोप
वर्तमान में किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने भी उस वक्त मुजफ्फरनगर हिंसा को लेकर इशारों-इशारों में सपा के स्थानीय नेता पर भी आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि हिंसा के पीछे रामपुर के आजम नहीं, बल्कि मुजफ्फरनगर के ‘आजम’ दोषी हैं। दैनिक जागरण से बातचीत के दौरान टिकैत ने कहा था, “27 अगस्त से सात सितंबर तक मुजफ्फरनगर के एक स्थानीय नेता के कहने पर पुलिस प्रशासन की जुबां बंद रही। दो आला अफसरों ने जबान खोली तो उनका तबादला कर दिया गया। कवाल कांड के आरोपितों को थाने से छुड़वाया गया, इसी के बाद आक्रोश भड़का।”
उस समय राकेश टिकैत ने कहा था कि नंगला मंदौड़ महापंचायत में भाजपा विधायक संगीत सोम हों या सुरेश राणा, किसी ने भी ऐसा भाषण नहीं दिया, जिससे उन्माद भड़कता हो। संगीत सोम व सुरेश राणा पर रासुका की कार्रवाई गलत है। पुलिस अफसरों को चाहिए कि वह सियासी चक्रव्यूह से निकल दोषियों पर शिकंजा कसें।
बता दें कि बीते दिनों समाजवादी पार्टी ने रामपुर जिले की पाँचों सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा की थी। इन उम्मीदवारों में जेल में बंद आजम खान (Azam Khan) को भी रामपुर सीट से टिकट दिया गया है। इसके अलावा अखिलेश यादव ने आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम खान (Abdullah Azam Khan) को स्वार-टांडा से टिकट दिया है।
बॉलीवुड से हॉलीवुड तक का सफर तय करने वाली प्रियंका चोपड़ा माँ बन गई हैं। वह और उनके पति निक जोनस ने सरोगेसी (Surrogacy) के जरिए माता-पिता बनना चुना और जब बच्चे के जन्म का दिन आया तो उन्होंने अपने फैन्स को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इसकी सूचना दी।
अब प्रियंका के पोस्ट के बाद से एक बार फिर से देश में सरोगेसी पर बातें होनी शुरू हो गई हैं। कुछ लोग आज भी ‘माँ-बाप’ बनने के लिए अपनाई गई प्रक्रिया की आलोचना करते हैं तो कुछ इसे बेहतर विकल्प मानते हैं। इनके अलावा कुछ ऐसे भी जो इस सोच-विचार में रहते हैं कि आखिर सरोगेसी क्या चीज है। आइए आज इसी संबंध में आपको पूरी जानकारी देते हैं और बताते हैं कि किन-किन नामी हस्तियों ने इस प्रयोग को अपनाया है।
सरोगेसी होती क्या है?
सरोगेसी का अर्थ यदि सामान्य भाषा में समझें तो जब एक महिला अपनी कोख में किसी और का बच्चा पालने के लिए समझौता करती है और फिर बच्चे के जन्म के बाद उन्हें सौंप देती है तो उस प्रक्रिया को ‘सरोगेसी’ कहा जाता है जबकि बच्चा पैदा करने वाली औरत ‘सरोगेट मदर’ कहलाती है। सामान्यत: इस प्रक्रिया को उस समय इस्तेमाल किया जाता है जब दंपत्ति को स्वास्थ्य संबंधी कोई समस्या हो, प्रेगनेंसी से महिला को खतरा हो या फिर औरत खुद अपनी इच्छा से बच्चे को जन्म न देना चाहती हो।
ऐसी स्थिति में सरोगेसी का सहारा लिया जाता है। पूरी प्रक्रिया से पहले सरोगेट मदर और दंपत्ति के बीच समझौता होता है। जिसमें इस बात का उल्लेख होता है कि भले ही बच्चे को जन्म कोई अन्य महिला दे रही है मगर उसके अधिकारी ये सरोगेसी कराने वाले माता-पिता ही हैं। यही दोनों उस महिला को गर्भावस्था के दौरान हर जरूरत के लिए पैसे मुहैया कराते हैं और कई बार खुद भी उसका व बच्चे का ध्यान रखते हैं।
सरोगेसी से बच्चा पैदा करने के दो तरीके
सरोगेसी से बच्चा करने के दो तरीके होते हैं। एक जिसमें पिता का स्पर्म इस्तेमाल होता है लेकिन एग्स उसी महिला के होते हैं जो बच्चा पैदा करने के लिए कोख देती है। दूसरा तरीका होता है-‘Gestational surrogate’ इसमें जो दंपत्ति बच्चा चाहता उसमें पिता के स्पर्म इस्तेमाल होते हैं और माँ के एग्स का प्रयोग होता है। इस वाले प्रोसेस में सिर्फ कोख ही दूसरी महिला की होती है। बच्चे के जेनेटिकली अपने माता-पिता का ही होता है।
सरोगेट मदर चुनने की प्रक्रिया और देश में मौजूद कानून
बता दें कि जब एक जोड़ा ये तय करता है कि उसे सरोगेसी के जरिए बच्चा चाहिए तो सबसे महत्वपूर्ण काम ही बच्चे के लिए सरोगेट मदर ढूँढने का होता है। ऐसी स्थिति में किसी जरूररतमंद औरत से समझौता होता है जिन्हें पैसे के बदले कोख किराए पर देने में कोई गुरेज नहीं होता।
कई बार गरीब औरतें आर्थिक दिक्कतों की वजह से सरोगेट मदर बनती हैं जिसके बदले उसे कपल की ओर से पैसे दिए जाते हैं। इस तरह की सरोगेसी को ‘कमर्शियल सरोगेसी’ कहते हैं। भारत में कमर्शियल सरोगेसी को साल 2002 में अनुमति दी गई थी। हालाँकि पिछले साल इस पर रोक लगाने के लिए सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम 2021 पास किया गया।
नए कानून के तहत सरोगेसी को धंधा बनाए जाने पर रोक लगाने का प्रावधान है। इसमें केवल और केवल मातृत्व सुख प्राप्त करने के लिए ही सरोगेसी को अनुमति दी जाएगी। नए एक्ट में जब दंपत्ति को किसी कारणवश बच्चा न हो पा रहा हो तो इसकी अनुमति दी जाएगी। सरोगेट माँ को गर्भावस्था के दौरान मेडिकल खर्च और बीमा कवरेज के अलावा और कोई वित्तीय मुआवजा नहीं दिया जाएगा।
कौन-कौन सी हस्तियाँ बनीं सरोगेसी से माता-पिता
उल्लेखनीय है कि प्रियंका चोपड़ा और निक जोनस अकेले ऐसे कपल नहीं हैं जिन्होंने सरोगेसी के जरिए बच्चा किया हो। कई हस्तियाँ ऐसी हैं जो इस प्रक्रिया से माता-पिता बने। साल 2020 में शिल्पा शेट्टी और राज कुंद्रा ने सरोगेसी के जरिए बेटी समीशा को पाया था। सनी लियोन और उनके पति डेनियल को साल 2017 में इसी माध्यम से दो बेटे हुए थे। शाहरुख खान के बेटे अबराम, आमिर खान के बेटे आजाद राव खान भी सरोगेसी के जरिए पैदा हुए। इनके अलावा कई नामी हस्तियाँ जैसे करण जौहर, तुषार कपूर करण ने भी पिता बनने का सुख पाया।
अयोध्या राम मंदिर (Ayodhya Ram Mandir) को विवादित बनाने के मकसद से ‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने जमीनों की खरीद पर किस तरह फैक्ट गढ़े, यह हम अपनी रिपोर्ट में आपको बता चुके हैं। इस तरह की रिपोर्टों को लेकर अयोध्या के लोगों की प्रतिक्रियाओं से भी आपको अवगत करा चुके हैं। जमीन सौदों की पड़ताल के दौरान गाली-गलौज करने वाले कथित पत्रकार के बारे में भी बता चुके हैं। इस पूरे विवाद में अयोध्या के एक स्थानीय पत्रकार जिसका नाम दुर्गा प्रसाद यादव (DP Yadav) है, की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। कई ऐसे ‘संयोग’ हैं जो इस पत्रकार के लिंक आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह और ‘इंडियन एक्सप्रेस’ में जमीन सौदों (Land Deals In Ayodhya) को लेकर रिपोर्ट करने वाले श्यामलाल यादव से होने का इशारा करते हैं। एक और यादव हैं- अरविन्द जो खुद को किसान नेता बताते हैं, उनके तार भी इन सबसे जुड़े हुए हैं। अयोध्या में जमीन सौदों को विवादित बताने वाली आप जितनी भी रिपोर्ट देखेंगे उसमें आपको अरविन्द यादव दिख जाएँगे।
दावा है कि अयोध्या में रिपोर्टिंग के दौरान श्यामलाल यादव का ‘गाइड’ दुर्गा यादव ही था। AAP सांसद संजय सिंह के ‘गाइड’ अरविंद यादव से दुर्गा की करीबी को लेकर अयोध्या में आपको कोई भी बता देगा। एक तथ्य यह भी है कि दुर्गा यादव खुद जमीन के सौदों से जुड़ा रहा है। जिन जगहों के जमीन सौदों को लेकर ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट में सवाल उठाए गए हैं, उनमें से एक जगह दुर्गा की जमीन भी है। हमने इस संबंध में सांसद संजय यादव से लेकर पत्रकार श्यामलाल यादव तक से सवाल किए, लेकिन उनके जवाब का आज भी इंतजार है।
JK न्यूज का संवाददाता दुर्गा यादव
दुर्गा यादव अयोध्या में JK News न्यूज के संवाददाता हैं। दुर्गा यादव के फेसबुक प्रोफाइल को खँगालने पर आपको तमाम वे न्यूज मिल जाएँगे जो अयोध्या में जमीन सौदों को विवादित बताते हैं। संजय सिंह के बरहटा माँझा दौरे की खबर भी मिल जाएगी। 22 दिसंबर 2021 को ‘इंडियन एक्सप्रेस’ में जमीन सौदों पर रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद दुर्गा ने भी लंबा-चौड़ा पोस्ट शेयर किया है। इस पोस्ट में समाजवादी पार्टी के कई नेताओं और कुछ पत्रकारों को भी टैग किया है। इसके बाद 28 दिसंबर को संजय सिंह ने बरहटा का दौरा किया। उन लोगों से मुलाकात की जिन्हें दुर्गा यादव ने अपनी कथित ग्राउंड रिपोर्ट में MRVT ट्रस्ट द्वारा पीड़ित बताया था।
दुर्गा यादव और अरविन्द यादव बेहद करीबी बताए जाते हैं
दुर्गा की रिपोर्ट में सौदों को लेकर बड़े दावे करने वाले अरविन्द कुमार यादव, संजय सिंह के दौरे के दौरान उनके साथ भी देखे जा सकते हैं। अरविन्द यादव को लेकर दुर्गा यादव फेसबुक पर पोस्ट भी करते रहते हैं। इन पोस्टों में वे उन्हें ‘किसानों का मसीहा’ बताते हैं। उनके खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर आपत्ति भी जताते हैं।
खुद जमीन की लड़ाई लड़ रहे दुर्गा यादव
गंजा गाँव की एक जमीन को लेकर दुर्गा यादव हाई कोर्ट में मुकदमा भी लड़ रहे हैं। गंजा गाँव का जिक्र ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट में भी है। दुर्गा यादव ने ऑपइंडिया के साथ बातचीत में गंजा गाँव में अपनी जमीन होने की बात मानते हुए बताया कि उचित मुआवजा नहीं मिलने पर उन्होंने केस कर रखा है। दुर्गा यादव के मुताबिक, “मैंने अयोध्या के जिलाधिकारी रहे अनुज कुमार झा पर मुकदमा किया था। इस मुकदमे के बाद मेरा स्थानीय मीडिया ने खूब नाम उछाला था। मैंने अधिकारियों के तमाम गलत कारनामों की जानकारी सबूतों के साथ हाई कोर्ट में जमा किया है। मुझे लगता है कि खबर आदि के लिए कागज़ वहीं से निकाले गए हैं।” इस पूरे मामले को दुर्गा यादव ने अपने फेसबुक पर भी नवम्बर 2021 में शेयर किया था।
IAS अनुज झा को लेकर दुर्गा यादव की नवम्बर 2021 की पोस्ट तथा उस समय प्रकाशित खबरें
IAS अनुज कुमार झा का नाम इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में भी है। यह भी दावा है कि IAS झा के केस में भी दुर्गा के सहयोगी अरविन्द यादव ही हैं।
‘अयोध्या के प्रोजेक्ट में अड़ंगा डालने के प्रयास’
ऑपइंडिया ने IAS अनुज कुमार झा से बात की। बातचीत के दौरान दुर्गा यादव द्वारा उन पर FIR के प्रयास और अरविन्द यादव द्वारा उनके खिलाफ लगातार आवाज उठाने की वजह पूछी गई। अनुज झा के मुताबिक, “मेरे ऊपर जो भी आरोप लगा रहे हैं वो झूठे हैं। मेरी जिम्मेदारी अयोध्या के शासकीय प्रोजेक्ट को पूरा करने की थी जिसे मैं कर रहा था। बीच मे अड़ंगा डालने के प्रयास किए गए। मैंने उन्हें सफल नहीं होने दिया। इसी वजह से मेरे विरुद्ध 156(3) के तहत कोर्ट में केस की याचिका डाली गई थी। बाकी मैंने अपना वर्जन अपने ट्वीट में दे दिया है। उसे ही मेरा स्पष्टीकरण समझा जाए।”
अयोध्या में महर्षि रामायण विद्यापीठ ट्रस्ट के द्वारा किए गए भूमि विक्रय के सम्बंध में कुछ समाचार चैनल/माध्यमों के द्वारा मेरे एवं मेरे पिताजी के सम्बंध में भ्रामक/असत्य रिपोर्ट चलायी गई है, इस सम्बंध में मेरा वक्तव्य। @aajtak@abplivenews@IndianExpresspic.twitter.com/9l4gSkC5nx
दिसम्बर 2021 की रिपोर्ट से पहले इंडियन एक्सप्रेस ने 22 फरवरी 2020 को भी अयोध्या से जुड़ी एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी। यह रिपोर्ट दुर्गा यादव, अरविन्द यादव व कुछ अन्य के बयान पर बनी थी। उस रिपोर्ट में भी DM अनुज कुमार झा, MRVT ट्रस्ट और बरहटा माँझा को प्रमुखता दी गई थी।
2020 में भी इंडियन एक्सप्रेस ने अलापा था विवादों का राग
पत्रकार श्यामलाल यादव ने ई-मेल पर सम्पर्क करने को कहा
इंडियन एक्सप्रेस के श्यामलाल यादव ने ऑपइंडिया को बताया कि उन्होंने अपनी रिपोर्ट करीब लगभग 10 दिन तक अयोध्या के विभिन्न क्षेत्रों में जमीनी पड़ताल के आधार पर बनाई है। 15 किमी दूर जमीन को भी राम मंदिर निर्माण स्थल के 5 किलोमीटर के दायरे में बताने को लेकर सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “दूरी एरियल डिस्टेंस के आधार पर निकाली है।” अन्य सवालों का जवाब देने से उन्होंने इनकार करते हुए ई-मेल भेजने को कहा। 2 जनवरी 2022 को हमने अपने सवालों के साथ उन्हें मेल किया था, जिसका जवाब खबर लिखे जाने तक नहीं मिला था। उनका पक्ष आने के बाद हम इस खबर को अपडेट करेंगे।
इंडियन एक्सप्रेस की खबर और पत्रकार श्यामलाल यादव
एक भुक्तभोगी पत्रकार
अयोध्या में एक और पत्रकार हैं। नाम है संदीप सिंह। NI न्यूज के सीनियर रिपोर्टर हैं। वे खुद को दुर्गा यादव से पीड़ित बताने है। ऑपइंडिया को उन्होंने बताया एक केस में दुर्गा यादव उनको धमका भी चुके हैं। संदीप सिंह ने बताया कि वे मूल रूप से सुल्तानपुर के रहने वाले हैं। करीब तीन साल पहले अयोध्या में कोचिंग शुरू करने के लिए दिल्ली के मुखर्जी नगर से आए थे। कोचिंग के लिए अयोध्या के गाँव जनौरा में एक जमीन का एग्रीमेंट करवाया। लेकिन उस जमीन को अयोध्या के एक बड़े भूमाफिया की नजर लग गई और संदीप के लिए परेशानियों की शुरुआत हो गई।
उन्होंने बताया, “मैंने एग्रीमेंट में 10 लाख रुपए से अधिक खर्च कर रखे थे इसलिए मैं पीछे नहीं हटा। कुछ समय बाद उसी जमीन के करीब एयरपोर्ट प्रस्तावित हो गया। ऐसा होने से जमीन की कीमतों में कई गुना वृद्धि हो गई। भूमाफियाओं द्वारा जमीन के असली मालिक को मुकदमे में फँसाया जाने लगा। उन्हें लगता था कि भूस्वामी गरीब दलित समाज से है तो वो डर जाएगा। लेकिन वहाँ मेरे भी पैसे लगे थे इसलिए उस लड़ाई में मैंने भूस्वामी का साथ दिया।”
संदीप सिंह और उनकी भूमि विवाद मामले में SDM का आदेश
जब संदीप सिंह को दी धमकी
संदीप सिंह बताते हैं, “जमीन का यह विवाद अयोध्या के उपजिलाधिकारी आयुष चौधरी के पास गया। उन्हें दबाव और प्रभाव में लेने की काफी कोशिश की गई। लेकिन आखिरकार 19 जून 2020 को उन्होंने निर्णय गरीब दलित के हक में दिया। यहीं से अयोध्या के उस भूमाफिया ने SDM आयुष चौधरी को भी अपना दुश्मन मान लिया। SDM आयुष के खिलाफ माहौल बनाने के लिए भूमाफिया ने दुर्गा यादव जैसे कथित पत्रकारों का सहारा लिया। दुर्गा यादव ने मुझे अयोध्या के एक स्थान पर बुलाकर SDM के खिलाफ बयानबाजी करवानी चाही थी। बाद में वो मुझे धमकाने मेरे कोचिंग सेंटर तक कुछ लोगों को लेकर आए। मुझ से पैसे की डिमांड भी की गई। इस बीच अपनी खुद की जमीन को बचाने के लिए मुझे कोर्ट कचहरी के इतने चक्कर लगाने पड़े कि दुर्गा यादव और उनके साथियों के कारनामों की सारी जानकारी हो गई।”
स्थानीय रघुबीर सिंह के दावे
रघुबीर सिंह अयोध्या के सिरसिंडा गाँव के निवासी हैं। अयोध्या में लम्बे समय से प्रॉपर्टी के काम से जुड़े हुए हैं। Earth Work नाम से कारोबार करते हैं। उनका दावा है कि जमीन के काम से जुड़े ज्यादातर लोग उनके मित्र हैं। उन्होंने ऑपइंडिया को बताया, “जब भ्रामक खबरों से धर्मनगरी को बदनाम करने की कोशिश होने लगी तो मैंने इसके खिलाफ आवाज उठाने का फैसला किया। खबर पब्लिश होने से लगभग 2 माह पहले स्थानीय पत्रकार दुर्गा यादव और आम आदमी पार्टी प्रदेश अध्यक्ष सभाजीत सिंह कुछ लोगों के साथ लखनऊ मीटिंग के लिए गए थे। संयोगवश मैं उस दिन लखनऊ में अपने एक परिचित के यहाँ था। मुझे भी पत्रकारपुरम चौराहे के पास स्थित आम आदमी पार्टी के कार्यालय पर बुलाया गया।”
रघुबीर सिंह का दावा है कि वे उस मीटिंग का हिस्सा नहीं थे। लेकिन बाद में AAP के लखनऊ कार्यालय गए थे। इसी कार्यालय में संजय सिंह का आवास भी है। उनका दावा है, “संजय सिंह के करीब करीब हर अयोध्या दौरे में दुर्गा यादव उनके साथ रहे हैं। साथ ही दुर्गा यादव ही इंडियन एक्सप्रेस के पत्रकार श्यामलाल यादव के भी सहयोगी बने।” रघुवीर सिंह ने बताया, “स्थानीय पत्रकार दुर्गा यादव अयोध्या जनपद में जमीनों के मामले में लिप्त है। उसने अयोध्या के भीखापुर की एक बैनामा जमीन की फर्जी एग्रीमेंट करवा रखी है।”
रघुवीर सिंह से बातचीत
रघुबीर सिंह ने दावा किया, “इस साजिश को रचने वालों के खिलाफ मेरे पास पक्के सबूत हैं। साजिश के मुख्य सूत्रधार ने खुद ही जमीनों के फर्जी एग्रीमेंट करवा रखे हैं। उसका यही काम है। वो आधिकारियों से उगाही का प्रयास करता रहता है। अगर सरकार इस मामले की जाँच के लिए कोई टीम गठित करेगी तो मैं सभी सबूत देने को तैयार हूँ।”
रघुवीर सिंह का दावा है कि पहले से बैनामा भूमि का फर्जी एग्रीमेंट दुर्गा यादव ने करवा रखा है
AAP के यूपी अध्यक्ष बोले- संजय सिंह से बात करिए
ऑपइंडिया ने लखनऊ में हुई मीटिंग के दावे पर आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सभाजीत सिंह से बात की। उन्होंने बताया, “अयोध्या जमीन सौदों से जुड़े मामलों की मुझे बहुत अधिक जानकारी नहीं है। इस मामले में हुई मीटिंग या किसी भी अन्य सवाल का जवाब हमारे सांसद जी (संजय सिंह) ही देंगे। बेहतर होगा कि आप उनसे बात कीजिए।”
संजय सिंह ने भी नहीं दिया जवाब
सांसद संजय सिंह ने 28 दिसम्बर 2021 को बरहटा माँझा जाकर स्थानीय लोगों से मिलने की तस्वीरें शेयर की थी। उन्होंने दलितों की जमीनों के साथ हेराफेरी का आरोप लगाया था। संजय सिंह और दुर्गा यादव के बीच अरविन्द यादव कॉमन कड़ी हैं। संजय सिंह के साथ अरविन्द यादव लगातार दौरे पर दिखते हैं। ऑपइंडिया ने सांसद संजय सिंह का पक्ष जानने के लिए उनको कई बार कॉल किया लेकिन संपर्क नहीं हो पाया। 2 जनवरी 2022 को हमने उन्हें ईमेल के जरिए भी अपने सवाल भेजे हैं, लेकिन जवाब खबर लिखे जाने तक नहीं मिला।
दुर्गा यादव और संजय सिंह के बीच कॉमन कड़ी है अरविन्द यादव
कौन हैं अरविन्द यादव
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अरविन्द यादव भारतीय किसान यूनियन के जिला उपाध्यक्ष हैं। जुलाई 2021 में जिला प्रशासन ने उन पर कार्रवाई की थी। साल 2022 में उन्हें राकेश टिकैत द्वारा प्रशस्ति-पत्र भी मिला था। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के 1 दिन बाद मौके पर पहुँचे आज तक संवादताता ने भी अपनी रिपोर्ट मुख्य रूप से अरविन्द यादव के बयानों के आधार पर तैयार की थी।
दुर्गा यादव ने माना, इंडियन एक्सप्रेस के पत्रकार मिले थे
दुर्गा यादव का कहना है, “मैं संजय सिंह के बरहटा माँझा सहित अन्य दौरों पर अपने ऊपर के अधिकारियों के आदेश से JK न्यूज के लिए कवर करने गया था। मेरी घनिष्ठता आप के प्रदेश अध्यक्ष सभाजीत सिंह से भी नहीं है। पूर्व DM के खिलाफ 156 (3) के तहत केस दायर करने के बाद से मेरा नाम जिले भर के अख़बारों में निकला था। भीखापुर की जिस जमीन पर मेरे ऊपर धोखाधड़ी का आरोप लग रहा है, वो भी सरासर गलत है। जमीन मेरे एक रिश्तेदार की थी। उससे जुड़ी सभी चीजें अदालत में विचाराधीन हैं।”
ऑपइंडिया को दुर्गा यादव ने बताया, “मुझ पर लगाए जा रहे सभी आरोप निराधार हैं। मैंने एयरपोर्ट के बगल गंजा गाँव में मौजूद जमीनों पर तब जिलाधिकारी रहे अनुज झा द्वारा किए गए गलत आदेश के विरुद्ध आवाज उठाई थी। तभी से कई लोग मेरे पीछे पड़े हैं। जो लोग मेरे बारे में बयान दिए हैं मैं उन्हें जानता भी नहीं। मैं कभी भी संजय सिंह से मिलने लखनऊ नहीं गया। यहाँ तक कि मैं उन्हें ठीक से जानता भी नहीं। इंडियन एक्सप्रेस के पत्रकार श्यामलाल यादव अपनी ग्राउंड रिपोर्टिंग के लिए मुझसे एक बार मिले थे। उन्होंने मुझसे मेरी अपनी व्यक्तिगत जमीन आदि के विवाद के कागज माँगे थे।”